सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।
RCM 1.3.2
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।
RCM 1.3.2
सुनि आचरज करै जनि कोई। सतसंगति महिमा नहिं गोई।।