बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।
RCM 1.5.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।
RCM 1.5.3
बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।।