सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।
RCM 1.8.6
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।
RCM 1.8.6
सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।