साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।
RCM 1.7.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।
RCM 1.7.10
साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।