सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।
RCM 1.2.14
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।
RCM 1.2.14
सुनि समुझहिं जन मुदित मन मज्जहिं अति अनुराग।