कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।
RCM 1.9.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।
RCM 1.9.3
कबित रसिक न राम पद नेहू। तिन्ह कहँ सुखद हास रस एहू।।