भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।
RCM 1.5.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।
RCM 1.5.7
भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।