पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।
RCM 1.4.2
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।
RCM 1.4.2
पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें।।