हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।
RCM 1.8.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।
RCM 1.8.10
हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।