हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।
RCM 1.7.8
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।
RCM 1.7.8
हानि कुसंग सुसंगति लाहू। लोकहुँ बेद बिदित सब काहू।।