बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
RCM 1.2.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।
RCM 1.2.3
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।