सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।
RCM 1.2.4
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।
RCM 1.2.4
सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।