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Ramcharitmanas · अध्याय 1

Bala Kanda

बालकाण्ड

The childhood of Rama — invocations, the birth of the four princes, breaking of Shiva's bow, wedding of Sita.

  1. RCM 1.1001Open verse →

    वर्णानामर्थसङ्घानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥

    Meaning · English

    I bow to Vani (Saraswati) and Vinayaka (Ganesha), the originators of sounds and their meanings, of rasas, of metres, and of all auspicious things.

  2. अमिय मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू।।

    अर्थ · Hindi

    अमिय मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू।।

  3. सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।

  4. जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।

    अर्थ · Hindi

    जन मन मंजु मुकुर मल हरनी। किएँ तिलक गुन गन बस करनी।।

  5. श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य द्रृष्टि हियँ होती।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीगुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य द्रृष्टि हियँ होती।।

  6. दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू।।

    अर्थ · Hindi

    दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू।।

  7. उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।

    अर्थ · Hindi

    उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।

  8. सूझहिं राम चरित मनि मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक।।

    अर्थ · Hindi

    सूझहिं राम चरित मनि मानिक। गुपुत प्रगट जहँ जो जेहि खानिक।।

  9. जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान।

    अर्थ · Hindi

    जथा सुअंजन अंजि दृग साधक सिद्ध सुजान।

  10. RCM 1.1.10Open verse →

    कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान।।1।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक देखत सैल बन भूतल भूरि निधान।।1।।

  11. गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।।

    अर्थ · Hindi

    गुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन। नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन।।

  12. तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन। बरनउँ राम चरित भव मोचन।।

  13. बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना।।

  14. सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी।।

  15. साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।।

    अर्थ · Hindi

    साधु चरित सुभ चरित कपासू। निरस बिसद गुनमय फल जासू।।

  16. जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा।।

    अर्थ · Hindi

    जो सहि दुख परछिद्र दुरावा। बंदनीय जेहिं जग जस पावा।।

  17. मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।

    अर्थ · Hindi

    मुद मंगलमय संत समाजू। जो जग जंगम तीरथराजू।।

  18. राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।

    अर्थ · Hindi

    राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा। सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा।।

  19. बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि निषेधमय कलि मल हरनी। करम कथा रबिनंदनि बरनी।।

  20. RCM 1.2.10Open verse →

    हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी।।

    अर्थ · Hindi

    हरि हर कथा बिराजति बेनी। सुनत सकल मुद मंगल देनी।।

  21. RCM 1.2.11Open verse →

    बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।

    अर्थ · Hindi

    बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा।।

  22. RCM 1.2.12Open verse →

    सबहिं सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।

    अर्थ · Hindi

    सबहिं सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा।।

  23. RCM 1.2.13Open verse →

    अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अकथ अलौकिक तीरथराऊ। देइ सद्य फल प्रगट प्रभाऊ।।

  24. RCM 1.2.14Open verse →

    सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।

    अर्थ · Hindi

    सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।

  25. RCM 1.2.15Open verse →

    लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।2।।

    अर्थ · Hindi

    लहहिं चारि फल अछत तनु साधु समाज प्रयाग।।2।।

  26. मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।।

    अर्थ · Hindi

    मज्जन फल पेखिअ ततकाला। काक होहिं पिक बकउ मराला।।

  27. सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।

  28. बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।।

    अर्थ · Hindi

    बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी।।

  29. जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।।

    अर्थ · Hindi

    जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना।।

  30. मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई।।

    अर्थ · Hindi

    मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई।।

  31. सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ।।

  32. बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु सतसंग बिबेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई।।

  33. सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला।।

    अर्थ · Hindi

    सतसंगत मुद मंगल मूला। सोइ फल सिधि सब साधन फूला।।

  34. सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    सठ सुधरहिं सतसंगति पाई। पारस परस कुधात सुहाई।।

  35. RCM 1.3.10Open verse →

    बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि बस सुजन कुसंगत परहीं। फनि मनि सम निज गुन अनुसरहीं।।

  36. RCM 1.3.11Open verse →

    बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी।।

  37. RCM 1.3.12Open verse →

    सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    सो मो सन कहि जात न कैसें। साक बनिक मनि गुन गन जैसें।।

  38. RCM 1.3.13Open verse →

    बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ संत समान चित हित अनहित नहिं कोइ।

  39. RCM 1.3.14Open verse →

    अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ।।3(क)।।

    अर्थ · Hindi

    अंजलि गत सुभ सुमन जिमि सम सुगंध कर दोइ।।3(क)।।

  40. RCM 1.3.15Open verse →

    संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।

    अर्थ · Hindi

    संत सरल चित जगत हित जानि सुभाउ सनेहु।

  41. RCM 1.3.16Open verse →

    बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु।।3(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    बालबिनय सुनि करि कृपा राम चरन रति देहु।।3(ख)।।

  42. बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ।।

  43. पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।

    अर्थ · Hindi

    पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।

  44. हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से।।

    अर्थ · Hindi

    हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से।।

  45. जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी।।

    अर्थ · Hindi

    जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी।।

  46. तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।।

    अर्थ · Hindi

    तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा।।

  47. उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके।।

    अर्थ · Hindi

    उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके।।

  48. पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं।।

  49. बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा।।

  50. पुनि प्रनवउँ पृथुराज समाना। पर अघ सुनइ सहस दस काना।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि प्रनवउँ पृथुराज समाना। पर अघ सुनइ सहस दस काना।।

  51. RCM 1.4.10Open verse →

    बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही।।

  52. RCM 1.4.11Open verse →

    बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।

    अर्थ · Hindi

    बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा।।

  53. RCM 1.4.12Open verse →

    उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति।

    अर्थ · Hindi

    उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति।

  54. RCM 1.4.13Open verse →

    जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति।।4।।

    अर्थ · Hindi

    जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति।।4।।

  55. मैं अपनी दिसि कीन्ह निहोरा। तिन्ह निज ओर न लाउब भोरा।।

    अर्थ · Hindi

    मैं अपनी दिसि कीन्ह निहोरा। तिन्ह निज ओर न लाउब भोरा।।

  56. बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।

    अर्थ · Hindi

    बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।

  57. बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।

  58. बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं।।

  59. उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।।

  60. सुधा सुरा सम साधू असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।।

    अर्थ · Hindi

    सुधा सुरा सम साधू असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।।

  61. भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।

    अर्थ · Hindi

    भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।।

  62. सुधा सुधाकर सुरसरि साधू। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।।

    अर्थ · Hindi

    सुधा सुधाकर सुरसरि साधू। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।।

  63. गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।

  64. RCM 1.5.10Open verse →

    भलो भलाइहि पै लहइ लहइ निचाइहि नीचु।

    अर्थ · Hindi

    भलो भलाइहि पै लहइ लहइ निचाइहि नीचु।

  65. RCM 1.5.11Open verse →

    सुधा सराहिअ अमरताँ गरल सराहिअ मीचु।।5।।

    अर्थ · Hindi

    सुधा सराहिअ अमरताँ गरल सराहिअ मीचु।।5।।

  66. खल अघ अगुन साधू गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा।।

    अर्थ · Hindi

    खल अघ अगुन साधू गुन गाहा। उभय अपार उदधि अवगाहा।।

  67. तेहि तें कछु गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि तें कछु गुन दोष बखाने। संग्रह त्याग न बिनु पहिचाने।।

  68. भलेउ पोच सब बिधि उपजाए। गनि गुन दोष बेद बिलगाए।।

    अर्थ · Hindi

    भलेउ पोच सब बिधि उपजाए। गनि गुन दोष बेद बिलगाए।।

  69. कहहिं बेद इतिहास पुराना। बिधि प्रपंचु गुन अवगुन साना।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं बेद इतिहास पुराना। बिधि प्रपंचु गुन अवगुन साना।।

  70. दुख सुख पाप पुन्य दिन राती। साधु असाधु सुजाति कुजाती।।

    अर्थ · Hindi

    दुख सुख पाप पुन्य दिन राती। साधु असाधु सुजाति कुजाती।।

  71. दानव देव ऊँच अरु नीचू। अमिअ सुजीवनु माहुरु मीचू।।

    अर्थ · Hindi

    दानव देव ऊँच अरु नीचू। अमिअ सुजीवनु माहुरु मीचू।।

  72. माया ब्रह्म जीव जगदीसा। लच्छि अलच्छि रंक अवनीसा।।

    अर्थ · Hindi

    माया ब्रह्म जीव जगदीसा। लच्छि अलच्छि रंक अवनीसा।।

  73. कासी मग सुरसरि क्रमनासा। मरु मारव महिदेव गवासा।।

    अर्थ · Hindi

    कासी मग सुरसरि क्रमनासा। मरु मारव महिदेव गवासा।।

  74. सरग नरक अनुराग बिरागा। निगमागम गुन दोष बिभागा।।

    अर्थ · Hindi

    सरग नरक अनुराग बिरागा। निगमागम गुन दोष बिभागा।।

  75. RCM 1.6.10Open verse →

    जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार।

    अर्थ · Hindi

    जड़ चेतन गुन दोषमय बिस्व कीन्ह करतार।

  76. RCM 1.6.11Open verse →

    संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार।।6।।

    अर्थ · Hindi

    संत हंस गुन गहहिं पय परिहरि बारि बिकार।।6।।

  77. RCM 1.7001Open verse →

    श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

    Meaning · English

    Cleansing the mirror of my mind with the dust of my Guru's lotus feet, I sing the pure glory of the best of the Raghu line, who bestows the four fruits of life.

  78. काल सुभाउ करम बरिआई। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    काल सुभाउ करम बरिआई। भलेउ प्रकृति बस चुकइ भलाई।।

  79. सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीं। दलि दुख दोष बिमल जसु देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुधारि हरिजन जिमि लेहीं। दलि दुख दोष बिमल जसु देहीं।।

  80. खलउ करहिं भल पाइ सुसंगू। मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू।।

    अर्थ · Hindi

    खलउ करहिं भल पाइ सुसंगू। मिटइ न मलिन सुभाउ अभंगू।।

  81. लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ।।

  82. उधरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।

    अर्थ · Hindi

    उधरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू।।

  83. किएहुँ कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवंत हनुमानू।।

    अर्थ · Hindi

    किएहुँ कुबेष साधु सनमानू। जिमि जग जामवंत हनुमानू।।

  84. हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।

    अर्थ · Hindi

    हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।

  85. गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा। कीचहिं मिलइ नीच जल संगा।।

    अर्थ · Hindi

    गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा। कीचहिं मिलइ नीच जल संगा।।

  86. RCM 1.7.10Open verse →

    साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।

    अर्थ · Hindi

    साधु असाधु सदन सुक सारीं। सुमिरहिं राम देहिं गनि गारी।।

  87. RCM 1.7.11Open verse →

    धूम कुसंगति कारिख होई। लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    धूम कुसंगति कारिख होई। लिखिअ पुरान मंजु मसि सोई।।

  88. RCM 1.7.12Open verse →

    सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवन दाता।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ जल अनल अनिल संघाता। होइ जलद जग जीवन दाता।।

  89. RCM 1.7.13Open verse →

    ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ कुजोग सुजोग।

    अर्थ · Hindi

    ग्रह भेषज जल पवन पट पाइ कुजोग सुजोग।

  90. RCM 1.7.14Open verse →

    होहि कुबस्तु सुबस्तु जग लखहिं सुलच्छन लोग।।7(क)।।

    अर्थ · Hindi

    होहि कुबस्तु सुबस्तु जग लखहिं सुलच्छन लोग।।7(क)।।

  91. RCM 1.7.15Open verse →

    सम प्रकास तम पाख दुहुँ नाम भेद बिधि कीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    सम प्रकास तम पाख दुहुँ नाम भेद बिधि कीन्ह।

  92. RCM 1.7.16Open verse →

    ससि सोषक पोषक समुझि जग जस अपजस दीन्ह।।7(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    ससि सोषक पोषक समुझि जग जस अपजस दीन्ह।।7(ख)।।

  93. RCM 1.7.17Open verse →

    जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।

    अर्थ · Hindi

    जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।

  94. RCM 1.7.18Open verse →

    बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।7(ग)।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ सब के पद कमल सदा जोरि जुग पानि।।7(ग)।।

  95. RCM 1.7.19Open verse →

    देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।

    अर्थ · Hindi

    देव दनुज नर नाग खग प्रेत पितर गंधर्ब।

  96. RCM 1.7.20Open verse →

    बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब।।7(घ)।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ किंनर रजनिचर कृपा करहु अब सर्ब।।7(घ)।।

  97. आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।

    अर्थ · Hindi

    आकर चारि लाख चौरासी। जाति जीव जल थल नभ बासी।।

  98. सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।

    अर्थ · Hindi

    सीय राममय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी।।

  99. जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू।।

    अर्थ · Hindi

    जानि कृपाकर किंकर मोहू। सब मिलि करहु छाड़ि छल छोहू।।

  100. निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाही।।

    अर्थ · Hindi

    निज बुधि बल भरोस मोहि नाहीं। तातें बिनय करउँ सब पाही।।

  101. करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।।

    अर्थ · Hindi

    करन चहउँ रघुपति गुन गाहा। लघु मति मोरि चरित अवगाहा।।

  102. सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सूझ न एकउ अंग उपाऊ। मन मति रंक मनोरथ राऊ।।

  103. मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी। चहिअ अमिअ जग जुरइ न छाछी।।

    अर्थ · Hindi

    मति अति नीच ऊँचि रुचि आछी। चहिअ अमिअ जग जुरइ न छाछी।।

  104. छमिहहिं सज्जन मोरि ढिठाई। सुनिहहिं बालबचन मन लाई।।

    अर्थ · Hindi

    छमिहहिं सज्जन मोरि ढिठाई। सुनिहहिं बालबचन मन लाई।।

  105. जौ बालक कह तोतरि बाता। सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता।।

    अर्थ · Hindi

    जौ बालक कह तोतरि बाता। सुनहिं मुदित मन पितु अरु माता।।

  106. RCM 1.8.10Open verse →

    हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।

    अर्थ · Hindi

    हँसिहहि कूर कुटिल कुबिचारी। जे पर दूषन भूषनधारी।।

  107. RCM 1.8.11Open verse →

    निज कवित केहि लाग न नीका। सरस होउ अथवा अति फीका।।

    अर्थ · Hindi

    निज कवित केहि लाग न नीका। सरस होउ अथवा अति फीका।।

  108. RCM 1.8.12Open verse →

    जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जे पर भनिति सुनत हरषाही। ते बर पुरुष बहुत जग नाहीं।।

  109. RCM 1.8.13Open verse →

    जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।

    अर्थ · Hindi

    जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।

  110. RCM 1.8.14Open verse →

    सज्जन सकृत सिंधु सम कोई। देखि पूर बिधु बाढ़इ जोई।।

    अर्थ · Hindi

    सज्जन सकृत सिंधु सम कोई। देखि पूर बिधु बाढ़इ जोई।।

  111. RCM 1.8.15Open verse →

    भाग छोट अभिलाषु बड़ करउँ एक बिस्वास।

    अर्थ · Hindi

    भाग छोट अभिलाषु बड़ करउँ एक बिस्वास।

  112. RCM 1.8.16Open verse →

    पैहहिं सुख सुनि सुजन सब खल करहहिं उपहास।।8।।

    अर्थ · Hindi

    पैहहिं सुख सुनि सुजन सब खल करहहिं उपहास।।8।।

  113. खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    खल परिहास होइ हित मोरा। काक कहहिं कलकंठ कठोरा।।

  114. हंसहि बक दादुर चातकही। हँसहिं मलिन खल बिमल बतकही।।

    अर्थ · Hindi

    हंसहि बक दादुर चातकही। हँसहिं मलिन खल बिमल बतकही।।

  115. कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।

    अर्थ · Hindi

    कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।

  116. भाषा भनिति भोरि मति मोरी। हँसिबे जोग हँसें नहिं खोरी।।

    अर्थ · Hindi

    भाषा भनिति भोरि मति मोरी। हँसिबे जोग हँसें नहिं खोरी।।

  117. प्रभु पद प्रीति न सामुझि नीकी। तिन्हहि कथा सुनि लागहि फीकी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद प्रीति न सामुझि नीकी। तिन्हहि कथा सुनि लागहि फीकी।।

  118. हरि हर पद रति मति न कुतरकी। तिन्ह कहुँ मधुर कथा रघुवर की।।

    अर्थ · Hindi

    हरि हर पद रति मति न कुतरकी। तिन्ह कहुँ मधुर कथा रघुवर की।।

  119. राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी।।

    अर्थ · Hindi

    राम भगति भूषित जियँ जानी। सुनिहहिं सुजन सराहि सुबानी।।

  120. कबि न होउँ नहिं बचन प्रबीनू। सकल कला सब बिद्या हीनू।।

    अर्थ · Hindi

    कबि न होउँ नहिं बचन प्रबीनू। सकल कला सब बिद्या हीनू।।

  121. आखर अरथ अलंकृति नाना। छंद प्रबंध अनेक बिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    आखर अरथ अलंकृति नाना। छंद प्रबंध अनेक बिधाना।।

  122. RCM 1.9.10Open verse →

    भाव भेद रस भेद अपारा। कबित दोष गुन बिबिध प्रकारा।।

    अर्थ · Hindi

    भाव भेद रस भेद अपारा। कबित दोष गुन बिबिध प्रकारा।।

  123. RCM 1.9.11Open verse →

    कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।।

    अर्थ · Hindi

    कबित बिबेक एक नहिं मोरें। सत्य कहउँ लिखि कागद कोरे।।

  124. RCM 1.9.12Open verse →

    भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।

    अर्थ · Hindi

    भनिति मोरि सब गुन रहित बिस्व बिदित गुन एक।

  125. RCM 1.9.13Open verse →

    सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिवेक।।9।।

    अर्थ · Hindi

    सो बिचारि सुनिहहिं सुमति जिन्ह कें बिमल बिवेक।।9।।

  126. RCM 1.10.1Open verse →

    एहि महँ रघुपति नाम उदारा। अति पावन पुरान श्रुति सारा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि महँ रघुपति नाम उदारा। अति पावन पुरान श्रुति सारा।।

  127. RCM 1.10.2Open verse →

    मंगल भवन अमंगल हारी। उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल भवन अमंगल हारी। उमा सहित जेहि जपत पुरारी।।

  128. RCM 1.10.3Open verse →

    भनिति बिचित्र सुकबि कृत जोऊ। राम नाम बिनु सोह न सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भनिति बिचित्र सुकबि कृत जोऊ। राम नाम बिनु सोह न सोऊ।।

  129. RCM 1.10.4Open verse →

    बिधुबदनी सब भाँति सँवारी। सोन न बसन बिना बर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिधुबदनी सब भाँति सँवारी। सोन न बसन बिना बर नारी।।

  130. RCM 1.10.5Open verse →

    सब गुन रहित कुकबि कृत बानी। राम नाम जस अंकित जानी।।

    अर्थ · Hindi

    सब गुन रहित कुकबि कृत बानी। राम नाम जस अंकित जानी।।

  131. RCM 1.10.6Open verse →

    सादर कहहिं सुनहिं बुध ताही। मधुकर सरिस संत गुनग्राही।।

    अर्थ · Hindi

    सादर कहहिं सुनहिं बुध ताही। मधुकर सरिस संत गुनग्राही।।

  132. RCM 1.10.7Open verse →

    जदपि कबित रस एकउ नाही। राम प्रताप प्रकट एहि माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि कबित रस एकउ नाही। राम प्रताप प्रकट एहि माहीं।।

  133. RCM 1.10.8Open verse →

    सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बडप्पनु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ भरोस मोरें मन आवा। केहिं न सुसंग बडप्पनु पावा।।

  134. RCM 1.10.9Open verse →

    धूमउ तजइ सहज करुआई। अगरु प्रसंग सुगंध बसाई।।

    अर्थ · Hindi

    धूमउ तजइ सहज करुआई। अगरु प्रसंग सुगंध बसाई।।

  135. RCM 1.10.10Open verse →

    भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी। राम कथा जग मंगल करनी।।

    अर्थ · Hindi

    भनिति भदेस बस्तु भलि बरनी। राम कथा जग मंगल करनी।।

  136. RCM 1.11.1Open verse →

    मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी।।

    अर्थ · Hindi

    मनि मानिक मुकुता छबि जैसी। अहि गिरि गज सिर सोह न तैसी।।

  137. RCM 1.11.2Open verse →

    नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    नृप किरीट तरुनी तनु पाई। लहहिं सकल सोभा अधिकाई।।

  138. RCM 1.11.3Open verse →

    तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तैसेहिं सुकबि कबित बुध कहहीं। उपजहिं अनत अनत छबि लहहीं।।

  139. RCM 1.11.4Open verse →

    भगति हेतु बिधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवति धाई।।

    अर्थ · Hindi

    भगति हेतु बिधि भवन बिहाई। सुमिरत सारद आवति धाई।।

  140. RCM 1.11.5Open verse →

    राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    राम चरित सर बिनु अन्हवाएँ। सो श्रम जाइ न कोटि उपाएँ।।

  141. RCM 1.11.6Open verse →

    कबि कोबिद अस हृदयँ बिचारी। गावहिं हरि जस कलि मल हारी।।

    अर्थ · Hindi

    कबि कोबिद अस हृदयँ बिचारी। गावहिं हरि जस कलि मल हारी।।

  142. RCM 1.11.7Open verse →

    कीन्हें प्राकृत जन गुन गाना। सिर धुनि गिरा लगत पछिताना।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्हें प्राकृत जन गुन गाना। सिर धुनि गिरा लगत पछिताना।।

  143. RCM 1.11.8Open verse →

    हृदय सिंधु मति सीप समाना। स्वाति सारदा कहहिं सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    हृदय सिंधु मति सीप समाना। स्वाति सारदा कहहिं सुजाना।।

  144. RCM 1.11.9Open verse →

    जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू।।

  145. RCM 1.11.10Open verse →

    जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।

    अर्थ · Hindi

    जुगुति बेधि पुनि पोहिअहिं रामचरित बर ताग।

  146. RCM 1.11.11Open verse →

    पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।11।।

    अर्थ · Hindi

    पहिरहिं सज्जन बिमल उर सोभा अति अनुराग।।11।।

  147. RCM 1.12.1Open verse →

    जे जनमे कलिकाल कराला। करतब बायस बेष मराला।।

    अर्थ · Hindi

    जे जनमे कलिकाल कराला। करतब बायस बेष मराला।।

  148. RCM 1.12.2Open verse →

    चलत कुपंथ बेद मग छाँड़े। कपट कलेवर कलि मल भाँड़ें।।

    अर्थ · Hindi

    चलत कुपंथ बेद मग छाँड़े। कपट कलेवर कलि मल भाँड़ें।।

  149. RCM 1.12.3Open verse →

    बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।

    अर्थ · Hindi

    बंचक भगत कहाइ राम के। किंकर कंचन कोह काम के।।

  150. RCM 1.12.4Open verse →

    तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी। धींग धरमध्वज धंधक धोरी।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह महँ प्रथम रेख जग मोरी। धींग धरमध्वज धंधक धोरी।।

  151. RCM 1.12.5Open verse →

    जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    जौं अपने अवगुन सब कहऊँ। बाढ़इ कथा पार नहिं लहऊँ।।

  152. RCM 1.12.6Open verse →

    ताते मैं अति अलप बखाने। थोरे महुँ जानिहहिं सयाने।।

    अर्थ · Hindi

    ताते मैं अति अलप बखाने। थोरे महुँ जानिहहिं सयाने।।

  153. RCM 1.12.7Open verse →

    समुझि बिबिधि बिधि बिनती मोरी। कोउ न कथा सुनि देइहि खोरी।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि बिबिधि बिधि बिनती मोरी। कोउ न कथा सुनि देइहि खोरी।।

  154. RCM 1.12.8Open verse →

    एतेहु पर करिहहिं जे असंका। मोहि ते अधिक ते जड़ मति रंका।।

    अर्थ · Hindi

    एतेहु पर करिहहिं जे असंका। मोहि ते अधिक ते जड़ मति रंका।।

  155. RCM 1.12.9Open verse →

    कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।।

    अर्थ · Hindi

    कबि न होउँ नहिं चतुर कहावउँ। मति अनुरूप राम गुन गावउँ।।

  156. RCM 1.12.10Open verse →

    कहँ रघुपति के चरित अपारा। कहँ मति मोरि निरत संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ रघुपति के चरित अपारा। कहँ मति मोरि निरत संसारा।।

  157. RCM 1.12.11Open verse →

    जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं मारुत गिरि मेरु उड़ाहीं। कहहु तूल केहि लेखे माहीं।।

  158. RCM 1.12.12Open verse →

    समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई।।

    अर्थ · Hindi

    समुझत अमित राम प्रभुताई। करत कथा मन अति कदराई।।

  159. RCM 1.12.13Open verse →

    सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।

    अर्थ · Hindi

    सारद सेस महेस बिधि आगम निगम पुरान।

  160. RCM 1.12.14Open verse →

    नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान।।12।।

    अर्थ · Hindi

    नेति नेति कहि जासु गुन करहिं निरंतर गान।।12।।

  161. RCM 1.13.1Open verse →

    सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    सब जानत प्रभु प्रभुता सोई। तदपि कहें बिनु रहा न कोई।।

  162. RCM 1.13.2Open verse →

    तहाँ बेद अस कारन राखा। भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा।।

    अर्थ · Hindi

    तहाँ बेद अस कारन राखा। भजन प्रभाउ भाँति बहु भाषा।।

  163. RCM 1.13.3Open verse →

    एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा।।

    अर्थ · Hindi

    एक अनीह अरूप अनामा। अज सच्चिदानंद पर धामा।।

  164. RCM 1.13.4Open verse →

    ब्यापक बिस्वरूप भगवाना। तेहिं धरि देह चरित कृत नाना।।

    अर्थ · Hindi

    ब्यापक बिस्वरूप भगवाना। तेहिं धरि देह चरित कृत नाना।।

  165. RCM 1.13.5Open verse →

    सो केवल भगतन हित लागी। परम कृपाल प्रनत अनुरागी।।

    अर्थ · Hindi

    सो केवल भगतन हित लागी। परम कृपाल प्रनत अनुरागी।।

  166. RCM 1.13.6Open verse →

    जेहि जन पर ममता अति छोहू। जेहिं करुना करि कीन्ह न कोहू।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि जन पर ममता अति छोहू। जेहिं करुना करि कीन्ह न कोहू।।

  167. RCM 1.13.7Open verse →

    गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।

    अर्थ · Hindi

    गई बहोर गरीब नेवाजू। सरल सबल साहिब रघुराजू।।

  168. RCM 1.13.8Open verse →

    बुध बरनहिं हरि जस अस जानी। करहि पुनीत सुफल निज बानी।।

    अर्थ · Hindi

    बुध बरनहिं हरि जस अस जानी। करहि पुनीत सुफल निज बानी।।

  169. RCM 1.13.9Open verse →

    तेहिं बल मैं रघुपति गुन गाथा। कहिहउँ नाइ राम पद माथा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं बल मैं रघुपति गुन गाथा। कहिहउँ नाइ राम पद माथा।।

  170. RCM 1.13.10Open verse →

    मुनिन्ह प्रथम हरि कीरति गाई। तेहिं मग चलत सुगम मोहि भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिन्ह प्रथम हरि कीरति गाई। तेहिं मग चलत सुगम मोहि भाई।।

  171. RCM 1.13.11Open verse →

    अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं।

    अर्थ · Hindi

    अति अपार जे सरित बर जौं नृप सेतु कराहिं।

  172. RCM 1.13.12Open verse →

    चढि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं।।13।।

    अर्थ · Hindi

    चढि पिपीलिकउ परम लघु बिनु श्रम पारहि जाहिं।।13।।

  173. RCM 1.14.1Open verse →

    एहि प्रकार बल मनहि देखाई। करिहउँ रघुपति कथा सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    एहि प्रकार बल मनहि देखाई। करिहउँ रघुपति कथा सुहाई।।

  174. RCM 1.14.2Open verse →

    ब्यास आदि कबि पुंगव नाना। जिन्ह सादर हरि सुजस बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    ब्यास आदि कबि पुंगव नाना। जिन्ह सादर हरि सुजस बखाना।।

  175. RCM 1.14.3Open verse →

    चरन कमल बंदउँ तिन्ह केरे। पुरवहुँ सकल मनोरथ मेरे।।

    अर्थ · Hindi

    चरन कमल बंदउँ तिन्ह केरे। पुरवहुँ सकल मनोरथ मेरे।।

  176. RCM 1.14.4Open verse →

    कलि के कबिन्ह करउँ परनामा। जिन्ह बरने रघुपति गुन ग्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    कलि के कबिन्ह करउँ परनामा। जिन्ह बरने रघुपति गुन ग्रामा।।

  177. RCM 1.14.5Open verse →

    जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    जे प्राकृत कबि परम सयाने। भाषाँ जिन्ह हरि चरित बखाने।।

  178. RCM 1.14.6Open verse →

    भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहिं कपट सब त्यागें।।

    अर्थ · Hindi

    भए जे अहहिं जे होइहहिं आगें। प्रनवउँ सबहिं कपट सब त्यागें।।

  179. RCM 1.14.7Open verse →

    होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।।

    अर्थ · Hindi

    होहु प्रसन्न देहु बरदानू। साधु समाज भनिति सनमानू।।

  180. RCM 1.14.8Open verse →

    जो प्रबंध बुध नहिं आदरहीं। सो श्रम बादि बाल कबि करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जो प्रबंध बुध नहिं आदरहीं। सो श्रम बादि बाल कबि करहीं।।

  181. RCM 1.14.9Open verse →

    कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।

    अर्थ · Hindi

    कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।

  182. RCM 1.14.10Open verse →

    राम सुकीरति भनिति भदेसा। असमंजस अस मोहि अँदेसा।।

    अर्थ · Hindi

    राम सुकीरति भनिति भदेसा। असमंजस अस मोहि अँदेसा।।

  183. RCM 1.14.11Open verse →

    तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरी कृपा सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे।।

  184. RCM 1.14.12Open verse →

    सरल कबित कीरति बिमल सोइ आदरहिं सुजान।

    अर्थ · Hindi

    सरल कबित कीरति बिमल सोइ आदरहिं सुजान।

  185. RCM 1.14.13Open verse →

    सहज बयर बिसराइ रिपु जो सुनि करहिं बखान।।14(क)।।

    अर्थ · Hindi

    सहज बयर बिसराइ रिपु जो सुनि करहिं बखान।।14(क)।।

  186. RCM 1.14.14Open verse →

    सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।

    अर्थ · Hindi

    सो न होइ बिनु बिमल मति मोहि मति बल अति थोर।

  187. RCM 1.14.15Open verse →

    करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर।।14(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    करहु कृपा हरि जस कहउँ पुनि पुनि करउँ निहोर।।14(ख)।।

  188. RCM 1.14.16Open verse →

    कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल।

    अर्थ · Hindi

    कबि कोबिद रघुबर चरित मानस मंजु मराल।

  189. RCM 1.14.17Open verse →

    बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि मोपर होहु कृपाल।।14(ग)।।

    अर्थ · Hindi

    बाल बिनय सुनि सुरुचि लखि मोपर होहु कृपाल।।14(ग)।।

  190. RCM 1.14.18Open verse →

    बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ मुनि पद कंजु रामायन जेहिं निरमयउ।

  191. RCM 1.14.19Open verse →

    सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित।।14(घ)।।

    अर्थ · Hindi

    सखर सुकोमल मंजु दोष रहित दूषन सहित।।14(घ)।।

  192. RCM 1.14.20Open verse →

    बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ चारिउ बेद भव बारिधि बोहित सरिस।

  193. RCM 1.14.21Open verse →

    जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु।।14(ङ)।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्हहि न सपनेहुँ खेद बरनत रघुबर बिसद जसु।।14(ङ)।।

  194. RCM 1.14.22Open verse →

    बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ बिधि पद रेनु भव सागर जेहि कीन्ह जहँ।

  195. RCM 1.14.23Open verse →

    संत सुधा ससि धेनु प्रगटे खल बिष बारुनी।।14(च)।।

    अर्थ · Hindi

    संत सुधा ससि धेनु प्रगटे खल बिष बारुनी।।14(च)।।

  196. RCM 1.14.24Open verse →

    बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।

    अर्थ · Hindi

    बिबुध बिप्र बुध ग्रह चरन बंदि कहउँ कर जोरि।

  197. RCM 1.14.25Open verse →

    होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि।।14(छ)।।

    अर्थ · Hindi

    होइ प्रसन्न पुरवहु सकल मंजु मनोरथ मोरि।।14(छ)।।

  198. RCM 1.15.1Open verse →

    पुनि बंदउँ सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि बंदउँ सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता।।

  199. RCM 1.15.2Open verse →

    मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका।।

    अर्थ · Hindi

    मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका।।

  200. RCM 1.15.3Open verse →

    गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी।।

  201. RCM 1.15.4Open verse →

    सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसीके।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसीके।।

  202. RCM 1.15.5Open verse →

    कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा।।

    अर्थ · Hindi

    कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा।।

  203. RCM 1.15.6Open verse →

    अनमिल आखर अरथ न जापू। प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू।।

    अर्थ · Hindi

    अनमिल आखर अरथ न जापू। प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू।।

  204. RCM 1.15.7Open verse →

    सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला।।

    अर्थ · Hindi

    सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला।।

  205. RCM 1.15.8Open verse →

    सुमिरि सिवा सिव पाइ पसाऊ। बरनउँ रामचरित चित चाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि सिवा सिव पाइ पसाऊ। बरनउँ रामचरित चित चाऊ।।

  206. RCM 1.15.9Open verse →

    भनिति मोरि सिव कृपाँ बिभाती। ससि समाज मिलि मनहुँ सुराती।।

    अर्थ · Hindi

    भनिति मोरि सिव कृपाँ बिभाती। ससि समाज मिलि मनहुँ सुराती।।

  207. RCM 1.15.10Open verse →

    जे एहि कथहि सनेह समेता। कहिहहिं सुनिहहिं समुझि सचेता।।

    अर्थ · Hindi

    जे एहि कथहि सनेह समेता। कहिहहिं सुनिहहिं समुझि सचेता।।

  208. RCM 1.15.11Open verse →

    होइहहिं राम चरन अनुरागी। कलि मल रहित सुमंगल भागी।।

    अर्थ · Hindi

    होइहहिं राम चरन अनुरागी। कलि मल रहित सुमंगल भागी।।

  209. RCM 1.15.12Open verse →

    सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।

    अर्थ · Hindi

    सपनेहुँ साचेहुँ मोहि पर जौं हर गौरि पसाउ।

  210. RCM 1.15.13Open verse →

    तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ।।15।।

    अर्थ · Hindi

    तौ फुर होउ जो कहेउँ सब भाषा भनिति प्रभाउ।।15।।

  211. RCM 1.16.1Open verse →

    बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ अवध पुरी अति पावनि। सरजू सरि कलि कलुष नसावनि।।

  212. RCM 1.16.2Open verse →

    प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी। ममता जिन्ह पर प्रभुहि न थोरी।।

  213. RCM 1.16.3Open verse →

    सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए।।

    अर्थ · Hindi

    सिय निंदक अघ ओघ नसाए। लोक बिसोक बनाइ बसाए।।

  214. RCM 1.16.4Open verse →

    बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ कौसल्या दिसि प्राची। कीरति जासु सकल जग माची।।

  215. RCM 1.16.5Open verse →

    प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटेउ जहँ रघुपति ससि चारू। बिस्व सुखद खल कमल तुसारू।।

  216. RCM 1.16.6Open verse →

    दसरथ राउ सहित सब रानी। सुकृत सुमंगल मूरति मानी।।

    अर्थ · Hindi

    दसरथ राउ सहित सब रानी। सुकृत सुमंगल मूरति मानी।।

  217. RCM 1.16.7Open verse →

    करउँ प्रनाम करम मन बानी। करहु कृपा सुत सेवक जानी।।

    अर्थ · Hindi

    करउँ प्रनाम करम मन बानी। करहु कृपा सुत सेवक जानी।।

  218. RCM 1.16.8Open verse →

    जिन्हहि बिरचि बड़ भयउ बिधाता। महिमा अवधि राम पितु माता।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्हहि बिरचि बड़ भयउ बिधाता। महिमा अवधि राम पितु माता।।

  219. RCM 1.16.9Open verse →

    बंदउँ अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ अवध भुआल सत्य प्रेम जेहि राम पद।

  220. RCM 1.16.10Open verse →

    बिछुरत दीनदयाल प्रिय तनु तृन इव परिहरेउ।।16।।

    अर्थ · Hindi

    बिछुरत दीनदयाल प्रिय तनु तृन इव परिहरेउ।।16।।

  221. RCM 1.17.1Open verse →

    प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रनवउँ परिजन सहित बिदेहू। जाहि राम पद गूढ़ सनेहू।।

  222. RCM 1.17.2Open verse →

    जोग भोग महँ राखेउ गोई। राम बिलोकत प्रगटेउ सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जोग भोग महँ राखेउ गोई। राम बिलोकत प्रगटेउ सोई।।

  223. RCM 1.17.3Open verse →

    प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना।।

    अर्थ · Hindi

    प्रनवउँ प्रथम भरत के चरना। जासु नेम ब्रत जाइ न बरना।।

  224. RCM 1.17.4Open verse →

    राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू।।

    अर्थ · Hindi

    राम चरन पंकज मन जासू। लुबुध मधुप इव तजइ न पासू।।

  225. RCM 1.17.5Open verse →

    बंदउँ लछिमन पद जलजाता। सीतल सुभग भगत सुख दाता।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ लछिमन पद जलजाता। सीतल सुभग भगत सुख दाता।।

  226. RCM 1.17.6Open verse →

    रघुपति कीरति बिमल पताका। दंड समान भयउ जस जाका।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति कीरति बिमल पताका। दंड समान भयउ जस जाका।।

  227. RCM 1.17.7Open verse →

    सेष सहस्त्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन।।

    अर्थ · Hindi

    सेष सहस्त्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन।।

  228. RCM 1.17.8Open verse →

    सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिंधु सौमित्रि गुनाकर।।

    अर्थ · Hindi

    सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिंधु सौमित्रि गुनाकर।।

  229. RCM 1.17.9Open verse →

    रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी।।

    अर्थ · Hindi

    रिपुसूदन पद कमल नमामी। सूर सुसील भरत अनुगामी।।

  230. RCM 1.17.10Open verse →

    महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    महावीर बिनवउँ हनुमाना। राम जासु जस आप बखाना।।

  231. RCM 1.17.11Open verse →

    प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।

    अर्थ · Hindi

    प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानधन।

  232. RCM 1.17.12Open verse →

    जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।17।।

    अर्थ · Hindi

    जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।17।।

  233. RCM 1.18.1Open verse →

    कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    कपिपति रीछ निसाचर राजा। अंगदादि जे कीस समाजा।।

  234. RCM 1.18.2Open verse →

    बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ सब के चरन सुहाए। अधम सरीर राम जिन्ह पाए।।

  235. RCM 1.18.3Open verse →

    रघुपति चरन उपासक जेते। खग मृग सुर नर असुर समेते।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति चरन उपासक जेते। खग मृग सुर नर असुर समेते।।

  236. RCM 1.18.4Open verse →

    बंदउँ पद सरोज सब केरे। जे बिनु काम राम के चेरे।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ पद सरोज सब केरे। जे बिनु काम राम के चेरे।।

  237. RCM 1.18.5Open verse →

    सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद।।

    अर्थ · Hindi

    सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद।।

  238. RCM 1.18.6Open verse →

    प्रनवउँ सबहिं धरनि धरि सीसा। करहु कृपा जन जानि मुनीसा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रनवउँ सबहिं धरनि धरि सीसा। करहु कृपा जन जानि मुनीसा।।

  239. RCM 1.18.7Open verse →

    जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुना निधान की।।

    अर्थ · Hindi

    जनकसुता जग जननि जानकी। अतिसय प्रिय करुना निधान की।।

  240. RCM 1.18.8Open verse →

    ताके जुग पद कमल मनावउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।

    अर्थ · Hindi

    ताके जुग पद कमल मनावउँ। जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ।।

  241. RCM 1.18.9Open verse →

    पुनि मन बचन कर्म रघुनायक। चरन कमल बंदउँ सब लायक।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि मन बचन कर्म रघुनायक। चरन कमल बंदउँ सब लायक।।

  242. RCM 1.18.10Open verse →

    राजिवनयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुख दायक।।

    अर्थ · Hindi

    राजिवनयन धरें धनु सायक। भगत बिपति भंजन सुख दायक।।

  243. RCM 1.18.11Open verse →

    गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न।

    अर्थ · Hindi

    गिरा अरथ जल बीचि सम कहिअत भिन्न न भिन्न।

  244. RCM 1.18.12Open verse →

    बदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न।।18।।

    अर्थ · Hindi

    बदउँ सीता राम पद जिन्हहि परम प्रिय खिन्न।।18।।

  245. RCM 1.19.1Open verse →

    बंदउँ नाम राम रघुवर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ नाम राम रघुवर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को।।

  246. RCM 1.19.2Open verse →

    बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो।।

  247. RCM 1.19.3Open verse →

    महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू।।

    अर्थ · Hindi

    महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू।।

  248. RCM 1.19.4Open verse →

    महिमा जासु जान गनराउ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    महिमा जासु जान गनराउ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ।।

  249. RCM 1.19.5Open verse →

    जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू।।

    अर्थ · Hindi

    जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू।।

  250. RCM 1.19.6Open verse →

    सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेई पिय संग भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेई पिय संग भवानी।।

  251. RCM 1.19.7Open verse →

    हरषे हेतु हेरि हर ही को। किय भूषन तिय भूषन ती को।।

    अर्थ · Hindi

    हरषे हेतु हेरि हर ही को। किय भूषन तिय भूषन ती को।।

  252. RCM 1.19.8Open verse →

    नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।

    अर्थ · Hindi

    नाम प्रभाउ जान सिव नीको। कालकूट फलु दीन्ह अमी को।।

  253. RCM 1.19.9Open verse →

    बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास।।

    अर्थ · Hindi

    बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास।।

  254. RCM 1.19.10Open verse →

    राम नाम बर बरन जुग सावन भादव मास।।19।।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम बर बरन जुग सावन भादव मास।।19।।

  255. RCM 1.20.1Open verse →

    आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    आखर मधुर मनोहर दोऊ। बरन बिलोचन जन जिय जोऊ।।

  256. RCM 1.20.2Open verse →

    सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरत सुलभ सुखद सब काहू। लोक लाहु परलोक निबाहू।।

  257. RCM 1.20.3Open verse →

    कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके। राम लखन सम प्रिय तुलसी के।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सुनत सुमिरत सुठि नीके। राम लखन सम प्रिय तुलसी के।।

  258. RCM 1.20.4Open verse →

    बरनत बरन प्रीति बिलगाती। ब्रह्म जीव सम सहज सँघाती।।

    अर्थ · Hindi

    बरनत बरन प्रीति बिलगाती। ब्रह्म जीव सम सहज सँघाती।।

  259. RCM 1.20.5Open verse →

    नर नारायन सरिस सुभ्राता। जग पालक बिसेषि जन त्राता।।

    अर्थ · Hindi

    नर नारायन सरिस सुभ्राता। जग पालक बिसेषि जन त्राता।।

  260. RCM 1.20.6Open verse →

    भगति सुतिय कल करन बिभूषन। जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन ।

    अर्थ · Hindi

    भगति सुतिय कल करन बिभूषन। जग हित हेतु बिमल बिधु पूषन ।

  261. RCM 1.20.7Open verse →

    स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के।।

    अर्थ · Hindi

    स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के।।

  262. RCM 1.20.8Open verse →

    जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से।।

    अर्थ · Hindi

    जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से।।

  263. RCM 1.20.9Open verse →

    एकु छत्रु एकु मुकुटमनि सब बरननि पर जोउ।

    अर्थ · Hindi

    एकु छत्रु एकु मुकुटमनि सब बरननि पर जोउ।

  264. RCM 1.20.10Open verse →

    तुलसी रघुबर नाम के बरन बिराजत दोउ।।20।।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी रघुबर नाम के बरन बिराजत दोउ।।20।।

  265. RCM 1.21.1Open verse →

    समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी।।

    अर्थ · Hindi

    समुझत सरिस नाम अरु नामी। प्रीति परसपर प्रभु अनुगामी।।

  266. RCM 1.21.2Open verse →

    नाम रूप दुइ ईस उपाधी। अकथ अनादि सुसामुझि साधी।।

    अर्थ · Hindi

    नाम रूप दुइ ईस उपाधी। अकथ अनादि सुसामुझि साधी।।

  267. RCM 1.21.3Open verse →

    को बड़ छोट कहत अपराधू। सुनि गुन भेद समुझिहहिं साधू।।

    अर्थ · Hindi

    को बड़ छोट कहत अपराधू। सुनि गुन भेद समुझिहहिं साधू।।

  268. RCM 1.21.4Open verse →

    देखिअहिं रूप नाम आधीना। रूप ग्यान नहिं नाम बिहीना।।

    अर्थ · Hindi

    देखिअहिं रूप नाम आधीना। रूप ग्यान नहिं नाम बिहीना।।

  269. RCM 1.21.5Open verse →

    रूप बिसेष नाम बिनु जानें। करतल गत न परहिं पहिचानें।।

    अर्थ · Hindi

    रूप बिसेष नाम बिनु जानें। करतल गत न परहिं पहिचानें।।

  270. RCM 1.21.6Open verse →

    सुमिरिअ नाम रूप बिनु देखें। आवत हृदयँ सनेह बिसेषें।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरिअ नाम रूप बिनु देखें। आवत हृदयँ सनेह बिसेषें।।

  271. RCM 1.21.7Open verse →

    नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    नाम रूप गति अकथ कहानी। समुझत सुखद न परति बखानी।।

  272. RCM 1.21.8Open verse →

    अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी। उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी।।

    अर्थ · Hindi

    अगुन सगुन बिच नाम सुसाखी। उभय प्रबोधक चतुर दुभाषी।।

  273. RCM 1.21.9Open verse →

    राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम मनिदीप धरु जीह देहरी द्वार।

  274. RCM 1.21.10Open verse →

    तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।।21।।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी भीतर बाहेरहुँ जौं चाहसि उजिआर।।21।।

  275. RCM 1.22.1Open verse →

    नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।।

    अर्थ · Hindi

    नाम जीहँ जपि जागहिं जोगी। बिरति बिरंचि प्रपंच बियोगी।।

  276. RCM 1.22.2Open verse →

    ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा। अकथ अनामय नाम न रूपा।।

  277. RCM 1.22.3Open verse →

    जाना चहहिं गूढ़ गति जेऊ। नाम जीहँ जपि जानहिं तेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जाना चहहिं गूढ़ गति जेऊ। नाम जीहँ जपि जानहिं तेऊ।।

  278. RCM 1.22.4Open verse →

    साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    साधक नाम जपहिं लय लाएँ। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएँ।।

  279. RCM 1.22.5Open verse →

    जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।

  280. RCM 1.22.6Open verse →

    राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा।।

    अर्थ · Hindi

    राम भगत जग चारि प्रकारा। सुकृती चारिउ अनघ उदारा।।

  281. RCM 1.22.7Open verse →

    चहू चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा।।

    अर्थ · Hindi

    चहू चतुर कहुँ नाम अधारा। ग्यानी प्रभुहि बिसेषि पिआरा।।

  282. RCM 1.22.8Open verse →

    चहुँ जुग चहुँ श्रुति ना प्रभाऊ। कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    चहुँ जुग चहुँ श्रुति ना प्रभाऊ। कलि बिसेषि नहिं आन उपाऊ।।

  283. RCM 1.22.9Open verse →

    सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।

    अर्थ · Hindi

    सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन।

  284. RCM 1.22.10Open verse →

    नाम सुप्रेम पियूष हद तिन्हहुँ किए मन मीन।।22।।

    अर्थ · Hindi

    नाम सुप्रेम पियूष हद तिन्हहुँ किए मन मीन।।22।।

  285. RCM 1.23.1Open verse →

    अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा। अकथ अगाध अनादि अनूपा।।

  286. RCM 1.23.2Open verse →

    मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें।।

    अर्थ · Hindi

    मोरें मत बड़ नामु दुहू तें। किए जेहिं जुग निज बस निज बूतें।।

  287. RCM 1.23.3Open verse →

    प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की।।

    अर्थ · Hindi

    प्रोढ़ि सुजन जनि जानहिं जन की। कहउँ प्रतीति प्रीति रुचि मन की।।

  288. RCM 1.23.4Open verse →

    एकु दारुगत देखिअ एकू। पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू।।

    अर्थ · Hindi

    एकु दारुगत देखिअ एकू। पावक सम जुग ब्रह्म बिबेकू।।

  289. RCM 1.23.5Open verse →

    उभय अगम जुग सुगम नाम तें। कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें।।

    अर्थ · Hindi

    उभय अगम जुग सुगम नाम तें। कहेउँ नामु बड़ ब्रह्म राम तें।।

  290. RCM 1.23.6Open verse →

    ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी। सत चेतन धन आनँद रासी।।

    अर्थ · Hindi

    ब्यापकु एकु ब्रह्म अबिनासी। सत चेतन धन आनँद रासी।।

  291. RCM 1.23.7Open verse →

    अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    अस प्रभु हृदयँ अछत अबिकारी। सकल जीव जग दीन दुखारी।।

  292. RCM 1.23.8Open verse →

    नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें।।

    अर्थ · Hindi

    नाम निरूपन नाम जतन तें। सोउ प्रगटत जिमि मोल रतन तें।।

  293. RCM 1.23.9Open verse →

    निरगुन तें एहि भाँति बड़ नाम प्रभाउ अपार।

    अर्थ · Hindi

    निरगुन तें एहि भाँति बड़ नाम प्रभाउ अपार।

  294. RCM 1.23.10Open verse →

    कहउँ नामु बड़ राम तें निज बिचार अनुसार।।23।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ नामु बड़ राम तें निज बिचार अनुसार।।23।।

  295. RCM 1.24.1Open verse →

    राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम भगत हित नर तनु धारी। सहि संकट किए साधु सुखारी।।

  296. RCM 1.24.2Open verse →

    नामु सप्रेम जपत अनयासा। भगत होहिं मुद मंगल बासा।।

    अर्थ · Hindi

    नामु सप्रेम जपत अनयासा। भगत होहिं मुद मंगल बासा।।

  297. RCM 1.24.3Open verse →

    राम एक तापस तिय तारी। नाम कोटि खल कुमति सुधारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम एक तापस तिय तारी। नाम कोटि खल कुमति सुधारी।।

  298. RCM 1.24.4Open verse →

    रिषि हित राम सुकेतुसुता की। सहित सेन सुत कीन्ह बिबाकी।।

    अर्थ · Hindi

    रिषि हित राम सुकेतुसुता की। सहित सेन सुत कीन्ह बिबाकी।।

  299. RCM 1.24.5Open verse →

    सहित दोष दुख दास दुरासा। दलइ नामु जिमि रबि निसि नासा।।

    अर्थ · Hindi

    सहित दोष दुख दास दुरासा। दलइ नामु जिमि रबि निसि नासा।।

  300. RCM 1.24.6Open verse →

    भंजेउ राम आपु भव चापू। भव भय भंजन नाम प्रतापू।।

    अर्थ · Hindi

    भंजेउ राम आपु भव चापू। भव भय भंजन नाम प्रतापू।।

  301. RCM 1.24.7Open verse →

    दंडक बनु प्रभु कीन्ह सुहावन। जन मन अमित नाम किए पावन।।।

    अर्थ · Hindi

    दंडक बनु प्रभु कीन्ह सुहावन। जन मन अमित नाम किए पावन।।।

  302. RCM 1.24.8Open verse →

    निसिचर निकर दले रघुनंदन। नामु सकल कलि कलुष निकंदन।।

    अर्थ · Hindi

    निसिचर निकर दले रघुनंदन। नामु सकल कलि कलुष निकंदन।।

  303. RCM 1.24.9Open verse →

    सबरी गीध सुसेवकनि सुगति दीन्हि रघुनाथ।

    अर्थ · Hindi

    सबरी गीध सुसेवकनि सुगति दीन्हि रघुनाथ।

  304. RCM 1.24.10Open verse →

    नाम उधारे अमित खल बेद बिदित गुन गाथ।।24।।

    अर्थ · Hindi

    नाम उधारे अमित खल बेद बिदित गुन गाथ।।24।।

  305. RCM 1.25.1Open verse →

    राम सुकंठ बिभीषन दोऊ। राखे सरन जान सबु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    राम सुकंठ बिभीषन दोऊ। राखे सरन जान सबु कोऊ।।

  306. RCM 1.25.2Open verse →

    नाम गरीब अनेक नेवाजे। लोक बेद बर बिरिद बिराजे।।

    अर्थ · Hindi

    नाम गरीब अनेक नेवाजे। लोक बेद बर बिरिद बिराजे।।

  307. RCM 1.25.3Open verse →

    राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा।।

    अर्थ · Hindi

    राम भालु कपि कटकु बटोरा। सेतु हेतु श्रमु कीन्ह न थोरा।।

  308. RCM 1.25.4Open verse →

    नामु लेत भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारु सुजन मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नामु लेत भवसिंधु सुखाहीं। करहु बिचारु सुजन मन माहीं।।

  309. RCM 1.25.5Open verse →

    राम सकुल रन रावनु मारा। सीय सहित निज पुर पगु धारा।।

    अर्थ · Hindi

    राम सकुल रन रावनु मारा। सीय सहित निज पुर पगु धारा।।

  310. RCM 1.25.6Open verse →

    राजा रामु अवध रजधानी। गावत गुन सुर मुनि बर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    राजा रामु अवध रजधानी। गावत गुन सुर मुनि बर बानी।।

  311. RCM 1.25.7Open verse →

    सेवक सुमिरत नामु सप्रीती। बिनु श्रम प्रबल मोह दलु जीती।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सुमिरत नामु सप्रीती। बिनु श्रम प्रबल मोह दलु जीती।।

  312. RCM 1.25.8Open verse →

    फिरत सनेहँ मगन सुख अपनें। नाम प्रसाद सोच नहिं सपनें।।

    अर्थ · Hindi

    फिरत सनेहँ मगन सुख अपनें। नाम प्रसाद सोच नहिं सपनें।।

  313. RCM 1.25.9Open verse →

    ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर दायक बर दानि।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्म राम तें नामु बड़ बर दायक बर दानि।

  314. RCM 1.25.10Open verse →

    रामचरित सत कोटि महँ लिय महेस जियँ जानि।।25।।

    अर्थ · Hindi

    रामचरित सत कोटि महँ लिय महेस जियँ जानि।।25।।

  315. RCM 1.26.1Open verse →

    नाम प्रसाद संभु अबिनासी। साजु अमंगल मंगल रासी।।

    अर्थ · Hindi

    नाम प्रसाद संभु अबिनासी। साजु अमंगल मंगल रासी।।

  316. RCM 1.26.2Open verse →

    सुक सनकादि सिद्ध मुनि जोगी। नाम प्रसाद ब्रह्मसुख भोगी।।

    अर्थ · Hindi

    सुक सनकादि सिद्ध मुनि जोगी। नाम प्रसाद ब्रह्मसुख भोगी।।

  317. RCM 1.26.3Open verse →

    नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू।।

    अर्थ · Hindi

    नारद जानेउ नाम प्रतापू। जग प्रिय हरि हरि हर प्रिय आपू।।

  318. RCM 1.26.4Open verse →

    नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू। भगत सिरोमनि भे प्रहलादू।।

    अर्थ · Hindi

    नामु जपत प्रभु कीन्ह प्रसादू। भगत सिरोमनि भे प्रहलादू।।

  319. RCM 1.26.5Open verse →

    ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    ध्रुवँ सगलानि जपेउ हरि नाऊँ। पायउ अचल अनूपम ठाऊँ।।

  320. RCM 1.26.6Open verse →

    सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि पवनसुत पावन नामू। अपने बस करि राखे रामू।।

  321. RCM 1.26.7Open verse →

    अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ। भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अपतु अजामिलु गजु गनिकाऊ। भए मुकुत हरि नाम प्रभाऊ।।

  322. RCM 1.26.8Open verse →

    कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहौं कहाँ लगि नाम बड़ाई। रामु न सकहिं नाम गुन गाई।।

  323. RCM 1.26.9Open verse →

    नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।

    अर्थ · Hindi

    नामु राम को कलपतरु कलि कल्यान निवासु।

  324. RCM 1.26.10Open verse →

    जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु।।26।।

    अर्थ · Hindi

    जो सुमिरत भयो भाँग तें तुलसी तुलसीदासु।।26।।

  325. RCM 1.27.1Open verse →

    चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका। भए नाम जपि जीव बिसोका।।

    अर्थ · Hindi

    चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका। भए नाम जपि जीव बिसोका।।

  326. RCM 1.27.2Open verse →

    बेद पुरान संत मत एहू। सकल सुकृत फल राम सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    बेद पुरान संत मत एहू। सकल सुकृत फल राम सनेहू।।

  327. RCM 1.27.3Open verse →

    ध्यानु प्रथम जुग मखबिधि दूजें। द्वापर परितोषत प्रभु पूजें।।

    अर्थ · Hindi

    ध्यानु प्रथम जुग मखबिधि दूजें। द्वापर परितोषत प्रभु पूजें।।

  328. RCM 1.27.4Open verse →

    कलि केवल मल मूल मलीना। पाप पयोनिधि जन मन मीना।।

    अर्थ · Hindi

    कलि केवल मल मूल मलीना। पाप पयोनिधि जन मन मीना।।

  329. RCM 1.27.5Open verse →

    नाम कामतरु काल कराला। सुमिरत समन सकल जग जाला।।

    अर्थ · Hindi

    नाम कामतरु काल कराला। सुमिरत समन सकल जग जाला।।

  330. RCM 1.27.6Open verse →

    राम नाम कलि अभिमत दाता। हित परलोक लोक पितु माता।।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम कलि अभिमत दाता। हित परलोक लोक पितु माता।।

  331. RCM 1.27.7Open verse →

    नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं कलि करम न भगति बिबेकू। राम नाम अवलंबन एकू।।

  332. RCM 1.27.8Open verse →

    कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।।

    अर्थ · Hindi

    कालनेमि कलि कपट निधानू। नाम सुमति समरथ हनुमानू।।

  333. RCM 1.27.9Open verse →

    राम नाम नरकेसरी कनककसिपु कलिकाल।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम नरकेसरी कनककसिपु कलिकाल।

  334. RCM 1.27.10Open verse →

    जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल।।27।।

    अर्थ · Hindi

    जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल।।27।।

  335. RCM 1.28.1Open verse →

    भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ।।

    अर्थ · Hindi

    भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ। नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ।।

  336. RCM 1.28.2Open verse →

    सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा। करउँ नाइ रघुनाथहि माथा।।

  337. RCM 1.28.3Open verse →

    मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।

    अर्थ · Hindi

    मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती।।

  338. RCM 1.28.4Open verse →

    राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि दैखि दयानिधि पोसो।।

    अर्थ · Hindi

    राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो। निज दिसि दैखि दयानिधि पोसो।।

  339. RCM 1.28.5Open verse →

    लोकहुँ बेद सुसाहिब रीतीं। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    लोकहुँ बेद सुसाहिब रीतीं। बिनय सुनत पहिचानत प्रीती।।

  340. RCM 1.28.6Open verse →

    गनी गरीब ग्रामनर नागर। पंडित मूढ़ मलीन उजागर।।

    अर्थ · Hindi

    गनी गरीब ग्रामनर नागर। पंडित मूढ़ मलीन उजागर।।

  341. RCM 1.28.7Open verse →

    सुकबि कुकबि निज मति अनुहारी। नृपहि सराहत सब नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुकबि कुकबि निज मति अनुहारी। नृपहि सराहत सब नर नारी।।

  342. RCM 1.28.8Open verse →

    साधु सुजान सुसील नृपाला। ईस अंस भव परम कृपाला।।

    अर्थ · Hindi

    साधु सुजान सुसील नृपाला। ईस अंस भव परम कृपाला।।

  343. RCM 1.28.9Open verse →

    सुनि सनमानहिं सबहि सुबानी। भनिति भगति नति गति पहिचानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनमानहिं सबहि सुबानी। भनिति भगति नति गति पहिचानी।।

  344. RCM 1.28.10Open verse →

    यह प्राकृत महिपाल सुभाऊ। जान सिरोमनि कोसलराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    यह प्राकृत महिपाल सुभाऊ। जान सिरोमनि कोसलराऊ।।

  345. RCM 1.28.11Open verse →

    रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें।।

    अर्थ · Hindi

    रीझत राम सनेह निसोतें। को जग मंद मलिनमति मोतें।।

  346. RCM 1.28.12Open verse →

    सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु।

    अर्थ · Hindi

    सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु।

  347. RCM 1.28.13Open verse →

    उपल किए जलजान जेहिं सचिव सुमति कपि भालु।।28(क)।।

    अर्थ · Hindi

    उपल किए जलजान जेहिं सचिव सुमति कपि भालु।।28(क)।।

  348. RCM 1.28.14Open verse →

    हौहु कहावत सबु कहत राम सहत उपहास।

    अर्थ · Hindi

    हौहु कहावत सबु कहत राम सहत उपहास।

  349. RCM 1.28.15Open verse →

    साहिब सीतानाथ सो सेवक तुलसीदास।।28(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    साहिब सीतानाथ सो सेवक तुलसीदास।।28(ख)।।

  350. RCM 1.29.1Open verse →

    अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी। सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी।।

    अर्थ · Hindi

    अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी। सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी।।

  351. RCM 1.29.2Open verse →

    समुझि सहम मोहि अपडर अपनें। सो सुधि राम कीन्हि नहिं सपनें।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि सहम मोहि अपडर अपनें। सो सुधि राम कीन्हि नहिं सपनें।।

  352. RCM 1.29.3Open verse →

    सुनि अवलोकि सुचित चख चाही। भगति मोरि मति स्वामि सराही।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि अवलोकि सुचित चख चाही। भगति मोरि मति स्वामि सराही।।

  353. RCM 1.29.4Open verse →

    कहत नसाइ होइ हियँ नीकी। रीझत राम जानि जन जी की।।

    अर्थ · Hindi

    कहत नसाइ होइ हियँ नीकी। रीझत राम जानि जन जी की।।

  354. RCM 1.29.5Open verse →

    रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।।

    अर्थ · Hindi

    रहति न प्रभु चित चूक किए की। करत सुरति सय बार हिए की।।

  355. RCM 1.29.6Open verse →

    जेहिं अघ बधेउ ब्याध जिमि बाली। फिरि सुकंठ सोइ कीन्ह कुचाली।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं अघ बधेउ ब्याध जिमि बाली। फिरि सुकंठ सोइ कीन्ह कुचाली।।

  356. RCM 1.29.7Open verse →

    सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ करतूति बिभीषन केरी। सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी।।

  357. RCM 1.29.8Open verse →

    ते भरतहि भेंटत सनमाने। राजसभाँ रघुबीर बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    ते भरतहि भेंटत सनमाने। राजसभाँ रघुबीर बखाने।।

  358. RCM 1.29.9Open verse →

    प्रभु तरु तर कपि डार पर ते किए आपु समान।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु तरु तर कपि डार पर ते किए आपु समान।।

  359. RCM 1.29.10Open verse →

    तुलसी कहूँ न राम से साहिब सीलनिधान।।29(क)।।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी कहूँ न राम से साहिब सीलनिधान।।29(क)।।

  360. RCM 1.29.11Open verse →

    राम निकाईं रावरी है सबही को नीक।

    अर्थ · Hindi

    राम निकाईं रावरी है सबही को नीक।

  361. RCM 1.29.12Open verse →

    जों यह साँची है सदा तौ नीको तुलसीक।।29(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    जों यह साँची है सदा तौ नीको तुलसीक।।29(ख)।।

  362. RCM 1.29.13Open verse →

    एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि निज गुन दोष कहि सबहि बहुरि सिरु नाइ।

  363. RCM 1.29.14Open verse →

    बरनउँ रघुबर बिसद जसु सुनि कलि कलुष नसाइ।।29(ग)।।

    अर्थ · Hindi

    बरनउँ रघुबर बिसद जसु सुनि कलि कलुष नसाइ।।29(ग)।।

  364. RCM 1.30.1Open verse →

    जागबलिक जो कथा सुहाई। भरद्वाज मुनिबरहि सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    जागबलिक जो कथा सुहाई। भरद्वाज मुनिबरहि सुनाई।।

  365. RCM 1.30.2Open verse →

    कहिहउँ सोइ संबाद बखानी। सुनहुँ सकल सज्जन सुखु मानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहिहउँ सोइ संबाद बखानी। सुनहुँ सकल सज्जन सुखु मानी।।

  366. RCM 1.30.3Open verse →

    संभु कीन्ह यह चरित सुहावा। बहुरि कृपा करि उमहि सुनावा।।

    अर्थ · Hindi

    संभु कीन्ह यह चरित सुहावा। बहुरि कृपा करि उमहि सुनावा।।

  367. RCM 1.30.4Open verse →

    सोइ सिव कागभुसुंडिहि दीन्हा। राम भगत अधिकारी चीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ सिव कागभुसुंडिहि दीन्हा। राम भगत अधिकारी चीन्हा।।

  368. RCM 1.30.5Open verse →

    तेहि सन जागबलिक पुनि पावा। तिन्ह पुनि भरद्वाज प्रति गावा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि सन जागबलिक पुनि पावा। तिन्ह पुनि भरद्वाज प्रति गावा।।

  369. RCM 1.30.6Open verse →

    ते श्रोता बकता समसीला। सवँदरसी जानहिं हरिलीला।।

    अर्थ · Hindi

    ते श्रोता बकता समसीला। सवँदरसी जानहिं हरिलीला।।

  370. RCM 1.30.7Open verse →

    जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना।।

    अर्थ · Hindi

    जानहिं तीनि काल निज ग्याना। करतल गत आमलक समाना।।

  371. RCM 1.30.8Open verse →

    औरउ जे हरिभगत सुजाना। कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    औरउ जे हरिभगत सुजाना। कहहिं सुनहिं समुझहिं बिधि नाना।।

  372. RCM 1.30.9Open verse →

    मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत।

    अर्थ · Hindi

    मै पुनि निज गुर सन सुनी कथा सो सूकरखेत।

  373. RCM 1.30.10Open verse →

    समुझी नहि तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत।।30(क)।।

    अर्थ · Hindi

    समुझी नहि तसि बालपन तब अति रहेउँ अचेत।।30(क)।।

  374. RCM 1.30.11Open verse →

    श्रोता बकता ग्याननिधि कथा राम कै गूढ़।

    अर्थ · Hindi

    श्रोता बकता ग्याननिधि कथा राम कै गूढ़।

  375. RCM 1.30.12Open verse →

    किमि समुझौं मै जीव जड़ कलि मल ग्रसित बिमूढ़।।30(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    किमि समुझौं मै जीव जड़ कलि मल ग्रसित बिमूढ़।।30(ख)।।

  376. RCM 1.31.1Open verse →

    तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा।।

  377. RCM 1.31.2Open verse →

    भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई।।

    अर्थ · Hindi

    भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई।।

  378. RCM 1.31.3Open verse →

    जस कछु बुधि बिबेक बल मेरें। तस कहिहउँ हियँ हरि के प्रेरें।।

    अर्थ · Hindi

    जस कछु बुधि बिबेक बल मेरें। तस कहिहउँ हियँ हरि के प्रेरें।।

  379. RCM 1.31.4Open verse →

    निज संदेह मोह भ्रम हरनी। करउँ कथा भव सरिता तरनी।।

    अर्थ · Hindi

    निज संदेह मोह भ्रम हरनी। करउँ कथा भव सरिता तरनी।।

  380. RCM 1.31.5Open verse →

    बुध बिश्राम सकल जन रंजनि। रामकथा कलि कलुष बिभंजनि।।

    अर्थ · Hindi

    बुध बिश्राम सकल जन रंजनि। रामकथा कलि कलुष बिभंजनि।।

  381. RCM 1.31.6Open verse →

    रामकथा कलि पंनग भरनी। पुनि बिबेक पावक कहुँ अरनी।।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा कलि पंनग भरनी। पुनि बिबेक पावक कहुँ अरनी।।

  382. RCM 1.31.7Open verse →

    रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा कलि कामद गाई। सुजन सजीवनि मूरि सुहाई।।

  383. RCM 1.31.8Open verse →

    सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ बसुधातल सुधा तरंगिनि। भय भंजनि भ्रम भेक भुअंगिनि।।

  384. RCM 1.31.9Open verse →

    असुर सेन सम नरक निकंदिनि। साधु बिबुध कुल हित गिरिनंदिनि।।

    अर्थ · Hindi

    असुर सेन सम नरक निकंदिनि। साधु बिबुध कुल हित गिरिनंदिनि।।

  385. RCM 1.31.10Open verse →

    संत समाज पयोधि रमा सी। बिस्व भार भर अचल छमा सी।।

    अर्थ · Hindi

    संत समाज पयोधि रमा सी। बिस्व भार भर अचल छमा सी।।

  386. RCM 1.31.11Open verse →

    जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी।।

    अर्थ · Hindi

    जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी। जीवन मुकुति हेतु जनु कासी।।

  387. RCM 1.31.12Open verse →

    रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी। तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी। तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी।।

  388. RCM 1.31.13Open verse →

    सिवप्रय मेकल सैल सुता सी। सकल सिद्धि सुख संपति रासी।।

    अर्थ · Hindi

    सिवप्रय मेकल सैल सुता सी। सकल सिद्धि सुख संपति रासी।।

  389. RCM 1.31.14Open verse →

    सदगुन सुरगन अंब अदिति सी। रघुबर भगति प्रेम परमिति सी।।

    अर्थ · Hindi

    सदगुन सुरगन अंब अदिति सी। रघुबर भगति प्रेम परमिति सी।।

  390. RCM 1.31.15Open verse →

    राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।

    अर्थ · Hindi

    राम कथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।

  391. RCM 1.31.16Open verse →

    तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु।।31।।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु।।31।।

  392. RCM 1.32.1Open verse →

    राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।

    अर्थ · Hindi

    राम चरित चिंतामनि चारू। संत सुमति तिय सुभग सिंगारू।।

  393. RCM 1.32.2Open verse →

    जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के।।

    अर्थ · Hindi

    जग मंगल गुन ग्राम राम के। दानि मुकुति धन धरम धाम के।।

  394. RCM 1.32.3Open verse →

    सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।

    अर्थ · Hindi

    सदगुर ग्यान बिराग जोग के। बिबुध बैद भव भीम रोग के।।

  395. RCM 1.32.4Open verse →

    जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के।।

    अर्थ · Hindi

    जननि जनक सिय राम प्रेम के। बीज सकल ब्रत धरम नेम के।।

  396. RCM 1.32.5Open verse →

    समन पाप संताप सोक के। प्रिय पालक परलोक लोक के।।

    अर्थ · Hindi

    समन पाप संताप सोक के। प्रिय पालक परलोक लोक के।।

  397. RCM 1.32.6Open verse →

    सचिव सुभट भूपति बिचार के। कुंभज लोभ उदधि अपार के।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव सुभट भूपति बिचार के। कुंभज लोभ उदधि अपार के।।

  398. RCM 1.32.7Open verse →

    काम कोह कलिमल करिगन के। केहरि सावक जन मन बन के।।

    अर्थ · Hindi

    काम कोह कलिमल करिगन के। केहरि सावक जन मन बन के।।

  399. RCM 1.32.8Open verse →

    अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद घन दारिद दवारि के।।

    अर्थ · Hindi

    अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद घन दारिद दवारि के।।

  400. RCM 1.32.9Open verse →

    मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के।।

    अर्थ · Hindi

    मंत्र महामनि बिषय ब्याल के। मेटत कठिन कुअंक भाल के।।

  401. RCM 1.32.10Open verse →

    हरन मोह तम दिनकर कर से। सेवक सालि पाल जलधर से।।

    अर्थ · Hindi

    हरन मोह तम दिनकर कर से। सेवक सालि पाल जलधर से।।

  402. RCM 1.32.11Open verse →

    अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।

    अर्थ · Hindi

    अभिमत दानि देवतरु बर से। सेवत सुलभ सुखद हरि हर से।।

  403. RCM 1.32.12Open verse →

    सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से।।

    अर्थ · Hindi

    सुकबि सरद नभ मन उडगन से। रामभगत जन जीवन धन से।।

  404. RCM 1.32.13Open verse →

    सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुकृत फल भूरि भोग से। जग हित निरुपधि साधु लोग से।।

  405. RCM 1.32.14Open verse →

    सेवक मन मानस मराल से। पावक गंग तंरग माल से।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक मन मानस मराल से। पावक गंग तंरग माल से।।

  406. RCM 1.32.15Open verse →

    कुपथ कुतरक कुचालि कलि कपट दंभ पाषंड।

    अर्थ · Hindi

    कुपथ कुतरक कुचालि कलि कपट दंभ पाषंड।

  407. RCM 1.32.16Open verse →

    दहन राम गुन ग्राम जिमि इंधन अनल प्रचंड।।32(क)।।

    अर्थ · Hindi

    दहन राम गुन ग्राम जिमि इंधन अनल प्रचंड।।32(क)।।

  408. RCM 1.32.17Open verse →

    रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु।

    अर्थ · Hindi

    रामचरित राकेस कर सरिस सुखद सब काहु।

  409. RCM 1.32.18Open verse →

    सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु।।32(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    सज्जन कुमुद चकोर चित हित बिसेषि बड़ लाहु।।32(ख)।।

  410. RCM 1.33.1Open verse →

    कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी। जेहि बिधि संकर कहा बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्हि प्रस्न जेहि भाँति भवानी। जेहि बिधि संकर कहा बखानी।।

  411. RCM 1.33.2Open verse →

    सो सब हेतु कहब मैं गाई। कथाप्रबंध बिचित्र बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    सो सब हेतु कहब मैं गाई। कथाप्रबंध बिचित्र बनाई।।

  412. RCM 1.33.3Open verse →

    जेहि यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करैं सुनि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करैं सुनि सोई।।

  413. RCM 1.33.4Open verse →

    कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी।।

    अर्थ · Hindi

    कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी।।

  414. RCM 1.33.5Open verse →

    रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं।।

  415. RCM 1.33.6Open verse →

    नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा।।

  416. RCM 1.33.7Open verse →

    कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए।।

    अर्थ · Hindi

    कलपभेद हरिचरित सुहाए। भाँति अनेक मुनीसन्ह गाए।।

  417. RCM 1.33.8Open verse →

    करिअ न संसय अस उर आनी। सुनिअ कथा सारद रति मानी।।

    अर्थ · Hindi

    करिअ न संसय अस उर आनी। सुनिअ कथा सारद रति मानी।।

  418. RCM 1.33.9Open verse →

    राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार।

    अर्थ · Hindi

    राम अनंत अनंत गुन अमित कथा बिस्तार।

  419. RCM 1.33.10Open verse →

    सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार।।33।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि आचरजु न मानिहहिं जिन्ह कें बिमल बिचार।।33।।

  420. RCM 1.34.1Open verse →

    एहि बिधि सब संसय करि दूरी। सिर धरि गुर पद पंकज धूरी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सब संसय करि दूरी। सिर धरि गुर पद पंकज धूरी।।

  421. RCM 1.34.2Open verse →

    पुनि सबही बिनवउँ कर जोरी। करत कथा जेहिं लाग न खोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि सबही बिनवउँ कर जोरी। करत कथा जेहिं लाग न खोरी।।

  422. RCM 1.34.3Open verse →

    सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सिवहि नाइ अब माथा। बरनउँ बिसद राम गुन गाथा।।

  423. RCM 1.34.4Open verse →

    संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।।

    अर्थ · Hindi

    संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा।।

  424. RCM 1.34.5Open verse →

    नौमी भौम बार मधु मासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।।

    अर्थ · Hindi

    नौमी भौम बार मधु मासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा।।

  425. RCM 1.34.6Open verse →

    जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं। तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं। तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिं।।

  426. RCM 1.34.7Open verse →

    असुर नाग खग नर मुनि देवा। आइ करहिं रघुनायक सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    असुर नाग खग नर मुनि देवा। आइ करहिं रघुनायक सेवा।।

  427. RCM 1.34.8Open verse →

    जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना। करहिं राम कल कीरति गाना।।

    अर्थ · Hindi

    जन्म महोत्सव रचहिं सुजाना। करहिं राम कल कीरति गाना।।

  428. RCM 1.34.9Open verse →

    मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर।

    अर्थ · Hindi

    मज्जहि सज्जन बृंद बहु पावन सरजू नीर।

  429. RCM 1.34.10Open verse →

    जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर।।34।।

    अर्थ · Hindi

    जपहिं राम धरि ध्यान उर सुंदर स्याम सरीर।।34।।

  430. RCM 1.35.1Open verse →

    दरस परस मज्जन अरु पाना। हरइ पाप कह बेद पुराना।।

    अर्थ · Hindi

    दरस परस मज्जन अरु पाना। हरइ पाप कह बेद पुराना।।

  431. RCM 1.35.2Open verse →

    नदी पुनीत अमित महिमा अति। कहि न सकइ सारद बिमलमति।।

    अर्थ · Hindi

    नदी पुनीत अमित महिमा अति। कहि न सकइ सारद बिमलमति।।

  432. RCM 1.35.3Open verse →

    राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि।।

    अर्थ · Hindi

    राम धामदा पुरी सुहावनि। लोक समस्त बिदित अति पावनि।।

  433. RCM 1.35.4Open verse →

    चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजे तनु नहि संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    चारि खानि जग जीव अपारा। अवध तजे तनु नहि संसारा।।

  434. RCM 1.35.5Open verse →

    सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि पुरी मनोहर जानी। सकल सिद्धिप्रद मंगल खानी।।

  435. RCM 1.35.6Open verse →

    बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा। सुनत नसाहिं काम मद दंभा।।

    अर्थ · Hindi

    बिमल कथा कर कीन्ह अरंभा। सुनत नसाहिं काम मद दंभा।।

  436. RCM 1.35.7Open verse →

    रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    रामचरितमानस एहि नामा। सुनत श्रवन पाइअ बिश्रामा।।

  437. RCM 1.35.8Open verse →

    मन करि विषय अनल बन जरई। होइ सुखी जौ एहिं सर परई।।

    अर्थ · Hindi

    मन करि विषय अनल बन जरई। होइ सुखी जौ एहिं सर परई।।

  438. RCM 1.35.9Open verse →

    रामचरितमानस मुनि भावन। बिरचेउ संभु सुहावन पावन।।

    अर्थ · Hindi

    रामचरितमानस मुनि भावन। बिरचेउ संभु सुहावन पावन।।

  439. RCM 1.35.10Open verse →

    त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन। कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन।।

    अर्थ · Hindi

    त्रिबिध दोष दुख दारिद दावन। कलि कुचालि कुलि कलुष नसावन।।

  440. RCM 1.35.11Open verse →

    रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा।।

    अर्थ · Hindi

    रचि महेस निज मानस राखा। पाइ सुसमउ सिवा सन भाषा।।

  441. RCM 1.35.12Open verse →

    तातें रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर।।

    अर्थ · Hindi

    तातें रामचरितमानस बर। धरेउ नाम हियँ हेरि हरषि हर।।

  442. RCM 1.35.13Open verse →

    कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई। सादर सुनहु सुजन मन लाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ कथा सोइ सुखद सुहाई। सादर सुनहु सुजन मन लाई।।

  443. RCM 1.35.14Open verse →

    जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।

    अर्थ · Hindi

    जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।

  444. RCM 1.35.15Open verse →

    अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु।।35।।

    अर्थ · Hindi

    अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु।।35।।

  445. RCM 1.36.1Open verse →

    संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी। रामचरितमानस कबि तुलसी।।

    अर्थ · Hindi

    संभु प्रसाद सुमति हियँ हुलसी। रामचरितमानस कबि तुलसी।।

  446. RCM 1.36.2Open verse →

    करइ मनोहर मति अनुहारी। सुजन सुचित सुनि लेहु सुधारी।।

    अर्थ · Hindi

    करइ मनोहर मति अनुहारी। सुजन सुचित सुनि लेहु सुधारी।।

  447. RCM 1.36.3Open verse →

    सुमति भूमि थल हृदय अगाधू। बेद पुरान उदधि घन साधू।।

    अर्थ · Hindi

    सुमति भूमि थल हृदय अगाधू। बेद पुरान उदधि घन साधू।।

  448. RCM 1.36.4Open verse →

    बरषहिं राम सुजस बर बारी। मधुर मनोहर मंगलकारी।।

    अर्थ · Hindi

    बरषहिं राम सुजस बर बारी। मधुर मनोहर मंगलकारी।।

  449. RCM 1.36.5Open verse →

    लीला सगुन जो कहहिं बखानी। सोइ स्वच्छता करइ मल हानी।।

    अर्थ · Hindi

    लीला सगुन जो कहहिं बखानी। सोइ स्वच्छता करइ मल हानी।।

  450. RCM 1.36.6Open verse →

    प्रेम भगति जो बरनि न जाई। सोइ मधुरता सुसीतलताई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम भगति जो बरनि न जाई। सोइ मधुरता सुसीतलताई।।

  451. RCM 1.36.7Open verse →

    सो जल सुकृत सालि हित होई। राम भगत जन जीवन सोई।।

    अर्थ · Hindi

    सो जल सुकृत सालि हित होई। राम भगत जन जीवन सोई।।

  452. RCM 1.36.8Open verse →

    मेधा महि गत सो जल पावन। सकिलि श्रवन मग चलेउ सुहावन।।

    अर्थ · Hindi

    मेधा महि गत सो जल पावन। सकिलि श्रवन मग चलेउ सुहावन।।

  453. RCM 1.36.9Open verse →

    भरेउ सुमानस सुथल थिराना। सुखद सीत रुचि चारु चिराना।।

    अर्थ · Hindi

    भरेउ सुमानस सुथल थिराना। सुखद सीत रुचि चारु चिराना।।

  454. RCM 1.36.10Open verse →

    सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि।

    अर्थ · Hindi

    सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि।

  455. RCM 1.36.11Open verse →

    तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि।।36।।

    अर्थ · Hindi

    तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि।।36।।

  456. RCM 1.37.1Open verse →

    सप्त प्रबन्ध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना।।

    अर्थ · Hindi

    सप्त प्रबन्ध सुभग सोपाना। ग्यान नयन निरखत मन माना।।

  457. RCM 1.37.2Open verse →

    रघुपति महिमा अगुन अबाधा। बरनब सोइ बर बारि अगाधा।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति महिमा अगुन अबाधा। बरनब सोइ बर बारि अगाधा।।

  458. RCM 1.37.3Open verse →

    राम सीय जस सलिल सुधासम। उपमा बीचि बिलास मनोरम।।

    अर्थ · Hindi

    राम सीय जस सलिल सुधासम। उपमा बीचि बिलास मनोरम।।

  459. RCM 1.37.4Open verse →

    पुरइनि सघन चारु चौपाई। जुगुति मंजु मनि सीप सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुरइनि सघन चारु चौपाई। जुगुति मंजु मनि सीप सुहाई।।

  460. RCM 1.37.5Open verse →

    छंद सोरठा सुंदर दोहा। सोइ बहुरंग कमल कुल सोहा।।

    अर्थ · Hindi

    छंद सोरठा सुंदर दोहा। सोइ बहुरंग कमल कुल सोहा।।

  461. RCM 1.37.6Open verse →

    अरथ अनूप सुमाव सुभासा। सोइ पराग मकरंद सुबासा।।

    अर्थ · Hindi

    अरथ अनूप सुमाव सुभासा। सोइ पराग मकरंद सुबासा।।

  462. RCM 1.37.7Open verse →

    सुकृत पुंज मंजुल अलि माला। ग्यान बिराग बिचार मराला।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृत पुंज मंजुल अलि माला। ग्यान बिराग बिचार मराला।।

  463. RCM 1.37.8Open verse →

    धुनि अवरेब कबित गुन जाती। मीन मनोहर ते बहुभाँती।।

    अर्थ · Hindi

    धुनि अवरेब कबित गुन जाती। मीन मनोहर ते बहुभाँती।।

  464. RCM 1.37.9Open verse →

    अरथ धरम कामादिक चारी। कहब ग्यान बिग्यान बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    अरथ धरम कामादिक चारी। कहब ग्यान बिग्यान बिचारी।।

  465. RCM 1.37.10Open verse →

    नव रस जप तप जोग बिरागा। ते सब जलचर चारु तड़ागा।।

    अर्थ · Hindi

    नव रस जप तप जोग बिरागा। ते सब जलचर चारु तड़ागा।।

  466. RCM 1.37.11Open verse →

    सुकृती साधु नाम गुन गाना। ते बिचित्र जल बिहग समाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृती साधु नाम गुन गाना। ते बिचित्र जल बिहग समाना।।

  467. RCM 1.37.12Open verse →

    संतसभा चहुँ दिसि अवँराई। श्रद्धा रितु बसंत सम गाई।।

    अर्थ · Hindi

    संतसभा चहुँ दिसि अवँराई। श्रद्धा रितु बसंत सम गाई।।

  468. RCM 1.37.13Open verse →

    भगति निरुपन बिबिध बिधाना। छमा दया दम लता बिताना।।

    अर्थ · Hindi

    भगति निरुपन बिबिध बिधाना। छमा दया दम लता बिताना।।

  469. RCM 1.37.14Open verse →

    सम जम नियम फूल फल ग्याना। हरि पत रति रस बेद बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    सम जम नियम फूल फल ग्याना। हरि पत रति रस बेद बखाना।।

  470. RCM 1.37.15Open verse →

    औरउ कथा अनेक प्रसंगा। तेइ सुक पिक बहुबरन बिहंगा।।

    अर्थ · Hindi

    औरउ कथा अनेक प्रसंगा। तेइ सुक पिक बहुबरन बिहंगा।।

  471. RCM 1.37.16Open verse →

    पुलक बाटिका बाग बन सुख सुबिहंग बिहारु।

    अर्थ · Hindi

    पुलक बाटिका बाग बन सुख सुबिहंग बिहारु।

  472. RCM 1.37.17Open verse →

    माली सुमन सनेह जल सींचत लोचन चारु।।37।।

    अर्थ · Hindi

    माली सुमन सनेह जल सींचत लोचन चारु।।37।।

  473. RCM 1.38.1Open verse →

    जे गावहिं यह चरित सँभारे। तेइ एहि ताल चतुर रखवारे।।

    अर्थ · Hindi

    जे गावहिं यह चरित सँभारे। तेइ एहि ताल चतुर रखवारे।।

  474. RCM 1.38.2Open verse →

    सदा सुनहिं सादर नर नारी। तेइ सुरबर मानस अधिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    सदा सुनहिं सादर नर नारी। तेइ सुरबर मानस अधिकारी।।

  475. RCM 1.38.3Open verse →

    अति खल जे बिषई बग कागा। एहिं सर निकट न जाहिं अभागा।।

    अर्थ · Hindi

    अति खल जे बिषई बग कागा। एहिं सर निकट न जाहिं अभागा।।

  476. RCM 1.38.4Open verse →

    संबुक भेक सेवार समाना। इहाँ न बिषय कथा रस नाना।।

    अर्थ · Hindi

    संबुक भेक सेवार समाना। इहाँ न बिषय कथा रस नाना।।

  477. RCM 1.38.5Open verse →

    तेहि कारन आवत हियँ हारे। कामी काक बलाक बिचारे।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कारन आवत हियँ हारे। कामी काक बलाक बिचारे।।

  478. RCM 1.38.6Open verse →

    आवत एहिं सर अति कठिनाई। राम कृपा बिनु आइ न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    आवत एहिं सर अति कठिनाई। राम कृपा बिनु आइ न जाई।।

  479. RCM 1.38.7Open verse →

    कठिन कुसंग कुपंथ कराला। तिन्ह के बचन बाघ हरि ब्याला।।

    अर्थ · Hindi

    कठिन कुसंग कुपंथ कराला। तिन्ह के बचन बाघ हरि ब्याला।।

  480. RCM 1.38.8Open verse →

    गृह कारज नाना जंजाला। ते अति दुर्गम सैल बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    गृह कारज नाना जंजाला। ते अति दुर्गम सैल बिसाला।।

  481. RCM 1.38.9Open verse →

    बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना।।

    अर्थ · Hindi

    बन बहु बिषम मोह मद माना। नदीं कुतर्क भयंकर नाना।।

  482. RCM 1.38.10Open verse →

    जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ।

    अर्थ · Hindi

    जे श्रद्धा संबल रहित नहि संतन्ह कर साथ।

  483. RCM 1.38.11Open verse →

    तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ।।38।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह कहुँ मानस अगम अति जिन्हहि न प्रिय रघुनाथ।।38।।

  484. RCM 1.39.1Open verse →

    जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई। जातहिं नींद जुड़ाई होई।।

  485. RCM 1.39.2Open verse →

    जड़ता जाड़ बिषम उर लागा। गएहुँ न मज्जन पाव अभागा।।

    अर्थ · Hindi

    जड़ता जाड़ बिषम उर लागा। गएहुँ न मज्जन पाव अभागा।।

  486. RCM 1.39.3Open verse →

    करि न जाइ सर मज्जन पाना। फिरि आवइ समेत अभिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    करि न जाइ सर मज्जन पाना। फिरि आवइ समेत अभिमाना।।

  487. RCM 1.39.4Open verse →

    जौं बहोरि कोउ पूछन आवा। सर निंदा करि ताहि बुझावा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बहोरि कोउ पूछन आवा। सर निंदा करि ताहि बुझावा।।

  488. RCM 1.39.5Open verse →

    सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।।

    अर्थ · Hindi

    सकल बिघ्न ब्यापहि नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही।।

  489. RCM 1.39.6Open verse →

    सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ सादर सर मज्जनु करई। महा घोर त्रयताप न जरई।।

  490. RCM 1.39.7Open verse →

    ते नर यह सर तजहिं न काऊ। जिन्ह के राम चरन भल भाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    ते नर यह सर तजहिं न काऊ। जिन्ह के राम चरन भल भाऊ।।

  491. RCM 1.39.8Open verse →

    जो नहाइ चह एहिं सर भाई। सो सतसंग करउ मन लाई।।

    अर्थ · Hindi

    जो नहाइ चह एहिं सर भाई। सो सतसंग करउ मन लाई।।

  492. RCM 1.39.9Open verse →

    अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।।

    अर्थ · Hindi

    अस मानस मानस चख चाही। भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही।।

  493. RCM 1.39.10Open verse →

    भयउ हृदयँ आनंद उछाहू। उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ हृदयँ आनंद उछाहू। उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू।।

  494. RCM 1.39.11Open verse →

    चली सुभग कबिता सरिता सो। राम बिमल जस जल भरिता सो।।

    अर्थ · Hindi

    चली सुभग कबिता सरिता सो। राम बिमल जस जल भरिता सो।।

  495. RCM 1.39.12Open verse →

    सरजू नाम सुमंगल मूला। लोक बेद मत मंजुल कूला।।

    अर्थ · Hindi

    सरजू नाम सुमंगल मूला। लोक बेद मत मंजुल कूला।।

  496. RCM 1.39.13Open verse →

    नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।

    अर्थ · Hindi

    नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि।।

  497. RCM 1.39.14Open verse →

    श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल।

    अर्थ · Hindi

    श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल।

  498. RCM 1.39.15Open verse →

    संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल।।39।।

    अर्थ · Hindi

    संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल।।39।।

  499. RCM 1.40.1Open verse →

    रामभगति सुरसरितहि जाई। मिली सुकीरति सरजु सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    रामभगति सुरसरितहि जाई। मिली सुकीरति सरजु सुहाई।।

  500. RCM 1.40.2Open verse →

    सानुज राम समर जसु पावन। मिलेउ महानदु सोन सुहावन।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज राम समर जसु पावन। मिलेउ महानदु सोन सुहावन।।

  501. RCM 1.40.3Open verse →

    जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    जुग बिच भगति देवधुनि धारा। सोहति सहित सुबिरति बिचारा।।

  502. RCM 1.40.4Open verse →

    त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरुप सिंधु समुहानी।।

    अर्थ · Hindi

    त्रिबिध ताप त्रासक तिमुहानी। राम सरुप सिंधु समुहानी।।

  503. RCM 1.40.5Open verse →

    मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।।

    अर्थ · Hindi

    मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही।।

  504. RCM 1.40.6Open verse →

    बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा।।

    अर्थ · Hindi

    बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा।।

  505. RCM 1.40.7Open verse →

    उमा महेस बिबाह बराती। ते जलचर अगनित बहुभाँती।।

    अर्थ · Hindi

    उमा महेस बिबाह बराती। ते जलचर अगनित बहुभाँती।।

  506. RCM 1.40.8Open verse →

    रघुबर जनम अनंद बधाई। भवँर तरंग मनोहरताई।।

    अर्थ · Hindi

    रघुबर जनम अनंद बधाई। भवँर तरंग मनोहरताई।।

  507. RCM 1.40.9Open verse →

    बालचरित चहु बंधु के बनज बिपुल बहुरंग।

    अर्थ · Hindi

    बालचरित चहु बंधु के बनज बिपुल बहुरंग।

  508. RCM 1.40.10Open verse →

    नृप रानी परिजन सुकृत मधुकर बारिबिहंग।।40।।

    अर्थ · Hindi

    नृप रानी परिजन सुकृत मधुकर बारिबिहंग।।40।।

  509. RCM 1.41.1Open verse →

    सीय स्वयंबर कथा सुहाई। सरित सुहावनि सो छबि छाई।।

    अर्थ · Hindi

    सीय स्वयंबर कथा सुहाई। सरित सुहावनि सो छबि छाई।।

  510. RCM 1.41.2Open verse →

    नदी नाव पटु प्रस्न अनेका। केवट कुसल उतर सबिबेका।।

    अर्थ · Hindi

    नदी नाव पटु प्रस्न अनेका। केवट कुसल उतर सबिबेका।।

  511. RCM 1.41.3Open verse →

    सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि अनुकथन परस्पर होई। पथिक समाज सोह सरि सोई।।

  512. RCM 1.41.4Open verse →

    घोर धार भृगुनाथ रिसानी। घाट सुबद्ध राम बर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    घोर धार भृगुनाथ रिसानी। घाट सुबद्ध राम बर बानी।।

  513. RCM 1.41.5Open verse →

    सानुज राम बिबाह उछाहू। सो सुभ उमग सुखद सब काहू।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज राम बिबाह उछाहू। सो सुभ उमग सुखद सब काहू।।

  514. RCM 1.41.6Open verse →

    कहत सुनत हरषहिं पुलकाहीं। ते सुकृती मन मुदित नहाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सुनत हरषहिं पुलकाहीं। ते सुकृती मन मुदित नहाहीं।।

  515. RCM 1.41.7Open verse →

    राम तिलक हित मंगल साजा। परब जोग जनु जुरे समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    राम तिलक हित मंगल साजा। परब जोग जनु जुरे समाजा।।

  516. RCM 1.41.8Open verse →

    काई कुमति केकई केरी। परी जासु फल बिपति घनेरी।।

    अर्थ · Hindi

    काई कुमति केकई केरी। परी जासु फल बिपति घनेरी।।

  517. RCM 1.41.9Open verse →

    समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग।

    अर्थ · Hindi

    समन अमित उतपात सब भरतचरित जपजाग।

  518. RCM 1.41.10Open verse →

    कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग।।41।।

    अर्थ · Hindi

    कलि अघ खल अवगुन कथन ते जलमल बग काग।।41।।

  519. RCM 1.42.1Open verse →

    कीरति सरित छहूँ रितु रूरी। समय सुहावनि पावनि भूरी।।

    अर्थ · Hindi

    कीरति सरित छहूँ रितु रूरी। समय सुहावनि पावनि भूरी।।

  520. RCM 1.42.2Open verse →

    हिम हिमसैलसुता सिव ब्याहू। सिसिर सुखद प्रभु जनम उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    हिम हिमसैलसुता सिव ब्याहू। सिसिर सुखद प्रभु जनम उछाहू।।

  521. RCM 1.42.3Open verse →

    बरनब राम बिबाह समाजू। सो मुद मंगलमय रितुराजू।।

    अर्थ · Hindi

    बरनब राम बिबाह समाजू। सो मुद मंगलमय रितुराजू।।

  522. RCM 1.42.4Open verse →

    ग्रीषम दुसह राम बनगवनू। पंथकथा खर आतप पवनू।।

    अर्थ · Hindi

    ग्रीषम दुसह राम बनगवनू। पंथकथा खर आतप पवनू।।

  523. RCM 1.42.5Open verse →

    बरषा घोर निसाचर रारी। सुरकुल सालि सुमंगलकारी।।

    अर्थ · Hindi

    बरषा घोर निसाचर रारी। सुरकुल सालि सुमंगलकारी।।

  524. RCM 1.42.6Open verse →

    राम राज सुख बिनय बड़ाई। बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम राज सुख बिनय बड़ाई। बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई।।

  525. RCM 1.42.7Open verse →

    सती सिरोमनि सिय गुनगाथा। सोइ गुन अमल अनूपम पाथा।।

    अर्थ · Hindi

    सती सिरोमनि सिय गुनगाथा। सोइ गुन अमल अनूपम पाथा।।

  526. RCM 1.42.8Open verse →

    भरत सुभाउ सुसीतलताई। सदा एकरस बरनि न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सुभाउ सुसीतलताई। सदा एकरस बरनि न जाई।।

  527. RCM 1.42.9Open verse →

    अवलोकनि बोलनि मिलनि प्रीति परसपर हास।

    अर्थ · Hindi

    अवलोकनि बोलनि मिलनि प्रीति परसपर हास।

  528. RCM 1.42.10Open verse →

    भायप भलि चहु बंधु की जल माधुरी सुबास।।42।।

    अर्थ · Hindi

    भायप भलि चहु बंधु की जल माधुरी सुबास।।42।।

  529. RCM 1.43.1Open verse →

    आरति बिनय दीनता मोरी। लघुता ललित सुबारि न थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    आरति बिनय दीनता मोरी। लघुता ललित सुबारि न थोरी।।

  530. RCM 1.43.2Open verse →

    अदभुत सलिल सुनत गुनकारी। आस पिआस मनोमल हारी।।

    अर्थ · Hindi

    अदभुत सलिल सुनत गुनकारी। आस पिआस मनोमल हारी।।

  531. RCM 1.43.3Open verse →

    राम सुप्रेमहि पोषत पानी। हरत सकल कलि कलुष गलानी।।

    अर्थ · Hindi

    राम सुप्रेमहि पोषत पानी। हरत सकल कलि कलुष गलानी।।

  532. RCM 1.43.4Open verse →

    भव श्रम सोषक तोषक तोषा। समन दुरित दुख दारिद दोषा।।

    अर्थ · Hindi

    भव श्रम सोषक तोषक तोषा। समन दुरित दुख दारिद दोषा।।

  533. RCM 1.43.5Open verse →

    काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन।।

    अर्थ · Hindi

    काम कोह मद मोह नसावन। बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन।।

  534. RCM 1.43.6Open verse →

    सादर मज्जन पान किए तें। मिटहिं पाप परिताप हिए तें।।

    अर्थ · Hindi

    सादर मज्जन पान किए तें। मिटहिं पाप परिताप हिए तें।।

  535. RCM 1.43.7Open verse →

    जिन्ह एहि बारि न मानस धोए। ते कायर कलिकाल बिगोए।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह एहि बारि न मानस धोए। ते कायर कलिकाल बिगोए।।

  536. RCM 1.43.8Open verse →

    तृषित निरखि रबि कर भव बारी। फिरिहहि मृग जिमि जीव दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    तृषित निरखि रबि कर भव बारी। फिरिहहि मृग जिमि जीव दुखारी।।

  537. RCM 1.43.9Open verse →

    मति अनुहारि सुबारि गुन गनि मन अन्हवाइ।

    अर्थ · Hindi

    मति अनुहारि सुबारि गुन गनि मन अन्हवाइ।

  538. RCM 1.43.10Open verse →

    सुमिरि भवानी संकरहि कह कबि कथा सुहाइ।।43(क)।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि भवानी संकरहि कह कबि कथा सुहाइ।।43(क)।।

  539. RCM 1.43.11Open verse →

    अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद ।

    अर्थ · Hindi

    अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद ।

  540. RCM 1.43.12Open verse →

    कहउँ जुगल मुनिबर्ज कर मिलन सुभग संबाद।।43(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ जुगल मुनिबर्ज कर मिलन सुभग संबाद।।43(ख)।।

  541. RCM 1.44.1Open verse →

    भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    भरद्वाज मुनि बसहिं प्रयागा। तिन्हहि राम पद अति अनुरागा।।

  542. RCM 1.44.2Open verse →

    तापस सम दम दया निधाना। परमारथ पथ परम सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    तापस सम दम दया निधाना। परमारथ पथ परम सुजाना।।

  543. RCM 1.44.3Open verse →

    माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।

    अर्थ · Hindi

    माघ मकरगत रबि जब होई। तीरथपतिहिं आव सब कोई।।

  544. RCM 1.44.4Open verse →

    देव दनुज किंनर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं।।

    अर्थ · Hindi

    देव दनुज किंनर नर श्रेनी। सादर मज्जहिं सकल त्रिबेनीं।।

  545. RCM 1.44.5Open verse →

    पूजहि माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।।

    अर्थ · Hindi

    पूजहि माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता।।

  546. RCM 1.44.6Open verse →

    भरद्वाज आश्रम अति पावन। परम रम्य मुनिबर मन भावन।।

    अर्थ · Hindi

    भरद्वाज आश्रम अति पावन। परम रम्य मुनिबर मन भावन।।

  547. RCM 1.44.7Open verse →

    तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा। जाहिं जे मज्जन तीरथराजा।।

    अर्थ · Hindi

    तहाँ होइ मुनि रिषय समाजा। जाहिं जे मज्जन तीरथराजा।।

  548. RCM 1.44.8Open verse →

    मज्जहिं प्रात समेत उछाहा। कहहिं परसपर हरि गुन गाहा।।

    अर्थ · Hindi

    मज्जहिं प्रात समेत उछाहा। कहहिं परसपर हरि गुन गाहा।।

  549. RCM 1.44.9Open verse →

    ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्म निरूपम धरम बिधि बरनहिं तत्त्व बिभाग।

  550. RCM 1.44.10Open verse →

    कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग।।44।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं भगति भगवंत कै संजुत ग्यान बिराग।।44।।

  551. RCM 1.45.1Open verse →

    एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि प्रकार भरि माघ नहाहीं। पुनि सब निज निज आश्रम जाहीं।।

  552. RCM 1.45.2Open verse →

    प्रति संबत अति होइ अनंदा। मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रति संबत अति होइ अनंदा। मकर मज्जि गवनहिं मुनिबृंदा।।

  553. RCM 1.45.3Open verse →

    एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार भरि मकर नहाए। सब मुनीस आश्रमन्ह सिधाए।।

  554. RCM 1.45.4Open verse →

    जगबालिक मुनि परम बिबेकी। भरव्दाज राखे पद टेकी।।

    अर्थ · Hindi

    जगबालिक मुनि परम बिबेकी। भरव्दाज राखे पद टेकी।।

  555. RCM 1.45.5Open verse →

    सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।।

    अर्थ · Hindi

    सादर चरन सरोज पखारे। अति पुनीत आसन बैठारे।।

  556. RCM 1.45.6Open verse →

    करि पूजा मुनि सुजस बखानी। बोले अति पुनीत मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    करि पूजा मुनि सुजस बखानी। बोले अति पुनीत मृदु बानी।।

  557. RCM 1.45.7Open verse →

    नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ एक संसउ बड़ मोरें। करगत बेदतत्व सबु तोरें।।

  558. RCM 1.45.8Open verse →

    कहत सो मोहि लागत भय लाजा। जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सो मोहि लागत भय लाजा। जौ न कहउँ बड़ होइ अकाजा।।

  559. RCM 1.45.9Open verse →

    संत कहहि असि नीति प्रभु श्रुति पुरान मुनि गाव।

    अर्थ · Hindi

    संत कहहि असि नीति प्रभु श्रुति पुरान मुनि गाव।

  560. RCM 1.45.10Open verse →

    होइ न बिमल बिबेक उर गुर सन किएँ दुराव।।45।।

    अर्थ · Hindi

    होइ न बिमल बिबेक उर गुर सन किएँ दुराव।।45।।

  561. RCM 1.46.1Open verse →

    अस बिचारि प्रगटउँ निज मोहू। हरहु नाथ करि जन पर छोहू।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि प्रगटउँ निज मोहू। हरहु नाथ करि जन पर छोहू।।

  562. RCM 1.46.2Open verse →

    राम नाम कर अमित प्रभावा। संत पुरान उपनिषद गावा।।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम कर अमित प्रभावा। संत पुरान उपनिषद गावा।।

  563. RCM 1.46.3Open verse →

    संतत जपत संभु अबिनासी। सिव भगवान ग्यान गुन रासी।।

    अर्थ · Hindi

    संतत जपत संभु अबिनासी। सिव भगवान ग्यान गुन रासी।।

  564. RCM 1.46.4Open verse →

    आकर चारि जीव जग अहहीं। कासीं मरत परम पद लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    आकर चारि जीव जग अहहीं। कासीं मरत परम पद लहहीं।।

  565. RCM 1.46.5Open verse →

    सोपि राम महिमा मुनिराया। सिव उपदेसु करत करि दाया।।

    अर्थ · Hindi

    सोपि राम महिमा मुनिराया। सिव उपदेसु करत करि दाया।।

  566. RCM 1.46.6Open verse →

    रामु कवन प्रभु पूछउँ तोही। कहिअ बुझाइ कृपानिधि मोही।।

    अर्थ · Hindi

    रामु कवन प्रभु पूछउँ तोही। कहिअ बुझाइ कृपानिधि मोही।।

  567. RCM 1.46.7Open verse →

    एक राम अवधेस कुमारा। तिन्ह कर चरित बिदित संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    एक राम अवधेस कुमारा। तिन्ह कर चरित बिदित संसारा।।

  568. RCM 1.46.8Open verse →

    नारि बिरहँ दुखु लहेउ अपारा। भयहु रोषु रन रावनु मारा।।

    अर्थ · Hindi

    नारि बिरहँ दुखु लहेउ अपारा। भयहु रोषु रन रावनु मारा।।

  569. RCM 1.46.9Open verse →

    प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु सोइ राम कि अपर कोउ जाहि जपत त्रिपुरारि।

  570. RCM 1.46.10Open verse →

    सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि।।46।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यधाम सर्बग्य तुम्ह कहहु बिबेकु बिचारि।।46।।

  571. RCM 1.47.1Open verse →

    जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।।

    अर्थ · Hindi

    जैसे मिटै मोर भ्रम भारी। कहहु सो कथा नाथ बिस्तारी।।

  572. RCM 1.47.2Open verse →

    जागबलिक बोले मुसुकाई। तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई।।

    अर्थ · Hindi

    जागबलिक बोले मुसुकाई। तुम्हहि बिदित रघुपति प्रभुताई।।

  573. RCM 1.47.3Open verse →

    राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।।

    अर्थ · Hindi

    राममगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारी मैं जानी।।

  574. RCM 1.47.4Open verse →

    चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा।।

  575. RCM 1.47.5Open verse →

    तात सुनहु सादर मनु लाई। कहउँ राम कै कथा सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    तात सुनहु सादर मनु लाई। कहउँ राम कै कथा सुहाई।।

  576. RCM 1.47.6Open verse →

    महामोहु महिषेसु बिसाला। रामकथा कालिका कराला।।

    अर्थ · Hindi

    महामोहु महिषेसु बिसाला। रामकथा कालिका कराला।।

  577. RCM 1.47.7Open verse →

    रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना।।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना।।

  578. RCM 1.47.8Open verse →

    ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी।।

  579. RCM 1.47.9Open verse →

    कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ सो मति अनुहारि अब उमा संभु संबाद।

  580. RCM 1.47.10Open verse →

    भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद।।47।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ समय जेहि हेतु जेहि सुनु मुनि मिटिहि बिषाद।।47।।

  581. RCM 1.48.1Open verse →

    एक बार त्रेता जुग माहीं। संभु गए कुंभज रिषि पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार त्रेता जुग माहीं। संभु गए कुंभज रिषि पाहीं।।

  582. RCM 1.48.2Open verse →

    संग सती जगजननि भवानी। पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी।।

    अर्थ · Hindi

    संग सती जगजननि भवानी। पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी।।

  583. RCM 1.48.3Open verse →

    रामकथा मुनीबर्ज बखानी। सुनी महेस परम सुखु मानी।।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा मुनीबर्ज बखानी। सुनी महेस परम सुखु मानी।।

  584. RCM 1.48.4Open verse →

    रिषि पूछी हरिभगति सुहाई। कही संभु अधिकारी पाई।।

    अर्थ · Hindi

    रिषि पूछी हरिभगति सुहाई। कही संभु अधिकारी पाई।।

  585. RCM 1.48.5Open verse →

    कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सुनत रघुपति गुन गाथा। कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा।।

  586. RCM 1.48.6Open verse →

    मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी। चले भवन सँग दच्छकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि सन बिदा मागि त्रिपुरारी। चले भवन सँग दच्छकुमारी।।

  587. RCM 1.48.7Open verse →

    तेहि अवसर भंजन महिभारा। हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर भंजन महिभारा। हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा।।

  588. RCM 1.48.8Open verse →

    पिता बचन तजि राजु उदासी। दंडक बन बिचरत अबिनासी।।

    अर्थ · Hindi

    पिता बचन तजि राजु उदासी। दंडक बन बिचरत अबिनासी।।

  589. RCM 1.48.9Open verse →

    ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ।

    अर्थ · Hindi

    ह्दयँ बिचारत जात हर केहि बिधि दरसनु होइ।

  590. RCM 1.48.10Open verse →

    गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ।।48(क)।।

    अर्थ · Hindi

    गुप्त रुप अवतरेउ प्रभु गएँ जान सबु कोइ।।48(क)।।

  591. RCM 1.48.11Open verse →

    संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ।।

    अर्थ · Hindi

    संकर उर अति छोभु सती न जानहिं मरमु सोइ।।

  592. RCM 1.48.12Open verse →

    तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची।।48(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी दरसन लोभु मन डरु लोचन लालची।।48(ख)।।

  593. RCM 1.49.1Open verse →

    रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।।

    अर्थ · Hindi

    रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।।

  594. RCM 1.49.2Open verse →

    जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा।।

  595. RCM 1.49.3Open verse →

    एहि बिधि भए सोचबस ईसा। तेहि समय जाइ दससीसा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि भए सोचबस ईसा। तेहि समय जाइ दससीसा।।

  596. RCM 1.49.4Open verse →

    लीन्ह नीच मारीचहि संगा। भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा।।

    अर्थ · Hindi

    लीन्ह नीच मारीचहि संगा। भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा।।

  597. RCM 1.49.5Open verse →

    करि छलु मूढ़ हरी बैदेही। प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही।।

    अर्थ · Hindi

    करि छलु मूढ़ हरी बैदेही। प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही।।

  598. RCM 1.49.6Open verse →

    मृग बधि बन्धु सहित हरि आए। आश्रमु देखि नयन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    मृग बधि बन्धु सहित हरि आए। आश्रमु देखि नयन जल छाए।।

  599. RCM 1.49.7Open verse →

    बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।।

  600. RCM 1.49.8Open verse →

    कबहूँ जोग बियोग न जाकें। देखा प्रगट बिरह दुख ताकें।।

    अर्थ · Hindi

    कबहूँ जोग बियोग न जाकें। देखा प्रगट बिरह दुख ताकें।।

  601. RCM 1.49.9Open verse →

    अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान।

    अर्थ · Hindi

    अति विचित्र रघुपति चरित जानहिं परम सुजान।

  602. RCM 1.49.10Open verse →

    जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन।।49।।

    अर्थ · Hindi

    जे मतिमंद बिमोह बस हृदयँ धरहिं कछु आन।।49।।

  603. RCM 1.50.1Open verse →

    संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    संभु समय तेहि रामहि देखा। उपजा हियँ अति हरपु बिसेषा।।

  604. RCM 1.50.2Open verse →

    भरि लोचन छबिसिंधु निहारी। कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    भरि लोचन छबिसिंधु निहारी। कुसमय जानिन कीन्हि चिन्हारी।।

  605. RCM 1.50.3Open verse →

    जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन।।

    अर्थ · Hindi

    जय सच्चिदानंद जग पावन। अस कहि चलेउ मनोज नसावन।।

  606. RCM 1.50.4Open verse →

    चले जात सिव सती समेता। पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता।।

    अर्थ · Hindi

    चले जात सिव सती समेता। पुनि पुनि पुलकत कृपानिकेता।।

  607. RCM 1.50.5Open verse →

    सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं सो दसा संभु कै देखी। उर उपजा संदेहु बिसेषी।।

  608. RCM 1.50.6Open verse →

    संकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावत सीसा।।

    अर्थ · Hindi

    संकरु जगतबंद्य जगदीसा। सुर नर मुनि सब नावत सीसा।।

  609. RCM 1.50.7Open verse →

    तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा। कहि सच्चिदानंद परधमा।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह नृपसुतहि नह परनामा। कहि सच्चिदानंद परधमा।।

  610. RCM 1.50.8Open verse →

    भए मगन छबि तासु बिलोकी। अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी।।

    अर्थ · Hindi

    भए मगन छबि तासु बिलोकी। अजहुँ प्रीति उर रहति न रोकी।।

  611. RCM 1.50.9Open verse →

    ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्म जो व्यापक बिरज अज अकल अनीह अभेद।

  612. RCM 1.50.10Open verse →

    सो कि देह धरि होइ नर जाहि न जानत वेद।। 50।।

    अर्थ · Hindi

    सो कि देह धरि होइ नर जाहि न जानत वेद।। 50।।

  613. RCM 1.51.1Open verse →

    बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।।

  614. RCM 1.51.2Open verse →

    खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी।।

  615. RCM 1.51.3Open verse →

    संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।।

    अर्थ · Hindi

    संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।।

  616. RCM 1.51.4Open verse →

    अस संसय मन भयउ अपारा। होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा।।

    अर्थ · Hindi

    अस संसय मन भयउ अपारा। होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा।।

  617. RCM 1.51.5Open verse →

    जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।।

  618. RCM 1.51.6Open verse →

    सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।

  619. RCM 1.51.7Open verse →

    जासु कथा कुभंज रिषि गाई। भगति जासु मैं मुनिहि सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    जासु कथा कुभंज रिषि गाई। भगति जासु मैं मुनिहि सुनाई।।

  620. RCM 1.51.8Open verse →

    सोउ मम इष्टदेव रघुबीरा। सेवत जाहि सदा मुनि धीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सोउ मम इष्टदेव रघुबीरा। सेवत जाहि सदा मुनि धीरा।।

  621. RCM 1.52.1Open verse →

    जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।।

  622. RCM 1.52.2Open verse →

    तब लगि बैठ अहउँ बटछाहिं। जब लगि तुम्ह ऐहहु मोहि पाही।।

    अर्थ · Hindi

    तब लगि बैठ अहउँ बटछाहिं। जब लगि तुम्ह ऐहहु मोहि पाही।।

  623. RCM 1.52.3Open verse →

    जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।।

  624. RCM 1.52.4Open verse →

    चलीं सती सिव आयसु पाई। करहिं बिचारु करौं का भाई।।

    अर्थ · Hindi

    चलीं सती सिव आयसु पाई। करहिं बिचारु करौं का भाई।।

  625. RCM 1.52.5Open verse →

    इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।।

  626. RCM 1.52.6Open verse →

    मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधी बिपरीत भलाई नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधी बिपरीत भलाई नाहीं।।

  627. RCM 1.52.7Open verse →

    होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा।।

    अर्थ · Hindi

    होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा।।

  628. RCM 1.52.8Open verse →

    अस कहि लगे जपन हरिनामा। गई सती जहँ प्रभु सुखधामा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि लगे जपन हरिनामा। गई सती जहँ प्रभु सुखधामा।।

  629. RCM 1.52.9Open verse →

    पुनि पुनि हृदयँ विचारु करि धरि सीता कर रुप।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि हृदयँ विचारु करि धरि सीता कर रुप।

  630. RCM 1.52.10Open verse →

    आगें होइ चलि पंथ तेहि जेहिं आवत नरभूप।।52।।

    अर्थ · Hindi

    आगें होइ चलि पंथ तेहि जेहिं आवत नरभूप।।52।।

  631. RCM 1.53.1Open verse →

    लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा।।

  632. RCM 1.53.2Open verse →

    कहि न सकत कछु अति गंभीरा। प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न सकत कछु अति गंभीरा। प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा।।

  633. RCM 1.53.3Open verse →

    सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    सती कपटु जानेउ सुरस्वामी। सबदरसी सब अंतरजामी।।

  634. RCM 1.53.4Open verse →

    सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना। सोइ सरबग्य रामु भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरत जाहि मिटइ अग्याना। सोइ सरबग्य रामु भगवाना।।

  635. RCM 1.53.5Open verse →

    सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ। देखहु नारि सुभाव प्रभाऊ।।

  636. RCM 1.53.6Open verse →

    निज माया बलु हृदयँ बखानी। बोले बिहसि रामु मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    निज माया बलु हृदयँ बखानी। बोले बिहसि रामु मृदु बानी।।

  637. RCM 1.53.7Open verse →

    जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू।।

    अर्थ · Hindi

    जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू। पिता समेत लीन्ह निज नामू।।

  638. RCM 1.53.8Open verse →

    कहेउ बहोरि कहाँ बृषकेतू। बिपिन अकेलि फिरहु केहि हेतू।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ बहोरि कहाँ बृषकेतू। बिपिन अकेलि फिरहु केहि हेतू।।

  639. RCM 1.53.9Open verse →

    राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।

    अर्थ · Hindi

    राम बचन मृदु गूढ़ सुनि उपजा अति संकोचु।

  640. RCM 1.53.10Open verse →

    सती सभीत महेस पहिं चलीं हृदयँ बड़ सोचु।।53।।

    अर्थ · Hindi

    सती सभीत महेस पहिं चलीं हृदयँ बड़ सोचु।।53।।

  641. RCM 1.54.1Open verse →

    मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर आना।।

    अर्थ · Hindi

    मैं संकर कर कहा न माना। निज अग्यानु राम पर आना।।

  642. RCM 1.54.2Open verse →

    जाइ उतरु अब देहउँ काहा। उर उपजा अति दारुन दाहा।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ उतरु अब देहउँ काहा। उर उपजा अति दारुन दाहा।।

  643. RCM 1.54.3Open verse →

    जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा।।

    अर्थ · Hindi

    जाना राम सतीं दुखु पावा। निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा।।

  644. RCM 1.54.4Open verse →

    सतीं दीख कौतुकु मग जाता। आगें रामु सहित श्री भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं दीख कौतुकु मग जाता। आगें रामु सहित श्री भ्राता।।

  645. RCM 1.54.5Open verse →

    फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा। सहित बंधु सिय सुंदर वेषा।।

    अर्थ · Hindi

    फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा। सहित बंधु सिय सुंदर वेषा।।

  646. RCM 1.54.6Open verse →

    जहँ चितवहिं तहँ प्रभु आसीना। सेवहिं सिद्ध मुनीस प्रबीना।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ चितवहिं तहँ प्रभु आसीना। सेवहिं सिद्ध मुनीस प्रबीना।।

  647. RCM 1.54.7Open verse →

    देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका। अमित प्रभाउ एक तें एका।।

    अर्थ · Hindi

    देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका। अमित प्रभाउ एक तें एका।।

  648. RCM 1.54.8Open verse →

    बंदत चरन करत प्रभु सेवा। बिबिध बेष देखे सब देवा।।

    अर्थ · Hindi

    बंदत चरन करत प्रभु सेवा। बिबिध बेष देखे सब देवा।।

  649. RCM 1.54.9Open verse →

    सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप।

    अर्थ · Hindi

    सती बिधात्री इंदिरा देखीं अमित अनूप।

  650. RCM 1.54.10Open verse →

    जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप।।54।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं जेहिं बेष अजादि सुर तेहि तेहि तन अनुरूप।।54।।

  651. RCM 1.55.1Open verse →

    देखे जहँ तहँ रघुपति जेते। सक्तिन्ह सहित सकल सुर तेते।।

    अर्थ · Hindi

    देखे जहँ तहँ रघुपति जेते। सक्तिन्ह सहित सकल सुर तेते।।

  652. RCM 1.55.2Open verse →

    जीव चराचर जो संसारा। देखे सकल अनेक प्रकारा।।

    अर्थ · Hindi

    जीव चराचर जो संसारा। देखे सकल अनेक प्रकारा।।

  653. RCM 1.55.3Open verse →

    पूजहिं प्रभुहि देव बहु बेषा। राम रूप दूसर नहिं देखा।।

    अर्थ · Hindi

    पूजहिं प्रभुहि देव बहु बेषा। राम रूप दूसर नहिं देखा।।

  654. RCM 1.55.4Open verse →

    अवलोके रघुपति बहुतेरे। सीता सहित न बेष घनेरे।।

    अर्थ · Hindi

    अवलोके रघुपति बहुतेरे। सीता सहित न बेष घनेरे।।

  655. RCM 1.55.5Open verse →

    सोइ रघुबर सोइ लछिमनु सीता। देखि सती अति भई सभीता।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ रघुबर सोइ लछिमनु सीता। देखि सती अति भई सभीता।।

  656. RCM 1.55.6Open verse →

    हृदय कंप तन सुधि कछु नाहीं। नयन मूदि बैठीं मग माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    हृदय कंप तन सुधि कछु नाहीं। नयन मूदि बैठीं मग माहीं।।

  657. RCM 1.55.7Open verse →

    बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी। कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी। कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी।।

  658. RCM 1.55.8Open verse →

    पुनि पुनि नाइ राम पद सीसा। चलीं तहाँ जहँ रहे गिरीसा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि नाइ राम पद सीसा। चलीं तहाँ जहँ रहे गिरीसा।।

  659. RCM 1.55.9Open verse →

    गई समीप महेस तब हँसि पूछी कुसलात।

    अर्थ · Hindi

    गई समीप महेस तब हँसि पूछी कुसलात।

  660. RCM 1.55.10Open verse →

    लीन्ही परीछा कवन बिधि कहहु सत्य सब बात।।55।।

    अर्थ · Hindi

    लीन्ही परीछा कवन बिधि कहहु सत्य सब बात।।55।।

  661. RCM 1.56.1Open verse →

    सतीं समुझि रघुबीर प्रभाऊ। भय बस सिव सन कीन्ह दुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं समुझि रघुबीर प्रभाऊ। भय बस सिव सन कीन्ह दुराऊ।।

  662. RCM 1.56.2Open verse →

    कछु न परीछा लीन्हि गोसाई। कीन्ह प्रनामु तुम्हारिहि नाई।।

    अर्थ · Hindi

    कछु न परीछा लीन्हि गोसाई। कीन्ह प्रनामु तुम्हारिहि नाई।।

  663. RCM 1.56.3Open verse →

    जो तुम्ह कहा सो मृषा न होई। मोरें मन प्रतीति अति सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जो तुम्ह कहा सो मृषा न होई। मोरें मन प्रतीति अति सोई।।

  664. RCM 1.56.4Open verse →

    तब संकर देखेउ धरि ध्याना। सतीं जो कीन्ह चरित सब जाना।।

    अर्थ · Hindi

    तब संकर देखेउ धरि ध्याना। सतीं जो कीन्ह चरित सब जाना।।

  665. RCM 1.56.5Open verse →

    बहुरि राममायहि सिरु नावा। प्रेरि सतिहि जेहिं झूँठ कहावा।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि राममायहि सिरु नावा। प्रेरि सतिहि जेहिं झूँठ कहावा।।

  666. RCM 1.56.6Open verse →

    हरि इच्छा भावी बलवाना। हृदयँ बिचारत संभु सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    हरि इच्छा भावी बलवाना। हृदयँ बिचारत संभु सुजाना।।

  667. RCM 1.56.7Open verse →

    सतीं कीन्ह सीता कर बेषा। सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं कीन्ह सीता कर बेषा। सिव उर भयउ बिषाद बिसेषा।।

  668. RCM 1.56.8Open verse →

    जौं अब करउँ सती सन प्रीती। मिटइ भगति पथु होइ अनीती।।

    अर्थ · Hindi

    जौं अब करउँ सती सन प्रीती। मिटइ भगति पथु होइ अनीती।।

  669. RCM 1.56.9Open verse →

    परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु।

    अर्थ · Hindi

    परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु।

  670. RCM 1.56.10Open verse →

    प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु।।56।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु।।56।।

  671. RCM 1.57.1Open verse →

    तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।।

    अर्थ · Hindi

    तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।।

  672. RCM 1.57.2Open verse →

    एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं। सिव संकल्पु कीन्ह मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं। सिव संकल्पु कीन्ह मन माहीं।।

  673. RCM 1.57.3Open verse →

    अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।।

  674. RCM 1.57.4Open verse →

    चलत गगन भै गिरा सुहाई। जय महेस भलि भगति दृढ़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    चलत गगन भै गिरा सुहाई। जय महेस भलि भगति दृढ़ाई।।

  675. RCM 1.57.5Open verse →

    अस पन तुम्ह बिनु करइ को आना। रामभगत समरथ भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    अस पन तुम्ह बिनु करइ को आना। रामभगत समरथ भगवाना।।

  676. RCM 1.57.6Open verse →

    सुनि नभगिरा सती उर सोचा। पूछा सिवहि समेत सकोचा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि नभगिरा सती उर सोचा। पूछा सिवहि समेत सकोचा।।

  677. RCM 1.57.7Open verse →

    कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।।

  678. RCM 1.57.8Open verse →

    जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती।।

  679. RCM 1.57.9Open verse →

    सतीं हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य।

    अर्थ · Hindi

    सतीं हृदय अनुमान किय सबु जानेउ सर्बग्य।

  680. RCM 1.57.10Open verse →

    कीन्ह कपटु मैं संभु सन नारि सहज जड़ अग्य।।57क।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह कपटु मैं संभु सन नारि सहज जड़ अग्य।।57क।।

  681. RCM 1.57.11Open verse →

    जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि।

    अर्थ · Hindi

    जलु पय सरिस बिकाइ देखहु प्रीति कि रीति भलि।

  682. RCM 1.57.12Open verse →

    बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि।।57ख।।

    अर्थ · Hindi

    बिलग होइ रसु जाइ कपट खटाई परत पुनि।।57ख।।

  683. RCM 1.58.1Open verse →

    हृदयँ सोचु समुझत निज करनी। चिंता अमित जाइ नहि बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ सोचु समुझत निज करनी। चिंता अमित जाइ नहि बरनी।।

  684. RCM 1.58.2Open verse →

    कृपासिंधु सिव परम अगाधा। प्रगट न कहेउ मोर अपराधा।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु सिव परम अगाधा। प्रगट न कहेउ मोर अपराधा।।

  685. RCM 1.58.3Open verse →

    संकर रुख अवलोकि भवानी। प्रभु मोहि तजेउ हृदयँ अकुलानी।।

    अर्थ · Hindi

    संकर रुख अवलोकि भवानी। प्रभु मोहि तजेउ हृदयँ अकुलानी।।

  686. RCM 1.58.4Open verse →

    निज अघ समुझि न कछु कहि जाई। तपइ अवाँ इव उर अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    निज अघ समुझि न कछु कहि जाई। तपइ अवाँ इव उर अधिकाई।।

  687. RCM 1.58.5Open verse →

    सतिहि ससोच जानि बृषकेतू। कहीं कथा सुंदर सुख हेतू।।

    अर्थ · Hindi

    सतिहि ससोच जानि बृषकेतू। कहीं कथा सुंदर सुख हेतू।।

  688. RCM 1.58.6Open verse →

    बरनत पंथ बिबिध इतिहासा। बिस्वनाथ पहुँचे कैलासा।।

    अर्थ · Hindi

    बरनत पंथ बिबिध इतिहासा। बिस्वनाथ पहुँचे कैलासा।।

  689. RCM 1.58.7Open verse →

    तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।।

  690. RCM 1.58.8Open verse →

    संकर सहज सरुप सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    संकर सहज सरुप सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा।।

  691. RCM 1.58.9Open verse →

    सती बसहि कैलास तब अधिक सोचु मन माहिं।

    अर्थ · Hindi

    सती बसहि कैलास तब अधिक सोचु मन माहिं।

  692. RCM 1.58.10Open verse →

    मरमु न कोऊ जान कछु जुग सम दिवस सिराहिं।।58।।

    अर्थ · Hindi

    मरमु न कोऊ जान कछु जुग सम दिवस सिराहिं।।58।।

  693. RCM 1.59.1Open verse →

    नित नव सोचु सतीं उर भारा। कब जैहउँ दुख सागर पारा।।

    अर्थ · Hindi

    नित नव सोचु सतीं उर भारा। कब जैहउँ दुख सागर पारा।।

  694. RCM 1.59.2Open verse →

    मैं जो कीन्ह रघुपति अपमाना। पुनिपति बचनु मृषा करि जाना।।

    अर्थ · Hindi

    मैं जो कीन्ह रघुपति अपमाना। पुनिपति बचनु मृषा करि जाना।।

  695. RCM 1.59.3Open verse →

    सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    सो फलु मोहि बिधाताँ दीन्हा। जो कछु उचित रहा सोइ कीन्हा।।

  696. RCM 1.59.4Open verse →

    अब बिधि अस बूझिअ नहि तोही। संकर बिमुख जिआवसि मोही।।

    अर्थ · Hindi

    अब बिधि अस बूझिअ नहि तोही। संकर बिमुख जिआवसि मोही।।

  697. RCM 1.59.5Open verse →

    कहि न जाई कछु हृदय गलानी। मन महुँ रामाहि सुमिर सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न जाई कछु हृदय गलानी। मन महुँ रामाहि सुमिर सयानी।।

  698. RCM 1.59.6Open verse →

    जौ प्रभु दीनदयालु कहावा। आरती हरन बेद जसु गावा।।

    अर्थ · Hindi

    जौ प्रभु दीनदयालु कहावा। आरती हरन बेद जसु गावा।।

  699. RCM 1.59.7Open verse →

    तौ मैं बिनय करउँ कर जोरी। छूटउ बेगि देह यह मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    तौ मैं बिनय करउँ कर जोरी। छूटउ बेगि देह यह मोरी।।

  700. RCM 1.59.8Open verse →

    जौं मोरे सिव चरन सनेहू। मन क्रम बचन सत्य ब्रतु एहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मोरे सिव चरन सनेहू। मन क्रम बचन सत्य ब्रतु एहू।।

  701. RCM 1.59.9Open verse →

    तौ सबदरसी सुनिअ प्रभु करउ सो बेगि उपाइ।

    अर्थ · Hindi

    तौ सबदरसी सुनिअ प्रभु करउ सो बेगि उपाइ।

  702. RCM 1.59.10Open verse →

    होइ मरनु जेही बिनहिं श्रम दुसह बिपत्ति बिहाइ।।59।।

    अर्थ · Hindi

    होइ मरनु जेही बिनहिं श्रम दुसह बिपत्ति बिहाइ।।59।।

  703. RCM 1.60.1Open verse →

    एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी। अकथनीय दारुन दुखु भारी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि दुखित प्रजेसकुमारी। अकथनीय दारुन दुखु भारी।।

  704. RCM 1.60.2Open verse →

    बीतें संबत सहस सतासी। तजी समाधि संभु अबिनासी।।

    अर्थ · Hindi

    बीतें संबत सहस सतासी। तजी समाधि संभु अबिनासी।।

  705. RCM 1.60.3Open verse →

    राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे।।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम सिव सुमिरन लागे। जानेउ सतीं जगतपति जागे।।

  706. RCM 1.60.4Open verse →

    जाइ संभु पद बंदनु कीन्ही। सनमुख संकर आसनु दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ संभु पद बंदनु कीन्ही। सनमुख संकर आसनु दीन्हा।।

  707. RCM 1.60.5Open verse →

    लगे कहन हरिकथा रसाला। दच्छ प्रजेस भए तेहि काला।।

    अर्थ · Hindi

    लगे कहन हरिकथा रसाला। दच्छ प्रजेस भए तेहि काला।।

  708. RCM 1.60.6Open verse →

    देखा बिधि बिचारि सब लायक। दच्छहि कीन्ह प्रजापति नायक।।

    अर्थ · Hindi

    देखा बिधि बिचारि सब लायक। दच्छहि कीन्ह प्रजापति नायक।।

  709. RCM 1.60.7Open verse →

    बड़ अधिकार दच्छ जब पावा। अति अभिमानु हृदयँ तब आवा।।

    अर्थ · Hindi

    बड़ अधिकार दच्छ जब पावा। अति अभिमानु हृदयँ तब आवा।।

  710. RCM 1.60.8Open verse →

    नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं। प्रभुता पाइ जाहि मद नाहीं।।

  711. RCM 1.60.9Open verse →

    दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग।

    अर्थ · Hindi

    दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग।

  712. RCM 1.60.10Open verse →

    नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग।।60।।

    अर्थ · Hindi

    नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग।।60।।

  713. RCM 1.61.1Open verse →

    किंनर नाग सिद्ध गंधर्बा। बधुन्ह समेत चले सुर सर्बा।।

    अर्थ · Hindi

    किंनर नाग सिद्ध गंधर्बा। बधुन्ह समेत चले सुर सर्बा।।

  714. RCM 1.61.2Open verse →

    बिष्नु बिरंचि महेसु बिहाई। चले सकल सुर जान बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिष्नु बिरंचि महेसु बिहाई। चले सकल सुर जान बनाई।।

  715. RCM 1.61.3Open verse →

    सतीं बिलोके ब्योम बिमाना। जात चले सुंदर बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं बिलोके ब्योम बिमाना। जात चले सुंदर बिधि नाना।।

  716. RCM 1.61.4Open verse →

    सुर सुंदरी करहिं कल गाना। सुनत श्रवन छूटहिं मुनि ध्याना।।

    अर्थ · Hindi

    सुर सुंदरी करहिं कल गाना। सुनत श्रवन छूटहिं मुनि ध्याना।।

  717. RCM 1.61.5Open verse →

    पूछेउ तब सिवँ कहेउ बखानी। पिता जग्य सुनि कछु हरषानी।।

    अर्थ · Hindi

    पूछेउ तब सिवँ कहेउ बखानी। पिता जग्य सुनि कछु हरषानी।।

  718. RCM 1.61.6Open verse →

    जौं महेसु मोहि आयसु देहीं। कुछ दिन जाइ रहौं मिस एहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं महेसु मोहि आयसु देहीं। कुछ दिन जाइ रहौं मिस एहीं।।

  719. RCM 1.61.7Open verse →

    पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।।

  720. RCM 1.61.8Open verse →

    बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी।।

    अर्थ · Hindi

    बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी।।

  721. RCM 1.61.9Open verse →

    पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।

    अर्थ · Hindi

    पिता भवन उत्सव परम जौं प्रभु आयसु होइ।

  722. RCM 1.61.10Open verse →

    तौ मै जाउँ कृपायतन सादर देखन सोइ।।61।।

    अर्थ · Hindi

    तौ मै जाउँ कृपायतन सादर देखन सोइ।।61।।

  723. RCM 1.62.1Open verse →

    कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत पठावा।।

    अर्थ · Hindi

    कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा। यह अनुचित नहिं नेवत पठावा।।

  724. RCM 1.62.2Open verse →

    दच्छ सकल निज सुता बोलाई। हमरें बयर तुम्हउ बिसराई।।

    अर्थ · Hindi

    दच्छ सकल निज सुता बोलाई। हमरें बयर तुम्हउ बिसराई।।

  725. RCM 1.62.3Open verse →

    ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मसभाँ हम सन दुखु माना। तेहि तें अजहुँ करहिं अपमाना।।

  726. RCM 1.62.4Open verse →

    जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बिनु बोलें जाहु भवानी। रहइ न सीलु सनेहु न कानी।।

  727. RCM 1.62.5Open verse →

    जदपि मित्र प्रभु पितु गुर गेहा। जाइअ बिनु बोलेहुँ न सँदेहा।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि मित्र प्रभु पितु गुर गेहा। जाइअ बिनु बोलेहुँ न सँदेहा।।

  728. RCM 1.62.6Open verse →

    तदपि बिरोध मान जहँ कोई। तहाँ गएँ कल्यानु न होई।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि बिरोध मान जहँ कोई। तहाँ गएँ कल्यानु न होई।।

  729. RCM 1.62.7Open verse →

    भाँति अनेक संभु समुझावा। भावी बस न ग्यानु उर आवा।।

    अर्थ · Hindi

    भाँति अनेक संभु समुझावा। भावी बस न ग्यानु उर आवा।।

  730. RCM 1.62.8Open verse →

    कह प्रभु जाहु जो बिनहिं बोलाएँ। नहिं भलि बात हमारे भाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    कह प्रभु जाहु जो बिनहिं बोलाएँ। नहिं भलि बात हमारे भाएँ।।

  731. RCM 1.62.9Open verse →

    कहि देखा हर जतन बहु रहइ न दच्छकुमारि।

    अर्थ · Hindi

    कहि देखा हर जतन बहु रहइ न दच्छकुमारि।

  732. RCM 1.62.10Open verse →

    दिए मुख्य गन संग तब बिदा कीन्ह त्रिपुरारि।।62।।

    अर्थ · Hindi

    दिए मुख्य गन संग तब बिदा कीन्ह त्रिपुरारि।।62।।

  733. RCM 1.63.1Open verse →

    पिता भवन जब गई भवानी। दच्छ त्रास काहुँ न सनमानी।।

    अर्थ · Hindi

    पिता भवन जब गई भवानी। दच्छ त्रास काहुँ न सनमानी।।

  734. RCM 1.63.2Open verse →

    सादर भलेहिं मिली एक माता। भगिनीं मिलीं बहुत मुसुकाता।।

    अर्थ · Hindi

    सादर भलेहिं मिली एक माता। भगिनीं मिलीं बहुत मुसुकाता।।

  735. RCM 1.63.3Open verse →

    दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।।

    अर्थ · Hindi

    दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।।

  736. RCM 1.63.4Open verse →

    सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा।।

  737. RCM 1.63.5Open verse →

    तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।।

  738. RCM 1.63.6Open verse →

    पाछिल दुखु न हृदयँ अस ब्यापा। जस यह भयउ महा परितापा।।

    अर्थ · Hindi

    पाछिल दुखु न हृदयँ अस ब्यापा। जस यह भयउ महा परितापा।।

  739. RCM 1.63.7Open verse →

    जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।।

  740. RCM 1.63.8Open verse →

    समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा।।

  741. RCM 1.63.9Open verse →

    सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।

    अर्थ · Hindi

    सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।

  742. RCM 1.63.10Open verse →

    सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध।।63।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध।।63।।

  743. RCM 1.64.1Open verse →

    सुनहु सभासद सकल मुनिंदा। कही सुनी जिन्ह संकर निंदा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु सभासद सकल मुनिंदा। कही सुनी जिन्ह संकर निंदा।।

  744. RCM 1.64.2Open verse →

    सो फलु तुरत लहब सब काहूँ। भली भाँति पछिताब पिताहूँ।।

    अर्थ · Hindi

    सो फलु तुरत लहब सब काहूँ। भली भाँति पछिताब पिताहूँ।।

  745. RCM 1.64.3Open verse →

    संत संभु श्रीपति अपबादा। सुनिअ जहाँ तहँ असि मरजादा।।

    अर्थ · Hindi

    संत संभु श्रीपति अपबादा। सुनिअ जहाँ तहँ असि मरजादा।।

  746. RCM 1.64.4Open verse →

    काटिअ तासु जीभ जो बसाई। श्रवन मूदि न त चलिअ पराई।।

    अर्थ · Hindi

    काटिअ तासु जीभ जो बसाई। श्रवन मूदि न त चलिअ पराई।।

  747. RCM 1.64.5Open verse →

    जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी।।

    अर्थ · Hindi

    जगदातमा महेसु पुरारी। जगत जनक सब के हितकारी।।

  748. RCM 1.64.6Open verse →

    पिता मंदमति निंदत तेही। दच्छ सुक्र संभव यह देही।।

    अर्थ · Hindi

    पिता मंदमति निंदत तेही। दच्छ सुक्र संभव यह देही।।

  749. RCM 1.64.7Open verse →

    तजिहउँ तुरत देह तेहि हेतू। उर धरि चंद्रमौलि बृषकेतू।।

    अर्थ · Hindi

    तजिहउँ तुरत देह तेहि हेतू। उर धरि चंद्रमौलि बृषकेतू।।

  750. RCM 1.64.8Open verse →

    अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि जोग अगिनि तनु जारा। भयउ सकल मख हाहाकारा।।

  751. RCM 1.64.9Open verse →

    सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।

    अर्थ · Hindi

    सती मरनु सुनि संभु गन लगे करन मख खीस।

  752. RCM 1.64.10Open verse →

    जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस।।64।।

    अर्थ · Hindi

    जग्य बिधंस बिलोकि भृगु रच्छा कीन्हि मुनीस।।64।।

  753. RCM 1.65.1Open verse →

    समाचार सब संकर पाए। बीरभद्रु करि कोप पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार सब संकर पाए। बीरभद्रु करि कोप पठाए।।

  754. RCM 1.65.2Open verse →

    जग्य बिधंस जाइ तिन्ह कीन्हा। सकल सुरन्ह बिधिवत फलु दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जग्य बिधंस जाइ तिन्ह कीन्हा। सकल सुरन्ह बिधिवत फलु दीन्हा।।

  755. RCM 1.65.3Open verse →

    भे जगबिदित दच्छ गति सोई। जसि कछु संभु बिमुख कै होई।।

    अर्थ · Hindi

    भे जगबिदित दच्छ गति सोई। जसि कछु संभु बिमुख कै होई।।

  756. RCM 1.65.4Open verse →

    यह इतिहास सकल जग जानी। ताते मैं संछेप बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    यह इतिहास सकल जग जानी। ताते मैं संछेप बखानी।।

  757. RCM 1.65.5Open verse →

    सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा।।

  758. RCM 1.65.6Open verse →

    तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई।।

  759. RCM 1.65.7Open verse →

    जब तें उमा सैल गृह जाईं। सकल सिद्धि संपति तहँ छाई।।

    अर्थ · Hindi

    जब तें उमा सैल गृह जाईं। सकल सिद्धि संपति तहँ छाई।।

  760. RCM 1.65.8Open verse →

    जहँ तहँ मुनिन्ह सुआश्रम कीन्हे। उचित बास हिम भूधर दीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ मुनिन्ह सुआश्रम कीन्हे। उचित बास हिम भूधर दीन्हे।।

  761. RCM 1.65.9Open verse →

    सदा सुमन फल सहित सब द्रुम नव नाना जाति।

    अर्थ · Hindi

    सदा सुमन फल सहित सब द्रुम नव नाना जाति।

  762. RCM 1.65.10Open verse →

    प्रगटीं सुंदर सैल पर मनि आकर बहु भाँति।।65।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटीं सुंदर सैल पर मनि आकर बहु भाँति।।65।।

  763. RCM 1.66.1Open verse →

    सरिता सब पुनित जलु बहहीं। खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सरिता सब पुनित जलु बहहीं। खग मृग मधुप सुखी सब रहहीं।।

  764. RCM 1.66.2Open verse →

    सहज बयरु सब जीवन्ह त्यागा। गिरि पर सकल करहिं अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    सहज बयरु सब जीवन्ह त्यागा। गिरि पर सकल करहिं अनुरागा।।

  765. RCM 1.66.3Open verse →

    सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    सोह सैल गिरिजा गृह आएँ। जिमि जनु रामभगति के पाएँ।।

  766. RCM 1.66.4Open verse →

    नित नूतन मंगल गृह तासू। ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू।।

    अर्थ · Hindi

    नित नूतन मंगल गृह तासू। ब्रह्मादिक गावहिं जसु जासू।।

  767. RCM 1.66.5Open verse →

    नारद समाचार सब पाए। कौतुकहीं गिरि गेह सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    नारद समाचार सब पाए। कौतुकहीं गिरि गेह सिधाए।।

  768. RCM 1.66.6Open verse →

    सैलराज बड़ आदर कीन्हा। पद पखारि बर आसनु दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    सैलराज बड़ आदर कीन्हा। पद पखारि बर आसनु दीन्हा।।

  769. RCM 1.66.7Open verse →

    नारि सहित मुनि पद सिरु नावा। चरन सलिल सबु भवनु सिंचावा।।

    अर्थ · Hindi

    नारि सहित मुनि पद सिरु नावा। चरन सलिल सबु भवनु सिंचावा।।

  770. RCM 1.66.8Open verse →

    निज सौभाग्य बहुत गिरि बरना। सुता बोलि मेली मुनि चरना।।

    अर्थ · Hindi

    निज सौभाग्य बहुत गिरि बरना। सुता बोलि मेली मुनि चरना।।

  771. RCM 1.66.9Open verse →

    त्रिकालग्य सर्बग्य तुम्ह गति सर्बत्र तुम्हारि।।

    अर्थ · Hindi

    त्रिकालग्य सर्बग्य तुम्ह गति सर्बत्र तुम्हारि।।

  772. RCM 1.66.10Open verse →

    कहहु सुता के दोष गुन मुनिबर हृदयँ बिचारि।।66।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु सुता के दोष गुन मुनिबर हृदयँ बिचारि।।66।।

  773. RCM 1.67.1Open verse →

    कह मुनि बिहसि गूढ़ मृदु बानी। सुता तुम्हारि सकल गुन खानी।।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनि बिहसि गूढ़ मृदु बानी। सुता तुम्हारि सकल गुन खानी।।

  774. RCM 1.67.2Open verse →

    सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी।।

  775. RCM 1.67.3Open verse →

    सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी।।

    अर्थ · Hindi

    सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी।।

  776. RCM 1.67.4Open verse →

    सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता।।

    अर्थ · Hindi

    सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता।।

  777. RCM 1.67.5Open verse →

    होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।।

  778. RCM 1.67.6Open verse →

    एहि कर नामु सुमिरि संसारा। त्रिय चढ़हहिं पतिब्रत असिधारा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि कर नामु सुमिरि संसारा। त्रिय चढ़हहिं पतिब्रत असिधारा।।

  779. RCM 1.67.7Open verse →

    सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।।

    अर्थ · Hindi

    सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।।

  780. RCM 1.67.8Open verse →

    अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना।।

    अर्थ · Hindi

    अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना।।

  781. RCM 1.67.9Open verse →

    जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष।।

    अर्थ · Hindi

    जोगी जटिल अकाम मन नगन अमंगल बेष।।

  782. RCM 1.67.10Open verse →

    अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेख।।67।।

    अर्थ · Hindi

    अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि परी हस्त असि रेख।।67।।

  783. RCM 1.68.1Open verse →

    सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।।

  784. RCM 1.68.2Open verse →

    नारदहुँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना।।

    अर्थ · Hindi

    नारदहुँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना।।

  785. RCM 1.68.3Open verse →

    सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।।

  786. RCM 1.68.4Open verse →

    होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा।।

    अर्थ · Hindi

    होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा।।

  787. RCM 1.68.5Open verse →

    उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।।

  788. RCM 1.68.6Open verse →

    जानि कुअवसरु प्रीति दुराई। सखी उछँग बैठी पुनि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    जानि कुअवसरु प्रीति दुराई। सखी उछँग बैठी पुनि जाई।।

  789. RCM 1.68.7Open verse →

    झूठि न होइ देवरिषि बानी। सोचहि दंपति सखीं सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    झूठि न होइ देवरिषि बानी। सोचहि दंपति सखीं सयानी।।

  790. RCM 1.68.8Open verse →

    उर धरि धीर कहइ गिरिराऊ। कहहु नाथ का करिअ उपाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    उर धरि धीर कहइ गिरिराऊ। कहहु नाथ का करिअ उपाऊ।।

  791. RCM 1.68.9Open verse →

    कह मुनीस हिमवंत सुनु जो बिधि लिखा लिलार।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनीस हिमवंत सुनु जो बिधि लिखा लिलार।

  792. RCM 1.68.10Open verse →

    देव दनुज नर नाग मुनि कोउ न मेटनिहार।।68।।

    अर्थ · Hindi

    देव दनुज नर नाग मुनि कोउ न मेटनिहार।।68।।

  793. RCM 1.69.1Open verse →

    तदपि एक मैं कहउँ उपाई। होइ करै जौं दैउ सहाई।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि एक मैं कहउँ उपाई। होइ करै जौं दैउ सहाई।।

  794. RCM 1.69.2Open verse →

    जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।।

  795. RCM 1.69.3Open verse →

    जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।

    अर्थ · Hindi

    जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।।

  796. RCM 1.69.4Open verse →

    जौं बिबाहु संकर सन होई। दोषउ गुन सम कह सबु कोई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बिबाहु संकर सन होई। दोषउ गुन सम कह सबु कोई।।

  797. RCM 1.69.5Open verse →

    जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।।

  798. RCM 1.69.6Open verse →

    भानु कृसानु सर्ब रस खाहीं। तिन्ह कहँ मंद कहत कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भानु कृसानु सर्ब रस खाहीं। तिन्ह कहँ मंद कहत कोउ नाहीं।।

  799. RCM 1.69.7Open verse →

    सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।।

    अर्थ · Hindi

    सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।।

  800. RCM 1.69.8Open verse →

    समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाई। रबि पावक सुरसरि की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाई। रबि पावक सुरसरि की नाई।।

  801. RCM 1.69.9Open verse →

    जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान।

    अर्थ · Hindi

    जौं अस हिसिषा करहिं नर जड़ि बिबेक अभिमान।

  802. RCM 1.69.10Open verse →

    परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान।।69।।

    अर्थ · Hindi

    परहिं कलप भरि नरक महुँ जीव कि ईस समान।।69।।

  803. RCM 1.70.1Open verse →

    सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।।

  804. RCM 1.70.2Open verse →

    सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें।।

    अर्थ · Hindi

    सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें।।

  805. RCM 1.70.3Open verse →

    संभु सहज समरथ भगवाना। एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना।।

    अर्थ · Hindi

    संभु सहज समरथ भगवाना। एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना।।

  806. RCM 1.70.4Open verse →

    दुराराध्य पै अहहिं महेसू। आसुतोष पुनि किएँ कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    दुराराध्य पै अहहिं महेसू। आसुतोष पुनि किएँ कलेसू।।

  807. RCM 1.70.5Open verse →

    जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।।

  808. RCM 1.70.6Open verse →

    जद्यपि बर अनेक जग माहीं। एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि बर अनेक जग माहीं। एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं।।

  809. RCM 1.70.7Open verse →

    बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।।

    अर्थ · Hindi

    बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।।

  810. RCM 1.70.8Open verse →

    इच्छित फल बिनु सिव अवराधे। लहिअ न कोटि जोग जप साधें।।

    अर्थ · Hindi

    इच्छित फल बिनु सिव अवराधे। लहिअ न कोटि जोग जप साधें।।

  811. RCM 1.70.9Open verse →

    अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि दीन्हि असीस।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि नारद सुमिरि हरि गिरिजहि दीन्हि असीस।

  812. RCM 1.70.10Open verse →

    होइहि यह कल्यान अब संसय तजहु गिरीस।।70।।

    अर्थ · Hindi

    होइहि यह कल्यान अब संसय तजहु गिरीस।।70।।

  813. RCM 1.71.1Open verse →

    कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ। आगिल चरित सुनहु जस भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ। आगिल चरित सुनहु जस भयऊ।।

  814. RCM 1.71.2Open verse →

    पतिहि एकांत पाइ कह मैना। नाथ न मैं समुझे मुनि बैना।।

    अर्थ · Hindi

    पतिहि एकांत पाइ कह मैना। नाथ न मैं समुझे मुनि बैना।।

  815. RCM 1.71.3Open verse →

    जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।।

  816. RCM 1.71.4Open verse →

    न त कन्या बरु रहउ कुआरी। कंत उमा मम प्रानपिआरी।।

    अर्थ · Hindi

    न त कन्या बरु रहउ कुआरी। कंत उमा मम प्रानपिआरी।।

  817. RCM 1.71.5Open verse →

    जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।।

  818. RCM 1.71.6Open verse →

    सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू। जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू। जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू।।

  819. RCM 1.71.7Open verse →

    अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।।

  820. RCM 1.71.8Open verse →

    बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं।।

  821. RCM 1.71.9Open verse →

    प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।

    अर्थ · Hindi

    प्रिया सोचु परिहरहु सबु सुमिरहु श्रीभगवान।

  822. RCM 1.71.10Open verse →

    पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान।।71।।

    अर्थ · Hindi

    पारबतिहि निरमयउ जेहिं सोइ करिहि कल्यान।।71।।

  823. RCM 1.72.1Open verse →

    अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू। तौ अस जाइ सिखावन देहू।।

    अर्थ · Hindi

    अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू। तौ अस जाइ सिखावन देहू।।

  824. RCM 1.72.2Open verse →

    करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटहि कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटहि कलेसू।।

  825. RCM 1.72.3Open verse →

    नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।।

    अर्थ · Hindi

    नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।।

  826. RCM 1.72.4Open verse →

    अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका।।

  827. RCM 1.72.5Open verse →

    सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।।

  828. RCM 1.72.6Open verse →

    उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी।।

    अर्थ · Hindi

    उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी।।

  829. RCM 1.72.7Open verse →

    बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।।

  830. RCM 1.72.8Open verse →

    जगत मातु सर्बग्य भवानी। मातु सुखद बोलीं मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    जगत मातु सर्बग्य भवानी। मातु सुखद बोलीं मृदु बानी।।

  831. RCM 1.72.9Open verse →

    सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि।

    अर्थ · Hindi

    सुनहि मातु मैं दीख अस सपन सुनावउँ तोहि।

  832. RCM 1.72.10Open verse →

    सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि।।72।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर गौर सुबिप्रबर अस उपदेसेउ मोहि।।72।।

  833. RCM 1.73.1Open verse →

    करहि जाइ तपु सैलकुमारी। नारद कहा सो सत्य बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    करहि जाइ तपु सैलकुमारी। नारद कहा सो सत्य बिचारी।।

  834. RCM 1.73.2Open verse →

    मातु पितहि पुनि यह मत भावा। तपु सुखप्रद दुख दोष नसावा।।

    अर्थ · Hindi

    मातु पितहि पुनि यह मत भावा। तपु सुखप्रद दुख दोष नसावा।।

  835. RCM 1.73.3Open verse →

    तपबल रचइ प्रपंच बिधाता। तपबल बिष्नु सकल जग त्राता।।

    अर्थ · Hindi

    तपबल रचइ प्रपंच बिधाता। तपबल बिष्नु सकल जग त्राता।।

  836. RCM 1.73.4Open verse →

    तपबल संभु करहिं संघारा। तपबल सेषु धरइ महिभारा।।

    अर्थ · Hindi

    तपबल संभु करहिं संघारा। तपबल सेषु धरइ महिभारा।।

  837. RCM 1.73.5Open verse →

    तप अधार सब सृष्टि भवानी। करहि जाइ तपु अस जियँ जानी।।

    अर्थ · Hindi

    तप अधार सब सृष्टि भवानी। करहि जाइ तपु अस जियँ जानी।।

  838. RCM 1.73.6Open verse →

    सुनत बचन बिसमित महतारी। सपन सुनायउ गिरिहि हँकारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन बिसमित महतारी। सपन सुनायउ गिरिहि हँकारी।।

  839. RCM 1.73.7Open verse →

    मातु पितुहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई।।

    अर्थ · Hindi

    मातु पितुहि बहुबिधि समुझाई। चलीं उमा तप हित हरषाई।।

  840. RCM 1.73.8Open verse →

    प्रिय परिवार पिता अरु माता। भए बिकल मुख आव न बाता।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिय परिवार पिता अरु माता। भए बिकल मुख आव न बाता।।

  841. RCM 1.73.9Open verse →

    बेदसिरा मुनि आइ तब सबहि कहा समुझाइ।।

    अर्थ · Hindi

    बेदसिरा मुनि आइ तब सबहि कहा समुझाइ।।

  842. RCM 1.73.10Open verse →

    पारबती महिमा सुनत रहे प्रबोधहि पाइ।।73।।

    अर्थ · Hindi

    पारबती महिमा सुनत रहे प्रबोधहि पाइ।।73।।

  843. RCM 1.74.1Open verse →

    उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना।।

    अर्थ · Hindi

    उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना।।

  844. RCM 1.74.2Open verse →

    अति सुकुमार न तनु तप जोगू। पति पद सुमिरि तजेउ सबु भोगू।।

    अर्थ · Hindi

    अति सुकुमार न तनु तप जोगू। पति पद सुमिरि तजेउ सबु भोगू।।

  845. RCM 1.74.3Open verse →

    नित नव चरन उपज अनुरागा। बिसरी देह तपहिं मनु लागा।।

    अर्थ · Hindi

    नित नव चरन उपज अनुरागा। बिसरी देह तपहिं मनु लागा।।

  846. RCM 1.74.4Open verse →

    संबत सहस मूल फल खाए। सागु खाइ सत बरष गवाँए।।

    अर्थ · Hindi

    संबत सहस मूल फल खाए। सागु खाइ सत बरष गवाँए।।

  847. RCM 1.74.5Open verse →

    कछु दिन भोजनु बारि बतासा। किए कठिन कछु दिन उपबासा।।

    अर्थ · Hindi

    कछु दिन भोजनु बारि बतासा। किए कठिन कछु दिन उपबासा।।

  848. RCM 1.74.6Open verse →

    बेल पाती महि परइ सुखाई। तीनि सहस संबत सोई खाई।।

    अर्थ · Hindi

    बेल पाती महि परइ सुखाई। तीनि सहस संबत सोई खाई।।

  849. RCM 1.74.7Open verse →

    पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नाम तब भयउ अपरना।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि परिहरे सुखानेउ परना। उमहि नाम तब भयउ अपरना।।

  850. RCM 1.74.8Open verse →

    देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि उमहि तप खीन सरीरा। ब्रह्मगिरा भै गगन गभीरा।।

  851. RCM 1.74.9Open verse →

    भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि।

    अर्थ · Hindi

    भयउ मनोरथ सुफल तव सुनु गिरिजाकुमारि।

  852. RCM 1.74.10Open verse →

    परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि।।74।।

    अर्थ · Hindi

    परिहरु दुसह कलेस सब अब मिलिहहिं त्रिपुरारि।।74।।

  853. RCM 1.75.1Open verse →

    अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।।

  854. RCM 1.75.2Open verse →

    अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी।।

    अर्थ · Hindi

    अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी।।

  855. RCM 1.75.3Open verse →

    आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।।

    अर्थ · Hindi

    आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।।

  856. RCM 1.75.4Open verse →

    मिलहिं तुम्हहि जब सप्त रिषीसा। जानेहु तब प्रमान बागीसा।।

    अर्थ · Hindi

    मिलहिं तुम्हहि जब सप्त रिषीसा। जानेहु तब प्रमान बागीसा।।

  857. RCM 1.75.5Open verse →

    सुनत गिरा बिधि गगन बखानी। पुलक गात गिरिजा हरषानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत गिरा बिधि गगन बखानी। पुलक गात गिरिजा हरषानी।।

  858. RCM 1.75.6Open verse →

    उमा चरित सुंदर मैं गावा। सुनहु संभु कर चरित सुहावा।।

    अर्थ · Hindi

    उमा चरित सुंदर मैं गावा। सुनहु संभु कर चरित सुहावा।।

  859. RCM 1.75.7Open verse →

    जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।

    अर्थ · Hindi

    जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।।

  860. RCM 1.75.8Open verse →

    जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा।।

  861. RCM 1.75.9Open verse →

    चिदानन्द सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम।

    अर्थ · Hindi

    चिदानन्द सुखधाम सिव बिगत मोह मद काम।

  862. RCM 1.75.10Open verse →

    बिचरहिं महि धरि हृदयँ हरि सकल लोक अभिराम।।75।।

    अर्थ · Hindi

    बिचरहिं महि धरि हृदयँ हरि सकल लोक अभिराम।।75।।

  863. RCM 1.76.1Open verse →

    कतहुँ मुनिन्ह उपदेसहिं ग्याना। कतहुँ राम गुन करहिं बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    कतहुँ मुनिन्ह उपदेसहिं ग्याना। कतहुँ राम गुन करहिं बखाना।।

  864. RCM 1.76.2Open verse →

    जदपि अकाम तदपि भगवाना। भगत बिरह दुख दुखित सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि अकाम तदपि भगवाना। भगत बिरह दुख दुखित सुजाना।।

  865. RCM 1.76.3Open verse →

    एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि गयउ कालु बहु बीती। नित नै होइ राम पद प्रीती।।

  866. RCM 1.76.4Open verse →

    नैमु प्रेमु संकर कर देखा। अबिचल हृदयँ भगति कै रेखा।।

    अर्थ · Hindi

    नैमु प्रेमु संकर कर देखा। अबिचल हृदयँ भगति कै रेखा।।

  867. RCM 1.76.5Open verse →

    प्रगटै रामु कृतग्य कृपाला। रूप सील निधि तेज बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटै रामु कृतग्य कृपाला। रूप सील निधि तेज बिसाला।।

  868. RCM 1.76.6Open verse →

    बहु प्रकार संकरहि सराहा। तुम्ह बिनु अस ब्रतु को निरबाहा।।

    अर्थ · Hindi

    बहु प्रकार संकरहि सराहा। तुम्ह बिनु अस ब्रतु को निरबाहा।।

  869. RCM 1.76.7Open verse →

    बहुबिधि राम सिवहि समुझावा। पारबती कर जन्मु सुनावा।।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि राम सिवहि समुझावा। पारबती कर जन्मु सुनावा।।

  870. RCM 1.76.8Open verse →

    अति पुनीत गिरिजा कै करनी। बिस्तर सहित कृपानिधि बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    अति पुनीत गिरिजा कै करनी। बिस्तर सहित कृपानिधि बरनी।।

  871. RCM 1.76.9Open verse →

    अब बिनती मम सुनेहु सिव जौं मो पर निज नेहु।

    अर्थ · Hindi

    अब बिनती मम सुनेहु सिव जौं मो पर निज नेहु।

  872. RCM 1.76.10Open verse →

    जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु।।76।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु।।76।।

  873. RCM 1.77.1Open verse →

    कह सिव जदपि उचित अस नाहीं। नाथ बचन पुनि मेटि न जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कह सिव जदपि उचित अस नाहीं। नाथ बचन पुनि मेटि न जाहीं।।

  874. RCM 1.77.2Open verse →

    सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरमु यह नाथ हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरमु यह नाथ हमारा।।

  875. RCM 1.77.3Open verse →

    मातु पिता गुर प्रभु कै बानी। बिनहिं बिचार करिअ सुभ जानी।।

    अर्थ · Hindi

    मातु पिता गुर प्रभु कै बानी। बिनहिं बिचार करिअ सुभ जानी।।

  876. RCM 1.77.4Open verse →

    तुम्ह सब भाँति परम हितकारी। अग्या सिर पर नाथ तुम्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सब भाँति परम हितकारी। अग्या सिर पर नाथ तुम्हारी।।

  877. RCM 1.77.5Open verse →

    प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु तोषेउ सुनि संकर बचना। भक्ति बिबेक धर्म जुत रचना।।

  878. RCM 1.77.6Open verse →

    कह प्रभु हर तुम्हार पन रहेऊ। अब उर राखेहु जो हम कहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कह प्रभु हर तुम्हार पन रहेऊ। अब उर राखेहु जो हम कहेऊ।।

  879. RCM 1.77.7Open verse →

    अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी।।

    अर्थ · Hindi

    अंतरधान भए अस भाषी। संकर सोइ मूरति उर राखी।।

  880. RCM 1.77.8Open verse →

    तबहिं सप्तरिषि सिव पहिं आए। बोले प्रभु अति बचन सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    तबहिं सप्तरिषि सिव पहिं आए। बोले प्रभु अति बचन सुहाए।।

  881. RCM 1.77.9Open verse →

    पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु।

    अर्थ · Hindi

    पारबती पहिं जाइ तुम्ह प्रेम परिच्छा लेहु।

  882. RCM 1.77.10Open verse →

    गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु।।77।।

    अर्थ · Hindi

    गिरिहि प्रेरि पठएहु भवन दूरि करेहु संदेहु।।77।।

  883. RCM 1.78.1Open verse →

    रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी।।

    अर्थ · Hindi

    रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी।।

  884. RCM 1.78.2Open verse →

    बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी।।

    अर्थ · Hindi

    बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी।।

  885. RCM 1.78.3Open verse →

    केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू।।

    अर्थ · Hindi

    केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू।।

  886. RCM 1.78.4Open verse →

    कहत बचत मनु अति सकुचाई। हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई।।

    अर्थ · Hindi

    कहत बचत मनु अति सकुचाई। हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई।।

  887. RCM 1.78.5Open verse →

    मनु हठ परा न सुनइ सिखावा। चहत बारि पर भीति उठावा।।

    अर्थ · Hindi

    मनु हठ परा न सुनइ सिखावा। चहत बारि पर भीति उठावा।।

  888. RCM 1.78.6Open verse →

    नारद कहा सत्य सोइ जाना। बिनु पंखन्ह हम चहहिं उड़ाना।।

    अर्थ · Hindi

    नारद कहा सत्य सोइ जाना। बिनु पंखन्ह हम चहहिं उड़ाना।।

  889. RCM 1.78.7Open verse →

    देखहु मुनि अबिबेकु हमारा। चाहिअ सदा सिवहि भरतारा।।

    अर्थ · Hindi

    देखहु मुनि अबिबेकु हमारा। चाहिअ सदा सिवहि भरतारा।।

  890. RCM 1.79.1Open verse →

    दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई।।

    अर्थ · Hindi

    दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई।।

  891. RCM 1.79.2Open verse →

    चित्रकेतु कर घरु उन घाला। कनककसिपु कर पुनि अस हाला।।

    अर्थ · Hindi

    चित्रकेतु कर घरु उन घाला। कनककसिपु कर पुनि अस हाला।।

  892. RCM 1.79.3Open verse →

    नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी।।

    अर्थ · Hindi

    नारद सिख जे सुनहिं नर नारी। अवसि होहिं तजि भवनु भिखारी।।

  893. RCM 1.79.4Open verse →

    मन कपटी तन सज्जन चीन्हा। आपु सरिस सबही चह कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    मन कपटी तन सज्जन चीन्हा। आपु सरिस सबही चह कीन्हा।।

  894. RCM 1.79.5Open verse →

    तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कें बचन मानि बिस्वासा। तुम्ह चाहहु पति सहज उदासा।।

  895. RCM 1.79.6Open verse →

    निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली।।

    अर्थ · Hindi

    निर्गुन निलज कुबेष कपाली। अकुल अगेह दिगंबर ब्याली।।

  896. RCM 1.79.7Open verse →

    कहहु कवन सुखु अस बरु पाएँ। भल भूलिहु ठग के बौराएँ।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु कवन सुखु अस बरु पाएँ। भल भूलिहु ठग के बौराएँ।।

  897. RCM 1.79.8Open verse →

    पंच कहें सिवँ सती बिबाही। पुनि अवडेरि मराएन्हि ताही।।

    अर्थ · Hindi

    पंच कहें सिवँ सती बिबाही। पुनि अवडेरि मराएन्हि ताही।।

  898. RCM 1.79.9Open verse →

    अब सुख सोवत सोचु नहि भीख मागि भव खाहिं।

    अर्थ · Hindi

    अब सुख सोवत सोचु नहि भीख मागि भव खाहिं।

  899. RCM 1.79.10Open verse →

    सहज एकाकिन्ह के भवन कबहुँ कि नारि खटाहिं।।79।।

    अर्थ · Hindi

    सहज एकाकिन्ह के भवन कबहुँ कि नारि खटाहिं।।79।।

  900. RCM 1.80.1Open verse →

    अजहूँ मानहु कहा हमारा। हम तुम्ह कहुँ बरु नीक बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    अजहूँ मानहु कहा हमारा। हम तुम्ह कहुँ बरु नीक बिचारा।।

  901. RCM 1.80.2Open verse →

    अति सुंदर सुचि सुखद सुसीला। गावहिं बेद जासु जस लीला।।

    अर्थ · Hindi

    अति सुंदर सुचि सुखद सुसीला। गावहिं बेद जासु जस लीला।।

  902. RCM 1.80.3Open verse →

    दूषन रहित सकल गुन रासी। श्रीपति पुर बैकुंठ निवासी।।

    अर्थ · Hindi

    दूषन रहित सकल गुन रासी। श्रीपति पुर बैकुंठ निवासी।।

  903. RCM 1.80.4Open verse →

    अस बरु तुम्हहि मिलाउब आनी। सुनत बिहसि कह बचन भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    अस बरु तुम्हहि मिलाउब आनी। सुनत बिहसि कह बचन भवानी।।

  904. RCM 1.80.5Open verse →

    सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।।

  905. RCM 1.80.6Open verse →

    कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई।।

    अर्थ · Hindi

    कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई।।

  906. RCM 1.80.7Open verse →

    नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।।

  907. RCM 1.80.8Open verse →

    गुर कें बचन प्रतीति न जेही। सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।

    अर्थ · Hindi

    गुर कें बचन प्रतीति न जेही। सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।

  908. RCM 1.80.9Open verse →

    महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।

    अर्थ · Hindi

    महादेव अवगुन भवन बिष्नु सकल गुन धाम।

  909. RCM 1.80.10Open verse →

    जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेही सन काम।।80।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि कर मनु रम जाहि सन तेहि तेही सन काम।।80।।

  910. RCM 1.81.1Open verse →

    जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।।

  911. RCM 1.81.2Open verse →

    अब मैं जन्मु संभु हित हारा। को गुन दूषन करै बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    अब मैं जन्मु संभु हित हारा। को गुन दूषन करै बिचारा।।

  912. RCM 1.81.3Open verse →

    जौं तुम्हरे हठ हृदयँ बिसेषी। रहि न जाइ बिनु किएँ बरेषी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं तुम्हरे हठ हृदयँ बिसेषी। रहि न जाइ बिनु किएँ बरेषी।।

  913. RCM 1.81.4Open verse →

    तौ कौतुकिअन्ह आलसु नाहीं। बर कन्या अनेक जग माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तौ कौतुकिअन्ह आलसु नाहीं। बर कन्या अनेक जग माहीं।।

  914. RCM 1.81.5Open verse →

    जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी।।

    अर्थ · Hindi

    जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी।।

  915. RCM 1.81.6Open verse →

    तजउँ न नारद कर उपदेसू। आपु कहहि सत बार महेसू।।

    अर्थ · Hindi

    तजउँ न नारद कर उपदेसू। आपु कहहि सत बार महेसू।।

  916. RCM 1.81.7Open verse →

    मैं पा परउँ कहइ जगदंबा। तुम्ह गृह गवनहु भयउ बिलंबा।।

    अर्थ · Hindi

    मैं पा परउँ कहइ जगदंबा। तुम्ह गृह गवनहु भयउ बिलंबा।।

  917. RCM 1.81.8Open verse →

    देखि प्रेमु बोले मुनि ग्यानी। जय जय जगदंबिके भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि प्रेमु बोले मुनि ग्यानी। जय जय जगदंबिके भवानी।।

  918. RCM 1.81.9Open verse →

    तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह माया भगवान सिव सकल जगत पितु मातु।

  919. RCM 1.81.10Open verse →

    नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु।।81।।

    अर्थ · Hindi

    नाइ चरन सिर मुनि चले पुनि पुनि हरषत गातु।।81।।

  920. RCM 1.82.1Open verse →

    जाइ मुनिन्ह हिमवंतु पठाए। करि बिनती गिरजहिं गृह ल्याए।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ मुनिन्ह हिमवंतु पठाए। करि बिनती गिरजहिं गृह ल्याए।।

  921. RCM 1.82.2Open verse →

    बहुरि सप्तरिषि सिव पहिं जाई। कथा उमा कै सकल सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि सप्तरिषि सिव पहिं जाई। कथा उमा कै सकल सुनाई।।

  922. RCM 1.82.3Open verse →

    भए मगन सिव सुनत सनेहा। हरषि सप्तरिषि गवने गेहा।।

    अर्थ · Hindi

    भए मगन सिव सुनत सनेहा। हरषि सप्तरिषि गवने गेहा।।

  923. RCM 1.82.4Open verse →

    मनु थिर करि तब संभु सुजाना। लगे करन रघुनायक ध्याना।।

    अर्थ · Hindi

    मनु थिर करि तब संभु सुजाना। लगे करन रघुनायक ध्याना।।

  924. RCM 1.82.5Open verse →

    तारकु असुर भयउ तेहि काला। भुज प्रताप बल तेज बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    तारकु असुर भयउ तेहि काला। भुज प्रताप बल तेज बिसाला।।

  925. RCM 1.82.6Open verse →

    तेंहि सब लोक लोकपति जीते। भए देव सुख संपति रीते।।

    अर्थ · Hindi

    तेंहि सब लोक लोकपति जीते। भए देव सुख संपति रीते।।

  926. RCM 1.82.7Open verse →

    अजर अमर सो जीति न जाई। हारे सुर करि बिबिध लराई।।

    अर्थ · Hindi

    अजर अमर सो जीति न जाई। हारे सुर करि बिबिध लराई।।

  927. RCM 1.82.8Open verse →

    तब बिरंचि सन जाइ पुकारे। देखे बिधि सब देव दुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    तब बिरंचि सन जाइ पुकारे। देखे बिधि सब देव दुखारे।।

  928. RCM 1.82.9Open verse →

    सब सन कहा बुझाइ बिधि दनुज निधन तब होइ।

    अर्थ · Hindi

    सब सन कहा बुझाइ बिधि दनुज निधन तब होइ।

  929. RCM 1.82.10Open verse →

    संभु सुक्र संभूत सुत एहि जीतइ रन सोइ।।82।।

    अर्थ · Hindi

    संभु सुक्र संभूत सुत एहि जीतइ रन सोइ।।82।।

  930. RCM 1.83.1Open verse →

    मोर कहा सुनि करहु उपाई। होइहि ईस्वर करिहि सहाई।।

    अर्थ · Hindi

    मोर कहा सुनि करहु उपाई। होइहि ईस्वर करिहि सहाई।।

  931. RCM 1.83.2Open verse →

    सतीं जो तजी दच्छ मख देहा। जनमी जाइ हिमाचल गेहा।।

    अर्थ · Hindi

    सतीं जो तजी दच्छ मख देहा। जनमी जाइ हिमाचल गेहा।।

  932. RCM 1.83.3Open verse →

    तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी। सिव समाधि बैठे सबु त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी। सिव समाधि बैठे सबु त्यागी।।

  933. RCM 1.83.4Open verse →

    जदपि अहइ असमंजस भारी। तदपि बात एक सुनहु हमारी।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि अहइ असमंजस भारी। तदपि बात एक सुनहु हमारी।।

  934. RCM 1.83.5Open verse →

    पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।।

  935. RCM 1.83.6Open verse →

    तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई।।

    अर्थ · Hindi

    तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई।।

  936. RCM 1.83.7Open verse →

    एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।।

  937. RCM 1.83.8Open verse →

    अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू।।

    अर्थ · Hindi

    अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू।।

  938. RCM 1.83.9Open verse →

    सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।

    अर्थ · Hindi

    सुरन्ह कहीं निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।

  939. RCM 1.83.10Open verse →

    संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार।।83।।

    अर्थ · Hindi

    संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार।।83।।

  940. RCM 1.84.1Open verse →

    तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।।

  941. RCM 1.84.2Open verse →

    पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही।।

    अर्थ · Hindi

    पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही।।

  942. RCM 1.84.3Open verse →

    अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई।।

  943. RCM 1.84.4Open verse →

    चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा।।

  944. RCM 1.84.5Open verse →

    तब आपन प्रभाउ बिस्तारा। निज बस कीन्ह सकल संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    तब आपन प्रभाउ बिस्तारा। निज बस कीन्ह सकल संसारा।।

  945. RCM 1.84.6Open verse →

    कोपेउ जबहि बारिचरकेतू। छन महुँ मिटे सकल श्रुति सेतू।।

    अर्थ · Hindi

    कोपेउ जबहि बारिचरकेतू। छन महुँ मिटे सकल श्रुति सेतू।।

  946. RCM 1.84.7Open verse →

    ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना।।

  947. RCM 1.84.8Open verse →

    सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सब भागा।।

    अर्थ · Hindi

    सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सब भागा।।

  948. RCM 1.85.1Open verse →

    सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा।।

    अर्थ · Hindi

    सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा।।

  949. RCM 1.85.2Open verse →

    नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाई। संगम करहिं तलाव तलाई।।

    अर्थ · Hindi

    नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाई। संगम करहिं तलाव तलाई।।

  950. RCM 1.85.3Open verse →

    जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी।।

  951. RCM 1.85.4Open verse →

    पसु पच्छी नभ जल थलचारी। भए कामबस समय बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    पसु पच्छी नभ जल थलचारी। भए कामबस समय बिसारी।।

  952. RCM 1.85.5Open verse →

    मदन अंध ब्याकुल सब लोका। निसि दिनु नहिं अवलोकहिं कोका।।

    अर्थ · Hindi

    मदन अंध ब्याकुल सब लोका। निसि दिनु नहिं अवलोकहिं कोका।।

  953. RCM 1.85.6Open verse →

    देव दनुज नर किंनर ब्याला। प्रेत पिसाच भूत बेताला।।

    अर्थ · Hindi

    देव दनुज नर किंनर ब्याला। प्रेत पिसाच भूत बेताला।।

  954. RCM 1.85.7Open verse →

    इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी।।

    अर्थ · Hindi

    इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी।।

  955. RCM 1.85.8Open verse →

    सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी।।

    अर्थ · Hindi

    सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी।।

  956. RCM 1.86.1Open verse →

    उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।।

  957. RCM 1.86.2Open verse →

    सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू।।

    अर्थ · Hindi

    सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू।।

  958. RCM 1.86.3Open verse →

    भए तुरत सब जीव सुखारे। जिमि मद उतरि गएँ मतवारे।।

    अर्थ · Hindi

    भए तुरत सब जीव सुखारे। जिमि मद उतरि गएँ मतवारे।।

  959. RCM 1.86.4Open verse →

    रुद्रहि देखि मदन भय माना। दुराधरष दुर्गम भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    रुद्रहि देखि मदन भय माना। दुराधरष दुर्गम भगवाना।।

  960. RCM 1.86.5Open verse →

    फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।।

    अर्थ · Hindi

    फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।।

  961. RCM 1.86.6Open verse →

    प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा।।

  962. RCM 1.86.7Open verse →

    बन उपबन बापिका तड़ागा। परम सुभग सब दिसा बिभागा।।

    अर्थ · Hindi

    बन उपबन बापिका तड़ागा। परम सुभग सब दिसा बिभागा।।

  963. RCM 1.86.8Open verse →

    जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा। देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा। देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा।।

  964. RCM 1.87.1Open verse →

    देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।।

  965. RCM 1.87.2Open verse →

    सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने।।

    अर्थ · Hindi

    सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने।।

  966. RCM 1.87.3Open verse →

    छाड़े बिषम बिसिख उर लागे। छुटि समाधि संभु तब जागे।।

    अर्थ · Hindi

    छाड़े बिषम बिसिख उर लागे। छुटि समाधि संभु तब जागे।।

  967. RCM 1.87.4Open verse →

    भयउ ईस मन छोभु बिसेषी। नयन उघारि सकल दिसि देखी।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ ईस मन छोभु बिसेषी। नयन उघारि सकल दिसि देखी।।

  968. RCM 1.87.5Open verse →

    सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।।

    अर्थ · Hindi

    सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।।

  969. RCM 1.87.6Open verse →

    तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा।।

    अर्थ · Hindi

    तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा।।

  970. RCM 1.87.7Open verse →

    हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।।

  971. RCM 1.87.8Open verse →

    समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी।।

  972. RCM 1.88.1Open verse →

    जब जदुबंस कृष्न अवतारा। होइहि हरन महा महिभारा।।

    अर्थ · Hindi

    जब जदुबंस कृष्न अवतारा। होइहि हरन महा महिभारा।।

  973. RCM 1.88.2Open verse →

    कृष्न तनय होइहि पति तोरा। बचनु अन्यथा होइ न मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    कृष्न तनय होइहि पति तोरा। बचनु अन्यथा होइ न मोरा।।

  974. RCM 1.88.3Open verse →

    रति गवनी सुनि संकर बानी। कथा अपर अब कहउँ बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    रति गवनी सुनि संकर बानी। कथा अपर अब कहउँ बखानी।।

  975. RCM 1.88.4Open verse →

    देवन्ह समाचार सब पाए। ब्रह्मादिक बैकुंठ सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    देवन्ह समाचार सब पाए। ब्रह्मादिक बैकुंठ सिधाए।।

  976. RCM 1.88.5Open verse →

    सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता।।

    अर्थ · Hindi

    सब सुर बिष्नु बिरंचि समेता। गए जहाँ सिव कृपानिकेता।।

  977. RCM 1.88.6Open verse →

    पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा।।

    अर्थ · Hindi

    पृथक पृथक तिन्ह कीन्हि प्रसंसा। भए प्रसन्न चंद्र अवतंसा।।

  978. RCM 1.88.7Open verse →

    बोले कृपासिंधु बृषकेतू। कहहु अमर आए केहि हेतू।।

    अर्थ · Hindi

    बोले कृपासिंधु बृषकेतू। कहहु अमर आए केहि हेतू।।

  979. RCM 1.88.8Open verse →

    कह बिधि तुम्ह प्रभु अंतरजामी। तदपि भगति बस बिनवउँ स्वामी।।

    अर्थ · Hindi

    कह बिधि तुम्ह प्रभु अंतरजामी। तदपि भगति बस बिनवउँ स्वामी।।

  980. RCM 1.88.9Open verse →

    सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।

  981. RCM 1.88.10Open verse →

    निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु।।88।।

    अर्थ · Hindi

    निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु।।88।।

  982. RCM 1.89.1Open verse →

    यह उत्सव देखिअ भरि लोचन। सोइ कछु करहु मदन मद मोचन।

    अर्थ · Hindi

    यह उत्सव देखिअ भरि लोचन। सोइ कछु करहु मदन मद मोचन।

  983. RCM 1.89.2Open verse →

    कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा। कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा। कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा।।

  984. RCM 1.89.3Open verse →

    सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।।

  985. RCM 1.89.4Open verse →

    पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा।।

    अर्थ · Hindi

    पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा।।

  986. RCM 1.89.5Open verse →

    सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।।

  987. RCM 1.89.6Open verse →

    तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई।।

    अर्थ · Hindi

    तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई।।

  988. RCM 1.89.7Open verse →

    अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।।

  989. RCM 1.89.8Open verse →

    प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी।।

  990. RCM 1.89.9Open verse →

    कहा हमार न सुनेहु तब नारद कें उपदेस।

    अर्थ · Hindi

    कहा हमार न सुनेहु तब नारद कें उपदेस।

  991. RCM 1.89.10Open verse →

    अब भा झूठ तुम्हार पन जारेउ कामु महेस।।89।।

    अर्थ · Hindi

    अब भा झूठ तुम्हार पन जारेउ कामु महेस।।89।।

  992. RCM 1.90.1Open verse →

    सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी। उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी। उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी।।

  993. RCM 1.90.2Open verse →

    तुम्हरें जान कामु अब जारा। अब लगि संभु रहे सबिकारा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरें जान कामु अब जारा। अब लगि संभु रहे सबिकारा।।

  994. RCM 1.90.3Open verse →

    हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।।

    अर्थ · Hindi

    हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।।

  995. RCM 1.90.4Open verse →

    जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी।।

  996. RCM 1.90.5Open verse →

    तौ हमार पन सुनहु मुनीसा। करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा।।

    अर्थ · Hindi

    तौ हमार पन सुनहु मुनीसा। करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा।।

  997. RCM 1.90.6Open verse →

    तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा। सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा। सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा।।

  998. RCM 1.90.7Open verse →

    तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।।

  999. RCM 1.90.8Open verse →

    गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई।।

  1000. RCM 1.90.9Open verse →

    हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।।

    अर्थ · Hindi

    हियँ हरषे मुनि बचन सुनि देखि प्रीति बिस्वास।।

  1001. RCM 1.90.10Open verse →

    चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास।।90।।

    अर्थ · Hindi

    चले भवानिहि नाइ सिर गए हिमाचल पास।।90।।

  1002. RCM 1.91.1Open verse →

    सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा। मदन दहन सुनि अति दुखु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा। मदन दहन सुनि अति दुखु पावा।।

  1003. RCM 1.91.2Open verse →

    बहुरि कहेउ रति कर बरदाना। सुनि हिमवंत बहुत सुखु माना।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि कहेउ रति कर बरदाना। सुनि हिमवंत बहुत सुखु माना।।

  1004. RCM 1.91.3Open verse →

    हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई। सादर मुनिबर लिए बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई। सादर मुनिबर लिए बोलाई।।

  1005. RCM 1.91.4Open verse →

    सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई। बेगि बेदबिधि लगन धराई।।

    अर्थ · Hindi

    सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई। बेगि बेदबिधि लगन धराई।।

  1006. RCM 1.91.5Open verse →

    पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही। गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही। गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही।।

  1007. RCM 1.91.6Open verse →

    जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती। बाचत प्रीति न हृदयँ समाती।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती। बाचत प्रीति न हृदयँ समाती।।

  1008. RCM 1.91.7Open verse →

    लगन बाचि अज सबहि सुनाई। हरषे मुनि सब सुर समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    लगन बाचि अज सबहि सुनाई। हरषे मुनि सब सुर समुदाई।।

  1009. RCM 1.91.8Open verse →

    सुमन बृष्टि नभ बाजन बाजे। मंगल कलस दसहुँ दिसि साजे।।

    अर्थ · Hindi

    सुमन बृष्टि नभ बाजन बाजे। मंगल कलस दसहुँ दिसि साजे।।

  1010. RCM 1.91.9Open verse →

    लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।

    अर्थ · Hindi

    लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।

  1011. RCM 1.91.10Open verse →

    होहि सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान।।91।।

    अर्थ · Hindi

    होहि सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान।।91।।

  1012. RCM 1.92.1Open verse →

    सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा।।

    अर्थ · Hindi

    सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा।।

  1013. RCM 1.92.2Open verse →

    कुंडल कंकन पहिरे ब्याला। तन बिभूति पट केहरि छाला।।

    अर्थ · Hindi

    कुंडल कंकन पहिरे ब्याला। तन बिभूति पट केहरि छाला।।

  1014. RCM 1.92.3Open verse →

    ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा।।

    अर्थ · Hindi

    ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा।।

  1015. RCM 1.92.4Open verse →

    गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला।।

    अर्थ · Hindi

    गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला।।

  1016. RCM 1.92.5Open verse →

    कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा।।

    अर्थ · Hindi

    कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा।।

  1017. RCM 1.92.6Open verse →

    देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं। बर लायक दुलहिनि जग नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं। बर लायक दुलहिनि जग नाहीं।।

  1018. RCM 1.92.7Open verse →

    बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता। चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता।।

    अर्थ · Hindi

    बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता। चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता।।

  1019. RCM 1.92.8Open verse →

    सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा।।

    अर्थ · Hindi

    सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा।।

  1020. RCM 1.92.9Open verse →

    बिष्नु कहा अस बिहसि तब बोलि सकल दिसिराज।

    अर्थ · Hindi

    बिष्नु कहा अस बिहसि तब बोलि सकल दिसिराज।

  1021. RCM 1.92.10Open verse →

    बिलग बिलग होइ चलहु सब निज निज सहित समाज।।92।।

    अर्थ · Hindi

    बिलग बिलग होइ चलहु सब निज निज सहित समाज।।92।।

  1022. RCM 1.93.1Open verse →

    बर अनुहारि बरात न भाई। हँसी करैहहु पर पुर जाई।।

    अर्थ · Hindi

    बर अनुहारि बरात न भाई। हँसी करैहहु पर पुर जाई।।

  1023. RCM 1.93.2Open verse →

    बिष्नु बचन सुनि सुर मुसकाने। निज निज सेन सहित बिलगाने।।

    अर्थ · Hindi

    बिष्नु बचन सुनि सुर मुसकाने। निज निज सेन सहित बिलगाने।।

  1024. RCM 1.93.3Open verse →

    मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मनहीं मन महेसु मुसुकाहीं। हरि के बिंग्य बचन नहिं जाहीं।।

  1025. RCM 1.93.4Open verse →

    अति प्रिय बचन सुनत प्रिय केरे। भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे।।

    अर्थ · Hindi

    अति प्रिय बचन सुनत प्रिय केरे। भृंगिहि प्रेरि सकल गन टेरे।।

  1026. RCM 1.93.5Open verse →

    सिव अनुसासन सुनि सब आए। प्रभु पद जलज सीस तिन्ह नाए।।

    अर्थ · Hindi

    सिव अनुसासन सुनि सब आए। प्रभु पद जलज सीस तिन्ह नाए।।

  1027. RCM 1.93.6Open verse →

    नाना बाहन नाना बेषा। बिहसे सिव समाज निज देखा।।

    अर्थ · Hindi

    नाना बाहन नाना बेषा। बिहसे सिव समाज निज देखा।।

  1028. RCM 1.93.7Open verse →

    कोउ मुखहीन बिपुल मुख काहू। बिनु पद कर कोउ बहु पद बाहू।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ मुखहीन बिपुल मुख काहू। बिनु पद कर कोउ बहु पद बाहू।।

  1029. RCM 1.93.8Open verse →

    बिपुल नयन कोउ नयन बिहीना। रिष्टपुष्ट कोउ अति तनखीना।।

    अर्थ · Hindi

    बिपुल नयन कोउ नयन बिहीना। रिष्टपुष्ट कोउ अति तनखीना।।

  1030. RCM 1.94.1Open verse →

    जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।।

    अर्थ · Hindi

    जस दूलहु तसि बनी बराता। कौतुक बिबिध होहिं मग जाता।।

  1031. RCM 1.94.2Open verse →

    इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ हिमाचल रचेउ बिताना। अति बिचित्र नहिं जाइ बखाना।।

  1032. RCM 1.94.3Open verse →

    सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सैल सकल जहँ लगि जग माहीं। लघु बिसाल नहिं बरनि सिराहीं।।

  1033. RCM 1.94.4Open verse →

    बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा।।

    अर्थ · Hindi

    बन सागर सब नदीं तलावा। हिमगिरि सब कहुँ नेवत पठावा।।

  1034. RCM 1.94.5Open verse →

    कामरूप सुंदर तन धारी। सहित समाज सहित बर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    कामरूप सुंदर तन धारी। सहित समाज सहित बर नारी।।

  1035. RCM 1.94.6Open verse →

    गए सकल तुहिनाचल गेहा। गावहिं मंगल सहित सनेहा।।

    अर्थ · Hindi

    गए सकल तुहिनाचल गेहा। गावहिं मंगल सहित सनेहा।।

  1036. RCM 1.94.7Open verse →

    प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथमहिं गिरि बहु गृह सँवराए। जथाजोगु तहँ तहँ सब छाए।।

  1037. RCM 1.94.8Open verse →

    पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुर सोभा अवलोकि सुहाई। लागइ लघु बिरंचि निपुनाई।।

  1038. RCM 1.95.1Open verse →

    नगर निकट बरात सुनि आई। पुर खरभरु सोभा अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    नगर निकट बरात सुनि आई। पुर खरभरु सोभा अधिकाई।।

  1039. RCM 1.95.2Open verse →

    करि बनाव सजि बाहन नाना। चले लेन सादर अगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    करि बनाव सजि बाहन नाना। चले लेन सादर अगवाना।।

  1040. RCM 1.95.3Open verse →

    हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    हियँ हरषे सुर सेन निहारी। हरिहि देखि अति भए सुखारी।।

  1041. RCM 1.95.4Open verse →

    सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे।।

    अर्थ · Hindi

    सिव समाज जब देखन लागे। बिडरि चले बाहन सब भागे।।

  1042. RCM 1.95.5Open verse →

    धरि धीरजु तहँ रहे सयाने। बालक सब लै जीव पराने।।

    अर्थ · Hindi

    धरि धीरजु तहँ रहे सयाने। बालक सब लै जीव पराने।।

  1043. RCM 1.95.6Open verse →

    गएँ भवन पूछहिं पितु माता। कहहिं बचन भय कंपित गाता।।

    अर्थ · Hindi

    गएँ भवन पूछहिं पितु माता। कहहिं बचन भय कंपित गाता।।

  1044. RCM 1.95.7Open verse →

    कहिअ काह कहि जाइ न बाता। जम कर धार किधौं बरिआता।।

    अर्थ · Hindi

    कहिअ काह कहि जाइ न बाता। जम कर धार किधौं बरिआता।।

  1045. RCM 1.95.8Open verse →

    बरु बौराह बसहँ असवारा। ब्याल कपाल बिभूषन छारा।।

    अर्थ · Hindi

    बरु बौराह बसहँ असवारा। ब्याल कपाल बिभूषन छारा।।

  1046. RCM 1.96.1Open verse →

    लै अगवान बरातहि आए। दिए सबहि जनवास सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    लै अगवान बरातहि आए। दिए सबहि जनवास सुहाए।।

  1047. RCM 1.96.2Open verse →

    मैनाँ सुभ आरती सँवारी। संग सुमंगल गावहिं नारी।।

    अर्थ · Hindi

    मैनाँ सुभ आरती सँवारी। संग सुमंगल गावहिं नारी।।

  1048. RCM 1.96.3Open verse →

    कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।।

    अर्थ · Hindi

    कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।।

  1049. RCM 1.96.4Open verse →

    बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।।

  1050. RCM 1.96.5Open verse →

    भागि भवन पैठीं अति त्रासा। गए महेसु जहाँ जनवासा।।

    अर्थ · Hindi

    भागि भवन पैठीं अति त्रासा। गए महेसु जहाँ जनवासा।।

  1051. RCM 1.96.6Open verse →

    मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी। लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी। लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी।।

  1052. RCM 1.96.7Open verse →

    अधिक सनेहँ गोद बैठारी। स्याम सरोज नयन भरे बारी।।

    अर्थ · Hindi

    अधिक सनेहँ गोद बैठारी। स्याम सरोज नयन भरे बारी।।

  1053. RCM 1.96.8Open verse →

    जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा। तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा। तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा।।

  1054. RCM 1.96.9Open verse →

    कस कीन्ह बरु बौराह बिधि जेहिं तुम्हहि सुंदरता दई।

    अर्थ · Hindi

    कस कीन्ह बरु बौराह बिधि जेहिं तुम्हहि सुंदरता दई।

  1055. RCM 1.96.10Open verse →

    जो फलु चहिअ सुरतरुहिं सो बरबस बबूरहिं लागई।।

    अर्थ · Hindi

    जो फलु चहिअ सुरतरुहिं सो बरबस बबूरहिं लागई।।

  1056. RCM 1.96.11Open verse →

    तुम्ह सहित गिरि तें गिरौं पावक जरौं जलनिधि महुँ परौं।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सहित गिरि तें गिरौं पावक जरौं जलनिधि महुँ परौं।।

  1057. RCM 1.96.12Open verse →

    घरु जाउ अपजसु होउ जग जीवत बिबाहु न हौं करौं।।

    अर्थ · Hindi

    घरु जाउ अपजसु होउ जग जीवत बिबाहु न हौं करौं।।

  1058. RCM 1.96.13Open verse →

    भई बिकल अबला सकल दुखित देखि गिरिनारि।

    अर्थ · Hindi

    भई बिकल अबला सकल दुखित देखि गिरिनारि।

  1059. RCM 1.96.14Open verse →

    करि बिलापु रोदति बदति सुता सनेहु सँभारि।।96।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिलापु रोदति बदति सुता सनेहु सँभारि।।96।।

  1060. RCM 1.97.1Open verse →

    नारद कर मैं काह बिगारा। भवनु मोर जिन्ह बसत उजारा।।

    अर्थ · Hindi

    नारद कर मैं काह बिगारा। भवनु मोर जिन्ह बसत उजारा।।

  1061. RCM 1.97.2Open verse →

    अस उपदेसु उमहि जिन्ह दीन्हा। बौरे बरहि लगि तपु कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    अस उपदेसु उमहि जिन्ह दीन्हा। बौरे बरहि लगि तपु कीन्हा।।

  1062. RCM 1.97.3Open verse →

    साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया।।

    अर्थ · Hindi

    साचेहुँ उन्ह के मोह न माया। उदासीन धनु धामु न जाया।।

  1063. RCM 1.97.4Open verse →

    पर घर घालक लाज न भीरा। बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा।।

    अर्थ · Hindi

    पर घर घालक लाज न भीरा। बाझँ कि जान प्रसव कैं पीरा।।

  1064. RCM 1.97.5Open verse →

    जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    जननिहि बिकल बिलोकि भवानी। बोली जुत बिबेक मृदु बानी।।

  1065. RCM 1.97.6Open verse →

    अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि सोचहि मति माता। सो न टरइ जो रचइ बिधाता।।

  1066. RCM 1.97.7Open verse →

    करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।

    अर्थ · Hindi

    करम लिखा जौ बाउर नाहू। तौ कत दोसु लगाइअ काहू।।

  1067. RCM 1.97.8Open verse →

    तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सन मिटहिं कि बिधि के अंका। मातु ब्यर्थ जनि लेहु कलंका।।

  1068. RCM 1.98.1Open verse →

    तब नारद सबहि समुझावा। पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा।।

    अर्थ · Hindi

    तब नारद सबहि समुझावा। पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा।।

  1069. RCM 1.98.2Open verse →

    मयना सत्य सुनहु मम बानी। जगदंबा तव सुता भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    मयना सत्य सुनहु मम बानी। जगदंबा तव सुता भवानी।।

  1070. RCM 1.98.3Open verse →

    अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।।

    अर्थ · Hindi

    अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।।

  1071. RCM 1.98.4Open verse →

    जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि।।

    अर्थ · Hindi

    जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि।।

  1072. RCM 1.98.5Open verse →

    जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई। नामु सती सुंदर तनु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई। नामु सती सुंदर तनु पाई।।

  1073. RCM 1.98.6Open verse →

    तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं। कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं। कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं।।

  1074. RCM 1.98.7Open verse →

    एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।।

  1075. RCM 1.98.8Open verse →

    भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा।।

  1076. RCM 1.99.1Open verse →

    तब मयना हिमवंतु अनंदे। पुनि पुनि पारबती पद बंदे।।

    अर्थ · Hindi

    तब मयना हिमवंतु अनंदे। पुनि पुनि पारबती पद बंदे।।

  1077. RCM 1.99.2Open verse →

    नारि पुरुष सिसु जुबा सयाने। नगर लोग सब अति हरषाने।।

    अर्थ · Hindi

    नारि पुरुष सिसु जुबा सयाने। नगर लोग सब अति हरषाने।।

  1078. RCM 1.99.3Open verse →

    लगे होन पुर मंगलगाना। सजे सबहि हाटक घट नाना।।

    अर्थ · Hindi

    लगे होन पुर मंगलगाना। सजे सबहि हाटक घट नाना।।

  1079. RCM 1.99.4Open verse →

    भाँति अनेक भई जेवराना। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा।।

    अर्थ · Hindi

    भाँति अनेक भई जेवराना। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा।।

  1080. RCM 1.99.5Open verse →

    सो जेवनार कि जाइ बखानी। बसहिं भवन जेहिं मातु भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    सो जेवनार कि जाइ बखानी। बसहिं भवन जेहिं मातु भवानी।।

  1081. RCM 1.99.6Open verse →

    सादर बोले सकल बराती। बिष्नु बिरंचि देव सब जाती।।

    अर्थ · Hindi

    सादर बोले सकल बराती। बिष्नु बिरंचि देव सब जाती।।

  1082. RCM 1.99.7Open verse →

    बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।।

  1083. RCM 1.99.8Open verse →

    नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी।।

  1084. RCM 1.100.1Open verse →

    बोलि सकल सुर सादर लीन्हे। सबहि जथोचित आसन दीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    बोलि सकल सुर सादर लीन्हे। सबहि जथोचित आसन दीन्हे।।

  1085. RCM 1.100.2Open verse →

    बेदी बेद बिधान सँवारी। सुभग सुमंगल गावहिं नारी।।

    अर्थ · Hindi

    बेदी बेद बिधान सँवारी। सुभग सुमंगल गावहिं नारी।।

  1086. RCM 1.100.3Open verse →

    सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।।

  1087. RCM 1.100.4Open verse →

    बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई।।

  1088. RCM 1.100.5Open verse →

    बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाई। करि सिंगारु सखीं लै आई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाई। करि सिंगारु सखीं लै आई।।

  1089. RCM 1.100.6Open verse →

    देखत रूपु सकल सुर मोहे। बरनै छबि अस जग कबि को है।।

    अर्थ · Hindi

    देखत रूपु सकल सुर मोहे। बरनै छबि अस जग कबि को है।।

  1090. RCM 1.100.7Open verse →

    जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।।

    अर्थ · Hindi

    जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।।

  1091. RCM 1.100.8Open verse →

    सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी।।

  1092. RCM 1.101.1Open verse →

    जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।।

    अर्थ · Hindi

    जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।।

  1093. RCM 1.101.2Open verse →

    गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी।।

  1094. RCM 1.101.3Open verse →

    पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।।

    अर्थ · Hindi

    पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।।

  1095. RCM 1.101.4Open verse →

    बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं।।

  1096. RCM 1.101.5Open verse →

    बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना।।

  1097. RCM 1.101.6Open verse →

    हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू।।

  1098. RCM 1.101.7Open verse →

    दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा।।

    अर्थ · Hindi

    दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा।।

  1099. RCM 1.101.8Open verse →

    अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना।।

  1100. RCM 1.102.1Open verse →

    बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    बहु बिधि संभु सास समुझाई। गवनी भवन चरन सिरु नाई।।

  1101. RCM 1.102.2Open verse →

    जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    जननीं उमा बोलि तब लीन्ही। लै उछंग सुंदर सिख दीन्ही।।

  1102. RCM 1.102.3Open verse →

    करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।।

    अर्थ · Hindi

    करेहु सदा संकर पद पूजा। नारिधरमु पति देउ न दूजा।।

  1103. RCM 1.102.4Open verse →

    बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    बचन कहत भरे लोचन बारी। बहुरि लाइ उर लीन्हि कुमारी।।

  1104. RCM 1.102.5Open verse →

    कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कत बिधि सृजीं नारि जग माहीं। पराधीन सपनेहुँ सुखु नाहीं।।

  1105. RCM 1.102.6Open verse →

    भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    भै अति प्रेम बिकल महतारी। धीरजु कीन्ह कुसमय बिचारी।।

  1106. RCM 1.102.7Open verse →

    पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि मिलति परति गहि चरना। परम प्रेम कछु जाइ न बरना।।

  1107. RCM 1.102.8Open verse →

    सब नारिन्ह मिलि भेटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी।।

    अर्थ · Hindi

    सब नारिन्ह मिलि भेटि भवानी। जाइ जननि उर पुनि लपटानी।।

  1108. RCM 1.103.1Open verse →

    तुरत भवन आए गिरिराई। सकल सैल सर लिए बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत भवन आए गिरिराई। सकल सैल सर लिए बोलाई।।

  1109. RCM 1.103.2Open verse →

    आदर दान बिनय बहुमाना। सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना।।

    अर्थ · Hindi

    आदर दान बिनय बहुमाना। सब कर बिदा कीन्ह हिमवाना।।

  1110. RCM 1.103.3Open verse →

    जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    जबहिं संभु कैलासहिं आए। सुर सब निज निज लोक सिधाए।।

  1111. RCM 1.103.4Open verse →

    जगत मातु पितु संभु भवानी। तेही सिंगारु न कहउँ बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    जगत मातु पितु संभु भवानी। तेही सिंगारु न कहउँ बखानी।।

  1112. RCM 1.103.5Open verse →

    करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं बिबिध बिधि भोग बिलासा। गनन्ह समेत बसहिं कैलासा।।

  1113. RCM 1.103.6Open verse →

    हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    हर गिरिजा बिहार नित नयऊ। एहि बिधि बिपुल काल चलि गयऊ।।

  1114. RCM 1.103.7Open verse →

    तब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुर समर जेहिं मारा।।

    अर्थ · Hindi

    तब जनमेउ षटबदन कुमारा। तारकु असुर समर जेहिं मारा।।

  1115. RCM 1.103.8Open verse →

    आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना।।

    अर्थ · Hindi

    आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। षन्मुख जन्मु सकल जग जाना।।

  1116. RCM 1.104.1Open verse →

    संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।।

    अर्थ · Hindi

    संभु चरित सुनि सरस सुहावा। भरद्वाज मुनि अति सुख पावा।।

  1117. RCM 1.104.2Open verse →

    बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी।।

    अर्थ · Hindi

    बहु लालसा कथा पर बाढ़ी। नयनन्हि नीरु रोमावलि ठाढ़ी।।

  1118. RCM 1.104.3Open verse →

    प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम बिबस मुख आव न बानी। दसा देखि हरषे मुनि ग्यानी।।

  1119. RCM 1.104.4Open verse →

    अहो धन्य तव जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा।।

    अर्थ · Hindi

    अहो धन्य तव जन्मु मुनीसा। तुम्हहि प्रान सम प्रिय गौरीसा।।

  1120. RCM 1.104.5Open verse →

    सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सिव पद कमल जिन्हहि रति नाहीं। रामहि ते सपनेहुँ न सोहाहीं।।

  1121. RCM 1.104.6Open verse →

    बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु छल बिस्वनाथ पद नेहू। राम भगत कर लच्छन एहू।।

  1122. RCM 1.104.7Open verse →

    सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।।

    अर्थ · Hindi

    सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी।।

  1123. RCM 1.104.8Open verse →

    पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई।।

    अर्थ · Hindi

    पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई।।

  1124. RCM 1.104.9Open verse →

    प्रथमहिं मै कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।

    अर्थ · Hindi

    प्रथमहिं मै कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार।

  1125. RCM 1.104.10Open verse →

    सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार।।104।।

    अर्थ · Hindi

    सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार।।104।।

  1126. RCM 1.105.1Open verse →

    मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला।।

    अर्थ · Hindi

    मैं जाना तुम्हार गुन सीला। कहउँ सुनहु अब रघुपति लीला।।

  1127. RCM 1.105.2Open verse →

    सुनु मुनि आजु समागम तोरें। कहि न जाइ जस सुखु मन मोरें।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मुनि आजु समागम तोरें। कहि न जाइ जस सुखु मन मोरें।।

  1128. RCM 1.105.3Open verse →

    राम चरित अति अमित मुनिसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा।।

    अर्थ · Hindi

    राम चरित अति अमित मुनिसा। कहि न सकहिं सत कोटि अहीसा।।

  1129. RCM 1.105.4Open verse →

    तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि जथाश्रुत कहउँ बखानी। सुमिरि गिरापति प्रभु धनुपानी।।

  1130. RCM 1.105.5Open verse →

    सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    सारद दारुनारि सम स्वामी। रामु सूत्रधर अंतरजामी।।

  1131. RCM 1.105.6Open verse →

    जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी।।

  1132. RCM 1.105.7Open verse →

    प्रनवउँ सोइ कृपाल रघुनाथा। बरनउँ बिसद तासु गुन गाथा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रनवउँ सोइ कृपाल रघुनाथा। बरनउँ बिसद तासु गुन गाथा।।

  1133. RCM 1.105.8Open verse →

    परम रम्य गिरिबरु कैलासू। सदा जहाँ सिव उमा निवासू।।

    अर्थ · Hindi

    परम रम्य गिरिबरु कैलासू। सदा जहाँ सिव उमा निवासू।।

  1134. RCM 1.105.9Open verse →

    सिद्ध तपोधन जोगिजन सूर किंनर मुनिबृंद।

    अर्थ · Hindi

    सिद्ध तपोधन जोगिजन सूर किंनर मुनिबृंद।

  1135. RCM 1.105.10Open verse →

    बसहिं तहाँ सुकृती सकल सेवहिं सिब सुखकंद।।105।।

    अर्थ · Hindi

    बसहिं तहाँ सुकृती सकल सेवहिं सिब सुखकंद।।105।।

  1136. RCM 1.106.1Open verse →

    हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    हरि हर बिमुख धर्म रति नाहीं। ते नर तहँ सपनेहुँ नहिं जाहीं।।

  1137. RCM 1.106.2Open verse →

    तेहि गिरि पर बट बिटप बिसाला। नित नूतन सुंदर सब काला।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि गिरि पर बट बिटप बिसाला। नित नूतन सुंदर सब काला।।

  1138. RCM 1.106.3Open verse →

    त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया।।

    अर्थ · Hindi

    त्रिबिध समीर सुसीतलि छाया। सिव बिश्राम बिटप श्रुति गाया।।

  1139. RCM 1.106.4Open verse →

    एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ। तरु बिलोकि उर अति सुखु भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार तेहि तर प्रभु गयऊ। तरु बिलोकि उर अति सुखु भयऊ।।

  1140. RCM 1.106.5Open verse →

    निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठै सहजहिं संभु कृपाला।।

    अर्थ · Hindi

    निज कर डासि नागरिपु छाला। बैठै सहजहिं संभु कृपाला।।

  1141. RCM 1.106.6Open verse →

    कुंद इंदु दर गौर सरीरा। भुज प्रलंब परिधन मुनिचीरा।।

    अर्थ · Hindi

    कुंद इंदु दर गौर सरीरा। भुज प्रलंब परिधन मुनिचीरा।।

  1142. RCM 1.106.7Open verse →

    तरुन अरुन अंबुज सम चरना। नख दुति भगत हृदय तम हरना।।

    अर्थ · Hindi

    तरुन अरुन अंबुज सम चरना। नख दुति भगत हृदय तम हरना।।

  1143. RCM 1.106.8Open verse →

    भुजग भूति भूषन त्रिपुरारी। आननु सरद चंद छबि हारी।।

    अर्थ · Hindi

    भुजग भूति भूषन त्रिपुरारी। आननु सरद चंद छबि हारी।।

  1144. RCM 1.106.9Open verse →

    जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।

    अर्थ · Hindi

    जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।

  1145. RCM 1.106.10Open verse →

    नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल।।106।।

    अर्थ · Hindi

    नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल।।106।।

  1146. RCM 1.107.1Open verse →

    बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें।।

  1147. RCM 1.107.2Open verse →

    पारबती भल अवसरु जानी। गई संभु पहिं मातु भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    पारबती भल अवसरु जानी। गई संभु पहिं मातु भवानी।।

  1148. RCM 1.107.3Open verse →

    जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा।।

  1149. RCM 1.107.4Open verse →

    बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई।।

    अर्थ · Hindi

    बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई।।

  1150. RCM 1.107.5Open verse →

    पति हियँ हेतु अधिक अनुमानी। बिहसि उमा बोलीं प्रिय बानी।।

    अर्थ · Hindi

    पति हियँ हेतु अधिक अनुमानी। बिहसि उमा बोलीं प्रिय बानी।।

  1151. RCM 1.107.6Open verse →

    कथा जो सकल लोक हितकारी। सोइ पूछन चह सैलकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    कथा जो सकल लोक हितकारी। सोइ पूछन चह सैलकुमारी।।

  1152. RCM 1.107.7Open verse →

    बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा बिदित तुम्हारी।।

  1153. RCM 1.107.8Open verse →

    चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    चर अरु अचर नाग नर देवा। सकल करहिं पद पंकज सेवा।।

  1154. RCM 1.107.9Open verse →

    प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु समरथ सर्बग्य सिव सकल कला गुन धाम।।

  1155. RCM 1.107.10Open verse →

    जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम।।107।।

    अर्थ · Hindi

    जोग ग्यान बैराग्य निधि प्रनत कलपतरु नाम।।107।।

  1156. RCM 1.108.1Open verse →

    जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मो पर प्रसन्न सुखरासी। जानिअ सत्य मोहि निज दासी।।

  1157. RCM 1.108.2Open verse →

    तौं प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    तौं प्रभु हरहु मोर अग्याना। कहि रघुनाथ कथा बिधि नाना।।

  1158. RCM 1.108.3Open verse →

    जासु भवनु सुरतरु तर होई। सहि कि दरिद्र जनित दुखु सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जासु भवनु सुरतरु तर होई। सहि कि दरिद्र जनित दुखु सोई।।

  1159. RCM 1.108.4Open verse →

    ससिभूषन अस हृदयँ बिचारी। हरहु नाथ मम मति भ्रम भारी।।

    अर्थ · Hindi

    ससिभूषन अस हृदयँ बिचारी। हरहु नाथ मम मति भ्रम भारी।।

  1160. RCM 1.108.5Open verse →

    प्रभु जे मुनि परमारथबादी। कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु जे मुनि परमारथबादी। कहहिं राम कहुँ ब्रह्म अनादी।।

  1161. RCM 1.108.6Open verse →

    सेस सारदा बेद पुराना। सकल करहिं रघुपति गुन गाना।।

    अर्थ · Hindi

    सेस सारदा बेद पुराना। सकल करहिं रघुपति गुन गाना।।

  1162. RCM 1.108.7Open verse →

    तुम्ह पुनि राम राम दिन राती। सादर जपहु अनँग आराती।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह पुनि राम राम दिन राती। सादर जपहु अनँग आराती।।

  1163. RCM 1.108.8Open verse →

    रामु सो अवध नृपति सुत सोई। की अज अगुन अलखगति कोई।।

    अर्थ · Hindi

    रामु सो अवध नृपति सुत सोई। की अज अगुन अलखगति कोई।।

  1164. RCM 1.108.9Open verse →

    जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि।

    अर्थ · Hindi

    जौं नृप तनय त ब्रह्म किमि नारि बिरहँ मति भोरि।

  1165. RCM 1.108.10Open verse →

    देख चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि।।108।।

    अर्थ · Hindi

    देख चरित महिमा सुनत भ्रमति बुद्धि अति मोरि।।108।।

  1166. RCM 1.109.1Open verse →

    जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कबहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जौं अनीह ब्यापक बिभु कोऊ। कबहु बुझाइ नाथ मोहि सोऊ।।

  1167. RCM 1.109.2Open verse →

    अग्य जानि रिस उर जनि धरहू। जेहि बिधि मोह मिटै सोइ करहू।।

    अर्थ · Hindi

    अग्य जानि रिस उर जनि धरहू। जेहि बिधि मोह मिटै सोइ करहू।।

  1168. RCM 1.109.3Open verse →

    मै बन दीखि राम प्रभुताई। अति भय बिकल न तुम्हहि सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    मै बन दीखि राम प्रभुताई। अति भय बिकल न तुम्हहि सुनाई।।

  1169. RCM 1.109.4Open verse →

    तदपि मलिन मन बोधु न आवा। सो फलु भली भाँति हम पावा।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि मलिन मन बोधु न आवा। सो फलु भली भाँति हम पावा।।

  1170. RCM 1.109.5Open verse →

    अजहूँ कछु संसउ मन मोरे। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें।।

    अर्थ · Hindi

    अजहूँ कछु संसउ मन मोरे। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें।।

  1171. RCM 1.109.6Open verse →

    प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा। नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा। नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा।।

  1172. RCM 1.109.7Open verse →

    तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं।।

  1173. RCM 1.109.8Open verse →

    कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा।।

  1174. RCM 1.109.9Open verse →

    बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।

    अर्थ · Hindi

    बंदउ पद धरि धरनि सिरु बिनय करउँ कर जोरि।

  1175. RCM 1.109.10Open verse →

    बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि।।109।।

    अर्थ · Hindi

    बरनहु रघुबर बिसद जसु श्रुति सिद्धांत निचोरि।।109।।

  1176. RCM 1.110.1Open verse →

    जदपि जोषिता नहिं अधिकारी। दासी मन क्रम बचन तुम्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि जोषिता नहिं अधिकारी। दासी मन क्रम बचन तुम्हारी।।

  1177. RCM 1.110.2Open verse →

    गूढ़उ तत्व न साधु दुरावहिं। आरत अधिकारी जहँ पावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    गूढ़उ तत्व न साधु दुरावहिं। आरत अधिकारी जहँ पावहिं।।

  1178. RCM 1.110.3Open verse →

    अति आरति पूछउँ सुरराया। रघुपति कथा कहहु करि दाया।।

    अर्थ · Hindi

    अति आरति पूछउँ सुरराया। रघुपति कथा कहहु करि दाया।।

  1179. RCM 1.110.4Open verse →

    प्रथम सो कारन कहहु बिचारी। निर्गुन ब्रह्म सगुन बपु धारी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम सो कारन कहहु बिचारी। निर्गुन ब्रह्म सगुन बपु धारी।।

  1180. RCM 1.110.5Open verse →

    पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि प्रभु कहहु राम अवतारा। बालचरित पुनि कहहु उदारा।।

  1181. RCM 1.110.6Open verse →

    कहहु जथा जानकी बिबाहीं। राज तजा सो दूषन काहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु जथा जानकी बिबाहीं। राज तजा सो दूषन काहीं।।

  1182. RCM 1.110.7Open verse →

    बन बसि कीन्हे चरित अपारा। कहहु नाथ जिमि रावन मारा।।

    अर्थ · Hindi

    बन बसि कीन्हे चरित अपारा। कहहु नाथ जिमि रावन मारा।।

  1183. RCM 1.110.8Open verse →

    राज बैठि कीन्हीं बहु लीला। सकल कहहु संकर सुखलीला।।

    अर्थ · Hindi

    राज बैठि कीन्हीं बहु लीला। सकल कहहु संकर सुखलीला।।

  1184. RCM 1.110.9Open verse →

    बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि कहहु करुनायतन कीन्ह जो अचरज राम।

  1185. RCM 1.110.10Open verse →

    प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम।।110।।

    अर्थ · Hindi

    प्रजा सहित रघुबंसमनि किमि गवने निज धाम।।110।।

  1186. RCM 1.111.1Open verse →

    पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी। जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि प्रभु कहहु सो तत्व बखानी। जेहिं बिग्यान मगन मुनि ग्यानी।।

  1187. RCM 1.111.2Open verse →

    भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। पुनि सब बरनहु सहित बिभागा।।

    अर्थ · Hindi

    भगति ग्यान बिग्यान बिरागा। पुनि सब बरनहु सहित बिभागा।।

  1188. RCM 1.111.3Open verse →

    औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका।।

    अर्थ · Hindi

    औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका।।

  1189. RCM 1.111.4Open verse →

    जो प्रभु मैं पूछा नहि होई। सोउ दयाल राखहु जनि गोई।।

    अर्थ · Hindi

    जो प्रभु मैं पूछा नहि होई। सोउ दयाल राखहु जनि गोई।।

  1190. RCM 1.111.5Open verse →

    तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना।।

  1191. RCM 1.111.6Open verse →

    प्रस्न उमा कै सहज सुहाई। छल बिहीन सुनि सिव मन भाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रस्न उमा कै सहज सुहाई। छल बिहीन सुनि सिव मन भाई।।

  1192. RCM 1.111.7Open verse →

    हर हियँ रामचरित सब आए। प्रेम पुलक लोचन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    हर हियँ रामचरित सब आए। प्रेम पुलक लोचन जल छाए।।

  1193. RCM 1.111.8Open verse →

    श्रीरघुनाथ रूप उर आवा। परमानंद अमित सुख पावा।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीरघुनाथ रूप उर आवा। परमानंद अमित सुख पावा।।

  1194. RCM 1.111.9Open verse →

    मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    मगन ध्यानरस दंड जुग पुनि मन बाहेर कीन्ह।

  1195. RCM 1.111.10Open verse →

    रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह।।111।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति चरित महेस तब हरषित बरनै लीन्ह।।111।।

  1196. RCM 1.112.1Open verse →

    झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें। जिमि भुजंग बिनु रजु पहिचानें।।

    अर्थ · Hindi

    झूठेउ सत्य जाहि बिनु जानें। जिमि भुजंग बिनु रजु पहिचानें।।

  1197. RCM 1.112.2Open verse →

    जेहि जानें जग जाइ हेराई। जागें जथा सपन भ्रम जाई।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि जानें जग जाइ हेराई। जागें जथा सपन भ्रम जाई।।

  1198. RCM 1.112.3Open verse →

    बंदउँ बालरूप सोई रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू।।

    अर्थ · Hindi

    बंदउँ बालरूप सोई रामू। सब सिधि सुलभ जपत जिसु नामू।।

  1199. RCM 1.112.4Open verse →

    मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी।।

  1200. RCM 1.112.5Open verse →

    करि प्रनाम रामहि त्रिपुरारी। हरषि सुधा सम गिरा उचारी।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनाम रामहि त्रिपुरारी। हरषि सुधा सम गिरा उचारी।।

  1201. RCM 1.112.6Open verse →

    धन्य धन्य गिरिराजकुमारी। तुम्ह समान नहिं कोउ उपकारी।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य धन्य गिरिराजकुमारी। तुम्ह समान नहिं कोउ उपकारी।।

  1202. RCM 1.112.7Open verse →

    पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा। सकल लोक जग पावनि गंगा।।

    अर्थ · Hindi

    पूँछेहु रघुपति कथा प्रसंगा। सकल लोक जग पावनि गंगा।।

  1203. RCM 1.112.8Open verse →

    तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी। कीन्हहु प्रस्न जगत हित लागी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह रघुबीर चरन अनुरागी। कीन्हहु प्रस्न जगत हित लागी।।

  1204. RCM 1.112.9Open verse →

    रामकृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं।

    अर्थ · Hindi

    रामकृपा तें पारबति सपनेहुँ तव मन माहिं।

  1205. RCM 1.112.10Open verse →

    सोक मोह संदेह भ्रम मम बिचार कछु नाहिं।।112।।

    अर्थ · Hindi

    सोक मोह संदेह भ्रम मम बिचार कछु नाहिं।।112।।

  1206. RCM 1.113.1Open verse →

    तदपि असंका कीन्हिहु सोई। कहत सुनत सब कर हित होई।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि असंका कीन्हिहु सोई। कहत सुनत सब कर हित होई।।

  1207. RCM 1.113.2Open verse →

    जिन्ह हरि कथा सुनी नहिं काना। श्रवन रंध्र अहिभवन समाना।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह हरि कथा सुनी नहिं काना। श्रवन रंध्र अहिभवन समाना।।

  1208. RCM 1.113.3Open verse →

    नयनन्हि संत दरस नहिं देखा। लोचन मोरपंख कर लेखा।।

    अर्थ · Hindi

    नयनन्हि संत दरस नहिं देखा। लोचन मोरपंख कर लेखा।।

  1209. RCM 1.113.4Open verse →

    ते सिर कटु तुंबरि समतूला। जे न नमत हरि गुर पद मूला।।

    अर्थ · Hindi

    ते सिर कटु तुंबरि समतूला। जे न नमत हरि गुर पद मूला।।

  1210. RCM 1.113.5Open verse →

    जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह हरिभगति हृदयँ नहिं आनी। जीवत सव समान तेइ प्रानी।।

  1211. RCM 1.113.6Open verse →

    जो नहिं करइ राम गुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।।

    अर्थ · Hindi

    जो नहिं करइ राम गुन गाना। जीह सो दादुर जीह समाना।।

  1212. RCM 1.113.7Open verse →

    कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती।।

    अर्थ · Hindi

    कुलिस कठोर निठुर सोइ छाती। सुनि हरिचरित न जो हरषाती।।

  1213. RCM 1.113.8Open verse →

    गिरिजा सुनहु राम कै लीला। सुर हित दनुज बिमोहनसीला।।

    अर्थ · Hindi

    गिरिजा सुनहु राम कै लीला। सुर हित दनुज बिमोहनसीला।।

  1214. RCM 1.113.9Open verse →

    रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा सुरधेनु सम सेवत सब सुख दानि।

  1215. RCM 1.113.10Open verse →

    सतसमाज सुरलोक सब को न सुनै अस जानि।।113।।

    अर्थ · Hindi

    सतसमाज सुरलोक सब को न सुनै अस जानि।।113।।

  1216. RCM 1.114.1Open verse →

    रामकथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उडावनिहारी।।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उडावनिहारी।।

  1217. RCM 1.114.2Open verse →

    रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    रामकथा कलि बिटप कुठारी। सादर सुनु गिरिराजकुमारी।।

  1218. RCM 1.114.3Open verse →

    राम नाम गुन चरित सुहाए। जनम करम अगनित श्रुति गाए।।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम गुन चरित सुहाए। जनम करम अगनित श्रुति गाए।।

  1219. RCM 1.114.4Open verse →

    जथा अनंत राम भगवाना। तथा कथा कीरति गुन नाना।।

    अर्थ · Hindi

    जथा अनंत राम भगवाना। तथा कथा कीरति गुन नाना।।

  1220. RCM 1.114.5Open verse →

    तदपि जथा श्रुत जसि मति मोरी। कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि जथा श्रुत जसि मति मोरी। कहिहउँ देखि प्रीति अति तोरी।।

  1221. RCM 1.114.6Open verse →

    उमा प्रस्न तव सहज सुहाई। सुखद संतसंमत मोहि भाई।।

    अर्थ · Hindi

    उमा प्रस्न तव सहज सुहाई। सुखद संतसंमत मोहि भाई।।

  1222. RCM 1.114.7Open verse →

    एक बात नहि मोहि सोहानी। जदपि मोह बस कहेहु भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    एक बात नहि मोहि सोहानी। जदपि मोह बस कहेहु भवानी।।

  1223. RCM 1.114.8Open verse →

    तुम जो कहा राम कोउ आना। जेहि श्रुति गाव धरहिं मुनि ध्याना।।

    अर्थ · Hindi

    तुम जो कहा राम कोउ आना। जेहि श्रुति गाव धरहिं मुनि ध्याना।।

  1224. RCM 1.114.9Open verse →

    कहहि सुनहि अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच।

    अर्थ · Hindi

    कहहि सुनहि अस अधम नर ग्रसे जे मोह पिसाच।

  1225. RCM 1.114.10Open verse →

    पाषंडी हरि पद बिमुख जानहिं झूठ न साच।।114।।

    अर्थ · Hindi

    पाषंडी हरि पद बिमुख जानहिं झूठ न साच।।114।।

  1226. RCM 1.115.1Open verse →

    अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकर मन लागी।।

    अर्थ · Hindi

    अग्य अकोबिद अंध अभागी। काई बिषय मुकर मन लागी।।

  1227. RCM 1.115.2Open verse →

    लंपट कपटी कुटिल बिसेषी। सपनेहुँ संतसभा नहिं देखी।।

    अर्थ · Hindi

    लंपट कपटी कुटिल बिसेषी। सपनेहुँ संतसभा नहिं देखी।।

  1228. RCM 1.115.3Open verse →

    कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं ते बेद असंमत बानी। जिन्ह कें सूझ लाभु नहिं हानी।।

  1229. RCM 1.115.4Open verse →

    मुकर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना।।

    अर्थ · Hindi

    मुकर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना।।

  1230. RCM 1.115.5Open verse →

    जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका। जल्पहिं कल्पित बचन अनेका।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह कें अगुन न सगुन बिबेका। जल्पहिं कल्पित बचन अनेका।।

  1231. RCM 1.115.6Open verse →

    हरिमाया बस जगत भ्रमाहीं। तिन्हहि कहत कछु अघटित नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    हरिमाया बस जगत भ्रमाहीं। तिन्हहि कहत कछु अघटित नाहीं।।

  1232. RCM 1.115.7Open verse →

    बातुल भूत बिबस मतवारे। ते नहिं बोलहिं बचन बिचारे।।

    अर्थ · Hindi

    बातुल भूत बिबस मतवारे। ते नहिं बोलहिं बचन बिचारे।।

  1233. RCM 1.115.8Open verse →

    जिन्ह कृत महामोह मद पाना। तिन् कर कहा करिअ नहिं काना।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह कृत महामोह मद पाना। तिन् कर कहा करिअ नहिं काना।।

  1234. RCM 1.115.9Open verse →

    अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद।

    अर्थ · Hindi

    अस निज हृदयँ बिचारि तजु संसय भजु राम पद।

  1235. RCM 1.115.10Open verse →

    सुनु गिरिराज कुमारि भ्रम तम रबि कर बचन मम।।115।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु गिरिराज कुमारि भ्रम तम रबि कर बचन मम।।115।।

  1236. RCM 1.116.1Open verse →

    सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।

    अर्थ · Hindi

    सगुनहि अगुनहि नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुध बेदा।।

  1237. RCM 1.116.2Open verse →

    अगुन अरुप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।

    अर्थ · Hindi

    अगुन अरुप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई।।

  1238. RCM 1.116.3Open verse →

    जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें। जलु हिम उपल बिलग नहिं जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    जो गुन रहित सगुन सोइ कैसें। जलु हिम उपल बिलग नहिं जैसें।।

  1239. RCM 1.116.4Open verse →

    जासु नाम भ्रम तिमिर पतंगा। तेहि किमि कहिअ बिमोह प्रसंगा।।

    अर्थ · Hindi

    जासु नाम भ्रम तिमिर पतंगा। तेहि किमि कहिअ बिमोह प्रसंगा।।

  1240. RCM 1.116.5Open verse →

    राम सच्चिदानंद दिनेसा। नहिं तहँ मोह निसा लवलेसा।।

    अर्थ · Hindi

    राम सच्चिदानंद दिनेसा। नहिं तहँ मोह निसा लवलेसा।।

  1241. RCM 1.116.6Open verse →

    सहज प्रकासरुप भगवाना। नहिं तहँ पुनि बिग्यान बिहाना।।

    अर्थ · Hindi

    सहज प्रकासरुप भगवाना। नहिं तहँ पुनि बिग्यान बिहाना।।

  1242. RCM 1.116.7Open verse →

    हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    हरष बिषाद ग्यान अग्याना। जीव धर्म अहमिति अभिमाना।।

  1243. RCM 1.116.8Open verse →

    राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना। परमानन्द परेस पुराना।।

    अर्थ · Hindi

    राम ब्रह्म ब्यापक जग जाना। परमानन्द परेस पुराना।।

  1244. RCM 1.116.9Open verse →

    पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ।।

    अर्थ · Hindi

    पुरुष प्रसिद्ध प्रकास निधि प्रगट परावर नाथ।।

  1245. RCM 1.116.10Open verse →

    रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ।।116।।

    अर्थ · Hindi

    रघुकुलमनि मम स्वामि सोइ कहि सिवँ नायउ माथ।।116।।

  1246. RCM 1.117.1Open verse →

    निज भ्रम नहिं समुझहिं अग्यानी। प्रभु पर मोह धरहिं जड़ प्रानी।।

    अर्थ · Hindi

    निज भ्रम नहिं समुझहिं अग्यानी। प्रभु पर मोह धरहिं जड़ प्रानी।।

  1247. RCM 1.117.2Open verse →

    जथा गगन घन पटल निहारी। झाँपेउ मानु कहहिं कुबिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    जथा गगन घन पटल निहारी। झाँपेउ मानु कहहिं कुबिचारी।।

  1248. RCM 1.117.3Open verse →

    चितव जो लोचन अंगुलि लाएँ। प्रगट जुगल ससि तेहि के भाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    चितव जो लोचन अंगुलि लाएँ। प्रगट जुगल ससि तेहि के भाएँ।।

  1249. RCM 1.117.4Open verse →

    उमा राम बिषइक अस मोहा। नभ तम धूम धूरि जिमि सोहा।।

    अर्थ · Hindi

    उमा राम बिषइक अस मोहा। नभ तम धूम धूरि जिमि सोहा।।

  1250. RCM 1.117.5Open verse →

    बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता।।

    अर्थ · Hindi

    बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता।।

  1251. RCM 1.117.6Open verse →

    सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई।।

    अर्थ · Hindi

    सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई।।

  1252. RCM 1.117.7Open verse →

    जगत प्रकास्य प्रकासक रामू। मायाधीस ग्यान गुन धामू।।

    अर्थ · Hindi

    जगत प्रकास्य प्रकासक रामू। मायाधीस ग्यान गुन धामू।।

  1253. RCM 1.117.8Open verse →

    जासु सत्यता तें जड माया। भास सत्य इव मोह सहाया।।

    अर्थ · Hindi

    जासु सत्यता तें जड माया। भास सत्य इव मोह सहाया।।

  1254. RCM 1.117.9Open verse →

    रजत सीप महुँ मास जिमि जथा भानु कर बारि।

    अर्थ · Hindi

    रजत सीप महुँ मास जिमि जथा भानु कर बारि।

  1255. RCM 1.117.10Open verse →

    जदपि मृषा तिहुँ काल सोइ भ्रम न सकइ कोउ टारि।।117।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि मृषा तिहुँ काल सोइ भ्रम न सकइ कोउ टारि।।117।।

  1256. RCM 1.118.1Open verse →

    एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि जग हरि आश्रित रहई। जदपि असत्य देत दुख अहई।।

  1257. RCM 1.118.2Open verse →

    जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं सपनें सिर काटै कोई। बिनु जागें न दूरि दुख होई।।

  1258. RCM 1.118.3Open verse →

    जासु कृपाँ अस भ्रम मिटि जाई। गिरिजा सोइ कृपाल रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    जासु कृपाँ अस भ्रम मिटि जाई। गिरिजा सोइ कृपाल रघुराई।।

  1259. RCM 1.118.4Open verse →

    आदि अंत कोउ जासु न पावा। मति अनुमानि निगम अस गावा।।

    अर्थ · Hindi

    आदि अंत कोउ जासु न पावा। मति अनुमानि निगम अस गावा।।

  1260. RCM 1.118.5Open verse →

    बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना। कर बिनु करम करइ बिधि नाना।।

  1261. RCM 1.118.6Open verse →

    आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।

    अर्थ · Hindi

    आनन रहित सकल रस भोगी। बिनु बानी बकता बड़ जोगी।।

  1262. RCM 1.118.7Open verse →

    तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।।

    अर्थ · Hindi

    तनु बिनु परस नयन बिनु देखा। ग्रहइ घ्रान बिनु बास असेषा।।

  1263. RCM 1.118.8Open verse →

    असि सब भाँति अलौकिक करनी। महिमा जासु जाइ नहिं बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    असि सब भाँति अलौकिक करनी। महिमा जासु जाइ नहिं बरनी।।

  1264. RCM 1.118.9Open verse →

    जेहि इमि गावहि बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि इमि गावहि बेद बुध जाहि धरहिं मुनि ध्यान।।

  1265. RCM 1.118.10Open verse →

    सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान।।118।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ दसरथ सुत भगत हित कोसलपति भगवान।।118।।

  1266. RCM 1.119.1Open verse →

    कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी।।

    अर्थ · Hindi

    कासीं मरत जंतु अवलोकी। जासु नाम बल करउँ बिसोकी।।

  1267. RCM 1.119.2Open verse →

    सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी। रघुबर सब उर अंतरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ प्रभु मोर चराचर स्वामी। रघुबर सब उर अंतरजामी।।

  1268. RCM 1.119.3Open verse →

    बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं। जनम अनेक रचित अघ दहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिबसहुँ जासु नाम नर कहहीं। जनम अनेक रचित अघ दहहीं।।

  1269. RCM 1.119.4Open verse →

    सादर सुमिरन जे नर करहीं। भव बारिधि गोपद इव तरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सुमिरन जे नर करहीं। भव बारिधि गोपद इव तरहीं।।

  1270. RCM 1.119.5Open verse →

    राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी।।

    अर्थ · Hindi

    राम सो परमातमा भवानी। तहँ भ्रम अति अबिहित तव बानी।।

  1271. RCM 1.119.6Open verse →

    अस संसय आनत उर माहीं। ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अस संसय आनत उर माहीं। ग्यान बिराग सकल गुन जाहीं।।

  1272. RCM 1.119.7Open verse →

    सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना। मिटि गै सब कुतरक कै रचना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सिव के भ्रम भंजन बचना। मिटि गै सब कुतरक कै रचना।।

  1273. RCM 1.119.8Open verse →

    भइ रघुपति पद प्रीति प्रतीती। दारुन असंभावना बीती।।

    अर्थ · Hindi

    भइ रघुपति पद प्रीति प्रतीती। दारुन असंभावना बीती।।

  1274. RCM 1.119.9Open verse →

    पुनि पुनि प्रभु पद कमल गहि जोरि पंकरुह पानि।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि प्रभु पद कमल गहि जोरि पंकरुह पानि।

  1275. RCM 1.119.10Open verse →

    बोली गिरिजा बचन बर मनहुँ प्रेम रस सानि।।119।।

    अर्थ · Hindi

    बोली गिरिजा बचन बर मनहुँ प्रेम रस सानि।।119।।

  1276. RCM 1.120.1Open verse →

    ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।।

    अर्थ · Hindi

    ससि कर सम सुनि गिरा तुम्हारी। मिटा मोह सरदातप भारी।।

  1277. RCM 1.120.2Open verse →

    तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरुप जानि मोहि परेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह कृपाल सबु संसउ हरेऊ। राम स्वरुप जानि मोहि परेऊ।।

  1278. RCM 1.120.3Open verse →

    नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ कृपाँ अब गयउ बिषादा। सुखी भयउँ प्रभु चरन प्रसादा।।

  1279. RCM 1.120.4Open verse →

    अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड नारि अयानी।।

    अर्थ · Hindi

    अब मोहि आपनि किंकरि जानी। जदपि सहज जड नारि अयानी।।

  1280. RCM 1.120.5Open verse →

    प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम जो मैं पूछा सोइ कहहू। जौं मो पर प्रसन्न प्रभु अहहू।।

  1281. RCM 1.120.6Open verse →

    राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी।।

    अर्थ · Hindi

    राम ब्रह्म चिनमय अबिनासी। सर्ब रहित सब उर पुर बासी।।

  1282. RCM 1.120.7Open verse →

    नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू। मोहि समुझाइ कहहु बृषकेतू।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ धरेउ नरतनु केहि हेतू। मोहि समुझाइ कहहु बृषकेतू।।

  1283. RCM 1.120.8Open verse →

    उमा बचन सुनि परम बिनीता। रामकथा पर प्रीति पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    उमा बचन सुनि परम बिनीता। रामकथा पर प्रीति पुनीता।।

  1284. RCM 1.120.9Open verse →

    हिंयँ हरषे कामारि तब संकर सहज सुजान

    अर्थ · Hindi

    हिंयँ हरषे कामारि तब संकर सहज सुजान

  1285. RCM 1.120.10Open verse →

    बहु बिधि उमहि प्रसंसि पुनि बोले कृपानिधान।।120(क)।।

    अर्थ · Hindi

    बहु बिधि उमहि प्रसंसि पुनि बोले कृपानिधान।।120(क)।।

  1286. RCM 1.120.11Open verse →

    सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल।

  1287. RCM 1.120.12Open verse →

    कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड।।120(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड।।120(ख)।।

  1288. RCM 1.120.13Open verse →

    सो संबाद उदार जेहि बिधि भा आगें कहब।

    अर्थ · Hindi

    सो संबाद उदार जेहि बिधि भा आगें कहब।

  1289. RCM 1.120.14Open verse →

    सुनहु राम अवतार चरित परम सुंदर अनघ।।120(ग)।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु राम अवतार चरित परम सुंदर अनघ।।120(ग)।।

  1290. RCM 1.120.15Open verse →

    हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित।

    अर्थ · Hindi

    हरि गुन नाम अपार कथा रूप अगनित अमित।

  1291. RCM 1.120.16Open verse →

    मैं निज मति अनुसार कहउँ उमा सादर सुनहु।।120(घ।।

    अर्थ · Hindi

    मैं निज मति अनुसार कहउँ उमा सादर सुनहु।।120(घ।।

  1292. RCM 1.121.1Open verse →

    सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए।।

  1293. RCM 1.121.2Open verse →

    हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई।।

    अर्थ · Hindi

    हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई।।

  1294. RCM 1.121.3Open verse →

    राम अर्तक्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    राम अर्तक्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी।।

  1295. RCM 1.121.4Open verse →

    तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना।।

  1296. RCM 1.121.5Open verse →

    तस मैं सुमुखि सुनावउँ तोही। समुझि परइ जस कारन मोही।।

    अर्थ · Hindi

    तस मैं सुमुखि सुनावउँ तोही। समुझि परइ जस कारन मोही।।

  1297. RCM 1.121.6Open verse →

    जब जब होइ धरम कै हानी। बाढहिं असुर अधम अभिमानी।।

    अर्थ · Hindi

    जब जब होइ धरम कै हानी। बाढहिं असुर अधम अभिमानी।।

  1298. RCM 1.121.7Open verse →

    करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं अनीति जाइ नहिं बरनी। सीदहिं बिप्र धेनु सुर धरनी।।

  1299. RCM 1.121.8Open verse →

    तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहि कृपानिधि सज्जन पीरा।।

    अर्थ · Hindi

    तब तब प्रभु धरि बिबिध सरीरा। हरहि कृपानिधि सज्जन पीरा।।

  1300. RCM 1.121.9Open verse →

    असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।

    अर्थ · Hindi

    असुर मारि थापहिं सुरन्ह राखहिं निज श्रुति सेतु।

  1301. RCM 1.121.10Open verse →

    जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु।।121।।

    अर्थ · Hindi

    जग बिस्तारहिं बिसद जस राम जन्म कर हेतु।।121।।

  1302. RCM 1.122.1Open verse →

    सोइ जस गाइ भगत भव तरहीं। कृपासिंधु जन हित तनु धरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ जस गाइ भगत भव तरहीं। कृपासिंधु जन हित तनु धरहीं।।

  1303. RCM 1.122.2Open verse →

    राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका।।

    अर्थ · Hindi

    राम जनम के हेतु अनेका। परम बिचित्र एक तें एका।।

  1304. RCM 1.122.3Open verse →

    जनम एक दुइ कहउँ बखानी। सावधान सुनु सुमति भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    जनम एक दुइ कहउँ बखानी। सावधान सुनु सुमति भवानी।।

  1305. RCM 1.122.4Open verse →

    द्वारपाल हरि के प्रिय दोऊ। जय अरु बिजय जान सब कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    द्वारपाल हरि के प्रिय दोऊ। जय अरु बिजय जान सब कोऊ।।

  1306. RCM 1.122.5Open verse →

    बिप्र श्राप तें दूनउ भाई। तामस असुर देह तिन्ह पाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र श्राप तें दूनउ भाई। तामस असुर देह तिन्ह पाई।।

  1307. RCM 1.122.6Open verse →

    कनककसिपु अरु हाटक लोचन। जगत बिदित सुरपति मद मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    कनककसिपु अरु हाटक लोचन। जगत बिदित सुरपति मद मोचन।।

  1308. RCM 1.122.7Open verse →

    बिजई समर बीर बिख्याता। धरि बराह बपु एक निपाता।।

    अर्थ · Hindi

    बिजई समर बीर बिख्याता। धरि बराह बपु एक निपाता।।

  1309. RCM 1.122.8Open verse →

    होइ नरहरि दूसर पुनि मारा। जन प्रहलाद सुजस बिस्तारा।।

    अर्थ · Hindi

    होइ नरहरि दूसर पुनि मारा। जन प्रहलाद सुजस बिस्तारा।।

  1310. RCM 1.122.9Open verse →

    भए निसाचर जाइ तेइ महाबीर बलवान।

    अर्थ · Hindi

    भए निसाचर जाइ तेइ महाबीर बलवान।

  1311. RCM 1.122.10Open verse →

    कुंभकरन रावण सुभट सुर बिजई जग जान।।122 ।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन रावण सुभट सुर बिजई जग जान।।122 ।

  1312. RCM 1.123.1Open verse →

    मुकुत न भए हते भगवाना। तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना।।

    अर्थ · Hindi

    मुकुत न भए हते भगवाना। तीनि जनम द्विज बचन प्रवाना।।

  1313. RCM 1.123.2Open verse →

    एक बार तिन्ह के हित लागी। धरेउ सरीर भगत अनुरागी।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार तिन्ह के हित लागी। धरेउ सरीर भगत अनुरागी।।

  1314. RCM 1.123.3Open verse →

    कस्यप अदिति तहाँ पितु माता। दसरथ कौसल्या बिख्याता।।

    अर्थ · Hindi

    कस्यप अदिति तहाँ पितु माता। दसरथ कौसल्या बिख्याता।।

  1315. RCM 1.123.4Open verse →

    एक कलप एहि बिधि अवतारा। चरित्र पवित्र किए संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    एक कलप एहि बिधि अवतारा। चरित्र पवित्र किए संसारा।।

  1316. RCM 1.123.5Open verse →

    एक कलप सुर देखि दुखारे। समर जलंधर सन सब हारे।।

    अर्थ · Hindi

    एक कलप सुर देखि दुखारे। समर जलंधर सन सब हारे।।

  1317. RCM 1.123.6Open verse →

    संभु कीन्ह संग्राम अपारा। दनुज महाबल मरइ न मारा।।

    अर्थ · Hindi

    संभु कीन्ह संग्राम अपारा। दनुज महाबल मरइ न मारा।।

  1318. RCM 1.123.7Open verse →

    परम सती असुराधिप नारी। तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    परम सती असुराधिप नारी। तेहि बल ताहि न जितहिं पुरारी।।

  1319. RCM 1.123.8Open verse →

    छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह।।

    अर्थ · Hindi

    छल करि टारेउ तासु ब्रत प्रभु सुर कारज कीन्ह।।

  1320. RCM 1.123.9Open verse →

    जब तेहि जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह।।123।।

    अर्थ · Hindi

    जब तेहि जानेउ मरम तब श्राप कोप करि दीन्ह।।123।।

  1321. RCM 1.124.1Open verse →

    तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना। कौतुकनिधि कृपाल भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    तासु श्राप हरि दीन्ह प्रमाना। कौतुकनिधि कृपाल भगवाना।।

  1322. RCM 1.124.2Open verse →

    तहाँ जलंधर रावन भयऊ। रन हति राम परम पद दयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तहाँ जलंधर रावन भयऊ। रन हति राम परम पद दयऊ।।

  1323. RCM 1.124.3Open verse →

    एक जनम कर कारन एहा। जेहि लागि राम धरी नरदेहा।।

    अर्थ · Hindi

    एक जनम कर कारन एहा। जेहि लागि राम धरी नरदेहा।।

  1324. RCM 1.124.4Open verse →

    प्रति अवतार कथा प्रभु केरी। सुनु मुनि बरनी कबिन्ह घनेरी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रति अवतार कथा प्रभु केरी। सुनु मुनि बरनी कबिन्ह घनेरी।।

  1325. RCM 1.124.5Open verse →

    नारद श्राप दीन्ह एक बारा। कलप एक तेहि लगि अवतारा।।

    अर्थ · Hindi

    नारद श्राप दीन्ह एक बारा। कलप एक तेहि लगि अवतारा।।

  1326. RCM 1.124.6Open verse →

    गिरिजा चकित भई सुनि बानी। नारद बिष्नुभगत पुनि ग्यानि।।

    अर्थ · Hindi

    गिरिजा चकित भई सुनि बानी। नारद बिष्नुभगत पुनि ग्यानि।।

  1327. RCM 1.124.7Open verse →

    कारन कवन श्राप मुनि दीन्हा। का अपराध रमापति कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    कारन कवन श्राप मुनि दीन्हा। का अपराध रमापति कीन्हा।।

  1328. RCM 1.124.8Open verse →

    यह प्रसंग मोहि कहहु पुरारी। मुनि मन मोह आचरज भारी।।

    अर्थ · Hindi

    यह प्रसंग मोहि कहहु पुरारी। मुनि मन मोह आचरज भारी।।

  1329. RCM 1.124.9Open verse →

    बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।

    अर्थ · Hindi

    बोले बिहसि महेस तब ग्यानी मूढ़ न कोइ।

  1330. RCM 1.124.10Open verse →

    जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।।124(क)।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि जस रघुपति करहिं जब सो तस तेहि छन होइ।।124(क)।।

  1331. RCM 1.124.11Open verse →

    कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ राम गुन गाथ भरद्वाज सादर सुनहु।

  1332. RCM 1.124.12Open verse →

    भव भंजन रघुनाथ भजु तुलसी तजि मान मद।।124(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    भव भंजन रघुनाथ भजु तुलसी तजि मान मद।।124(ख)।।

  1333. RCM 1.125.1Open verse →

    हिमगिरि गुहा एक अति पावनि। बह समीप सुरसरी सुहावनि।।

    अर्थ · Hindi

    हिमगिरि गुहा एक अति पावनि। बह समीप सुरसरी सुहावनि।।

  1334. RCM 1.125.2Open verse →

    आश्रम परम पुनीत सुहावा। देखि देवरिषि मन अति भावा।।

    अर्थ · Hindi

    आश्रम परम पुनीत सुहावा। देखि देवरिषि मन अति भावा।।

  1335. RCM 1.125.3Open verse →

    निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा। भयउ रमापति पद अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि सैल सरि बिपिन बिभागा। भयउ रमापति पद अनुरागा।।

  1336. RCM 1.125.4Open verse →

    सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरत हरिहि श्राप गति बाधी। सहज बिमल मन लागि समाधी।।

  1337. RCM 1.125.5Open verse →

    मुनि गति देखि सुरेस डेराना। कामहि बोलि कीन्ह सनमाना।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि गति देखि सुरेस डेराना। कामहि बोलि कीन्ह सनमाना।।

  1338. RCM 1.125.6Open verse →

    सहित सहाय जाहु मम हेतू। चकेउ हरषि हियँ जलचरकेतू।।

    अर्थ · Hindi

    सहित सहाय जाहु मम हेतू। चकेउ हरषि हियँ जलचरकेतू।।

  1339. RCM 1.125.7Open verse →

    सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनासीर मन महुँ असि त्रासा। चहत देवरिषि मम पुर बासा।।

  1340. RCM 1.125.8Open verse →

    जे कामी लोलुप जग माहीं। कुटिल काक इव सबहि डेराहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जे कामी लोलुप जग माहीं। कुटिल काक इव सबहि डेराहीं।।

  1341. RCM 1.125.9Open verse →

    सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।

    अर्थ · Hindi

    सुख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।

  1342. RCM 1.125.10Open verse →

    छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज।।125।।

    अर्थ · Hindi

    छीनि लेइ जनि जान जड़ तिमि सुरपतिहि न लाज।।125।।

  1343. RCM 1.126.1Open verse →

    तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि आश्रमहिं मदन जब गयऊ। निज मायाँ बसंत निरमयऊ।।

  1344. RCM 1.126.2Open verse →

    कुसुमित बिबिध बिटप बहुरंगा। कूजहिं कोकिल गुंजहि भृंगा।।

    अर्थ · Hindi

    कुसुमित बिबिध बिटप बहुरंगा। कूजहिं कोकिल गुंजहि भृंगा।।

  1345. RCM 1.126.3Open verse →

    चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी।।

    अर्थ · Hindi

    चली सुहावनि त्रिबिध बयारी। काम कृसानु बढ़ावनिहारी।।

  1346. RCM 1.126.4Open verse →

    रंभादिक सुरनारि नबीना । सकल असमसर कला प्रबीना।।

    अर्थ · Hindi

    रंभादिक सुरनारि नबीना । सकल असमसर कला प्रबीना।।

  1347. RCM 1.126.5Open verse →

    करहिं गान बहु तान तरंगा। बहुबिधि क्रीड़हि पानि पतंगा।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं गान बहु तान तरंगा। बहुबिधि क्रीड़हि पानि पतंगा।।

  1348. RCM 1.126.6Open verse →

    देखि सहाय मदन हरषाना। कीन्हेसि पुनि प्रपंच बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सहाय मदन हरषाना। कीन्हेसि पुनि प्रपंच बिधि नाना।।

  1349. RCM 1.126.7Open verse →

    काम कला कछु मुनिहि न ब्यापी। निज भयँ डरेउ मनोभव पापी।।

    अर्थ · Hindi

    काम कला कछु मुनिहि न ब्यापी। निज भयँ डरेउ मनोभव पापी।।

  1350. RCM 1.126.8Open verse →

    सीम कि चाँपि सकइ कोउ तासु। बड़ रखवार रमापति जासू।।

    अर्थ · Hindi

    सीम कि चाँपि सकइ कोउ तासु। बड़ रखवार रमापति जासू।।

  1351. RCM 1.126.9Open verse →

    सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।

    अर्थ · Hindi

    सहित सहाय सभीत अति मानि हारि मन मैन।

  1352. RCM 1.126.10Open verse →

    गहेसि जाइ मुनि चरन तब कहि सुठि आरत बैन।।126।।

    अर्थ · Hindi

    गहेसि जाइ मुनि चरन तब कहि सुठि आरत बैन।।126।।

  1353. RCM 1.127.1Open verse →

    भयउ न नारद मन कछु रोषा। कहि प्रिय बचन काम परितोषा।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ न नारद मन कछु रोषा। कहि प्रिय बचन काम परितोषा।।

  1354. RCM 1.127.2Open verse →

    नाइ चरन सिरु आयसु पाई। गयउ मदन तब सहित सहाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाइ चरन सिरु आयसु पाई। गयउ मदन तब सहित सहाई।।

  1355. RCM 1.127.3Open verse →

    मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि सुसीलता आपनि करनी। सुरपति सभाँ जाइ सब बरनी।।

  1356. RCM 1.127.4Open verse →

    सुनि सब कें मन अचरजु आवा। मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिरु नावा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सब कें मन अचरजु आवा। मुनिहि प्रसंसि हरिहि सिरु नावा।।

  1357. RCM 1.127.5Open verse →

    तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तब नारद गवने सिव पाहीं। जिता काम अहमिति मन माहीं।।

  1358. RCM 1.127.6Open verse →

    मार चरित संकरहिं सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए।।

    अर्थ · Hindi

    मार चरित संकरहिं सुनाए। अतिप्रिय जानि महेस सिखाए।।

  1359. RCM 1.127.7Open verse →

    बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार बिनवउँ मुनि तोहीं। जिमि यह कथा सुनायहु मोहीं।।

  1360. RCM 1.127.8Open verse →

    तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ। चलेहुँ प्रसंग दुराएडु तबहूँ।।

    अर्थ · Hindi

    तिमि जनि हरिहि सुनावहु कबहूँ। चलेहुँ प्रसंग दुराएडु तबहूँ।।

  1361. RCM 1.127.9Open verse →

    संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि सोहान।

    अर्थ · Hindi

    संभु दीन्ह उपदेस हित नहिं नारदहि सोहान।

  1362. RCM 1.127.10Open verse →

    भारद्वाज कौतुक सुनहु हरि इच्छा बलवान।।127।।

    अर्थ · Hindi

    भारद्वाज कौतुक सुनहु हरि इच्छा बलवान।।127।।

  1363. RCM 1.128.1Open verse →

    राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।।

    अर्थ · Hindi

    राम कीन्ह चाहहिं सोइ होई। करै अन्यथा अस नहिं कोई।।

  1364. RCM 1.128.2Open verse →

    संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    संभु बचन मुनि मन नहिं भाए। तब बिरंचि के लोक सिधाए।।

  1365. RCM 1.128.3Open verse →

    एक बार करतल बर बीना। गावत हरि गुन गान प्रबीना।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार करतल बर बीना। गावत हरि गुन गान प्रबीना।।

  1366. RCM 1.128.4Open verse →

    छीरसिंधु गवने मुनिनाथा। जहँ बस श्रीनिवास श्रुतिमाथा।।

    अर्थ · Hindi

    छीरसिंधु गवने मुनिनाथा। जहँ बस श्रीनिवास श्रुतिमाथा।।

  1367. RCM 1.128.5Open verse →

    हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि मिले उठि रमानिकेता। बैठे आसन रिषिहि समेता।।

  1368. RCM 1.128.6Open verse →

    बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया।।

    अर्थ · Hindi

    बोले बिहसि चराचर राया। बहुते दिनन कीन्हि मुनि दाया।।

  1369. RCM 1.128.7Open verse →

    काम चरित नारद सब भाषे। जद्यपि प्रथम बरजि सिवँ राखे।।

    अर्थ · Hindi

    काम चरित नारद सब भाषे। जद्यपि प्रथम बरजि सिवँ राखे।।

  1370. RCM 1.128.8Open verse →

    अति प्रचंड रघुपति कै माया। जेहि न मोह अस को जग जाया।।

    अर्थ · Hindi

    अति प्रचंड रघुपति कै माया। जेहि न मोह अस को जग जाया।।

  1371. RCM 1.128.9Open verse →

    रूख बदन करि बचन मृदु बोले श्रीभगवान ।

    अर्थ · Hindi

    रूख बदन करि बचन मृदु बोले श्रीभगवान ।

  1372. RCM 1.128.10Open verse →

    तुम्हरे सुमिरन तें मिटहिं मोह मार मद मान।।128।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरे सुमिरन तें मिटहिं मोह मार मद मान।।128।।

  1373. RCM 1.129.1Open verse →

    सुनु मुनि मोह होइ मन ताकें। ग्यान बिराग हृदय नहिं जाके।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मुनि मोह होइ मन ताकें। ग्यान बिराग हृदय नहिं जाके।।

  1374. RCM 1.129.2Open verse →

    ब्रह्मचरज ब्रत रत मतिधीरा। तुम्हहि कि करइ मनोभव पीरा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मचरज ब्रत रत मतिधीरा। तुम्हहि कि करइ मनोभव पीरा।।

  1375. RCM 1.129.3Open verse →

    नारद कहेउ सहित अभिमाना। कृपा तुम्हारि सकल भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    नारद कहेउ सहित अभिमाना। कृपा तुम्हारि सकल भगवाना।।

  1376. RCM 1.129.4Open verse →

    करुनानिधि मन दीख बिचारी। उर अंकुरेउ गरब तरु भारी।।

    अर्थ · Hindi

    करुनानिधि मन दीख बिचारी। उर अंकुरेउ गरब तरु भारी।।

  1377. RCM 1.129.5Open verse →

    बेगि सो मै डारिहउँ उखारी। पन हमार सेवक हितकारी।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि सो मै डारिहउँ उखारी। पन हमार सेवक हितकारी।।

  1378. RCM 1.129.6Open verse →

    मुनि कर हित मम कौतुक होई। अवसि उपाय करबि मै सोई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि कर हित मम कौतुक होई। अवसि उपाय करबि मै सोई।।

  1379. RCM 1.129.7Open verse →

    तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई।।

  1380. RCM 1.129.8Open verse →

    श्रीपति निज माया तब प्रेरी। सुनहु कठिन करनी तेहि केरी।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीपति निज माया तब प्रेरी। सुनहु कठिन करनी तेहि केरी।।

  1381. RCM 1.129.9Open verse →

    बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।

    अर्थ · Hindi

    बिरचेउ मग महुँ नगर तेहिं सत जोजन बिस्तार।

  1382. RCM 1.129.10Open verse →

    श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार।।129।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीनिवासपुर तें अधिक रचना बिबिध प्रकार।।129।।

  1383. RCM 1.130.1Open verse →

    बसहिं नगर सुंदर नर नारी। जनु बहु मनसिज रति तनुधारी।।

    अर्थ · Hindi

    बसहिं नगर सुंदर नर नारी। जनु बहु मनसिज रति तनुधारी।।

  1384. RCM 1.130.2Open verse →

    तेहिं पुर बसइ सीलनिधि राजा। अगनित हय गय सेन समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं पुर बसइ सीलनिधि राजा। अगनित हय गय सेन समाजा।।

  1385. RCM 1.130.3Open verse →

    सत सुरेस सम बिभव बिलासा। रूप तेज बल नीति निवासा।।

    अर्थ · Hindi

    सत सुरेस सम बिभव बिलासा। रूप तेज बल नीति निवासा।।

  1386. RCM 1.130.4Open verse →

    बिस्वमोहनी तासु कुमारी। श्री बिमोह जिसु रूपु निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वमोहनी तासु कुमारी। श्री बिमोह जिसु रूपु निहारी।।

  1387. RCM 1.130.5Open verse →

    सोइ हरिमाया सब गुन खानी। सोभा तासु कि जाइ बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ हरिमाया सब गुन खानी। सोभा तासु कि जाइ बखानी।।

  1388. RCM 1.130.6Open verse →

    करइ स्वयंबर सो नृपबाला। आए तहँ अगनित महिपाला।।

    अर्थ · Hindi

    करइ स्वयंबर सो नृपबाला। आए तहँ अगनित महिपाला।।

  1389. RCM 1.130.7Open verse →

    मुनि कौतुकी नगर तेहिं गयऊ। पुरबासिन्ह सब पूछत भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि कौतुकी नगर तेहिं गयऊ। पुरबासिन्ह सब पूछत भयऊ।।

  1390. RCM 1.130.8Open verse →

    सुनि सब चरित भूपगृहँ आए। करि पूजा नृप मुनि बैठाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सब चरित भूपगृहँ आए। करि पूजा नृप मुनि बैठाए।।

  1391. RCM 1.130.9Open verse →

    आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि।

    अर्थ · Hindi

    आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि।

  1392. RCM 1.130.10Open verse →

    कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि।।130।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि।।130।।

  1393. RCM 1.131.1Open verse →

    देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि रूप मुनि बिरति बिसारी। बड़ी बार लगि रहे निहारी।।

  1394. RCM 1.131.2Open verse →

    लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    लच्छन तासु बिलोकि भुलाने। हृदयँ हरष नहिं प्रगट बखाने।।

  1395. RCM 1.131.3Open verse →

    जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    जो एहि बरइ अमर सोइ होई। समरभूमि तेहि जीत न कोई।।

  1396. RCM 1.131.4Open verse →

    सेवहिं सकल चराचर ताही। बरइ सीलनिधि कन्या जाही।।

    अर्थ · Hindi

    सेवहिं सकल चराचर ताही। बरइ सीलनिधि कन्या जाही।।

  1397. RCM 1.131.5Open verse →

    लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।।

    अर्थ · Hindi

    लच्छन सब बिचारि उर राखे। कछुक बनाइ भूप सन भाषे।।

  1398. RCM 1.131.6Open verse →

    सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुता सुलच्छन कहि नृप पाहीं। नारद चले सोच मन माहीं।।

  1399. RCM 1.131.7Open verse →

    करौं जाइ सोइ जतन बिचारी। जेहि प्रकार मोहि बरै कुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    करौं जाइ सोइ जतन बिचारी। जेहि प्रकार मोहि बरै कुमारी।।

  1400. RCM 1.131.8Open verse →

    जप तप कछु न होइ तेहि काला। हे बिधि मिलइ कवन बिधि बाला।।

    अर्थ · Hindi

    जप तप कछु न होइ तेहि काला। हे बिधि मिलइ कवन बिधि बाला।।

  1401. RCM 1.131.9Open verse →

    एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल।

    अर्थ · Hindi

    एहि अवसर चाहिअ परम सोभा रूप बिसाल।

  1402. RCM 1.131.10Open verse →

    जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल।।131।।

    अर्थ · Hindi

    जो बिलोकि रीझै कुअँरि तब मेलै जयमाल।।131।।

  1403. RCM 1.132.1Open verse →

    हरि सन मागौं सुंदरताई। होइहि जात गहरु अति भाई।।

    अर्थ · Hindi

    हरि सन मागौं सुंदरताई। होइहि जात गहरु अति भाई।।

  1404. RCM 1.132.2Open verse →

    मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहि अवसर सहाय सोइ होऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मोरें हित हरि सम नहिं कोऊ। एहि अवसर सहाय सोइ होऊ।।

  1405. RCM 1.132.3Open verse →

    बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि बिनय कीन्हि तेहि काला। प्रगटेउ प्रभु कौतुकी कृपाला।।

  1406. RCM 1.132.4Open verse →

    प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु बिलोकि मुनि नयन जुड़ाने। होइहि काजु हिएँ हरषाने।।

  1407. RCM 1.132.5Open verse →

    अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।।

    अर्थ · Hindi

    अति आरति कहि कथा सुनाई। करहु कृपा करि होहु सहाई।।

  1408. RCM 1.132.6Open verse →

    आपन रूप देहु प्रभु मोही। आन भाँति नहिं पावौं ओही।।

    अर्थ · Hindi

    आपन रूप देहु प्रभु मोही। आन भाँति नहिं पावौं ओही।।

  1409. RCM 1.132.7Open verse →

    जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा। करहु सो बेगि दास मैं तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बिधि नाथ होइ हित मोरा। करहु सो बेगि दास मैं तोरा।।

  1410. RCM 1.132.8Open verse →

    निज माया बल देखि बिसाला। हियँ हँसि बोले दीनदयाला।।

    अर्थ · Hindi

    निज माया बल देखि बिसाला। हियँ हँसि बोले दीनदयाला।।

  1411. RCM 1.132.9Open verse →

    जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बिधि होइहि परम हित नारद सुनहु तुम्हार।

  1412. RCM 1.132.10Open verse →

    सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार।।132।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ हम करब न आन कछु बचन न मृषा हमार।।132।।

  1413. RCM 1.133.1Open verse →

    कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।।

    अर्थ · Hindi

    कुपथ माग रुज ब्याकुल रोगी। बैद न देइ सुनहु मुनि जोगी।।

  1414. RCM 1.133.2Open verse →

    एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि हित तुम्हार मैं ठयऊ। कहि अस अंतरहित प्रभु भयऊ।।

  1415. RCM 1.133.3Open verse →

    माया बिबस भए मुनि मूढ़ा। समुझी नहिं हरि गिरा निगूढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    माया बिबस भए मुनि मूढ़ा। समुझी नहिं हरि गिरा निगूढ़ा।।

  1416. RCM 1.133.4Open verse →

    गवने तुरत तहाँ रिषिराई। जहाँ स्वयंबर भूमि बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    गवने तुरत तहाँ रिषिराई। जहाँ स्वयंबर भूमि बनाई।।

  1417. RCM 1.133.5Open verse →

    निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    निज निज आसन बैठे राजा। बहु बनाव करि सहित समाजा।।

  1418. RCM 1.133.6Open verse →

    मुनि मन हरष रूप अति मोरें। मोहि तजि आनहि बारिहि न भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि मन हरष रूप अति मोरें। मोहि तजि आनहि बारिहि न भोरें।।

  1419. RCM 1.133.7Open verse →

    मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि हित कारन कृपानिधाना। दीन्ह कुरूप न जाइ बखाना।।

  1420. RCM 1.133.8Open verse →

    सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा।।

    अर्थ · Hindi

    सो चरित्र लखि काहुँ न पावा। नारद जानि सबहिं सिर नावा।।

  1421. RCM 1.133.9Open verse →

    रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ।

    अर्थ · Hindi

    रहे तहाँ दुइ रुद्र गन ते जानहिं सब भेउ।

  1422. RCM 1.133.10Open verse →

    बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ।।133।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रबेष देखत फिरहिं परम कौतुकी तेउ।।133।।

  1423. RCM 1.134.1Open verse →

    जेंहि समाज बैंठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    जेंहि समाज बैंठे मुनि जाई। हृदयँ रूप अहमिति अधिकाई।।

  1424. RCM 1.134.2Open verse →

    तहँ बैठ महेस गन दोऊ। बिप्रबेष गति लखइ न कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ बैठ महेस गन दोऊ। बिप्रबेष गति लखइ न कोऊ।।

  1425. RCM 1.134.3Open verse →

    करहिं कूटि नारदहि सुनाई। नीकि दीन्हि हरि सुंदरताई।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं कूटि नारदहि सुनाई। नीकि दीन्हि हरि सुंदरताई।।

  1426. RCM 1.134.4Open verse →

    रीझहि राजकुअँरि छबि देखी। इन्हहि बरिहि हरि जानि बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    रीझहि राजकुअँरि छबि देखी। इन्हहि बरिहि हरि जानि बिसेषी।।

  1427. RCM 1.134.5Open verse →

    मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिहि मोह मन हाथ पराएँ। हँसहिं संभु गन अति सचु पाएँ।।

  1428. RCM 1.134.6Open verse →

    जदपि सुनहिं मुनि अटपटि बानी। समुझि न परइ बुद्धि भ्रम सानी।।

    अर्थ · Hindi

    जदपि सुनहिं मुनि अटपटि बानी। समुझि न परइ बुद्धि भ्रम सानी।।

  1429. RCM 1.134.7Open verse →

    काहुँ न लखा सो चरित बिसेषा। सो सरूप नृपकन्याँ देखा।।

    अर्थ · Hindi

    काहुँ न लखा सो चरित बिसेषा। सो सरूप नृपकन्याँ देखा।।

  1430. RCM 1.134.8Open verse →

    मर्कट बदन भयंकर देही। देखत हृदयँ क्रोध भा तेही।।

    अर्थ · Hindi

    मर्कट बदन भयंकर देही। देखत हृदयँ क्रोध भा तेही।।

  1431. RCM 1.134.9Open verse →

    सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।

    अर्थ · Hindi

    सखीं संग लै कुअँरि तब चलि जनु राजमराल।

  1432. RCM 1.134.10Open verse →

    देखत फिरइ महीप सब कर सरोज जयमाल।।134।।

    अर्थ · Hindi

    देखत फिरइ महीप सब कर सरोज जयमाल।।134।।

  1433. RCM 1.135.1Open verse →

    जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि देहि न बिलोकी भूली।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि दिसि बैठे नारद फूली। सो दिसि देहि न बिलोकी भूली।।

  1434. RCM 1.135.2Open verse →

    पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं। देखि दसा हर गन मुसकाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि मुनि उकसहिं अकुलाहीं। देखि दसा हर गन मुसकाहीं।।

  1435. RCM 1.135.3Open verse →

    धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला। कुअँरि हरषि मेलेउ जयमाला।।

    अर्थ · Hindi

    धरि नृपतनु तहँ गयउ कृपाला। कुअँरि हरषि मेलेउ जयमाला।।

  1436. RCM 1.135.4Open verse →

    दुलहिनि लै गे लच्छिनिवासा। नृपसमाज सब भयउ निरासा।।

    अर्थ · Hindi

    दुलहिनि लै गे लच्छिनिवासा। नृपसमाज सब भयउ निरासा।।

  1437. RCM 1.135.5Open verse →

    मुनि अति बिकल मोंहँ मति नाठी। मनि गिरि गई छूटि जनु गाँठी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि अति बिकल मोंहँ मति नाठी। मनि गिरि गई छूटि जनु गाँठी।।

  1438. RCM 1.135.6Open verse →

    तब हर गन बोले मुसुकाई। निज मुख मुकुर बिलोकहु जाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब हर गन बोले मुसुकाई। निज मुख मुकुर बिलोकहु जाई।।

  1439. RCM 1.135.7Open verse →

    अस कहि दोउ भागे भयँ भारी। बदन दीख मुनि बारि निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि दोउ भागे भयँ भारी। बदन दीख मुनि बारि निहारी।।

  1440. RCM 1.135.8Open verse →

    बेषु बिलोकि क्रोध अति बाढ़ा। तिन्हहि सराप दीन्ह अति गाढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    बेषु बिलोकि क्रोध अति बाढ़ा। तिन्हहि सराप दीन्ह अति गाढ़ा।।

  1441. RCM 1.135.9Open verse →

    होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।

    अर्थ · Hindi

    होहु निसाचर जाइ तुम्ह कपटी पापी दोउ।

  1442. RCM 1.135.10Open verse →

    हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ।।135।।

    अर्थ · Hindi

    हँसेहु हमहि सो लेहु फल बहुरि हँसेहु मुनि कोउ।।135।।

  1443. RCM 1.136.1Open verse →

    पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि जल दीख रूप निज पावा। तदपि हृदयँ संतोष न आवा।।

  1444. RCM 1.136.2Open verse →

    फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    फरकत अधर कोप मन माहीं। सपदी चले कमलापति पाहीं।।

  1445. RCM 1.136.3Open verse →

    देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोर उपहास कराई।।

    अर्थ · Hindi

    देहउँ श्राप कि मरिहउँ जाई। जगत मोर उपहास कराई।।

  1446. RCM 1.136.4Open verse →

    बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    बीचहिं पंथ मिले दनुजारी। संग रमा सोइ राजकुमारी।।

  1447. RCM 1.136.5Open verse →

    बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।।

    अर्थ · Hindi

    बोले मधुर बचन सुरसाईं। मुनि कहँ चले बिकल की नाईं।।

  1448. RCM 1.136.6Open verse →

    सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन उपजा अति क्रोधा। माया बस न रहा मन बोधा।।

  1449. RCM 1.136.7Open verse →

    पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    पर संपदा सकहु नहिं देखी। तुम्हरें इरिषा कपट बिसेषी।।

  1450. RCM 1.136.8Open verse →

    मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।

    अर्थ · Hindi

    मथत सिंधु रुद्रहि बौरायहु। सुरन्ह प्रेरी बिष पान करायहु।।

  1451. RCM 1.136.9Open verse →

    असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।

    अर्थ · Hindi

    असुर सुरा बिष संकरहि आपु रमा मनि चारु।

  1452. RCM 1.136.10Open verse →

    स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु।।136।।

    अर्थ · Hindi

    स्वारथ साधक कुटिल तुम्ह सदा कपट ब्यवहारु।।136।।

  1453. RCM 1.137.1Open verse →

    परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।।

    अर्थ · Hindi

    परम स्वतंत्र न सिर पर कोई। भावइ मनहि करहु तुम्ह सोई।।

  1454. RCM 1.137.2Open verse →

    भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू।।

    अर्थ · Hindi

    भलेहि मंद मंदेहि भल करहू। बिसमय हरष न हियँ कछु धरहू।।

  1455. RCM 1.137.3Open verse →

    डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    डहकि डहकि परिचेहु सब काहू। अति असंक मन सदा उछाहू।।

  1456. RCM 1.137.4Open verse →

    करम सुभासुभ तुम्हहि न बाधा। अब लगि तुम्हहि न काहूँ साधा।।

    अर्थ · Hindi

    करम सुभासुभ तुम्हहि न बाधा। अब लगि तुम्हहि न काहूँ साधा।।

  1457. RCM 1.137.5Open verse →

    भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    भले भवन अब बायन दीन्हा। पावहुगे फल आपन कीन्हा।।

  1458. RCM 1.137.6Open verse →

    बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा।।

    अर्थ · Hindi

    बंचेहु मोहि जवनि धरि देहा। सोइ तनु धरहु श्राप मम एहा।।

  1459. RCM 1.137.7Open verse →

    कपि आकृति तुम्ह कीन्हि हमारी। करिहहिं कीस सहाय तुम्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    कपि आकृति तुम्ह कीन्हि हमारी। करिहहिं कीस सहाय तुम्हारी।।

  1460. RCM 1.137.8Open verse →

    मम अपकार कीन्ही तुम्ह भारी। नारी बिरहँ तुम्ह होब दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    मम अपकार कीन्ही तुम्ह भारी। नारी बिरहँ तुम्ह होब दुखारी।।

  1461. RCM 1.137.9Open verse →

    श्राप सीस धरी हरषि हियँ प्रभु बहु बिनती कीन्हि।

    अर्थ · Hindi

    श्राप सीस धरी हरषि हियँ प्रभु बहु बिनती कीन्हि।

  1462. RCM 1.137.10Open verse →

    निज माया कै प्रबलता करषि कृपानिधि लीन्हि।।137।।

    अर्थ · Hindi

    निज माया कै प्रबलता करषि कृपानिधि लीन्हि।।137।।

  1463. RCM 1.138.1Open verse →

    जब हरि माया दूरि निवारी। नहिं तहँ रमा न राजकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    जब हरि माया दूरि निवारी। नहिं तहँ रमा न राजकुमारी।।

  1464. RCM 1.138.2Open verse →

    तब मुनि अति सभीत हरि चरना। गहे पाहि प्रनतारति हरना।।

    अर्थ · Hindi

    तब मुनि अति सभीत हरि चरना। गहे पाहि प्रनतारति हरना।।

  1465. RCM 1.138.3Open verse →

    मृषा होउ मम श्राप कृपाला। मम इच्छा कह दीनदयाला।।

    अर्थ · Hindi

    मृषा होउ मम श्राप कृपाला। मम इच्छा कह दीनदयाला।।

  1466. RCM 1.138.4Open verse →

    मैं दुर्बचन कहे बहुतेरे। कह मुनि पाप मिटिहिं किमि मेरे।।

    अर्थ · Hindi

    मैं दुर्बचन कहे बहुतेरे। कह मुनि पाप मिटिहिं किमि मेरे।।

  1467. RCM 1.138.5Open verse →

    जपहु जाइ संकर सत नामा। होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    जपहु जाइ संकर सत नामा। होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा।।

  1468. RCM 1.138.6Open verse →

    कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें। असि परतीति तजहु जनि भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें। असि परतीति तजहु जनि भोरें।।

  1469. RCM 1.138.7Open verse →

    जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी।।

  1470. RCM 1.138.8Open verse →

    अस उर धरि महि बिचरहु जाई। अब न तुम्हहि माया निअराई।।

    अर्थ · Hindi

    अस उर धरि महि बिचरहु जाई। अब न तुम्हहि माया निअराई।।

  1471. RCM 1.138.9Open verse →

    बहुबिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु तब भए अंतरधान।।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि मुनिहि प्रबोधि प्रभु तब भए अंतरधान।।

  1472. RCM 1.138.10Open verse →

    सत्यलोक नारद चले करत राम गुन गान।।138।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यलोक नारद चले करत राम गुन गान।।138।।

  1473. RCM 1.139.1Open verse →

    हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगतमोह मन हरष बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    हर गन मुनिहि जात पथ देखी। बिगतमोह मन हरष बिसेषी।।

  1474. RCM 1.139.2Open verse →

    अति सभीत नारद पहिं आए। गहि पद आरत बचन सुनाए।।

    अर्थ · Hindi

    अति सभीत नारद पहिं आए। गहि पद आरत बचन सुनाए।।

  1475. RCM 1.139.3Open verse →

    हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया।।

    अर्थ · Hindi

    हर गन हम न बिप्र मुनिराया। बड़ अपराध कीन्ह फल पाया।।

  1476. RCM 1.139.4Open verse →

    श्राप अनुग्रह करहु कृपाला। बोले नारद दीनदयाला।।

    अर्थ · Hindi

    श्राप अनुग्रह करहु कृपाला। बोले नारद दीनदयाला।।

  1477. RCM 1.139.5Open verse →

    निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ। बैभव बिपुल तेज बल होऊ।।

    अर्थ · Hindi

    निसिचर जाइ होहु तुम्ह दोऊ। बैभव बिपुल तेज बल होऊ।।

  1478. RCM 1.139.6Open verse →

    भुजबल बिस्व जितब तुम्ह जहिआ। धरिहहिं बिष्नु मनुज तनु तहिआ।

    अर्थ · Hindi

    भुजबल बिस्व जितब तुम्ह जहिआ। धरिहहिं बिष्नु मनुज तनु तहिआ।

  1479. RCM 1.139.7Open verse →

    समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    समर मरन हरि हाथ तुम्हारा। होइहहु मुकुत न पुनि संसारा।।

  1480. RCM 1.139.8Open verse →

    चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले जुगल मुनि पद सिर नाई। भए निसाचर कालहि पाई।।

  1481. RCM 1.139.9Open verse →

    एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार।

    अर्थ · Hindi

    एक कलप एहि हेतु प्रभु लीन्ह मनुज अवतार।

  1482. RCM 1.139.10Open verse →

    सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार।।139।।

    अर्थ · Hindi

    सुर रंजन सज्जन सुखद हरि भंजन भुबि भार।।139।।

  1483. RCM 1.140.1Open verse →

    एहि बिधि जनम करम हरि केरे। सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि जनम करम हरि केरे। सुंदर सुखद बिचित्र घनेरे।।

  1484. RCM 1.140.2Open verse →

    कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं। चारु चरित नानाबिधि करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कलप कलप प्रति प्रभु अवतरहीं। चारु चरित नानाबिधि करहीं।।

  1485. RCM 1.140.3Open verse →

    तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब तब कथा मुनीसन्ह गाई। परम पुनीत प्रबंध बनाई।।

  1486. RCM 1.140.4Open verse →

    बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध प्रसंग अनूप बखाने। करहिं न सुनि आचरजु सयाने।।

  1487. RCM 1.140.5Open verse →

    हरि अनंत हरिकथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।

    अर्थ · Hindi

    हरि अनंत हरिकथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता।।

  1488. RCM 1.140.6Open verse →

    रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए।।

    अर्थ · Hindi

    रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए।।

  1489. RCM 1.140.7Open verse →

    यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी।।

  1490. RCM 1.140.8Open verse →

    प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी।।सेवत सुलभ सकल दुख हारी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी।।सेवत सुलभ सकल दुख हारी।।

  1491. RCM 1.140.9Open verse →

    सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।।

    अर्थ · Hindi

    सुर नर मुनि कोउ नाहिं जेहि न मोह माया प्रबल।।

  1492. RCM 1.140.10Open verse →

    अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि।।140।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि मन माहिं भजिअ महामाया पतिहि।।140।।

  1493. RCM 1.141.1Open verse →

    अपर हेतु सुनु सैलकुमारी। कहउँ बिचित्र कथा बिस्तारी।।

    अर्थ · Hindi

    अपर हेतु सुनु सैलकुमारी। कहउँ बिचित्र कथा बिस्तारी।।

  1494. RCM 1.141.2Open verse →

    जेहि कारन अज अगुन अरूपा। ब्रह्म भयउ कोसलपुर भूपा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि कारन अज अगुन अरूपा। ब्रह्म भयउ कोसलपुर भूपा।।

  1495. RCM 1.141.3Open verse →

    जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा।।

    अर्थ · Hindi

    जो प्रभु बिपिन फिरत तुम्ह देखा। बंधु समेत धरें मुनिबेषा।।

  1496. RCM 1.141.4Open verse →

    जासु चरित अवलोकि भवानी। सती सरीर रहिहु बौरानी।।

    अर्थ · Hindi

    जासु चरित अवलोकि भवानी। सती सरीर रहिहु बौरानी।।

  1497. RCM 1.141.5Open verse →

    अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी। तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी।।

    अर्थ · Hindi

    अजहुँ न छाया मिटति तुम्हारी। तासु चरित सुनु भ्रम रुज हारी।।

  1498. RCM 1.141.6Open verse →

    लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा। सो सब कहिहउँ मति अनुसारा।।

    अर्थ · Hindi

    लीला कीन्हि जो तेहिं अवतारा। सो सब कहिहउँ मति अनुसारा।।

  1499. RCM 1.141.7Open verse →

    भरद्वाज सुनि संकर बानी। सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी।।

    अर्थ · Hindi

    भरद्वाज सुनि संकर बानी। सकुचि सप्रेम उमा मुसकानी।।

  1500. RCM 1.141.8Open verse →

    लगे बहुरि बरने बृषकेतू। सो अवतार भयउ जेहि हेतू।।

    अर्थ · Hindi

    लगे बहुरि बरने बृषकेतू। सो अवतार भयउ जेहि हेतू।।

  1501. RCM 1.141.9Open verse →

    सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई।।

    अर्थ · Hindi

    सो मैं तुम्ह सन कहउँ सबु सुनु मुनीस मन लाई।।

  1502. RCM 1.141.10Open verse →

    राम कथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ।।141।।

    अर्थ · Hindi

    राम कथा कलि मल हरनि मंगल करनि सुहाइ।।141।।

  1503. RCM 1.142.1Open verse →

    स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    स्वायंभू मनु अरु सतरूपा। जिन्ह तें भै नरसृष्टि अनूपा।।

  1504. RCM 1.142.2Open verse →

    दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।

    अर्थ · Hindi

    दंपति धरम आचरन नीका। अजहुँ गाव श्रुति जिन्ह कै लीका।।

  1505. RCM 1.142.3Open verse →

    नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।।

    अर्थ · Hindi

    नृप उत्तानपाद सुत तासू। ध्रुव हरि भगत भयउ सुत जासू।।

  1506. RCM 1.142.4Open verse →

    लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही। बेद पुरान प्रसंसहि जाही।।

    अर्थ · Hindi

    लघु सुत नाम प्रिय्रब्रत ताही। बेद पुरान प्रसंसहि जाही।।

  1507. RCM 1.142.5Open verse →

    देवहूति पुनि तासु कुमारी। जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी।।

    अर्थ · Hindi

    देवहूति पुनि तासु कुमारी। जो मुनि कर्दम कै प्रिय नारी।।

  1508. RCM 1.142.6Open verse →

    आदिदेव प्रभु दीनदयाला। जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला।।

    अर्थ · Hindi

    आदिदेव प्रभु दीनदयाला। जठर धरेउ जेहिं कपिल कृपाला।।

  1509. RCM 1.142.7Open verse →

    सांख्य सास्त्र जिन्ह प्रगट बखाना। तत्व बिचार निपुन भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    सांख्य सास्त्र जिन्ह प्रगट बखाना। तत्व बिचार निपुन भगवाना।।

  1510. RCM 1.142.8Open verse →

    तेहिं मनु राज कीन्ह बहु काला। प्रभु आयसु सब बिधि प्रतिपाला।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं मनु राज कीन्ह बहु काला। प्रभु आयसु सब बिधि प्रतिपाला।।

  1511. RCM 1.142.9Open verse →

    होइ न बिषय बिराग भवन बसत भा चौथपन।

    अर्थ · Hindi

    होइ न बिषय बिराग भवन बसत भा चौथपन।

  1512. RCM 1.142.10Open verse →

    हृदयँ बहुत दुख लाग जनम गयउ हरिभगति बिनु।।142।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ बहुत दुख लाग जनम गयउ हरिभगति बिनु।।142।।

  1513. RCM 1.143.1Open verse →

    बरबस राज सुतहि तब दीन्हा। नारि समेत गवन बन कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    बरबस राज सुतहि तब दीन्हा। नारि समेत गवन बन कीन्हा।।

  1514. RCM 1.143.2Open verse →

    तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता।।

    अर्थ · Hindi

    तीरथ बर नैमिष बिख्याता। अति पुनीत साधक सिधि दाता।।

  1515. RCM 1.143.3Open verse →

    बसहिं तहाँ मुनि सिद्ध समाजा। तहँ हियँ हरषि चलेउ मनु राजा।।

    अर्थ · Hindi

    बसहिं तहाँ मुनि सिद्ध समाजा। तहँ हियँ हरषि चलेउ मनु राजा।।

  1516. RCM 1.143.4Open verse →

    पंथ जात सोहहिं मतिधीरा। ग्यान भगति जनु धरें सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    पंथ जात सोहहिं मतिधीरा। ग्यान भगति जनु धरें सरीरा।।

  1517. RCM 1.143.5Open verse →

    पहुँचे जाइ धेनुमति तीरा। हरषि नहाने निरमल नीरा।।

    अर्थ · Hindi

    पहुँचे जाइ धेनुमति तीरा। हरषि नहाने निरमल नीरा।।

  1518. RCM 1.143.6Open verse →

    आए मिलन सिद्ध मुनि ग्यानी। धरम धुरंधर नृपरिषि जानी।।

    अर्थ · Hindi

    आए मिलन सिद्ध मुनि ग्यानी। धरम धुरंधर नृपरिषि जानी।।

  1519. RCM 1.143.7Open verse →

    जहँ जँह तीरथ रहे सुहाए। मुनिन्ह सकल सादर करवाए।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जँह तीरथ रहे सुहाए। मुनिन्ह सकल सादर करवाए।।

  1520. RCM 1.143.8Open verse →

    कृस सरीर मुनिपट परिधाना। सत समाज नित सुनहिं पुराना ।

    अर्थ · Hindi

    कृस सरीर मुनिपट परिधाना। सत समाज नित सुनहिं पुराना ।

  1521. RCM 1.143.9Open verse →

    द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।

    अर्थ · Hindi

    द्वादस अच्छर मंत्र पुनि जपहिं सहित अनुराग।

  1522. RCM 1.143.10Open verse →

    बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग।।143।।

    अर्थ · Hindi

    बासुदेव पद पंकरुह दंपति मन अति लाग।।143।।

  1523. RCM 1.144.1Open verse →

    करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं अहार साक फल कंदा। सुमिरहिं ब्रह्म सच्चिदानंदा।।

  1524. RCM 1.144.2Open verse →

    पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि हरि हेतु करन तप लागे। बारि अधार मूल फल त्यागे।।

  1525. RCM 1.144.3Open verse →

    उर अभिलाष निंरंतर होई। देखअ नयन परम प्रभु सोई।।

    अर्थ · Hindi

    उर अभिलाष निंरंतर होई। देखअ नयन परम प्रभु सोई।।

  1526. RCM 1.144.4Open verse →

    अगुन अखंड अनंत अनादी। जेहि चिंतहिं परमारथबादी।।

    अर्थ · Hindi

    अगुन अखंड अनंत अनादी। जेहि चिंतहिं परमारथबादी।।

  1527. RCM 1.144.5Open verse →

    नेति नेति जेहि बेद निरूपा। निजानंद निरुपाधि अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    नेति नेति जेहि बेद निरूपा। निजानंद निरुपाधि अनूपा।।

  1528. RCM 1.144.6Open verse →

    संभु बिरंचि बिष्नु भगवाना। उपजहिं जासु अंस तें नाना।।

    अर्थ · Hindi

    संभु बिरंचि बिष्नु भगवाना। उपजहिं जासु अंस तें नाना।।

  1529. RCM 1.144.7Open verse →

    ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।

    अर्थ · Hindi

    ऐसेउ प्रभु सेवक बस अहई। भगत हेतु लीलातनु गहई।।

  1530. RCM 1.144.8Open verse →

    जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं यह बचन सत्य श्रुति भाषा। तौ हमार पूजहि अभिलाषा।।

  1531. RCM 1.144.9Open verse →

    एहि बिधि बीतें बरष षट सहस बारि आहार।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि बीतें बरष षट सहस बारि आहार।

  1532. RCM 1.144.10Open verse →

    संबत सप्त सहस्त्र पुनि रहे समीर अधार।।144।।

    अर्थ · Hindi

    संबत सप्त सहस्त्र पुनि रहे समीर अधार।।144।।

  1533. RCM 1.145.1Open verse →

    बरष सहस दस त्यागेउ सोऊ। ठाढ़े रहे एक पद दोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बरष सहस दस त्यागेउ सोऊ। ठाढ़े रहे एक पद दोऊ।।

  1534. RCM 1.145.2Open verse →

    बिधि हरि तप देखि अपारा। मनु समीप आए बहु बारा।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि हरि तप देखि अपारा। मनु समीप आए बहु बारा।।

  1535. RCM 1.145.3Open verse →

    मागहु बर बहु भाँति लोभाए। परम धीर नहिं चलहिं चलाए।।

    अर्थ · Hindi

    मागहु बर बहु भाँति लोभाए। परम धीर नहिं चलहिं चलाए।।

  1536. RCM 1.145.4Open verse →

    अस्थिमात्र होइ रहे सरीरा। तदपि मनाग मनहिं नहिं पीरा।।

    अर्थ · Hindi

    अस्थिमात्र होइ रहे सरीरा। तदपि मनाग मनहिं नहिं पीरा।।

  1537. RCM 1.145.5Open verse →

    प्रभु सर्बग्य दास निज जानी। गति अनन्य तापस नृप रानी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु सर्बग्य दास निज जानी। गति अनन्य तापस नृप रानी।।

  1538. RCM 1.145.6Open verse →

    मागु मागु बरु भै नभ बानी। परम गभीर कृपामृत सानी।।

    अर्थ · Hindi

    मागु मागु बरु भै नभ बानी। परम गभीर कृपामृत सानी।।

  1539. RCM 1.145.7Open verse →

    मृतक जिआवनि गिरा सुहाई। श्रबन रंध्र होइ उर जब आई।।

    अर्थ · Hindi

    मृतक जिआवनि गिरा सुहाई। श्रबन रंध्र होइ उर जब आई।।

  1540. RCM 1.145.8Open verse →

    ह्रष्टपुष्ट तन भए सुहाए। मानहुँ अबहिं भवन ते आए।।

    अर्थ · Hindi

    ह्रष्टपुष्ट तन भए सुहाए। मानहुँ अबहिं भवन ते आए।।

  1541. RCM 1.145.9Open verse →

    श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात।

    अर्थ · Hindi

    श्रवन सुधा सम बचन सुनि पुलक प्रफुल्लित गात।

  1542. RCM 1.145.10Open verse →

    बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात।।145।।

    अर्थ · Hindi

    बोले मनु करि दंडवत प्रेम न हृदयँ समात।।145।।

  1543. RCM 1.146.1Open verse →

    सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू।।

  1544. RCM 1.146.2Open verse →

    सेवत सुलभ सकल सुख दायक। प्रनतपाल सचराचर नायक।।

    अर्थ · Hindi

    सेवत सुलभ सकल सुख दायक। प्रनतपाल सचराचर नायक।।

  1545. RCM 1.146.3Open verse →

    जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू।।

  1546. RCM 1.146.4Open verse →

    जो सरूप बस सिव मन माहीं। जेहि कारन मुनि जतन कराहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जो सरूप बस सिव मन माहीं। जेहि कारन मुनि जतन कराहीं।।

  1547. RCM 1.146.5Open verse →

    जो भुसुंडि मन मानस हंसा। सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा।।

    अर्थ · Hindi

    जो भुसुंडि मन मानस हंसा। सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा।।

  1548. RCM 1.146.6Open verse →

    देखहिं हम सो रूप भरि लोचन। कृपा करहु प्रनतारति मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    देखहिं हम सो रूप भरि लोचन। कृपा करहु प्रनतारति मोचन।।

  1549. RCM 1.146.7Open verse →

    दंपति बचन परम प्रिय लागे। मुदुल बिनीत प्रेम रस पागे।।

    अर्थ · Hindi

    दंपति बचन परम प्रिय लागे। मुदुल बिनीत प्रेम रस पागे।।

  1550. RCM 1.146.8Open verse →

    भगत बछल प्रभु कृपानिधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    भगत बछल प्रभु कृपानिधाना। बिस्वबास प्रगटे भगवाना।।

  1551. RCM 1.146.9Open verse →

    नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर स्याम।

    अर्थ · Hindi

    नील सरोरुह नील मनि नील नीरधर स्याम।

  1552. RCM 1.146.10Open verse →

    लाजहिं तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम।।146।।

    अर्थ · Hindi

    लाजहिं तन सोभा निरखि कोटि कोटि सत काम।।146।।

  1553. RCM 1.147.1Open verse →

    सरद मयंक बदन छबि सींवा। चारु कपोल चिबुक दर ग्रीवा।।

    अर्थ · Hindi

    सरद मयंक बदन छबि सींवा। चारु कपोल चिबुक दर ग्रीवा।।

  1554. RCM 1.147.2Open verse →

    अधर अरुन रद सुंदर नासा। बिधु कर निकर बिनिंदक हासा।।

    अर्थ · Hindi

    अधर अरुन रद सुंदर नासा। बिधु कर निकर बिनिंदक हासा।।

  1555. RCM 1.147.3Open verse →

    नव अबुंज अंबक छबि नीकी। चितवनि ललित भावँती जी की।।

    अर्थ · Hindi

    नव अबुंज अंबक छबि नीकी। चितवनि ललित भावँती जी की।।

  1556. RCM 1.147.4Open verse →

    भुकुटि मनोज चाप छबि हारी। तिलक ललाट पटल दुतिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    भुकुटि मनोज चाप छबि हारी। तिलक ललाट पटल दुतिकारी।।

  1557. RCM 1.147.5Open verse →

    कुंडल मकर मुकुट सिर भ्राजा। कुटिल केस जनु मधुप समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    कुंडल मकर मुकुट सिर भ्राजा। कुटिल केस जनु मधुप समाजा।।

  1558. RCM 1.147.6Open verse →

    उर श्रीबत्स रुचिर बनमाला। पदिक हार भूषन मनिजाला।।

    अर्थ · Hindi

    उर श्रीबत्स रुचिर बनमाला। पदिक हार भूषन मनिजाला।।

  1559. RCM 1.147.7Open verse →

    केहरि कंधर चारु जनेउ। बाहु बिभूषन सुंदर तेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    केहरि कंधर चारु जनेउ। बाहु बिभूषन सुंदर तेऊ।।

  1560. RCM 1.147.8Open verse →

    करि कर सरि सुभग भुजदंडा। कटि निषंग कर सर कोदंडा।।

    अर्थ · Hindi

    करि कर सरि सुभग भुजदंडा। कटि निषंग कर सर कोदंडा।।

  1561. RCM 1.147.9Open verse →

    तडित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि।।

    अर्थ · Hindi

    तडित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि।।

  1562. RCM 1.147.10Open verse →

    नाभि मनोहर लेति जनु जमुन भवँर छबि छीनि।।147।।

    अर्थ · Hindi

    नाभि मनोहर लेति जनु जमुन भवँर छबि छीनि।।147।।

  1563. RCM 1.148.1Open verse →

    पद राजीव बरनि नहि जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पद राजीव बरनि नहि जाहीं। मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं।।

  1564. RCM 1.148.2Open verse →

    बाम भाग सोभति अनुकूला। आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला।।

    अर्थ · Hindi

    बाम भाग सोभति अनुकूला। आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला।।

  1565. RCM 1.148.3Open verse →

    जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।।

    अर्थ · Hindi

    जासु अंस उपजहिं गुनखानी। अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी।।

  1566. RCM 1.148.4Open verse →

    भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई।।

    अर्थ · Hindi

    भृकुटि बिलास जासु जग होई। राम बाम दिसि सीता सोई।।

  1567. RCM 1.148.5Open verse →

    छबिसमुद्र हरि रूप बिलोकी। एकटक रहे नयन पट रोकी।।

    अर्थ · Hindi

    छबिसमुद्र हरि रूप बिलोकी। एकटक रहे नयन पट रोकी।।

  1568. RCM 1.148.6Open verse →

    चितवहिं सादर रूप अनूपा। तृप्ति न मानहिं मनु सतरूपा।।

    अर्थ · Hindi

    चितवहिं सादर रूप अनूपा। तृप्ति न मानहिं मनु सतरूपा।।

  1569. RCM 1.148.7Open verse →

    हरष बिबस तन दसा भुलानी। परे दंड इव गहि पद पानी।।

    अर्थ · Hindi

    हरष बिबस तन दसा भुलानी। परे दंड इव गहि पद पानी।।

  1570. RCM 1.148.8Open verse →

    सिर परसे प्रभु निज कर कंजा। तुरत उठाए करुनापुंजा।।

    अर्थ · Hindi

    सिर परसे प्रभु निज कर कंजा। तुरत उठाए करुनापुंजा।।

  1571. RCM 1.148.9Open verse →

    बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि जानि।

    अर्थ · Hindi

    बोले कृपानिधान पुनि अति प्रसन्न मोहि जानि।

  1572. RCM 1.148.10Open verse →

    मागहु बर जोइ भाव मन महादानि अनुमानि।।148।।

    अर्थ · Hindi

    मागहु बर जोइ भाव मन महादानि अनुमानि।।148।।

  1573. RCM 1.149.1Open verse →

    सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी। धरि धीरजु बोली मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रभु बचन जोरि जुग पानी। धरि धीरजु बोली मृदु बानी।।

  1574. RCM 1.149.2Open verse →

    नाथ देखि पद कमल तुम्हारे। अब पूरे सब काम हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ देखि पद कमल तुम्हारे। अब पूरे सब काम हमारे।।

  1575. RCM 1.149.3Open verse →

    एक लालसा बड़ि उर माही। सुगम अगम कहि जात सो नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एक लालसा बड़ि उर माही। सुगम अगम कहि जात सो नाहीं।।

  1576. RCM 1.149.4Open verse →

    तुम्हहि देत अति सुगम गोसाईं। अगम लाग मोहि निज कृपनाईं।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हहि देत अति सुगम गोसाईं। अगम लाग मोहि निज कृपनाईं।।

  1577. RCM 1.149.5Open verse →

    जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।।

    अर्थ · Hindi

    जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।।

  1578. RCM 1.149.6Open verse →

    तासु प्रभा जान नहिं सोई। तथा हृदयँ मम संसय होई।।

    अर्थ · Hindi

    तासु प्रभा जान नहिं सोई। तथा हृदयँ मम संसय होई।।

  1579. RCM 1.149.7Open verse →

    सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।।

    अर्थ · Hindi

    सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।।

  1580. RCM 1.149.8Open verse →

    सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि। मोरें नहिं अदेय कछु तोही।।

    अर्थ · Hindi

    सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि। मोरें नहिं अदेय कछु तोही।।

  1581. RCM 1.149.9Open verse →

    दानि सिरोमनि कृपानिधि नाथ कहउँ सतिभाउ।।

    अर्थ · Hindi

    दानि सिरोमनि कृपानिधि नाथ कहउँ सतिभाउ।।

  1582. RCM 1.149.10Open verse →

    चाहउँ तुम्हहि समान सुत प्रभु सन कवन दुराउ।।149।।

    अर्थ · Hindi

    चाहउँ तुम्हहि समान सुत प्रभु सन कवन दुराउ।।149।।

  1583. RCM 1.150.1Open verse →

    देखि प्रीति सुनि बचन अमोले। एवमस्तु करुनानिधि बोले।।

    अर्थ · Hindi

    देखि प्रीति सुनि बचन अमोले। एवमस्तु करुनानिधि बोले।।

  1584. RCM 1.150.2Open verse →

    आपु सरिस खोजौं कहँ जाई। नृप तव तनय होब मैं आई।।

    अर्थ · Hindi

    आपु सरिस खोजौं कहँ जाई। नृप तव तनय होब मैं आई।।

  1585. RCM 1.150.3Open verse →

    सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।।

    अर्थ · Hindi

    सतरूपहि बिलोकि कर जोरें। देबि मागु बरु जो रुचि तोरे।।

  1586. RCM 1.150.4Open verse →

    जो बरु नाथ चतुर नृप मागा। सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा।।

    अर्थ · Hindi

    जो बरु नाथ चतुर नृप मागा। सोइ कृपाल मोहि अति प्रिय लागा।।

  1587. RCM 1.150.5Open verse →

    प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु परंतु सुठि होति ढिठाई। जदपि भगत हित तुम्हहि सोहाई।।

  1588. RCM 1.150.6Open verse →

    तुम्ह ब्रह्मादि जनक जग स्वामी। ब्रह्म सकल उर अंतरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह ब्रह्मादि जनक जग स्वामी। ब्रह्म सकल उर अंतरजामी।।

  1589. RCM 1.150.7Open verse →

    अस समुझत मन संसय होई। कहा जो प्रभु प्रवान पुनि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    अस समुझत मन संसय होई। कहा जो प्रभु प्रवान पुनि सोई।।

  1590. RCM 1.150.8Open verse →

    जे निज भगत नाथ तव अहहीं। जो सुख पावहिं जो गति लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जे निज भगत नाथ तव अहहीं। जो सुख पावहिं जो गति लहहीं।।

  1591. RCM 1.150.9Open verse →

    सोइ सुख सोइ गति सोइ भगति सोइ निज चरन सनेहु।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ सुख सोइ गति सोइ भगति सोइ निज चरन सनेहु।।

  1592. RCM 1.150.10Open verse →

    सोइ बिबेक सोइ रहनि प्रभु हमहि कृपा करि देहु।।150।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ बिबेक सोइ रहनि प्रभु हमहि कृपा करि देहु।।150।।

  1593. RCM 1.151.1Open verse →

    सुनु मृदु गूढ़ रुचिर बर रचना। कृपासिंधु बोले मृदु बचना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मृदु गूढ़ रुचिर बर रचना। कृपासिंधु बोले मृदु बचना।।

  1594. RCM 1.151.2Open verse →

    जो कछु रुचि तुम्हेर मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जो कछु रुचि तुम्हेर मन माहीं। मैं सो दीन्ह सब संसय नाहीं।।

  1595. RCM 1.151.3Open verse →

    मातु बिबेक अलोकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ।

    अर्थ · Hindi

    मातु बिबेक अलोकिक तोरें। कबहुँ न मिटिहि अनुग्रह मोरें ।

  1596. RCM 1.151.4Open verse →

    बंदि चरन मनु कहेउ बहोरी। अवर एक बिनति प्रभु मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि चरन मनु कहेउ बहोरी। अवर एक बिनति प्रभु मोरी।।

  1597. RCM 1.151.5Open verse →

    सुत बिषइक तव पद रति होऊ। मोहि बड़ मूढ़ कहै किन कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुत बिषइक तव पद रति होऊ। मोहि बड़ मूढ़ कहै किन कोऊ।।

  1598. RCM 1.151.6Open verse →

    मनि बिनु फनि जिमि जल बिनु मीना। मम जीवन तिमि तुम्हहि अधीना।।

    अर्थ · Hindi

    मनि बिनु फनि जिमि जल बिनु मीना। मम जीवन तिमि तुम्हहि अधीना।।

  1599. RCM 1.151.7Open verse →

    अस बरु मागि चरन गहि रहेऊ। एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अस बरु मागि चरन गहि रहेऊ। एवमस्तु करुनानिधि कहेऊ।।

  1600. RCM 1.151.8Open verse →

    अब तुम्ह मम अनुसासन मानी। बसहु जाइ सुरपति रजधानी।।

    अर्थ · Hindi

    अब तुम्ह मम अनुसासन मानी। बसहु जाइ सुरपति रजधानी।।

  1601. RCM 1.151.9Open verse →

    तहँ करि भोग बिसाल तात गउँ कछु काल पुनि।

    अर्थ · Hindi

    तहँ करि भोग बिसाल तात गउँ कछु काल पुनि।

  1602. RCM 1.151.10Open verse →

    होइहहु अवध भुआल तब मैं होब तुम्हार सुत।।151।।

    अर्थ · Hindi

    होइहहु अवध भुआल तब मैं होब तुम्हार सुत।।151।।

  1603. RCM 1.152.1Open verse →

    इच्छामय नरबेष सँवारें। होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारे।।

    अर्थ · Hindi

    इच्छामय नरबेष सँवारें। होइहउँ प्रगट निकेत तुम्हारे।।

  1604. RCM 1.152.2Open verse →

    अंसन्ह सहित देह धरि ताता। करिहउँ चरित भगत सुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    अंसन्ह सहित देह धरि ताता। करिहउँ चरित भगत सुखदाता।।

  1605. RCM 1.152.3Open verse →

    जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।।

  1606. RCM 1.152.4Open verse →

    आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया। सोउ अवतरिहि मोरि यह माया।।

    अर्थ · Hindi

    आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया। सोउ अवतरिहि मोरि यह माया।।

  1607. RCM 1.152.5Open verse →

    पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।।

  1608. RCM 1.152.6Open verse →

    पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना। अंतरधान भए भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना। अंतरधान भए भगवाना।।

  1609. RCM 1.152.7Open verse →

    दंपति उर धरि भगत कृपाला। तेहिं आश्रम निवसे कछु काला।।

    अर्थ · Hindi

    दंपति उर धरि भगत कृपाला। तेहिं आश्रम निवसे कछु काला।।

  1610. RCM 1.152.8Open verse →

    समय पाइ तनु तजि अनयासा। जाइ कीन्ह अमरावति बासा।।

    अर्थ · Hindi

    समय पाइ तनु तजि अनयासा। जाइ कीन्ह अमरावति बासा।।

  1611. RCM 1.152.9Open verse →

    यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु।

    अर्थ · Hindi

    यह इतिहास पुनीत अति उमहि कही बृषकेतु।

  1612. RCM 1.152.10Open verse →

    भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु।।152।।

    अर्थ · Hindi

    भरद्वाज सुनु अपर पुनि राम जनम कर हेतु।।152।।

  1613. RCM 1.153.1Open verse →

    सुनु मुनि कथा पुनीत पुरानी। जो गिरिजा प्रति संभु बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मुनि कथा पुनीत पुरानी। जो गिरिजा प्रति संभु बखानी।।

  1614. RCM 1.153.2Open verse →

    बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्व बिदित एक कैकय देसू। सत्यकेतु तहँ बसइ नरेसू।।

  1615. RCM 1.153.3Open verse →

    धरम धुरंधर नीति निधाना। तेज प्रताप सील बलवाना।।

    अर्थ · Hindi

    धरम धुरंधर नीति निधाना। तेज प्रताप सील बलवाना।।

  1616. RCM 1.153.4Open verse →

    तेहि कें भए जुगल सुत बीरा। सब गुन धाम महा रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कें भए जुगल सुत बीरा। सब गुन धाम महा रनधीरा।।

  1617. RCM 1.153.5Open verse →

    राज धनी जो जेठ सुत आही। नाम प्रतापभानु अस ताही।।

    अर्थ · Hindi

    राज धनी जो जेठ सुत आही। नाम प्रतापभानु अस ताही।।

  1618. RCM 1.153.6Open verse →

    अपर सुतहि अरिमर्दन नामा। भुजबल अतुल अचल संग्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    अपर सुतहि अरिमर्दन नामा। भुजबल अतुल अचल संग्रामा।।

  1619. RCM 1.153.7Open verse →

    भाइहि भाइहि परम समीती। सकल दोष छल बरजित प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    भाइहि भाइहि परम समीती। सकल दोष छल बरजित प्रीती।।

  1620. RCM 1.153.8Open verse →

    जेठे सुतहि राज नृप दीन्हा। हरि हित आपु गवन बन कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जेठे सुतहि राज नृप दीन्हा। हरि हित आपु गवन बन कीन्हा।।

  1621. RCM 1.153.9Open verse →

    जब प्रतापरबि भयउ नृप फिरी दोहाई देस।

    अर्थ · Hindi

    जब प्रतापरबि भयउ नृप फिरी दोहाई देस।

  1622. RCM 1.153.10Open verse →

    प्रजा पाल अति बेदबिधि कतहुँ नहीं अघ लेस।।153।।

    अर्थ · Hindi

    प्रजा पाल अति बेदबिधि कतहुँ नहीं अघ लेस।।153।।

  1623. RCM 1.154.1Open verse →

    नृप हितकारक सचिव सयाना। नाम धरमरुचि सुक्र समाना।।

    अर्थ · Hindi

    नृप हितकारक सचिव सयाना। नाम धरमरुचि सुक्र समाना।।

  1624. RCM 1.154.2Open verse →

    सचिव सयान बंधु बलबीरा। आपु प्रतापपुंज रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव सयान बंधु बलबीरा। आपु प्रतापपुंज रनधीरा।।

  1625. RCM 1.154.3Open verse →

    सेन संग चतुरंग अपारा। अमित सुभट सब समर जुझारा।।

    अर्थ · Hindi

    सेन संग चतुरंग अपारा। अमित सुभट सब समर जुझारा।।

  1626. RCM 1.154.4Open verse →

    सेन बिलोकि राउ हरषाना। अरु बाजे गहगहे निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    सेन बिलोकि राउ हरषाना। अरु बाजे गहगहे निसाना।।

  1627. RCM 1.154.5Open verse →

    बिजय हेतु कटकई बनाई। सुदिन साधि नृप चलेउ बजाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिजय हेतु कटकई बनाई। सुदिन साधि नृप चलेउ बजाई।।

  1628. RCM 1.154.6Open verse →

    जँह तहँ परीं अनेक लराईं। जीते सकल भूप बरिआई।।

    अर्थ · Hindi

    जँह तहँ परीं अनेक लराईं। जीते सकल भूप बरिआई।।

  1629. RCM 1.154.7Open verse →

    सप्त दीप भुजबल बस कीन्हे। लै लै दंड छाड़ि नृप दीन्हें।।

    अर्थ · Hindi

    सप्त दीप भुजबल बस कीन्हे। लै लै दंड छाड़ि नृप दीन्हें।।

  1630. RCM 1.154.8Open verse →

    सकल अवनि मंडल तेहि काला। एक प्रतापभानु महिपाला।।

    अर्थ · Hindi

    सकल अवनि मंडल तेहि काला। एक प्रतापभानु महिपाला।।

  1631. RCM 1.154.9Open verse →

    स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।

    अर्थ · Hindi

    स्वबस बिस्व करि बाहुबल निज पुर कीन्ह प्रबेसु।

  1632. RCM 1.154.10Open verse →

    अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु।।154।।

    अर्थ · Hindi

    अरथ धरम कामादि सुख सेवइ समयँ नरेसु।।154।।

  1633. RCM 1.155.1Open verse →

    भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    भूप प्रतापभानु बल पाई। कामधेनु भै भूमि सुहाई।।

  1634. RCM 1.155.2Open verse →

    सब दुख बरजित प्रजा सुखारी। धरमसील सुंदर नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    सब दुख बरजित प्रजा सुखारी। धरमसील सुंदर नर नारी।।

  1635. RCM 1.155.3Open verse →

    सचिव धरमरुचि हरि पद प्रीती। नृप हित हेतु सिखव नित नीती।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव धरमरुचि हरि पद प्रीती। नृप हित हेतु सिखव नित नीती।।

  1636. RCM 1.155.4Open verse →

    गुर सुर संत पितर महिदेवा। करइ सदा नृप सब कै सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    गुर सुर संत पितर महिदेवा। करइ सदा नृप सब कै सेवा।।

  1637. RCM 1.155.5Open verse →

    भूप धरम जे बेद बखाने। सकल करइ सादर सुख माने।।

    अर्थ · Hindi

    भूप धरम जे बेद बखाने। सकल करइ सादर सुख माने।।

  1638. RCM 1.155.6Open verse →

    दिन प्रति देह बिबिध बिधि दाना। सुनहु सास्त्र बर बेद पुराना।।

    अर्थ · Hindi

    दिन प्रति देह बिबिध बिधि दाना। सुनहु सास्त्र बर बेद पुराना।।

  1639. RCM 1.155.7Open verse →

    नाना बापीं कूप तड़ागा। सुमन बाटिका सुंदर बागा।।

    अर्थ · Hindi

    नाना बापीं कूप तड़ागा। सुमन बाटिका सुंदर बागा।।

  1640. RCM 1.155.8Open verse →

    बिप्रभवन सुरभवन सुहाए। सब तीरथन्ह बिचित्र बनाए।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रभवन सुरभवन सुहाए। सब तीरथन्ह बिचित्र बनाए।।

  1641. RCM 1.155.9Open verse →

    जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग।

    अर्थ · Hindi

    जँह लगि कहे पुरान श्रुति एक एक सब जाग।

  1642. RCM 1.155.10Open verse →

    बार सहस्त्र सहस्त्र नृप किए सहित अनुराग।।155।।

    अर्थ · Hindi

    बार सहस्त्र सहस्त्र नृप किए सहित अनुराग।।155।।

  1643. RCM 1.156.1Open verse →

    हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ न कछु फल अनुसंधाना। भूप बिबेकी परम सुजाना।।

  1644. RCM 1.156.2Open verse →

    करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    करइ जे धरम करम मन बानी। बासुदेव अर्पित नृप ग्यानी।।

  1645. RCM 1.156.3Open verse →

    चढ़ि बर बाजि बार एक राजा। मृगया कर सब साजि समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    चढ़ि बर बाजि बार एक राजा। मृगया कर सब साजि समाजा।।

  1646. RCM 1.156.4Open verse →

    बिंध्याचल गभीर बन गयऊ। मृग पुनीत बहु मारत भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बिंध्याचल गभीर बन गयऊ। मृग पुनीत बहु मारत भयऊ।।

  1647. RCM 1.156.5Open verse →

    फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।।

    अर्थ · Hindi

    फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।।

  1648. RCM 1.156.6Open verse →

    बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।।

  1649. RCM 1.156.7Open verse →

    कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।।

  1650. RCM 1.156.8Open verse →

    घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।

  1651. RCM 1.156.9Open verse →

    नील महीधर सिखर सम देखि बिसाल बराहु।

    अर्थ · Hindi

    नील महीधर सिखर सम देखि बिसाल बराहु।

  1652. RCM 1.156.10Open verse →

    चपरि चलेउ हय सुटुकि नृप हाँकि न होइ निबाहु।।156।।

    अर्थ · Hindi

    चपरि चलेउ हय सुटुकि नृप हाँकि न होइ निबाहु।।156।।

  1653. RCM 1.157.1Open verse →

    आवत देखि अधिक रव बाजी। चलेउ बराह मरुत गति भाजी।।

    अर्थ · Hindi

    आवत देखि अधिक रव बाजी। चलेउ बराह मरुत गति भाजी।।

  1654. RCM 1.157.2Open verse →

    तुरत कीन्ह नृप सर संधाना। महि मिलि गयउ बिलोकत बाना।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत कीन्ह नृप सर संधाना। महि मिलि गयउ बिलोकत बाना।।

  1655. RCM 1.157.3Open verse →

    तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।

    अर्थ · Hindi

    तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल सुअर सरीर बचावा।।

  1656. RCM 1.157.4Open verse →

    प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ संग लागा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटत दुरत जाइ मृग भागा। रिस बस भूप चलेउ संग लागा।।

  1657. RCM 1.157.5Open verse →

    गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    गयउ दूरि घन गहन बराहू। जहँ नाहिन गज बाजि निबाहू।।

  1658. RCM 1.157.6Open verse →

    अति अकेल बन बिपुल कलेसू। तदपि न मृग मग तजइ नरेसू।।

    अर्थ · Hindi

    अति अकेल बन बिपुल कलेसू। तदपि न मृग मग तजइ नरेसू।।

  1659. RCM 1.157.7Open verse →

    कोल बिलोकि भूप बड़ धीरा। भागि पैठ गिरिगुहाँ गभीरा।।

    अर्थ · Hindi

    कोल बिलोकि भूप बड़ धीरा। भागि पैठ गिरिगुहाँ गभीरा।।

  1660. RCM 1.157.8Open verse →

    अगम देखि नृप अति पछिताई। फिरेउ महाबन परेउ भुलाई।।

    अर्थ · Hindi

    अगम देखि नृप अति पछिताई। फिरेउ महाबन परेउ भुलाई।।

  1661. RCM 1.157.9Open verse →

    खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।

    अर्थ · Hindi

    खेद खिन्न छुद्धित तृषित राजा बाजि समेत।

  1662. RCM 1.157.10Open verse →

    खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत।।157।।

    अर्थ · Hindi

    खोजत ब्याकुल सरित सर जल बिनु भयउ अचेत।।157।।

  1663. RCM 1.158.1Open verse →

    फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।।

    अर्थ · Hindi

    फिरत बिपिन आश्रम एक देखा। तहँ बस नृपति कपट मुनिबेषा।।

  1664. RCM 1.158.2Open verse →

    जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।

    अर्थ · Hindi

    जासु देस नृप लीन्ह छड़ाई। समर सेन तजि गयउ पराई।।

  1665. RCM 1.158.3Open verse →

    समय प्रतापभानु कर जानी। आपन अति असमय अनुमानी।।

    अर्थ · Hindi

    समय प्रतापभानु कर जानी। आपन अति असमय अनुमानी।।

  1666. RCM 1.158.4Open verse →

    गयउ न गृह मन बहुत गलानी। मिला न राजहि नृप अभिमानी।।

    अर्थ · Hindi

    गयउ न गृह मन बहुत गलानी। मिला न राजहि नृप अभिमानी।।

  1667. RCM 1.158.5Open verse →

    रिस उर मारि रंक जिमि राजा। बिपिन बसइ तापस कें साजा।।

    अर्थ · Hindi

    रिस उर मारि रंक जिमि राजा। बिपिन बसइ तापस कें साजा।।

  1668. RCM 1.158.6Open verse →

    तासु समीप गवन नृप कीन्हा। यह प्रतापरबि तेहि तब चीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    तासु समीप गवन नृप कीन्हा। यह प्रतापरबि तेहि तब चीन्हा।।

  1669. RCM 1.158.7Open verse →

    राउ तृषित नहि सो पहिचाना। देखि सुबेष महामुनि जाना।।

    अर्थ · Hindi

    राउ तृषित नहि सो पहिचाना। देखि सुबेष महामुनि जाना।।

  1670. RCM 1.158.8Open verse →

    उतरि तुरग तें कीन्ह प्रनामा। परम चतुर न कहेउ निज नामा।।

    अर्थ · Hindi

    उतरि तुरग तें कीन्ह प्रनामा। परम चतुर न कहेउ निज नामा।।

  1671. RCM 1.158.9Open verse →

    भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ।

    अर्थ · Hindi

    भूपति तृषित बिलोकि तेहिं सरबरु दीन्ह देखाइ।

  1672. RCM 1.158.10Open verse →

    मज्जन पान समेत हय कीन्ह नृपति हरषाइ।।158।।

    अर्थ · Hindi

    मज्जन पान समेत हय कीन्ह नृपति हरषाइ।।158।।

  1673. RCM 1.159.1Open verse →

    गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    गै श्रम सकल सुखी नृप भयऊ। निज आश्रम तापस लै गयऊ।।

  1674. RCM 1.159.2Open verse →

    आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    आसन दीन्ह अस्त रबि जानी। पुनि तापस बोलेउ मृदु बानी।।

  1675. RCM 1.159.3Open verse →

    को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें।।

    अर्थ · Hindi

    को तुम्ह कस बन फिरहु अकेलें। सुंदर जुबा जीव परहेलें।।

  1676. RCM 1.159.4Open verse →

    चक्रबर्ति के लच्छन तोरें। देखत दया लागि अति मोरें।।

    अर्थ · Hindi

    चक्रबर्ति के लच्छन तोरें। देखत दया लागि अति मोरें।।

  1677. RCM 1.159.5Open verse →

    नाम प्रतापभानु अवनीसा। तासु सचिव मैं सुनहु मुनीसा।।

    अर्थ · Hindi

    नाम प्रतापभानु अवनीसा। तासु सचिव मैं सुनहु मुनीसा।।

  1678. RCM 1.159.6Open verse →

    फिरत अहेरें परेउँ भुलाई। बडे भाग देखउँ पद आई।।

    अर्थ · Hindi

    फिरत अहेरें परेउँ भुलाई। बडे भाग देखउँ पद आई।।

  1679. RCM 1.159.7Open verse →

    हम कहँ दुर्लभ दरस तुम्हारा। जानत हौं कछु भल होनिहारा।।

    अर्थ · Hindi

    हम कहँ दुर्लभ दरस तुम्हारा। जानत हौं कछु भल होनिहारा।।

  1680. RCM 1.159.8Open verse →

    कह मुनि तात भयउ अँधियारा। जोजन सत्तरि नगरु तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनि तात भयउ अँधियारा। जोजन सत्तरि नगरु तुम्हारा।।

  1681. RCM 1.159.9Open verse →

    निसा घोर गम्भीर बन पंथ न सुनहु सुजान।

    अर्थ · Hindi

    निसा घोर गम्भीर बन पंथ न सुनहु सुजान।

  1682. RCM 1.159.10Open verse →

    बसहु आजु अस जानि तुम्ह जाएहु होत बिहान।।159(क)।।

    अर्थ · Hindi

    बसहु आजु अस जानि तुम्ह जाएहु होत बिहान।।159(क)।।

  1683. RCM 1.159.11Open verse →

    तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी जसि भवतब्यता तैसी मिलइ सहाइ।

  1684. RCM 1.159.12Open verse →

    आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ।।159(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    आपुनु आवइ ताहि पहिं ताहि तहाँ लै जाइ।।159(ख)।।

  1685. RCM 1.160.1Open verse →

    भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।।

    अर्थ · Hindi

    भलेहिं नाथ आयसु धरि सीसा। बाँधि तुरग तरु बैठ महीसा।।

  1686. RCM 1.160.2Open verse →

    नृप बहु भाँती प्रसंसेउ ताही। चरन बंदी निज भाग्य सराही।।

    अर्थ · Hindi

    नृप बहु भाँती प्रसंसेउ ताही। चरन बंदी निज भाग्य सराही।।

  1687. RCM 1.160.3Open verse →

    पुनि बोले मृदु गिरा सुहाई। जानि पिता प्रभु करउँ ढिठाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि बोले मृदु गिरा सुहाई। जानि पिता प्रभु करउँ ढिठाई।।

  1688. RCM 1.160.4Open verse →

    मोहि मुनीस सुत सेवक जानी। नाथ नाम निज कहहु बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि मुनीस सुत सेवक जानी। नाथ नाम निज कहहु बखानी।।

  1689. RCM 1.160.5Open verse →

    तेहि न जान नृप नृपहि सो जाना। भूप सुह्रद सो कपट सयाना।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि न जान नृप नृपहि सो जाना। भूप सुह्रद सो कपट सयाना।।

  1690. RCM 1.160.6Open verse →

    बैरी पुनि छत्री पुनि राजा। छल बल कीन्ह चहइ निज काजा।।

    अर्थ · Hindi

    बैरी पुनि छत्री पुनि राजा। छल बल कीन्ह चहइ निज काजा।।

  1691. RCM 1.160.7Open verse →

    समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि राजसुख दुखित अराती। अवाँ अनल इव सुलगइ छाती।।

  1692. RCM 1.160.8Open verse →

    सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदयँ हरषाना।।

    अर्थ · Hindi

    सरल बचन नृप के सुनि काना। बयर सँभारि हृदयँ हरषाना।।

  1693. RCM 1.160.9Open verse →

    कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत।

    अर्थ · Hindi

    कपट बोरि बानी मृदुल बोलेउ जुगुति समेत।

  1694. RCM 1.160.10Open verse →

    नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेति।।160।।

    अर्थ · Hindi

    नाम हमार भिखारि अब निर्धन रहित निकेति।।160।।

  1695. RCM 1.161.1Open verse →

    कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    कह नृप जे बिग्यान निधाना। तुम्ह सारिखे गलित अभिमाना।।

  1696. RCM 1.161.2Open verse →

    सदा रहहि अपनपौ दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    सदा रहहि अपनपौ दुराएँ। सब बिधि कुसल कुबेष बनाएँ।।

  1697. RCM 1.161.3Open verse →

    तेहि तें कहहि संत श्रुति टेरें। परम अकिंचन प्रिय हरि केरें।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि तें कहहि संत श्रुति टेरें। परम अकिंचन प्रिय हरि केरें।।

  1698. RCM 1.161.4Open verse →

    तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा। होत बिरंचि सिवहि संदेहा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सम अधन भिखारि अगेहा। होत बिरंचि सिवहि संदेहा।।

  1699. RCM 1.161.5Open verse →

    जोसि सोसि तव चरन नमामी। मो पर कृपा करिअ अब स्वामी।।

    अर्थ · Hindi

    जोसि सोसि तव चरन नमामी। मो पर कृपा करिअ अब स्वामी।।

  1700. RCM 1.161.6Open verse →

    सहज प्रीति भूपति कै देखी। आपु बिषय बिस्वास बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    सहज प्रीति भूपति कै देखी। आपु बिषय बिस्वास बिसेषी।।

  1701. RCM 1.161.7Open verse →

    सब प्रकार राजहि अपनाई। बोलेउ अधिक सनेह जनाई।।

    अर्थ · Hindi

    सब प्रकार राजहि अपनाई। बोलेउ अधिक सनेह जनाई।।

  1702. RCM 1.161.8Open verse →

    सुनु सतिभाउ कहउँ महिपाला। इहाँ बसत बीते बहु काला।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सतिभाउ कहउँ महिपाला। इहाँ बसत बीते बहु काला।।

  1703. RCM 1.161.9Open verse →

    अब लगि मोहि न मिलेउ कोउ मैं न जनावउँ काहु।

    अर्थ · Hindi

    अब लगि मोहि न मिलेउ कोउ मैं न जनावउँ काहु।

  1704. RCM 1.161.10Open verse →

    लोकमान्यता अनल सम कर तप कानन दाहु।।161(क)।।

    अर्थ · Hindi

    लोकमान्यता अनल सम कर तप कानन दाहु।।161(क)।।

  1705. RCM 1.161.11Open verse →

    तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर।

  1706. RCM 1.161.12Open verse →

    सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।161(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।161(ख)।।

  1707. RCM 1.162.1Open verse →

    तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तातें गुपुत रहउँ जग माहीं। हरि तजि किमपि प्रयोजन नाहीं।।

  1708. RCM 1.162.2Open verse →

    प्रभु जानत सब बिनहिं जनाएँ। कहहु कवनि सिधि लोक रिझाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु जानत सब बिनहिं जनाएँ। कहहु कवनि सिधि लोक रिझाएँ।।

  1709. RCM 1.162.3Open verse →

    तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सुचि सुमति परम प्रिय मोरें। प्रीति प्रतीति मोहि पर तोरें।।

  1710. RCM 1.162.4Open verse →

    अब जौं तात दुरावउँ तोही। दारुन दोष घटइ अति मोही।।

    अर्थ · Hindi

    अब जौं तात दुरावउँ तोही। दारुन दोष घटइ अति मोही।।

  1711. RCM 1.162.5Open verse →

    जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि जिमि तापसु कथइ उदासा। तिमि तिमि नृपहि उपज बिस्वासा।।

  1712. RCM 1.162.6Open verse →

    देखा स्वबस कर्म मन बानी। तब बोला तापस बगध्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    देखा स्वबस कर्म मन बानी। तब बोला तापस बगध्यानी।।

  1713. RCM 1.162.7Open verse →

    नाम हमार एकतनु भाई। सुनि नृप बोले पुनि सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाम हमार एकतनु भाई। सुनि नृप बोले पुनि सिरु नाई।।

  1714. RCM 1.162.8Open verse →

    कहहु नाम कर अरथ बखानी। मोहि सेवक अति आपन जानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु नाम कर अरथ बखानी। मोहि सेवक अति आपन जानी।।

  1715. RCM 1.162.9Open verse →

    आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।

    अर्थ · Hindi

    आदिसृष्टि उपजी जबहिं तब उतपति भै मोरि।

  1716. RCM 1.162.10Open verse →

    नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि।।162।।

    अर्थ · Hindi

    नाम एकतनु हेतु तेहि देह न धरी बहोरि।।162।।

  1717. RCM 1.163.1Open verse →

    जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।।

  1718. RCM 1.163.2Open verse →

    तपबल तें जग सृजइ बिधाता। तपबल बिष्नु भए परित्राता।।

    अर्थ · Hindi

    तपबल तें जग सृजइ बिधाता। तपबल बिष्नु भए परित्राता।।

  1719. RCM 1.163.3Open verse →

    तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।।

  1720. RCM 1.163.4Open verse →

    भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा। कथा पुरातन कहै सो लागा।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा। कथा पुरातन कहै सो लागा।।

  1721. RCM 1.163.5Open verse →

    करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।।

    अर्थ · Hindi

    करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।।

  1722. RCM 1.163.6Open verse →

    उदभव पालन प्रलय कहानी। कहेसि अमित आचरज बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    उदभव पालन प्रलय कहानी। कहेसि अमित आचरज बखानी।।

  1723. RCM 1.163.7Open verse →

    सुनि महिप तापस बस भयऊ। आपन नाम कहत तब लयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि महिप तापस बस भयऊ। आपन नाम कहत तब लयऊ।।

  1724. RCM 1.163.8Open verse →

    कह तापस नृप जानउँ तोही। कीन्हेहु कपट लाग भल मोही।।

    अर्थ · Hindi

    कह तापस नृप जानउँ तोही। कीन्हेहु कपट लाग भल मोही।।

  1725. RCM 1.163.9Open verse →

    सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप।

    अर्थ · Hindi

    सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप।

  1726. RCM 1.163.10Open verse →

    मोहि तोहि पर अति प्रीति सोइ चतुरता बिचारि तव।।163।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि तोहि पर अति प्रीति सोइ चतुरता बिचारि तव।।163।।

  1727. RCM 1.164.1Open verse →

    नाम तुम्हार प्रताप दिनेसा। सत्यकेतु तव पिता नरेसा।।

    अर्थ · Hindi

    नाम तुम्हार प्रताप दिनेसा। सत्यकेतु तव पिता नरेसा।।

  1728. RCM 1.164.2Open verse →

    गुर प्रसाद सब जानिअ राजा। कहिअ न आपन जानि अकाजा।।

    अर्थ · Hindi

    गुर प्रसाद सब जानिअ राजा। कहिअ न आपन जानि अकाजा।।

  1729. RCM 1.164.3Open verse →

    देखि तात तव सहज सुधाई। प्रीति प्रतीति नीति निपुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    देखि तात तव सहज सुधाई। प्रीति प्रतीति नीति निपुनाई।।

  1730. RCM 1.164.4Open verse →

    उपजि परि ममता मन मोरें। कहउँ कथा निज पूछे तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    उपजि परि ममता मन मोरें। कहउँ कथा निज पूछे तोरें।।

  1731. RCM 1.164.5Open verse →

    अब प्रसन्न मैं संसय नाहीं। मागु जो भूप भाव मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अब प्रसन्न मैं संसय नाहीं। मागु जो भूप भाव मन माहीं।।

  1732. RCM 1.164.6Open verse →

    सुनि सुबचन भूपति हरषाना। गहि पद बिनय कीन्हि बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुबचन भूपति हरषाना। गहि पद बिनय कीन्हि बिधि नाना।।

  1733. RCM 1.164.7Open verse →

    कृपासिंधु मुनि दरसन तोरें। चारि पदारथ करतल मोरें।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु मुनि दरसन तोरें। चारि पदारथ करतल मोरें।।

  1734. RCM 1.164.8Open verse →

    प्रभुहि तथापि प्रसन्न बिलोकी। मागि अगम बर होउँ असोकी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुहि तथापि प्रसन्न बिलोकी। मागि अगम बर होउँ असोकी।।

  1735. RCM 1.164.9Open verse →

    जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ।

    अर्थ · Hindi

    जरा मरन दुख रहित तनु समर जितै जनि कोउ।

  1736. RCM 1.164.10Open verse →

    एकछत्र रिपुहीन महि राज कलप सत होउ।।164।।

    अर्थ · Hindi

    एकछत्र रिपुहीन महि राज कलप सत होउ।।164।।

  1737. RCM 1.165.1Open verse →

    कह तापस नृप ऐसेइ होऊ। कारन एक कठिन सुनु सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कह तापस नृप ऐसेइ होऊ। कारन एक कठिन सुनु सोऊ।।

  1738. RCM 1.165.2Open verse →

    कालउ तुअ पद नाइहि सीसा। एक बिप्रकुल छाड़ि महीसा।।

    अर्थ · Hindi

    कालउ तुअ पद नाइहि सीसा। एक बिप्रकुल छाड़ि महीसा।।

  1739. RCM 1.165.3Open verse →

    तपबल बिप्र सदा बरिआरा। तिन्ह के कोप न कोउ रखवारा।।

    अर्थ · Hindi

    तपबल बिप्र सदा बरिआरा। तिन्ह के कोप न कोउ रखवारा।।

  1740. RCM 1.165.4Open verse →

    जौं बिप्रन्ह सब करहु नरेसा। तौ तुअ बस बिधि बिष्नु महेसा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बिप्रन्ह सब करहु नरेसा। तौ तुअ बस बिधि बिष्नु महेसा।।

  1741. RCM 1.165.5Open verse →

    चल न ब्रह्मकुल सन बरिआई। सत्य कहउँ दोउ भुजा उठाई।।

    अर्थ · Hindi

    चल न ब्रह्मकुल सन बरिआई। सत्य कहउँ दोउ भुजा उठाई।।

  1742. RCM 1.165.6Open verse →

    बिप्र श्राप बिनु सुनु महिपाला। तोर नास नहि कवनेहुँ काला।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र श्राप बिनु सुनु महिपाला। तोर नास नहि कवनेहुँ काला।।

  1743. RCM 1.165.7Open verse →

    हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।

    अर्थ · Hindi

    हरषेउ राउ बचन सुनि तासू। नाथ न होइ मोर अब नासू।।

  1744. RCM 1.165.8Open verse →

    तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्ब काल कल्याना।।

    अर्थ · Hindi

    तव प्रसाद प्रभु कृपानिधाना। मो कहुँ सर्ब काल कल्याना।।

  1745. RCM 1.165.9Open verse →

    एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि।

    अर्थ · Hindi

    एवमस्तु कहि कपटमुनि बोला कुटिल बहोरि।

  1746. RCM 1.165.10Open verse →

    मिलब हमार भुलाब निज कहहु त हमहि न खोरि।।165।।

    अर्थ · Hindi

    मिलब हमार भुलाब निज कहहु त हमहि न खोरि।।165।।

  1747. RCM 1.166.1Open verse →

    तातें मै तोहि बरजउँ राजा। कहें कथा तव परम अकाजा।।

    अर्थ · Hindi

    तातें मै तोहि बरजउँ राजा। कहें कथा तव परम अकाजा।।

  1748. RCM 1.166.2Open verse →

    छठें श्रवन यह परत कहानी। नास तुम्हार सत्य मम बानी।।

    अर्थ · Hindi

    छठें श्रवन यह परत कहानी। नास तुम्हार सत्य मम बानी।।

  1749. RCM 1.166.3Open verse →

    यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।

    अर्थ · Hindi

    यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा।।

  1750. RCM 1.166.4Open verse →

    आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं।।

  1751. RCM 1.166.5Open verse →

    सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा। द्विज गुर कोप कहहु को राखा।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा। द्विज गुर कोप कहहु को राखा।।

  1752. RCM 1.166.6Open verse →

    राखइ गुर जौं कोप बिधाता। गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता।।

    अर्थ · Hindi

    राखइ गुर जौं कोप बिधाता। गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता।।

  1753. RCM 1.166.7Open verse →

    जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।

    अर्थ · Hindi

    जौं न चलब हम कहे तुम्हारें। होउ नास नहिं सोच हमारें।।

  1754. RCM 1.166.8Open verse →

    एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।

    अर्थ · Hindi

    एकहिं डर डरपत मन मोरा। प्रभु महिदेव श्राप अति घोरा।।

  1755. RCM 1.166.9Open verse →

    होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ।

    अर्थ · Hindi

    होहिं बिप्र बस कवन बिधि कहहु कृपा करि सोउ।

  1756. RCM 1.166.10Open verse →

    तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ।।166।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह तजि दीनदयाल निज हितू न देखउँ कोउँ।।166।।

  1757. RCM 1.167.1Open verse →

    सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं। कष्टसाध्य पुनि होहिं कि नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु नृप बिबिध जतन जग माहीं। कष्टसाध्य पुनि होहिं कि नाहीं।।

  1758. RCM 1.167.2Open verse →

    अहइ एक अति सुगम उपाई। तहाँ परंतु एक कठिनाई।।

    अर्थ · Hindi

    अहइ एक अति सुगम उपाई। तहाँ परंतु एक कठिनाई।।

  1759. RCM 1.167.3Open verse →

    मम आधीन जुगुति नृप सोई। मोर जाब तव नगर न होई।।

    अर्थ · Hindi

    मम आधीन जुगुति नृप सोई। मोर जाब तव नगर न होई।।

  1760. RCM 1.167.4Open verse →

    आजु लगें अरु जब तें भयऊँ। काहू के गृह ग्राम न गयऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    आजु लगें अरु जब तें भयऊँ। काहू के गृह ग्राम न गयऊँ।।

  1761. RCM 1.167.5Open verse →

    जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं न जाउँ तव होइ अकाजू। बना आइ असमंजस आजू।।

  1762. RCM 1.167.6Open verse →

    सुनि महीस बोलेउ मृदु बानी। नाथ निगम असि नीति बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि महीस बोलेउ मृदु बानी। नाथ निगम असि नीति बखानी।।

  1763. RCM 1.167.7Open verse →

    बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बड़े सनेह लघुन्ह पर करहीं। गिरि निज सिरनि सदा तृन धरहीं।।

  1764. RCM 1.167.8Open verse →

    जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू।।

    अर्थ · Hindi

    जलधि अगाध मौलि बह फेनू। संतत धरनि धरत सिर रेनू।।

  1765. RCM 1.167.9Open verse →

    अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि गहे नरेस पद स्वामी होहु कृपाल।

  1766. RCM 1.167.10Open verse →

    मोहि लागि दुख सहिअ प्रभु सज्जन दीनदयाल।।167।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि लागि दुख सहिअ प्रभु सज्जन दीनदयाल।।167।।

  1767. RCM 1.168.1Open verse →

    जानि नृपहि आपन आधीना। बोला तापस कपट प्रबीना।।

    अर्थ · Hindi

    जानि नृपहि आपन आधीना। बोला तापस कपट प्रबीना।।

  1768. RCM 1.168.2Open verse →

    सत्य कहउँ भूपति सुनु तोही। जग नाहिन दुर्लभ कछु मोही।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य कहउँ भूपति सुनु तोही। जग नाहिन दुर्लभ कछु मोही।।

  1769. RCM 1.168.3Open verse →

    अवसि काज मैं करिहउँ तोरा। मन तन बचन भगत तैं मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    अवसि काज मैं करिहउँ तोरा। मन तन बचन भगत तैं मोरा।।

  1770. RCM 1.168.4Open verse →

    जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ।।

  1771. RCM 1.168.5Open verse →

    जौं नरेस मैं करौं रसोई। तुम्ह परुसहु मोहि जान न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं नरेस मैं करौं रसोई। तुम्ह परुसहु मोहि जान न कोई।।

  1772. RCM 1.168.6Open verse →

    अन्न सो जोइ जोइ भोजन करई। सोइ सोइ तव आयसु अनुसरई।।

    अर्थ · Hindi

    अन्न सो जोइ जोइ भोजन करई। सोइ सोइ तव आयसु अनुसरई।।

  1773. RCM 1.168.7Open verse →

    पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि तिन्ह के गृह जेवँइ जोऊ। तव बस होइ भूप सुनु सोऊ।।

  1774. RCM 1.168.8Open verse →

    जाइ उपाय रचहु नृप एहू। संबत भरि संकलप करेहू।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ उपाय रचहु नृप एहू। संबत भरि संकलप करेहू।।

  1775. RCM 1.168.9Open verse →

    नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार।

    अर्थ · Hindi

    नित नूतन द्विज सहस सत बरेहु सहित परिवार।

  1776. RCM 1.168.10Open verse →

    मैं तुम्हरे संकलप लगि दिनहिंकरिब जेवनार।।168।।

    अर्थ · Hindi

    मैं तुम्हरे संकलप लगि दिनहिंकरिब जेवनार।।168।।

  1777. RCM 1.169.1Open verse →

    एहि बिधि भूप कष्ट अति थोरें। होइहहिं सकल बिप्र बस तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि भूप कष्ट अति थोरें। होइहहिं सकल बिप्र बस तोरें।।

  1778. RCM 1.169.2Open verse →

    करिहहिं बिप्र होम मख सेवा। तेहिं प्रसंग सहजेहिं बस देवा।।

    अर्थ · Hindi

    करिहहिं बिप्र होम मख सेवा। तेहिं प्रसंग सहजेहिं बस देवा।।

  1779. RCM 1.169.3Open verse →

    और एक तोहि कहऊँ लखाऊ। मैं एहि बेष न आउब काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    और एक तोहि कहऊँ लखाऊ। मैं एहि बेष न आउब काऊ।।

  1780. RCM 1.169.4Open verse →

    तुम्हरे उपरोहित कहुँ राया। हरि आनब मैं करि निज माया।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरे उपरोहित कहुँ राया। हरि आनब मैं करि निज माया।।

  1781. RCM 1.169.5Open verse →

    तपबल तेहि करि आपु समाना। रखिहउँ इहाँ बरष परवाना।।

    अर्थ · Hindi

    तपबल तेहि करि आपु समाना। रखिहउँ इहाँ बरष परवाना।।

  1782. RCM 1.169.6Open verse →

    मैं धरि तासु बेषु सुनु राजा। सब बिधि तोर सँवारब काजा।।

    अर्थ · Hindi

    मैं धरि तासु बेषु सुनु राजा। सब बिधि तोर सँवारब काजा।।

  1783. RCM 1.169.7Open verse →

    गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे।।

    अर्थ · Hindi

    गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे।।

  1784. RCM 1.169.8Open verse →

    मैं तपबल तोहि तुरग समेता। पहुँचेहउँ सोवतहि निकेता।।

    अर्थ · Hindi

    मैं तपबल तोहि तुरग समेता। पहुँचेहउँ सोवतहि निकेता।।

  1785. RCM 1.169.9Open verse →

    मैं आउब सोइ बेषु धरि पहिचानेहु तब मोहि।

    अर्थ · Hindi

    मैं आउब सोइ बेषु धरि पहिचानेहु तब मोहि।

  1786. RCM 1.169.10Open verse →

    जब एकांत बोलाइ सब कथा सुनावौं तोहि।।169।।

    अर्थ · Hindi

    जब एकांत बोलाइ सब कथा सुनावौं तोहि।।169।।

  1787. RCM 1.170.1Open verse →

    सयन कीन्ह नृप आयसु मानी। आसन जाइ बैठ छलग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सयन कीन्ह नृप आयसु मानी। आसन जाइ बैठ छलग्यानी।।

  1788. RCM 1.170.2Open verse →

    श्रमित भूप निद्रा अति आई। सो किमि सोव सोच अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    श्रमित भूप निद्रा अति आई। सो किमि सोव सोच अधिकाई।।

  1789. RCM 1.170.3Open verse →

    कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।।

    अर्थ · Hindi

    कालकेतु निसिचर तहँ आवा। जेहिं सूकर होइ नृपहि भुलावा।।

  1790. RCM 1.170.4Open verse →

    परम मित्र तापस नृप केरा। जानइ सो अति कपट घनेरा।।

    अर्थ · Hindi

    परम मित्र तापस नृप केरा। जानइ सो अति कपट घनेरा।।

  1791. RCM 1.170.5Open verse →

    तेहि के सत सुत अरु दस भाई। खल अति अजय देव दुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि के सत सुत अरु दस भाई। खल अति अजय देव दुखदाई।।

  1792. RCM 1.170.6Open verse →

    प्रथमहि भूप समर सब मारे। बिप्र संत सुर देखि दुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथमहि भूप समर सब मारे। बिप्र संत सुर देखि दुखारे।।

  1793. RCM 1.170.7Open verse →

    तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं खल पाछिल बयरु सँभरा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा।।

  1794. RCM 1.170.8Open verse →

    जेहि रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ।।

  1795. RCM 1.170.9Open verse →

    रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।

    अर्थ · Hindi

    रिपु तेजसी अकेल अपि लघु करि गनिअ न ताहु।

  1796. RCM 1.170.10Open verse →

    अजहुँ देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु।।170।।

    अर्थ · Hindi

    अजहुँ देत दुख रबि ससिहि सिर अवसेषित राहु।।170।।

  1797. RCM 1.171.1Open verse →

    तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    तापस नृप निज सखहि निहारी। हरषि मिलेउ उठि भयउ सुखारी।।

  1798. RCM 1.171.2Open verse →

    मित्रहि कहि सब कथा सुनाई। जातुधान बोला सुख पाई।।

    अर्थ · Hindi

    मित्रहि कहि सब कथा सुनाई। जातुधान बोला सुख पाई।।

  1799. RCM 1.171.3Open verse →

    अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा। जौं तुम्ह कीन्ह मोर उपदेसा।।

    अर्थ · Hindi

    अब साधेउँ रिपु सुनहु नरेसा। जौं तुम्ह कीन्ह मोर उपदेसा।।

  1800. RCM 1.171.4Open verse →

    परिहरि सोच रहहु तुम्ह सोई। बिनु औषध बिआधि बिधि खोई।।

    अर्थ · Hindi

    परिहरि सोच रहहु तुम्ह सोई। बिनु औषध बिआधि बिधि खोई।।

  1801. RCM 1.171.5Open verse →

    कुल समेत रिपु मूल बहाई। चौथे दिवस मिलब मैं आई।।

    अर्थ · Hindi

    कुल समेत रिपु मूल बहाई। चौथे दिवस मिलब मैं आई।।

  1802. RCM 1.171.6Open verse →

    तापस नृपहि बहुत परितोषी। चला महाकपटी अतिरोषी।।

    अर्थ · Hindi

    तापस नृपहि बहुत परितोषी। चला महाकपटी अतिरोषी।।

  1803. RCM 1.171.7Open verse →

    भानुप्रतापहि बाजि समेता। पहुँचाएसि छन माझ निकेता।।

    अर्थ · Hindi

    भानुप्रतापहि बाजि समेता। पहुँचाएसि छन माझ निकेता।।

  1804. RCM 1.171.8Open verse →

    नृपहि नारि पहिं सयन कराई। हयगृहँ बाँधेसि बाजि बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    नृपहि नारि पहिं सयन कराई। हयगृहँ बाँधेसि बाजि बनाई।।

  1805. RCM 1.171.9Open verse →

    राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि।

    अर्थ · Hindi

    राजा के उपरोहितहि हरि लै गयउ बहोरि।

  1806. RCM 1.171.10Open verse →

    लै राखेसि गिरि खोह महुँ मायाँ करि मति भोरि।।171।।

    अर्थ · Hindi

    लै राखेसि गिरि खोह महुँ मायाँ करि मति भोरि।।171।।

  1807. RCM 1.172.1Open verse →

    आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    आपु बिरचि उपरोहित रूपा। परेउ जाइ तेहि सेज अनूपा।।

  1808. RCM 1.172.2Open verse →

    जागेउ नृप अनभएँ बिहाना। देखि भवन अति अचरजु माना।।

    अर्थ · Hindi

    जागेउ नृप अनभएँ बिहाना। देखि भवन अति अचरजु माना।।

  1809. RCM 1.172.3Open verse →

    मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि महिमा मन महुँ अनुमानी। उठेउ गवँहि जेहि जान न रानी।।

  1810. RCM 1.172.4Open verse →

    कानन गयउ बाजि चढ़ि तेहीं। पुर नर नारि न जानेउ केहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कानन गयउ बाजि चढ़ि तेहीं। पुर नर नारि न जानेउ केहीं।।

  1811. RCM 1.172.5Open verse →

    गएँ जाम जुग भूपति आवा। घर घर उत्सव बाज बधावा।।

    अर्थ · Hindi

    गएँ जाम जुग भूपति आवा। घर घर उत्सव बाज बधावा।।

  1812. RCM 1.172.6Open verse →

    उपरोहितहि देख जब राजा। चकित बिलोकि सुमिरि सोइ काजा।।

    अर्थ · Hindi

    उपरोहितहि देख जब राजा। चकित बिलोकि सुमिरि सोइ काजा।।

  1813. RCM 1.172.7Open verse →

    जुग सम नृपहि गए दिन तीनी। कपटी मुनि पद रह मति लीनी।।

    अर्थ · Hindi

    जुग सम नृपहि गए दिन तीनी। कपटी मुनि पद रह मति लीनी।।

  1814. RCM 1.172.8Open verse →

    समय जानि उपरोहित आवा। नृपहि मते सब कहि समुझावा।।

    अर्थ · Hindi

    समय जानि उपरोहित आवा। नृपहि मते सब कहि समुझावा।।

  1815. RCM 1.172.9Open verse →

    नृप हरषेउ पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत।

    अर्थ · Hindi

    नृप हरषेउ पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत।

  1816. RCM 1.172.10Open verse →

    बरे तुरत सत सहस बर बिप्र कुटुंब समेत।।172।।

    अर्थ · Hindi

    बरे तुरत सत सहस बर बिप्र कुटुंब समेत।।172।।

  1817. RCM 1.173.1Open verse →

    उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई।।

    अर्थ · Hindi

    उपरोहित जेवनार बनाई। छरस चारि बिधि जसि श्रुति गाई।।

  1818. RCM 1.173.2Open verse →

    मायामय तेहिं कीन्ह रसोई। बिंजन बहु गनि सकइ न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    मायामय तेहिं कीन्ह रसोई। बिंजन बहु गनि सकइ न कोई।।

  1819. RCM 1.173.3Open verse →

    बिबिध मृगन्ह कर आमिष राँधा। तेहि महुँ बिप्र माँसु खल साँधा।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध मृगन्ह कर आमिष राँधा। तेहि महुँ बिप्र माँसु खल साँधा।।

  1820. RCM 1.173.4Open verse →

    भोजन कहुँ सब बिप्र बोलाए। पद पखारि सादर बैठाए।।

    अर्थ · Hindi

    भोजन कहुँ सब बिप्र बोलाए। पद पखारि सादर बैठाए।।

  1821. RCM 1.173.5Open verse →

    परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला।।

    अर्थ · Hindi

    परुसन जबहिं लाग महिपाला। भै अकासबानी तेहि काला।।

  1822. RCM 1.173.6Open verse →

    बिप्रबृंद उठि उठि गृह जाहू। है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रबृंद उठि उठि गृह जाहू। है बड़ि हानि अन्न जनि खाहू।।

  1823. RCM 1.173.7Open verse →

    भयउ रसोईं भूसुर माँसू। सब द्विज उठे मानि बिस्वासू।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ रसोईं भूसुर माँसू। सब द्विज उठे मानि बिस्वासू।।

  1824. RCM 1.173.8Open verse →

    भूप बिकल मति मोहँ भुलानी। भावी बस आव मुख बानी।।

    अर्थ · Hindi

    भूप बिकल मति मोहँ भुलानी। भावी बस आव मुख बानी।।

  1825. RCM 1.173.9Open verse →

    बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार।

    अर्थ · Hindi

    बोले बिप्र सकोप तब नहिं कछु कीन्ह बिचार।

  1826. RCM 1.173.10Open verse →

    जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार।।173।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ निसाचर होहु नृप मूढ़ सहित परिवार।।173।।

  1827. RCM 1.174.1Open verse →

    छत्रबंधु तैं बिप्र बोलाई। घालै लिए सहित समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    छत्रबंधु तैं बिप्र बोलाई। घालै लिए सहित समुदाई।।

  1828. RCM 1.174.2Open verse →

    ईस्वर राखा धरम हमारा। जैहसि तैं समेत परिवारा।।

    अर्थ · Hindi

    ईस्वर राखा धरम हमारा। जैहसि तैं समेत परिवारा।।

  1829. RCM 1.174.3Open verse →

    संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    संबत मध्य नास तव होऊ। जलदाता न रहिहि कुल कोऊ।।

  1830. RCM 1.174.4Open verse →

    नृप सुनि श्राप बिकल अति त्रासा। भै बहोरि बर गिरा अकासा।।

    अर्थ · Hindi

    नृप सुनि श्राप बिकल अति त्रासा। भै बहोरि बर गिरा अकासा।।

  1831. RCM 1.174.5Open verse →

    बिप्रहु श्राप बिचारि न दीन्हा। नहिं अपराध भूप कछु कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रहु श्राप बिचारि न दीन्हा। नहिं अपराध भूप कछु कीन्हा।।

  1832. RCM 1.174.6Open verse →

    चकित बिप्र सब सुनि नभबानी। भूप गयउ जहँ भोजन खानी।।

    अर्थ · Hindi

    चकित बिप्र सब सुनि नभबानी। भूप गयउ जहँ भोजन खानी।।

  1833. RCM 1.174.7Open verse →

    तहँ न असन नहिं बिप्र सुआरा। फिरेउ राउ मन सोच अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ न असन नहिं बिप्र सुआरा। फिरेउ राउ मन सोच अपारा।।

  1834. RCM 1.174.8Open verse →

    सब प्रसंग महिसुरन्ह सुनाई। त्रसित परेउ अवनीं अकुलाई।।

    अर्थ · Hindi

    सब प्रसंग महिसुरन्ह सुनाई। त्रसित परेउ अवनीं अकुलाई।।

  1835. RCM 1.174.9Open verse →

    भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर।

    अर्थ · Hindi

    भूपति भावी मिटइ नहिं जदपि न दूषन तोर।

  1836. RCM 1.174.10Open verse →

    किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर।।174।।

    अर्थ · Hindi

    किएँ अन्यथा होइ नहिं बिप्रश्राप अति घोर।।174।।

  1837. RCM 1.175.1Open verse →

    अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि सब महिदेव सिधाए। समाचार पुरलोगन्ह पाए।।

  1838. RCM 1.175.2Open verse →

    सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिचरत हंस काग किय जेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सोचहिं दूषन दैवहि देहीं। बिचरत हंस काग किय जेहीं।।

  1839. RCM 1.175.3Open verse →

    उपरोहितहि भवन पहुँचाई। असुर तापसहि खबरि जनाई।।

    अर्थ · Hindi

    उपरोहितहि भवन पहुँचाई। असुर तापसहि खबरि जनाई।।

  1840. RCM 1.175.4Open verse →

    तेहिं खल जहँ तहँ पत्र पठाए। सजि सजि सेन भूप सब धाए।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं खल जहँ तहँ पत्र पठाए। सजि सजि सेन भूप सब धाए।।

  1841. RCM 1.175.5Open verse →

    घेरेन्हि नगर निसान बजाई। बिबिध भाँति नित होई लराई।।

    अर्थ · Hindi

    घेरेन्हि नगर निसान बजाई। बिबिध भाँति नित होई लराई।।

  1842. RCM 1.175.6Open verse →

    जूझे सकल सुभट करि करनी। बंधु समेत परेउ नृप धरनी।।

    अर्थ · Hindi

    जूझे सकल सुभट करि करनी। बंधु समेत परेउ नृप धरनी।।

  1843. RCM 1.175.7Open verse →

    सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यकेतु कुल कोउ नहिं बाँचा। बिप्रश्राप किमि होइ असाँचा।।

  1844. RCM 1.175.8Open verse →

    रिपु जिति सब नृप नगर बसाई। निज पुर गवने जय जसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    रिपु जिति सब नृप नगर बसाई। निज पुर गवने जय जसु पाई।।

  1845. RCM 1.175.9Open verse →

    भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम।

    अर्थ · Hindi

    भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम।

  1846. RCM 1.175.10Open verse →

    धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम।।।175।।

    अर्थ · Hindi

    धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम।।।175।।

  1847. RCM 1.176.1Open verse →

    काल पाइ मुनि सुनु सोइ राजा। भयउ निसाचर सहित समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    काल पाइ मुनि सुनु सोइ राजा। भयउ निसाचर सहित समाजा।।

  1848. RCM 1.176.2Open verse →

    दस सिर ताहि बीस भुजदंडा। रावन नाम बीर बरिबंडा।।

    अर्थ · Hindi

    दस सिर ताहि बीस भुजदंडा। रावन नाम बीर बरिबंडा।।

  1849. RCM 1.176.3Open verse →

    भूप अनुज अरिमर्दन नामा। भयउ सो कुंभकरन बलधामा।।

    अर्थ · Hindi

    भूप अनुज अरिमर्दन नामा। भयउ सो कुंभकरन बलधामा।।

  1850. RCM 1.176.4Open verse →

    सचिव जो रहा धरमरुचि जासू। भयउ बिमात्र बंधु लघु तासू।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव जो रहा धरमरुचि जासू। भयउ बिमात्र बंधु लघु तासू।।

  1851. RCM 1.176.5Open verse →

    नाम बिभीषन जेहि जग जाना। बिष्नुभगत बिग्यान निधाना।।

    अर्थ · Hindi

    नाम बिभीषन जेहि जग जाना। बिष्नुभगत बिग्यान निधाना।।

  1852. RCM 1.176.6Open verse →

    रहे जे सुत सेवक नृप केरे। भए निसाचर घोर घनेरे।।

    अर्थ · Hindi

    रहे जे सुत सेवक नृप केरे। भए निसाचर घोर घनेरे।।

  1853. RCM 1.176.7Open verse →

    कामरूप खल जिनस अनेका। कुटिल भयंकर बिगत बिबेका।।

    अर्थ · Hindi

    कामरूप खल जिनस अनेका। कुटिल भयंकर बिगत बिबेका।।

  1854. RCM 1.176.8Open verse →

    कृपा रहित हिंसक सब पापी। बरनि न जाहिं बिस्व परितापी।।

    अर्थ · Hindi

    कृपा रहित हिंसक सब पापी। बरनि न जाहिं बिस्व परितापी।।

  1855. RCM 1.176.9Open verse →

    उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप।

    अर्थ · Hindi

    उपजे जदपि पुलस्त्यकुल पावन अमल अनूप।

  1856. RCM 1.176.10Open verse →

    तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अघरूप।।176।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि महीसुर श्राप बस भए सकल अघरूप।।176।।

  1857. RCM 1.177.1Open verse →

    कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह बिबिध तप तीनिहुँ भाई। परम उग्र नहिं बरनि सो जाई।।

  1858. RCM 1.177.2Open verse →

    गयउ निकट तप देखि बिधाता। मागहु बर प्रसन्न मैं ताता।।

    अर्थ · Hindi

    गयउ निकट तप देखि बिधाता। मागहु बर प्रसन्न मैं ताता।।

  1859. RCM 1.177.3Open verse →

    करि बिनती पद गहि दससीसा। बोलेउ बचन सुनहु जगदीसा।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिनती पद गहि दससीसा। बोलेउ बचन सुनहु जगदीसा।।

  1860. RCM 1.177.4Open verse →

    हम काहू के मरहिं न मारें। बानर मनुज जाति दुइ बारें।।

    अर्थ · Hindi

    हम काहू के मरहिं न मारें। बानर मनुज जाति दुइ बारें।।

  1861. RCM 1.177.5Open verse →

    एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    एवमस्तु तुम्ह बड़ तप कीन्हा। मैं ब्रह्माँ मिलि तेहि बर दीन्हा।।

  1862. RCM 1.177.6Open verse →

    पुनि प्रभु कुंभकरन पहिं गयऊ। तेहि बिलोकि मन बिसमय भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि प्रभु कुंभकरन पहिं गयऊ। तेहि बिलोकि मन बिसमय भयऊ।।

  1863. RCM 1.177.7Open verse →

    जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं एहिं खल नित करब अहारू। होइहि सब उजारि संसारू।।

  1864. RCM 1.177.8Open verse →

    सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास षट केरी।।

    अर्थ · Hindi

    सारद प्रेरि तासु मति फेरी। मागेसि नीद मास षट केरी।।

  1865. RCM 1.177.9Open verse →

    गए बिभीषन पास पुनि कहेउ पुत्र बर मागु।

    अर्थ · Hindi

    गए बिभीषन पास पुनि कहेउ पुत्र बर मागु।

  1866. RCM 1.177.10Open verse →

    तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु।।177।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं मागेउ भगवंत पद कमल अमल अनुरागु।।177।।

  1867. RCM 1.178.1Open verse →

    तिन्हि देइ बर ब्रह्म सिधाए। हरषित ते अपने गृह आए।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्हि देइ बर ब्रह्म सिधाए। हरषित ते अपने गृह आए।।

  1868. RCM 1.178.2Open verse →

    मय तनुजा मंदोदरि नामा। परम सुंदरी नारि ललामा।।

    अर्थ · Hindi

    मय तनुजा मंदोदरि नामा। परम सुंदरी नारि ललामा।।

  1869. RCM 1.178.3Open verse →

    सोइ मयँ दीन्हि रावनहि आनी। होइहि जातुधानपति जानी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ मयँ दीन्हि रावनहि आनी। होइहि जातुधानपति जानी।।

  1870. RCM 1.178.4Open verse →

    हरषित भयउ नारि भलि पाई। पुनि दोउ बंधु बिआहेसि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    हरषित भयउ नारि भलि पाई। पुनि दोउ बंधु बिआहेसि जाई।।

  1871. RCM 1.178.5Open verse →

    गिरि त्रिकूट एक सिंधु मझारी। बिधि निर्मित दुर्गम अति भारी।।

    अर्थ · Hindi

    गिरि त्रिकूट एक सिंधु मझारी। बिधि निर्मित दुर्गम अति भारी।।

  1872. RCM 1.178.6Open verse →

    सोइ मय दानवँ बहुरि सँवारा। कनक रचित मनिभवन अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ मय दानवँ बहुरि सँवारा। कनक रचित मनिभवन अपारा।।

  1873. RCM 1.178.7Open verse →

    भोगावति जसि अहिकुल बासा। अमरावति जसि सक्रनिवासा।।

    अर्थ · Hindi

    भोगावति जसि अहिकुल बासा। अमरावति जसि सक्रनिवासा।।

  1874. RCM 1.178.8Open verse →

    तिन्ह तें अधिक रम्य अति बंका। जग बिख्यात नाम तेहि लंका।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह तें अधिक रम्य अति बंका। जग बिख्यात नाम तेहि लंका।।

  1875. RCM 1.178.9Open verse →

    खाईं सिंधु गभीर अति चारिहुँ दिसि फिरि आव।

    अर्थ · Hindi

    खाईं सिंधु गभीर अति चारिहुँ दिसि फिरि आव।

  1876. RCM 1.178.10Open verse →

    कनक कोट मनि खचित दृढ़ बरनि न जाइ बनाव।।178(क)।।

    अर्थ · Hindi

    कनक कोट मनि खचित दृढ़ बरनि न जाइ बनाव।।178(क)।।

  1877. RCM 1.178.11Open verse →

    हरिप्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ।

    अर्थ · Hindi

    हरिप्रेरित जेहिं कलप जोइ जातुधानपति होइ।

  1878. RCM 1.178.12Open verse →

    सूर प्रतापी अतुलबल दल समेत बस सोइ।।178(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    सूर प्रतापी अतुलबल दल समेत बस सोइ।।178(ख)।।

  1879. RCM 1.179.1Open verse →

    रहे तहाँ निसिचर भट भारे। ते सब सुरन्ह समर संघारे।।

    अर्थ · Hindi

    रहे तहाँ निसिचर भट भारे। ते सब सुरन्ह समर संघारे।।

  1880. RCM 1.179.2Open verse →

    अब तहँ रहहिं सक्र के प्रेरे। रच्छक कोटि जच्छपति केरे।।

    अर्थ · Hindi

    अब तहँ रहहिं सक्र के प्रेरे। रच्छक कोटि जच्छपति केरे।।

  1881. RCM 1.179.3Open verse →

    दसमुख कतहुँ खबरि असि पाई। सेन साजि गढ़ घेरेसि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    दसमुख कतहुँ खबरि असि पाई। सेन साजि गढ़ घेरेसि जाई।।

  1882. RCM 1.179.4Open verse →

    देखि बिकट भट बड़ि कटकाई। जच्छ जीव लै गए पराई।।

    अर्थ · Hindi

    देखि बिकट भट बड़ि कटकाई। जच्छ जीव लै गए पराई।।

  1883. RCM 1.179.5Open verse →

    फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    फिरि सब नगर दसानन देखा। गयउ सोच सुख भयउ बिसेषा।।

  1884. RCM 1.179.6Open verse →

    सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर सहज अगम अनुमानी। कीन्हि तहाँ रावन रजधानी।।

  1885. RCM 1.179.7Open verse →

    जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे। सुखी सकल रजनीचर कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि जस जोग बाँटि गृह दीन्हे। सुखी सकल रजनीचर कीन्हे।।

  1886. RCM 1.179.8Open verse →

    एक बार कुबेर पर धावा। पुष्पक जान जीति लै आवा।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार कुबेर पर धावा। पुष्पक जान जीति लै आवा।।

  1887. RCM 1.179.9Open verse →

    कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।

    अर्थ · Hindi

    कौतुकहीं कैलास पुनि लीन्हेसि जाइ उठाइ।

  1888. RCM 1.179.10Open verse →

    मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ।।179।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ तौलि निज बाहुबल चला बहुत सुख पाइ।।179।।

  1889. RCM 1.180.1Open verse →

    सुख संपति सुत सेन सहाई। जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुख संपति सुत सेन सहाई। जय प्रताप बल बुद्धि बड़ाई।।

  1890. RCM 1.180.2Open verse →

    नित नूतन सब बाढ़त जाई। जिमि प्रतिलाभ लोभ अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    नित नूतन सब बाढ़त जाई। जिमि प्रतिलाभ लोभ अधिकाई।।

  1891. RCM 1.180.3Open verse →

    अतिबल कुंभकरन अस भ्राता। जेहि कहुँ नहिं प्रतिभट जग जाता।।

    अर्थ · Hindi

    अतिबल कुंभकरन अस भ्राता। जेहि कहुँ नहिं प्रतिभट जग जाता।।

  1892. RCM 1.180.4Open verse →

    करइ पान सोवइ षट मासा। जागत होइ तिहुँ पुर त्रासा।।

    अर्थ · Hindi

    करइ पान सोवइ षट मासा। जागत होइ तिहुँ पुर त्रासा।।

  1893. RCM 1.180.5Open verse →

    जौं दिन प्रति अहार कर सोई। बिस्व बेगि सब चौपट होई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं दिन प्रति अहार कर सोई। बिस्व बेगि सब चौपट होई।।

  1894. RCM 1.180.6Open verse →

    समर धीर नहिं जाइ बखाना। तेहि सम अमित बीर बलवाना।।

    अर्थ · Hindi

    समर धीर नहिं जाइ बखाना। तेहि सम अमित बीर बलवाना।।

  1895. RCM 1.180.7Open verse →

    बारिदनाद जेठ सुत तासू। भट महुँ प्रथम लीक जग जासू।।

    अर्थ · Hindi

    बारिदनाद जेठ सुत तासू। भट महुँ प्रथम लीक जग जासू।।

  1896. RCM 1.180.8Open verse →

    जेहि न होइ रन सनमुख कोई। सुरपुर नितहिं परावन होई।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि न होइ रन सनमुख कोई। सुरपुर नितहिं परावन होई।।

  1897. RCM 1.180.9Open verse →

    कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।

    अर्थ · Hindi

    कुमुख अकंपन कुलिसरद धूमकेतु अतिकाय।

  1898. RCM 1.180.10Open verse →

    एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय।।180।।

    अर्थ · Hindi

    एक एक जग जीति सक ऐसे सुभट निकाय।।180।।

  1899. RCM 1.181.1Open verse →

    कामरूप जानहिं सब माया। सपनेहुँ जिन्ह कें धरम न दाया।।

    अर्थ · Hindi

    कामरूप जानहिं सब माया। सपनेहुँ जिन्ह कें धरम न दाया।।

  1900. RCM 1.181.2Open verse →

    दसमुख बैठ सभाँ एक बारा। देखि अमित आपन परिवारा।।

    अर्थ · Hindi

    दसमुख बैठ सभाँ एक बारा। देखि अमित आपन परिवारा।।

  1901. RCM 1.181.3Open verse →

    सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।।

    अर्थ · Hindi

    सुत समूह जन परिजन नाती। गे को पार निसाचर जाती।।

  1902. RCM 1.181.4Open verse →

    सेन बिलोकि सहज अभिमानी। बोला बचन क्रोध मद सानी।।

    अर्थ · Hindi

    सेन बिलोकि सहज अभिमानी। बोला बचन क्रोध मद सानी।।

  1903. RCM 1.181.5Open verse →

    सुनहु सकल रजनीचर जूथा। हमरे बैरी बिबुध बरूथा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु सकल रजनीचर जूथा। हमरे बैरी बिबुध बरूथा।।

  1904. RCM 1.181.6Open verse →

    ते सनमुख नहिं करही लराई। देखि सबल रिपु जाहिं पराई।।

    अर्थ · Hindi

    ते सनमुख नहिं करही लराई। देखि सबल रिपु जाहिं पराई।।

  1905. RCM 1.181.7Open verse →

    तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।।

    अर्थ · Hindi

    तेन्ह कर मरन एक बिधि होई। कहउँ बुझाइ सुनहु अब सोई।।

  1906. RCM 1.181.8Open verse →

    द्विजभोजन मख होम सराधा।।सब कै जाइ करहु तुम्ह बाधा।।

    अर्थ · Hindi

    द्विजभोजन मख होम सराधा।।सब कै जाइ करहु तुम्ह बाधा।।

  1907. RCM 1.181.9Open verse →

    छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं आइ।

    अर्थ · Hindi

    छुधा छीन बलहीन सुर सहजेहिं मिलिहहिं आइ।

  1908. RCM 1.181.10Open verse →

    तब मारिहउँ कि छाड़िहउँ भली भाँति अपनाइ।।181।।

    अर्थ · Hindi

    तब मारिहउँ कि छाड़िहउँ भली भाँति अपनाइ।।181।।

  1909. RCM 1.182.1Open verse →

    मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा। दीन्ही सिख बलु बयरु बढ़ावा।।

    अर्थ · Hindi

    मेघनाद कहुँ पुनि हँकरावा। दीन्ही सिख बलु बयरु बढ़ावा।।

  1910. RCM 1.182.2Open verse →

    जे सुर समर धीर बलवाना। जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    जे सुर समर धीर बलवाना। जिन्ह कें लरिबे कर अभिमाना।।

  1911. RCM 1.182.3Open verse →

    तिन्हहि जीति रन आनेसु बाँधी। उठि सुत पितु अनुसासन काँधी।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्हहि जीति रन आनेसु बाँधी। उठि सुत पितु अनुसासन काँधी।।

  1912. RCM 1.182.4Open verse →

    एहि बिधि सबही अग्या दीन्ही। आपुनु चलेउ गदा कर लीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सबही अग्या दीन्ही। आपुनु चलेउ गदा कर लीन्ही।।

  1913. RCM 1.182.5Open verse →

    चलत दसानन डोलति अवनी। गर्जत गर्भ स्त्रवहिं सुर रवनी।।

    अर्थ · Hindi

    चलत दसानन डोलति अवनी। गर्जत गर्भ स्त्रवहिं सुर रवनी।।

  1914. RCM 1.182.6Open verse →

    रावन आवत सुनेउ सकोहा। देवन्ह तके मेरु गिरि खोहा।।

    अर्थ · Hindi

    रावन आवत सुनेउ सकोहा। देवन्ह तके मेरु गिरि खोहा।।

  1915. RCM 1.182.7Open verse →

    दिगपालन्ह के लोक सुहाए। सूने सकल दसानन पाए।।

    अर्थ · Hindi

    दिगपालन्ह के लोक सुहाए। सूने सकल दसानन पाए।।

  1916. RCM 1.182.8Open verse →

    पुनि पुनि सिंघनाद करि भारी। देइ देवतन्ह गारि पचारी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि सिंघनाद करि भारी। देइ देवतन्ह गारि पचारी।।

  1917. RCM 1.182.9Open verse →

    रन मद मत्त फिरइ जग धावा। प्रतिभट खौजत कतहुँ न पावा।।

    अर्थ · Hindi

    रन मद मत्त फिरइ जग धावा। प्रतिभट खौजत कतहुँ न पावा।।

  1918. RCM 1.182.10Open verse →

    रबि ससि पवन बरुन धनधारी। अगिनि काल जम सब अधिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    रबि ससि पवन बरुन धनधारी। अगिनि काल जम सब अधिकारी।।

  1919. RCM 1.182.11Open verse →

    किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।

    अर्थ · Hindi

    किंनर सिद्ध मनुज सुर नागा। हठि सबही के पंथहिं लागा।।

  1920. RCM 1.182.12Open verse →

    ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मसृष्टि जहँ लगि तनुधारी। दसमुख बसबर्ती नर नारी।।

  1921. RCM 1.182.13Open verse →

    आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु करहिं सकल भयभीता। नवहिं आइ नित चरन बिनीता।।

  1922. RCM 1.182.14Open verse →

    भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।

    अर्थ · Hindi

    भुजबल बिस्व बस्य करि राखेसि कोउ न सुतंत्र।

  1923. RCM 1.182.15Open verse →

    मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र।।182(क)।।

    अर्थ · Hindi

    मंडलीक मनि रावन राज करइ निज मंत्र।।182(क)।।

  1924. RCM 1.182.16Open verse →

    देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।

    अर्थ · Hindi

    देव जच्छ गंधर्व नर किंनर नाग कुमारि।

  1925. RCM 1.182.17Open verse →

    जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि।।182ख।।

    अर्थ · Hindi

    जीति बरीं निज बाहुबल बहु सुंदर बर नारि।।182ख।।

  1926. RCM 1.183.1Open verse →

    इंद्रजीत सन जो कछु कहेऊ। सो सब जनु पहिलेहिं करि रहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    इंद्रजीत सन जो कछु कहेऊ। सो सब जनु पहिलेहिं करि रहेऊ।।

  1927. RCM 1.183.2Open verse →

    प्रथमहिं जिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा। तिन्ह कर चरित सुनहु जो कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथमहिं जिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा। तिन्ह कर चरित सुनहु जो कीन्हा।।

  1928. RCM 1.183.3Open verse →

    देखत भीमरूप सब पापी। निसिचर निकर देव परितापी।।

    अर्थ · Hindi

    देखत भीमरूप सब पापी। निसिचर निकर देव परितापी।।

  1929. RCM 1.183.4Open verse →

    करहि उपद्रव असुर निकाया। नाना रूप धरहिं करि माया।।

    अर्थ · Hindi

    करहि उपद्रव असुर निकाया। नाना रूप धरहिं करि माया।।

  1930. RCM 1.183.5Open verse →

    जेहि बिधि होइ धर्म निर्मूला। सो सब करहिं बेद प्रतिकूला।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बिधि होइ धर्म निर्मूला। सो सब करहिं बेद प्रतिकूला।।

  1931. RCM 1.183.6Open verse →

    जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं। नगर गाउँ पुर आगि लगावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं। नगर गाउँ पुर आगि लगावहिं।।

  1932. RCM 1.183.7Open verse →

    सुभ आचरन कतहुँ नहिं होई। देव बिप्र गुरू मान न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    सुभ आचरन कतहुँ नहिं होई। देव बिप्र गुरू मान न कोई।।

  1933. RCM 1.183.8Open verse →

    नहिं हरिभगति जग्य तप ग्याना। सपनेहुँ सुनिअ न बेद पुराना।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं हरिभगति जग्य तप ग्याना। सपनेहुँ सुनिअ न बेद पुराना।।

  1934. RCM 1.184.1Open verse →

    बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।

    अर्थ · Hindi

    बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा।।

  1935. RCM 1.184.2Open verse →

    मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा।।

  1936. RCM 1.184.3Open verse →

    जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह के यह आचरन भवानी। ते जानेहु निसिचर सब प्रानी।।

  1937. RCM 1.184.4Open verse →

    अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी।।

    अर्थ · Hindi

    अतिसय देखि धर्म कै ग्लानी। परम सभीत धरा अकुलानी।।

  1938. RCM 1.184.5Open verse →

    गिरि सरि सिंधु भार नहिं मोही। जस मोहि गरुअ एक परद्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    गिरि सरि सिंधु भार नहिं मोही। जस मोहि गरुअ एक परद्रोही।।

  1939. RCM 1.184.6Open verse →

    सकल धर्म देखइ बिपरीता। कहि न सकइ रावन भय भीता।।

    अर्थ · Hindi

    सकल धर्म देखइ बिपरीता। कहि न सकइ रावन भय भीता।।

  1940. RCM 1.184.7Open verse →

    धेनु रूप धरि हृदयँ बिचारी। गई तहाँ जहँ सुर मुनि झारी।।

    अर्थ · Hindi

    धेनु रूप धरि हृदयँ बिचारी। गई तहाँ जहँ सुर मुनि झारी।।

  1941. RCM 1.184.8Open verse →

    निज संताप सुनाएसि रोई। काहू तें कछु काज न होई।।

    अर्थ · Hindi

    निज संताप सुनाएसि रोई। काहू तें कछु काज न होई।।

  1942. RCM 1.185.1Open verse →

    बैठे सुर सब करहिं बिचारा। कहँ पाइअ प्रभु करिअ पुकारा।।

    अर्थ · Hindi

    बैठे सुर सब करहिं बिचारा। कहँ पाइअ प्रभु करिअ पुकारा।।

  1943. RCM 1.185.2Open verse →

    पुर बैकुंठ जान कह कोई। कोउ कह पयनिधि बस प्रभु सोई।।

    अर्थ · Hindi

    पुर बैकुंठ जान कह कोई। कोउ कह पयनिधि बस प्रभु सोई।।

  1944. RCM 1.185.3Open verse →

    जाके हृदयँ भगति जसि प्रीति। प्रभु तहँ प्रगट सदा तेहिं रीती।।

    अर्थ · Hindi

    जाके हृदयँ भगति जसि प्रीति। प्रभु तहँ प्रगट सदा तेहिं रीती।।

  1945. RCM 1.185.4Open verse →

    तेहि समाज गिरिजा मैं रहेऊँ। अवसर पाइ बचन एक कहेऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि समाज गिरिजा मैं रहेऊँ। अवसर पाइ बचन एक कहेऊँ।।

  1946. RCM 1.185.5Open verse →

    हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना।।

    अर्थ · Hindi

    हरि ब्यापक सर्बत्र समाना। प्रेम तें प्रगट होहिं मैं जाना।।

  1947. RCM 1.185.6Open verse →

    देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं। कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    देस काल दिसि बिदिसिहु माहीं। कहहु सो कहाँ जहाँ प्रभु नाहीं।।

  1948. RCM 1.185.7Open verse →

    अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी।।

    अर्थ · Hindi

    अग जगमय सब रहित बिरागी। प्रेम तें प्रभु प्रगटइ जिमि आगी।।

  1949. RCM 1.185.8Open verse →

    मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    मोर बचन सब के मन माना। साधु साधु करि ब्रह्म बखाना।।

  1950. RCM 1.185.9Open verse →

    सुनि बिरंचि मन हरष तन पुलकि नयन बह नीर।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बिरंचि मन हरष तन पुलकि नयन बह नीर।

  1951. RCM 1.185.10Open verse →

    अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर।।185।।

    अर्थ · Hindi

    अस्तुति करत जोरि कर सावधान मतिधीर।।185।।

  1952. RCM 1.186.1Open verse →

    जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता।

    अर्थ · Hindi

    जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता।

  1953. RCM 1.186.2Open verse →

    गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता।।

    अर्थ · Hindi

    गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता।।

  1954. RCM 1.186.3Open verse →

    पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई।

    अर्थ · Hindi

    पालन सुर धरनी अद्भुत करनी मरम न जानइ कोई।

  1955. RCM 1.186.4Open verse →

    जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जो सहज कृपाला दीनदयाला करउ अनुग्रह सोई।।

  1956. RCM 1.186.5Open verse →

    जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा।

    अर्थ · Hindi

    जय जय अबिनासी सब घट बासी ब्यापक परमानंदा।

  1957. RCM 1.186.6Open verse →

    अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा।।

    अर्थ · Hindi

    अबिगत गोतीतं चरित पुनीतं मायारहित मुकुंदा।।

  1958. RCM 1.186.7Open verse →

    जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगतमोह मुनिबृंदा।

    अर्थ · Hindi

    जेहि लागि बिरागी अति अनुरागी बिगतमोह मुनिबृंदा।

  1959. RCM 1.186.8Open verse →

    निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा।।

    अर्थ · Hindi

    निसि बासर ध्यावहिं गुन गन गावहिं जयति सच्चिदानंदा।।

  1960. RCM 1.186.9Open verse →

    जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं सृष्टि उपाई त्रिबिध बनाई संग सहाय न दूजा।

  1961. RCM 1.186.10Open verse →

    सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा।।

    अर्थ · Hindi

    सो करउ अघारी चिंत हमारी जानिअ भगति न पूजा।।

  1962. RCM 1.186.11Open verse →

    जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा।

    अर्थ · Hindi

    जो भव भय भंजन मुनि मन रंजन गंजन बिपति बरूथा।

  1963. RCM 1.186.12Open verse →

    मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा।।

    अर्थ · Hindi

    मन बच क्रम बानी छाड़ि सयानी सरन सकल सुर जूथा।।

  1964. RCM 1.186.13Open verse →

    सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।

    अर्थ · Hindi

    सारद श्रुति सेषा रिषय असेषा जा कहुँ कोउ नहि जाना।

  1965. RCM 1.186.14Open verse →

    जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि दीन पिआरे बेद पुकारे द्रवउ सो श्रीभगवाना।।

  1966. RCM 1.186.15Open verse →

    भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा।

    अर्थ · Hindi

    भव बारिधि मंदर सब बिधि सुंदर गुनमंदिर सुखपुंजा।

  1967. RCM 1.186.16Open verse →

    मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि सिद्ध सकल सुर परम भयातुर नमत नाथ पद कंजा।।

  1968. RCM 1.187.1Open verse →

    जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा।।

    अर्थ · Hindi

    जनि डरपहु मुनि सिद्ध सुरेसा। तुम्हहि लागि धरिहउँ नर बेसा।।

  1969. RCM 1.187.2Open verse →

    अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा।।

    अर्थ · Hindi

    अंसन्ह सहित मनुज अवतारा। लेहउँ दिनकर बंस उदारा।।

  1970. RCM 1.187.3Open verse →

    कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा।।

  1971. RCM 1.187.4Open verse →

    ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नरभूपा।।

    अर्थ · Hindi

    ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नरभूपा।।

  1972. RCM 1.187.5Open verse →

    तिन्ह के गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह के गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई।।

  1973. RCM 1.187.6Open verse →

    नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ।।

    अर्थ · Hindi

    नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ।।

  1974. RCM 1.187.7Open verse →

    हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई।।

  1975. RCM 1.187.8Open verse →

    गगन ब्रह्मबानी सुनी काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना।।

    अर्थ · Hindi

    गगन ब्रह्मबानी सुनी काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना।।

  1976. RCM 1.187.9Open verse →

    तब ब्रह्मा धरनिहि समुझावा। अभय भई भरोस जियँ आवा।।

    अर्थ · Hindi

    तब ब्रह्मा धरनिहि समुझावा। अभय भई भरोस जियँ आवा।।

  1977. RCM 1.187.10Open verse →

    निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।

    अर्थ · Hindi

    निज लोकहि बिरंचि गे देवन्ह इहइ सिखाइ।

  1978. RCM 1.187.11Open verse →

    बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ।।187।।

    अर्थ · Hindi

    बानर तनु धरि धरि महि हरि पद सेवहु जाइ।।187।।

  1979. RCM 1.188.1Open verse →

    गए देव सब निज निज धामा। भूमि सहित मन कहुँ बिश्रामा ।

    अर्थ · Hindi

    गए देव सब निज निज धामा। भूमि सहित मन कहुँ बिश्रामा ।

  1980. RCM 1.188.2Open verse →

    जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। हरषे देव बिलंब न कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जो कछु आयसु ब्रह्माँ दीन्हा। हरषे देव बिलंब न कीन्हा।।

  1981. RCM 1.188.3Open verse →

    बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बनचर देह धरि छिति माहीं। अतुलित बल प्रताप तिन्ह पाहीं।।

  1982. RCM 1.188.4Open verse →

    गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    गिरि तरु नख आयुध सब बीरा। हरि मारग चितवहिं मतिधीरा।।

  1983. RCM 1.188.5Open verse →

    गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।।

    अर्थ · Hindi

    गिरि कानन जहँ तहँ भरि पूरी। रहे निज निज अनीक रचि रूरी।।

  1984. RCM 1.188.6Open verse →

    यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा।।

    अर्थ · Hindi

    यह सब रुचिर चरित मैं भाषा। अब सो सुनहु जो बीचहिं राखा।।

  1985. RCM 1.188.7Open verse →

    अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ।।

  1986. RCM 1.188.8Open verse →

    धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी।।

    अर्थ · Hindi

    धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी।।

  1987. RCM 1.188.9Open verse →

    कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्यादि नारि प्रिय सब आचरन पुनीत।

  1988. RCM 1.188.10Open verse →

    पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत।।188।।

    अर्थ · Hindi

    पति अनुकूल प्रेम दृढ़ हरि पद कमल बिनीत।।188।।

  1989. RCM 1.189.1Open verse →

    एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार भूपति मन माहीं। भै गलानि मोरें सुत नाहीं।।

  1990. RCM 1.189.2Open verse →

    गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला।।

  1991. RCM 1.189.3Open verse →

    निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।।

    अर्थ · Hindi

    निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहुबिधि समुझायउ।।

  1992. RCM 1.189.4Open verse →

    धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।।

    अर्थ · Hindi

    धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी।।

  1993. RCM 1.189.5Open verse →

    सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।

    अर्थ · Hindi

    सृंगी रिषहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा।।

  1994. RCM 1.189.6Open verse →

    भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें।।

    अर्थ · Hindi

    भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें।।

  1995. RCM 1.189.7Open verse →

    जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा। सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    जो बसिष्ठ कछु हृदयँ बिचारा। सकल काजु भा सिद्ध तुम्हारा।।

  1996. RCM 1.189.8Open verse →

    यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    यह हबि बाँटि देहु नृप जाई। जथा जोग जेहि भाग बनाई।।

  1997. RCM 1.189.9Open verse →

    तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।।

    अर्थ · Hindi

    तब अदृस्य भए पावक सकल सभहि समुझाइ।।

  1998. RCM 1.189.10Open verse →

    परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ।।189।।

    अर्थ · Hindi

    परमानंद मगन नृप हरष न हृदयँ समाइ।।189।।

  1999. RCM 1.190.1Open verse →

    तबहिं रायँ प्रिय नारि बोलाईं। कौसल्यादि तहाँ चलि आई।।

    अर्थ · Hindi

    तबहिं रायँ प्रिय नारि बोलाईं। कौसल्यादि तहाँ चलि आई।।

  2000. RCM 1.190.2Open verse →

    अर्ध भाग कौसल्याहि दीन्हा। उभय भाग आधे कर कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    अर्ध भाग कौसल्याहि दीन्हा। उभय भाग आधे कर कीन्हा।।

  2001. RCM 1.190.3Open verse →

    कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कैकेई कहँ नृप सो दयऊ। रह्यो सो उभय भाग पुनि भयऊ।।

  2002. RCM 1.190.4Open verse →

    कौसल्या कैकेई हाथ धरि। दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या कैकेई हाथ धरि। दीन्ह सुमित्रहि मन प्रसन्न करि।।

  2003. RCM 1.190.5Open verse →

    एहि बिधि गर्भसहित सब नारी। भईं हृदयँ हरषित सुख भारी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि गर्भसहित सब नारी। भईं हृदयँ हरषित सुख भारी।।

  2004. RCM 1.190.6Open verse →

    जा दिन तें हरि गर्भहिं आए। सकल लोक सुख संपति छाए।।

    अर्थ · Hindi

    जा दिन तें हरि गर्भहिं आए। सकल लोक सुख संपति छाए।।

  2005. RCM 1.190.7Open verse →

    मंदिर महँ सब राजहिं रानी। सोभा सील तेज की खानीं।।

    अर्थ · Hindi

    मंदिर महँ सब राजहिं रानी। सोभा सील तेज की खानीं।।

  2006. RCM 1.190.8Open verse →

    सुख जुत कछुक काल चलि गयऊ। जेहिं प्रभु प्रगट सो अवसर भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुख जुत कछुक काल चलि गयऊ। जेहिं प्रभु प्रगट सो अवसर भयऊ।।

  2007. RCM 1.190.9Open verse →

    जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।

    अर्थ · Hindi

    जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।

  2008. RCM 1.190.10Open verse →

    चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल।।190।।

    अर्थ · Hindi

    चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल।।190।।

  2009. RCM 1.191.1Open verse →

    नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।

    अर्थ · Hindi

    नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।।

  2010. RCM 1.191.2Open verse →

    मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा।।

  2011. RCM 1.191.3Open verse →

    सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ।।

  2012. RCM 1.191.4Open verse →

    बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा।।

    अर्थ · Hindi

    बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा।।

  2013. RCM 1.191.5Open verse →

    सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना।।

  2014. RCM 1.191.6Open verse →

    गगन बिमल सकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा।।

    अर्थ · Hindi

    गगन बिमल सकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा।।

  2015. RCM 1.191.7Open verse →

    बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।

    अर्थ · Hindi

    बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी।।

  2016. RCM 1.191.8Open verse →

    अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा।।

  2017. RCM 1.191.9Open verse →

    सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।

    अर्थ · Hindi

    सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।

  2018. RCM 1.191.10Open verse →

    जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम।।191।।

    अर्थ · Hindi

    जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम।।191।।

  2019. RCM 1.192.1Open verse →

    भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।

    अर्थ · Hindi

    भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।

  2020. RCM 1.192.2Open verse →

    हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।।

  2021. RCM 1.192.3Open verse →

    लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।

    अर्थ · Hindi

    लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।

  2022. RCM 1.192.4Open verse →

    भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी।।

    अर्थ · Hindi

    भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी।।

  2023. RCM 1.192.5Open verse →

    कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।

    अर्थ · Hindi

    कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।

  2024. RCM 1.192.6Open verse →

    माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।

    अर्थ · Hindi

    माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता।।

  2025. RCM 1.192.7Open verse →

    करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।

    अर्थ · Hindi

    करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।

  2026. RCM 1.192.8Open verse →

    सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।

    अर्थ · Hindi

    सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता।।

  2027. RCM 1.192.9Open verse →

    ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।

  2028. RCM 1.192.10Open verse →

    मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।

    अर्थ · Hindi

    मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै।।

  2029. RCM 1.192.11Open verse →

    उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।

    अर्थ · Hindi

    उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।

  2030. RCM 1.192.12Open verse →

    कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।

    अर्थ · Hindi

    कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै।।

  2031. RCM 1.192.13Open verse →

    माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।

    अर्थ · Hindi

    माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।

  2032. RCM 1.192.14Open verse →

    कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।।

  2033. RCM 1.192.15Open verse →

    सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।

  2034. RCM 1.192.16Open verse →

    यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।

    अर्थ · Hindi

    यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा।।

  2035. RCM 1.193.1Open verse →

    सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी। संभ्रम चलि आई सब रानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी। संभ्रम चलि आई सब रानी।।

  2036. RCM 1.193.2Open verse →

    हरषित जहँ तहँ धाईं दासी। आनँद मगन सकल पुरबासी।।

    अर्थ · Hindi

    हरषित जहँ तहँ धाईं दासी। आनँद मगन सकल पुरबासी।।

  2037. RCM 1.193.3Open verse →

    दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना।।

    अर्थ · Hindi

    दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना।।

  2038. RCM 1.193.4Open verse →

    परम प्रेम मन पुलक सरीरा। चाहत उठत करत मति धीरा।।

    अर्थ · Hindi

    परम प्रेम मन पुलक सरीरा। चाहत उठत करत मति धीरा।।

  2039. RCM 1.193.5Open verse →

    जाकर नाम सुनत सुभ होई। मोरें गृह आवा प्रभु सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जाकर नाम सुनत सुभ होई। मोरें गृह आवा प्रभु सोई।।

  2040. RCM 1.193.6Open verse →

    परमानंद पूरि मन राजा। कहा बोलाइ बजावहु बाजा।।

    अर्थ · Hindi

    परमानंद पूरि मन राजा। कहा बोलाइ बजावहु बाजा।।

  2041. RCM 1.193.7Open verse →

    गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा।।

    अर्थ · Hindi

    गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा।।

  2042. RCM 1.193.8Open verse →

    अनुपम बालक देखेन्हि जाई। रूप रासि गुन कहि न सिराई।।

    अर्थ · Hindi

    अनुपम बालक देखेन्हि जाई। रूप रासि गुन कहि न सिराई।।

  2043. RCM 1.193.9Open verse →

    नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    नंदीमुख सराध करि जातकरम सब कीन्ह।

  2044. RCM 1.193.10Open verse →

    हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहँ दीन्ह।।193।।

    अर्थ · Hindi

    हाटक धेनु बसन मनि नृप बिप्रन्ह कहँ दीन्ह।।193।।

  2045. RCM 1.194.1Open verse →

    ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    ध्वज पताक तोरन पुर छावा। कहि न जाइ जेहि भाँति बनावा।।

  2046. RCM 1.194.2Open verse →

    सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।।

    अर्थ · Hindi

    सुमनबृष्टि अकास तें होई। ब्रह्मानंद मगन सब लोई।।

  2047. RCM 1.194.3Open verse →

    बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।

    अर्थ · Hindi

    बृंद बृंद मिलि चलीं लोगाई। सहज संगार किएँ उठि धाई।।

  2048. RCM 1.194.4Open verse →

    कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।।

    अर्थ · Hindi

    कनक कलस मंगल धरि थारा। गावत पैठहिं भूप दुआरा।।

  2049. RCM 1.194.5Open verse →

    करि आरति नेवछावरि करहीं। बार बार सिसु चरनन्हि परहीं।।

    अर्थ · Hindi

    करि आरति नेवछावरि करहीं। बार बार सिसु चरनन्हि परहीं।।

  2050. RCM 1.194.6Open verse →

    मागध सूत बंदिगन गायक। पावन गुन गावहिं रघुनायक।।

    अर्थ · Hindi

    मागध सूत बंदिगन गायक। पावन गुन गावहिं रघुनायक।।

  2051. RCM 1.194.7Open verse →

    सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।

    अर्थ · Hindi

    सर्बस दान दीन्ह सब काहू। जेहिं पावा राखा नहिं ताहू।।

  2052. RCM 1.194.8Open verse →

    मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।

    अर्थ · Hindi

    मृगमद चंदन कुंकुम कीचा। मची सकल बीथिन्ह बिच बीचा।।

  2053. RCM 1.194.9Open verse →

    गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।

    अर्थ · Hindi

    गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद।

  2054. RCM 1.194.10Open verse →

    हरषवंत सब जहँ तहँ नगर नारि नर बृंद।।194।।

    अर्थ · Hindi

    हरषवंत सब जहँ तहँ नगर नारि नर बृंद।।194।।

  2055. RCM 1.195.1Open verse →

    कैकयसुता सुमित्रा दोऊ। सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कैकयसुता सुमित्रा दोऊ। सुंदर सुत जनमत भैं ओऊ।।

  2056. RCM 1.195.2Open verse →

    वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकइ सारद अहिराजा।।

    अर्थ · Hindi

    वह सुख संपति समय समाजा। कहि न सकइ सारद अहिराजा।।

  2057. RCM 1.195.3Open verse →

    अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।।

    अर्थ · Hindi

    अवधपुरी सोहइ एहि भाँती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती।।

  2058. RCM 1.195.4Open verse →

    देखि भानू जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि भानू जनु मन सकुचानी। तदपि बनी संध्या अनुमानी।।

  2059. RCM 1.195.5Open verse →

    अगर धूप बहु जनु अँधिआरी। उड़इ अभीर मनहुँ अरुनारी।।

    अर्थ · Hindi

    अगर धूप बहु जनु अँधिआरी। उड़इ अभीर मनहुँ अरुनारी।।

  2060. RCM 1.195.6Open verse →

    मंदिर मनि समूह जनु तारा। नृप गृह कलस सो इंदु उदारा।।

    अर्थ · Hindi

    मंदिर मनि समूह जनु तारा। नृप गृह कलस सो इंदु उदारा।।

  2061. RCM 1.195.7Open verse →

    भवन बेदधुनि अति मृदु बानी। जनु खग मूखर समयँ जनु सानी।।

    अर्थ · Hindi

    भवन बेदधुनि अति मृदु बानी। जनु खग मूखर समयँ जनु सानी।।

  2062. RCM 1.195.8Open verse →

    कौतुक देखि पतंग भुलाना। एक मास तेइँ जात न जाना।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक देखि पतंग भुलाना। एक मास तेइँ जात न जाना।।

  2063. RCM 1.195.9Open verse →

    मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ।

    अर्थ · Hindi

    मास दिवस कर दिवस भा मरम न जानइ कोइ।

  2064. RCM 1.195.10Open verse →

    रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होइ।।195।।

    अर्थ · Hindi

    रथ समेत रबि थाकेउ निसा कवन बिधि होइ।।195।।

  2065. RCM 1.196.1Open verse →

    यह रहस्य काहू नहिं जाना। दिन मनि चले करत गुनगाना।।

    अर्थ · Hindi

    यह रहस्य काहू नहिं जाना। दिन मनि चले करत गुनगाना।।

  2066. RCM 1.196.2Open verse →

    देखि महोत्सव सुर मुनि नागा। चले भवन बरनत निज भागा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि महोत्सव सुर मुनि नागा। चले भवन बरनत निज भागा।।

  2067. RCM 1.196.3Open verse →

    औरउ एक कहउँ निज चोरी। सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी।।

    अर्थ · Hindi

    औरउ एक कहउँ निज चोरी। सुनु गिरिजा अति दृढ़ मति तोरी।।

  2068. RCM 1.196.4Open verse →

    काक भुसुंडि संग हम दोऊ। मनुजरूप जानइ नहिं कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    काक भुसुंडि संग हम दोऊ। मनुजरूप जानइ नहिं कोऊ।।

  2069. RCM 1.196.5Open verse →

    परमानंद प्रेमसुख फूले। बीथिन्ह फिरहिं मगन मन भूले।।

    अर्थ · Hindi

    परमानंद प्रेमसुख फूले। बीथिन्ह फिरहिं मगन मन भूले।।

  2070. RCM 1.196.6Open verse →

    यह सुभ चरित जान पै सोई। कृपा राम कै जापर होई।।

    अर्थ · Hindi

    यह सुभ चरित जान पै सोई। कृपा राम कै जापर होई।।

  2071. RCM 1.196.7Open verse →

    तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा। दीन्ह भूप जो जेहि मन भावा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर जो जेहि बिधि आवा। दीन्ह भूप जो जेहि मन भावा।।

  2072. RCM 1.196.8Open verse →

    गज रथ तुरग हेम गो हीरा। दीन्हे नृप नानाबिधि चीरा।।

    अर्थ · Hindi

    गज रथ तुरग हेम गो हीरा। दीन्हे नृप नानाबिधि चीरा।।

  2073. RCM 1.196.9Open verse →

    मन संतोषे सबन्हि के जहँ तहँ देहि असीस।

    अर्थ · Hindi

    मन संतोषे सबन्हि के जहँ तहँ देहि असीस।

  2074. RCM 1.196.10Open verse →

    सकल तनय चिर जीवहुँ तुलसिदास के ईस।।196।।

    अर्थ · Hindi

    सकल तनय चिर जीवहुँ तुलसिदास के ईस।।196।।

  2075. RCM 1.197.1Open verse →

    कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।।

    अर्थ · Hindi

    कछुक दिवस बीते एहि भाँती। जात न जानिअ दिन अरु राती।।

  2076. RCM 1.197.2Open verse →

    नामकरन कर अवसरु जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    नामकरन कर अवसरु जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी।।

  2077. RCM 1.197.3Open verse →

    करि पूजा भूपति अस भाषा। धरिअ नाम जो मुनि गुनि राखा।।

    अर्थ · Hindi

    करि पूजा भूपति अस भाषा। धरिअ नाम जो मुनि गुनि राखा।।

  2078. RCM 1.197.4Open verse →

    इन्ह के नाम अनेक अनूपा। मैं नृप कहब स्वमति अनुरूपा।।

    अर्थ · Hindi

    इन्ह के नाम अनेक अनूपा। मैं नृप कहब स्वमति अनुरूपा।।

  2079. RCM 1.197.5Open verse →

    जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी।।

    अर्थ · Hindi

    जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी।।

  2080. RCM 1.197.6Open verse →

    सो सुख धाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुख धाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा।।

  2081. RCM 1.197.7Open verse →

    बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्व भरन पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत अस होई।।

  2082. RCM 1.197.8Open verse →

    जाके सुमिरन तें रिपु नासा। नाम सत्रुहन बेद प्रकासा।।

    अर्थ · Hindi

    जाके सुमिरन तें रिपु नासा। नाम सत्रुहन बेद प्रकासा।।

  2083. RCM 1.197.9Open verse →

    लच्छन धाम राम प्रिय सकल जगत आधार।

    अर्थ · Hindi

    लच्छन धाम राम प्रिय सकल जगत आधार।

  2084. RCM 1.197.10Open verse →

    गुरु बसिष्ट तेहि राखा लछिमन नाम उदार।।197।।

    अर्थ · Hindi

    गुरु बसिष्ट तेहि राखा लछिमन नाम उदार।।197।।

  2085. RCM 1.198.1Open verse →

    धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।।

    अर्थ · Hindi

    धरे नाम गुर हृदयँ बिचारी। बेद तत्व नृप तव सुत चारी।।

  2086. RCM 1.198.2Open verse →

    मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि तेहिं सुख माना।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि धन जन सरबस सिव प्राना। बाल केलि तेहिं सुख माना।।

  2087. RCM 1.198.3Open verse →

    बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।।

    अर्थ · Hindi

    बारेहि ते निज हित पति जानी। लछिमन राम चरन रति मानी।।

  2088. RCM 1.198.4Open verse →

    भरत सत्रुहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सत्रुहन दूनउ भाई। प्रभु सेवक जसि प्रीति बड़ाई।।

  2089. RCM 1.198.5Open verse →

    स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गौर सुंदर दोउ जोरी। निरखहिं छबि जननीं तृन तोरी।।

  2090. RCM 1.198.6Open verse →

    चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा।।

    अर्थ · Hindi

    चारिउ सील रूप गुन धामा। तदपि अधिक सुखसागर रामा।।

  2091. RCM 1.198.7Open verse →

    हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा। सूचत किरन मनोहर हासा।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ अनुग्रह इंदु प्रकासा। सूचत किरन मनोहर हासा।।

  2092. RCM 1.198.8Open verse →

    कबहुँ उछंग कबहुँ बर पलना। मातु दुलारइ कहि प्रिय ललना।।

    अर्थ · Hindi

    कबहुँ उछंग कबहुँ बर पलना। मातु दुलारइ कहि प्रिय ललना।।

  2093. RCM 1.198.9Open verse →

    ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद।

    अर्थ · Hindi

    ब्यापक ब्रह्म निरंजन निर्गुन बिगत बिनोद।

  2094. RCM 1.198.10Open verse →

    सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद।।198।।

    अर्थ · Hindi

    सो अज प्रेम भगति बस कौसल्या के गोद।।198।।

  2095. RCM 1.199.1Open verse →

    काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा।।

    अर्थ · Hindi

    काम कोटि छबि स्याम सरीरा। नील कंज बारिद गंभीरा।।

  2096. RCM 1.199.2Open verse →

    अरुन चरन पकंज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती।।

    अर्थ · Hindi

    अरुन चरन पकंज नख जोती। कमल दलन्हि बैठे जनु मोती।।

  2097. RCM 1.199.3Open verse →

    रेख कुलिस धवज अंकुर सोहे। नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे।।

    अर्थ · Hindi

    रेख कुलिस धवज अंकुर सोहे। नूपुर धुनि सुनि मुनि मन मोहे।।

  2098. RCM 1.199.4Open verse →

    कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा। नाभि गभीर जान जेहि देखा।।

    अर्थ · Hindi

    कटि किंकिनी उदर त्रय रेखा। नाभि गभीर जान जेहि देखा।।

  2099. RCM 1.199.5Open verse →

    भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।।

    अर्थ · Hindi

    भुज बिसाल भूषन जुत भूरी। हियँ हरि नख अति सोभा रूरी।।

  2100. RCM 1.199.6Open verse →

    उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा।।

    अर्थ · Hindi

    उर मनिहार पदिक की सोभा। बिप्र चरन देखत मन लोभा।।

  2101. RCM 1.199.7Open verse →

    कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई। आनन अमित मदन छबि छाई।।

    अर्थ · Hindi

    कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई। आनन अमित मदन छबि छाई।।

  2102. RCM 1.199.8Open verse →

    दुइ दुइ दसन अधर अरुनारे। नासा तिलक को बरनै पारे।।

    अर्थ · Hindi

    दुइ दुइ दसन अधर अरुनारे। नासा तिलक को बरनै पारे।।

  2103. RCM 1.199.9Open verse →

    सुंदर श्रवन सुचारु कपोला। अति प्रिय मधुर तोतरे बोला।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर श्रवन सुचारु कपोला। अति प्रिय मधुर तोतरे बोला।।

  2104. RCM 1.199.10Open verse →

    चिक्कन कच कुंचित गभुआरे। बहु प्रकार रचि मातु सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    चिक्कन कच कुंचित गभुआरे। बहु प्रकार रचि मातु सँवारे।।

  2105. RCM 1.199.11Open verse →

    पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।।

    अर्थ · Hindi

    पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई।।

  2106. RCM 1.199.12Open verse →

    रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा।।

    अर्थ · Hindi

    रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहि देखा।।

  2107. RCM 1.199.13Open verse →

    सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत।

    अर्थ · Hindi

    सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत।

  2108. RCM 1.199.14Open verse →

    दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत।।199।।

    अर्थ · Hindi

    दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत।।199।।

  2109. RCM 1.200.1Open verse →

    एहि बिधि राम जगत पितु माता। कोसलपुर बासिन्ह सुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि राम जगत पितु माता। कोसलपुर बासिन्ह सुखदाता।।

  2110. RCM 1.200.2Open verse →

    जिन्ह रघुनाथ चरन रति मानी। तिन्ह की यह गति प्रगट भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह रघुनाथ चरन रति मानी। तिन्ह की यह गति प्रगट भवानी।।

  2111. RCM 1.200.3Open verse →

    रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति बिमुख जतन कर कोरी। कवन सकइ भव बंधन छोरी।।

  2112. RCM 1.200.4Open verse →

    जीव चराचर बस कै राखे। सो माया प्रभु सों भय भाखे।।

    अर्थ · Hindi

    जीव चराचर बस कै राखे। सो माया प्रभु सों भय भाखे।।

  2113. RCM 1.200.5Open verse →

    भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।।

    अर्थ · Hindi

    भृकुटि बिलास नचावइ ताही। अस प्रभु छाड़ि भजिअ कहु काही।।

  2114. RCM 1.200.6Open verse →

    मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    मन क्रम बचन छाड़ि चतुराई। भजत कृपा करिहहिं रघुराई।।

  2115. RCM 1.200.7Open verse →

    एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सिसुबिनोद प्रभु कीन्हा। सकल नगरबासिन्ह सुख दीन्हा।।

  2116. RCM 1.200.8Open verse →

    लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालनें घालि झुलावै।।

    अर्थ · Hindi

    लै उछंग कबहुँक हलरावै। कबहुँ पालनें घालि झुलावै।।

  2117. RCM 1.200.9Open verse →

    प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम मगन कौसल्या निसि दिन जात न जान।

  2118. RCM 1.200.10Open verse →

    सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।200।।

    अर्थ · Hindi

    सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान।।200।।

  2119. RCM 1.201.1Open verse →

    एक बार जननीं अन्हवाए। करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार जननीं अन्हवाए। करि सिंगार पलनाँ पौढ़ाए।।

  2120. RCM 1.201.2Open verse →

    निज कुल इष्टदेव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना।।

    अर्थ · Hindi

    निज कुल इष्टदेव भगवाना। पूजा हेतु कीन्ह अस्नाना।।

  2121. RCM 1.201.3Open verse →

    करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    करि पूजा नैबेद्य चढ़ावा। आपु गई जहँ पाक बनावा।।

  2122. RCM 1.201.4Open verse →

    बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत देख सुत जाई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि मातु तहवाँ चलि आई। भोजन करत देख सुत जाई।।

  2123. RCM 1.201.5Open verse →

    गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।

    अर्थ · Hindi

    गै जननी सिसु पहिं भयभीता। देखा बाल तहाँ पुनि सूता।।

  2124. RCM 1.201.6Open verse →

    बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि आइ देखा सुत सोई। हृदयँ कंप मन धीर न होई।।

  2125. RCM 1.201.7Open verse →

    इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ उहाँ दुइ बालक देखा। मतिभ्रम मोर कि आन बिसेषा।।

  2126. RCM 1.201.8Open verse →

    देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम जननी अकुलानी। प्रभु हँसि दीन्ह मधुर मुसुकानी।।

  2127. RCM 1.201.9Open verse →

    देखरावा मातहि निज अदभुत रुप अखंड।

    अर्थ · Hindi

    देखरावा मातहि निज अदभुत रुप अखंड।

  2128. RCM 1.201.10Open verse →

    रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मंड।। 201।।

    अर्थ · Hindi

    रोम रोम प्रति लागे कोटि कोटि ब्रह्मंड।। 201।।

  2129. RCM 1.202.1Open verse →

    अगनित रबि ससि सिव चतुरानन। बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।।

    अर्थ · Hindi

    अगनित रबि ससि सिव चतुरानन। बहु गिरि सरित सिंधु महि कानन।।

  2130. RCM 1.202.2Open verse →

    काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ। सोउ देखा जो सुना न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    काल कर्म गुन ग्यान सुभाऊ। सोउ देखा जो सुना न काऊ।।

  2131. RCM 1.202.3Open verse →

    देखी माया सब बिधि गाढ़ी। अति सभीत जोरें कर ठाढ़ी।।

    अर्थ · Hindi

    देखी माया सब बिधि गाढ़ी। अति सभीत जोरें कर ठाढ़ी।।

  2132. RCM 1.202.4Open verse →

    देखा जीव नचावइ जाही। देखी भगति जो छोरइ ताही।।

    अर्थ · Hindi

    देखा जीव नचावइ जाही। देखी भगति जो छोरइ ताही।।

  2133. RCM 1.202.5Open verse →

    तन पुलकित मुख बचन न आवा। नयन मूदि चरननि सिरु नावा।।

    अर्थ · Hindi

    तन पुलकित मुख बचन न आवा। नयन मूदि चरननि सिरु नावा।।

  2134. RCM 1.202.6Open verse →

    बिसमयवंत देखि महतारी। भए बहुरि सिसुरूप खरारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिसमयवंत देखि महतारी। भए बहुरि सिसुरूप खरारी।।

  2135. RCM 1.202.7Open verse →

    अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।।

    अर्थ · Hindi

    अस्तुति करि न जाइ भय माना। जगत पिता मैं सुत करि जाना।।

  2136. RCM 1.202.8Open verse →

    हरि जननि बहुबिधि समुझाई। यह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।।

    अर्थ · Hindi

    हरि जननि बहुबिधि समुझाई। यह जनि कतहुँ कहसि सुनु माई।।

  2137. RCM 1.202.9Open verse →

    बार बार कौसल्या बिनय करइ कर जोरि।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार कौसल्या बिनय करइ कर जोरि।।

  2138. RCM 1.202.10Open verse →

    अब जनि कबहूँ ब्यापै प्रभु मोहि माया तोरि।। 202।।

    अर्थ · Hindi

    अब जनि कबहूँ ब्यापै प्रभु मोहि माया तोरि।। 202।।

  2139. RCM 1.203.1Open verse →

    बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    बालचरित हरि बहुबिधि कीन्हा। अति अनंद दासन्ह कहँ दीन्हा।।

  2140. RCM 1.203.2Open verse →

    कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    कछुक काल बीतें सब भाई। बड़े भए परिजन सुखदाई।।

  2141. RCM 1.203.3Open verse →

    चूड़ाकरन कीन्ह गुरु जाई। बिप्रन्ह पुनि दछिना बहु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    चूड़ाकरन कीन्ह गुरु जाई। बिप्रन्ह पुनि दछिना बहु पाई।।

  2142. RCM 1.203.4Open verse →

    परम मनोहर चरित अपारा। करत फिरत चारिउ सुकुमारा।।

    अर्थ · Hindi

    परम मनोहर चरित अपारा। करत फिरत चारिउ सुकुमारा।।

  2143. RCM 1.203.5Open verse →

    मन क्रम बचन अगोचर जोई। दसरथ अजिर बिचर प्रभु सोई।।

    अर्थ · Hindi

    मन क्रम बचन अगोचर जोई। दसरथ अजिर बिचर प्रभु सोई।।

  2144. RCM 1.203.6Open verse →

    भोजन करत बोल जब राजा। नहिं आवत तजि बाल समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    भोजन करत बोल जब राजा। नहिं आवत तजि बाल समाजा।।

  2145. RCM 1.203.7Open verse →

    कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या जब बोलन जाई। ठुमकु ठुमकु प्रभु चलहिं पराई।।

  2146. RCM 1.203.8Open verse →

    निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा।।

    अर्थ · Hindi

    निगम नेति सिव अंत न पावा। ताहि धरै जननी हठि धावा।।

  2147. RCM 1.203.9Open verse →

    धूरस धूरि भरें तनु आए। भूपति बिहसि गोद बैठाए।।

    अर्थ · Hindi

    धूरस धूरि भरें तनु आए। भूपति बिहसि गोद बैठाए।।

  2148. RCM 1.203.10Open verse →

    भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ।

    अर्थ · Hindi

    भोजन करत चपल चित इत उत अवसरु पाइ।

  2149. RCM 1.203.11Open verse →

    भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ।।203।।

    अर्थ · Hindi

    भाजि चले किलकत मुख दधि ओदन लपटाइ।।203।।

  2150. RCM 1.204.1Open verse →

    बालचरित अति सरल सुहाए। सारद सेष संभु श्रुति गाए।।

    अर्थ · Hindi

    बालचरित अति सरल सुहाए। सारद सेष संभु श्रुति गाए।।

  2151. RCM 1.204.2Open verse →

    जिन कर मन इन्ह सन नहिं राता। ते जन बंचित किए बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    जिन कर मन इन्ह सन नहिं राता। ते जन बंचित किए बिधाता।।

  2152. RCM 1.204.3Open verse →

    भए कुमार जबहिं सब भ्राता। दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता।।

    अर्थ · Hindi

    भए कुमार जबहिं सब भ्राता। दीन्ह जनेऊ गुरु पितु माता।।

  2153. RCM 1.204.4Open verse →

    गुरगृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल बिद्या सब आई।।

    अर्थ · Hindi

    गुरगृहँ गए पढ़न रघुराई। अलप काल बिद्या सब आई।।

  2154. RCM 1.204.5Open verse →

    जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी।।

    अर्थ · Hindi

    जाकी सहज स्वास श्रुति चारी। सो हरि पढ़ यह कौतुक भारी।।

  2155. RCM 1.204.6Open verse →

    बिद्या बिनय निपुन गुन सीला। खेलहिं खेल सकल नृपलीला।।

    अर्थ · Hindi

    बिद्या बिनय निपुन गुन सीला। खेलहिं खेल सकल नृपलीला।।

  2156. RCM 1.204.7Open verse →

    करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    करतल बान धनुष अति सोहा। देखत रूप चराचर मोहा।।

  2157. RCM 1.204.8Open verse →

    जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह बीथिन्ह बिहरहिं सब भाई। थकित होहिं सब लोग लुगाई।।

  2158. RCM 1.204.9Open verse →

    कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल।

    अर्थ · Hindi

    कोसलपुर बासी नर नारि बृद्ध अरु बाल।

  2159. RCM 1.204.10Open verse →

    प्रानहु ते प्रिय लागत सब कहुँ राम कृपाल।।204।।

    अर्थ · Hindi

    प्रानहु ते प्रिय लागत सब कहुँ राम कृपाल।।204।।

  2160. RCM 1.205.1Open verse →

    बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु सखा संग लेहिं बोलाई। बन मृगया नित खेलहिं जाई।।

  2161. RCM 1.205.2Open verse →

    पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।।

    अर्थ · Hindi

    पावन मृग मारहिं जियँ जानी। दिन प्रति नृपहि देखावहिं आनी।।

  2162. RCM 1.205.3Open verse →

    जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सुरलोक सिधारे।।

    अर्थ · Hindi

    जे मृग राम बान के मारे। ते तनु तजि सुरलोक सिधारे।।

  2163. RCM 1.205.4Open verse →

    अनुज सखा सँग भोजन करहीं। मातु पिता अग्या अनुसरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अनुज सखा सँग भोजन करहीं। मातु पिता अग्या अनुसरहीं।।

  2164. RCM 1.205.5Open verse →

    जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।।

  2165. RCM 1.205.6Open verse →

    बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई।।

    अर्थ · Hindi

    बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई।।

  2166. RCM 1.205.7Open verse →

    प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।

  2167. RCM 1.205.8Open verse →

    आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा।।

  2168. RCM 1.205.9Open verse →

    ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।

    अर्थ · Hindi

    ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप।

  2169. RCM 1.205.10Open verse →

    भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप।।205।।

    अर्थ · Hindi

    भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप।।205।।

  2170. RCM 1.206.1Open verse →

    यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई।।

    अर्थ · Hindi

    यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई।।

  2171. RCM 1.206.2Open verse →

    बिस्वामित्र महामुनि ग्यानी। बसहि बिपिन सुभ आश्रम जानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वामित्र महामुनि ग्यानी। बसहि बिपिन सुभ आश्रम जानी।।

  2172. RCM 1.206.3Open verse →

    जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।।

  2173. RCM 1.206.4Open verse →

    देखत जग्य निसाचर धावहि। करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    देखत जग्य निसाचर धावहि। करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं।।

  2174. RCM 1.206.5Open verse →

    गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।।

    अर्थ · Hindi

    गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।।

  2175. RCM 1.206.6Open verse →

    तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा।।

    अर्थ · Hindi

    तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा।।

  2176. RCM 1.206.7Open verse →

    एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।।

  2177. RCM 1.206.8Open verse →

    ग्यान बिराग सकल गुन अयना। सो प्रभु मै देखब भरि नयना।।

    अर्थ · Hindi

    ग्यान बिराग सकल गुन अयना। सो प्रभु मै देखब भरि नयना।।

  2178. RCM 1.206.9Open verse →

    बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि करत मनोरथ जात लागि नहिं बार।

  2179. RCM 1.206.10Open verse →

    करि मज्जन सरऊ जल गए भूप दरबार।।206।।

    अर्थ · Hindi

    करि मज्जन सरऊ जल गए भूप दरबार।।206।।

  2180. RCM 1.207.1Open verse →

    मुनि आगमन सुना जब राजा। मिलन गयऊ लै बिप्र समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि आगमन सुना जब राजा। मिलन गयऊ लै बिप्र समाजा।।

  2181. RCM 1.207.2Open verse →

    करि दंडवत मुनिहि सनमानी। निज आसन बैठारेन्हि आनी।।

    अर्थ · Hindi

    करि दंडवत मुनिहि सनमानी। निज आसन बैठारेन्हि आनी।।

  2182. RCM 1.207.3Open verse →

    चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।।

    अर्थ · Hindi

    चरन पखारि कीन्हि अति पूजा। मो सम आजु धन्य नहिं दूजा।।

  2183. RCM 1.207.4Open verse →

    बिबिध भाँति भोजन करवावा। मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध भाँति भोजन करवावा। मुनिवर हृदयँ हरष अति पावा।।

  2184. RCM 1.207.5Open verse →

    पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि चरननि मेले सुत चारी। राम देखि मुनि देह बिसारी।।

  2185. RCM 1.207.6Open verse →

    भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा।।

    अर्थ · Hindi

    भए मगन देखत मुख सोभा। जनु चकोर पूरन ससि लोभा।।

  2186. RCM 1.207.7Open verse →

    तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तब मन हरषि बचन कह राऊ। मुनि अस कृपा न कीन्हिहु काऊ।।

  2187. RCM 1.207.8Open verse →

    केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा।।

    अर्थ · Hindi

    केहि कारन आगमन तुम्हारा। कहहु सो करत न लावउँ बारा।।

  2188. RCM 1.207.9Open verse →

    असुर समूह सतावहिं मोही। मै जाचन आयउँ नृप तोही।।

    अर्थ · Hindi

    असुर समूह सतावहिं मोही। मै जाचन आयउँ नृप तोही।।

  2189. RCM 1.207.10Open verse →

    अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    अनुज समेत देहु रघुनाथा। निसिचर बध मैं होब सनाथा।।

  2190. RCM 1.207.11Open verse →

    देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान।

    अर्थ · Hindi

    देहु भूप मन हरषित तजहु मोह अग्यान।

  2191. RCM 1.207.12Open verse →

    धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान।।207।।

    अर्थ · Hindi

    धर्म सुजस प्रभु तुम्ह कौं इन्ह कहँ अति कल्यान।।207।।

  2192. RCM 1.208.1Open verse →

    सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि राजा अति अप्रिय बानी। हृदय कंप मुख दुति कुमुलानी।।

  2193. RCM 1.208.2Open verse →

    चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    चौथेंपन पायउँ सुत चारी। बिप्र बचन नहिं कहेहु बिचारी।।

  2194. RCM 1.208.3Open verse →

    मागहु भूमि धेनु धन कोसा। सर्बस देउँ आजु सहरोसा।।

    अर्थ · Hindi

    मागहु भूमि धेनु धन कोसा। सर्बस देउँ आजु सहरोसा।।

  2195. RCM 1.208.4Open verse →

    देह प्रान तें प्रिय कछु नाही। सोउ मुनि देउँ निमिष एक माही।।

    अर्थ · Hindi

    देह प्रान तें प्रिय कछु नाही। सोउ मुनि देउँ निमिष एक माही।।

  2196. RCM 1.208.5Open verse →

    सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाई।।

    अर्थ · Hindi

    सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाईं। राम देत नहिं बनइ गोसाई।।

  2197. RCM 1.208.6Open verse →

    कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ निसिचर अति घोर कठोरा। कहँ सुंदर सुत परम किसोरा।।

  2198. RCM 1.208.7Open verse →

    सुनि नृप गिरा प्रेम रस सानी। हृदयँ हरष माना मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि नृप गिरा प्रेम रस सानी। हृदयँ हरष माना मुनि ग्यानी।।

  2199. RCM 1.208.8Open verse →

    तब बसिष्ट बहु निधि समुझावा। नृप संदेह नास कहँ पावा।।

    अर्थ · Hindi

    तब बसिष्ट बहु निधि समुझावा। नृप संदेह नास कहँ पावा।।

  2200. RCM 1.208.9Open verse →

    अति आदर दोउ तनय बोलाए। हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए।।

    अर्थ · Hindi

    अति आदर दोउ तनय बोलाए। हृदयँ लाइ बहु भाँति सिखाए।।

  2201. RCM 1.208.10Open verse →

    मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मेरे प्रान नाथ सुत दोऊ। तुम्ह मुनि पिता आन नहिं कोऊ।।

  2202. RCM 1.208.11Open verse →

    सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस।

    अर्थ · Hindi

    सौंपे भूप रिषिहि सुत बहु बिधि देइ असीस।

  2203. RCM 1.208.12Open verse →

    जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।।208(क)।।

    अर्थ · Hindi

    जननी भवन गए प्रभु चले नाइ पद सीस।।208(क)।।

  2204. RCM 1.208.13Open verse →

    पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन।।

    अर्थ · Hindi

    पुरुषसिंह दोउ बीर हरषि चले मुनि भय हरन।।

  2205. RCM 1.208.14Open verse →

    कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन।।208(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु मतिधीर अखिल बिस्व कारन करन।।208(ख)।।

  2206. RCM 1.209.1Open verse →

    अरुन नयन उर बाहु बिसाला। नील जलज तनु स्याम तमाला।।

    अर्थ · Hindi

    अरुन नयन उर बाहु बिसाला। नील जलज तनु स्याम तमाला।।

  2207. RCM 1.209.2Open verse →

    कटि पट पीत कसें बर भाथा। रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कटि पट पीत कसें बर भाथा। रुचिर चाप सायक दुहुँ हाथा।।

  2208. RCM 1.209.3Open verse →

    स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्बामित्र महानिधि पाई।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गौर सुंदर दोउ भाई। बिस्बामित्र महानिधि पाई।।

  2209. RCM 1.209.4Open verse →

    प्रभु ब्रह्मन्यदेव मै जाना। मोहि निति पिता तजेहु भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु ब्रह्मन्यदेव मै जाना। मोहि निति पिता तजेहु भगवाना।।

  2210. RCM 1.209.5Open verse →

    चले जात मुनि दीन्हि दिखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले जात मुनि दीन्हि दिखाई। सुनि ताड़का क्रोध करि धाई।।

  2211. RCM 1.209.6Open verse →

    एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा।।

  2212. RCM 1.209.7Open verse →

    तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। बिद्यानिधि कहुँ बिद्या दीन्ही।।

  2213. RCM 1.209.8Open verse →

    जाते लाग न छुधा पिपासा। अतुलित बल तनु तेज प्रकासा।।

    अर्थ · Hindi

    जाते लाग न छुधा पिपासा। अतुलित बल तनु तेज प्रकासा।।

  2214. RCM 1.209.9Open verse →

    आयुष सब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि।

    अर्थ · Hindi

    आयुष सब समर्पि कै प्रभु निज आश्रम आनि।

  2215. RCM 1.209.10Open verse →

    कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि।।209।।

    अर्थ · Hindi

    कंद मूल फल भोजन दीन्ह भगति हित जानि।।209।।

  2216. RCM 1.210.1Open verse →

    प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई।।

  2217. RCM 1.210.2Open verse →

    होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी।।

    अर्थ · Hindi

    होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी।।

  2218. RCM 1.210.3Open verse →

    सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मारीच निसाचर क्रोही। लै सहाय धावा मुनिद्रोही।।

  2219. RCM 1.210.4Open verse →

    बिनु फर बान राम तेहि मारा। सत जोजन गा सागर पारा।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु फर बान राम तेहि मारा। सत जोजन गा सागर पारा।।

  2220. RCM 1.210.5Open verse →

    पावक सर सुबाहु पुनि मारा। अनुज निसाचर कटकु सँघारा।।

    अर्थ · Hindi

    पावक सर सुबाहु पुनि मारा। अनुज निसाचर कटकु सँघारा।।

  2221. RCM 1.210.6Open verse →

    मारि असुर द्विज निर्मयकारी। अस्तुति करहिं देव मुनि झारी।।

    अर्थ · Hindi

    मारि असुर द्विज निर्मयकारी। अस्तुति करहिं देव मुनि झारी।।

  2222. RCM 1.210.7Open verse →

    तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया।।

  2223. RCM 1.210.8Open verse →

    भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना।।

    अर्थ · Hindi

    भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना।।

  2224. RCM 1.210.9Open verse →

    तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई।।

  2225. RCM 1.210.10Open verse →

    धनुषजग्य मुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा।।

    अर्थ · Hindi

    धनुषजग्य मुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा।।

  2226. RCM 1.210.11Open verse →

    आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं।।

  2227. RCM 1.210.12Open verse →

    पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी।।

  2228. RCM 1.210.13Open verse →

    गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।

    अर्थ · Hindi

    गौतम नारि श्राप बस उपल देह धरि धीर।

  2229. RCM 1.210.14Open verse →

    चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर।।210।।

    अर्थ · Hindi

    चरन कमल रज चाहति कृपा करहु रघुबीर।।210।।

  2230. RCM 1.211.1Open verse →

    परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।

    अर्थ · Hindi

    परसत पद पावन सोक नसावन प्रगट भई तपपुंज सही।

  2231. RCM 1.211.2Open verse →

    देखत रघुनायक जन सुख दायक सनमुख होइ कर जोरि रही।।

    अर्थ · Hindi

    देखत रघुनायक जन सुख दायक सनमुख होइ कर जोरि रही।।

  2232. RCM 1.211.3Open verse →

    अति प्रेम अधीरा पुलक सरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।

    अर्थ · Hindi

    अति प्रेम अधीरा पुलक सरीरा मुख नहिं आवइ बचन कही।

  2233. RCM 1.211.4Open verse →

    अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही।।

    अर्थ · Hindi

    अतिसय बड़भागी चरनन्हि लागी जुगल नयन जलधार बही।।

  2234. RCM 1.211.5Open verse →

    धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।

    अर्थ · Hindi

    धीरजु मन कीन्हा प्रभु कहुँ चीन्हा रघुपति कृपाँ भगति पाई।

  2235. RCM 1.211.6Open verse →

    अति निर्मल बानीं अस्तुति ठानी ग्यानगम्य जय रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    अति निर्मल बानीं अस्तुति ठानी ग्यानगम्य जय रघुराई।।

  2236. RCM 1.211.7Open verse →

    मै नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जन सुखदाई।

    अर्थ · Hindi

    मै नारि अपावन प्रभु जग पावन रावन रिपु जन सुखदाई।

  2237. RCM 1.211.8Open verse →

    राजीव बिलोचन भव भय मोचन पाहि पाहि सरनहिं आई।।

    अर्थ · Hindi

    राजीव बिलोचन भव भय मोचन पाहि पाहि सरनहिं आई।।

  2238. RCM 1.211.9Open verse →

    मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।

    अर्थ · Hindi

    मुनि श्राप जो दीन्हा अति भल कीन्हा परम अनुग्रह मैं माना।

  2239. RCM 1.211.10Open verse →

    देखेउँ भरि लोचन हरि भवमोचन इहइ लाभ संकर जाना।।

    अर्थ · Hindi

    देखेउँ भरि लोचन हरि भवमोचन इहइ लाभ संकर जाना।।

  2240. RCM 1.211.11Open verse →

    बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ न मागउँ बर आना।

    अर्थ · Hindi

    बिनती प्रभु मोरी मैं मति भोरी नाथ न मागउँ बर आना।

  2241. RCM 1.211.12Open verse →

    पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना।।

    अर्थ · Hindi

    पद कमल परागा रस अनुरागा मम मन मधुप करै पाना।।

  2242. RCM 1.211.13Open verse →

    जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं पद सुरसरिता परम पुनीता प्रगट भई सिव सीस धरी।

  2243. RCM 1.211.14Open verse →

    सोइ पद पंकज जेहि पूजत अज मम सिर धरेउ कृपाल हरी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ पद पंकज जेहि पूजत अज मम सिर धरेउ कृपाल हरी।।

  2244. RCM 1.211.15Open verse →

    एहि भाँति सिधारी गौतम नारी बार बार हरि चरन परी।

    अर्थ · Hindi

    एहि भाँति सिधारी गौतम नारी बार बार हरि चरन परी।

  2245. RCM 1.211.16Open verse →

    जो अति मन भावा सो बरु पावा गै पतिलोक अनंद भरी।।

    अर्थ · Hindi

    जो अति मन भावा सो बरु पावा गै पतिलोक अनंद भरी।।

  2246. RCM 1.212.1Open verse →

    चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा।।

    अर्थ · Hindi

    चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा।।

  2247. RCM 1.212.2Open verse →

    गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई।।

    अर्थ · Hindi

    गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई।।

  2248. RCM 1.212.3Open verse →

    तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।।

    अर्थ · Hindi

    तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।।

  2249. RCM 1.212.4Open verse →

    हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया।।

  2250. RCM 1.212.5Open verse →

    पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी।।

  2251. RCM 1.212.6Open verse →

    बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना।।

    अर्थ · Hindi

    बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना।।

  2252. RCM 1.212.7Open verse →

    गुंजत मंजु मत्त रस भृंगा। कूजत कल बहुबरन बिहंगा।।

    अर्थ · Hindi

    गुंजत मंजु मत्त रस भृंगा। कूजत कल बहुबरन बिहंगा।।

  2253. RCM 1.212.8Open verse →

    बरन बरन बिकसे बन जाता। त्रिबिध समीर सदा सुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    बरन बरन बिकसे बन जाता। त्रिबिध समीर सदा सुखदाता।।

  2254. RCM 1.212.9Open verse →

    सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।

    अर्थ · Hindi

    सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।

  2255. RCM 1.212.10Open verse →

    फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास।।212।।

    अर्थ · Hindi

    फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास।।212।।

  2256. RCM 1.213.1Open verse →

    बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।।

    अर्थ · Hindi

    बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई।।

  2257. RCM 1.213.2Open verse →

    चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी।।

    अर्थ · Hindi

    चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी।।

  2258. RCM 1.213.3Open verse →

    धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठ सकल बस्तु लै नाना।।

    अर्थ · Hindi

    धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठ सकल बस्तु लै नाना।।

  2259. RCM 1.213.4Open verse →

    चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई।।

    अर्थ · Hindi

    चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई।।

  2260. RCM 1.213.5Open verse →

    मंगलमय मंदिर सब केरें। चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें।।

    अर्थ · Hindi

    मंगलमय मंदिर सब केरें। चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें।।

  2261. RCM 1.213.6Open verse →

    पुर नर नारि सुभग सुचि संता। धरमसील ग्यानी गुनवंता।।

    अर्थ · Hindi

    पुर नर नारि सुभग सुचि संता। धरमसील ग्यानी गुनवंता।।

  2262. RCM 1.213.7Open verse →

    अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।।

    अर्थ · Hindi

    अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू।।

  2263. RCM 1.213.8Open verse →

    होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी।।

    अर्थ · Hindi

    होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी।।

  2264. RCM 1.213.9Open verse →

    धवल धाम मनि पुरट पट सुघटित नाना भाँति।

    अर्थ · Hindi

    धवल धाम मनि पुरट पट सुघटित नाना भाँति।

  2265. RCM 1.213.10Open verse →

    सिय निवास सुंदर सदन सोभा किमि कहि जाति।।213।।

    अर्थ · Hindi

    सिय निवास सुंदर सदन सोभा किमि कहि जाति।।213।।

  2266. RCM 1.214.1Open verse →

    सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।

    अर्थ · Hindi

    सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा।।

  2267. RCM 1.214.2Open verse →

    बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला।।

    अर्थ · Hindi

    बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रथ संकुल सब काला।।

  2268. RCM 1.214.3Open verse →

    सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे।।

    अर्थ · Hindi

    सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे।।

  2269. RCM 1.214.4Open verse →

    पुर बाहेर सर सारित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा।।

    अर्थ · Hindi

    पुर बाहेर सर सारित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा।।

  2270. RCM 1.214.5Open verse →

    देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।।

  2271. RCM 1.214.6Open verse →

    कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना।।

  2272. RCM 1.214.7Open verse →

    भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता। उतरे तहँ मुनिबृंद समेता।।

    अर्थ · Hindi

    भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता। उतरे तहँ मुनिबृंद समेता।।

  2273. RCM 1.214.8Open verse →

    बिस्वामित्र महामुनि आए। समाचार मिथिलापति पाए।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वामित्र महामुनि आए। समाचार मिथिलापति पाए।।

  2274. RCM 1.214.9Open verse →

    संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति।

    अर्थ · Hindi

    संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति।

  2275. RCM 1.214.10Open verse →

    चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति।।214।।

    अर्थ · Hindi

    चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति।।214।।

  2276. RCM 1.215.1Open verse →

    कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा।।

  2277. RCM 1.215.2Open verse →

    बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे।।

  2278. RCM 1.215.3Open verse →

    कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।।

    अर्थ · Hindi

    कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा।।

  2279. RCM 1.215.4Open verse →

    तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई।।

  2280. RCM 1.215.5Open verse →

    स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा।।

  2281. RCM 1.215.6Open verse →

    उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए।।

    अर्थ · Hindi

    उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए।।

  2282. RCM 1.215.7Open verse →

    भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता। बारि बिलोचन पुलकित गाता।।

    अर्थ · Hindi

    भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता। बारि बिलोचन पुलकित गाता।।

  2283. RCM 1.215.8Open verse →

    मूरति मधुर मनोहर देखी। भयउ बिदेहु बिदेहु बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    मूरति मधुर मनोहर देखी। भयउ बिदेहु बिदेहु बिसेषी।।

  2284. RCM 1.215.9Open verse →

    प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर।

  2285. RCM 1.215.10Open verse →

    बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर।।215।।

    अर्थ · Hindi

    बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर।।215।।

  2286. RCM 1.216.1Open verse →

    कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक।।

  2287. RCM 1.216.2Open verse →

    ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा।।

  2288. RCM 1.216.3Open verse →

    सहज बिरागरुप मनु मोरा। थकित होत जिमि चंद चकोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सहज बिरागरुप मनु मोरा। थकित होत जिमि चंद चकोरा।।

  2289. RCM 1.216.4Open verse →

    ताते प्रभु पूछउँ सतिभाऊ। कहहु नाथ जनि करहु दुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    ताते प्रभु पूछउँ सतिभाऊ। कहहु नाथ जनि करहु दुराऊ।।

  2290. RCM 1.216.5Open verse →

    इन्हहि बिलोकत अति अनुरागा। बरबस ब्रह्मसुखहि मन त्यागा।।

    अर्थ · Hindi

    इन्हहि बिलोकत अति अनुरागा। बरबस ब्रह्मसुखहि मन त्यागा।।

  2291. RCM 1.216.6Open verse →

    कह मुनि बिहसि कहेहु नृप नीका। बचन तुम्हार न होइ अलीका।।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनि बिहसि कहेहु नृप नीका। बचन तुम्हार न होइ अलीका।।

  2292. RCM 1.216.7Open verse →

    ए प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी। मन मुसुकाहिं रामु सुनि बानी।।

    अर्थ · Hindi

    ए प्रिय सबहि जहाँ लगि प्रानी। मन मुसुकाहिं रामु सुनि बानी।।

  2293. RCM 1.216.8Open verse →

    रघुकुल मनि दसरथ के जाए। मम हित लागि नरेस पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    रघुकुल मनि दसरथ के जाए। मम हित लागि नरेस पठाए।।

  2294. RCM 1.216.9Open verse →

    रामु लखनु दोउ बंधुबर रूप सील बल धाम।

    अर्थ · Hindi

    रामु लखनु दोउ बंधुबर रूप सील बल धाम।

  2295. RCM 1.216.10Open verse →

    मख राखेउ सबु साखि जगु जिते असुर संग्राम।।216।।

    अर्थ · Hindi

    मख राखेउ सबु साखि जगु जिते असुर संग्राम।।216।।

  2296. RCM 1.217.1Open verse →

    मुनि तव चरन देखि कह राऊ। कहि न सकउँ निज पुन्य प्राभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि तव चरन देखि कह राऊ। कहि न सकउँ निज पुन्य प्राभाऊ।।

  2297. RCM 1.217.2Open verse →

    सुंदर स्याम गौर दोउ भ्राता। आनँदहू के आनँद दाता।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर स्याम गौर दोउ भ्राता। आनँदहू के आनँद दाता।।

  2298. RCM 1.217.3Open verse →

    इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि।।

    अर्थ · Hindi

    इन्ह कै प्रीति परसपर पावनि। कहि न जाइ मन भाव सुहावनि।।

  2299. RCM 1.217.4Open verse →

    सुनहु नाथ कह मुदित बिदेहू। ब्रह्म जीव इव सहज सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु नाथ कह मुदित बिदेहू। ब्रह्म जीव इव सहज सनेहू।।

  2300. RCM 1.217.5Open verse →

    पुनि पुनि प्रभुहि चितव नरनाहू। पुलक गात उर अधिक उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि प्रभुहि चितव नरनाहू। पुलक गात उर अधिक उछाहू।।

  2301. RCM 1.217.6Open verse →

    म्रुनिहि प्रसंसि नाइ पद सीसू। चलेउ लवाइ नगर अवनीसू।।

    अर्थ · Hindi

    म्रुनिहि प्रसंसि नाइ पद सीसू। चलेउ लवाइ नगर अवनीसू।।

  2302. RCM 1.217.7Open verse →

    सुंदर सदनु सुखद सब काला। तहाँ बासु लै दीन्ह भुआला।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर सदनु सुखद सब काला। तहाँ बासु लै दीन्ह भुआला।।

  2303. RCM 1.217.8Open verse →

    करि पूजा सब बिधि सेवकाई। गयउ राउ गृह बिदा कराई।।

    अर्थ · Hindi

    करि पूजा सब बिधि सेवकाई। गयउ राउ गृह बिदा कराई।।

  2304. RCM 1.217.9Open verse →

    रिषय संग रघुबंस मनि करि भोजनु बिश्रामु।

    अर्थ · Hindi

    रिषय संग रघुबंस मनि करि भोजनु बिश्रामु।

  2305. RCM 1.217.10Open verse →

    बैठे प्रभु भ्राता सहित दिवसु रहा भरि जामु।।217।।

    अर्थ · Hindi

    बैठे प्रभु भ्राता सहित दिवसु रहा भरि जामु।।217।।

  2306. RCM 1.218.1Open verse →

    लखन हृदयँ लालसा बिसेषी। जाइ जनकपुर आइअ देखी।।

    अर्थ · Hindi

    लखन हृदयँ लालसा बिसेषी। जाइ जनकपुर आइअ देखी।।

  2307. RCM 1.218.2Open verse →

    प्रभु भय बहुरि मुनिहि सकुचाहीं। प्रगट न कहहिं मनहिं मुसुकाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु भय बहुरि मुनिहि सकुचाहीं। प्रगट न कहहिं मनहिं मुसुकाहीं।।

  2308. RCM 1.218.3Open verse →

    राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हिंयँ हुलसानी।।

    अर्थ · Hindi

    राम अनुज मन की गति जानी। भगत बछलता हिंयँ हुलसानी।।

  2309. RCM 1.218.4Open verse →

    परम बिनीत सकुचि मुसुकाई। बोले गुर अनुसासन पाई।।

    अर्थ · Hindi

    परम बिनीत सकुचि मुसुकाई। बोले गुर अनुसासन पाई।।

  2310. RCM 1.218.5Open verse →

    नाथ लखनु पुरु देखन चहहीं। प्रभु सकोच डर प्रगट न कहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ लखनु पुरु देखन चहहीं। प्रभु सकोच डर प्रगट न कहहीं।।

  2311. RCM 1.218.6Open verse →

    जौं राउर आयसु मैं पावौं। नगर देखाइ तुरत लै आवौ।।

    अर्थ · Hindi

    जौं राउर आयसु मैं पावौं। नगर देखाइ तुरत लै आवौ।।

  2312. RCM 1.218.7Open verse →

    सुनि मुनीसु कह बचन सप्रीती। कस न राम तुम्ह राखहु नीती।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनीसु कह बचन सप्रीती। कस न राम तुम्ह राखहु नीती।।

  2313. RCM 1.218.8Open verse →

    धरम सेतु पालक तुम्ह ताता। प्रेम बिबस सेवक सुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    धरम सेतु पालक तुम्ह ताता। प्रेम बिबस सेवक सुखदाता।।

  2314. RCM 1.218.9Open verse →

    जाइ देखी आवहु नगरु सुख निधान दोउ भाइ।

    अर्थ · Hindi

    जाइ देखी आवहु नगरु सुख निधान दोउ भाइ।

  2315. RCM 1.218.10Open verse →

    करहु सुफल सब के नयन सुंदर बदन देखाइ।।218।।

    अर्थ · Hindi

    करहु सुफल सब के नयन सुंदर बदन देखाइ।।218।।

  2316. RCM 1.219.1Open verse →

    मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता। चले लोक लोचन सुख दाता।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि पद कमल बंदि दोउ भ्राता। चले लोक लोचन सुख दाता।।

  2317. RCM 1.219.2Open verse →

    बालक बृंदि देखि अति सोभा। लगे संग लोचन मनु लोभा।।

    अर्थ · Hindi

    बालक बृंदि देखि अति सोभा। लगे संग लोचन मनु लोभा।।

  2318. RCM 1.219.3Open verse →

    पीत बसन परिकर कटि भाथा। चारु चाप सर सोहत हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    पीत बसन परिकर कटि भाथा। चारु चाप सर सोहत हाथा।।

  2319. RCM 1.219.4Open verse →

    तन अनुहरत सुचंदन खोरी। स्यामल गौर मनोहर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    तन अनुहरत सुचंदन खोरी। स्यामल गौर मनोहर जोरी।।

  2320. RCM 1.219.5Open verse →

    केहरि कंधर बाहु बिसाला। उर अति रुचिर नागमनि माला।।

    अर्थ · Hindi

    केहरि कंधर बाहु बिसाला। उर अति रुचिर नागमनि माला।।

  2321. RCM 1.219.6Open verse →

    सुभग सोन सरसीरुह लोचन। बदन मयंक तापत्रय मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    सुभग सोन सरसीरुह लोचन। बदन मयंक तापत्रय मोचन।।

  2322. RCM 1.219.7Open verse →

    कानन्हि कनक फूल छबि देहीं। चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कानन्हि कनक फूल छबि देहीं। चितवत चितहि चोरि जनु लेहीं।।

  2323. RCM 1.219.8Open verse →

    चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी। तिलक रेखा सोभा जनु चाँकी।।

    अर्थ · Hindi

    चितवनि चारु भृकुटि बर बाँकी। तिलक रेखा सोभा जनु चाँकी।।

  2324. RCM 1.219.9Open verse →

    रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।

    अर्थ · Hindi

    रुचिर चौतनीं सुभग सिर मेचक कुंचित केस।

  2325. RCM 1.219.10Open verse →

    नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस।।219।।

    अर्थ · Hindi

    नख सिख सुंदर बंधु दोउ सोभा सकल सुदेस।।219।।

  2326. RCM 1.220.1Open verse →

    देखन नगरु भूपसुत आए। समाचार पुरबासिन्ह पाए।।

    अर्थ · Hindi

    देखन नगरु भूपसुत आए। समाचार पुरबासिन्ह पाए।।

  2327. RCM 1.220.2Open verse →

    धाए धाम काम सब त्यागी। मनहु रंक निधि लूटन लागी।।

    अर्थ · Hindi

    धाए धाम काम सब त्यागी। मनहु रंक निधि लूटन लागी।।

  2328. RCM 1.220.3Open verse →

    निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि सहज सुंदर दोउ भाई। होहिं सुखी लोचन फल पाई।।

  2329. RCM 1.220.4Open verse →

    जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीं। निरखहिं राम रूप अनुरागीं।।

    अर्थ · Hindi

    जुबतीं भवन झरोखन्हि लागीं। निरखहिं राम रूप अनुरागीं।।

  2330. RCM 1.220.5Open verse →

    कहहिं परसपर बचन सप्रीती। सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं परसपर बचन सप्रीती। सखि इन्ह कोटि काम छबि जीती।।

  2331. RCM 1.220.6Open verse →

    सुर नर असुर नाग मुनि माहीं। सोभा असि कहुँ सुनिअति नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुर नर असुर नाग मुनि माहीं। सोभा असि कहुँ सुनिअति नाहीं।।

  2332. RCM 1.220.7Open verse →

    बिष्नु चारि भुज बिघि मुख चारी। बिकट बेष मुख पंच पुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिष्नु चारि भुज बिघि मुख चारी। बिकट बेष मुख पंच पुरारी।।

  2333. RCM 1.220.8Open verse →

    अपर देउ अस कोउ न आही। यह छबि सखि पटतरिअ जाही।।

    अर्थ · Hindi

    अपर देउ अस कोउ न आही। यह छबि सखि पटतरिअ जाही।।

  2334. RCM 1.220.9Open verse →

    बय किसोर सुषमा सदन स्याम गौर सुख घाम।

    अर्थ · Hindi

    बय किसोर सुषमा सदन स्याम गौर सुख घाम।

  2335. RCM 1.220.10Open verse →

    अंग अंग पर वारिअहिं कोटि कोटि सत काम।।220।।

    अर्थ · Hindi

    अंग अंग पर वारिअहिं कोटि कोटि सत काम।।220।।

  2336. RCM 1.221.1Open verse →

    कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु सखी अस को तनुधारी। जो न मोह यह रूप निहारी।।

  2337. RCM 1.221.2Open verse →

    कोउ सप्रेम बोली मृदु बानी। जो मैं सुना सो सुनहु सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ सप्रेम बोली मृदु बानी। जो मैं सुना सो सुनहु सयानी।।

  2338. RCM 1.221.3Open verse →

    ए दोऊ दसरथ के ढोटा। बाल मरालन्हि के कल जोटा।।

    अर्थ · Hindi

    ए दोऊ दसरथ के ढोटा। बाल मरालन्हि के कल जोटा।।

  2339. RCM 1.221.4Open verse →

    मुनि कौसिक मख के रखवारे। जिन्ह रन अजिर निसाचर मारे।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि कौसिक मख के रखवारे। जिन्ह रन अजिर निसाचर मारे।।

  2340. RCM 1.221.5Open verse →

    स्याम गात कल कंज बिलोचन। जो मारीच सुभुज मदु मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गात कल कंज बिलोचन। जो मारीच सुभुज मदु मोचन।।

  2341. RCM 1.221.6Open verse →

    कौसल्या सुत सो सुख खानी। नामु रामु धनु सायक पानी।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या सुत सो सुख खानी। नामु रामु धनु सायक पानी।।

  2342. RCM 1.221.7Open verse →

    गौर किसोर बेषु बर काछें। कर सर चाप राम के पाछें।।

    अर्थ · Hindi

    गौर किसोर बेषु बर काछें। कर सर चाप राम के पाछें।।

  2343. RCM 1.221.8Open verse →

    लछिमनु नामु राम लघु भ्राता। सुनु सखि तासु सुमित्रा माता।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमनु नामु राम लघु भ्राता। सुनु सखि तासु सुमित्रा माता।।

  2344. RCM 1.221.9Open verse →

    बिप्रकाजु करि बंधु दोउ मग मुनिबधू उधारि।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रकाजु करि बंधु दोउ मग मुनिबधू उधारि।

  2345. RCM 1.221.10Open verse →

    आए देखन चापमख सुनि हरषीं सब नारि।।221।।

    अर्थ · Hindi

    आए देखन चापमख सुनि हरषीं सब नारि।।221।।

  2346. RCM 1.222.1Open verse →

    देखि राम छबि कोउ एक कहई। जोगु जानकिहि यह बरु अहई।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम छबि कोउ एक कहई। जोगु जानकिहि यह बरु अहई।।

  2347. RCM 1.222.2Open verse →

    जौ सखि इन्हहि देख नरनाहू। पन परिहरि हठि करइ बिबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौ सखि इन्हहि देख नरनाहू। पन परिहरि हठि करइ बिबाहू।।

  2348. RCM 1.222.3Open verse →

    कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह ए भूपति पहिचाने। मुनि समेत सादर सनमाने।।

  2349. RCM 1.222.4Open verse →

    सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।।

    अर्थ · Hindi

    सखि परंतु पनु राउ न तजई। बिधि बस हठि अबिबेकहि भजई।।

  2350. RCM 1.222.5Open verse →

    कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह जौं भल अहइ बिधाता। सब कहँ सुनिअ उचित फलदाता।।

  2351. RCM 1.222.6Open verse →

    तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    तौ जानकिहि मिलिहि बरु एहू। नाहिन आलि इहाँ संदेहू।।

  2352. RCM 1.222.7Open verse →

    जौ बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू।।

    अर्थ · Hindi

    जौ बिधि बस अस बनै सँजोगू। तौ कृतकृत्य होइ सब लोगू।।

  2353. RCM 1.222.8Open verse →

    सखि हमरें आरति अति तातें। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें।।

    अर्थ · Hindi

    सखि हमरें आरति अति तातें। कबहुँक ए आवहिं एहि नातें।।

  2354. RCM 1.222.9Open verse →

    नाहिं त हम कहुँ सुनहु सखि इन्ह कर दरसनु दूरि।

    अर्थ · Hindi

    नाहिं त हम कहुँ सुनहु सखि इन्ह कर दरसनु दूरि।

  2355. RCM 1.222.10Open verse →

    यह संघटु तब होइ जब पुन्य पुराकृत भूरि।।222।।

    अर्थ · Hindi

    यह संघटु तब होइ जब पुन्य पुराकृत भूरि।।222।।

  2356. RCM 1.223.1Open verse →

    बोली अपर कहेहु सखि नीका। एहिं बिआह अति हित सबहीं का।।

    अर्थ · Hindi

    बोली अपर कहेहु सखि नीका। एहिं बिआह अति हित सबहीं का।।

  2357. RCM 1.223.2Open verse →

    कोउ कह संकर चाप कठोरा। ए स्यामल मृदुगात किसोरा।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह संकर चाप कठोरा। ए स्यामल मृदुगात किसोरा।।

  2358. RCM 1.223.3Open verse →

    सबु असमंजस अहइ सयानी। यह सुनि अपर कहइ मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    सबु असमंजस अहइ सयानी। यह सुनि अपर कहइ मृदु बानी।।

  2359. RCM 1.223.4Open verse →

    सखि इन्ह कहँ कोउ कोउ अस कहहीं। बड़ प्रभाउ देखत लघु अहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सखि इन्ह कहँ कोउ कोउ अस कहहीं। बड़ प्रभाउ देखत लघु अहहीं।।

  2360. RCM 1.223.5Open verse →

    परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।।

    अर्थ · Hindi

    परसि जासु पद पंकज धूरी। तरी अहल्या कृत अघ भूरी।।

  2361. RCM 1.223.6Open verse →

    सो कि रहिहि बिनु सिवधनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    सो कि रहिहि बिनु सिवधनु तोरें। यह प्रतीति परिहरिअ न भोरें।।

  2362. RCM 1.223.7Open verse →

    जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बिरंचि रचि सीय सँवारी। तेहिं स्यामल बरु रचेउ बिचारी।।

  2363. RCM 1.223.8Open verse →

    तासु बचन सुनि सब हरषानीं। ऐसेइ होउ कहहिं मुदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    तासु बचन सुनि सब हरषानीं। ऐसेइ होउ कहहिं मुदु बानी।।

  2364. RCM 1.223.9Open verse →

    हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद।

    अर्थ · Hindi

    हियँ हरषहिं बरषहिं सुमन सुमुखि सुलोचनि बृंद।

  2365. RCM 1.223.10Open verse →

    जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद।।223।।

    अर्थ · Hindi

    जाहिं जहाँ जहँ बंधु दोउ तहँ तहँ परमानंद।।223।।

  2366. RCM 1.224.1Open verse →

    पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुर पूरब दिसि गे दोउ भाई। जहँ धनुमख हित भूमि बनाई।।

  2367. RCM 1.224.2Open verse →

    अति बिस्तार चारु गच ढारी। बिमल बेदिका रुचिर सँवारी।।

    अर्थ · Hindi

    अति बिस्तार चारु गच ढारी। बिमल बेदिका रुचिर सँवारी।।

  2368. RCM 1.224.3Open verse →

    चहुँ दिसि कंचन मंच बिसाला। रचे जहाँ बेठहिं महिपाला।।

    अर्थ · Hindi

    चहुँ दिसि कंचन मंच बिसाला। रचे जहाँ बेठहिं महिपाला।।

  2369. RCM 1.224.4Open verse →

    तेहि पाछें समीप चहुँ पासा। अपर मंच मंडली बिलासा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि पाछें समीप चहुँ पासा। अपर मंच मंडली बिलासा।।

  2370. RCM 1.224.5Open verse →

    कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई। बैठहिं नगर लोग जहँ जाई।।

    अर्थ · Hindi

    कछुक ऊँचि सब भाँति सुहाई। बैठहिं नगर लोग जहँ जाई।।

  2371. RCM 1.224.6Open verse →

    तिन्ह के निकट बिसाल सुहाए। धवल धाम बहुबरन बनाए।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह के निकट बिसाल सुहाए। धवल धाम बहुबरन बनाए।।

  2372. RCM 1.224.7Open verse →

    जहँ बैंठैं देखहिं सब नारी। जथा जोगु निज कुल अनुहारी।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ बैंठैं देखहिं सब नारी। जथा जोगु निज कुल अनुहारी।।

  2373. RCM 1.224.8Open verse →

    पुर बालक कहि कहि मृदु बचना। सादर प्रभुहि देखावहिं रचना।।

    अर्थ · Hindi

    पुर बालक कहि कहि मृदु बचना। सादर प्रभुहि देखावहिं रचना।।

  2374. RCM 1.224.9Open verse →

    सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।

    अर्थ · Hindi

    सब सिसु एहि मिस प्रेमबस परसि मनोहर गात।

  2375. RCM 1.224.10Open verse →

    तन पुलकहिं अति हरषु हियँ देखि देखि दोउ भ्रात।।224।।

    अर्थ · Hindi

    तन पुलकहिं अति हरषु हियँ देखि देखि दोउ भ्रात।।224।।

  2376. RCM 1.225.1Open verse →

    सिसु सब राम प्रेमबस जाने। प्रीति समेत निकेत बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    सिसु सब राम प्रेमबस जाने। प्रीति समेत निकेत बखाने।।

  2377. RCM 1.225.2Open verse →

    निज निज रुचि सब लेंहिं बोलाई। सहित सनेह जाहिं दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    निज निज रुचि सब लेंहिं बोलाई। सहित सनेह जाहिं दोउ भाई।।

  2378. RCM 1.225.3Open verse →

    राम देखावहिं अनुजहि रचना। कहि मृदु मधुर मनोहर बचना।।

    अर्थ · Hindi

    राम देखावहिं अनुजहि रचना। कहि मृदु मधुर मनोहर बचना।।

  2379. RCM 1.225.4Open verse →

    लव निमेष महँ भुवन निकाया। रचइ जासु अनुसासन माया।।

    अर्थ · Hindi

    लव निमेष महँ भुवन निकाया। रचइ जासु अनुसासन माया।।

  2380. RCM 1.225.5Open verse →

    भगति हेतु सोइ दीनदयाला। चितवत चकित धनुष मखसाला।।

    अर्थ · Hindi

    भगति हेतु सोइ दीनदयाला। चितवत चकित धनुष मखसाला।।

  2381. RCM 1.225.6Open verse →

    कौतुक देखि चले गुरु पाहीं। जानि बिलंबु त्रास मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक देखि चले गुरु पाहीं। जानि बिलंबु त्रास मन माहीं।।

  2382. RCM 1.225.7Open verse →

    जासु त्रास डर कहुँ डर होई। भजन प्रभाउ देखावत सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जासु त्रास डर कहुँ डर होई। भजन प्रभाउ देखावत सोई।।

  2383. RCM 1.225.8Open verse →

    कहि बातें मृदु मधुर सुहाईं। किए बिदा बालक बरिआई।।

    अर्थ · Hindi

    कहि बातें मृदु मधुर सुहाईं। किए बिदा बालक बरिआई।।

  2384. RCM 1.225.9Open verse →

    सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ।

    अर्थ · Hindi

    सभय सप्रेम बिनीत अति सकुच सहित दोउ भाइ।

  2385. RCM 1.225.10Open verse →

    गुर पद पंकज नाइ सिर बैठे आयसु पाइ।।225।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पद पंकज नाइ सिर बैठे आयसु पाइ।।225।।

  2386. RCM 1.226.1Open verse →

    निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    निसि प्रबेस मुनि आयसु दीन्हा। सबहीं संध्याबंदनु कीन्हा।।

  2387. RCM 1.226.2Open verse →

    कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहत कथा इतिहास पुरानी। रुचिर रजनि जुग जाम सिरानी।।

  2388. RCM 1.226.3Open verse →

    मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई।।

  2389. RCM 1.226.4Open verse →

    जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी।।

  2390. RCM 1.226.5Open verse →

    तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।

    अर्थ · Hindi

    तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते।।

  2391. RCM 1.226.6Open verse →

    बारबार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    बारबार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही।।

  2392. RCM 1.226.7Open verse →

    चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    चापत चरन लखनु उर लाएँ। सभय सप्रेम परम सचु पाएँ।।

  2393. RCM 1.226.8Open verse →

    पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता। पौढ़े धरि उर पद जलजाता।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि प्रभु कह सोवहु ताता। पौढ़े धरि उर पद जलजाता।।

  2394. RCM 1.226.9Open verse →

    उठे लखन निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।।

    अर्थ · Hindi

    उठे लखन निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।।

  2395. RCM 1.226.10Open verse →

    गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान।।226।।

    अर्थ · Hindi

    गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान।।226।।

  2396. RCM 1.227.1Open verse →

    सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सौच करि जाइ नहाए। नित्य निबाहि मुनिहि सिर नाए।।

  2397. RCM 1.227.2Open verse →

    समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    समय जानि गुर आयसु पाई। लेन प्रसून चले दोउ भाई।।

  2398. RCM 1.227.3Open verse →

    भूप बागु बर देखेउ जाई। जहँ बसंत रितु रही लोभाई।।

    अर्थ · Hindi

    भूप बागु बर देखेउ जाई। जहँ बसंत रितु रही लोभाई।।

  2399. RCM 1.227.4Open verse →

    लागे बिटप मनोहर नाना। बरन बरन बर बेलि बिताना।।

    अर्थ · Hindi

    लागे बिटप मनोहर नाना। बरन बरन बर बेलि बिताना।।

  2400. RCM 1.227.5Open verse →

    नव पल्लव फल सुमान सुहाए। निज संपति सुर रूख लजाए।।

    अर्थ · Hindi

    नव पल्लव फल सुमान सुहाए। निज संपति सुर रूख लजाए।।

  2401. RCM 1.227.6Open verse →

    चातक कोकिल कीर चकोरा। कूजत बिहग नटत कल मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    चातक कोकिल कीर चकोरा। कूजत बिहग नटत कल मोरा।।

  2402. RCM 1.227.7Open verse →

    मध्य बाग सरु सोह सुहावा। मनि सोपान बिचित्र बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    मध्य बाग सरु सोह सुहावा। मनि सोपान बिचित्र बनावा।।

  2403. RCM 1.227.8Open verse →

    बिमल सलिलु सरसिज बहुरंगा। जलखग कूजत गुंजत भृंगा।।

    अर्थ · Hindi

    बिमल सलिलु सरसिज बहुरंगा। जलखग कूजत गुंजत भृंगा।।

  2404. RCM 1.227.9Open verse →

    बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत।

    अर्थ · Hindi

    बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत।

  2405. RCM 1.227.10Open verse →

    परम रम्य आरामु यहु जो रामहि सुख देत।।227।।

    अर्थ · Hindi

    परम रम्य आरामु यहु जो रामहि सुख देत।।227।।

  2406. RCM 1.228.1Open verse →

    चहुँ दिसि चितइ पूँछि मालिगन। लगे लेन दल फूल मुदित मन।।

    अर्थ · Hindi

    चहुँ दिसि चितइ पूँछि मालिगन। लगे लेन दल फूल मुदित मन।।

  2407. RCM 1.228.2Open verse →

    तेहि अवसर सीता तहँ आई। गिरिजा पूजन जननि पठाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर सीता तहँ आई। गिरिजा पूजन जननि पठाई।।

  2408. RCM 1.228.3Open verse →

    संग सखीं सब सुभग सयानी। गावहिं गीत मनोहर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    संग सखीं सब सुभग सयानी। गावहिं गीत मनोहर बानी।।

  2409. RCM 1.228.4Open verse →

    सर समीप गिरिजा गृह सोहा। बरनि न जाइ देखि मनु मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    सर समीप गिरिजा गृह सोहा। बरनि न जाइ देखि मनु मोहा।।

  2410. RCM 1.228.5Open verse →

    मज्जनु करि सर सखिन्ह समेता। गई मुदित मन गौरि निकेता।।

    अर्थ · Hindi

    मज्जनु करि सर सखिन्ह समेता। गई मुदित मन गौरि निकेता।।

  2411. RCM 1.228.6Open verse →

    पूजा कीन्हि अधिक अनुरागा। निज अनुरूप सुभग बरु मागा।।

    अर्थ · Hindi

    पूजा कीन्हि अधिक अनुरागा। निज अनुरूप सुभग बरु मागा।।

  2412. RCM 1.228.7Open verse →

    एक सखी सिय संगु बिहाई। गई रही देखन फुलवाई।।

    अर्थ · Hindi

    एक सखी सिय संगु बिहाई। गई रही देखन फुलवाई।।

  2413. RCM 1.228.8Open verse →

    तेहि दोउ बंधु बिलोके जाई। प्रेम बिबस सीता पहिं आई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि दोउ बंधु बिलोके जाई। प्रेम बिबस सीता पहिं आई।।

  2414. RCM 1.228.9Open verse →

    तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।

    अर्थ · Hindi

    तासु दसा देखि सखिन्ह पुलक गात जलु नैन।

  2415. RCM 1.228.10Open verse →

    कहु कारनु निज हरष कर पूछहि सब मृदु बैन।।228।।

    अर्थ · Hindi

    कहु कारनु निज हरष कर पूछहि सब मृदु बैन।।228।।

  2416. RCM 1.229.1Open verse →

    देखन बागु कुअँर दुइ आए। बय किसोर सब भाँति सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    देखन बागु कुअँर दुइ आए। बय किसोर सब भाँति सुहाए।।

  2417. RCM 1.229.2Open verse →

    स्याम गौर किमि कहौं बखानी। गिरा अनयन नयन बिनु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गौर किमि कहौं बखानी। गिरा अनयन नयन बिनु बानी।।

  2418. RCM 1.229.3Open verse →

    सुनि हरषीं सब सखीं सयानी। सिय हियँ अति उतकंठा जानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि हरषीं सब सखीं सयानी। सिय हियँ अति उतकंठा जानी।।

  2419. RCM 1.229.4Open verse →

    एक कहइ नृपसुत तेइ आली। सुने जे मुनि सँग आए काली।।

    अर्थ · Hindi

    एक कहइ नृपसुत तेइ आली। सुने जे मुनि सँग आए काली।।

  2420. RCM 1.229.5Open verse →

    जिन्ह निज रूप मोहनी डारी। कीन्ह स्वबस नगर नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह निज रूप मोहनी डारी। कीन्ह स्वबस नगर नर नारी।।

  2421. RCM 1.229.6Open verse →

    बरनत छबि जहँ तहँ सब लोगू। अवसि देखिअहिं देखन जोगू।।

    अर्थ · Hindi

    बरनत छबि जहँ तहँ सब लोगू। अवसि देखिअहिं देखन जोगू।।

  2422. RCM 1.229.7Open verse →

    तासु वचन अति सियहि सुहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने।।

    अर्थ · Hindi

    तासु वचन अति सियहि सुहाने। दरस लागि लोचन अकुलाने।।

  2423. RCM 1.229.8Open verse →

    चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    चली अग्र करि प्रिय सखि सोई। प्रीति पुरातन लखइ न कोई।।

  2424. RCM 1.229.9Open verse →

    सुमिरि सीय नारद बचन उपजी प्रीति पुनीत।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि सीय नारद बचन उपजी प्रीति पुनीत।।

  2425. RCM 1.229.10Open verse →

    चकित बिलोकति सकल दिसि जनु सिसु मृगी सभीत।।229।।

    अर्थ · Hindi

    चकित बिलोकति सकल दिसि जनु सिसु मृगी सभीत।।229।।

  2426. RCM 1.230.1Open verse →

    कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि।।

    अर्थ · Hindi

    कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि। कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि।।

  2427. RCM 1.230.2Open verse →

    मानहुँ मदन दुंदुभी दीन्ही।।मनसा बिस्व बिजय कहँ कीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    मानहुँ मदन दुंदुभी दीन्ही।।मनसा बिस्व बिजय कहँ कीन्ही।।

  2428. RCM 1.230.3Open verse →

    अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि फिरि चितए तेहि ओरा। सिय मुख ससि भए नयन चकोरा।।

  2429. RCM 1.230.4Open verse →

    भए बिलोचन चारु अचंचल। मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल।।

    अर्थ · Hindi

    भए बिलोचन चारु अचंचल। मनहुँ सकुचि निमि तजे दिगंचल।।

  2430. RCM 1.230.5Open verse →

    देखि सीय सोभा सुखु पावा। हृदयँ सराहत बचनु न आवा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सीय सोभा सुखु पावा। हृदयँ सराहत बचनु न आवा।।

  2431. RCM 1.230.6Open verse →

    जनु बिरंचि सब निज निपुनाई। बिरचि बिस्व कहँ प्रगटि देखाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनु बिरंचि सब निज निपुनाई। बिरचि बिस्व कहँ प्रगटि देखाई।।

  2432. RCM 1.230.7Open verse →

    सुंदरता कहुँ सुंदर करई। छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदरता कहुँ सुंदर करई। छबिगृहँ दीपसिखा जनु बरई।।

  2433. RCM 1.230.8Open verse →

    सब उपमा कबि रहे जुठारी। केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    सब उपमा कबि रहे जुठारी। केहिं पटतरौं बिदेहकुमारी।।

  2434. RCM 1.230.9Open verse →

    सिय सोभा हियँ बरनि प्रभु आपनि दसा बिचारि।

    अर्थ · Hindi

    सिय सोभा हियँ बरनि प्रभु आपनि दसा बिचारि।

  2435. RCM 1.230.10Open verse →

    बोले सुचि मन अनुज सन बचन समय अनुहारि।।230।।

    अर्थ · Hindi

    बोले सुचि मन अनुज सन बचन समय अनुहारि।।230।।

  2436. RCM 1.231.1Open verse →

    तात जनकतनया यह सोई। धनुषजग्य जेहि कारन होई।।

    अर्थ · Hindi

    तात जनकतनया यह सोई। धनुषजग्य जेहि कारन होई।।

  2437. RCM 1.231.2Open verse →

    पूजन गौरि सखीं लै आई। करत प्रकासु फिरइ फुलवाई।।

    अर्थ · Hindi

    पूजन गौरि सखीं लै आई। करत प्रकासु फिरइ फुलवाई।।

  2438. RCM 1.231.3Open verse →

    जासु बिलोकि अलोकिक सोभा। सहज पुनीत मोर मनु छोभा।।

    अर्थ · Hindi

    जासु बिलोकि अलोकिक सोभा। सहज पुनीत मोर मनु छोभा।।

  2439. RCM 1.231.4Open verse →

    सो सबु कारन जान बिधाता। फरकहिं सुभद अंग सुनु भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    सो सबु कारन जान बिधाता। फरकहिं सुभद अंग सुनु भ्राता।।

  2440. RCM 1.231.5Open verse →

    रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    रघुबंसिन्ह कर सहज सुभाऊ। मनु कुपंथ पगु धरइ न काऊ।।

  2441. RCM 1.231.6Open verse →

    मोहि अतिसय प्रतीति मन केरी। जेहिं सपनेहुँ परनारि न हेरी।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि अतिसय प्रतीति मन केरी। जेहिं सपनेहुँ परनारि न हेरी।।

  2442. RCM 1.231.7Open verse →

    जिन्ह कै लहहिं न रिपु रन पीठी। नहिं पावहिं परतिय मनु डीठी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह कै लहहिं न रिपु रन पीठी। नहिं पावहिं परतिय मनु डीठी।।

  2443. RCM 1.231.8Open verse →

    मंगन लहहि न जिन्ह कै नाहीं। ते नरबर थोरे जग माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मंगन लहहि न जिन्ह कै नाहीं। ते नरबर थोरे जग माहीं।।

  2444. RCM 1.231.9Open verse →

    करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान।

    अर्थ · Hindi

    करत बतकहि अनुज सन मन सिय रूप लोभान।

  2445. RCM 1.231.10Open verse →

    मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान।।231।।

    अर्थ · Hindi

    मुख सरोज मकरंद छबि करइ मधुप इव पान।।231।।

  2446. RCM 1.232.1Open verse →

    चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।।

    अर्थ · Hindi

    चितवहि चकित चहूँ दिसि सीता। कहँ गए नृपकिसोर मनु चिंता।।

  2447. RCM 1.232.2Open verse →

    जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ बिलोक मृग सावक नैनी। जनु तहँ बरिस कमल सित श्रेनी।।

  2448. RCM 1.232.3Open verse →

    लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए।।

  2449. RCM 1.232.4Open verse →

    देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने।।

    अर्थ · Hindi

    देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने।।

  2450. RCM 1.232.5Open verse →

    थके नयन रघुपति छबि देखें। पलकन्हिहूँ परिहरीं निमेषें।।

    अर्थ · Hindi

    थके नयन रघुपति छबि देखें। पलकन्हिहूँ परिहरीं निमेषें।।

  2451. RCM 1.232.6Open verse →

    अधिक सनेहँ देह भै भोरी। सरद ससिहि जनु चितव चकोरी।।

    अर्थ · Hindi

    अधिक सनेहँ देह भै भोरी। सरद ससिहि जनु चितव चकोरी।।

  2452. RCM 1.232.7Open verse →

    लोचन मग रामहि उर आनी। दीन्हे पलक कपाट सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    लोचन मग रामहि उर आनी। दीन्हे पलक कपाट सयानी।।

  2453. RCM 1.232.8Open verse →

    जब सिय सखिन्ह प्रेमबस जानी। कहि न सकहिं कछु मन सकुचानी।।

    अर्थ · Hindi

    जब सिय सखिन्ह प्रेमबस जानी। कहि न सकहिं कछु मन सकुचानी।।

  2454. RCM 1.232.9Open verse →

    लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ।

    अर्थ · Hindi

    लताभवन तें प्रगट भे तेहि अवसर दोउ भाइ।

  2455. RCM 1.232.10Open verse →

    निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ।।232।।

    अर्थ · Hindi

    निकसे जनु जुग बिमल बिधु जलद पटल बिलगाइ।।232।।

  2456. RCM 1.233.1Open verse →

    सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा।।

  2457. RCM 1.233.2Open verse →

    मोरपंख सिर सोहत नीके। गुच्छ बीच बिच कुसुम कली के।।

    अर्थ · Hindi

    मोरपंख सिर सोहत नीके। गुच्छ बीच बिच कुसुम कली के।।

  2458. RCM 1.233.3Open verse →

    भाल तिलक श्रमबिंदु सुहाए। श्रवन सुभग भूषन छबि छाए।।

    अर्थ · Hindi

    भाल तिलक श्रमबिंदु सुहाए। श्रवन सुभग भूषन छबि छाए।।

  2459. RCM 1.233.4Open verse →

    बिकट भृकुटि कच घूघरवारे। नव सरोज लोचन रतनारे।।

    अर्थ · Hindi

    बिकट भृकुटि कच घूघरवारे। नव सरोज लोचन रतनारे।।

  2460. RCM 1.233.5Open verse →

    चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला।।

    अर्थ · Hindi

    चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला।।

  2461. RCM 1.233.6Open verse →

    मुखछबि कहि न जाइ मोहि पाहीं। जो बिलोकि बहु काम लजाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मुखछबि कहि न जाइ मोहि पाहीं। जो बिलोकि बहु काम लजाहीं।।

  2462. RCM 1.233.7Open verse →

    उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा।।

    अर्थ · Hindi

    उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा।।

  2463. RCM 1.233.8Open verse →

    सुमन समेत बाम कर दोना। सावँर कुअँर सखी सुठि लोना।।

    अर्थ · Hindi

    सुमन समेत बाम कर दोना। सावँर कुअँर सखी सुठि लोना।।

  2464. RCM 1.233.9Open verse →

    केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान।

    अर्थ · Hindi

    केहरि कटि पट पीत धर सुषमा सील निधान।

  2465. RCM 1.233.10Open verse →

    देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।233।।

    अर्थ · Hindi

    देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।।233।।

  2466. RCM 1.234.1Open verse →

    धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी।।

    अर्थ · Hindi

    धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी।।

  2467. RCM 1.234.2Open verse →

    बहुरि गौरि कर ध्यान करेहू। भूपकिसोर देखि किन लेहू।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि गौरि कर ध्यान करेहू। भूपकिसोर देखि किन लेहू।।

  2468. RCM 1.234.3Open verse →

    सकुचि सीयँ तब नयन उघारे। सनमुख दोउ रघुसिंघ निहारे।।

    अर्थ · Hindi

    सकुचि सीयँ तब नयन उघारे। सनमुख दोउ रघुसिंघ निहारे।।

  2469. RCM 1.234.4Open verse →

    नख सिख देखि राम कै सोभा। सुमिरि पिता पनु मनु अति छोभा।।

    अर्थ · Hindi

    नख सिख देखि राम कै सोभा। सुमिरि पिता पनु मनु अति छोभा।।

  2470. RCM 1.234.5Open verse →

    परबस सखिन्ह लखी जब सीता। भयउ गहरु सब कहहि सभीता।।

    अर्थ · Hindi

    परबस सखिन्ह लखी जब सीता। भयउ गहरु सब कहहि सभीता।।

  2471. RCM 1.234.6Open verse →

    पुनि आउब एहि बेरिआँ काली। अस कहि मन बिहसी एक आली।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि आउब एहि बेरिआँ काली। अस कहि मन बिहसी एक आली।।

  2472. RCM 1.234.7Open verse →

    गूढ़ गिरा सुनि सिय सकुचानी। भयउ बिलंबु मातु भय मानी।।

    अर्थ · Hindi

    गूढ़ गिरा सुनि सिय सकुचानी। भयउ बिलंबु मातु भय मानी।।

  2473. RCM 1.234.8Open verse →

    धरि बड़ि धीर रामु उर आने। फिरि अपनपउ पितुबस जाने।।

    अर्थ · Hindi

    धरि बड़ि धीर रामु उर आने। फिरि अपनपउ पितुबस जाने।।

  2474. RCM 1.234.9Open verse →

    देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।

    अर्थ · Hindi

    देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।

  2475. RCM 1.234.10Open verse →

    निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि।। 234।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि।। 234।।

  2476. RCM 1.235.1Open verse →

    जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।।

    अर्थ · Hindi

    जानि कठिन सिवचाप बिसूरति। चली राखि उर स्यामल मूरति।।

  2477. RCM 1.235.2Open verse →

    प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु जब जात जानकी जानी। सुख सनेह सोभा गुन खानी।।

  2478. RCM 1.235.3Open verse →

    परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    परम प्रेममय मृदु मसि कीन्ही। चारु चित भीतीं लिख लीन्ही।।

  2479. RCM 1.235.4Open verse →

    गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    गई भवानी भवन बहोरी। बंदि चरन बोली कर जोरी।।

  2480. RCM 1.235.5Open verse →

    जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जय जय गिरिबरराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।।

  2481. RCM 1.235.6Open verse →

    जय गज बदन षड़ानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।।

    अर्थ · Hindi

    जय गज बदन षड़ानन माता। जगत जननि दामिनि दुति गाता।।

  2482. RCM 1.235.7Open verse →

    नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं तव आदि मध्य अवसाना। अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना।।

  2483. RCM 1.235.8Open verse →

    भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

    अर्थ · Hindi

    भव भव बिभव पराभव कारिनि। बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि।।

  2484. RCM 1.235.9Open verse →

    पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।

    अर्थ · Hindi

    पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख।

  2485. RCM 1.235.10Open verse →

    महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष।।235।।

    अर्थ · Hindi

    महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष।।235।।

  2486. RCM 1.236.1Open verse →

    सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी।।

    अर्थ · Hindi

    सेवत तोहि सुलभ फल चारी। बरदायनी पुरारि पिआरी।।

  2487. RCM 1.236.2Open verse →

    देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    देबि पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे।।

  2488. RCM 1.236.3Open verse →

    मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें।।

    अर्थ · Hindi

    मोर मनोरथु जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही कें।।

  2489. RCM 1.236.4Open verse →

    कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं।।

  2490. RCM 1.236.5Open verse →

    बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मूरति मुसुकानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मूरति मुसुकानी।।

  2491. RCM 1.236.6Open verse →

    सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ। बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ।।

  2492. RCM 1.236.7Open verse →

    सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी।।

  2493. RCM 1.236.8Open verse →

    नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।।

    अर्थ · Hindi

    नारद बचन सदा सुचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा।।

  2494. RCM 1.237.1Open verse →

    हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ सराहत सीय लोनाई। गुर समीप गवने दोउ भाई।।

  2495. RCM 1.237.2Open verse →

    राम कहा सबु कौसिक पाहीं। सरल सुभाउ छुअत छल नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम कहा सबु कौसिक पाहीं। सरल सुभाउ छुअत छल नाहीं।।

  2496. RCM 1.237.3Open verse →

    सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    सुमन पाइ मुनि पूजा कीन्ही। पुनि असीस दुहु भाइन्ह दीन्ही।।

  2497. RCM 1.237.4Open verse →

    सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    सुफल मनोरथ होहुँ तुम्हारे। रामु लखनु सुनि भए सुखारे।।

  2498. RCM 1.237.5Open verse →

    करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।।

    अर्थ · Hindi

    करि भोजनु मुनिबर बिग्यानी। लगे कहन कछु कथा पुरानी।।

  2499. RCM 1.237.6Open verse →

    बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिगत दिवसु गुरु आयसु पाई। संध्या करन चले दोउ भाई।।

  2500. RCM 1.237.7Open verse →

    प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    प्राची दिसि ससि उयउ सुहावा। सिय मुख सरिस देखि सुखु पावा।।

  2501. RCM 1.237.8Open verse →

    बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बिचारु कीन्ह मन माहीं। सीय बदन सम हिमकर नाहीं।।

  2502. RCM 1.237.9Open verse →

    जनमु सिंधु पुनि बंधु बिषु दिन मलीन सकलंक।

    अर्थ · Hindi

    जनमु सिंधु पुनि बंधु बिषु दिन मलीन सकलंक।

  2503. RCM 1.237.10Open verse →

    सिय मुख समता पाव किमि चंदु बापुरो रंक।।237।।

    अर्थ · Hindi

    सिय मुख समता पाव किमि चंदु बापुरो रंक।।237।।

  2504. RCM 1.238.1Open verse →

    घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।।

    अर्थ · Hindi

    घटइ बढ़इ बिरहनि दुखदाई। ग्रसइ राहु निज संधिहिं पाई।।

  2505. RCM 1.238.2Open verse →

    कोक सिकप्रद पंकज द्रोही। अवगुन बहुत चंद्रमा तोही।।

    अर्थ · Hindi

    कोक सिकप्रद पंकज द्रोही। अवगुन बहुत चंद्रमा तोही।।

  2506. RCM 1.238.3Open verse →

    बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    बैदेही मुख पटतर दीन्हे। होइ दोष बड़ अनुचित कीन्हे।।

  2507. RCM 1.238.4Open verse →

    सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी।।

    अर्थ · Hindi

    सिय मुख छबि बिधु ब्याज बखानी। गुरु पहिं चले निसा बड़ि जानी।।

  2508. RCM 1.238.5Open verse →

    करि मुनि चरन सरोज प्रनामा। आयसु पाइ कीन्ह बिश्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    करि मुनि चरन सरोज प्रनामा। आयसु पाइ कीन्ह बिश्रामा।।

  2509. RCM 1.238.6Open verse →

    बिगत निसा रघुनायक जागे। बंधु बिलोकि कहन अस लागे।।

    अर्थ · Hindi

    बिगत निसा रघुनायक जागे। बंधु बिलोकि कहन अस लागे।।

  2510. RCM 1.238.7Open verse →

    उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    उदउ अरुन अवलोकहु ताता। पंकज कोक लोक सुखदाता।।

  2511. RCM 1.238.8Open verse →

    बोले लखनु जोरि जुग पानी। प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    बोले लखनु जोरि जुग पानी। प्रभु प्रभाउ सूचक मृदु बानी।।

  2512. RCM 1.238.9Open verse →

    अरुनोदयँ सकुचे कुमुद उडगन जोति मलीन।

    अर्थ · Hindi

    अरुनोदयँ सकुचे कुमुद उडगन जोति मलीन।

  2513. RCM 1.238.10Open verse →

    जिमि तुम्हार आगमन सुनि भए नृपति बलहीन।।238।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि तुम्हार आगमन सुनि भए नृपति बलहीन।।238।।

  2514. RCM 1.239.1Open verse →

    नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी।।

    अर्थ · Hindi

    नृप सब नखत करहिं उजिआरी। टारि न सकहिं चाप तम भारी।।

  2515. RCM 1.239.2Open verse →

    कमल कोक मधुकर खग नाना। हरषे सकल निसा अवसाना।।

    अर्थ · Hindi

    कमल कोक मधुकर खग नाना। हरषे सकल निसा अवसाना।।

  2516. RCM 1.239.3Open verse →

    ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    ऐसेहिं प्रभु सब भगत तुम्हारे। होइहहिं टूटें धनुष सुखारे।।

  2517. RCM 1.239.4Open verse →

    उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे नखत जग तेजु प्रकासा।।

    अर्थ · Hindi

    उयउ भानु बिनु श्रम तम नासा। दुरे नखत जग तेजु प्रकासा।।

  2518. RCM 1.239.5Open verse →

    रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया।।

    अर्थ · Hindi

    रबि निज उदय ब्याज रघुराया। प्रभु प्रतापु सब नृपन्ह दिखाया।।

  2519. RCM 1.239.6Open verse →

    तव भुज बल महिमा उदघाटी। प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी।।

    अर्थ · Hindi

    तव भुज बल महिमा उदघाटी। प्रगटी धनु बिघटन परिपाटी।।

  2520. RCM 1.239.7Open verse →

    बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु बचन सुनि प्रभु मुसुकाने। होइ सुचि सहज पुनीत नहाने।।

  2521. RCM 1.239.8Open verse →

    नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए। चरन सरोज सुभग सिर नाए।।

    अर्थ · Hindi

    नित्यक्रिया करि गुरु पहिं आए। चरन सरोज सुभग सिर नाए।।

  2522. RCM 1.239.9Open verse →

    सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    सतानंदु तब जनक बोलाए। कौसिक मुनि पहिं तुरत पठाए।।

  2523. RCM 1.239.10Open verse →

    जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई। हरषे बोलि लिए दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनक बिनय तिन्ह आइ सुनाई। हरषे बोलि लिए दोउ भाई।।

  2524. RCM 1.239.11Open verse →

    सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ।

    अर्थ · Hindi

    सतानंदपद बंदि प्रभु बैठे गुर पहिं जाइ।

  2525. RCM 1.239.12Open verse →

    चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ।।239।।

    अर्थ · Hindi

    चलहु तात मुनि कहेउ तब पठवा जनक बोलाइ।।239।।

  2526. RCM 1.240.1Open verse →

    सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    सीय स्वयंबरु देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई।।

  2527. RCM 1.240.2Open verse →

    लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई।।

    अर्थ · Hindi

    लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई।।

  2528. RCM 1.240.3Open verse →

    हरषे मुनि सब सुनि बर बानी। दीन्हि असीस सबहिं सुखु मानी।।

    अर्थ · Hindi

    हरषे मुनि सब सुनि बर बानी। दीन्हि असीस सबहिं सुखु मानी।।

  2529. RCM 1.240.4Open verse →

    पुनि मुनिबृंद समेत कृपाला। देखन चले धनुषमख साला।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि मुनिबृंद समेत कृपाला। देखन चले धनुषमख साला।।

  2530. RCM 1.240.5Open verse →

    रंगभूमि आए दोउ भाई। असि सुधि सब पुरबासिन्ह पाई।।

    अर्थ · Hindi

    रंगभूमि आए दोउ भाई। असि सुधि सब पुरबासिन्ह पाई।।

  2531. RCM 1.240.6Open verse →

    चले सकल गृह काज बिसारी। बाल जुबान जरठ नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    चले सकल गृह काज बिसारी। बाल जुबान जरठ नर नारी।।

  2532. RCM 1.240.7Open verse →

    देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखी जनक भीर भै भारी। सुचि सेवक सब लिए हँकारी।।

  2533. RCM 1.240.8Open verse →

    तुरत सकल लोगन्ह पहिं जाहू। आसन उचित देहू सब काहू।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत सकल लोगन्ह पहिं जाहू। आसन उचित देहू सब काहू।।

  2534. RCM 1.240.9Open verse →

    कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि।

    अर्थ · Hindi

    कहि मृदु बचन बिनीत तिन्ह बैठारे नर नारि।

  2535. RCM 1.240.10Open verse →

    उत्तम मध्यम नीच लघु निज निज थल अनुहारि।।240।।

    अर्थ · Hindi

    उत्तम मध्यम नीच लघु निज निज थल अनुहारि।।240।।

  2536. RCM 1.241.1Open verse →

    राजकुअँर तेहि अवसर आए। मनहुँ मनोहरता तन छाए।।

    अर्थ · Hindi

    राजकुअँर तेहि अवसर आए। मनहुँ मनोहरता तन छाए।।

  2537. RCM 1.241.2Open verse →

    गुन सागर नागर बर बीरा। सुंदर स्यामल गौर सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    गुन सागर नागर बर बीरा। सुंदर स्यामल गौर सरीरा।।

  2538. RCM 1.241.3Open verse →

    राज समाज बिराजत रूरे। उडगन महुँ जनु जुग बिधु पूरे।।

    अर्थ · Hindi

    राज समाज बिराजत रूरे। उडगन महुँ जनु जुग बिधु पूरे।।

  2539. RCM 1.241.4Open verse →

    जिन्ह कें रही भावना जैसी। प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह कें रही भावना जैसी। प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी।।

  2540. RCM 1.241.5Open verse →

    देखहिं रूप महा रनधीरा। मनहुँ बीर रसु धरें सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    देखहिं रूप महा रनधीरा। मनहुँ बीर रसु धरें सरीरा।।

  2541. RCM 1.241.6Open verse →

    डरे कुटिल नृप प्रभुहि निहारी। मनहुँ भयानक मूरति भारी।।

    अर्थ · Hindi

    डरे कुटिल नृप प्रभुहि निहारी। मनहुँ भयानक मूरति भारी।।

  2542. RCM 1.241.7Open verse →

    रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट कालसम देखा।।

    अर्थ · Hindi

    रहे असुर छल छोनिप बेषा। तिन्ह प्रभु प्रगट कालसम देखा।।

  2543. RCM 1.241.8Open verse →

    पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई। नरभूषन लोचन सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुरबासिन्ह देखे दोउ भाई। नरभूषन लोचन सुखदाई।।

  2544. RCM 1.241.9Open verse →

    नारि बिलोकहिं हरषि हियँ निज निज रुचि अनुरूप।

    अर्थ · Hindi

    नारि बिलोकहिं हरषि हियँ निज निज रुचि अनुरूप।

  2545. RCM 1.241.10Open verse →

    जनु सोहत सिंगार धरि मूरति परम अनूप।।241।।

    अर्थ · Hindi

    जनु सोहत सिंगार धरि मूरति परम अनूप।।241।।

  2546. RCM 1.242.1Open verse →

    बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।।

    अर्थ · Hindi

    बिदुषन्ह प्रभु बिराटमय दीसा। बहु मुख कर पग लोचन सीसा।।

  2547. RCM 1.242.2Open verse →

    जनक जाति अवलोकहिं कैसैं। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    जनक जाति अवलोकहिं कैसैं। सजन सगे प्रिय लागहिं जैसें।।

  2548. RCM 1.242.3Open verse →

    सहित बिदेह बिलोकहिं रानी। सिसु सम प्रीति न जाति बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सहित बिदेह बिलोकहिं रानी। सिसु सम प्रीति न जाति बखानी।।

  2549. RCM 1.242.4Open verse →

    जोगिन्ह परम तत्वमय भासा। सांत सुद्ध सम सहज प्रकासा।।

    अर्थ · Hindi

    जोगिन्ह परम तत्वमय भासा। सांत सुद्ध सम सहज प्रकासा।।

  2550. RCM 1.242.5Open verse →

    हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।।

    अर्थ · Hindi

    हरिभगतन्ह देखे दोउ भ्राता। इष्टदेव इव सब सुख दाता।।

  2551. RCM 1.242.6Open verse →

    रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि चितव भायँ जेहि सीया। सो सनेहु सुखु नहिं कथनीया।।

  2552. RCM 1.242.7Open verse →

    उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    उर अनुभवति न कहि सक सोऊ। कवन प्रकार कहै कबि कोऊ।।

  2553. RCM 1.242.8Open verse →

    एहि बिधि रहा जाहि जस भाऊ। तेहिं तस देखेउ कोसलराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि रहा जाहि जस भाऊ। तेहिं तस देखेउ कोसलराऊ।।

  2554. RCM 1.242.9Open verse →

    राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर।

    अर्थ · Hindi

    राजत राज समाज महुँ कोसलराज किसोर।

  2555. RCM 1.242.10Open verse →

    सुंदर स्यामल गौर तन बिस्व बिलोचन चोर।।242।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर स्यामल गौर तन बिस्व बिलोचन चोर।।242।।

  2556. RCM 1.243.1Open verse →

    सहज मनोहर मूरति दोऊ। कोटि काम उपमा लघु सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सहज मनोहर मूरति दोऊ। कोटि काम उपमा लघु सोऊ।।

  2557. RCM 1.243.2Open verse →

    सरद चंद निंदक मुख नीके। नीरज नयन भावते जी के।।

    अर्थ · Hindi

    सरद चंद निंदक मुख नीके। नीरज नयन भावते जी के।।

  2558. RCM 1.243.3Open verse →

    चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    चितवत चारु मार मनु हरनी। भावति हृदय जाति नहीं बरनी।।

  2559. RCM 1.243.4Open verse →

    कल कपोल श्रुति कुंडल लोला। चिबुक अधर सुंदर मृदु बोला।।

    अर्थ · Hindi

    कल कपोल श्रुति कुंडल लोला। चिबुक अधर सुंदर मृदु बोला।।

  2560. RCM 1.243.5Open verse →

    कुमुदबंधु कर निंदक हाँसा। भृकुटी बिकट मनोहर नासा।।

    अर्थ · Hindi

    कुमुदबंधु कर निंदक हाँसा। भृकुटी बिकट मनोहर नासा।।

  2561. RCM 1.243.6Open verse →

    भाल बिसाल तिलक झलकाहीं। कच बिलोकि अलि अवलि लजाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भाल बिसाल तिलक झलकाहीं। कच बिलोकि अलि अवलि लजाहीं।।

  2562. RCM 1.243.7Open verse →

    पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।

    अर्थ · Hindi

    पीत चौतनीं सिरन्हि सुहाई। कुसुम कलीं बिच बीच बनाईं।।

  2563. RCM 1.243.8Open verse →

    रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ।।

    अर्थ · Hindi

    रेखें रुचिर कंबु कल गीवाँ। जनु त्रिभुवन सुषमा की सीवाँ।।

  2564. RCM 1.243.9Open verse →

    कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।

    अर्थ · Hindi

    कुंजर मनि कंठा कलित उरन्हि तुलसिका माल।

  2565. RCM 1.243.10Open verse →

    बृषभ कंध केहरि ठवनि बल निधि बाहु बिसाल।।243।।

    अर्थ · Hindi

    बृषभ कंध केहरि ठवनि बल निधि बाहु बिसाल।।243।।

  2566. RCM 1.244.1Open verse →

    कटि तूनीर पीत पट बाँधे। कर सर धनुष बाम बर काँधे।।

    अर्थ · Hindi

    कटि तूनीर पीत पट बाँधे। कर सर धनुष बाम बर काँधे।।

  2567. RCM 1.244.2Open verse →

    पीत जग्य उपबीत सुहाए। नख सिख मंजु महाछबि छाए।।

    अर्थ · Hindi

    पीत जग्य उपबीत सुहाए। नख सिख मंजु महाछबि छाए।।

  2568. RCM 1.244.3Open verse →

    देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे।।

    अर्थ · Hindi

    देखि लोग सब भए सुखारे। एकटक लोचन चलत न तारे।।

  2569. RCM 1.244.4Open verse →

    हरषे जनकु देखि दोउ भाई। मुनि पद कमल गहे तब जाई।।

    अर्थ · Hindi

    हरषे जनकु देखि दोउ भाई। मुनि पद कमल गहे तब जाई।।

  2570. RCM 1.244.5Open verse →

    करि बिनती निज कथा सुनाई। रंग अवनि सब मुनिहि देखाई।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिनती निज कथा सुनाई। रंग अवनि सब मुनिहि देखाई।।

  2571. RCM 1.244.6Open verse →

    जहँ जहँ जाहि कुअँर बर दोऊ। तहँ तहँ चकित चितव सबु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जहँ जाहि कुअँर बर दोऊ। तहँ तहँ चकित चितव सबु कोऊ।।

  2572. RCM 1.244.7Open verse →

    निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    निज निज रुख रामहि सबु देखा। कोउ न जान कछु मरमु बिसेषा।।

  2573. RCM 1.244.8Open verse →

    भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ। राजाँ मुदित महासुख लहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भलि रचना मुनि नृप सन कहेऊ। राजाँ मुदित महासुख लहेऊ।।

  2574. RCM 1.244.9Open verse →

    सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल।

    अर्थ · Hindi

    सब मंचन्ह ते मंचु एक सुंदर बिसद बिसाल।

  2575. RCM 1.244.10Open verse →

    मुनि समेत दोउ बंधु तहँ बैठारे महिपाल।।244।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि समेत दोउ बंधु तहँ बैठारे महिपाल।।244।।

  2576. RCM 1.245.1Open verse →

    प्रभुहि देखि सब नृप हिंयँ हारे। जनु राकेस उदय भएँ तारे।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुहि देखि सब नृप हिंयँ हारे। जनु राकेस उदय भएँ तारे।।

  2577. RCM 1.245.2Open verse →

    असि प्रतीति सब के मन माहीं। राम चाप तोरब सक नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    असि प्रतीति सब के मन माहीं। राम चाप तोरब सक नाहीं।।

  2578. RCM 1.245.3Open verse →

    बिनु भंजेहुँ भव धनुषु बिसाला। मेलिहि सीय राम उर माला।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु भंजेहुँ भव धनुषु बिसाला। मेलिहि सीय राम उर माला।।

  2579. RCM 1.245.4Open verse →

    अस बिचारि गवनहु घर भाई। जसु प्रतापु बलु तेजु गवाँई।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि गवनहु घर भाई। जसु प्रतापु बलु तेजु गवाँई।।

  2580. RCM 1.245.5Open verse →

    बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिहसे अपर भूप सुनि बानी। जे अबिबेक अंध अभिमानी।।

  2581. RCM 1.245.6Open verse →

    तोरेहुँ धनुषु ब्याहु अवगाहा। बिनु तोरें को कुअँरि बिआहा।।

    अर्थ · Hindi

    तोरेहुँ धनुषु ब्याहु अवगाहा। बिनु तोरें को कुअँरि बिआहा।।

  2582. RCM 1.245.7Open verse →

    एक बार कालउ किन होऊ। सिय हित समर जितब हम सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    एक बार कालउ किन होऊ। सिय हित समर जितब हम सोऊ।।

  2583. RCM 1.245.8Open verse →

    यह सुनि अवर महिप मुसकाने। धरमसील हरिभगत सयाने।।

    अर्थ · Hindi

    यह सुनि अवर महिप मुसकाने। धरमसील हरिभगत सयाने।।

  2584. RCM 1.245.9Open verse →

    सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के।।

    अर्थ · Hindi

    सीय बिआहबि राम गरब दूरि करि नृपन्ह के।।

  2585. RCM 1.245.10Open verse →

    जीति को सक संग्राम दसरथ के रन बाँकुरे।।245।।

    अर्थ · Hindi

    जीति को सक संग्राम दसरथ के रन बाँकुरे।।245।।

  2586. RCM 1.246.1Open verse →

    ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।।

    अर्थ · Hindi

    ब्यर्थ मरहु जनि गाल बजाई। मन मोदकन्हि कि भूख बुताई।।

  2587. RCM 1.246.2Open verse →

    सिख हमारि सुनि परम पुनीता। जगदंबा जानहु जियँ सीता।।

    अर्थ · Hindi

    सिख हमारि सुनि परम पुनीता। जगदंबा जानहु जियँ सीता।।

  2588. RCM 1.246.3Open verse →

    जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    जगत पिता रघुपतिहि बिचारी। भरि लोचन छबि लेहु निहारी।।

  2589. RCM 1.246.4Open verse →

    सुंदर सुखद सकल गुन रासी। ए दोउ बंधु संभु उर बासी।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर सुखद सकल गुन रासी। ए दोउ बंधु संभु उर बासी।।

  2590. RCM 1.246.5Open verse →

    सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई।।

  2591. RCM 1.246.6Open verse →

    करहु जाइ जा कहुँ जोई भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    करहु जाइ जा कहुँ जोई भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा।।

  2592. RCM 1.246.7Open verse →

    अस कहि भले भूप अनुरागे। रूप अनूप बिलोकन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि भले भूप अनुरागे। रूप अनूप बिलोकन लागे।।

  2593. RCM 1.246.8Open verse →

    देखहिं सुर नभ चढ़े बिमाना। बरषहिं सुमन करहिं कल गाना।।

    अर्थ · Hindi

    देखहिं सुर नभ चढ़े बिमाना। बरषहिं सुमन करहिं कल गाना।।

  2594. RCM 1.246.9Open verse →

    जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाई।

    अर्थ · Hindi

    जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाई।

  2595. RCM 1.246.10Open verse →

    चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं लवाईं।।246।।

    अर्थ · Hindi

    चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं लवाईं।।246।।

  2596. RCM 1.247.1Open verse →

    सिय सोभा नहिं जाइ बखानी। जगदंबिका रूप गुन खानी।।

    अर्थ · Hindi

    सिय सोभा नहिं जाइ बखानी। जगदंबिका रूप गुन खानी।।

  2597. RCM 1.247.2Open verse →

    उपमा सकल मोहि लघु लागीं। प्राकृत नारि अंग अनुरागीं।।

    अर्थ · Hindi

    उपमा सकल मोहि लघु लागीं। प्राकृत नारि अंग अनुरागीं।।

  2598. RCM 1.247.3Open verse →

    सिय बरनिअ तेइ उपमा देई। कुकबि कहाइ अजसु को लेई।।

    अर्थ · Hindi

    सिय बरनिअ तेइ उपमा देई। कुकबि कहाइ अजसु को लेई।।

  2599. RCM 1.247.4Open verse →

    जौ पटतरिअ तीय सम सीया। जग असि जुबति कहाँ कमनीया।।

    अर्थ · Hindi

    जौ पटतरिअ तीय सम सीया। जग असि जुबति कहाँ कमनीया।।

  2600. RCM 1.247.5Open verse →

    गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी।।

    अर्थ · Hindi

    गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी।।

  2601. RCM 1.247.6Open verse →

    बिष बारुनी बंधु प्रिय जेही। कहिअ रमासम किमि बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    बिष बारुनी बंधु प्रिय जेही। कहिअ रमासम किमि बैदेही।।

  2602. RCM 1.247.7Open verse →

    जौ छबि सुधा पयोनिधि होई। परम रूपमय कच्छप सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जौ छबि सुधा पयोनिधि होई। परम रूपमय कच्छप सोई।।

  2603. RCM 1.247.8Open verse →

    सोभा रजु मंदरु सिंगारू। मथै पानि पंकज निज मारू।।

    अर्थ · Hindi

    सोभा रजु मंदरु सिंगारू। मथै पानि पंकज निज मारू।।

  2604. RCM 1.247.9Open verse →

    एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि उपजै लच्छि जब सुंदरता सुख मूल।

  2605. RCM 1.247.10Open verse →

    तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल।।247।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि सकोच समेत कबि कहहिं सीय समतूल।।247।।

  2606. RCM 1.248.1Open verse →

    चलिं संग लै सखीं सयानी। गावत गीत मनोहर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    चलिं संग लै सखीं सयानी। गावत गीत मनोहर बानी।।

  2607. RCM 1.248.2Open verse →

    सोह नवल तनु सुंदर सारी। जगत जननि अतुलित छबि भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सोह नवल तनु सुंदर सारी। जगत जननि अतुलित छबि भारी।।

  2608. RCM 1.248.3Open verse →

    भूषन सकल सुदेस सुहाए। अंग अंग रचि सखिन्ह बनाए।।

    अर्थ · Hindi

    भूषन सकल सुदेस सुहाए। अंग अंग रचि सखिन्ह बनाए।।

  2609. RCM 1.248.4Open verse →

    रंगभूमि जब सिय पगु धारी। देखि रूप मोहे नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    रंगभूमि जब सिय पगु धारी। देखि रूप मोहे नर नारी।।

  2610. RCM 1.248.5Open verse →

    हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई। बरषि प्रसून अपछरा गाई।।

  2611. RCM 1.248.6Open verse →

    पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला।।

    अर्थ · Hindi

    पानि सरोज सोह जयमाला। अवचट चितए सकल भुआला।।

  2612. RCM 1.248.7Open verse →

    सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा।।

    अर्थ · Hindi

    सीय चकित चित रामहि चाहा। भए मोहबस सब नरनाहा।।

  2613. RCM 1.248.8Open verse →

    मुनि समीप देखे दोउ भाई। लगे ललकि लोचन निधि पाई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि समीप देखे दोउ भाई। लगे ललकि लोचन निधि पाई।।

  2614. RCM 1.248.9Open verse →

    गुरजन लाज समाजु बड़ देखि सीय सकुचानि।।

    अर्थ · Hindi

    गुरजन लाज समाजु बड़ देखि सीय सकुचानि।।

  2615. RCM 1.248.10Open verse →

    लागि बिलोकन सखिन्ह तन रघुबीरहि उर आनि।।248।।

    अर्थ · Hindi

    लागि बिलोकन सखिन्ह तन रघुबीरहि उर आनि।।248।।

  2616. RCM 1.249.1Open verse →

    राम रूपु अरु सिय छबि देखें। नर नारिन्ह परिहरीं निमेषें।।

    अर्थ · Hindi

    राम रूपु अरु सिय छबि देखें। नर नारिन्ह परिहरीं निमेषें।।

  2617. RCM 1.249.2Open verse →

    सोचहिं सकल कहत सकुचाहीं। बिधि सन बिनय करहिं मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सोचहिं सकल कहत सकुचाहीं। बिधि सन बिनय करहिं मन माहीं।।

  2618. RCM 1.249.3Open verse →

    हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई। मति हमारि असि देहि सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    हरु बिधि बेगि जनक जड़ताई। मति हमारि असि देहि सुहाई।।

  2619. RCM 1.249.4Open verse →

    बिनु बिचार पनु तजि नरनाहु। सीय राम कर करै बिबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु बिचार पनु तजि नरनाहु। सीय राम कर करै बिबाहू।।

  2620. RCM 1.249.5Open verse →

    जग भल कहहि भाव सब काहू। हठ कीन्हे अंतहुँ उर दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    जग भल कहहि भाव सब काहू। हठ कीन्हे अंतहुँ उर दाहू।।

  2621. RCM 1.249.6Open verse →

    एहिं लालसाँ मगन सब लोगू। बरु साँवरो जानकी जोगू।।

    अर्थ · Hindi

    एहिं लालसाँ मगन सब लोगू। बरु साँवरो जानकी जोगू।।

  2622. RCM 1.249.7Open verse →

    तब बंदीजन जनक बौलाए। बिरिदावली कहत चलि आए।।

    अर्थ · Hindi

    तब बंदीजन जनक बौलाए। बिरिदावली कहत चलि आए।।

  2623. RCM 1.249.8Open verse →

    कह नृप जाइ कहहु पन मोरा। चले भाट हियँ हरषु न थोरा।।

    अर्थ · Hindi

    कह नृप जाइ कहहु पन मोरा। चले भाट हियँ हरषु न थोरा।।

  2624. RCM 1.249.9Open verse →

    बोले बंदी बचन बर सुनहु सकल महिपाल।

    अर्थ · Hindi

    बोले बंदी बचन बर सुनहु सकल महिपाल।

  2625. RCM 1.249.10Open verse →

    पन बिदेह कर कहहिं हम भुजा उठाइ बिसाल।।249।।

    अर्थ · Hindi

    पन बिदेह कर कहहिं हम भुजा उठाइ बिसाल।।249।।

  2626. RCM 1.250.1Open verse →

    नृप भुजबल बिधु सिवधनु राहू। गरुअ कठोर बिदित सब काहू।।

    अर्थ · Hindi

    नृप भुजबल बिधु सिवधनु राहू। गरुअ कठोर बिदित सब काहू।।

  2627. RCM 1.250.2Open verse →

    रावनु बानु महाभट भारे। देखि सरासन गवँहिं सिधारे।।

    अर्थ · Hindi

    रावनु बानु महाभट भारे। देखि सरासन गवँहिं सिधारे।।

  2628. RCM 1.250.3Open verse →

    सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ पुरारि कोदंडु कठोरा। राज समाज आजु जोइ तोरा।।

  2629. RCM 1.250.4Open verse →

    त्रिभुवन जय समेत बैदेही।।बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही।।

    अर्थ · Hindi

    त्रिभुवन जय समेत बैदेही।।बिनहिं बिचार बरइ हठि तेही।।

  2630. RCM 1.250.5Open verse →

    सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे।।

  2631. RCM 1.250.6Open verse →

    परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई।।

    अर्थ · Hindi

    परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई।।

  2632. RCM 1.250.7Open verse →

    तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तमकि ताकि तकि सिवधनु धरहीं। उठइ न कोटि भाँति बलु करहीं।।

  2633. RCM 1.250.8Open verse →

    जिन्ह के कछु बिचारु मन माहीं। चाप समीप महीप न जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह के कछु बिचारु मन माहीं। चाप समीप महीप न जाहीं।।

  2634. RCM 1.250.9Open verse →

    तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ।

    अर्थ · Hindi

    तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ।

  2635. RCM 1.250.10Open verse →

    मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ।।250।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ।।250।।

  2636. RCM 1.251.1Open verse →

    भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा।।

    अर्थ · Hindi

    भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा।।

  2637. RCM 1.251.2Open verse →

    डगइ न संभु सरासन कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    डगइ न संभु सरासन कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें।।

  2638. RCM 1.251.3Open verse →

    सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु बिराग संन्यासी।।

    अर्थ · Hindi

    सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु बिराग संन्यासी।।

  2639. RCM 1.251.4Open verse →

    कीरति बिजय बीरता भारी। चले चाप कर बरबस हारी।।

    अर्थ · Hindi

    कीरति बिजय बीरता भारी। चले चाप कर बरबस हारी।।

  2640. RCM 1.251.5Open verse →

    श्रीहत भए हारि हियँ राजा। बैठे निज निज जाइ समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीहत भए हारि हियँ राजा। बैठे निज निज जाइ समाजा।।

  2641. RCM 1.251.6Open verse →

    नृपन्ह बिलोकि जनकु अकुलाने। बोले बचन रोष जनु साने।।

    अर्थ · Hindi

    नृपन्ह बिलोकि जनकु अकुलाने। बोले बचन रोष जनु साने।।

  2642. RCM 1.251.7Open verse →

    दीप दीप के भूपति नाना। आए सुनि हम जो पनु ठाना।।

    अर्थ · Hindi

    दीप दीप के भूपति नाना। आए सुनि हम जो पनु ठाना।।

  2643. RCM 1.251.8Open verse →

    देव दनुज धरि मनुज सरीरा। बिपुल बीर आए रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    देव दनुज धरि मनुज सरीरा। बिपुल बीर आए रनधीरा।।

  2644. RCM 1.251.9Open verse →

    कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय।

    अर्थ · Hindi

    कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय।

  2645. RCM 1.251.10Open verse →

    पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय।।251।।

    अर्थ · Hindi

    पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय।।251।।

  2646. RCM 1.252.1Open verse →

    कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु काहि यहु लाभु न भावा। काहुँ न संकर चाप चढ़ावा।।

  2647. RCM 1.252.2Open verse →

    रहउ चढ़ाउब तोरब भाई। तिलु भरि भूमि न सके छड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    रहउ चढ़ाउब तोरब भाई। तिलु भरि भूमि न सके छड़ाई।।

  2648. RCM 1.252.3Open verse →

    अब जनि कोउ माखै भट मानी। बीर बिहीन मही मैं जानी।।

    अर्थ · Hindi

    अब जनि कोउ माखै भट मानी। बीर बिहीन मही मैं जानी।।

  2649. RCM 1.252.4Open verse →

    तजहु आस निज निज गृह जाहू। लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    तजहु आस निज निज गृह जाहू। लिखा न बिधि बैदेहि बिबाहू।।

  2650. RCM 1.252.5Open verse →

    सुकृत जाइ जौं पनु परिहरऊँ। कुअँरि कुआरि रहउ का करऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृत जाइ जौं पनु परिहरऊँ। कुअँरि कुआरि रहउ का करऊँ।।

  2651. RCM 1.252.6Open verse →

    जो जनतेउँ बिनु भट भुबि भाई। तौ पनु करि होतेउँ न हँसाई।।

    अर्थ · Hindi

    जो जनतेउँ बिनु भट भुबि भाई। तौ पनु करि होतेउँ न हँसाई।।

  2652. RCM 1.252.7Open verse →

    जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    जनक बचन सुनि सब नर नारी। देखि जानकिहि भए दुखारी।।

  2653. RCM 1.252.8Open verse →

    माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें।।

    अर्थ · Hindi

    माखे लखनु कुटिल भइँ भौंहें। रदपट फरकत नयन रिसौंहें।।

  2654. RCM 1.252.9Open verse →

    कहि न सकत रघुबीर डर लगे बचन जनु बान।

    अर्थ · Hindi

    कहि न सकत रघुबीर डर लगे बचन जनु बान।

  2655. RCM 1.252.10Open verse →

    नाइ राम पद कमल सिरु बोले गिरा प्रमान।।252।।

    अर्थ · Hindi

    नाइ राम पद कमल सिरु बोले गिरा प्रमान।।252।।

  2656. RCM 1.253.1Open verse →

    रघुबंसिन्ह महुँ जहँ कोउ होई। तेहिं समाज अस कहइ न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    रघुबंसिन्ह महुँ जहँ कोउ होई। तेहिं समाज अस कहइ न कोई।।

  2657. RCM 1.253.2Open verse →

    कही जनक जसि अनुचित बानी। बिद्यमान रघुकुल मनि जानी।।

    अर्थ · Hindi

    कही जनक जसि अनुचित बानी। बिद्यमान रघुकुल मनि जानी।।

  2658. RCM 1.253.3Open verse →

    सुनहु भानुकुल पंकज भानू। कहउँ सुभाउ न कछु अभिमानू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु भानुकुल पंकज भानू। कहउँ सुभाउ न कछु अभिमानू।।

  2659. RCM 1.253.4Open verse →

    जौ तुम्हारि अनुसासन पावौं। कंदुक इव ब्रह्मांड उठावौं।।

    अर्थ · Hindi

    जौ तुम्हारि अनुसासन पावौं। कंदुक इव ब्रह्मांड उठावौं।।

  2660. RCM 1.253.5Open verse →

    काचे घट जिमि डारौं फोरी। सकउँ मेरु मूलक जिमि तोरी।।

    अर्थ · Hindi

    काचे घट जिमि डारौं फोरी। सकउँ मेरु मूलक जिमि तोरी।।

  2661. RCM 1.253.6Open verse →

    तव प्रताप महिमा भगवाना। को बापुरो पिनाक पुराना।।

    अर्थ · Hindi

    तव प्रताप महिमा भगवाना। को बापुरो पिनाक पुराना।।

  2662. RCM 1.253.7Open verse →

    नाथ जानि अस आयसु होऊ। कौतुकु करौं बिलोकिअ सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ जानि अस आयसु होऊ। कौतुकु करौं बिलोकिअ सोऊ।।

  2663. RCM 1.253.8Open verse →

    कमल नाल जिमि चाफ चढ़ावौं। जोजन सत प्रमान लै धावौं।।

    अर्थ · Hindi

    कमल नाल जिमि चाफ चढ़ावौं। जोजन सत प्रमान लै धावौं।।

  2664. RCM 1.253.9Open verse →

    तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ।

    अर्थ · Hindi

    तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ।

  2665. RCM 1.253.10Open verse →

    जौं न करौं प्रभु पद सपथ कर न धरौं धनु भाथ।।253।।

    अर्थ · Hindi

    जौं न करौं प्रभु पद सपथ कर न धरौं धनु भाथ।।253।।

  2666. RCM 1.254.1Open verse →

    लखन सकोप बचन जे बोले। डगमगानि महि दिग्गज डोले।।

    अर्थ · Hindi

    लखन सकोप बचन जे बोले। डगमगानि महि दिग्गज डोले।।

  2667. RCM 1.254.2Open verse →

    सकल लोक सब भूप डेराने। सिय हियँ हरषु जनकु सकुचाने।।

    अर्थ · Hindi

    सकल लोक सब भूप डेराने। सिय हियँ हरषु जनकु सकुचाने।।

  2668. RCM 1.254.3Open verse →

    गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं।।

  2669. RCM 1.254.4Open verse →

    सयनहिं रघुपति लखनु नेवारे। प्रेम समेत निकट बैठारे।।

    अर्थ · Hindi

    सयनहिं रघुपति लखनु नेवारे। प्रेम समेत निकट बैठारे।।

  2670. RCM 1.254.5Open verse →

    बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी।।

  2671. RCM 1.254.6Open verse →

    उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा।।

    अर्थ · Hindi

    उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा।।

  2672. RCM 1.254.7Open verse →

    सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा। हरषु बिषादु न कछु उर आवा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा। हरषु बिषादु न कछु उर आवा।।

  2673. RCM 1.254.8Open verse →

    ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएँ। ठवनि जुबा मृगराजु लजाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएँ। ठवनि जुबा मृगराजु लजाएँ।।

  2674. RCM 1.254.9Open verse →

    उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग।

    अर्थ · Hindi

    उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग।

  2675. RCM 1.254.10Open verse →

    बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।।254।।

    अर्थ · Hindi

    बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग।।254।।

  2676. RCM 1.255.1Open verse →

    नृपन्ह केरि आसा निसि नासी। बचन नखत अवली न प्रकासी।।

    अर्थ · Hindi

    नृपन्ह केरि आसा निसि नासी। बचन नखत अवली न प्रकासी।।

  2677. RCM 1.255.2Open verse →

    मानी महिप कुमुद सकुचाने। कपटी भूप उलूक लुकाने।।

    अर्थ · Hindi

    मानी महिप कुमुद सकुचाने। कपटी भूप उलूक लुकाने।।

  2678. RCM 1.255.3Open verse →

    भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    भए बिसोक कोक मुनि देवा। बरिसहिं सुमन जनावहिं सेवा।।

  2679. RCM 1.255.4Open verse →

    गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पद बंदि सहित अनुरागा। राम मुनिन्ह सन आयसु मागा।।

  2680. RCM 1.255.5Open verse →

    सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।

    अर्थ · Hindi

    सहजहिं चले सकल जग स्वामी। मत्त मंजु बर कुंजर गामी।।

  2681. RCM 1.255.6Open verse →

    चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    चलत राम सब पुर नर नारी। पुलक पूरि तन भए सुखारी।।

  2682. RCM 1.255.7Open verse →

    बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि पितर सुर सुकृत सँभारे। जौं कछु पुन्य प्रभाउ हमारे।।

  2683. RCM 1.255.8Open verse →

    तौ सिवधनु मृनाल की नाईं। तोरहुँ राम गनेस गोसाईं।।

    अर्थ · Hindi

    तौ सिवधनु मृनाल की नाईं। तोरहुँ राम गनेस गोसाईं।।

  2684. RCM 1.255.9Open verse →

    रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।

    अर्थ · Hindi

    रामहि प्रेम समेत लखि सखिन्ह समीप बोलाइ।

  2685. RCM 1.255.10Open verse →

    सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ।।255।।

    अर्थ · Hindi

    सीता मातु सनेह बस बचन कहइ बिलखाइ।।255।।

  2686. RCM 1.256.1Open verse →

    सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    सखि सब कौतुक देखनिहारे। जेठ कहावत हितू हमारे।।

  2687. RCM 1.256.2Open verse →

    कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं। ए बालक असि हठ भलि नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ न बुझाइ कहइ गुर पाहीं। ए बालक असि हठ भलि नाहीं।।

  2688. RCM 1.256.3Open verse →

    रावन बान छुआ नहिं चापा। हारे सकल भूप करि दापा।।

    अर्थ · Hindi

    रावन बान छुआ नहिं चापा। हारे सकल भूप करि दापा।।

  2689. RCM 1.256.4Open verse →

    सो धनु राजकुअँर कर देहीं। बाल मराल कि मंदर लेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सो धनु राजकुअँर कर देहीं। बाल मराल कि मंदर लेहीं।।

  2690. RCM 1.256.5Open verse →

    भूप सयानप सकल सिरानी। सखि बिधि गति कछु जाति न जानी।।

    अर्थ · Hindi

    भूप सयानप सकल सिरानी। सखि बिधि गति कछु जाति न जानी।।

  2691. RCM 1.256.6Open verse →

    बोली चतुर सखी मृदु बानी। तेजवंत लघु गनिअ न रानी।।

    अर्थ · Hindi

    बोली चतुर सखी मृदु बानी। तेजवंत लघु गनिअ न रानी।।

  2692. RCM 1.256.7Open verse →

    कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ कुंभज कहँ सिंधु अपारा। सोषेउ सुजसु सकल संसारा।।

  2693. RCM 1.256.8Open verse →

    रबि मंडल देखत लघु लागा। उदयँ तासु तिभुवन तम भागा।।

    अर्थ · Hindi

    रबि मंडल देखत लघु लागा। उदयँ तासु तिभुवन तम भागा।।

  2694. RCM 1.256.9Open verse →

    मंत्र परम लघु जासु बस बिधि हरि हर सुर सर्ब।

    अर्थ · Hindi

    मंत्र परम लघु जासु बस बिधि हरि हर सुर सर्ब।

  2695. RCM 1.256.10Open verse →

    महामत्त गजराज कहुँ बस कर अंकुस खर्ब।।256।।

    अर्थ · Hindi

    महामत्त गजराज कहुँ बस कर अंकुस खर्ब।।256।।

  2696. RCM 1.257.1Open verse →

    काम कुसुम धनु सायक लीन्हे। सकल भुवन अपने बस कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    काम कुसुम धनु सायक लीन्हे। सकल भुवन अपने बस कीन्हे।।

  2697. RCM 1.257.2Open verse →

    देबि तजिअ संसउ अस जानी। भंजब धनुष रामु सुनु रानी।।

    अर्थ · Hindi

    देबि तजिअ संसउ अस जानी। भंजब धनुष रामु सुनु रानी।।

  2698. RCM 1.257.3Open verse →

    सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    सखी बचन सुनि भै परतीती। मिटा बिषादु बढ़ी अति प्रीती।।

  2699. RCM 1.257.4Open verse →

    तब रामहि बिलोकि बैदेही। सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही।।

    अर्थ · Hindi

    तब रामहि बिलोकि बैदेही। सभय हृदयँ बिनवति जेहि तेही।।

  2700. RCM 1.257.5Open verse →

    मनहीं मन मनाव अकुलानी। होहु प्रसन्न महेस भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    मनहीं मन मनाव अकुलानी। होहु प्रसन्न महेस भवानी।।

  2701. RCM 1.257.6Open verse →

    करहु सफल आपनि सेवकाई। करि हितु हरहु चाप गरुआई।।

    अर्थ · Hindi

    करहु सफल आपनि सेवकाई। करि हितु हरहु चाप गरुआई।।

  2702. RCM 1.257.7Open verse →

    गननायक बरदायक देवा। आजु लगें कीन्हिउँ तुअ सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    गननायक बरदायक देवा। आजु लगें कीन्हिउँ तुअ सेवा।।

  2703. RCM 1.257.8Open verse →

    बार बार बिनती सुनि मोरी। करहु चाप गुरुता अति थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार बिनती सुनि मोरी। करहु चाप गुरुता अति थोरी।।

  2704. RCM 1.257.9Open verse →

    देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।

    अर्थ · Hindi

    देखि देखि रघुबीर तन सुर मनाव धरि धीर।।

  2705. RCM 1.257.10Open verse →

    भरे बिलोचन प्रेम जल पुलकावली सरीर।।257।।

    अर्थ · Hindi

    भरे बिलोचन प्रेम जल पुलकावली सरीर।।257।।

  2706. RCM 1.258.1Open verse →

    नीकें निरखि नयन भरि सोभा। पितु पनु सुमिरि बहुरि मनु छोभा।।

    अर्थ · Hindi

    नीकें निरखि नयन भरि सोभा। पितु पनु सुमिरि बहुरि मनु छोभा।।

  2707. RCM 1.258.2Open verse →

    अहह तात दारुनि हठ ठानी। समुझत नहिं कछु लाभु न हानी।।

    अर्थ · Hindi

    अहह तात दारुनि हठ ठानी। समुझत नहिं कछु लाभु न हानी।।

  2708. RCM 1.258.3Open verse →

    सचिव सभय सिख देइ न कोई। बुध समाज बड़ अनुचित होई।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव सभय सिख देइ न कोई। बुध समाज बड़ अनुचित होई।।

  2709. RCM 1.258.4Open verse →

    कहँ धनु कुलिसहु चाहि कठोरा। कहँ स्यामल मृदुगात किसोरा।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ धनु कुलिसहु चाहि कठोरा। कहँ स्यामल मृदुगात किसोरा।।

  2710. RCM 1.258.5Open verse →

    बिधि केहि भाँति धरौं उर धीरा। सिरस सुमन कन बेधिअ हीरा।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि केहि भाँति धरौं उर धीरा। सिरस सुमन कन बेधिअ हीरा।।

  2711. RCM 1.258.6Open verse →

    सकल सभा कै मति भै भोरी। अब मोहि संभुचाप गति तोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सभा कै मति भै भोरी। अब मोहि संभुचाप गति तोरी।।

  2712. RCM 1.258.7Open verse →

    निज जड़ता लोगन्ह पर डारी। होहि हरुअ रघुपतिहि निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    निज जड़ता लोगन्ह पर डारी। होहि हरुअ रघुपतिहि निहारी।।

  2713. RCM 1.258.8Open verse →

    अति परिताप सीय मन माही। लव निमेष जुग सब सय जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अति परिताप सीय मन माही। लव निमेष जुग सब सय जाहीं।।

  2714. RCM 1.258.9Open verse →

    प्रभुहि चितइ पुनि चितव महि राजत लोचन लोल।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुहि चितइ पुनि चितव महि राजत लोचन लोल।

  2715. RCM 1.258.10Open verse →

    खेलत मनसिज मीन जुग जनु बिधु मंडल डोल।।258।।

    अर्थ · Hindi

    खेलत मनसिज मीन जुग जनु बिधु मंडल डोल।।258।।

  2716. RCM 1.259.1Open verse →

    गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी।।

    अर्थ · Hindi

    गिरा अलिनि मुख पंकज रोकी। प्रगट न लाज निसा अवलोकी।।

  2717. RCM 1.259.2Open verse →

    लोचन जलु रह लोचन कोना। जैसे परम कृपन कर सोना।।

    अर्थ · Hindi

    लोचन जलु रह लोचन कोना। जैसे परम कृपन कर सोना।।

  2718. RCM 1.259.3Open verse →

    सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी। धरि धीरजु प्रतीति उर आनी।।

    अर्थ · Hindi

    सकुची ब्याकुलता बड़ि जानी। धरि धीरजु प्रतीति उर आनी।।

  2719. RCM 1.259.4Open verse →

    तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चितु राचा।।

    अर्थ · Hindi

    तन मन बचन मोर पनु साचा। रघुपति पद सरोज चितु राचा।।

  2720. RCM 1.259.5Open verse →

    तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहिं मोहि रघुबर कै दासी।।

    अर्थ · Hindi

    तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहिं मोहि रघुबर कै दासी।।

  2721. RCM 1.259.6Open verse →

    जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संहेहू।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संहेहू।।

  2722. RCM 1.259.7Open verse →

    प्रभु तन चितइ प्रेम तन ठाना। कृपानिधान राम सबु जाना।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु तन चितइ प्रेम तन ठाना। कृपानिधान राम सबु जाना।।

  2723. RCM 1.259.8Open verse →

    सियहि बिलोकि तकेउ धनु कैसे। चितव गरुरु लघु ब्यालहि जैसे।।

    अर्थ · Hindi

    सियहि बिलोकि तकेउ धनु कैसे। चितव गरुरु लघु ब्यालहि जैसे।।

  2724. RCM 1.259.9Open verse →

    लखन लखेउ रघुबंसमनि ताकेउ हर कोदंडु।

    अर्थ · Hindi

    लखन लखेउ रघुबंसमनि ताकेउ हर कोदंडु।

  2725. RCM 1.259.10Open verse →

    पुलकि गात बोले बचन चरन चापि ब्रह्मांडु।।259।।

    अर्थ · Hindi

    पुलकि गात बोले बचन चरन चापि ब्रह्मांडु।।259।।

  2726. RCM 1.260.1Open verse →

    दिसकुंजरहु कमठ अहि कोला। धरहु धरनि धरि धीर न डोला।।

    अर्थ · Hindi

    दिसकुंजरहु कमठ अहि कोला। धरहु धरनि धरि धीर न डोला।।

  2727. RCM 1.260.2Open verse →

    रामु चहहिं संकर धनु तोरा। होहु सजग सुनि आयसु मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    रामु चहहिं संकर धनु तोरा। होहु सजग सुनि आयसु मोरा।।

  2728. RCM 1.260.3Open verse →

    चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।।

    अर्थ · Hindi

    चाप सपीप रामु जब आए। नर नारिन्ह सुर सुकृत मनाए।।

  2729. RCM 1.260.4Open verse →

    सब कर संसउ अरु अग्यानू। मंद महीपन्ह कर अभिमानू।।

    अर्थ · Hindi

    सब कर संसउ अरु अग्यानू। मंद महीपन्ह कर अभिमानू।।

  2730. RCM 1.260.5Open verse →

    भृगुपति केरि गरब गरुआई। सुर मुनिबरन्ह केरि कदराई।।

    अर्थ · Hindi

    भृगुपति केरि गरब गरुआई। सुर मुनिबरन्ह केरि कदराई।।

  2731. RCM 1.260.6Open verse →

    सिय कर सोचु जनक पछितावा। रानिन्ह कर दारुन दुख दावा।।

    अर्थ · Hindi

    सिय कर सोचु जनक पछितावा। रानिन्ह कर दारुन दुख दावा।।

  2732. RCM 1.260.7Open verse →

    संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    संभुचाप बड बोहितु पाई। चढे जाइ सब संगु बनाई।।

  2733. RCM 1.260.8Open verse →

    राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहि कोउ कड़हारू।।

    अर्थ · Hindi

    राम बाहुबल सिंधु अपारू। चहत पारु नहि कोउ कड़हारू।।

  2734. RCM 1.260.9Open verse →

    राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।

    अर्थ · Hindi

    राम बिलोके लोग सब चित्र लिखे से देखि।

  2735. RCM 1.260.10Open verse →

    चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि।।260।।

    अर्थ · Hindi

    चितई सीय कृपायतन जानी बिकल बिसेषि।।260।।

  2736. RCM 1.261.1Open verse →

    देखी बिपुल बिकल बैदेही। निमिष बिहात कलप सम तेही।।

    अर्थ · Hindi

    देखी बिपुल बिकल बैदेही। निमिष बिहात कलप सम तेही।।

  2737. RCM 1.261.2Open verse →

    तृषित बारि बिनु जो तनु त्यागा। मुएँ करइ का सुधा तड़ागा।।

    अर्थ · Hindi

    तृषित बारि बिनु जो तनु त्यागा। मुएँ करइ का सुधा तड़ागा।।

  2738. RCM 1.261.3Open verse →

    का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें।।

    अर्थ · Hindi

    का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें।।

  2739. RCM 1.261.4Open verse →

    अस जियँ जानि जानकी देखी। प्रभु पुलके लखि प्रीति बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    अस जियँ जानि जानकी देखी। प्रभु पुलके लखि प्रीति बिसेषी।।

  2740. RCM 1.261.5Open verse →

    गुरहि प्रनामु मनहि मन कीन्हा। अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    गुरहि प्रनामु मनहि मन कीन्हा। अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।

  2741. RCM 1.261.6Open verse →

    दमकेउ दामिनि जिमि जब लयऊ। पुनि नभ धनु मंडल सम भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    दमकेउ दामिनि जिमि जब लयऊ। पुनि नभ धनु मंडल सम भयऊ।।

  2742. RCM 1.261.7Open verse →

    लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें।।

    अर्थ · Hindi

    लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें।।

  2743. RCM 1.261.8Open verse →

    तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा।।

  2744. RCM 1.262.1Open verse →

    प्रभु दोउ चापखंड महि डारे। देखि लोग सब भए सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु दोउ चापखंड महि डारे। देखि लोग सब भए सुखारे।।

  2745. RCM 1.262.2Open verse →

    कोसिकरुप पयोनिधि पावन। प्रेम बारि अवगाहु सुहावन।।

    अर्थ · Hindi

    कोसिकरुप पयोनिधि पावन। प्रेम बारि अवगाहु सुहावन।।

  2746. RCM 1.262.3Open verse →

    रामरूप राकेसु निहारी। बढ़त बीचि पुलकावलि भारी।।

    अर्थ · Hindi

    रामरूप राकेसु निहारी। बढ़त बीचि पुलकावलि भारी।।

  2747. RCM 1.262.4Open verse →

    बाजे नभ गहगहे निसाना। देवबधू नाचहिं करि गाना।।

    अर्थ · Hindi

    बाजे नभ गहगहे निसाना। देवबधू नाचहिं करि गाना।।

  2748. RCM 1.262.5Open verse →

    ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहि देहिं असीसा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मादिक सुर सिद्ध मुनीसा। प्रभुहि प्रसंसहि देहिं असीसा।।

  2749. RCM 1.262.6Open verse →

    बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला।।

    अर्थ · Hindi

    बरिसहिं सुमन रंग बहु माला। गावहिं किंनर गीत रसाला।।

  2750. RCM 1.262.7Open verse →

    रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।

    अर्थ · Hindi

    रही भुवन भरि जय जय बानी। धनुषभंग धुनि जात न जानी।।

  2751. RCM 1.262.8Open verse →

    मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित कहहिं जहँ तहँ नर नारी। भंजेउ राम संभुधनु भारी।।

  2752. RCM 1.262.9Open verse →

    बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।

    अर्थ · Hindi

    बंदी मागध सूतगन बिरुद बदहिं मतिधीर।

  2753. RCM 1.262.10Open verse →

    करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर।।262।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं निछावरि लोग सब हय गय धन मनि चीर।।262।।

  2754. RCM 1.263.1Open verse →

    झाँझि मृदंग संख सहनाई। भेरि ढोल दुंदुभी सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    झाँझि मृदंग संख सहनाई। भेरि ढोल दुंदुभी सुहाई।।

  2755. RCM 1.263.2Open verse →

    बाजहिं बहु बाजने सुहाए। जहँ तहँ जुबतिन्ह मंगल गाए।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं बहु बाजने सुहाए। जहँ तहँ जुबतिन्ह मंगल गाए।।

  2756. RCM 1.263.3Open verse →

    सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।।

    अर्थ · Hindi

    सखिन्ह सहित हरषी अति रानी। सूखत धान परा जनु पानी।।

  2757. RCM 1.263.4Open verse →

    जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनक लहेउ सुखु सोचु बिहाई। पैरत थकें थाह जनु पाई।।

  2758. RCM 1.263.5Open verse →

    श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीहत भए भूप धनु टूटे। जैसें दिवस दीप छबि छूटे।।

  2759. RCM 1.263.6Open verse →

    सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती। जनु चातकी पाइ जलु स्वाती।।

    अर्थ · Hindi

    सीय सुखहि बरनिअ केहि भाँती। जनु चातकी पाइ जलु स्वाती।।

  2760. RCM 1.263.7Open verse →

    रामहि लखनु बिलोकत कैसें। ससिहि चकोर किसोरकु जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि लखनु बिलोकत कैसें। ससिहि चकोर किसोरकु जैसें।।

  2761. RCM 1.263.8Open verse →

    सतानंद तब आयसु दीन्हा। सीताँ गमनु राम पहिं कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    सतानंद तब आयसु दीन्हा। सीताँ गमनु राम पहिं कीन्हा।।

  2762. RCM 1.263.9Open verse →

    संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।

    अर्थ · Hindi

    संग सखीं सुदंर चतुर गावहिं मंगलचार।

  2763. RCM 1.263.10Open verse →

    गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार।।263।।

    अर्थ · Hindi

    गवनी बाल मराल गति सुषमा अंग अपार।।263।।

  2764. RCM 1.264.1Open verse →

    सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे। छबिगन मध्य महाछबि जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    सखिन्ह मध्य सिय सोहति कैसे। छबिगन मध्य महाछबि जैसें।।

  2765. RCM 1.264.2Open verse →

    कर सरोज जयमाल सुहाई। बिस्व बिजय सोभा जेहिं छाई।।

    अर्थ · Hindi

    कर सरोज जयमाल सुहाई। बिस्व बिजय सोभा जेहिं छाई।।

  2766. RCM 1.264.3Open verse →

    तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू।।

    अर्थ · Hindi

    तन सकोचु मन परम उछाहू। गूढ़ प्रेमु लखि परइ न काहू।।

  2767. RCM 1.264.4Open verse →

    जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुँअरि चित्र अवरेखी।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ समीप राम छबि देखी। रहि जनु कुँअरि चित्र अवरेखी।।

  2768. RCM 1.264.5Open verse →

    चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    चतुर सखीं लखि कहा बुझाई। पहिरावहु जयमाल सुहाई।।

  2769. RCM 1.264.6Open verse →

    सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत जुगल कर माल उठाई। प्रेम बिबस पहिराइ न जाई।।

  2770. RCM 1.264.7Open verse →

    सोहत जनु जुग जलज सनाला। ससिहि सभीत देत जयमाला।।

    अर्थ · Hindi

    सोहत जनु जुग जलज सनाला। ससिहि सभीत देत जयमाला।।

  2771. RCM 1.264.8Open verse →

    गावहिं छबि अवलोकि सहेली। सियँ जयमाल राम उर मेली।।

    अर्थ · Hindi

    गावहिं छबि अवलोकि सहेली। सियँ जयमाल राम उर मेली।।

  2772. RCM 1.264.9Open verse →

    रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन।

    अर्थ · Hindi

    रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन।

  2773. RCM 1.264.10Open verse →

    सकुचे सकल भुआल जनु बिलोकि रबि कुमुदगन।।264।।

    अर्थ · Hindi

    सकुचे सकल भुआल जनु बिलोकि रबि कुमुदगन।।264।।

  2774. RCM 1.265.1Open verse →

    पुर अरु ब्योम बाजने बाजे। खल भए मलिन साधु सब राजे।।

    अर्थ · Hindi

    पुर अरु ब्योम बाजने बाजे। खल भए मलिन साधु सब राजे।।

  2775. RCM 1.265.2Open verse →

    सुर किंनर नर नाग मुनीसा। जय जय जय कहि देहिं असीसा।।

    अर्थ · Hindi

    सुर किंनर नर नाग मुनीसा। जय जय जय कहि देहिं असीसा।।

  2776. RCM 1.265.3Open verse →

    नाचहिं गावहिं बिबुध बधूटीं। बार बार कुसुमांजलि छूटीं।।

    अर्थ · Hindi

    नाचहिं गावहिं बिबुध बधूटीं। बार बार कुसुमांजलि छूटीं।।

  2777. RCM 1.265.4Open verse →

    जहँ तहँ बिप्र बेदधुनि करहीं। बंदी बिरदावलि उच्चरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ बिप्र बेदधुनि करहीं। बंदी बिरदावलि उच्चरहीं।।

  2778. RCM 1.265.5Open verse →

    महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।।

    अर्थ · Hindi

    महि पाताल नाक जसु ब्यापा। राम बरी सिय भंजेउ चापा।।

  2779. RCM 1.265.6Open verse →

    करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं आरती पुर नर नारी। देहिं निछावरि बित्त बिसारी।।

  2780. RCM 1.265.7Open verse →

    सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सोहति सीय राम कै जौरी। छबि सिंगारु मनहुँ एक ठोरी।।

  2781. RCM 1.265.8Open verse →

    सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता।।

    अर्थ · Hindi

    सखीं कहहिं प्रभुपद गहु सीता। करति न चरन परस अति भीता।।

  2782. RCM 1.265.9Open verse →

    गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परसति पग पानि।

    अर्थ · Hindi

    गौतम तिय गति सुरति करि नहिं परसति पग पानि।

  2783. RCM 1.265.10Open verse →

    मन बिहसे रघुबंसमनि प्रीति अलौकिक जानि।।265।।

    अर्थ · Hindi

    मन बिहसे रघुबंसमनि प्रीति अलौकिक जानि।।265।।

  2784. RCM 1.266.1Open verse →

    तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे।।

    अर्थ · Hindi

    तब सिय देखि भूप अभिलाषे। कूर कपूत मूढ़ मन माखे।।

  2785. RCM 1.266.2Open verse →

    उठि उठि पहिरि सनाह अभागे। जहँ तहँ गाल बजावन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    उठि उठि पहिरि सनाह अभागे। जहँ तहँ गाल बजावन लागे।।

  2786. RCM 1.266.3Open verse →

    लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    लेहु छड़ाइ सीय कह कोऊ। धरि बाँधहु नृप बालक दोऊ।।

  2787. RCM 1.266.4Open verse →

    तोरें धनुषु चाड़ नहिं सरई। जीवत हमहि कुअँरि को बरई।।

    अर्थ · Hindi

    तोरें धनुषु चाड़ नहिं सरई। जीवत हमहि कुअँरि को बरई।।

  2788. RCM 1.266.5Open verse →

    जौं बिदेहु कछु करै सहाई। जीतहु समर सहित दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बिदेहु कछु करै सहाई। जीतहु समर सहित दोउ भाई।।

  2789. RCM 1.266.6Open verse →

    साधु भूप बोले सुनि बानी। राजसमाजहि लाज लजानी।।

    अर्थ · Hindi

    साधु भूप बोले सुनि बानी। राजसमाजहि लाज लजानी।।

  2790. RCM 1.266.7Open verse →

    बलु प्रतापु बीरता बड़ाई। नाक पिनाकहि संग सिधाई।।

    अर्थ · Hindi

    बलु प्रतापु बीरता बड़ाई। नाक पिनाकहि संग सिधाई।।

  2791. RCM 1.266.8Open verse →

    सोइ सूरता कि अब कहुँ पाई। असि बुधि तौ बिधि मुहँ मसि लाई।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ सूरता कि अब कहुँ पाई। असि बुधि तौ बिधि मुहँ मसि लाई।।

  2792. RCM 1.266.9Open verse →

    देखहु रामहि नयन भरि तजि इरिषा मदु कोहु।

    अर्थ · Hindi

    देखहु रामहि नयन भरि तजि इरिषा मदु कोहु।

  2793. RCM 1.266.10Open verse →

    लखन रोषु पावकु प्रबल जानि सलभ जनि होहु।।266।।

    अर्थ · Hindi

    लखन रोषु पावकु प्रबल जानि सलभ जनि होहु।।266।।

  2794. RCM 1.267.1Open verse →

    बैनतेय बलि जिमि चह कागू। जिमि ससु चहै नाग अरि भागू।।

    अर्थ · Hindi

    बैनतेय बलि जिमि चह कागू। जिमि ससु चहै नाग अरि भागू।।

  2795. RCM 1.267.2Open verse →

    जिमि चह कुसल अकारन कोही। सब संपदा चहै सिवद्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि चह कुसल अकारन कोही। सब संपदा चहै सिवद्रोही।।

  2796. RCM 1.267.3Open verse →

    लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई।।

    अर्थ · Hindi

    लोभी लोलुप कल कीरति चहई। अकलंकता कि कामी लहई।।

  2797. RCM 1.267.4Open verse →

    हरि पद बिमुख परम गति चाहा। तस तुम्हार लालचु नरनाहा।।

    अर्थ · Hindi

    हरि पद बिमुख परम गति चाहा। तस तुम्हार लालचु नरनाहा।।

  2798. RCM 1.267.5Open verse →

    कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी।।

    अर्थ · Hindi

    कोलाहलु सुनि सीय सकानी। सखीं लवाइ गईं जहँ रानी।।

  2799. RCM 1.267.6Open verse →

    रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं। सिय सनेहु बरनत मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    रामु सुभायँ चले गुरु पाहीं। सिय सनेहु बरनत मन माहीं।।

  2800. RCM 1.267.7Open verse →

    रानिन्ह सहित सोचबस सीया। अब धौं बिधिहि काह करनीया।।

    अर्थ · Hindi

    रानिन्ह सहित सोचबस सीया। अब धौं बिधिहि काह करनीया।।

  2801. RCM 1.267.8Open verse →

    भूप बचन सुनि इत उत तकहीं। लखनु राम डर बोलि न सकहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भूप बचन सुनि इत उत तकहीं। लखनु राम डर बोलि न सकहीं।।

  2802. RCM 1.267.9Open verse →

    अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप।

    अर्थ · Hindi

    अरुन नयन भृकुटी कुटिल चितवत नृपन्ह सकोप।

  2803. RCM 1.267.10Open verse →

    मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप।।267।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ मत्त गजगन निरखि सिंघकिसोरहि चोप।।267।।

  2804. RCM 1.268.1Open verse →

    खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं।।

    अर्थ · Hindi

    खरभरु देखि बिकल पुर नारीं। सब मिलि देहिं महीपन्ह गारीं।।

  2805. RCM 1.268.2Open verse →

    तेहिं अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयसु भृगुकुल कमल पतंगा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं अवसर सुनि सिव धनु भंगा। आयसु भृगुकुल कमल पतंगा।।

  2806. RCM 1.268.3Open verse →

    देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने।।

    अर्थ · Hindi

    देखि महीप सकल सकुचाने। बाज झपट जनु लवा लुकाने।।

  2807. RCM 1.268.4Open verse →

    गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा।।

    अर्थ · Hindi

    गौरि सरीर भूति भल भ्राजा। भाल बिसाल त्रिपुंड बिराजा।।

  2808. RCM 1.268.5Open verse →

    सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।।

    अर्थ · Hindi

    सीस जटा ससिबदनु सुहावा। रिसबस कछुक अरुन होइ आवा।।

  2809. RCM 1.268.6Open verse →

    भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते।।

    अर्थ · Hindi

    भृकुटी कुटिल नयन रिस राते। सहजहुँ चितवत मनहुँ रिसाते।।

  2810. RCM 1.268.7Open verse →

    बृषभ कंध उर बाहु बिसाला। चारु जनेउ माल मृगछाला।।

    अर्थ · Hindi

    बृषभ कंध उर बाहु बिसाला। चारु जनेउ माल मृगछाला।।

  2811. RCM 1.268.8Open verse →

    कटि मुनि बसन तून दुइ बाँधें। धनु सर कर कुठारु कल काँधें।।

    अर्थ · Hindi

    कटि मुनि बसन तून दुइ बाँधें। धनु सर कर कुठारु कल काँधें।।

  2812. RCM 1.268.9Open verse →

    सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरुप।

    अर्थ · Hindi

    सांत बेषु करनी कठिन बरनि न जाइ सरुप।

  2813. RCM 1.268.10Open verse →

    धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप।।268।।

    अर्थ · Hindi

    धरि मुनितनु जनु बीर रसु आयउ जहँ सब भूप।।268।।

  2814. RCM 1.269.1Open verse →

    देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला।।

    अर्थ · Hindi

    देखत भृगुपति बेषु कराला। उठे सकल भय बिकल भुआला।।

  2815. RCM 1.269.2Open verse →

    पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।

    अर्थ · Hindi

    पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।

  2816. RCM 1.269.3Open verse →

    जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि सुभायँ चितवहिं हितु जानी। सो जानइ जनु आइ खुटानी।।

  2817. RCM 1.269.4Open verse →

    जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा।।

    अर्थ · Hindi

    जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा।।

  2818. RCM 1.269.5Open verse →

    आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।

    अर्थ · Hindi

    आसिष दीन्हि सखीं हरषानीं। निज समाज लै गई सयानीं।।

  2819. RCM 1.269.6Open verse →

    बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वामित्रु मिले पुनि आई। पद सरोज मेले दोउ भाई।।

  2820. RCM 1.269.7Open verse →

    रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा।।

    अर्थ · Hindi

    रामु लखनु दसरथ के ढोटा। दीन्हि असीस देखि भल जोटा।।

  2821. RCM 1.269.8Open verse →

    रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि चितइ रहे थकि लोचन। रूप अपार मार मद मोचन।।

  2822. RCM 1.269.9Open verse →

    बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बिलोकि बिदेह सन कहहु काह अति भीर।।

  2823. RCM 1.269.10Open verse →

    पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर।।269।।

    अर्थ · Hindi

    पूछत जानि अजान जिमि ब्यापेउ कोपु सरीर।।269।।

  2824. RCM 1.270.1Open verse →

    समाचार कहि जनक सुनाए। जेहि कारन महीप सब आए।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार कहि जनक सुनाए। जेहि कारन महीप सब आए।।

  2825. RCM 1.270.2Open verse →

    सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन फिरि अनत निहारे। देखे चापखंड महि डारे।।

  2826. RCM 1.270.3Open verse →

    अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा।।

  2827. RCM 1.270.4Open verse →

    बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि देखाउ मूढ़ न त आजू। उलटउँ महि जहँ लहि तव राजू।।

  2828. RCM 1.270.5Open verse →

    अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं।।

  2829. RCM 1.270.6Open verse →

    सुर मुनि नाग नगर नर नारी।।सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुर मुनि नाग नगर नर नारी।।सोचहिं सकल त्रास उर भारी।।

  2830. RCM 1.270.7Open verse →

    मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।।

    अर्थ · Hindi

    मन पछिताति सीय महतारी। बिधि अब सँवरी बात बिगारी।।

  2831. RCM 1.270.8Open verse →

    भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता।।

    अर्थ · Hindi

    भृगुपति कर सुभाउ सुनि सीता। अरध निमेष कलप सम बीता।।

  2832. RCM 1.270.9Open verse →

    सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु।

    अर्थ · Hindi

    सभय बिलोके लोग सब जानि जानकी भीरु।

  2833. RCM 1.270.10Open verse →

    हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु।।270।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघुबीरु।।270।।

  2834. RCM 1.271.1Open verse →

    नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा।।

  2835. RCM 1.271.2Open verse →

    आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही।।

  2836. RCM 1.271.3Open verse →

    सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई।।

    अर्थ · Hindi

    सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरि करनी करि करिअ लराई।।

  2837. RCM 1.271.4Open verse →

    सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा।।

  2838. RCM 1.271.5Open verse →

    सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।

    अर्थ · Hindi

    सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।

  2839. RCM 1.271.6Open verse →

    सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।

  2840. RCM 1.271.7Open verse →

    बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।

    अर्थ · Hindi

    बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं।।

  2841. RCM 1.271.8Open verse →

    एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।

    अर्थ · Hindi

    एहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू।।

  2842. RCM 1.271.9Open verse →

    रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँमार।।

    अर्थ · Hindi

    रे नृप बालक कालबस बोलत तोहि न सँमार।।

  2843. RCM 1.271.10Open verse →

    धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।271।।

    अर्थ · Hindi

    धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार।।271।।

  2844. RCM 1.272.1Open verse →

    लखन कहा हँसि हमरें जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।

    अर्थ · Hindi

    लखन कहा हँसि हमरें जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।।

  2845. RCM 1.272.2Open verse →

    का छति लाभु जून धनु तौरें। देखा राम नयन के भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    का छति लाभु जून धनु तौरें। देखा राम नयन के भोरें।।

  2846. RCM 1.272.3Open verse →

    छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।

    अर्थ · Hindi

    छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू ।

  2847. RCM 1.272.4Open verse →

    बोले चितइ परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    बोले चितइ परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।।

  2848. RCM 1.272.5Open verse →

    बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।।

    अर्थ · Hindi

    बालकु बोलि बधउँ नहिं तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।।

  2849. RCM 1.272.6Open verse →

    बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्व बिदित छत्रियकुल द्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्व बिदित छत्रियकुल द्रोही।।

  2850. RCM 1.272.7Open verse →

    भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।

  2851. RCM 1.272.8Open verse →

    सहसबाहु भुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

    अर्थ · Hindi

    सहसबाहु भुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।

  2852. RCM 1.272.9Open verse →

    मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।

    अर्थ · Hindi

    मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।

  2853. RCM 1.272.10Open verse →

    गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।272।।

    अर्थ · Hindi

    गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।272।।

  2854. RCM 1.273.1Open verse →

    बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महा भटमानी।।

  2855. RCM 1.273.2Open verse →

    पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू।।

  2856. RCM 1.273.3Open verse →

    इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।

  2857. RCM 1.273.4Open verse →

    देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।।

  2858. RCM 1.273.5Open verse →

    भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।।

    अर्थ · Hindi

    भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु सहउँ रिस रोकी।।

  2859. RCM 1.273.6Open verse →

    सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई।।

    अर्थ · Hindi

    सुर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरें कुल इन्ह पर न सुराई।।

  2860. RCM 1.273.7Open verse →

    बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहूँ पा परिअ तुम्हारें।।

    अर्थ · Hindi

    बधें पापु अपकीरति हारें। मारतहूँ पा परिअ तुम्हारें।।

  2861. RCM 1.273.8Open verse →

    कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा।।

    अर्थ · Hindi

    कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा।।

  2862. RCM 1.273.9Open verse →

    जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।

    अर्थ · Hindi

    जो बिलोकि अनुचित कहेउँ छमहु महामुनि धीर।

  2863. RCM 1.273.10Open verse →

    सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गभीर।।273।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सरोष भृगुबंसमनि बोले गिरा गभीर।।273।।

  2864. RCM 1.274.1Open verse →

    कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिल कालबस निज कुल घालकु।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिक सुनहु मंद यहु बालकु। कुटिल कालबस निज कुल घालकु।।

  2865. RCM 1.274.2Open verse →

    भानु बंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू।।

    अर्थ · Hindi

    भानु बंस राकेस कलंकू। निपट निरंकुस अबुध असंकू।।

  2866. RCM 1.274.3Open verse →

    काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    काल कवलु होइहि छन माहीं। कहउँ पुकारि खोरि मोहि नाहीं।।

  2867. RCM 1.274.4Open verse →

    तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह हटकउ जौं चहहु उबारा। कहि प्रतापु बलु रोषु हमारा।।

  2868. RCM 1.274.5Open verse →

    लखन कहेउ मुनि सुजस तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा।।

    अर्थ · Hindi

    लखन कहेउ मुनि सुजस तुम्हारा। तुम्हहि अछत को बरनै पारा।।

  2869. RCM 1.274.6Open verse →

    अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी। बार अनेक भाँति बहु बरनी।।

  2870. RCM 1.274.7Open verse →

    नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं संतोषु त पुनि कछु कहहू। जनि रिस रोकि दुसह दुख सहहू।।

  2871. RCM 1.274.8Open verse →

    बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।

    अर्थ · Hindi

    बीरब्रती तुम्ह धीर अछोभा। गारी देत न पावहु सोभा।।

  2872. RCM 1.274.9Open verse →

    सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।

    अर्थ · Hindi

    सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु।

  2873. RCM 1.274.10Open verse →

    बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।274।।

    अर्थ · Hindi

    बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु।।274।।

  2874. RCM 1.275.1Open verse →

    तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा।।

  2875. RCM 1.275.2Open verse →

    सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा।।

  2876. RCM 1.275.3Open verse →

    अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालकु बधजोगू।।

    अर्थ · Hindi

    अब जनि देइ दोसु मोहि लोगू। कटुबादी बालकु बधजोगू।।

  2877. RCM 1.275.4Open verse →

    बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब यहु मरनिहार भा साँचा।।

    अर्थ · Hindi

    बाल बिलोकि बहुत मैं बाँचा। अब यहु मरनिहार भा साँचा।।

  2878. RCM 1.275.5Open verse →

    कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।

  2879. RCM 1.275.6Open verse →

    खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगें अपराधी गुरुद्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगें अपराधी गुरुद्रोही।।

  2880. RCM 1.275.7Open verse →

    उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें।।

    अर्थ · Hindi

    उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें।।

  2881. RCM 1.275.8Open verse →

    न त एहि काटि कुठार कठोरें। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें।।

    अर्थ · Hindi

    न त एहि काटि कुठार कठोरें। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें।।

  2882. RCM 1.275.9Open verse →

    गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।

    अर्थ · Hindi

    गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरिअरइ सूझ।

  2883. RCM 1.275.10Open verse →

    अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।275।।

    अर्थ · Hindi

    अयमय खाँड न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।275।।

  2884. RCM 1.276.1Open verse →

    कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।

  2885. RCM 1.276.2Open verse →

    माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।।

    अर्थ · Hindi

    माता पितहि उरिन भए नीकें। गुर रिनु रहा सोचु बड़ जीकें।।

  2886. RCM 1.276.3Open verse →

    सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    सो जनु हमरेहि माथे काढ़ा। दिन चलि गए ब्याज बड़ बाढ़ा।।

  2887. RCM 1.276.4Open verse →

    अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली।।

    अर्थ · Hindi

    अब आनिअ ब्यवहरिआ बोली। तुरत देउँ मैं थैली खोली।।

  2888. RCM 1.276.5Open verse →

    सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि कटु बचन कुठार सुधारा। हाय हाय सब सभा पुकारा।।

  2889. RCM 1.276.6Open verse →

    भृगुबर परसु देखावहु मोही। बिप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    भृगुबर परसु देखावहु मोही। बिप्र बिचारि बचउँ नृपद्रोही।।

  2890. RCM 1.276.7Open verse →

    मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।

    अर्थ · Hindi

    मिले न कबहुँ सुभट रन गाढ़े। द्विज देवता घरहि के बाढ़े।।

  2891. RCM 1.276.8Open verse →

    अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।

    अर्थ · Hindi

    अनुचित कहि सब लोग पुकारे। रघुपति सयनहिं लखनु नेवारे।।

  2892. RCM 1.276.9Open verse →

    लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।

    अर्थ · Hindi

    लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु।

  2893. RCM 1.276.10Open verse →

    बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।276।।

    अर्थ · Hindi

    बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।276।।

  2894. RCM 1.277.1Open verse →

    नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू।।

  2895. RCM 1.277.2Open verse →

    जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना।।

  2896. RCM 1.277.3Open verse →

    जौं लरिका कछु अचगरि करहीं। गुर पितु मातु मोद मन भरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं लरिका कछु अचगरि करहीं। गुर पितु मातु मोद मन भरहीं।।

  2897. RCM 1.277.4Open verse →

    करिअ कृपा सिसु सेवक जानी। तुम्ह सम सील धीर मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    करिअ कृपा सिसु सेवक जानी। तुम्ह सम सील धीर मुनि ग्यानी।।

  2898. RCM 1.277.5Open verse →

    राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने। कहि कछु लखनु बहुरि मुसकाने।।

    अर्थ · Hindi

    राम बचन सुनि कछुक जुड़ाने। कहि कछु लखनु बहुरि मुसकाने।।

  2899. RCM 1.277.6Open verse →

    हँसत देखि नख सिख रिस ब्यापी। राम तोर भ्राता बड़ पापी।।

    अर्थ · Hindi

    हँसत देखि नख सिख रिस ब्यापी। राम तोर भ्राता बड़ पापी।।

  2900. RCM 1.277.7Open verse →

    गौर सरीर स्याम मन माहीं। कालकूटमुख पयमुख नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गौर सरीर स्याम मन माहीं। कालकूटमुख पयमुख नाहीं।।

  2901. RCM 1.277.8Open verse →

    सहज टेढ़ अनुहरइ न तोही। नीचु मीचु सम देख न मौहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सहज टेढ़ अनुहरइ न तोही। नीचु मीचु सम देख न मौहीं।।

  2902. RCM 1.277.9Open verse →

    लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।

    अर्थ · Hindi

    लखन कहेउ हँसि सुनहु मुनि क्रोधु पाप कर मूल।

  2903. RCM 1.277.10Open verse →

    जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल।।277।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बस जन अनुचित करहिं चरहिं बिस्व प्रतिकूल।।277।।

  2904. RCM 1.278.1Open verse →

    मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया।।

    अर्थ · Hindi

    मैं तुम्हार अनुचर मुनिराया। परिहरि कोपु करिअ अब दाया।।

  2905. RCM 1.278.2Open verse →

    टूट चाप नहिं जुरहि रिसाने। बैठिअ होइहिं पाय पिराने।।

    अर्थ · Hindi

    टूट चाप नहिं जुरहि रिसाने। बैठिअ होइहिं पाय पिराने।।

  2906. RCM 1.278.3Open verse →

    जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौ अति प्रिय तौ करिअ उपाई। जोरिअ कोउ बड़ गुनी बोलाई।।

  2907. RCM 1.278.4Open verse →

    बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं। मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बोलत लखनहिं जनकु डेराहीं। मष्ट करहु अनुचित भल नाहीं।।

  2908. RCM 1.278.5Open verse →

    थर थर कापहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी।।

    अर्थ · Hindi

    थर थर कापहिं पुर नर नारी। छोट कुमार खोट बड़ भारी।।

  2909. RCM 1.278.6Open verse →

    भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी। रिस तन जरइ होइ बल हानी।।

    अर्थ · Hindi

    भृगुपति सुनि सुनि निरभय बानी। रिस तन जरइ होइ बल हानी।।

  2910. RCM 1.278.7Open verse →

    बोले रामहि देइ निहोरा। बचउँ बिचारि बंधु लघु तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    बोले रामहि देइ निहोरा। बचउँ बिचारि बंधु लघु तोरा।।

  2911. RCM 1.278.8Open verse →

    मनु मलीन तनु सुंदर कैसें। बिष रस भरा कनक घटु जैसैं।।

    अर्थ · Hindi

    मनु मलीन तनु सुंदर कैसें। बिष रस भरा कनक घटु जैसैं।।

  2912. RCM 1.278.9Open verse →

    सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।

    अर्थ · Hindi

    सुनि लछिमन बिहसे बहुरि नयन तरेरे राम।

  2913. RCM 1.278.10Open verse →

    गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम।।278।।

    अर्थ · Hindi

    गुर समीप गवने सकुचि परिहरि बानी बाम।।278।।

  2914. RCM 1.279.1Open verse →

    अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।।

    अर्थ · Hindi

    अति बिनीत मृदु सीतल बानी। बोले रामु जोरि जुग पानी।।

  2915. RCM 1.279.2Open verse →

    सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना। बालक बचनु करिअ नहिं काना।।

  2916. RCM 1.279.3Open verse →

    बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बररै बालक एकु सुभाऊ। इन्हहि न संत बिदूषहिं काऊ।।

  2917. RCM 1.279.4Open verse →

    तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा। अपराधी में नाथ तुम्हारा।।

  2918. RCM 1.279.5Open verse →

    कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    कृपा कोपु बधु बँधब गोसाईं। मो पर करिअ दास की नाई।।

  2919. RCM 1.279.6Open verse →

    कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहिअ बेगि जेहि बिधि रिस जाई। मुनिनायक सोइ करौं उपाई।।

  2920. RCM 1.279.7Open verse →

    कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनि राम जाइ रिस कैसें। अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें।।

  2921. RCM 1.279.8Open verse →

    एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि के कंठ कुठारु न दीन्हा। तौ मैं काह कोपु करि कीन्हा।।

  2922. RCM 1.279.9Open verse →

    गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।

    अर्थ · Hindi

    गर्भ स्त्रवहिं अवनिप रवनि सुनि कुठार गति घोर।

  2923. RCM 1.279.10Open verse →

    परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर।।279।।

    अर्थ · Hindi

    परसु अछत देखउँ जिअत बैरी भूपकिसोर।।279।।

  2924. RCM 1.280.1Open verse →

    बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती।।

    अर्थ · Hindi

    बहइ न हाथु दहइ रिस छाती। भा कुठारु कुंठित नृपघाती।।

  2925. RCM 1.280.2Open verse →

    भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ। मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ बाम बिधि फिरेउ सुभाऊ। मोरे हृदयँ कृपा कसि काऊ।।

  2926. RCM 1.280.3Open verse →

    आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा।।

    अर्थ · Hindi

    आजु दया दुखु दुसह सहावा। सुनि सौमित्र बिहसि सिरु नावा।।

  2927. RCM 1.280.4Open verse →

    बाउ कृपा मूरति अनुकूला। बोलत बचन झरत जनु फूला।।

    अर्थ · Hindi

    बाउ कृपा मूरति अनुकूला। बोलत बचन झरत जनु फूला।।

  2928. RCM 1.280.5Open verse →

    जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पै कृपाँ जरिहिं मुनि गाता। क्रोध भएँ तनु राख बिधाता।।

  2929. RCM 1.280.6Open verse →

    देखु जनक हठि बालक एहू। कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू।।

    अर्थ · Hindi

    देखु जनक हठि बालक एहू। कीन्ह चहत जड़ जमपुर गेहू।।

  2930. RCM 1.280.7Open verse →

    बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा। देखत छोट खोट नृप ढोटा।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि करहु किन आँखिन्ह ओटा। देखत छोट खोट नृप ढोटा।।

  2931. RCM 1.280.8Open verse →

    बिहसे लखनु कहा मन माहीं। मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिहसे लखनु कहा मन माहीं। मूदें आँखि कतहुँ कोउ नाहीं।।

  2932. RCM 1.280.9Open verse →

    परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।

    अर्थ · Hindi

    परसुरामु तब राम प्रति बोले उर अति क्रोधु।

  2933. RCM 1.280.10Open verse →

    संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु।।280।।

    अर्थ · Hindi

    संभु सरासनु तोरि सठ करसि हमार प्रबोधु।।280।।

  2934. RCM 1.281.1Open verse →

    बंधु कहइ कटु संमत तोरें। तू छल बिनय करसि कर जोरें।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु कहइ कटु संमत तोरें। तू छल बिनय करसि कर जोरें।।

  2935. RCM 1.281.2Open verse →

    करु परितोषु मोर संग्रामा। नाहिं त छाड़ कहाउब रामा।।

    अर्थ · Hindi

    करु परितोषु मोर संग्रामा। नाहिं त छाड़ कहाउब रामा।।

  2936. RCM 1.281.3Open verse →

    छलु तजि करहि समरु सिवद्रोही। बंधु सहित न त मारउँ तोही।।

    अर्थ · Hindi

    छलु तजि करहि समरु सिवद्रोही। बंधु सहित न त मारउँ तोही।।

  2937. RCM 1.281.4Open verse →

    भृगुपति बकहिं कुठार उठाएँ। मन मुसकाहिं रामु सिर नाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    भृगुपति बकहिं कुठार उठाएँ। मन मुसकाहिं रामु सिर नाएँ।।

  2938. RCM 1.281.5Open verse →

    गुनह लखन कर हम पर रोषू। कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू।।

    अर्थ · Hindi

    गुनह लखन कर हम पर रोषू। कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू।।

  2939. RCM 1.281.6Open verse →

    टेढ़ जानि सब बंदइ काहू। बक्र चंद्रमहि ग्रसइ न राहू।।

    अर्थ · Hindi

    टेढ़ जानि सब बंदइ काहू। बक्र चंद्रमहि ग्रसइ न राहू।।

  2940. RCM 1.281.7Open verse →

    राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा। कर कुठारु आगें यह सीसा।।

    अर्थ · Hindi

    राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा। कर कुठारु आगें यह सीसा।।

  2941. RCM 1.281.8Open verse →

    जेंहिं रिस जाइ करिअ सोइ स्वामी। मोहि जानि आपन अनुगामी।।

    अर्थ · Hindi

    जेंहिं रिस जाइ करिअ सोइ स्वामी। मोहि जानि आपन अनुगामी।।

  2942. RCM 1.281.9Open verse →

    प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुहि सेवकहि समरु कस तजहु बिप्रबर रोसु।

  2943. RCM 1.281.10Open verse →

    बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु।।281।।

    अर्थ · Hindi

    बेषु बिलोकें कहेसि कछु बालकहू नहिं दोसु।।281।।

  2944. RCM 1.282.1Open verse →

    देखि कुठार बान धनु धारी। भै लरिकहि रिस बीरु बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि कुठार बान धनु धारी। भै लरिकहि रिस बीरु बिचारी।।

  2945. RCM 1.282.2Open verse →

    नामु जान पै तुम्हहि न चीन्हा। बंस सुभायँ उतरु तेंहिं दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    नामु जान पै तुम्हहि न चीन्हा। बंस सुभायँ उतरु तेंहिं दीन्हा।।

  2946. RCM 1.282.3Open verse →

    जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं तुम्ह औतेहु मुनि की नाईं। पद रज सिर सिसु धरत गोसाईं।।

  2947. RCM 1.282.4Open verse →

    छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी।।

    अर्थ · Hindi

    छमहु चूक अनजानत केरी। चहिअ बिप्र उर कृपा घनेरी।।

  2948. RCM 1.282.5Open verse →

    हमहि तुम्हहि सरिबरि कसि नाथा।।कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा।।

    अर्थ · Hindi

    हमहि तुम्हहि सरिबरि कसि नाथा।।कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा।।

  2949. RCM 1.282.6Open verse →

    राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ नाम तोहारा।।

    अर्थ · Hindi

    राम मात्र लघु नाम हमारा। परसु सहित बड़ नाम तोहारा।।

  2950. RCM 1.282.7Open verse →

    देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।।

    अर्थ · Hindi

    देव एकु गुनु धनुष हमारें। नव गुन परम पुनीत तुम्हारें।।

  2951. RCM 1.282.8Open verse →

    सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे। छमहु बिप्र अपराध हमारे।।

  2952. RCM 1.282.9Open verse →

    बार बार मुनि बिप्रबर कहा राम सन राम।

    अर्थ · Hindi

    बार बार मुनि बिप्रबर कहा राम सन राम।

  2953. RCM 1.282.10Open verse →

    बोले भृगुपति सरुष हसि तहूँ बंधु सम बाम।।282।।

    अर्थ · Hindi

    बोले भृगुपति सरुष हसि तहूँ बंधु सम बाम।।282।।

  2954. RCM 1.283.1Open verse →

    निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।।

    अर्थ · Hindi

    निपटहिं द्विज करि जानहि मोही। मैं जस बिप्र सुनावउँ तोही।।

  2955. RCM 1.283.2Open verse →

    चाप स्त्रुवा सर आहुति जानू। कोप मोर अति घोर कृसानु।।

    अर्थ · Hindi

    चाप स्त्रुवा सर आहुति जानू। कोप मोर अति घोर कृसानु।।

  2956. RCM 1.283.3Open verse →

    समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।।

    अर्थ · Hindi

    समिधि सेन चतुरंग सुहाई। महा महीप भए पसु आई।।

  2957. RCM 1.283.4Open verse →

    मै एहि परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    मै एहि परसु काटि बलि दीन्हे। समर जग्य जप कोटिन्ह कीन्हे।।

  2958. RCM 1.283.5Open verse →

    मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    मोर प्रभाउ बिदित नहिं तोरें। बोलसि निदरि बिप्र के भोरें।।

  2959. RCM 1.283.6Open verse →

    भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    भंजेउ चापु दापु बड़ बाढ़ा। अहमिति मनहुँ जीति जगु ठाढ़ा।।

  2960. RCM 1.283.7Open verse →

    राम कहा मुनि कहहु बिचारी। रिस अति बड़ि लघु चूक हमारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम कहा मुनि कहहु बिचारी। रिस अति बड़ि लघु चूक हमारी।।

  2961. RCM 1.283.8Open verse →

    छुअतहिं टूट पिनाक पुराना। मैं कहि हेतु करौं अभिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    छुअतहिं टूट पिनाक पुराना। मैं कहि हेतु करौं अभिमाना।।

  2962. RCM 1.283.9Open verse →

    जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।

    अर्थ · Hindi

    जौं हम निदरहिं बिप्र बदि सत्य सुनहु भृगुनाथ।

  2963. RCM 1.283.10Open verse →

    तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ।।283।।

    अर्थ · Hindi

    तौ अस को जग सुभटु जेहि भय बस नावहिं माथ।।283।।

  2964. RCM 1.284.1Open verse →

    देव दनुज भूपति भट नाना। समबल अधिक होउ बलवाना।।

    अर्थ · Hindi

    देव दनुज भूपति भट नाना। समबल अधिक होउ बलवाना।।

  2965. RCM 1.284.2Open verse →

    जौं रन हमहि पचारै कोऊ। लरहिं सुखेन कालु किन होऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जौं रन हमहि पचारै कोऊ। लरहिं सुखेन कालु किन होऊ।।

  2966. RCM 1.284.3Open verse →

    छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना।।

    अर्थ · Hindi

    छत्रिय तनु धरि समर सकाना। कुल कलंकु तेहिं पावँर आना।।

  2967. RCM 1.284.4Open verse →

    कहउँ सुभाउ न कुलहि प्रसंसी। कालहु डरहिं न रन रघुबंसी।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ सुभाउ न कुलहि प्रसंसी। कालहु डरहिं न रन रघुबंसी।।

  2968. RCM 1.284.5Open verse →

    बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रबंस कै असि प्रभुताई। अभय होइ जो तुम्हहि डेराई।।

  2969. RCM 1.284.6Open verse →

    सुनु मृदु गूढ़ बचन रघुपति के। उघरे पटल परसुधर मति के।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मृदु गूढ़ बचन रघुपति के। उघरे पटल परसुधर मति के।।

  2970. RCM 1.284.7Open verse →

    राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    राम रमापति कर धनु लेहू। खैंचहु मिटै मोर संदेहू।।

  2971. RCM 1.284.8Open verse →

    देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    देत चापु आपुहिं चलि गयऊ। परसुराम मन बिसमय भयऊ।।

  2972. RCM 1.284.9Open verse →

    जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।

    अर्थ · Hindi

    जाना राम प्रभाउ तब पुलक प्रफुल्लित गात।

  2973. RCM 1.284.10Open verse →

    जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात।।284।।

    अर्थ · Hindi

    जोरि पानि बोले बचन ह्दयँ न प्रेमु अमात।।284।।

  2974. RCM 1.285.1Open verse →

    जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानु।।

    अर्थ · Hindi

    जय रघुबंस बनज बन भानू। गहन दनुज कुल दहन कृसानु।।

  2975. RCM 1.285.2Open verse →

    जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।।

    अर्थ · Hindi

    जय सुर बिप्र धेनु हितकारी। जय मद मोह कोह भ्रम हारी।।

  2976. RCM 1.285.3Open verse →

    बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर।।

    अर्थ · Hindi

    बिनय सील करुना गुन सागर। जयति बचन रचना अति नागर।।

  2977. RCM 1.285.4Open verse →

    सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सुखद सुभग सब अंगा। जय सरीर छबि कोटि अनंगा।।

  2978. RCM 1.285.5Open verse →

    करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।

    अर्थ · Hindi

    करौं काह मुख एक प्रसंसा। जय महेस मन मानस हंसा।।

  2979. RCM 1.285.6Open verse →

    अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    अनुचित बहुत कहेउँ अग्याता। छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता।।

  2980. RCM 1.285.7Open verse →

    कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।

    अर्थ · Hindi

    कहि जय जय जय रघुकुलकेतू। भृगुपति गए बनहि तप हेतू।।

  2981. RCM 1.285.8Open verse →

    अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।

    अर्थ · Hindi

    अपभयँ कुटिल महीप डेराने। जहँ तहँ कायर गवँहिं पराने।।

  2982. RCM 1.285.9Open verse →

    देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।

    अर्थ · Hindi

    देवन्ह दीन्हीं दुंदुभीं प्रभु पर बरषहिं फूल।

  2983. RCM 1.285.10Open verse →

    हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल।।285।।

    अर्थ · Hindi

    हरषे पुर नर नारि सब मिटी मोहमय सूल।।285।।

  2984. RCM 1.286.1Open verse →

    अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे।।

    अर्थ · Hindi

    अति गहगहे बाजने बाजे। सबहिं मनोहर मंगल साजे।।

  2985. RCM 1.286.2Open verse →

    जूथ जूथ मिलि सुमुख सुनयनीं। करहिं गान कल कोकिलबयनी।।

    अर्थ · Hindi

    जूथ जूथ मिलि सुमुख सुनयनीं। करहिं गान कल कोकिलबयनी।।

  2986. RCM 1.286.3Open verse →

    सुखु बिदेह कर बरनि न जाई। जन्मदरिद्र मनहुँ निधि पाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुखु बिदेह कर बरनि न जाई। जन्मदरिद्र मनहुँ निधि पाई।।

  2987. RCM 1.286.4Open verse →

    गत त्रास भइ सीय सुखारी। जनु बिधु उदयँ चकोरकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    गत त्रास भइ सीय सुखारी। जनु बिधु उदयँ चकोरकुमारी।।

  2988. RCM 1.286.5Open verse →

    जनक कीन्ह कौसिकहि प्रनामा। प्रभु प्रसाद धनु भंजेउ रामा।।

    अर्थ · Hindi

    जनक कीन्ह कौसिकहि प्रनामा। प्रभु प्रसाद धनु भंजेउ रामा।।

  2989. RCM 1.286.6Open verse →

    मोहि कृतकृत्य कीन्ह दुहुँ भाईं। अब जो उचित सो कहिअ गोसाई।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि कृतकृत्य कीन्ह दुहुँ भाईं। अब जो उचित सो कहिअ गोसाई।।

  2990. RCM 1.286.7Open verse →

    कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना। रहा बिबाहु चाप आधीना।।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनि सुनु नरनाथ प्रबीना। रहा बिबाहु चाप आधीना।।

  2991. RCM 1.286.8Open verse →

    टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू। सुर नर नाग बिदित सब काहु।।

    अर्थ · Hindi

    टूटतहीं धनु भयउ बिबाहू। सुर नर नाग बिदित सब काहु।।

  2992. RCM 1.286.9Open verse →

    तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।

    अर्थ · Hindi

    तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।

  2993. RCM 1.286.10Open verse →

    बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु।।286।।

    अर्थ · Hindi

    बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु।।286।।

  2994. RCM 1.287.1Open verse →

    दूत अवधपुर पठवहु जाई। आनहिं नृप दसरथहि बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    दूत अवधपुर पठवहु जाई। आनहिं नृप दसरथहि बोलाई।।

  2995. RCM 1.287.2Open verse →

    मुदित राउ कहि भलेहिं कृपाला। पठए दूत बोलि तेहि काला।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित राउ कहि भलेहिं कृपाला। पठए दूत बोलि तेहि काला।।

  2996. RCM 1.287.3Open verse →

    बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि महाजन सकल बोलाए। आइ सबन्हि सादर सिर नाए।।

  2997. RCM 1.287.4Open verse →

    हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा।।

    अर्थ · Hindi

    हाट बाट मंदिर सुरबासा। नगरु सँवारहु चारिहुँ पासा।।

  2998. RCM 1.287.5Open verse →

    हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि चले निज निज गृह आए। पुनि परिचारक बोलि पठाए।।

  2999. RCM 1.287.6Open verse →

    रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    रचहु बिचित्र बितान बनाई। सिर धरि बचन चले सचु पाई।।

  3000. RCM 1.287.7Open verse →

    पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    पठए बोलि गुनी तिन्ह नाना। जे बितान बिधि कुसल सुजाना।।

  3001. RCM 1.287.8Open verse →

    बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।

    अर्थ · Hindi

    बिधिहि बंदि तिन्ह कीन्ह अरंभा। बिरचे कनक कदलि के खंभा।।

  3002. RCM 1.287.9Open verse →

    हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग के फूल।

    अर्थ · Hindi

    हरित मनिन्ह के पत्र फल पदुमराग के फूल।

  3003. RCM 1.287.10Open verse →

    रचना देखि बिचित्र अति मनु बिरंचि कर भूल।।287।।

    अर्थ · Hindi

    रचना देखि बिचित्र अति मनु बिरंचि कर भूल।।287।।

  3004. RCM 1.288.1Open verse →

    बेनि हरित मनिमय सब कीन्हे। सरल सपरब परहिं नहिं चीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    बेनि हरित मनिमय सब कीन्हे। सरल सपरब परहिं नहिं चीन्हे।।

  3005. RCM 1.288.2Open verse →

    कनक कलित अहिबेल बनाई। लखि नहि परइ सपरन सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    कनक कलित अहिबेल बनाई। लखि नहि परइ सपरन सुहाई।।

  3006. RCM 1.288.3Open verse →

    तेहि के रचि पचि बंध बनाए। बिच बिच मुकता दाम सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि के रचि पचि बंध बनाए। बिच बिच मुकता दाम सुहाए।।

  3007. RCM 1.288.4Open verse →

    मानिक मरकत कुलिस पिरोजा। चीरि कोरि पचि रचे सरोजा।।

    अर्थ · Hindi

    मानिक मरकत कुलिस पिरोजा। चीरि कोरि पचि रचे सरोजा।।

  3008. RCM 1.288.5Open verse →

    किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।

    अर्थ · Hindi

    किए भृंग बहुरंग बिहंगा। गुंजहिं कूजहिं पवन प्रसंगा।।

  3009. RCM 1.288.6Open verse →

    सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।

    अर्थ · Hindi

    सुर प्रतिमा खंभन गढ़ी काढ़ी। मंगल द्रब्य लिएँ सब ठाढ़ी।।

  3010. RCM 1.288.7Open verse →

    चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    चौंकें भाँति अनेक पुराईं। सिंधुर मनिमय सहज सुहाई।।

  3011. RCM 1.288.8Open verse →

    सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।

    अर्थ · Hindi

    सौरभ पल्लव सुभग सुठि किए नीलमनि कोरि।।

  3012. RCM 1.288.9Open verse →

    हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।

    अर्थ · Hindi

    हेम बौर मरकत घवरि लसत पाटमय डोरि।।288।।

  3013. RCM 1.289.1Open verse →

    रचे रुचिर बर बंदनिबारे। मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    रचे रुचिर बर बंदनिबारे। मनहुँ मनोभवँ फंद सँवारे।।

  3014. RCM 1.289.2Open verse →

    मंगल कलस अनेक बनाए। ध्वज पताक पट चमर सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल कलस अनेक बनाए। ध्वज पताक पट चमर सुहाए।।

  3015. RCM 1.289.3Open verse →

    दीप मनोहर मनिमय नाना। जाइ न बरनि बिचित्र बिताना।।

    अर्थ · Hindi

    दीप मनोहर मनिमय नाना। जाइ न बरनि बिचित्र बिताना।।

  3016. RCM 1.289.4Open verse →

    जेहिं मंडप दुलहिनि बैदेही। सो बरनै असि मति कबि केही।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं मंडप दुलहिनि बैदेही। सो बरनै असि मति कबि केही।।

  3017. RCM 1.289.5Open verse →

    दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।

    अर्थ · Hindi

    दूलहु रामु रूप गुन सागर। सो बितानु तिहुँ लोक उजागर।।

  3018. RCM 1.289.6Open verse →

    जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।

    अर्थ · Hindi

    जनक भवन कै सौभा जैसी। गृह गृह प्रति पुर देखिअ तैसी।।

  3019. RCM 1.289.7Open verse →

    जेहिं तेरहुति तेहि समय निहारी। तेहि लघु लगहिं भुवन दस चारी।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं तेरहुति तेहि समय निहारी। तेहि लघु लगहिं भुवन दस चारी।।

  3020. RCM 1.289.8Open verse →

    जो संपदा नीच गृह सोहा। सो बिलोकि सुरनायक मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    जो संपदा नीच गृह सोहा। सो बिलोकि सुरनायक मोहा।।

  3021. RCM 1.289.9Open verse →

    बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।

    अर्थ · Hindi

    बसइ नगर जेहि लच्छ करि कपट नारि बर बेषु।।

  3022. RCM 1.289.10Open verse →

    तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि पुर कै सोभा कहत सकुचहिं सारद सेषु।।289।।

  3023. RCM 1.290.1Open verse →

    पहुँचे दूत राम पुर पावन। हरषे नगर बिलोकि सुहावन।।

    अर्थ · Hindi

    पहुँचे दूत राम पुर पावन। हरषे नगर बिलोकि सुहावन।।

  3024. RCM 1.290.2Open verse →

    भूप द्वार तिन्ह खबरि जनाई। दसरथ नृप सुनि लिए बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    भूप द्वार तिन्ह खबरि जनाई। दसरथ नृप सुनि लिए बोलाई।।

  3025. RCM 1.290.3Open verse →

    करि प्रनामु तिन्ह पाती दीन्ही। मुदित महीप आपु उठि लीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु तिन्ह पाती दीन्ही। मुदित महीप आपु उठि लीन्ही।।

  3026. RCM 1.290.4Open verse →

    बारि बिलोचन बाचत पाँती। पुलक गात आई भरि छाती।।

    अर्थ · Hindi

    बारि बिलोचन बाचत पाँती। पुलक गात आई भरि छाती।।

  3027. RCM 1.290.5Open verse →

    रामु लखनु उर कर बर चीठी। रहि गए कहत न खाटी मीठी।।

    अर्थ · Hindi

    रामु लखनु उर कर बर चीठी। रहि गए कहत न खाटी मीठी।।

  3028. RCM 1.290.6Open verse →

    पुनि धरि धीर पत्रिका बाँची। हरषी सभा बात सुनि साँची।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि धरि धीर पत्रिका बाँची। हरषी सभा बात सुनि साँची।।

  3029. RCM 1.290.7Open verse →

    खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।

    अर्थ · Hindi

    खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।

  3030. RCM 1.290.8Open verse →

    पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।

    अर्थ · Hindi

    पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।

  3031. RCM 1.290.9Open verse →

    कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।

    अर्थ · Hindi

    कुसल प्रानप्रिय बंधु दोउ अहहिं कहहु केहिं देस।

  3032. RCM 1.290.10Open verse →

    सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनेह साने बचन बाची बहुरि नरेस।।290।।

  3033. RCM 1.291.1Open verse →

    सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि पाती पुलके दोउ भ्राता। अधिक सनेहु समात न गाता।।

  3034. RCM 1.291.2Open verse →

    प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रीति पुनीत भरत कै देखी। सकल सभाँ सुखु लहेउ बिसेषी।।

  3035. RCM 1.291.3Open verse →

    तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।

    अर्थ · Hindi

    तब नृप दूत निकट बैठारे। मधुर मनोहर बचन उचारे।।

  3036. RCM 1.291.4Open verse →

    भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।

    अर्थ · Hindi

    भैया कहहु कुसल दोउ बारे। तुम्ह नीकें निज नयन निहारे।।

  3037. RCM 1.291.5Open verse →

    स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।

    अर्थ · Hindi

    स्यामल गौर धरें धनु भाथा। बय किसोर कौसिक मुनि साथा।।

  3038. RCM 1.291.6Open verse →

    पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पहिचानहु तुम्ह कहहु सुभाऊ। प्रेम बिबस पुनि पुनि कह राऊ।।

  3039. RCM 1.291.7Open verse →

    जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।।

    अर्थ · Hindi

    जा दिन तें मुनि गए लवाई। तब तें आजु साँचि सुधि पाई।।

  3040. RCM 1.291.8Open verse →

    कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु बिदेह कवन बिधि जाने। सुनि प्रिय बचन दूत मुसकाने।।

  3041. RCM 1.291.9Open verse →

    सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु महीपति मुकुट मनि तुम्ह सम धन्य न कोउ।

  3042. RCM 1.291.10Open verse →

    रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।

    अर्थ · Hindi

    रामु लखनु जिन्ह के तनय बिस्व बिभूषन दोउ।।291।।

  3043. RCM 1.292.1Open verse →

    पूछन जोगु न तनय तुम्हारे। पुरुषसिंघ तिहु पुर उजिआरे।।

    अर्थ · Hindi

    पूछन जोगु न तनय तुम्हारे। पुरुषसिंघ तिहु पुर उजिआरे।।

  3044. RCM 1.292.2Open verse →

    जिन्ह के जस प्रताप कें आगे। ससि मलीन रबि सीतल लागे।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह के जस प्रताप कें आगे। ससि मलीन रबि सीतल लागे।।

  3045. RCM 1.292.3Open verse →

    तिन्ह कहँ कहिअ नाथ किमि चीन्हे। देखिअ रबि कि दीप कर लीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह कहँ कहिअ नाथ किमि चीन्हे। देखिअ रबि कि दीप कर लीन्हे।।

  3046. RCM 1.292.4Open verse →

    सीय स्वयंबर भूप अनेका। समिटे सुभट एक तें एका।।

    अर्थ · Hindi

    सीय स्वयंबर भूप अनेका। समिटे सुभट एक तें एका।।

  3047. RCM 1.292.5Open verse →

    संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।

    अर्थ · Hindi

    संभु सरासनु काहुँ न टारा। हारे सकल बीर बरिआरा।।

  3048. RCM 1.292.6Open verse →

    तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।।

    अर्थ · Hindi

    तीनि लोक महँ जे भटमानी। सभ कै सकति संभु धनु भानी।।

  3049. RCM 1.292.7Open verse →

    सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।

    अर्थ · Hindi

    सकइ उठाइ सरासुर मेरू। सोउ हियँ हारि गयउ करि फेरू।।

  3050. RCM 1.292.8Open verse →

    जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि कौतुक सिवसैलु उठावा। सोउ तेहि सभाँ पराभउ पावा।।

  3051. RCM 1.292.9Open verse →

    तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।

    अर्थ · Hindi

    तहाँ राम रघुबंस मनि सुनिअ महा महिपाल।

  3052. RCM 1.292.10Open verse →

    भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।

    अर्थ · Hindi

    भंजेउ चाप प्रयास बिनु जिमि गज पंकज नाल।।292।।

  3053. RCM 1.293.1Open verse →

    सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सरोष भृगुनायकु आए। बहुत भाँति तिन्ह आँखि देखाए।।

  3054. RCM 1.293.2Open verse →

    देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम बलु निज धनु दीन्हा। करि बहु बिनय गवनु बन कीन्हा।।

  3055. RCM 1.293.3Open verse →

    राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें।।

    अर्थ · Hindi

    राजन रामु अतुलबल जैसें। तेज निधान लखनु पुनि तैसें।।

  3056. RCM 1.293.4Open verse →

    कंपहि भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें।।

    अर्थ · Hindi

    कंपहि भूप बिलोकत जाकें। जिमि गज हरि किसोर के ताकें।।

  3057. RCM 1.293.5Open verse →

    देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    देव देखि तव बालक दोऊ। अब न आँखि तर आवत कोऊ।।

  3058. RCM 1.293.6Open verse →

    दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।।

    अर्थ · Hindi

    दूत बचन रचना प्रिय लागी। प्रेम प्रताप बीर रस पागी।।

  3059. RCM 1.293.7Open verse →

    सभा समेत राउ अनुरागे। दूतन्ह देन निछावरि लागे।।

    अर्थ · Hindi

    सभा समेत राउ अनुरागे। दूतन्ह देन निछावरि लागे।।

  3060. RCM 1.293.8Open verse →

    कहि अनीति ते मूदहिं काना। धरमु बिचारि सबहिं सुख माना।।

    अर्थ · Hindi

    कहि अनीति ते मूदहिं काना। धरमु बिचारि सबहिं सुख माना।।

  3061. RCM 1.293.9Open verse →

    तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।

    अर्थ · Hindi

    तब उठि भूप बसिष्ठ कहुँ दीन्हि पत्रिका जाइ।

  3062. RCM 1.293.10Open verse →

    कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।

    अर्थ · Hindi

    कथा सुनाई गुरहि सब सादर दूत बोलाइ।।293।।

  3063. RCM 1.294.1Open verse →

    सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बोले गुर अति सुखु पाई। पुन्य पुरुष कहुँ महि सुख छाई।।

  3064. RCM 1.294.2Open verse →

    जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं। जद्यपि ताहि कामना नाहीं।।

  3065. RCM 1.294.3Open verse →

    तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ। धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ।।

  3066. RCM 1.294.4Open verse →

    तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह गुर बिप्र धेनु सुर सेबी। तसि पुनीत कौसल्या देबी।।

  3067. RCM 1.294.5Open verse →

    सुकृती तुम्ह समान जग माहीं। भयउ न है कोउ होनेउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृती तुम्ह समान जग माहीं। भयउ न है कोउ होनेउ नाहीं।।

  3068. RCM 1.294.6Open verse →

    तुम्ह ते अधिक पुन्य बड़ काकें। राजन राम सरिस सुत जाकें।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह ते अधिक पुन्य बड़ काकें। राजन राम सरिस सुत जाकें।।

  3069. RCM 1.294.7Open verse →

    बीर बिनीत धरम ब्रत धारी। गुन सागर बर बालक चारी।।

    अर्थ · Hindi

    बीर बिनीत धरम ब्रत धारी। गुन सागर बर बालक चारी।।

  3070. RCM 1.294.8Open verse →

    तुम्ह कहुँ सर्ब काल कल्याना। सजहु बरात बजाइ निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह कहुँ सर्ब काल कल्याना। सजहु बरात बजाइ निसाना।।

  3071. RCM 1.294.9Open verse →

    चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ।

    अर्थ · Hindi

    चलहु बेगि सुनि गुर बचन भलेहिं नाथ सिरु नाइ।

  3072. RCM 1.294.10Open verse →

    भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ।।294।।

    अर्थ · Hindi

    भूपति गवने भवन तब दूतन्ह बासु देवाइ।।294।।

  3073. RCM 1.295.1Open verse →

    राजा सबु रनिवास बोलाई। जनक पत्रिका बाचि सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    राजा सबु रनिवास बोलाई। जनक पत्रिका बाचि सुनाई।।

  3074. RCM 1.295.2Open verse →

    सुनि संदेसु सकल हरषानीं। अपर कथा सब भूप बखानीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि संदेसु सकल हरषानीं। अपर कथा सब भूप बखानीं।।

  3075. RCM 1.295.3Open verse →

    प्रेम प्रफुल्लित राजहिं रानी। मनहुँ सिखिनि सुनि बारिद बनी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम प्रफुल्लित राजहिं रानी। मनहुँ सिखिनि सुनि बारिद बनी।।

  3076. RCM 1.295.4Open verse →

    मुदित असीस देहिं गुरु नारीं। अति आनंद मगन महतारीं।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित असीस देहिं गुरु नारीं। अति आनंद मगन महतारीं।।

  3077. RCM 1.295.5Open verse →

    लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।।

    अर्थ · Hindi

    लेहिं परस्पर अति प्रिय पाती। हृदयँ लगाइ जुड़ावहिं छाती।।

  3078. RCM 1.295.6Open verse →

    राम लखन कै कीरति करनी। बारहिं बार भूपबर बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन कै कीरति करनी। बारहिं बार भूपबर बरनी।।

  3079. RCM 1.295.7Open verse →

    मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि प्रसादु कहि द्वार सिधाए। रानिन्ह तब महिदेव बोलाए।।

  3080. RCM 1.295.8Open verse →

    दिए दान आनंद समेता। चले बिप्रबर आसिष देता।।

    अर्थ · Hindi

    दिए दान आनंद समेता। चले बिप्रबर आसिष देता।।

  3081. RCM 1.295.9Open verse →

    जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।

    अर्थ · Hindi

    जाचक लिए हँकारि दीन्हि निछावरि कोटि बिधि।

  3082. RCM 1.295.10Open verse →

    चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के।।295।।

    अर्थ · Hindi

    चिरु जीवहुँ सुत चारि चक्रबर्ति दसरत्थ के।।295।।

  3083. RCM 1.296.1Open verse →

    कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    कहत चले पहिरें पट नाना। हरषि हने गहगहे निसाना।।

  3084. RCM 1.296.2Open verse →

    समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार सब लोगन्ह पाए। लागे घर घर होने बधाए।।

  3085. RCM 1.296.3Open verse →

    भुवन चारि दस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।

    अर्थ · Hindi

    भुवन चारि दस भरा उछाहू। जनकसुता रघुबीर बिआहू।।

  3086. RCM 1.296.4Open verse →

    सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे। मग गृह गलीं सँवारन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे। मग गृह गलीं सँवारन लागे।।

  3087. RCM 1.296.5Open verse →

    जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि अवध सदैव सुहावनि। राम पुरी मंगलमय पावनि।।

  3088. RCM 1.296.6Open verse →

    तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि प्रीति कै प्रीति सुहाई। मंगल रचना रची बनाई।।

  3089. RCM 1.296.7Open verse →

    ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।।

    अर्थ · Hindi

    ध्वज पताक पट चामर चारु। छावा परम बिचित्र बजारू।।

  3090. RCM 1.296.8Open verse →

    कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।

    अर्थ · Hindi

    कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब दधि अच्छत माला।।

  3091. RCM 1.296.9Open verse →

    मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ।

    अर्थ · Hindi

    मंगलमय निज निज भवन लोगन्ह रचे बनाइ।

  3092. RCM 1.296.10Open verse →

    बीथीं सीचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ।।296।।

    अर्थ · Hindi

    बीथीं सीचीं चतुरसम चौकें चारु पुराइ।।296।।

  3093. RCM 1.297.1Open verse →

    जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि। सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि।।

  3094. RCM 1.297.2Open verse →

    बिधुबदनीं मृग सावक लोचनि। निज सरुप रति मानु बिमोचनि।।

    अर्थ · Hindi

    बिधुबदनीं मृग सावक लोचनि। निज सरुप रति मानु बिमोचनि।।

  3095. RCM 1.297.3Open verse →

    गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।।

    अर्थ · Hindi

    गावहिं मंगल मंजुल बानीं। सुनिकल रव कलकंठि लजानीं।।

  3096. RCM 1.297.4Open verse →

    भूप भवन किमि जाइ बखाना। बिस्व बिमोहन रचेउ बिताना।।

    अर्थ · Hindi

    भूप भवन किमि जाइ बखाना। बिस्व बिमोहन रचेउ बिताना।।

  3097. RCM 1.297.5Open verse →

    मंगल द्रब्य मनोहर नाना। राजत बाजत बिपुल निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल द्रब्य मनोहर नाना। राजत बाजत बिपुल निसाना।।

  3098. RCM 1.297.6Open verse →

    कतहुँ बिरिद बंदी उच्चरहीं। कतहुँ बेद धुनि भूसुर करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कतहुँ बिरिद बंदी उच्चरहीं। कतहुँ बेद धुनि भूसुर करहीं।।

  3099. RCM 1.297.7Open verse →

    गावहिं सुंदरि मंगल गीता। लै लै नामु रामु अरु सीता।।

    अर्थ · Hindi

    गावहिं सुंदरि मंगल गीता। लै लै नामु रामु अरु सीता।।

  3100. RCM 1.297.8Open verse →

    बहुत उछाहु भवनु अति थोरा। मानहुँ उमगि चला चहु ओरा।।

    अर्थ · Hindi

    बहुत उछाहु भवनु अति थोरा। मानहुँ उमगि चला चहु ओरा।।

  3101. RCM 1.297.9Open verse →

    सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार।

    अर्थ · Hindi

    सोभा दसरथ भवन कइ को कबि बरनै पार।

  3102. RCM 1.297.10Open verse →

    जहाँ सकल सुर सीस मनि राम लीन्ह अवतार।।297।।

    अर्थ · Hindi

    जहाँ सकल सुर सीस मनि राम लीन्ह अवतार।।297।।

  3103. RCM 1.298.1Open verse →

    भूप भरत पुनि लिए बोलाई। हय गय स्यंदन साजहु जाई।।

    अर्थ · Hindi

    भूप भरत पुनि लिए बोलाई। हय गय स्यंदन साजहु जाई।।

  3104. RCM 1.298.2Open verse →

    चलहु बेगि रघुबीर बराता। सुनत पुलक पूरे दोउ भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    चलहु बेगि रघुबीर बराता। सुनत पुलक पूरे दोउ भ्राता।।

  3105. RCM 1.298.3Open verse →

    भरत सकल साहनी बोलाए। आयसु दीन्ह मुदित उठि धाए।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सकल साहनी बोलाए। आयसु दीन्ह मुदित उठि धाए।।

  3106. RCM 1.298.4Open verse →

    रचि रुचि जीन तुरग तिन्ह साजे। बरन बरन बर बाजि बिराजे।।

    अर्थ · Hindi

    रचि रुचि जीन तुरग तिन्ह साजे। बरन बरन बर बाजि बिराजे।।

  3107. RCM 1.298.5Open verse →

    सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।।

    अर्थ · Hindi

    सुभग सकल सुठि चंचल करनी। अय इव जरत धरत पग धरनी।।

  3108. RCM 1.298.6Open verse →

    नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।।

    अर्थ · Hindi

    नाना जाति न जाहिं बखाने। निदरि पवनु जनु चहत उड़ाने।।

  3109. RCM 1.298.7Open verse →

    तिन्ह सब छयल भए असवारा। भरत सरिस बय राजकुमारा।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह सब छयल भए असवारा। भरत सरिस बय राजकुमारा।।

  3110. RCM 1.298.8Open verse →

    सब सुंदर सब भूषनधारी। कर सर चाप तून कटि भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सब सुंदर सब भूषनधारी। कर सर चाप तून कटि भारी।।

  3111. RCM 1.298.9Open verse →

    छरे छबीले छयल सब सूर सुजान नबीन।

    अर्थ · Hindi

    छरे छबीले छयल सब सूर सुजान नबीन।

  3112. RCM 1.298.10Open verse →

    जुग पदचर असवार प्रति जे असिकला प्रबीन।।298।।

    अर्थ · Hindi

    जुग पदचर असवार प्रति जे असिकला प्रबीन।।298।।

  3113. RCM 1.299.1Open verse →

    बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।।

    अर्थ · Hindi

    बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े। निकसि भए पुर बाहेर ठाढ़े।।

  3114. RCM 1.299.2Open verse →

    फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पवन निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    फेरहिं चतुर तुरग गति नाना। हरषहिं सुनि सुनि पवन निसाना।।

  3115. RCM 1.299.3Open verse →

    रथ सारथिन्ह बिचित्र बनाए। ध्वज पताक मनि भूषन लाए।।

    अर्थ · Hindi

    रथ सारथिन्ह बिचित्र बनाए। ध्वज पताक मनि भूषन लाए।।

  3116. RCM 1.299.4Open verse →

    चवँर चारु किंकिन धुनि करही। भानु जान सोभा अपहरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    चवँर चारु किंकिन धुनि करही। भानु जान सोभा अपहरहीं।।

  3117. RCM 1.299.5Open verse →

    सावँकरन अगनित हय होते। ते तिन्ह रथन्ह सारथिन्ह जोते।।

    अर्थ · Hindi

    सावँकरन अगनित हय होते। ते तिन्ह रथन्ह सारथिन्ह जोते।।

  3118. RCM 1.299.6Open verse →

    सुंदर सकल अलंकृत सोहे। जिन्हहि बिलोकत मुनि मन मोहे।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर सकल अलंकृत सोहे। जिन्हहि बिलोकत मुनि मन मोहे।।

  3119. RCM 1.299.7Open verse →

    जे जल चलहिं थलहि की नाई। टाप न बूड़ बेग अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    जे जल चलहिं थलहि की नाई। टाप न बूड़ बेग अधिकाई।।

  3120. RCM 1.299.8Open verse →

    अस्त्र सस्त्र सबु साजु बनाई। रथी सारथिन्ह लिए बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    अस्त्र सस्त्र सबु साजु बनाई। रथी सारथिन्ह लिए बोलाई।।

  3121. RCM 1.299.9Open verse →

    चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात।

    अर्थ · Hindi

    चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर लागी जुरन बरात।

  3122. RCM 1.299.10Open verse →

    होत सगुन सुन्दर सबहि जो जेहि कारज जात।।299।।

    अर्थ · Hindi

    होत सगुन सुन्दर सबहि जो जेहि कारज जात।।299।।

  3123. RCM 1.300.1Open verse →

    कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।

    अर्थ · Hindi

    कलित करिबरन्हि परीं अँबारीं। कहि न जाहिं जेहि भाँति सँवारीं।।

  3124. RCM 1.300.2Open verse →

    चले मत्तगज घंट बिराजी। मनहुँ सुभग सावन घन राजी।।

    अर्थ · Hindi

    चले मत्तगज घंट बिराजी। मनहुँ सुभग सावन घन राजी।।

  3125. RCM 1.300.3Open verse →

    बाहन अपर अनेक बिधाना। सिबिका सुभग सुखासन जाना।।

    अर्थ · Hindi

    बाहन अपर अनेक बिधाना। सिबिका सुभग सुखासन जाना।।

  3126. RCM 1.300.4Open verse →

    तिन्ह चढ़ि चले बिप्रबर बृन्दा। जनु तनु धरें सकल श्रुति छंदा।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह चढ़ि चले बिप्रबर बृन्दा। जनु तनु धरें सकल श्रुति छंदा।।

  3127. RCM 1.300.5Open verse →

    मागध सूत बंदि गुनगायक। चले जान चढ़ि जो जेहि लायक।।

    अर्थ · Hindi

    मागध सूत बंदि गुनगायक। चले जान चढ़ि जो जेहि लायक।।

  3128. RCM 1.300.6Open verse →

    बेसर ऊँट बृषभ बहु जाती। चले बस्तु भरि अगनित भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    बेसर ऊँट बृषभ बहु जाती। चले बस्तु भरि अगनित भाँती।।

  3129. RCM 1.300.7Open verse →

    कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।

    अर्थ · Hindi

    कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।

  3130. RCM 1.300.8Open verse →

    चले सकल सेवक समुदाई। निज निज साजु समाजु बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले सकल सेवक समुदाई। निज निज साजु समाजु बनाई।।

  3131. RCM 1.300.9Open verse →

    सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।

    अर्थ · Hindi

    सब कें उर निर्भर हरषु पूरित पुलक सरीर।

  3132. RCM 1.300.10Open verse →

    कबहिं देखिबे नयन भरि रामु लखनू दोउ बीर।।300।।

    अर्थ · Hindi

    कबहिं देखिबे नयन भरि रामु लखनू दोउ बीर।।300।।

  3133. RCM 1.301.1Open verse →

    गरजहिं गज घंटा धुनि घोरा। रथ रव बाजि हिंस चहु ओरा।।

    अर्थ · Hindi

    गरजहिं गज घंटा धुनि घोरा। रथ रव बाजि हिंस चहु ओरा।।

  3134. RCM 1.301.2Open verse →

    निदरि घनहि घुर्म्मरहिं निसाना। निज पराइ कछु सुनिअ न काना।।

    अर्थ · Hindi

    निदरि घनहि घुर्म्मरहिं निसाना। निज पराइ कछु सुनिअ न काना।।

  3135. RCM 1.301.3Open verse →

    महा भीर भूपति के द्वारें। रज होइ जाइ पषान पबारें।।

    अर्थ · Hindi

    महा भीर भूपति के द्वारें। रज होइ जाइ पषान पबारें।।

  3136. RCM 1.301.4Open verse →

    चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं। लिंएँ आरती मंगल थारी।।

    अर्थ · Hindi

    चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नारीं। लिंएँ आरती मंगल थारी।।

  3137. RCM 1.301.5Open verse →

    गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    गावहिं गीत मनोहर नाना। अति आनंदु न जाइ बखाना।।

  3138. RCM 1.301.6Open verse →

    तब सुमंत्र दुइ स्पंदन साजी। जोते रबि हय निंदक बाजी।।

    अर्थ · Hindi

    तब सुमंत्र दुइ स्पंदन साजी। जोते रबि हय निंदक बाजी।।

  3139. RCM 1.301.7Open verse →

    दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    दोउ रथ रुचिर भूप पहिं आने। नहिं सारद पहिं जाहिं बखाने।।

  3140. RCM 1.301.8Open verse →

    राज समाजु एक रथ साजा। दूसर तेज पुंज अति भ्राजा।।

    अर्थ · Hindi

    राज समाजु एक रथ साजा। दूसर तेज पुंज अति भ्राजा।।

  3141. RCM 1.301.9Open verse →

    तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं रथ रुचिर बसिष्ठ कहुँ हरषि चढ़ाइ नरेसु।

  3142. RCM 1.301.10Open verse →

    आपु चढ़ेउ स्पंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु।।301।।

    अर्थ · Hindi

    आपु चढ़ेउ स्पंदन सुमिरि हर गुर गौरि गनेसु।।301।।

  3143. RCM 1.302.1Open verse →

    सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    सहित बसिष्ठ सोह नृप कैसें। सुर गुर संग पुरंदर जैसें।।

  3144. RCM 1.302.2Open verse →

    करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    करि कुल रीति बेद बिधि राऊ। देखि सबहि सब भाँति बनाऊ।।

  3145. RCM 1.302.3Open verse →

    सुमिरि रामु गुर आयसु पाई। चले महीपति संख बजाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि रामु गुर आयसु पाई। चले महीपति संख बजाई।।

  3146. RCM 1.302.4Open verse →

    हरषे बिबुध बिलोकि बराता। बरषहिं सुमन सुमंगल दाता।।

    अर्थ · Hindi

    हरषे बिबुध बिलोकि बराता। बरषहिं सुमन सुमंगल दाता।।

  3147. RCM 1.302.5Open verse →

    भयउ कोलाहल हय गय गाजे। ब्योम बरात बाजने बाजे।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ कोलाहल हय गय गाजे। ब्योम बरात बाजने बाजे।।

  3148. RCM 1.302.6Open verse →

    सुर नर नारि सुमंगल गाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुर नर नारि सुमंगल गाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

  3149. RCM 1.302.7Open verse →

    घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।।

    अर्थ · Hindi

    घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।।

  3150. RCM 1.302.8Open verse →

    करहिं बिदूषक कौतुक नाना। हास कुसल कल गान सुजाना ।

    अर्थ · Hindi

    करहिं बिदूषक कौतुक नाना। हास कुसल कल गान सुजाना ।

  3151. RCM 1.302.9Open verse →

    तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।।

    अर्थ · Hindi

    तुरग नचावहिं कुँअर बर अकनि मृदंग निसान।।

  3152. RCM 1.302.10Open verse →

    नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान।।302।।

    अर्थ · Hindi

    नागर नट चितवहिं चकित डगहिं न ताल बँधान।।302।।

  3153. RCM 1.303.1Open verse →

    बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।।

    अर्थ · Hindi

    बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता।।

  3154. RCM 1.303.2Open verse →

    चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई।।

    अर्थ · Hindi

    चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई।।

  3155. RCM 1.303.3Open verse →

    दाहिन काग सुखेत सुहावा। नकुल दरसु सब काहूँ पावा।।

    अर्थ · Hindi

    दाहिन काग सुखेत सुहावा। नकुल दरसु सब काहूँ पावा।।

  3156. RCM 1.303.4Open verse →

    सानुकूल बह त्रिबिध बयारी। सघट सवाल आव बर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    सानुकूल बह त्रिबिध बयारी। सघट सवाल आव बर नारी।।

  3157. RCM 1.303.5Open verse →

    लोवा फिरि फिरि दरसु देखावा। सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा।।

    अर्थ · Hindi

    लोवा फिरि फिरि दरसु देखावा। सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा।।

  3158. RCM 1.303.6Open verse →

    मृगमाला फिरि दाहिनि आई। मंगल गन जनु दीन्हि देखाई।।

    अर्थ · Hindi

    मृगमाला फिरि दाहिनि आई। मंगल गन जनु दीन्हि देखाई।।

  3159. RCM 1.303.7Open verse →

    छेमकरी कह छेम बिसेषी। स्यामा बाम सुतरु पर देखी।।

    अर्थ · Hindi

    छेमकरी कह छेम बिसेषी। स्यामा बाम सुतरु पर देखी।।

  3160. RCM 1.303.8Open verse →

    सनमुख आयउ दधि अरु मीना। कर पुस्तक दुइ बिप्र प्रबीना।।

    अर्थ · Hindi

    सनमुख आयउ दधि अरु मीना। कर पुस्तक दुइ बिप्र प्रबीना।।

  3161. RCM 1.303.9Open verse →

    मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।

    अर्थ · Hindi

    मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।

  3162. RCM 1.303.10Open verse →

    जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार।।303।।

    अर्थ · Hindi

    जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार।।303।।

  3163. RCM 1.304.1Open verse →

    मंगल सगुन सुगम सब ताकें। सगुन ब्रह्म सुंदर सुत जाकें।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल सगुन सुगम सब ताकें। सगुन ब्रह्म सुंदर सुत जाकें।।

  3164. RCM 1.304.2Open verse →

    राम सरिस बरु दुलहिनि सीता। समधी दसरथु जनकु पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    राम सरिस बरु दुलहिनि सीता। समधी दसरथु जनकु पुनीता।।

  3165. RCM 1.304.3Open verse →

    सुनि अस ब्याहु सगुन सब नाचे। अब कीन्हे बिरंचि हम साँचे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि अस ब्याहु सगुन सब नाचे। अब कीन्हे बिरंचि हम साँचे।।

  3166. RCM 1.304.4Open verse →

    एहि बिधि कीन्ह बरात पयाना। हय गय गाजहिं हने निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि कीन्ह बरात पयाना। हय गय गाजहिं हने निसाना।।

  3167. RCM 1.304.5Open verse →

    आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू।।

    अर्थ · Hindi

    आवत जानि भानुकुल केतू। सरितन्हि जनक बँधाए सेतू।।

  3168. RCM 1.304.6Open verse →

    बीच बीच बर बास बनाए। सुरपुर सरिस संपदा छाए।।

    अर्थ · Hindi

    बीच बीच बर बास बनाए। सुरपुर सरिस संपदा छाए।।

  3169. RCM 1.304.7Open verse →

    असन सयन बर बसन सुहाए। पावहिं सब निज निज मन भाए।।

    अर्थ · Hindi

    असन सयन बर बसन सुहाए। पावहिं सब निज निज मन भाए।।

  3170. RCM 1.304.8Open verse →

    नित नूतन सुख लखि अनुकूले। सकल बरातिन्ह मंदिर भूले।।

    अर्थ · Hindi

    नित नूतन सुख लखि अनुकूले। सकल बरातिन्ह मंदिर भूले।।

  3171. RCM 1.304.9Open verse →

    आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान।

    अर्थ · Hindi

    आवत जानि बरात बर सुनि गहगहे निसान।

  3172. RCM 1.304.10Open verse →

    सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान।।304।।

    अर्थ · Hindi

    सजि गज रथ पदचर तुरग लेन चले अगवान।।304।।

  3173. RCM 1.305.1Open verse →

    कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।।

    अर्थ · Hindi

    कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा।।

  3174. RCM 1.305.2Open verse →

    भरे सुधासम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    भरे सुधासम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने।।

  3175. RCM 1.305.3Open verse →

    फल अनेक बर बस्तु सुहाईं। हरषि भेंट हित भूप पठाईं।।

    अर्थ · Hindi

    फल अनेक बर बस्तु सुहाईं। हरषि भेंट हित भूप पठाईं।।

  3176. RCM 1.305.4Open verse →

    भूषन बसन महामनि नाना। खग मृग हय गय बहुबिधि जाना।।

    अर्थ · Hindi

    भूषन बसन महामनि नाना। खग मृग हय गय बहुबिधि जाना।।

  3177. RCM 1.305.5Open verse →

    मंगल सगुन सुगंध सुहाए। बहुत भाँति महिपाल पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल सगुन सुगंध सुहाए। बहुत भाँति महिपाल पठाए।।

  3178. RCM 1.305.6Open verse →

    दधि चिउरा उपहार अपारा। भरि भरि काँवरि चले कहारा।।

    अर्थ · Hindi

    दधि चिउरा उपहार अपारा। भरि भरि काँवरि चले कहारा।।

  3179. RCM 1.305.7Open verse →

    अगवानन्ह जब दीखि बराता।उर आनंदु पुलक भर गाता।।

    अर्थ · Hindi

    अगवानन्ह जब दीखि बराता।उर आनंदु पुलक भर गाता।।

  3180. RCM 1.305.8Open verse →

    देखि बनाव सहित अगवाना। मुदित बरातिन्ह हने निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    देखि बनाव सहित अगवाना। मुदित बरातिन्ह हने निसाना।।

  3181. RCM 1.305.9Open verse →

    हरषि परसपर मिलन हित कछुक चले बगमेल।

    अर्थ · Hindi

    हरषि परसपर मिलन हित कछुक चले बगमेल।

  3182. RCM 1.305.10Open verse →

    जनु आनंद समुद्र दुइ मिलत बिहाइ सुबेल।।305।।

    अर्थ · Hindi

    जनु आनंद समुद्र दुइ मिलत बिहाइ सुबेल।।305।।

  3183. RCM 1.306.1Open verse →

    बरषि सुमन सुर सुंदरि गावहिं। मुदित देव दुंदुभीं बजावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    बरषि सुमन सुर सुंदरि गावहिं। मुदित देव दुंदुभीं बजावहिं।।

  3184. RCM 1.306.2Open verse →

    बस्तु सकल राखीं नृप आगें। बिनय कीन्ह तिन्ह अति अनुरागें।।

    अर्थ · Hindi

    बस्तु सकल राखीं नृप आगें। बिनय कीन्ह तिन्ह अति अनुरागें।।

  3185. RCM 1.306.3Open verse →

    प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम समेत रायँ सबु लीन्हा। भै बकसीस जाचकन्हि दीन्हा।।

  3186. RCM 1.306.4Open verse →

    करि पूजा मान्यता बड़ाई। जनवासे कहुँ चले लवाई।।

    अर्थ · Hindi

    करि पूजा मान्यता बड़ाई। जनवासे कहुँ चले लवाई।।

  3187. RCM 1.306.5Open verse →

    बसन बिचित्र पाँवड़े परहीं। देखि धनहु धन मदु परिहरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बसन बिचित्र पाँवड़े परहीं। देखि धनहु धन मदु परिहरहीं।।

  3188. RCM 1.306.6Open verse →

    अति सुंदर दीन्हेउ जनवासा। जहँ सब कहुँ सब भाँति सुपासा।।

    अर्थ · Hindi

    अति सुंदर दीन्हेउ जनवासा। जहँ सब कहुँ सब भाँति सुपासा।।

  3189. RCM 1.306.7Open verse →

    जानी सियँ बरात पुर आई। कछु निज महिमा प्रगटि जनाई।।

    अर्थ · Hindi

    जानी सियँ बरात पुर आई। कछु निज महिमा प्रगटि जनाई।।

  3190. RCM 1.306.8Open verse →

    हृदयँ सुमिरि सब सिद्धि बोलाई। भूप पहुनई करन पठाई।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ सुमिरि सब सिद्धि बोलाई। भूप पहुनई करन पठाई।।

  3191. RCM 1.306.9Open verse →

    सिधि सब सिय आयसु अकनि गईं जहाँ जनवास।

    अर्थ · Hindi

    सिधि सब सिय आयसु अकनि गईं जहाँ जनवास।

  3192. RCM 1.306.10Open verse →

    लिएँ संपदा सकल सुख सुरपुर भोग बिलास।।306।।

    अर्थ · Hindi

    लिएँ संपदा सकल सुख सुरपुर भोग बिलास।।306।।

  3193. RCM 1.307.1Open verse →

    निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    निज निज बास बिलोकि बराती। सुर सुख सकल सुलभ सब भाँती।।

  3194. RCM 1.307.2Open verse →

    बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिभव भेद कछु कोउ न जाना। सकल जनक कर करहिं बखाना।।

  3195. RCM 1.307.3Open verse →

    सिय महिमा रघुनायक जानी। हरषे हृदयँ हेतु पहिचानी।।

    अर्थ · Hindi

    सिय महिमा रघुनायक जानी। हरषे हृदयँ हेतु पहिचानी।।

  3196. RCM 1.307.4Open verse →

    पितु आगमनु सुनत दोउ भाई। हृदयँ न अति आनंदु अमाई।।

    अर्थ · Hindi

    पितु आगमनु सुनत दोउ भाई। हृदयँ न अति आनंदु अमाई।।

  3197. RCM 1.307.5Open verse →

    सकुचन्ह कहि न सकत गुरु पाहीं। पितु दरसन लालचु मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सकुचन्ह कहि न सकत गुरु पाहीं। पितु दरसन लालचु मन माहीं।।

  3198. RCM 1.307.6Open verse →

    बिस्वामित्र बिनय बड़ि देखी। उपजा उर संतोषु बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वामित्र बिनय बड़ि देखी। उपजा उर संतोषु बिसेषी।।

  3199. RCM 1.307.7Open verse →

    हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि बंधु दोउ हृदयँ लगाए। पुलक अंग अंबक जल छाए।।

  3200. RCM 1.307.8Open verse →

    चले जहाँ दसरथु जनवासे। मनहुँ सरोबर तकेउ पिआसे।।

    अर्थ · Hindi

    चले जहाँ दसरथु जनवासे। मनहुँ सरोबर तकेउ पिआसे।।

  3201. RCM 1.307.9Open verse →

    भूप बिलोके जबहिं मुनि आवत सुतन्ह समेत।

    अर्थ · Hindi

    भूप बिलोके जबहिं मुनि आवत सुतन्ह समेत।

  3202. RCM 1.307.10Open verse →

    उठे हरषि सुखसिंधु महुँ चले थाह सी लेत।।307।।

    अर्थ · Hindi

    उठे हरषि सुखसिंधु महुँ चले थाह सी लेत।।307।।

  3203. RCM 1.308.1Open verse →

    मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा। बार बार पद रज धरि सीसा।।

  3204. RCM 1.308.2Open verse →

    कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिक राउ लिये उर लाई। कहि असीस पूछी कुसलाई।।

  3205. RCM 1.308.3Open verse →

    पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि दंडवत करत दोउ भाई। देखि नृपति उर सुखु न समाई।।

  3206. RCM 1.308.4Open verse →

    सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।।

    अर्थ · Hindi

    सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे। मृतक सरीर प्रान जनु भेंटे।।

  3207. RCM 1.308.5Open verse →

    पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाए। प्रेम मुदित मुनिबर उर लाए।।

  3208. RCM 1.308.6Open verse →

    बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र बृंद बंदे दुहुँ भाईं। मन भावती असीसें पाईं।।

  3209. RCM 1.308.7Open verse →

    भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा। लिए उठाइ लाइ उर रामा।।

  3210. RCM 1.308.8Open verse →

    हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।

    अर्थ · Hindi

    हरषे लखन देखि दोउ भ्राता। मिले प्रेम परिपूरित गाता।।

  3211. RCM 1.308.9Open verse →

    पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन परिजन जातिजन जाचक मंत्री मीत।

  3212. RCM 1.308.10Open verse →

    मिले जथाबिधि सबहि प्रभु परम कृपाल बिनीत।।308।।

    अर्थ · Hindi

    मिले जथाबिधि सबहि प्रभु परम कृपाल बिनीत।।308।।

  3213. RCM 1.309.1Open verse →

    रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी।।

  3214. RCM 1.309.2Open verse →

    नृप समीप सोहहिं सुत चारी। जनु धन धरमादिक तनुधारी।।

    अर्थ · Hindi

    नृप समीप सोहहिं सुत चारी। जनु धन धरमादिक तनुधारी।।

  3215. RCM 1.309.3Open verse →

    सुतन्ह समेत दसरथहि देखी। मुदित नगर नर नारि बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    सुतन्ह समेत दसरथहि देखी। मुदित नगर नर नारि बिसेषी।।

  3216. RCM 1.309.4Open verse →

    सुमन बरिसि सुर हनहिं निसाना। नाकनटीं नाचहिं करि गाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुमन बरिसि सुर हनहिं निसाना। नाकनटीं नाचहिं करि गाना।।

  3217. RCM 1.309.5Open verse →

    सतानंद अरु बिप्र सचिव गन। मागध सूत बिदुष बंदीजन।।

    अर्थ · Hindi

    सतानंद अरु बिप्र सचिव गन। मागध सूत बिदुष बंदीजन।।

  3218. RCM 1.309.6Open verse →

    सहित बरात राउ सनमाना। आयसु मागि फिरे अगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    सहित बरात राउ सनमाना। आयसु मागि फिरे अगवाना।।

  3219. RCM 1.309.7Open verse →

    प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम बरात लगन तें आई। तातें पुर प्रमोदु अधिकाई।।

  3220. RCM 1.309.8Open verse →

    ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं। बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मानंदु लोग सब लहहीं। बढ़हुँ दिवस निसि बिधि सन कहहीं।।

  3221. RCM 1.309.9Open verse →

    रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।

    अर्थ · Hindi

    रामु सीय सोभा अवधि सुकृत अवधि दोउ राज।

  3222. RCM 1.309.10Open verse →

    जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज।।।309।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जहँ पुरजन कहहिं अस मिलि नर नारि समाज।।।309।।

  3223. RCM 1.310.1Open verse →

    जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।।

    अर्थ · Hindi

    जनक सुकृत मूरति बैदेही। दसरथ सुकृत रामु धरें देही।।

  3224. RCM 1.310.2Open verse →

    इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।।

    अर्थ · Hindi

    इन्ह सम काँहु न सिव अवराधे। काहिं न इन्ह समान फल लाधे।।

  3225. RCM 1.310.3Open verse →

    इन्ह सम कोउ न भयउ जग माहीं। है नहिं कतहूँ होनेउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    इन्ह सम कोउ न भयउ जग माहीं। है नहिं कतहूँ होनेउ नाहीं।।

  3226. RCM 1.310.4Open verse →

    हम सब सकल सुकृत कै रासी। भए जग जनमि जनकपुर बासी।।

    अर्थ · Hindi

    हम सब सकल सुकृत कै रासी। भए जग जनमि जनकपुर बासी।।

  3227. RCM 1.310.5Open verse →

    जिन्ह जानकी राम छबि देखी। को सुकृती हम सरिस बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह जानकी राम छबि देखी। को सुकृती हम सरिस बिसेषी।।

  3228. RCM 1.310.6Open verse →

    पुनि देखब रघुबीर बिआहू। लेब भली बिधि लोचन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि देखब रघुबीर बिआहू। लेब भली बिधि लोचन लाहू।।

  3229. RCM 1.310.7Open verse →

    कहहिं परसपर कोकिलबयनीं। एहि बिआहँ बड़ लाभु सुनयनीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं परसपर कोकिलबयनीं। एहि बिआहँ बड़ लाभु सुनयनीं।।

  3230. RCM 1.310.8Open verse →

    बड़ें भाग बिधि बात बनाई। नयन अतिथि होइहहिं दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बड़ें भाग बिधि बात बनाई। नयन अतिथि होइहहिं दोउ भाई।।

  3231. RCM 1.310.9Open verse →

    बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय।

    अर्थ · Hindi

    बारहिं बार सनेह बस जनक बोलाउब सीय।

  3232. RCM 1.310.10Open verse →

    लेन आइहहिं बंधु दोउ कोटि काम कमनीय।।310।।

    अर्थ · Hindi

    लेन आइहहिं बंधु दोउ कोटि काम कमनीय।।310।।

  3233. RCM 1.311.1Open verse →

    बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध भाँति होइहि पहुनाई। प्रिय न काहि अस सासुर माई।।

  3234. RCM 1.311.2Open verse →

    तब तब राम लखनहि निहारी। होइहहिं सब पुर लोग सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    तब तब राम लखनहि निहारी। होइहहिं सब पुर लोग सुखारी।।

  3235. RCM 1.311.3Open verse →

    सखि जस राम लखनकर जोटा। तैसेइ भूप संग दुइ ढोटा।।

    अर्थ · Hindi

    सखि जस राम लखनकर जोटा। तैसेइ भूप संग दुइ ढोटा।।

  3236. RCM 1.311.4Open verse →

    स्याम गौर सब अंग सुहाए। ते सब कहहिं देखि जे आए।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गौर सब अंग सुहाए। ते सब कहहिं देखि जे आए।।

  3237. RCM 1.311.5Open verse →

    कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    कहा एक मैं आजु निहारे। जनु बिरंचि निज हाथ सँवारे।।

  3238. RCM 1.311.6Open verse →

    भरतु रामही की अनुहारी। सहसा लखि न सकहिं नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु रामही की अनुहारी। सहसा लखि न सकहिं नर नारी।।

  3239. RCM 1.311.7Open verse →

    लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    लखनु सत्रुसूदनु एकरूपा। नख सिख ते सब अंग अनूपा।।

  3240. RCM 1.311.8Open verse →

    मन भावहिं मुख बरनि न जाहीं। उपमा कहुँ त्रिभुवन कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मन भावहिं मुख बरनि न जाहीं। उपमा कहुँ त्रिभुवन कोउ नाहीं।।

  3241. RCM 1.312.1Open verse →

    एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। आनँद उमगि उमगि उर भरहीं।।

  3242. RCM 1.312.2Open verse →

    जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए।।

    अर्थ · Hindi

    जे नृप सीय स्वयंबर आए। देखि बंधु सब तिन्ह सुख पाए।।

  3243. RCM 1.312.3Open verse →

    कहत राम जसु बिसद बिसाला। निज निज भवन गए महिपाला।।

    अर्थ · Hindi

    कहत राम जसु बिसद बिसाला। निज निज भवन गए महिपाला।।

  3244. RCM 1.312.4Open verse →

    गए बीति कुछ दिन एहि भाँती। प्रमुदित पुरजन सकल बराती।।

    अर्थ · Hindi

    गए बीति कुछ दिन एहि भाँती। प्रमुदित पुरजन सकल बराती।।

  3245. RCM 1.312.5Open verse →

    मंगल मूल लगन दिनु आवा। हिम रितु अगहनु मासु सुहावा।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल मूल लगन दिनु आवा। हिम रितु अगहनु मासु सुहावा।।

  3246. RCM 1.312.6Open verse →

    ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू। लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू।।

    अर्थ · Hindi

    ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू। लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू।।

  3247. RCM 1.312.7Open verse →

    पठै दीन्हि नारद सन सोई। गनी जनक के गनकन्ह जोई।।

    अर्थ · Hindi

    पठै दीन्हि नारद सन सोई। गनी जनक के गनकन्ह जोई।।

  3248. RCM 1.312.8Open verse →

    सुनी सकल लोगन्ह यह बाता। कहहिं जोतिषी आहिं बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    सुनी सकल लोगन्ह यह बाता। कहहिं जोतिषी आहिं बिधाता।।

  3249. RCM 1.312.9Open verse →

    धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल।

    अर्थ · Hindi

    धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल।

  3250. RCM 1.312.10Open verse →

    बिप्रन्ह कहेउ बिदेह सन जानि सगुन अनुकुल।।312।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रन्ह कहेउ बिदेह सन जानि सगुन अनुकुल।।312।।

  3251. RCM 1.313.1Open verse →

    उपरोहितहि कहेउ नरनाहा। अब बिलंब कर कारनु काहा।।

    अर्थ · Hindi

    उपरोहितहि कहेउ नरनाहा। अब बिलंब कर कारनु काहा।।

  3252. RCM 1.313.2Open verse →

    सतानंद तब सचिव बोलाए। मंगल सकल साजि सब ल्याए।।

    अर्थ · Hindi

    सतानंद तब सचिव बोलाए। मंगल सकल साजि सब ल्याए।।

  3253. RCM 1.313.3Open verse →

    संख निसान पनव बहु बाजे। मंगल कलस सगुन सुभ साजे।।

    अर्थ · Hindi

    संख निसान पनव बहु बाजे। मंगल कलस सगुन सुभ साजे।।

  3254. RCM 1.313.4Open verse →

    सुभग सुआसिनि गावहिं गीता। करहिं बेद धुनि बिप्र पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    सुभग सुआसिनि गावहिं गीता। करहिं बेद धुनि बिप्र पुनीता।।

  3255. RCM 1.313.5Open verse →

    लेन चले सादर एहि भाँती। गए जहाँ जनवास बराती।।

    अर्थ · Hindi

    लेन चले सादर एहि भाँती। गए जहाँ जनवास बराती।।

  3256. RCM 1.313.6Open verse →

    कोसलपति कर देखि समाजू। अति लघु लाग तिन्हहि सुरराजू।।

    अर्थ · Hindi

    कोसलपति कर देखि समाजू। अति लघु लाग तिन्हहि सुरराजू।।

  3257. RCM 1.313.7Open verse →

    भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ समउ अब धारिअ पाऊ। यह सुनि परा निसानहिं घाऊ।।

  3258. RCM 1.313.8Open verse →

    गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    गुरहि पूछि करि कुल बिधि राजा। चले संग मुनि साधु समाजा।।

  3259. RCM 1.313.9Open verse →

    भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि।

    अर्थ · Hindi

    भाग्य बिभव अवधेस कर देखि देव ब्रह्मादि।

  3260. RCM 1.313.10Open verse →

    लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि।।313।।

    अर्थ · Hindi

    लगे सराहन सहस मुख जानि जनम निज बादि।।313।।

  3261. RCM 1.314.1Open verse →

    सुरन्ह सुमंगल अवसरु जाना। बरषहिं सुमन बजाइ निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुरन्ह सुमंगल अवसरु जाना। बरषहिं सुमन बजाइ निसाना।।

  3262. RCM 1.314.2Open verse →

    सिव ब्रह्मादिक बिबुध बरूथा। चढ़े बिमानन्हि नाना जूथा।।

    अर्थ · Hindi

    सिव ब्रह्मादिक बिबुध बरूथा। चढ़े बिमानन्हि नाना जूथा।।

  3263. RCM 1.314.3Open verse →

    प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।

  3264. RCM 1.314.4Open verse →

    देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।।

    अर्थ · Hindi

    देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।।

  3265. RCM 1.314.5Open verse →

    चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।

    अर्थ · Hindi

    चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।

  3266. RCM 1.314.6Open verse →

    नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।।

  3267. RCM 1.314.7Open verse →

    तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।

  3268. RCM 1.314.8Open verse →

    बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।

    अर्थ · Hindi

    बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।

  3269. RCM 1.314.9Open verse →

    सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।

    अर्थ · Hindi

    सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु।

  3270. RCM 1.314.10Open verse →

    हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु।।314।।

  3271. RCM 1.315.1Open verse →

    जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं।।

  3272. RCM 1.315.2Open verse →

    करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।।

    अर्थ · Hindi

    करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी।।

  3273. RCM 1.315.3Open verse →

    एहि बिधि संभु सुरन्ह समुझावा। पुनि आगें बर बसह चलावा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि संभु सुरन्ह समुझावा। पुनि आगें बर बसह चलावा।।

  3274. RCM 1.315.4Open verse →

    देवन्ह देखे दसरथु जाता। महामोद मन पुलकित गाता।।

    अर्थ · Hindi

    देवन्ह देखे दसरथु जाता। महामोद मन पुलकित गाता।।

  3275. RCM 1.315.5Open verse →

    साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    साधु समाज संग महिदेवा। जनु तनु धरें करहिं सुख सेवा।।

  3276. RCM 1.315.6Open verse →

    सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।।

    अर्थ · Hindi

    सोहत साथ सुभग सुत चारी। जनु अपबरग सकल तनुधारी।।

  3277. RCM 1.315.7Open verse →

    मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    मरकत कनक बरन बर जोरी। देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी।।

  3278. RCM 1.315.8Open verse →

    पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे। नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे।।

  3279. RCM 1.315.9Open verse →

    राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि।

    अर्थ · Hindi

    राम रूपु नख सिख सुभग बारहिं बार निहारि।

  3280. RCM 1.315.10Open verse →

    पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।

    अर्थ · Hindi

    पुलक गात लोचन सजल उमा समेत पुरारि।।315।।

  3281. RCM 1.316.1Open verse →

    केकि कंठ दुति स्यामल अंगा। तड़ित बिनिंदक बसन सुरंगा।।

    अर्थ · Hindi

    केकि कंठ दुति स्यामल अंगा। तड़ित बिनिंदक बसन सुरंगा।।

  3282. RCM 1.316.2Open verse →

    ब्याह बिभूषन बिबिध बनाए। मंगल सब सब भाँति सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याह बिभूषन बिबिध बनाए। मंगल सब सब भाँति सुहाए।।

  3283. RCM 1.316.3Open verse →

    सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन। नयन नवल राजीव लजावन।।

    अर्थ · Hindi

    सरद बिमल बिधु बदनु सुहावन। नयन नवल राजीव लजावन।।

  3284. RCM 1.316.4Open verse →

    सकल अलौकिक सुंदरताई। कहि न जाइ मनहीं मन भाई।।

    अर्थ · Hindi

    सकल अलौकिक सुंदरताई। कहि न जाइ मनहीं मन भाई।।

  3285. RCM 1.316.5Open verse →

    बंधु मनोहर सोहहिं संगा। जात नचावत चपल तुरंगा।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु मनोहर सोहहिं संगा। जात नचावत चपल तुरंगा।।

  3286. RCM 1.316.6Open verse →

    राजकुअँर बर बाजि देखावहिं। बंस प्रसंसक बिरिद सुनावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    राजकुअँर बर बाजि देखावहिं। बंस प्रसंसक बिरिद सुनावहिं।।

  3287. RCM 1.316.7Open verse →

    जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि तुरंग पर रामु बिराजे। गति बिलोकि खगनायकु लाजे।।

  3288. RCM 1.316.8Open verse →

    कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न जाइ सब भाँति सुहावा। बाजि बेषु जनु काम बनावा।।

  3289. RCM 1.317.1Open verse →

    जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बर बाजि रामु असवारा। तेहि सारदउ न बरनै पारा।।

  3290. RCM 1.317.2Open verse →

    संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।।

    अर्थ · Hindi

    संकरु राम रूप अनुरागे। नयन पंचदस अति प्रिय लागे।।

  3291. RCM 1.317.3Open verse →

    हरि हित सहित रामु जब जोहे। रमा समेत रमापति मोहे।।

    अर्थ · Hindi

    हरि हित सहित रामु जब जोहे। रमा समेत रमापति मोहे।।

  3292. RCM 1.317.4Open verse →

    निरखि राम छबि बिधि हरषाने। आठइ नयन जानि पछिताने।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि राम छबि बिधि हरषाने। आठइ नयन जानि पछिताने।।

  3293. RCM 1.317.5Open verse →

    सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सुर सेनप उर बहुत उछाहू। बिधि ते डेवढ़ लोचन लाहू।।

  3294. RCM 1.317.6Open verse →

    रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि चितव सुरेस सुजाना। गौतम श्रापु परम हित माना।।

  3295. RCM 1.317.7Open verse →

    देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    देव सकल सुरपतिहि सिहाहीं। आजु पुरंदर सम कोउ नाहीं।।

  3296. RCM 1.317.8Open verse →

    मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित देवगन रामहि देखी। नृपसमाज दुहुँ हरषु बिसेषी।।

  3297. RCM 1.318.1Open verse →

    बिधुबदनीं सब सब मृगलोचनि। सब निज तन छबि रति मदु मोचनि।।

    अर्थ · Hindi

    बिधुबदनीं सब सब मृगलोचनि। सब निज तन छबि रति मदु मोचनि।।

  3298. RCM 1.318.2Open verse →

    पहिरें बरन बरन बर चीरा। सकल बिभूषन सजें सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    पहिरें बरन बरन बर चीरा। सकल बिभूषन सजें सरीरा।।

  3299. RCM 1.318.3Open verse →

    सकल सुमंगल अंग बनाएँ। करहिं गान कलकंठि लजाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुमंगल अंग बनाएँ। करहिं गान कलकंठि लजाएँ।।

  3300. RCM 1.318.4Open verse →

    कंकन किंकिनि नूपुर बाजहिं। चालि बिलोकि काम गज लाजहिं।।

    अर्थ · Hindi

    कंकन किंकिनि नूपुर बाजहिं। चालि बिलोकि काम गज लाजहिं।।

  3301. RCM 1.318.5Open verse →

    बाजहिं बाजने बिबिध प्रकारा। नभ अरु नगर सुमंगलचारा।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं बाजने बिबिध प्रकारा। नभ अरु नगर सुमंगलचारा।।

  3302. RCM 1.318.6Open verse →

    सची सारदा रमा भवानी। जे सुरतिय सुचि सहज सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    सची सारदा रमा भवानी। जे सुरतिय सुचि सहज सयानी।।

  3303. RCM 1.318.7Open verse →

    कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।

    अर्थ · Hindi

    कपट नारि बर बेष बनाई। मिलीं सकल रनिवासहिं जाई।।

  3304. RCM 1.318.8Open verse →

    करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं गान कल मंगल बानीं। हरष बिबस सब काहुँ न जानी।।

  3305. RCM 1.319.1Open verse →

    नयन नीरु हटि मंगल जानी। परिछनि करहिं मुदित मन रानी।।

    अर्थ · Hindi

    नयन नीरु हटि मंगल जानी। परिछनि करहिं मुदित मन रानी।।

  3306. RCM 1.319.2Open verse →

    बेद बिहित अरु कुल आचारू। कीन्ह भली बिधि सब ब्यवहारू।।

    अर्थ · Hindi

    बेद बिहित अरु कुल आचारू। कीन्ह भली बिधि सब ब्यवहारू।।

  3307. RCM 1.319.3Open verse →

    पंच सबद धुनि मंगल गाना। पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    पंच सबद धुनि मंगल गाना। पट पाँवड़े परहिं बिधि नाना।।

  3308. RCM 1.319.4Open verse →

    करि आरती अरघु तिन्ह दीन्हा। राम गमनु मंडप तब कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    करि आरती अरघु तिन्ह दीन्हा। राम गमनु मंडप तब कीन्हा।।

  3309. RCM 1.319.5Open verse →

    दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।।

    अर्थ · Hindi

    दसरथु सहित समाज बिराजे। बिभव बिलोकि लोकपति लाजे।।

  3310. RCM 1.319.6Open verse →

    समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला। सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला।।

    अर्थ · Hindi

    समयँ समयँ सुर बरषहिं फूला। सांति पढ़हिं महिसुर अनुकूला।।

  3311. RCM 1.319.7Open verse →

    नभ अरु नगर कोलाहल होई। आपनि पर कछु सुनइ न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    नभ अरु नगर कोलाहल होई। आपनि पर कछु सुनइ न कोई।।

  3312. RCM 1.319.8Open verse →

    एहि बिधि रामु मंडपहिं आए। अरघु देइ आसन बैठाए।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि रामु मंडपहिं आए। अरघु देइ आसन बैठाए।।

  3313. RCM 1.320.1Open verse →

    मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।।

    अर्थ · Hindi

    मिले जनकु दसरथु अति प्रीतीं। करि बैदिक लौकिक सब रीतीं।।

  3314. RCM 1.320.2Open verse →

    मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।।

    अर्थ · Hindi

    मिलत महा दोउ राज बिराजे। उपमा खोजि खोजि कबि लाजे।।

  3315. RCM 1.320.3Open verse →

    लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।।

    अर्थ · Hindi

    लही न कतहुँ हारि हियँ मानी। इन्ह सम एइ उपमा उर आनी।।

  3316. RCM 1.320.4Open verse →

    सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    सामध देखि देव अनुरागे। सुमन बरषि जसु गावन लागे।।

  3317. RCM 1.320.5Open verse →

    जगु बिरंचि उपजावा जब तें। देखे सुने ब्याह बहु तब तें।।

    अर्थ · Hindi

    जगु बिरंचि उपजावा जब तें। देखे सुने ब्याह बहु तब तें।।

  3318. RCM 1.320.6Open verse →

    सकल भाँति सम साजु समाजू। सम समधी देखे हम आजू।।

    अर्थ · Hindi

    सकल भाँति सम साजु समाजू। सम समधी देखे हम आजू।।

  3319. RCM 1.320.7Open verse →

    देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।।

    अर्थ · Hindi

    देव गिरा सुनि सुंदर साँची। प्रीति अलौकिक दुहु दिसि माची।।

  3320. RCM 1.320.8Open verse →

    देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।

    अर्थ · Hindi

    देत पाँवड़े अरघु सुहाए। सादर जनकु मंडपहिं ल्याए।।

  3321. RCM 1.321.1Open verse →

    बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि कीन्ह कोसलपति पूजा। जानि ईस सम भाउ न दूजा।।

  3322. RCM 1.321.2Open verse →

    कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई। कहि निज भाग्य बिभव बहुताई।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह जोरि कर बिनय बड़ाई। कहि निज भाग्य बिभव बहुताई।।

  3323. RCM 1.321.3Open verse →

    पूजे भूपति सकल बराती। समधि सम सादर सब भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    पूजे भूपति सकल बराती। समधि सम सादर सब भाँती।।

  3324. RCM 1.321.4Open verse →

    आसन उचित दिए सब काहू। कहौं काह मूख एक उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    आसन उचित दिए सब काहू। कहौं काह मूख एक उछाहू।।

  3325. RCM 1.321.5Open verse →

    सकल बरात जनक सनमानी। दान मान बिनती बर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    सकल बरात जनक सनमानी। दान मान बिनती बर बानी।।

  3326. RCM 1.321.6Open verse →

    बिधि हरि हरु दिसिपति दिनराऊ। जे जानहिं रघुबीर प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि हरि हरु दिसिपति दिनराऊ। जे जानहिं रघुबीर प्रभाऊ।।

  3327. RCM 1.321.7Open verse →

    कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    कपट बिप्र बर बेष बनाएँ। कौतुक देखहिं अति सचु पाएँ।।

  3328. RCM 1.321.8Open verse →

    पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें।।

    अर्थ · Hindi

    पूजे जनक देव सम जानें। दिए सुआसन बिनु पहिचानें।।

  3329. RCM 1.322.1Open verse →

    समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।।

    अर्थ · Hindi

    समउ बिलोकि बसिष्ठ बोलाए। सादर सतानंदु सुनि आए।।

  3330. RCM 1.322.2Open verse →

    बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि कुअँरि अब आनहु जाई। चले मुदित मुनि आयसु पाई।।

  3331. RCM 1.322.3Open verse →

    रानी सुनि उपरोहित बानी। प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    रानी सुनि उपरोहित बानी। प्रमुदित सखिन्ह समेत सयानी।।

  3332. RCM 1.322.4Open verse →

    बिप्र बधू कुलबृद्ध बोलाईं। करि कुल रीति सुमंगल गाईं।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र बधू कुलबृद्ध बोलाईं। करि कुल रीति सुमंगल गाईं।।

  3333. RCM 1.322.5Open verse →

    नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।।

    अर्थ · Hindi

    नारि बेष जे सुर बर बामा। सकल सुभायँ सुंदरी स्यामा।।

  3334. RCM 1.322.6Open verse →

    तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्हहि देखि सुखु पावहिं नारीं। बिनु पहिचानि प्रानहु ते प्यारीं।।

  3335. RCM 1.322.7Open verse →

    बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार सनमानहिं रानी। उमा रमा सारद सम जानी।।

  3336. RCM 1.322.8Open verse →

    सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।

    अर्थ · Hindi

    सीय सँवारि समाजु बनाई। मुदित मंडपहिं चलीं लवाई।।

  3337. RCM 1.323.1Open verse →

    सिय सुंदरता बरनि न जाई। लघु मति बहुत मनोहरताई।।

    अर्थ · Hindi

    सिय सुंदरता बरनि न जाई। लघु मति बहुत मनोहरताई।।

  3338. RCM 1.323.2Open verse →

    आवत दीखि बरातिन्ह सीता।।रूप रासि सब भाँति पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    आवत दीखि बरातिन्ह सीता।।रूप रासि सब भाँति पुनीता।।

  3339. RCM 1.323.3Open verse →

    सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।।

    अर्थ · Hindi

    सबहि मनहिं मन किए प्रनामा। देखि राम भए पूरनकामा।।

  3340. RCM 1.323.4Open verse →

    हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।।

    अर्थ · Hindi

    हरषे दसरथ सुतन्ह समेता। कहि न जाइ उर आनँदु जेता।।

  3341. RCM 1.323.5Open verse →

    सुर प्रनामु करि बरसहिं फूला। मुनि असीस धुनि मंगल मूला।।

    अर्थ · Hindi

    सुर प्रनामु करि बरसहिं फूला। मुनि असीस धुनि मंगल मूला।।

  3342. RCM 1.323.6Open verse →

    गान निसान कोलाहलु भारी। प्रेम प्रमोद मगन नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    गान निसान कोलाहलु भारी। प्रेम प्रमोद मगन नर नारी।।

  3343. RCM 1.323.7Open verse →

    एहि बिधि सीय मंडपहिं आई। प्रमुदित सांति पढ़हिं मुनिराई।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सीय मंडपहिं आई। प्रमुदित सांति पढ़हिं मुनिराई।।

  3344. RCM 1.323.8Open verse →

    तेहि अवसर कर बिधि ब्यवहारू। दुहुँ कुलगुर सब कीन्ह अचारू।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर कर बिधि ब्यवहारू। दुहुँ कुलगुर सब कीन्ह अचारू।।

  3345. RCM 1.324.1Open verse →

    जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।।

  3346. RCM 1.324.2Open verse →

    सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।।

  3347. RCM 1.324.3Open verse →

    समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाई। सुनत सुआसिनि सादर ल्याई।।

    अर्थ · Hindi

    समउ जानि मुनिबरन्ह बोलाई। सुनत सुआसिनि सादर ल्याई।।

  3348. RCM 1.324.4Open verse →

    जनक बाम दिसि सोह सुनयना। हिमगिरि संग बनि जनु मयना।।

    अर्थ · Hindi

    जनक बाम दिसि सोह सुनयना। हिमगिरि संग बनि जनु मयना।।

  3349. RCM 1.324.5Open verse →

    कनक कलस मनि कोपर रूरे। सुचि सुंगध मंगल जल पूरे।।

    अर्थ · Hindi

    कनक कलस मनि कोपर रूरे। सुचि सुंगध मंगल जल पूरे।।

  3350. RCM 1.324.6Open verse →

    निज कर मुदित रायँ अरु रानी। धरे राम के आगें आनी।।

    अर्थ · Hindi

    निज कर मुदित रायँ अरु रानी। धरे राम के आगें आनी।।

  3351. RCM 1.324.7Open verse →

    पढ़हिं बेद मुनि मंगल बानी। गगन सुमन झरि अवसरु जानी।।

    अर्थ · Hindi

    पढ़हिं बेद मुनि मंगल बानी। गगन सुमन झरि अवसरु जानी।।

  3352. RCM 1.324.8Open verse →

    बरु बिलोकि दंपति अनुरागे। पाय पुनीत पखारन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    बरु बिलोकि दंपति अनुरागे। पाय पुनीत पखारन लागे।।

  3353. RCM 1.325.1Open verse →

    कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं।।नयन लाभु सब सादर लेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं।।नयन लाभु सब सादर लेहीं।।

  3354. RCM 1.325.2Open verse →

    जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहौं सो थोरी।।

  3355. RCM 1.325.3Open verse →

    राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं। जगमगात मनि खंभन माहीं ।

    अर्थ · Hindi

    राम सीय सुंदर प्रतिछाहीं। जगमगात मनि खंभन माहीं ।

  3356. RCM 1.325.4Open verse →

    मनहुँ मदन रति धरि बहु रूपा। देखत राम बिआहु अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ मदन रति धरि बहु रूपा। देखत राम बिआहु अनूपा।।

  3357. RCM 1.325.5Open verse →

    दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    दरस लालसा सकुच न थोरी। प्रगटत दुरत बहोरि बहोरी।।

  3358. RCM 1.325.6Open verse →

    भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।।

    अर्थ · Hindi

    भए मगन सब देखनिहारे। जनक समान अपान बिसारे।।

  3359. RCM 1.325.7Open verse →

    प्रमुदित मुनिन्ह भावँरी फेरी। नेगसहित सब रीति निबेरीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रमुदित मुनिन्ह भावँरी फेरी। नेगसहित सब रीति निबेरीं।।

  3360. RCM 1.325.8Open verse →

    राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं।।

  3361. RCM 1.325.9Open verse →

    अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।।

    अर्थ · Hindi

    अरुन पराग जलजु भरि नीकें। ससिहि भूष अहि लोभ अमी कें।।

  3362. RCM 1.325.10Open verse →

    बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बसिष्ठ दीन्ह अनुसासन। बरु दुलहिनि बैठे एक आसन।।

  3363. RCM 1.326.1Open verse →

    जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी।।

    अर्थ · Hindi

    जसि रघुबीर ब्याह बिधि बरनी। सकल कुअँर ब्याहे तेहिं करनी।।

  3364. RCM 1.326.2Open verse →

    कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न जाइ कछु दाइज भूरी। रहा कनक मनि मंडपु पूरी।।

  3365. RCM 1.326.3Open verse →

    कंबल बसन बिचित्र पटोरे। भाँति भाँति बहु मोल न थोरे।।

    अर्थ · Hindi

    कंबल बसन बिचित्र पटोरे। भाँति भाँति बहु मोल न थोरे।।

  3366. RCM 1.326.4Open verse →

    गज रथ तुरग दास अरु दासी। धेनु अलंकृत कामदुहा सी।।

    अर्थ · Hindi

    गज रथ तुरग दास अरु दासी। धेनु अलंकृत कामदुहा सी।।

  3367. RCM 1.326.5Open verse →

    बस्तु अनेक करिअ किमि लेखा। कहि न जाइ जानहिं जिन्ह देखा।।

    अर्थ · Hindi

    बस्तु अनेक करिअ किमि लेखा। कहि न जाइ जानहिं जिन्ह देखा।।

  3368. RCM 1.326.6Open verse →

    लोकपाल अवलोकि सिहाने। लीन्ह अवधपति सबु सुखु माने।।

    अर्थ · Hindi

    लोकपाल अवलोकि सिहाने। लीन्ह अवधपति सबु सुखु माने।।

  3369. RCM 1.326.7Open verse →

    दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।।

    अर्थ · Hindi

    दीन्ह जाचकन्हि जो जेहि भावा। उबरा सो जनवासेहिं आवा।।

  3370. RCM 1.326.8Open verse →

    तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।

    अर्थ · Hindi

    तब कर जोरि जनकु मृदु बानी। बोले सब बरात सनमानी।।

  3371. RCM 1.327.1Open verse →

    स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन। सोभा कोटि मनोज लजावन।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम सरीरु सुभायँ सुहावन। सोभा कोटि मनोज लजावन।।

  3372. RCM 1.327.2Open verse →

    जावक जुत पद कमल सुहाए। मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए।।

    अर्थ · Hindi

    जावक जुत पद कमल सुहाए। मुनि मन मधुप रहत जिन्ह छाए।।

  3373. RCM 1.327.3Open verse →

    पीत पुनीत मनोहर धोती। हरति बाल रबि दामिनि जोती।।

    अर्थ · Hindi

    पीत पुनीत मनोहर धोती। हरति बाल रबि दामिनि जोती।।

  3374. RCM 1.327.4Open verse →

    कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर।।

    अर्थ · Hindi

    कल किंकिनि कटि सूत्र मनोहर। बाहु बिसाल बिभूषन सुंदर।।

  3375. RCM 1.327.5Open verse →

    पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।।

    अर्थ · Hindi

    पीत जनेउ महाछबि देई। कर मुद्रिका चोरि चितु लेई।।

  3376. RCM 1.327.6Open verse →

    सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन राजे।।

    अर्थ · Hindi

    सोहत ब्याह साज सब साजे। उर आयत उरभूषन राजे।।

  3377. RCM 1.327.7Open verse →

    पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती।।

    अर्थ · Hindi

    पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती।।

  3378. RCM 1.327.8Open verse →

    नयन कमल कल कुंडल काना। बदनु सकल सौंदर्ज निधाना।।

    अर्थ · Hindi

    नयन कमल कल कुंडल काना। बदनु सकल सौंदर्ज निधाना।।

  3379. RCM 1.327.9Open verse →

    सुंदर भृकुटि मनोहर नासा। भाल तिलकु रुचिरता निवासा।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर भृकुटि मनोहर नासा। भाल तिलकु रुचिरता निवासा।।

  3380. RCM 1.327.10Open verse →

    सोहत मौरु मनोहर माथे। मंगलमय मुकुता मनि गाथे।।

    अर्थ · Hindi

    सोहत मौरु मनोहर माथे। मंगलमय मुकुता मनि गाथे।।

  3381. RCM 1.328.1Open verse →

    पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि जेवनार भई बहु भाँती। पठए जनक बोलाइ बराती।।

  3382. RCM 1.328.2Open verse →

    परत पाँवड़े बसन अनूपा। सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा।।

    अर्थ · Hindi

    परत पाँवड़े बसन अनूपा। सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा।।

  3383. RCM 1.328.3Open verse →

    सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सबके पाय पखारे। जथाजोगु पीढ़न्ह बैठारे।।

  3384. RCM 1.328.4Open verse →

    धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना।।

    अर्थ · Hindi

    धोए जनक अवधपति चरना। सीलु सनेहु जाइ नहिं बरना।।

  3385. RCM 1.328.5Open verse →

    बहुरि राम पद पंकज धोए। जे हर हृदय कमल महुँ गोए।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि राम पद पंकज धोए। जे हर हृदय कमल महुँ गोए।।

  3386. RCM 1.328.6Open verse →

    तीनिउ भाई राम सम जानी। धोए चरन जनक निज पानी।।

    अर्थ · Hindi

    तीनिउ भाई राम सम जानी। धोए चरन जनक निज पानी।।

  3387. RCM 1.328.7Open verse →

    आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    आसन उचित सबहि नृप दीन्हे। बोलि सूपकारी सब लीन्हे।।

  3388. RCM 1.328.8Open verse →

    सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    सादर लगे परन पनवारे। कनक कील मनि पान सँवारे।।

  3389. RCM 1.328.9Open verse →

    सूपोदन सुरभी सरपि सुंदर स्वादु पुनीत।

    अर्थ · Hindi

    सूपोदन सुरभी सरपि सुंदर स्वादु पुनीत।

  3390. RCM 1.328.10Open verse →

    छन महुँ सब कें परुसि गे चतुर सुआर बिनीत।।328।।

    अर्थ · Hindi

    छन महुँ सब कें परुसि गे चतुर सुआर बिनीत।।328।।

  3391. RCM 1.329.1Open verse →

    पंच कवल करि जेवन लअगे। गारि गान सुनि अति अनुरागे।।

    अर्थ · Hindi

    पंच कवल करि जेवन लअगे। गारि गान सुनि अति अनुरागे।।

  3392. RCM 1.329.2Open verse →

    भाँति अनेक परे पकवाने। सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    भाँति अनेक परे पकवाने। सुधा सरिस नहिं जाहिं बखाने।।

  3393. RCM 1.329.3Open verse →

    परुसन लगे सुआर सुजाना। बिंजन बिबिध नाम को जाना।।

    अर्थ · Hindi

    परुसन लगे सुआर सुजाना। बिंजन बिबिध नाम को जाना।।

  3394. RCM 1.329.4Open verse →

    चारि भाँति भोजन बिधि गाई। एक एक बिधि बरनि न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    चारि भाँति भोजन बिधि गाई। एक एक बिधि बरनि न जाई।।

  3395. RCM 1.329.5Open verse →

    छरस रुचिर बिंजन बहु जाती। एक एक रस अगनित भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    छरस रुचिर बिंजन बहु जाती। एक एक रस अगनित भाँती।।

  3396. RCM 1.329.6Open verse →

    जेवँत देहिं मधुर धुनि गारी। लै लै नाम पुरुष अरु नारी।।

    अर्थ · Hindi

    जेवँत देहिं मधुर धुनि गारी। लै लै नाम पुरुष अरु नारी।।

  3397. RCM 1.329.7Open verse →

    समय सुहावनि गारि बिराजा। हँसत राउ सुनि सहित समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    समय सुहावनि गारि बिराजा। हँसत राउ सुनि सहित समाजा।।

  3398. RCM 1.329.8Open verse →

    एहि बिधि सबहीं भौजनु कीन्हा। आदर सहित आचमनु दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सबहीं भौजनु कीन्हा। आदर सहित आचमनु दीन्हा।।

  3399. RCM 1.329.9Open verse →

    देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।

    अर्थ · Hindi

    देइ पान पूजे जनक दसरथु सहित समाज।

  3400. RCM 1.329.10Open verse →

    जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।

    अर्थ · Hindi

    जनवासेहि गवने मुदित सकल भूप सिरताज।।329।।

  3401. RCM 1.330.1Open verse →

    नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नित नूतन मंगल पुर माहीं। निमिष सरिस दिन जामिनि जाहीं।।

  3402. RCM 1.330.2Open verse →

    बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुन गन गावन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    बड़े भोर भूपतिमनि जागे। जाचक गुन गन गावन लागे।।

  3403. RCM 1.330.3Open verse →

    देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता।।

    अर्थ · Hindi

    देखि कुअँर बर बधुन्ह समेता। किमि कहि जात मोदु मन जेता।।

  3404. RCM 1.330.4Open verse →

    प्रातक्रिया करि गे गुरु पाहीं। महाप्रमोदु प्रेमु मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रातक्रिया करि गे गुरु पाहीं। महाप्रमोदु प्रेमु मन माहीं।।

  3405. RCM 1.330.5Open verse →

    करि प्रनाम पूजा कर जोरी। बोले गिरा अमिअँ जनु बोरी।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनाम पूजा कर जोरी। बोले गिरा अमिअँ जनु बोरी।।

  3406. RCM 1.330.6Open verse →

    तुम्हरी कृपाँ सुनहु मुनिराजा। भयउँ आजु मैं पूरनकाजा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरी कृपाँ सुनहु मुनिराजा। भयउँ आजु मैं पूरनकाजा।।

  3407. RCM 1.330.7Open verse →

    अब सब बिप्र बोलाइ गोसाईं। देहु धेनु सब भाँति बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    अब सब बिप्र बोलाइ गोसाईं। देहु धेनु सब भाँति बनाई।।

  3408. RCM 1.330.8Open verse →

    सुनि गुर करि महिपाल बड़ाई। पुनि पठए मुनि बृंद बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि गुर करि महिपाल बड़ाई। पुनि पठए मुनि बृंद बोलाई।।

  3409. RCM 1.330.9Open verse →

    बामदेउ अरु देवरिषि बालमीकि जाबालि।

    अर्थ · Hindi

    बामदेउ अरु देवरिषि बालमीकि जाबालि।

  3410. RCM 1.330.10Open verse →

    आए मुनिबर निकर तब कौसिकादि तपसालि।।330।।

    अर्थ · Hindi

    आए मुनिबर निकर तब कौसिकादि तपसालि।।330।।

  3411. RCM 1.331.1Open verse →

    दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे। पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    दंड प्रनाम सबहि नृप कीन्हे। पूजि सप्रेम बरासन दीन्हे।।

  3412. RCM 1.331.2Open verse →

    चारि लच्छ बर धेनु मगाई। कामसुरभि सम सील सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    चारि लच्छ बर धेनु मगाई। कामसुरभि सम सील सुहाई।।

  3413. RCM 1.331.3Open verse →

    सब बिधि सकल अलंकृत कीन्हीं। मुदित महिप महिदेवन्ह दीन्हीं।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि सकल अलंकृत कीन्हीं। मुदित महिप महिदेवन्ह दीन्हीं।।

  3414. RCM 1.331.4Open verse →

    करत बिनय बहु बिधि नरनाहू। लहेउँ आजु जग जीवन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    करत बिनय बहु बिधि नरनाहू। लहेउँ आजु जग जीवन लाहू।।

  3415. RCM 1.331.5Open verse →

    पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।।

    अर्थ · Hindi

    पाइ असीस महीसु अनंदा। लिए बोलि पुनि जाचक बृंदा।।

  3416. RCM 1.331.6Open verse →

    कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन।।

    अर्थ · Hindi

    कनक बसन मनि हय गय स्यंदन। दिए बूझि रुचि रबिकुलनंदन।।

  3417. RCM 1.331.7Open verse →

    चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।।

    अर्थ · Hindi

    चले पढ़त गावत गुन गाथा। जय जय जय दिनकर कुल नाथा।।

  3418. RCM 1.331.8Open verse →

    एहि बिधि राम बिआह उछाहू। सकइ न बरनि सहस मुख जाहू।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि राम बिआह उछाहू। सकइ न बरनि सहस मुख जाहू।।

  3419. RCM 1.331.9Open verse →

    बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ।

    अर्थ · Hindi

    बार बार कौसिक चरन सीसु नाइ कह राउ।

  3420. RCM 1.331.10Open verse →

    यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ।।331।।

    अर्थ · Hindi

    यह सबु सुखु मुनिराज तव कृपा कटाच्छ पसाउ।।331।।

  3421. RCM 1.332.1Open verse →

    जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती।।

    अर्थ · Hindi

    जनक सनेहु सीलु करतूती। नृपु सब भाँति सराह बिभूती।।

  3422. RCM 1.332.2Open verse →

    दिन उठि बिदा अवधपति मागा। राखहिं जनकु सहित अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    दिन उठि बिदा अवधपति मागा। राखहिं जनकु सहित अनुरागा।।

  3423. RCM 1.332.3Open verse →

    नित नूतन आदरु अधिकाई। दिन प्रति सहस भाँति पहुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    नित नूतन आदरु अधिकाई। दिन प्रति सहस भाँति पहुनाई।।

  3424. RCM 1.332.4Open verse →

    नित नव नगर अनंद उछाहू। दसरथ गवनु सोहाइ न काहू।।

    अर्थ · Hindi

    नित नव नगर अनंद उछाहू। दसरथ गवनु सोहाइ न काहू।।

  3425. RCM 1.332.5Open verse →

    बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती।।

    अर्थ · Hindi

    बहुत दिवस बीते एहि भाँती। जनु सनेह रजु बँधे बराती।।

  3426. RCM 1.332.6Open verse →

    कौसिक सतानंद तब जाई। कहा बिदेह नृपहि समुझाई।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिक सतानंद तब जाई। कहा बिदेह नृपहि समुझाई।।

  3427. RCM 1.332.7Open verse →

    अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    अब दसरथ कहँ आयसु देहू। जद्यपि छाड़ि न सकहु सनेहू।।

  3428. RCM 1.332.8Open verse →

    भलेहिं नाथ कहि सचिव बोलाए। कहि जय जीव सीस तिन्ह नाए।।

    अर्थ · Hindi

    भलेहिं नाथ कहि सचिव बोलाए। कहि जय जीव सीस तिन्ह नाए।।

  3429. RCM 1.332.9Open verse →

    अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ।

    अर्थ · Hindi

    अवधनाथु चाहत चलन भीतर करहु जनाउ।

  3430. RCM 1.332.10Open verse →

    भए प्रेमबस सचिव सुनि बिप्र सभासद राउ।।332।।

    अर्थ · Hindi

    भए प्रेमबस सचिव सुनि बिप्र सभासद राउ।।332।।

  3431. RCM 1.333.1Open verse →

    पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।।

    अर्थ · Hindi

    पुरबासी सुनि चलिहि बराता। बूझत बिकल परस्पर बाता।।

  3432. RCM 1.333.2Open verse →

    सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य गवनु सुनि सब बिलखाने। मनहुँ साँझ सरसिज सकुचाने।।

  3433. RCM 1.333.3Open verse →

    जहँ जहँ आवत बसे बराती। तहँ तहँ सिद्ध चला बहु भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जहँ आवत बसे बराती। तहँ तहँ सिद्ध चला बहु भाँती।।

  3434. RCM 1.333.4Open verse →

    बिबिध भाँति मेवा पकवाना। भोजन साजु न जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध भाँति मेवा पकवाना। भोजन साजु न जाइ बखाना।।

  3435. RCM 1.333.5Open verse →

    भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।।

    अर्थ · Hindi

    भरि भरि बसहँ अपार कहारा। पठई जनक अनेक सुसारा।।

  3436. RCM 1.333.6Open verse →

    तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा।।

    अर्थ · Hindi

    तुरग लाख रथ सहस पचीसा। सकल सँवारे नख अरु सीसा।।

  3437. RCM 1.333.7Open verse →

    मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।।

    अर्थ · Hindi

    मत्त सहस दस सिंधुर साजे। जिन्हहि देखि दिसिकुंजर लाजे।।

  3438. RCM 1.333.8Open verse →

    कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    कनक बसन मनि भरि भरि जाना। महिषीं धेनु बस्तु बिधि नाना।।

  3439. RCM 1.333.9Open verse →

    दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि।

    अर्थ · Hindi

    दाइज अमित न सकिअ कहि दीन्ह बिदेहँ बहोरि।

  3440. RCM 1.333.10Open verse →

    जो अवलोकत लोकपति लोक संपदा थोरि।।333।।

    अर्थ · Hindi

    जो अवलोकत लोकपति लोक संपदा थोरि।।333।।

  3441. RCM 1.334.1Open verse →

    सबु समाजु एहि भाँति बनाई। जनक अवधपुर दीन्ह पठाई।।

    अर्थ · Hindi

    सबु समाजु एहि भाँति बनाई। जनक अवधपुर दीन्ह पठाई।।

  3442. RCM 1.334.2Open verse →

    चलिहि बरात सुनत सब रानीं। बिकल मीनगन जनु लघु पानीं।।

    अर्थ · Hindi

    चलिहि बरात सुनत सब रानीं। बिकल मीनगन जनु लघु पानीं।।

  3443. RCM 1.334.3Open verse →

    पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि सीय गोद करि लेहीं। देइ असीस सिखावनु देहीं।।

  3444. RCM 1.334.4Open verse →

    होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी।।

    अर्थ · Hindi

    होएहु संतत पियहि पिआरी। चिरु अहिबात असीस हमारी।।

  3445. RCM 1.334.5Open verse →

    सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।

    अर्थ · Hindi

    सासु ससुर गुर सेवा करेहू। पति रुख लखि आयसु अनुसरेहू।।

  3446. RCM 1.334.6Open verse →

    अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    अति सनेह बस सखीं सयानी। नारि धरम सिखवहिं मृदु बानी।।

  3447. RCM 1.334.7Open verse →

    सादर सकल कुअँरि समुझाई। रानिन्ह बार बार उर लाई।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सकल कुअँरि समुझाई। रानिन्ह बार बार उर लाई।।

  3448. RCM 1.334.8Open verse →

    बहुरि बहुरि भेटहिं महतारीं। कहहिं बिरंचि रचीं कत नारीं।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बहुरि भेटहिं महतारीं। कहहिं बिरंचि रचीं कत नारीं।।

  3449. RCM 1.334.9Open verse →

    तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर भाइन्ह सहित रामु भानु कुल केतु।

  3450. RCM 1.334.10Open verse →

    चले जनक मंदिर मुदित बिदा करावन हेतु।।334।।

    अर्थ · Hindi

    चले जनक मंदिर मुदित बिदा करावन हेतु।।334।।

  3451. RCM 1.335.1Open verse →

    चारिअ भाइ सुभायँ सुहाए। नगर नारि नर देखन धाए।।

    अर्थ · Hindi

    चारिअ भाइ सुभायँ सुहाए। नगर नारि नर देखन धाए।।

  3452. RCM 1.335.2Open verse →

    कोउ कह चलन चहत हहिं आजू। कीन्ह बिदेह बिदा कर साजू।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह चलन चहत हहिं आजू। कीन्ह बिदेह बिदा कर साजू।।

  3453. RCM 1.335.3Open verse →

    लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।।

    अर्थ · Hindi

    लेहु नयन भरि रूप निहारी। प्रिय पाहुने भूप सुत चारी।।

  3454. RCM 1.335.4Open verse →

    को जानै केहि सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी।।

    अर्थ · Hindi

    को जानै केहि सुकृत सयानी। नयन अतिथि कीन्हे बिधि आनी।।

  3455. RCM 1.335.5Open verse →

    मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा। सुरतरु लहै जनम कर भूखा।।

    अर्थ · Hindi

    मरनसीलु जिमि पाव पिऊषा। सुरतरु लहै जनम कर भूखा।।

  3456. RCM 1.335.6Open verse →

    पाव नारकी हरिपदु जैसें। इन्ह कर दरसनु हम कहँ तैसे।।

    अर्थ · Hindi

    पाव नारकी हरिपदु जैसें। इन्ह कर दरसनु हम कहँ तैसे।।

  3457. RCM 1.335.7Open verse →

    निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि राम सोभा उर धरहू। निज मन फनि मूरति मनि करहू।।

  3458. RCM 1.335.8Open verse →

    एहि बिधि सबहि नयन फलु देता। गए कुअँर सब राज निकेता।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सबहि नयन फलु देता। गए कुअँर सब राज निकेता।।

  3459. RCM 1.335.9Open verse →

    रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।

    अर्थ · Hindi

    रूप सिंधु सब बंधु लखि हरषि उठा रनिवासु।

  3460. RCM 1.335.10Open verse →

    करहि निछावरि आरती महा मुदित मन सासु।।335।।

    अर्थ · Hindi

    करहि निछावरि आरती महा मुदित मन सासु।।335।।

  3461. RCM 1.336.1Open verse →

    देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम छबि अति अनुरागीं। प्रेमबिबस पुनि पुनि पद लागीं।।

  3462. RCM 1.336.2Open verse →

    रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    रही न लाज प्रीति उर छाई। सहज सनेहु बरनि किमि जाई।।

  3463. RCM 1.336.3Open verse →

    भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए। छरस असन अति हेतु जेवाँए।।

    अर्थ · Hindi

    भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाए। छरस असन अति हेतु जेवाँए।।

  3464. RCM 1.336.4Open verse →

    बोले रामु सुअवसरु जानी। सील सनेह सकुचमय बानी।।

    अर्थ · Hindi

    बोले रामु सुअवसरु जानी। सील सनेह सकुचमय बानी।।

  3465. RCM 1.336.5Open verse →

    राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    राउ अवधपुर चहत सिधाए। बिदा होन हम इहाँ पठाए।।

  3466. RCM 1.336.6Open verse →

    मातु मुदित मन आयसु देहू। बालक जानि करब नित नेहू।।

    अर्थ · Hindi

    मातु मुदित मन आयसु देहू। बालक जानि करब नित नेहू।।

  3467. RCM 1.336.7Open verse →

    सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू। बोलि न सकहिं प्रेमबस सासू।।

  3468. RCM 1.336.8Open verse →

    हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही। पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ लगाइ कुअँरि सब लीन्ही। पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही।।

  3469. RCM 1.337.1Open verse →

    अस कहि रही चरन गहि रानी। प्रेम पंक जनु गिरा समानी।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि रही चरन गहि रानी। प्रेम पंक जनु गिरा समानी।।

  3470. RCM 1.337.2Open verse →

    सुनि सनेहसानी बर बानी। बहुबिधि राम सासु सनमानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनेहसानी बर बानी। बहुबिधि राम सासु सनमानी।।

  3471. RCM 1.337.3Open verse →

    राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    राम बिदा मागत कर जोरी। कीन्ह प्रनामु बहोरि बहोरी।।

  3472. RCM 1.337.4Open verse →

    पाइ असीस बहुरि सिरु नाई। भाइन्ह सहित चले रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    पाइ असीस बहुरि सिरु नाई। भाइन्ह सहित चले रघुराई।।

  3473. RCM 1.337.5Open verse →

    मंजु मधुर मूरति उर आनी। भई सनेह सिथिल सब रानी।।

    अर्थ · Hindi

    मंजु मधुर मूरति उर आनी। भई सनेह सिथिल सब रानी।।

  3474. RCM 1.337.6Open verse →

    पुनि धीरजु धरि कुअँरि हँकारी। बार बार भेटहिं महतारीं।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि धीरजु धरि कुअँरि हँकारी। बार बार भेटहिं महतारीं।।

  3475. RCM 1.337.7Open verse →

    पहुँचावहिं फिरि मिलहिं बहोरी। बढ़ी परस्पर प्रीति न थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पहुँचावहिं फिरि मिलहिं बहोरी। बढ़ी परस्पर प्रीति न थोरी।।

  3476. RCM 1.337.8Open verse →

    पुनि पुनि मिलत सखिन्ह बिलगाई। बाल बच्छ जिमि धेनु लवाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि मिलत सखिन्ह बिलगाई। बाल बच्छ जिमि धेनु लवाई।।

  3477. RCM 1.337.9Open verse →

    प्रेमबिबस नर नारि सब सखिन्ह सहित रनिवासु।

    अर्थ · Hindi

    प्रेमबिबस नर नारि सब सखिन्ह सहित रनिवासु।

  3478. RCM 1.337.10Open verse →

    मानहुँ कीन्ह बिदेहपुर करुनाँ बिरहँ निवासु।।337।।

    अर्थ · Hindi

    मानहुँ कीन्ह बिदेहपुर करुनाँ बिरहँ निवासु।।337।।

  3479. RCM 1.338.1Open verse →

    सुक सारिका जानकी ज्याए। कनक पिंजरन्हि राखि पढ़ाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुक सारिका जानकी ज्याए। कनक पिंजरन्हि राखि पढ़ाए।।

  3480. RCM 1.338.2Open verse →

    ब्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही। सुनि धीरजु परिहरइ न केही।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही। सुनि धीरजु परिहरइ न केही।।

  3481. RCM 1.338.3Open verse →

    भए बिकल खग मृग एहि भाँति। मनुज दसा कैसें कहि जाती।।

    अर्थ · Hindi

    भए बिकल खग मृग एहि भाँति। मनुज दसा कैसें कहि जाती।।

  3482. RCM 1.338.4Open verse →

    बंधु समेत जनकु तब आए। प्रेम उमगि लोचन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु समेत जनकु तब आए। प्रेम उमगि लोचन जल छाए।।

  3483. RCM 1.338.5Open verse →

    सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।।

    अर्थ · Hindi

    सीय बिलोकि धीरता भागी। रहे कहावत परम बिरागी।।

  3484. RCM 1.338.6Open verse →

    लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।।

    अर्थ · Hindi

    लीन्हि राँय उर लाइ जानकी। मिटी महामरजाद ग्यान की।।

  3485. RCM 1.338.7Open verse →

    समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।।

    अर्थ · Hindi

    समुझावत सब सचिव सयाने। कीन्ह बिचारु न अवसर जाने।।

  3486. RCM 1.338.8Open verse →

    बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।

    अर्थ · Hindi

    बारहिं बार सुता उर लाई। सजि सुंदर पालकीं मगाई।।

  3487. RCM 1.338.9Open verse →

    प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस।

    अर्थ · Hindi

    प्रेमबिबस परिवारु सबु जानि सुलगन नरेस।

  3488. RCM 1.338.10Open verse →

    कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह सुमिरे सिद्धि गनेस।।338।।

    अर्थ · Hindi

    कुँअरि चढ़ाई पालकिन्ह सुमिरे सिद्धि गनेस।।338।।

  3489. RCM 1.339.1Open verse →

    बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि भूप सुता समुझाई। नारिधरमु कुलरीति सिखाई।।

  3490. RCM 1.339.2Open verse →

    दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे।।

    अर्थ · Hindi

    दासीं दास दिए बहुतेरे। सुचि सेवक जे प्रिय सिय केरे।।

  3491. RCM 1.339.3Open verse →

    सीय चलत ब्याकुल पुरबासी। होहिं सगुन सुभ मंगल रासी।।

    अर्थ · Hindi

    सीय चलत ब्याकुल पुरबासी। होहिं सगुन सुभ मंगल रासी।।

  3492. RCM 1.339.4Open verse →

    भूसुर सचिव समेत समाजा। संग चले पहुँचावन राजा।।

    अर्थ · Hindi

    भूसुर सचिव समेत समाजा। संग चले पहुँचावन राजा।।

  3493. RCM 1.339.5Open verse →

    समय बिलोकि बाजने बाजे। रथ गज बाजि बरातिन्ह साजे।।

    अर्थ · Hindi

    समय बिलोकि बाजने बाजे। रथ गज बाजि बरातिन्ह साजे।।

  3494. RCM 1.339.6Open verse →

    दसरथ बिप्र बोलि सब लीन्हे। दान मान परिपूरन कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    दसरथ बिप्र बोलि सब लीन्हे। दान मान परिपूरन कीन्हे।।

  3495. RCM 1.339.7Open verse →

    चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।

    अर्थ · Hindi

    चरन सरोज धूरि धरि सीसा। मुदित महीपति पाइ असीसा।।

  3496. RCM 1.339.8Open verse →

    सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि गजाननु कीन्ह पयाना। मंगलमूल सगुन भए नाना।।

  3497. RCM 1.339.9Open verse →

    सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।

    अर्थ · Hindi

    सुर प्रसून बरषहि हरषि करहिं अपछरा गान।

  3498. RCM 1.339.10Open verse →

    चले अवधपति अवधपुर मुदित बजाइ निसान।।339।।

    अर्थ · Hindi

    चले अवधपति अवधपुर मुदित बजाइ निसान।।339।।

  3499. RCM 1.340.1Open verse →

    नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।

    अर्थ · Hindi

    नृप करि बिनय महाजन फेरे। सादर सकल मागने टेरे।।

  3500. RCM 1.340.2Open verse →

    भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    भूषन बसन बाजि गज दीन्हे। प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे।।

  3501. RCM 1.340.3Open verse →

    बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार बिरिदावलि भाषी। फिरे सकल रामहि उर राखी।।

  3502. RCM 1.340.4Open verse →

    बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं। जनकु प्रेमबस फिरै न चहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं। जनकु प्रेमबस फिरै न चहहीं।।

  3503. RCM 1.340.5Open verse →

    पुनि कह भूपति बचन सुहाए। फिरिअ महीस दूरि बड़ि आए।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कह भूपति बचन सुहाए। फिरिअ महीस दूरि बड़ि आए।।

  3504. RCM 1.340.6Open verse →

    राउ बहोरि उतरि भए ठाढ़े। प्रेम प्रबाह बिलोचन बाढ़े।।

    अर्थ · Hindi

    राउ बहोरि उतरि भए ठाढ़े। प्रेम प्रबाह बिलोचन बाढ़े।।

  3505. RCM 1.340.7Open verse →

    तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।

    अर्थ · Hindi

    तब बिदेह बोले कर जोरी। बचन सनेह सुधाँ जनु बोरी।।

  3506. RCM 1.340.8Open verse →

    करौ कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    करौ कवन बिधि बिनय बनाई। महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई।।

  3507. RCM 1.340.9Open verse →

    कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।

    अर्थ · Hindi

    कोसलपति समधी सजन सनमाने सब भाँति।

  3508. RCM 1.340.10Open verse →

    मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति।।340।।

    अर्थ · Hindi

    मिलनि परसपर बिनय अति प्रीति न हृदयँ समाति।।340।।

  3509. RCM 1.341.1Open verse →

    मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा। आसिरबादु सबहि सन पावा।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि मंडलिहि जनक सिरु नावा। आसिरबादु सबहि सन पावा।।

  3510. RCM 1.341.2Open verse →

    सादर पुनि भेंटे जामाता। रूप सील गुन निधि सब भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    सादर पुनि भेंटे जामाता। रूप सील गुन निधि सब भ्राता।।

  3511. RCM 1.341.3Open verse →

    जोरि पंकरुह पानि सुहाए। बोले बचन प्रेम जनु जाए।।

    अर्थ · Hindi

    जोरि पंकरुह पानि सुहाए। बोले बचन प्रेम जनु जाए।।

  3512. RCM 1.341.4Open verse →

    राम करौ केहि भाँति प्रसंसा। मुनि महेस मन मानस हंसा।।

    अर्थ · Hindi

    राम करौ केहि भाँति प्रसंसा। मुनि महेस मन मानस हंसा।।

  3513. RCM 1.341.5Open verse →

    करहिं जोग जोगी जेहि लागी। कोहु मोहु ममता मदु त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं जोग जोगी जेहि लागी। कोहु मोहु ममता मदु त्यागी।।

  3514. RCM 1.341.6Open verse →

    ब्यापकु ब्रह्मु अलखु अबिनासी। चिदानंदु निरगुन गुनरासी।।

    अर्थ · Hindi

    ब्यापकु ब्रह्मु अलखु अबिनासी। चिदानंदु निरगुन गुनरासी।।

  3515. RCM 1.341.7Open verse →

    मन समेत जेहि जान न बानी। तरकि न सकहिं सकल अनुमानी।।

    अर्थ · Hindi

    मन समेत जेहि जान न बानी। तरकि न सकहिं सकल अनुमानी।।

  3516. RCM 1.341.8Open verse →

    महिमा निगमु नेति कहि कहई। जो तिहुँ काल एकरस रहई।।

    अर्थ · Hindi

    महिमा निगमु नेति कहि कहई। जो तिहुँ काल एकरस रहई।।

  3517. RCM 1.341.9Open verse →

    नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल।

    अर्थ · Hindi

    नयन बिषय मो कहुँ भयउ सो समस्त सुख मूल।

  3518. RCM 1.341.10Open verse →

    सबइ लाभु जग जीव कहँ भएँ ईसु अनुकुल।।341।।

    अर्थ · Hindi

    सबइ लाभु जग जीव कहँ भएँ ईसु अनुकुल।।341।।

  3519. RCM 1.342.1Open verse →

    सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।।

    अर्थ · Hindi

    सबहि भाँति मोहि दीन्हि बड़ाई। निज जन जानि लीन्ह अपनाई।।

  3520. RCM 1.342.2Open verse →

    होहिं सहस दस सारद सेषा। करहिं कलप कोटिक भरि लेखा।।

    अर्थ · Hindi

    होहिं सहस दस सारद सेषा। करहिं कलप कोटिक भरि लेखा।।

  3521. RCM 1.342.3Open verse →

    मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    मोर भाग्य राउर गुन गाथा। कहि न सिराहिं सुनहु रघुनाथा।।

  3522. RCM 1.342.4Open verse →

    मै कछु कहउँ एक बल मोरें। तुम्ह रीझहु सनेह सुठि थोरें।।

    अर्थ · Hindi

    मै कछु कहउँ एक बल मोरें। तुम्ह रीझहु सनेह सुठि थोरें।।

  3523. RCM 1.342.5Open verse →

    बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार मागउँ कर जोरें। मनु परिहरै चरन जनि भोरें।।

  3524. RCM 1.342.6Open verse →

    सुनि बर बचन प्रेम जनु पोषे। पूरनकाम रामु परितोषे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बर बचन प्रेम जनु पोषे। पूरनकाम रामु परितोषे।।

  3525. RCM 1.342.7Open verse →

    करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।।

    अर्थ · Hindi

    करि बर बिनय ससुर सनमाने। पितु कौसिक बसिष्ठ सम जाने।।

  3526. RCM 1.342.8Open verse →

    बिनती बहुरि भरत सन कीन्ही। मिलि सप्रेमु पुनि आसिष दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    बिनती बहुरि भरत सन कीन्ही। मिलि सप्रेमु पुनि आसिष दीन्ही।।

  3527. RCM 1.342.9Open verse →

    मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस।

    अर्थ · Hindi

    मिले लखन रिपुसूदनहि दीन्हि असीस महीस।

  3528. RCM 1.342.10Open verse →

    भए परस्पर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस।।342।।

    अर्थ · Hindi

    भए परस्पर प्रेमबस फिरि फिरि नावहिं सीस।।342।।

  3529. RCM 1.343.1Open verse →

    बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार करि बिनय बड़ाई। रघुपति चले संग सब भाई।।

  3530. RCM 1.343.2Open verse →

    जनक गहे कौसिक पद जाई। चरन रेनु सिर नयनन्ह लाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनक गहे कौसिक पद जाई। चरन रेनु सिर नयनन्ह लाई।।

  3531. RCM 1.343.3Open verse →

    सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मुनीस बर दरसन तोरें। अगमु न कछु प्रतीति मन मोरें।।

  3532. RCM 1.343.4Open verse →

    जो सुखु सुजसु लोकपति चहहीं। करत मनोरथ सकुचत अहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जो सुखु सुजसु लोकपति चहहीं। करत मनोरथ सकुचत अहहीं।।

  3533. RCM 1.343.5Open verse →

    सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुखु सुजसु सुलभ मोहि स्वामी। सब सिधि तव दरसन अनुगामी।।

  3534. RCM 1.343.6Open verse →

    कीन्हि बिनय पुनि पुनि सिरु नाई। फिरे महीसु आसिषा पाई।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्हि बिनय पुनि पुनि सिरु नाई। फिरे महीसु आसिषा पाई।।

  3535. RCM 1.343.7Open verse →

    चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई।।

  3536. RCM 1.343.8Open verse →

    रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी।।

  3537. RCM 1.343.9Open verse →

    बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।

    अर्थ · Hindi

    बीच बीच बर बास करि मग लोगन्ह सुख देत।

  3538. RCM 1.343.10Open verse →

    अवध समीप पुनीत दिन पहुँची आइ जनेत।।343।।

    अर्थ · Hindi

    अवध समीप पुनीत दिन पहुँची आइ जनेत।।343।।

  3539. RCM 1.344.1Open verse →

    हने निसान पनव बर बाजे। भेरि संख धुनि हय गय गाजे।।

    अर्थ · Hindi

    हने निसान पनव बर बाजे। भेरि संख धुनि हय गय गाजे।।

  3540. RCM 1.344.2Open verse →

    झाँझि बिरव डिंडमीं सुहाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

    अर्थ · Hindi

    झाँझि बिरव डिंडमीं सुहाई। सरस राग बाजहिं सहनाई।।

  3541. RCM 1.344.3Open verse →

    पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता।।

    अर्थ · Hindi

    पुर जन आवत अकनि बराता। मुदित सकल पुलकावलि गाता।।

  3542. RCM 1.344.4Open verse →

    निज निज सुंदर सदन सँवारे। हाट बाट चौहट पुर द्वारे।।

    अर्थ · Hindi

    निज निज सुंदर सदन सँवारे। हाट बाट चौहट पुर द्वारे।।

  3543. RCM 1.344.5Open verse →

    गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई। जहँ तहँ चौकें चारु पुराई।।

    अर्थ · Hindi

    गलीं सकल अरगजाँ सिंचाई। जहँ तहँ चौकें चारु पुराई।।

  3544. RCM 1.344.6Open verse →

    बना बजारु न जाइ बखाना। तोरन केतु पताक बिताना।।

    अर्थ · Hindi

    बना बजारु न जाइ बखाना। तोरन केतु पताक बिताना।।

  3545. RCM 1.344.7Open verse →

    सफल पूगफल कदलि रसाला। रोपे बकुल कदंब तमाला।।

    अर्थ · Hindi

    सफल पूगफल कदलि रसाला। रोपे बकुल कदंब तमाला।।

  3546. RCM 1.344.8Open verse →

    लगे सुभग तरु परसत धरनी। मनिमय आलबाल कल करनी।।

    अर्थ · Hindi

    लगे सुभग तरु परसत धरनी। मनिमय आलबाल कल करनी।।

  3547. RCM 1.344.9Open verse →

    बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह रचे सँवारि।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध भाँति मंगल कलस गृह गृह रचे सँवारि।

  3548. RCM 1.344.10Open verse →

    सुर ब्रह्मादि सिहाहिं सब रघुबर पुरी निहारि।।344।।

    अर्थ · Hindi

    सुर ब्रह्मादि सिहाहिं सब रघुबर पुरी निहारि।।344।।

  3549. RCM 1.345.1Open verse →

    भूप भवन तेहि अवसर सोहा। रचना देखि मदन मनु मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    भूप भवन तेहि अवसर सोहा। रचना देखि मदन मनु मोहा।।

  3550. RCM 1.345.2Open verse →

    मंगल सगुन मनोहरताई। रिधि सिधि सुख संपदा सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल सगुन मनोहरताई। रिधि सिधि सुख संपदा सुहाई।।

  3551. RCM 1.345.3Open verse →

    जनु उछाह सब सहज सुहाए। तनु धरि धरि दसरथ दसरथ गृहँ छाए।।

    अर्थ · Hindi

    जनु उछाह सब सहज सुहाए। तनु धरि धरि दसरथ दसरथ गृहँ छाए।।

  3552. RCM 1.345.4Open verse →

    देखन हेतु राम बैदेही। कहहु लालसा होहि न केही।।

    अर्थ · Hindi

    देखन हेतु राम बैदेही। कहहु लालसा होहि न केही।।

  3553. RCM 1.345.5Open verse →

    जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि। निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि।।

    अर्थ · Hindi

    जुथ जूथ मिलि चलीं सुआसिनि। निज छबि निदरहिं मदन बिलासनि।।

  3554. RCM 1.345.6Open verse →

    सकल सुमंगल सजें आरती। गावहिं जनु बहु बेष भारती।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुमंगल सजें आरती। गावहिं जनु बहु बेष भारती।।

  3555. RCM 1.345.7Open verse →

    भूपति भवन कोलाहलु होई। जाइ न बरनि समउ सुखु सोई।।

    अर्थ · Hindi

    भूपति भवन कोलाहलु होई। जाइ न बरनि समउ सुखु सोई।।

  3556. RCM 1.345.8Open verse →

    कौसल्यादि राम महतारीं। प्रेम बिबस तन दसा बिसारीं।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्यादि राम महतारीं। प्रेम बिबस तन दसा बिसारीं।।

  3557. RCM 1.345.9Open verse →

    दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस पुरारी।

    अर्थ · Hindi

    दिए दान बिप्रन्ह बिपुल पूजि गनेस पुरारी।

  3558. RCM 1.345.10Open verse →

    प्रमुदित परम दरिद्र जनु पाइ पदारथ चारि।।345।।

    अर्थ · Hindi

    प्रमुदित परम दरिद्र जनु पाइ पदारथ चारि।।345।।

  3559. RCM 1.346.1Open verse →

    मोद प्रमोद बिबस सब माता। चलहिं न चरन सिथिल भए गाता।।

    अर्थ · Hindi

    मोद प्रमोद बिबस सब माता। चलहिं न चरन सिथिल भए गाता।।

  3560. RCM 1.346.2Open verse →

    राम दरस हित अति अनुरागीं। परिछनि साजु सजन सब लागीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम दरस हित अति अनुरागीं। परिछनि साजु सजन सब लागीं।।

  3561. RCM 1.346.3Open verse →

    बिबिध बिधान बाजने बाजे। मंगल मुदित सुमित्राँ साजे।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध बिधान बाजने बाजे। मंगल मुदित सुमित्राँ साजे।।

  3562. RCM 1.346.4Open verse →

    हरद दूब दधि पल्लव फूला। पान पूगफल मंगल मूला।।

    अर्थ · Hindi

    हरद दूब दधि पल्लव फूला। पान पूगफल मंगल मूला।।

  3563. RCM 1.346.5Open verse →

    अच्छत अंकुर लोचन लाजा। मंजुल मंजरि तुलसि बिराजा।।

    अर्थ · Hindi

    अच्छत अंकुर लोचन लाजा। मंजुल मंजरि तुलसि बिराजा।।

  3564. RCM 1.346.6Open verse →

    छुहे पुरट घट सहज सुहाए। मदन सकुन जनु नीड़ बनाए।।

    अर्थ · Hindi

    छुहे पुरट घट सहज सुहाए। मदन सकुन जनु नीड़ बनाए।।

  3565. RCM 1.346.7Open verse →

    सगुन सुंगध न जाहिं बखानी। मंगल सकल सजहिं सब रानी।।

    अर्थ · Hindi

    सगुन सुंगध न जाहिं बखानी। मंगल सकल सजहिं सब रानी।।

  3566. RCM 1.346.8Open verse →

    रचीं आरतीं बहुत बिधाना। मुदित करहिं कल मंगल गाना।।

    अर्थ · Hindi

    रचीं आरतीं बहुत बिधाना। मुदित करहिं कल मंगल गाना।।

  3567. RCM 1.346.9Open verse →

    कनक थार भरि मंगलन्हि कमल करन्हि लिएँ मात।

    अर्थ · Hindi

    कनक थार भरि मंगलन्हि कमल करन्हि लिएँ मात।

  3568. RCM 1.346.10Open verse →

    चलीं मुदित परिछनि करन पुलक पल्लवित गात।।346।।

    अर्थ · Hindi

    चलीं मुदित परिछनि करन पुलक पल्लवित गात।।346।।

  3569. RCM 1.347.1Open verse →

    धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    धूप धूम नभु मेचक भयऊ। सावन घन घमंडु जनु ठयऊ।।

  3570. RCM 1.347.2Open verse →

    सुरतरु सुमन माल सुर बरषहिं। मनहुँ बलाक अवलि मनु करषहिं।।

    अर्थ · Hindi

    सुरतरु सुमन माल सुर बरषहिं। मनहुँ बलाक अवलि मनु करषहिं।।

  3571. RCM 1.347.3Open verse →

    मंजुल मनिमय बंदनिवारे। मनहुँ पाकरिपु चाप सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    मंजुल मनिमय बंदनिवारे। मनहुँ पाकरिपु चाप सँवारे।।

  3572. RCM 1.347.4Open verse →

    प्रगटहिं दुरहिं अटन्ह पर भामिनि। चारु चपल जनु दमकहिं दामिनि।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटहिं दुरहिं अटन्ह पर भामिनि। चारु चपल जनु दमकहिं दामिनि।।

  3573. RCM 1.347.5Open verse →

    दुंदुभि धुनि घन गरजनि घोरा। जाचक चातक दादुर मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    दुंदुभि धुनि घन गरजनि घोरा। जाचक चातक दादुर मोरा।।

  3574. RCM 1.347.6Open verse →

    सुर सुगन्ध सुचि बरषहिं बारी। सुखी सकल ससि पुर नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुर सुगन्ध सुचि बरषहिं बारी। सुखी सकल ससि पुर नर नारी।।

  3575. RCM 1.347.7Open verse →

    समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    समउ जानी गुर आयसु दीन्हा। पुर प्रबेसु रघुकुलमनि कीन्हा।।

  3576. RCM 1.347.8Open verse →

    सुमिरि संभु गिरजा गनराजा। मुदित महीपति सहित समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि संभु गिरजा गनराजा। मुदित महीपति सहित समाजा।।

  3577. RCM 1.347.9Open verse →

    होहिं सगुन बरषहिं सुमन सुर दुंदुभीं बजाइ।

    अर्थ · Hindi

    होहिं सगुन बरषहिं सुमन सुर दुंदुभीं बजाइ।

  3578. RCM 1.347.10Open verse →

    बिबुध बधू नाचहिं मुदित मंजुल मंगल गाइ।।347।।

    अर्थ · Hindi

    बिबुध बधू नाचहिं मुदित मंजुल मंगल गाइ।।347।।

  3579. RCM 1.348.1Open verse →

    मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।

    अर्थ · Hindi

    मागध सूत बंदि नट नागर। गावहिं जसु तिहु लोक उजागर।।

  3580. RCM 1.348.2Open verse →

    जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।।

    अर्थ · Hindi

    जय धुनि बिमल बेद बर बानी। दस दिसि सुनिअ सुमंगल सानी।।

  3581. RCM 1.348.3Open verse →

    बिपुल बाजने बाजन लागे। नभ सुर नगर लोग अनुरागे।।

    अर्थ · Hindi

    बिपुल बाजने बाजन लागे। नभ सुर नगर लोग अनुरागे।।

  3582. RCM 1.348.4Open verse →

    बने बराती बरनि न जाहीं। महा मुदित मन सुख न समाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बने बराती बरनि न जाहीं। महा मुदित मन सुख न समाहीं।।

  3583. RCM 1.348.5Open verse →

    पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    पुरबासिन्ह तब राय जोहारे। देखत रामहि भए सुखारे।।

  3584. RCM 1.348.6Open verse →

    करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं निछावरि मनिगन चीरा। बारि बिलोचन पुलक सरीरा।।

  3585. RCM 1.348.7Open verse →

    आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।

    अर्थ · Hindi

    आरति करहिं मुदित पुर नारी। हरषहिं निरखि कुँअर बर चारी।।

  3586. RCM 1.348.8Open verse →

    सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    सिबिका सुभग ओहार उघारी। देखि दुलहिनिन्ह होहिं सुखारी।।

  3587. RCM 1.348.9Open verse →

    एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सबही देत सुखु आए राजदुआर।

  3588. RCM 1.348.10Open verse →

    मुदित मातु परुछनि करहिं बधुन्ह समेत कुमार।।348।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित मातु परुछनि करहिं बधुन्ह समेत कुमार।।348।।

  3589. RCM 1.349.1Open verse →

    करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं आरती बारहिं बारा। प्रेमु प्रमोदु कहै को पारा।।

  3590. RCM 1.349.2Open verse →

    भूषन मनि पट नाना जाती।।करही निछावरि अगनित भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    भूषन मनि पट नाना जाती।।करही निछावरि अगनित भाँती।।

  3591. RCM 1.349.3Open verse →

    बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    बधुन्ह समेत देखि सुत चारी। परमानंद मगन महतारी।।

  3592. RCM 1.349.4Open verse →

    पुनि पुनि सीय राम छबि देखी।।मुदित सफल जग जीवन लेखी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि सीय राम छबि देखी।।मुदित सफल जग जीवन लेखी।।

  3593. RCM 1.349.5Open verse →

    सखीं सीय मुख पुनि पुनि चाही। गान करहिं निज सुकृत सराही।।

    अर्थ · Hindi

    सखीं सीय मुख पुनि पुनि चाही। गान करहिं निज सुकृत सराही।।

  3594. RCM 1.349.6Open verse →

    बरषहिं सुमन छनहिं छन देवा। नाचहिं गावहिं लावहिं सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    बरषहिं सुमन छनहिं छन देवा। नाचहिं गावहिं लावहिं सेवा।।

  3595. RCM 1.349.7Open verse →

    देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।।

    अर्थ · Hindi

    देखि मनोहर चारिउ जोरीं। सारद उपमा सकल ढँढोरीं।।

  3596. RCM 1.349.8Open verse →

    देत न बनहिं निपट लघु लागी। एकटक रहीं रूप अनुरागीं।।

    अर्थ · Hindi

    देत न बनहिं निपट लघु लागी। एकटक रहीं रूप अनुरागीं।।

  3597. RCM 1.349.9Open verse →

    निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत।

    अर्थ · Hindi

    निगम नीति कुल रीति करि अरघ पाँवड़े देत।

  3598. RCM 1.349.10Open verse →

    बधुन्ह सहित सुत परिछि सब चलीं लवाइ निकेत।।349।।

    अर्थ · Hindi

    बधुन्ह सहित सुत परिछि सब चलीं लवाइ निकेत।।349।।

  3599. RCM 1.350.1Open verse →

    चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।

    अर्थ · Hindi

    चारि सिंघासन सहज सुहाए। जनु मनोज निज हाथ बनाए।।

  3600. RCM 1.350.2Open verse →

    तिन्ह पर कुअँरि कुअँर बैठारे। सादर पाय पुनित पखारे।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह पर कुअँरि कुअँर बैठारे। सादर पाय पुनित पखारे।।

  3601. RCM 1.350.3Open verse →

    धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।

    अर्थ · Hindi

    धूप दीप नैबेद बेद बिधि। पूजे बर दुलहिनि मंगलनिधि।।

  3602. RCM 1.350.4Open verse →

    बारहिं बार आरती करहीं। ब्यजन चारु चामर सिर ढरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बारहिं बार आरती करहीं। ब्यजन चारु चामर सिर ढरहीं।।

  3603. RCM 1.350.5Open verse →

    बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बस्तु अनेक निछावर होहीं। भरीं प्रमोद मातु सब सोहीं।।

  3604. RCM 1.350.6Open verse →

    पावा परम तत्व जनु जोगीं। अमृत लहेउ जनु संतत रोगीं।।

    अर्थ · Hindi

    पावा परम तत्व जनु जोगीं। अमृत लहेउ जनु संतत रोगीं।।

  3605. RCM 1.350.7Open verse →

    जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।

    अर्थ · Hindi

    जनम रंक जनु पारस पावा। अंधहि लोचन लाभु सुहावा।।

  3606. RCM 1.350.8Open verse →

    मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई।।

    अर्थ · Hindi

    मूक बदन जनु सारद छाई। मानहुँ समर सूर जय पाई।।

  3607. RCM 1.350.9Open verse →

    एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।

    अर्थ · Hindi

    एहि सुख ते सत कोटि गुन पावहिं मातु अनंदु।।

  3608. RCM 1.350.10Open verse →

    भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु।।350(क)।।

    अर्थ · Hindi

    भाइन्ह सहित बिआहि घर आए रघुकुलचंदु।।350(क)।।

  3609. RCM 1.350.11Open verse →

    लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।

    अर्थ · Hindi

    लोक रीत जननी करहिं बर दुलहिनि सकुचाहिं।

  3610. RCM 1.350.12Open verse →

    मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसकाहिं।।350(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    मोदु बिनोदु बिलोकि बड़ रामु मनहिं मुसकाहिं।।350(ख)।।

  3611. RCM 1.351.1Open verse →

    देव पितर पूजे बिधि नीकी। पूजीं सकल बासना जी की।।

    अर्थ · Hindi

    देव पितर पूजे बिधि नीकी। पूजीं सकल बासना जी की।।

  3612. RCM 1.351.2Open verse →

    सबहिं बंदि मागहिं बरदाना। भाइन्ह सहित राम कल्याना।।

    अर्थ · Hindi

    सबहिं बंदि मागहिं बरदाना। भाइन्ह सहित राम कल्याना।।

  3613. RCM 1.351.3Open verse →

    अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंचल भरि लेंहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अंतरहित सुर आसिष देहीं। मुदित मातु अंचल भरि लेंहीं।।

  3614. RCM 1.351.4Open verse →

    भूपति बोलि बराती लीन्हे। जान बसन मनि भूषन दीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    भूपति बोलि बराती लीन्हे। जान बसन मनि भूषन दीन्हे।।

  3615. RCM 1.351.5Open verse →

    आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु पाइ राखि उर रामहि। मुदित गए सब निज निज धामहि।।

  3616. RCM 1.351.6Open verse →

    पुर नर नारि सकल पहिराए। घर घर बाजन लगे बधाए।।

    अर्थ · Hindi

    पुर नर नारि सकल पहिराए। घर घर बाजन लगे बधाए।।

  3617. RCM 1.351.7Open verse →

    जाचक जन जाचहि जोइ जोई। प्रमुदित राउ देहिं सोइ सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जाचक जन जाचहि जोइ जोई। प्रमुदित राउ देहिं सोइ सोई।।

  3618. RCM 1.351.8Open verse →

    सेवक सकल बजनिआ नाना। पूरन किए दान सनमाना।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सकल बजनिआ नाना। पूरन किए दान सनमाना।।

  3619. RCM 1.351.9Open verse →

    देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।

    अर्थ · Hindi

    देंहिं असीस जोहारि सब गावहिं गुन गन गाथ।

  3620. RCM 1.351.10Open verse →

    तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ।।351।।

    अर्थ · Hindi

    तब गुर भूसुर सहित गृहँ गवनु कीन्ह नरनाथ।।351।।

  3621. RCM 1.352.1Open verse →

    जो बसिष्ठ अनुसासन दीन्ही। लोक बेद बिधि सादर कीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    जो बसिष्ठ अनुसासन दीन्ही। लोक बेद बिधि सादर कीन्ही।।

  3622. RCM 1.352.2Open verse →

    भूसुर भीर देखि सब रानी। सादर उठीं भाग्य बड़ जानी।।

    अर्थ · Hindi

    भूसुर भीर देखि सब रानी। सादर उठीं भाग्य बड़ जानी।।

  3623. RCM 1.352.3Open verse →

    पाय पखारि सकल अन्हवाए। पूजि भली बिधि भूप जेवाँए।।

    अर्थ · Hindi

    पाय पखारि सकल अन्हवाए। पूजि भली बिधि भूप जेवाँए।।

  3624. RCM 1.352.4Open verse →

    आदर दान प्रेम परिपोषे। देत असीस चले मन तोषे।।

    अर्थ · Hindi

    आदर दान प्रेम परिपोषे। देत असीस चले मन तोषे।।

  3625. RCM 1.352.5Open verse →

    बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।

    अर्थ · Hindi

    बहु बिधि कीन्हि गाधिसुत पूजा। नाथ मोहि सम धन्य न दूजा।।

  3626. RCM 1.352.6Open verse →

    कीन्हि प्रसंसा भूपति भूरी। रानिन्ह सहित लीन्हि पग धूरी।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्हि प्रसंसा भूपति भूरी। रानिन्ह सहित लीन्हि पग धूरी।।

  3627. RCM 1.352.7Open verse →

    भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।

    अर्थ · Hindi

    भीतर भवन दीन्ह बर बासु। मन जोगवत रह नृप रनिवासू।।

  3628. RCM 1.352.8Open verse →

    पूजे गुर पद कमल बहोरी। कीन्हि बिनय उर प्रीति न थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पूजे गुर पद कमल बहोरी। कीन्हि बिनय उर प्रीति न थोरी।।

  3629. RCM 1.352.9Open verse →

    बधुन्ह समेत कुमार सब रानिन्ह सहित महीसु।

    अर्थ · Hindi

    बधुन्ह समेत कुमार सब रानिन्ह सहित महीसु।

  3630. RCM 1.352.10Open verse →

    पुनि पुनि बंदत गुर चरन देत असीस मुनीसु।।352।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि बंदत गुर चरन देत असीस मुनीसु।।352।।

  3631. RCM 1.353.1Open verse →

    बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें।।

    अर्थ · Hindi

    बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें।।

  3632. RCM 1.353.2Open verse →

    नेगु मागि मुनिनायक लीन्हा। आसिरबादु बहुत बिधि दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    नेगु मागि मुनिनायक लीन्हा। आसिरबादु बहुत बिधि दीन्हा।।

  3633. RCM 1.353.3Open verse →

    उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता।।

    अर्थ · Hindi

    उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता।।

  3634. RCM 1.353.4Open verse →

    बिप्रबधू सब भूप बोलाई। चैल चारु भूषन पहिराई।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रबधू सब भूप बोलाई। चैल चारु भूषन पहिराई।।

  3635. RCM 1.353.5Open verse →

    बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं।।

  3636. RCM 1.353.6Open verse →

    नेगी नेग जोग सब लेहीं। रुचि अनुरुप भूपमनि देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नेगी नेग जोग सब लेहीं। रुचि अनुरुप भूपमनि देहीं।।

  3637. RCM 1.353.7Open verse →

    प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिय पाहुने पूज्य जे जाने। भूपति भली भाँति सनमाने।।

  3638. RCM 1.353.8Open verse →

    देव देखि रघुबीर बिबाहू। बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    देव देखि रघुबीर बिबाहू। बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू।।

  3639. RCM 1.353.9Open verse →

    चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ।

    अर्थ · Hindi

    चले निसान बजाइ सुर निज निज पुर सुख पाइ।

  3640. RCM 1.353.10Open verse →

    कहत परसपर राम जसु प्रेम न हृदयँ समाइ।।353।।

    अर्थ · Hindi

    कहत परसपर राम जसु प्रेम न हृदयँ समाइ।।353।।

  3641. RCM 1.354.1Open verse →

    सब बिधि सबहि समदि नरनाहू। रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि सबहि समदि नरनाहू। रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू।।

  3642. RCM 1.354.2Open verse →

    जहँ रनिवासु तहाँ पगु धारे। सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ रनिवासु तहाँ पगु धारे। सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे।।

  3643. RCM 1.354.3Open verse →

    लिए गोद करि मोद समेता। को कहि सकइ भयउ सुखु जेता।।

    अर्थ · Hindi

    लिए गोद करि मोद समेता। को कहि सकइ भयउ सुखु जेता।।

  3644. RCM 1.354.4Open verse →

    बधू सप्रेम गोद बैठारीं। बार बार हियँ हरषि दुलारीं।।

    अर्थ · Hindi

    बधू सप्रेम गोद बैठारीं। बार बार हियँ हरषि दुलारीं।।

  3645. RCM 1.354.5Open verse →

    देखि समाजु मुदित रनिवासू। सब कें उर अनंद कियो बासू।।

    अर्थ · Hindi

    देखि समाजु मुदित रनिवासू। सब कें उर अनंद कियो बासू।।

  3646. RCM 1.354.6Open verse →

    कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू। सुनि हरषु होत सब काहू।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू। सुनि हरषु होत सब काहू।।

  3647. RCM 1.354.7Open verse →

    जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनक राज गुन सीलु बड़ाई। प्रीति रीति संपदा सुहाई।।

  3648. RCM 1.354.8Open verse →

    बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि भूप भाट जिमि बरनी। रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी।।

  3649. RCM 1.354.9Open verse →

    सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र गुर ग्याति।

    अर्थ · Hindi

    सुतन्ह समेत नहाइ नृप बोलि बिप्र गुर ग्याति।

  3650. RCM 1.354.10Open verse →

    भोजन कीन्ह अनेक बिधि घरी पंच गइ राति।।354।।

    अर्थ · Hindi

    भोजन कीन्ह अनेक बिधि घरी पंच गइ राति।।354।।

  3651. RCM 1.355.1Open verse →

    मंगलगान करहिं बर भामिनि। भै सुखमूल मनोहर जामिनि।।

    अर्थ · Hindi

    मंगलगान करहिं बर भामिनि। भै सुखमूल मनोहर जामिनि।।

  3652. RCM 1.355.2Open verse →

    अँचइ पान सब काहूँ पाए। स्त्रग सुगंध भूषित छबि छाए।।

    अर्थ · Hindi

    अँचइ पान सब काहूँ पाए। स्त्रग सुगंध भूषित छबि छाए।।

  3653. RCM 1.355.3Open verse →

    रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि देखि रजायसु पाई। निज निज भवन चले सिर नाई।।

  3654. RCM 1.355.4Open verse →

    प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम प्रमोद बिनोदु बढ़ाई। समउ समाजु मनोहरताई।।

  3655. RCM 1.355.5Open verse →

    कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न सकहि सत सारद सेसू। बेद बिरंचि महेस गनेसू।।

  3656. RCM 1.355.6Open verse →

    सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।।

    अर्थ · Hindi

    सो मै कहौं कवन बिधि बरनी। भूमिनागु सिर धरइ कि धरनी।।

  3657. RCM 1.355.7Open verse →

    नृप सब भाँति सबहि सनमानी। कहि मृदु बचन बोलाई रानी।।

    अर्थ · Hindi

    नृप सब भाँति सबहि सनमानी। कहि मृदु बचन बोलाई रानी।।

  3658. RCM 1.355.8Open verse →

    बधू लरिकनीं पर घर आईं। राखेहु नयन पलक की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    बधू लरिकनीं पर घर आईं। राखेहु नयन पलक की नाई।।

  3659. RCM 1.355.9Open verse →

    लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।

    अर्थ · Hindi

    लरिका श्रमित उनीद बस सयन करावहु जाइ।

  3660. RCM 1.355.10Open verse →

    अस कहि गे बिश्रामगृहँ राम चरन चितु लाइ।।355।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि गे बिश्रामगृहँ राम चरन चितु लाइ।।355।।

  3661. RCM 1.356.1Open verse →

    भूप बचन सुनि सहज सुहाए। जरित कनक मनि पलँग डसाए।।

    अर्थ · Hindi

    भूप बचन सुनि सहज सुहाए। जरित कनक मनि पलँग डसाए।।

  3662. RCM 1.356.2Open verse →

    सुभग सुरभि पय फेन समाना। कोमल कलित सुपेतीं नाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुभग सुरभि पय फेन समाना। कोमल कलित सुपेतीं नाना।।

  3663. RCM 1.356.3Open verse →

    उपबरहन बर बरनि न जाहीं। स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    उपबरहन बर बरनि न जाहीं। स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं।।

  3664. RCM 1.356.4Open verse →

    रतनदीप सुठि चारु चँदोवा। कहत न बनइ जान जेहिं जोवा।।

    अर्थ · Hindi

    रतनदीप सुठि चारु चँदोवा। कहत न बनइ जान जेहिं जोवा।।

  3665. RCM 1.356.5Open verse →

    सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए।।

    अर्थ · Hindi

    सेज रुचिर रचि रामु उठाए। प्रेम समेत पलँग पौढ़ाए।।

  3666. RCM 1.356.6Open verse →

    अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही। निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    अग्या पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही। निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही।।

  3667. RCM 1.356.7Open verse →

    देखि स्याम मृदु मंजुल गाता। कहहिं सप्रेम बचन सब माता।।

    अर्थ · Hindi

    देखि स्याम मृदु मंजुल गाता। कहहिं सप्रेम बचन सब माता।।

  3668. RCM 1.356.8Open verse →

    मारग जात भयावनि भारी। केहि बिधि तात ताड़का मारी।।

    अर्थ · Hindi

    मारग जात भयावनि भारी। केहि बिधि तात ताड़का मारी।।

  3669. RCM 1.356.9Open verse →

    घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु।।

    अर्थ · Hindi

    घोर निसाचर बिकट भट समर गनहिं नहिं काहु।।

  3670. RCM 1.356.10Open verse →

    मारे सहित सहाय किमि खल मारीच सुबाहु।।356।।

    अर्थ · Hindi

    मारे सहित सहाय किमि खल मारीच सुबाहु।।356।।

  3671. RCM 1.357.1Open verse →

    मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी। ईस अनेक करवरें टारी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी। ईस अनेक करवरें टारी।।

  3672. RCM 1.357.2Open verse →

    मख रखवारी करि दुहुँ भाई। गुरु प्रसाद सब बिद्या पाई।।

    अर्थ · Hindi

    मख रखवारी करि दुहुँ भाई। गुरु प्रसाद सब बिद्या पाई।।

  3673. RCM 1.357.3Open verse →

    मुनितय तरी लगत पग धूरी। कीरति रही भुवन भरि पूरी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनितय तरी लगत पग धूरी। कीरति रही भुवन भरि पूरी।।

  3674. RCM 1.357.4Open verse →

    कमठ पीठि पबि कूट कठोरा। नृप समाज महुँ सिव धनु तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    कमठ पीठि पबि कूट कठोरा। नृप समाज महुँ सिव धनु तोरा।।

  3675. RCM 1.357.5Open verse →

    बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्व बिजय जसु जानकि पाई। आए भवन ब्याहि सब भाई।।

  3676. RCM 1.357.6Open verse →

    सकल अमानुष करम तुम्हारे। केवल कौसिक कृपाँ सुधारे।।

    अर्थ · Hindi

    सकल अमानुष करम तुम्हारे। केवल कौसिक कृपाँ सुधारे।।

  3677. RCM 1.357.7Open verse →

    आजु सुफल जग जनमु हमारा। देखि तात बिधुबदन तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    आजु सुफल जग जनमु हमारा। देखि तात बिधुबदन तुम्हारा।।

  3678. RCM 1.357.8Open verse →

    जे दिन गए तुम्हहि बिनु देखें। ते बिरंचि जनि पारहिं लेखें।।

    अर्थ · Hindi

    जे दिन गए तुम्हहि बिनु देखें। ते बिरंचि जनि पारहिं लेखें।।

  3679. RCM 1.357.9Open verse →

    राम प्रतोषीं मातु सब कहि बिनीत बर बैन।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रतोषीं मातु सब कहि बिनीत बर बैन।

  3680. RCM 1.357.10Open verse →

    सुमिरि संभु गुर बिप्र पद किए नीदबस नैन।।357।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि संभु गुर बिप्र पद किए नीदबस नैन।।357।।

  3681. RCM 1.358.1Open verse →

    नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।

    अर्थ · Hindi

    नीदउँ बदन सोह सुठि लोना। मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना।।

  3682. RCM 1.358.2Open verse →

    घर घर करहिं जागरन नारीं। देहिं परसपर मंगल गारीं।।

    अर्थ · Hindi

    घर घर करहिं जागरन नारीं। देहिं परसपर मंगल गारीं।।

  3683. RCM 1.358.3Open verse →

    पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।

    अर्थ · Hindi

    पुरी बिराजति राजति रजनी। रानीं कहहिं बिलोकहु सजनी।।

  3684. RCM 1.358.4Open verse →

    सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई। फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर बधुन्ह सासु लै सोई। फनिकन्ह जनु सिरमनि उर गोई।।

  3685. RCM 1.358.5Open verse →

    प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    प्रात पुनीत काल प्रभु जागे। अरुनचूड़ बर बोलन लागे।।

  3686. RCM 1.358.6Open verse →

    बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि मागधन्हि गुनगन गाए। पुरजन द्वार जोहारन आए।।

  3687. RCM 1.358.7Open verse →

    बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता। पाइ असीस मुदित सब भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि बिप्र सुर गुर पितु माता। पाइ असीस मुदित सब भ्राता।।

  3688. RCM 1.358.8Open verse →

    जननिन्ह सादर बदन निहारे। भूपति संग द्वार पगु धारे।।

    अर्थ · Hindi

    जननिन्ह सादर बदन निहारे। भूपति संग द्वार पगु धारे।।

  3689. RCM 1.358.9Open verse →

    कीन्ह सौच सब सहज सुचि सरित पुनीत नहाइ।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह सौच सब सहज सुचि सरित पुनीत नहाइ।

  3690. RCM 1.358.10Open verse →

    प्रातक्रिया करि तात पहिं आए चारिउ भाइ।।358।।

    अर्थ · Hindi

    प्रातक्रिया करि तात पहिं आए चारिउ भाइ।।358।।

  3691. RCM 1.359.1Open verse →

    भूप बिलोकि लिए उर लाई। बैठै हरषि रजायसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    भूप बिलोकि लिए उर लाई। बैठै हरषि रजायसु पाई।।

  3692. RCM 1.359.2Open verse →

    देखि रामु सब सभा जुड़ानी। लोचन लाभ अवधि अनुमानी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि रामु सब सभा जुड़ानी। लोचन लाभ अवधि अनुमानी।।

  3693. RCM 1.359.3Open verse →

    पुनि बसिष्टु मुनि कौसिक आए। सुभग आसनन्हि मुनि बैठाए।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि बसिष्टु मुनि कौसिक आए। सुभग आसनन्हि मुनि बैठाए।।

  3694. RCM 1.359.4Open verse →

    सुतन्ह समेत पूजि पद लागे। निरखि रामु दोउ गुर अनुरागे।।

    अर्थ · Hindi

    सुतन्ह समेत पूजि पद लागे। निरखि रामु दोउ गुर अनुरागे।।

  3695. RCM 1.359.5Open verse →

    कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं बसिष्टु धरम इतिहासा। सुनहिं महीसु सहित रनिवासा।।

  3696. RCM 1.359.6Open verse →

    मुनि मन अगम गाधिसुत करनी। मुदित बसिष्ट बिपुल बिधि बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि मन अगम गाधिसुत करनी। मुदित बसिष्ट बिपुल बिधि बरनी।।

  3697. RCM 1.359.7Open verse →

    बोले बामदेउ सब साँची। कीरति कलित लोक तिहुँ माची।।

    अर्थ · Hindi

    बोले बामदेउ सब साँची। कीरति कलित लोक तिहुँ माची।।

  3698. RCM 1.359.8Open verse →

    सुनि आनंदु भयउ सब काहू। राम लखन उर अधिक उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि आनंदु भयउ सब काहू। राम लखन उर अधिक उछाहू।।

  3699. RCM 1.359.9Open verse →

    मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति।

    अर्थ · Hindi

    मंगल मोद उछाह नित जाहिं दिवस एहि भाँति।

  3700. RCM 1.359.10Open verse →

    उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति।।359।।

    अर्थ · Hindi

    उमगी अवध अनंद भरि अधिक अधिक अधिकाति।।359।।

  3701. RCM 1.360.1Open verse →

    सुदिन सोधि कल कंकन छौरे। मंगल मोद बिनोद न थोरे।।

    अर्थ · Hindi

    सुदिन सोधि कल कंकन छौरे। मंगल मोद बिनोद न थोरे।।

  3702. RCM 1.360.2Open verse →

    नित नव सुखु सुर देखि सिहाहीं। अवध जन्म जाचहिं बिधि पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नित नव सुखु सुर देखि सिहाहीं। अवध जन्म जाचहिं बिधि पाहीं।।

  3703. RCM 1.360.3Open verse →

    बिस्वामित्रु चलन नित चहहीं। राम सप्रेम बिनय बस रहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वामित्रु चलन नित चहहीं। राम सप्रेम बिनय बस रहहीं।।

  3704. RCM 1.360.4Open verse →

    दिन दिन सयगुन भूपति भाऊ। देखि सराह महामुनिराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    दिन दिन सयगुन भूपति भाऊ। देखि सराह महामुनिराऊ।।

  3705. RCM 1.360.5Open verse →

    मागत बिदा राउ अनुरागे। सुतन्ह समेत ठाढ़ भे आगे।।

    अर्थ · Hindi

    मागत बिदा राउ अनुरागे। सुतन्ह समेत ठाढ़ भे आगे।।

  3706. RCM 1.360.6Open verse →

    नाथ सकल संपदा तुम्हारी। मैं सेवकु समेत सुत नारी।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ सकल संपदा तुम्हारी। मैं सेवकु समेत सुत नारी।।

  3707. RCM 1.360.7Open verse →

    करब सदा लरिकनः पर छोहू। दरसन देत रहब मुनि मोहू।।

    अर्थ · Hindi

    करब सदा लरिकनः पर छोहू। दरसन देत रहब मुनि मोहू।।

  3708. RCM 1.360.8Open verse →

    अस कहि राउ सहित सुत रानी। परेउ चरन मुख आव न बानी।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि राउ सहित सुत रानी। परेउ चरन मुख आव न बानी।।

  3709. RCM 1.360.9Open verse →

    दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।।

    अर्थ · Hindi

    दीन्ह असीस बिप्र बहु भाँती। चले न प्रीति रीति कहि जाती।।

  3710. RCM 1.360.10Open verse →

    रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई।।

    अर्थ · Hindi

    रामु सप्रेम संग सब भाई। आयसु पाइ फिरे पहुँचाई।।

  3711. RCM 1.360.11Open verse →

    राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु।

    अर्थ · Hindi

    राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु।

  3712. RCM 1.360.12Open verse →

    जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु।।360।।

    अर्थ · Hindi

    जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु।।360।।

  3713. RCM 1.361.1Open verse →

    बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    बामदेव रघुकुल गुर ग्यानी। बहुरि गाधिसुत कथा बखानी।।

  3714. RCM 1.361.2Open verse →

    सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ। बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि सुजसु मनहिं मन राऊ। बरनत आपन पुन्य प्रभाऊ।।

  3715. RCM 1.361.3Open verse →

    बहुरे लोग रजायसु भयऊ। सुतन्ह समेत नृपति गृहँ गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरे लोग रजायसु भयऊ। सुतन्ह समेत नृपति गृहँ गयऊ।।

  3716. RCM 1.361.4Open verse →

    जहँ तहँ राम ब्याहु सबु गावा। सुजसु पुनीत लोक तिहुँ छावा।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ राम ब्याहु सबु गावा। सुजसु पुनीत लोक तिहुँ छावा।।

  3717. RCM 1.361.5Open verse →

    आए ब्याहि रामु घर जब तें। बसइ अनंद अवध सब तब तें।।

    अर्थ · Hindi

    आए ब्याहि रामु घर जब तें। बसइ अनंद अवध सब तब तें।।

  3718. RCM 1.361.6Open verse →

    प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू। सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु बिबाहँ जस भयउ उछाहू। सकहिं न बरनि गिरा अहिनाहू।।

  3719. RCM 1.361.7Open verse →

    कबिकुल जीवनु पावन जानी।।राम सीय जसु मंगल खानी।।

    अर्थ · Hindi

    कबिकुल जीवनु पावन जानी।।राम सीय जसु मंगल खानी।।

  3720. RCM 1.361.8Open verse →

    तेहि ते मैं कछु कहा बखानी। करन पुनीत हेतु निज बानी।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि ते मैं कछु कहा बखानी। करन पुनीत हेतु निज बानी।।