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Ramcharitmanas · Chapter 1

Bala Kanda

बालकाण्ड

The childhood of Rama — invocations, the birth of the four princes, breaking of Shiva's bow, wedding of Sita.

3720 verses

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  1. वर्णानामर्थसङ्घानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥

    Meaning (English)

    I bow to Vani (Saraswati) and Vinayaka (Ganesha), the originators of sounds and their meanings, of rasas, of metres, and of all auspicious things.

  2. RCM 1.1.2
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    अमिय मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू।।

    अर्थ (Hindi)

    अमिय मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू।।

  3. RCM 1.1.3
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    सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।

    अर्थ (Hindi)

    सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।

  4. RCM 1.1.4
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    जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।

  5. RCM 1.1.5
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    श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य द्रृष्टि हियँ होती।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य द्रृष्टि हियँ होती।।

  6. RCM 1.1.6
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    दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू।।

    अर्थ (Hindi)

    दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू।।

  7. RCM 1.1.7
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    उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।

    अर्थ (Hindi)

    उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।

  8. RCM 1.1.8
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    सूझहिं राम चरित मनि मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक।।

    अर्थ (Hindi)

    सूझहिं राम चरित मनि मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक।।

  9. RCM 1.1.9
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    जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान।

    अर्थ (Hindi)

    जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान।

  10. RCM 1.1.10
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    कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान।।1।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान।।1।।

  11. RCM 1.2.1
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    गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।।

    अर्थ (Hindi)

    गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।।

  12. RCM 1.2.2
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    तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन।।

  13. RCM 1.2.3
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    बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।

  14. RCM 1.2.4
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    सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।

  15. RCM 1.2.5
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    साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।।

    अर्थ (Hindi)

    साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।।

  16. RCM 1.2.6
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    जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा।।

  17. RCM 1.2.7
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    मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।

    अर्थ (Hindi)

    मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।

  18. RCM 1.2.8
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    राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।

  19. RCM 1.2.9
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    बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।।

  20. RCM 1.2.10
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    हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी।।

  21. RCM 1.2.11
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    बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।

    अर्थ (Hindi)

    बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।

  22. RCM 1.2.12
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    सबहिं सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सबहिं सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।

  23. RCM 1.2.13
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    अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।

  24. RCM 1.2.14
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    सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।

  25. RCM 1.2.15
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    लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।2।।

    अर्थ (Hindi)

    लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।2।।

  26. RCM 1.3.1
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    मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।।

    अर्थ (Hindi)

    मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।।

  27. RCM 1.3.2
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    सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।

  28. RCM 1.3.3
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    बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।।

    अर्थ (Hindi)

    बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।।

  29. RCM 1.3.4
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    जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।।

  30. RCM 1.3.5
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    मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई।।

  31. RCM 1.3.6
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    सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ।।

  32. RCM 1.3.7
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    बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।

  33. RCM 1.3.8
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    सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला।।

    अर्थ (Hindi)

    सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला।।

  34. RCM 1.3.9
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    सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई।।

  35. RCM 1.3.10
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    बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं।।

  36. RCM 1.3.11
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    बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।।

  37. RCM 1.3.12
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    सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें।।

  38. RCM 1.3.13
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    बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ।

  39. RCM 1.3.14
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    अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ।।3(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ।।3(क)।।

  40. RCM 1.3.15
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    संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।

    अर्थ (Hindi)

    संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।

  41. RCM 1.3.16
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    बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु।।3(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु।।3(ख)।।

  42. RCM 1.4.1
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    बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।।

  43. RCM 1.4.2
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    पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।

    अर्थ (Hindi)

    पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।

  44. RCM 1.4.3
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    हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से।।

  45. RCM 1.4.4
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    जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी।।

    अर्थ (Hindi)

    जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी।।

  46. RCM 1.4.5
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    तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।।

  47. RCM 1.4.6
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    उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके।।

    अर्थ (Hindi)

    उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके।।

  48. RCM 1.4.7
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    पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।।

  49. RCM 1.4.8
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    बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा।।

  50. RCM 1.4.9
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    पुनि प्रनवउँ पृथुराज समाना। पर अघ सुनइ सहस दस काना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि प्रनवउँ पृथुराज समाना। पर अघ सुनइ सहस दस काना।।

  51. RCM 1.4.10
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    बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।

  52. RCM 1.4.11
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    बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।

  53. RCM 1.4.12
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    उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति।

    अर्थ (Hindi)

    उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति।

  54. RCM 1.4.13
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    जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति।।4।।

    अर्थ (Hindi)

    जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति।।4।।

  55. RCM 1.5.1
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    मैं अपनी दिसि कीन्ह निहोरा। तिन्ह निज ओर न लाउब भोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं अपनी दिसि कीन्ह निहोरा। तिन्ह निज ओर न लाउब भोरा।।

  56. RCM 1.5.2
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    बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।

    अर्थ (Hindi)

    बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।

  57. RCM 1.5.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।

  58. RCM 1.5.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं।।

  59. RCM 1.5.5
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    उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।।

  60. RCM 1.5.6
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    सुधा सुरा सम साधू असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुधा सुरा सम साधू असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।।

  61. RCM 1.5.7
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    भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।

    अर्थ (Hindi)

    भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।

  62. RCM 1.5.8
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    सुधा सुधाकर सुरसरि साधू। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुधा सुधाकर सुरसरि साधू। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।।

  63. RCM 1.5.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।

  64. RCM 1.5.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भलो भलाइहि पै लहइ लहइ निचाइहि नीचु।

    अर्थ (Hindi)

    भलो भलाइहि पै लहइ लहइ निचाइहि नीचु।

  65. RCM 1.5.11
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    सुधा सराहिअ अमरताँ गरल सराहिअ मीचु।।5।।

    अर्थ (Hindi)

    सुधा सराहिअ अमरताँ गरल सराहिअ मीचु।।5।।

  66. RCM 1.6.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खल अघ अगुन साधू गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    खल अघ अगुन साधू गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा।।

  67. RCM 1.6.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि तें कछु गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि तें कछु गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।।

  68. RCM 1.6.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भलेउ पोच सब बिधि उपजाए। गनि गुन दोष बेद बिलगाए।।

    अर्थ (Hindi)

    भलेउ पोच सब बिधि उपजाए। गनि गुन दोष बेद बिलगाए।।

  69. RCM 1.6.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहिं बेद इतिहास पुराना। बिधि प्रपंचु गुन अवगुन साना।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं बेद इतिहास पुराना। बिधि प्रपंचु गुन अवगुन साना।।

  70. RCM 1.6.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दुख सुख पाप पुन्य दिन राती। साधु असाधु सुजाति कुजाती।।

    अर्थ (Hindi)

    दुख सुख पाप पुन्य दिन राती। साधु असाधु सुजाति कुजाती।।

  71. RCM 1.6.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दानव देव ऊँच अरु नीचू। अमिअ सुजीवनु माहुरु मीचू।।

    अर्थ (Hindi)

    दानव देव ऊँच अरु नीचू। अमिअ सुजीवनु माहुरु मीचू।।

  72. RCM 1.6.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    माया ब्रह्म जीव जगदीसा। लच्छि अलच्छि रंक अवनीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    माया ब्रह्म जीव जगदीसा। लच्छि अलच्छि रंक अवनीसा।।

  73. RCM 1.6.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कासी मग सुरसरि क्रमनासा। मरु मारव महिदेव गवासा।।

    अर्थ (Hindi)

    कासी मग सुरसरि क्रमनासा। मरु मारव महिदेव गवासा।।

  74. RCM 1.6.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सरग नरक अनुराग बिरागा। निगमागम गुन दोष बिभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    सरग नरक अनुराग बिरागा। निगमागम गुन दोष बिभागा।।

  75. RCM 1.6.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार।

    अर्थ (Hindi)

    जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार।

  76. RCM 1.6.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार।।6।।

    अर्थ (Hindi)

    संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार।।6।।

  77. श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

    Meaning (English)

    Cleansing the mirror of my mind with the dust of my Guru's lotus feet, I sing the pure glory of the best of the Raghu line, who bestows the four fruits of life.

  78. RCM 1.7.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    काल सुभाउ करम बरिआई। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    काल सुभाउ करम बरिआई। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई।।

  79. RCM 1.7.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीं। दलि दुख दोष बिमल जसु देहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीं। दलि दुख दोष बिमल जसु देहीं।।

  80. RCM 1.7.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खलउ करहिं भल पाइ सुसंगू। मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू।।

    अर्थ (Hindi)

    खलउ करहिं भल पाइ सुसंगू। मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू।।

  81. RCM 1.7.5
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    लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ।।

  82. RCM 1.7.6
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    उधरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।

    अर्थ (Hindi)

    उधरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।

  83. RCM 1.7.7
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    किएहुँ कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवंत हनुमानू।।

    अर्थ (Hindi)

    किएहुँ कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवंत हनुमानू।।

  84. RCM 1.7.8
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    हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।

  85. RCM 1.7.9
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    गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा। कीचहिं मिलइ नीच जल संगा।।

    अर्थ (Hindi)

    गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा। कीचहिं मिलइ नीच जल संगा।।

  86. RCM 1.7.10
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    साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।

    अर्थ (Hindi)

    साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।

  87. RCM 1.7.11
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    धूम कुसंगति कारिख होई। लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    धूम कुसंगति कारिख होई। लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई।।

  88. RCM 1.7.12
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    सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवन दाता।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवन दाता।।

  89. RCM 1.7.13
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    ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ कुजोग सुजोग।

    अर्थ (Hindi)

    ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ कुजोग सुजोग।

  90. RCM 1.7.14
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    होहि कुबस्तु सुबस्तु जग लखहिं सुलच्छन लोग।।7(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    होहि कुबस्तु सुबस्तु जग लखहिं सुलच्छन लोग।।7(क)।।

  91. RCM 1.7.15
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    सम प्रकास तम पाख दुहुँ नाम भेद बिधि कीन्ह।

    अर्थ (Hindi)

    सम प्रकास तम पाख दुहुँ नाम भेद बिधि कीन्ह।

  92. RCM 1.7.16
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    ससि सोषक पोषक समुझि जग जस अपजस दीन्ह।।7(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    ससि सोषक पोषक समुझि जग जस अपजस दीन्ह।।7(ख)।।

  93. RCM 1.7.17
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    जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।

    अर्थ (Hindi)

    जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।

  94. RCM 1.7.18
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    बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।7(ग)।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।7(ग)।।

  95. RCM 1.7.19
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    देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।

    अर्थ (Hindi)

    देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।

  96. RCM 1.7.20
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    बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब।।7(घ)।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब।।7(घ)।।

  97. RCM 1.8.1
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    आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।

    अर्थ (Hindi)

    आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।

  98. RCM 1.8.2
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    सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।

  99. RCM 1.8.3
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    जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू।।

  100. RCM 1.8.4
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    निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाही।।

    अर्थ (Hindi)

    निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाही।।

  101. RCM 1.8.5
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    करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।।

  102. RCM 1.8.6
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    सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।

  103. RCM 1.8.7
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    मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी। चहिअ अमिअ जग जुरइ न छाछी।।

    अर्थ (Hindi)

    मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी। चहिअ अमिअ जग जुरइ न छाछी।।

  104. RCM 1.8.8
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    छमिहहिं सज्जन मोरि ढिठाई। सुनिहहिं बालबचन मन लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    छमिहहिं सज्जन मोरि ढिठाई। सुनिहहिं बालबचन मन लाई।।

  105. RCM 1.8.9
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    जौ बालक कह तोतरि बाता। सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ बालक कह तोतरि बाता। सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता।।

  106. RCM 1.8.10
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    हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।

    अर्थ (Hindi)

    हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।

  107. RCM 1.8.11
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    निज कवित केहि लाग न नीका। सरस होउ अथवा अति फीका।।

    अर्थ (Hindi)

    निज कवित केहि लाग न नीका। सरस होउ अथवा अति फीका।।

  108. RCM 1.8.12
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    जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।

  109. RCM 1.8.13
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    जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।

  110. RCM 1.8.14
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    सज्जन सकृत सिंधु सम कोई। देखि पूर बिधु बाढ़इ जोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सज्जन सकृत सिंधु सम कोई। देखि पूर बिधु बाढ़इ जोई।।

  111. RCM 1.8.15
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    भाग छोट अभिलाषु बड़ करउँ एक बिस्वास।

    अर्थ (Hindi)

    भाग छोट अभिलाषु बड़ करउँ एक बिस्वास।

  112. RCM 1.8.16
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    पैहहिं सुख सुनि सुजन सब खल करहहिं उपहास।।8।।

    अर्थ (Hindi)

    पैहहिं सुख सुनि सुजन सब खल करहहिं उपहास।।8।।

  113. RCM 1.9.1
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    खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।

  114. RCM 1.9.2
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    हंसहि बक दादुर चातकही। हँसहिं मलिन खल बिमल बतकही।।

    अर्थ (Hindi)

    हंसहि बक दादुर चातकही। हँसहिं मलिन खल बिमल बतकही।।

  115. RCM 1.9.3
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    कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।

    अर्थ (Hindi)

    कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।

  116. RCM 1.9.4
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    भाषा भनिति भोरि मति मोरी। हँसिबे जोग हँसें नहिं खोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    भाषा भनिति भोरि मति मोरी। हँसिबे जोग हँसें नहिं खोरी।।

  117. RCM 1.9.5
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    प्रभु पद प्रीति न सामुझि नीकी। तिन्हहि कथा सुनि लागहि फीकी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु पद प्रीति न सामुझि नीकी। तिन्हहि कथा सुनि लागहि फीकी।।

  118. RCM 1.9.6
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    हरि हर पद रति मति न कुतरकी। तिन्ह कहुँ मधुर कथा रघुवर की।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि हर पद रति मति न कुतरकी। तिन्ह कहुँ मधुर कथा रघुवर की।।

  119. RCM 1.9.7
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    राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी।।

  120. RCM 1.9.8
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    कबि न होउँ नहिं बचन प्रबीनू। सकल कला सब बिद्या हीनू।।

    अर्थ (Hindi)

    कबि न होउँ नहिं बचन प्रबीनू। सकल कला सब बिद्या हीनू।।

  121. RCM 1.9.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आखर अरथ अलंकृति नाना। छंद प्रबंध अनेक बिधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    आखर अरथ अलंकृति नाना। छंद प्रबंध अनेक बिधाना।।

  122. RCM 1.9.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भाव भेद रस भेद अपारा। कबित दोष गुन बिबिध प्रकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    भाव भेद रस भेद अपारा। कबित दोष गुन बिबिध प्रकारा।।

  123. RCM 1.9.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।।

    अर्थ (Hindi)

    कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।।

  124. RCM 1.9.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।

    अर्थ (Hindi)

    भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।

  125. RCM 1.9.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिवेक।।9।।

    अर्थ (Hindi)

    सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिवेक।।9।।

  126. RCM 1.10.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि महँ रघुपति नाम उदारा। अति पावन पुरान श्रुति सारा।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि महँ रघुपति नाम उदारा। अति पावन पुरान श्रुति सारा।।

  127. RCM 1.10.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंगल भवन अमंगल हारी। उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल भवन अमंगल हारी। उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।

  128. RCM 1.10.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भनिति बिचित्र सुकबि कृत जोऊ। राम नाम बिनु सोह न सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    भनिति बिचित्र सुकबि कृत जोऊ। राम नाम बिनु सोह न सोऊ।।

  129. RCM 1.10.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिधुबदनी सब भाँति सँवारी। सोन न बसन बिना बर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधुबदनी सब भाँति सँवारी। सोन न बसन बिना बर नारी।।

  130. RCM 1.10.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सब गुन रहित कुकबि कृत बानी। राम नाम जस अंकित जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब गुन रहित कुकबि कृत बानी। राम नाम जस अंकित जानी।।

  131. RCM 1.10.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सादर कहहिं सुनहिं बुध ताही। मधुकर सरिस संत गुनग्राही।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर कहहिं सुनहिं बुध ताही। मधुकर सरिस संत गुनग्राही।।

  132. RCM 1.10.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जदपि कबित रस एकउ नाही। राम प्रताप प्रकट एहि माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि कबित रस एकउ नाही। राम प्रताप प्रकट एहि माहीं।।

  133. RCM 1.10.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बडप्पनु पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बडप्पनु पावा।।

  134. RCM 1.10.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धूमउ तजइ सहज करुआई। अगरु प्रसंग सुगंध बसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    धूमउ तजइ सहज करुआई। अगरु प्रसंग सुगंध बसाई।।

  135. RCM 1.10.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी। राम कथा जग मंगल करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी। राम कथा जग मंगल करनी।।

  136. RCM 1.11.1
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    मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी।।

    अर्थ (Hindi)

    मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी।।

  137. RCM 1.11.2
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    नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई।।

  138. RCM 1.11.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं।।

  139. RCM 1.11.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भगति हेतु बिधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवति धाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भगति हेतु बिधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवति धाई।।

  140. RCM 1.11.5
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    राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ।।

  141. RCM 1.11.6
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    कबि कोबिद अस हृदयँ बिचारी। गावहिं हरि जस कलि मल हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कबि कोबिद अस हृदयँ बिचारी। गावहिं हरि जस कलि मल हारी।।

  142. RCM 1.11.7
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    कीन्हें प्राकृत जन गुन गाना। सिर धुनि गिरा लगत पछिताना।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्हें प्राकृत जन गुन गाना। सिर धुनि गिरा लगत पछिताना।।

  143. RCM 1.11.8
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    हृदय सिंधु मति सीप समाना। स्वाति सारदा कहहिं सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदय सिंधु मति सीप समाना। स्वाति सारदा कहहिं सुजाना।।

  144. RCM 1.11.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू।।

  145. RCM 1.11.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।

    अर्थ (Hindi)

    जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।

  146. RCM 1.11.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।11।।

    अर्थ (Hindi)

    पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।11।।

  147. RCM 1.12.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जे जनमे कलिकाल कराला। करतब बायस बेष मराला।।

    अर्थ (Hindi)

    जे जनमे कलिकाल कराला। करतब बायस बेष मराला।।

  148. RCM 1.12.2
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    चलत कुपंथ बेद मग छाँड़े। कपट कलेवर कलि मल भाँड़ें।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत कुपंथ बेद मग छाँड़े। कपट कलेवर कलि मल भाँड़ें।।

  149. RCM 1.12.3
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    बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।

    अर्थ (Hindi)

    बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।

  150. RCM 1.12.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी। धींग धरमध्वज धंधक धोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी। धींग धरमध्वज धंधक धोरी।।

  151. RCM 1.12.5
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    जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।।

  152. RCM 1.12.6
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    ताते मैं अति अलप बखाने। थोरे महुँ जानिहहिं सयाने।।

    अर्थ (Hindi)

    ताते मैं अति अलप बखाने। थोरे महुँ जानिहहिं सयाने।।

  153. RCM 1.12.7
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    समुझि बिबिधि बिधि बिनती मोरी। कोउ न कथा सुनि देइहि खोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझि बिबिधि बिधि बिनती मोरी। कोउ न कथा सुनि देइहि खोरी।।

  154. RCM 1.12.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एतेहु पर करिहहिं जे असंका। मोहि ते अधिक ते जड़ मति रंका।।

    अर्थ (Hindi)

    एतेहु पर करिहहिं जे असंका। मोहि ते अधिक ते जड़ मति रंका।।

  155. RCM 1.12.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।।

  156. RCM 1.12.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहँ रघुपति के चरित अपारा। कहँ मति मोरि निरत संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँ रघुपति के चरित अपारा। कहँ मति मोरि निरत संसारा।।

  157. RCM 1.12.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।।

  158. RCM 1.12.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई।।

  159. RCM 1.12.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।

    अर्थ (Hindi)

    सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।

  160. RCM 1.12.14
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    नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान।।12।।

    अर्थ (Hindi)

    नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान।।12।।

  161. RCM 1.13.1
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    सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई।।

  162. RCM 1.13.2
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    तहाँ बेद अस कारन राखा। भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा।।

    अर्थ (Hindi)

    तहाँ बेद अस कारन राखा। भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा।।

  163. RCM 1.13.3
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    एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा।।

    अर्थ (Hindi)

    एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा।।

  164. RCM 1.13.4
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    ब्यापक बिस्वरूप भगवाना। तेहिं धरि देह चरित कृत नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यापक बिस्वरूप भगवाना। तेहिं धरि देह चरित कृत नाना।।

  165. RCM 1.13.5
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    सो केवल भगतन हित लागी। परम कृपाल प्रनत अनुरागी।।

    अर्थ (Hindi)

    सो केवल भगतन हित लागी। परम कृपाल प्रनत अनुरागी।।

  166. RCM 1.13.6
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    जेहि जन पर ममता अति छोहू। जेहिं करुना करि कीन्ह न कोहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि जन पर ममता अति छोहू। जेहिं करुना करि कीन्ह न कोहू।।

  167. RCM 1.13.7
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    गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।

    अर्थ (Hindi)

    गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।

  168. RCM 1.13.8
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    बुध बरनहिं हरि जस अस जानी। करहि पुनीत सुफल निज बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बुध बरनहिं हरि जस अस जानी। करहि पुनीत सुफल निज बानी।।

  169. RCM 1.13.9
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    तेहिं बल मैं रघुपति गुन गाथा। कहिहउँ नाइ राम पद माथा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं बल मैं रघुपति गुन गाथा। कहिहउँ नाइ राम पद माथा।।

  170. RCM 1.13.10
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    मुनिन्ह प्रथम हरि कीरति गाई। तेहिं मग चलत सुगम मोहि भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनिन्ह प्रथम हरि कीरति गाई। तेहिं मग चलत सुगम मोहि भाई।।

  171. RCM 1.13.11
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    अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं।

    अर्थ (Hindi)

    अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं।

  172. RCM 1.13.12
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    चढि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं।।13।।

    अर्थ (Hindi)

    चढि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं।।13।।

  173. RCM 1.14.1
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    एहि प्रकार बल मनहि देखाई। करिहउँ रघुपति कथा सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि प्रकार बल मनहि देखाई। करिहउँ रघुपति कथा सुहाई।।

  174. RCM 1.14.2
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    ब्यास आदि कबि पुंगव नाना। जिन्ह सादर हरि सुजस बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यास आदि कबि पुंगव नाना। जिन्ह सादर हरि सुजस बखाना।।

  175. RCM 1.14.3
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    चरन कमल बंदउँ तिन्ह केरे। पुरवहुँ सकल मनोरथ मेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    चरन कमल बंदउँ तिन्ह केरे। पुरवहुँ सकल मनोरथ मेरे।।

  176. RCM 1.14.4
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    कलि के कबिन्ह करउँ परनामा। जिन्ह बरने रघुपति गुन ग्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    कलि के कबिन्ह करउँ परनामा। जिन्ह बरने रघुपति गुन ग्रामा।।

  177. RCM 1.14.5
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    जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।।

  178. RCM 1.14.6
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    भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहिं कपट सब त्यागें।।

    अर्थ (Hindi)

    भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहिं कपट सब त्यागें।।

  179. RCM 1.14.7
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    होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।।

    अर्थ (Hindi)

    होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।।

  180. RCM 1.14.8
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    जो प्रबंध बुध नहिं आदरहीं। सो श्रम बादि बाल कबि करहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जो प्रबंध बुध नहिं आदरहीं। सो श्रम बादि बाल कबि करहीं।।

  181. RCM 1.14.9
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    कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।

    अर्थ (Hindi)

    कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।

  182. RCM 1.14.10
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    राम सुकीरति भनिति भदेसा। असमंजस अस मोहि अँदेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सुकीरति भनिति भदेसा। असमंजस अस मोहि अँदेसा।।

  183. RCM 1.14.11
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    तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।

  184. RCM 1.14.12
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    सरल कबित कीरति बिमल सोइ आदरहिं सुजान।

    अर्थ (Hindi)

    सरल कबित कीरति बिमल सोइ आदरहिं सुजान।

  185. RCM 1.14.13
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    सहज बयर बिसराइ रिपु जो सुनि करहिं बखान।।14(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज बयर बिसराइ रिपु जो सुनि करहिं बखान।।14(क)।।

  186. RCM 1.14.14
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    सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।

    अर्थ (Hindi)

    सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।

  187. RCM 1.14.15
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    करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर।।14(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर।।14(ख)।।

  188. RCM 1.14.16
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    कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल।

    अर्थ (Hindi)

    कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल।

  189. RCM 1.14.17
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    बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि मोपर होहु कृपाल।।14(ग)।।

    अर्थ (Hindi)

    बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि मोपर होहु कृपाल।।14(ग)।।

  190. RCM 1.14.18
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    बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।

  191. RCM 1.14.19
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    सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित।।14(घ)।।

    अर्थ (Hindi)

    सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित।।14(घ)।।

  192. RCM 1.14.20
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    बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।

  193. RCM 1.14.21
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    जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु।।14(ङ)।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु।।14(ङ)।।

  194. RCM 1.14.22
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    बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ।

  195. RCM 1.14.23
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    संत सुधा ससि धेनु प्रगटे खल बिष बारुनी।।14(च)।।

    अर्थ (Hindi)

    संत सुधा ससि धेनु प्रगटे खल बिष बारुनी।।14(च)।।

  196. RCM 1.14.24
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    बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।

    अर्थ (Hindi)

    बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।

  197. RCM 1.14.25
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    होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि।।14(छ)।।

    अर्थ (Hindi)

    होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि।।14(छ)।।

  198. RCM 1.15.1
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    पुनि बंदउँ सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि बंदउँ सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता।।

  199. RCM 1.15.2
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    मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका।।

    अर्थ (Hindi)

    मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका।।

  200. RCM 1.15.3
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    गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी।।

  201. RCM 1.15.4
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    सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसीके।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसीके।।

  202. RCM 1.15.5
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    कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा।।

    अर्थ (Hindi)

    कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा।।

  203. RCM 1.15.6
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    अनमिल आखर अरथ न जापू। प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू।।

    अर्थ (Hindi)

    अनमिल आखर अरथ न जापू। प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू।।

  204. RCM 1.15.7
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    सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला।।

    अर्थ (Hindi)

    सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला।।

  205. RCM 1.15.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुमिरि सिवा सिव पाइ पसाऊ। बरनउँ रामचरित चित चाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि सिवा सिव पाइ पसाऊ। बरनउँ रामचरित चित चाऊ।।

  206. RCM 1.15.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भनिति मोरि सिव कृपाँ बिभाती। ससि समाज मिलि मनहुँ सुराती।।

    अर्थ (Hindi)

    भनिति मोरि सिव कृपाँ बिभाती। ससि समाज मिलि मनहुँ सुराती।।

  207. RCM 1.15.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जे एहि कथहि सनेह समेता। कहिहहिं सुनिहहिं समुझि सचेता।।

    अर्थ (Hindi)

    जे एहि कथहि सनेह समेता। कहिहहिं सुनिहहिं समुझि सचेता।।

  208. RCM 1.15.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    होइहहिं राम चरन अनुरागी। कलि मल रहित सुमंगल भागी।।

    अर्थ (Hindi)

    होइहहिं राम चरन अनुरागी। कलि मल रहित सुमंगल भागी।।

  209. RCM 1.15.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।

    अर्थ (Hindi)

    सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।

  210. RCM 1.15.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ।।15।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ।।15।।

  211. RCM 1.16.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि।।

  212. RCM 1.16.2
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    प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी।।

  213. RCM 1.16.3
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    सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए।।

  214. RCM 1.16.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची।।

  215. RCM 1.16.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू।।

  216. RCM 1.16.6
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    दसरथ राउ सहित सब रानी। सुकृत सुमंगल मूरति मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    दसरथ राउ सहित सब रानी। सुकृत सुमंगल मूरति मानी।।

  217. RCM 1.16.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करउँ प्रनाम करम मन बानी। करहु कृपा सुत सेवक जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    करउँ प्रनाम करम मन बानी। करहु कृपा सुत सेवक जानी।।

  218. RCM 1.16.8
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    जिन्हहि बिरचि बड़ भयउ बिधाता। महिमा अवधि राम पितु माता।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्हहि बिरचि बड़ भयउ बिधाता। महिमा अवधि राम पितु माता।।

  219. RCM 1.16.9
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    बंदउँ अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद।

  220. RCM 1.16.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिछुरत दीनदयाल प्रिय तनु तृन इव परिहरेउ।।16।।

    अर्थ (Hindi)

    बिछुरत दीनदयाल प्रिय तनु तृन इव परिहरेउ।।16।।

  221. RCM 1.17.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू।।

  222. RCM 1.17.2
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    जोग भोग महँ राखेउ गोई। राम बिलोकत प्रगटेउ सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जोग भोग महँ राखेउ गोई। राम बिलोकत प्रगटेउ सोई।।

  223. RCM 1.17.3
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    प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना।।

  224. RCM 1.17.4
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    राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू।।

    अर्थ (Hindi)

    राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू।।

  225. RCM 1.17.5
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    बंदउँ लछिमन पद जलजाता। सीतल सुभग भगत सुख दाता।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ लछिमन पद जलजाता। सीतल सुभग भगत सुख दाता।।

  226. RCM 1.17.6
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    रघुपति कीरति बिमल पताका। दंड समान भयउ जस जाका।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति कीरति बिमल पताका। दंड समान भयउ जस जाका।।

  227. RCM 1.17.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सेष सहस्त्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन।।

    अर्थ (Hindi)

    सेष सहस्त्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन।।

  228. RCM 1.17.8
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    सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिंधु सौमित्रि गुनाकर।।

    अर्थ (Hindi)

    सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिंधु सौमित्रि गुनाकर।।

  229. RCM 1.17.9
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    रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी।।

    अर्थ (Hindi)

    रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी।।

  230. RCM 1.17.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना।।

  231. RCM 1.17.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।

    अर्थ (Hindi)

    प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।

  232. RCM 1.17.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।17।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।17।।

  233. RCM 1.18.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा।।

  234. RCM 1.18.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए।।

  235. RCM 1.18.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रघुपति चरन उपासक जेते। खग मृग सुर नर असुर समेते।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति चरन उपासक जेते। खग मृग सुर नर असुर समेते।।

  236. RCM 1.18.4
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    बंदउँ पद सरोज सब केरे। जे बिनु काम राम के चेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ पद सरोज सब केरे। जे बिनु काम राम के चेरे।।

  237. RCM 1.18.5
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    सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद।।

    अर्थ (Hindi)

    सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद।।

  238. RCM 1.18.6
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    प्रनवउँ सबहिं धरनि धरि सीसा। करहु कृपा जन जानि मुनीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रनवउँ सबहिं धरनि धरि सीसा। करहु कृपा जन जानि मुनीसा।।

  239. RCM 1.18.7
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    जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुना निधान की।।

    अर्थ (Hindi)

    जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुना निधान की।।

  240. RCM 1.18.8
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    ताके जुग पद कमल मनावउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    ताके जुग पद कमल मनावउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।

  241. RCM 1.18.9
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    पुनि मन बचन कर्म रघुनायक। चरन कमल बंदउँ सब लायक।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि मन बचन कर्म रघुनायक। चरन कमल बंदउँ सब लायक।।

  242. RCM 1.18.10
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    राजिवनयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुख दायक।।

    अर्थ (Hindi)

    राजिवनयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुख दायक।।

  243. RCM 1.18.11
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    गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न।

    अर्थ (Hindi)

    गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न।

  244. RCM 1.18.12
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    बदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न।।18।।

    अर्थ (Hindi)

    बदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न।।18।।

  245. RCM 1.19.1
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    बंदउँ नाम राम रघुवर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ नाम राम रघुवर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को।।

  246. RCM 1.19.2
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    बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो।।

  247. RCM 1.19.3
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    महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू।।

    अर्थ (Hindi)

    महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू।।

  248. RCM 1.19.4
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    महिमा जासु जान गनराउ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    महिमा जासु जान गनराउ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ।।

  249. RCM 1.19.5
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    जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू।।

    अर्थ (Hindi)

    जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू।।

  250. RCM 1.19.6
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    सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेई पिय संग भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेई पिय संग भवानी।।

  251. RCM 1.19.7
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    हरषे हेतु हेरि हर ही को। किय भूषन तिय भूषन ती को।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषे हेतु हेरि हर ही को। किय भूषन तिय भूषन ती को।।

  252. RCM 1.19.8
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    नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।

  253. RCM 1.19.9
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    बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास।।

  254. RCM 1.19.10
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    राम नाम बर बरन जुग सावन भादव मास।।19।।

    अर्थ (Hindi)

    राम नाम बर बरन जुग सावन भादव मास।।19।।

  255. RCM 1.20.1
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    आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ।।

  256. RCM 1.20.2
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    सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू।।

  257. RCM 1.20.3
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    कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके। राम लखन सम प्रिय तुलसी के।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके। राम लखन सम प्रिय तुलसी के।।

  258. RCM 1.20.4
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    बरनत बरन प्रीति बिलगाती। ब्रह्म जीव सम सहज सँघाती।।

    अर्थ (Hindi)

    बरनत बरन प्रीति बिलगाती। ब्रह्म जीव सम सहज सँघाती।।

  259. RCM 1.20.5
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    नर नारायन सरिस सुभ्राता। जग पालक बिसेषि जन त्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    नर नारायन सरिस सुभ्राता। जग पालक बिसेषि जन त्राता।।

  260. RCM 1.20.6
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    भगति सुतिय कल करन बिभूषन। जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन ।

    अर्थ (Hindi)

    भगति सुतिय कल करन बिभूषन। जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन ।

  261. RCM 1.20.7
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    स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के।।

    अर्थ (Hindi)

    स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के।।

  262. RCM 1.20.8
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    जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से।।

    अर्थ (Hindi)

    जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से।।

  263. RCM 1.20.9
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    एकु छत्रु एकु मुकुटमनि सब बरननि पर जोउ।

    अर्थ (Hindi)

    एकु छत्रु एकु मुकुटमनि सब बरननि पर जोउ।

  264. RCM 1.20.10
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    तुलसी रघुबर नाम के बरन बिराजत दोउ।।20।।

    अर्थ (Hindi)

    तुलसी रघुबर नाम के बरन बिराजत दोउ।।20।।

  265. RCM 1.21.1
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    समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी।।

  266. RCM 1.21.2
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    नाम रूप दुइ ईस उपाधी। अकथ अनादि सुसामुझि साधी।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम रूप दुइ ईस उपाधी। अकथ अनादि सुसामुझि साधी।।

  267. RCM 1.21.3
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    को बड़ छोट कहत अपराधू। सुनि गुन भेद समुझिहहिं साधू।।

    अर्थ (Hindi)

    को बड़ छोट कहत अपराधू। सुनि गुन भेद समुझिहहिं साधू।।

  268. RCM 1.21.4
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    देखिअहिं रूप नाम आधीना। रूप ग्यान नहिं नाम बिहीना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखिअहिं रूप नाम आधीना। रूप ग्यान नहिं नाम बिहीना।।

  269. RCM 1.21.5
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    रूप बिसेष नाम बिनु जानें। करतल गत न परहिं पहिचानें।।

    अर्थ (Hindi)

    रूप बिसेष नाम बिनु जानें। करतल गत न परहिं पहिचानें।।

  270. RCM 1.21.6
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    सुमिरिअ नाम रूप बिनु देखें। आवत हृदयँ सनेह बिसेषें।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरिअ नाम रूप बिनु देखें। आवत हृदयँ सनेह बिसेषें।।

  271. RCM 1.21.7
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    नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी।।

  272. RCM 1.21.8
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    अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी। उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी।।

    अर्थ (Hindi)

    अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी। उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी।।

  273. RCM 1.21.9
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    राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार।

    अर्थ (Hindi)

    राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार।

  274. RCM 1.21.10
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    तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।।21।।

    अर्थ (Hindi)

    तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।।21।।

  275. RCM 1.22.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।।

  276. RCM 1.22.2
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    ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा।।

  277. RCM 1.22.3
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    जाना चहहिं गूढ़ गति जेऊ। नाम जीहँ जपि जानहिं तेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    जाना चहहिं गूढ़ गति जेऊ। नाम जीहँ जपि जानहिं तेऊ।।

  278. RCM 1.22.4
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    साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।

  279. RCM 1.22.5
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    जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।

  280. RCM 1.22.6
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    राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा।।

  281. RCM 1.22.7
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    चहू चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा।।

    अर्थ (Hindi)

    चहू चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा।।

  282. RCM 1.22.8
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    चहुँ जुग चहुँ श्रुति ना प्रभाऊ। कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    चहुँ जुग चहुँ श्रुति ना प्रभाऊ। कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ।।

  283. RCM 1.22.9
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    सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।

    अर्थ (Hindi)

    सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।

  284. RCM 1.22.10
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    नाम सुप्रेम पियूष हद तिन्हहुँ किए मन मीन।।22।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम सुप्रेम पियूष हद तिन्हहुँ किए मन मीन।।22।।

  285. RCM 1.23.1
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    अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा।।

  286. RCM 1.23.2
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    मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें।।

    अर्थ (Hindi)

    मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें।।

  287. RCM 1.23.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की।।

  288. RCM 1.23.4
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    एकु दारुगत देखिअ एकू। पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू।।

    अर्थ (Hindi)

    एकु दारुगत देखिअ एकू। पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू।।

  289. RCM 1.23.5
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    उभय अगम जुग सुगम नाम तें। कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें।।

    अर्थ (Hindi)

    उभय अगम जुग सुगम नाम तें। कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें।।

  290. RCM 1.23.6
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    ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी। सत चेतन धन आनँद रासी।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी। सत चेतन धन आनँद रासी।।

  291. RCM 1.23.7
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    अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी।।

  292. RCM 1.23.8
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    नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें।।

  293. RCM 1.23.9
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    निरगुन तें एहि भाँति बड़ नाम प्रभाउ अपार।

    अर्थ (Hindi)

    निरगुन तें एहि भाँति बड़ नाम प्रभाउ अपार।

  294. RCM 1.23.10
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    कहउँ नामु बड़ राम तें निज बिचार अनुसार।।23।।

    अर्थ (Hindi)

    कहउँ नामु बड़ राम तें निज बिचार अनुसार।।23।।

  295. RCM 1.24.1
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    राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी।।

  296. RCM 1.24.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नामु सप्रेम जपत अनयासा। भगत होहिं मुद मंगल बासा।।

    अर्थ (Hindi)

    नामु सप्रेम जपत अनयासा। भगत होहिं मुद मंगल बासा।।

  297. RCM 1.24.3
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    राम एक तापस तिय तारी। नाम कोटि खल कुमति सुधारी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम एक तापस तिय तारी। नाम कोटि खल कुमति सुधारी।।

  298. RCM 1.24.4
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    रिषि हित राम सुकेतुसुता की। सहित सेन सुत कीन्ह बिबाकी।।

    अर्थ (Hindi)

    रिषि हित राम सुकेतुसुता की। सहित सेन सुत कीन्ह बिबाकी।।

  299. RCM 1.24.5
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    सहित दोष दुख दास दुरासा। दलइ नामु जिमि रबि निसि नासा।।

    अर्थ (Hindi)

    सहित दोष दुख दास दुरासा। दलइ नामु जिमि रबि निसि नासा।।

  300. RCM 1.24.6
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    भंजेउ राम आपु भव चापू। भव भय भंजन नाम प्रतापू।।

    अर्थ (Hindi)

    भंजेउ राम आपु भव चापू। भव भय भंजन नाम प्रतापू।।

  301. RCM 1.24.7
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    दंडक बनु प्रभु कीन्ह सुहावन। जन मन अमित नाम किए पावन।।।

    अर्थ (Hindi)

    दंडक बनु प्रभु कीन्ह सुहावन। जन मन अमित नाम किए पावन।।।

  302. RCM 1.24.8
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    निसिचर निकर दले रघुनंदन। नामु सकल कलि कलुष निकंदन।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिचर निकर दले रघुनंदन। नामु सकल कलि कलुष निकंदन।।

  303. RCM 1.24.9
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    सबरी गीध सुसेवकनि सुगति दीन्हि रघुनाथ।

    अर्थ (Hindi)

    सबरी गीध सुसेवकनि सुगति दीन्हि रघुनाथ।

  304. RCM 1.24.10
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    नाम उधारे अमित खल बेद बिदित गुन गाथ।।24।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम उधारे अमित खल बेद बिदित गुन गाथ।।24।।

  305. RCM 1.25.1
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    राम सुकंठ बिभीषन दोऊ। राखे सरन जान सबु कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सुकंठ बिभीषन दोऊ। राखे सरन जान सबु कोऊ।।

  306. RCM 1.25.2
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    नाम गरीब अनेक नेवाजे। लोक बेद बर बिरिद बिराजे।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम गरीब अनेक नेवाजे। लोक बेद बर बिरिद बिराजे।।

  307. RCM 1.25.3
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    राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा।।

  308. RCM 1.25.4
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    नामु लेत भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारु सुजन मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नामु लेत भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारु सुजन मन माहीं।।

  309. RCM 1.25.5
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    राम सकुल रन रावनु मारा। सीय सहित निज पुर पगु धारा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सकुल रन रावनु मारा। सीय सहित निज पुर पगु धारा।।

  310. RCM 1.25.6
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    राजा रामु अवध रजधानी। गावत गुन सुर मुनि बर बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    राजा रामु अवध रजधानी। गावत गुन सुर मुनि बर बानी।।

  311. RCM 1.25.7
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    सेवक सुमिरत नामु सप्रीती। बिनु श्रम प्रबल मोह दलु जीती।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवक सुमिरत नामु सप्रीती। बिनु श्रम प्रबल मोह दलु जीती।।

  312. RCM 1.25.8
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    फिरत सनेहँ मगन सुख अपनें। नाम प्रसाद सोच नहिं सपनें।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरत सनेहँ मगन सुख अपनें। नाम प्रसाद सोच नहिं सपनें।।

  313. RCM 1.25.9
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    ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर दायक बर दानि।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर दायक बर दानि।

  314. RCM 1.25.10
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    रामचरित सत कोटि महँ लिय महेस जियँ जानि।।25।।

    अर्थ (Hindi)

    रामचरित सत कोटि महँ लिय महेस जियँ जानि।।25।।

  315. RCM 1.26.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाम प्रसाद संभु अबिनासी। साजु अमंगल मंगल रासी।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम प्रसाद संभु अबिनासी। साजु अमंगल मंगल रासी।।

  316. RCM 1.26.2
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    सुक सनकादि सिद्ध मुनि जोगी। नाम प्रसाद ब्रह्मसुख भोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुक सनकादि सिद्ध मुनि जोगी। नाम प्रसाद ब्रह्मसुख भोगी।।

  317. RCM 1.26.3
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    नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू।।

  318. RCM 1.26.4
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    नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू। भगत सिरोमनि भे प्रहलादू।।

    अर्थ (Hindi)

    नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू। भगत सिरोमनि भे प्रहलादू।।

  319. RCM 1.26.5
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    ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ।।

  320. RCM 1.26.6
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    सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू।।

  321. RCM 1.26.7
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    अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ। भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ। भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ।।

  322. RCM 1.26.8
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    कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई।।

  323. RCM 1.26.9
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    नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।

    अर्थ (Hindi)

    नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।

  324. RCM 1.26.10
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    जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु।।26।।

    अर्थ (Hindi)

    जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु।।26।।

  325. RCM 1.27.1
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    चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका। भए नाम जपि जीव बिसोका।।

    अर्थ (Hindi)

    चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका। भए नाम जपि जीव बिसोका।।

  326. RCM 1.27.2
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    बेद पुरान संत मत एहू। सकल सुकृत फल राम सनेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    बेद पुरान संत मत एहू। सकल सुकृत फल राम सनेहू।।

  327. RCM 1.27.3
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    ध्यानु प्रथम जुग मखबिधि दूजें। द्वापर परितोषत प्रभु पूजें।।

    अर्थ (Hindi)

    ध्यानु प्रथम जुग मखबिधि दूजें। द्वापर परितोषत प्रभु पूजें।।

  328. RCM 1.27.4
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    कलि केवल मल मूल मलीना। पाप पयोनिधि जन मन मीना।।

    अर्थ (Hindi)

    कलि केवल मल मूल मलीना। पाप पयोनिधि जन मन मीना।।

  329. RCM 1.27.5
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    नाम कामतरु काल कराला। सुमिरत समन सकल जग जाला।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम कामतरु काल कराला। सुमिरत समन सकल जग जाला।।

  330. RCM 1.27.6
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    राम नाम कलि अभिमत दाता। हित परलोक लोक पितु माता।।

    अर्थ (Hindi)

    राम नाम कलि अभिमत दाता। हित परलोक लोक पितु माता।।

  331. RCM 1.27.7
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    नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू।।

    अर्थ (Hindi)

    नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू।।

  332. RCM 1.27.8
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    कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।।

    अर्थ (Hindi)

    कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।।

  333. RCM 1.27.9
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    राम नाम नरकेसरी कनककसिपु कलिकाल।

    अर्थ (Hindi)

    राम नाम नरकेसरी कनककसिपु कलिकाल।

  334. RCM 1.27.10
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    जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल।।27।।

    अर्थ (Hindi)

    जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल।।27।।

  335. RCM 1.28.1
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    भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ।।

    अर्थ (Hindi)

    भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ।।

  336. RCM 1.28.2
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    सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा।।

  337. RCM 1.28.3
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    मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।

    अर्थ (Hindi)

    मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।

  338. RCM 1.28.4
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    राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि दैखि दयानिधि पोसो।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि दैखि दयानिधि पोसो।।

  339. RCM 1.28.5
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    लोकहुँ बेद सुसाहिब रीतीं। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती।।

    अर्थ (Hindi)

    लोकहुँ बेद सुसाहिब रीतीं। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती।।

  340. RCM 1.28.6
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    गनी गरीब ग्रामनर नागर। पंडित मूढ़ मलीन उजागर।।

    अर्थ (Hindi)

    गनी गरीब ग्रामनर नागर। पंडित मूढ़ मलीन उजागर।।

  341. RCM 1.28.7
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    सुकबि कुकबि निज मति अनुहारी। नृपहि सराहत सब नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुकबि कुकबि निज मति अनुहारी। नृपहि सराहत सब नर नारी।।

  342. RCM 1.28.8
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    साधु सुजान सुसील नृपाला। ईस अंस भव परम कृपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    साधु सुजान सुसील नृपाला। ईस अंस भव परम कृपाला।।

  343. RCM 1.28.9
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    सुनि सनमानहिं सबहि सुबानी। भनिति भगति नति गति पहिचानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सनमानहिं सबहि सुबानी। भनिति भगति नति गति पहिचानी।।

  344. RCM 1.28.10
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    यह प्राकृत महिपाल सुभाऊ। जान सिरोमनि कोसलराऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    यह प्राकृत महिपाल सुभाऊ। जान सिरोमनि कोसलराऊ।।

  345. RCM 1.28.11
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    रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें।।

    अर्थ (Hindi)

    रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें।।

  346. RCM 1.28.12
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    सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु।

    अर्थ (Hindi)

    सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु।

  347. RCM 1.28.13
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    उपल किए जलजान जेहिं सचिव सुमति कपि भालु।।28(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    उपल किए जलजान जेहिं सचिव सुमति कपि भालु।।28(क)।।

  348. RCM 1.28.14
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    हौहु कहावत सबु कहत राम सहत उपहास।

    अर्थ (Hindi)

    हौहु कहावत सबु कहत राम सहत उपहास।

  349. RCM 1.28.15
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    साहिब सीतानाथ सो सेवक तुलसीदास।।28(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    साहिब सीतानाथ सो सेवक तुलसीदास।।28(ख)।।

  350. RCM 1.29.1
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    अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी। सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी। सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी।।

  351. RCM 1.29.2
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    समुझि सहम मोहि अपडर अपनें। सो सुधि राम कीन्हि नहिं सपनें।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझि सहम मोहि अपडर अपनें। सो सुधि राम कीन्हि नहिं सपनें।।

  352. RCM 1.29.3
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    सुनि अवलोकि सुचित चख चाही। भगति मोरि मति स्वामि सराही।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि अवलोकि सुचित चख चाही। भगति मोरि मति स्वामि सराही।।

  353. RCM 1.29.4
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    कहत नसाइ होइ हियँ नीकी। रीझत राम जानि जन जी की।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत नसाइ होइ हियँ नीकी। रीझत राम जानि जन जी की।।

  354. RCM 1.29.5
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    रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।।

    अर्थ (Hindi)

    रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।।

  355. RCM 1.29.6
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    जेहिं अघ बधेउ ब्याध जिमि बाली। फिरि सुकंठ सोइ कीन्ह कुचाली।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं अघ बधेउ ब्याध जिमि बाली। फिरि सुकंठ सोइ कीन्ह कुचाली।।

  356. RCM 1.29.7
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    सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी।।

  357. RCM 1.29.8
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    ते भरतहि भेंटत सनमाने। राजसभाँ रघुबीर बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    ते भरतहि भेंटत सनमाने। राजसभाँ रघुबीर बखाने।।

  358. RCM 1.29.9
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    प्रभु तरु तर कपि डार पर ते किए आपु समान।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु तरु तर कपि डार पर ते किए आपु समान।।

  359. RCM 1.29.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुलसी कहूँ न राम से साहिब सीलनिधान।।29(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    तुलसी कहूँ न राम से साहिब सीलनिधान।।29(क)।।

  360. RCM 1.29.11
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    राम निकाईं रावरी है सबही को नीक।

    अर्थ (Hindi)

    राम निकाईं रावरी है सबही को नीक।

  361. RCM 1.29.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जों यह साँची है सदा तौ नीको तुलसीक।।29(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    जों यह साँची है सदा तौ नीको तुलसीक।।29(ख)।।

  362. RCM 1.29.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।

  363. RCM 1.29.14
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरनउँ रघुबर बिसद जसु सुनि कलि कलुष नसाइ।।29(ग)।।

    अर्थ (Hindi)

    बरनउँ रघुबर बिसद जसु सुनि कलि कलुष नसाइ।।29(ग)।।

  364. RCM 1.30.1
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    जागबलिक जो कथा सुहाई। भरद्वाज मुनिबरहि सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जागबलिक जो कथा सुहाई। भरद्वाज मुनिबरहि सुनाई।।

  365. RCM 1.30.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहिहउँ सोइ संबाद बखानी। सुनहुँ सकल सज्जन सुखु मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहिहउँ सोइ संबाद बखानी। सुनहुँ सकल सज्जन सुखु मानी।।

  366. RCM 1.30.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संभु कीन्ह यह चरित सुहावा। बहुरि कृपा करि उमहि सुनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु कीन्ह यह चरित सुहावा। बहुरि कृपा करि उमहि सुनावा।।

  367. RCM 1.30.4
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    सोइ सिव कागभुसुंडिहि दीन्हा। राम भगत अधिकारी चीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ सिव कागभुसुंडिहि दीन्हा। राम भगत अधिकारी चीन्हा।।

  368. RCM 1.30.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि सन जागबलिक पुनि पावा। तिन्ह पुनि भरद्वाज प्रति गावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि सन जागबलिक पुनि पावा। तिन्ह पुनि भरद्वाज प्रति गावा।।

  369. RCM 1.30.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ते श्रोता बकता समसीला। सवँदरसी जानहिं हरिलीला।।

    अर्थ (Hindi)

    ते श्रोता बकता समसीला। सवँदरसी जानहिं हरिलीला।।

  370. RCM 1.30.7
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    जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना।।

  371. RCM 1.30.8
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    औरउ जे हरिभगत सुजाना। कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    औरउ जे हरिभगत सुजाना। कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना।।

  372. RCM 1.30.9
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    मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत।

    अर्थ (Hindi)

    मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत।

  373. RCM 1.30.10
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    समुझी नहि तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत।।30(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझी नहि तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत।।30(क)।।

  374. RCM 1.30.11
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    श्रोता बकता ग्याननिधि कथा राम कै गूढ़।

    अर्थ (Hindi)

    श्रोता बकता ग्याननिधि कथा राम कै गूढ़।

  375. RCM 1.30.12
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    किमि समुझौं मै जीव जड़ कलि मल ग्रसित बिमूढ़।।30(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    किमि समुझौं मै जीव जड़ कलि मल ग्रसित बिमूढ़।।30(ख)।।

  376. RCM 1.31.1
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    तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा।।

  377. RCM 1.31.2
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    भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई।।

    अर्थ (Hindi)

    भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई।।

  378. RCM 1.31.3
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    जस कछु बुधि बिबेक बल मेरें। तस कहिहउँ हियँ हरि के प्रेरें।।

    अर्थ (Hindi)

    जस कछु बुधि बिबेक बल मेरें। तस कहिहउँ हियँ हरि के प्रेरें।।

  379. RCM 1.31.4
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    निज संदेह मोह भ्रम हरनी। करउँ कथा भव सरिता तरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    निज संदेह मोह भ्रम हरनी। करउँ कथा भव सरिता तरनी।।

  380. RCM 1.31.5
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    बुध बिश्राम सकल जन रंजनि। रामकथा कलि कलुष बिभंजनि।।

    अर्थ (Hindi)

    बुध बिश्राम सकल जन रंजनि। रामकथा कलि कलुष बिभंजनि।।

  381. RCM 1.31.6
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    रामकथा कलि पंनग भरनी। पुनि बिबेक पावक कहुँ अरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा कलि पंनग भरनी। पुनि बिबेक पावक कहुँ अरनी।।

  382. RCM 1.31.7
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    रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई।।

  383. RCM 1.31.8
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    सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि।।

  384. RCM 1.31.9
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    असुर सेन सम नरक निकंदिनि। साधु बिबुध कुल हित गिरिनंदिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    असुर सेन सम नरक निकंदिनि। साधु बिबुध कुल हित गिरिनंदिनि।।

  385. RCM 1.31.10
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    संत समाज पयोधि रमा सी। बिस्व भार भर अचल छमा सी।।

    अर्थ (Hindi)

    संत समाज पयोधि रमा सी। बिस्व भार भर अचल छमा सी।।

  386. RCM 1.31.11
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    जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी।।

    अर्थ (Hindi)

    जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी।।

  387. RCM 1.31.12
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    रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी। तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी। तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी।।

  388. RCM 1.31.13
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    सिवप्रय मेकल सैल सुता सी। सकल सिद्धि सुख संपति रासी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिवप्रय मेकल सैल सुता सी। सकल सिद्धि सुख संपति रासी।।

  389. RCM 1.31.14
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    सदगुन सुरगन अंब अदिति सी। रघुबर भगति प्रेम परमिति सी।।

    अर्थ (Hindi)

    सदगुन सुरगन अंब अदिति सी। रघुबर भगति प्रेम परमिति सी।।

  390. RCM 1.31.15
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    राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।

    अर्थ (Hindi)

    राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।

  391. RCM 1.31.16
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    तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु।।31।।

    अर्थ (Hindi)

    तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु।।31।।

  392. RCM 1.32.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।

    अर्थ (Hindi)

    राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।

  393. RCM 1.32.2
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    जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के।।

    अर्थ (Hindi)

    जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के।।

  394. RCM 1.32.3
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    सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।

    अर्थ (Hindi)

    सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।

  395. RCM 1.32.4
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    जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के।।

    अर्थ (Hindi)

    जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के।।

  396. RCM 1.32.5
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    समन पाप संताप सोक के। प्रिय पालक परलोक लोक के।।

    अर्थ (Hindi)

    समन पाप संताप सोक के। प्रिय पालक परलोक लोक के।।

  397. RCM 1.32.6
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    सचिव सुभट भूपति बिचार के। कुंभज लोभ उदधि अपार के।।

    अर्थ (Hindi)

    सचिव सुभट भूपति बिचार के। कुंभज लोभ उदधि अपार के।।

  398. RCM 1.32.7
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    काम कोह कलिमल करिगन के। केहरि सावक जन मन बन के।।

    अर्थ (Hindi)

    काम कोह कलिमल करिगन के। केहरि सावक जन मन बन के।।

  399. RCM 1.32.8
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    अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद घन दारिद दवारि के।।

    अर्थ (Hindi)

    अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद घन दारिद दवारि के।।

  400. RCM 1.32.9
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    मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के।।

    अर्थ (Hindi)

    मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के।।

  401. RCM 1.32.10
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    हरन मोह तम दिनकर कर से। सेवक सालि पाल जलधर से।।

    अर्थ (Hindi)

    हरन मोह तम दिनकर कर से। सेवक सालि पाल जलधर से।।

  402. RCM 1.32.11
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    अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।

    अर्थ (Hindi)

    अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।

  403. RCM 1.32.12
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    सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से।।

    अर्थ (Hindi)

    सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से।।

  404. RCM 1.32.13
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    सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।

  405. RCM 1.32.14
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    सेवक मन मानस मराल से। पावक गंग तंरग माल से।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवक मन मानस मराल से। पावक गंग तंरग माल से।।

  406. RCM 1.32.15
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    कुपथ कुतरक कुचालि कलि कपट दंभ पाषंड।

    अर्थ (Hindi)

    कुपथ कुतरक कुचालि कलि कपट दंभ पाषंड।

  407. RCM 1.32.16
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    दहन राम गुन ग्राम जिमि इंधन अनल प्रचंड।।32(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    दहन राम गुन ग्राम जिमि इंधन अनल प्रचंड।।32(क)।।

  408. RCM 1.32.17
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    रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु।

    अर्थ (Hindi)

    रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु।

  409. RCM 1.32.18
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    सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु।।32(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु।।32(ख)।।

  410. RCM 1.33.1
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    कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी। जेहि बिधि संकर कहा बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी। जेहि बिधि संकर कहा बखानी।।

  411. RCM 1.33.2
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    सो सब हेतु कहब मैं गाई। कथाप्रबंध बिचित्र बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सो सब हेतु कहब मैं गाई। कथाप्रबंध बिचित्र बनाई।।

  412. RCM 1.33.3
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    जेहि यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करैं सुनि सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करैं सुनि सोई।।

  413. RCM 1.33.4
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    कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी।।

  414. RCM 1.33.5
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    रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं।।

  415. RCM 1.33.6
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    नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा।।

  416. RCM 1.33.7
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    कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए।।

    अर्थ (Hindi)

    कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए।।

  417. RCM 1.33.8
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    करिअ न संसय अस उर आनी। सुनिअ कथा सारद रति मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    करिअ न संसय अस उर आनी। सुनिअ कथा सारद रति मानी।।

  418. RCM 1.33.9
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    राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार।

    अर्थ (Hindi)

    राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार।

  419. RCM 1.33.10
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    सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार।।33।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार।।33।।

  420. RCM 1.34.1
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    एहि बिधि सब संसय करि दूरी। सिर धरि गुर पद पंकज धूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सब संसय करि दूरी। सिर धरि गुर पद पंकज धूरी।।

  421. RCM 1.34.2
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    पुनि सबही बिनवउँ कर जोरी। करत कथा जेहिं लाग न खोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि सबही बिनवउँ कर जोरी। करत कथा जेहिं लाग न खोरी।।

  422. RCM 1.34.3
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    सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा।।

  423. RCM 1.34.4
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    संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।।

  424. RCM 1.34.5
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    नौमी भौम बार मधु मासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।।

    अर्थ (Hindi)

    नौमी भौम बार मधु मासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।।

  425. RCM 1.34.6
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    जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं। तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं। तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिं।।

  426. RCM 1.34.7
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    असुर नाग खग नर मुनि देवा। आइ करहिं रघुनायक सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    असुर नाग खग नर मुनि देवा। आइ करहिं रघुनायक सेवा।।

  427. RCM 1.34.8
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    जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना। करहिं राम कल कीरति गाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना। करहिं राम कल कीरति गाना।।

  428. RCM 1.34.9
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    मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर।

    अर्थ (Hindi)

    मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर।

  429. RCM 1.34.10
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    जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर।।34।।

    अर्थ (Hindi)

    जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर।।34।।

  430. RCM 1.35.1
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    दरस परस मज्जन अरु पाना। हरइ पाप कह बेद पुराना।।

    अर्थ (Hindi)

    दरस परस मज्जन अरु पाना। हरइ पाप कह बेद पुराना।।

  431. RCM 1.35.2
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    नदी पुनीत अमित महिमा अति। कहि न सकइ सारद बिमलमति।।

    अर्थ (Hindi)

    नदी पुनीत अमित महिमा अति। कहि न सकइ सारद बिमलमति।।

  432. RCM 1.35.3
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    राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि।।

    अर्थ (Hindi)

    राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि।।

  433. RCM 1.35.4
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    चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजे तनु नहि संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजे तनु नहि संसारा।।

  434. RCM 1.35.5
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    सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी।।

  435. RCM 1.35.6
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    बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा। सुनत नसाहिं काम मद दंभा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा। सुनत नसाहिं काम मद दंभा।।

  436. RCM 1.35.7
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    रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा।।

  437. RCM 1.35.8
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    मन करि विषय अनल बन जरई। होइ सुखी जौ एहिं सर परई।।

    अर्थ (Hindi)

    मन करि विषय अनल बन जरई। होइ सुखी जौ एहिं सर परई।।

  438. RCM 1.35.9
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    रामचरितमानस मुनि भावन। बिरचेउ संभु सुहावन पावन।।

    अर्थ (Hindi)

    रामचरितमानस मुनि भावन। बिरचेउ संभु सुहावन पावन।।

  439. RCM 1.35.10
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    त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन। कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन।।

    अर्थ (Hindi)

    त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन। कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन।।

  440. RCM 1.35.11
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    रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा।।

    अर्थ (Hindi)

    रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा।।

  441. RCM 1.35.12
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    तातें रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर।।

    अर्थ (Hindi)

    तातें रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर।।

  442. RCM 1.35.13
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    कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई। सादर सुनहु सुजन मन लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई। सादर सुनहु सुजन मन लाई।।

  443. RCM 1.35.14
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    जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।

    अर्थ (Hindi)

    जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।

  444. RCM 1.35.15
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु।।35।।

    अर्थ (Hindi)

    अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु।।35।।

  445. RCM 1.36.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी। रामचरितमानस कबि तुलसी।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी। रामचरितमानस कबि तुलसी।।

  446. RCM 1.36.2
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    करइ मनोहर मति अनुहारी। सुजन सुचित सुनि लेहु सुधारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करइ मनोहर मति अनुहारी। सुजन सुचित सुनि लेहु सुधारी।।

  447. RCM 1.36.3
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    सुमति भूमि थल हृदय अगाधू। बेद पुरान उदधि घन साधू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमति भूमि थल हृदय अगाधू। बेद पुरान उदधि घन साधू।।

  448. RCM 1.36.4
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    बरषहिं राम सुजस बर बारी। मधुर मनोहर मंगलकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषहिं राम सुजस बर बारी। मधुर मनोहर मंगलकारी।।

  449. RCM 1.36.5
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    लीला सगुन जो कहहिं बखानी। सोइ स्वच्छता करइ मल हानी।।

    अर्थ (Hindi)

    लीला सगुन जो कहहिं बखानी। सोइ स्वच्छता करइ मल हानी।।

  450. RCM 1.36.6
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    प्रेम भगति जो बरनि न जाई। सोइ मधुरता सुसीतलताई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम भगति जो बरनि न जाई। सोइ मधुरता सुसीतलताई।।

  451. RCM 1.36.7
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    सो जल सुकृत सालि हित होई। राम भगत जन जीवन सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सो जल सुकृत सालि हित होई। राम भगत जन जीवन सोई।।

  452. RCM 1.36.8
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    मेधा महि गत सो जल पावन। सकिलि श्रवन मग चलेउ सुहावन।।

    अर्थ (Hindi)

    मेधा महि गत सो जल पावन। सकिलि श्रवन मग चलेउ सुहावन।।

  453. RCM 1.36.9
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    भरेउ सुमानस सुथल थिराना। सुखद सीत रुचि चारु चिराना।।

    अर्थ (Hindi)

    भरेउ सुमानस सुथल थिराना। सुखद सीत रुचि चारु चिराना।।

  454. RCM 1.36.10
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    सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि।

    अर्थ (Hindi)

    सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि।

  455. RCM 1.36.11
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    तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि।।36।।

    अर्थ (Hindi)

    तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि।।36।।

  456. RCM 1.37.1
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    सप्त प्रबन्ध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना।।

    अर्थ (Hindi)

    सप्त प्रबन्ध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना।।

  457. RCM 1.37.2
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    रघुपति महिमा अगुन अबाधा। बरनब सोइ बर बारि अगाधा।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति महिमा अगुन अबाधा। बरनब सोइ बर बारि अगाधा।।

  458. RCM 1.37.3
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    राम सीय जस सलिल सुधासम। उपमा बीचि बिलास मनोरम।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सीय जस सलिल सुधासम। उपमा बीचि बिलास मनोरम।।

  459. RCM 1.37.4
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    पुरइनि सघन चारु चौपाई। जुगुति मंजु मनि सीप सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरइनि सघन चारु चौपाई। जुगुति मंजु मनि सीप सुहाई।।

  460. RCM 1.37.5
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    छंद सोरठा सुंदर दोहा। सोइ बहुरंग कमल कुल सोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    छंद सोरठा सुंदर दोहा। सोइ बहुरंग कमल कुल सोहा।।

  461. RCM 1.37.6
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    अरथ अनूप सुमाव सुभासा। सोइ पराग मकरंद सुबासा।।

    अर्थ (Hindi)

    अरथ अनूप सुमाव सुभासा। सोइ पराग मकरंद सुबासा।।

  462. RCM 1.37.7
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    सुकृत पुंज मंजुल अलि माला। ग्यान बिराग बिचार मराला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुकृत पुंज मंजुल अलि माला। ग्यान बिराग बिचार मराला।।

  463. RCM 1.37.8
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    धुनि अवरेब कबित गुन जाती। मीन मनोहर ते बहुभाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    धुनि अवरेब कबित गुन जाती। मीन मनोहर ते बहुभाँती।।

  464. RCM 1.37.9
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    अरथ धरम कामादिक चारी। कहब ग्यान बिग्यान बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अरथ धरम कामादिक चारी। कहब ग्यान बिग्यान बिचारी।।

  465. RCM 1.37.10
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    नव रस जप तप जोग बिरागा। ते सब जलचर चारु तड़ागा।।

    अर्थ (Hindi)

    नव रस जप तप जोग बिरागा। ते सब जलचर चारु तड़ागा।।

  466. RCM 1.37.11
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    सुकृती साधु नाम गुन गाना। ते बिचित्र जल बिहग समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुकृती साधु नाम गुन गाना। ते बिचित्र जल बिहग समाना।।

  467. RCM 1.37.12
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    संतसभा चहुँ दिसि अवँराई। श्रद्धा रितु बसंत सम गाई।।

    अर्थ (Hindi)

    संतसभा चहुँ दिसि अवँराई। श्रद्धा रितु बसंत सम गाई।।

  468. RCM 1.37.13
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    भगति निरुपन बिबिध बिधाना। छमा दया दम लता बिताना।।

    अर्थ (Hindi)

    भगति निरुपन बिबिध बिधाना। छमा दया दम लता बिताना।।

  469. RCM 1.37.14
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    सम जम नियम फूल फल ग्याना। हरि पत रति रस बेद बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सम जम नियम फूल फल ग्याना। हरि पत रति रस बेद बखाना।।

  470. RCM 1.37.15
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    औरउ कथा अनेक प्रसंगा। तेइ सुक पिक बहुबरन बिहंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    औरउ कथा अनेक प्रसंगा। तेइ सुक पिक बहुबरन बिहंगा।।

  471. RCM 1.37.16
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    पुलक बाटिका बाग बन सुख सुबिहंग बिहारु।

    अर्थ (Hindi)

    पुलक बाटिका बाग बन सुख सुबिहंग बिहारु।

  472. RCM 1.37.17
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    माली सुमन सनेह जल सींचत लोचन चारु।।37।।

    अर्थ (Hindi)

    माली सुमन सनेह जल सींचत लोचन चारु।।37।।

  473. RCM 1.38.1
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    जे गावहिं यह चरित सँभारे। तेइ एहि ताल चतुर रखवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    जे गावहिं यह चरित सँभारे। तेइ एहि ताल चतुर रखवारे।।

  474. RCM 1.38.2
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    सदा सुनहिं सादर नर नारी। तेइ सुरबर मानस अधिकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सदा सुनहिं सादर नर नारी। तेइ सुरबर मानस अधिकारी।।

  475. RCM 1.38.3
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    अति खल जे बिषई बग कागा। एहिं सर निकट न जाहिं अभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    अति खल जे बिषई बग कागा। एहिं सर निकट न जाहिं अभागा।।

  476. RCM 1.38.4
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    संबुक भेक सेवार समाना। इहाँ न बिषय कथा रस नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    संबुक भेक सेवार समाना। इहाँ न बिषय कथा रस नाना।।

  477. RCM 1.38.5
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    तेहि कारन आवत हियँ हारे। कामी काक बलाक बिचारे।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि कारन आवत हियँ हारे। कामी काक बलाक बिचारे।।

  478. RCM 1.38.6
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    आवत एहिं सर अति कठिनाई। राम कृपा बिनु आइ न जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत एहिं सर अति कठिनाई। राम कृपा बिनु आइ न जाई।।

  479. RCM 1.38.7
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    कठिन कुसंग कुपंथ कराला। तिन्ह के बचन बाघ हरि ब्याला।।

    अर्थ (Hindi)

    कठिन कुसंग कुपंथ कराला। तिन्ह के बचन बाघ हरि ब्याला।।

  480. RCM 1.38.8
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    गृह कारज नाना जंजाला। ते अति दुर्गम सैल बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    गृह कारज नाना जंजाला। ते अति दुर्गम सैल बिसाला।।

  481. RCM 1.38.9
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    बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना।।

  482. RCM 1.38.10
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    जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ।

    अर्थ (Hindi)

    जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ।

  483. RCM 1.38.11
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    तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ।।38।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ।।38।।

  484. RCM 1.39.1
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    जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।।

  485. RCM 1.39.2
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    जड़ता जाड़ बिषम उर लागा। गएहुँ न मज्जन पाव अभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    जड़ता जाड़ बिषम उर लागा। गएहुँ न मज्जन पाव अभागा।।

  486. RCM 1.39.3
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    करि न जाइ सर मज्जन पाना। फिरि आवइ समेत अभिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    करि न जाइ सर मज्जन पाना। फिरि आवइ समेत अभिमाना।।

  487. RCM 1.39.4
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    जौं बहोरि कोउ पूछन आवा। सर निंदा करि ताहि बुझावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं बहोरि कोउ पूछन आवा। सर निंदा करि ताहि बुझावा।।

  488. RCM 1.39.5
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    सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।।

  489. RCM 1.39.6
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    सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई।।

  490. RCM 1.39.7
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    ते नर यह सर तजहिं न काऊ। जिन्ह के राम चरन भल भाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    ते नर यह सर तजहिं न काऊ। जिन्ह के राम चरन भल भाऊ।।

  491. RCM 1.39.8
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    जो नहाइ चह एहिं सर भाई। सो सतसंग करउ मन लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जो नहाइ चह एहिं सर भाई। सो सतसंग करउ मन लाई।।

  492. RCM 1.39.9
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    अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।।

    अर्थ (Hindi)

    अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।।

  493. RCM 1.39.10
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    भयउ हृदयँ आनंद उछाहू। उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ हृदयँ आनंद उछाहू। उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू।।

  494. RCM 1.39.11
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    चली सुभग कबिता सरिता सो। राम बिमल जस जल भरिता सो।।

    अर्थ (Hindi)

    चली सुभग कबिता सरिता सो। राम बिमल जस जल भरिता सो।।

  495. RCM 1.39.12
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    सरजू नाम सुमंगल मूला। लोक बेद मत मंजुल कूला।।

    अर्थ (Hindi)

    सरजू नाम सुमंगल मूला। लोक बेद मत मंजुल कूला।।

  496. RCM 1.39.13
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    नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।

  497. RCM 1.39.14
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    श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल।

    अर्थ (Hindi)

    श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल।

  498. RCM 1.39.15
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    संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल।।39।।

    अर्थ (Hindi)

    संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल।।39।।

  499. RCM 1.40.1
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    रामभगति सुरसरितहि जाई। मिली सुकीरति सरजु सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रामभगति सुरसरितहि जाई। मिली सुकीरति सरजु सुहाई।।

  500. RCM 1.40.2
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    सानुज राम समर जसु पावन। मिलेउ महानदु सोन सुहावन।।

    अर्थ (Hindi)

    सानुज राम समर जसु पावन। मिलेउ महानदु सोन सुहावन।।

  501. RCM 1.40.3
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    जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।।

  502. RCM 1.40.4
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    त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरुप सिंधु समुहानी।।

    अर्थ (Hindi)

    त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरुप सिंधु समुहानी।।

  503. RCM 1.40.5
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    मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।।

    अर्थ (Hindi)

    मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।।

  504. RCM 1.40.6
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    बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा।।

  505. RCM 1.40.7
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    उमा महेस बिबाह बराती। ते जलचर अगनित बहुभाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा महेस बिबाह बराती। ते जलचर अगनित बहुभाँती।।

  506. RCM 1.40.8
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    रघुबर जनम अनंद बधाई। भवँर तरंग मनोहरताई।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुबर जनम अनंद बधाई। भवँर तरंग मनोहरताई।।

  507. RCM 1.40.9
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    बालचरित चहु बंधु के बनज बिपुल बहुरंग।

    अर्थ (Hindi)

    बालचरित चहु बंधु के बनज बिपुल बहुरंग।

  508. RCM 1.40.10
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    नृप रानी परिजन सुकृत मधुकर बारिबिहंग।।40।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप रानी परिजन सुकृत मधुकर बारिबिहंग।।40।।

  509. RCM 1.41.1
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    सीय स्वयंबर कथा सुहाई। सरित सुहावनि सो छबि छाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय स्वयंबर कथा सुहाई। सरित सुहावनि सो छबि छाई।।

  510. RCM 1.41.2
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    नदी नाव पटु प्रस्न अनेका। केवट कुसल उतर सबिबेका।।

    अर्थ (Hindi)

    नदी नाव पटु प्रस्न अनेका। केवट कुसल उतर सबिबेका।।

  511. RCM 1.41.3
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    सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।।

  512. RCM 1.41.4
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    घोर धार भृगुनाथ रिसानी। घाट सुबद्ध राम बर बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    घोर धार भृगुनाथ रिसानी। घाट सुबद्ध राम बर बानी।।

  513. RCM 1.41.5
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    सानुज राम बिबाह उछाहू। सो सुभ उमग सुखद सब काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सानुज राम बिबाह उछाहू। सो सुभ उमग सुखद सब काहू।।

  514. RCM 1.41.6
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    कहत सुनत हरषहिं पुलकाहीं। ते सुकृती मन मुदित नहाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत सुनत हरषहिं पुलकाहीं। ते सुकृती मन मुदित नहाहीं।।

  515. RCM 1.41.7
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    राम तिलक हित मंगल साजा। परब जोग जनु जुरे समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम तिलक हित मंगल साजा। परब जोग जनु जुरे समाजा।।

  516. RCM 1.41.8
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    काई कुमति केकई केरी। परी जासु फल बिपति घनेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    काई कुमति केकई केरी। परी जासु फल बिपति घनेरी।।

  517. RCM 1.41.9
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    समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग।

    अर्थ (Hindi)

    समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग।

  518. RCM 1.41.10
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    कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग।।41।।

    अर्थ (Hindi)

    कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग।।41।।

  519. RCM 1.42.1
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    कीरति सरित छहूँ रितु रूरी। समय सुहावनि पावनि भूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    कीरति सरित छहूँ रितु रूरी। समय सुहावनि पावनि भूरी।।

  520. RCM 1.42.2
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    हिम हिमसैलसुता सिव ब्याहू। सिसिर सुखद प्रभु जनम उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    हिम हिमसैलसुता सिव ब्याहू। सिसिर सुखद प्रभु जनम उछाहू।।

  521. RCM 1.42.3
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    बरनब राम बिबाह समाजू। सो मुद मंगलमय रितुराजू।।

    अर्थ (Hindi)

    बरनब राम बिबाह समाजू। सो मुद मंगलमय रितुराजू।।

  522. RCM 1.42.4
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    ग्रीषम दुसह राम बनगवनू। पंथकथा खर आतप पवनू।।

    अर्थ (Hindi)

    ग्रीषम दुसह राम बनगवनू। पंथकथा खर आतप पवनू।।

  523. RCM 1.42.5
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    बरषा घोर निसाचर रारी। सुरकुल सालि सुमंगलकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषा घोर निसाचर रारी। सुरकुल सालि सुमंगलकारी।।

  524. RCM 1.42.6
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    राम राज सुख बिनय बड़ाई। बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    राम राज सुख बिनय बड़ाई। बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई।।

  525. RCM 1.42.7
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    सती सिरोमनि सिय गुनगाथा। सोइ गुन अमल अनूपम पाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सती सिरोमनि सिय गुनगाथा। सोइ गुन अमल अनूपम पाथा।।

  526. RCM 1.42.8
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    भरत सुभाउ सुसीतलताई। सदा एकरस बरनि न जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भरत सुभाउ सुसीतलताई। सदा एकरस बरनि न जाई।।

  527. RCM 1.42.9
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    अवलोकनि बोलनि मिलनि प्रीति परसपर हास।

    अर्थ (Hindi)

    अवलोकनि बोलनि मिलनि प्रीति परसपर हास।

  528. RCM 1.42.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भायप भलि चहु बंधु की जल माधुरी सुबास।।42।।

    अर्थ (Hindi)

    भायप भलि चहु बंधु की जल माधुरी सुबास।।42।।

  529. RCM 1.43.1
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    आरति बिनय दीनता मोरी। लघुता ललित सुबारि न थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    आरति बिनय दीनता मोरी। लघुता ललित सुबारि न थोरी।।

  530. RCM 1.43.2
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    अदभुत सलिल सुनत गुनकारी। आस पिआस मनोमल हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अदभुत सलिल सुनत गुनकारी। आस पिआस मनोमल हारी।।

  531. RCM 1.43.3
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    राम सुप्रेमहि पोषत पानी। हरत सकल कलि कलुष गलानी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सुप्रेमहि पोषत पानी। हरत सकल कलि कलुष गलानी।।

  532. RCM 1.43.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भव श्रम सोषक तोषक तोषा। समन दुरित दुख दारिद दोषा।।

    अर्थ (Hindi)

    भव श्रम सोषक तोषक तोषा। समन दुरित दुख दारिद दोषा।।

  533. RCM 1.43.5
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    काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन।।

    अर्थ (Hindi)

    काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन।।

  534. RCM 1.43.6
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    सादर मज्जन पान किए तें। मिटहिं पाप परिताप हिए तें।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर मज्जन पान किए तें। मिटहिं पाप परिताप हिए तें।।

  535. RCM 1.43.7
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    जिन्ह एहि बारि न मानस धोए। ते कायर कलिकाल बिगोए।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह एहि बारि न मानस धोए। ते कायर कलिकाल बिगोए।।

  536. RCM 1.43.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तृषित निरखि रबि कर भव बारी। फिरिहहि मृग जिमि जीव दुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    तृषित निरखि रबि कर भव बारी। फिरिहहि मृग जिमि जीव दुखारी।।

  537. RCM 1.43.9
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    मति अनुहारि सुबारि गुन गनि मन अन्हवाइ।

    अर्थ (Hindi)

    मति अनुहारि सुबारि गुन गनि मन अन्हवाइ।

  538. RCM 1.43.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुमिरि भवानी संकरहि कह कबि कथा सुहाइ।।43(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि भवानी संकरहि कह कबि कथा सुहाइ।।43(क)।।

  539. RCM 1.43.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद ।

    अर्थ (Hindi)

    अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद ।

  540. RCM 1.43.12
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    कहउँ जुगल मुनिबर्ज कर मिलन सुभग संबाद।।43(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    कहउँ जुगल मुनिबर्ज कर मिलन सुभग संबाद।।43(ख)।।

  541. RCM 1.44.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।

    अर्थ (Hindi)

    भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।

  542. RCM 1.44.2
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    तापस सम दम दया निधाना। परमारथ पथ परम सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तापस सम दम दया निधाना। परमारथ पथ परम सुजाना।।

  543. RCM 1.44.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।

  544. RCM 1.44.4
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    देव दनुज किंनर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं।।

    अर्थ (Hindi)

    देव दनुज किंनर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं।।

  545. RCM 1.44.5
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    पूजहि माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    पूजहि माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।।

  546. RCM 1.44.6
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    भरद्वाज आश्रम अति पावन। परम रम्य मुनिबर मन भावन।।

    अर्थ (Hindi)

    भरद्वाज आश्रम अति पावन। परम रम्य मुनिबर मन भावन।।

  547. RCM 1.44.7
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    तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा। जाहिं जे मज्जन तीरथराजा।।

    अर्थ (Hindi)

    तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा। जाहिं जे मज्जन तीरथराजा।।

  548. RCM 1.44.8
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    मज्जहिं प्रात समेत उछाहा। कहहिं परसपर हरि गुन गाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    मज्जहिं प्रात समेत उछाहा। कहहिं परसपर हरि गुन गाहा।।

  549. RCM 1.44.9
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    ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग।

  550. RCM 1.44.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग।।44।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग।।44।।

  551. RCM 1.45.1
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    एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।।

  552. RCM 1.45.2
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    प्रति संबत अति होइ अनंदा। मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रति संबत अति होइ अनंदा। मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा।।

  553. RCM 1.45.3
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    एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।।

  554. RCM 1.45.4
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    जगबालिक मुनि परम बिबेकी। भरव्दाज राखे पद टेकी।।

    अर्थ (Hindi)

    जगबालिक मुनि परम बिबेकी। भरव्दाज राखे पद टेकी।।

  555. RCM 1.45.5
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    सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।।

  556. RCM 1.45.6
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    करि पूजा मुनि सुजस बखानी। बोले अति पुनीत मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    करि पूजा मुनि सुजस बखानी। बोले अति पुनीत मृदु बानी।।

  557. RCM 1.45.7
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    नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।।

  558. RCM 1.45.8
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    कहत सो मोहि लागत भय लाजा। जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत सो मोहि लागत भय लाजा। जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा।।

  559. RCM 1.45.9
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    संत कहहि असि नीति प्रभु श्रुति पुरान मुनि गाव।

    अर्थ (Hindi)

    संत कहहि असि नीति प्रभु श्रुति पुरान मुनि गाव।

  560. RCM 1.45.10
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    होइ न बिमल बिबेक उर गुर सन किएँ दुराव।।45।।

    अर्थ (Hindi)

    होइ न बिमल बिबेक उर गुर सन किएँ दुराव।।45।।

  561. RCM 1.46.1
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    अस बिचारि प्रगटउँ निज मोहू। हरहु नाथ करि जन पर छोहू।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि प्रगटउँ निज मोहू। हरहु नाथ करि जन पर छोहू।।

  562. RCM 1.46.2
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    राम नाम कर अमित प्रभावा। संत पुरान उपनिषद गावा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम नाम कर अमित प्रभावा। संत पुरान उपनिषद गावा।।

  563. RCM 1.46.3
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    संतत जपत संभु अबिनासी। सिव भगवान ग्यान गुन रासी।।

    अर्थ (Hindi)

    संतत जपत संभु अबिनासी। सिव भगवान ग्यान गुन रासी।।

  564. RCM 1.46.4
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    आकर चारि जीव जग अहहीं। कासीं मरत परम पद लहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    आकर चारि जीव जग अहहीं। कासीं मरत परम पद लहहीं।।

  565. RCM 1.46.5
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    सोपि राम महिमा मुनिराया। सिव उपदेसु करत करि दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    सोपि राम महिमा मुनिराया। सिव उपदेसु करत करि दाया।।

  566. RCM 1.46.6
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    रामु कवन प्रभु पूछउँ तोही। कहिअ बुझाइ कृपानिधि मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु कवन प्रभु पूछउँ तोही। कहिअ बुझाइ कृपानिधि मोही।।

  567. RCM 1.46.7
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    एक राम अवधेस कुमारा। तिन्ह कर चरित बिदित संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    एक राम अवधेस कुमारा। तिन्ह कर चरित बिदित संसारा।।

  568. RCM 1.46.8
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    नारि बिरहँ दुखु लहेउ अपारा। भयहु रोषु रन रावनु मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    नारि बिरहँ दुखु लहेउ अपारा। भयहु रोषु रन रावनु मारा।।

  569. RCM 1.46.9
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    प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि।

  570. RCM 1.46.10
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    सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि।।46।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि।।46।।

  571. RCM 1.47.1
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    जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।।

  572. RCM 1.47.2
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    जागबलिक बोले मुसुकाई। तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई।।

    अर्थ (Hindi)

    जागबलिक बोले मुसुकाई। तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई।।

  573. RCM 1.47.3
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    राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।।

  574. RCM 1.47.4
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    चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा।।

  575. RCM 1.47.5
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    तात सुनहु सादर मनु लाई। कहउँ राम कै कथा सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तात सुनहु सादर मनु लाई। कहउँ राम कै कथा सुहाई।।

  576. RCM 1.47.6
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    महामोहु महिषेसु बिसाला। रामकथा कालिका कराला।।

    अर्थ (Hindi)

    महामोहु महिषेसु बिसाला। रामकथा कालिका कराला।।

  577. RCM 1.47.7
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    रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना।।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना।।

  578. RCM 1.47.8
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    ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी।।

  579. RCM 1.47.9
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    कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद।

    अर्थ (Hindi)

    कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद।

  580. RCM 1.47.10
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    भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद।।47।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद।।47।।

  581. RCM 1.48.1
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    एक बार त्रेता जुग माहीं। संभु गए कुंभज रिषि पाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार त्रेता जुग माहीं। संभु गए कुंभज रिषि पाहीं।।

  582. RCM 1.48.2
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    संग सती जगजननि भवानी। पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    संग सती जगजननि भवानी। पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी।।

  583. RCM 1.48.3
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    रामकथा मुनीबर्ज बखानी। सुनी महेस परम सुखु मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा मुनीबर्ज बखानी। सुनी महेस परम सुखु मानी।।

  584. RCM 1.48.4
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    रिषि पूछी हरिभगति सुहाई। कही संभु अधिकारी पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रिषि पूछी हरिभगति सुहाई। कही संभु अधिकारी पाई।।

  585. RCM 1.48.5
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    कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा।।

  586. RCM 1.48.6
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    मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी। चले भवन सँग दच्छकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी। चले भवन सँग दच्छकुमारी।।

  587. RCM 1.48.7
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    तेहि अवसर भंजन महिभारा। हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अवसर भंजन महिभारा। हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा।।

  588. RCM 1.48.8
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    पिता बचन तजि राजु उदासी। दंडक बन बिचरत अबिनासी।।

    अर्थ (Hindi)

    पिता बचन तजि राजु उदासी। दंडक बन बिचरत अबिनासी।।

  589. RCM 1.48.9
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    ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ।

    अर्थ (Hindi)

    ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ।

  590. RCM 1.48.10
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    गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ।।48(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ।।48(क)।।

  591. RCM 1.48.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ।।

    अर्थ (Hindi)

    संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ।।

  592. RCM 1.48.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची।।48(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची।।48(ख)।।

  593. RCM 1.49.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।।

  594. RCM 1.49.2
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    जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा।।

  595. RCM 1.49.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि भए सोचबस ईसा। तेहि समय जाइ दससीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि भए सोचबस ईसा। तेहि समय जाइ दससीसा।।

  596. RCM 1.49.4
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    लीन्ह नीच मारीचहि संगा। भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    लीन्ह नीच मारीचहि संगा। भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा।।

  597. RCM 1.49.5
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    करि छलु मूढ़ हरी बैदेही। प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    करि छलु मूढ़ हरी बैदेही। प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही।।

  598. RCM 1.49.6
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    मृग बधि बन्धु सहित हरि आए। आश्रमु देखि नयन जल छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    मृग बधि बन्धु सहित हरि आए। आश्रमु देखि नयन जल छाए।।

  599. RCM 1.49.7
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    बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।।

  600. RCM 1.49.8
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    कबहूँ जोग बियोग न जाकें। देखा प्रगट बिरह दुख ताकें।।

    अर्थ (Hindi)

    कबहूँ जोग बियोग न जाकें। देखा प्रगट बिरह दुख ताकें।।

  601. RCM 1.49.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान।

    अर्थ (Hindi)

    अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान।

  602. RCM 1.49.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन।।49।।

    अर्थ (Hindi)

    जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन।।49।।

  603. RCM 1.50.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा।।

  604. RCM 1.50.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भरि लोचन छबिसिंधु निहारी। कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भरि लोचन छबिसिंधु निहारी। कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी।।

  605. RCM 1.50.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन।।

    अर्थ (Hindi)

    जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन।।

  606. RCM 1.50.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चले जात सिव सती समेता। पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    चले जात सिव सती समेता। पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता।।

  607. RCM 1.50.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी।।

  608. RCM 1.50.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावत सीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    संकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावत सीसा।।

  609. RCM 1.50.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा। कहि सच्चिदानंद परधमा।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा। कहि सच्चिदानंद परधमा।।

  610. RCM 1.50.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भए मगन छबि तासु बिलोकी। अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी।।

    अर्थ (Hindi)

    भए मगन छबि तासु बिलोकी। अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी।।

  611. RCM 1.50.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद।

  612. RCM 1.50.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो कि देह धरि होइ नर जाहि न जानत वेद।। 50।।

    अर्थ (Hindi)

    सो कि देह धरि होइ नर जाहि न जानत वेद।। 50।।

  613. RCM 1.51.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।।

  614. RCM 1.51.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी।।

  615. RCM 1.51.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।।

  616. RCM 1.51.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस संसय मन भयउ अपारा। होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस संसय मन भयउ अपारा। होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा।।

  617. RCM 1.51.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।।

  618. RCM 1.51.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।

  619. RCM 1.51.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जासु कथा कुभंज रिषि गाई। भगति जासु मैं मुनिहि सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु कथा कुभंज रिषि गाई। भगति जासु मैं मुनिहि सुनाई।।

  620. RCM 1.51.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोउ मम इष्टदेव रघुबीरा। सेवत जाहि सदा मुनि धीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सोउ मम इष्टदेव रघुबीरा। सेवत जाहि सदा मुनि धीरा।।

  621. RCM 1.52.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।।

  622. RCM 1.52.2
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    तब लगि बैठ अहउँ बटछाहिं। जब लगि तुम्ह ऐहहु मोहि पाही।।

    अर्थ (Hindi)

    तब लगि बैठ अहउँ बटछाहिं। जब लगि तुम्ह ऐहहु मोहि पाही।।

  623. RCM 1.52.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।।

  624. RCM 1.52.4
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    चलीं सती सिव आयसु पाई। करहिं बिचारु करौं का भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चलीं सती सिव आयसु पाई। करहिं बिचारु करौं का भाई।।

  625. RCM 1.52.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।।

  626. RCM 1.52.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधी बिपरीत भलाई नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधी बिपरीत भलाई नाहीं।।

  627. RCM 1.52.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा।।

    अर्थ (Hindi)

    होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा।।

  628. RCM 1.52.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कहि लगे जपन हरिनामा। गई सती जहँ प्रभु सुखधामा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि लगे जपन हरिनामा। गई सती जहँ प्रभु सुखधामा।।

  629. RCM 1.52.9
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    पुनि पुनि हृदयँ विचारु करि धरि सीता कर रुप।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि हृदयँ विचारु करि धरि सीता कर रुप।

  630. RCM 1.52.10
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    आगें होइ चलि पंथ तेहि जेहिं आवत नरभूप।।52।।

    अर्थ (Hindi)

    आगें होइ चलि पंथ तेहि जेहिं आवत नरभूप।।52।।

  631. RCM 1.53.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा।।

  632. RCM 1.53.2
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    कहि न सकत कछु अति गंभीरा। प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि न सकत कछु अति गंभीरा। प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा।।

  633. RCM 1.53.3
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    सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी।।

    अर्थ (Hindi)

    सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी।।

  634. RCM 1.53.4
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    सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना। सोइ सरबग्य रामु भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना। सोइ सरबग्य रामु भगवाना।।

  635. RCM 1.53.5
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    सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ।।

  636. RCM 1.53.6
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    निज माया बलु हृदयँ बखानी। बोले बिहसि रामु मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    निज माया बलु हृदयँ बखानी। बोले बिहसि रामु मृदु बानी।।

  637. RCM 1.53.7
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    जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू।।

    अर्थ (Hindi)

    जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू।।

  638. RCM 1.53.8
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    कहेउ बहोरि कहाँ बृषकेतू। बिपिन अकेलि फिरहु केहि हेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    कहेउ बहोरि कहाँ बृषकेतू। बिपिन अकेलि फिरहु केहि हेतू।।

  639. RCM 1.53.9
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    राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।

    अर्थ (Hindi)

    राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।

  640. RCM 1.53.10
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    सती सभीत महेस पहिं चलीं हृदयँ बड़ सोचु।।53।।

    अर्थ (Hindi)

    सती सभीत महेस पहिं चलीं हृदयँ बड़ सोचु।।53।।

  641. RCM 1.54.1
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    मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर आना।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर आना।।

  642. RCM 1.54.2
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    जाइ उतरु अब देहउँ काहा। उर उपजा अति दारुन दाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ उतरु अब देहउँ काहा। उर उपजा अति दारुन दाहा।।

  643. RCM 1.54.3
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    जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा।।

  644. RCM 1.54.4
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    सतीं दीख कौतुकु मग जाता। आगें रामु सहित श्री भ्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं दीख कौतुकु मग जाता। आगें रामु सहित श्री भ्राता।।

  645. RCM 1.54.5
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    फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा। सहित बंधु सिय सुंदर वेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा। सहित बंधु सिय सुंदर वेषा।।

  646. RCM 1.54.6
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    जहँ चितवहिं तहँ प्रभु आसीना। सेवहिं सिद्ध मुनीस प्रबीना।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ चितवहिं तहँ प्रभु आसीना। सेवहिं सिद्ध मुनीस प्रबीना।।

  647. RCM 1.54.7
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    देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका। अमित प्रभाउ एक तें एका।।

    अर्थ (Hindi)

    देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका। अमित प्रभाउ एक तें एका।।

  648. RCM 1.54.8
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    बंदत चरन करत प्रभु सेवा। बिबिध बेष देखे सब देवा।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदत चरन करत प्रभु सेवा। बिबिध बेष देखे सब देवा।।

  649. RCM 1.54.9
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    सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप।

    अर्थ (Hindi)

    सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप।

  650. RCM 1.54.10
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    जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप।।54।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप।।54।।

  651. RCM 1.55.1
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    देखे जहँ तहँ रघुपति जेते। सक्तिन्ह सहित सकल सुर तेते।।

    अर्थ (Hindi)

    देखे जहँ तहँ रघुपति जेते। सक्तिन्ह सहित सकल सुर तेते।।

  652. RCM 1.55.2
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    जीव चराचर जो संसारा। देखे सकल अनेक प्रकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जीव चराचर जो संसारा। देखे सकल अनेक प्रकारा।।

  653. RCM 1.55.3
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    पूजहिं प्रभुहि देव बहु बेषा। राम रूप दूसर नहिं देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    पूजहिं प्रभुहि देव बहु बेषा। राम रूप दूसर नहिं देखा।।

  654. RCM 1.55.4
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    अवलोके रघुपति बहुतेरे। सीता सहित न बेष घनेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    अवलोके रघुपति बहुतेरे। सीता सहित न बेष घनेरे।।

  655. RCM 1.55.5
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    सोइ रघुबर सोइ लछिमनु सीता। देखि सती अति भई सभीता।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ रघुबर सोइ लछिमनु सीता। देखि सती अति भई सभीता।।

  656. RCM 1.55.6
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    हृदय कंप तन सुधि कछु नाहीं। नयन मूदि बैठीं मग माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदय कंप तन सुधि कछु नाहीं। नयन मूदि बैठीं मग माहीं।।

  657. RCM 1.55.7
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    बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी। कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी। कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी।।

  658. RCM 1.55.8
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    पुनि पुनि नाइ राम पद सीसा। चलीं तहाँ जहँ रहे गिरीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि नाइ राम पद सीसा। चलीं तहाँ जहँ रहे गिरीसा।।

  659. RCM 1.55.9
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    गई समीप महेस तब हँसि पूछी कुसलात।

    अर्थ (Hindi)

    गई समीप महेस तब हँसि पूछी कुसलात।

  660. RCM 1.55.10
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    लीन्ही परीछा कवन बिधि कहहु सत्य सब बात।।55।।

    अर्थ (Hindi)

    लीन्ही परीछा कवन बिधि कहहु सत्य सब बात।।55।।

  661. RCM 1.56.1
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    सतीं समुझि रघुबीर प्रभाऊ। भय बस सिव सन कीन्ह दुराऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं समुझि रघुबीर प्रभाऊ। भय बस सिव सन कीन्ह दुराऊ।।

  662. RCM 1.56.2
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    कछु न परीछा लीन्हि गोसाई। कीन्ह प्रनामु तुम्हारिहि नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कछु न परीछा लीन्हि गोसाई। कीन्ह प्रनामु तुम्हारिहि नाई।।

  663. RCM 1.56.3
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    जो तुम्ह कहा सो मृषा न होई। मोरें मन प्रतीति अति सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जो तुम्ह कहा सो मृषा न होई। मोरें मन प्रतीति अति सोई।।

  664. RCM 1.56.4
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    तब संकर देखेउ धरि ध्याना। सतीं जो कीन्ह चरित सब जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तब संकर देखेउ धरि ध्याना। सतीं जो कीन्ह चरित सब जाना।।

  665. RCM 1.56.5
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    बहुरि राममायहि सिरु नावा। प्रेरि सतिहि जेहिं झूँठ कहावा।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि राममायहि सिरु नावा। प्रेरि सतिहि जेहिं झूँठ कहावा।।

  666. RCM 1.56.6
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    हरि इच्छा भावी बलवाना। हृदयँ बिचारत संभु सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि इच्छा भावी बलवाना। हृदयँ बिचारत संभु सुजाना।।

  667. RCM 1.56.7
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    सतीं कीन्ह सीता कर बेषा। सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं कीन्ह सीता कर बेषा। सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।

  668. RCM 1.56.8
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    जौं अब करउँ सती सन प्रीती। मिटइ भगति पथु होइ अनीती।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं अब करउँ सती सन प्रीती। मिटइ भगति पथु होइ अनीती।।

  669. RCM 1.56.9
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    परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु।

    अर्थ (Hindi)

    परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु।

  670. RCM 1.56.10
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    प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु।।56।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु।।56।।

  671. RCM 1.57.1
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    तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।।

  672. RCM 1.57.2
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    एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं। सिव संकल्पु कीन्ह मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं। सिव संकल्पु कीन्ह मन माहीं।।

  673. RCM 1.57.3
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    अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।।

  674. RCM 1.57.4
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    चलत गगन भै गिरा सुहाई। जय महेस भलि भगति दृढ़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत गगन भै गिरा सुहाई। जय महेस भलि भगति दृढ़ाई।।

  675. RCM 1.57.5
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    अस पन तुम्ह बिनु करइ को आना। रामभगत समरथ भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    अस पन तुम्ह बिनु करइ को आना। रामभगत समरथ भगवाना।।

  676. RCM 1.57.6
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    सुनि नभगिरा सती उर सोचा। पूछा सिवहि समेत सकोचा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि नभगिरा सती उर सोचा। पूछा सिवहि समेत सकोचा।।

  677. RCM 1.57.7
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    कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।।

  678. RCM 1.57.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती।।

  679. RCM 1.57.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सतीं हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य।

  680. RCM 1.57.10
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    कीन्ह कपटु मैं संभु सन नारि सहज जड़ अग्य।।57क।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्ह कपटु मैं संभु सन नारि सहज जड़ अग्य।।57क।।

  681. RCM 1.57.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि।

    अर्थ (Hindi)

    जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि।

  682. RCM 1.57.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि।।57ख।।

    अर्थ (Hindi)

    बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि।।57ख।।

  683. RCM 1.58.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हृदयँ सोचु समुझत निज करनी। चिंता अमित जाइ नहि बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ सोचु समुझत निज करनी। चिंता अमित जाइ नहि बरनी।।

  684. RCM 1.58.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कृपासिंधु सिव परम अगाधा। प्रगट न कहेउ मोर अपराधा।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपासिंधु सिव परम अगाधा। प्रगट न कहेउ मोर अपराधा।।

  685. RCM 1.58.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संकर रुख अवलोकि भवानी। प्रभु मोहि तजेउ हृदयँ अकुलानी।।

    अर्थ (Hindi)

    संकर रुख अवलोकि भवानी। प्रभु मोहि तजेउ हृदयँ अकुलानी।।

  686. RCM 1.58.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निज अघ समुझि न कछु कहि जाई। तपइ अवाँ इव उर अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    निज अघ समुझि न कछु कहि जाई। तपइ अवाँ इव उर अधिकाई।।

  687. RCM 1.58.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सतिहि ससोच जानि बृषकेतू। कहीं कथा सुंदर सुख हेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    सतिहि ससोच जानि बृषकेतू। कहीं कथा सुंदर सुख हेतू।।

  688. RCM 1.58.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरनत पंथ बिबिध इतिहासा। बिस्वनाथ पहुँचे कैलासा।।

    अर्थ (Hindi)

    बरनत पंथ बिबिध इतिहासा। बिस्वनाथ पहुँचे कैलासा।।

  689. RCM 1.58.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।।

    अर्थ (Hindi)

    तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।।

  690. RCM 1.58.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संकर सहज सरुप सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा।।

    अर्थ (Hindi)

    संकर सहज सरुप सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा।।

  691. RCM 1.58.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सती बसहि कैलास तब अधिक सोचु मन माहिं।

    अर्थ (Hindi)

    सती बसहि कैलास तब अधिक सोचु मन माहिं।

  692. RCM 1.58.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मरमु न कोऊ जान कछु जुग सम दिवस सिराहिं।।58।।

    अर्थ (Hindi)

    मरमु न कोऊ जान कछु जुग सम दिवस सिराहिं।।58।।

  693. RCM 1.59.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नित नव सोचु सतीं उर भारा। कब जैहउँ दुख सागर पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नव सोचु सतीं उर भारा। कब जैहउँ दुख सागर पारा।।

  694. RCM 1.59.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मैं जो कीन्ह रघुपति अपमाना। पुनिपति बचनु मृषा करि जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं जो कीन्ह रघुपति अपमाना। पुनिपति बचनु मृषा करि जाना।।

  695. RCM 1.59.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा।।

  696. RCM 1.59.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब बिधि अस बूझिअ नहि तोही। संकर बिमुख जिआवसि मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    अब बिधि अस बूझिअ नहि तोही। संकर बिमुख जिआवसि मोही।।

  697. RCM 1.59.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहि न जाई कछु हृदय गलानी। मन महुँ रामाहि सुमिर सयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि न जाई कछु हृदय गलानी। मन महुँ रामाहि सुमिर सयानी।।

  698. RCM 1.59.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौ प्रभु दीनदयालु कहावा। आरती हरन बेद जसु गावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ प्रभु दीनदयालु कहावा। आरती हरन बेद जसु गावा।।

  699. RCM 1.59.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तौ मैं बिनय करउँ कर जोरी। छूटउ बेगि देह यह मोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ मैं बिनय करउँ कर जोरी। छूटउ बेगि देह यह मोरी।।

  700. RCM 1.59.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं मोरे सिव चरन सनेहू। मन क्रम बचन सत्य ब्रतु एहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं मोरे सिव चरन सनेहू। मन क्रम बचन सत्य ब्रतु एहू।।

  701. RCM 1.59.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तौ सबदरसी सुनिअ प्रभु करउ सो बेगि उपाइ।

    अर्थ (Hindi)

    तौ सबदरसी सुनिअ प्रभु करउ सो बेगि उपाइ।

  702. RCM 1.59.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    होइ मरनु जेही बिनहिं श्रम दुसह बिपत्ति बिहाइ।।59।।

    अर्थ (Hindi)

    होइ मरनु जेही बिनहिं श्रम दुसह बिपत्ति बिहाइ।।59।।

  703. RCM 1.60.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी। अकथनीय दारुन दुखु भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी। अकथनीय दारुन दुखु भारी।।

  704. RCM 1.60.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बीतें संबत सहस सतासी। तजी समाधि संभु अबिनासी।।

    अर्थ (Hindi)

    बीतें संबत सहस सतासी। तजी समाधि संभु अबिनासी।।

  705. RCM 1.60.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे।।

    अर्थ (Hindi)

    राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे।।

  706. RCM 1.60.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जाइ संभु पद बंदनु कीन्ही। सनमुख संकर आसनु दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ संभु पद बंदनु कीन्ही। सनमुख संकर आसनु दीन्हा।।

  707. RCM 1.60.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लगे कहन हरिकथा रसाला। दच्छ प्रजेस भए तेहि काला।।

    अर्थ (Hindi)

    लगे कहन हरिकथा रसाला। दच्छ प्रजेस भए तेहि काला।।

  708. RCM 1.60.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखा बिधि बिचारि सब लायक। दच्छहि कीन्ह प्रजापति नायक।।

    अर्थ (Hindi)

    देखा बिधि बिचारि सब लायक। दच्छहि कीन्ह प्रजापति नायक।।

  709. RCM 1.60.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बड़ अधिकार दच्छ जब पावा। अति अभिमानु हृदयँ तब आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    बड़ अधिकार दच्छ जब पावा। अति अभिमानु हृदयँ तब आवा।।

  710. RCM 1.60.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं।।

  711. RCM 1.60.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग।

    अर्थ (Hindi)

    दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग।

  712. RCM 1.60.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग।।60।।

    अर्थ (Hindi)

    नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग।।60।।

  713. RCM 1.61.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    किंनर नाग सिद्ध गंधर्बा। बधुन्ह समेत चले सुर सर्बा।।

    अर्थ (Hindi)

    किंनर नाग सिद्ध गंधर्बा। बधुन्ह समेत चले सुर सर्बा।।

  714. RCM 1.61.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिष्नु बिरंचि महेसु बिहाई। चले सकल सुर जान बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष्नु बिरंचि महेसु बिहाई। चले सकल सुर जान बनाई।।

  715. RCM 1.61.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सतीं बिलोके ब्योम बिमाना। जात चले सुंदर बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं बिलोके ब्योम बिमाना। जात चले सुंदर बिधि नाना।।

  716. RCM 1.61.4
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    सुर सुंदरी करहिं कल गाना। सुनत श्रवन छूटहिं मुनि ध्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर सुंदरी करहिं कल गाना। सुनत श्रवन छूटहिं मुनि ध्याना।।

  717. RCM 1.61.5
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    पूछेउ तब सिवँ कहेउ बखानी। पिता जग्य सुनि कछु हरषानी।।

    अर्थ (Hindi)

    पूछेउ तब सिवँ कहेउ बखानी। पिता जग्य सुनि कछु हरषानी।।

  718. RCM 1.61.6
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    जौं महेसु मोहि आयसु देहीं। कुछ दिन जाइ रहौं मिस एहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं महेसु मोहि आयसु देहीं। कुछ दिन जाइ रहौं मिस एहीं।।

  719. RCM 1.61.7
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    पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।।

  720. RCM 1.61.8
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    बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी।।

  721. RCM 1.61.9
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    पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।

    अर्थ (Hindi)

    पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।

  722. RCM 1.61.10
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    तौ मै जाउँ कृपायतन सादर देखन सोइ।।61।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ मै जाउँ कृपायतन सादर देखन सोइ।।61।।

  723. RCM 1.62.1
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    कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत पठावा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत पठावा।।

  724. RCM 1.62.2
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    दच्छ सकल निज सुता बोलाई। हमरें बयर तुम्हउ बिसराई।।

    अर्थ (Hindi)

    दच्छ सकल निज सुता बोलाई। हमरें बयर तुम्हउ बिसराई।।

  725. RCM 1.62.3
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    ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना।।

  726. RCM 1.62.4
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    जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी।।

  727. RCM 1.62.5
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    जदपि मित्र प्रभु पितु गुर गेहा। जाइअ बिनु बोलेहुँ न सँदेहा।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि मित्र प्रभु पितु गुर गेहा। जाइअ बिनु बोलेहुँ न सँदेहा।।

  728. RCM 1.62.6
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    तदपि बिरोध मान जहँ कोई। तहाँ गएँ कल्यानु न होई।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि बिरोध मान जहँ कोई। तहाँ गएँ कल्यानु न होई।।

  729. RCM 1.62.7
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    भाँति अनेक संभु समुझावा। भावी बस न ग्यानु उर आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    भाँति अनेक संभु समुझावा। भावी बस न ग्यानु उर आवा।।

  730. RCM 1.62.8
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    कह प्रभु जाहु जो बिनहिं बोलाएँ। नहिं भलि बात हमारे भाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    कह प्रभु जाहु जो बिनहिं बोलाएँ। नहिं भलि बात हमारे भाएँ।।

  731. RCM 1.62.9
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    कहि देखा हर जतन बहु रहइ न दच्छकुमारि।

    अर्थ (Hindi)

    कहि देखा हर जतन बहु रहइ न दच्छकुमारि।

  732. RCM 1.62.10
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    दिए मुख्य गन संग तब बिदा कीन्ह त्रिपुरारि।।62।।

    अर्थ (Hindi)

    दिए मुख्य गन संग तब बिदा कीन्ह त्रिपुरारि।।62।।

  733. RCM 1.63.1
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    पिता भवन जब गई भवानी। दच्छ त्रास काहुँ न सनमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    पिता भवन जब गई भवानी। दच्छ त्रास काहुँ न सनमानी।।

  734. RCM 1.63.2
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    सादर भलेहिं मिली एक माता। भगिनीं मिलीं बहुत मुसुकाता।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर भलेहिं मिली एक माता। भगिनीं मिलीं बहुत मुसुकाता।।

  735. RCM 1.63.3
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    दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।।

  736. RCM 1.63.4
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    सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा।।

  737. RCM 1.63.5
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    तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।।

  738. RCM 1.63.6
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    पाछिल दुखु न हृदयँ अस ब्यापा। जस यह भयउ महा परितापा।।

    अर्थ (Hindi)

    पाछिल दुखु न हृदयँ अस ब्यापा। जस यह भयउ महा परितापा।।

  739. RCM 1.63.7
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    जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।।

  740. RCM 1.63.8
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    समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा।।

  741. RCM 1.63.9
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    सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।

    अर्थ (Hindi)

    सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।

  742. RCM 1.63.10
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    सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध।।63।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध।।63।।

  743. RCM 1.64.1
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    सुनहु सभासद सकल मुनिंदा। कही सुनी जिन्ह संकर निंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु सभासद सकल मुनिंदा। कही सुनी जिन्ह संकर निंदा।।

  744. RCM 1.64.2
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    सो फलु तुरत लहब सब काहूँ। भली भाँति पछिताब पिताहूँ।।

    अर्थ (Hindi)

    सो फलु तुरत लहब सब काहूँ। भली भाँति पछिताब पिताहूँ।।

  745. RCM 1.64.3
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    संत संभु श्रीपति अपबादा। सुनिअ जहाँ तहँ असि मरजादा।।

    अर्थ (Hindi)

    संत संभु श्रीपति अपबादा। सुनिअ जहाँ तहँ असि मरजादा।।

  746. RCM 1.64.4
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    काटिअ तासु जीभ जो बसाई। श्रवन मूदि न त चलिअ पराई।।

    अर्थ (Hindi)

    काटिअ तासु जीभ जो बसाई। श्रवन मूदि न त चलिअ पराई।।

  747. RCM 1.64.5
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    जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी।।

  748. RCM 1.64.6
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    पिता मंदमति निंदत तेही। दच्छ सुक्र संभव यह देही।।

    अर्थ (Hindi)

    पिता मंदमति निंदत तेही। दच्छ सुक्र संभव यह देही।।

  749. RCM 1.64.7
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    तजिहउँ तुरत देह तेहि हेतू। उर धरि चंद्रमौलि बृषकेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    तजिहउँ तुरत देह तेहि हेतू। उर धरि चंद्रमौलि बृषकेतू।।

  750. RCM 1.64.8
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    अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा।।

  751. RCM 1.64.9
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    सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।

    अर्थ (Hindi)

    सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।

  752. RCM 1.64.10
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    जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस।।64।।

    अर्थ (Hindi)

    जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस।।64।।

  753. RCM 1.65.1
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    समाचार सब संकर पाए। बीरभद्रु करि कोप पठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    समाचार सब संकर पाए। बीरभद्रु करि कोप पठाए।।

  754. RCM 1.65.2
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    जग्य बिधंस जाइ तिन्ह कीन्हा। सकल सुरन्ह बिधिवत फलु दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    जग्य बिधंस जाइ तिन्ह कीन्हा। सकल सुरन्ह बिधिवत फलु दीन्हा।।

  755. RCM 1.65.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भे जगबिदित दच्छ गति सोई। जसि कछु संभु बिमुख कै होई।।

    अर्थ (Hindi)

    भे जगबिदित दच्छ गति सोई। जसि कछु संभु बिमुख कै होई।।

  756. RCM 1.65.4
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    यह इतिहास सकल जग जानी। ताते मैं संछेप बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    यह इतिहास सकल जग जानी। ताते मैं संछेप बखानी।।

  757. RCM 1.65.5
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    सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा।।

  758. RCM 1.65.6
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    तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई।।

  759. RCM 1.65.7
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    जब तें उमा सैल गृह जाईं। सकल सिद्धि संपति तहँ छाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जब तें उमा सैल गृह जाईं। सकल सिद्धि संपति तहँ छाई।।

  760. RCM 1.65.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ तहँ मुनिन्ह सुआश्रम कीन्हे। उचित बास हिम भूधर दीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ मुनिन्ह सुआश्रम कीन्हे। उचित बास हिम भूधर दीन्हे।।

  761. RCM 1.65.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सदा सुमन फल सहित सब द्रुम नव नाना जाति।

    अर्थ (Hindi)

    सदा सुमन फल सहित सब द्रुम नव नाना जाति।

  762. RCM 1.65.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रगटीं सुंदर सैल पर मनि आकर बहु भाँति।।65।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटीं सुंदर सैल पर मनि आकर बहु भाँति।।65।।

  763. RCM 1.66.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सरिता सब पुनित जलु बहहीं। खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सरिता सब पुनित जलु बहहीं। खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं।।

  764. RCM 1.66.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सहज बयरु सब जीवन्ह त्यागा। गिरि पर सकल करहिं अनुरागा।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज बयरु सब जीवन्ह त्यागा। गिरि पर सकल करहिं अनुरागा।।

  765. RCM 1.66.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ।।

  766. RCM 1.66.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नित नूतन मंगल गृह तासू। ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नूतन मंगल गृह तासू। ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू।।

  767. RCM 1.66.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नारद समाचार सब पाए। कौतुकहीं गिरि गेह सिधाए।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद समाचार सब पाए। कौतुकहीं गिरि गेह सिधाए।।

  768. RCM 1.66.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सैलराज बड़ आदर कीन्हा। पद पखारि बर आसनु दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    सैलराज बड़ आदर कीन्हा। पद पखारि बर आसनु दीन्हा।।

  769. RCM 1.66.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नारि सहित मुनि पद सिरु नावा। चरन सलिल सबु भवनु सिंचावा।।

    अर्थ (Hindi)

    नारि सहित मुनि पद सिरु नावा। चरन सलिल सबु भवनु सिंचावा।।

  770. RCM 1.66.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निज सौभाग्य बहुत गिरि बरना। सुता बोलि मेली मुनि चरना।।

    अर्थ (Hindi)

    निज सौभाग्य बहुत गिरि बरना। सुता बोलि मेली मुनि चरना।।

  771. RCM 1.66.9
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    त्रिकालग्य सर्बग्य तुम्ह गति सर्बत्र तुम्हारि।।

    अर्थ (Hindi)

    त्रिकालग्य सर्बग्य तुम्ह गति सर्बत्र तुम्हारि।।

  772. RCM 1.66.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहु सुता के दोष गुन मुनिबर हृदयँ बिचारि।।66।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु सुता के दोष गुन मुनिबर हृदयँ बिचारि।।66।।

  773. RCM 1.67.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह मुनि बिहसि गूढ़ मृदु बानी। सुता तुम्हारि सकल गुन खानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कह मुनि बिहसि गूढ़ मृदु बानी। सुता तुम्हारि सकल गुन खानी।।

  774. RCM 1.67.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी।।

  775. RCM 1.67.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी।।

  776. RCM 1.67.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता।।

    अर्थ (Hindi)

    सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता।।

  777. RCM 1.67.5
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    होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।

  778. RCM 1.67.6
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    एहि कर नामु सुमिरि संसारा। त्रिय चढ़हहिं पतिब्रत असिधारा।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि कर नामु सुमिरि संसारा। त्रिय चढ़हहिं पतिब्रत असिधारा।।

  779. RCM 1.67.7
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    सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।।

  780. RCM 1.67.8
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    अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना।।

    अर्थ (Hindi)

    अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना।।

  781. RCM 1.67.9
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    जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष।।

    अर्थ (Hindi)

    जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष।।

  782. RCM 1.67.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेख।।67।।

    अर्थ (Hindi)

    अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेख।।67।।

  783. RCM 1.68.1
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    सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।।

  784. RCM 1.68.2
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    नारदहुँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नारदहुँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना।।

  785. RCM 1.68.3
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    सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।।

  786. RCM 1.68.4
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    होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा।।

    अर्थ (Hindi)

    होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा।।

  787. RCM 1.68.5
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    उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।।

  788. RCM 1.68.6
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    जानि कुअवसरु प्रीति दुराई। सखी उछँग बैठी पुनि जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जानि कुअवसरु प्रीति दुराई। सखी उछँग बैठी पुनि जाई।।

  789. RCM 1.68.7
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    झूठि न होइ देवरिषि बानी। सोचहि दंपति सखीं सयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    झूठि न होइ देवरिषि बानी। सोचहि दंपति सखीं सयानी।।

  790. RCM 1.68.8
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    उर धरि धीर कहइ गिरिराऊ। कहहु नाथ का करिअ उपाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    उर धरि धीर कहइ गिरिराऊ। कहहु नाथ का करिअ उपाऊ।।

  791. RCM 1.68.9
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    कह मुनीस हिमवंत सुनु जो बिधि लिखा लिलार।

    अर्थ (Hindi)

    कह मुनीस हिमवंत सुनु जो बिधि लिखा लिलार।

  792. RCM 1.68.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देव दनुज नर नाग मुनि कोउ न मेटनिहार।।68।।

    अर्थ (Hindi)

    देव दनुज नर नाग मुनि कोउ न मेटनिहार।।68।।

  793. RCM 1.69.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तदपि एक मैं कहउँ उपाई। होइ करै जौं दैउ सहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि एक मैं कहउँ उपाई। होइ करै जौं दैउ सहाई।।

  794. RCM 1.69.2
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    जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।।

  795. RCM 1.69.3
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    जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।

    अर्थ (Hindi)

    जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।

  796. RCM 1.69.4
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    जौं बिबाहु संकर सन होई। दोषउ गुन सम कह सबु कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं बिबाहु संकर सन होई। दोषउ गुन सम कह सबु कोई।।

  797. RCM 1.69.5
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    जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।।

  798. RCM 1.69.6
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    भानु कृसानु सर्ब रस खाहीं। तिन्ह कहँ मंद कहत कोउ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    भानु कृसानु सर्ब रस खाहीं। तिन्ह कहँ मंद कहत कोउ नाहीं।।

  799. RCM 1.69.7
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    सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।।

  800. RCM 1.69.8
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    समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाई। रबि पावक सुरसरि की नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाई। रबि पावक सुरसरि की नाई।।

  801. RCM 1.69.9
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    जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान।

    अर्थ (Hindi)

    जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान।

  802. RCM 1.69.10
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    परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान।।69।।

    अर्थ (Hindi)

    परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान।।69।।

  803. RCM 1.70.1
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    सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।।

  804. RCM 1.70.2
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    सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें।।

  805. RCM 1.70.3
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    संभु सहज समरथ भगवाना। एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु सहज समरथ भगवाना। एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना।।

  806. RCM 1.70.4
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    दुराराध्य पै अहहिं महेसू। आसुतोष पुनि किएँ कलेसू।।

    अर्थ (Hindi)

    दुराराध्य पै अहहिं महेसू। आसुतोष पुनि किएँ कलेसू।।

  807. RCM 1.70.5
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    जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।।

  808. RCM 1.70.6
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    जद्यपि बर अनेक जग माहीं। एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जद्यपि बर अनेक जग माहीं। एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं।।

  809. RCM 1.70.7
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    बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।।

    अर्थ (Hindi)

    बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।।

  810. RCM 1.70.8
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    इच्छित फल बिनु सिव अवराधे। लहिअ न कोटि जोग जप साधें।।

    अर्थ (Hindi)

    इच्छित फल बिनु सिव अवराधे। लहिअ न कोटि जोग जप साधें।।

  811. RCM 1.70.9
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    अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि दीन्हि असीस।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि दीन्हि असीस।

  812. RCM 1.70.10
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    होइहि यह कल्यान अब संसय तजहु गिरीस।।70।।

    अर्थ (Hindi)

    होइहि यह कल्यान अब संसय तजहु गिरीस।।70।।

  813. RCM 1.71.1
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    कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ। आगिल चरित सुनहु जस भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ। आगिल चरित सुनहु जस भयऊ।।

  814. RCM 1.71.2
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    पतिहि एकांत पाइ कह मैना। नाथ न मैं समुझे मुनि बैना।।

    अर्थ (Hindi)

    पतिहि एकांत पाइ कह मैना। नाथ न मैं समुझे मुनि बैना।।

  815. RCM 1.71.3
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    जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।।

  816. RCM 1.71.4
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    न त कन्या बरु रहउ कुआरी। कंत उमा मम प्रानपिआरी।।

    अर्थ (Hindi)

    न त कन्या बरु रहउ कुआरी। कंत उमा मम प्रानपिआरी।।

  817. RCM 1.71.5
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    जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।।

  818. RCM 1.71.6
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    सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू। जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू। जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू।।

  819. RCM 1.71.7
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    अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।।

  820. RCM 1.71.8
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    बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं।।

  821. RCM 1.71.9
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    प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।

    अर्थ (Hindi)

    प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।

  822. RCM 1.71.10
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    पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान।।71।।

    अर्थ (Hindi)

    पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान।।71।।

  823. RCM 1.72.1
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    अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू। तौ अस जाइ सिखावन देहू।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू। तौ अस जाइ सिखावन देहू।।

  824. RCM 1.72.2
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    करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटहि कलेसू।।

    अर्थ (Hindi)

    करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटहि कलेसू।।

  825. RCM 1.72.3
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    नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।।

  826. RCM 1.72.4
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    अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका।।

  827. RCM 1.72.5
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    सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।।

  828. RCM 1.72.6
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    उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी।।

    अर्थ (Hindi)

    उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी।।

  829. RCM 1.72.7
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    बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।।

  830. RCM 1.72.8
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    जगत मातु सर्बग्य भवानी। मातु सुखद बोलीं मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जगत मातु सर्बग्य भवानी। मातु सुखद बोलीं मृदु बानी।।

  831. RCM 1.72.9
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    सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि।

  832. RCM 1.72.10
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    सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि।।72।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि।।72।।

  833. RCM 1.73.1
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    करहि जाइ तपु सैलकुमारी। नारद कहा सो सत्य बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करहि जाइ तपु सैलकुमारी। नारद कहा सो सत्य बिचारी।।

  834. RCM 1.73.2
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    मातु पितहि पुनि यह मत भावा। तपु सुखप्रद दुख दोष नसावा।।

    अर्थ (Hindi)

    मातु पितहि पुनि यह मत भावा। तपु सुखप्रद दुख दोष नसावा।।

  835. RCM 1.73.3
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    तपबल रचइ प्रपंच बिधाता। तपबल बिष्नु सकल जग त्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    तपबल रचइ प्रपंच बिधाता। तपबल बिष्नु सकल जग त्राता।।

  836. RCM 1.73.4
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    तपबल संभु करहिं संघारा। तपबल सेषु धरइ महिभारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तपबल संभु करहिं संघारा। तपबल सेषु धरइ महिभारा।।

  837. RCM 1.73.5
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    तप अधार सब सृष्टि भवानी। करहि जाइ तपु अस जियँ जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तप अधार सब सृष्टि भवानी। करहि जाइ तपु अस जियँ जानी।।

  838. RCM 1.73.6
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    सुनत बचन बिसमित महतारी। सपन सुनायउ गिरिहि हँकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन बिसमित महतारी। सपन सुनायउ गिरिहि हँकारी।।

  839. RCM 1.73.7
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    मातु पितुहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मातु पितुहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई।।

  840. RCM 1.73.8
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    प्रिय परिवार पिता अरु माता। भए बिकल मुख आव न बाता।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रिय परिवार पिता अरु माता। भए बिकल मुख आव न बाता।।

  841. RCM 1.73.9
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    बेदसिरा मुनि आइ तब सबहि कहा समुझाइ।।

    अर्थ (Hindi)

    बेदसिरा मुनि आइ तब सबहि कहा समुझाइ।।

  842. RCM 1.73.10
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    पारबती महिमा सुनत रहे प्रबोधहि पाइ।।73।।

    अर्थ (Hindi)

    पारबती महिमा सुनत रहे प्रबोधहि पाइ।।73।।

  843. RCM 1.74.1
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    उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना।।

    अर्थ (Hindi)

    उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना।।

  844. RCM 1.74.2
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    अति सुकुमार न तनु तप जोगू। पति पद सुमिरि तजेउ सबु भोगू।।

    अर्थ (Hindi)

    अति सुकुमार न तनु तप जोगू। पति पद सुमिरि तजेउ सबु भोगू।।

  845. RCM 1.74.3
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    नित नव चरन उपज अनुरागा। बिसरी देह तपहिं मनु लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नव चरन उपज अनुरागा। बिसरी देह तपहिं मनु लागा।।

  846. RCM 1.74.4
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    संबत सहस मूल फल खाए। सागु खाइ सत बरष गवाँए।।

    अर्थ (Hindi)

    संबत सहस मूल फल खाए। सागु खाइ सत बरष गवाँए।।

  847. RCM 1.74.5
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    कछु दिन भोजनु बारि बतासा। किए कठिन कछु दिन उपबासा।।

    अर्थ (Hindi)

    कछु दिन भोजनु बारि बतासा। किए कठिन कछु दिन उपबासा।।

  848. RCM 1.74.6
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    बेल पाती महि परइ सुखाई। तीनि सहस संबत सोई खाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बेल पाती महि परइ सुखाई। तीनि सहस संबत सोई खाई।।

  849. RCM 1.74.7
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    पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नाम तब भयउ अपरना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नाम तब भयउ अपरना।।

  850. RCM 1.74.8
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    देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा।।

  851. RCM 1.74.9
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    भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि।

  852. RCM 1.74.10
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    परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि।।74।।

    अर्थ (Hindi)

    परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि।।74।।

  853. RCM 1.75.1
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    अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।।

  854. RCM 1.75.2
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    अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी।।

  855. RCM 1.75.3
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    आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।।

  856. RCM 1.75.4
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    मिलहिं तुम्हहि जब सप्त रिषीसा। जानेहु तब प्रमान बागीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    मिलहिं तुम्हहि जब सप्त रिषीसा। जानेहु तब प्रमान बागीसा।।

  857. RCM 1.75.5
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    सुनत गिरा बिधि गगन बखानी। पुलक गात गिरिजा हरषानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत गिरा बिधि गगन बखानी। पुलक गात गिरिजा हरषानी।।

  858. RCM 1.75.6
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    उमा चरित सुंदर मैं गावा। सुनहु संभु कर चरित सुहावा।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा चरित सुंदर मैं गावा। सुनहु संभु कर चरित सुहावा।।

  859. RCM 1.75.7
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    जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।

    अर्थ (Hindi)

    जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।

  860. RCM 1.75.8
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    जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा।।

  861. RCM 1.75.9
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    चिदानन्द सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम।

    अर्थ (Hindi)

    चिदानन्द सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम।

  862. RCM 1.75.10
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    बिचरहिं महि धरि हृदयँ हरि सकल लोक अभिराम।।75।।

    अर्थ (Hindi)

    बिचरहिं महि धरि हृदयँ हरि सकल लोक अभिराम।।75।।

  863. RCM 1.76.1
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    कतहुँ मुनिन्ह उपदेसहिं ग्याना। कतहुँ राम गुन करहिं बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कतहुँ मुनिन्ह उपदेसहिं ग्याना। कतहुँ राम गुन करहिं बखाना।।

  864. RCM 1.76.2
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    जदपि अकाम तदपि भगवाना। भगत बिरह दुख दुखित सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि अकाम तदपि भगवाना। भगत बिरह दुख दुखित सुजाना।।

  865. RCM 1.76.3
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    एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती।।

  866. RCM 1.76.4
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    नैमु प्रेमु संकर कर देखा। अबिचल हृदयँ भगति कै रेखा।।

    अर्थ (Hindi)

    नैमु प्रेमु संकर कर देखा। अबिचल हृदयँ भगति कै रेखा।।

  867. RCM 1.76.5
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    प्रगटै रामु कृतग्य कृपाला। रूप सील निधि तेज बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटै रामु कृतग्य कृपाला। रूप सील निधि तेज बिसाला।।

  868. RCM 1.76.6
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    बहु प्रकार संकरहि सराहा। तुम्ह बिनु अस ब्रतु को निरबाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु प्रकार संकरहि सराहा। तुम्ह बिनु अस ब्रतु को निरबाहा।।

  869. RCM 1.76.7
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    बहुबिधि राम सिवहि समुझावा। पारबती कर जन्मु सुनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुबिधि राम सिवहि समुझावा। पारबती कर जन्मु सुनावा।।

  870. RCM 1.76.8
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    अति पुनीत गिरिजा कै करनी। बिस्तर सहित कृपानिधि बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    अति पुनीत गिरिजा कै करनी। बिस्तर सहित कृपानिधि बरनी।।

  871. RCM 1.76.9
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    अब बिनती मम सुनेहु सिव जौं मो पर निज नेहु।

    अर्थ (Hindi)

    अब बिनती मम सुनेहु सिव जौं मो पर निज नेहु।

  872. RCM 1.76.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु।।76।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु।।76।।

  873. RCM 1.77.1
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    कह सिव जदपि उचित अस नाहीं। नाथ बचन पुनि मेटि न जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कह सिव जदपि उचित अस नाहीं। नाथ बचन पुनि मेटि न जाहीं।।

  874. RCM 1.77.2
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    सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरमु यह नाथ हमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरमु यह नाथ हमारा।।

  875. RCM 1.77.3
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    मातु पिता गुर प्रभु कै बानी। बिनहिं बिचार करिअ सुभ जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मातु पिता गुर प्रभु कै बानी। बिनहिं बिचार करिअ सुभ जानी।।

  876. RCM 1.77.4
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    तुम्ह सब भाँति परम हितकारी। अग्या सिर पर नाथ तुम्हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह सब भाँति परम हितकारी। अग्या सिर पर नाथ तुम्हारी।।

  877. RCM 1.77.5
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    प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना।।

  878. RCM 1.77.6
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    कह प्रभु हर तुम्हार पन रहेऊ। अब उर राखेहु जो हम कहेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    कह प्रभु हर तुम्हार पन रहेऊ। अब उर राखेहु जो हम कहेऊ।।

  879. RCM 1.77.7
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    अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी।।

    अर्थ (Hindi)

    अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी।।

  880. RCM 1.77.8
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    तबहिं सप्तरिषि सिव पहिं आए। बोले प्रभु अति बचन सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तबहिं सप्तरिषि सिव पहिं आए। बोले प्रभु अति बचन सुहाए।।

  881. RCM 1.77.9
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    पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु।

    अर्थ (Hindi)

    पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु।

  882. RCM 1.77.10
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    गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु।।77।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु।।77।।

  883. RCM 1.78.1
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    रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी।।

    अर्थ (Hindi)

    रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी।।

  884. RCM 1.78.2
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    बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी।।

  885. RCM 1.78.3
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    केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू।।

    अर्थ (Hindi)

    केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू।।

  886. RCM 1.78.4
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    कहत बचत मनु अति सकुचाई। हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत बचत मनु अति सकुचाई। हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई।।

  887. RCM 1.78.5
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    मनु हठ परा न सुनइ सिखावा। चहत बारि पर भीति उठावा।।

    अर्थ (Hindi)

    मनु हठ परा न सुनइ सिखावा। चहत बारि पर भीति उठावा।।

  888. RCM 1.78.6
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    नारद कहा सत्य सोइ जाना। बिनु पंखन्ह हम चहहिं उड़ाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद कहा सत्य सोइ जाना। बिनु पंखन्ह हम चहहिं उड़ाना।।

  889. RCM 1.78.7
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    देखहु मुनि अबिबेकु हमारा। चाहिअ सदा सिवहि भरतारा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखहु मुनि अबिबेकु हमारा। चाहिअ सदा सिवहि भरतारा।।

  890. RCM 1.79.1
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    दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई।।

    अर्थ (Hindi)

    दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई।।

  891. RCM 1.79.2
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    चित्रकेतु कर घरु उन घाला। कनककसिपु कर पुनि अस हाला।।

    अर्थ (Hindi)

    चित्रकेतु कर घरु उन घाला। कनककसिपु कर पुनि अस हाला।।

  892. RCM 1.79.3
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    नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी।।

  893. RCM 1.79.4
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    मन कपटी तन सज्जन चीन्हा। आपु सरिस सबही चह कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    मन कपटी तन सज्जन चीन्हा। आपु सरिस सबही चह कीन्हा।।

  894. RCM 1.79.5
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    तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा।।

  895. RCM 1.79.6
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    निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली।।

    अर्थ (Hindi)

    निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली।।

  896. RCM 1.79.7
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    कहहु कवन सुखु अस बरु पाएँ। भल भूलिहु ठग के बौराएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु कवन सुखु अस बरु पाएँ। भल भूलिहु ठग के बौराएँ।।

  897. RCM 1.79.8
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    पंच कहें सिवँ सती बिबाही। पुनि अवडेरि मराएन्हि ताही।।

    अर्थ (Hindi)

    पंच कहें सिवँ सती बिबाही। पुनि अवडेरि मराएन्हि ताही।।

  898. RCM 1.79.9
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    अब सुख सोवत सोचु नहि भीख मागि भव खाहिं।

    अर्थ (Hindi)

    अब सुख सोवत सोचु नहि भीख मागि भव खाहिं।

  899. RCM 1.79.10
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    सहज एकाकिन्ह के भवन कबहुँ कि नारि खटाहिं।।79।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज एकाकिन्ह के भवन कबहुँ कि नारि खटाहिं।।79।।

  900. RCM 1.80.1
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    अजहूँ मानहु कहा हमारा। हम तुम्ह कहुँ बरु नीक बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    अजहूँ मानहु कहा हमारा। हम तुम्ह कहुँ बरु नीक बिचारा।।

  901. RCM 1.80.2
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    अति सुंदर सुचि सुखद सुसीला। गावहिं बेद जासु जस लीला।।

    अर्थ (Hindi)

    अति सुंदर सुचि सुखद सुसीला। गावहिं बेद जासु जस लीला।।

  902. RCM 1.80.3
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    दूषन रहित सकल गुन रासी। श्रीपति पुर बैकुंठ निवासी।।

    अर्थ (Hindi)

    दूषन रहित सकल गुन रासी। श्रीपति पुर बैकुंठ निवासी।।

  903. RCM 1.80.4
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    अस बरु तुम्हहि मिलाउब आनी। सुनत बिहसि कह बचन भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बरु तुम्हहि मिलाउब आनी। सुनत बिहसि कह बचन भवानी।।

  904. RCM 1.80.5
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    सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।।

  905. RCM 1.80.6
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    कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई।।

  906. RCM 1.80.7
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    नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।

  907. RCM 1.80.8
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    गुर कें बचन प्रतीति न जेही। सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर कें बचन प्रतीति न जेही। सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।

  908. RCM 1.80.9
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    महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।

    अर्थ (Hindi)

    महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।

  909. RCM 1.80.10
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    जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेही सन काम।।80।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेही सन काम।।80।।

  910. RCM 1.81.1
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    जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।।

  911. RCM 1.81.2
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    अब मैं जन्मु संभु हित हारा। को गुन दूषन करै बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    अब मैं जन्मु संभु हित हारा। को गुन दूषन करै बिचारा।।

  912. RCM 1.81.3
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    जौं तुम्हरे हठ हृदयँ बिसेषी। रहि न जाइ बिनु किएँ बरेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं तुम्हरे हठ हृदयँ बिसेषी। रहि न जाइ बिनु किएँ बरेषी।।

  913. RCM 1.81.4
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    तौ कौतुकिअन्ह आलसु नाहीं। बर कन्या अनेक जग माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ कौतुकिअन्ह आलसु नाहीं। बर कन्या अनेक जग माहीं।।

  914. RCM 1.81.5
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    जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी।।

    अर्थ (Hindi)

    जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी।।

  915. RCM 1.81.6
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    तजउँ न नारद कर उपदेसू। आपु कहहि सत बार महेसू।।

    अर्थ (Hindi)

    तजउँ न नारद कर उपदेसू। आपु कहहि सत बार महेसू।।

  916. RCM 1.81.7
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    मैं पा परउँ कहइ जगदंबा। तुम्ह गृह गवनहु भयउ बिलंबा।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं पा परउँ कहइ जगदंबा। तुम्ह गृह गवनहु भयउ बिलंबा।।

  917. RCM 1.81.8
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    देखि प्रेमु बोले मुनि ग्यानी। जय जय जगदंबिके भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि प्रेमु बोले मुनि ग्यानी। जय जय जगदंबिके भवानी।।

  918. RCM 1.81.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु।

  919. RCM 1.81.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु।।81।।

    अर्थ (Hindi)

    नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु।।81।।

  920. RCM 1.82.1
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    जाइ मुनिन्ह हिमवंतु पठाए। करि बिनती गिरजहिं गृह ल्याए।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ मुनिन्ह हिमवंतु पठाए। करि बिनती गिरजहिं गृह ल्याए।।

  921. RCM 1.82.2
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    बहुरि सप्तरिषि सिव पहिं जाई। कथा उमा कै सकल सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि सप्तरिषि सिव पहिं जाई। कथा उमा कै सकल सुनाई।।

  922. RCM 1.82.3
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    भए मगन सिव सुनत सनेहा। हरषि सप्तरिषि गवने गेहा।।

    अर्थ (Hindi)

    भए मगन सिव सुनत सनेहा। हरषि सप्तरिषि गवने गेहा।।

  923. RCM 1.82.4
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    मनु थिर करि तब संभु सुजाना। लगे करन रघुनायक ध्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    मनु थिर करि तब संभु सुजाना। लगे करन रघुनायक ध्याना।।

  924. RCM 1.82.5
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    तारकु असुर भयउ तेहि काला। भुज प्रताप बल तेज बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    तारकु असुर भयउ तेहि काला। भुज प्रताप बल तेज बिसाला।।

  925. RCM 1.82.6
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    तेंहि सब लोक लोकपति जीते। भए देव सुख संपति रीते।।

    अर्थ (Hindi)

    तेंहि सब लोक लोकपति जीते। भए देव सुख संपति रीते।।

  926. RCM 1.82.7
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    अजर अमर सो जीति न जाई। हारे सुर करि बिबिध लराई।।

    अर्थ (Hindi)

    अजर अमर सो जीति न जाई। हारे सुर करि बिबिध लराई।।

  927. RCM 1.82.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब बिरंचि सन जाइ पुकारे। देखे बिधि सब देव दुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    तब बिरंचि सन जाइ पुकारे। देखे बिधि सब देव दुखारे।।

  928. RCM 1.82.9
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    सब सन कहा बुझाइ बिधि दनुज निधन तब होइ।

    अर्थ (Hindi)

    सब सन कहा बुझाइ बिधि दनुज निधन तब होइ।

  929. RCM 1.82.10
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    संभु सुक्र संभूत सुत एहि जीतइ रन सोइ।।82।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु सुक्र संभूत सुत एहि जीतइ रन सोइ।।82।।

  930. RCM 1.83.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मोर कहा सुनि करहु उपाई। होइहि ईस्वर करिहि सहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मोर कहा सुनि करहु उपाई। होइहि ईस्वर करिहि सहाई।।

  931. RCM 1.83.2
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    सतीं जो तजी दच्छ मख देहा। जनमी जाइ हिमाचल गेहा।।

    अर्थ (Hindi)

    सतीं जो तजी दच्छ मख देहा। जनमी जाइ हिमाचल गेहा।।

  932. RCM 1.83.3
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    तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी। सिव समाधि बैठे सबु त्यागी।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी। सिव समाधि बैठे सबु त्यागी।।

  933. RCM 1.83.4
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    जदपि अहइ असमंजस भारी। तदपि बात एक सुनहु हमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि अहइ असमंजस भारी। तदपि बात एक सुनहु हमारी।।

  934. RCM 1.83.5
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    पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।।

  935. RCM 1.83.6
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    तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई।।

  936. RCM 1.83.7
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    एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।।

  937. RCM 1.83.8
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    अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू।।

  938. RCM 1.83.9
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    सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।

    अर्थ (Hindi)

    सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।

  939. RCM 1.83.10
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    संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार।।83।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार।।83।।

  940. RCM 1.84.1
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    तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।।

  941. RCM 1.84.2
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    पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही।।

  942. RCM 1.84.3
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    अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई।।

  943. RCM 1.84.4
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    चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा।।

  944. RCM 1.84.5
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    तब आपन प्रभाउ बिस्तारा। निज बस कीन्ह सकल संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब आपन प्रभाउ बिस्तारा। निज बस कीन्ह सकल संसारा।।

  945. RCM 1.84.6
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    कोपेउ जबहि बारिचरकेतू। छन महुँ मिटे सकल श्रुति सेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    कोपेउ जबहि बारिचरकेतू। छन महुँ मिटे सकल श्रुति सेतू।।

  946. RCM 1.84.7
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    ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना।।

  947. RCM 1.84.8
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    सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सब भागा।।

    अर्थ (Hindi)

    सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सब भागा।।

  948. RCM 1.85.1
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    सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा।।

    अर्थ (Hindi)

    सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा।।

  949. RCM 1.85.2
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    नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाई। संगम करहिं तलाव तलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाई। संगम करहिं तलाव तलाई।।

  950. RCM 1.85.3
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    जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी।।

  951. RCM 1.85.4
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    पसु पच्छी नभ जल थलचारी। भए कामबस समय बिसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    पसु पच्छी नभ जल थलचारी। भए कामबस समय बिसारी।।

  952. RCM 1.85.5
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    मदन अंध ब्याकुल सब लोका। निसि दिनु नहिं अवलोकहिं कोका।।

    अर्थ (Hindi)

    मदन अंध ब्याकुल सब लोका। निसि दिनु नहिं अवलोकहिं कोका।।

  953. RCM 1.85.6
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    देव दनुज नर किंनर ब्याला। प्रेत पिसाच भूत बेताला।।

    अर्थ (Hindi)

    देव दनुज नर किंनर ब्याला। प्रेत पिसाच भूत बेताला।।

  954. RCM 1.85.7
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    इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी।।

  955. RCM 1.85.8
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    सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी।।

  956. RCM 1.86.1
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    उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।।

  957. RCM 1.86.2
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    सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू।।

    अर्थ (Hindi)

    सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू।।

  958. RCM 1.86.3
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    भए तुरत सब जीव सुखारे। जिमि मद उतरि गएँ मतवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    भए तुरत सब जीव सुखारे। जिमि मद उतरि गएँ मतवारे।।

  959. RCM 1.86.4
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    रुद्रहि देखि मदन भय माना। दुराधरष दुर्गम भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    रुद्रहि देखि मदन भय माना। दुराधरष दुर्गम भगवाना।।

  960. RCM 1.86.5
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    फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।।

  961. RCM 1.86.6
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    प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा।।

  962. RCM 1.86.7
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    बन उपबन बापिका तड़ागा। परम सुभग सब दिसा बिभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    बन उपबन बापिका तड़ागा। परम सुभग सब दिसा बिभागा।।

  963. RCM 1.86.8
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    जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा। देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा। देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा।।

  964. RCM 1.87.1
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    देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।।

  965. RCM 1.87.2
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    सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने।।

  966. RCM 1.87.3
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    छाड़े बिषम बिसिख उर लागे। छुटि समाधि संभु तब जागे।।

    अर्थ (Hindi)

    छाड़े बिषम बिसिख उर लागे। छुटि समाधि संभु तब जागे।।

  967. RCM 1.87.4
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    भयउ ईस मन छोभु बिसेषी। नयन उघारि सकल दिसि देखी।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ ईस मन छोभु बिसेषी। नयन उघारि सकल दिसि देखी।।

  968. RCM 1.87.5
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    सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।।

    अर्थ (Hindi)

    सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।।

  969. RCM 1.87.6
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    तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा।।

  970. RCM 1.87.7
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    हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।।

  971. RCM 1.87.8
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    समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी।।

  972. RCM 1.88.1
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    जब जदुबंस कृष्न अवतारा। होइहि हरन महा महिभारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जब जदुबंस कृष्न अवतारा। होइहि हरन महा महिभारा।।

  973. RCM 1.88.2
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    कृष्न तनय होइहि पति तोरा। बचनु अन्यथा होइ न मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कृष्न तनय होइहि पति तोरा। बचनु अन्यथा होइ न मोरा।।

  974. RCM 1.88.3
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    रति गवनी सुनि संकर बानी। कथा अपर अब कहउँ बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रति गवनी सुनि संकर बानी। कथा अपर अब कहउँ बखानी।।

  975. RCM 1.88.4
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    देवन्ह समाचार सब पाए। ब्रह्मादिक बैकुंठ सिधाए।।

    अर्थ (Hindi)

    देवन्ह समाचार सब पाए। ब्रह्मादिक बैकुंठ सिधाए।।

  976. RCM 1.88.5
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    सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता।।

  977. RCM 1.88.6
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    पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा।।

    अर्थ (Hindi)

    पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा।।

  978. RCM 1.88.7
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    बोले कृपासिंधु बृषकेतू। कहहु अमर आए केहि हेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले कृपासिंधु बृषकेतू। कहहु अमर आए केहि हेतू।।

  979. RCM 1.88.8
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    कह बिधि तुम्ह प्रभु अंतरजामी। तदपि भगति बस बिनवउँ स्वामी।।

    अर्थ (Hindi)

    कह बिधि तुम्ह प्रभु अंतरजामी। तदपि भगति बस बिनवउँ स्वामी।।

  980. RCM 1.88.9
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    सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।

  981. RCM 1.88.10
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    निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु।।88।।

    अर्थ (Hindi)

    निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु।।88।।

  982. RCM 1.89.1
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    यह उत्सव देखिअ भरि लोचन। सोइ कछु करहु मदन मद मोचन।

    अर्थ (Hindi)

    यह उत्सव देखिअ भरि लोचन। सोइ कछु करहु मदन मद मोचन।

  983. RCM 1.89.2
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    कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा। कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा। कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा।।

  984. RCM 1.89.3
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    सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।।

  985. RCM 1.89.4
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    पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा।।

  986. RCM 1.89.5
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    सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।।

  987. RCM 1.89.6
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    तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई।।

  988. RCM 1.89.7
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    अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।।

  989. RCM 1.89.8
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    प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी।।

  990. RCM 1.89.9
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    कहा हमार न सुनेहु तब नारद कें उपदेस।

    अर्थ (Hindi)

    कहा हमार न सुनेहु तब नारद कें उपदेस।

  991. RCM 1.89.10
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    अब भा झूठ तुम्हार पन जारेउ कामु महेस।।89।।

    अर्थ (Hindi)

    अब भा झूठ तुम्हार पन जारेउ कामु महेस।।89।।

  992. RCM 1.90.1
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    सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी। उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी। उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी।।

  993. RCM 1.90.2
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    तुम्हरें जान कामु अब जारा। अब लगि संभु रहे सबिकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हरें जान कामु अब जारा। अब लगि संभु रहे सबिकारा।।

  994. RCM 1.90.3
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    हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।।

  995. RCM 1.90.4
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    जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी।।

  996. RCM 1.90.5
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    तौ हमार पन सुनहु मुनीसा। करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ हमार पन सुनहु मुनीसा। करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा।।

  997. RCM 1.90.6
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    तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा। सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा। सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा।।

  998. RCM 1.90.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।।

  999. RCM 1.90.8
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    गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई।।

  1000. RCM 1.90.9
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    हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।।

    अर्थ (Hindi)

    हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।।

  1001. RCM 1.90.10
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    चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास।।90।।

    अर्थ (Hindi)

    चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास।।90।।

  1002. RCM 1.91.1
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    सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा। मदन दहन सुनि अति दुखु पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा। मदन दहन सुनि अति दुखु पावा।।

  1003. RCM 1.91.2
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    बहुरि कहेउ रति कर बरदाना। सुनि हिमवंत बहुत सुखु माना।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि कहेउ रति कर बरदाना। सुनि हिमवंत बहुत सुखु माना।।

  1004. RCM 1.91.3
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    हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई। सादर मुनिबर लिए बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई। सादर मुनिबर लिए बोलाई।।

  1005. RCM 1.91.4
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    सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई। बेगि बेदबिधि लगन धराई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई। बेगि बेदबिधि लगन धराई।।

  1006. RCM 1.91.5
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    पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही। गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही। गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही।।

  1007. RCM 1.91.6
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    जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती। बाचत प्रीति न हृदयँ समाती।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती। बाचत प्रीति न हृदयँ समाती।।

  1008. RCM 1.91.7
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    लगन बाचि अज सबहि सुनाई। हरषे मुनि सब सुर समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    लगन बाचि अज सबहि सुनाई। हरषे मुनि सब सुर समुदाई।।

  1009. RCM 1.91.8
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    सुमन बृष्टि नभ बाजन बाजे। मंगल कलस दसहुँ दिसि साजे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमन बृष्टि नभ बाजन बाजे। मंगल कलस दसहुँ दिसि साजे।।

  1010. RCM 1.91.9
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    लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।

    अर्थ (Hindi)

    लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।

  1011. RCM 1.91.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    होहि सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान।।91।।

    अर्थ (Hindi)

    होहि सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान।।91।।

  1012. RCM 1.92.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा।।

  1013. RCM 1.92.2
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    कुंडल कंकन पहिरे ब्याला। तन बिभूति पट केहरि छाला।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंडल कंकन पहिरे ब्याला। तन बिभूति पट केहरि छाला।।

  1014. RCM 1.92.3
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    ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा।।

  1015. RCM 1.92.4
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    गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला।।

  1016. RCM 1.92.5
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    कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा।।

  1017. RCM 1.92.6
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    देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं। बर लायक दुलहिनि जग नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं। बर लायक दुलहिनि जग नाहीं।।

  1018. RCM 1.92.7
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    बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता। चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता। चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता।।

  1019. RCM 1.92.8
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    सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा।।

  1020. RCM 1.92.9
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    बिष्नु कहा अस बिहसि तब बोलि सकल दिसिराज।

    अर्थ (Hindi)

    बिष्नु कहा अस बिहसि तब बोलि सकल दिसिराज।

  1021. RCM 1.92.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिलग बिलग होइ चलहु सब निज निज सहित समाज।।92।।

    अर्थ (Hindi)

    बिलग बिलग होइ चलहु सब निज निज सहित समाज।।92।।

  1022. RCM 1.93.1
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    बर अनुहारि बरात न भाई। हँसी करैहहु पर पुर जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बर अनुहारि बरात न भाई। हँसी करैहहु पर पुर जाई।।

  1023. RCM 1.93.2
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    बिष्नु बचन सुनि सुर मुसकाने। निज निज सेन सहित बिलगाने।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष्नु बचन सुनि सुर मुसकाने। निज निज सेन सहित बिलगाने।।

  1024. RCM 1.93.3
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    मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।

  1025. RCM 1.93.4
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    अति प्रिय बचन सुनत प्रिय केरे। भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    अति प्रिय बचन सुनत प्रिय केरे। भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे।।

  1026. RCM 1.93.5
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    सिव अनुसासन सुनि सब आए। प्रभु पद जलज सीस तिन्ह नाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव अनुसासन सुनि सब आए। प्रभु पद जलज सीस तिन्ह नाए।।

  1027. RCM 1.93.6
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    नाना बाहन नाना बेषा। बिहसे सिव समाज निज देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना बाहन नाना बेषा। बिहसे सिव समाज निज देखा।।

  1028. RCM 1.93.7
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    कोउ मुखहीन बिपुल मुख काहू। बिनु पद कर कोउ बहु पद बाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ मुखहीन बिपुल मुख काहू। बिनु पद कर कोउ बहु पद बाहू।।

  1029. RCM 1.93.8
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    बिपुल नयन कोउ नयन बिहीना। रिष्टपुष्ट कोउ अति तनखीना।।

    अर्थ (Hindi)

    बिपुल नयन कोउ नयन बिहीना। रिष्टपुष्ट कोउ अति तनखीना।।

  1030. RCM 1.94.1
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    जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।।

    अर्थ (Hindi)

    जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।।

  1031. RCM 1.94.2
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    इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना।।

  1032. RCM 1.94.3
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    सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं।।

  1033. RCM 1.94.4
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    बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा।।

    अर्थ (Hindi)

    बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा।।

  1034. RCM 1.94.5
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    कामरूप सुंदर तन धारी। सहित समाज सहित बर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कामरूप सुंदर तन धारी। सहित समाज सहित बर नारी।।

  1035. RCM 1.94.6
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    गए सकल तुहिनाचल गेहा। गावहिं मंगल सहित सनेहा।।

    अर्थ (Hindi)

    गए सकल तुहिनाचल गेहा। गावहिं मंगल सहित सनेहा।।

  1036. RCM 1.94.7
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    प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए।।

  1037. RCM 1.94.8
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    पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई।।

  1038. RCM 1.95.1
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    नगर निकट बरात सुनि आई। पुर खरभरु सोभा अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नगर निकट बरात सुनि आई। पुर खरभरु सोभा अधिकाई।।

  1039. RCM 1.95.2
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    करि बनाव सजि बाहन नाना। चले लेन सादर अगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बनाव सजि बाहन नाना। चले लेन सादर अगवाना।।

  1040. RCM 1.95.3
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    हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी।।

  1041. RCM 1.95.4
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    सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे।।

  1042. RCM 1.95.5
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    धरि धीरजु तहँ रहे सयाने। बालक सब लै जीव पराने।।

    अर्थ (Hindi)

    धरि धीरजु तहँ रहे सयाने। बालक सब लै जीव पराने।।

  1043. RCM 1.95.6
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    गएँ भवन पूछहिं पितु माता। कहहिं बचन भय कंपित गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    गएँ भवन पूछहिं पितु माता। कहहिं बचन भय कंपित गाता।।

  1044. RCM 1.95.7
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    कहिअ काह कहि जाइ न बाता। जम कर धार किधौं बरिआता।।

    अर्थ (Hindi)

    कहिअ काह कहि जाइ न बाता। जम कर धार किधौं बरिआता।।

  1045. RCM 1.95.8
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    बरु बौराह बसहँ असवारा। ब्याल कपाल बिभूषन छारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बरु बौराह बसहँ असवारा। ब्याल कपाल बिभूषन छारा।।

  1046. RCM 1.96.1
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    लै अगवान बरातहि आए। दिए सबहि जनवास सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    लै अगवान बरातहि आए। दिए सबहि जनवास सुहाए।।

  1047. RCM 1.96.2
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    मैनाँ सुभ आरती सँवारी। संग सुमंगल गावहिं नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मैनाँ सुभ आरती सँवारी। संग सुमंगल गावहिं नारी।।

  1048. RCM 1.96.3
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    कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।।

  1049. RCM 1.96.4
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    बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।।

  1050. RCM 1.96.5
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    भागि भवन पैठीं अति त्रासा। गए महेसु जहाँ जनवासा।।

    अर्थ (Hindi)

    भागि भवन पैठीं अति त्रासा। गए महेसु जहाँ जनवासा।।

  1051. RCM 1.96.6
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    मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी। लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी। लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी।।

  1052. RCM 1.96.7
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    अधिक सनेहँ गोद बैठारी। स्याम सरोज नयन भरे बारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अधिक सनेहँ गोद बैठारी। स्याम सरोज नयन भरे बारी।।

  1053. RCM 1.96.8
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    जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा। तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा। तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा।।

  1054. RCM 1.96.9
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    कस कीन्ह बरु बौराह बिधि जेहिं तुम्हहि सुंदरता दई।

    अर्थ (Hindi)

    कस कीन्ह बरु बौराह बिधि जेहिं तुम्हहि सुंदरता दई।

  1055. RCM 1.96.10
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    जो फलु चहिअ सुरतरुहिं सो बरबस बबूरहिं लागई।।

    अर्थ (Hindi)

    जो फलु चहिअ सुरतरुहिं सो बरबस बबूरहिं लागई।।

  1056. RCM 1.96.11
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    तुम्ह सहित गिरि तें गिरौं पावक जरौं जलनिधि महुँ परौं।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह सहित गिरि तें गिरौं पावक जरौं जलनिधि महुँ परौं।।

  1057. RCM 1.96.12
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    घरु जाउ अपजसु होउ जग जीवत बिबाहु न हौं करौं।।

    अर्थ (Hindi)

    घरु जाउ अपजसु होउ जग जीवत बिबाहु न हौं करौं।।

  1058. RCM 1.96.13
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    भई बिकल अबला सकल दुखित देखि गिरिनारि।

    अर्थ (Hindi)

    भई बिकल अबला सकल दुखित देखि गिरिनारि।

  1059. RCM 1.96.14
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    करि बिलापु रोदति बदति सुता सनेहु सँभारि।।96।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बिलापु रोदति बदति सुता सनेहु सँभारि।।96।।

  1060. RCM 1.97.1
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    नारद कर मैं काह बिगारा। भवनु मोर जिन्ह बसत उजारा।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद कर मैं काह बिगारा। भवनु मोर जिन्ह बसत उजारा।।

  1061. RCM 1.97.2
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    अस उपदेसु उमहि जिन्ह दीन्हा। बौरे बरहि लगि तपु कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस उपदेसु उमहि जिन्ह दीन्हा। बौरे बरहि लगि तपु कीन्हा।।

  1062. RCM 1.97.3
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    साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया।।

    अर्थ (Hindi)

    साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया।।

  1063. RCM 1.97.4
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    पर घर घालक लाज न भीरा। बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    पर घर घालक लाज न भीरा। बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा।।

  1064. RCM 1.97.5
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    जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।।

  1065. RCM 1.97.6
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    अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता।।

  1066. RCM 1.97.7
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    करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।

  1067. RCM 1.97.8
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    तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका।।

  1068. RCM 1.98.1
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    तब नारद सबहि समुझावा। पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब नारद सबहि समुझावा। पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा।।

  1069. RCM 1.98.2
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    मयना सत्य सुनहु मम बानी। जगदंबा तव सुता भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मयना सत्य सुनहु मम बानी। जगदंबा तव सुता भवानी।।

  1070. RCM 1.98.3
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    अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।।

  1071. RCM 1.98.4
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    जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि।।

  1072. RCM 1.98.5
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    जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई। नामु सती सुंदर तनु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई। नामु सती सुंदर तनु पाई।।

  1073. RCM 1.98.6
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    तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं। कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं। कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं।।

  1074. RCM 1.98.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।।

  1075. RCM 1.98.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा।।

  1076. RCM 1.99.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब मयना हिमवंतु अनंदे। पुनि पुनि पारबती पद बंदे।।

    अर्थ (Hindi)

    तब मयना हिमवंतु अनंदे। पुनि पुनि पारबती पद बंदे।।

  1077. RCM 1.99.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नारि पुरुष सिसु जुबा सयाने। नगर लोग सब अति हरषाने।।

    अर्थ (Hindi)

    नारि पुरुष सिसु जुबा सयाने। नगर लोग सब अति हरषाने।।

  1078. RCM 1.99.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लगे होन पुर मंगलगाना। सजे सबहि हाटक घट नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    लगे होन पुर मंगलगाना। सजे सबहि हाटक घट नाना।।

  1079. RCM 1.99.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भाँति अनेक भई जेवराना। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा।।

    अर्थ (Hindi)

    भाँति अनेक भई जेवराना। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा।।

  1080. RCM 1.99.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो जेवनार कि जाइ बखानी। बसहिं भवन जेहिं मातु भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सो जेवनार कि जाइ बखानी। बसहिं भवन जेहिं मातु भवानी।।

  1081. RCM 1.99.6
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    सादर बोले सकल बराती। बिष्नु बिरंचि देव सब जाती।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर बोले सकल बराती। बिष्नु बिरंचि देव सब जाती।।

  1082. RCM 1.99.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।।

  1083. RCM 1.99.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी।।

  1084. RCM 1.100.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बोलि सकल सुर सादर लीन्हे। सबहि जथोचित आसन दीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    बोलि सकल सुर सादर लीन्हे। सबहि जथोचित आसन दीन्हे।।

  1085. RCM 1.100.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बेदी बेद बिधान सँवारी। सुभग सुमंगल गावहिं नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बेदी बेद बिधान सँवारी। सुभग सुमंगल गावहिं नारी।।

  1086. RCM 1.100.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।।

  1087. RCM 1.100.4
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    बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई।।

  1088. RCM 1.100.5
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    बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाई। करि सिंगारु सखीं लै आई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाई। करि सिंगारु सखीं लै आई।।

  1089. RCM 1.100.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखत रूपु सकल सुर मोहे। बरनै छबि अस जग कबि को है।।

    अर्थ (Hindi)

    देखत रूपु सकल सुर मोहे। बरनै छबि अस जग कबि को है।।

  1090. RCM 1.100.7
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    जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।।

    अर्थ (Hindi)

    जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।।

  1091. RCM 1.100.8
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    सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी।।

  1092. RCM 1.101.1
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    जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।।

  1093. RCM 1.101.2
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    गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी।।

  1094. RCM 1.101.3
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    पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।।

  1095. RCM 1.101.4
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    बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं।।

  1096. RCM 1.101.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना।।

  1097. RCM 1.101.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू।।

  1098. RCM 1.101.7
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    दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा।।

  1099. RCM 1.101.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना।।

  1100. RCM 1.102.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।।

  1101. RCM 1.102.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही।।

  1102. RCM 1.102.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।।

    अर्थ (Hindi)

    करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।।

  1103. RCM 1.102.4
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    बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी।।

  1104. RCM 1.102.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।।

  1105. RCM 1.102.6
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    भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।।

  1106. RCM 1.102.7
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    पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।।

  1107. RCM 1.102.8
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    सब नारिन्ह मिलि भेटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब नारिन्ह मिलि भेटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी।।

  1108. RCM 1.103.1
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    तुरत भवन आए गिरिराई। सकल सैल सर लिए बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत भवन आए गिरिराई। सकल सैल सर लिए बोलाई।।

  1109. RCM 1.103.2
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    आदर दान बिनय बहुमाना। सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    आदर दान बिनय बहुमाना। सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना।।

  1110. RCM 1.103.3
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    जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।।

  1111. RCM 1.103.4
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    जगत मातु पितु संभु भवानी। तेही सिंगारु न कहउँ बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जगत मातु पितु संभु भवानी। तेही सिंगारु न कहउँ बखानी।।

  1112. RCM 1.103.5
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    करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।

  1113. RCM 1.103.6
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    हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।।

  1114. RCM 1.103.7
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    तब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुर समर जेहिं मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुर समर जेहिं मारा।।

  1115. RCM 1.103.8
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    आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना।।

  1116. RCM 1.104.1
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    संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।।

  1117. RCM 1.104.2
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    बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी।।

  1118. RCM 1.104.3
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    प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।।

  1119. RCM 1.104.4
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    अहो धन्य तव जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    अहो धन्य तव जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा।।

  1120. RCM 1.104.5
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    सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।

  1121. RCM 1.104.6
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    बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।।

  1122. RCM 1.104.7
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    सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।।

  1123. RCM 1.104.8
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    पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई।।

  1124. RCM 1.104.9
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    प्रथमहिं मै कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथमहिं मै कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।

  1125. RCM 1.104.10
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    सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार।।104।।

    अर्थ (Hindi)

    सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार।।104।।

  1126. RCM 1.105.1
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    मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला।।

  1127. RCM 1.105.2
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    सुनु मुनि आजु समागम तोरें। कहि न जाइ जस सुखु मन मोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मुनि आजु समागम तोरें। कहि न जाइ जस सुखु मन मोरें।।

  1128. RCM 1.105.3
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    राम चरित अति अमित मुनिसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम चरित अति अमित मुनिसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा।।

  1129. RCM 1.105.4
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    तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी।।

  1130. RCM 1.105.5
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    सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी।।

    अर्थ (Hindi)

    सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी।।

  1131. RCM 1.105.6
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    जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी।।

  1132. RCM 1.105.7
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    प्रनवउँ सोइ कृपाल रघुनाथा। बरनउँ बिसद तासु गुन गाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रनवउँ सोइ कृपाल रघुनाथा। बरनउँ बिसद तासु गुन गाथा।।

  1133. RCM 1.105.8
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    परम रम्य गिरिबरु कैलासू। सदा जहाँ सिव उमा निवासू।।

    अर्थ (Hindi)

    परम रम्य गिरिबरु कैलासू। सदा जहाँ सिव उमा निवासू।।

  1134. RCM 1.105.9
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    सिद्ध तपोधन जोगिजन सूर किंनर मुनिबृंद।

    अर्थ (Hindi)

    सिद्ध तपोधन जोगिजन सूर किंनर मुनिबृंद।

  1135. RCM 1.105.10
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    बसहिं तहाँ सुकृती सकल सेवहिं सिब सुखकंद।।105।।

    अर्थ (Hindi)

    बसहिं तहाँ सुकृती सकल सेवहिं सिब सुखकंद।।105।।

  1136. RCM 1.106.1
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    हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं।।

  1137. RCM 1.106.2
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    तेहि गिरि पर बट बिटप बिसाला। नित नूतन सुंदर सब काला।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि गिरि पर बट बिटप बिसाला। नित नूतन सुंदर सब काला।।

  1138. RCM 1.106.3
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    त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया।।

    अर्थ (Hindi)

    त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया।।

  1139. RCM 1.106.4
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    एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ। तरु बिलोकि उर अति सुखु भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ। तरु बिलोकि उर अति सुखु भयऊ।।

  1140. RCM 1.106.5
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    निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठै सहजहिं संभु कृपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठै सहजहिं संभु कृपाला।।

  1141. RCM 1.106.6
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    कुंद इंदु दर गौर सरीरा। भुज प्रलंब परिधन मुनिचीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंद इंदु दर गौर सरीरा। भुज प्रलंब परिधन मुनिचीरा।।

  1142. RCM 1.106.7
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    तरुन अरुन अंबुज सम चरना। नख दुति भगत हृदय तम हरना।।

    अर्थ (Hindi)

    तरुन अरुन अंबुज सम चरना। नख दुति भगत हृदय तम हरना।।

  1143. RCM 1.106.8
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    भुजग भूति भूषन त्रिपुरारी। आननु सरद चंद छबि हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भुजग भूति भूषन त्रिपुरारी। आननु सरद चंद छबि हारी।।

  1144. RCM 1.106.9
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    जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।

    अर्थ (Hindi)

    जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।

  1145. RCM 1.106.10
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    नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल।।106।।

    अर्थ (Hindi)

    नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल।।106।।

  1146. RCM 1.107.1
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    बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें।।

  1147. RCM 1.107.2
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    पारबती भल अवसरु जानी। गई संभु पहिं मातु भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    पारबती भल अवसरु जानी। गई संभु पहिं मातु भवानी।।

  1148. RCM 1.107.3
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    जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा।।

  1149. RCM 1.107.4
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    बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई।।

    अर्थ (Hindi)

    बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई।।

  1150. RCM 1.107.5
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    पति हियँ हेतु अधिक अनुमानी। बिहसि उमा बोलीं प्रिय बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    पति हियँ हेतु अधिक अनुमानी। बिहसि उमा बोलीं प्रिय बानी।।

  1151. RCM 1.107.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कथा जो सकल लोक हितकारी। सोइ पूछन चह सैलकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कथा जो सकल लोक हितकारी। सोइ पूछन चह सैलकुमारी।।

  1152. RCM 1.107.7
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    बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।

  1153. RCM 1.107.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा।।

  1154. RCM 1.107.9
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    प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।।

  1155. RCM 1.107.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम।।107।।

    अर्थ (Hindi)

    जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम।।107।।

  1156. RCM 1.108.1
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    जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी।।

  1157. RCM 1.108.2
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    तौं प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तौं प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना।।

  1158. RCM 1.108.3
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    जासु भवनु सुरतरु तर होई। सहि कि दरिद्र जनित दुखु सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु भवनु सुरतरु तर होई। सहि कि दरिद्र जनित दुखु सोई।।

  1159. RCM 1.108.4
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    ससिभूषन अस हृदयँ बिचारी। हरहु नाथ मम मति भ्रम भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    ससिभूषन अस हृदयँ बिचारी। हरहु नाथ मम मति भ्रम भारी।।

  1160. RCM 1.108.5
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    प्रभु जे मुनि परमारथबादी। कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु जे मुनि परमारथबादी। कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी।।

  1161. RCM 1.108.6
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    सेस सारदा बेद पुराना। सकल करहिं रघुपति गुन गाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सेस सारदा बेद पुराना। सकल करहिं रघुपति गुन गाना।।

  1162. RCM 1.108.7
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    तुम्ह पुनि राम राम दिन राती। सादर जपहु अनँग आराती।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह पुनि राम राम दिन राती। सादर जपहु अनँग आराती।।

  1163. RCM 1.108.8
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    रामु सो अवध नृपति सुत सोई। की अज अगुन अलखगति कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु सो अवध नृपति सुत सोई। की अज अगुन अलखगति कोई।।

  1164. RCM 1.108.9
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    जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि।

    अर्थ (Hindi)

    जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि।

  1165. RCM 1.108.10
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    देख चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि।।108।।

    अर्थ (Hindi)

    देख चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि।।108।।

  1166. RCM 1.109.1
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    जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कबहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कबहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ।।

  1167. RCM 1.109.2
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    अग्य जानि रिस उर जनि धरहू। जेहि बिधि मोह मिटै सोइ करहू।।

    अर्थ (Hindi)

    अग्य जानि रिस उर जनि धरहू। जेहि बिधि मोह मिटै सोइ करहू।।

  1168. RCM 1.109.3
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    मै बन दीखि राम प्रभुताई। अति भय बिकल न तुम्हहि सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मै बन दीखि राम प्रभुताई। अति भय बिकल न तुम्हहि सुनाई।।

  1169. RCM 1.109.4
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    तदपि मलिन मन बोधु न आवा। सो फलु भली भाँति हम पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि मलिन मन बोधु न आवा। सो फलु भली भाँति हम पावा।।

  1170. RCM 1.109.5
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    अजहूँ कछु संसउ मन मोरे। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    अजहूँ कछु संसउ मन मोरे। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें।।

  1171. RCM 1.109.6
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    प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा। नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा। नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा।।

  1172. RCM 1.109.7
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    तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं।।

  1173. RCM 1.109.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा।।

  1174. RCM 1.109.9
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    बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।

  1175. RCM 1.109.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि।।109।।

    अर्थ (Hindi)

    बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि।।109।।

  1176. RCM 1.110.1
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    जदपि जोषिता नहिं अधिकारी। दासी मन क्रम बचन तुम्हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि जोषिता नहिं अधिकारी। दासी मन क्रम बचन तुम्हारी।।

  1177. RCM 1.110.2
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    गूढ़उ तत्व न साधु दुरावहिं। आरत अधिकारी जहँ पावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    गूढ़उ तत्व न साधु दुरावहिं। आरत अधिकारी जहँ पावहिं।।

  1178. RCM 1.110.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अति आरति पूछउँ सुरराया। रघुपति कथा कहहु करि दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    अति आरति पूछउँ सुरराया। रघुपति कथा कहहु करि दाया।।

  1179. RCM 1.110.4
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    प्रथम सो कारन कहहु बिचारी। निर्गुन ब्रह्म सगुन बपु धारी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथम सो कारन कहहु बिचारी। निर्गुन ब्रह्म सगुन बपु धारी।।

  1180. RCM 1.110.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा।।

  1181. RCM 1.110.6
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    कहहु जथा जानकी बिबाहीं। राज तजा सो दूषन काहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु जथा जानकी बिबाहीं। राज तजा सो दूषन काहीं।।

  1182. RCM 1.110.7
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    बन बसि कीन्हे चरित अपारा। कहहु नाथ जिमि रावन मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बन बसि कीन्हे चरित अपारा। कहहु नाथ जिमि रावन मारा।।

  1183. RCM 1.110.8
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    राज बैठि कीन्हीं बहु लीला। सकल कहहु संकर सुखलीला।।

    अर्थ (Hindi)

    राज बैठि कीन्हीं बहु लीला। सकल कहहु संकर सुखलीला।।

  1184. RCM 1.110.9
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    बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।

  1185. RCM 1.110.10
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    प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम।।110।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम।।110।।

  1186. RCM 1.111.1
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    पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी। जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी। जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी।।

  1187. RCM 1.111.2
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    भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। पुनि सब बरनहु सहित बिभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। पुनि सब बरनहु सहित बिभागा।।

  1188. RCM 1.111.3
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    औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका।।

    अर्थ (Hindi)

    औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका।।

  1189. RCM 1.111.4
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    जो प्रभु मैं पूछा नहि होई। सोउ दयाल राखहु जनि गोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जो प्रभु मैं पूछा नहि होई। सोउ दयाल राखहु जनि गोई।।

  1190. RCM 1.111.5
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    तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना।।

  1191. RCM 1.111.6
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    प्रस्न उमा कै सहज सुहाई। छल बिहीन सुनि सिव मन भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रस्न उमा कै सहज सुहाई। छल बिहीन सुनि सिव मन भाई।।

  1192. RCM 1.111.7
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    हर हियँ रामचरित सब आए। प्रेम पुलक लोचन जल छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    हर हियँ रामचरित सब आए। प्रेम पुलक लोचन जल छाए।।

  1193. RCM 1.111.8
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    श्रीरघुनाथ रूप उर आवा। परमानंद अमित सुख पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रीरघुनाथ रूप उर आवा। परमानंद अमित सुख पावा।।

  1194. RCM 1.111.9
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    मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह।

    अर्थ (Hindi)

    मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह।

  1195. RCM 1.111.10
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    रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह।।111।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह।।111।।

  1196. RCM 1.112.1
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    झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें। जिमि भुजंग बिनु रजु पहिचानें।।

    अर्थ (Hindi)

    झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें। जिमि भुजंग बिनु रजु पहिचानें।।

  1197. RCM 1.112.2
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    जेहि जानें जग जाइ हेराई। जागें जथा सपन भ्रम जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि जानें जग जाइ हेराई। जागें जथा सपन भ्रम जाई।।

  1198. RCM 1.112.3
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    बंदउँ बालरूप सोई रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदउँ बालरूप सोई रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू।।

  1199. RCM 1.112.4
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    मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।

  1200. RCM 1.112.5
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    करि प्रनाम रामहि त्रिपुरारी। हरषि सुधा सम गिरा उचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करि प्रनाम रामहि त्रिपुरारी। हरषि सुधा सम गिरा उचारी।।

  1201. RCM 1.112.6
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    धन्य धन्य गिरिराजकुमारी। तुम्ह समान नहिं कोउ उपकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    धन्य धन्य गिरिराजकुमारी। तुम्ह समान नहिं कोउ उपकारी।।

  1202. RCM 1.112.7
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    पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा। सकल लोक जग पावनि गंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा। सकल लोक जग पावनि गंगा।।

  1203. RCM 1.112.8
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    तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी। कीन्हहु प्रस्न जगत हित लागी।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी। कीन्हहु प्रस्न जगत हित लागी।।

  1204. RCM 1.112.9
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    रामकृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं।

    अर्थ (Hindi)

    रामकृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं।

  1205. RCM 1.112.10
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    सोक मोह संदेह भ्रम मम बिचार कछु नाहिं।।112।।

    अर्थ (Hindi)

    सोक मोह संदेह भ्रम मम बिचार कछु नाहिं।।112।।

  1206. RCM 1.113.1
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    तदपि असंका कीन्हिहु सोई। कहत सुनत सब कर हित होई।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि असंका कीन्हिहु सोई। कहत सुनत सब कर हित होई।।

  1207. RCM 1.113.2
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    जिन्ह हरि कथा सुनी नहिं काना। श्रवन रंध्र अहिभवन समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह हरि कथा सुनी नहिं काना। श्रवन रंध्र अहिभवन समाना।।

  1208. RCM 1.113.3
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    नयनन्हि संत दरस नहिं देखा। लोचन मोरपंख कर लेखा।।

    अर्थ (Hindi)

    नयनन्हि संत दरस नहिं देखा। लोचन मोरपंख कर लेखा।।

  1209. RCM 1.113.4
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    ते सिर कटु तुंबरि समतूला। जे न नमत हरि गुर पद मूला।।

    अर्थ (Hindi)

    ते सिर कटु तुंबरि समतूला। जे न नमत हरि गुर पद मूला।।

  1210. RCM 1.113.5
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    जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी।।

  1211. RCM 1.113.6
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    जो नहिं करइ राम गुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जो नहिं करइ राम गुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।।

  1212. RCM 1.113.7
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    कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती।।

    अर्थ (Hindi)

    कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती।।

  1213. RCM 1.113.8
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    गिरिजा सुनहु राम कै लीला। सुर हित दनुज बिमोहनसीला।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरिजा सुनहु राम कै लीला। सुर हित दनुज बिमोहनसीला।।

  1214. RCM 1.113.9
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    रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि।

  1215. RCM 1.113.10
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    सतसमाज सुरलोक सब को न सुनै अस जानि।।113।।

    अर्थ (Hindi)

    सतसमाज सुरलोक सब को न सुनै अस जानि।।113।।

  1216. RCM 1.114.1
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    रामकथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उडावनिहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उडावनिहारी।।

  1217. RCM 1.114.2
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    रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी।।

  1218. RCM 1.114.3
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    राम नाम गुन चरित सुहाए। जनम करम अगनित श्रुति गाए।।

    अर्थ (Hindi)

    राम नाम गुन चरित सुहाए। जनम करम अगनित श्रुति गाए।।

  1219. RCM 1.114.4
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    जथा अनंत राम भगवाना। तथा कथा कीरति गुन नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जथा अनंत राम भगवाना। तथा कथा कीरति गुन नाना।।

  1220. RCM 1.114.5
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    तदपि जथा श्रुत जसि मति मोरी। कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि जथा श्रुत जसि मति मोरी। कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी।।

  1221. RCM 1.114.6
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    उमा प्रस्न तव सहज सुहाई। सुखद संतसंमत मोहि भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा प्रस्न तव सहज सुहाई। सुखद संतसंमत मोहि भाई।।

  1222. RCM 1.114.7
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    एक बात नहि मोहि सोहानी। जदपि मोह बस कहेहु भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बात नहि मोहि सोहानी। जदपि मोह बस कहेहु भवानी।।

  1223. RCM 1.114.8
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    तुम जो कहा राम कोउ आना। जेहि श्रुति गाव धरहिं मुनि ध्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम जो कहा राम कोउ आना। जेहि श्रुति गाव धरहिं मुनि ध्याना।।

  1224. RCM 1.114.9
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    कहहि सुनहि अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच।

    अर्थ (Hindi)

    कहहि सुनहि अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच।

  1225. RCM 1.114.10
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    पाषंडी हरि पद बिमुख जानहिं झूठ न साच।।114।।

    अर्थ (Hindi)

    पाषंडी हरि पद बिमुख जानहिं झूठ न साच।।114।।

  1226. RCM 1.115.1
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    अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकर मन लागी।।

    अर्थ (Hindi)

    अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकर मन लागी।।

  1227. RCM 1.115.2
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    लंपट कपटी कुटिल बिसेषी। सपनेहुँ संतसभा नहिं देखी।।

    अर्थ (Hindi)

    लंपट कपटी कुटिल बिसेषी। सपनेहुँ संतसभा नहिं देखी।।

  1228. RCM 1.115.3
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    कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी।।

  1229. RCM 1.115.4
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    मुकर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना।।

    अर्थ (Hindi)

    मुकर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना।।

  1230. RCM 1.115.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका। जल्पहिं कल्पित बचन अनेका।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका। जल्पहिं कल्पित बचन अनेका।।

  1231. RCM 1.115.6
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    हरिमाया बस जगत भ्रमाहीं। तिन्हहि कहत कछु अघटित नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    हरिमाया बस जगत भ्रमाहीं। तिन्हहि कहत कछु अघटित नाहीं।।

  1232. RCM 1.115.7
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    बातुल भूत बिबस मतवारे। ते नहिं बोलहिं बचन बिचारे।।

    अर्थ (Hindi)

    बातुल भूत बिबस मतवारे। ते नहिं बोलहिं बचन बिचारे।।

  1233. RCM 1.115.8
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    जिन्ह कृत महामोह मद पाना। तिन् कर कहा करिअ नहिं काना।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह कृत महामोह मद पाना। तिन् कर कहा करिअ नहिं काना।।

  1234. RCM 1.115.9
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    अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद।

    अर्थ (Hindi)

    अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद।

  1235. RCM 1.115.10
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    सुनु गिरिराज कुमारि भ्रम तम रबि कर बचन मम।।115।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु गिरिराज कुमारि भ्रम तम रबि कर बचन मम।।115।।

  1236. RCM 1.116.1
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    सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।

    अर्थ (Hindi)

    सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।

  1237. RCM 1.116.2
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    अगुन अरुप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।

    अर्थ (Hindi)

    अगुन अरुप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।

  1238. RCM 1.116.3
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    जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें। जलु हिम उपल बिलग नहिं जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें। जलु हिम उपल बिलग नहिं जैसें।।

  1239. RCM 1.116.4
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    जासु नाम भ्रम तिमिर पतंगा। तेहि किमि कहिअ बिमोह प्रसंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु नाम भ्रम तिमिर पतंगा। तेहि किमि कहिअ बिमोह प्रसंगा।।

  1240. RCM 1.116.5
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    राम सच्चिदानंद दिनेसा। नहिं तहँ मोह निसा लवलेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सच्चिदानंद दिनेसा। नहिं तहँ मोह निसा लवलेसा।।

  1241. RCM 1.116.6
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    सहज प्रकासरुप भगवाना। नहिं तहँ पुनि बिग्यान बिहाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज प्रकासरुप भगवाना। नहिं तहँ पुनि बिग्यान बिहाना।।

  1242. RCM 1.116.7
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    हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना।।

  1243. RCM 1.116.8
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    राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना। परमानन्द परेस पुराना।।

    अर्थ (Hindi)

    राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना। परमानन्द परेस पुराना।।

  1244. RCM 1.116.9
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    पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ।।

  1245. RCM 1.116.10
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    रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ।।116।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ।।116।।

  1246. RCM 1.117.1
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    निज भ्रम नहिं समुझहिं अग्यानी। प्रभु पर मोह धरहिं जड़ प्रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    निज भ्रम नहिं समुझहिं अग्यानी। प्रभु पर मोह धरहिं जड़ प्रानी।।

  1247. RCM 1.117.2
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    जथा गगन घन पटल निहारी। झाँपेउ मानु कहहिं कुबिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जथा गगन घन पटल निहारी। झाँपेउ मानु कहहिं कुबिचारी।।

  1248. RCM 1.117.3
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    चितव जो लोचन अंगुलि लाएँ। प्रगट जुगल ससि तेहि के भाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    चितव जो लोचन अंगुलि लाएँ। प्रगट जुगल ससि तेहि के भाएँ।।

  1249. RCM 1.117.4
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    उमा राम बिषइक अस मोहा। नभ तम धूम धूरि जिमि सोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा राम बिषइक अस मोहा। नभ तम धूम धूरि जिमि सोहा।।

  1250. RCM 1.117.5
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    बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता।।

    अर्थ (Hindi)

    बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता।।

  1251. RCM 1.117.6
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    सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई।।

  1252. RCM 1.117.7
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    जगत प्रकास्य प्रकासक रामू। मायाधीस ग्यान गुन धामू।।

    अर्थ (Hindi)

    जगत प्रकास्य प्रकासक रामू। मायाधीस ग्यान गुन धामू।।

  1253. RCM 1.117.8
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    जासु सत्यता तें जड माया। भास सत्य इव मोह सहाया।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु सत्यता तें जड माया। भास सत्य इव मोह सहाया।।

  1254. RCM 1.117.9
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    रजत सीप महुँ मास जिमि जथा भानु कर बारि।

    अर्थ (Hindi)

    रजत सीप महुँ मास जिमि जथा भानु कर बारि।

  1255. RCM 1.117.10
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    जदपि मृषा तिहुँ काल सोइ भ्रम न सकइ कोउ टारि।।117।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि मृषा तिहुँ काल सोइ भ्रम न सकइ कोउ टारि।।117।।

  1256. RCM 1.118.1
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    एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।।

  1257. RCM 1.118.2
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    जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई।।

  1258. RCM 1.118.3
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    जासु कृपाँ अस भ्रम मिटि जाई। गिरिजा सोइ कृपाल रघुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु कृपाँ अस भ्रम मिटि जाई। गिरिजा सोइ कृपाल रघुराई।।

  1259. RCM 1.118.4
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    आदि अंत कोउ जासु न पावा। मति अनुमानि निगम अस गावा।।

    अर्थ (Hindi)

    आदि अंत कोउ जासु न पावा। मति अनुमानि निगम अस गावा।।

  1260. RCM 1.118.5
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    बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।।

  1261. RCM 1.118.6
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    आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।

  1262. RCM 1.118.7
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    तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।।

  1263. RCM 1.118.8
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    असि सब भाँति अलौकिक करनी। महिमा जासु जाइ नहिं बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    असि सब भाँति अलौकिक करनी। महिमा जासु जाइ नहिं बरनी।।

  1264. RCM 1.118.9
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    जेहि इमि गावहि बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि इमि गावहि बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।।

  1265. RCM 1.118.10
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    सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान।।118।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान।।118।।

  1266. RCM 1.119.1
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    कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी।।

    अर्थ (Hindi)

    कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी।।

  1267. RCM 1.119.2
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    सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी। रघुबर सब उर अंतरजामी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी। रघुबर सब उर अंतरजामी।।

  1268. RCM 1.119.3
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    बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं। जनम अनेक रचित अघ दहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं। जनम अनेक रचित अघ दहहीं।।

  1269. RCM 1.119.4
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    सादर सुमिरन जे नर करहीं। भव बारिधि गोपद इव तरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर सुमिरन जे नर करहीं। भव बारिधि गोपद इव तरहीं।।

  1270. RCM 1.119.5
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    राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी।।

  1271. RCM 1.119.6
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    अस संसय आनत उर माहीं। ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अस संसय आनत उर माहीं। ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं।।

  1272. RCM 1.119.7
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    सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना। मिटि गै सब कुतरक कै रचना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना। मिटि गै सब कुतरक कै रचना।।

  1273. RCM 1.119.8
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    भइ रघुपति पद प्रीति प्रतीती। दारुन असंभावना बीती।।

    अर्थ (Hindi)

    भइ रघुपति पद प्रीति प्रतीती। दारुन असंभावना बीती।।

  1274. RCM 1.119.9
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    पुनि पुनि प्रभु पद कमल गहि जोरि पंकरुह पानि।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि प्रभु पद कमल गहि जोरि पंकरुह पानि।

  1275. RCM 1.119.10
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    बोली गिरिजा बचन बर मनहुँ प्रेम रस सानि।।119।।

    अर्थ (Hindi)

    बोली गिरिजा बचन बर मनहुँ प्रेम रस सानि।।119।।

  1276. RCM 1.120.1
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    ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।।

  1277. RCM 1.120.2
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    तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरुप जानि मोहि परेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरुप जानि मोहि परेऊ।।

  1278. RCM 1.120.3
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    नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।।

  1279. RCM 1.120.4
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    अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड नारि अयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड नारि अयानी।।

  1280. RCM 1.120.5
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    प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।।

  1281. RCM 1.120.6
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    राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी।।

  1282. RCM 1.120.7
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    नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू। मोहि समुझाइ कहहु बृषकेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू। मोहि समुझाइ कहहु बृषकेतू।।

  1283. RCM 1.120.8
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    उमा बचन सुनि परम बिनीता। रामकथा पर प्रीति पुनीता।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा बचन सुनि परम बिनीता। रामकथा पर प्रीति पुनीता।।

  1284. RCM 1.120.9
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    हिंयँ हरषे कामारि तब संकर सहज सुजान

    अर्थ (Hindi)

    हिंयँ हरषे कामारि तब संकर सहज सुजान

  1285. RCM 1.120.10
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    बहु बिधि उमहि प्रसंसि पुनि बोले कृपानिधान।।120(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु बिधि उमहि प्रसंसि पुनि बोले कृपानिधान।।120(क)।।

  1286. RCM 1.120.11
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    सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल।

  1287. RCM 1.120.12
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    कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड।।120(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड।।120(ख)।।

  1288. RCM 1.120.13
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    सो संबाद उदार जेहि बिधि भा आगें कहब।

    अर्थ (Hindi)

    सो संबाद उदार जेहि बिधि भा आगें कहब।

  1289. RCM 1.120.14
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    सुनहु राम अवतार चरित परम सुंदर अनघ।।120(ग)।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु राम अवतार चरित परम सुंदर अनघ।।120(ग)।।

  1290. RCM 1.120.15
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    हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित।

    अर्थ (Hindi)

    हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित।

  1291. RCM 1.120.16
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    मैं निज मति अनुसार कहउँ उमा सादर सुनहु।।120(घ।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं निज मति अनुसार कहउँ उमा सादर सुनहु।।120(घ।।

  1292. RCM 1.121.1
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    सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।।

  1293. RCM 1.121.2
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    हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई।।

  1294. RCM 1.121.3
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    राम अर्तक्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम अर्तक्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी।।

  1295. RCM 1.121.4
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    तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना।।

  1296. RCM 1.121.5
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    तस मैं सुमुखि सुनावउँ तोही। समुझि परइ जस कारन मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    तस मैं सुमुखि सुनावउँ तोही। समुझि परइ जस कारन मोही।।

  1297. RCM 1.121.6
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    जब जब होइ धरम कै हानी। बाढहिं असुर अधम अभिमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जब जब होइ धरम कै हानी। बाढहिं असुर अधम अभिमानी।।

  1298. RCM 1.121.7
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    करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी।।

  1299. RCM 1.121.8
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    तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहि कृपानिधि सज्जन पीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहि कृपानिधि सज्जन पीरा।।

  1300. RCM 1.121.9
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    असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।

    अर्थ (Hindi)

    असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।

  1301. RCM 1.121.10
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    जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु।।121।।

    अर्थ (Hindi)

    जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु।।121।।

  1302. RCM 1.122.1
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    सोइ जस गाइ भगत भव तरहीं। कृपासिंधु जन हित तनु धरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ जस गाइ भगत भव तरहीं। कृपासिंधु जन हित तनु धरहीं।।

  1303. RCM 1.122.2
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    राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका।।

    अर्थ (Hindi)

    राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका।।

  1304. RCM 1.122.3
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    जनम एक दुइ कहउँ बखानी। सावधान सुनु सुमति भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जनम एक दुइ कहउँ बखानी। सावधान सुनु सुमति भवानी।।

  1305. RCM 1.122.4
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    द्वारपाल हरि के प्रिय दोऊ। जय अरु बिजय जान सब कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    द्वारपाल हरि के प्रिय दोऊ। जय अरु बिजय जान सब कोऊ।।

  1306. RCM 1.122.5
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    बिप्र श्राप तें दूनउ भाई। तामस असुर देह तिन्ह पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्र श्राप तें दूनउ भाई। तामस असुर देह तिन्ह पाई।।

  1307. RCM 1.122.6
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    कनककसिपु अरु हाटक लोचन। जगत बिदित सुरपति मद मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    कनककसिपु अरु हाटक लोचन। जगत बिदित सुरपति मद मोचन।।

  1308. RCM 1.122.7
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    बिजई समर बीर बिख्याता। धरि बराह बपु एक निपाता।।

    अर्थ (Hindi)

    बिजई समर बीर बिख्याता। धरि बराह बपु एक निपाता।।

  1309. RCM 1.122.8
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    होइ नरहरि दूसर पुनि मारा। जन प्रहलाद सुजस बिस्तारा।।

    अर्थ (Hindi)

    होइ नरहरि दूसर पुनि मारा। जन प्रहलाद सुजस बिस्तारा।।

  1310. RCM 1.122.9
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    भए निसाचर जाइ तेइ महाबीर बलवान।

    अर्थ (Hindi)

    भए निसाचर जाइ तेइ महाबीर बलवान।

  1311. RCM 1.122.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कुंभकरन रावण सुभट सुर बिजई जग जान।।122 ।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन रावण सुभट सुर बिजई जग जान।।122 ।

  1312. RCM 1.123.1
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    मुकुत न भए हते भगवाना। तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मुकुत न भए हते भगवाना। तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना।।

  1313. RCM 1.123.2
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    एक बार तिन्ह के हित लागी। धरेउ सरीर भगत अनुरागी।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार तिन्ह के हित लागी। धरेउ सरीर भगत अनुरागी।।

  1314. RCM 1.123.3
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    कस्यप अदिति तहाँ पितु माता। दसरथ कौसल्या बिख्याता।।

    अर्थ (Hindi)

    कस्यप अदिति तहाँ पितु माता। दसरथ कौसल्या बिख्याता।।

  1315. RCM 1.123.4
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    एक कलप एहि बिधि अवतारा। चरित्र पवित्र किए संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    एक कलप एहि बिधि अवतारा। चरित्र पवित्र किए संसारा।।

  1316. RCM 1.123.5
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    एक कलप सुर देखि दुखारे। समर जलंधर सन सब हारे।।

    अर्थ (Hindi)

    एक कलप सुर देखि दुखारे। समर जलंधर सन सब हारे।।

  1317. RCM 1.123.6
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    संभु कीन्ह संग्राम अपारा। दनुज महाबल मरइ न मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु कीन्ह संग्राम अपारा। दनुज महाबल मरइ न मारा।।

  1318. RCM 1.123.7
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    परम सती असुराधिप नारी। तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    परम सती असुराधिप नारी। तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी।।

  1319. RCM 1.123.8
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    छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह।।

    अर्थ (Hindi)

    छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह।।

  1320. RCM 1.123.9
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    जब तेहि जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह।।123।।

    अर्थ (Hindi)

    जब तेहि जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह।।123।।

  1321. RCM 1.124.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना। कौतुकनिधि कृपाल भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना। कौतुकनिधि कृपाल भगवाना।।

  1322. RCM 1.124.2
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    तहाँ जलंधर रावन भयऊ। रन हति राम परम पद दयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तहाँ जलंधर रावन भयऊ। रन हति राम परम पद दयऊ।।

  1323. RCM 1.124.3
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    एक जनम कर कारन एहा। जेहि लागि राम धरी नरदेहा।।

    अर्थ (Hindi)

    एक जनम कर कारन एहा। जेहि लागि राम धरी नरदेहा।।

  1324. RCM 1.124.4
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    प्रति अवतार कथा प्रभु केरी। सुनु मुनि बरनी कबिन्ह घनेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रति अवतार कथा प्रभु केरी। सुनु मुनि बरनी कबिन्ह घनेरी।।

  1325. RCM 1.124.5
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    नारद श्राप दीन्ह एक बारा। कलप एक तेहि लगि अवतारा।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद श्राप दीन्ह एक बारा। कलप एक तेहि लगि अवतारा।।

  1326. RCM 1.124.6
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    गिरिजा चकित भई सुनि बानी। नारद बिष्नुभगत पुनि ग्यानि।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरिजा चकित भई सुनि बानी। नारद बिष्नुभगत पुनि ग्यानि।।

  1327. RCM 1.124.7
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    कारन कवन श्राप मुनि दीन्हा। का अपराध रमापति कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    कारन कवन श्राप मुनि दीन्हा। का अपराध रमापति कीन्हा।।

  1328. RCM 1.124.8
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    यह प्रसंग मोहि कहहु पुरारी। मुनि मन मोह आचरज भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    यह प्रसंग मोहि कहहु पुरारी। मुनि मन मोह आचरज भारी।।

  1329. RCM 1.124.9
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    बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।

    अर्थ (Hindi)

    बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।

  1330. RCM 1.124.10
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    जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।।124(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।।124(क)।।

  1331. RCM 1.124.11
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    कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु।

    अर्थ (Hindi)

    कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु।

  1332. RCM 1.124.12
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    भव भंजन रघुनाथ भजु तुलसी तजि मान मद।।124(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    भव भंजन रघुनाथ भजु तुलसी तजि मान मद।।124(ख)।।

  1333. RCM 1.125.1
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    हिमगिरि गुहा एक अति पावनि। बह समीप सुरसरी सुहावनि।।

    अर्थ (Hindi)

    हिमगिरि गुहा एक अति पावनि। बह समीप सुरसरी सुहावनि।।

  1334. RCM 1.125.2
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    आश्रम परम पुनीत सुहावा। देखि देवरिषि मन अति भावा।।

    अर्थ (Hindi)

    आश्रम परम पुनीत सुहावा। देखि देवरिषि मन अति भावा।।

  1335. RCM 1.125.3
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    निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा। भयउ रमापति पद अनुरागा।।

    अर्थ (Hindi)

    निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा। भयउ रमापति पद अनुरागा।।

  1336. RCM 1.125.4
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    सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी।।

  1337. RCM 1.125.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि गति देखि सुरेस डेराना। कामहि बोलि कीन्ह सनमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि गति देखि सुरेस डेराना। कामहि बोलि कीन्ह सनमाना।।

  1338. RCM 1.125.6
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    सहित सहाय जाहु मम हेतू। चकेउ हरषि हियँ जलचरकेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    सहित सहाय जाहु मम हेतू। चकेउ हरषि हियँ जलचरकेतू।।

  1339. RCM 1.125.7
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    सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा।।

  1340. RCM 1.125.8
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    जे कामी लोलुप जग माहीं। कुटिल काक इव सबहि डेराहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जे कामी लोलुप जग माहीं। कुटिल काक इव सबहि डेराहीं।।

  1341. RCM 1.125.9
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    सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।

    अर्थ (Hindi)

    सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।

  1342. RCM 1.125.10
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    छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज।।125।।

    अर्थ (Hindi)

    छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज।।125।।

  1343. RCM 1.126.1
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    तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ।।

  1344. RCM 1.126.2
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    कुसुमित बिबिध बिटप बहुरंगा। कूजहिं कोकिल गुंजहि भृंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    कुसुमित बिबिध बिटप बहुरंगा। कूजहिं कोकिल गुंजहि भृंगा।।

  1345. RCM 1.126.3
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    चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी।।

  1346. RCM 1.126.4
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    रंभादिक सुरनारि नबीना । सकल असमसर कला प्रबीना।।

    अर्थ (Hindi)

    रंभादिक सुरनारि नबीना । सकल असमसर कला प्रबीना।।

  1347. RCM 1.126.5
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    करहिं गान बहु तान तरंगा। बहुबिधि क्रीड़हि पानि पतंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं गान बहु तान तरंगा। बहुबिधि क्रीड़हि पानि पतंगा।।

  1348. RCM 1.126.6
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    देखि सहाय मदन हरषाना। कीन्हेसि पुनि प्रपंच बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि सहाय मदन हरषाना। कीन्हेसि पुनि प्रपंच बिधि नाना।।

  1349. RCM 1.126.7
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    काम कला कछु मुनिहि न ब्यापी। निज भयँ डरेउ मनोभव पापी।।

    अर्थ (Hindi)

    काम कला कछु मुनिहि न ब्यापी। निज भयँ डरेउ मनोभव पापी।।

  1350. RCM 1.126.8
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    सीम कि चाँपि सकइ कोउ तासु। बड़ रखवार रमापति जासू।।

    अर्थ (Hindi)

    सीम कि चाँपि सकइ कोउ तासु। बड़ रखवार रमापति जासू।।

  1351. RCM 1.126.9
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    सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।

    अर्थ (Hindi)

    सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।

  1352. RCM 1.126.10
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    गहेसि जाइ मुनि चरन तब कहि सुठि आरत बैन।।126।।

    अर्थ (Hindi)

    गहेसि जाइ मुनि चरन तब कहि सुठि आरत बैन।।126।।

  1353. RCM 1.127.1
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    भयउ न नारद मन कछु रोषा। कहि प्रिय बचन काम परितोषा।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ न नारद मन कछु रोषा। कहि प्रिय बचन काम परितोषा।।

  1354. RCM 1.127.2
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    नाइ चरन सिरु आयसु पाई। गयउ मदन तब सहित सहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नाइ चरन सिरु आयसु पाई। गयउ मदन तब सहित सहाई।।

  1355. RCM 1.127.3
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    मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।।

  1356. RCM 1.127.4
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    सुनि सब कें मन अचरजु आवा। मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिरु नावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सब कें मन अचरजु आवा। मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिरु नावा।।

  1357. RCM 1.127.5
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    तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।।

  1358. RCM 1.127.6
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    मार चरित संकरहिं सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए।।

    अर्थ (Hindi)

    मार चरित संकरहिं सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए।।

  1359. RCM 1.127.7
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    बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।।

  1360. RCM 1.127.8
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    तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ। चलेहुँ प्रसंग दुराएडु तबहूँ।।

    अर्थ (Hindi)

    तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ। चलेहुँ प्रसंग दुराएडु तबहूँ।।

  1361. RCM 1.127.9
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    संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि सोहान।

    अर्थ (Hindi)

    संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि सोहान।

  1362. RCM 1.127.10
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    भारद्वाज कौतुक सुनहु हरि इच्छा बलवान।।127।।

    अर्थ (Hindi)

    भारद्वाज कौतुक सुनहु हरि इच्छा बलवान।।127।।

  1363. RCM 1.128.1
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    राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।।

  1364. RCM 1.128.2
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    संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए।।

  1365. RCM 1.128.3
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    एक बार करतल बर बीना। गावत हरि गुन गान प्रबीना।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार करतल बर बीना। गावत हरि गुन गान प्रबीना।।

  1366. RCM 1.128.4
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    छीरसिंधु गवने मुनिनाथा। जहँ बस श्रीनिवास श्रुतिमाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    छीरसिंधु गवने मुनिनाथा। जहँ बस श्रीनिवास श्रुतिमाथा।।

  1367. RCM 1.128.5
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    हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।।

  1368. RCM 1.128.6
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    बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया।।

  1369. RCM 1.128.7
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    काम चरित नारद सब भाषे। जद्यपि प्रथम बरजि सिवँ राखे।।

    अर्थ (Hindi)

    काम चरित नारद सब भाषे। जद्यपि प्रथम बरजि सिवँ राखे।।

  1370. RCM 1.128.8
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    अति प्रचंड रघुपति कै माया। जेहि न मोह अस को जग जाया।।

    अर्थ (Hindi)

    अति प्रचंड रघुपति कै माया। जेहि न मोह अस को जग जाया।।

  1371. RCM 1.128.9
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    रूख बदन करि बचन मृदु बोले श्रीभगवान ।

    अर्थ (Hindi)

    रूख बदन करि बचन मृदु बोले श्रीभगवान ।

  1372. RCM 1.128.10
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    तुम्हरे सुमिरन तें मिटहिं मोह मार मद मान।।128।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हरे सुमिरन तें मिटहिं मोह मार मद मान।।128।।

  1373. RCM 1.129.1
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    सुनु मुनि मोह होइ मन ताकें। ग्यान बिराग हृदय नहिं जाके।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मुनि मोह होइ मन ताकें। ग्यान बिराग हृदय नहिं जाके।।

  1374. RCM 1.129.2
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    ब्रह्मचरज ब्रत रत मतिधीरा। तुम्हहि कि करइ मनोभव पीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मचरज ब्रत रत मतिधीरा। तुम्हहि कि करइ मनोभव पीरा।।

  1375. RCM 1.129.3
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    नारद कहेउ सहित अभिमाना। कृपा तुम्हारि सकल भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद कहेउ सहित अभिमाना। कृपा तुम्हारि सकल भगवाना।।

  1376. RCM 1.129.4
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    करुनानिधि मन दीख बिचारी। उर अंकुरेउ गरब तरु भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करुनानिधि मन दीख बिचारी। उर अंकुरेउ गरब तरु भारी।।

  1377. RCM 1.129.5
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    बेगि सो मै डारिहउँ उखारी। पन हमार सेवक हितकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बेगि सो मै डारिहउँ उखारी। पन हमार सेवक हितकारी।।

  1378. RCM 1.129.6
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    मुनि कर हित मम कौतुक होई। अवसि उपाय करबि मै सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि कर हित मम कौतुक होई। अवसि उपाय करबि मै सोई।।

  1379. RCM 1.129.7
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    तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई।।

  1380. RCM 1.129.8
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    श्रीपति निज माया तब प्रेरी। सुनहु कठिन करनी तेहि केरी।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रीपति निज माया तब प्रेरी। सुनहु कठिन करनी तेहि केरी।।

  1381. RCM 1.129.9
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    बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।

    अर्थ (Hindi)

    बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।

  1382. RCM 1.129.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार।।129।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार।।129।।

  1383. RCM 1.130.1
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    बसहिं नगर सुंदर नर नारी। जनु बहु मनसिज रति तनुधारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बसहिं नगर सुंदर नर नारी। जनु बहु मनसिज रति तनुधारी।।

  1384. RCM 1.130.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहिं पुर बसइ सीलनिधि राजा। अगनित हय गय सेन समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं पुर बसइ सीलनिधि राजा। अगनित हय गय सेन समाजा।।

  1385. RCM 1.130.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सत सुरेस सम बिभव बिलासा। रूप तेज बल नीति निवासा।।

    अर्थ (Hindi)

    सत सुरेस सम बिभव बिलासा। रूप तेज बल नीति निवासा।।

  1386. RCM 1.130.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिस्वमोहनी तासु कुमारी। श्री बिमोह जिसु रूपु निहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वमोहनी तासु कुमारी। श्री बिमोह जिसु रूपु निहारी।।

  1387. RCM 1.130.5
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    सोइ हरिमाया सब गुन खानी। सोभा तासु कि जाइ बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ हरिमाया सब गुन खानी। सोभा तासु कि जाइ बखानी।।

  1388. RCM 1.130.6
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    करइ स्वयंबर सो नृपबाला। आए तहँ अगनित महिपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    करइ स्वयंबर सो नृपबाला। आए तहँ अगनित महिपाला।।

  1389. RCM 1.130.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि कौतुकी नगर तेहिं गयऊ। पुरबासिन्ह सब पूछत भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि कौतुकी नगर तेहिं गयऊ। पुरबासिन्ह सब पूछत भयऊ।।

  1390. RCM 1.130.8
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    सुनि सब चरित भूपगृहँ आए। करि पूजा नृप मुनि बैठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सब चरित भूपगृहँ आए। करि पूजा नृप मुनि बैठाए।।

  1391. RCM 1.130.9
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    आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि।

    अर्थ (Hindi)

    आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि।

  1392. RCM 1.130.10
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    कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि।।130।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि।।130।।

  1393. RCM 1.131.1
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    देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।।

  1394. RCM 1.131.2
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    लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने।।

  1395. RCM 1.131.3
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    जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।।

  1396. RCM 1.131.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सेवहिं सकल चराचर ताही। बरइ सीलनिधि कन्या जाही।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवहिं सकल चराचर ताही। बरइ सीलनिधि कन्या जाही।।

  1397. RCM 1.131.5
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    लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।।

    अर्थ (Hindi)

    लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।।

  1398. RCM 1.131.6
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    सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं।।

  1399. RCM 1.131.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करौं जाइ सोइ जतन बिचारी। जेहि प्रकार मोहि बरै कुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करौं जाइ सोइ जतन बिचारी। जेहि प्रकार मोहि बरै कुमारी।।

  1400. RCM 1.131.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जप तप कछु न होइ तेहि काला। हे बिधि मिलइ कवन बिधि बाला।।

    अर्थ (Hindi)

    जप तप कछु न होइ तेहि काला। हे बिधि मिलइ कवन बिधि बाला।।

  1401. RCM 1.131.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल।

    अर्थ (Hindi)

    एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल।

  1402. RCM 1.131.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल।।131।।

    अर्थ (Hindi)

    जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल।।131।।

  1403. RCM 1.132.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हरि सन मागौं सुंदरताई। होइहि जात गहरु अति भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि सन मागौं सुंदरताई। होइहि जात गहरु अति भाई।।

  1404. RCM 1.132.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहि अवसर सहाय सोइ होऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहि अवसर सहाय सोइ होऊ।।

  1405. RCM 1.132.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।।

  1406. RCM 1.132.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने।।

  1407. RCM 1.132.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।।

  1408. RCM 1.132.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आपन रूप देहु प्रभु मोही। आन भाँति नहिं पावौं ओही।।

    अर्थ (Hindi)

    आपन रूप देहु प्रभु मोही। आन भाँति नहिं पावौं ओही।।

  1409. RCM 1.132.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा। करहु सो बेगि दास मैं तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा। करहु सो बेगि दास मैं तोरा।।

  1410. RCM 1.132.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निज माया बल देखि बिसाला। हियँ हँसि बोले दीनदयाला।।

    अर्थ (Hindi)

    निज माया बल देखि बिसाला। हियँ हँसि बोले दीनदयाला।।

  1411. RCM 1.132.9
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    जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार।

  1412. RCM 1.132.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार।।132।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार।।132।।

  1413. RCM 1.133.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।।

  1414. RCM 1.133.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ।।

  1415. RCM 1.133.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    माया बिबस भए मुनि मूढ़ा। समुझी नहिं हरि गिरा निगूढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    माया बिबस भए मुनि मूढ़ा। समुझी नहिं हरि गिरा निगूढ़ा।।

  1416. RCM 1.133.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गवने तुरत तहाँ रिषिराई। जहाँ स्वयंबर भूमि बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    गवने तुरत तहाँ रिषिराई। जहाँ स्वयंबर भूमि बनाई।।

  1417. RCM 1.133.5
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    निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।।

  1418. RCM 1.133.6
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    मुनि मन हरष रूप अति मोरें। मोहि तजि आनहि बारिहि न भोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि मन हरष रूप अति मोरें। मोहि तजि आनहि बारिहि न भोरें।।

  1419. RCM 1.133.7
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    मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।।

  1420. RCM 1.133.8
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    सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा।।

  1421. RCM 1.133.9
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    रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ।

    अर्थ (Hindi)

    रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ।

  1422. RCM 1.133.10
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    बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ।।133।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ।।133।।

  1423. RCM 1.134.1
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    जेंहि समाज बैंठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जेंहि समाज बैंठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई।।

  1424. RCM 1.134.2
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    तहँ बैठ महेस गन दोऊ। बिप्रबेष गति लखइ न कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तहँ बैठ महेस गन दोऊ। बिप्रबेष गति लखइ न कोऊ।।

  1425. RCM 1.134.3
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    करहिं कूटि नारदहि सुनाई। नीकि दीन्हि हरि सुंदरताई।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं कूटि नारदहि सुनाई। नीकि दीन्हि हरि सुंदरताई।।

  1426. RCM 1.134.4
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    रीझहि राजकुअँरि छबि देखी। इन्हहि बरिहि हरि जानि बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    रीझहि राजकुअँरि छबि देखी। इन्हहि बरिहि हरि जानि बिसेषी।।

  1427. RCM 1.134.5
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    मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ।।

  1428. RCM 1.134.6
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    जदपि सुनहिं मुनि अटपटि बानी। समुझि न परइ बुद्धि भ्रम सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जदपि सुनहिं मुनि अटपटि बानी। समुझि न परइ बुद्धि भ्रम सानी।।

  1429. RCM 1.134.7
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    काहुँ न लखा सो चरित बिसेषा। सो सरूप नृपकन्याँ देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    काहुँ न लखा सो चरित बिसेषा। सो सरूप नृपकन्याँ देखा।।

  1430. RCM 1.134.8
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    मर्कट बदन भयंकर देही। देखत हृदयँ क्रोध भा तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    मर्कट बदन भयंकर देही। देखत हृदयँ क्रोध भा तेही।।

  1431. RCM 1.134.9
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    सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।

    अर्थ (Hindi)

    सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।

  1432. RCM 1.134.10
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    देखत फिरइ महीप सब कर सरोज जयमाल।।134।।

    अर्थ (Hindi)

    देखत फिरइ महीप सब कर सरोज जयमाल।।134।।

  1433. RCM 1.135.1
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    जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि देहि न बिलोकी भूली।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि देहि न बिलोकी भूली।।

  1434. RCM 1.135.2
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    पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं। देखि दसा हर गन मुसकाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं। देखि दसा हर गन मुसकाहीं।।

  1435. RCM 1.135.3
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    धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला। कुअँरि हरषि मेलेउ जयमाला।।

    अर्थ (Hindi)

    धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला। कुअँरि हरषि मेलेउ जयमाला।।

  1436. RCM 1.135.4
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    दुलहिनि लै गे लच्छिनिवासा। नृपसमाज सब भयउ निरासा।।

    अर्थ (Hindi)

    दुलहिनि लै गे लच्छिनिवासा। नृपसमाज सब भयउ निरासा।।

  1437. RCM 1.135.5
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    मुनि अति बिकल मोंहँ मति नाठी। मनि गिरि गई छूटि जनु गाँठी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि अति बिकल मोंहँ मति नाठी। मनि गिरि गई छूटि जनु गाँठी।।

  1438. RCM 1.135.6
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    तब हर गन बोले मुसुकाई। निज मुख मुकुर बिलोकहु जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब हर गन बोले मुसुकाई। निज मुख मुकुर बिलोकहु जाई।।

  1439. RCM 1.135.7
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    अस कहि दोउ भागे भयँ भारी। बदन दीख मुनि बारि निहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि दोउ भागे भयँ भारी। बदन दीख मुनि बारि निहारी।।

  1440. RCM 1.135.8
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    बेषु बिलोकि क्रोध अति बाढ़ा। तिन्हहि सराप दीन्ह अति गाढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    बेषु बिलोकि क्रोध अति बाढ़ा। तिन्हहि सराप दीन्ह अति गाढ़ा।।

  1441. RCM 1.135.9
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    होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।

    अर्थ (Hindi)

    होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।

  1442. RCM 1.135.10
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    हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ।।135।।

    अर्थ (Hindi)

    हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ।।135।।

  1443. RCM 1.136.1
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    पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।।

  1444. RCM 1.136.2
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    फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।।

  1445. RCM 1.136.3
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    देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोर उपहास कराई।।

    अर्थ (Hindi)

    देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोर उपहास कराई।।

  1446. RCM 1.136.4
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    बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी।।

  1447. RCM 1.136.5
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    बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।।

  1448. RCM 1.136.6
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    सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।।

  1449. RCM 1.136.7
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    पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।।

  1450. RCM 1.136.8
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    मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।

    अर्थ (Hindi)

    मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।

  1451. RCM 1.136.9
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    असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।

    अर्थ (Hindi)

    असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।

  1452. RCM 1.136.10
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    स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु।।136।।

    अर्थ (Hindi)

    स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु।।136।।

  1453. RCM 1.137.1
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    परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।।

  1454. RCM 1.137.2
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    भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू।।

    अर्थ (Hindi)

    भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू।।

  1455. RCM 1.137.3
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    डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।।

  1456. RCM 1.137.4
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    करम सुभासुभ तुम्हहि न बाधा। अब लगि तुम्हहि न काहूँ साधा।।

    अर्थ (Hindi)

    करम सुभासुभ तुम्हहि न बाधा। अब लगि तुम्हहि न काहूँ साधा।।

  1457. RCM 1.137.5
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    भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।।

  1458. RCM 1.137.6
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    बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा।।

    अर्थ (Hindi)

    बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा।।

  1459. RCM 1.137.7
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    कपि आकृति तुम्ह कीन्हि हमारी। करिहहिं कीस सहाय तुम्हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कपि आकृति तुम्ह कीन्हि हमारी। करिहहिं कीस सहाय तुम्हारी।।

  1460. RCM 1.137.8
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    मम अपकार कीन्ही तुम्ह भारी। नारी बिरहँ तुम्ह होब दुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मम अपकार कीन्ही तुम्ह भारी। नारी बिरहँ तुम्ह होब दुखारी।।

  1461. RCM 1.137.9
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    श्राप सीस धरी हरषि हियँ प्रभु बहु बिनती कीन्हि।

    अर्थ (Hindi)

    श्राप सीस धरी हरषि हियँ प्रभु बहु बिनती कीन्हि।

  1462. RCM 1.137.10
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    निज माया कै प्रबलता करषि कृपानिधि लीन्हि।।137।।

    अर्थ (Hindi)

    निज माया कै प्रबलता करषि कृपानिधि लीन्हि।।137।।

  1463. RCM 1.138.1
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    जब हरि माया दूरि निवारी। नहिं तहँ रमा न राजकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जब हरि माया दूरि निवारी। नहिं तहँ रमा न राजकुमारी।।

  1464. RCM 1.138.2
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    तब मुनि अति सभीत हरि चरना। गहे पाहि प्रनतारति हरना।।

    अर्थ (Hindi)

    तब मुनि अति सभीत हरि चरना। गहे पाहि प्रनतारति हरना।।

  1465. RCM 1.138.3
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    मृषा होउ मम श्राप कृपाला। मम इच्छा कह दीनदयाला।।

    अर्थ (Hindi)

    मृषा होउ मम श्राप कृपाला। मम इच्छा कह दीनदयाला।।

  1466. RCM 1.138.4
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    मैं दुर्बचन कहे बहुतेरे। कह मुनि पाप मिटिहिं किमि मेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं दुर्बचन कहे बहुतेरे। कह मुनि पाप मिटिहिं किमि मेरे।।

  1467. RCM 1.138.5
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    जपहु जाइ संकर सत नामा। होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    जपहु जाइ संकर सत नामा। होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा।।

  1468. RCM 1.138.6
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    कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें। असि परतीति तजहु जनि भोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें। असि परतीति तजहु जनि भोरें।।

  1469. RCM 1.138.7
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    जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी।।

  1470. RCM 1.138.8
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    अस उर धरि महि बिचरहु जाई। अब न तुम्हहि माया निअराई।।

    अर्थ (Hindi)

    अस उर धरि महि बिचरहु जाई। अब न तुम्हहि माया निअराई।।

  1471. RCM 1.138.9
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    बहुबिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु तब भए अंतरधान।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुबिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु तब भए अंतरधान।।

  1472. RCM 1.138.10
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    सत्यलोक नारद चले करत राम गुन गान।।138।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्यलोक नारद चले करत राम गुन गान।।138।।

  1473. RCM 1.139.1
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    हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगतमोह मन हरष बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगतमोह मन हरष बिसेषी।।

  1474. RCM 1.139.2
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    अति सभीत नारद पहिं आए। गहि पद आरत बचन सुनाए।।

    अर्थ (Hindi)

    अति सभीत नारद पहिं आए। गहि पद आरत बचन सुनाए।।

  1475. RCM 1.139.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया।।

    अर्थ (Hindi)

    हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया।।

  1476. RCM 1.139.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    श्राप अनुग्रह करहु कृपाला। बोले नारद दीनदयाला।।

    अर्थ (Hindi)

    श्राप अनुग्रह करहु कृपाला। बोले नारद दीनदयाला।।

  1477. RCM 1.139.5
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    निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ। बैभव बिपुल तेज बल होऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ। बैभव बिपुल तेज बल होऊ।।

  1478. RCM 1.139.6
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    भुजबल बिस्व जितब तुम्ह जहिआ। धरिहहिं बिष्नु मनुज तनु तहिआ।

    अर्थ (Hindi)

    भुजबल बिस्व जितब तुम्ह जहिआ। धरिहहिं बिष्नु मनुज तनु तहिआ।

  1479. RCM 1.139.7
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    समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा।।

  1480. RCM 1.139.8
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    चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई।।

  1481. RCM 1.139.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार।

    अर्थ (Hindi)

    एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार।

  1482. RCM 1.139.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार।।139।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार।।139।।

  1483. RCM 1.140.1
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    एहि बिधि जनम करम हरि केरे। सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि जनम करम हरि केरे। सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे।।

  1484. RCM 1.140.2
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    कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं। चारु चरित नानाबिधि करहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं। चारु चरित नानाबिधि करहीं।।

  1485. RCM 1.140.3
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    तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।।

  1486. RCM 1.140.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने।।

  1487. RCM 1.140.5
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    हरि अनंत हरिकथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि अनंत हरिकथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।

  1488. RCM 1.140.6
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    रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए।।

    अर्थ (Hindi)

    रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए।।

  1489. RCM 1.140.7
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    यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।।

  1490. RCM 1.140.8
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    प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी।।सेवत सुलभ सकल दुख हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी।।सेवत सुलभ सकल दुख हारी।।

  1491. RCM 1.140.9
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    सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।।

  1492. RCM 1.140.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि।।140।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि।।140।।

  1493. RCM 1.141.1
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    अपर हेतु सुनु सैलकुमारी। कहउँ बिचित्र कथा बिस्तारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अपर हेतु सुनु सैलकुमारी। कहउँ बिचित्र कथा बिस्तारी।।

  1494. RCM 1.141.2
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    जेहि कारन अज अगुन अरूपा। ब्रह्म भयउ कोसलपुर भूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि कारन अज अगुन अरूपा। ब्रह्म भयउ कोसलपुर भूपा।।

  1495. RCM 1.141.3
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    जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा।।

  1496. RCM 1.141.4
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    जासु चरित अवलोकि भवानी। सती सरीर रहिहु बौरानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु चरित अवलोकि भवानी। सती सरीर रहिहु बौरानी।।

  1497. RCM 1.141.5
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    अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी। तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी। तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी।।

  1498. RCM 1.141.6
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    लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा। सो सब कहिहउँ मति अनुसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा। सो सब कहिहउँ मति अनुसारा।।

  1499. RCM 1.141.7
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    भरद्वाज सुनि संकर बानी। सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी।।

    अर्थ (Hindi)

    भरद्वाज सुनि संकर बानी। सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी।।

  1500. RCM 1.141.8
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    लगे बहुरि बरने बृषकेतू। सो अवतार भयउ जेहि हेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    लगे बहुरि बरने बृषकेतू। सो अवतार भयउ जेहि हेतू।।

  1501. RCM 1.141.9
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    सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई।।

  1502. RCM 1.141.10
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    राम कथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ।।141।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ।।141।।

  1503. RCM 1.142.1
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    स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।।

  1504. RCM 1.142.2
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    दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।

    अर्थ (Hindi)

    दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।

  1505. RCM 1.142.3
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    नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।।

  1506. RCM 1.142.4
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    लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही। बेद पुरान प्रसंसहि जाही।।

    अर्थ (Hindi)

    लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही। बेद पुरान प्रसंसहि जाही।।

  1507. RCM 1.142.5
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    देवहूति पुनि तासु कुमारी। जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    देवहूति पुनि तासु कुमारी। जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी।।

  1508. RCM 1.142.6
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    आदिदेव प्रभु दीनदयाला। जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    आदिदेव प्रभु दीनदयाला। जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला।।

  1509. RCM 1.142.7
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    सांख्य सास्त्र जिन्ह प्रगट बखाना। तत्व बिचार निपुन भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सांख्य सास्त्र जिन्ह प्रगट बखाना। तत्व बिचार निपुन भगवाना।।

  1510. RCM 1.142.8
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    तेहिं मनु राज कीन्ह बहु काला। प्रभु आयसु सब बिधि प्रतिपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं मनु राज कीन्ह बहु काला। प्रभु आयसु सब बिधि प्रतिपाला।।

  1511. RCM 1.142.9
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    होइ न बिषय बिराग भवन बसत भा चौथपन।

    अर्थ (Hindi)

    होइ न बिषय बिराग भवन बसत भा चौथपन।

  1512. RCM 1.142.10
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    हृदयँ बहुत दुख लाग जनम गयउ हरिभगति बिनु।।142।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ बहुत दुख लाग जनम गयउ हरिभगति बिनु।।142।।

  1513. RCM 1.143.1
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    बरबस राज सुतहि तब दीन्हा। नारि समेत गवन बन कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    बरबस राज सुतहि तब दीन्हा। नारि समेत गवन बन कीन्हा।।

  1514. RCM 1.143.2
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    तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता।।

    अर्थ (Hindi)

    तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता।।

  1515. RCM 1.143.3
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    बसहिं तहाँ मुनि सिद्ध समाजा। तहँ हियँ हरषि चलेउ मनु राजा।।

    अर्थ (Hindi)

    बसहिं तहाँ मुनि सिद्ध समाजा। तहँ हियँ हरषि चलेउ मनु राजा।।

  1516. RCM 1.143.4
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    पंथ जात सोहहिं मतिधीरा। ग्यान भगति जनु धरें सरीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    पंथ जात सोहहिं मतिधीरा। ग्यान भगति जनु धरें सरीरा।।

  1517. RCM 1.143.5
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    पहुँचे जाइ धेनुमति तीरा। हरषि नहाने निरमल नीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    पहुँचे जाइ धेनुमति तीरा। हरषि नहाने निरमल नीरा।।

  1518. RCM 1.143.6
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    आए मिलन सिद्ध मुनि ग्यानी। धरम धुरंधर नृपरिषि जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    आए मिलन सिद्ध मुनि ग्यानी। धरम धुरंधर नृपरिषि जानी।।

  1519. RCM 1.143.7
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    जहँ जँह तीरथ रहे सुहाए। मुनिन्ह सकल सादर करवाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ जँह तीरथ रहे सुहाए। मुनिन्ह सकल सादर करवाए।।

  1520. RCM 1.143.8
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    कृस सरीर मुनिपट परिधाना। सत समाज नित सुनहिं पुराना ।

    अर्थ (Hindi)

    कृस सरीर मुनिपट परिधाना। सत समाज नित सुनहिं पुराना ।

  1521. RCM 1.143.9
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    द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।

    अर्थ (Hindi)

    द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।

  1522. RCM 1.143.10
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    बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग।।143।।

    अर्थ (Hindi)

    बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग।।143।।

  1523. RCM 1.144.1
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    करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।

  1524. RCM 1.144.2
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    पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।

  1525. RCM 1.144.3
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    उर अभिलाष निंरंतर होई। देखअ नयन परम प्रभु सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    उर अभिलाष निंरंतर होई। देखअ नयन परम प्रभु सोई।।

  1526. RCM 1.144.4
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    अगुन अखंड अनंत अनादी। जेहि चिंतहिं परमारथबादी।।

    अर्थ (Hindi)

    अगुन अखंड अनंत अनादी। जेहि चिंतहिं परमारथबादी।।

  1527. RCM 1.144.5
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    नेति नेति जेहि बेद निरूपा। निजानंद निरुपाधि अनूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    नेति नेति जेहि बेद निरूपा। निजानंद निरुपाधि अनूपा।।

  1528. RCM 1.144.6
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    संभु बिरंचि बिष्नु भगवाना। उपजहिं जासु अंस तें नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु बिरंचि बिष्नु भगवाना। उपजहिं जासु अंस तें नाना।।

  1529. RCM 1.144.7
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    ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।

    अर्थ (Hindi)

    ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।

  1530. RCM 1.144.8
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    जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।

  1531. RCM 1.144.9
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    एहि बिधि बीतें बरष षट सहस बारि आहार।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि बीतें बरष षट सहस बारि आहार।

  1532. RCM 1.144.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संबत सप्त सहस्त्र पुनि रहे समीर अधार।।144।।

    अर्थ (Hindi)

    संबत सप्त सहस्त्र पुनि रहे समीर अधार।।144।।

  1533. RCM 1.145.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरष सहस दस त्यागेउ सोऊ। ठाढ़े रहे एक पद दोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    बरष सहस दस त्यागेउ सोऊ। ठाढ़े रहे एक पद दोऊ।।

  1534. RCM 1.145.2
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    बिधि हरि तप देखि अपारा। मनु समीप आए बहु बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधि हरि तप देखि अपारा। मनु समीप आए बहु बारा।।

  1535. RCM 1.145.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मागहु बर बहु भाँति लोभाए। परम धीर नहिं चलहिं चलाए।।

    अर्थ (Hindi)

    मागहु बर बहु भाँति लोभाए। परम धीर नहिं चलहिं चलाए।।

  1536. RCM 1.145.4
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    अस्थिमात्र होइ रहे सरीरा। तदपि मनाग मनहिं नहिं पीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्थिमात्र होइ रहे सरीरा। तदपि मनाग मनहिं नहिं पीरा।।

  1537. RCM 1.145.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु सर्बग्य दास निज जानी। गति अनन्य तापस नृप रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु सर्बग्य दास निज जानी। गति अनन्य तापस नृप रानी।।

  1538. RCM 1.145.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मागु मागु बरु भै नभ बानी। परम गभीर कृपामृत सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मागु मागु बरु भै नभ बानी। परम गभीर कृपामृत सानी।।

  1539. RCM 1.145.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मृतक जिआवनि गिरा सुहाई। श्रबन रंध्र होइ उर जब आई।।

    अर्थ (Hindi)

    मृतक जिआवनि गिरा सुहाई। श्रबन रंध्र होइ उर जब आई।।

  1540. RCM 1.145.8
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    ह्रष्टपुष्ट तन भए सुहाए। मानहुँ अबहिं भवन ते आए।।

    अर्थ (Hindi)

    ह्रष्टपुष्ट तन भए सुहाए। मानहुँ अबहिं भवन ते आए।।

  1541. RCM 1.145.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात।

    अर्थ (Hindi)

    श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात।

  1542. RCM 1.145.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात।।145।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात।।145।।

  1543. RCM 1.146.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू।।

  1544. RCM 1.146.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सेवत सुलभ सकल सुख दायक। प्रनतपाल सचराचर नायक।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवत सुलभ सकल सुख दायक। प्रनतपाल सचराचर नायक।।

  1545. RCM 1.146.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू।।

  1546. RCM 1.146.4
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    जो सरूप बस सिव मन माहीं। जेहि कारन मुनि जतन कराहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जो सरूप बस सिव मन माहीं। जेहि कारन मुनि जतन कराहीं।।

  1547. RCM 1.146.5
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    जो भुसुंडि मन मानस हंसा। सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा।।

    अर्थ (Hindi)

    जो भुसुंडि मन मानस हंसा। सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा।।

  1548. RCM 1.146.6
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    देखहिं हम सो रूप भरि लोचन। कृपा करहु प्रनतारति मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    देखहिं हम सो रूप भरि लोचन। कृपा करहु प्रनतारति मोचन।।

  1549. RCM 1.146.7
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    दंपति बचन परम प्रिय लागे। मुदुल बिनीत प्रेम रस पागे।।

    अर्थ (Hindi)

    दंपति बचन परम प्रिय लागे। मुदुल बिनीत प्रेम रस पागे।।

  1550. RCM 1.146.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भगत बछल प्रभु कृपानिधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    भगत बछल प्रभु कृपानिधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।

  1551. RCM 1.146.9
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    नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर स्याम।

    अर्थ (Hindi)

    नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर स्याम।

  1552. RCM 1.146.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लाजहिं तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम।।146।।

    अर्थ (Hindi)

    लाजहिं तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम।।146।।

  1553. RCM 1.147.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सरद मयंक बदन छबि सींवा। चारु कपोल चिबुक दर ग्रीवा।।

    अर्थ (Hindi)

    सरद मयंक बदन छबि सींवा। चारु कपोल चिबुक दर ग्रीवा।।

  1554. RCM 1.147.2
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    अधर अरुन रद सुंदर नासा। बिधु कर निकर बिनिंदक हासा।।

    अर्थ (Hindi)

    अधर अरुन रद सुंदर नासा। बिधु कर निकर बिनिंदक हासा।।

  1555. RCM 1.147.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नव अबुंज अंबक छबि नीकी। चितवनि ललित भावँती जी की।।

    अर्थ (Hindi)

    नव अबुंज अंबक छबि नीकी। चितवनि ललित भावँती जी की।।

  1556. RCM 1.147.4
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    भुकुटि मनोज चाप छबि हारी। तिलक ललाट पटल दुतिकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भुकुटि मनोज चाप छबि हारी। तिलक ललाट पटल दुतिकारी।।

  1557. RCM 1.147.5
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    कुंडल मकर मुकुट सिर भ्राजा। कुटिल केस जनु मधुप समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंडल मकर मुकुट सिर भ्राजा। कुटिल केस जनु मधुप समाजा।।

  1558. RCM 1.147.6
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    उर श्रीबत्स रुचिर बनमाला। पदिक हार भूषन मनिजाला।।

    अर्थ (Hindi)

    उर श्रीबत्स रुचिर बनमाला। पदिक हार भूषन मनिजाला।।

  1559. RCM 1.147.7
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    केहरि कंधर चारु जनेउ। बाहु बिभूषन सुंदर तेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    केहरि कंधर चारु जनेउ। बाहु बिभूषन सुंदर तेऊ।।

  1560. RCM 1.147.8
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    करि कर सरि सुभग भुजदंडा। कटि निषंग कर सर कोदंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    करि कर सरि सुभग भुजदंडा। कटि निषंग कर सर कोदंडा।।

  1561. RCM 1.147.9
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    तडित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि।।

    अर्थ (Hindi)

    तडित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि।।

  1562. RCM 1.147.10
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    नाभि मनोहर लेति जनु जमुन भवँर छबि छीनि।।147।।

    अर्थ (Hindi)

    नाभि मनोहर लेति जनु जमुन भवँर छबि छीनि।।147।।

  1563. RCM 1.148.1
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    पद राजीव बरनि नहि जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पद राजीव बरनि नहि जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं।।

  1564. RCM 1.148.2
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    बाम भाग सोभति अनुकूला। आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला।।

    अर्थ (Hindi)

    बाम भाग सोभति अनुकूला। आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला।।

  1565. RCM 1.148.3
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    जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।।

  1566. RCM 1.148.4
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    भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई।।

  1567. RCM 1.148.5
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    छबिसमुद्र हरि रूप बिलोकी। एकटक रहे नयन पट रोकी।।

    अर्थ (Hindi)

    छबिसमुद्र हरि रूप बिलोकी। एकटक रहे नयन पट रोकी।।

  1568. RCM 1.148.6
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    चितवहिं सादर रूप अनूपा। तृप्ति न मानहिं मनु सतरूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    चितवहिं सादर रूप अनूपा। तृप्ति न मानहिं मनु सतरूपा।।

  1569. RCM 1.148.7
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    हरष बिबस तन दसा भुलानी। परे दंड इव गहि पद पानी।।

    अर्थ (Hindi)

    हरष बिबस तन दसा भुलानी। परे दंड इव गहि पद पानी।।

  1570. RCM 1.148.8
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    सिर परसे प्रभु निज कर कंजा। तुरत उठाए करुनापुंजा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिर परसे प्रभु निज कर कंजा। तुरत उठाए करुनापुंजा।।

  1571. RCM 1.148.9
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    बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि जानि।

    अर्थ (Hindi)

    बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि जानि।

  1572. RCM 1.148.10
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    मागहु बर जोइ भाव मन महादानि अनुमानि।।148।।

    अर्थ (Hindi)

    मागहु बर जोइ भाव मन महादानि अनुमानि।।148।।

  1573. RCM 1.149.1
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    सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी। धरि धीरजु बोली मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी। धरि धीरजु बोली मृदु बानी।।

  1574. RCM 1.149.2
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    नाथ देखि पद कमल तुम्हारे। अब पूरे सब काम हमारे।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ देखि पद कमल तुम्हारे। अब पूरे सब काम हमारे।।

  1575. RCM 1.149.3
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    एक लालसा बड़ि उर माही। सुगम अगम कहि जात सो नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    एक लालसा बड़ि उर माही। सुगम अगम कहि जात सो नाहीं।।

  1576. RCM 1.149.4
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    तुम्हहि देत अति सुगम गोसाईं। अगम लाग मोहि निज कृपनाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हहि देत अति सुगम गोसाईं। अगम लाग मोहि निज कृपनाईं।।

  1577. RCM 1.149.5
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    जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।।

  1578. RCM 1.149.6
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    तासु प्रभा जान नहिं सोई। तथा हृदयँ मम संसय होई।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु प्रभा जान नहिं सोई। तथा हृदयँ मम संसय होई।।

  1579. RCM 1.149.7
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    सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।।

    अर्थ (Hindi)

    सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।।

  1580. RCM 1.149.8
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    सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि। मोरें नहिं अदेय कछु तोही।।

    अर्थ (Hindi)

    सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि। मोरें नहिं अदेय कछु तोही।।

  1581. RCM 1.149.9
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    दानि सिरोमनि कृपानिधि नाथ कहउँ सतिभाउ।।

    अर्थ (Hindi)

    दानि सिरोमनि कृपानिधि नाथ कहउँ सतिभाउ।।

  1582. RCM 1.149.10
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    चाहउँ तुम्हहि समान सुत प्रभु सन कवन दुराउ।।149।।

    अर्थ (Hindi)

    चाहउँ तुम्हहि समान सुत प्रभु सन कवन दुराउ।।149।।

  1583. RCM 1.150.1
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    देखि प्रीति सुनि बचन अमोले। एवमस्तु करुनानिधि बोले।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि प्रीति सुनि बचन अमोले। एवमस्तु करुनानिधि बोले।।

  1584. RCM 1.150.2
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    आपु सरिस खोजौं कहँ जाई। नृप तव तनय होब मैं आई।।

    अर्थ (Hindi)

    आपु सरिस खोजौं कहँ जाई। नृप तव तनय होब मैं आई।।

  1585. RCM 1.150.3
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    सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।।

    अर्थ (Hindi)

    सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।।

  1586. RCM 1.150.4
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    जो बरु नाथ चतुर नृप मागा। सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    जो बरु नाथ चतुर नृप मागा। सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा।।

  1587. RCM 1.150.5
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    प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।।

  1588. RCM 1.150.6
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    तुम्ह ब्रह्मादि जनक जग स्वामी। ब्रह्म सकल उर अंतरजामी।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह ब्रह्मादि जनक जग स्वामी। ब्रह्म सकल उर अंतरजामी।।

  1589. RCM 1.150.7
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    अस समुझत मन संसय होई। कहा जो प्रभु प्रवान पुनि सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    अस समुझत मन संसय होई। कहा जो प्रभु प्रवान पुनि सोई।।

  1590. RCM 1.150.8
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    जे निज भगत नाथ तव अहहीं। जो सुख पावहिं जो गति लहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जे निज भगत नाथ तव अहहीं। जो सुख पावहिं जो गति लहहीं।।

  1591. RCM 1.150.9
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    सोइ सुख सोइ गति सोइ भगति सोइ निज चरन सनेहु।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ सुख सोइ गति सोइ भगति सोइ निज चरन सनेहु।।

  1592. RCM 1.150.10
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    सोइ बिबेक सोइ रहनि प्रभु हमहि कृपा करि देहु।।150।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ बिबेक सोइ रहनि प्रभु हमहि कृपा करि देहु।।150।।

  1593. RCM 1.151.1
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    सुनु मृदु गूढ़ रुचिर बर रचना। कृपासिंधु बोले मृदु बचना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मृदु गूढ़ रुचिर बर रचना। कृपासिंधु बोले मृदु बचना।।

  1594. RCM 1.151.2
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    जो कछु रुचि तुम्हेर मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जो कछु रुचि तुम्हेर मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं।।

  1595. RCM 1.151.3
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    मातु बिबेक अलोकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ।

    अर्थ (Hindi)

    मातु बिबेक अलोकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ।

  1596. RCM 1.151.4
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    बंदि चरन मनु कहेउ बहोरी। अवर एक बिनति प्रभु मोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदि चरन मनु कहेउ बहोरी। अवर एक बिनति प्रभु मोरी।।

  1597. RCM 1.151.5
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    सुत बिषइक तव पद रति होऊ। मोहि बड़ मूढ़ कहै किन कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत बिषइक तव पद रति होऊ। मोहि बड़ मूढ़ कहै किन कोऊ।।

  1598. RCM 1.151.6
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    मनि बिनु फनि जिमि जल बिनु मीना। मम जीवन तिमि तुम्हहि अधीना।।

    अर्थ (Hindi)

    मनि बिनु फनि जिमि जल बिनु मीना। मम जीवन तिमि तुम्हहि अधीना।।

  1599. RCM 1.151.7
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    अस बरु मागि चरन गहि रहेऊ। एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बरु मागि चरन गहि रहेऊ। एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ।।

  1600. RCM 1.151.8
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    अब तुम्ह मम अनुसासन मानी। बसहु जाइ सुरपति रजधानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अब तुम्ह मम अनुसासन मानी। बसहु जाइ सुरपति रजधानी।।

  1601. RCM 1.151.9
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    तहँ करि भोग बिसाल तात गउँ कछु काल पुनि।

    अर्थ (Hindi)

    तहँ करि भोग बिसाल तात गउँ कछु काल पुनि।

  1602. RCM 1.151.10
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    होइहहु अवध भुआल तब मैं होब तुम्हार सुत।।151।।

    अर्थ (Hindi)

    होइहहु अवध भुआल तब मैं होब तुम्हार सुत।।151।।

  1603. RCM 1.152.1
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    इच्छामय नरबेष सँवारें। होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारे।।

    अर्थ (Hindi)

    इच्छामय नरबेष सँवारें। होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारे।।

  1604. RCM 1.152.2
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    अंसन्ह सहित देह धरि ताता। करिहउँ चरित भगत सुखदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    अंसन्ह सहित देह धरि ताता। करिहउँ चरित भगत सुखदाता।।

  1605. RCM 1.152.3
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    जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।।

    अर्थ (Hindi)

    जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।।

  1606. RCM 1.152.4
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    आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया। सोउ अवतरिहि मोरि यह माया।।

    अर्थ (Hindi)

    आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया। सोउ अवतरिहि मोरि यह माया।।

  1607. RCM 1.152.5
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    पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।।

  1608. RCM 1.152.6
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    पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना। अंतरधान भए भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना। अंतरधान भए भगवाना।।

  1609. RCM 1.152.7
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    दंपति उर धरि भगत कृपाला। तेहिं आश्रम निवसे कछु काला।।

    अर्थ (Hindi)

    दंपति उर धरि भगत कृपाला। तेहिं आश्रम निवसे कछु काला।।

  1610. RCM 1.152.8
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    समय पाइ तनु तजि अनयासा। जाइ कीन्ह अमरावति बासा।।

    अर्थ (Hindi)

    समय पाइ तनु तजि अनयासा। जाइ कीन्ह अमरावति बासा।।

  1611. RCM 1.152.9
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    यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु।

    अर्थ (Hindi)

    यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु।

  1612. RCM 1.152.10
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    भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु।।152।।

    अर्थ (Hindi)

    भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु।।152।।

  1613. RCM 1.153.1
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    सुनु मुनि कथा पुनीत पुरानी। जो गिरिजा प्रति संभु बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मुनि कथा पुनीत पुरानी। जो गिरिजा प्रति संभु बखानी।।

  1614. RCM 1.153.2
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    बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू।।

  1615. RCM 1.153.3
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    धरम धुरंधर नीति निधाना। तेज प्रताप सील बलवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    धरम धुरंधर नीति निधाना। तेज प्रताप सील बलवाना।।

  1616. RCM 1.153.4
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    तेहि कें भए जुगल सुत बीरा। सब गुन धाम महा रनधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि कें भए जुगल सुत बीरा। सब गुन धाम महा रनधीरा।।

  1617. RCM 1.153.5
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    राज धनी जो जेठ सुत आही। नाम प्रतापभानु अस ताही।।

    अर्थ (Hindi)

    राज धनी जो जेठ सुत आही। नाम प्रतापभानु अस ताही।।

  1618. RCM 1.153.6
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    अपर सुतहि अरिमर्दन नामा। भुजबल अतुल अचल संग्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    अपर सुतहि अरिमर्दन नामा। भुजबल अतुल अचल संग्रामा।।

  1619. RCM 1.153.7
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    भाइहि भाइहि परम समीती। सकल दोष छल बरजित प्रीती।।

    अर्थ (Hindi)

    भाइहि भाइहि परम समीती। सकल दोष छल बरजित प्रीती।।

  1620. RCM 1.153.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जेठे सुतहि राज नृप दीन्हा। हरि हित आपु गवन बन कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेठे सुतहि राज नृप दीन्हा। हरि हित आपु गवन बन कीन्हा।।

  1621. RCM 1.153.9
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    जब प्रतापरबि भयउ नृप फिरी दोहाई देस।

    अर्थ (Hindi)

    जब प्रतापरबि भयउ नृप फिरी दोहाई देस।

  1622. RCM 1.153.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रजा पाल अति बेदबिधि कतहुँ नहीं अघ लेस।।153।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रजा पाल अति बेदबिधि कतहुँ नहीं अघ लेस।।153।।

  1623. RCM 1.154.1
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    नृप हितकारक सचिव सयाना। नाम धरमरुचि सुक्र समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप हितकारक सचिव सयाना। नाम धरमरुचि सुक्र समाना।।

  1624. RCM 1.154.2
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    सचिव सयान बंधु बलबीरा। आपु प्रतापपुंज रनधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सचिव सयान बंधु बलबीरा। आपु प्रतापपुंज रनधीरा।।

  1625. RCM 1.154.3
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    सेन संग चतुरंग अपारा। अमित सुभट सब समर जुझारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सेन संग चतुरंग अपारा। अमित सुभट सब समर जुझारा।।

  1626. RCM 1.154.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सेन बिलोकि राउ हरषाना। अरु बाजे गहगहे निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सेन बिलोकि राउ हरषाना। अरु बाजे गहगहे निसाना।।

  1627. RCM 1.154.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिजय हेतु कटकई बनाई। सुदिन साधि नृप चलेउ बजाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिजय हेतु कटकई बनाई। सुदिन साधि नृप चलेउ बजाई।।

  1628. RCM 1.154.6
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    जँह तहँ परीं अनेक लराईं। जीते सकल भूप बरिआई।।

    अर्थ (Hindi)

    जँह तहँ परीं अनेक लराईं। जीते सकल भूप बरिआई।।

  1629. RCM 1.154.7
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    सप्त दीप भुजबल बस कीन्हे। लै लै दंड छाड़ि नृप दीन्हें।।

    अर्थ (Hindi)

    सप्त दीप भुजबल बस कीन्हे। लै लै दंड छाड़ि नृप दीन्हें।।

  1630. RCM 1.154.8
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    सकल अवनि मंडल तेहि काला। एक प्रतापभानु महिपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल अवनि मंडल तेहि काला। एक प्रतापभानु महिपाला।।

  1631. RCM 1.154.9
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    स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।

    अर्थ (Hindi)

    स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।

  1632. RCM 1.154.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु।।154।।

    अर्थ (Hindi)

    अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु।।154।।

  1633. RCM 1.155.1
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    भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई।।

  1634. RCM 1.155.2
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    सब दुख बरजित प्रजा सुखारी। धरमसील सुंदर नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब दुख बरजित प्रजा सुखारी। धरमसील सुंदर नर नारी।।

  1635. RCM 1.155.3
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    सचिव धरमरुचि हरि पद प्रीती। नृप हित हेतु सिखव नित नीती।।

    अर्थ (Hindi)

    सचिव धरमरुचि हरि पद प्रीती। नृप हित हेतु सिखव नित नीती।।

  1636. RCM 1.155.4
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    गुर सुर संत पितर महिदेवा। करइ सदा नृप सब कै सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर सुर संत पितर महिदेवा। करइ सदा नृप सब कै सेवा।।

  1637. RCM 1.155.5
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    भूप धरम जे बेद बखाने। सकल करइ सादर सुख माने।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप धरम जे बेद बखाने। सकल करइ सादर सुख माने।।

  1638. RCM 1.155.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दिन प्रति देह बिबिध बिधि दाना। सुनहु सास्त्र बर बेद पुराना।।

    अर्थ (Hindi)

    दिन प्रति देह बिबिध बिधि दाना। सुनहु सास्त्र बर बेद पुराना।।

  1639. RCM 1.155.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाना बापीं कूप तड़ागा। सुमन बाटिका सुंदर बागा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना बापीं कूप तड़ागा। सुमन बाटिका सुंदर बागा।।

  1640. RCM 1.155.8
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    बिप्रभवन सुरभवन सुहाए। सब तीरथन्ह बिचित्र बनाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रभवन सुरभवन सुहाए। सब तीरथन्ह बिचित्र बनाए।।

  1641. RCM 1.155.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग।

    अर्थ (Hindi)

    जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग।

  1642. RCM 1.155.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बार सहस्त्र सहस्त्र नृप किए सहित अनुराग।।155।।

    अर्थ (Hindi)

    बार सहस्त्र सहस्त्र नृप किए सहित अनुराग।।155।।

  1643. RCM 1.156.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।।

  1644. RCM 1.156.2
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    करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।।

  1645. RCM 1.156.3
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    चढ़ि बर बाजि बार एक राजा। मृगया कर सब साजि समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    चढ़ि बर बाजि बार एक राजा। मृगया कर सब साजि समाजा।।

  1646. RCM 1.156.4
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    बिंध्याचल गभीर बन गयऊ। मृग पुनीत बहु मारत भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    बिंध्याचल गभीर बन गयऊ। मृग पुनीत बहु मारत भयऊ।।

  1647. RCM 1.156.5
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    फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।।

  1648. RCM 1.156.6
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    बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।।

  1649. RCM 1.156.7
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    कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।।

  1650. RCM 1.156.8
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    घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।

  1651. RCM 1.156.9
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    नील महीधर सिखर सम देखि बिसाल बराहु।

    अर्थ (Hindi)

    नील महीधर सिखर सम देखि बिसाल बराहु।

  1652. RCM 1.156.10
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    चपरि चलेउ हय सुटुकि नृप हाँकि न होइ निबाहु।।156।।

    अर्थ (Hindi)

    चपरि चलेउ हय सुटुकि नृप हाँकि न होइ निबाहु।।156।।

  1653. RCM 1.157.1
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    आवत देखि अधिक रव बाजी। चलेउ बराह मरुत गति भाजी।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत देखि अधिक रव बाजी। चलेउ बराह मरुत गति भाजी।।

  1654. RCM 1.157.2
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    तुरत कीन्ह नृप सर संधाना। महि मिलि गयउ बिलोकत बाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत कीन्ह नृप सर संधाना। महि मिलि गयउ बिलोकत बाना।।

  1655. RCM 1.157.3
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    तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।

  1656. RCM 1.157.4
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    प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ संग लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ संग लागा।।

  1657. RCM 1.157.5
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    गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।

  1658. RCM 1.157.6
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    अति अकेल बन बिपुल कलेसू। तदपि न मृग मग तजइ नरेसू।।

    अर्थ (Hindi)

    अति अकेल बन बिपुल कलेसू। तदपि न मृग मग तजइ नरेसू।।

  1659. RCM 1.157.7
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    कोल बिलोकि भूप बड़ धीरा। भागि पैठ गिरिगुहाँ गभीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोल बिलोकि भूप बड़ धीरा। भागि पैठ गिरिगुहाँ गभीरा।।

  1660. RCM 1.157.8
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    अगम देखि नृप अति पछिताई। फिरेउ महाबन परेउ भुलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अगम देखि नृप अति पछिताई। फिरेउ महाबन परेउ भुलाई।।

  1661. RCM 1.157.9
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    खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।

    अर्थ (Hindi)

    खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।

  1662. RCM 1.157.10
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    खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत।।157।।

    अर्थ (Hindi)

    खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत।।157।।

  1663. RCM 1.158.1
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    फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।।

  1664. RCM 1.158.2
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    जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।

  1665. RCM 1.158.3
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    समय प्रतापभानु कर जानी। आपन अति असमय अनुमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    समय प्रतापभानु कर जानी। आपन अति असमय अनुमानी।।

  1666. RCM 1.158.4
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    गयउ न गृह मन बहुत गलानी। मिला न राजहि नृप अभिमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    गयउ न गृह मन बहुत गलानी। मिला न राजहि नृप अभिमानी।।

  1667. RCM 1.158.5
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    रिस उर मारि रंक जिमि राजा। बिपिन बसइ तापस कें साजा।।

    अर्थ (Hindi)

    रिस उर मारि रंक जिमि राजा। बिपिन बसइ तापस कें साजा।।

  1668. RCM 1.158.6
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    तासु समीप गवन नृप कीन्हा। यह प्रतापरबि तेहि तब चीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु समीप गवन नृप कीन्हा। यह प्रतापरबि तेहि तब चीन्हा।।

  1669. RCM 1.158.7
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    राउ तृषित नहि सो पहिचाना। देखि सुबेष महामुनि जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    राउ तृषित नहि सो पहिचाना। देखि सुबेष महामुनि जाना।।

  1670. RCM 1.158.8
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    उतरि तुरग तें कीन्ह प्रनामा। परम चतुर न कहेउ निज नामा।।

    अर्थ (Hindi)

    उतरि तुरग तें कीन्ह प्रनामा। परम चतुर न कहेउ निज नामा।।

  1671. RCM 1.158.9
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    भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ।

    अर्थ (Hindi)

    भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ।

  1672. RCM 1.158.10
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    मज्जन पान समेत हय कीन्ह नृपति हरषाइ।।158।।

    अर्थ (Hindi)

    मज्जन पान समेत हय कीन्ह नृपति हरषाइ।।158।।

  1673. RCM 1.159.1
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    गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ।।

  1674. RCM 1.159.2
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    आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी।।

  1675. RCM 1.159.3
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    को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें।।

    अर्थ (Hindi)

    को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें।।

  1676. RCM 1.159.4
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    चक्रबर्ति के लच्छन तोरें। देखत दया लागि अति मोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    चक्रबर्ति के लच्छन तोरें। देखत दया लागि अति मोरें।।

  1677. RCM 1.159.5
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    नाम प्रतापभानु अवनीसा। तासु सचिव मैं सुनहु मुनीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम प्रतापभानु अवनीसा। तासु सचिव मैं सुनहु मुनीसा।।

  1678. RCM 1.159.6
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    फिरत अहेरें परेउँ भुलाई। बडे भाग देखउँ पद आई।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरत अहेरें परेउँ भुलाई। बडे भाग देखउँ पद आई।।

  1679. RCM 1.159.7
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    हम कहँ दुर्लभ दरस तुम्हारा। जानत हौं कछु भल होनिहारा।।

    अर्थ (Hindi)

    हम कहँ दुर्लभ दरस तुम्हारा। जानत हौं कछु भल होनिहारा।।

  1680. RCM 1.159.8
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    कह मुनि तात भयउ अँधियारा। जोजन सत्तरि नगरु तुम्हारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कह मुनि तात भयउ अँधियारा। जोजन सत्तरि नगरु तुम्हारा।।

  1681. RCM 1.159.9
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    निसा घोर गम्भीर बन पंथ न सुनहु सुजान।

    अर्थ (Hindi)

    निसा घोर गम्भीर बन पंथ न सुनहु सुजान।

  1682. RCM 1.159.10
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    बसहु आजु अस जानि तुम्ह जाएहु होत बिहान।।159(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    बसहु आजु अस जानि तुम्ह जाएहु होत बिहान।।159(क)।।

  1683. RCM 1.159.11
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    तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।

    अर्थ (Hindi)

    तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।

  1684. RCM 1.159.12
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    आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ।।159(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ।।159(ख)।।

  1685. RCM 1.160.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।।

  1686. RCM 1.160.2
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    नृप बहु भाँती प्रसंसेउ ताही। चरन बंदी निज भाग्य सराही।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप बहु भाँती प्रसंसेउ ताही। चरन बंदी निज भाग्य सराही।।

  1687. RCM 1.160.3
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    पुनि बोले मृदु गिरा सुहाई। जानि पिता प्रभु करउँ ढिठाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि बोले मृदु गिरा सुहाई। जानि पिता प्रभु करउँ ढिठाई।।

  1688. RCM 1.160.4
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    मोहि मुनीस सुत सेवक जानी। नाथ नाम निज कहहु बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि मुनीस सुत सेवक जानी। नाथ नाम निज कहहु बखानी।।

  1689. RCM 1.160.5
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    तेहि न जान नृप नृपहि सो जाना। भूप सुह्रद सो कपट सयाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि न जान नृप नृपहि सो जाना। भूप सुह्रद सो कपट सयाना।।

  1690. RCM 1.160.6
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    बैरी पुनि छत्री पुनि राजा। छल बल कीन्ह चहइ निज काजा।।

    अर्थ (Hindi)

    बैरी पुनि छत्री पुनि राजा। छल बल कीन्ह चहइ निज काजा।।

  1691. RCM 1.160.7
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    समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।।

  1692. RCM 1.160.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदयँ हरषाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदयँ हरषाना।।

  1693. RCM 1.160.9
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    कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत।

    अर्थ (Hindi)

    कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत।

  1694. RCM 1.160.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेति।।160।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेति।।160।।

  1695. RCM 1.161.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना।।

  1696. RCM 1.161.2
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    सदा रहहि अपनपौ दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    सदा रहहि अपनपौ दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ।।

  1697. RCM 1.161.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि तें कहहि संत श्रुति टेरें। परम अकिंचन प्रिय हरि केरें।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि तें कहहि संत श्रुति टेरें। परम अकिंचन प्रिय हरि केरें।।

  1698. RCM 1.161.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा। होत बिरंचि सिवहि संदेहा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा। होत बिरंचि सिवहि संदेहा।।

  1699. RCM 1.161.5
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    जोसि सोसि तव चरन नमामी। मो पर कृपा करिअ अब स्वामी।।

    अर्थ (Hindi)

    जोसि सोसि तव चरन नमामी। मो पर कृपा करिअ अब स्वामी।।

  1700. RCM 1.161.6
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    सहज प्रीति भूपति कै देखी। आपु बिषय बिस्वास बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज प्रीति भूपति कै देखी। आपु बिषय बिस्वास बिसेषी।।

  1701. RCM 1.161.7
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    सब प्रकार राजहि अपनाई। बोलेउ अधिक सनेह जनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सब प्रकार राजहि अपनाई। बोलेउ अधिक सनेह जनाई।।

  1702. RCM 1.161.8
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    सुनु सतिभाउ कहउँ महिपाला। इहाँ बसत बीते बहु काला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सतिभाउ कहउँ महिपाला। इहाँ बसत बीते बहु काला।।

  1703. RCM 1.161.9
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    अब लगि मोहि न मिलेउ कोउ मैं न जनावउँ काहु।

    अर्थ (Hindi)

    अब लगि मोहि न मिलेउ कोउ मैं न जनावउँ काहु।

  1704. RCM 1.161.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लोकमान्यता अनल सम कर तप कानन दाहु।।161(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    लोकमान्यता अनल सम कर तप कानन दाहु।।161(क)।।

  1705. RCM 1.161.11
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    तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।

    अर्थ (Hindi)

    तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।

  1706. RCM 1.161.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।161(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।161(ख)।।

  1707. RCM 1.162.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।

  1708. RCM 1.162.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु जानत सब बिनहिं जनाएँ। कहहु कवनि सिधि लोक रिझाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु जानत सब बिनहिं जनाएँ। कहहु कवनि सिधि लोक रिझाएँ।।

  1709. RCM 1.162.3
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    तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।

  1710. RCM 1.162.4
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    अब जौं तात दुरावउँ तोही। दारुन दोष घटइ अति मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जौं तात दुरावउँ तोही। दारुन दोष घटइ अति मोही।।

  1711. RCM 1.162.5
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    जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा।।

    अर्थ (Hindi)

    जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा।।

  1712. RCM 1.162.6
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    देखा स्वबस कर्म मन बानी। तब बोला तापस बगध्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखा स्वबस कर्म मन बानी। तब बोला तापस बगध्यानी।।

  1713. RCM 1.162.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाम हमार एकतनु भाई। सुनि नृप बोले पुनि सिरु नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम हमार एकतनु भाई। सुनि नृप बोले पुनि सिरु नाई।।

  1714. RCM 1.162.8
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    कहहु नाम कर अरथ बखानी। मोहि सेवक अति आपन जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु नाम कर अरथ बखानी। मोहि सेवक अति आपन जानी।।

  1715. RCM 1.162.9
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    आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।

    अर्थ (Hindi)

    आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।

  1716. RCM 1.162.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि।।162।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि।।162।।

  1717. RCM 1.163.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।।

  1718. RCM 1.163.2
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    तपबल तें जग सृजइ बिधाता। तपबल बिष्नु भए परित्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    तपबल तें जग सृजइ बिधाता। तपबल बिष्नु भए परित्राता।।

  1719. RCM 1.163.3
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    तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।।

  1720. RCM 1.163.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा। कथा पुरातन कहै सो लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा। कथा पुरातन कहै सो लागा।।

  1721. RCM 1.163.5
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    करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।।

    अर्थ (Hindi)

    करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।।

  1722. RCM 1.163.6
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    उदभव पालन प्रलय कहानी। कहेसि अमित आचरज बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    उदभव पालन प्रलय कहानी। कहेसि अमित आचरज बखानी।।

  1723. RCM 1.163.7
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    सुनि महिप तापस बस भयऊ। आपन नाम कहत तब लयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि महिप तापस बस भयऊ। आपन नाम कहत तब लयऊ।।

  1724. RCM 1.163.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह तापस नृप जानउँ तोही। कीन्हेहु कपट लाग भल मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    कह तापस नृप जानउँ तोही। कीन्हेहु कपट लाग भल मोही।।

  1725. RCM 1.163.9
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    सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप।

  1726. RCM 1.163.10
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    मोहि तोहि पर अति प्रीति सोइ चतुरता बिचारि तव।।163।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि तोहि पर अति प्रीति सोइ चतुरता बिचारि तव।।163।।

  1727. RCM 1.164.1
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    नाम तुम्हार प्रताप दिनेसा। सत्यकेतु तव पिता नरेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम तुम्हार प्रताप दिनेसा। सत्यकेतु तव पिता नरेसा।।

  1728. RCM 1.164.2
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    गुर प्रसाद सब जानिअ राजा। कहिअ न आपन जानि अकाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर प्रसाद सब जानिअ राजा। कहिअ न आपन जानि अकाजा।।

  1729. RCM 1.164.3
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    देखि तात तव सहज सुधाई। प्रीति प्रतीति नीति निपुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि तात तव सहज सुधाई। प्रीति प्रतीति नीति निपुनाई।।

  1730. RCM 1.164.4
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    उपजि परि ममता मन मोरें। कहउँ कथा निज पूछे तोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    उपजि परि ममता मन मोरें। कहउँ कथा निज पूछे तोरें।।

  1731. RCM 1.164.5
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    अब प्रसन्न मैं संसय नाहीं। मागु जो भूप भाव मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अब प्रसन्न मैं संसय नाहीं। मागु जो भूप भाव मन माहीं।।

  1732. RCM 1.164.6
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    सुनि सुबचन भूपति हरषाना। गहि पद बिनय कीन्हि बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सुबचन भूपति हरषाना। गहि पद बिनय कीन्हि बिधि नाना।।

  1733. RCM 1.164.7
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    कृपासिंधु मुनि दरसन तोरें। चारि पदारथ करतल मोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपासिंधु मुनि दरसन तोरें। चारि पदारथ करतल मोरें।।

  1734. RCM 1.164.8
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    प्रभुहि तथापि प्रसन्न बिलोकी। मागि अगम बर होउँ असोकी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभुहि तथापि प्रसन्न बिलोकी। मागि अगम बर होउँ असोकी।।

  1735. RCM 1.164.9
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    जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ।

    अर्थ (Hindi)

    जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ।

  1736. RCM 1.164.10
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    एकछत्र रिपुहीन महि राज कलप सत होउ।।164।।

    अर्थ (Hindi)

    एकछत्र रिपुहीन महि राज कलप सत होउ।।164।।

  1737. RCM 1.165.1
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    कह तापस नृप ऐसेइ होऊ। कारन एक कठिन सुनु सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    कह तापस नृप ऐसेइ होऊ। कारन एक कठिन सुनु सोऊ।।

  1738. RCM 1.165.2
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    कालउ तुअ पद नाइहि सीसा। एक बिप्रकुल छाड़ि महीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    कालउ तुअ पद नाइहि सीसा। एक बिप्रकुल छाड़ि महीसा।।

  1739. RCM 1.165.3
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    तपबल बिप्र सदा बरिआरा। तिन्ह के कोप न कोउ रखवारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तपबल बिप्र सदा बरिआरा। तिन्ह के कोप न कोउ रखवारा।।

  1740. RCM 1.165.4
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    जौं बिप्रन्ह सब करहु नरेसा। तौ तुअ बस बिधि बिष्नु महेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं बिप्रन्ह सब करहु नरेसा। तौ तुअ बस बिधि बिष्नु महेसा।।

  1741. RCM 1.165.5
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    चल न ब्रह्मकुल सन बरिआई। सत्य कहउँ दोउ भुजा उठाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चल न ब्रह्मकुल सन बरिआई। सत्य कहउँ दोउ भुजा उठाई।।

  1742. RCM 1.165.6
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    बिप्र श्राप बिनु सुनु महिपाला। तोर नास नहि कवनेहुँ काला।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्र श्राप बिनु सुनु महिपाला। तोर नास नहि कवनेहुँ काला।।

  1743. RCM 1.165.7
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    हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।

  1744. RCM 1.165.8
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    तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्ब काल कल्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्ब काल कल्याना।।

  1745. RCM 1.165.9
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    एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि।

    अर्थ (Hindi)

    एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि।

  1746. RCM 1.165.10
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    मिलब हमार भुलाब निज कहहु त हमहि न खोरि।।165।।

    अर्थ (Hindi)

    मिलब हमार भुलाब निज कहहु त हमहि न खोरि।।165।।

  1747. RCM 1.166.1
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    तातें मै तोहि बरजउँ राजा। कहें कथा तव परम अकाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    तातें मै तोहि बरजउँ राजा। कहें कथा तव परम अकाजा।।

  1748. RCM 1.166.2
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    छठें श्रवन यह परत कहानी। नास तुम्हार सत्य मम बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    छठें श्रवन यह परत कहानी। नास तुम्हार सत्य मम बानी।।

  1749. RCM 1.166.3
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    यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।

    अर्थ (Hindi)

    यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।

  1750. RCM 1.166.4
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    आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।

  1751. RCM 1.166.5
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    सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा। द्विज गुर कोप कहहु को राखा।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा। द्विज गुर कोप कहहु को राखा।।

  1752. RCM 1.166.6
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    राखइ गुर जौं कोप बिधाता। गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    राखइ गुर जौं कोप बिधाता। गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता।।

  1753. RCM 1.166.7
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    जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।

  1754. RCM 1.166.8
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    एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।

  1755. RCM 1.166.9
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    होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ।

    अर्थ (Hindi)

    होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ।

  1756. RCM 1.166.10
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    तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ।।166।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ।।166।।

  1757. RCM 1.167.1
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    सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं। कष्टसाध्य पुनि होहिं कि नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं। कष्टसाध्य पुनि होहिं कि नाहीं।।

  1758. RCM 1.167.2
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    अहइ एक अति सुगम उपाई। तहाँ परंतु एक कठिनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अहइ एक अति सुगम उपाई। तहाँ परंतु एक कठिनाई।।

  1759. RCM 1.167.3
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    मम आधीन जुगुति नृप सोई। मोर जाब तव नगर न होई।।

    अर्थ (Hindi)

    मम आधीन जुगुति नृप सोई। मोर जाब तव नगर न होई।।

  1760. RCM 1.167.4
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    आजु लगें अरु जब तें भयऊँ। काहू के गृह ग्राम न गयऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    आजु लगें अरु जब तें भयऊँ। काहू के गृह ग्राम न गयऊँ।।

  1761. RCM 1.167.5
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    जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।।

  1762. RCM 1.167.6
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    सुनि महीस बोलेउ मृदु बानी। नाथ निगम असि नीति बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि महीस बोलेउ मृदु बानी। नाथ निगम असि नीति बखानी।।

  1763. RCM 1.167.7
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    बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।।

  1764. RCM 1.167.8
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    जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू।।

    अर्थ (Hindi)

    जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू।।

  1765. RCM 1.167.9
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    अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल।

  1766. RCM 1.167.10
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    मोहि लागि दुख सहिअ प्रभु सज्जन दीनदयाल।।167।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि लागि दुख सहिअ प्रभु सज्जन दीनदयाल।।167।।

  1767. RCM 1.168.1
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    जानि नृपहि आपन आधीना। बोला तापस कपट प्रबीना।।

    अर्थ (Hindi)

    जानि नृपहि आपन आधीना। बोला तापस कपट प्रबीना।।

  1768. RCM 1.168.2
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    सत्य कहउँ भूपति सुनु तोही। जग नाहिन दुर्लभ कछु मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य कहउँ भूपति सुनु तोही। जग नाहिन दुर्लभ कछु मोही।।

  1769. RCM 1.168.3
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    अवसि काज मैं करिहउँ तोरा। मन तन बचन भगत तैं मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अवसि काज मैं करिहउँ तोरा। मन तन बचन भगत तैं मोरा।।

  1770. RCM 1.168.4
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    जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ।।

  1771. RCM 1.168.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं नरेस मैं करौं रसोई। तुम्ह परुसहु मोहि जान न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं नरेस मैं करौं रसोई। तुम्ह परुसहु मोहि जान न कोई।।

  1772. RCM 1.168.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अन्न सो जोइ जोइ भोजन करई। सोइ सोइ तव आयसु अनुसरई।।

    अर्थ (Hindi)

    अन्न सो जोइ जोइ भोजन करई। सोइ सोइ तव आयसु अनुसरई।।

  1773. RCM 1.168.7
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    पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ।।

  1774. RCM 1.168.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जाइ उपाय रचहु नृप एहू। संबत भरि संकलप करेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ उपाय रचहु नृप एहू। संबत भरि संकलप करेहू।।

  1775. RCM 1.168.9
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    नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार।

    अर्थ (Hindi)

    नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार।

  1776. RCM 1.168.10
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    मैं तुम्हरे संकलप लगि दिनहिंकरिब जेवनार।।168।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं तुम्हरे संकलप लगि दिनहिंकरिब जेवनार।।168।।

  1777. RCM 1.169.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि भूप कष्ट अति थोरें। होइहहिं सकल बिप्र बस तोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि भूप कष्ट अति थोरें। होइहहिं सकल बिप्र बस तोरें।।

  1778. RCM 1.169.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करिहहिं बिप्र होम मख सेवा। तेहिं प्रसंग सहजेहिं बस देवा।।

    अर्थ (Hindi)

    करिहहिं बिप्र होम मख सेवा। तेहिं प्रसंग सहजेहिं बस देवा।।

  1779. RCM 1.169.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    और एक तोहि कहऊँ लखाऊ। मैं एहि बेष न आउब काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    और एक तोहि कहऊँ लखाऊ। मैं एहि बेष न आउब काऊ।।

  1780. RCM 1.169.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुम्हरे उपरोहित कहुँ राया। हरि आनब मैं करि निज माया।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हरे उपरोहित कहुँ राया। हरि आनब मैं करि निज माया।।

  1781. RCM 1.169.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तपबल तेहि करि आपु समाना। रखिहउँ इहाँ बरष परवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तपबल तेहि करि आपु समाना। रखिहउँ इहाँ बरष परवाना।।

  1782. RCM 1.169.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मैं धरि तासु बेषु सुनु राजा। सब बिधि तोर सँवारब काजा।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं धरि तासु बेषु सुनु राजा। सब बिधि तोर सँवारब काजा।।

  1783. RCM 1.169.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे।।

    अर्थ (Hindi)

    गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे।।

  1784. RCM 1.169.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मैं तपबल तोहि तुरग समेता। पहुँचेहउँ सोवतहि निकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं तपबल तोहि तुरग समेता। पहुँचेहउँ सोवतहि निकेता।।

  1785. RCM 1.169.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मैं आउब सोइ बेषु धरि पहिचानेहु तब मोहि।

    अर्थ (Hindi)

    मैं आउब सोइ बेषु धरि पहिचानेहु तब मोहि।

  1786. RCM 1.169.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जब एकांत बोलाइ सब कथा सुनावौं तोहि।।169।।

    अर्थ (Hindi)

    जब एकांत बोलाइ सब कथा सुनावौं तोहि।।169।।

  1787. RCM 1.170.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सयन कीन्ह नृप आयसु मानी। आसन जाइ बैठ छलग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सयन कीन्ह नृप आयसु मानी। आसन जाइ बैठ छलग्यानी।।

  1788. RCM 1.170.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    श्रमित भूप निद्रा अति आई। सो किमि सोव सोच अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रमित भूप निद्रा अति आई। सो किमि सोव सोच अधिकाई।।

  1789. RCM 1.170.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।।

    अर्थ (Hindi)

    कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।।

  1790. RCM 1.170.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परम मित्र तापस नृप केरा। जानइ सो अति कपट घनेरा।।

    अर्थ (Hindi)

    परम मित्र तापस नृप केरा। जानइ सो अति कपट घनेरा।।

  1791. RCM 1.170.5
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    तेहि के सत सुत अरु दस भाई। खल अति अजय देव दुखदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि के सत सुत अरु दस भाई। खल अति अजय देव दुखदाई।।

  1792. RCM 1.170.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रथमहि भूप समर सब मारे। बिप्र संत सुर देखि दुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथमहि भूप समर सब मारे। बिप्र संत सुर देखि दुखारे।।

  1793. RCM 1.170.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।।

  1794. RCM 1.170.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जेहि रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ।।

  1795. RCM 1.170.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।

    अर्थ (Hindi)

    रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।

  1796. RCM 1.170.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अजहुँ देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु।।170।।

    अर्थ (Hindi)

    अजहुँ देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु।।170।।

  1797. RCM 1.171.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।।

  1798. RCM 1.171.2
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    मित्रहि कहि सब कथा सुनाई। जातुधान बोला सुख पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मित्रहि कहि सब कथा सुनाई। जातुधान बोला सुख पाई।।

  1799. RCM 1.171.3
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    अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा। जौं तुम्ह कीन्ह मोर उपदेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा। जौं तुम्ह कीन्ह मोर उपदेसा।।

  1800. RCM 1.171.4
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    परिहरि सोच रहहु तुम्ह सोई। बिनु औषध बिआधि बिधि खोई।।

    अर्थ (Hindi)

    परिहरि सोच रहहु तुम्ह सोई। बिनु औषध बिआधि बिधि खोई।।

  1801. RCM 1.171.5
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    कुल समेत रिपु मूल बहाई। चौथे दिवस मिलब मैं आई।।

    अर्थ (Hindi)

    कुल समेत रिपु मूल बहाई। चौथे दिवस मिलब मैं आई।।

  1802. RCM 1.171.6
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    तापस नृपहि बहुत परितोषी। चला महाकपटी अतिरोषी।।

    अर्थ (Hindi)

    तापस नृपहि बहुत परितोषी। चला महाकपटी अतिरोषी।।

  1803. RCM 1.171.7
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    भानुप्रतापहि बाजि समेता। पहुँचाएसि छन माझ निकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    भानुप्रतापहि बाजि समेता। पहुँचाएसि छन माझ निकेता।।

  1804. RCM 1.171.8
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    नृपहि नारि पहिं सयन कराई। हयगृहँ बाँधेसि बाजि बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नृपहि नारि पहिं सयन कराई। हयगृहँ बाँधेसि बाजि बनाई।।

  1805. RCM 1.171.9
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    राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि।

    अर्थ (Hindi)

    राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि।

  1806. RCM 1.171.10
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    लै राखेसि गिरि खोह महुँ मायाँ करि मति भोरि।।171।।

    अर्थ (Hindi)

    लै राखेसि गिरि खोह महुँ मायाँ करि मति भोरि।।171।।

  1807. RCM 1.172.1
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    आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।।

  1808. RCM 1.172.2
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    जागेउ नृप अनभएँ बिहाना। देखि भवन अति अचरजु माना।।

    अर्थ (Hindi)

    जागेउ नृप अनभएँ बिहाना। देखि भवन अति अचरजु माना।।

  1809. RCM 1.172.3
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    मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।।

  1810. RCM 1.172.4
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    कानन गयउ बाजि चढ़ि तेहीं। पुर नर नारि न जानेउ केहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कानन गयउ बाजि चढ़ि तेहीं। पुर नर नारि न जानेउ केहीं।।

  1811. RCM 1.172.5
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    गएँ जाम जुग भूपति आवा। घर घर उत्सव बाज बधावा।।

    अर्थ (Hindi)

    गएँ जाम जुग भूपति आवा। घर घर उत्सव बाज बधावा।।

  1812. RCM 1.172.6
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    उपरोहितहि देख जब राजा। चकित बिलोकि सुमिरि सोइ काजा।।

    अर्थ (Hindi)

    उपरोहितहि देख जब राजा। चकित बिलोकि सुमिरि सोइ काजा।।

  1813. RCM 1.172.7
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    जुग सम नृपहि गए दिन तीनी। कपटी मुनि पद रह मति लीनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जुग सम नृपहि गए दिन तीनी। कपटी मुनि पद रह मति लीनी।।

  1814. RCM 1.172.8
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    समय जानि उपरोहित आवा। नृपहि मते सब कहि समुझावा।।

    अर्थ (Hindi)

    समय जानि उपरोहित आवा। नृपहि मते सब कहि समुझावा।।

  1815. RCM 1.172.9
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    नृप हरषेउ पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत।

    अर्थ (Hindi)

    नृप हरषेउ पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत।

  1816. RCM 1.172.10
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    बरे तुरत सत सहस बर बिप्र कुटुंब समेत।।172।।

    अर्थ (Hindi)

    बरे तुरत सत सहस बर बिप्र कुटुंब समेत।।172।।

  1817. RCM 1.173.1
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    उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई।।

    अर्थ (Hindi)

    उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई।।

  1818. RCM 1.173.2
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    मायामय तेहिं कीन्ह रसोई। बिंजन बहु गनि सकइ न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    मायामय तेहिं कीन्ह रसोई। बिंजन बहु गनि सकइ न कोई।।

  1819. RCM 1.173.3
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    बिबिध मृगन्ह कर आमिष राँधा। तेहि महुँ बिप्र माँसु खल साँधा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध मृगन्ह कर आमिष राँधा। तेहि महुँ बिप्र माँसु खल साँधा।।

  1820. RCM 1.173.4
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    भोजन कहुँ सब बिप्र बोलाए। पद पखारि सादर बैठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    भोजन कहुँ सब बिप्र बोलाए। पद पखारि सादर बैठाए।।

  1821. RCM 1.173.5
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    परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला।।

    अर्थ (Hindi)

    परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला।।

  1822. RCM 1.173.6
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    बिप्रबृंद उठि उठि गृह जाहू। है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रबृंद उठि उठि गृह जाहू। है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू।।

  1823. RCM 1.173.7
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    भयउ रसोईं भूसुर माँसू। सब द्विज उठे मानि बिस्वासू।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ रसोईं भूसुर माँसू। सब द्विज उठे मानि बिस्वासू।।

  1824. RCM 1.173.8
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    भूप बिकल मति मोहँ भुलानी। भावी बस आव मुख बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप बिकल मति मोहँ भुलानी। भावी बस आव मुख बानी।।

  1825. RCM 1.173.9
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    बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार।

    अर्थ (Hindi)

    बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार।

  1826. RCM 1.173.10
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    जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार।।173।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार।।173।।

  1827. RCM 1.174.1
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    छत्रबंधु तैं बिप्र बोलाई। घालै लिए सहित समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    छत्रबंधु तैं बिप्र बोलाई। घालै लिए सहित समुदाई।।

  1828. RCM 1.174.2
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    ईस्वर राखा धरम हमारा। जैहसि तैं समेत परिवारा।।

    अर्थ (Hindi)

    ईस्वर राखा धरम हमारा। जैहसि तैं समेत परिवारा।।

  1829. RCM 1.174.3
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    संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ।।

  1830. RCM 1.174.4
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    नृप सुनि श्राप बिकल अति त्रासा। भै बहोरि बर गिरा अकासा।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप सुनि श्राप बिकल अति त्रासा। भै बहोरि बर गिरा अकासा।।

  1831. RCM 1.174.5
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    बिप्रहु श्राप बिचारि न दीन्हा। नहिं अपराध भूप कछु कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रहु श्राप बिचारि न दीन्हा। नहिं अपराध भूप कछु कीन्हा।।

  1832. RCM 1.174.6
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    चकित बिप्र सब सुनि नभबानी। भूप गयउ जहँ भोजन खानी।।

    अर्थ (Hindi)

    चकित बिप्र सब सुनि नभबानी। भूप गयउ जहँ भोजन खानी।।

  1833. RCM 1.174.7
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    तहँ न असन नहिं बिप्र सुआरा। फिरेउ राउ मन सोच अपारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तहँ न असन नहिं बिप्र सुआरा। फिरेउ राउ मन सोच अपारा।।

  1834. RCM 1.174.8
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    सब प्रसंग महिसुरन्ह सुनाई। त्रसित परेउ अवनीं अकुलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सब प्रसंग महिसुरन्ह सुनाई। त्रसित परेउ अवनीं अकुलाई।।

  1835. RCM 1.174.9
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    भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर।

    अर्थ (Hindi)

    भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर।

  1836. RCM 1.174.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर।।174।।

    अर्थ (Hindi)

    किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर।।174।।

  1837. RCM 1.175.1
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    अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।।

  1838. RCM 1.175.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिचरत हंस काग किय जेहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिचरत हंस काग किय जेहीं।।

  1839. RCM 1.175.3
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    उपरोहितहि भवन पहुँचाई। असुर तापसहि खबरि जनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    उपरोहितहि भवन पहुँचाई। असुर तापसहि खबरि जनाई।।

  1840. RCM 1.175.4
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    तेहिं खल जहँ तहँ पत्र पठाए। सजि सजि सेन भूप सब धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं खल जहँ तहँ पत्र पठाए। सजि सजि सेन भूप सब धाए।।

  1841. RCM 1.175.5
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    घेरेन्हि नगर निसान बजाई। बिबिध भाँति नित होई लराई।।

    अर्थ (Hindi)

    घेरेन्हि नगर निसान बजाई। बिबिध भाँति नित होई लराई।।

  1842. RCM 1.175.6
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    जूझे सकल सुभट करि करनी। बंधु समेत परेउ नृप धरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जूझे सकल सुभट करि करनी। बंधु समेत परेउ नृप धरनी।।

  1843. RCM 1.175.7
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    सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।।

  1844. RCM 1.175.8
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    रिपु जिति सब नृप नगर बसाई। निज पुर गवने जय जसु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रिपु जिति सब नृप नगर बसाई। निज पुर गवने जय जसु पाई।।

  1845. RCM 1.175.9
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    भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम।

    अर्थ (Hindi)

    भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम।

  1846. RCM 1.175.10
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    धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम।।।175।।

    अर्थ (Hindi)

    धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम।।।175।।

  1847. RCM 1.176.1
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    काल पाइ मुनि सुनु सोइ राजा। भयउ निसाचर सहित समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    काल पाइ मुनि सुनु सोइ राजा। भयउ निसाचर सहित समाजा।।

  1848. RCM 1.176.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दस सिर ताहि बीस भुजदंडा। रावन नाम बीर बरिबंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    दस सिर ताहि बीस भुजदंडा। रावन नाम बीर बरिबंडा।।

  1849. RCM 1.176.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूप अनुज अरिमर्दन नामा। भयउ सो कुंभकरन बलधामा।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप अनुज अरिमर्दन नामा। भयउ सो कुंभकरन बलधामा।।

  1850. RCM 1.176.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सचिव जो रहा धरमरुचि जासू। भयउ बिमात्र बंधु लघु तासू।।

    अर्थ (Hindi)

    सचिव जो रहा धरमरुचि जासू। भयउ बिमात्र बंधु लघु तासू।।

  1851. RCM 1.176.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाम बिभीषन जेहि जग जाना। बिष्नुभगत बिग्यान निधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नाम बिभीषन जेहि जग जाना। बिष्नुभगत बिग्यान निधाना।।

  1852. RCM 1.176.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रहे जे सुत सेवक नृप केरे। भए निसाचर घोर घनेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    रहे जे सुत सेवक नृप केरे। भए निसाचर घोर घनेरे।।

  1853. RCM 1.176.7
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    कामरूप खल जिनस अनेका। कुटिल भयंकर बिगत बिबेका।।

    अर्थ (Hindi)

    कामरूप खल जिनस अनेका। कुटिल भयंकर बिगत बिबेका।।

  1854. RCM 1.176.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कृपा रहित हिंसक सब पापी। बरनि न जाहिं बिस्व परितापी।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपा रहित हिंसक सब पापी। बरनि न जाहिं बिस्व परितापी।।

  1855. RCM 1.176.9
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    उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप।

    अर्थ (Hindi)

    उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप।

  1856. RCM 1.176.10
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    तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अघरूप।।176।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अघरूप।।176।।

  1857. RCM 1.177.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई।।

  1858. RCM 1.177.2
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    गयउ निकट तप देखि बिधाता। मागहु बर प्रसन्न मैं ताता।।

    अर्थ (Hindi)

    गयउ निकट तप देखि बिधाता। मागहु बर प्रसन्न मैं ताता।।

  1859. RCM 1.177.3
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    करि बिनती पद गहि दससीसा। बोलेउ बचन सुनहु जगदीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बिनती पद गहि दससीसा। बोलेउ बचन सुनहु जगदीसा।।

  1860. RCM 1.177.4
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    हम काहू के मरहिं न मारें। बानर मनुज जाति दुइ बारें।।

    अर्थ (Hindi)

    हम काहू के मरहिं न मारें। बानर मनुज जाति दुइ बारें।।

  1861. RCM 1.177.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा।।

  1862. RCM 1.177.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि प्रभु कुंभकरन पहिं गयऊ। तेहि बिलोकि मन बिसमय भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि प्रभु कुंभकरन पहिं गयऊ। तेहि बिलोकि मन बिसमय भयऊ।।

  1863. RCM 1.177.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू।।

  1864. RCM 1.177.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास षट केरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास षट केरी।।

  1865. RCM 1.177.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गए बिभीषन पास पुनि कहेउ पुत्र बर मागु।

    अर्थ (Hindi)

    गए बिभीषन पास पुनि कहेउ पुत्र बर मागु।

  1866. RCM 1.177.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु।।177।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु।।177।।

  1867. RCM 1.178.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तिन्हि देइ बर ब्रह्म सिधाए। हरषित ते अपने गृह आए।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्हि देइ बर ब्रह्म सिधाए। हरषित ते अपने गृह आए।।

  1868. RCM 1.178.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मय तनुजा मंदोदरि नामा। परम सुंदरी नारि ललामा।।

    अर्थ (Hindi)

    मय तनुजा मंदोदरि नामा। परम सुंदरी नारि ललामा।।

  1869. RCM 1.178.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोइ मयँ दीन्हि रावनहि आनी। होइहि जातुधानपति जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ मयँ दीन्हि रावनहि आनी। होइहि जातुधानपति जानी।।

  1870. RCM 1.178.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हरषित भयउ नारि भलि पाई। पुनि दोउ बंधु बिआहेसि जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषित भयउ नारि भलि पाई। पुनि दोउ बंधु बिआहेसि जाई।।

  1871. RCM 1.178.5
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    गिरि त्रिकूट एक सिंधु मझारी। बिधि निर्मित दुर्गम अति भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरि त्रिकूट एक सिंधु मझारी। बिधि निर्मित दुर्गम अति भारी।।

  1872. RCM 1.178.6
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    सोइ मय दानवँ बहुरि सँवारा। कनक रचित मनिभवन अपारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ मय दानवँ बहुरि सँवारा। कनक रचित मनिभवन अपारा।।

  1873. RCM 1.178.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भोगावति जसि अहिकुल बासा। अमरावति जसि सक्रनिवासा।।

    अर्थ (Hindi)

    भोगावति जसि अहिकुल बासा। अमरावति जसि सक्रनिवासा।।

  1874. RCM 1.178.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तिन्ह तें अधिक रम्य अति बंका। जग बिख्यात नाम तेहि लंका।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह तें अधिक रम्य अति बंका। जग बिख्यात नाम तेहि लंका।।

  1875. RCM 1.178.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खाईं सिंधु गभीर अति चारिहुँ दिसि फिरि आव।

    अर्थ (Hindi)

    खाईं सिंधु गभीर अति चारिहुँ दिसि फिरि आव।

  1876. RCM 1.178.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कनक कोट मनि खचित दृढ़ बरनि न जाइ बनाव।।178(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक कोट मनि खचित दृढ़ बरनि न जाइ बनाव।।178(क)।।

  1877. RCM 1.178.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हरिप्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ।

    अर्थ (Hindi)

    हरिप्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ।

  1878. RCM 1.178.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सूर प्रतापी अतुलबल दल समेत बस सोइ।।178(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    सूर प्रतापी अतुलबल दल समेत बस सोइ।।178(ख)।।

  1879. RCM 1.179.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रहे तहाँ निसिचर भट भारे। ते सब सुरन्ह समर संघारे।।

    अर्थ (Hindi)

    रहे तहाँ निसिचर भट भारे। ते सब सुरन्ह समर संघारे।।

  1880. RCM 1.179.2
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    अब तहँ रहहिं सक्र के प्रेरे। रच्छक कोटि जच्छपति केरे।।

    अर्थ (Hindi)

    अब तहँ रहहिं सक्र के प्रेरे। रच्छक कोटि जच्छपति केरे।।

  1881. RCM 1.179.3
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    दसमुख कतहुँ खबरि असि पाई। सेन साजि गढ़ घेरेसि जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    दसमुख कतहुँ खबरि असि पाई। सेन साजि गढ़ घेरेसि जाई।।

  1882. RCM 1.179.4
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    देखि बिकट भट बड़ि कटकाई। जच्छ जीव लै गए पराई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि बिकट भट बड़ि कटकाई। जच्छ जीव लै गए पराई।।

  1883. RCM 1.179.5
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    फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।

  1884. RCM 1.179.6
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    सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।।

  1885. RCM 1.179.7
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    जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे। सुखी सकल रजनीचर कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे। सुखी सकल रजनीचर कीन्हे।।

  1886. RCM 1.179.8
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    एक बार कुबेर पर धावा। पुष्पक जान जीति लै आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार कुबेर पर धावा। पुष्पक जान जीति लै आवा।।

  1887. RCM 1.179.9
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    कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।

  1888. RCM 1.179.10
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    मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ।।179।।

    अर्थ (Hindi)

    मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ।।179।।

  1889. RCM 1.180.1
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    सुख संपति सुत सेन सहाई। जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुख संपति सुत सेन सहाई। जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई।।

  1890. RCM 1.180.2
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    नित नूतन सब बाढ़त जाई। जिमि प्रतिलाभ लोभ अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नूतन सब बाढ़त जाई। जिमि प्रतिलाभ लोभ अधिकाई।।

  1891. RCM 1.180.3
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    अतिबल कुंभकरन अस भ्राता। जेहि कहुँ नहिं प्रतिभट जग जाता।।

    अर्थ (Hindi)

    अतिबल कुंभकरन अस भ्राता। जेहि कहुँ नहिं प्रतिभट जग जाता।।

  1892. RCM 1.180.4
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    करइ पान सोवइ षट मासा। जागत होइ तिहुँ पुर त्रासा।।

    अर्थ (Hindi)

    करइ पान सोवइ षट मासा। जागत होइ तिहुँ पुर त्रासा।।

  1893. RCM 1.180.5
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    जौं दिन प्रति अहार कर सोई। बिस्व बेगि सब चौपट होई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं दिन प्रति अहार कर सोई। बिस्व बेगि सब चौपट होई।।

  1894. RCM 1.180.6
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    समर धीर नहिं जाइ बखाना। तेहि सम अमित बीर बलवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    समर धीर नहिं जाइ बखाना। तेहि सम अमित बीर बलवाना।।

  1895. RCM 1.180.7
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    बारिदनाद जेठ सुत तासू। भट महुँ प्रथम लीक जग जासू।।

    अर्थ (Hindi)

    बारिदनाद जेठ सुत तासू। भट महुँ प्रथम लीक जग जासू।।

  1896. RCM 1.180.8
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    जेहि न होइ रन सनमुख कोई। सुरपुर नितहिं परावन होई।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि न होइ रन सनमुख कोई। सुरपुर नितहिं परावन होई।।

  1897. RCM 1.180.9
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    कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।

    अर्थ (Hindi)

    कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।

  1898. RCM 1.180.10
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    एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय।।180।।

    अर्थ (Hindi)

    एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय।।180।।

  1899. RCM 1.181.1
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    कामरूप जानहिं सब माया। सपनेहुँ जिन्ह कें धरम न दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    कामरूप जानहिं सब माया। सपनेहुँ जिन्ह कें धरम न दाया।।

  1900. RCM 1.181.2
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    दसमुख बैठ सभाँ एक बारा। देखि अमित आपन परिवारा।।

    अर्थ (Hindi)

    दसमुख बैठ सभाँ एक बारा। देखि अमित आपन परिवारा।।

  1901. RCM 1.181.3
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    सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।।

  1902. RCM 1.181.4
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    सेन बिलोकि सहज अभिमानी। बोला बचन क्रोध मद सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सेन बिलोकि सहज अभिमानी। बोला बचन क्रोध मद सानी।।

  1903. RCM 1.181.5
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    सुनहु सकल रजनीचर जूथा। हमरे बैरी बिबुध बरूथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु सकल रजनीचर जूथा। हमरे बैरी बिबुध बरूथा।।

  1904. RCM 1.181.6
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    ते सनमुख नहिं करही लराई। देखि सबल रिपु जाहिं पराई।।

    अर्थ (Hindi)

    ते सनमुख नहिं करही लराई। देखि सबल रिपु जाहिं पराई।।

  1905. RCM 1.181.7
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    तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।।

  1906. RCM 1.181.8
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    द्विजभोजन मख होम सराधा।।सब कै जाइ करहु तुम्ह बाधा।।

    अर्थ (Hindi)

    द्विजभोजन मख होम सराधा।।सब कै जाइ करहु तुम्ह बाधा।।

  1907. RCM 1.181.9
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    छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं आइ।

    अर्थ (Hindi)

    छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं आइ।

  1908. RCM 1.181.10
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    तब मारिहउँ कि छाड़िहउँ भली भाँति अपनाइ।।181।।

    अर्थ (Hindi)

    तब मारिहउँ कि छाड़िहउँ भली भाँति अपनाइ।।181।।

  1909. RCM 1.182.1
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    मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा। दीन्ही सिख बलु बयरु बढ़ावा।।

    अर्थ (Hindi)

    मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा। दीन्ही सिख बलु बयरु बढ़ावा।।

  1910. RCM 1.182.2
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    जे सुर समर धीर बलवाना। जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जे सुर समर धीर बलवाना। जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना।।

  1911. RCM 1.182.3
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    तिन्हहि जीति रन आनेसु बाँधी। उठि सुत पितु अनुसासन काँधी।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्हहि जीति रन आनेसु बाँधी। उठि सुत पितु अनुसासन काँधी।।

  1912. RCM 1.182.4
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    एहि बिधि सबही अग्या दीन्ही। आपुनु चलेउ गदा कर लीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सबही अग्या दीन्ही। आपुनु चलेउ गदा कर लीन्ही।।

  1913. RCM 1.182.5
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    चलत दसानन डोलति अवनी। गर्जत गर्भ स्त्रवहिं सुर रवनी।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत दसानन डोलति अवनी। गर्जत गर्भ स्त्रवहिं सुर रवनी।।

  1914. RCM 1.182.6
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    रावन आवत सुनेउ सकोहा। देवन्ह तके मेरु गिरि खोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन आवत सुनेउ सकोहा। देवन्ह तके मेरु गिरि खोहा।।

  1915. RCM 1.182.7
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    दिगपालन्ह के लोक सुहाए। सूने सकल दसानन पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    दिगपालन्ह के लोक सुहाए। सूने सकल दसानन पाए।।

  1916. RCM 1.182.8
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    पुनि पुनि सिंघनाद करि भारी। देइ देवतन्ह गारि पचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि सिंघनाद करि भारी। देइ देवतन्ह गारि पचारी।।

  1917. RCM 1.182.9
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    रन मद मत्त फिरइ जग धावा। प्रतिभट खौजत कतहुँ न पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    रन मद मत्त फिरइ जग धावा। प्रतिभट खौजत कतहुँ न पावा।।

  1918. RCM 1.182.10
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    रबि ससि पवन बरुन धनधारी। अगिनि काल जम सब अधिकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रबि ससि पवन बरुन धनधारी। अगिनि काल जम सब अधिकारी।।

  1919. RCM 1.182.11
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    किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।

  1920. RCM 1.182.12
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    ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।।

  1921. RCM 1.182.13
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    आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।

    अर्थ (Hindi)

    आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।

  1922. RCM 1.182.14
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    भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।

    अर्थ (Hindi)

    भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।

  1923. RCM 1.182.15
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    मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र।।182(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र।।182(क)।।

  1924. RCM 1.182.16
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    देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।

    अर्थ (Hindi)

    देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।

  1925. RCM 1.182.17
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    जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि।।182ख।।

    अर्थ (Hindi)

    जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि।।182ख।।

  1926. RCM 1.183.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इंद्रजीत सन जो कछु कहेऊ। सो सब जनु पहिलेहिं करि रहेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    इंद्रजीत सन जो कछु कहेऊ। सो सब जनु पहिलेहिं करि रहेऊ।।

  1927. RCM 1.183.2
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    प्रथमहिं जिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा। तिन्ह कर चरित सुनहु जो कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथमहिं जिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा। तिन्ह कर चरित सुनहु जो कीन्हा।।

  1928. RCM 1.183.3
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    देखत भीमरूप सब पापी। निसिचर निकर देव परितापी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखत भीमरूप सब पापी। निसिचर निकर देव परितापी।।

  1929. RCM 1.183.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करहि उपद्रव असुर निकाया। नाना रूप धरहिं करि माया।।

    अर्थ (Hindi)

    करहि उपद्रव असुर निकाया। नाना रूप धरहिं करि माया।।

  1930. RCM 1.183.5
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    जेहि बिधि होइ धर्म निर्मूला। सो सब करहिं बेद प्रतिकूला।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि बिधि होइ धर्म निर्मूला। सो सब करहिं बेद प्रतिकूला।।

  1931. RCM 1.183.6
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    जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं। नगर गाउँ पुर आगि लगावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं। नगर गाउँ पुर आगि लगावहिं।।

  1932. RCM 1.183.7
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    सुभ आचरन कतहुँ नहिं होई। देव बिप्र गुरू मान न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभ आचरन कतहुँ नहिं होई। देव बिप्र गुरू मान न कोई।।

  1933. RCM 1.183.8
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    नहिं हरिभगति जग्य तप ग्याना। सपनेहुँ सुनिअ न बेद पुराना।।

    अर्थ (Hindi)

    नहिं हरिभगति जग्य तप ग्याना। सपनेहुँ सुनिअ न बेद पुराना।।

  1934. RCM 1.184.1
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    बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।

  1935. RCM 1.184.2
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    मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।।

  1936. RCM 1.184.3
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    जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।

  1937. RCM 1.184.4
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    अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी।।

  1938. RCM 1.184.5
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    गिरि सरि सिंधु भार नहिं मोही। जस मोहि गरुअ एक परद्रोही।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरि सरि सिंधु भार नहिं मोही। जस मोहि गरुअ एक परद्रोही।।

  1939. RCM 1.184.6
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    सकल धर्म देखइ बिपरीता। कहि न सकइ रावन भय भीता।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल धर्म देखइ बिपरीता। कहि न सकइ रावन भय भीता।।

  1940. RCM 1.184.7
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    धेनु रूप धरि हृदयँ बिचारी। गई तहाँ जहँ सुर मुनि झारी।।

    अर्थ (Hindi)

    धेनु रूप धरि हृदयँ बिचारी। गई तहाँ जहँ सुर मुनि झारी।।

  1941. RCM 1.184.8
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    निज संताप सुनाएसि रोई। काहू तें कछु काज न होई।।

    अर्थ (Hindi)

    निज संताप सुनाएसि रोई। काहू तें कछु काज न होई।।

  1942. RCM 1.185.1
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    बैठे सुर सब करहिं बिचारा। कहँ पाइअ प्रभु करिअ पुकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बैठे सुर सब करहिं बिचारा। कहँ पाइअ प्रभु करिअ पुकारा।।

  1943. RCM 1.185.2
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    पुर बैकुंठ जान कह कोई। कोउ कह पयनिधि बस प्रभु सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर बैकुंठ जान कह कोई। कोउ कह पयनिधि बस प्रभु सोई।।

  1944. RCM 1.185.3
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    जाके हृदयँ भगति जसि प्रीति। प्रभु तहँ प्रगट सदा तेहिं रीती।।

    अर्थ (Hindi)

    जाके हृदयँ भगति जसि प्रीति। प्रभु तहँ प्रगट सदा तेहिं रीती।।

  1945. RCM 1.185.4
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    तेहि समाज गिरिजा मैं रहेऊँ। अवसर पाइ बचन एक कहेऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि समाज गिरिजा मैं रहेऊँ। अवसर पाइ बचन एक कहेऊँ।।

  1946. RCM 1.185.5
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    हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना।।

  1947. RCM 1.185.6
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    देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं। कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं। कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं।।

  1948. RCM 1.185.7
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    अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी।।

    अर्थ (Hindi)

    अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी।।

  1949. RCM 1.185.8
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    मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना।।

  1950. RCM 1.185.9
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    सुनि बिरंचि मन हरष तन पुलकि नयन बह नीर।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि बिरंचि मन हरष तन पुलकि नयन बह नीर।

  1951. RCM 1.185.10
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    अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर।।185।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर।।185।।

  1952. RCM 1.186.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता।

    अर्थ (Hindi)

    जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता।

  1953. RCM 1.186.2
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    गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता।।

    अर्थ (Hindi)

    गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता।।

  1954. RCM 1.186.3
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    पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई।

    अर्थ (Hindi)

    पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई।

  1955. RCM 1.186.4
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    जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई।।

  1956. RCM 1.186.5
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    जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा।

    अर्थ (Hindi)

    जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा।

  1957. RCM 1.186.6
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    अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा।।

  1958. RCM 1.186.7
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    जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगतमोह मुनिबृंदा।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगतमोह मुनिबृंदा।

  1959. RCM 1.186.8
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    निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा।।

  1960. RCM 1.186.9
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    जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।

  1961. RCM 1.186.10
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    सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा।।

  1962. RCM 1.186.11
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    जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा।

    अर्थ (Hindi)

    जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा।

  1963. RCM 1.186.12
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    मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा।।

    अर्थ (Hindi)

    मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा।।

  1964. RCM 1.186.13
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    सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।

    अर्थ (Hindi)

    सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।

  1965. RCM 1.186.14
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    जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना।।

  1966. RCM 1.186.15
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    भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा।

    अर्थ (Hindi)

    भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा।

  1967. RCM 1.186.16
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    मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा।।

  1968. RCM 1.187.1
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    जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा।।

  1969. RCM 1.187.2
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    अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा।।

  1970. RCM 1.187.3
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    कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा।।

  1971. RCM 1.187.4
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    ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नरभूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नरभूपा।।

  1972. RCM 1.187.5
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    तिन्ह के गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह के गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई।।

  1973. RCM 1.187.6
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    नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ।।

  1974. RCM 1.187.7
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    हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।।

  1975. RCM 1.187.8
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    गगन ब्रह्मबानी सुनी काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना।।

    अर्थ (Hindi)

    गगन ब्रह्मबानी सुनी काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना।।

  1976. RCM 1.187.9
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    तब ब्रह्मा धरनिहि समुझावा। अभय भई भरोस जियँ आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब ब्रह्मा धरनिहि समुझावा। अभय भई भरोस जियँ आवा।।

  1977. RCM 1.187.10
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    निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।

    अर्थ (Hindi)

    निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।

  1978. RCM 1.187.11
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    बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ।।187।।

    अर्थ (Hindi)

    बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ।।187।।

  1979. RCM 1.188.1
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    गए देव सब निज निज धामा। भूमि सहित मन कहुँ बिश्रामा ।

    अर्थ (Hindi)

    गए देव सब निज निज धामा। भूमि सहित मन कहुँ बिश्रामा ।

  1980. RCM 1.188.2
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    जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। हरषे देव बिलंब न कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। हरषे देव बिलंब न कीन्हा।।

  1981. RCM 1.188.3
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    बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।।

  1982. RCM 1.188.4
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    गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा।।

  1983. RCM 1.188.5
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    गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।।

  1984. RCM 1.188.6
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    यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा।।

    अर्थ (Hindi)

    यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा।।

  1985. RCM 1.188.7
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    अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।।

  1986. RCM 1.188.8
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    धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी।।

    अर्थ (Hindi)

    धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी।।

  1987. RCM 1.188.9
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    कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत।

    अर्थ (Hindi)

    कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत।

  1988. RCM 1.188.10
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    पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत।।188।।

    अर्थ (Hindi)

    पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत।।188।।

  1989. RCM 1.189.1
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    एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।।

  1990. RCM 1.189.2
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    गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला।।

  1991. RCM 1.189.3
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    निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।।

    अर्थ (Hindi)

    निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।।

  1992. RCM 1.189.4
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    धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।।

  1993. RCM 1.189.5
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    सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।

  1994. RCM 1.189.6
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    भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें।।

    अर्थ (Hindi)

    भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें।।

  1995. RCM 1.189.7
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    जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा। सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा। सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा।।

  1996. RCM 1.189.8
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    यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई।।

  1997. RCM 1.189.9
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    तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।।

    अर्थ (Hindi)

    तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।।

  1998. RCM 1.189.10
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    परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ।।189।।

    अर्थ (Hindi)

    परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ।।189।।

  1999. RCM 1.190.1
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    तबहिं रायँ प्रिय नारि बोलाईं। कौसल्यादि तहाँ चलि आई।।

    अर्थ (Hindi)

    तबहिं रायँ प्रिय नारि बोलाईं। कौसल्यादि तहाँ चलि आई।।

  2000. RCM 1.190.2
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    अर्ध भाग कौसल्याहि दीन्हा। उभय भाग आधे कर कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    अर्ध भाग कौसल्याहि दीन्हा। उभय भाग आधे कर कीन्हा।।

  2001. RCM 1.190.3
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    कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ।।

  2002. RCM 1.190.4
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    कौसल्या कैकेई हाथ धरि। दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसल्या कैकेई हाथ धरि। दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि।।

  2003. RCM 1.190.5
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    एहि बिधि गर्भसहित सब नारी। भईं हृदयँ हरषित सुख भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि गर्भसहित सब नारी। भईं हृदयँ हरषित सुख भारी।।

  2004. RCM 1.190.6
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    जा दिन तें हरि गर्भहिं आए। सकल लोक सुख संपति छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जा दिन तें हरि गर्भहिं आए। सकल लोक सुख संपति छाए।।

  2005. RCM 1.190.7
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    मंदिर महँ सब राजहिं रानी। सोभा सील तेज की खानीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदिर महँ सब राजहिं रानी। सोभा सील तेज की खानीं।।

  2006. RCM 1.190.8
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    सुख जुत कछुक काल चलि गयऊ। जेहिं प्रभु प्रगट सो अवसर भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सुख जुत कछुक काल चलि गयऊ। जेहिं प्रभु प्रगट सो अवसर भयऊ।।

  2007. RCM 1.190.9
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    जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।

    अर्थ (Hindi)

    जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।

  2008. RCM 1.190.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल।।190।।

    अर्थ (Hindi)

    चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल।।190।।

  2009. RCM 1.191.1
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    नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।

    अर्थ (Hindi)

    नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।

  2010. RCM 1.191.2
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    मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा।।

  2011. RCM 1.191.3
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    सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ।।

  2012. RCM 1.191.4
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    बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा।।

  2013. RCM 1.191.5
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    सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना।।

  2014. RCM 1.191.6
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    गगन बिमल सकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा।।

    अर्थ (Hindi)

    गगन बिमल सकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा।।

  2015. RCM 1.191.7
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    बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।

  2016. RCM 1.191.8
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    अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा।।

  2017. RCM 1.191.9
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    सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।

    अर्थ (Hindi)

    सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।

  2018. RCM 1.191.10
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    जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम।।191।।

    अर्थ (Hindi)

    जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम।।191।।

  2019. RCM 1.192.1
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    भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।

    अर्थ (Hindi)

    भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।

  2020. RCM 1.192.2
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    हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।

  2021. RCM 1.192.3
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    लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।

    अर्थ (Hindi)

    लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।

  2022. RCM 1.192.4
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    भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी।।

  2023. RCM 1.192.5
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    कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।

    अर्थ (Hindi)

    कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।

  2024. RCM 1.192.6
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    माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।

    अर्थ (Hindi)

    माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।

  2025. RCM 1.192.7
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    करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।

    अर्थ (Hindi)

    करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।

  2026. RCM 1.192.8
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    सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।

    अर्थ (Hindi)

    सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।

  2027. RCM 1.192.9
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    ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।

  2028. RCM 1.192.10
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    मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।

    अर्थ (Hindi)

    मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।

  2029. RCM 1.192.11
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    उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।

    अर्थ (Hindi)

    उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।

  2030. RCM 1.192.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।

  2031. RCM 1.192.13
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    माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।

    अर्थ (Hindi)

    माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।

  2032. RCM 1.192.14
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    कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।

  2033. RCM 1.192.15
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    सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।

  2034. RCM 1.192.16
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    यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।

  2035. RCM 1.193.1
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    सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी। संभ्रम चलि आई सब रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी। संभ्रम चलि आई सब रानी।।

  2036. RCM 1.193.2
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    हरषित जहँ तहँ धाईं दासी। आनँद मगन सकल पुरबासी।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषित जहँ तहँ धाईं दासी। आनँद मगन सकल पुरबासी।।

  2037. RCM 1.193.3
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    दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना।।

  2038. RCM 1.193.4
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    परम प्रेम मन पुलक सरीरा। चाहत उठत करत मति धीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    परम प्रेम मन पुलक सरीरा। चाहत उठत करत मति धीरा।।

  2039. RCM 1.193.5
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    जाकर नाम सुनत सुभ होई। मोरें गृह आवा प्रभु सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जाकर नाम सुनत सुभ होई। मोरें गृह आवा प्रभु सोई।।

  2040. RCM 1.193.6
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    परमानंद पूरि मन राजा। कहा बोलाइ बजावहु बाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    परमानंद पूरि मन राजा। कहा बोलाइ बजावहु बाजा।।

  2041. RCM 1.193.7
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    गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा।।

  2042. RCM 1.193.8
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    अनुपम बालक देखेन्हि जाई। रूप रासि गुन कहि न सिराई।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुपम बालक देखेन्हि जाई। रूप रासि गुन कहि न सिराई।।

  2043. RCM 1.193.9
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    नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह।

    अर्थ (Hindi)

    नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह।

  2044. RCM 1.193.10
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    हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहँ दीन्ह।।193।।

    अर्थ (Hindi)

    हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहँ दीन्ह।।193।।

  2045. RCM 1.194.1
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    ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।

  2046. RCM 1.194.2
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    सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।।

  2047. RCM 1.194.3
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    बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।

  2048. RCM 1.194.4
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    कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।।

  2049. RCM 1.194.5
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    करि आरति नेवछावरि करहीं। बार बार सिसु चरनन्हि परहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    करि आरति नेवछावरि करहीं। बार बार सिसु चरनन्हि परहीं।।

  2050. RCM 1.194.6
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    मागध सूत बंदिगन गायक। पावन गुन गावहिं रघुनायक।।

    अर्थ (Hindi)

    मागध सूत बंदिगन गायक। पावन गुन गावहिं रघुनायक।।

  2051. RCM 1.194.7
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    सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।

  2052. RCM 1.194.8
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    मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।

    अर्थ (Hindi)

    मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।

  2053. RCM 1.194.9
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    गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।

    अर्थ (Hindi)

    गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।

  2054. RCM 1.194.10
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    हरषवंत सब जहँ तहँ नगर नारि नर बृंद।।194।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषवंत सब जहँ तहँ नगर नारि नर बृंद।।194।।

  2055. RCM 1.195.1
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    कैकयसुता सुमित्रा दोऊ। सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    कैकयसुता सुमित्रा दोऊ। सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ।।

  2056. RCM 1.195.2
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    वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकइ सारद अहिराजा।।

    अर्थ (Hindi)

    वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकइ सारद अहिराजा।।

  2057. RCM 1.195.3
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    अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।।

    अर्थ (Hindi)

    अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।।

  2058. RCM 1.195.4
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    देखि भानू जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि भानू जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी।।

  2059. RCM 1.195.5
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    अगर धूप बहु जनु अँधिआरी। उड़इ अभीर मनहुँ अरुनारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अगर धूप बहु जनु अँधिआरी। उड़इ अभीर मनहुँ अरुनारी।।

  2060. RCM 1.195.6
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    मंदिर मनि समूह जनु तारा। नृप गृह कलस सो इंदु उदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदिर मनि समूह जनु तारा। नृप गृह कलस सो इंदु उदारा।।

  2061. RCM 1.195.7
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    भवन बेदधुनि अति मृदु बानी। जनु खग मूखर समयँ जनु सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    भवन बेदधुनि अति मृदु बानी। जनु खग मूखर समयँ जनु सानी।।

  2062. RCM 1.195.8
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    कौतुक देखि पतंग भुलाना। एक मास तेइँ जात न जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक देखि पतंग भुलाना। एक मास तेइँ जात न जाना।।

  2063. RCM 1.195.9
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    मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ।

    अर्थ (Hindi)

    मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ।

  2064. RCM 1.195.10
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    रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होइ।।195।।

    अर्थ (Hindi)

    रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होइ।।195।।

  2065. RCM 1.196.1
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    यह रहस्य काहू नहिं जाना। दिन मनि चले करत गुनगाना।।

    अर्थ (Hindi)

    यह रहस्य काहू नहिं जाना। दिन मनि चले करत गुनगाना।।

  2066. RCM 1.196.2
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    देखि महोत्सव सुर मुनि नागा। चले भवन बरनत निज भागा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि महोत्सव सुर मुनि नागा। चले भवन बरनत निज भागा।।

  2067. RCM 1.196.3
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    औरउ एक कहउँ निज चोरी। सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    औरउ एक कहउँ निज चोरी। सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी।।

  2068. RCM 1.196.4
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    काक भुसुंडि संग हम दोऊ। मनुजरूप जानइ नहिं कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    काक भुसुंडि संग हम दोऊ। मनुजरूप जानइ नहिं कोऊ।।

  2069. RCM 1.196.5
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    परमानंद प्रेमसुख फूले। बीथिन्ह फिरहिं मगन मन भूले।।

    अर्थ (Hindi)

    परमानंद प्रेमसुख फूले। बीथिन्ह फिरहिं मगन मन भूले।।

  2070. RCM 1.196.6
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    यह सुभ चरित जान पै सोई। कृपा राम कै जापर होई।।

    अर्थ (Hindi)

    यह सुभ चरित जान पै सोई। कृपा राम कै जापर होई।।

  2071. RCM 1.196.7
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    तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा। दीन्ह भूप जो जेहि मन भावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा। दीन्ह भूप जो जेहि मन भावा।।

  2072. RCM 1.196.8
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    गज रथ तुरग हेम गो हीरा। दीन्हे नृप नानाबिधि चीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    गज रथ तुरग हेम गो हीरा। दीन्हे नृप नानाबिधि चीरा।।

  2073. RCM 1.196.9
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    मन संतोषे सबन्हि के जहँ तहँ देहि असीस।

    अर्थ (Hindi)

    मन संतोषे सबन्हि के जहँ तहँ देहि असीस।

  2074. RCM 1.196.10
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    सकल तनय चिर जीवहुँ तुलसिदास के ईस।।196।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल तनय चिर जीवहुँ तुलसिदास के ईस।।196।।

  2075. RCM 1.197.1
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    कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।।

    अर्थ (Hindi)

    कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।।

  2076. RCM 1.197.2
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    नामकरन कर अवसरु जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    नामकरन कर अवसरु जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी।।

  2077. RCM 1.197.3
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    करि पूजा भूपति अस भाषा। धरिअ नाम जो मुनि गुनि राखा।।

    अर्थ (Hindi)

    करि पूजा भूपति अस भाषा। धरिअ नाम जो मुनि गुनि राखा।।

  2078. RCM 1.197.4
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    इन्ह के नाम अनेक अनूपा। मैं नृप कहब स्वमति अनुरूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    इन्ह के नाम अनेक अनूपा। मैं नृप कहब स्वमति अनुरूपा।।

  2079. RCM 1.197.5
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    जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी।।

    अर्थ (Hindi)

    जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी।।

  2080. RCM 1.197.6
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    सो सुख धाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो सुख धाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा।।

  2081. RCM 1.197.7
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    बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।

  2082. RCM 1.197.8
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    जाके सुमिरन तें रिपु नासा। नाम सत्रुहन बेद प्रकासा।।

    अर्थ (Hindi)

    जाके सुमिरन तें रिपु नासा। नाम सत्रुहन बेद प्रकासा।।

  2083. RCM 1.197.9
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    लच्छन धाम राम प्रिय सकल जगत आधार।

    अर्थ (Hindi)

    लच्छन धाम राम प्रिय सकल जगत आधार।

  2084. RCM 1.197.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गुरु बसिष्ट तेहि राखा लछिमन नाम उदार।।197।।

    अर्थ (Hindi)

    गुरु बसिष्ट तेहि राखा लछिमन नाम उदार।।197।।

  2085. RCM 1.198.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।।

  2086. RCM 1.198.2
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    मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि तेहिं सुख माना।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि तेहिं सुख माना।।

  2087. RCM 1.198.3
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    बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।।

  2088. RCM 1.198.4
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    भरत सत्रुहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भरत सत्रुहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई।।

  2089. RCM 1.198.5
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    स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।

  2090. RCM 1.198.6
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    चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा।।

  2091. RCM 1.198.7
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    हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा। सूचत किरन मनोहर हासा।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा। सूचत किरन मनोहर हासा।।

  2092. RCM 1.198.8
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    कबहुँ उछंग कबहुँ बर पलना। मातु दुलारइ कहि प्रिय ललना।।

    अर्थ (Hindi)

    कबहुँ उछंग कबहुँ बर पलना। मातु दुलारइ कहि प्रिय ललना।।

  2093. RCM 1.198.9
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    ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद।

  2094. RCM 1.198.10
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    सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद।।198।।

    अर्थ (Hindi)

    सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद।।198।।

  2095. RCM 1.199.1
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    काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा।।

  2096. RCM 1.199.2
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    अरुन चरन पकंज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती।।

    अर्थ (Hindi)

    अरुन चरन पकंज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती।।

  2097. RCM 1.199.3
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    रेख कुलिस धवज अंकुर सोहे। नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे।।

    अर्थ (Hindi)

    रेख कुलिस धवज अंकुर सोहे। नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे।।

  2098. RCM 1.199.4
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    कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा। नाभि गभीर जान जेहि देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा। नाभि गभीर जान जेहि देखा।।

  2099. RCM 1.199.5
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    भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।।

  2100. RCM 1.199.6
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    उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा।।

  2101. RCM 1.199.7
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    कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई। आनन अमित मदन छबि छाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई। आनन अमित मदन छबि छाई।।

  2102. RCM 1.199.8
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    दुइ दुइ दसन अधर अरुनारे। नासा तिलक को बरनै पारे।।

    अर्थ (Hindi)

    दुइ दुइ दसन अधर अरुनारे। नासा तिलक को बरनै पारे।।

  2103. RCM 1.199.9
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    सुंदर श्रवन सुचारु कपोला। अति प्रिय मधुर तोतरे बोला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर श्रवन सुचारु कपोला। अति प्रिय मधुर तोतरे बोला।।

  2104. RCM 1.199.10
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    चिक्कन कच कुंचित गभुआरे। बहु प्रकार रचि मातु सँवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    चिक्कन कच कुंचित गभुआरे। बहु प्रकार रचि मातु सँवारे।।

  2105. RCM 1.199.11
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    पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।।

  2106. RCM 1.199.12
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    रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा।।

  2107. RCM 1.199.13
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    सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत।

    अर्थ (Hindi)

    सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत।

  2108. RCM 1.199.14
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    दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत।।199।।

    अर्थ (Hindi)

    दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत।।199।।

  2109. RCM 1.200.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि राम जगत पितु माता। कोसलपुर बासिन्ह सुखदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि राम जगत पितु माता। कोसलपुर बासिन्ह सुखदाता।।

  2110. RCM 1.200.2
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    जिन्ह रघुनाथ चरन रति मानी। तिन्ह की यह गति प्रगट भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह रघुनाथ चरन रति मानी। तिन्ह की यह गति प्रगट भवानी।।

  2111. RCM 1.200.3
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    रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।।

  2112. RCM 1.200.4
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    जीव चराचर बस कै राखे। सो माया प्रभु सों भय भाखे।।

    अर्थ (Hindi)

    जीव चराचर बस कै राखे। सो माया प्रभु सों भय भाखे।।

  2113. RCM 1.200.5
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    भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।।

    अर्थ (Hindi)

    भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।।

  2114. RCM 1.200.6
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    मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई।।

  2115. RCM 1.200.7
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    एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।।

  2116. RCM 1.200.8
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    लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालनें घालि झुलावै।।

    अर्थ (Hindi)

    लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालनें घालि झुलावै।।

  2117. RCM 1.200.9
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    प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।

  2118. RCM 1.200.10
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    सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।200।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।200।।

  2119. RCM 1.201.1
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    एक बार जननीं अन्हवाए। करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार जननीं अन्हवाए। करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए।।

  2120. RCM 1.201.2
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    निज कुल इष्टदेव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    निज कुल इष्टदेव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना।।

  2121. RCM 1.201.3
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    करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा।।

  2122. RCM 1.201.4
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    बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत देख सुत जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत देख सुत जाई।।

  2123. RCM 1.201.5
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    गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।

    अर्थ (Hindi)

    गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।

  2124. RCM 1.201.6
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    बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।।

  2125. RCM 1.201.7
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    इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।।

  2126. RCM 1.201.8
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    देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।

  2127. RCM 1.201.9
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    देखरावा मातहि निज अदभुत रुप अखंड।

    अर्थ (Hindi)

    देखरावा मातहि निज अदभुत रुप अखंड।

  2128. RCM 1.201.10
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    रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मंड।। 201।।

    अर्थ (Hindi)

    रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मंड।। 201।।

  2129. RCM 1.202.1
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    अगनित रबि ससि सिव चतुरानन। बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।।

    अर्थ (Hindi)

    अगनित रबि ससि सिव चतुरानन। बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।।

  2130. RCM 1.202.2
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    काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ। सोउ देखा जो सुना न काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ। सोउ देखा जो सुना न काऊ।।

  2131. RCM 1.202.3
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    देखी माया सब बिधि गाढ़ी। अति सभीत जोरें कर ठाढ़ी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखी माया सब बिधि गाढ़ी। अति सभीत जोरें कर ठाढ़ी।।

  2132. RCM 1.202.4
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    देखा जीव नचावइ जाही। देखी भगति जो छोरइ ताही।।

    अर्थ (Hindi)

    देखा जीव नचावइ जाही। देखी भगति जो छोरइ ताही।।

  2133. RCM 1.202.5
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    तन पुलकित मुख बचन न आवा। नयन मूदि चरननि सिरु नावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तन पुलकित मुख बचन न आवा। नयन मूदि चरननि सिरु नावा।।

  2134. RCM 1.202.6
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    बिसमयवंत देखि महतारी। भए बहुरि सिसुरूप खरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिसमयवंत देखि महतारी। भए बहुरि सिसुरूप खरारी।।

  2135. RCM 1.202.7
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    अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।।

  2136. RCM 1.202.8
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    हरि जननि बहुबिधि समुझाई। यह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि जननि बहुबिधि समुझाई। यह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।।

  2137. RCM 1.202.9
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    बार बार कौसल्या बिनय करइ कर जोरि।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार कौसल्या बिनय करइ कर जोरि।।

  2138. RCM 1.202.10
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    अब जनि कबहूँ ब्यापै प्रभु मोहि माया तोरि।। 202।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जनि कबहूँ ब्यापै प्रभु मोहि माया तोरि।। 202।।

  2139. RCM 1.203.1
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    बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा।।

  2140. RCM 1.203.2
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    कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई।।

  2141. RCM 1.203.3
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    चूड़ाकरन कीन्ह गुरु जाई। बिप्रन्ह पुनि दछिना बहु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चूड़ाकरन कीन्ह गुरु जाई। बिप्रन्ह पुनि दछिना बहु पाई।।

  2142. RCM 1.203.4
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    परम मनोहर चरित अपारा। करत फिरत चारिउ सुकुमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    परम मनोहर चरित अपारा। करत फिरत चारिउ सुकुमारा।।

  2143. RCM 1.203.5
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    मन क्रम बचन अगोचर जोई। दसरथ अजिर बिचर प्रभु सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    मन क्रम बचन अगोचर जोई। दसरथ अजिर बिचर प्रभु सोई।।

  2144. RCM 1.203.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भोजन करत बोल जब राजा। नहिं आवत तजि बाल समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    भोजन करत बोल जब राजा। नहिं आवत तजि बाल समाजा।।

  2145. RCM 1.203.7
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    कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई।।

  2146. RCM 1.203.8
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    निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा।।

    अर्थ (Hindi)

    निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा।।

  2147. RCM 1.203.9
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    धूरस धूरि भरें तनु आए। भूपति बिहसि गोद बैठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    धूरस धूरि भरें तनु आए। भूपति बिहसि गोद बैठाए।।

  2148. RCM 1.203.10
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    भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ।

    अर्थ (Hindi)

    भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ।

  2149. RCM 1.203.11
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    भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ।।203।।

    अर्थ (Hindi)

    भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ।।203।।

  2150. RCM 1.204.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बालचरित अति सरल सुहाए। सारद सेष संभु श्रुति गाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बालचरित अति सरल सुहाए। सारद सेष संभु श्रुति गाए।।

  2151. RCM 1.204.2
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    जिन कर मन इन्ह सन नहिं राता। ते जन बंचित किए बिधाता।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन कर मन इन्ह सन नहिं राता। ते जन बंचित किए बिधाता।।

  2152. RCM 1.204.3
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    भए कुमार जबहिं सब भ्राता। दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता।।

    अर्थ (Hindi)

    भए कुमार जबहिं सब भ्राता। दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता।।

  2153. RCM 1.204.4
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    गुरगृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल बिद्या सब आई।।

    अर्थ (Hindi)

    गुरगृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल बिद्या सब आई।।

  2154. RCM 1.204.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी।।

  2155. RCM 1.204.6
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    बिद्या बिनय निपुन गुन सीला। खेलहिं खेल सकल नृपलीला।।

    अर्थ (Hindi)

    बिद्या बिनय निपुन गुन सीला। खेलहिं खेल सकल नृपलीला।।

  2156. RCM 1.204.7
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    करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा।।

  2157. RCM 1.204.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई।।

  2158. RCM 1.204.9
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    कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल।

    अर्थ (Hindi)

    कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल।

  2159. RCM 1.204.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रानहु ते प्रिय लागत सब कहुँ राम कृपाल।।204।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रानहु ते प्रिय लागत सब कहुँ राम कृपाल।।204।।

  2160. RCM 1.205.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।

  2161. RCM 1.205.2
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    पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।।

    अर्थ (Hindi)

    पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।।

  2162. RCM 1.205.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सुरलोक सिधारे।।

    अर्थ (Hindi)

    जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सुरलोक सिधारे।।

  2163. RCM 1.205.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अनुज सखा सँग भोजन करहीं। मातु पिता अग्या अनुसरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुज सखा सँग भोजन करहीं। मातु पिता अग्या अनुसरहीं।।

  2164. RCM 1.205.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।।

  2165. RCM 1.205.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई।।

  2166. RCM 1.205.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।

  2167. RCM 1.205.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा।।

    अर्थ (Hindi)

    आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा।।

  2168. RCM 1.205.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।

  2169. RCM 1.205.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप।।205।।

    अर्थ (Hindi)

    भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप।।205।।

  2170. RCM 1.206.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई।।

  2171. RCM 1.206.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिस्वामित्र महामुनि ग्यानी। बसहि बिपिन सुभ आश्रम जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वामित्र महामुनि ग्यानी। बसहि बिपिन सुभ आश्रम जानी।।

  2172. RCM 1.206.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।।

  2173. RCM 1.206.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखत जग्य निसाचर धावहि। करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    देखत जग्य निसाचर धावहि। करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं।।

  2174. RCM 1.206.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।।

    अर्थ (Hindi)

    गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।।

  2175. RCM 1.206.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा।।

  2176. RCM 1.206.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।।

  2177. RCM 1.206.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ग्यान बिराग सकल गुन अयना। सो प्रभु मै देखब भरि नयना।।

    अर्थ (Hindi)

    ग्यान बिराग सकल गुन अयना। सो प्रभु मै देखब भरि नयना।।

  2178. RCM 1.206.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार।

    अर्थ (Hindi)

    बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार।

  2179. RCM 1.206.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करि मज्जन सरऊ जल गए भूप दरबार।।206।।

    अर्थ (Hindi)

    करि मज्जन सरऊ जल गए भूप दरबार।।206।।

  2180. RCM 1.207.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि आगमन सुना जब राजा। मिलन गयऊ लै बिप्र समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि आगमन सुना जब राजा। मिलन गयऊ लै बिप्र समाजा।।

  2181. RCM 1.207.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करि दंडवत मुनिहि सनमानी। निज आसन बैठारेन्हि आनी।।

    अर्थ (Hindi)

    करि दंडवत मुनिहि सनमानी। निज आसन बैठारेन्हि आनी।।

  2182. RCM 1.207.3
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    चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।।

    अर्थ (Hindi)

    चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।।

  2183. RCM 1.207.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिबिध भाँति भोजन करवावा। मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध भाँति भोजन करवावा। मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा।।

  2184. RCM 1.207.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।।

  2185. RCM 1.207.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा।।

  2186. RCM 1.207.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।।

  2187. RCM 1.207.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा।।

  2188. RCM 1.207.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    असुर समूह सतावहिं मोही। मै जाचन आयउँ नृप तोही।।

    अर्थ (Hindi)

    असुर समूह सतावहिं मोही। मै जाचन आयउँ नृप तोही।।

  2189. RCM 1.207.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा।।

  2190. RCM 1.207.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान।

    अर्थ (Hindi)

    देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान।

  2191. RCM 1.207.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान।।207।।

    अर्थ (Hindi)

    धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान।।207।।

  2192. RCM 1.208.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी।।

  2193. RCM 1.208.2
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    चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी।।

  2194. RCM 1.208.3
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    मागहु भूमि धेनु धन कोसा। सर्बस देउँ आजु सहरोसा।।

    अर्थ (Hindi)

    मागहु भूमि धेनु धन कोसा। सर्बस देउँ आजु सहरोसा।।

  2195. RCM 1.208.4
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    देह प्रान तें प्रिय कछु नाही। सोउ मुनि देउँ निमिष एक माही।।

    अर्थ (Hindi)

    देह प्रान तें प्रिय कछु नाही। सोउ मुनि देउँ निमिष एक माही।।

  2196. RCM 1.208.5
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    सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाई।।

  2197. RCM 1.208.6
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    कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा।।

  2198. RCM 1.208.7
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    सुनि नृप गिरा प्रेम रस सानी। हृदयँ हरष माना मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि नृप गिरा प्रेम रस सानी। हृदयँ हरष माना मुनि ग्यानी।।

  2199. RCM 1.208.8
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    तब बसिष्ट बहु निधि समुझावा। नृप संदेह नास कहँ पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब बसिष्ट बहु निधि समुझावा। नृप संदेह नास कहँ पावा।।

  2200. RCM 1.208.9
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    अति आदर दोउ तनय बोलाए। हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए।।

    अर्थ (Hindi)

    अति आदर दोउ तनय बोलाए। हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए।।

  2201. RCM 1.208.10
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    मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ।।

  2202. RCM 1.208.11
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    सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस।

    अर्थ (Hindi)

    सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस।

  2203. RCM 1.208.12
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    जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।।208(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।।208(क)।।

  2204. RCM 1.208.13
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    पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन।।

  2205. RCM 1.208.14
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    कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन।।208(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन।।208(ख)।।

  2206. RCM 1.209.1
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    अरुन नयन उर बाहु बिसाला। नील जलज तनु स्याम तमाला।।

    अर्थ (Hindi)

    अरुन नयन उर बाहु बिसाला। नील जलज तनु स्याम तमाला।।

  2207. RCM 1.209.2
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    कटि पट पीत कसें बर भाथा। रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    कटि पट पीत कसें बर भाथा। रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा।।

  2208. RCM 1.209.3
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    स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्बामित्र महानिधि पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्बामित्र महानिधि पाई।।

  2209. RCM 1.209.4
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    प्रभु ब्रह्मन्यदेव मै जाना। मोहि निति पिता तजेहु भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु ब्रह्मन्यदेव मै जाना। मोहि निति पिता तजेहु भगवाना।।

  2210. RCM 1.209.5
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    चले जात मुनि दीन्हि दिखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चले जात मुनि दीन्हि दिखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई।।

  2211. RCM 1.209.6
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    एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा।।

  2212. RCM 1.209.7
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    तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही।।

  2213. RCM 1.209.8
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    जाते लाग न छुधा पिपासा। अतुलित बल तनु तेज प्रकासा।।

    अर्थ (Hindi)

    जाते लाग न छुधा पिपासा। अतुलित बल तनु तेज प्रकासा।।

  2214. RCM 1.209.9
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    आयुष सब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि।

    अर्थ (Hindi)

    आयुष सब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि।

  2215. RCM 1.209.10
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    कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि।।209।।

    अर्थ (Hindi)

    कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि।।209।।

  2216. RCM 1.210.1
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    प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई।।

  2217. RCM 1.210.2
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    होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी।।

    अर्थ (Hindi)

    होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी।।

  2218. RCM 1.210.3
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    सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।।

  2219. RCM 1.210.4
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    बिनु फर बान राम तेहि मारा। सत जोजन गा सागर पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु फर बान राम तेहि मारा। सत जोजन गा सागर पारा।।

  2220. RCM 1.210.5
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    पावक सर सुबाहु पुनि मारा। अनुज निसाचर कटकु सँघारा।।

    अर्थ (Hindi)

    पावक सर सुबाहु पुनि मारा। अनुज निसाचर कटकु सँघारा।।

  2221. RCM 1.210.6
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    मारि असुर द्विज निर्मयकारी। अस्तुति करहिं देव मुनि झारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मारि असुर द्विज निर्मयकारी। अस्तुति करहिं देव मुनि झारी।।

  2222. RCM 1.210.7
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    तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।।

  2223. RCM 1.210.8
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    भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना।।

  2224. RCM 1.210.9
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    तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।।

  2225. RCM 1.210.10
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    धनुषजग्य मुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा।।

    अर्थ (Hindi)

    धनुषजग्य मुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा।।

  2226. RCM 1.210.11
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    आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं।।

  2227. RCM 1.210.12
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    पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी।।

  2228. RCM 1.210.13
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    गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।

    अर्थ (Hindi)

    गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।

  2229. RCM 1.210.14
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    चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर।।210।।

    अर्थ (Hindi)

    चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर।।210।।

  2230. RCM 1.211.1
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    परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।

    अर्थ (Hindi)

    परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।

  2231. RCM 1.211.2
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    देखत रघुनायक जन सुख दायक सनमुख होइ कर जोरि रही।।

    अर्थ (Hindi)

    देखत रघुनायक जन सुख दायक सनमुख होइ कर जोरि रही।।

  2232. RCM 1.211.3
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    अति प्रेम अधीरा पुलक सरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।

    अर्थ (Hindi)

    अति प्रेम अधीरा पुलक सरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।

  2233. RCM 1.211.4
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    अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही।।

    अर्थ (Hindi)

    अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही।।

  2234. RCM 1.211.5
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    धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।

    अर्थ (Hindi)

    धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।

  2235. RCM 1.211.6
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    अति निर्मल बानीं अस्तुति ठानी ग्यानगम्य जय रघुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    अति निर्मल बानीं अस्तुति ठानी ग्यानगम्य जय रघुराई।।

  2236. RCM 1.211.7
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    मै नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जन सुखदाई।

    अर्थ (Hindi)

    मै नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जन सुखदाई।

  2237. RCM 1.211.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राजीव बिलोचन भव भय मोचन पाहि पाहि सरनहिं आई।।

    अर्थ (Hindi)

    राजीव बिलोचन भव भय मोचन पाहि पाहि सरनहिं आई।।

  2238. RCM 1.211.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।

  2239. RCM 1.211.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखेउँ भरि लोचन हरि भवमोचन इहइ लाभ संकर जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखेउँ भरि लोचन हरि भवमोचन इहइ लाभ संकर जाना।।

  2240. RCM 1.211.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ न मागउँ बर आना।

    अर्थ (Hindi)

    बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ न मागउँ बर आना।

  2241. RCM 1.211.12
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    पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना।।

    अर्थ (Hindi)

    पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना।।

  2242. RCM 1.211.13
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    जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।

  2243. RCM 1.211.14
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    सोइ पद पंकज जेहि पूजत अज मम सिर धरेउ कृपाल हरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ पद पंकज जेहि पूजत अज मम सिर धरेउ कृपाल हरी।।

  2244. RCM 1.211.15
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    एहि भाँति सिधारी गौतम नारी बार बार हरि चरन परी।

    अर्थ (Hindi)

    एहि भाँति सिधारी गौतम नारी बार बार हरि चरन परी।

  2245. RCM 1.211.16
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    जो अति मन भावा सो बरु पावा गै पतिलोक अनंद भरी।।

    अर्थ (Hindi)

    जो अति मन भावा सो बरु पावा गै पतिलोक अनंद भरी।।

  2246. RCM 1.212.1
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    चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा।।

  2247. RCM 1.212.2
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    गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई।।

    अर्थ (Hindi)

    गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई।।

  2248. RCM 1.212.3
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    तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।।

  2249. RCM 1.212.4
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    हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया।।

  2250. RCM 1.212.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी।।

  2251. RCM 1.212.6
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    बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना।।

  2252. RCM 1.212.7
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    गुंजत मंजु मत्त रस भृंगा। कूजत कल बहुबरन बिहंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुंजत मंजु मत्त रस भृंगा। कूजत कल बहुबरन बिहंगा।।

  2253. RCM 1.212.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरन बरन बिकसे बन जाता। त्रिबिध समीर सदा सुखदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    बरन बरन बिकसे बन जाता। त्रिबिध समीर सदा सुखदाता।।

  2254. RCM 1.212.9
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    सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।

    अर्थ (Hindi)

    सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।

  2255. RCM 1.212.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास।।212।।

    अर्थ (Hindi)

    फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास।।212।।

  2256. RCM 1.213.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।।

  2257. RCM 1.213.2
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    चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी।।

    अर्थ (Hindi)

    चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी।।

  2258. RCM 1.213.3
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    धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठ सकल बस्तु लै नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठ सकल बस्तु लै नाना।।

  2259. RCM 1.213.4
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    चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई।।

  2260. RCM 1.213.5
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    मंगलमय मंदिर सब केरें। चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगलमय मंदिर सब केरें। चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें।।

  2261. RCM 1.213.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुर नर नारि सुभग सुचि संता। धरमसील ग्यानी गुनवंता।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर नर नारि सुभग सुचि संता। धरमसील ग्यानी गुनवंता।।

  2262. RCM 1.213.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।।

    अर्थ (Hindi)

    अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।।

  2263. RCM 1.213.8
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    होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी।।

    अर्थ (Hindi)

    होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी।।

  2264. RCM 1.213.9
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    धवल धाम मनि पुरट पट सुघटित नाना भाँति।

    अर्थ (Hindi)

    धवल धाम मनि पुरट पट सुघटित नाना भाँति।

  2265. RCM 1.213.10
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    सिय निवास सुंदर सदन सोभा किमि कहि जाति।।213।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय निवास सुंदर सदन सोभा किमि कहि जाति।।213।।

  2266. RCM 1.214.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।

  2267. RCM 1.214.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला।।

    अर्थ (Hindi)

    बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला।।

  2268. RCM 1.214.3
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    सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे।।

    अर्थ (Hindi)

    सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे।।

  2269. RCM 1.214.4
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    पुर बाहेर सर सारित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर बाहेर सर सारित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा।।

  2270. RCM 1.214.5
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    देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।

  2271. RCM 1.214.6
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    कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना।।

  2272. RCM 1.214.7
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    भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता। उतरे तहँ मुनिबृंद समेता।।

    अर्थ (Hindi)

    भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता। उतरे तहँ मुनिबृंद समेता।।

  2273. RCM 1.214.8
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    बिस्वामित्र महामुनि आए। समाचार मिथिलापति पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वामित्र महामुनि आए। समाचार मिथिलापति पाए।।

  2274. RCM 1.214.9
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    संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति।

    अर्थ (Hindi)

    संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति।

  2275. RCM 1.214.10
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    चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति।।214।।

    अर्थ (Hindi)

    चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति।।214।।

  2276. RCM 1.215.1
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    कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।।

  2277. RCM 1.215.2
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    बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे।।

  2278. RCM 1.215.3
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    कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।।

  2279. RCM 1.215.4
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    तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई।।

  2280. RCM 1.215.5
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    स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।।

  2281. RCM 1.215.6
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    उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए।।

  2282. RCM 1.215.7
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    भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता। बारि बिलोचन पुलकित गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता। बारि बिलोचन पुलकित गाता।।

  2283. RCM 1.215.8
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    मूरति मधुर मनोहर देखी। भयउ बिदेहु बिदेहु बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    मूरति मधुर मनोहर देखी। भयउ बिदेहु बिदेहु बिसेषी।।

  2284. RCM 1.215.9
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    प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर।

  2285. RCM 1.215.10
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    बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर।।215।।

    अर्थ (Hindi)

    बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर।।215।।

  2286. RCM 1.216.1
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    कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक।।

  2287. RCM 1.216.2
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    ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा।।

  2288. RCM 1.216.3
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    सहज बिरागरुप मनु मोरा। थकित होत जिमि चंद चकोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज बिरागरुप मनु मोरा। थकित होत जिमि चंद चकोरा।।

  2289. RCM 1.216.4
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    ताते प्रभु पूछउँ सतिभाऊ। कहहु नाथ जनि करहु दुराऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    ताते प्रभु पूछउँ सतिभाऊ। कहहु नाथ जनि करहु दुराऊ।।

  2290. RCM 1.216.5
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    इन्हहि बिलोकत अति अनुरागा। बरबस ब्रह्मसुखहि मन त्यागा।।

    अर्थ (Hindi)

    इन्हहि बिलोकत अति अनुरागा। बरबस ब्रह्मसुखहि मन त्यागा।।

  2291. RCM 1.216.6
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    कह मुनि बिहसि कहेहु नृप नीका। बचन तुम्हार न होइ अलीका।।

    अर्थ (Hindi)

    कह मुनि बिहसि कहेहु नृप नीका। बचन तुम्हार न होइ अलीका।।

  2292. RCM 1.216.7
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    ए प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी। मन मुसुकाहिं रामु सुनि बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    ए प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी। मन मुसुकाहिं रामु सुनि बानी।।

  2293. RCM 1.216.8
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    रघुकुल मनि दसरथ के जाए। मम हित लागि नरेस पठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुकुल मनि दसरथ के जाए। मम हित लागि नरेस पठाए।।

  2294. RCM 1.216.9
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    रामु लखनु दोउ बंधुबर रूप सील बल धाम।

    अर्थ (Hindi)

    रामु लखनु दोउ बंधुबर रूप सील बल धाम।

  2295. RCM 1.216.10
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    मख राखेउ सबु साखि जगु जिते असुर संग्राम।।216।।

    अर्थ (Hindi)

    मख राखेउ सबु साखि जगु जिते असुर संग्राम।।216।।

  2296. RCM 1.217.1
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    मुनि तव चरन देखि कह राऊ। कहि न सकउँ निज पुन्य प्राभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि तव चरन देखि कह राऊ। कहि न सकउँ निज पुन्य प्राभाऊ।।

  2297. RCM 1.217.2
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    सुंदर स्याम गौर दोउ भ्राता। आनँदहू के आनँद दाता।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर स्याम गौर दोउ भ्राता। आनँदहू के आनँद दाता।।

  2298. RCM 1.217.3
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    इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि।।

    अर्थ (Hindi)

    इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि।।

  2299. RCM 1.217.4
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    सुनहु नाथ कह मुदित बिदेहू। ब्रह्म जीव इव सहज सनेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु नाथ कह मुदित बिदेहू। ब्रह्म जीव इव सहज सनेहू।।

  2300. RCM 1.217.5
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    पुनि पुनि प्रभुहि चितव नरनाहू। पुलक गात उर अधिक उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि प्रभुहि चितव नरनाहू। पुलक गात उर अधिक उछाहू।।

  2301. RCM 1.217.6
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    म्रुनिहि प्रसंसि नाइ पद सीसू। चलेउ लवाइ नगर अवनीसू।।

    अर्थ (Hindi)

    म्रुनिहि प्रसंसि नाइ पद सीसू। चलेउ लवाइ नगर अवनीसू।।

  2302. RCM 1.217.7
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    सुंदर सदनु सुखद सब काला। तहाँ बासु लै दीन्ह भुआला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर सदनु सुखद सब काला। तहाँ बासु लै दीन्ह भुआला।।

  2303. RCM 1.217.8
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    करि पूजा सब बिधि सेवकाई। गयउ राउ गृह बिदा कराई।।

    अर्थ (Hindi)

    करि पूजा सब बिधि सेवकाई। गयउ राउ गृह बिदा कराई।।

  2304. RCM 1.217.9
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    रिषय संग रघुबंस मनि करि भोजनु बिश्रामु।

    अर्थ (Hindi)

    रिषय संग रघुबंस मनि करि भोजनु बिश्रामु।

  2305. RCM 1.217.10
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    बैठे प्रभु भ्राता सहित दिवसु रहा भरि जामु।।217।।

    अर्थ (Hindi)

    बैठे प्रभु भ्राता सहित दिवसु रहा भरि जामु।।217।।

  2306. RCM 1.218.1
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    लखन हृदयँ लालसा बिसेषी। जाइ जनकपुर आइअ देखी।।

    अर्थ (Hindi)

    लखन हृदयँ लालसा बिसेषी। जाइ जनकपुर आइअ देखी।।

  2307. RCM 1.218.2
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    प्रभु भय बहुरि मुनिहि सकुचाहीं। प्रगट न कहहिं मनहिं मुसुकाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु भय बहुरि मुनिहि सकुचाहीं। प्रगट न कहहिं मनहिं मुसुकाहीं।।

  2308. RCM 1.218.3
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    राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हिंयँ हुलसानी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हिंयँ हुलसानी।।

  2309. RCM 1.218.4
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    परम बिनीत सकुचि मुसुकाई। बोले गुर अनुसासन पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    परम बिनीत सकुचि मुसुकाई। बोले गुर अनुसासन पाई।।

  2310. RCM 1.218.5
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    नाथ लखनु पुरु देखन चहहीं। प्रभु सकोच डर प्रगट न कहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ लखनु पुरु देखन चहहीं। प्रभु सकोच डर प्रगट न कहहीं।।

  2311. RCM 1.218.6
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    जौं राउर आयसु मैं पावौं। नगर देखाइ तुरत लै आवौ।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं राउर आयसु मैं पावौं। नगर देखाइ तुरत लै आवौ।।

  2312. RCM 1.218.7
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    सुनि मुनीसु कह बचन सप्रीती। कस न राम तुम्ह राखहु नीती।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि मुनीसु कह बचन सप्रीती। कस न राम तुम्ह राखहु नीती।।

  2313. RCM 1.218.8
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    धरम सेतु पालक तुम्ह ताता। प्रेम बिबस सेवक सुखदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    धरम सेतु पालक तुम्ह ताता। प्रेम बिबस सेवक सुखदाता।।

  2314. RCM 1.218.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जाइ देखी आवहु नगरु सुख निधान दोउ भाइ।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ देखी आवहु नगरु सुख निधान दोउ भाइ।

  2315. RCM 1.218.10
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    करहु सुफल सब के नयन सुंदर बदन देखाइ।।218।।

    अर्थ (Hindi)

    करहु सुफल सब के नयन सुंदर बदन देखाइ।।218।।

  2316. RCM 1.219.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता। चले लोक लोचन सुख दाता।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता। चले लोक लोचन सुख दाता।।

  2317. RCM 1.219.2
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    बालक बृंदि देखि अति सोभा। लगे संग लोचन मनु लोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    बालक बृंदि देखि अति सोभा। लगे संग लोचन मनु लोभा।।

  2318. RCM 1.219.3
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    पीत बसन परिकर कटि भाथा। चारु चाप सर सोहत हाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    पीत बसन परिकर कटि भाथा। चारु चाप सर सोहत हाथा।।

  2319. RCM 1.219.4
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    तन अनुहरत सुचंदन खोरी। स्यामल गौर मनोहर जोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    तन अनुहरत सुचंदन खोरी। स्यामल गौर मनोहर जोरी।।

  2320. RCM 1.219.5
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    केहरि कंधर बाहु बिसाला। उर अति रुचिर नागमनि माला।।

    अर्थ (Hindi)

    केहरि कंधर बाहु बिसाला। उर अति रुचिर नागमनि माला।।

  2321. RCM 1.219.6
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    सुभग सोन सरसीरुह लोचन। बदन मयंक तापत्रय मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभग सोन सरसीरुह लोचन। बदन मयंक तापत्रय मोचन।।

  2322. RCM 1.219.7
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    कानन्हि कनक फूल छबि देहीं। चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कानन्हि कनक फूल छबि देहीं। चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं।।

  2323. RCM 1.219.8
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    चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी। तिलक रेखा सोभा जनु चाँकी।।

    अर्थ (Hindi)

    चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी। तिलक रेखा सोभा जनु चाँकी।।

  2324. RCM 1.219.9
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    रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।

    अर्थ (Hindi)

    रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।

  2325. RCM 1.219.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस।।219।।

    अर्थ (Hindi)

    नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस।।219।।

  2326. RCM 1.220.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखन नगरु भूपसुत आए। समाचार पुरबासिन्ह पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    देखन नगरु भूपसुत आए। समाचार पुरबासिन्ह पाए।।

  2327. RCM 1.220.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धाए धाम काम सब त्यागी। मनहु रंक निधि लूटन लागी।।

    अर्थ (Hindi)

    धाए धाम काम सब त्यागी। मनहु रंक निधि लूटन लागी।।

  2328. RCM 1.220.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई।।

  2329. RCM 1.220.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीं। निरखहिं राम रूप अनुरागीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीं। निरखहिं राम रूप अनुरागीं।।

  2330. RCM 1.220.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहिं परसपर बचन सप्रीती। सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं परसपर बचन सप्रीती। सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती।।

  2331. RCM 1.220.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुर नर असुर नाग मुनि माहीं। सोभा असि कहुँ सुनिअति नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर नर असुर नाग मुनि माहीं। सोभा असि कहुँ सुनिअति नाहीं।।

  2332. RCM 1.220.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिष्नु चारि भुज बिघि मुख चारी। बिकट बेष मुख पंच पुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष्नु चारि भुज बिघि मुख चारी। बिकट बेष मुख पंच पुरारी।।

  2333. RCM 1.220.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अपर देउ अस कोउ न आही। यह छबि सखि पटतरिअ जाही।।

    अर्थ (Hindi)

    अपर देउ अस कोउ न आही। यह छबि सखि पटतरिअ जाही।।

  2334. RCM 1.220.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बय किसोर सुषमा सदन स्याम गौर सुख घाम।

    अर्थ (Hindi)

    बय किसोर सुषमा सदन स्याम गौर सुख घाम।

  2335. RCM 1.220.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंग अंग पर वारिअहिं कोटि कोटि सत काम।।220।।

    अर्थ (Hindi)

    अंग अंग पर वारिअहिं कोटि कोटि सत काम।।220।।

  2336. RCM 1.221.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी।।

  2337. RCM 1.221.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कोउ सप्रेम बोली मृदु बानी। जो मैं सुना सो सुनहु सयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ सप्रेम बोली मृदु बानी। जो मैं सुना सो सुनहु सयानी।।

  2338. RCM 1.221.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ए दोऊ दसरथ के ढोटा। बाल मरालन्हि के कल जोटा।।

    अर्थ (Hindi)

    ए दोऊ दसरथ के ढोटा। बाल मरालन्हि के कल जोटा।।

  2339. RCM 1.221.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि कौसिक मख के रखवारे। जिन्ह रन अजिर निसाचर मारे।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि कौसिक मख के रखवारे। जिन्ह रन अजिर निसाचर मारे।।

  2340. RCM 1.221.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    स्याम गात कल कंज बिलोचन। जो मारीच सुभुज मदु मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गात कल कंज बिलोचन। जो मारीच सुभुज मदु मोचन।।

  2341. RCM 1.221.6
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    कौसल्या सुत सो सुख खानी। नामु रामु धनु सायक पानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसल्या सुत सो सुख खानी। नामु रामु धनु सायक पानी।।

  2342. RCM 1.221.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गौर किसोर बेषु बर काछें। कर सर चाप राम के पाछें।।

    अर्थ (Hindi)

    गौर किसोर बेषु बर काछें। कर सर चाप राम के पाछें।।

  2343. RCM 1.221.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लछिमनु नामु राम लघु भ्राता। सुनु सखि तासु सुमित्रा माता।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमनु नामु राम लघु भ्राता। सुनु सखि तासु सुमित्रा माता।।

  2344. RCM 1.221.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिप्रकाजु करि बंधु दोउ मग मुनिबधू उधारि।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रकाजु करि बंधु दोउ मग मुनिबधू उधारि।

  2345. RCM 1.221.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आए देखन चापमख सुनि हरषीं सब नारि।।221।।

    अर्थ (Hindi)

    आए देखन चापमख सुनि हरषीं सब नारि।।221।।

  2346. RCM 1.222.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि राम छबि कोउ एक कहई। जोगु जानकिहि यह बरु अहई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि राम छबि कोउ एक कहई। जोगु जानकिहि यह बरु अहई।।

  2347. RCM 1.222.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौ सखि इन्हहि देख नरनाहू। पन परिहरि हठि करइ बिबाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ सखि इन्हहि देख नरनाहू। पन परिहरि हठि करइ बिबाहू।।

  2348. RCM 1.222.3
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    कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।।

  2349. RCM 1.222.4
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    सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।।

    अर्थ (Hindi)

    सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।।

  2350. RCM 1.222.5
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    कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता।।

  2351. RCM 1.222.6
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    तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू।।

  2352. RCM 1.222.7
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    जौ बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू।।

  2353. RCM 1.222.8
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    सखि हमरें आरति अति तातें। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें।।

    अर्थ (Hindi)

    सखि हमरें आरति अति तातें। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें।।

  2354. RCM 1.222.9
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    नाहिं त हम कहुँ सुनहु सखि इन्ह कर दरसनु दूरि।

    अर्थ (Hindi)

    नाहिं त हम कहुँ सुनहु सखि इन्ह कर दरसनु दूरि।

  2355. RCM 1.222.10
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    यह संघटु तब होइ जब पुन्य पुराकृत भूरि।।222।।

    अर्थ (Hindi)

    यह संघटु तब होइ जब पुन्य पुराकृत भूरि।।222।।

  2356. RCM 1.223.1
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    बोली अपर कहेहु सखि नीका। एहिं बिआह अति हित सबहीं का।।

    अर्थ (Hindi)

    बोली अपर कहेहु सखि नीका। एहिं बिआह अति हित सबहीं का।।

  2357. RCM 1.223.2
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    कोउ कह संकर चाप कठोरा। ए स्यामल मृदुगात किसोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ कह संकर चाप कठोरा। ए स्यामल मृदुगात किसोरा।।

  2358. RCM 1.223.3
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    सबु असमंजस अहइ सयानी। यह सुनि अपर कहइ मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सबु असमंजस अहइ सयानी। यह सुनि अपर कहइ मृदु बानी।।

  2359. RCM 1.223.4
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    सखि इन्ह कहँ कोउ कोउ अस कहहीं। बड़ प्रभाउ देखत लघु अहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सखि इन्ह कहँ कोउ कोउ अस कहहीं। बड़ प्रभाउ देखत लघु अहहीं।।

  2360. RCM 1.223.5
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    परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।।

  2361. RCM 1.223.6
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    सो कि रहिहि बिनु सिवधनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    सो कि रहिहि बिनु सिवधनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें।।

  2362. RCM 1.223.7
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    जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।।

  2363. RCM 1.223.8
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    तासु बचन सुनि सब हरषानीं। ऐसेइ होउ कहहिं मुदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु बचन सुनि सब हरषानीं। ऐसेइ होउ कहहिं मुदु बानी।।

  2364. RCM 1.223.9
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    हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद।

    अर्थ (Hindi)

    हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद।

  2365. RCM 1.223.10
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    जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद।।223।।

    अर्थ (Hindi)

    जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद।।223।।

  2366. RCM 1.224.1
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    पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई।।

  2367. RCM 1.224.2
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    अति बिस्तार चारु गच ढारी। बिमल बेदिका रुचिर सँवारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अति बिस्तार चारु गच ढारी। बिमल बेदिका रुचिर सँवारी।।

  2368. RCM 1.224.3
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    चहुँ दिसि कंचन मंच बिसाला। रचे जहाँ बेठहिं महिपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    चहुँ दिसि कंचन मंच बिसाला। रचे जहाँ बेठहिं महिपाला।।

  2369. RCM 1.224.4
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    तेहि पाछें समीप चहुँ पासा। अपर मंच मंडली बिलासा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि पाछें समीप चहुँ पासा। अपर मंच मंडली बिलासा।।

  2370. RCM 1.224.5
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    कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई। बैठहिं नगर लोग जहँ जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई। बैठहिं नगर लोग जहँ जाई।।

  2371. RCM 1.224.6
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    तिन्ह के निकट बिसाल सुहाए। धवल धाम बहुबरन बनाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह के निकट बिसाल सुहाए। धवल धाम बहुबरन बनाए।।

  2372. RCM 1.224.7
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    जहँ बैंठैं देखहिं सब नारी। जथा जोगु निज कुल अनुहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ बैंठैं देखहिं सब नारी। जथा जोगु निज कुल अनुहारी।।

  2373. RCM 1.224.8
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    पुर बालक कहि कहि मृदु बचना। सादर प्रभुहि देखावहिं रचना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर बालक कहि कहि मृदु बचना। सादर प्रभुहि देखावहिं रचना।।

  2374. RCM 1.224.9
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    सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।

    अर्थ (Hindi)

    सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।

  2375. RCM 1.224.10
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    तन पुलकहिं अति हरषु हियँ देखि देखि दोउ भ्रात।।224।।

    अर्थ (Hindi)

    तन पुलकहिं अति हरषु हियँ देखि देखि दोउ भ्रात।।224।।

  2376. RCM 1.225.1
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    सिसु सब राम प्रेमबस जाने। प्रीति समेत निकेत बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    सिसु सब राम प्रेमबस जाने। प्रीति समेत निकेत बखाने।।

  2377. RCM 1.225.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निज निज रुचि सब लेंहिं बोलाई। सहित सनेह जाहिं दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    निज निज रुचि सब लेंहिं बोलाई। सहित सनेह जाहिं दोउ भाई।।

  2378. RCM 1.225.3
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    राम देखावहिं अनुजहि रचना। कहि मृदु मधुर मनोहर बचना।।

    अर्थ (Hindi)

    राम देखावहिं अनुजहि रचना। कहि मृदु मधुर मनोहर बचना।।

  2379. RCM 1.225.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लव निमेष महँ भुवन निकाया। रचइ जासु अनुसासन माया।।

    अर्थ (Hindi)

    लव निमेष महँ भुवन निकाया। रचइ जासु अनुसासन माया।।

  2380. RCM 1.225.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भगति हेतु सोइ दीनदयाला। चितवत चकित धनुष मखसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    भगति हेतु सोइ दीनदयाला। चितवत चकित धनुष मखसाला।।

  2381. RCM 1.225.6
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    कौतुक देखि चले गुरु पाहीं। जानि बिलंबु त्रास मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक देखि चले गुरु पाहीं। जानि बिलंबु त्रास मन माहीं।।

  2382. RCM 1.225.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जासु त्रास डर कहुँ डर होई। भजन प्रभाउ देखावत सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु त्रास डर कहुँ डर होई। भजन प्रभाउ देखावत सोई।।

  2383. RCM 1.225.8
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    कहि बातें मृदु मधुर सुहाईं। किए बिदा बालक बरिआई।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि बातें मृदु मधुर सुहाईं। किए बिदा बालक बरिआई।।

  2384. RCM 1.225.9
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    सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ।

    अर्थ (Hindi)

    सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ।

  2385. RCM 1.225.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गुर पद पंकज नाइ सिर बैठे आयसु पाइ।।225।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर पद पंकज नाइ सिर बैठे आयसु पाइ।।225।।

  2386. RCM 1.226.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।

  2387. RCM 1.226.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी।।

  2388. RCM 1.226.3
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    मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।

  2389. RCM 1.226.4
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    जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी।।

  2390. RCM 1.226.5
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    तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।

    अर्थ (Hindi)

    तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।

  2391. RCM 1.226.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बारबार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    बारबार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही।।

  2392. RCM 1.226.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।

  2393. RCM 1.226.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता। पौढ़े धरि उर पद जलजाता।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता। पौढ़े धरि उर पद जलजाता।।

  2394. RCM 1.226.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उठे लखन निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।।

    अर्थ (Hindi)

    उठे लखन निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।।

  2395. RCM 1.226.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान।।226।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान।।226।।

  2396. RCM 1.227.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।।

  2397. RCM 1.227.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई।।

  2398. RCM 1.227.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूप बागु बर देखेउ जाई। जहँ बसंत रितु रही लोभाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप बागु बर देखेउ जाई। जहँ बसंत रितु रही लोभाई।।

  2399. RCM 1.227.4
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    लागे बिटप मनोहर नाना। बरन बरन बर बेलि बिताना।।

    अर्थ (Hindi)

    लागे बिटप मनोहर नाना। बरन बरन बर बेलि बिताना।।

  2400. RCM 1.227.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नव पल्लव फल सुमान सुहाए। निज संपति सुर रूख लजाए।।

    अर्थ (Hindi)

    नव पल्लव फल सुमान सुहाए। निज संपति सुर रूख लजाए।।

  2401. RCM 1.227.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चातक कोकिल कीर चकोरा। कूजत बिहग नटत कल मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    चातक कोकिल कीर चकोरा। कूजत बिहग नटत कल मोरा।।

  2402. RCM 1.227.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मध्य बाग सरु सोह सुहावा। मनि सोपान बिचित्र बनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    मध्य बाग सरु सोह सुहावा। मनि सोपान बिचित्र बनावा।।

  2403. RCM 1.227.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिमल सलिलु सरसिज बहुरंगा। जलखग कूजत गुंजत भृंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिमल सलिलु सरसिज बहुरंगा। जलखग कूजत गुंजत भृंगा।।

  2404. RCM 1.227.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत।

    अर्थ (Hindi)

    बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत।

  2405. RCM 1.227.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परम रम्य आरामु यहु जो रामहि सुख देत।।227।।

    अर्थ (Hindi)

    परम रम्य आरामु यहु जो रामहि सुख देत।।227।।

  2406. RCM 1.228.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चहुँ दिसि चितइ पूँछि मालिगन। लगे लेन दल फूल मुदित मन।।

    अर्थ (Hindi)

    चहुँ दिसि चितइ पूँछि मालिगन। लगे लेन दल फूल मुदित मन।।

  2407. RCM 1.228.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि अवसर सीता तहँ आई। गिरिजा पूजन जननि पठाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अवसर सीता तहँ आई। गिरिजा पूजन जननि पठाई।।

  2408. RCM 1.228.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संग सखीं सब सुभग सयानी। गावहिं गीत मनोहर बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    संग सखीं सब सुभग सयानी। गावहिं गीत मनोहर बानी।।

  2409. RCM 1.228.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सर समीप गिरिजा गृह सोहा। बरनि न जाइ देखि मनु मोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    सर समीप गिरिजा गृह सोहा। बरनि न जाइ देखि मनु मोहा।।

  2410. RCM 1.228.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मज्जनु करि सर सखिन्ह समेता। गई मुदित मन गौरि निकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    मज्जनु करि सर सखिन्ह समेता। गई मुदित मन गौरि निकेता।।

  2411. RCM 1.228.6
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    पूजा कीन्हि अधिक अनुरागा। निज अनुरूप सुभग बरु मागा।।

    अर्थ (Hindi)

    पूजा कीन्हि अधिक अनुरागा। निज अनुरूप सुभग बरु मागा।।

  2412. RCM 1.228.7
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    एक सखी सिय संगु बिहाई। गई रही देखन फुलवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    एक सखी सिय संगु बिहाई। गई रही देखन फुलवाई।।

  2413. RCM 1.228.8
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    तेहि दोउ बंधु बिलोके जाई। प्रेम बिबस सीता पहिं आई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि दोउ बंधु बिलोके जाई। प्रेम बिबस सीता पहिं आई।।

  2414. RCM 1.228.9
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    तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।

    अर्थ (Hindi)

    तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।

  2415. RCM 1.228.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहु कारनु निज हरष कर पूछहि सब मृदु बैन।।228।।

    अर्थ (Hindi)

    कहु कारनु निज हरष कर पूछहि सब मृदु बैन।।228।।

  2416. RCM 1.229.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखन बागु कुअँर दुइ आए। बय किसोर सब भाँति सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    देखन बागु कुअँर दुइ आए। बय किसोर सब भाँति सुहाए।।

  2417. RCM 1.229.2
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    स्याम गौर किमि कहौं बखानी। गिरा अनयन नयन बिनु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गौर किमि कहौं बखानी। गिरा अनयन नयन बिनु बानी।।

  2418. RCM 1.229.3
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    सुनि हरषीं सब सखीं सयानी। सिय हियँ अति उतकंठा जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि हरषीं सब सखीं सयानी। सिय हियँ अति उतकंठा जानी।।

  2419. RCM 1.229.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एक कहइ नृपसुत तेइ आली। सुने जे मुनि सँग आए काली।।

    अर्थ (Hindi)

    एक कहइ नृपसुत तेइ आली। सुने जे मुनि सँग आए काली।।

  2420. RCM 1.229.5
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    जिन्ह निज रूप मोहनी डारी। कीन्ह स्वबस नगर नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह निज रूप मोहनी डारी। कीन्ह स्वबस नगर नर नारी।।

  2421. RCM 1.229.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरनत छबि जहँ तहँ सब लोगू। अवसि देखिअहिं देखन जोगू।।

    अर्थ (Hindi)

    बरनत छबि जहँ तहँ सब लोगू। अवसि देखिअहिं देखन जोगू।।

  2422. RCM 1.229.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तासु वचन अति सियहि सुहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु वचन अति सियहि सुहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने।।

  2423. RCM 1.229.8
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    चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई।।

  2424. RCM 1.229.9
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    सुमिरि सीय नारद बचन उपजी प्रीति पुनीत।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि सीय नारद बचन उपजी प्रीति पुनीत।।

  2425. RCM 1.229.10
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    चकित बिलोकति सकल दिसि जनु सिसु मृगी सभीत।।229।।

    अर्थ (Hindi)

    चकित बिलोकति सकल दिसि जनु सिसु मृगी सभीत।।229।।

  2426. RCM 1.230.1
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    कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि।।

    अर्थ (Hindi)

    कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि।।

  2427. RCM 1.230.2
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    मानहुँ मदन दुंदुभी दीन्ही।।मनसा बिस्व बिजय कहँ कीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    मानहुँ मदन दुंदुभी दीन्ही।।मनसा बिस्व बिजय कहँ कीन्ही।।

  2428. RCM 1.230.3
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    अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा।।

  2429. RCM 1.230.4
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    भए बिलोचन चारु अचंचल। मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल।।

    अर्थ (Hindi)

    भए बिलोचन चारु अचंचल। मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल।।

  2430. RCM 1.230.5
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    देखि सीय सोभा सुखु पावा। हृदयँ सराहत बचनु न आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि सीय सोभा सुखु पावा। हृदयँ सराहत बचनु न आवा।।

  2431. RCM 1.230.6
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    जनु बिरंचि सब निज निपुनाई। बिरचि बिस्व कहँ प्रगटि देखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जनु बिरंचि सब निज निपुनाई। बिरचि बिस्व कहँ प्रगटि देखाई।।

  2432. RCM 1.230.7
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    सुंदरता कहुँ सुंदर करई। छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदरता कहुँ सुंदर करई। छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई।।

  2433. RCM 1.230.8
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    सब उपमा कबि रहे जुठारी। केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब उपमा कबि रहे जुठारी। केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी।।

  2434. RCM 1.230.9
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    सिय सोभा हियँ बरनि प्रभु आपनि दसा बिचारि।

    अर्थ (Hindi)

    सिय सोभा हियँ बरनि प्रभु आपनि दसा बिचारि।

  2435. RCM 1.230.10
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    बोले सुचि मन अनुज सन बचन समय अनुहारि।।230।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले सुचि मन अनुज सन बचन समय अनुहारि।।230।।

  2436. RCM 1.231.1
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    तात जनकतनया यह सोई। धनुषजग्य जेहि कारन होई।।

    अर्थ (Hindi)

    तात जनकतनया यह सोई। धनुषजग्य जेहि कारन होई।।

  2437. RCM 1.231.2
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    पूजन गौरि सखीं लै आई। करत प्रकासु फिरइ फुलवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पूजन गौरि सखीं लै आई। करत प्रकासु फिरइ फुलवाई।।

  2438. RCM 1.231.3
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    जासु बिलोकि अलोकिक सोभा। सहज पुनीत मोर मनु छोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु बिलोकि अलोकिक सोभा। सहज पुनीत मोर मनु छोभा।।

  2439. RCM 1.231.4
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    सो सबु कारन जान बिधाता। फरकहिं सुभद अंग सुनु भ्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    सो सबु कारन जान बिधाता। फरकहिं सुभद अंग सुनु भ्राता।।

  2440. RCM 1.231.5
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    रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ।।

  2441. RCM 1.231.6
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    मोहि अतिसय प्रतीति मन केरी। जेहिं सपनेहुँ परनारि न हेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि अतिसय प्रतीति मन केरी। जेहिं सपनेहुँ परनारि न हेरी।।

  2442. RCM 1.231.7
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    जिन्ह कै लहहिं न रिपु रन पीठी। नहिं पावहिं परतिय मनु डीठी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह कै लहहिं न रिपु रन पीठी। नहिं पावहिं परतिय मनु डीठी।।

  2443. RCM 1.231.8
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    मंगन लहहि न जिन्ह कै नाहीं। ते नरबर थोरे जग माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगन लहहि न जिन्ह कै नाहीं। ते नरबर थोरे जग माहीं।।

  2444. RCM 1.231.9
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    करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान।

    अर्थ (Hindi)

    करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान।

  2445. RCM 1.231.10
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    मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान।।231।।

    अर्थ (Hindi)

    मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान।।231।।

  2446. RCM 1.232.1
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    चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।।

    अर्थ (Hindi)

    चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।।

  2447. RCM 1.232.2
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    जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी।।

  2448. RCM 1.232.3
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    लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।।

  2449. RCM 1.232.4
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    देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने।।

  2450. RCM 1.232.5
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    थके नयन रघुपति छबि देखें। पलकन्हिहूँ परिहरीं निमेषें।।

    अर्थ (Hindi)

    थके नयन रघुपति छबि देखें। पलकन्हिहूँ परिहरीं निमेषें।।

  2451. RCM 1.232.6
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    अधिक सनेहँ देह भै भोरी। सरद ससिहि जनु चितव चकोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    अधिक सनेहँ देह भै भोरी। सरद ससिहि जनु चितव चकोरी।।

  2452. RCM 1.232.7
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    लोचन मग रामहि उर आनी। दीन्हे पलक कपाट सयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    लोचन मग रामहि उर आनी। दीन्हे पलक कपाट सयानी।।

  2453. RCM 1.232.8
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    जब सिय सखिन्ह प्रेमबस जानी। कहि न सकहिं कछु मन सकुचानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जब सिय सखिन्ह प्रेमबस जानी। कहि न सकहिं कछु मन सकुचानी।।

  2454. RCM 1.232.9
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    लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ।

    अर्थ (Hindi)

    लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ।

  2455. RCM 1.232.10
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    निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ।।232।।

    अर्थ (Hindi)

    निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ।।232।।

  2456. RCM 1.233.1
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    सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा।।

  2457. RCM 1.233.2
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    मोरपंख सिर सोहत नीके। गुच्छ बीच बिच कुसुम कली के।।

    अर्थ (Hindi)

    मोरपंख सिर सोहत नीके। गुच्छ बीच बिच कुसुम कली के।।

  2458. RCM 1.233.3
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    भाल तिलक श्रमबिंदु सुहाए। श्रवन सुभग भूषन छबि छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    भाल तिलक श्रमबिंदु सुहाए। श्रवन सुभग भूषन छबि छाए।।

  2459. RCM 1.233.4
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    बिकट भृकुटि कच घूघरवारे। नव सरोज लोचन रतनारे।।

    अर्थ (Hindi)

    बिकट भृकुटि कच घूघरवारे। नव सरोज लोचन रतनारे।।

  2460. RCM 1.233.5
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    चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला।।

    अर्थ (Hindi)

    चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला।।

  2461. RCM 1.233.6
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    मुखछबि कहि न जाइ मोहि पाहीं। जो बिलोकि बहु काम लजाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मुखछबि कहि न जाइ मोहि पाहीं। जो बिलोकि बहु काम लजाहीं।।

  2462. RCM 1.233.7
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    उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा।।

    अर्थ (Hindi)

    उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा।।

  2463. RCM 1.233.8
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    सुमन समेत बाम कर दोना। सावँर कुअँर सखी सुठि लोना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमन समेत बाम कर दोना। सावँर कुअँर सखी सुठि लोना।।

  2464. RCM 1.233.9
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    केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान।

    अर्थ (Hindi)

    केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान।

  2465. RCM 1.233.10
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    देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।233।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।233।।

  2466. RCM 1.234.1
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    धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी।।

    अर्थ (Hindi)

    धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी।।

  2467. RCM 1.234.2
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    बहुरि गौरि कर ध्यान करेहू। भूपकिसोर देखि किन लेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि गौरि कर ध्यान करेहू। भूपकिसोर देखि किन लेहू।।

  2468. RCM 1.234.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सकुचि सीयँ तब नयन उघारे। सनमुख दोउ रघुसिंघ निहारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सकुचि सीयँ तब नयन उघारे। सनमुख दोउ रघुसिंघ निहारे।।

  2469. RCM 1.234.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नख सिख देखि राम कै सोभा। सुमिरि पिता पनु मनु अति छोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    नख सिख देखि राम कै सोभा। सुमिरि पिता पनु मनु अति छोभा।।

  2470. RCM 1.234.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परबस सखिन्ह लखी जब सीता। भयउ गहरु सब कहहि सभीता।।

    अर्थ (Hindi)

    परबस सखिन्ह लखी जब सीता। भयउ गहरु सब कहहि सभीता।।

  2471. RCM 1.234.6
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    पुनि आउब एहि बेरिआँ काली। अस कहि मन बिहसी एक आली।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि आउब एहि बेरिआँ काली। अस कहि मन बिहसी एक आली।।

  2472. RCM 1.234.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गूढ़ गिरा सुनि सिय सकुचानी। भयउ बिलंबु मातु भय मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    गूढ़ गिरा सुनि सिय सकुचानी। भयउ बिलंबु मातु भय मानी।।

  2473. RCM 1.234.8
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    धरि बड़ि धीर रामु उर आने। फिरि अपनपउ पितुबस जाने।।

    अर्थ (Hindi)

    धरि बड़ि धीर रामु उर आने। फिरि अपनपउ पितुबस जाने।।

  2474. RCM 1.234.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।

    अर्थ (Hindi)

    देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।

  2475. RCM 1.234.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि।। 234।।

    अर्थ (Hindi)

    निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि।। 234।।

  2476. RCM 1.235.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।।

    अर्थ (Hindi)

    जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।।

  2477. RCM 1.235.2
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    प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी।।

  2478. RCM 1.235.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।।

  2479. RCM 1.235.4
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    गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी।।

  2480. RCM 1.235.5
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    जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।।

  2481. RCM 1.235.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जय गज बदन षड़ानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    जय गज बदन षड़ानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।।

  2482. RCM 1.235.7
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    नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।

  2483. RCM 1.235.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

  2484. RCM 1.235.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।

    अर्थ (Hindi)

    पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।

  2485. RCM 1.235.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष।।235।।

    अर्थ (Hindi)

    महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष।।235।।

  2486. RCM 1.236.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी।।

  2487. RCM 1.236.2
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    देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।

  2488. RCM 1.236.3
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    मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें।।

    अर्थ (Hindi)

    मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें।।

  2489. RCM 1.236.4
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    कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।

  2490. RCM 1.236.5
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    बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मूरति मुसुकानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मूरति मुसुकानी।।

  2491. RCM 1.236.6
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    सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।।

  2492. RCM 1.236.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।

  2493. RCM 1.236.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।।

  2494. RCM 1.237.1
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    हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई।।

  2495. RCM 1.237.2
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    राम कहा सबु कौसिक पाहीं। सरल सुभाउ छुअत छल नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कहा सबु कौसिक पाहीं। सरल सुभाउ छुअत छल नाहीं।।

  2496. RCM 1.237.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही।।

  2497. RCM 1.237.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे।।

  2498. RCM 1.237.5
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    करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।।

    अर्थ (Hindi)

    करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।।

  2499. RCM 1.237.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई।।

  2500. RCM 1.237.7
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    प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।।

  2501. RCM 1.237.8
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    बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं।।

  2502. RCM 1.237.9
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    जनमु सिंधु पुनि बंधु बिषु दिन मलीन सकलंक।

    अर्थ (Hindi)

    जनमु सिंधु पुनि बंधु बिषु दिन मलीन सकलंक।

  2503. RCM 1.237.10
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    सिय मुख समता पाव किमि चंदु बापुरो रंक।।237।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय मुख समता पाव किमि चंदु बापुरो रंक।।237।।

  2504. RCM 1.238.1
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    घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।।

  2505. RCM 1.238.2
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    कोक सिकप्रद पंकज द्रोही। अवगुन बहुत चंद्रमा तोही।।

    अर्थ (Hindi)

    कोक सिकप्रद पंकज द्रोही। अवगुन बहुत चंद्रमा तोही।।

  2506. RCM 1.238.3
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    बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।।

  2507. RCM 1.238.4
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    सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी।।

  2508. RCM 1.238.5
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    करि मुनि चरन सरोज प्रनामा। आयसु पाइ कीन्ह बिश्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    करि मुनि चरन सरोज प्रनामा। आयसु पाइ कीन्ह बिश्रामा।।

  2509. RCM 1.238.6
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    बिगत निसा रघुनायक जागे। बंधु बिलोकि कहन अस लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    बिगत निसा रघुनायक जागे। बंधु बिलोकि कहन अस लागे।।

  2510. RCM 1.238.7
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    उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।।

  2511. RCM 1.238.8
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    बोले लखनु जोरि जुग पानी। प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले लखनु जोरि जुग पानी। प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी।।

  2512. RCM 1.238.9
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    अरुनोदयँ सकुचे कुमुद उडगन जोति मलीन।

    अर्थ (Hindi)

    अरुनोदयँ सकुचे कुमुद उडगन जोति मलीन।

  2513. RCM 1.238.10
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    जिमि तुम्हार आगमन सुनि भए नृपति बलहीन।।238।।

    अर्थ (Hindi)

    जिमि तुम्हार आगमन सुनि भए नृपति बलहीन।।238।।

  2514. RCM 1.239.1
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    नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी।।

  2515. RCM 1.239.2
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    कमल कोक मधुकर खग नाना। हरषे सकल निसा अवसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कमल कोक मधुकर खग नाना। हरषे सकल निसा अवसाना।।

  2516. RCM 1.239.3
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    ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे।।

  2517. RCM 1.239.4
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    उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे नखत जग तेजु प्रकासा।।

    अर्थ (Hindi)

    उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे नखत जग तेजु प्रकासा।।

  2518. RCM 1.239.5
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    रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया।।

    अर्थ (Hindi)

    रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया।।

  2519. RCM 1.239.6
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    तव भुज बल महिमा उदघाटी। प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी।।

    अर्थ (Hindi)

    तव भुज बल महिमा उदघाटी। प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी।।

  2520. RCM 1.239.7
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    बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने।।

  2521. RCM 1.239.8
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    नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए। चरन सरोज सुभग सिर नाए।।

    अर्थ (Hindi)

    नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए। चरन सरोज सुभग सिर नाए।।

  2522. RCM 1.239.9
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    सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए।।

  2523. RCM 1.239.10
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    जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई। हरषे बोलि लिए दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई। हरषे बोलि लिए दोउ भाई।।

  2524. RCM 1.239.11
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    सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ।

    अर्थ (Hindi)

    सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ।

  2525. RCM 1.239.12
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    चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ।।239।।

    अर्थ (Hindi)

    चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ।।239।।

  2526. RCM 1.240.1
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    सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई।।

  2527. RCM 1.240.2
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    लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई।।

    अर्थ (Hindi)

    लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई।।

  2528. RCM 1.240.3
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    हरषे मुनि सब सुनि बर बानी। दीन्हि असीस सबहिं सुखु मानी।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषे मुनि सब सुनि बर बानी। दीन्हि असीस सबहिं सुखु मानी।।

  2529. RCM 1.240.4
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    पुनि मुनिबृंद समेत कृपाला। देखन चले धनुषमख साला।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि मुनिबृंद समेत कृपाला। देखन चले धनुषमख साला।।

  2530. RCM 1.240.5
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    रंगभूमि आए दोउ भाई। असि सुधि सब पुरबासिन्ह पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रंगभूमि आए दोउ भाई। असि सुधि सब पुरबासिन्ह पाई।।

  2531. RCM 1.240.6
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    चले सकल गृह काज बिसारी। बाल जुबान जरठ नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    चले सकल गृह काज बिसारी। बाल जुबान जरठ नर नारी।।

  2532. RCM 1.240.7
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    देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी।।

  2533. RCM 1.240.8
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    तुरत सकल लोगन्ह पहिं जाहू। आसन उचित देहू सब काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत सकल लोगन्ह पहिं जाहू। आसन उचित देहू सब काहू।।

  2534. RCM 1.240.9
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    कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि।

    अर्थ (Hindi)

    कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि।

  2535. RCM 1.240.10
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    उत्तम मध्यम नीच लघु निज निज थल अनुहारि।।240।।

    अर्थ (Hindi)

    उत्तम मध्यम नीच लघु निज निज थल अनुहारि।।240।।

  2536. RCM 1.241.1
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    राजकुअँर तेहि अवसर आए। मनहुँ मनोहरता तन छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    राजकुअँर तेहि अवसर आए। मनहुँ मनोहरता तन छाए।।

  2537. RCM 1.241.2
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    गुन सागर नागर बर बीरा। सुंदर स्यामल गौर सरीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुन सागर नागर बर बीरा। सुंदर स्यामल गौर सरीरा।।

  2538. RCM 1.241.3
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    राज समाज बिराजत रूरे। उडगन महुँ जनु जुग बिधु पूरे।।

    अर्थ (Hindi)

    राज समाज बिराजत रूरे। उडगन महुँ जनु जुग बिधु पूरे।।

  2539. RCM 1.241.4
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    जिन्ह कें रही भावना जैसी। प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह कें रही भावना जैसी। प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी।।

  2540. RCM 1.241.5
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    देखहिं रूप महा रनधीरा। मनहुँ बीर रसु धरें सरीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखहिं रूप महा रनधीरा। मनहुँ बीर रसु धरें सरीरा।।

  2541. RCM 1.241.6
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    डरे कुटिल नृप प्रभुहि निहारी। मनहुँ भयानक मूरति भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    डरे कुटिल नृप प्रभुहि निहारी। मनहुँ भयानक मूरति भारी।।

  2542. RCM 1.241.7
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    रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट कालसम देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट कालसम देखा।।

  2543. RCM 1.241.8
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    पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई। नरभूषन लोचन सुखदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई। नरभूषन लोचन सुखदाई।।

  2544. RCM 1.241.9
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    नारि बिलोकहिं हरषि हियँ निज निज रुचि अनुरूप।

    अर्थ (Hindi)

    नारि बिलोकहिं हरषि हियँ निज निज रुचि अनुरूप।

  2545. RCM 1.241.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनु सोहत सिंगार धरि मूरति परम अनूप।।241।।

    अर्थ (Hindi)

    जनु सोहत सिंगार धरि मूरति परम अनूप।।241।।

  2546. RCM 1.242.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।।

  2547. RCM 1.242.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनक जाति अवलोकहिं कैसैं। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक जाति अवलोकहिं कैसैं। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें।।

  2548. RCM 1.242.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सहित बिदेह बिलोकहिं रानी। सिसु सम प्रीति न जाति बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सहित बिदेह बिलोकहिं रानी। सिसु सम प्रीति न जाति बखानी।।

  2549. RCM 1.242.4
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    जोगिन्ह परम तत्वमय भासा। सांत सुद्ध सम सहज प्रकासा।।

    अर्थ (Hindi)

    जोगिन्ह परम तत्वमय भासा। सांत सुद्ध सम सहज प्रकासा।।

  2550. RCM 1.242.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।।

    अर्थ (Hindi)

    हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।।

  2551. RCM 1.242.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया।।

  2552. RCM 1.242.7
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    उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।।

  2553. RCM 1.242.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि रहा जाहि जस भाऊ। तेहिं तस देखेउ कोसलराऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि रहा जाहि जस भाऊ। तेहिं तस देखेउ कोसलराऊ।।

  2554. RCM 1.242.9
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    राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर।

    अर्थ (Hindi)

    राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर।

  2555. RCM 1.242.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुंदर स्यामल गौर तन बिस्व बिलोचन चोर।।242।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर स्यामल गौर तन बिस्व बिलोचन चोर।।242।।

  2556. RCM 1.243.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सहज मनोहर मूरति दोऊ। कोटि काम उपमा लघु सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज मनोहर मूरति दोऊ। कोटि काम उपमा लघु सोऊ।।

  2557. RCM 1.243.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सरद चंद निंदक मुख नीके। नीरज नयन भावते जी के।।

    अर्थ (Hindi)

    सरद चंद निंदक मुख नीके। नीरज नयन भावते जी के।।

  2558. RCM 1.243.3
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    चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।

  2559. RCM 1.243.4
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    कल कपोल श्रुति कुंडल लोला। चिबुक अधर सुंदर मृदु बोला।।

    अर्थ (Hindi)

    कल कपोल श्रुति कुंडल लोला। चिबुक अधर सुंदर मृदु बोला।।

  2560. RCM 1.243.5
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    कुमुदबंधु कर निंदक हाँसा। भृकुटी बिकट मनोहर नासा।।

    अर्थ (Hindi)

    कुमुदबंधु कर निंदक हाँसा। भृकुटी बिकट मनोहर नासा।।

  2561. RCM 1.243.6
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    भाल बिसाल तिलक झलकाहीं। कच बिलोकि अलि अवलि लजाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    भाल बिसाल तिलक झलकाहीं। कच बिलोकि अलि अवलि लजाहीं।।

  2562. RCM 1.243.7
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    पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।

  2563. RCM 1.243.8
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    रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ।।

    अर्थ (Hindi)

    रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ।।

  2564. RCM 1.243.9
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    कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।

    अर्थ (Hindi)

    कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।

  2565. RCM 1.243.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बृषभ कंध केहरि ठवनि बल निधि बाहु बिसाल।।243।।

    अर्थ (Hindi)

    बृषभ कंध केहरि ठवनि बल निधि बाहु बिसाल।।243।।

  2566. RCM 1.244.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कटि तूनीर पीत पट बाँधे। कर सर धनुष बाम बर काँधे।।

    अर्थ (Hindi)

    कटि तूनीर पीत पट बाँधे। कर सर धनुष बाम बर काँधे।।

  2567. RCM 1.244.2
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    पीत जग्य उपबीत सुहाए। नख सिख मंजु महाछबि छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    पीत जग्य उपबीत सुहाए। नख सिख मंजु महाछबि छाए।।

  2568. RCM 1.244.3
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    देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे।।

  2569. RCM 1.244.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हरषे जनकु देखि दोउ भाई। मुनि पद कमल गहे तब जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषे जनकु देखि दोउ भाई। मुनि पद कमल गहे तब जाई।।

  2570. RCM 1.244.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करि बिनती निज कथा सुनाई। रंग अवनि सब मुनिहि देखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बिनती निज कथा सुनाई। रंग अवनि सब मुनिहि देखाई।।

  2571. RCM 1.244.6
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    जहँ जहँ जाहि कुअँर बर दोऊ। तहँ तहँ चकित चितव सबु कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ जहँ जाहि कुअँर बर दोऊ। तहँ तहँ चकित चितव सबु कोऊ।।

  2572. RCM 1.244.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा।।

  2573. RCM 1.244.8
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    भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ। राजाँ मुदित महासुख लहेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ। राजाँ मुदित महासुख लहेऊ।।

  2574. RCM 1.244.9
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    सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल।

    अर्थ (Hindi)

    सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल।

  2575. RCM 1.244.10
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    मुनि समेत दोउ बंधु तहँ बैठारे महिपाल।।244।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि समेत दोउ बंधु तहँ बैठारे महिपाल।।244।।

  2576. RCM 1.245.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभुहि देखि सब नृप हिंयँ हारे। जनु राकेस उदय भएँ तारे।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभुहि देखि सब नृप हिंयँ हारे। जनु राकेस उदय भएँ तारे।।

  2577. RCM 1.245.2
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    असि प्रतीति सब के मन माहीं। राम चाप तोरब सक नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    असि प्रतीति सब के मन माहीं। राम चाप तोरब सक नाहीं।।

  2578. RCM 1.245.3
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    बिनु भंजेहुँ भव धनुषु बिसाला। मेलिहि सीय राम उर माला।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु भंजेहुँ भव धनुषु बिसाला। मेलिहि सीय राम उर माला।।

  2579. RCM 1.245.4
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    अस बिचारि गवनहु घर भाई। जसु प्रतापु बलु तेजु गवाँई।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि गवनहु घर भाई। जसु प्रतापु बलु तेजु गवाँई।।

  2580. RCM 1.245.5
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    बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी।।

  2581. RCM 1.245.6
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    तोरेहुँ धनुषु ब्याहु अवगाहा। बिनु तोरें को कुअँरि बिआहा।।

    अर्थ (Hindi)

    तोरेहुँ धनुषु ब्याहु अवगाहा। बिनु तोरें को कुअँरि बिआहा।।

  2582. RCM 1.245.7
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    एक बार कालउ किन होऊ। सिय हित समर जितब हम सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बार कालउ किन होऊ। सिय हित समर जितब हम सोऊ।।

  2583. RCM 1.245.8
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    यह सुनि अवर महिप मुसकाने। धरमसील हरिभगत सयाने।।

    अर्थ (Hindi)

    यह सुनि अवर महिप मुसकाने। धरमसील हरिभगत सयाने।।

  2584. RCM 1.245.9
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    सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के।।

  2585. RCM 1.245.10
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    जीति को सक संग्राम दसरथ के रन बाँकुरे।।245।।

    अर्थ (Hindi)

    जीति को सक संग्राम दसरथ के रन बाँकुरे।।245।।

  2586. RCM 1.246.1
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    ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।।

  2587. RCM 1.246.2
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    सिख हमारि सुनि परम पुनीता। जगदंबा जानहु जियँ सीता।।

    अर्थ (Hindi)

    सिख हमारि सुनि परम पुनीता। जगदंबा जानहु जियँ सीता।।

  2588. RCM 1.246.3
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    जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।।

  2589. RCM 1.246.4
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    सुंदर सुखद सकल गुन रासी। ए दोउ बंधु संभु उर बासी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर सुखद सकल गुन रासी। ए दोउ बंधु संभु उर बासी।।

  2590. RCM 1.246.5
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    सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।।

  2591. RCM 1.246.6
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    करहु जाइ जा कहुँ जोई भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    करहु जाइ जा कहुँ जोई भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा।।

  2592. RCM 1.246.7
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    अस कहि भले भूप अनुरागे। रूप अनूप बिलोकन लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि भले भूप अनुरागे। रूप अनूप बिलोकन लागे।।

  2593. RCM 1.246.8
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    देखहिं सुर नभ चढ़े बिमाना। बरषहिं सुमन करहिं कल गाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखहिं सुर नभ चढ़े बिमाना। बरषहिं सुमन करहिं कल गाना।।

  2594. RCM 1.246.9
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    जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाई।

    अर्थ (Hindi)

    जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाई।

  2595. RCM 1.246.10
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    चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं लवाईं।।246।।

    अर्थ (Hindi)

    चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं लवाईं।।246।।

  2596. RCM 1.247.1
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    सिय सोभा नहिं जाइ बखानी। जगदंबिका रूप गुन खानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय सोभा नहिं जाइ बखानी। जगदंबिका रूप गुन खानी।।

  2597. RCM 1.247.2
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    उपमा सकल मोहि लघु लागीं। प्राकृत नारि अंग अनुरागीं।।

    अर्थ (Hindi)

    उपमा सकल मोहि लघु लागीं। प्राकृत नारि अंग अनुरागीं।।

  2598. RCM 1.247.3
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    सिय बरनिअ तेइ उपमा देई। कुकबि कहाइ अजसु को लेई।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय बरनिअ तेइ उपमा देई। कुकबि कहाइ अजसु को लेई।।

  2599. RCM 1.247.4
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    जौ पटतरिअ तीय सम सीया। जग असि जुबति कहाँ कमनीया।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ पटतरिअ तीय सम सीया। जग असि जुबति कहाँ कमनीया।।

  2600. RCM 1.247.5
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    गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी।।

  2601. RCM 1.247.6
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    बिष बारुनी बंधु प्रिय जेही। कहिअ रमासम किमि बैदेही।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष बारुनी बंधु प्रिय जेही। कहिअ रमासम किमि बैदेही।।

  2602. RCM 1.247.7
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    जौ छबि सुधा पयोनिधि होई। परम रूपमय कच्छप सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ छबि सुधा पयोनिधि होई। परम रूपमय कच्छप सोई।।

  2603. RCM 1.247.8
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    सोभा रजु मंदरु सिंगारू। मथै पानि पंकज निज मारू।।

    अर्थ (Hindi)

    सोभा रजु मंदरु सिंगारू। मथै पानि पंकज निज मारू।।

  2604. RCM 1.247.9
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    एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल।

  2605. RCM 1.247.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल।।247।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल।।247।।

  2606. RCM 1.248.1
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    चलिं संग लै सखीं सयानी। गावत गीत मनोहर बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    चलिं संग लै सखीं सयानी। गावत गीत मनोहर बानी।।

  2607. RCM 1.248.2
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    सोह नवल तनु सुंदर सारी। जगत जननि अतुलित छबि भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोह नवल तनु सुंदर सारी। जगत जननि अतुलित छबि भारी।।

  2608. RCM 1.248.3
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    भूषन सकल सुदेस सुहाए। अंग अंग रचि सखिन्ह बनाए।।

    अर्थ (Hindi)

    भूषन सकल सुदेस सुहाए। अंग अंग रचि सखिन्ह बनाए।।

  2609. RCM 1.248.4
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    रंगभूमि जब सिय पगु धारी। देखि रूप मोहे नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रंगभूमि जब सिय पगु धारी। देखि रूप मोहे नर नारी।।

  2610. RCM 1.248.5
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    हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।

  2611. RCM 1.248.6
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    पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला।।

    अर्थ (Hindi)

    पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला।।

  2612. RCM 1.248.7
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    सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा।।

  2613. RCM 1.248.8
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    मुनि समीप देखे दोउ भाई। लगे ललकि लोचन निधि पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि समीप देखे दोउ भाई। लगे ललकि लोचन निधि पाई।।

  2614. RCM 1.248.9
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    गुरजन लाज समाजु बड़ देखि सीय सकुचानि।।

    अर्थ (Hindi)

    गुरजन लाज समाजु बड़ देखि सीय सकुचानि।।

  2615. RCM 1.248.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लागि बिलोकन सखिन्ह तन रघुबीरहि उर आनि।।248।।

    अर्थ (Hindi)

    लागि बिलोकन सखिन्ह तन रघुबीरहि उर आनि।।248।।

  2616. RCM 1.249.1
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    राम रूपु अरु सिय छबि देखें। नर नारिन्ह परिहरीं निमेषें।।

    अर्थ (Hindi)

    राम रूपु अरु सिय छबि देखें। नर नारिन्ह परिहरीं निमेषें।।

  2617. RCM 1.249.2
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    सोचहिं सकल कहत सकुचाहीं। बिधि सन बिनय करहिं मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सोचहिं सकल कहत सकुचाहीं। बिधि सन बिनय करहिं मन माहीं।।

  2618. RCM 1.249.3
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    हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई। मति हमारि असि देहि सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई। मति हमारि असि देहि सुहाई।।

  2619. RCM 1.249.4
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    बिनु बिचार पनु तजि नरनाहु। सीय राम कर करै बिबाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु बिचार पनु तजि नरनाहु। सीय राम कर करै बिबाहू।।

  2620. RCM 1.249.5
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    जग भल कहहि भाव सब काहू। हठ कीन्हे अंतहुँ उर दाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जग भल कहहि भाव सब काहू। हठ कीन्हे अंतहुँ उर दाहू।।

  2621. RCM 1.249.6
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    एहिं लालसाँ मगन सब लोगू। बरु साँवरो जानकी जोगू।।

    अर्थ (Hindi)

    एहिं लालसाँ मगन सब लोगू। बरु साँवरो जानकी जोगू।।

  2622. RCM 1.249.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब बंदीजन जनक बौलाए। बिरिदावली कहत चलि आए।।

    अर्थ (Hindi)

    तब बंदीजन जनक बौलाए। बिरिदावली कहत चलि आए।।

  2623. RCM 1.249.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह नृप जाइ कहहु पन मोरा। चले भाट हियँ हरषु न थोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कह नृप जाइ कहहु पन मोरा। चले भाट हियँ हरषु न थोरा।।

  2624. RCM 1.249.9
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    बोले बंदी बचन बर सुनहु सकल महिपाल।

    अर्थ (Hindi)

    बोले बंदी बचन बर सुनहु सकल महिपाल।

  2625. RCM 1.249.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पन बिदेह कर कहहिं हम भुजा उठाइ बिसाल।।249।।

    अर्थ (Hindi)

    पन बिदेह कर कहहिं हम भुजा उठाइ बिसाल।।249।।

  2626. RCM 1.250.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नृप भुजबल बिधु सिवधनु राहू। गरुअ कठोर बिदित सब काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप भुजबल बिधु सिवधनु राहू। गरुअ कठोर बिदित सब काहू।।

  2627. RCM 1.250.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रावनु बानु महाभट भारे। देखि सरासन गवँहिं सिधारे।।

    अर्थ (Hindi)

    रावनु बानु महाभट भारे। देखि सरासन गवँहिं सिधारे।।

  2628. RCM 1.250.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।।

  2629. RCM 1.250.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    त्रिभुवन जय समेत बैदेही।।बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    त्रिभुवन जय समेत बैदेही।।बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही।।

  2630. RCM 1.250.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।।

  2631. RCM 1.250.6
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    परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई।।

  2632. RCM 1.250.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।।

  2633. RCM 1.250.8
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    जिन्ह के कछु बिचारु मन माहीं। चाप समीप महीप न जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह के कछु बिचारु मन माहीं। चाप समीप महीप न जाहीं।।

  2634. RCM 1.250.9
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    तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ।

    अर्थ (Hindi)

    तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ।

  2635. RCM 1.250.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ।।250।।

    अर्थ (Hindi)

    मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ।।250।।

  2636. RCM 1.251.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा।।

  2637. RCM 1.251.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    डगइ न संभु सरासन कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    डगइ न संभु सरासन कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें।।

  2638. RCM 1.251.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु बिराग संन्यासी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु बिराग संन्यासी।।

  2639. RCM 1.251.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कीरति बिजय बीरता भारी। चले चाप कर बरबस हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कीरति बिजय बीरता भारी। चले चाप कर बरबस हारी।।

  2640. RCM 1.251.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    श्रीहत भए हारि हियँ राजा। बैठे निज निज जाइ समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रीहत भए हारि हियँ राजा। बैठे निज निज जाइ समाजा।।

  2641. RCM 1.251.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नृपन्ह बिलोकि जनकु अकुलाने। बोले बचन रोष जनु साने।।

    अर्थ (Hindi)

    नृपन्ह बिलोकि जनकु अकुलाने। बोले बचन रोष जनु साने।।

  2642. RCM 1.251.7
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    दीप दीप के भूपति नाना। आए सुनि हम जो पनु ठाना।।

    अर्थ (Hindi)

    दीप दीप के भूपति नाना। आए सुनि हम जो पनु ठाना।।

  2643. RCM 1.251.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देव दनुज धरि मनुज सरीरा। बिपुल बीर आए रनधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    देव दनुज धरि मनुज सरीरा। बिपुल बीर आए रनधीरा।।

  2644. RCM 1.251.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय।

    अर्थ (Hindi)

    कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय।

  2645. RCM 1.251.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय।।251।।

    अर्थ (Hindi)

    पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय।।251।।

  2646. RCM 1.252.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।।

  2647. RCM 1.252.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रहउ चढ़ाउब तोरब भाई। तिलु भरि भूमि न सके छड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रहउ चढ़ाउब तोरब भाई। तिलु भरि भूमि न सके छड़ाई।।

  2648. RCM 1.252.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब जनि कोउ माखै भट मानी। बीर बिहीन मही मैं जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जनि कोउ माखै भट मानी। बीर बिहीन मही मैं जानी।।

  2649. RCM 1.252.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तजहु आस निज निज गृह जाहू। लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    तजहु आस निज निज गृह जाहू। लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू।।

  2650. RCM 1.252.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुकृत जाइ जौं पनु परिहरऊँ। कुअँरि कुआरि रहउ का करऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    सुकृत जाइ जौं पनु परिहरऊँ। कुअँरि कुआरि रहउ का करऊँ।।

  2651. RCM 1.252.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जो जनतेउँ बिनु भट भुबि भाई। तौ पनु करि होतेउँ न हँसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जो जनतेउँ बिनु भट भुबि भाई। तौ पनु करि होतेउँ न हँसाई।।

  2652. RCM 1.252.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।।

  2653. RCM 1.252.8
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    माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें।।

    अर्थ (Hindi)

    माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें।।

  2654. RCM 1.252.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहि न सकत रघुबीर डर लगे बचन जनु बान।

    अर्थ (Hindi)

    कहि न सकत रघुबीर डर लगे बचन जनु बान।

  2655. RCM 1.252.10
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    नाइ राम पद कमल सिरु बोले गिरा प्रमान।।252।।

    अर्थ (Hindi)

    नाइ राम पद कमल सिरु बोले गिरा प्रमान।।252।।

  2656. RCM 1.253.1
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    रघुबंसिन्ह महुँ जहँ कोउ होई। तेहिं समाज अस कहइ न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुबंसिन्ह महुँ जहँ कोउ होई। तेहिं समाज अस कहइ न कोई।।

  2657. RCM 1.253.2
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    कही जनक जसि अनुचित बानी। बिद्यमान रघुकुल मनि जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कही जनक जसि अनुचित बानी। बिद्यमान रघुकुल मनि जानी।।

  2658. RCM 1.253.3
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    सुनहु भानुकुल पंकज भानू। कहउँ सुभाउ न कछु अभिमानू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु भानुकुल पंकज भानू। कहउँ सुभाउ न कछु अभिमानू।।

  2659. RCM 1.253.4
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    जौ तुम्हारि अनुसासन पावौं। कंदुक इव ब्रह्मांड उठावौं।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ तुम्हारि अनुसासन पावौं। कंदुक इव ब्रह्मांड उठावौं।।

  2660. RCM 1.253.5
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    काचे घट जिमि डारौं फोरी। सकउँ मेरु मूलक जिमि तोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    काचे घट जिमि डारौं फोरी। सकउँ मेरु मूलक जिमि तोरी।।

  2661. RCM 1.253.6
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    तव प्रताप महिमा भगवाना। को बापुरो पिनाक पुराना।।

    अर्थ (Hindi)

    तव प्रताप महिमा भगवाना। को बापुरो पिनाक पुराना।।

  2662. RCM 1.253.7
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    नाथ जानि अस आयसु होऊ। कौतुकु करौं बिलोकिअ सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ जानि अस आयसु होऊ। कौतुकु करौं बिलोकिअ सोऊ।।

  2663. RCM 1.253.8
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    कमल नाल जिमि चाफ चढ़ावौं। जोजन सत प्रमान लै धावौं।।

    अर्थ (Hindi)

    कमल नाल जिमि चाफ चढ़ावौं। जोजन सत प्रमान लै धावौं।।

  2664. RCM 1.253.9
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    तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ।

    अर्थ (Hindi)

    तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ।

  2665. RCM 1.253.10
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    जौं न करौं प्रभु पद सपथ कर न धरौं धनु भाथ।।253।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं न करौं प्रभु पद सपथ कर न धरौं धनु भाथ।।253।।

  2666. RCM 1.254.1
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    लखन सकोप बचन जे बोले। डगमगानि महि दिग्गज डोले।।

    अर्थ (Hindi)

    लखन सकोप बचन जे बोले। डगमगानि महि दिग्गज डोले।।

  2667. RCM 1.254.2
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    सकल लोक सब भूप डेराने। सिय हियँ हरषु जनकु सकुचाने।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल लोक सब भूप डेराने। सिय हियँ हरषु जनकु सकुचाने।।

  2668. RCM 1.254.3
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    गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं।।

  2669. RCM 1.254.4
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    सयनहिं रघुपति लखनु नेवारे। प्रेम समेत निकट बैठारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सयनहिं रघुपति लखनु नेवारे। प्रेम समेत निकट बैठारे।।

  2670. RCM 1.254.5
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    बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी।।

  2671. RCM 1.254.6
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    उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा।।

    अर्थ (Hindi)

    उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा।।

  2672. RCM 1.254.7
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    सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा। हरषु बिषादु न कछु उर आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा। हरषु बिषादु न कछु उर आवा।।

  2673. RCM 1.254.8
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    ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएँ। ठवनि जुबा मृगराजु लजाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएँ। ठवनि जुबा मृगराजु लजाएँ।।

  2674. RCM 1.254.9
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    उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग।

    अर्थ (Hindi)

    उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग।

  2675. RCM 1.254.10
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    बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।।254।।

    अर्थ (Hindi)

    बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।।254।।

  2676. RCM 1.255.1
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    नृपन्ह केरि आसा निसि नासी। बचन नखत अवली न प्रकासी।।

    अर्थ (Hindi)

    नृपन्ह केरि आसा निसि नासी। बचन नखत अवली न प्रकासी।।

  2677. RCM 1.255.2
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    मानी महिप कुमुद सकुचाने। कपटी भूप उलूक लुकाने।।

    अर्थ (Hindi)

    मानी महिप कुमुद सकुचाने। कपटी भूप उलूक लुकाने।।

  2678. RCM 1.255.3
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    भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।

  2679. RCM 1.255.4
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    गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा।।

  2680. RCM 1.255.5
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    सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।

    अर्थ (Hindi)

    सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।

  2681. RCM 1.255.6
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    चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी।।

  2682. RCM 1.255.7
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    बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।

  2683. RCM 1.255.8
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    तौ सिवधनु मृनाल की नाईं। तोरहुँ राम गनेस गोसाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ सिवधनु मृनाल की नाईं। तोरहुँ राम गनेस गोसाईं।।

  2684. RCM 1.255.9
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    रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।

  2685. RCM 1.255.10
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    सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ।।255।।

    अर्थ (Hindi)

    सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ।।255।।

  2686. RCM 1.256.1
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    सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।।

  2687. RCM 1.256.2
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    कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं। ए बालक असि हठ भलि नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं। ए बालक असि हठ भलि नाहीं।।

  2688. RCM 1.256.3
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    रावन बान छुआ नहिं चापा। हारे सकल भूप करि दापा।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन बान छुआ नहिं चापा। हारे सकल भूप करि दापा।।

  2689. RCM 1.256.4
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    सो धनु राजकुअँर कर देहीं। बाल मराल कि मंदर लेहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सो धनु राजकुअँर कर देहीं। बाल मराल कि मंदर लेहीं।।

  2690. RCM 1.256.5
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    भूप सयानप सकल सिरानी। सखि बिधि गति कछु जाति न जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप सयानप सकल सिरानी। सखि बिधि गति कछु जाति न जानी।।

  2691. RCM 1.256.6
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    बोली चतुर सखी मृदु बानी। तेजवंत लघु गनिअ न रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बोली चतुर सखी मृदु बानी। तेजवंत लघु गनिअ न रानी।।

  2692. RCM 1.256.7
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    कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।

  2693. RCM 1.256.8
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    रबि मंडल देखत लघु लागा। उदयँ तासु तिभुवन तम भागा।।

    अर्थ (Hindi)

    रबि मंडल देखत लघु लागा। उदयँ तासु तिभुवन तम भागा।।

  2694. RCM 1.256.9
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    मंत्र परम लघु जासु बस बिधि हरि हर सुर सर्ब।

    अर्थ (Hindi)

    मंत्र परम लघु जासु बस बिधि हरि हर सुर सर्ब।

  2695. RCM 1.256.10
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    महामत्त गजराज कहुँ बस कर अंकुस खर्ब।।256।।

    अर्थ (Hindi)

    महामत्त गजराज कहुँ बस कर अंकुस खर्ब।।256।।

  2696. RCM 1.257.1
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    काम कुसुम धनु सायक लीन्हे। सकल भुवन अपने बस कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    काम कुसुम धनु सायक लीन्हे। सकल भुवन अपने बस कीन्हे।।

  2697. RCM 1.257.2
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    देबि तजिअ संसउ अस जानी। भंजब धनुष रामु सुनु रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    देबि तजिअ संसउ अस जानी। भंजब धनुष रामु सुनु रानी।।

  2698. RCM 1.257.3
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    सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती।।

    अर्थ (Hindi)

    सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती।।

  2699. RCM 1.257.4
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    तब रामहि बिलोकि बैदेही। सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    तब रामहि बिलोकि बैदेही। सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही।।

  2700. RCM 1.257.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मनहीं मन मनाव अकुलानी। होहु प्रसन्न महेस भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मनहीं मन मनाव अकुलानी। होहु प्रसन्न महेस भवानी।।

  2701. RCM 1.257.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करहु सफल आपनि सेवकाई। करि हितु हरहु चाप गरुआई।।

    अर्थ (Hindi)

    करहु सफल आपनि सेवकाई। करि हितु हरहु चाप गरुआई।।

  2702. RCM 1.257.7
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    गननायक बरदायक देवा। आजु लगें कीन्हिउँ तुअ सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    गननायक बरदायक देवा। आजु लगें कीन्हिउँ तुअ सेवा।।

  2703. RCM 1.257.8
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    बार बार बिनती सुनि मोरी। करहु चाप गुरुता अति थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार बिनती सुनि मोरी। करहु चाप गुरुता अति थोरी।।

  2704. RCM 1.257.9
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    देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।

  2705. RCM 1.257.10
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    भरे बिलोचन प्रेम जल पुलकावली सरीर।।257।।

    अर्थ (Hindi)

    भरे बिलोचन प्रेम जल पुलकावली सरीर।।257।।

  2706. RCM 1.258.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नीकें निरखि नयन भरि सोभा। पितु पनु सुमिरि बहुरि मनु छोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    नीकें निरखि नयन भरि सोभा। पितु पनु सुमिरि बहुरि मनु छोभा।।

  2707. RCM 1.258.2
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    अहह तात दारुनि हठ ठानी। समुझत नहिं कछु लाभु न हानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अहह तात दारुनि हठ ठानी। समुझत नहिं कछु लाभु न हानी।।

  2708. RCM 1.258.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सचिव सभय सिख देइ न कोई। बुध समाज बड़ अनुचित होई।।

    अर्थ (Hindi)

    सचिव सभय सिख देइ न कोई। बुध समाज बड़ अनुचित होई।।

  2709. RCM 1.258.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहँ धनु कुलिसहु चाहि कठोरा। कहँ स्यामल मृदुगात किसोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँ धनु कुलिसहु चाहि कठोरा। कहँ स्यामल मृदुगात किसोरा।।

  2710. RCM 1.258.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिधि केहि भाँति धरौं उर धीरा। सिरस सुमन कन बेधिअ हीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधि केहि भाँति धरौं उर धीरा। सिरस सुमन कन बेधिअ हीरा।।

  2711. RCM 1.258.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सकल सभा कै मति भै भोरी। अब मोहि संभुचाप गति तोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सभा कै मति भै भोरी। अब मोहि संभुचाप गति तोरी।।

  2712. RCM 1.258.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निज जड़ता लोगन्ह पर डारी। होहि हरुअ रघुपतिहि निहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    निज जड़ता लोगन्ह पर डारी। होहि हरुअ रघुपतिहि निहारी।।

  2713. RCM 1.258.8
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    अति परिताप सीय मन माही। लव निमेष जुग सब सय जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अति परिताप सीय मन माही। लव निमेष जुग सब सय जाहीं।।

  2714. RCM 1.258.9
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    प्रभुहि चितइ पुनि चितव महि राजत लोचन लोल।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभुहि चितइ पुनि चितव महि राजत लोचन लोल।

  2715. RCM 1.258.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खेलत मनसिज मीन जुग जनु बिधु मंडल डोल।।258।।

    अर्थ (Hindi)

    खेलत मनसिज मीन जुग जनु बिधु मंडल डोल।।258।।

  2716. RCM 1.259.1
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    गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी।।

  2717. RCM 1.259.2
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    लोचन जलु रह लोचन कोना। जैसे परम कृपन कर सोना।।

    अर्थ (Hindi)

    लोचन जलु रह लोचन कोना। जैसे परम कृपन कर सोना।।

  2718. RCM 1.259.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी। धरि धीरजु प्रतीति उर आनी।।

    अर्थ (Hindi)

    सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी। धरि धीरजु प्रतीति उर आनी।।

  2719. RCM 1.259.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चितु राचा।।

    अर्थ (Hindi)

    तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चितु राचा।।

  2720. RCM 1.259.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहिं मोहि रघुबर कै दासी।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहिं मोहि रघुबर कै दासी।।

  2721. RCM 1.259.6
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    जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संहेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संहेहू।।

  2722. RCM 1.259.7
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    प्रभु तन चितइ प्रेम तन ठाना। कृपानिधान राम सबु जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु तन चितइ प्रेम तन ठाना। कृपानिधान राम सबु जाना।।

  2723. RCM 1.259.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सियहि बिलोकि तकेउ धनु कैसे। चितव गरुरु लघु ब्यालहि जैसे।।

    अर्थ (Hindi)

    सियहि बिलोकि तकेउ धनु कैसे। चितव गरुरु लघु ब्यालहि जैसे।।

  2724. RCM 1.259.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लखन लखेउ रघुबंसमनि ताकेउ हर कोदंडु।

    अर्थ (Hindi)

    लखन लखेउ रघुबंसमनि ताकेउ हर कोदंडु।

  2725. RCM 1.259.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुलकि गात बोले बचन चरन चापि ब्रह्मांडु।।259।।

    अर्थ (Hindi)

    पुलकि गात बोले बचन चरन चापि ब्रह्मांडु।।259।।

  2726. RCM 1.260.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दिसकुंजरहु कमठ अहि कोला। धरहु धरनि धरि धीर न डोला।।

    अर्थ (Hindi)

    दिसकुंजरहु कमठ अहि कोला। धरहु धरनि धरि धीर न डोला।।

  2727. RCM 1.260.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रामु चहहिं संकर धनु तोरा। होहु सजग सुनि आयसु मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु चहहिं संकर धनु तोरा। होहु सजग सुनि आयसु मोरा।।

  2728. RCM 1.260.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।।

    अर्थ (Hindi)

    चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।।

  2729. RCM 1.260.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सब कर संसउ अरु अग्यानू। मंद महीपन्ह कर अभिमानू।।

    अर्थ (Hindi)

    सब कर संसउ अरु अग्यानू। मंद महीपन्ह कर अभिमानू।।

  2730. RCM 1.260.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भृगुपति केरि गरब गरुआई। सुर मुनिबरन्ह केरि कदराई।।

    अर्थ (Hindi)

    भृगुपति केरि गरब गरुआई। सुर मुनिबरन्ह केरि कदराई।।

  2731. RCM 1.260.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिय कर सोचु जनक पछितावा। रानिन्ह कर दारुन दुख दावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय कर सोचु जनक पछितावा। रानिन्ह कर दारुन दुख दावा।।

  2732. RCM 1.260.7
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    संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।।

  2733. RCM 1.260.8
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    राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहि कोउ कड़हारू।।

    अर्थ (Hindi)

    राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहि कोउ कड़हारू।।

  2734. RCM 1.260.9
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    राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।

    अर्थ (Hindi)

    राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।

  2735. RCM 1.260.10
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    चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि।।260।।

    अर्थ (Hindi)

    चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि।।260।।

  2736. RCM 1.261.1
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    देखी बिपुल बिकल बैदेही। निमिष बिहात कलप सम तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    देखी बिपुल बिकल बैदेही। निमिष बिहात कलप सम तेही।।

  2737. RCM 1.261.2
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    तृषित बारि बिनु जो तनु त्यागा। मुएँ करइ का सुधा तड़ागा।।

    अर्थ (Hindi)

    तृषित बारि बिनु जो तनु त्यागा। मुएँ करइ का सुधा तड़ागा।।

  2738. RCM 1.261.3
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    का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें।।

    अर्थ (Hindi)

    का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें।।

  2739. RCM 1.261.4
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    अस जियँ जानि जानकी देखी। प्रभु पुलके लखि प्रीति बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस जियँ जानि जानकी देखी। प्रभु पुलके लखि प्रीति बिसेषी।।

  2740. RCM 1.261.5
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    गुरहि प्रनामु मनहि मन कीन्हा। अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुरहि प्रनामु मनहि मन कीन्हा। अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।

  2741. RCM 1.261.6
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    दमकेउ दामिनि जिमि जब लयऊ। पुनि नभ धनु मंडल सम भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    दमकेउ दामिनि जिमि जब लयऊ। पुनि नभ धनु मंडल सम भयऊ।।

  2742. RCM 1.261.7
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    लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें।।

    अर्थ (Hindi)

    लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें।।

  2743. RCM 1.261.8
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    तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा।।

  2744. RCM 1.262.1
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    प्रभु दोउ चापखंड महि डारे। देखि लोग सब भए सुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु दोउ चापखंड महि डारे। देखि लोग सब भए सुखारे।।

  2745. RCM 1.262.2
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    कोसिकरुप पयोनिधि पावन। प्रेम बारि अवगाहु सुहावन।।

    अर्थ (Hindi)

    कोसिकरुप पयोनिधि पावन। प्रेम बारि अवगाहु सुहावन।।

  2746. RCM 1.262.3
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    रामरूप राकेसु निहारी। बढ़त बीचि पुलकावलि भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामरूप राकेसु निहारी। बढ़त बीचि पुलकावलि भारी।।

  2747. RCM 1.262.4
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    बाजे नभ गहगहे निसाना। देवबधू नाचहिं करि गाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजे नभ गहगहे निसाना। देवबधू नाचहिं करि गाना।।

  2748. RCM 1.262.5
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    ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहि देहिं असीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहि देहिं असीसा।।

  2749. RCM 1.262.6
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    बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला।।

  2750. RCM 1.262.7
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    रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।

  2751. RCM 1.262.8
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    मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।

  2752. RCM 1.262.9
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    बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।

    अर्थ (Hindi)

    बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।

  2753. RCM 1.262.10
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    करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर।।262।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर।।262।।

  2754. RCM 1.263.1
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    झाँझि मृदंग संख सहनाई। भेरि ढोल दुंदुभी सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    झाँझि मृदंग संख सहनाई। भेरि ढोल दुंदुभी सुहाई।।

  2755. RCM 1.263.2
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    बाजहिं बहु बाजने सुहाए। जहँ तहँ जुबतिन्ह मंगल गाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजहिं बहु बाजने सुहाए। जहँ तहँ जुबतिन्ह मंगल गाए।।

  2756. RCM 1.263.3
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    सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।।

  2757. RCM 1.263.4
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    जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई।।

  2758. RCM 1.263.5
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    श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।।

  2759. RCM 1.263.6
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    सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती। जनु चातकी पाइ जलु स्वाती।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती। जनु चातकी पाइ जलु स्वाती।।

  2760. RCM 1.263.7
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    रामहि लखनु बिलोकत कैसें। ससिहि चकोर किसोरकु जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि लखनु बिलोकत कैसें। ससिहि चकोर किसोरकु जैसें।।

  2761. RCM 1.263.8
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    सतानंद तब आयसु दीन्हा। सीताँ गमनु राम पहिं कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    सतानंद तब आयसु दीन्हा। सीताँ गमनु राम पहिं कीन्हा।।

  2762. RCM 1.263.9
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    संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।

    अर्थ (Hindi)

    संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।

  2763. RCM 1.263.10
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    गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार।।263।।

    अर्थ (Hindi)

    गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार।।263।।

  2764. RCM 1.264.1
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    सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे। छबिगन मध्य महाछबि जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे। छबिगन मध्य महाछबि जैसें।।

  2765. RCM 1.264.2
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    कर सरोज जयमाल सुहाई। बिस्व बिजय सोभा जेहिं छाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कर सरोज जयमाल सुहाई। बिस्व बिजय सोभा जेहिं छाई।।

  2766. RCM 1.264.3
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    तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू।।

  2767. RCM 1.264.4
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    जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुँअरि चित्र अवरेखी।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुँअरि चित्र अवरेखी।।

  2768. RCM 1.264.5
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    चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई।।

  2769. RCM 1.264.6
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    सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ न जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ न जाई।।

  2770. RCM 1.264.7
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    सोहत जनु जुग जलज सनाला। ससिहि सभीत देत जयमाला।।

    अर्थ (Hindi)

    सोहत जनु जुग जलज सनाला। ससिहि सभीत देत जयमाला।।

  2771. RCM 1.264.8
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    गावहिं छबि अवलोकि सहेली। सियँ जयमाल राम उर मेली।।

    अर्थ (Hindi)

    गावहिं छबि अवलोकि सहेली। सियँ जयमाल राम उर मेली।।

  2772. RCM 1.264.9
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    रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन।

    अर्थ (Hindi)

    रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन।

  2773. RCM 1.264.10
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    सकुचे सकल भुआल जनु बिलोकि रबि कुमुदगन।।264।।

    अर्थ (Hindi)

    सकुचे सकल भुआल जनु बिलोकि रबि कुमुदगन।।264।।

  2774. RCM 1.265.1
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    पुर अरु ब्योम बाजने बाजे। खल भए मलिन साधु सब राजे।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर अरु ब्योम बाजने बाजे। खल भए मलिन साधु सब राजे।।

  2775. RCM 1.265.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुर किंनर नर नाग मुनीसा। जय जय जय कहि देहिं असीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर किंनर नर नाग मुनीसा। जय जय जय कहि देहिं असीसा।।

  2776. RCM 1.265.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाचहिं गावहिं बिबुध बधूटीं। बार बार कुसुमांजलि छूटीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नाचहिं गावहिं बिबुध बधूटीं। बार बार कुसुमांजलि छूटीं।।

  2777. RCM 1.265.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ तहँ बिप्र बेदधुनि करहीं। बंदी बिरदावलि उच्चरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ बिप्र बेदधुनि करहीं। बंदी बिरदावलि उच्चरहीं।।

  2778. RCM 1.265.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।।

    अर्थ (Hindi)

    महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।।

  2779. RCM 1.265.6
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    करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी।।

  2780. RCM 1.265.7
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    सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।।

  2781. RCM 1.265.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता।।

    अर्थ (Hindi)

    सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता।।

  2782. RCM 1.265.9
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    गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परसति पग पानि।

    अर्थ (Hindi)

    गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परसति पग पानि।

  2783. RCM 1.265.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मन बिहसे रघुबंसमनि प्रीति अलौकिक जानि।।265।।

    अर्थ (Hindi)

    मन बिहसे रघुबंसमनि प्रीति अलौकिक जानि।।265।।

  2784. RCM 1.266.1
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    तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे।।

    अर्थ (Hindi)

    तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे।।

  2785. RCM 1.266.2
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    उठि उठि पहिरि सनाह अभागे। जहँ तहँ गाल बजावन लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    उठि उठि पहिरि सनाह अभागे। जहँ तहँ गाल बजावन लागे।।

  2786. RCM 1.266.3
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    लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ।।

  2787. RCM 1.266.4
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    तोरें धनुषु चाड़ नहिं सरई। जीवत हमहि कुअँरि को बरई।।

    अर्थ (Hindi)

    तोरें धनुषु चाड़ नहिं सरई। जीवत हमहि कुअँरि को बरई।।

  2788. RCM 1.266.5
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    जौं बिदेहु कछु करै सहाई। जीतहु समर सहित दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं बिदेहु कछु करै सहाई। जीतहु समर सहित दोउ भाई।।

  2789. RCM 1.266.6
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    साधु भूप बोले सुनि बानी। राजसमाजहि लाज लजानी।।

    अर्थ (Hindi)

    साधु भूप बोले सुनि बानी। राजसमाजहि लाज लजानी।।

  2790. RCM 1.266.7
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    बलु प्रतापु बीरता बड़ाई। नाक पिनाकहि संग सिधाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बलु प्रतापु बीरता बड़ाई। नाक पिनाकहि संग सिधाई।।

  2791. RCM 1.266.8
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    सोइ सूरता कि अब कहुँ पाई। असि बुधि तौ बिधि मुहँ मसि लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ सूरता कि अब कहुँ पाई। असि बुधि तौ बिधि मुहँ मसि लाई।।

  2792. RCM 1.266.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखहु रामहि नयन भरि तजि इरिषा मदु कोहु।

    अर्थ (Hindi)

    देखहु रामहि नयन भरि तजि इरिषा मदु कोहु।

  2793. RCM 1.266.10
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    लखन रोषु पावकु प्रबल जानि सलभ जनि होहु।।266।।

    अर्थ (Hindi)

    लखन रोषु पावकु प्रबल जानि सलभ जनि होहु।।266।।

  2794. RCM 1.267.1
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    बैनतेय बलि जिमि चह कागू। जिमि ससु चहै नाग अरि भागू।।

    अर्थ (Hindi)

    बैनतेय बलि जिमि चह कागू। जिमि ससु चहै नाग अरि भागू।।

  2795. RCM 1.267.2
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    जिमि चह कुसल अकारन कोही। सब संपदा चहै सिवद्रोही।।

    अर्थ (Hindi)

    जिमि चह कुसल अकारन कोही। सब संपदा चहै सिवद्रोही।।

  2796. RCM 1.267.3
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    लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई।।

    अर्थ (Hindi)

    लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई।।

  2797. RCM 1.267.4
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    हरि पद बिमुख परम गति चाहा। तस तुम्हार लालचु नरनाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि पद बिमुख परम गति चाहा। तस तुम्हार लालचु नरनाहा।।

  2798. RCM 1.267.5
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    कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी।।

  2799. RCM 1.267.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं। सिय सनेहु बरनत मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं। सिय सनेहु बरनत मन माहीं।।

  2800. RCM 1.267.7
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    रानिन्ह सहित सोचबस सीया। अब धौं बिधिहि काह करनीया।।

    अर्थ (Hindi)

    रानिन्ह सहित सोचबस सीया। अब धौं बिधिहि काह करनीया।।

  2801. RCM 1.267.8
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    भूप बचन सुनि इत उत तकहीं। लखनु राम डर बोलि न सकहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप बचन सुनि इत उत तकहीं। लखनु राम डर बोलि न सकहीं।।

  2802. RCM 1.267.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप।

    अर्थ (Hindi)

    अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप।

  2803. RCM 1.267.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप।।267।।

    अर्थ (Hindi)

    मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप।।267।।

  2804. RCM 1.268.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं।।

  2805. RCM 1.268.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहिं अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयसु भृगुकुल कमल पतंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयसु भृगुकुल कमल पतंगा।।

  2806. RCM 1.268.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने।।

  2807. RCM 1.268.4
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    गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा।।

    अर्थ (Hindi)

    गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा।।

  2808. RCM 1.268.5
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    सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।।

  2809. RCM 1.268.6
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    भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते।।

    अर्थ (Hindi)

    भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते।।

  2810. RCM 1.268.7
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    बृषभ कंध उर बाहु बिसाला। चारु जनेउ माल मृगछाला।।

    अर्थ (Hindi)

    बृषभ कंध उर बाहु बिसाला। चारु जनेउ माल मृगछाला।।

  2811. RCM 1.268.8
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    कटि मुनि बसन तून दुइ बाँधें। धनु सर कर कुठारु कल काँधें।।

    अर्थ (Hindi)

    कटि मुनि बसन तून दुइ बाँधें। धनु सर कर कुठारु कल काँधें।।

  2812. RCM 1.268.9
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    सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरुप।

    अर्थ (Hindi)

    सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरुप।

  2813. RCM 1.268.10
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    धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप।।268।।

    अर्थ (Hindi)

    धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप।।268।।

  2814. RCM 1.269.1
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    देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला।।

    अर्थ (Hindi)

    देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला।।

  2815. RCM 1.269.2
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    पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।

    अर्थ (Hindi)

    पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।

  2816. RCM 1.269.3
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    जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।

  2817. RCM 1.269.4
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    जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा।।

  2818. RCM 1.269.5
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    आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।

    अर्थ (Hindi)

    आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।

  2819. RCM 1.269.6
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    बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई।।

  2820. RCM 1.269.7
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    रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा।।

  2821. RCM 1.269.8
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    रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन।।

  2822. RCM 1.269.9
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    बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।

  2823. RCM 1.269.10
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    पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर।।269।।

    अर्थ (Hindi)

    पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर।।269।।

  2824. RCM 1.270.1
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    समाचार कहि जनक सुनाए। जेहि कारन महीप सब आए।।

    अर्थ (Hindi)

    समाचार कहि जनक सुनाए। जेहि कारन महीप सब आए।।

  2825. RCM 1.270.2
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    सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे।।

  2826. RCM 1.270.3
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    अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा।।

  2827. RCM 1.270.4
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    बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू।।

    अर्थ (Hindi)

    बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू।।

  2828. RCM 1.270.5
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    अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।

  2829. RCM 1.270.6
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    सुर मुनि नाग नगर नर नारी।।सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर मुनि नाग नगर नर नारी।।सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।

  2830. RCM 1.270.7
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    मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।।

  2831. RCM 1.270.8
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    भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता।।

    अर्थ (Hindi)

    भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता।।

  2832. RCM 1.270.9
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    सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु।

    अर्थ (Hindi)

    सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु।

  2833. RCM 1.270.10
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    हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु।।270।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु।।270।।

  2834. RCM 1.271.1
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    नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।

  2835. RCM 1.271.2
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    आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।

    अर्थ (Hindi)

    आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।

  2836. RCM 1.271.3
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    सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई।।

  2837. RCM 1.271.4
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    सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।

  2838. RCM 1.271.5
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    सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।

  2839. RCM 1.271.6
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    सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।

  2840. RCM 1.271.7
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    बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।

  2841. RCM 1.271.8
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    एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।

  2842. RCM 1.271.9
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    रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँमार।।

    अर्थ (Hindi)

    रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँमार।।

  2843. RCM 1.271.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।271।।

    अर्थ (Hindi)

    धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।271।।

  2844. RCM 1.272.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लखन कहा हँसि हमरें जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    लखन कहा हँसि हमरें जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।

  2845. RCM 1.272.2
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    का छति लाभु जून धनु तौरें। देखा राम नयन के भोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    का छति लाभु जून धनु तौरें। देखा राम नयन के भोरें।।

  2846. RCM 1.272.3
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    छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।

    अर्थ (Hindi)

    छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।

  2847. RCM 1.272.4
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    बोले चितइ परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले चितइ परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।

  2848. RCM 1.272.5
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    बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।।

  2849. RCM 1.272.6
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    बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्व बिदित छत्रियकुल द्रोही।।

    अर्थ (Hindi)

    बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्व बिदित छत्रियकुल द्रोही।।

  2850. RCM 1.272.7
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    भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।

  2851. RCM 1.272.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सहसबाहु भुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सहसबाहु भुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

  2852. RCM 1.272.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।

    अर्थ (Hindi)

    मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।

  2853. RCM 1.272.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।272।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।272।।

  2854. RCM 1.273.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।।

  2855. RCM 1.273.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।

  2856. RCM 1.273.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।

  2857. RCM 1.273.4
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    देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।

  2858. RCM 1.273.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।।

    अर्थ (Hindi)

    भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।।

  2859. RCM 1.273.6
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    सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई।।

  2860. RCM 1.273.7
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    बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहूँ पा परिअ तुम्हारें।।

    अर्थ (Hindi)

    बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहूँ पा परिअ तुम्हारें।।

  2861. RCM 1.273.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा।।

  2862. RCM 1.273.9
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    जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।

    अर्थ (Hindi)

    जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।

  2863. RCM 1.273.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गभीर।।273।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गभीर।।273।।

  2864. RCM 1.274.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिल कालबस निज कुल घालकु।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिल कालबस निज कुल घालकु।।

  2865. RCM 1.274.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भानु बंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू।।

    अर्थ (Hindi)

    भानु बंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू।।

  2866. RCM 1.274.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।।

  2867. RCM 1.274.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।

  2868. RCM 1.274.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लखन कहेउ मुनि सुजस तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    लखन कहेउ मुनि सुजस तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा।।

  2869. RCM 1.274.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी।।

  2870. RCM 1.274.7
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    नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।।

    अर्थ (Hindi)

    नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।।

  2871. RCM 1.274.8
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    बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।

  2872. RCM 1.274.9
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    सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।

    अर्थ (Hindi)

    सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।

  2873. RCM 1.274.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।274।।

    अर्थ (Hindi)

    बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।274।।

  2874. RCM 1.275.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।।

  2875. RCM 1.275.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

  2876. RCM 1.275.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालकु बधजोगू।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालकु बधजोगू।।

  2877. RCM 1.275.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब यहु मरनिहार भा साँचा।।

    अर्थ (Hindi)

    बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब यहु मरनिहार भा साँचा।।

  2878. RCM 1.275.5
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    कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

  2879. RCM 1.275.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगें अपराधी गुरुद्रोही।।

    अर्थ (Hindi)

    खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगें अपराधी गुरुद्रोही।।

  2880. RCM 1.275.7
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    उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें।।

    अर्थ (Hindi)

    उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें।।

  2881. RCM 1.275.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    न त एहि काटि कुठार कठोरें। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    न त एहि काटि कुठार कठोरें। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें।।

  2882. RCM 1.275.9
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    गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।

    अर्थ (Hindi)

    गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।

  2883. RCM 1.275.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।275।।

    अर्थ (Hindi)

    अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।275।।

  2884. RCM 1.276.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।

  2885. RCM 1.276.2
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    माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।।

    अर्थ (Hindi)

    माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।।

  2886. RCM 1.276.3
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    सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।।

  2887. RCM 1.276.4
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    अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली।।

    अर्थ (Hindi)

    अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली।।

  2888. RCM 1.276.5
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    सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा।।

  2889. RCM 1.276.6
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    भृगुबर परसु देखावहु मोही। बिप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही।।

    अर्थ (Hindi)

    भृगुबर परसु देखावहु मोही। बिप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही।।

  2890. RCM 1.276.7
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    मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।

    अर्थ (Hindi)

    मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।

  2891. RCM 1.276.8
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    अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।

  2892. RCM 1.276.9
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    लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।

    अर्थ (Hindi)

    लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।

  2893. RCM 1.276.10
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    बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।276।।

    अर्थ (Hindi)

    बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।276।।

  2894. RCM 1.277.1
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    नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू।।

  2895. RCM 1.277.2
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    जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना।।

  2896. RCM 1.277.3
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    जौं लरिका कछु अचगरि करहीं। गुर पितु मातु मोद मन भरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं लरिका कछु अचगरि करहीं। गुर पितु मातु मोद मन भरहीं।।

  2897. RCM 1.277.4
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    करिअ कृपा सिसु सेवक जानी। तुम्ह सम सील धीर मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    करिअ कृपा सिसु सेवक जानी। तुम्ह सम सील धीर मुनि ग्यानी।।

  2898. RCM 1.277.5
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    राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने। कहि कछु लखनु बहुरि मुसकाने।।

    अर्थ (Hindi)

    राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने। कहि कछु लखनु बहुरि मुसकाने।।

  2899. RCM 1.277.6
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    हँसत देखि नख सिख रिस ब्यापी। राम तोर भ्राता बड़ पापी।।

    अर्थ (Hindi)

    हँसत देखि नख सिख रिस ब्यापी। राम तोर भ्राता बड़ पापी।।

  2900. RCM 1.277.7
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    गौर सरीर स्याम मन माहीं। कालकूटमुख पयमुख नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    गौर सरीर स्याम मन माहीं। कालकूटमुख पयमुख नाहीं।।

  2901. RCM 1.277.8
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    सहज टेढ़ अनुहरइ न तोही। नीचु मीचु सम देख न मौहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज टेढ़ अनुहरइ न तोही। नीचु मीचु सम देख न मौहीं।।

  2902. RCM 1.277.9
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    लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।

    अर्थ (Hindi)

    लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।

  2903. RCM 1.277.10
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    जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल।।277।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल।।277।।

  2904. RCM 1.278.1
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    मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया।।

  2905. RCM 1.278.2
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    टूट चाप नहिं जुरहि रिसाने। बैठिअ होइहिं पाय पिराने।।

    अर्थ (Hindi)

    टूट चाप नहिं जुरहि रिसाने। बैठिअ होइहिं पाय पिराने।।

  2906. RCM 1.278.3
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    जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई।।

  2907. RCM 1.278.4
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    बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं। मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं। मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं।।

  2908. RCM 1.278.5
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    थर थर कापहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    थर थर कापहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी।।

  2909. RCM 1.278.6
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    भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी। रिस तन जरइ होइ बल हानी।।

    अर्थ (Hindi)

    भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी। रिस तन जरइ होइ बल हानी।।

  2910. RCM 1.278.7
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    बोले रामहि देइ निहोरा। बचउँ बिचारि बंधु लघु तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले रामहि देइ निहोरा। बचउँ बिचारि बंधु लघु तोरा।।

  2911. RCM 1.278.8
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    मनु मलीन तनु सुंदर कैसें। बिष रस भरा कनक घटु जैसैं।।

    अर्थ (Hindi)

    मनु मलीन तनु सुंदर कैसें। बिष रस भरा कनक घटु जैसैं।।

  2912. RCM 1.278.9
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    सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।

  2913. RCM 1.278.10
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    गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम।।278।।

    अर्थ (Hindi)

    गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम।।278।।

  2914. RCM 1.279.1
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    अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।।

  2915. RCM 1.279.2
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    सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।।

  2916. RCM 1.279.3
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    बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।।

  2917. RCM 1.279.4
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    तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।।

  2918. RCM 1.279.5
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    कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाई।।

  2919. RCM 1.279.6
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    कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई।।

  2920. RCM 1.279.7
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    कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।।

  2921. RCM 1.279.8
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    एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।

  2922. RCM 1.279.9
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    गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।

    अर्थ (Hindi)

    गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।

  2923. RCM 1.279.10
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    परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर।।279।।

    अर्थ (Hindi)

    परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर।।279।।

  2924. RCM 1.280.1
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    बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती।।

    अर्थ (Hindi)

    बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती।।

  2925. RCM 1.280.2
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    भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ। मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ। मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ।।

  2926. RCM 1.280.3
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    आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा।।

    अर्थ (Hindi)

    आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा।।

  2927. RCM 1.280.4
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    बाउ कृपा मूरति अनुकूला। बोलत बचन झरत जनु फूला।।

    अर्थ (Hindi)

    बाउ कृपा मूरति अनुकूला। बोलत बचन झरत जनु फूला।।

  2928. RCM 1.280.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता।।

  2929. RCM 1.280.6
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    देखु जनक हठि बालक एहू। कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    देखु जनक हठि बालक एहू। कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू।।

  2930. RCM 1.280.7
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    बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा। देखत छोट खोट नृप ढोटा।।

    अर्थ (Hindi)

    बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा। देखत छोट खोट नृप ढोटा।।

  2931. RCM 1.280.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिहसे लखनु कहा मन माहीं। मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिहसे लखनु कहा मन माहीं। मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं।।

  2932. RCM 1.280.9
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    परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।

    अर्थ (Hindi)

    परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।

  2933. RCM 1.280.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु।।280।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु।।280।।

  2934. RCM 1.281.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बंधु कहइ कटु संमत तोरें। तू छल बिनय करसि कर जोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु कहइ कटु संमत तोरें। तू छल बिनय करसि कर जोरें।।

  2935. RCM 1.281.2
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    करु परितोषु मोर संग्रामा। नाहिं त छाड़ कहाउब रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    करु परितोषु मोर संग्रामा। नाहिं त छाड़ कहाउब रामा।।

  2936. RCM 1.281.3
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    छलु तजि करहि समरु सिवद्रोही। बंधु सहित न त मारउँ तोही।।

    अर्थ (Hindi)

    छलु तजि करहि समरु सिवद्रोही। बंधु सहित न त मारउँ तोही।।

  2937. RCM 1.281.4
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    भृगुपति बकहिं कुठार उठाएँ। मन मुसकाहिं रामु सिर नाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    भृगुपति बकहिं कुठार उठाएँ। मन मुसकाहिं रामु सिर नाएँ।।

  2938. RCM 1.281.5
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    गुनह लखन कर हम पर रोषू। कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू।।

    अर्थ (Hindi)

    गुनह लखन कर हम पर रोषू। कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू।।

  2939. RCM 1.281.6
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    टेढ़ जानि सब बंदइ काहू। बक्र चंद्रमहि ग्रसइ न राहू।।

    अर्थ (Hindi)

    टेढ़ जानि सब बंदइ काहू। बक्र चंद्रमहि ग्रसइ न राहू।।

  2940. RCM 1.281.7
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    राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा। कर कुठारु आगें यह सीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा। कर कुठारु आगें यह सीसा।।

  2941. RCM 1.281.8
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    जेंहिं रिस जाइ करिअ सोइ स्वामी। मोहि जानि आपन अनुगामी।।

    अर्थ (Hindi)

    जेंहिं रिस जाइ करिअ सोइ स्वामी। मोहि जानि आपन अनुगामी।।

  2942. RCM 1.281.9
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    प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।

  2943. RCM 1.281.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु।।281।।

    अर्थ (Hindi)

    बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु।।281।।

  2944. RCM 1.282.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि कुठार बान धनु धारी। भै लरिकहि रिस बीरु बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि कुठार बान धनु धारी। भै लरिकहि रिस बीरु बिचारी।।

  2945. RCM 1.282.2
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    नामु जान पै तुम्हहि न चीन्हा। बंस सुभायँ उतरु तेंहिं दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    नामु जान पै तुम्हहि न चीन्हा। बंस सुभायँ उतरु तेंहिं दीन्हा।।

  2946. RCM 1.282.3
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    जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।।

  2947. RCM 1.282.4
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    छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी।।

  2948. RCM 1.282.5
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    हमहि तुम्हहि सरिबरि कसि नाथा।।कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा।।

    अर्थ (Hindi)

    हमहि तुम्हहि सरिबरि कसि नाथा।।कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा।।

  2949. RCM 1.282.6
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    राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ नाम तोहारा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ नाम तोहारा।।

  2950. RCM 1.282.7
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    देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।।

    अर्थ (Hindi)

    देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।।

  2951. RCM 1.282.8
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    सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे।।

  2952. RCM 1.282.9
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    बार बार मुनि बिप्रबर कहा राम सन राम।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार मुनि बिप्रबर कहा राम सन राम।

  2953. RCM 1.282.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बोले भृगुपति सरुष हसि तहूँ बंधु सम बाम।।282।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले भृगुपति सरुष हसि तहूँ बंधु सम बाम।।282।।

  2954. RCM 1.283.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।।

    अर्थ (Hindi)

    निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।।

  2955. RCM 1.283.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चाप स्त्रुवा सर आहुति जानू। कोप मोर अति घोर कृसानु।।

    अर्थ (Hindi)

    चाप स्त्रुवा सर आहुति जानू। कोप मोर अति घोर कृसानु।।

  2956. RCM 1.283.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।।

    अर्थ (Hindi)

    समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।।

  2957. RCM 1.283.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मै एहि परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    मै एहि परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे।।

  2958. RCM 1.283.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।।

  2959. RCM 1.283.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा।।

  2960. RCM 1.283.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम कहा मुनि कहहु बिचारी। रिस अति बड़ि लघु चूक हमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कहा मुनि कहहु बिचारी। रिस अति बड़ि लघु चूक हमारी।।

  2961. RCM 1.283.8
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    छुअतहिं टूट पिनाक पुराना। मैं कहि हेतु करौं अभिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    छुअतहिं टूट पिनाक पुराना। मैं कहि हेतु करौं अभिमाना।।

  2962. RCM 1.283.9
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    जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।

    अर्थ (Hindi)

    जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।

  2963. RCM 1.283.10
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    तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ।।283।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ।।283।।

  2964. RCM 1.284.1
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    देव दनुज भूपति भट नाना। समबल अधिक होउ बलवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देव दनुज भूपति भट नाना। समबल अधिक होउ बलवाना।।

  2965. RCM 1.284.2
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    जौं रन हमहि पचारै कोऊ। लरहिं सुखेन कालु किन होऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं रन हमहि पचारै कोऊ। लरहिं सुखेन कालु किन होऊ।।

  2966. RCM 1.284.3
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    छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना।।

    अर्थ (Hindi)

    छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना।।

  2967. RCM 1.284.4
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    कहउँ सुभाउ न कुलहि प्रसंसी। कालहु डरहिं न रन रघुबंसी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहउँ सुभाउ न कुलहि प्रसंसी। कालहु डरहिं न रन रघुबंसी।।

  2968. RCM 1.284.5
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    बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई।।

  2969. RCM 1.284.6
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    सुनु मृदु गूढ़ बचन रघुपति के। उघरे पटल परसुधर मति के।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मृदु गूढ़ बचन रघुपति के। उघरे पटल परसुधर मति के।।

  2970. RCM 1.284.7
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    राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।।

  2971. RCM 1.284.8
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    देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ।।

  2972. RCM 1.284.9
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    जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।

    अर्थ (Hindi)

    जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।

  2973. RCM 1.284.10
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    जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात।।284।।

    अर्थ (Hindi)

    जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात।।284।।

  2974. RCM 1.285.1
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    जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानु।।

    अर्थ (Hindi)

    जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानु।।

  2975. RCM 1.285.2
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    जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।।

  2976. RCM 1.285.3
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    बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर।।

  2977. RCM 1.285.4
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    सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा।।

  2978. RCM 1.285.5
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    करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।

    अर्थ (Hindi)

    करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।

  2979. RCM 1.285.6
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    अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।।

  2980. RCM 1.285.7
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    कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।

  2981. RCM 1.285.8
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    अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।

    अर्थ (Hindi)

    अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।

  2982. RCM 1.285.9
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    देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।

    अर्थ (Hindi)

    देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।

  2983. RCM 1.285.10
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    हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल।।285।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल।।285।।

  2984. RCM 1.286.1
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    अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे।।

    अर्थ (Hindi)

    अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे।।

  2985. RCM 1.286.2
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    जूथ जूथ मिलि सुमुख सुनयनीं। करहिं गान कल कोकिलबयनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जूथ जूथ मिलि सुमुख सुनयनीं। करहिं गान कल कोकिलबयनी।।

  2986. RCM 1.286.3
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    सुखु बिदेह कर बरनि न जाई। जन्मदरिद्र मनहुँ निधि पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुखु बिदेह कर बरनि न जाई। जन्मदरिद्र मनहुँ निधि पाई।।

  2987. RCM 1.286.4
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    गत त्रास भइ सीय सुखारी। जनु बिधु उदयँ चकोरकुमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    गत त्रास भइ सीय सुखारी। जनु बिधु उदयँ चकोरकुमारी।।

  2988. RCM 1.286.5
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    जनक कीन्ह कौसिकहि प्रनामा। प्रभु प्रसाद धनु भंजेउ रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक कीन्ह कौसिकहि प्रनामा। प्रभु प्रसाद धनु भंजेउ रामा।।

  2989. RCM 1.286.6
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    मोहि कृतकृत्य कीन्ह दुहुँ भाईं। अब जो उचित सो कहिअ गोसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि कृतकृत्य कीन्ह दुहुँ भाईं। अब जो उचित सो कहिअ गोसाई।।

  2990. RCM 1.286.7
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    कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना। रहा बिबाहु चाप आधीना।।

    अर्थ (Hindi)

    कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना। रहा बिबाहु चाप आधीना।।

  2991. RCM 1.286.8
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    टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू। सुर नर नाग बिदित सब काहु।।

    अर्थ (Hindi)

    टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू। सुर नर नाग बिदित सब काहु।।

  2992. RCM 1.286.9
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    तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।

  2993. RCM 1.286.10
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    बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु।।286।।

    अर्थ (Hindi)

    बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु।।286।।

  2994. RCM 1.287.1
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    दूत अवधपुर पठवहु जाई। आनहिं नृप दसरथहि बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    दूत अवधपुर पठवहु जाई। आनहिं नृप दसरथहि बोलाई।।

  2995. RCM 1.287.2
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    मुदित राउ कहि भलेहिं कृपाला। पठए दूत बोलि तेहि काला।।

    अर्थ (Hindi)

    मुदित राउ कहि भलेहिं कृपाला। पठए दूत बोलि तेहि काला।।

  2996. RCM 1.287.3
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    बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए।।

  2997. RCM 1.287.4
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    हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा।।

    अर्थ (Hindi)

    हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा।।

  2998. RCM 1.287.5
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    हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।

  2999. RCM 1.287.6
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    रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।

  3000. RCM 1.287.7
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    पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।

  3001. RCM 1.287.8
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    बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।

  3002. RCM 1.287.9
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    हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग के फूल।

    अर्थ (Hindi)

    हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग के फूल।

  3003. RCM 1.287.10
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    रचना देखि बिचित्र अति मनु बिरंचि कर भूल।।287।।

    अर्थ (Hindi)

    रचना देखि बिचित्र अति मनु बिरंचि कर भूल।।287।।

  3004. RCM 1.288.1
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    बेनि हरित मनिमय सब कीन्हे। सरल सपरब परहिं नहिं चीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    बेनि हरित मनिमय सब कीन्हे। सरल सपरब परहिं नहिं चीन्हे।।

  3005. RCM 1.288.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कनक कलित अहिबेल बनाई। लखि नहि परइ सपरन सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक कलित अहिबेल बनाई। लखि नहि परइ सपरन सुहाई।।

  3006. RCM 1.288.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि के रचि पचि बंध बनाए। बिच बिच मुकता दाम सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि के रचि पचि बंध बनाए। बिच बिच मुकता दाम सुहाए।।

  3007. RCM 1.288.4
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    मानिक मरकत कुलिस पिरोजा। चीरि कोरि पचि रचे सरोजा।।

    अर्थ (Hindi)

    मानिक मरकत कुलिस पिरोजा। चीरि कोरि पचि रचे सरोजा।।

  3008. RCM 1.288.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।

  3009. RCM 1.288.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।

  3010. RCM 1.288.7
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    चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।

  3011. RCM 1.288.8
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    सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।

    अर्थ (Hindi)

    सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।

  3012. RCM 1.288.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।

    अर्थ (Hindi)

    हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।

  3013. RCM 1.289.1
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    रचे रुचिर बर बंदनिबारे। मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    रचे रुचिर बर बंदनिबारे। मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे।।

  3014. RCM 1.289.2
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    मंगल कलस अनेक बनाए। ध्वज पताक पट चमर सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल कलस अनेक बनाए। ध्वज पताक पट चमर सुहाए।।

  3015. RCM 1.289.3
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    दीप मनोहर मनिमय नाना। जाइ न बरनि बिचित्र बिताना।।

    अर्थ (Hindi)

    दीप मनोहर मनिमय नाना। जाइ न बरनि बिचित्र बिताना।।

  3016. RCM 1.289.4
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    जेहिं मंडप दुलहिनि बैदेही। सो बरनै असि मति कबि केही।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं मंडप दुलहिनि बैदेही। सो बरनै असि मति कबि केही।।

  3017. RCM 1.289.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।

    अर्थ (Hindi)

    दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।

  3018. RCM 1.289.6
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    जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।

  3019. RCM 1.289.7
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    जेहिं तेरहुति तेहि समय निहारी। तेहि लघु लगहिं भुवन दस चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं तेरहुति तेहि समय निहारी। तेहि लघु लगहिं भुवन दस चारी।।

  3020. RCM 1.289.8
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    जो संपदा नीच गृह सोहा। सो बिलोकि सुरनायक मोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    जो संपदा नीच गृह सोहा। सो बिलोकि सुरनायक मोहा।।

  3021. RCM 1.289.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।

    अर्थ (Hindi)

    बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।

  3022. RCM 1.289.10
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    तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।

  3023. RCM 1.290.1
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    पहुँचे दूत राम पुर पावन। हरषे नगर बिलोकि सुहावन।।

    अर्थ (Hindi)

    पहुँचे दूत राम पुर पावन। हरषे नगर बिलोकि सुहावन।।

  3024. RCM 1.290.2
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    भूप द्वार तिन्ह खबरि जनाई। दसरथ नृप सुनि लिए बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप द्वार तिन्ह खबरि जनाई। दसरथ नृप सुनि लिए बोलाई।।

  3025. RCM 1.290.3
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    करि प्रनामु तिन्ह पाती दीन्ही। मुदित महीप आपु उठि लीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    करि प्रनामु तिन्ह पाती दीन्ही। मुदित महीप आपु उठि लीन्ही।।

  3026. RCM 1.290.4
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    बारि बिलोचन बाचत पाँती। पुलक गात आई भरि छाती।।

    अर्थ (Hindi)

    बारि बिलोचन बाचत पाँती। पुलक गात आई भरि छाती।।

  3027. RCM 1.290.5
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    रामु लखनु उर कर बर चीठी। रहि गए कहत न खाटी मीठी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु लखनु उर कर बर चीठी। रहि गए कहत न खाटी मीठी।।

  3028. RCM 1.290.6
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    पुनि धरि धीर पत्रिका बाँची। हरषी सभा बात सुनि साँची।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि धरि धीर पत्रिका बाँची। हरषी सभा बात सुनि साँची।।

  3029. RCM 1.290.7
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    खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।

  3030. RCM 1.290.8
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    पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।

    अर्थ (Hindi)

    पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।

  3031. RCM 1.290.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।

    अर्थ (Hindi)

    कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।

  3032. RCM 1.290.10
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    सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।

  3033. RCM 1.291.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।

  3034. RCM 1.291.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।

  3035. RCM 1.291.3
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    तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।

    अर्थ (Hindi)

    तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।

  3036. RCM 1.291.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।

    अर्थ (Hindi)

    भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।

  3037. RCM 1.291.5
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    स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।

    अर्थ (Hindi)

    स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।

  3038. RCM 1.291.6
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    पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।

  3039. RCM 1.291.7
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    जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।।

  3040. RCM 1.291.8
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    कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।

  3041. RCM 1.291.9
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    सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।

  3042. RCM 1.291.10
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    रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।

  3043. RCM 1.292.1
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    पूछन जोगु न तनय तुम्हारे। पुरुषसिंघ तिहु पुर उजिआरे।।

    अर्थ (Hindi)

    पूछन जोगु न तनय तुम्हारे। पुरुषसिंघ तिहु पुर उजिआरे।।

  3044. RCM 1.292.2
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    जिन्ह के जस प्रताप कें आगे। ससि मलीन रबि सीतल लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह के जस प्रताप कें आगे। ससि मलीन रबि सीतल लागे।।

  3045. RCM 1.292.3
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    तिन्ह कहँ कहिअ नाथ किमि चीन्हे। देखिअ रबि कि दीप कर लीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह कहँ कहिअ नाथ किमि चीन्हे। देखिअ रबि कि दीप कर लीन्हे।।

  3046. RCM 1.292.4
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    सीय स्वयंबर भूप अनेका। समिटे सुभट एक तें एका।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय स्वयंबर भूप अनेका। समिटे सुभट एक तें एका।।

  3047. RCM 1.292.5
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    संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।

    अर्थ (Hindi)

    संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।

  3048. RCM 1.292.6
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    तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।।

  3049. RCM 1.292.7
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    सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।

    अर्थ (Hindi)

    सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।

  3050. RCM 1.292.8
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    जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।

  3051. RCM 1.292.9
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    तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।

    अर्थ (Hindi)

    तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।

  3052. RCM 1.292.10
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    भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।

    अर्थ (Hindi)

    भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।

  3053. RCM 1.293.1
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    सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।

  3054. RCM 1.293.2
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    देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।।

  3055. RCM 1.293.3
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    राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें।।

  3056. RCM 1.293.4
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    कंपहि भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें।।

    अर्थ (Hindi)

    कंपहि भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें।।

  3057. RCM 1.293.5
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    देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।

  3058. RCM 1.293.6
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    दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।।

    अर्थ (Hindi)

    दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।।

  3059. RCM 1.293.7
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    सभा समेत राउ अनुरागे। दूतन्ह देन निछावरि लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    सभा समेत राउ अनुरागे। दूतन्ह देन निछावरि लागे।।

  3060. RCM 1.293.8
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    कहि अनीति ते मूदहिं काना। धरमु बिचारि सबहिं सुख माना।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि अनीति ते मूदहिं काना। धरमु बिचारि सबहिं सुख माना।।

  3061. RCM 1.293.9
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    तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।

    अर्थ (Hindi)

    तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।

  3062. RCM 1.293.10
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    कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।

    अर्थ (Hindi)

    कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।

  3063. RCM 1.294.1
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    सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।

  3064. RCM 1.294.2
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    जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।

  3065. RCM 1.294.3
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    तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।

  3066. RCM 1.294.4
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    तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।।

  3067. RCM 1.294.5
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    सुकृती तुम्ह समान जग माहीं। भयउ न है कोउ होनेउ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुकृती तुम्ह समान जग माहीं। भयउ न है कोउ होनेउ नाहीं।।

  3068. RCM 1.294.6
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    तुम्ह ते अधिक पुन्य बड़ काकें। राजन राम सरिस सुत जाकें।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह ते अधिक पुन्य बड़ काकें। राजन राम सरिस सुत जाकें।।

  3069. RCM 1.294.7
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    बीर बिनीत धरम ब्रत धारी। गुन सागर बर बालक चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बीर बिनीत धरम ब्रत धारी। गुन सागर बर बालक चारी।।

  3070. RCM 1.294.8
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    तुम्ह कहुँ सर्ब काल कल्याना। सजहु बरात बजाइ निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह कहुँ सर्ब काल कल्याना। सजहु बरात बजाइ निसाना।।

  3071. RCM 1.294.9
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    चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ।

    अर्थ (Hindi)

    चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ।

  3072. RCM 1.294.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ।।294।।

    अर्थ (Hindi)

    भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ।।294।।

  3073. RCM 1.295.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राजा सबु रनिवास बोलाई। जनक पत्रिका बाचि सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    राजा सबु रनिवास बोलाई। जनक पत्रिका बाचि सुनाई।।

  3074. RCM 1.295.2
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    सुनि संदेसु सकल हरषानीं। अपर कथा सब भूप बखानीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि संदेसु सकल हरषानीं। अपर कथा सब भूप बखानीं।।

  3075. RCM 1.295.3
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    प्रेम प्रफुल्लित राजहिं रानी। मनहुँ सिखिनि सुनि बारिद बनी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम प्रफुल्लित राजहिं रानी। मनहुँ सिखिनि सुनि बारिद बनी।।

  3076. RCM 1.295.4
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    मुदित असीस देहिं गुरु नारीं। अति आनंद मगन महतारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मुदित असीस देहिं गुरु नारीं। अति आनंद मगन महतारीं।।

  3077. RCM 1.295.5
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    लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।।

    अर्थ (Hindi)

    लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।।

  3078. RCM 1.295.6
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    राम लखन कै कीरति करनी। बारहिं बार भूपबर बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम लखन कै कीरति करनी। बारहिं बार भूपबर बरनी।।

  3079. RCM 1.295.7
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    मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।।

  3080. RCM 1.295.8
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    दिए दान आनंद समेता। चले बिप्रबर आसिष देता।।

    अर्थ (Hindi)

    दिए दान आनंद समेता। चले बिप्रबर आसिष देता।।

  3081. RCM 1.295.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।

    अर्थ (Hindi)

    जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।

  3082. RCM 1.295.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के।।295।।

    अर्थ (Hindi)

    चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के।।295।।

  3083. RCM 1.296.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।।

  3084. RCM 1.296.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।।

    अर्थ (Hindi)

    समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।।

  3085. RCM 1.296.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भुवन चारि दस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।

    अर्थ (Hindi)

    भुवन चारि दस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।

  3086. RCM 1.296.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे। मग गृह गलीं सँवारन लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे। मग गृह गलीं सँवारन लागे।।

  3087. RCM 1.296.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।।

    अर्थ (Hindi)

    जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।।

  3088. RCM 1.296.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।।

  3089. RCM 1.296.7
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    ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।।

    अर्थ (Hindi)

    ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।।

  3090. RCM 1.296.8
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    कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।

  3091. RCM 1.296.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ।

    अर्थ (Hindi)

    मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ।

  3092. RCM 1.296.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बीथीं सीचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ।।296।।

    अर्थ (Hindi)

    बीथीं सीचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ।।296।।

  3093. RCM 1.297.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।।

  3094. RCM 1.297.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिधुबदनीं मृग सावक लोचनि। निज सरुप रति मानु बिमोचनि।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधुबदनीं मृग सावक लोचनि। निज सरुप रति मानु बिमोचनि।।

  3095. RCM 1.297.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।।

    अर्थ (Hindi)

    गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।।

  3096. RCM 1.297.4
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    भूप भवन किमि जाइ बखाना। बिस्व बिमोहन रचेउ बिताना।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप भवन किमि जाइ बखाना। बिस्व बिमोहन रचेउ बिताना।।

  3097. RCM 1.297.5
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    मंगल द्रब्य मनोहर नाना। राजत बाजत बिपुल निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल द्रब्य मनोहर नाना। राजत बाजत बिपुल निसाना।।

  3098. RCM 1.297.6
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    कतहुँ बिरिद बंदी उच्चरहीं। कतहुँ बेद धुनि भूसुर करहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कतहुँ बिरिद बंदी उच्चरहीं। कतहुँ बेद धुनि भूसुर करहीं।।

  3099. RCM 1.297.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गावहिं सुंदरि मंगल गीता। लै लै नामु रामु अरु सीता।।

    अर्थ (Hindi)

    गावहिं सुंदरि मंगल गीता। लै लै नामु रामु अरु सीता।।

  3100. RCM 1.297.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुत उछाहु भवनु अति थोरा। मानहुँ उमगि चला चहु ओरा।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुत उछाहु भवनु अति थोरा। मानहुँ उमगि चला चहु ओरा।।

  3101. RCM 1.297.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार।

    अर्थ (Hindi)

    सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार।

  3102. RCM 1.297.10
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    जहाँ सकल सुर सीस मनि राम लीन्ह अवतार।।297।।

    अर्थ (Hindi)

    जहाँ सकल सुर सीस मनि राम लीन्ह अवतार।।297।।

  3103. RCM 1.298.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूप भरत पुनि लिए बोलाई। हय गय स्यंदन साजहु जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप भरत पुनि लिए बोलाई। हय गय स्यंदन साजहु जाई।।

  3104. RCM 1.298.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चलहु बेगि रघुबीर बराता। सुनत पुलक पूरे दोउ भ्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    चलहु बेगि रघुबीर बराता। सुनत पुलक पूरे दोउ भ्राता।।

  3105. RCM 1.298.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भरत सकल साहनी बोलाए। आयसु दीन्ह मुदित उठि धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    भरत सकल साहनी बोलाए। आयसु दीन्ह मुदित उठि धाए।।

  3106. RCM 1.298.4
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    रचि रुचि जीन तुरग तिन्ह साजे। बरन बरन बर बाजि बिराजे।।

    अर्थ (Hindi)

    रचि रुचि जीन तुरग तिन्ह साजे। बरन बरन बर बाजि बिराजे।।

  3107. RCM 1.298.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।।

  3108. RCM 1.298.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।।

  3109. RCM 1.298.7
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    तिन्ह सब छयल भए असवारा। भरत सरिस बय राजकुमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह सब छयल भए असवारा। भरत सरिस बय राजकुमारा।।

  3110. RCM 1.298.8
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    सब सुंदर सब भूषनधारी। कर सर चाप तून कटि भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब सुंदर सब भूषनधारी। कर सर चाप तून कटि भारी।।

  3111. RCM 1.298.9
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    छरे छबीले छयल सब सूर सुजान नबीन।

    अर्थ (Hindi)

    छरे छबीले छयल सब सूर सुजान नबीन।

  3112. RCM 1.298.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जुग पदचर असवार प्रति जे असिकला प्रबीन।।298।।

    अर्थ (Hindi)

    जुग पदचर असवार प्रति जे असिकला प्रबीन।।298।।

  3113. RCM 1.299.1
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    बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।।

    अर्थ (Hindi)

    बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।।

  3114. RCM 1.299.2
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    फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पवन निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पवन निसाना।।

  3115. RCM 1.299.3
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    रथ सारथिन्ह बिचित्र बनाए। ध्वज पताक मनि भूषन लाए।।

    अर्थ (Hindi)

    रथ सारथिन्ह बिचित्र बनाए। ध्वज पताक मनि भूषन लाए।।

  3116. RCM 1.299.4
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    चवँर चारु किंकिन धुनि करही। भानु जान सोभा अपहरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    चवँर चारु किंकिन धुनि करही। भानु जान सोभा अपहरहीं।।

  3117. RCM 1.299.5
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    सावँकरन अगनित हय होते। ते तिन्ह रथन्ह सारथिन्ह जोते।।

    अर्थ (Hindi)

    सावँकरन अगनित हय होते। ते तिन्ह रथन्ह सारथिन्ह जोते।।

  3118. RCM 1.299.6
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    सुंदर सकल अलंकृत सोहे। जिन्हहि बिलोकत मुनि मन मोहे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर सकल अलंकृत सोहे। जिन्हहि बिलोकत मुनि मन मोहे।।

  3119. RCM 1.299.7
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    जे जल चलहिं थलहि की नाई। टाप न बूड़ बेग अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जे जल चलहिं थलहि की नाई। टाप न बूड़ बेग अधिकाई।।

  3120. RCM 1.299.8
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    अस्त्र सस्त्र सबु साजु बनाई। रथी सारथिन्ह लिए बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्त्र सस्त्र सबु साजु बनाई। रथी सारथिन्ह लिए बोलाई।।

  3121. RCM 1.299.9
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    चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात।

    अर्थ (Hindi)

    चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात।

  3122. RCM 1.299.10
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    होत सगुन सुन्दर सबहि जो जेहि कारज जात।।299।।

    अर्थ (Hindi)

    होत सगुन सुन्दर सबहि जो जेहि कारज जात।।299।।

  3123. RCM 1.300.1
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    कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।

  3124. RCM 1.300.2
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    चले मत्तगज घंट बिराजी। मनहुँ सुभग सावन घन राजी।।

    अर्थ (Hindi)

    चले मत्तगज घंट बिराजी। मनहुँ सुभग सावन घन राजी।।

  3125. RCM 1.300.3
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    बाहन अपर अनेक बिधाना। सिबिका सुभग सुखासन जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बाहन अपर अनेक बिधाना। सिबिका सुभग सुखासन जाना।।

  3126. RCM 1.300.4
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    तिन्ह चढ़ि चले बिप्रबर बृन्दा। जनु तनु धरें सकल श्रुति छंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह चढ़ि चले बिप्रबर बृन्दा। जनु तनु धरें सकल श्रुति छंदा।।

  3127. RCM 1.300.5
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    मागध सूत बंदि गुनगायक। चले जान चढ़ि जो जेहि लायक।।

    अर्थ (Hindi)

    मागध सूत बंदि गुनगायक। चले जान चढ़ि जो जेहि लायक।।

  3128. RCM 1.300.6
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    बेसर ऊँट बृषभ बहु जाती। चले बस्तु भरि अगनित भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    बेसर ऊँट बृषभ बहु जाती। चले बस्तु भरि अगनित भाँती।।

  3129. RCM 1.300.7
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    कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।

  3130. RCM 1.300.8
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    चले सकल सेवक समुदाई। निज निज साजु समाजु बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चले सकल सेवक समुदाई। निज निज साजु समाजु बनाई।।

  3131. RCM 1.300.9
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    सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।

    अर्थ (Hindi)

    सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।

  3132. RCM 1.300.10
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    कबहिं देखिबे नयन भरि रामु लखनू दोउ बीर।।300।।

    अर्थ (Hindi)

    कबहिं देखिबे नयन भरि रामु लखनू दोउ बीर।।300।।

  3133. RCM 1.301.1
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    गरजहिं गज घंटा धुनि घोरा। रथ रव बाजि हिंस चहु ओरा।।

    अर्थ (Hindi)

    गरजहिं गज घंटा धुनि घोरा। रथ रव बाजि हिंस चहु ओरा।।

  3134. RCM 1.301.2
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    निदरि घनहि घुर्म्मरहिं निसाना। निज पराइ कछु सुनिअ न काना।।

    अर्थ (Hindi)

    निदरि घनहि घुर्म्मरहिं निसाना। निज पराइ कछु सुनिअ न काना।।

  3135. RCM 1.301.3
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    महा भीर भूपति के द्वारें। रज होइ जाइ पषान पबारें।।

    अर्थ (Hindi)

    महा भीर भूपति के द्वारें। रज होइ जाइ पषान पबारें।।

  3136. RCM 1.301.4
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    चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं। लिंएँ आरती मंगल थारी।।

    अर्थ (Hindi)

    चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं। लिंएँ आरती मंगल थारी।।

  3137. RCM 1.301.5
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    गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना।।

  3138. RCM 1.301.6
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    तब सुमंत्र दुइ स्पंदन साजी। जोते रबि हय निंदक बाजी।।

    अर्थ (Hindi)

    तब सुमंत्र दुइ स्पंदन साजी। जोते रबि हय निंदक बाजी।।

  3139. RCM 1.301.7
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    दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने।।

  3140. RCM 1.301.8
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    राज समाजु एक रथ साजा। दूसर तेज पुंज अति भ्राजा।।

    अर्थ (Hindi)

    राज समाजु एक रथ साजा। दूसर तेज पुंज अति भ्राजा।।

  3141. RCM 1.301.9
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    तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।

  3142. RCM 1.301.10
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    आपु चढ़ेउ स्पंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु।।301।।

    अर्थ (Hindi)

    आपु चढ़ेउ स्पंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु।।301।।

  3143. RCM 1.302.1
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    सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।।

  3144. RCM 1.302.2
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    करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ।।

  3145. RCM 1.302.3
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    सुमिरि रामु गुर आयसु पाई। चले महीपति संख बजाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि रामु गुर आयसु पाई। चले महीपति संख बजाई।।

  3146. RCM 1.302.4
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    हरषे बिबुध बिलोकि बराता। बरषहिं सुमन सुमंगल दाता।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषे बिबुध बिलोकि बराता। बरषहिं सुमन सुमंगल दाता।।

  3147. RCM 1.302.5
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    भयउ कोलाहल हय गय गाजे। ब्योम बरात बाजने बाजे।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ कोलाहल हय गय गाजे। ब्योम बरात बाजने बाजे।।

  3148. RCM 1.302.6
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    सुर नर नारि सुमंगल गाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर नर नारि सुमंगल गाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

  3149. RCM 1.302.7
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    घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।।

  3150. RCM 1.302.8
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    करहिं बिदूषक कौतुक नाना। हास कुसल कल गान सुजाना ।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं बिदूषक कौतुक नाना। हास कुसल कल गान सुजाना ।

  3151. RCM 1.302.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।।

  3152. RCM 1.302.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान।।302।।

    अर्थ (Hindi)

    नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान।।302।।

  3153. RCM 1.303.1
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    बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।।

  3154. RCM 1.303.2
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    चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई।।

    अर्थ (Hindi)

    चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई।।

  3155. RCM 1.303.3
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    दाहिन काग सुखेत सुहावा। नकुल दरसु सब काहूँ पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    दाहिन काग सुखेत सुहावा। नकुल दरसु सब काहूँ पावा।।

  3156. RCM 1.303.4
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    सानुकूल बह त्रिबिध बयारी। सघट सवाल आव बर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सानुकूल बह त्रिबिध बयारी। सघट सवाल आव बर नारी।।

  3157. RCM 1.303.5
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    लोवा फिरि फिरि दरसु देखावा। सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा।।

    अर्थ (Hindi)

    लोवा फिरि फिरि दरसु देखावा। सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा।।

  3158. RCM 1.303.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मृगमाला फिरि दाहिनि आई। मंगल गन जनु दीन्हि देखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मृगमाला फिरि दाहिनि आई। मंगल गन जनु दीन्हि देखाई।।

  3159. RCM 1.303.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    छेमकरी कह छेम बिसेषी। स्यामा बाम सुतरु पर देखी।।

    अर्थ (Hindi)

    छेमकरी कह छेम बिसेषी। स्यामा बाम सुतरु पर देखी।।

  3160. RCM 1.303.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सनमुख आयउ दधि अरु मीना। कर पुस्तक दुइ बिप्र प्रबीना।।

    अर्थ (Hindi)

    सनमुख आयउ दधि अरु मीना। कर पुस्तक दुइ बिप्र प्रबीना।।

  3161. RCM 1.303.9
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    मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।

    अर्थ (Hindi)

    मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।

  3162. RCM 1.303.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार।।303।।

    अर्थ (Hindi)

    जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार।।303।।

  3163. RCM 1.304.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंगल सगुन सुगम सब ताकें। सगुन ब्रह्म सुंदर सुत जाकें।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल सगुन सुगम सब ताकें। सगुन ब्रह्म सुंदर सुत जाकें।।

  3164. RCM 1.304.2
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    राम सरिस बरु दुलहिनि सीता। समधी दसरथु जनकु पुनीता।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सरिस बरु दुलहिनि सीता। समधी दसरथु जनकु पुनीता।।

  3165. RCM 1.304.3
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    सुनि अस ब्याहु सगुन सब नाचे। अब कीन्हे बिरंचि हम साँचे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि अस ब्याहु सगुन सब नाचे। अब कीन्हे बिरंचि हम साँचे।।

  3166. RCM 1.304.4
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    एहि बिधि कीन्ह बरात पयाना। हय गय गाजहिं हने निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि कीन्ह बरात पयाना। हय गय गाजहिं हने निसाना।।

  3167. RCM 1.304.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू।।

  3168. RCM 1.304.6
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    बीच बीच बर बास बनाए। सुरपुर सरिस संपदा छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बीच बीच बर बास बनाए। सुरपुर सरिस संपदा छाए।।

  3169. RCM 1.304.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    असन सयन बर बसन सुहाए। पावहिं सब निज निज मन भाए।।

    अर्थ (Hindi)

    असन सयन बर बसन सुहाए। पावहिं सब निज निज मन भाए।।

  3170. RCM 1.304.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नित नूतन सुख लखि अनुकूले। सकल बरातिन्ह मंदिर भूले।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नूतन सुख लखि अनुकूले। सकल बरातिन्ह मंदिर भूले।।

  3171. RCM 1.304.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान।

    अर्थ (Hindi)

    आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान।

  3172. RCM 1.304.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान।।304।।

    अर्थ (Hindi)

    सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान।।304।।

  3173. RCM 1.305.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।।

  3174. RCM 1.305.2
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    भरे सुधासम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    भरे सुधासम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने।।

  3175. RCM 1.305.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    फल अनेक बर बस्तु सुहाईं। हरषि भेंट हित भूप पठाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    फल अनेक बर बस्तु सुहाईं। हरषि भेंट हित भूप पठाईं।।

  3176. RCM 1.305.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूषन बसन महामनि नाना। खग मृग हय गय बहुबिधि जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    भूषन बसन महामनि नाना। खग मृग हय गय बहुबिधि जाना।।

  3177. RCM 1.305.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंगल सगुन सुगंध सुहाए। बहुत भाँति महिपाल पठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल सगुन सुगंध सुहाए। बहुत भाँति महिपाल पठाए।।

  3178. RCM 1.305.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दधि चिउरा उपहार अपारा। भरि भरि काँवरि चले कहारा।।

    अर्थ (Hindi)

    दधि चिउरा उपहार अपारा। भरि भरि काँवरि चले कहारा।।

  3179. RCM 1.305.7
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    अगवानन्ह जब दीखि बराता।उर आनंदु पुलक भर गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    अगवानन्ह जब दीखि बराता।उर आनंदु पुलक भर गाता।।

  3180. RCM 1.305.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि बनाव सहित अगवाना। मुदित बरातिन्ह हने निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि बनाव सहित अगवाना। मुदित बरातिन्ह हने निसाना।।

  3181. RCM 1.305.9
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    हरषि परसपर मिलन हित कछुक चले बगमेल।

    अर्थ (Hindi)

    हरषि परसपर मिलन हित कछुक चले बगमेल।

  3182. RCM 1.305.10
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    जनु आनंद समुद्र दुइ मिलत बिहाइ सुबेल।।305।।

    अर्थ (Hindi)

    जनु आनंद समुद्र दुइ मिलत बिहाइ सुबेल।।305।।

  3183. RCM 1.306.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरषि सुमन सुर सुंदरि गावहिं। मुदित देव दुंदुभीं बजावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषि सुमन सुर सुंदरि गावहिं। मुदित देव दुंदुभीं बजावहिं।।

  3184. RCM 1.306.2
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    बस्तु सकल राखीं नृप आगें। बिनय कीन्ह तिन्ह अति अनुरागें।।

    अर्थ (Hindi)

    बस्तु सकल राखीं नृप आगें। बिनय कीन्ह तिन्ह अति अनुरागें।।

  3185. RCM 1.306.3
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    प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।।

  3186. RCM 1.306.4
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    करि पूजा मान्यता बड़ाई। जनवासे कहुँ चले लवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    करि पूजा मान्यता बड़ाई। जनवासे कहुँ चले लवाई।।

  3187. RCM 1.306.5
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    बसन बिचित्र पाँवड़े परहीं। देखि धनहु धन मदु परिहरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बसन बिचित्र पाँवड़े परहीं। देखि धनहु धन मदु परिहरहीं।।

  3188. RCM 1.306.6
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    अति सुंदर दीन्हेउ जनवासा। जहँ सब कहुँ सब भाँति सुपासा।।

    अर्थ (Hindi)

    अति सुंदर दीन्हेउ जनवासा। जहँ सब कहुँ सब भाँति सुपासा।।

  3189. RCM 1.306.7
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    जानी सियँ बरात पुर आई। कछु निज महिमा प्रगटि जनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जानी सियँ बरात पुर आई। कछु निज महिमा प्रगटि जनाई।।

  3190. RCM 1.306.8
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    हृदयँ सुमिरि सब सिद्धि बोलाई। भूप पहुनई करन पठाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ सुमिरि सब सिद्धि बोलाई। भूप पहुनई करन पठाई।।

  3191. RCM 1.306.9
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    सिधि सब सिय आयसु अकनि गईं जहाँ जनवास।

    अर्थ (Hindi)

    सिधि सब सिय आयसु अकनि गईं जहाँ जनवास।

  3192. RCM 1.306.10
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    लिएँ संपदा सकल सुख सुरपुर भोग बिलास।।306।।

    अर्थ (Hindi)

    लिएँ संपदा सकल सुख सुरपुर भोग बिलास।।306।।

  3193. RCM 1.307.1
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    निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।।

  3194. RCM 1.307.2
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    बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना।।

  3195. RCM 1.307.3
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    सिय महिमा रघुनायक जानी। हरषे हृदयँ हेतु पहिचानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय महिमा रघुनायक जानी। हरषे हृदयँ हेतु पहिचानी।।

  3196. RCM 1.307.4
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    पितु आगमनु सुनत दोउ भाई। हृदयँ न अति आनंदु अमाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पितु आगमनु सुनत दोउ भाई। हृदयँ न अति आनंदु अमाई।।

  3197. RCM 1.307.5
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    सकुचन्ह कहि न सकत गुरु पाहीं। पितु दरसन लालचु मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सकुचन्ह कहि न सकत गुरु पाहीं। पितु दरसन लालचु मन माहीं।।

  3198. RCM 1.307.6
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    बिस्वामित्र बिनय बड़ि देखी। उपजा उर संतोषु बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वामित्र बिनय बड़ि देखी। उपजा उर संतोषु बिसेषी।।

  3199. RCM 1.307.7
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    हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।।

  3200. RCM 1.307.8
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    चले जहाँ दसरथु जनवासे। मनहुँ सरोबर तकेउ पिआसे।।

    अर्थ (Hindi)

    चले जहाँ दसरथु जनवासे। मनहुँ सरोबर तकेउ पिआसे।।

  3201. RCM 1.307.9
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    भूप बिलोके जबहिं मुनि आवत सुतन्ह समेत।

    अर्थ (Hindi)

    भूप बिलोके जबहिं मुनि आवत सुतन्ह समेत।

  3202. RCM 1.307.10
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    उठे हरषि सुखसिंधु महुँ चले थाह सी लेत।।307।।

    अर्थ (Hindi)

    उठे हरषि सुखसिंधु महुँ चले थाह सी लेत।।307।।

  3203. RCM 1.308.1
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    मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।

  3204. RCM 1.308.2
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    कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।।

  3205. RCM 1.308.3
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    पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।

  3206. RCM 1.308.4
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    सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।।

  3207. RCM 1.308.5
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    पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।

  3208. RCM 1.308.6
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    बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।।

  3209. RCM 1.308.7
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    भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।

  3210. RCM 1.308.8
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    हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।

  3211. RCM 1.308.9
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    पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।

    अर्थ (Hindi)

    पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।

  3212. RCM 1.308.10
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    मिले जथाबिधि सबहि प्रभु परम कृपाल बिनीत।।308।।

    अर्थ (Hindi)

    मिले जथाबिधि सबहि प्रभु परम कृपाल बिनीत।।308।।

  3213. RCM 1.309.1
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    रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी।।

  3214. RCM 1.309.2
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    नृप समीप सोहहिं सुत चारी। जनु धन धरमादिक तनुधारी।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप समीप सोहहिं सुत चारी। जनु धन धरमादिक तनुधारी।।

  3215. RCM 1.309.3
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    सुतन्ह समेत दसरथहि देखी। मुदित नगर नर नारि बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुतन्ह समेत दसरथहि देखी। मुदित नगर नर नारि बिसेषी।।

  3216. RCM 1.309.4
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    सुमन बरिसि सुर हनहिं निसाना। नाकनटीं नाचहिं करि गाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमन बरिसि सुर हनहिं निसाना। नाकनटीं नाचहिं करि गाना।।

  3217. RCM 1.309.5
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    सतानंद अरु बिप्र सचिव गन। मागध सूत बिदुष बंदीजन।।

    अर्थ (Hindi)

    सतानंद अरु बिप्र सचिव गन। मागध सूत बिदुष बंदीजन।।

  3218. RCM 1.309.6
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    सहित बरात राउ सनमाना। आयसु मागि फिरे अगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सहित बरात राउ सनमाना। आयसु मागि फिरे अगवाना।।

  3219. RCM 1.309.7
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    प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।।

  3220. RCM 1.309.8
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    ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं। बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं। बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं।।

  3221. RCM 1.309.9
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    रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।

    अर्थ (Hindi)

    रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।

  3222. RCM 1.309.10
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    जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज।।।309।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज।।।309।।

  3223. RCM 1.310.1
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    जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।।

  3224. RCM 1.310.2
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    इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।।

    अर्थ (Hindi)

    इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।।

  3225. RCM 1.310.3
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    इन्ह सम कोउ न भयउ जग माहीं। है नहिं कतहूँ होनेउ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    इन्ह सम कोउ न भयउ जग माहीं। है नहिं कतहूँ होनेउ नाहीं।।

  3226. RCM 1.310.4
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    हम सब सकल सुकृत कै रासी। भए जग जनमि जनकपुर बासी।।

    अर्थ (Hindi)

    हम सब सकल सुकृत कै रासी। भए जग जनमि जनकपुर बासी।।

  3227. RCM 1.310.5
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    जिन्ह जानकी राम छबि देखी। को सुकृती हम सरिस बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह जानकी राम छबि देखी। को सुकृती हम सरिस बिसेषी।।

  3228. RCM 1.310.6
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    पुनि देखब रघुबीर बिआहू। लेब भली बिधि लोचन लाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि देखब रघुबीर बिआहू। लेब भली बिधि लोचन लाहू।।

  3229. RCM 1.310.7
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    कहहिं परसपर कोकिलबयनीं। एहि बिआहँ बड़ लाभु सुनयनीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं परसपर कोकिलबयनीं। एहि बिआहँ बड़ लाभु सुनयनीं।।

  3230. RCM 1.310.8
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    बड़ें भाग बिधि बात बनाई। नयन अतिथि होइहहिं दोउ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बड़ें भाग बिधि बात बनाई। नयन अतिथि होइहहिं दोउ भाई।।

  3231. RCM 1.310.9
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    बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय।

    अर्थ (Hindi)

    बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय।

  3232. RCM 1.310.10
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    लेन आइहहिं बंधु दोउ कोटि काम कमनीय।।310।।

    अर्थ (Hindi)

    लेन आइहहिं बंधु दोउ कोटि काम कमनीय।।310।।

  3233. RCM 1.311.1
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    बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।।

  3234. RCM 1.311.2
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    तब तब राम लखनहि निहारी। होइहहिं सब पुर लोग सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    तब तब राम लखनहि निहारी। होइहहिं सब पुर लोग सुखारी।।

  3235. RCM 1.311.3
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    सखि जस राम लखनकर जोटा। तैसेइ भूप संग दुइ ढोटा।।

    अर्थ (Hindi)

    सखि जस राम लखनकर जोटा। तैसेइ भूप संग दुइ ढोटा।।

  3236. RCM 1.311.4
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    स्याम गौर सब अंग सुहाए। ते सब कहहिं देखि जे आए।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गौर सब अंग सुहाए। ते सब कहहिं देखि जे आए।।

  3237. RCM 1.311.5
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    कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।।

  3238. RCM 1.311.6
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    भरतु रामही की अनुहारी। सहसा लखि न सकहिं नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भरतु रामही की अनुहारी। सहसा लखि न सकहिं नर नारी।।

  3239. RCM 1.311.7
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    लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।।

  3240. RCM 1.311.8
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    मन भावहिं मुख बरनि न जाहीं। उपमा कहुँ त्रिभुवन कोउ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मन भावहिं मुख बरनि न जाहीं। उपमा कहुँ त्रिभुवन कोउ नाहीं।।

  3241. RCM 1.312.1
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    एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।।

  3242. RCM 1.312.2
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    जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए।।

  3243. RCM 1.312.3
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    कहत राम जसु बिसद बिसाला। निज निज भवन गए महिपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत राम जसु बिसद बिसाला। निज निज भवन गए महिपाला।।

  3244. RCM 1.312.4
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    गए बीति कुछ दिन एहि भाँती। प्रमुदित पुरजन सकल बराती।।

    अर्थ (Hindi)

    गए बीति कुछ दिन एहि भाँती। प्रमुदित पुरजन सकल बराती।।

  3245. RCM 1.312.5
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    मंगल मूल लगन दिनु आवा। हिम रितु अगहनु मासु सुहावा।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल मूल लगन दिनु आवा। हिम रितु अगहनु मासु सुहावा।।

  3246. RCM 1.312.6
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    ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू। लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू।।

    अर्थ (Hindi)

    ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू। लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू।।

  3247. RCM 1.312.7
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    पठै दीन्हि नारद सन सोई। गनी जनक के गनकन्ह जोई।।

    अर्थ (Hindi)

    पठै दीन्हि नारद सन सोई। गनी जनक के गनकन्ह जोई।।

  3248. RCM 1.312.8
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    सुनी सकल लोगन्ह यह बाता। कहहिं जोतिषी आहिं बिधाता।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनी सकल लोगन्ह यह बाता। कहहिं जोतिषी आहिं बिधाता।।

  3249. RCM 1.312.9
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    धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल।

    अर्थ (Hindi)

    धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल।

  3250. RCM 1.312.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिप्रन्ह कहेउ बिदेह सन जानि सगुन अनुकुल।।312।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रन्ह कहेउ बिदेह सन जानि सगुन अनुकुल।।312।।

  3251. RCM 1.313.1
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    उपरोहितहि कहेउ नरनाहा। अब बिलंब कर कारनु काहा।।

    अर्थ (Hindi)

    उपरोहितहि कहेउ नरनाहा। अब बिलंब कर कारनु काहा।।

  3252. RCM 1.313.2
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    सतानंद तब सचिव बोलाए। मंगल सकल साजि सब ल्याए।।

    अर्थ (Hindi)

    सतानंद तब सचिव बोलाए। मंगल सकल साजि सब ल्याए।।

  3253. RCM 1.313.3
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    संख निसान पनव बहु बाजे। मंगल कलस सगुन सुभ साजे।।

    अर्थ (Hindi)

    संख निसान पनव बहु बाजे। मंगल कलस सगुन सुभ साजे।।

  3254. RCM 1.313.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुभग सुआसिनि गावहिं गीता। करहिं बेद धुनि बिप्र पुनीता।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभग सुआसिनि गावहिं गीता। करहिं बेद धुनि बिप्र पुनीता।।

  3255. RCM 1.313.5
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    लेन चले सादर एहि भाँती। गए जहाँ जनवास बराती।।

    अर्थ (Hindi)

    लेन चले सादर एहि भाँती। गए जहाँ जनवास बराती।।

  3256. RCM 1.313.6
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    कोसलपति कर देखि समाजू। अति लघु लाग तिन्हहि सुरराजू।।

    अर्थ (Hindi)

    कोसलपति कर देखि समाजू। अति लघु लाग तिन्हहि सुरराजू।।

  3257. RCM 1.313.7
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    भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।।

  3258. RCM 1.313.8
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    गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा।।

  3259. RCM 1.313.9
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    भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि।

    अर्थ (Hindi)

    भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि।

  3260. RCM 1.313.10
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    लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि।।313।।

    अर्थ (Hindi)

    लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि।।313।।

  3261. RCM 1.314.1
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    सुरन्ह सुमंगल अवसरु जाना। बरषहिं सुमन बजाइ निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुरन्ह सुमंगल अवसरु जाना। बरषहिं सुमन बजाइ निसाना।।

  3262. RCM 1.314.2
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    सिव ब्रह्मादिक बिबुध बरूथा। चढ़े बिमानन्हि नाना जूथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव ब्रह्मादिक बिबुध बरूथा। चढ़े बिमानन्हि नाना जूथा।।

  3263. RCM 1.314.3
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    प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।

  3264. RCM 1.314.4
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    देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।।

  3265. RCM 1.314.5
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    चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।

  3266. RCM 1.314.6
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    नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।।

  3267. RCM 1.314.7
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    तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।

  3268. RCM 1.314.8
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    बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।

  3269. RCM 1.314.9
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    सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।

    अर्थ (Hindi)

    सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।

  3270. RCM 1.314.10
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    हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।

  3271. RCM 1.315.1
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    जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।।

  3272. RCM 1.315.2
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    करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।।

  3273. RCM 1.315.3
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    एहि बिधि संभु सुरन्ह समुझावा। पुनि आगें बर बसह चलावा।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि संभु सुरन्ह समुझावा। पुनि आगें बर बसह चलावा।।

  3274. RCM 1.315.4
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    देवन्ह देखे दसरथु जाता। महामोद मन पुलकित गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    देवन्ह देखे दसरथु जाता। महामोद मन पुलकित गाता।।

  3275. RCM 1.315.5
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    साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।।

  3276. RCM 1.315.6
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    सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।।

  3277. RCM 1.315.7
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    मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।।

  3278. RCM 1.315.8
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    पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।

  3279. RCM 1.315.9
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    राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि।

    अर्थ (Hindi)

    राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि।

  3280. RCM 1.315.10
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    पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।

    अर्थ (Hindi)

    पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।

  3281. RCM 1.316.1
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    केकि कंठ दुति स्यामल अंगा। तड़ित बिनिंदक बसन सुरंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    केकि कंठ दुति स्यामल अंगा। तड़ित बिनिंदक बसन सुरंगा।।

  3282. RCM 1.316.2
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    ब्याह बिभूषन बिबिध बनाए। मंगल सब सब भाँति सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्याह बिभूषन बिबिध बनाए। मंगल सब सब भाँति सुहाए।।

  3283. RCM 1.316.3
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    सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन। नयन नवल राजीव लजावन।।

    अर्थ (Hindi)

    सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन। नयन नवल राजीव लजावन।।

  3284. RCM 1.316.4
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    सकल अलौकिक सुंदरताई। कहि न जाइ मनहीं मन भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल अलौकिक सुंदरताई। कहि न जाइ मनहीं मन भाई।।

  3285. RCM 1.316.5
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    बंधु मनोहर सोहहिं संगा। जात नचावत चपल तुरंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु मनोहर सोहहिं संगा। जात नचावत चपल तुरंगा।।

  3286. RCM 1.316.6
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    राजकुअँर बर बाजि देखावहिं। बंस प्रसंसक बिरिद सुनावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    राजकुअँर बर बाजि देखावहिं। बंस प्रसंसक बिरिद सुनावहिं।।

  3287. RCM 1.316.7
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    जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।।

  3288. RCM 1.316.8
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    कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।

  3289. RCM 1.317.1
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    जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।।

  3290. RCM 1.317.2
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    संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।।

  3291. RCM 1.317.3
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    हरि हित सहित रामु जब जोहे। रमा समेत रमापति मोहे।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि हित सहित रामु जब जोहे। रमा समेत रमापति मोहे।।

  3292. RCM 1.317.4
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    निरखि राम छबि बिधि हरषाने। आठइ नयन जानि पछिताने।।

    अर्थ (Hindi)

    निरखि राम छबि बिधि हरषाने। आठइ नयन जानि पछिताने।।

  3293. RCM 1.317.5
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    सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।।

  3294. RCM 1.317.6
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    रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।।

  3295. RCM 1.317.7
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    देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।।

  3296. RCM 1.317.8
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    मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।

  3297. RCM 1.318.1
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    बिधुबदनीं सब सब मृगलोचनि। सब निज तन छबि रति मदु मोचनि।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधुबदनीं सब सब मृगलोचनि। सब निज तन छबि रति मदु मोचनि।।

  3298. RCM 1.318.2
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    पहिरें बरन बरन बर चीरा। सकल बिभूषन सजें सरीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    पहिरें बरन बरन बर चीरा। सकल बिभूषन सजें सरीरा।।

  3299. RCM 1.318.3
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    सकल सुमंगल अंग बनाएँ। करहिं गान कलकंठि लजाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सुमंगल अंग बनाएँ। करहिं गान कलकंठि लजाएँ।।

  3300. RCM 1.318.4
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    कंकन किंकिनि नूपुर बाजहिं। चालि बिलोकि काम गज लाजहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    कंकन किंकिनि नूपुर बाजहिं। चालि बिलोकि काम गज लाजहिं।।

  3301. RCM 1.318.5
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    बाजहिं बाजने बिबिध प्रकारा। नभ अरु नगर सुमंगलचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजहिं बाजने बिबिध प्रकारा। नभ अरु नगर सुमंगलचारा।।

  3302. RCM 1.318.6
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    सची सारदा रमा भवानी। जे सुरतिय सुचि सहज सयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सची सारदा रमा भवानी। जे सुरतिय सुचि सहज सयानी।।

  3303. RCM 1.318.7
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    कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।

  3304. RCM 1.318.8
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    करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।

  3305. RCM 1.319.1
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    नयन नीरु हटि मंगल जानी। परिछनि करहिं मुदित मन रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    नयन नीरु हटि मंगल जानी। परिछनि करहिं मुदित मन रानी।।

  3306. RCM 1.319.2
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    बेद बिहित अरु कुल आचारू। कीन्ह भली बिधि सब ब्यवहारू।।

    अर्थ (Hindi)

    बेद बिहित अरु कुल आचारू। कीन्ह भली बिधि सब ब्यवहारू।।

  3307. RCM 1.319.3
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    पंच सबद धुनि मंगल गाना। पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    पंच सबद धुनि मंगल गाना। पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना।।

  3308. RCM 1.319.4
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    करि आरती अरघु तिन्ह दीन्हा। राम गमनु मंडप तब कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    करि आरती अरघु तिन्ह दीन्हा। राम गमनु मंडप तब कीन्हा।।

  3309. RCM 1.319.5
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    दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।।

    अर्थ (Hindi)

    दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।।

  3310. RCM 1.319.6
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    समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला। सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला।।

    अर्थ (Hindi)

    समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला। सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला।।

  3311. RCM 1.319.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नभ अरु नगर कोलाहल होई। आपनि पर कछु सुनइ न कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    नभ अरु नगर कोलाहल होई। आपनि पर कछु सुनइ न कोई।।

  3312. RCM 1.319.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि रामु मंडपहिं आए। अरघु देइ आसन बैठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि रामु मंडपहिं आए। अरघु देइ आसन बैठाए।।

  3313. RCM 1.320.1
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    मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।।

    अर्थ (Hindi)

    मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।।

  3314. RCM 1.320.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।।

    अर्थ (Hindi)

    मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।।

  3315. RCM 1.320.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।।

    अर्थ (Hindi)

    लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।।

  3316. RCM 1.320.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।।

  3317. RCM 1.320.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जगु बिरंचि उपजावा जब तें। देखे सुने ब्याह बहु तब तें।।

    अर्थ (Hindi)

    जगु बिरंचि उपजावा जब तें। देखे सुने ब्याह बहु तब तें।।

  3318. RCM 1.320.6
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    सकल भाँति सम साजु समाजू। सम समधी देखे हम आजू।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल भाँति सम साजु समाजू। सम समधी देखे हम आजू।।

  3319. RCM 1.320.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।।

    अर्थ (Hindi)

    देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।।

  3320. RCM 1.320.8
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    देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।

    अर्थ (Hindi)

    देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।

  3321. RCM 1.321.1
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    बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।।

  3322. RCM 1.321.2
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    कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई। कहि निज भाग्य बिभव बहुताई।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई। कहि निज भाग्य बिभव बहुताई।।

  3323. RCM 1.321.3
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    पूजे भूपति सकल बराती। समधि सम सादर सब भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    पूजे भूपति सकल बराती। समधि सम सादर सब भाँती।।

  3324. RCM 1.321.4
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    आसन उचित दिए सब काहू। कहौं काह मूख एक उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    आसन उचित दिए सब काहू। कहौं काह मूख एक उछाहू।।

  3325. RCM 1.321.5
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    सकल बरात जनक सनमानी। दान मान बिनती बर बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल बरात जनक सनमानी। दान मान बिनती बर बानी।।

  3326. RCM 1.321.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिधि हरि हरु दिसिपति दिनराऊ। जे जानहिं रघुबीर प्रभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    बिधि हरि हरु दिसिपति दिनराऊ। जे जानहिं रघुबीर प्रभाऊ।।

  3327. RCM 1.321.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।।

    अर्थ (Hindi)

    कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।।

  3328. RCM 1.321.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें।।

    अर्थ (Hindi)

    पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें।।

  3329. RCM 1.322.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।।

    अर्थ (Hindi)

    समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।।

  3330. RCM 1.322.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।।

  3331. RCM 1.322.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रानी सुनि उपरोहित बानी। प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रानी सुनि उपरोहित बानी। प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी।।

  3332. RCM 1.322.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिप्र बधू कुलबृद्ध बोलाईं। करि कुल रीति सुमंगल गाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्र बधू कुलबृद्ध बोलाईं। करि कुल रीति सुमंगल गाईं।।

  3333. RCM 1.322.5
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    नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।।

    अर्थ (Hindi)

    नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।।

  3334. RCM 1.322.6
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    तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।।

  3335. RCM 1.322.7
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    बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।।

  3336. RCM 1.322.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।

  3337. RCM 1.323.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिय सुंदरता बरनि न जाई। लघु मति बहुत मनोहरताई।।

    अर्थ (Hindi)

    सिय सुंदरता बरनि न जाई। लघु मति बहुत मनोहरताई।।

  3338. RCM 1.323.2
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    आवत दीखि बरातिन्ह सीता।।रूप रासि सब भाँति पुनीता।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत दीखि बरातिन्ह सीता।।रूप रासि सब भाँति पुनीता।।

  3339. RCM 1.323.3
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    सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।।

    अर्थ (Hindi)

    सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।।

  3340. RCM 1.323.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।।

  3341. RCM 1.323.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुर प्रनामु करि बरसहिं फूला। मुनि असीस धुनि मंगल मूला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर प्रनामु करि बरसहिं फूला। मुनि असीस धुनि मंगल मूला।।

  3342. RCM 1.323.6
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    गान निसान कोलाहलु भारी। प्रेम प्रमोद मगन नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    गान निसान कोलाहलु भारी। प्रेम प्रमोद मगन नर नारी।।

  3343. RCM 1.323.7
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    एहि बिधि सीय मंडपहिं आई। प्रमुदित सांति पढ़हिं मुनिराई।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सीय मंडपहिं आई। प्रमुदित सांति पढ़हिं मुनिराई।।

  3344. RCM 1.323.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि अवसर कर बिधि ब्यवहारू। दुहुँ कुलगुर सब कीन्ह अचारू।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अवसर कर बिधि ब्यवहारू। दुहुँ कुलगुर सब कीन्ह अचारू।।

  3345. RCM 1.324.1
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    जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।।

  3346. RCM 1.324.2
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    सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।।

  3347. RCM 1.324.3
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    समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाई। सुनत सुआसिनि सादर ल्याई।।

    अर्थ (Hindi)

    समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाई। सुनत सुआसिनि सादर ल्याई।।

  3348. RCM 1.324.4
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    जनक बाम दिसि सोह सुनयना। हिमगिरि संग बनि जनु मयना।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक बाम दिसि सोह सुनयना। हिमगिरि संग बनि जनु मयना।।

  3349. RCM 1.324.5
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    कनक कलस मनि कोपर रूरे। सुचि सुंगध मंगल जल पूरे।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक कलस मनि कोपर रूरे। सुचि सुंगध मंगल जल पूरे।।

  3350. RCM 1.324.6
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    निज कर मुदित रायँ अरु रानी। धरे राम के आगें आनी।।

    अर्थ (Hindi)

    निज कर मुदित रायँ अरु रानी। धरे राम के आगें आनी।।

  3351. RCM 1.324.7
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    पढ़हिं बेद मुनि मंगल बानी। गगन सुमन झरि अवसरु जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    पढ़हिं बेद मुनि मंगल बानी। गगन सुमन झरि अवसरु जानी।।

  3352. RCM 1.324.8
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    बरु बिलोकि दंपति अनुरागे। पाय पुनीत पखारन लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    बरु बिलोकि दंपति अनुरागे। पाय पुनीत पखारन लागे।।

  3353. RCM 1.325.1
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    कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं।।नयन लाभु सब सादर लेहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं।।नयन लाभु सब सादर लेहीं।।

  3354. RCM 1.325.2
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    जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी।।

  3355. RCM 1.325.3
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    राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं। जगमगात मनि खंभन माहीं ।

    अर्थ (Hindi)

    राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं। जगमगात मनि खंभन माहीं ।

  3356. RCM 1.325.4
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    मनहुँ मदन रति धरि बहु रूपा। देखत राम बिआहु अनूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    मनहुँ मदन रति धरि बहु रूपा। देखत राम बिआहु अनूपा।।

  3357. RCM 1.325.5
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    दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।।

  3358. RCM 1.325.6
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    भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।।

    अर्थ (Hindi)

    भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।।

  3359. RCM 1.325.7
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    प्रमुदित मुनिन्ह भावँरी फेरी। नेगसहित सब रीति निबेरीं।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रमुदित मुनिन्ह भावँरी फेरी। नेगसहित सब रीति निबेरीं।।

  3360. RCM 1.325.8
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    राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं।।

  3361. RCM 1.325.9
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    अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।।

    अर्थ (Hindi)

    अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।।

  3362. RCM 1.325.10
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    बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।

  3363. RCM 1.326.1
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    जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी।।

  3364. RCM 1.326.2
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    कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी।।

  3365. RCM 1.326.3
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    कंबल बसन बिचित्र पटोरे। भाँति भाँति बहु मोल न थोरे।।

    अर्थ (Hindi)

    कंबल बसन बिचित्र पटोरे। भाँति भाँति बहु मोल न थोरे।।

  3366. RCM 1.326.4
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    गज रथ तुरग दास अरु दासी। धेनु अलंकृत कामदुहा सी।।

    अर्थ (Hindi)

    गज रथ तुरग दास अरु दासी। धेनु अलंकृत कामदुहा सी।।

  3367. RCM 1.326.5
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    बस्तु अनेक करिअ किमि लेखा। कहि न जाइ जानहिं जिन्ह देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    बस्तु अनेक करिअ किमि लेखा। कहि न जाइ जानहिं जिन्ह देखा।।

  3368. RCM 1.326.6
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    लोकपाल अवलोकि सिहाने। लीन्ह अवधपति सबु सुखु माने।।

    अर्थ (Hindi)

    लोकपाल अवलोकि सिहाने। लीन्ह अवधपति सबु सुखु माने।।

  3369. RCM 1.326.7
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    दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।।

  3370. RCM 1.326.8
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    तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।

  3371. RCM 1.327.1
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    स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन। सोभा कोटि मनोज लजावन।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन। सोभा कोटि मनोज लजावन।।

  3372. RCM 1.327.2
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    जावक जुत पद कमल सुहाए। मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जावक जुत पद कमल सुहाए। मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए।।

  3373. RCM 1.327.3
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    पीत पुनीत मनोहर धोती। हरति बाल रबि दामिनि जोती।।

    अर्थ (Hindi)

    पीत पुनीत मनोहर धोती। हरति बाल रबि दामिनि जोती।।

  3374. RCM 1.327.4
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    कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर।।

    अर्थ (Hindi)

    कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर।।

  3375. RCM 1.327.5
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    पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।।

    अर्थ (Hindi)

    पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।।

  3376. RCM 1.327.6
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    सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन राजे।।

    अर्थ (Hindi)

    सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन राजे।।

  3377. RCM 1.327.7
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    पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती।।

    अर्थ (Hindi)

    पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती।।

  3378. RCM 1.327.8
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    नयन कमल कल कुंडल काना। बदनु सकल सौंदर्ज निधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नयन कमल कल कुंडल काना। बदनु सकल सौंदर्ज निधाना।।

  3379. RCM 1.327.9
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    सुंदर भृकुटि मनोहर नासा। भाल तिलकु रुचिरता निवासा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर भृकुटि मनोहर नासा। भाल तिलकु रुचिरता निवासा।।

  3380. RCM 1.327.10
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    सोहत मौरु मनोहर माथे। मंगलमय मुकुता मनि गाथे।।

    अर्थ (Hindi)

    सोहत मौरु मनोहर माथे। मंगलमय मुकुता मनि गाथे।।

  3381. RCM 1.328.1
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    पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।।

  3382. RCM 1.328.2
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    परत पाँवड़े बसन अनूपा। सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    परत पाँवड़े बसन अनूपा। सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा।।

  3383. RCM 1.328.3
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    सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।।

  3384. RCM 1.328.4
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    धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना।।

    अर्थ (Hindi)

    धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना।।

  3385. RCM 1.328.5
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    बहुरि राम पद पंकज धोए। जे हर हृदय कमल महुँ गोए।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि राम पद पंकज धोए। जे हर हृदय कमल महुँ गोए।।

  3386. RCM 1.328.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तीनिउ भाई राम सम जानी। धोए चरन जनक निज पानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तीनिउ भाई राम सम जानी। धोए चरन जनक निज पानी।।

  3387. RCM 1.328.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।।

  3388. RCM 1.328.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे।।

  3389. RCM 1.328.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सूपोदन सुरभी सरपि सुंदर स्वादु पुनीत।

    अर्थ (Hindi)

    सूपोदन सुरभी सरपि सुंदर स्वादु पुनीत।

  3390. RCM 1.328.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    छन महुँ सब कें परुसि गे चतुर सुआर बिनीत।।328।।

    अर्थ (Hindi)

    छन महुँ सब कें परुसि गे चतुर सुआर बिनीत।।328।।

  3391. RCM 1.329.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पंच कवल करि जेवन लअगे। गारि गान सुनि अति अनुरागे।।

    अर्थ (Hindi)

    पंच कवल करि जेवन लअगे। गारि गान सुनि अति अनुरागे।।

  3392. RCM 1.329.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भाँति अनेक परे पकवाने। सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    भाँति अनेक परे पकवाने। सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने।।

  3393. RCM 1.329.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परुसन लगे सुआर सुजाना। बिंजन बिबिध नाम को जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    परुसन लगे सुआर सुजाना। बिंजन बिबिध नाम को जाना।।

  3394. RCM 1.329.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चारि भाँति भोजन बिधि गाई। एक एक बिधि बरनि न जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चारि भाँति भोजन बिधि गाई। एक एक बिधि बरनि न जाई।।

  3395. RCM 1.329.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    छरस रुचिर बिंजन बहु जाती। एक एक रस अगनित भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    छरस रुचिर बिंजन बहु जाती। एक एक रस अगनित भाँती।।

  3396. RCM 1.329.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जेवँत देहिं मधुर धुनि गारी। लै लै नाम पुरुष अरु नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जेवँत देहिं मधुर धुनि गारी। लै लै नाम पुरुष अरु नारी।।

  3397. RCM 1.329.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समय सुहावनि गारि बिराजा। हँसत राउ सुनि सहित समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    समय सुहावनि गारि बिराजा। हँसत राउ सुनि सहित समाजा।।

  3398. RCM 1.329.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि सबहीं भौजनु कीन्हा। आदर सहित आचमनु दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सबहीं भौजनु कीन्हा। आदर सहित आचमनु दीन्हा।।

  3399. RCM 1.329.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।

    अर्थ (Hindi)

    देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।

  3400. RCM 1.329.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।

    अर्थ (Hindi)

    जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।

  3401. RCM 1.330.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।

  3402. RCM 1.330.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुन गन गावन लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुन गन गावन लागे।।

  3403. RCM 1.330.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता।।

  3404. RCM 1.330.4
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    प्रातक्रिया करि गे गुरु पाहीं। महाप्रमोदु प्रेमु मन माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रातक्रिया करि गे गुरु पाहीं। महाप्रमोदु प्रेमु मन माहीं।।

  3405. RCM 1.330.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करि प्रनाम पूजा कर जोरी। बोले गिरा अमिअँ जनु बोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    करि प्रनाम पूजा कर जोरी। बोले गिरा अमिअँ जनु बोरी।।

  3406. RCM 1.330.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुम्हरी कृपाँ सुनहु मुनिराजा। भयउँ आजु मैं पूरनकाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हरी कृपाँ सुनहु मुनिराजा। भयउँ आजु मैं पूरनकाजा।।

  3407. RCM 1.330.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब सब बिप्र बोलाइ गोसाईं। देहु धेनु सब भाँति बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अब सब बिप्र बोलाइ गोसाईं। देहु धेनु सब भाँति बनाई।।

  3408. RCM 1.330.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि गुर करि महिपाल बड़ाई। पुनि पठए मुनि बृंद बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि गुर करि महिपाल बड़ाई। पुनि पठए मुनि बृंद बोलाई।।

  3409. RCM 1.330.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बामदेउ अरु देवरिषि बालमीकि जाबालि।

    अर्थ (Hindi)

    बामदेउ अरु देवरिषि बालमीकि जाबालि।

  3410. RCM 1.330.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आए मुनिबर निकर तब कौसिकादि तपसालि।।330।।

    अर्थ (Hindi)

    आए मुनिबर निकर तब कौसिकादि तपसालि।।330।।

  3411. RCM 1.331.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे। पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे। पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे।।

  3412. RCM 1.331.2
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    चारि लच्छ बर धेनु मगाई। कामसुरभि सम सील सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चारि लच्छ बर धेनु मगाई। कामसुरभि सम सील सुहाई।।

  3413. RCM 1.331.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सब बिधि सकल अलंकृत कीन्हीं। मुदित महिप महिदेवन्ह दीन्हीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सब बिधि सकल अलंकृत कीन्हीं। मुदित महिप महिदेवन्ह दीन्हीं।।

  3414. RCM 1.331.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करत बिनय बहु बिधि नरनाहू। लहेउँ आजु जग जीवन लाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    करत बिनय बहु बिधि नरनाहू। लहेउँ आजु जग जीवन लाहू।।

  3415. RCM 1.331.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।।

  3416. RCM 1.331.6
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    कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन।।

  3417. RCM 1.331.7
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    चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।।

  3418. RCM 1.331.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि राम बिआह उछाहू। सकइ न बरनि सहस मुख जाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि राम बिआह उछाहू। सकइ न बरनि सहस मुख जाहू।।

  3419. RCM 1.331.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ।

  3420. RCM 1.331.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ।।331।।

    अर्थ (Hindi)

    यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ।।331।।

  3421. RCM 1.332.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती।।

  3422. RCM 1.332.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दिन उठि बिदा अवधपति मागा। राखहिं जनकु सहित अनुरागा।।

    अर्थ (Hindi)

    दिन उठि बिदा अवधपति मागा। राखहिं जनकु सहित अनुरागा।।

  3423. RCM 1.332.3
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    नित नूतन आदरु अधिकाई। दिन प्रति सहस भाँति पहुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नूतन आदरु अधिकाई। दिन प्रति सहस भाँति पहुनाई।।

  3424. RCM 1.332.4
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    नित नव नगर अनंद उछाहू। दसरथ गवनु सोहाइ न काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नव नगर अनंद उछाहू। दसरथ गवनु सोहाइ न काहू।।

  3425. RCM 1.332.5
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    बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती।।

  3426. RCM 1.332.6
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    कौसिक सतानंद तब जाई। कहा बिदेह नृपहि समुझाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसिक सतानंद तब जाई। कहा बिदेह नृपहि समुझाई।।

  3427. RCM 1.332.7
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    अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू।।

  3428. RCM 1.332.8
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    भलेहिं नाथ कहि सचिव बोलाए। कहि जय जीव सीस तिन्ह नाए।।

    अर्थ (Hindi)

    भलेहिं नाथ कहि सचिव बोलाए। कहि जय जीव सीस तिन्ह नाए।।

  3429. RCM 1.332.9
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    अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ।

    अर्थ (Hindi)

    अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ।

  3430. RCM 1.332.10
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    भए प्रेमबस सचिव सुनि बिप्र सभासद राउ।।332।।

    अर्थ (Hindi)

    भए प्रेमबस सचिव सुनि बिप्र सभासद राउ।।332।।

  3431. RCM 1.333.1
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    पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।।

  3432. RCM 1.333.2
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    सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने।।

  3433. RCM 1.333.3
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    जहँ जहँ आवत बसे बराती। तहँ तहँ सिद्ध चला बहु भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ जहँ आवत बसे बराती। तहँ तहँ सिद्ध चला बहु भाँती।।

  3434. RCM 1.333.4
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    बिबिध भाँति मेवा पकवाना। भोजन साजु न जाइ बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध भाँति मेवा पकवाना। भोजन साजु न जाइ बखाना।।

  3435. RCM 1.333.5
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    भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।।

  3436. RCM 1.333.6
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    तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा।।

  3437. RCM 1.333.7
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    मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।।

    अर्थ (Hindi)

    मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।।

  3438. RCM 1.333.8
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    कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना।।

  3439. RCM 1.333.9
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    दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि।

    अर्थ (Hindi)

    दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि।

  3440. RCM 1.333.10
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    जो अवलोकत लोकपति लोक संपदा थोरि।।333।।

    अर्थ (Hindi)

    जो अवलोकत लोकपति लोक संपदा थोरि।।333।।

  3441. RCM 1.334.1
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    सबु समाजु एहि भाँति बनाई। जनक अवधपुर दीन्ह पठाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सबु समाजु एहि भाँति बनाई। जनक अवधपुर दीन्ह पठाई।।

  3442. RCM 1.334.2
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    चलिहि बरात सुनत सब रानीं। बिकल मीनगन जनु लघु पानीं।।

    अर्थ (Hindi)

    चलिहि बरात सुनत सब रानीं। बिकल मीनगन जनु लघु पानीं।।

  3443. RCM 1.334.3
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    पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।

  3444. RCM 1.334.4
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    होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी।।

    अर्थ (Hindi)

    होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी।।

  3445. RCM 1.334.5
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    सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।

  3446. RCM 1.334.6
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    अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी।।

  3447. RCM 1.334.7
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    सादर सकल कुअँरि समुझाई। रानिन्ह बार बार उर लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर सकल कुअँरि समुझाई। रानिन्ह बार बार उर लाई।।

  3448. RCM 1.334.8
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    बहुरि बहुरि भेटहिं महतारीं। कहहिं बिरंचि रचीं कत नारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बहुरि भेटहिं महतारीं। कहहिं बिरंचि रचीं कत नारीं।।

  3449. RCM 1.334.9
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    तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।

  3450. RCM 1.334.10
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    चले जनक मंदिर मुदित बिदा करावन हेतु।।334।।

    अर्थ (Hindi)

    चले जनक मंदिर मुदित बिदा करावन हेतु।।334।।

  3451. RCM 1.335.1
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    चारिअ भाइ सुभायँ सुहाए। नगर नारि नर देखन धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    चारिअ भाइ सुभायँ सुहाए। नगर नारि नर देखन धाए।।

  3452. RCM 1.335.2
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    कोउ कह चलन चहत हहिं आजू। कीन्ह बिदेह बिदा कर साजू।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ कह चलन चहत हहिं आजू। कीन्ह बिदेह बिदा कर साजू।।

  3453. RCM 1.335.3
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    लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।।

  3454. RCM 1.335.4
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    को जानै केहि सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी।।

    अर्थ (Hindi)

    को जानै केहि सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी।।

  3455. RCM 1.335.5
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    मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा। सुरतरु लहै जनम कर भूखा।।

    अर्थ (Hindi)

    मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा। सुरतरु लहै जनम कर भूखा।।

  3456. RCM 1.335.6
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    पाव नारकी हरिपदु जैसें। इन्ह कर दरसनु हम कहँ तैसे।।

    अर्थ (Hindi)

    पाव नारकी हरिपदु जैसें। इन्ह कर दरसनु हम कहँ तैसे।।

  3457. RCM 1.335.7
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    निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।।

    अर्थ (Hindi)

    निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।।

  3458. RCM 1.335.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि सबहि नयन फलु देता। गए कुअँर सब राज निकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सबहि नयन फलु देता। गए कुअँर सब राज निकेता।।

  3459. RCM 1.335.9
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    रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।

    अर्थ (Hindi)

    रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।

  3460. RCM 1.335.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करहि निछावरि आरती महा मुदित मन सासु।।335।।

    अर्थ (Hindi)

    करहि निछावरि आरती महा मुदित मन सासु।।335।।

  3461. RCM 1.336.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।।

  3462. RCM 1.336.2
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    रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई।।

  3463. RCM 1.336.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए। छरस असन अति हेतु जेवाँए।।

    अर्थ (Hindi)

    भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए। छरस असन अति हेतु जेवाँए।।

  3464. RCM 1.336.4
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    बोले रामु सुअवसरु जानी। सील सनेह सकुचमय बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले रामु सुअवसरु जानी। सील सनेह सकुचमय बानी।।

  3465. RCM 1.336.5
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    राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।।

  3466. RCM 1.336.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मातु मुदित मन आयसु देहू। बालक जानि करब नित नेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    मातु मुदित मन आयसु देहू। बालक जानि करब नित नेहू।।

  3467. RCM 1.336.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।।

  3468. RCM 1.336.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही। पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही। पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही।।

  3469. RCM 1.337.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कहि रही चरन गहि रानी। प्रेम पंक जनु गिरा समानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि रही चरन गहि रानी। प्रेम पंक जनु गिरा समानी।।

  3470. RCM 1.337.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि सनेहसानी बर बानी। बहुबिधि राम सासु सनमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सनेहसानी बर बानी। बहुबिधि राम सासु सनमानी।।

  3471. RCM 1.337.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी।।

  3472. RCM 1.337.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पाइ असीस बहुरि सिरु नाई। भाइन्ह सहित चले रघुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    पाइ असीस बहुरि सिरु नाई। भाइन्ह सहित चले रघुराई।।

  3473. RCM 1.337.5
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    मंजु मधुर मूरति उर आनी। भई सनेह सिथिल सब रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मंजु मधुर मूरति उर आनी। भई सनेह सिथिल सब रानी।।

  3474. RCM 1.337.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि धीरजु धरि कुअँरि हँकारी। बार बार भेटहिं महतारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि धीरजु धरि कुअँरि हँकारी। बार बार भेटहिं महतारीं।।

  3475. RCM 1.337.7
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    पहुँचावहिं फिरि मिलहिं बहोरी। बढ़ी परस्पर प्रीति न थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    पहुँचावहिं फिरि मिलहिं बहोरी। बढ़ी परस्पर प्रीति न थोरी।।

  3476. RCM 1.337.8
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    पुनि पुनि मिलत सखिन्ह बिलगाई। बाल बच्छ जिमि धेनु लवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि मिलत सखिन्ह बिलगाई। बाल बच्छ जिमि धेनु लवाई।।

  3477. RCM 1.337.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रेमबिबस नर नारि सब सखिन्ह सहित रनिवासु।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेमबिबस नर नारि सब सखिन्ह सहित रनिवासु।

  3478. RCM 1.337.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मानहुँ कीन्ह बिदेहपुर करुनाँ बिरहँ निवासु।।337।।

    अर्थ (Hindi)

    मानहुँ कीन्ह बिदेहपुर करुनाँ बिरहँ निवासु।।337।।

  3479. RCM 1.338.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुक सारिका जानकी ज्याए। कनक पिंजरन्हि राखि पढ़ाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सुक सारिका जानकी ज्याए। कनक पिंजरन्हि राखि पढ़ाए।।

  3480. RCM 1.338.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ब्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही। सुनि धीरजु परिहरइ न केही।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही। सुनि धीरजु परिहरइ न केही।।

  3481. RCM 1.338.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भए बिकल खग मृग एहि भाँति। मनुज दसा कैसें कहि जाती।।

    अर्थ (Hindi)

    भए बिकल खग मृग एहि भाँति। मनुज दसा कैसें कहि जाती।।

  3482. RCM 1.338.4
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    बंधु समेत जनकु तब आए। प्रेम उमगि लोचन जल छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु समेत जनकु तब आए। प्रेम उमगि लोचन जल छाए।।

  3483. RCM 1.338.5
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    सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।।

  3484. RCM 1.338.6
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    लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।।

    अर्थ (Hindi)

    लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।।

  3485. RCM 1.338.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।।

  3486. RCM 1.338.8
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    बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।

  3487. RCM 1.338.9
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    प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस।

  3488. RCM 1.338.10
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    कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह सुमिरे सिद्धि गनेस।।338।।

    अर्थ (Hindi)

    कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह सुमिरे सिद्धि गनेस।।338।।

  3489. RCM 1.339.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।

  3490. RCM 1.339.2
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    दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे।।

    अर्थ (Hindi)

    दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे।।

  3491. RCM 1.339.3
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    सीय चलत ब्याकुल पुरबासी। होहिं सगुन सुभ मंगल रासी।।

    अर्थ (Hindi)

    सीय चलत ब्याकुल पुरबासी। होहिं सगुन सुभ मंगल रासी।।

  3492. RCM 1.339.4
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    भूसुर सचिव समेत समाजा। संग चले पहुँचावन राजा।।

    अर्थ (Hindi)

    भूसुर सचिव समेत समाजा। संग चले पहुँचावन राजा।।

  3493. RCM 1.339.5
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    समय बिलोकि बाजने बाजे। रथ गज बाजि बरातिन्ह साजे।।

    अर्थ (Hindi)

    समय बिलोकि बाजने बाजे। रथ गज बाजि बरातिन्ह साजे।।

  3494. RCM 1.339.6
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    दसरथ बिप्र बोलि सब लीन्हे। दान मान परिपूरन कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    दसरथ बिप्र बोलि सब लीन्हे। दान मान परिपूरन कीन्हे।।

  3495. RCM 1.339.7
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    चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।

  3496. RCM 1.339.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना।।

  3497. RCM 1.339.9
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    सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।

    अर्थ (Hindi)

    सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।

  3498. RCM 1.339.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चले अवधपति अवधपुर मुदित बजाइ निसान।।339।।

    अर्थ (Hindi)

    चले अवधपति अवधपुर मुदित बजाइ निसान।।339।।

  3499. RCM 1.340.1
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    नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।

  3500. RCM 1.340.2
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    भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे।।

  3501. RCM 1.340.3
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    बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।

  3502. RCM 1.340.4
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    बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं। जनकु प्रेमबस फिरै न चहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं। जनकु प्रेमबस फिरै न चहहीं।।

  3503. RCM 1.340.5
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    पुनि कह भूपति बचन सुहाए। फिरिअ महीस दूरि बड़ि आए।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि कह भूपति बचन सुहाए। फिरिअ महीस दूरि बड़ि आए।।

  3504. RCM 1.340.6
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    राउ बहोरि उतरि भए ठाढ़े। प्रेम प्रबाह बिलोचन बाढ़े।।

    अर्थ (Hindi)

    राउ बहोरि उतरि भए ठाढ़े। प्रेम प्रबाह बिलोचन बाढ़े।।

  3505. RCM 1.340.7
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    तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।

  3506. RCM 1.340.8
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    करौ कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    करौ कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई।।

  3507. RCM 1.340.9
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    कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।

    अर्थ (Hindi)

    कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।

  3508. RCM 1.340.10
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    मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति।।340।।

    अर्थ (Hindi)

    मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति।।340।।

  3509. RCM 1.341.1
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    मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा। आसिरबादु सबहि सन पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा। आसिरबादु सबहि सन पावा।।

  3510. RCM 1.341.2
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    सादर पुनि भेंटे जामाता। रूप सील गुन निधि सब भ्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर पुनि भेंटे जामाता। रूप सील गुन निधि सब भ्राता।।

  3511. RCM 1.341.3
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    जोरि पंकरुह पानि सुहाए। बोले बचन प्रेम जनु जाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जोरि पंकरुह पानि सुहाए। बोले बचन प्रेम जनु जाए।।

  3512. RCM 1.341.4
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    राम करौ केहि भाँति प्रसंसा। मुनि महेस मन मानस हंसा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम करौ केहि भाँति प्रसंसा। मुनि महेस मन मानस हंसा।।

  3513. RCM 1.341.5
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    करहिं जोग जोगी जेहि लागी। कोहु मोहु ममता मदु त्यागी।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं जोग जोगी जेहि लागी। कोहु मोहु ममता मदु त्यागी।।

  3514. RCM 1.341.6
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    ब्यापकु ब्रह्मु अलखु अबिनासी। चिदानंदु निरगुन गुनरासी।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यापकु ब्रह्मु अलखु अबिनासी। चिदानंदु निरगुन गुनरासी।।

  3515. RCM 1.341.7
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    मन समेत जेहि जान न बानी। तरकि न सकहिं सकल अनुमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    मन समेत जेहि जान न बानी। तरकि न सकहिं सकल अनुमानी।।

  3516. RCM 1.341.8
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    महिमा निगमु नेति कहि कहई। जो तिहुँ काल एकरस रहई।।

    अर्थ (Hindi)

    महिमा निगमु नेति कहि कहई। जो तिहुँ काल एकरस रहई।।

  3517. RCM 1.341.9
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    नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल।

    अर्थ (Hindi)

    नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल।

  3518. RCM 1.341.10
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    सबइ लाभु जग जीव कहँ भएँ ईसु अनुकुल।।341।।

    अर्थ (Hindi)

    सबइ लाभु जग जीव कहँ भएँ ईसु अनुकुल।।341।।

  3519. RCM 1.342.1
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    सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।।

  3520. RCM 1.342.2
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    होहिं सहस दस सारद सेषा। करहिं कलप कोटिक भरि लेखा।।

    अर्थ (Hindi)

    होहिं सहस दस सारद सेषा। करहिं कलप कोटिक भरि लेखा।।

  3521. RCM 1.342.3
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    मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।।

  3522. RCM 1.342.4
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    मै कछु कहउँ एक बल मोरें। तुम्ह रीझहु सनेह सुठि थोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    मै कछु कहउँ एक बल मोरें। तुम्ह रीझहु सनेह सुठि थोरें।।

  3523. RCM 1.342.5
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    बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।।

  3524. RCM 1.342.6
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    सुनि बर बचन प्रेम जनु पोषे। पूरनकाम रामु परितोषे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि बर बचन प्रेम जनु पोषे। पूरनकाम रामु परितोषे।।

  3525. RCM 1.342.7
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    करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।।

  3526. RCM 1.342.8
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    बिनती बहुरि भरत सन कीन्ही। मिलि सप्रेमु पुनि आसिष दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनती बहुरि भरत सन कीन्ही। मिलि सप्रेमु पुनि आसिष दीन्ही।।

  3527. RCM 1.342.9
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    मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस।

    अर्थ (Hindi)

    मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस।

  3528. RCM 1.342.10
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    भए परस्पर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस।।342।।

    अर्थ (Hindi)

    भए परस्पर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस।।342।।

  3529. RCM 1.343.1
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    बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई।।

  3530. RCM 1.343.2
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    जनक गहे कौसिक पद जाई। चरन रेनु सिर नयनन्ह लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक गहे कौसिक पद जाई। चरन रेनु सिर नयनन्ह लाई।।

  3531. RCM 1.343.3
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    सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें।।

  3532. RCM 1.343.4
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    जो सुखु सुजसु लोकपति चहहीं। करत मनोरथ सकुचत अहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जो सुखु सुजसु लोकपति चहहीं। करत मनोरथ सकुचत अहहीं।।

  3533. RCM 1.343.5
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    सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी।।

    अर्थ (Hindi)

    सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी।।

  3534. RCM 1.343.6
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    कीन्हि बिनय पुनि पुनि सिरु नाई। फिरे महीसु आसिषा पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्हि बिनय पुनि पुनि सिरु नाई। फिरे महीसु आसिषा पाई।।

  3535. RCM 1.343.7
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    चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई।।

  3536. RCM 1.343.8
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    रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी।।

  3537. RCM 1.343.9
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    बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।

    अर्थ (Hindi)

    बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।

  3538. RCM 1.343.10
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    अवध समीप पुनीत दिन पहुँची आइ जनेत।।343।।

    अर्थ (Hindi)

    अवध समीप पुनीत दिन पहुँची आइ जनेत।।343।।

  3539. RCM 1.344.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हने निसान पनव बर बाजे। भेरि संख धुनि हय गय गाजे।।

    अर्थ (Hindi)

    हने निसान पनव बर बाजे। भेरि संख धुनि हय गय गाजे।।

  3540. RCM 1.344.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    झाँझि बिरव डिंडमीं सुहाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    झाँझि बिरव डिंडमीं सुहाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

  3541. RCM 1.344.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता।।

  3542. RCM 1.344.4
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    निज निज सुंदर सदन सँवारे। हाट बाट चौहट पुर द्वारे।।

    अर्थ (Hindi)

    निज निज सुंदर सदन सँवारे। हाट बाट चौहट पुर द्वारे।।

  3543. RCM 1.344.5
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    गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई। जहँ तहँ चौकें चारु पुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई। जहँ तहँ चौकें चारु पुराई।।

  3544. RCM 1.344.6
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    बना बजारु न जाइ बखाना। तोरन केतु पताक बिताना।।

    अर्थ (Hindi)

    बना बजारु न जाइ बखाना। तोरन केतु पताक बिताना।।

  3545. RCM 1.344.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सफल पूगफल कदलि रसाला। रोपे बकुल कदंब तमाला।।

    अर्थ (Hindi)

    सफल पूगफल कदलि रसाला। रोपे बकुल कदंब तमाला।।

  3546. RCM 1.344.8
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    लगे सुभग तरु परसत धरनी। मनिमय आलबाल कल करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    लगे सुभग तरु परसत धरनी। मनिमय आलबाल कल करनी।।

  3547. RCM 1.344.9
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    बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह रचे सँवारि।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह रचे सँवारि।

  3548. RCM 1.344.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुर ब्रह्मादि सिहाहिं सब रघुबर पुरी निहारि।।344।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर ब्रह्मादि सिहाहिं सब रघुबर पुरी निहारि।।344।।

  3549. RCM 1.345.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूप भवन तेहि अवसर सोहा। रचना देखि मदन मनु मोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप भवन तेहि अवसर सोहा। रचना देखि मदन मनु मोहा।।

  3550. RCM 1.345.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंगल सगुन मनोहरताई। रिधि सिधि सुख संपदा सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल सगुन मनोहरताई। रिधि सिधि सुख संपदा सुहाई।।

  3551. RCM 1.345.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनु उछाह सब सहज सुहाए। तनु धरि धरि दसरथ दसरथ गृहँ छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जनु उछाह सब सहज सुहाए। तनु धरि धरि दसरथ दसरथ गृहँ छाए।।

  3552. RCM 1.345.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखन हेतु राम बैदेही। कहहु लालसा होहि न केही।।

    अर्थ (Hindi)

    देखन हेतु राम बैदेही। कहहु लालसा होहि न केही।।

  3553. RCM 1.345.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि। निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि।।

    अर्थ (Hindi)

    जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि। निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि।।

  3554. RCM 1.345.6
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    सकल सुमंगल सजें आरती। गावहिं जनु बहु बेष भारती।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल सुमंगल सजें आरती। गावहिं जनु बहु बेष भारती।।

  3555. RCM 1.345.7
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    भूपति भवन कोलाहलु होई। जाइ न बरनि समउ सुखु सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    भूपति भवन कोलाहलु होई। जाइ न बरनि समउ सुखु सोई।।

  3556. RCM 1.345.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कौसल्यादि राम महतारीं। प्रेम बिबस तन दसा बिसारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कौसल्यादि राम महतारीं। प्रेम बिबस तन दसा बिसारीं।।

  3557. RCM 1.345.9
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    दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस पुरारी।

    अर्थ (Hindi)

    दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस पुरारी।

  3558. RCM 1.345.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रमुदित परम दरिद्र जनु पाइ पदारथ चारि।।345।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रमुदित परम दरिद्र जनु पाइ पदारथ चारि।।345।।

  3559. RCM 1.346.1
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    मोद प्रमोद बिबस सब माता। चलहिं न चरन सिथिल भए गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    मोद प्रमोद बिबस सब माता। चलहिं न चरन सिथिल भए गाता।।

  3560. RCM 1.346.2
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    राम दरस हित अति अनुरागीं। परिछनि साजु सजन सब लागीं।।

    अर्थ (Hindi)

    राम दरस हित अति अनुरागीं। परिछनि साजु सजन सब लागीं।।

  3561. RCM 1.346.3
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    बिबिध बिधान बाजने बाजे। मंगल मुदित सुमित्राँ साजे।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध बिधान बाजने बाजे। मंगल मुदित सुमित्राँ साजे।।

  3562. RCM 1.346.4
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    हरद दूब दधि पल्लव फूला। पान पूगफल मंगल मूला।।

    अर्थ (Hindi)

    हरद दूब दधि पल्लव फूला। पान पूगफल मंगल मूला।।

  3563. RCM 1.346.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अच्छत अंकुर लोचन लाजा। मंजुल मंजरि तुलसि बिराजा।।

    अर्थ (Hindi)

    अच्छत अंकुर लोचन लाजा। मंजुल मंजरि तुलसि बिराजा।।

  3564. RCM 1.346.6
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    छुहे पुरट घट सहज सुहाए। मदन सकुन जनु नीड़ बनाए।।

    अर्थ (Hindi)

    छुहे पुरट घट सहज सुहाए। मदन सकुन जनु नीड़ बनाए।।

  3565. RCM 1.346.7
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    सगुन सुंगध न जाहिं बखानी। मंगल सकल सजहिं सब रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सगुन सुंगध न जाहिं बखानी। मंगल सकल सजहिं सब रानी।।

  3566. RCM 1.346.8
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    रचीं आरतीं बहुत बिधाना। मुदित करहिं कल मंगल गाना।।

    अर्थ (Hindi)

    रचीं आरतीं बहुत बिधाना। मुदित करहिं कल मंगल गाना।।

  3567. RCM 1.346.9
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    कनक थार भरि मंगलन्हि कमल करन्हि लिएँ मात।

    अर्थ (Hindi)

    कनक थार भरि मंगलन्हि कमल करन्हि लिएँ मात।

  3568. RCM 1.346.10
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    चलीं मुदित परिछनि करन पुलक पल्लवित गात।।346।।

    अर्थ (Hindi)

    चलीं मुदित परिछनि करन पुलक पल्लवित गात।।346।।

  3569. RCM 1.347.1
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    धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।।

  3570. RCM 1.347.2
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    सुरतरु सुमन माल सुर बरषहिं। मनहुँ बलाक अवलि मनु करषहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुरतरु सुमन माल सुर बरषहिं। मनहुँ बलाक अवलि मनु करषहिं।।

  3571. RCM 1.347.3
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    मंजुल मनिमय बंदनिवारे। मनहुँ पाकरिपु चाप सँवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    मंजुल मनिमय बंदनिवारे। मनहुँ पाकरिपु चाप सँवारे।।

  3572. RCM 1.347.4
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    प्रगटहिं दुरहिं अटन्ह पर भामिनि। चारु चपल जनु दमकहिं दामिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटहिं दुरहिं अटन्ह पर भामिनि। चारु चपल जनु दमकहिं दामिनि।।

  3573. RCM 1.347.5
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    दुंदुभि धुनि घन गरजनि घोरा। जाचक चातक दादुर मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    दुंदुभि धुनि घन गरजनि घोरा। जाचक चातक दादुर मोरा।।

  3574. RCM 1.347.6
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    सुर सुगन्ध सुचि बरषहिं बारी। सुखी सकल ससि पुर नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर सुगन्ध सुचि बरषहिं बारी। सुखी सकल ससि पुर नर नारी।।

  3575. RCM 1.347.7
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    समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।।

  3576. RCM 1.347.8
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    सुमिरि संभु गिरजा गनराजा। मुदित महीपति सहित समाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि संभु गिरजा गनराजा। मुदित महीपति सहित समाजा।।

  3577. RCM 1.347.9
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    होहिं सगुन बरषहिं सुमन सुर दुंदुभीं बजाइ।

    अर्थ (Hindi)

    होहिं सगुन बरषहिं सुमन सुर दुंदुभीं बजाइ।

  3578. RCM 1.347.10
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    बिबुध बधू नाचहिं मुदित मंजुल मंगल गाइ।।347।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबुध बधू नाचहिं मुदित मंजुल मंगल गाइ।।347।।

  3579. RCM 1.348.1
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    मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।

    अर्थ (Hindi)

    मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।

  3580. RCM 1.348.2
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    जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।।

  3581. RCM 1.348.3
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    बिपुल बाजने बाजन लागे। नभ सुर नगर लोग अनुरागे।।

    अर्थ (Hindi)

    बिपुल बाजने बाजन लागे। नभ सुर नगर लोग अनुरागे।।

  3582. RCM 1.348.4
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    बने बराती बरनि न जाहीं। महा मुदित मन सुख न समाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बने बराती बरनि न जाहीं। महा मुदित मन सुख न समाहीं।।

  3583. RCM 1.348.5
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    पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।

  3584. RCM 1.348.6
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    करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।।

  3585. RCM 1.348.7
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    आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।

  3586. RCM 1.348.8
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    सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।

  3587. RCM 1.348.9
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    एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।

  3588. RCM 1.348.10
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    मुदित मातु परुछनि करहिं बधुन्ह समेत कुमार।।348।।

    अर्थ (Hindi)

    मुदित मातु परुछनि करहिं बधुन्ह समेत कुमार।।348।।

  3589. RCM 1.349.1
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    करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।।

  3590. RCM 1.349.2
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    भूषन मनि पट नाना जाती।।करही निछावरि अगनित भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    भूषन मनि पट नाना जाती।।करही निछावरि अगनित भाँती।।

  3591. RCM 1.349.3
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    बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।।

  3592. RCM 1.349.4
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    पुनि पुनि सीय राम छबि देखी।।मुदित सफल जग जीवन लेखी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि सीय राम छबि देखी।।मुदित सफल जग जीवन लेखी।।

  3593. RCM 1.349.5
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    सखीं सीय मुख पुनि पुनि चाही। गान करहिं निज सुकृत सराही।।

    अर्थ (Hindi)

    सखीं सीय मुख पुनि पुनि चाही। गान करहिं निज सुकृत सराही।।

  3594. RCM 1.349.6
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    बरषहिं सुमन छनहिं छन देवा। नाचहिं गावहिं लावहिं सेवा।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषहिं सुमन छनहिं छन देवा। नाचहिं गावहिं लावहिं सेवा।।

  3595. RCM 1.349.7
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    देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।।

  3596. RCM 1.349.8
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    देत न बनहिं निपट लघु लागी। एकटक रहीं रूप अनुरागीं।।

    अर्थ (Hindi)

    देत न बनहिं निपट लघु लागी। एकटक रहीं रूप अनुरागीं।।

  3597. RCM 1.349.9
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    निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत।

    अर्थ (Hindi)

    निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत।

  3598. RCM 1.349.10
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    बधुन्ह सहित सुत परिछि सब चलीं लवाइ निकेत।।349।।

    अर्थ (Hindi)

    बधुन्ह सहित सुत परिछि सब चलीं लवाइ निकेत।।349।।

  3599. RCM 1.350.1
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    चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।

    अर्थ (Hindi)

    चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।

  3600. RCM 1.350.2
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    तिन्ह पर कुअँरि कुअँर बैठारे। सादर पाय पुनित पखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह पर कुअँरि कुअँर बैठारे। सादर पाय पुनित पखारे।।

  3601. RCM 1.350.3
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    धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।

    अर्थ (Hindi)

    धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।

  3602. RCM 1.350.4
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    बारहिं बार आरती करहीं। ब्यजन चारु चामर सिर ढरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बारहिं बार आरती करहीं। ब्यजन चारु चामर सिर ढरहीं।।

  3603. RCM 1.350.5
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    बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।

  3604. RCM 1.350.6
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    पावा परम तत्व जनु जोगीं। अमृत लहेउ जनु संतत रोगीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पावा परम तत्व जनु जोगीं। अमृत लहेउ जनु संतत रोगीं।।

  3605. RCM 1.350.7
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    जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।

  3606. RCM 1.350.8
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    मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई।।

  3607. RCM 1.350.9
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    एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।

  3608. RCM 1.350.10
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    भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु।।350(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु।।350(क)।।

  3609. RCM 1.350.11
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    लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।

    अर्थ (Hindi)

    लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।

  3610. RCM 1.350.12
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    मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसकाहिं।।350(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसकाहिं।।350(ख)।।

  3611. RCM 1.351.1
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    देव पितर पूजे बिधि नीकी। पूजीं सकल बासना जी की।।

    अर्थ (Hindi)

    देव पितर पूजे बिधि नीकी। पूजीं सकल बासना जी की।।

  3612. RCM 1.351.2
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    सबहिं बंदि मागहिं बरदाना। भाइन्ह सहित राम कल्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    सबहिं बंदि मागहिं बरदाना। भाइन्ह सहित राम कल्याना।।

  3613. RCM 1.351.3
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    अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंचल भरि लेंहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंचल भरि लेंहीं।।

  3614. RCM 1.351.4
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    भूपति बोलि बराती लीन्हे। जान बसन मनि भूषन दीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    भूपति बोलि बराती लीन्हे। जान बसन मनि भूषन दीन्हे।।

  3615. RCM 1.351.5
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    आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि।।

    अर्थ (Hindi)

    आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि।।

  3616. RCM 1.351.6
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    पुर नर नारि सकल पहिराए। घर घर बाजन लगे बधाए।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर नर नारि सकल पहिराए। घर घर बाजन लगे बधाए।।

  3617. RCM 1.351.7
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    जाचक जन जाचहि जोइ जोई। प्रमुदित राउ देहिं सोइ सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    जाचक जन जाचहि जोइ जोई। प्रमुदित राउ देहिं सोइ सोई।।

  3618. RCM 1.351.8
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    सेवक सकल बजनिआ नाना। पूरन किए दान सनमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सेवक सकल बजनिआ नाना। पूरन किए दान सनमाना।।

  3619. RCM 1.351.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।

    अर्थ (Hindi)

    देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।

  3620. RCM 1.351.10
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    तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ।।351।।

    अर्थ (Hindi)

    तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ।।351।।

  3621. RCM 1.352.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जो बसिष्ठ अनुसासन दीन्ही। लोक बेद बिधि सादर कीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    जो बसिष्ठ अनुसासन दीन्ही। लोक बेद बिधि सादर कीन्ही।।

  3622. RCM 1.352.2
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    भूसुर भीर देखि सब रानी। सादर उठीं भाग्य बड़ जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    भूसुर भीर देखि सब रानी। सादर उठीं भाग्य बड़ जानी।।

  3623. RCM 1.352.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पाय पखारि सकल अन्हवाए। पूजि भली बिधि भूप जेवाँए।।

    अर्थ (Hindi)

    पाय पखारि सकल अन्हवाए। पूजि भली बिधि भूप जेवाँए।।

  3624. RCM 1.352.4
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    आदर दान प्रेम परिपोषे। देत असीस चले मन तोषे।।

    अर्थ (Hindi)

    आदर दान प्रेम परिपोषे। देत असीस चले मन तोषे।।

  3625. RCM 1.352.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।

  3626. RCM 1.352.6
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    कीन्हि प्रसंसा भूपति भूरी। रानिन्ह सहित लीन्हि पग धूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्हि प्रसंसा भूपति भूरी। रानिन्ह सहित लीन्हि पग धूरी।।

  3627. RCM 1.352.7
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    भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।

    अर्थ (Hindi)

    भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।

  3628. RCM 1.352.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पूजे गुर पद कमल बहोरी। कीन्हि बिनय उर प्रीति न थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    पूजे गुर पद कमल बहोरी। कीन्हि बिनय उर प्रीति न थोरी।।

  3629. RCM 1.352.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बधुन्ह समेत कुमार सब रानिन्ह सहित महीसु।

    अर्थ (Hindi)

    बधुन्ह समेत कुमार सब रानिन्ह सहित महीसु।

  3630. RCM 1.352.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि पुनि बंदत गुर चरन देत असीस मुनीसु।।352।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि बंदत गुर चरन देत असीस मुनीसु।।352।।

  3631. RCM 1.353.1
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    बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें।।

  3632. RCM 1.353.2
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    नेगु मागि मुनिनायक लीन्हा। आसिरबादु बहुत बिधि दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    नेगु मागि मुनिनायक लीन्हा। आसिरबादु बहुत बिधि दीन्हा।।

  3633. RCM 1.353.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता।।

  3634. RCM 1.353.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिप्रबधू सब भूप बोलाई। चैल चारु भूषन पहिराई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिप्रबधू सब भूप बोलाई। चैल चारु भूषन पहिराई।।

  3635. RCM 1.353.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं।।

  3636. RCM 1.353.6
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    नेगी नेग जोग सब लेहीं। रुचि अनुरुप भूपमनि देहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नेगी नेग जोग सब लेहीं। रुचि अनुरुप भूपमनि देहीं।।

  3637. RCM 1.353.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने।।

  3638. RCM 1.353.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देव देखि रघुबीर बिबाहू। बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    देव देखि रघुबीर बिबाहू। बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू।।

  3639. RCM 1.353.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ।

    अर्थ (Hindi)

    चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ।

  3640. RCM 1.353.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहत परसपर राम जसु प्रेम न हृदयँ समाइ।।353।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत परसपर राम जसु प्रेम न हृदयँ समाइ।।353।।

  3641. RCM 1.354.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सब बिधि सबहि समदि नरनाहू। रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सब बिधि सबहि समदि नरनाहू। रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू।।

  3642. RCM 1.354.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ रनिवासु तहाँ पगु धारे। सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ रनिवासु तहाँ पगु धारे। सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे।।

  3643. RCM 1.354.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लिए गोद करि मोद समेता। को कहि सकइ भयउ सुखु जेता।।

    अर्थ (Hindi)

    लिए गोद करि मोद समेता। को कहि सकइ भयउ सुखु जेता।।

  3644. RCM 1.354.4
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    बधू सप्रेम गोद बैठारीं। बार बार हियँ हरषि दुलारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बधू सप्रेम गोद बैठारीं। बार बार हियँ हरषि दुलारीं।।

  3645. RCM 1.354.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि समाजु मुदित रनिवासू। सब कें उर अनंद कियो बासू।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि समाजु मुदित रनिवासू। सब कें उर अनंद कियो बासू।।

  3646. RCM 1.354.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू। सुनि हरषु होत सब काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू। सुनि हरषु होत सब काहू।।

  3647. RCM 1.354.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।

  3648. RCM 1.354.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।

  3649. RCM 1.354.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र गुर ग्याति।

    अर्थ (Hindi)

    सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र गुर ग्याति।

  3650. RCM 1.354.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भोजन कीन्ह अनेक बिधि घरी पंच गइ राति।।354।।

    अर्थ (Hindi)

    भोजन कीन्ह अनेक बिधि घरी पंच गइ राति।।354।।

  3651. RCM 1.355.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंगलगान करहिं बर भामिनि। भै सुखमूल मनोहर जामिनि।।

    अर्थ (Hindi)

    मंगलगान करहिं बर भामिनि। भै सुखमूल मनोहर जामिनि।।

  3652. RCM 1.355.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अँचइ पान सब काहूँ पाए। स्त्रग सुगंध भूषित छबि छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    अँचइ पान सब काहूँ पाए। स्त्रग सुगंध भूषित छबि छाए।।

  3653. RCM 1.355.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।

  3654. RCM 1.355.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।।

  3655. RCM 1.355.5
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    कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।

  3656. RCM 1.355.6
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    सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।।

  3657. RCM 1.355.7
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    नृप सब भाँति सबहि सनमानी। कहि मृदु बचन बोलाई रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप सब भाँति सबहि सनमानी। कहि मृदु बचन बोलाई रानी।।

  3658. RCM 1.355.8
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    बधू लरिकनीं पर घर आईं। राखेहु नयन पलक की नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बधू लरिकनीं पर घर आईं। राखेहु नयन पलक की नाई।।

  3659. RCM 1.355.9
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    लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।

    अर्थ (Hindi)

    लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।

  3660. RCM 1.355.10
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    अस कहि गे बिश्रामगृहँ राम चरन चितु लाइ।।355।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि गे बिश्रामगृहँ राम चरन चितु लाइ।।355।।

  3661. RCM 1.356.1
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    भूप बचन सुनि सहज सुहाए। जरित कनक मनि पलँग डसाए।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप बचन सुनि सहज सुहाए। जरित कनक मनि पलँग डसाए।।

  3662. RCM 1.356.2
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    सुभग सुरभि पय फेन समाना। कोमल कलित सुपेतीं नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभग सुरभि पय फेन समाना। कोमल कलित सुपेतीं नाना।।

  3663. RCM 1.356.3
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    उपबरहन बर बरनि न जाहीं। स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    उपबरहन बर बरनि न जाहीं। स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं।।

  3664. RCM 1.356.4
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    रतनदीप सुठि चारु चँदोवा। कहत न बनइ जान जेहिं जोवा।।

    अर्थ (Hindi)

    रतनदीप सुठि चारु चँदोवा। कहत न बनइ जान जेहिं जोवा।।

  3665. RCM 1.356.5
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    सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए।।

  3666. RCM 1.356.6
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    अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही। निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही। निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही।।

  3667. RCM 1.356.7
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    देखि स्याम मृदु मंजुल गाता। कहहिं सप्रेम बचन सब माता।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि स्याम मृदु मंजुल गाता। कहहिं सप्रेम बचन सब माता।।

  3668. RCM 1.356.8
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    मारग जात भयावनि भारी। केहि बिधि तात ताड़का मारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मारग जात भयावनि भारी। केहि बिधि तात ताड़का मारी।।

  3669. RCM 1.356.9
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    घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु।।

    अर्थ (Hindi)

    घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु।।

  3670. RCM 1.356.10
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    मारे सहित सहाय किमि खल मारीच सुबाहु।।356।।

    अर्थ (Hindi)

    मारे सहित सहाय किमि खल मारीच सुबाहु।।356।।

  3671. RCM 1.357.1
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    मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी। ईस अनेक करवरें टारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी। ईस अनेक करवरें टारी।।

  3672. RCM 1.357.2
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    मख रखवारी करि दुहुँ भाई। गुरु प्रसाद सब बिद्या पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मख रखवारी करि दुहुँ भाई। गुरु प्रसाद सब बिद्या पाई।।

  3673. RCM 1.357.3
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    मुनितय तरी लगत पग धूरी। कीरति रही भुवन भरि पूरी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनितय तरी लगत पग धूरी। कीरति रही भुवन भरि पूरी।।

  3674. RCM 1.357.4
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    कमठ पीठि पबि कूट कठोरा। नृप समाज महुँ सिव धनु तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कमठ पीठि पबि कूट कठोरा। नृप समाज महुँ सिव धनु तोरा।।

  3675. RCM 1.357.5
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    बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई।।

  3676. RCM 1.357.6
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    सकल अमानुष करम तुम्हारे। केवल कौसिक कृपाँ सुधारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल अमानुष करम तुम्हारे। केवल कौसिक कृपाँ सुधारे।।

  3677. RCM 1.357.7
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    आजु सुफल जग जनमु हमारा। देखि तात बिधुबदन तुम्हारा।।

    अर्थ (Hindi)

    आजु सुफल जग जनमु हमारा। देखि तात बिधुबदन तुम्हारा।।

  3678. RCM 1.357.8
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    जे दिन गए तुम्हहि बिनु देखें। ते बिरंचि जनि पारहिं लेखें।।

    अर्थ (Hindi)

    जे दिन गए तुम्हहि बिनु देखें। ते बिरंचि जनि पारहिं लेखें।।

  3679. RCM 1.357.9
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    राम प्रतोषीं मातु सब कहि बिनीत बर बैन।

    अर्थ (Hindi)

    राम प्रतोषीं मातु सब कहि बिनीत बर बैन।

  3680. RCM 1.357.10
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    सुमिरि संभु गुर बिप्र पद किए नीदबस नैन।।357।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि संभु गुर बिप्र पद किए नीदबस नैन।।357।।

  3681. RCM 1.358.1
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    नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।

    अर्थ (Hindi)

    नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।

  3682. RCM 1.358.2
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    घर घर करहिं जागरन नारीं। देहिं परसपर मंगल गारीं।।

    अर्थ (Hindi)

    घर घर करहिं जागरन नारीं। देहिं परसपर मंगल गारीं।।

  3683. RCM 1.358.3
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    पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।

  3684. RCM 1.358.4
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    सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई। फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई। फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई।।

  3685. RCM 1.358.5
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    प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।

  3686. RCM 1.358.6
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    बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए।।

  3687. RCM 1.358.7
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    बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता। पाइ असीस मुदित सब भ्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता। पाइ असीस मुदित सब भ्राता।।

  3688. RCM 1.358.8
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    जननिन्ह सादर बदन निहारे। भूपति संग द्वार पगु धारे।।

    अर्थ (Hindi)

    जननिन्ह सादर बदन निहारे। भूपति संग द्वार पगु धारे।।

  3689. RCM 1.358.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कीन्ह सौच सब सहज सुचि सरित पुनीत नहाइ।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्ह सौच सब सहज सुचि सरित पुनीत नहाइ।

  3690. RCM 1.358.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रातक्रिया करि तात पहिं आए चारिउ भाइ।।358।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रातक्रिया करि तात पहिं आए चारिउ भाइ।।358।।

  3691. RCM 1.359.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूप बिलोकि लिए उर लाई। बैठै हरषि रजायसु पाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भूप बिलोकि लिए उर लाई। बैठै हरषि रजायसु पाई।।

  3692. RCM 1.359.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि रामु सब सभा जुड़ानी। लोचन लाभ अवधि अनुमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि रामु सब सभा जुड़ानी। लोचन लाभ अवधि अनुमानी।।

  3693. RCM 1.359.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि बसिष्टु मुनि कौसिक आए। सुभग आसनन्हि मुनि बैठाए।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि बसिष्टु मुनि कौसिक आए। सुभग आसनन्हि मुनि बैठाए।।

  3694. RCM 1.359.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुतन्ह समेत पूजि पद लागे। निरखि रामु दोउ गुर अनुरागे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुतन्ह समेत पूजि पद लागे। निरखि रामु दोउ गुर अनुरागे।।

  3695. RCM 1.359.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा।।

  3696. RCM 1.359.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि मन अगम गाधिसुत करनी। मुदित बसिष्ट बिपुल बिधि बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि मन अगम गाधिसुत करनी। मुदित बसिष्ट बिपुल बिधि बरनी।।

  3697. RCM 1.359.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बोले बामदेउ सब साँची। कीरति कलित लोक तिहुँ माची।।

    अर्थ (Hindi)

    बोले बामदेउ सब साँची। कीरति कलित लोक तिहुँ माची।।

  3698. RCM 1.359.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि आनंदु भयउ सब काहू। राम लखन उर अधिक उछाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि आनंदु भयउ सब काहू। राम लखन उर अधिक उछाहू।।

  3699. RCM 1.359.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति।

    अर्थ (Hindi)

    मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति।

  3700. RCM 1.359.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति।।359।।

    अर्थ (Hindi)

    उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति।।359।।

  3701. RCM 1.360.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुदिन सोधि कल कंकन छौरे। मंगल मोद बिनोद न थोरे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुदिन सोधि कल कंकन छौरे। मंगल मोद बिनोद न थोरे।।

  3702. RCM 1.360.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नित नव सुखु सुर देखि सिहाहीं। अवध जन्म जाचहिं बिधि पाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नित नव सुखु सुर देखि सिहाहीं। अवध जन्म जाचहिं बिधि पाहीं।।

  3703. RCM 1.360.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिस्वामित्रु चलन नित चहहीं। राम सप्रेम बिनय बस रहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वामित्रु चलन नित चहहीं। राम सप्रेम बिनय बस रहहीं।।

  3704. RCM 1.360.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दिन दिन सयगुन भूपति भाऊ। देखि सराह महामुनिराऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    दिन दिन सयगुन भूपति भाऊ। देखि सराह महामुनिराऊ।।

  3705. RCM 1.360.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मागत बिदा राउ अनुरागे। सुतन्ह समेत ठाढ़ भे आगे।।

    अर्थ (Hindi)

    मागत बिदा राउ अनुरागे। सुतन्ह समेत ठाढ़ भे आगे।।

  3706. RCM 1.360.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाथ सकल संपदा तुम्हारी। मैं सेवकु समेत सुत नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ सकल संपदा तुम्हारी। मैं सेवकु समेत सुत नारी।।

  3707. RCM 1.360.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करब सदा लरिकनः पर छोहू। दरसन देत रहब मुनि मोहू।।

    अर्थ (Hindi)

    करब सदा लरिकनः पर छोहू। दरसन देत रहब मुनि मोहू।।

  3708. RCM 1.360.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कहि राउ सहित सुत रानी। परेउ चरन मुख आव न बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि राउ सहित सुत रानी। परेउ चरन मुख आव न बानी।।

  3709. RCM 1.360.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।।

    अर्थ (Hindi)

    दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।।

  3710. RCM 1.360.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई।।

  3711. RCM 1.360.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु।

    अर्थ (Hindi)

    राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु।

  3712. RCM 1.360.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु।।360।।

    अर्थ (Hindi)

    जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु।।360।।

  3713. RCM 1.361.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी।।

  3714. RCM 1.361.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ। बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ। बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ।।

  3715. RCM 1.361.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुरे लोग रजायसु भयऊ। सुतन्ह समेत नृपति गृहँ गयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरे लोग रजायसु भयऊ। सुतन्ह समेत नृपति गृहँ गयऊ।।

  3716. RCM 1.361.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ तहँ राम ब्याहु सबु गावा। सुजसु पुनीत लोक तिहुँ छावा।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ राम ब्याहु सबु गावा। सुजसु पुनीत लोक तिहुँ छावा।।

  3717. RCM 1.361.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आए ब्याहि रामु घर जब तें। बसइ अनंद अवध सब तब तें।।

    अर्थ (Hindi)

    आए ब्याहि रामु घर जब तें। बसइ अनंद अवध सब तब तें।।

  3718. RCM 1.361.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू। सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू। सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू।।

  3719. RCM 1.361.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कबिकुल जीवनु पावन जानी।।राम सीय जसु मंगल खानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कबिकुल जीवनु पावन जानी।।राम सीय जसु मंगल खानी।।

  3720. RCM 1.361.8
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    तेहि ते मैं कछु कहा बखानी। करन पुनीत हेतु निज बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि ते मैं कछु कहा बखानी। करन पुनीत हेतु निज बानी।।