जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।
RCM 1.8.12
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।
RCM 1.8.12
जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।