उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।
RCM 1.1.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।
RCM 1.1.7
उघरहिं बिमल बिलोचन ही के। मिटहिं दोष दुख भव रजनी के।।