बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।
RCM 1.4.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।
RCM 1.4.10
बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।