जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।
RCM 1.8.13
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।
RCM 1.8.13
जग बहु नर सर सरि सम भाई। जे निज बाढ़ि बढ़हिं जल पाई।।