खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।
RCM 1.9.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।
RCM 1.9.1
खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।