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Ramcharitmanas · अध्याय 2

Ayodhya Kanda

अयोध्याकाण्ड

Kaikeyi's boon, Rama's exile, Bharata's pilgrimage to Chitrakoot.

  1. जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए।।

    अर्थ · Hindi

    जब तें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए।।

  2. भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी।।

    अर्थ · Hindi

    भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहि सुख बारी।।

  3. रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।

    अर्थ · Hindi

    रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।

  4. मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।

  5. कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतनिअ बिरंचि करतूती।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतनिअ बिरंचि करतूती।।

  6. सब बिधि सब पुर लोग सुखारी। रामचंद मुख चंदु निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि सब पुर लोग सुखारी। रामचंद मुख चंदु निहारी।।

  7. मुदित मातु सब सखीं सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित मातु सब सखीं सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली।।

  8. राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।

  9. सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु।

    अर्थ · Hindi

    सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु।

  10. RCM 2.1.10Open verse →

    आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु।।1।।

    अर्थ · Hindi

    आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु।।1।।

  11. एक समय सब सहित समाजा। राजसभाँ रघुराजु बिराजा।।

    अर्थ · Hindi

    एक समय सब सहित समाजा। राजसभाँ रघुराजु बिराजा।।

  12. सकल सुकृत मूरति नरनाहू। राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुकृत मूरति नरनाहू। राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू।।

  13. नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।

    अर्थ · Hindi

    नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।

  14. तिभुवन तीनि काल जग माहीं। भूरि भाग दसरथ सम नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तिभुवन तीनि काल जग माहीं। भूरि भाग दसरथ सम नाहीं।।

  15. मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिज थोर सबु तासू।।

    अर्थ · Hindi

    मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिज थोर सबु तासू।।

  16. रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।।

  17. श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।

    अर्थ · Hindi

    श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।

  18. नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।

    अर्थ · Hindi

    नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।

  19. यह बिचारु उर आनि नृप सुदिनु सुअवसरु पाइ।

    अर्थ · Hindi

    यह बिचारु उर आनि नृप सुदिनु सुअवसरु पाइ।

  20. RCM 2.2.10Open verse →

    प्रेम पुलकि तन मुदित मन गुरहि सुनायउ जाइ।।2।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम पुलकि तन मुदित मन गुरहि सुनायउ जाइ।।2।।

  21. कहइ भुआलु सुनिअ मुनिनायक। भए राम सब बिधि सब लायक।।

    अर्थ · Hindi

    कहइ भुआलु सुनिअ मुनिनायक। भए राम सब बिधि सब लायक।।

  22. सेवक सचिव सकल पुरबासी। जे हमारे अरि मित्र उदासी।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सचिव सकल पुरबासी। जे हमारे अरि मित्र उदासी।।

  23. सबहि रामु प्रिय जेहि बिधि मोही। प्रभु असीस जनु तनु धरि सोही।।

    अर्थ · Hindi

    सबहि रामु प्रिय जेहि बिधि मोही। प्रभु असीस जनु तनु धरि सोही।।

  24. बिप्र सहित परिवार गोसाईं। करहिं छोहु सब रौरिहि नाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र सहित परिवार गोसाईं। करहिं छोहु सब रौरिहि नाई।।

  25. जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं।।

  26. मोहि सम यहु अनुभयउ न दूजें। सबु पायउँ रज पावनि पूजें।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि सम यहु अनुभयउ न दूजें। सबु पायउँ रज पावनि पूजें।।

  27. अब अभिलाषु एकु मन मोरें। पूजहि नाथ अनुग्रह तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    अब अभिलाषु एकु मन मोरें। पूजहि नाथ अनुग्रह तोरें।।

  28. मुनि प्रसन्न लखि सहज सनेहू। कहेउ नरेस रजायसु देहू।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि प्रसन्न लखि सहज सनेहू। कहेउ नरेस रजायसु देहू।।

  29. राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार।

    अर्थ · Hindi

    राजन राउर नामु जसु सब अभिमत दातार।

  30. RCM 2.3.10Open verse →

    फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार।।3।।

    अर्थ · Hindi

    फल अनुगामी महिप मनि मन अभिलाषु तुम्हार।।3।।

  31. सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी। बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि गुरु प्रसन्न जियँ जानी। बोलेउ राउ रहँसि मृदु बानी।।

  32. नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।

  33. मोहि अछत यहु होइ उछाहू। लहहिं लोग सब लोचन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि अछत यहु होइ उछाहू। लहहिं लोग सब लोचन लाहू।।

  34. प्रभु प्रसाद सिव सबइ निबाहीं। यह लालसा एक मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रसाद सिव सबइ निबाहीं। यह लालसा एक मन माहीं।।

  35. पुनि न सोच तनु रहउ कि जाऊ। जेहिं न होइ पाछें पछिताऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि न सोच तनु रहउ कि जाऊ। जेहिं न होइ पाछें पछिताऊ।।

  36. सुनि मुनि दसरथ बचन सुहाए। मंगल मोद मूल मन भाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि दसरथ बचन सुहाए। मंगल मोद मूल मन भाए।।

  37. सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं। जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं। जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं।।

  38. भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।।

  39. बेगि बिलंबु न करिअ नृप साजिअ सबुइ समाजु।

    अर्थ · Hindi

    बेगि बिलंबु न करिअ नृप साजिअ सबुइ समाजु।

  40. RCM 2.4.10Open verse →

    सुदिन सुमंगलु तबहिं जब रामु होहिं जुबराजु।।4।।

    अर्थ · Hindi

    सुदिन सुमंगलु तबहिं जब रामु होहिं जुबराजु।।4।।

  41. मुदित महिपति मंदिर आए। सेवक सचिव सुमंत्रु बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित महिपति मंदिर आए। सेवक सचिव सुमंत्रु बोलाए।।

  42. कहि जयजीव सीस तिन्ह नाए। भूप सुमंगल बचन सुनाए।।

    अर्थ · Hindi

    कहि जयजीव सीस तिन्ह नाए। भूप सुमंगल बचन सुनाए।।

  43. जौं पाँचहि मत लागै नीका। करहु हरषि हियँ रामहि टीका।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पाँचहि मत लागै नीका। करहु हरषि हियँ रामहि टीका।।

  44. मंत्री मुदित सुनत प्रिय बानी। अभिमत बिरवँ परेउ जनु पानी।।

    अर्थ · Hindi

    मंत्री मुदित सुनत प्रिय बानी। अभिमत बिरवँ परेउ जनु पानी।।

  45. बिनती सचिव करहि कर जोरी। जिअहु जगतपति बरिस करोरी।।

    अर्थ · Hindi

    बिनती सचिव करहि कर जोरी। जिअहु जगतपति बरिस करोरी।।

  46. जग मंगल भल काजु बिचारा। बेगिअ नाथ न लाइअ बारा।।

    अर्थ · Hindi

    जग मंगल भल काजु बिचारा। बेगिअ नाथ न लाइअ बारा।।

  47. नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा। बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा।।

    अर्थ · Hindi

    नृपहि मोदु सुनि सचिव सुभाषा। बढ़त बौंड़ जनु लही सुसाखा।।

  48. कहेउ भूप मुनिराज कर जोइ जोइ आयसु होइ।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ भूप मुनिराज कर जोइ जोइ आयसु होइ।

  49. राम राज अभिषेक हित बेगि करहु सोइ सोइ।।5।।

    अर्थ · Hindi

    राम राज अभिषेक हित बेगि करहु सोइ सोइ।।5।।

  50. हरषि मुनीस कहेउ मृदु बानी। आनहु सकल सुतीरथ पानी।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि मुनीस कहेउ मृदु बानी। आनहु सकल सुतीरथ पानी।।

  51. औषध मूल फूल फल पाना। कहे नाम गनि मंगल नाना।।

    अर्थ · Hindi

    औषध मूल फूल फल पाना। कहे नाम गनि मंगल नाना।।

  52. चामर चरम बसन बहु भाँती। रोम पाट पट अगनित जाती।।

    अर्थ · Hindi

    चामर चरम बसन बहु भाँती। रोम पाट पट अगनित जाती।।

  53. मनिगन मंगल बस्तु अनेका। जो जग जोगु भूप अभिषेका।।

    अर्थ · Hindi

    मनिगन मंगल बस्तु अनेका। जो जग जोगु भूप अभिषेका।।

  54. बेद बिदित कहि सकल बिधाना। कहेउ रचहु पुर बिबिध बिताना।।

    अर्थ · Hindi

    बेद बिदित कहि सकल बिधाना। कहेउ रचहु पुर बिबिध बिताना।।

  55. सफल रसाल पूगफल केरा। रोपहु बीथिन्ह पुर चहुँ फेरा।।

    अर्थ · Hindi

    सफल रसाल पूगफल केरा। रोपहु बीथिन्ह पुर चहुँ फेरा।।

  56. रचहु मंजु मनि चौकें चारू। कहहु बनावन बेगि बजारू।।

    अर्थ · Hindi

    रचहु मंजु मनि चौकें चारू। कहहु बनावन बेगि बजारू।।

  57. पूजहु गनपति गुर कुलदेवा। सब बिधि करहु भूमिसुर सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    पूजहु गनपति गुर कुलदेवा। सब बिधि करहु भूमिसुर सेवा।।

  58. ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग।

    अर्थ · Hindi

    ध्वज पताक तोरन कलस सजहु तुरग रथ नाग।

  59. RCM 2.6.10Open verse →

    सिर धरि मुनिबर बचन सबु निज निज काजहिं लाग।।6।।

    अर्थ · Hindi

    सिर धरि मुनिबर बचन सबु निज निज काजहिं लाग।।6।।

  60. जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा। सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जो मुनीस जेहि आयसु दीन्हा। सो तेहिं काजु प्रथम जनु कीन्हा।।

  61. बिप्र साधु सुर पूजत राजा। करत राम हित मंगल काजा।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र साधु सुर पूजत राजा। करत राम हित मंगल काजा।।

  62. सुनत राम अभिषेक सुहावा। बाज गहागह अवध बधावा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत राम अभिषेक सुहावा। बाज गहागह अवध बधावा।।

  63. राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए।।

  64. पुलकि सप्रेम परसपर कहहीं। भरत आगमनु सूचक अहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पुलकि सप्रेम परसपर कहहीं। भरत आगमनु सूचक अहहीं।।

  65. भए बहुत दिन अति अवसेरी। सगुन प्रतीति भेंट प्रिय केरी।।

    अर्थ · Hindi

    भए बहुत दिन अति अवसेरी। सगुन प्रतीति भेंट प्रिय केरी।।

  66. भरत सरिस प्रिय को जग माहीं। इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सरिस प्रिय को जग माहीं। इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं।।

  67. रामहि बंधु सोच दिन राती। अंडन्हि कमठ ह्रदउ जेहि भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि बंधु सोच दिन राती। अंडन्हि कमठ ह्रदउ जेहि भाँती।।

  68. एहि अवसर मंगलु परम सुनि रहँसेउ रनिवासु।

    अर्थ · Hindi

    एहि अवसर मंगलु परम सुनि रहँसेउ रनिवासु।

  69. RCM 2.7.10Open verse →

    सोभत लखि बिधु बढ़त जनु बारिधि बीचि बिलासु।।7।।

    अर्थ · Hindi

    सोभत लखि बिधु बढ़त जनु बारिधि बीचि बिलासु।।7।।

  70. प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम जाइ जिन्ह बचन सुनाए। भूषन बसन भूरि तिन्ह पाए।।

  71. प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।

  72. चौकें चारु सुमित्राँ पुरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।।

    अर्थ · Hindi

    चौकें चारु सुमित्राँ पुरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रुरी।।

  73. आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी।।

    अर्थ · Hindi

    आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी।।

  74. पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा।।

    अर्थ · Hindi

    पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा।।

  75. जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू।।

  76. गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।

    अर्थ · Hindi

    गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।

  77. राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि।

    अर्थ · Hindi

    राम राज अभिषेकु सुनि हियँ हरषे नर नारि।

  78. लगे सुमंगल सजन सब बिधि अनुकूल बिचारि।।8।।

    अर्थ · Hindi

    लगे सुमंगल सजन सब बिधि अनुकूल बिचारि।।8।।

  79. तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए। रामधाम सिख देन पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    तब नरनाहँ बसिष्ठु बोलाए। रामधाम सिख देन पठाए।।

  80. गुर आगमनु सुनत रघुनाथा। द्वार आइ पद नायउ माथा।।

    अर्थ · Hindi

    गुर आगमनु सुनत रघुनाथा। द्वार आइ पद नायउ माथा।।

  81. सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भाँति पूजि सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    सादर अरघ देइ घर आने। सोरह भाँति पूजि सनमाने।।

  82. गहे चरन सिय सहित बहोरी। बोले रामु कमल कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    गहे चरन सिय सहित बहोरी। बोले रामु कमल कर जोरी।।

  83. सेवक सदन स्वामि आगमनू। मंगल मूल अमंगल दमनू।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सदन स्वामि आगमनू। मंगल मूल अमंगल दमनू।।

  84. तदपि उचित जनु बोलि सप्रीती। पठइअ काज नाथ असि नीती।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि उचित जनु बोलि सप्रीती। पठइअ काज नाथ असि नीती।।

  85. प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू। भयउ पुनीत आजु यहु गेहू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुता तजि प्रभु कीन्ह सनेहू। भयउ पुनीत आजु यहु गेहू।।

  86. आयसु होइ सो करौं गोसाई। सेवक लहइ स्वामि सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु होइ सो करौं गोसाई। सेवक लहइ स्वामि सेवकाई।।

  87. सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनेह साने बचन मुनि रघुबरहि प्रसंस।

  88. RCM 2.9.10Open verse →

    राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस।।9।।

    अर्थ · Hindi

    राम कस न तुम्ह कहहु अस हंस बंस अवतंस।।9।।

  89. RCM 2.10.1Open verse →

    बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बरनि राम गुन सीलु सुभाऊ। बोले प्रेम पुलकि मुनिराऊ।।

  90. RCM 2.10.2Open verse →

    भूप सजेउ अभिषेक समाजू। चाहत देन तुम्हहि जुबराजू।।

    अर्थ · Hindi

    भूप सजेउ अभिषेक समाजू। चाहत देन तुम्हहि जुबराजू।।

  91. RCM 2.10.3Open verse →

    राम करहु सब संजम आजू। जौं बिधि कुसल निबाहै काजू।।

    अर्थ · Hindi

    राम करहु सब संजम आजू। जौं बिधि कुसल निबाहै काजू।।

  92. RCM 2.10.4Open verse →

    गुरु सिख देइ राय पहिं गयउ। राम हृदयँ अस बिसमउ भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    गुरु सिख देइ राय पहिं गयउ। राम हृदयँ अस बिसमउ भयऊ।।

  93. RCM 2.10.5Open verse →

    जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन केलि लरिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन केलि लरिकाई।।

  94. RCM 2.10.6Open verse →

    करनबेध उपबीत बिआहा। संग संग सब भए उछाहा।।

    अर्थ · Hindi

    करनबेध उपबीत बिआहा। संग संग सब भए उछाहा।।

  95. RCM 2.10.7Open verse →

    बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू।।

    अर्थ · Hindi

    बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू।।

  96. RCM 2.10.8Open verse →

    प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।।

  97. RCM 2.10.9Open verse →

    तेहि अवसर आए लखन मगन प्रेम आनंद।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर आए लखन मगन प्रेम आनंद।

  98. RCM 2.10.10Open verse →

    सनमाने प्रिय बचन कहि रघुकुल कैरव चंद।।10।।

    अर्थ · Hindi

    सनमाने प्रिय बचन कहि रघुकुल कैरव चंद।।10।।

  99. RCM 2.11.1Open verse →

    बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना। पुर प्रमोदु नहिं जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं बाजने बिबिध बिधाना। पुर प्रमोदु नहिं जाइ बखाना।।

  100. RCM 2.11.2Open verse →

    भरत आगमनु सकल मनावहिं। आवहुँ बेगि नयन फलु पावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    भरत आगमनु सकल मनावहिं। आवहुँ बेगि नयन फलु पावहिं।।

  101. RCM 2.11.3Open verse →

    हाट बाट घर गलीं अथाई। कहहिं परसपर लोग लोगाई।।

    अर्थ · Hindi

    हाट बाट घर गलीं अथाई। कहहिं परसपर लोग लोगाई।।

  102. RCM 2.11.4Open verse →

    कालि लगन भलि केतिक बारा। पूजिहि बिधि अभिलाषु हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    कालि लगन भलि केतिक बारा। पूजिहि बिधि अभिलाषु हमारा।।

  103. RCM 2.11.5Open verse →

    कनक सिंघासन सीय समेता। बैठहिं रामु होइ चित चेता।।

    अर्थ · Hindi

    कनक सिंघासन सीय समेता। बैठहिं रामु होइ चित चेता।।

  104. RCM 2.11.6Open verse →

    सकल कहहिं कब होइहि काली। बिघन मनावहिं देव कुचाली।।

    अर्थ · Hindi

    सकल कहहिं कब होइहि काली। बिघन मनावहिं देव कुचाली।।

  105. RCM 2.11.7Open verse →

    तिन्हहि सोहाइ न अवध बधावा। चोरहि चंदिनि राति न भावा।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्हहि सोहाइ न अवध बधावा। चोरहि चंदिनि राति न भावा।।

  106. RCM 2.11.8Open verse →

    सारद बोलि बिनय सुर करहीं। बारहिं बार पाय लै परहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सारद बोलि बिनय सुर करहीं। बारहिं बार पाय लै परहीं।।

  107. RCM 2.11.9Open verse →

    बिपति हमारि बिलोकि बड़ि मातु करिअ सोइ आजु।

    अर्थ · Hindi

    बिपति हमारि बिलोकि बड़ि मातु करिअ सोइ आजु।

  108. RCM 2.11.10Open verse →

    रामु जाहिं बन राजु तजि होइ सकल सुरकाजु।।11।।

    अर्थ · Hindi

    रामु जाहिं बन राजु तजि होइ सकल सुरकाजु।।11।।

  109. RCM 2.12.1Open verse →

    सुनि सुर बिनय ठाढ़ि पछिताती। भइउँ सरोज बिपिन हिमराती।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुर बिनय ठाढ़ि पछिताती। भइउँ सरोज बिपिन हिमराती।।

  110. RCM 2.12.2Open verse →

    देखि देव पुनि कहहिं निहोरी। मातु तोहि नहिं थोरिउ खोरी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि देव पुनि कहहिं निहोरी। मातु तोहि नहिं थोरिउ खोरी।।

  111. RCM 2.12.3Open verse →

    बिसमय हरष रहित रघुराऊ। तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बिसमय हरष रहित रघुराऊ। तुम्ह जानहु सब राम प्रभाऊ।।

  112. RCM 2.12.4Open verse →

    जीव करम बस सुख दुख भागी। जाइअ अवध देव हित लागी।।

    अर्थ · Hindi

    जीव करम बस सुख दुख भागी। जाइअ अवध देव हित लागी।।

  113. RCM 2.12.5Open verse →

    बार बार गहि चरन सँकोचौ। चली बिचारि बिबुध मति पोची।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार गहि चरन सँकोचौ। चली बिचारि बिबुध मति पोची।।

  114. RCM 2.12.6Open verse →

    ऊँच निवासु नीचि करतूती। देखि न सकहिं पराइ बिभूती।।

    अर्थ · Hindi

    ऊँच निवासु नीचि करतूती। देखि न सकहिं पराइ बिभूती।।

  115. RCM 2.12.7Open verse →

    आगिल काजु बिचारि बहोरी। करहहिं चाह कुसल कबि मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    आगिल काजु बिचारि बहोरी। करहहिं चाह कुसल कबि मोरी।।

  116. RCM 2.12.8Open verse →

    हरषि हृदयँ दसरथ पुर आई। जनु ग्रह दसा दुसह दुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि हृदयँ दसरथ पुर आई। जनु ग्रह दसा दुसह दुखदाई।।

  117. RCM 2.12.9Open verse →

    नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकेइ केरि।

    अर्थ · Hindi

    नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकेइ केरि।

  118. RCM 2.12.10Open verse →

    अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि।।12।।

    अर्थ · Hindi

    अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि।।12।।

  119. RCM 2.13.1Open verse →

    दीख मंथरा नगरु बनावा। मंजुल मंगल बाज बधावा।।

    अर्थ · Hindi

    दीख मंथरा नगरु बनावा। मंजुल मंगल बाज बधावा।।

  120. RCM 2.13.2Open verse →

    पूछेसि लोगन्ह काह उछाहू। राम तिलकु सुनि भा उर दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    पूछेसि लोगन्ह काह उछाहू। राम तिलकु सुनि भा उर दाहू।।

  121. RCM 2.13.3Open verse →

    करइ बिचारु कुबुद्धि कुजाती। होइ अकाजु कवनि बिधि राती।।

    अर्थ · Hindi

    करइ बिचारु कुबुद्धि कुजाती। होइ अकाजु कवनि बिधि राती।।

  122. RCM 2.13.4Open verse →

    देखि लागि मधु कुटिल किराती। जिमि गवँ तकइ लेउँ केहि भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    देखि लागि मधु कुटिल किराती। जिमि गवँ तकइ लेउँ केहि भाँती।।

  123. RCM 2.13.5Open verse →

    भरत मातु पहिं गइ बिलखानी। का अनमनि हसि कह हँसि रानी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत मातु पहिं गइ बिलखानी। का अनमनि हसि कह हँसि रानी।।

  124. RCM 2.13.6Open verse →

    ऊतरु देइ न लेइ उसासू। नारि चरित करि ढारइ आँसू।।

    अर्थ · Hindi

    ऊतरु देइ न लेइ उसासू। नारि चरित करि ढारइ आँसू।।

  125. RCM 2.13.7Open verse →

    हँसि कह रानि गालु बड़ तोरें। दीन्ह लखन सिख अस मन मोरें।।

    अर्थ · Hindi

    हँसि कह रानि गालु बड़ तोरें। दीन्ह लखन सिख अस मन मोरें।।

  126. RCM 2.13.8Open verse →

    तबहुँ न बोल चेरि बड़ि पापिनि। छाड़इ स्वास कारि जनु साँपिनि।।

    अर्थ · Hindi

    तबहुँ न बोल चेरि बड़ि पापिनि। छाड़इ स्वास कारि जनु साँपिनि।।

  127. RCM 2.13.9Open verse →

    सभय रानि कह कहसि किन कुसल रामु महिपालु।

    अर्थ · Hindi

    सभय रानि कह कहसि किन कुसल रामु महिपालु।

  128. RCM 2.13.10Open verse →

    लखनु भरतु रिपुदमनु सुनि भा कुबरी उर सालु।।13।।

    अर्थ · Hindi

    लखनु भरतु रिपुदमनु सुनि भा कुबरी उर सालु।।13।।

  129. RCM 2.14.1Open verse →

    कत सिख देइ हमहि कोउ माई। गालु करब केहि कर बलु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    कत सिख देइ हमहि कोउ माई। गालु करब केहि कर बलु पाई।।

  130. RCM 2.14.2Open verse →

    रामहि छाड़ि कुसल केहि आजू। जेहि जनेसु देइ जुबराजू।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि छाड़ि कुसल केहि आजू। जेहि जनेसु देइ जुबराजू।।

  131. RCM 2.14.3Open verse →

    भयउ कौसिलहि बिधि अति दाहिन। देखत गरब रहत उर नाहिन।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ कौसिलहि बिधि अति दाहिन। देखत गरब रहत उर नाहिन।।

  132. RCM 2.14.4Open verse →

    देखेहु कस न जाइ सब सोभा। जो अवलोकि मोर मनु छोभा।।

    अर्थ · Hindi

    देखेहु कस न जाइ सब सोभा। जो अवलोकि मोर मनु छोभा।।

  133. RCM 2.14.5Open verse →

    पूतु बिदेस न सोचु तुम्हारें। जानति हहु बस नाहु हमारें।।

    अर्थ · Hindi

    पूतु बिदेस न सोचु तुम्हारें। जानति हहु बस नाहु हमारें।।

  134. RCM 2.14.6Open verse →

    नीद बहुत प्रिय सेज तुराई। लखहु न भूप कपट चतुराई।।

    अर्थ · Hindi

    नीद बहुत प्रिय सेज तुराई। लखहु न भूप कपट चतुराई।।

  135. RCM 2.14.7Open verse →

    सुनि प्रिय बचन मलिन मनु जानी। झुकी रानि अब रहु अरगानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रिय बचन मलिन मनु जानी। झुकी रानि अब रहु अरगानी।।

  136. RCM 2.14.8Open verse →

    पुनि अस कबहुँ कहसि घरफोरी। तब धरि जीभ कढ़ावउँ तोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि अस कबहुँ कहसि घरफोरी। तब धरि जीभ कढ़ावउँ तोरी।।

  137. RCM 2.14.9Open verse →

    काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि।

    अर्थ · Hindi

    काने खोरे कूबरे कुटिल कुचाली जानि।

  138. RCM 2.14.10Open verse →

    तिय बिसेषि पुनि चेरि कहि भरतमातु मुसुकानि।।14।।

    अर्थ · Hindi

    तिय बिसेषि पुनि चेरि कहि भरतमातु मुसुकानि।।14।।

  139. RCM 2.15.1Open verse →

    प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही। सपनेहुँ तो पर कोपु न मोही।।

    अर्थ · Hindi

    प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही। सपनेहुँ तो पर कोपु न मोही।।

  140. RCM 2.15.2Open verse →

    सुदिनु सुमंगल दायकु सोई। तोर कहा फुर जेहि दिन होई।।

    अर्थ · Hindi

    सुदिनु सुमंगल दायकु सोई। तोर कहा फुर जेहि दिन होई।।

  141. RCM 2.15.3Open verse →

    जेठ स्वामि सेवक लघु भाई। यह दिनकर कुल रीति सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जेठ स्वामि सेवक लघु भाई। यह दिनकर कुल रीति सुहाई।।

  142. RCM 2.15.4Open verse →

    राम तिलकु जौं साँचेहुँ काली। देउँ मागु मन भावत आली।।

    अर्थ · Hindi

    राम तिलकु जौं साँचेहुँ काली। देउँ मागु मन भावत आली।।

  143. RCM 2.15.5Open verse →

    कौसल्या सम सब महतारी। रामहि सहज सुभायँ पिआरी।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या सम सब महतारी। रामहि सहज सुभायँ पिआरी।।

  144. RCM 2.15.6Open verse →

    मो पर करहिं सनेहु बिसेषी। मैं करि प्रीति परीछा देखी।।

    अर्थ · Hindi

    मो पर करहिं सनेहु बिसेषी। मैं करि प्रीति परीछा देखी।।

  145. RCM 2.15.7Open verse →

    जौं बिधि जनमु देइ करि छोहू। होहुँ राम सिय पूत पुतोहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बिधि जनमु देइ करि छोहू। होहुँ राम सिय पूत पुतोहू।।

  146. RCM 2.15.8Open verse →

    प्रान तें अधिक रामु प्रिय मोरें। तिन्ह कें तिलक छोभु कस तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    प्रान तें अधिक रामु प्रिय मोरें। तिन्ह कें तिलक छोभु कस तोरें।।

  147. RCM 2.15.9Open verse →

    भरत सपथ तोहि सत्य कहु परिहरि कपट दुराउ।

    अर्थ · Hindi

    भरत सपथ तोहि सत्य कहु परिहरि कपट दुराउ।

  148. RCM 2.15.10Open verse →

    हरष समय बिसमउ करसि कारन मोहि सुनाउ।।15।।

    अर्थ · Hindi

    हरष समय बिसमउ करसि कारन मोहि सुनाउ।।15।।

  149. RCM 2.16.1Open verse →

    एकहिं बार आस सब पूजी। अब कछु कहब जीभ करि दूजी।।

    अर्थ · Hindi

    एकहिं बार आस सब पूजी। अब कछु कहब जीभ करि दूजी।।

  150. RCM 2.16.2Open verse →

    फोरै जोगु कपारु अभागा। भलेउ कहत दुख रउरेहि लागा।।

    अर्थ · Hindi

    फोरै जोगु कपारु अभागा। भलेउ कहत दुख रउरेहि लागा।।

  151. RCM 2.16.3Open verse →

    कहहिं झूठि फुरि बात बनाई। ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं झूठि फुरि बात बनाई। ते प्रिय तुम्हहि करुइ मैं माई।।

  152. RCM 2.16.4Open verse →

    हमहुँ कहबि अब ठकुरसोहाती। नाहिं त मौन रहब दिनु राती।।

    अर्थ · Hindi

    हमहुँ कहबि अब ठकुरसोहाती। नाहिं त मौन रहब दिनु राती।।

  153. RCM 2.16.5Open verse →

    करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा। बवा सो लुनिअ लहिअ जो दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    करि कुरूप बिधि परबस कीन्हा। बवा सो लुनिअ लहिअ जो दीन्हा।।

  154. RCM 2.16.6Open verse →

    कोउ नृप होउ हमहि का हानी। चेरि छाड़ि अब होब कि रानी।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ नृप होउ हमहि का हानी। चेरि छाड़ि अब होब कि रानी।।

  155. RCM 2.16.7Open verse →

    जारै जोगु सुभाउ हमारा। अनभल देखि न जाइ तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    जारै जोगु सुभाउ हमारा। अनभल देखि न जाइ तुम्हारा।।

  156. RCM 2.16.8Open verse →

    तातें कछुक बात अनुसारी। छमिअ देबि बड़ि चूक हमारी।।

    अर्थ · Hindi

    तातें कछुक बात अनुसारी। छमिअ देबि बड़ि चूक हमारी।।

  157. RCM 2.16.9Open verse →

    गूढ़ कपट प्रिय बचन सुनि तीय अधरबुधि रानि।

    अर्थ · Hindi

    गूढ़ कपट प्रिय बचन सुनि तीय अधरबुधि रानि।

  158. RCM 2.16.10Open verse →

    सुरमाया बस बैरिनिहि सुह्द जानि पतिआनि।।16।।

    अर्थ · Hindi

    सुरमाया बस बैरिनिहि सुह्द जानि पतिआनि।।16।।

  159. RCM 2.17.1Open verse →

    सादर पुनि पुनि पूँछति ओही। सबरी गान मृगी जनु मोही।।

    अर्थ · Hindi

    सादर पुनि पुनि पूँछति ओही। सबरी गान मृगी जनु मोही।।

  160. RCM 2.17.2Open verse →

    तसि मति फिरी अहइ जसि भाबी। रहसी चेरि घात जनु फाबी।।

    अर्थ · Hindi

    तसि मति फिरी अहइ जसि भाबी। रहसी चेरि घात जनु फाबी।।

  161. RCM 2.17.3Open verse →

    तुम्ह पूँछहु मैं कहत डेराऊँ। धरेउ मोर घरफोरी नाऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह पूँछहु मैं कहत डेराऊँ। धरेउ मोर घरफोरी नाऊँ।।

  162. RCM 2.17.4Open verse →

    सजि प्रतीति बहुबिधि गढ़ि छोली। अवध साढ़साती तब बोली।।

    अर्थ · Hindi

    सजि प्रतीति बहुबिधि गढ़ि छोली। अवध साढ़साती तब बोली।।

  163. RCM 2.17.5Open verse →

    प्रिय सिय रामु कहा तुम्ह रानी। रामहि तुम्ह प्रिय सो फुरि बानी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिय सिय रामु कहा तुम्ह रानी। रामहि तुम्ह प्रिय सो फुरि बानी।।

  164. RCM 2.17.6Open verse →

    रहा प्रथम अब ते दिन बीते। समउ फिरें रिपु होहिं पिंरीते।।

    अर्थ · Hindi

    रहा प्रथम अब ते दिन बीते। समउ फिरें रिपु होहिं पिंरीते।।

  165. RCM 2.17.7Open verse →

    भानु कमल कुल पोषनिहारा। बिनु जल जारि करइ सोइ छारा।।

    अर्थ · Hindi

    भानु कमल कुल पोषनिहारा। बिनु जल जारि करइ सोइ छारा।।

  166. RCM 2.17.8Open verse →

    जरि तुम्हारि चह सवति उखारी। रूँधहु करि उपाउ बर बारी।।

    अर्थ · Hindi

    जरि तुम्हारि चह सवति उखारी। रूँधहु करि उपाउ बर बारी।।

  167. RCM 2.17.9Open verse →

    तुम्हहि न सोचु सोहाग बल निज बस जानहु राउ।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हहि न सोचु सोहाग बल निज बस जानहु राउ।

  168. RCM 2.17.10Open verse →

    मन मलीन मुह मीठ नृप राउर सरल सुभाउ।।17।।

    अर्थ · Hindi

    मन मलीन मुह मीठ नृप राउर सरल सुभाउ।।17।।

  169. RCM 2.18.1Open verse →

    चतुर गँभीर राम महतारी। बीचु पाइ निज बात सँवारी।।

    अर्थ · Hindi

    चतुर गँभीर राम महतारी। बीचु पाइ निज बात सँवारी।।

  170. RCM 2.18.2Open verse →

    पठए भरतु भूप ननिअउरें। राम मातु मत जानव रउरें।।

    अर्थ · Hindi

    पठए भरतु भूप ननिअउरें। राम मातु मत जानव रउरें।।

  171. RCM 2.18.3Open verse →

    सेवहिं सकल सवति मोहि नीकें। गरबित भरत मातु बल पी कें।।

    अर्थ · Hindi

    सेवहिं सकल सवति मोहि नीकें। गरबित भरत मातु बल पी कें।।

  172. RCM 2.18.4Open verse →

    सालु तुम्हार कौसिलहि माई। कपट चतुर नहिं होइ जनाई।।

    अर्थ · Hindi

    सालु तुम्हार कौसिलहि माई। कपट चतुर नहिं होइ जनाई।।

  173. RCM 2.18.5Open verse →

    राजहि तुम्ह पर प्रेमु बिसेषी। सवति सुभाउ सकइ नहिं देखी।।

    अर्थ · Hindi

    राजहि तुम्ह पर प्रेमु बिसेषी। सवति सुभाउ सकइ नहिं देखी।।

  174. RCM 2.18.6Open verse →

    रची प्रंपचु भूपहि अपनाई। राम तिलक हित लगन धराई।।

    अर्थ · Hindi

    रची प्रंपचु भूपहि अपनाई। राम तिलक हित लगन धराई।।

  175. RCM 2.18.7Open verse →

    यह कुल उचित राम कहुँ टीका। सबहि सोहाइ मोहि सुठि नीका।।

    अर्थ · Hindi

    यह कुल उचित राम कहुँ टीका। सबहि सोहाइ मोहि सुठि नीका।।

  176. RCM 2.18.8Open verse →

    आगिलि बात समुझि डरु मोही। देउ दैउ फिरि सो फलु ओही।।

    अर्थ · Hindi

    आगिलि बात समुझि डरु मोही। देउ दैउ फिरि सो फलु ओही।।

  177. RCM 2.18.9Open verse →

    रचि पचि कोटिक कुटिलपन कीन्हेसि कपट प्रबोधु।।

    अर्थ · Hindi

    रचि पचि कोटिक कुटिलपन कीन्हेसि कपट प्रबोधु।।

  178. RCM 2.18.10Open verse →

    कहिसि कथा सत सवति कै जेहि बिधि बाढ़ बिरोधु।।18।।

    अर्थ · Hindi

    कहिसि कथा सत सवति कै जेहि बिधि बाढ़ बिरोधु।।18।।

  179. RCM 2.19.1Open verse →

    भावी बस प्रतीति उर आई। पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई।।

    अर्थ · Hindi

    भावी बस प्रतीति उर आई। पूँछ रानि पुनि सपथ देवाई।।

  180. RCM 2.19.2Open verse →

    का पूछहुँ तुम्ह अबहुँ न जाना। निज हित अनहित पसु पहिचाना।।

    अर्थ · Hindi

    का पूछहुँ तुम्ह अबहुँ न जाना। निज हित अनहित पसु पहिचाना।।

  181. RCM 2.19.3Open verse →

    भयउ पाखु दिन सजत समाजू। तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ पाखु दिन सजत समाजू। तुम्ह पाई सुधि मोहि सन आजू।।

  182. RCM 2.19.4Open verse →

    खाइअ पहिरिअ राज तुम्हारें। सत्य कहें नहिं दोषु हमारें।।

    अर्थ · Hindi

    खाइअ पहिरिअ राज तुम्हारें। सत्य कहें नहिं दोषु हमारें।।

  183. RCM 2.19.5Open verse →

    जौं असत्य कछु कहब बनाई। तौ बिधि देइहि हमहि सजाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं असत्य कछु कहब बनाई। तौ बिधि देइहि हमहि सजाई।।

  184. RCM 2.19.6Open verse →

    रामहि तिलक कालि जौं भयऊ। तुम्ह कहुँ बिपति बीजु बिधि बयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि तिलक कालि जौं भयऊ। तुम्ह कहुँ बिपति बीजु बिधि बयऊ।।

  185. RCM 2.19.7Open verse →

    रेख खँचाइ कहउँ बलु भाषी। भामिनि भइहु दूध कइ माखी।।

    अर्थ · Hindi

    रेख खँचाइ कहउँ बलु भाषी। भामिनि भइहु दूध कइ माखी।।

  186. RCM 2.19.8Open verse →

    जौं सुत सहित करहु सेवकाई। तौ घर रहहु न आन उपाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं सुत सहित करहु सेवकाई। तौ घर रहहु न आन उपाई।।

  187. RCM 2.19.9Open verse →

    कद्रूँ बिनतहि दीन्ह दुखु तुम्हहि कौसिलाँ देब।

    अर्थ · Hindi

    कद्रूँ बिनतहि दीन्ह दुखु तुम्हहि कौसिलाँ देब।

  188. RCM 2.19.10Open verse →

    भरतु बंदिगृह सेइहहिं लखनु राम के नेब।।19।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु बंदिगृह सेइहहिं लखनु राम के नेब।।19।।

  189. RCM 2.20.1Open verse →

    कैकयसुता सुनत कटु बानी। कहि न सकइ कछु सहमि सुखानी।।

    अर्थ · Hindi

    कैकयसुता सुनत कटु बानी। कहि न सकइ कछु सहमि सुखानी।।

  190. RCM 2.20.2Open verse →

    तन पसेउ कदली जिमि काँपी। कुबरीं दसन जीभ तब चाँपी।।

    अर्थ · Hindi

    तन पसेउ कदली जिमि काँपी। कुबरीं दसन जीभ तब चाँपी।।

  191. RCM 2.20.3Open verse →

    कहि कहि कोटिक कपट कहानी। धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहि कहि कोटिक कपट कहानी। धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी।।

  192. RCM 2.20.4Open verse →

    फिरा करमु प्रिय लागि कुचाली। बकिहि सराहइ मानि मराली।।

    अर्थ · Hindi

    फिरा करमु प्रिय लागि कुचाली। बकिहि सराहइ मानि मराली।।

  193. RCM 2.20.5Open verse →

    सुनु मंथरा बात फुरि तोरी। दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मंथरा बात फुरि तोरी। दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी।।

  194. RCM 2.20.6Open verse →

    दिन प्रति देखउँ राति कुसपने। कहउँ न तोहि मोह बस अपने।।

    अर्थ · Hindi

    दिन प्रति देखउँ राति कुसपने। कहउँ न तोहि मोह बस अपने।।

  195. RCM 2.20.7Open verse →

    काह करौ सखि सूध सुभाऊ। दाहिन बाम न जानउँ काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    काह करौ सखि सूध सुभाऊ। दाहिन बाम न जानउँ काऊ।।

  196. RCM 2.20.8Open verse →

    अपने चलत न आजु लगि अनभल काहुक कीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    अपने चलत न आजु लगि अनभल काहुक कीन्ह।

  197. RCM 2.20.9Open verse →

    केहिं अघ एकहि बार मोहि दैअँ दुसह दुखु दीन्ह।।20।।

    अर्थ · Hindi

    केहिं अघ एकहि बार मोहि दैअँ दुसह दुखु दीन्ह।।20।।

  198. RCM 2.21.1Open verse →

    नैहर जनमु भरब बरु जाइ। जिअत न करबि सवति सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    नैहर जनमु भरब बरु जाइ। जिअत न करबि सवति सेवकाई।।

  199. RCM 2.21.2Open verse →

    अरि बस दैउ जिआवत जाही। मरनु नीक तेहि जीवन चाही।।

    अर्थ · Hindi

    अरि बस दैउ जिआवत जाही। मरनु नीक तेहि जीवन चाही।।

  200. RCM 2.21.3Open verse →

    दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी।।

    अर्थ · Hindi

    दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी।।

  201. RCM 2.21.4Open verse →

    अस कस कहहु मानि मन ऊना। सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना।।

    अर्थ · Hindi

    अस कस कहहु मानि मन ऊना। सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना।।

  202. RCM 2.21.5Open verse →

    जेहिं राउर अति अनभल ताका। सोइ पाइहि यहु फलु परिपाका।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं राउर अति अनभल ताका। सोइ पाइहि यहु फलु परिपाका।।

  203. RCM 2.21.6Open verse →

    जब तें कुमत सुना मैं स्वामिनि। भूख न बासर नींद न जामिनि।।

    अर्थ · Hindi

    जब तें कुमत सुना मैं स्वामिनि। भूख न बासर नींद न जामिनि।।

  204. RCM 2.21.7Open verse →

    पूँछेउ गुनिन्ह रेख तिन्ह खाँची। भरत भुआल होहिं यह साँची।।

    अर्थ · Hindi

    पूँछेउ गुनिन्ह रेख तिन्ह खाँची। भरत भुआल होहिं यह साँची।।

  205. RCM 2.21.8Open verse →

    भामिनि करहु त कहौं उपाऊ। है तुम्हरीं सेवा बस राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भामिनि करहु त कहौं उपाऊ। है तुम्हरीं सेवा बस राऊ।।

  206. RCM 2.21.9Open verse →

    परउँ कूप तुअ बचन पर सकउँ पूत पति त्यागि।

    अर्थ · Hindi

    परउँ कूप तुअ बचन पर सकउँ पूत पति त्यागि।

  207. RCM 2.21.10Open verse →

    कहसि मोर दुखु देखि बड़ कस न करब हित लागि।।21।।

    अर्थ · Hindi

    कहसि मोर दुखु देखि बड़ कस न करब हित लागि।।21।।

  208. RCM 2.22.1Open verse →

    कुबरीं करि कबुली कैकेई। कपट छुरी उर पाहन टेई।।

    अर्थ · Hindi

    कुबरीं करि कबुली कैकेई। कपट छुरी उर पाहन टेई।।

  209. RCM 2.22.2Open verse →

    लखइ न रानि निकट दुखु कैंसे। चरइ हरित तिन बलिपसु जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    लखइ न रानि निकट दुखु कैंसे। चरइ हरित तिन बलिपसु जैसें।।

  210. RCM 2.22.3Open verse →

    सुनत बात मृदु अंत कठोरी। देति मनहुँ मधु माहुर घोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बात मृदु अंत कठोरी। देति मनहुँ मधु माहुर घोरी।।

  211. RCM 2.22.4Open verse →

    कहइ चेरि सुधि अहइ कि नाही। स्वामिनि कहिहु कथा मोहि पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहइ चेरि सुधि अहइ कि नाही। स्वामिनि कहिहु कथा मोहि पाहीं।।

  212. RCM 2.22.5Open verse →

    दुइ बरदान भूप सन थाती। मागहु आजु जुड़ावहु छाती।।

    अर्थ · Hindi

    दुइ बरदान भूप सन थाती। मागहु आजु जुड़ावहु छाती।।

  213. RCM 2.22.6Open verse →

    सुतहि राजु रामहि बनवासू। देहु लेहु सब सवति हुलासु।।

    अर्थ · Hindi

    सुतहि राजु रामहि बनवासू। देहु लेहु सब सवति हुलासु।।

  214. RCM 2.22.7Open verse →

    भूपति राम सपथ जब करई। तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई।।

    अर्थ · Hindi

    भूपति राम सपथ जब करई। तब मागेहु जेहिं बचनु न टरई।।

  215. RCM 2.22.8Open verse →

    होइ अकाजु आजु निसि बीतें। बचनु मोर प्रिय मानेहु जी तें।।

    अर्थ · Hindi

    होइ अकाजु आजु निसि बीतें। बचनु मोर प्रिय मानेहु जी तें।।

  216. RCM 2.22.9Open verse →

    बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु।

    अर्थ · Hindi

    बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु।

  217. RCM 2.22.10Open verse →

    काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु।।22।।

    अर्थ · Hindi

    काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु।।22।।

  218. RCM 2.23.1Open verse →

    कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बड़ि बुद्धि बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    कुबरिहि रानि प्रानप्रिय जानी। बार बार बड़ि बुद्धि बखानी।।

  219. RCM 2.23.2Open verse →

    तोहि सम हित न मोर संसारा। बहे जात कइ भइसि अधारा।।

    अर्थ · Hindi

    तोहि सम हित न मोर संसारा। बहे जात कइ भइसि अधारा।।

  220. RCM 2.23.3Open verse →

    जौं बिधि पुरब मनोरथु काली। करौं तोहि चख पूतरि आली।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बिधि पुरब मनोरथु काली। करौं तोहि चख पूतरि आली।।

  221. RCM 2.23.4Open verse →

    बहुबिधि चेरिहि आदरु देई। कोपभवन गवनि कैकेई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि चेरिहि आदरु देई। कोपभवन गवनि कैकेई।।

  222. RCM 2.23.5Open verse →

    बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकेई केरी।।

    अर्थ · Hindi

    बिपति बीजु बरषा रितु चेरी। भुइँ भइ कुमति कैकेई केरी।।

  223. RCM 2.23.6Open verse →

    पाइ कपट जलु अंकुर जामा। बर दोउ दल दुख फल परिनामा।।

    अर्थ · Hindi

    पाइ कपट जलु अंकुर जामा। बर दोउ दल दुख फल परिनामा।।

  224. RCM 2.23.7Open verse →

    कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई।।

    अर्थ · Hindi

    कोप समाजु साजि सबु सोई। राजु करत निज कुमति बिगोई।।

  225. RCM 2.23.8Open verse →

    राउर नगर कोलाहलु होई। यह कुचालि कछु जान न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    राउर नगर कोलाहलु होई। यह कुचालि कछु जान न कोई।।

  226. RCM 2.23.9Open verse →

    प्रमुदित पुर नर नारि। सब सजहिं सुमंगलचार।

    अर्थ · Hindi

    प्रमुदित पुर नर नारि। सब सजहिं सुमंगलचार।

  227. RCM 2.23.10Open verse →

    एक प्रबिसहिं एक निर्गमहिं भीर भूप दरबार।।23।।

    अर्थ · Hindi

    एक प्रबिसहिं एक निर्गमहिं भीर भूप दरबार।।23।।

  228. RCM 2.24.1Open verse →

    बाल सखा सुन हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बाल सखा सुन हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं।।

  229. RCM 2.24.2Open verse →

    प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी। पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी। पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी।।

  230. RCM 2.24.3Open verse →

    फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई।।

  231. RCM 2.24.4Open verse →

    को रघुबीर सरिस संसारा। सीलु सनेह निबाहनिहारा।

    अर्थ · Hindi

    को रघुबीर सरिस संसारा। सीलु सनेह निबाहनिहारा।

  232. RCM 2.24.5Open verse →

    जेंहि जेंहि जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जेंहि जेंहि जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं।।

  233. RCM 2.24.6Open verse →

    सेवक हम स्वामी सियनाहू। होउ नात यह ओर निबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक हम स्वामी सियनाहू। होउ नात यह ओर निबाहू।।

  234. RCM 2.24.7Open verse →

    अस अभिलाषु नगर सब काहू। कैकयसुता ह्दयँ अति दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    अस अभिलाषु नगर सब काहू। कैकयसुता ह्दयँ अति दाहू।।

  235. RCM 2.24.8Open verse →

    को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मतें चतुराई।।

    अर्थ · Hindi

    को न कुसंगति पाइ नसाई। रहइ न नीच मतें चतुराई।।

  236. RCM 2.24.9Open verse →

    साँस समय सानंद नृपु गयउ कैकेई गेहँ।

    अर्थ · Hindi

    साँस समय सानंद नृपु गयउ कैकेई गेहँ।

  237. RCM 2.24.10Open verse →

    गवनु निठुरता निकट किय जनु धरि देह सनेहँ।।24।।

    अर्थ · Hindi

    गवनु निठुरता निकट किय जनु धरि देह सनेहँ।।24।।

  238. RCM 2.25.1Open verse →

    कोपभवन सुनि सकुचेउ राउ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कोपभवन सुनि सकुचेउ राउ। भय बस अगहुड़ परइ न पाऊ।।

  239. RCM 2.25.2Open verse →

    सुरपति बसइ बाहँबल जाके। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें।।

    अर्थ · Hindi

    सुरपति बसइ बाहँबल जाके। नरपति सकल रहहिं रुख ताकें।।

  240. RCM 2.25.3Open verse →

    सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई। देखहु काम प्रताप बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुनि तिय रिस गयउ सुखाई। देखहु काम प्रताप बड़ाई।।

  241. RCM 2.25.4Open verse →

    सूल कुलिस असि अँगवनिहारे। ते रतिनाथ सुमन सर मारे।।

    अर्थ · Hindi

    सूल कुलिस असि अँगवनिहारे। ते रतिनाथ सुमन सर मारे।।

  242. RCM 2.25.5Open verse →

    सभय नरेसु प्रिया पहिं गयऊ। देखि दसा दुखु दारुन भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सभय नरेसु प्रिया पहिं गयऊ। देखि दसा दुखु दारुन भयऊ।।

  243. RCM 2.25.6Open verse →

    भूमि सयन पटु मोट पुराना। दिए डारि तन भूषण नाना।।

    अर्थ · Hindi

    भूमि सयन पटु मोट पुराना। दिए डारि तन भूषण नाना।।

  244. RCM 2.25.7Open verse →

    कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अन अहिवातु सूच जनु भाबी।।

    अर्थ · Hindi

    कुमतिहि कसि कुबेषता फाबी। अन अहिवातु सूच जनु भाबी।।

  245. RCM 2.25.8Open verse →

    जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी। प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ निकट नृपु कह मृदु बानी। प्रानप्रिया केहि हेतु रिसानी।।

  246. RCM 2.26.1Open verse →

    अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा।।

  247. RCM 2.26.2Open verse →

    कहु केहि रंकहि करौ नरेसू। कहु केहि नृपहि निकासौं देसू।।

    अर्थ · Hindi

    कहु केहि रंकहि करौ नरेसू। कहु केहि नृपहि निकासौं देसू।।

  248. RCM 2.26.3Open verse →

    सकउँ तोर अरि अमरउ मारी। काह कीट बपुरे नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    सकउँ तोर अरि अमरउ मारी। काह कीट बपुरे नर नारी।।

  249. RCM 2.26.4Open verse →

    जानसि मोर सुभाउ बरोरू। मनु तव आनन चंद चकोरू।।

    अर्थ · Hindi

    जानसि मोर सुभाउ बरोरू। मनु तव आनन चंद चकोरू।।

  250. RCM 2.26.5Open verse →

    प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें। परिजन प्रजा सकल बस तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें। परिजन प्रजा सकल बस तोरें।।

  251. RCM 2.26.6Open verse →

    जौं कछु कहौ कपटु करि तोही। भामिनि राम सपथ सत मोही।।

    अर्थ · Hindi

    जौं कछु कहौ कपटु करि तोही। भामिनि राम सपथ सत मोही।।

  252. RCM 2.26.7Open verse →

    बिहसि मागु मनभावति बाता। भूषन सजहि मनोहर गाता।।

    अर्थ · Hindi

    बिहसि मागु मनभावति बाता। भूषन सजहि मनोहर गाता।।

  253. RCM 2.26.8Open verse →

    घरी कुघरी समुझि जियँ देखू। बेगि प्रिया परिहरहि कुबेषू।।

    अर्थ · Hindi

    घरी कुघरी समुझि जियँ देखू। बेगि प्रिया परिहरहि कुबेषू।।

  254. RCM 2.26.9Open verse →

    यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि बिहसि उठी मतिमंद।

    अर्थ · Hindi

    यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि बिहसि उठी मतिमंद।

  255. RCM 2.26.10Open verse →

    भूषन सजति बिलोकि मृगु मनहुँ किरातिनि फंद।।26।।

    अर्थ · Hindi

    भूषन सजति बिलोकि मृगु मनहुँ किरातिनि फंद।।26।।

  256. RCM 2.27.1Open verse →

    पुनि कह राउ सुह्रद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कह राउ सुह्रद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी।।

  257. RCM 2.27.2Open verse →

    भामिनि भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा।।

    अर्थ · Hindi

    भामिनि भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा।।

  258. RCM 2.27.3Open verse →

    रामहि देउँ कालि जुबराजू। सजहि सुलोचनि मंगल साजू।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि देउँ कालि जुबराजू। सजहि सुलोचनि मंगल साजू।।

  259. RCM 2.27.4Open verse →

    दलकि उठेउ सुनि ह्रदउ कठोरू। जनु छुइ गयउ पाक बरतोरू।।

    अर्थ · Hindi

    दलकि उठेउ सुनि ह्रदउ कठोरू। जनु छुइ गयउ पाक बरतोरू।।

  260. RCM 2.27.5Open verse →

    ऐसिउ पीर बिहसि तेहि गोई। चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई।।

    अर्थ · Hindi

    ऐसिउ पीर बिहसि तेहि गोई। चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई।।

  261. RCM 2.27.6Open verse →

    लखहिं न भूप कपट चतुराई। कोटि कुटिल मनि गुरू पढ़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    लखहिं न भूप कपट चतुराई। कोटि कुटिल मनि गुरू पढ़ाई।।

  262. RCM 2.27.7Open verse →

    जद्यपि नीति निपुन नरनाहू। नारिचरित जलनिधि अवगाहू।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि नीति निपुन नरनाहू। नारिचरित जलनिधि अवगाहू।।

  263. RCM 2.27.8Open verse →

    कपट सनेहु बढ़ाइ बहोरी। बोली बिहसि नयन मुहु मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    कपट सनेहु बढ़ाइ बहोरी। बोली बिहसि नयन मुहु मोरी।।

  264. RCM 2.27.9Open verse →

    मागु मागु पै कहहु पिय कबहुँ न देहु न लेहु।

    अर्थ · Hindi

    मागु मागु पै कहहु पिय कबहुँ न देहु न लेहु।

  265. RCM 2.27.10Open verse →

    देन कहेहु बरदान दुइ तेउ पावत संदेहु।।27।।

    अर्थ · Hindi

    देन कहेहु बरदान दुइ तेउ पावत संदेहु।।27।।

  266. RCM 2.28.1Open verse →

    जानेउँ मरमु राउ हँसि कहई। तुम्हहि कोहाब परम प्रिय अहई।।

    अर्थ · Hindi

    जानेउँ मरमु राउ हँसि कहई। तुम्हहि कोहाब परम प्रिय अहई।।

  267. RCM 2.28.2Open verse →

    थाति राखि न मागिहु काऊ। बिसरि गयउ मोहि भोर सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    थाति राखि न मागिहु काऊ। बिसरि गयउ मोहि भोर सुभाऊ।।

  268. RCM 2.28.3Open verse →

    झूठेहुँ हमहि दोषु जनि देहू। दुइ कै चारि मागि मकु लेहू।।

    अर्थ · Hindi

    झूठेहुँ हमहि दोषु जनि देहू। दुइ कै चारि मागि मकु लेहू।।

  269. RCM 2.28.4Open verse →

    रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुँ बरु बचनु न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुँ बरु बचनु न जाई।।

  270. RCM 2.28.5Open verse →

    नहिं असत्य सम पातक पुंजा। गिरि सम होहिं कि कोटिक गुंजा।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं असत्य सम पातक पुंजा। गिरि सम होहिं कि कोटिक गुंजा।।

  271. RCM 2.28.6Open verse →

    सत्यमूल सब सुकृत सुहाए। बेद पुरान बिदित मनु गाए।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यमूल सब सुकृत सुहाए। बेद पुरान बिदित मनु गाए।।

  272. RCM 2.28.7Open verse →

    तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई।।

  273. RCM 2.28.8Open verse →

    बात दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली। कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली।।

    अर्थ · Hindi

    बात दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली। कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली।।

  274. RCM 2.28.9Open verse →

    भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग समाजु।

    अर्थ · Hindi

    भूप मनोरथ सुभग बनु सुख सुबिहंग समाजु।

  275. RCM 2.28.10Open verse →

    भिल्लनि जिमि छाड़न चहति बचनु भयंकरु बाजु।।28।।

    अर्थ · Hindi

    भिल्लनि जिमि छाड़न चहति बचनु भयंकरु बाजु।।28।।

  276. RCM 2.29.1Open verse →

    सुनहु प्रानप्रिय भावत जी का। देहु एक बर भरतहि टीका।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु प्रानप्रिय भावत जी का। देहु एक बर भरतहि टीका।।

  277. RCM 2.29.2Open verse →

    मागउँ दूसर बर कर जोरी। पुरवहु नाथ मनोरथ मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    मागउँ दूसर बर कर जोरी। पुरवहु नाथ मनोरथ मोरी।।

  278. RCM 2.29.3Open verse →

    तापस बेष बिसेषि उदासी। चौदह बरिस रामु बनबासी।।

    अर्थ · Hindi

    तापस बेष बिसेषि उदासी। चौदह बरिस रामु बनबासी।।

  279. RCM 2.29.4Open verse →

    सुनि मृदु बचन भूप हियँ सोकू। ससि कर छुअत बिकल जिमि कोकू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मृदु बचन भूप हियँ सोकू। ससि कर छुअत बिकल जिमि कोकू।।

  280. RCM 2.29.5Open verse →

    गयउ सहमि नहिं कछु कहि आवा। जनु सचान बन झपटेउ लावा।।

    अर्थ · Hindi

    गयउ सहमि नहिं कछु कहि आवा। जनु सचान बन झपटेउ लावा।।

  281. RCM 2.29.6Open verse →

    बिबरन भयउ निपट नरपालू। दामिनि हनेउ मनहुँ तरु तालू।।

    अर्थ · Hindi

    बिबरन भयउ निपट नरपालू। दामिनि हनेउ मनहुँ तरु तालू।।

  282. RCM 2.29.7Open verse →

    माथे हाथ मूदि दोउ लोचन। तनु धरि सोचु लाग जनु सोचन।।

    अर्थ · Hindi

    माथे हाथ मूदि दोउ लोचन। तनु धरि सोचु लाग जनु सोचन।।

  283. RCM 2.29.8Open verse →

    मोर मनोरथु सुरतरु फूला। फरत करिनि जिमि हतेउ समूला।।

    अर्थ · Hindi

    मोर मनोरथु सुरतरु फूला। फरत करिनि जिमि हतेउ समूला।।

  284. RCM 2.29.9Open verse →

    अवध उजारि कीन्हि कैकेईं। दीन्हसि अचल बिपति कै नेईं।।

    अर्थ · Hindi

    अवध उजारि कीन्हि कैकेईं। दीन्हसि अचल बिपति कै नेईं।।

  285. RCM 2.29.10Open verse →

    कवनें अवसर का भयउ गयउँ नारि बिस्वास।

    अर्थ · Hindi

    कवनें अवसर का भयउ गयउँ नारि बिस्वास।

  286. RCM 2.29.11Open verse →

    जोग सिद्धि फल समय जिमि जतिहि अबिद्या नास।।29।।

    अर्थ · Hindi

    जोग सिद्धि फल समय जिमि जतिहि अबिद्या नास।।29।।

  287. RCM 2.30.1Open verse →

    एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा। देखि कुभाँति कुमति मन माखा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा। देखि कुभाँति कुमति मन माखा।।

  288. RCM 2.30.2Open verse →

    भरतु कि राउर पूत न होहीं। आनेहु मोल बेसाहि कि मोही।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु कि राउर पूत न होहीं। आनेहु मोल बेसाहि कि मोही।।

  289. RCM 2.30.3Open verse →

    जो सुनि सरु अस लाग तुम्हारें। काहे न बोलहु बचनु सँभारे।।

    अर्थ · Hindi

    जो सुनि सरु अस लाग तुम्हारें। काहे न बोलहु बचनु सँभारे।।

  290. RCM 2.30.4Open verse →

    देहु उतरु अनु करहु कि नाहीं। सत्यसंध तुम्ह रघुकुल माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    देहु उतरु अनु करहु कि नाहीं। सत्यसंध तुम्ह रघुकुल माहीं।।

  291. RCM 2.30.5Open verse →

    देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहुँ सत्य जग अपजसु लेहू।।

    अर्थ · Hindi

    देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहुँ सत्य जग अपजसु लेहू।।

  292. RCM 2.30.6Open verse →

    सत्य सराहि कहेहु बरु देना। जानेहु लेइहि मागि चबेना।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य सराहि कहेहु बरु देना। जानेहु लेइहि मागि चबेना।।

  293. RCM 2.30.7Open verse →

    सिबि दधीचि बलि जो कछु भाषा। तनु धनु तजेउ बचन पनु राखा।।

    अर्थ · Hindi

    सिबि दधीचि बलि जो कछु भाषा। तनु धनु तजेउ बचन पनु राखा।।

  294. RCM 2.30.8Open verse →

    अति कटु बचन कहति कैकेई। मानहुँ लोन जरे पर देई।।

    अर्थ · Hindi

    अति कटु बचन कहति कैकेई। मानहुँ लोन जरे पर देई।।

  295. RCM 2.30.9Open verse →

    धरम धुरंधर धीर धरि नयन उघारे रायँ।

    अर्थ · Hindi

    धरम धुरंधर धीर धरि नयन उघारे रायँ।

  296. RCM 2.30.10Open verse →

    सिरु धुनि लीन्हि उसास असि मारेसि मोहि कुठायँ।।30।।

    अर्थ · Hindi

    सिरु धुनि लीन्हि उसास असि मारेसि मोहि कुठायँ।।30।।

  297. RCM 2.31.1Open verse →

    आगें दीखि जरत रिस भारी। मनहुँ रोष तरवारि उघारी।।

    अर्थ · Hindi

    आगें दीखि जरत रिस भारी। मनहुँ रोष तरवारि उघारी।।

  298. RCM 2.31.2Open verse →

    मूठि कुबुद्धि धार निठुराई। धरी कूबरीं सान बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    मूठि कुबुद्धि धार निठुराई। धरी कूबरीं सान बनाई।।

  299. RCM 2.31.3Open verse →

    लखी महीप कराल कठोरा। सत्य कि जीवनु लेइहि मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    लखी महीप कराल कठोरा। सत्य कि जीवनु लेइहि मोरा।।

  300. RCM 2.31.4Open verse →

    बोले राउ कठिन करि छाती। बानी सबिनय तासु सोहाती।।

    अर्थ · Hindi

    बोले राउ कठिन करि छाती। बानी सबिनय तासु सोहाती।।

  301. RCM 2.31.5Open verse →

    प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती।।

  302. RCM 2.31.6Open verse →

    मोरें भरतु रामु दुइ आँखी। सत्य कहउँ करि संकरू साखी।।

    अर्थ · Hindi

    मोरें भरतु रामु दुइ आँखी। सत्य कहउँ करि संकरू साखी।।

  303. RCM 2.31.7Open verse →

    अवसि दूतु मैं पठइब प्राता। ऐहहिं बेगि सुनत दोउ भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    अवसि दूतु मैं पठइब प्राता। ऐहहिं बेगि सुनत दोउ भ्राता।।

  304. RCM 2.31.8Open verse →

    सुदिन सोधि सबु साजु सजाई। देउँ भरत कहुँ राजु बजाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुदिन सोधि सबु साजु सजाई। देउँ भरत कहुँ राजु बजाई।।

  305. RCM 2.31.9Open verse →

    लोभु न रामहि राजु कर बहुत भरत पर प्रीति।

    अर्थ · Hindi

    लोभु न रामहि राजु कर बहुत भरत पर प्रीति।

  306. RCM 2.31.10Open verse →

    मैं बड़ छोट बिचारि जियँ करत रहेउँ नृपनीति।।31।।

    अर्थ · Hindi

    मैं बड़ छोट बिचारि जियँ करत रहेउँ नृपनीति।।31।।

  307. RCM 2.32.1Open verse →

    राम सपथ सत कहुउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    राम सपथ सत कहुउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ।।

  308. RCM 2.32.2Open verse →

    मैं सबु कीन्ह तोहि बिनु पूँछें। तेहि तें परेउ मनोरथु छूछें।।

    अर्थ · Hindi

    मैं सबु कीन्ह तोहि बिनु पूँछें। तेहि तें परेउ मनोरथु छूछें।।

  309. RCM 2.32.3Open verse →

    रिस परिहरू अब मंगल साजू। कछु दिन गएँ भरत जुबराजू।।

    अर्थ · Hindi

    रिस परिहरू अब मंगल साजू। कछु दिन गएँ भरत जुबराजू।।

  310. RCM 2.32.4Open verse →

    एकहि बात मोहि दुखु लागा। बर दूसर असमंजस मागा।।

    अर्थ · Hindi

    एकहि बात मोहि दुखु लागा। बर दूसर असमंजस मागा।।

  311. RCM 2.32.5Open verse →

    अजहुँ हृदय जरत तेहि आँचा। रिस परिहास कि साँचेहुँ साँचा।।

    अर्थ · Hindi

    अजहुँ हृदय जरत तेहि आँचा। रिस परिहास कि साँचेहुँ साँचा।।

  312. RCM 2.32.6Open verse →

    कहु तजि रोषु राम अपराधू। सबु कोउ कहइ रामु सुठि साधू।।

    अर्थ · Hindi

    कहु तजि रोषु राम अपराधू। सबु कोउ कहइ रामु सुठि साधू।।

  313. RCM 2.32.7Open verse →

    तुहूँ सराहसि करसि सनेहू। अब सुनि मोहि भयउ संदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    तुहूँ सराहसि करसि सनेहू। अब सुनि मोहि भयउ संदेहू।।

  314. RCM 2.32.8Open verse →

    जासु सुभाउ अरिहि अनुकूला। सो किमि करिहि मातु प्रतिकूला।।

    अर्थ · Hindi

    जासु सुभाउ अरिहि अनुकूला। सो किमि करिहि मातु प्रतिकूला।।

  315. RCM 2.32.9Open verse →

    प्रिया हास रिस परिहरहि मागु बिचारि बिबेकु।

    अर्थ · Hindi

    प्रिया हास रिस परिहरहि मागु बिचारि बिबेकु।

  316. RCM 2.32.10Open verse →

    जेहिं देखाँ अब नयन भरि भरत राज अभिषेकु।।32।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं देखाँ अब नयन भरि भरत राज अभिषेकु।।32।।

  317. RCM 2.33.1Open verse →

    जिऐ मीन बरू बारि बिहीना। मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना।।

    अर्थ · Hindi

    जिऐ मीन बरू बारि बिहीना। मनि बिनु फनिकु जिऐ दुख दीना।।

  318. RCM 2.33.2Open verse →

    कहउँ सुभाउ न छलु मन माहीं। जीवनु मोर राम बिनु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ सुभाउ न छलु मन माहीं। जीवनु मोर राम बिनु नाहीं।।

  319. RCM 2.33.3Open verse →

    समुझि देखु जियँ प्रिया प्रबीना। जीवनु राम दरस आधीना।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि देखु जियँ प्रिया प्रबीना। जीवनु राम दरस आधीना।।

  320. RCM 2.33.4Open verse →

    सुनि म्रदु बचन कुमति अति जरई। मनहुँ अनल आहुति घृत परई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि म्रदु बचन कुमति अति जरई। मनहुँ अनल आहुति घृत परई।।

  321. RCM 2.33.5Open verse →

    कहइ करहु किन कोटि उपाया। इहाँ न लागिहि राउरि माया।।

    अर्थ · Hindi

    कहइ करहु किन कोटि उपाया। इहाँ न लागिहि राउरि माया।।

  322. RCM 2.33.6Open verse →

    देहु कि लेहु अजसु करि नाहीं। मोहि न बहुत प्रपंच सोहाहीं।

    अर्थ · Hindi

    देहु कि लेहु अजसु करि नाहीं। मोहि न बहुत प्रपंच सोहाहीं।

  323. RCM 2.33.7Open verse →

    रामु साधु तुम्ह साधु सयाने। राममातु भलि सब पहिचाने।।

    अर्थ · Hindi

    रामु साधु तुम्ह साधु सयाने। राममातु भलि सब पहिचाने।।

  324. RCM 2.33.8Open verse →

    जस कौसिलाँ मोर भल ताका। तस फलु उन्हहि देउँ करि साका।।

    अर्थ · Hindi

    जस कौसिलाँ मोर भल ताका। तस फलु उन्हहि देउँ करि साका।।

  325. RCM 2.33.9Open verse →

    होत प्रात मुनिबेष धरि जौं न रामु बन जाहिं।

    अर्थ · Hindi

    होत प्रात मुनिबेष धरि जौं न रामु बन जाहिं।

  326. RCM 2.33.10Open verse →

    मोर मरनु राउर अजस नृप समुझिअ मन माहिं।।33।।

    अर्थ · Hindi

    मोर मरनु राउर अजस नृप समुझिअ मन माहिं।।33।।

  327. RCM 2.34.1Open verse →

    अस कहि कुटिल भई उठि ठाढ़ी। मानहुँ रोष तरंगिनि बाढ़ी।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि कुटिल भई उठि ठाढ़ी। मानहुँ रोष तरंगिनि बाढ़ी।।

  328. RCM 2.34.2Open verse →

    पाप पहार प्रगट भइ सोई। भरी क्रोध जल जाइ न जोई।।

    अर्थ · Hindi

    पाप पहार प्रगट भइ सोई। भरी क्रोध जल जाइ न जोई।।

  329. RCM 2.34.3Open verse →

    दोउ बर कूल कठिन हठ धारा। भवँर कूबरी बचन प्रचारा।।

    अर्थ · Hindi

    दोउ बर कूल कठिन हठ धारा। भवँर कूबरी बचन प्रचारा।।

  330. RCM 2.34.4Open verse →

    ढाहत भूपरूप तरु मूला। चली बिपति बारिधि अनुकूला।।

    अर्थ · Hindi

    ढाहत भूपरूप तरु मूला। चली बिपति बारिधि अनुकूला।।

  331. RCM 2.34.5Open verse →

    लखी नरेस बात फुरि साँची। तिय मिस मीचु सीस पर नाची।।

    अर्थ · Hindi

    लखी नरेस बात फुरि साँची। तिय मिस मीचु सीस पर नाची।।

  332. RCM 2.34.6Open verse →

    गहि पद बिनय कीन्ह बैठारी। जनि दिनकर कुल होसि कुठारी।।

    अर्थ · Hindi

    गहि पद बिनय कीन्ह बैठारी। जनि दिनकर कुल होसि कुठारी।।

  333. RCM 2.34.7Open verse →

    मागु माथ अबहीं देउँ तोही। राम बिरहँ जनि मारसि मोही।।

    अर्थ · Hindi

    मागु माथ अबहीं देउँ तोही। राम बिरहँ जनि मारसि मोही।।

  334. RCM 2.34.8Open verse →

    राखु राम कहुँ जेहि तेहि भाँती। नाहिं त जरिहि जनम भरि छाती।।

    अर्थ · Hindi

    राखु राम कहुँ जेहि तेहि भाँती। नाहिं त जरिहि जनम भरि छाती।।

  335. RCM 2.34.9Open verse →

    देखी ब्याधि असाध नृपु परेउ धरनि धुनि माथ।

    अर्थ · Hindi

    देखी ब्याधि असाध नृपु परेउ धरनि धुनि माथ।

  336. RCM 2.34.10Open verse →

    कहत परम आरत बचन राम राम रघुनाथ।।34।।

    अर्थ · Hindi

    कहत परम आरत बचन राम राम रघुनाथ।।34।।

  337. RCM 2.35.1Open verse →

    ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता। करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता। करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता।।

  338. RCM 2.35.2Open verse →

    कंठु सूख मुख आव न बानी। जनु पाठीनु दीन बिनु पानी।।

    अर्थ · Hindi

    कंठु सूख मुख आव न बानी। जनु पाठीनु दीन बिनु पानी।।

  339. RCM 2.35.3Open verse →

    पुनि कह कटु कठोर कैकेई। मनहुँ घाय महुँ माहुर देई।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कह कटु कठोर कैकेई। मनहुँ घाय महुँ माहुर देई।।

  340. RCM 2.35.4Open verse →

    जौं अंतहुँ अस करतबु रहेऊ। मागु मागु तुम्ह केहिं बल कहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जौं अंतहुँ अस करतबु रहेऊ। मागु मागु तुम्ह केहिं बल कहेऊ।।

  341. RCM 2.35.5Open verse →

    दुइ कि होइ एक समय भुआला। हँसब ठठाइ फुलाउब गाला।।

    अर्थ · Hindi

    दुइ कि होइ एक समय भुआला। हँसब ठठाइ फुलाउब गाला।।

  342. RCM 2.35.6Open verse →

    दानि कहाउब अरु कृपनाई। होइ कि खेम कुसल रौताई।।

    अर्थ · Hindi

    दानि कहाउब अरु कृपनाई। होइ कि खेम कुसल रौताई।।

  343. RCM 2.35.7Open verse →

    छाड़हु बचनु कि धीरजु धरहू। जनि अबला जिमि करुना करहू।।

    अर्थ · Hindi

    छाड़हु बचनु कि धीरजु धरहू। जनि अबला जिमि करुना करहू।।

  344. RCM 2.35.8Open verse →

    तनु तिय तनय धामु धनु धरनी। सत्यसंध कहुँ तृन सम बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    तनु तिय तनय धामु धनु धरनी। सत्यसंध कहुँ तृन सम बरनी।।

  345. RCM 2.35.9Open verse →

    मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर।

    अर्थ · Hindi

    मरम बचन सुनि राउ कह कहु कछु दोषु न तोर।

  346. RCM 2.35.10Open verse →

    लागेउ तोहि पिसाच जिमि कालु कहावत मोर।।35।।

    अर्थ · Hindi

    लागेउ तोहि पिसाच जिमि कालु कहावत मोर।।35।।

  347. RCM 2.36.1Open verse →

    चहत न भरत भूपतहि भोरें। बिधि बस कुमति बसी जिय तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    चहत न भरत भूपतहि भोरें। बिधि बस कुमति बसी जिय तोरें।।

  348. RCM 2.36.2Open verse →

    सो सबु मोर पाप परिनामू। भयउ कुठाहर जेहिं बिधि बामू।।

    अर्थ · Hindi

    सो सबु मोर पाप परिनामू। भयउ कुठाहर जेहिं बिधि बामू।।

  349. RCM 2.36.3Open verse →

    सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई। सब गुन धाम राम प्रभुताई।।

    अर्थ · Hindi

    सुबस बसिहि फिरि अवध सुहाई। सब गुन धाम राम प्रभुताई।।

  350. RCM 2.36.4Open verse →

    करिहहिं भाइ सकल सेवकाई। होइहि तिहुँ पुर राम बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    करिहहिं भाइ सकल सेवकाई। होइहि तिहुँ पुर राम बड़ाई।।

  351. RCM 2.36.5Open verse →

    तोर कलंकु मोर पछिताऊ। मुएहुँ न मिटहि न जाइहि काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तोर कलंकु मोर पछिताऊ। मुएहुँ न मिटहि न जाइहि काऊ।।

  352. RCM 2.36.6Open verse →

    अब तोहि नीक लाग करु सोई। लोचन ओट बैठु मुहु गोई।।

    अर्थ · Hindi

    अब तोहि नीक लाग करु सोई। लोचन ओट बैठु मुहु गोई।।

  353. RCM 2.36.7Open verse →

    जब लगि जिऔं कहउँ कर जोरी। तब लगि जनि कछु कहसि बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जब लगि जिऔं कहउँ कर जोरी। तब लगि जनि कछु कहसि बहोरी।।

  354. RCM 2.36.8Open verse →

    फिरि पछितैहसि अंत अभागी। मारसि गाइ नहारु लागी।।

    अर्थ · Hindi

    फिरि पछितैहसि अंत अभागी। मारसि गाइ नहारु लागी।।

  355. RCM 2.36.9Open verse →

    परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे करसि निदानु।

    अर्थ · Hindi

    परेउ राउ कहि कोटि बिधि काहे करसि निदानु।

  356. RCM 2.36.10Open verse →

    कपट सयानि न कहति कछु जागति मनहुँ मसानु।।36।।

    अर्थ · Hindi

    कपट सयानि न कहति कछु जागति मनहुँ मसानु।।36।।

  357. RCM 2.37.1Open verse →

    राम राम रट बिकल भुआलू। जनु बिनु पंख बिहंग बेहालू।।

    अर्थ · Hindi

    राम राम रट बिकल भुआलू। जनु बिनु पंख बिहंग बेहालू।।

  358. RCM 2.37.2Open verse →

    हृदयँ मनाव भोरु जनि होई। रामहि जाइ कहै जनि कोई।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ मनाव भोरु जनि होई। रामहि जाइ कहै जनि कोई।।

  359. RCM 2.37.3Open verse →

    उदउ करहु जनि रबि रघुकुल गुर। अवध बिलोकि सूल होइहि उर।।

    अर्थ · Hindi

    उदउ करहु जनि रबि रघुकुल गुर। अवध बिलोकि सूल होइहि उर।।

  360. RCM 2.37.4Open verse →

    भूप प्रीति कैकइ कठिनाई। उभय अवधि बिधि रची बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    भूप प्रीति कैकइ कठिनाई। उभय अवधि बिधि रची बनाई।।

  361. RCM 2.37.5Open verse →

    बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा। बीना बेनु संख धुनि द्वारा।।

    अर्थ · Hindi

    बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा। बीना बेनु संख धुनि द्वारा।।

  362. RCM 2.37.6Open verse →

    पढ़हिं भाट गुन गावहिं गायक। सुनत नृपहि जनु लागहिं सायक।।

    अर्थ · Hindi

    पढ़हिं भाट गुन गावहिं गायक। सुनत नृपहि जनु लागहिं सायक।।

  363. RCM 2.37.7Open verse →

    मंगल सकल सोहाहिं न कैसें। सहगामिनिहि बिभूषन जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल सकल सोहाहिं न कैसें। सहगामिनिहि बिभूषन जैसें।।

  364. RCM 2.37.8Open verse →

    तेहिं निसि नीद परी नहि काहू। राम दरस लालसा उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं निसि नीद परी नहि काहू। राम दरस लालसा उछाहू।।

  365. RCM 2.37.9Open verse →

    द्वार भीर सेवक सचिव कहहिं उदित रबि देखि।

    अर्थ · Hindi

    द्वार भीर सेवक सचिव कहहिं उदित रबि देखि।

  366. RCM 2.37.10Open verse →

    जागेउ अजहुँ न अवधपति कारनु कवनु बिसेषि।।37।।

    अर्थ · Hindi

    जागेउ अजहुँ न अवधपति कारनु कवनु बिसेषि।।37।।

  367. RCM 2.38.1Open verse →

    पछिले पहर भूपु नित जागा। आजु हमहि बड़ अचरजु लागा।।

    अर्थ · Hindi

    पछिले पहर भूपु नित जागा। आजु हमहि बड़ अचरजु लागा।।

  368. RCM 2.38.2Open verse →

    जाहु सुमंत्र जगावहु जाई। कीजिअ काजु रजायसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    जाहु सुमंत्र जगावहु जाई। कीजिअ काजु रजायसु पाई।।

  369. RCM 2.38.3Open verse →

    गए सुमंत्रु तब राउर माही। देखि भयावन जात डेराहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गए सुमंत्रु तब राउर माही। देखि भयावन जात डेराहीं।।

  370. RCM 2.38.4Open verse →

    धाइ खाइ जनु जाइ न हेरा। मानहुँ बिपति बिषाद बसेरा।।

    अर्थ · Hindi

    धाइ खाइ जनु जाइ न हेरा। मानहुँ बिपति बिषाद बसेरा।।

  371. RCM 2.38.5Open verse →

    पूछें कोउ न ऊतरु देई। गए जेंहिं भवन भूप कैकैई।।

    अर्थ · Hindi

    पूछें कोउ न ऊतरु देई। गए जेंहिं भवन भूप कैकैई।।

  372. RCM 2.38.6Open verse →

    कहि जयजीव बैठ सिरु नाई। दैखि भूप गति गयउ सुखाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहि जयजीव बैठ सिरु नाई। दैखि भूप गति गयउ सुखाई।।

  373. RCM 2.38.7Open verse →

    सोच बिकल बिबरन महि परेऊ। मानहुँ कमल मूलु परिहरेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सोच बिकल बिबरन महि परेऊ। मानहुँ कमल मूलु परिहरेऊ।।

  374. RCM 2.38.8Open verse →

    सचिउ सभीत सकइ नहिं पूँछी। बोली असुभ भरी सुभ छूछी।।

    अर्थ · Hindi

    सचिउ सभीत सकइ नहिं पूँछी। बोली असुभ भरी सुभ छूछी।।

  375. RCM 2.38.9Open verse →

    परी न राजहि नीद निसि हेतु जान जगदीसु।

    अर्थ · Hindi

    परी न राजहि नीद निसि हेतु जान जगदीसु।

  376. RCM 2.38.10Open verse →

    रामु रामु रटि भोरु किय कहइ न मरमु महीसु।।38।।

    अर्थ · Hindi

    रामु रामु रटि भोरु किय कहइ न मरमु महीसु।।38।।

  377. RCM 2.39.1Open verse →

    आनहु रामहि बेगि बोलाई। समाचार तब पूँछेहु आई।।

    अर्थ · Hindi

    आनहु रामहि बेगि बोलाई। समाचार तब पूँछेहु आई।।

  378. RCM 2.39.2Open verse →

    चलेउ सुमंत्र राय रूख जानी। लखी कुचालि कीन्हि कछु रानी।।

    अर्थ · Hindi

    चलेउ सुमंत्र राय रूख जानी। लखी कुचालि कीन्हि कछु रानी।।

  379. RCM 2.39.3Open verse →

    सोच बिकल मग परइ न पाऊ। रामहि बोलि कहिहि का राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सोच बिकल मग परइ न पाऊ। रामहि बोलि कहिहि का राऊ।।

  380. RCM 2.39.4Open verse →

    उर धरि धीरजु गयउ दुआरें। पूछँहिं सकल देखि मनु मारें।।

    अर्थ · Hindi

    उर धरि धीरजु गयउ दुआरें। पूछँहिं सकल देखि मनु मारें।।

  381. RCM 2.39.5Open verse →

    समाधानु करि सो सबही का। गयउ जहाँ दिनकर कुल टीका।।

    अर्थ · Hindi

    समाधानु करि सो सबही का। गयउ जहाँ दिनकर कुल टीका।।

  382. RCM 2.39.6Open verse →

    रामु सुमंत्रहि आवत देखा। आदरु कीन्ह पिता सम लेखा।।

    अर्थ · Hindi

    रामु सुमंत्रहि आवत देखा। आदरु कीन्ह पिता सम लेखा।।

  383. RCM 2.39.7Open verse →

    निरखि बदनु कहि भूप रजाई। रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि बदनु कहि भूप रजाई। रघुकुलदीपहि चलेउ लेवाई।।

  384. RCM 2.39.8Open verse →

    रामु कुभाँति सचिव सँग जाहीं। देखि लोग जहँ तहँ बिलखाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    रामु कुभाँति सचिव सँग जाहीं। देखि लोग जहँ तहँ बिलखाहीं।।

  385. RCM 2.39.9Open verse →

    जाइ दीख रघुबंसमनि नरपति निपट कुसाजु।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ दीख रघुबंसमनि नरपति निपट कुसाजु।।

  386. RCM 2.39.10Open verse →

    सहमि परेउ लखि सिंघिनिहि मनहुँ बृद्ध गजराजु।।39।।

    अर्थ · Hindi

    सहमि परेउ लखि सिंघिनिहि मनहुँ बृद्ध गजराजु।।39।।

  387. RCM 2.40.1Open verse →

    सूखहिं अधर जरइ सबु अंगू। मनहुँ दीन मनिहीन भुअंगू।।

    अर्थ · Hindi

    सूखहिं अधर जरइ सबु अंगू। मनहुँ दीन मनिहीन भुअंगू।।

  388. RCM 2.40.2Open verse →

    सरुष समीप दीखि कैकेई। मानहुँ मीचु घरी गनि लेई।।

    अर्थ · Hindi

    सरुष समीप दीखि कैकेई। मानहुँ मीचु घरी गनि लेई।।

  389. RCM 2.40.3Open verse →

    करुनामय मृदु राम सुभाऊ। प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    करुनामय मृदु राम सुभाऊ। प्रथम दीख दुखु सुना न काऊ।।

  390. RCM 2.40.4Open verse →

    तदपि धीर धरि समउ बिचारी। पूँछी मधुर बचन महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि धीर धरि समउ बिचारी। पूँछी मधुर बचन महतारी।।

  391. RCM 2.40.5Open verse →

    मोहि कहु मातु तात दुख कारन। करिअ जतन जेहिं होइ निवारन।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि कहु मातु तात दुख कारन। करिअ जतन जेहिं होइ निवारन।।

  392. RCM 2.40.6Open verse →

    सुनहु राम सबु कारन एहू। राजहि तुम पर बहुत सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु राम सबु कारन एहू। राजहि तुम पर बहुत सनेहू।।

  393. RCM 2.40.7Open verse →

    देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना। मागेउँ जो कछु मोहि सोहाना।

    अर्थ · Hindi

    देन कहेन्हि मोहि दुइ बरदाना। मागेउँ जो कछु मोहि सोहाना।

  394. RCM 2.40.8Open verse →

    सो सुनि भयउ भूप उर सोचू। छाड़ि न सकहिं तुम्हार सँकोचू।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुनि भयउ भूप उर सोचू। छाड़ि न सकहिं तुम्हार सँकोचू।।

  395. RCM 2.40.9Open verse →

    सुत सनेह इत बचनु उत संकट परेउ नरेसु।

    अर्थ · Hindi

    सुत सनेह इत बचनु उत संकट परेउ नरेसु।

  396. RCM 2.40.10Open verse →

    सकहु न आयसु धरहु सिर मेटहु कठिन कलेसु।।40।।

    अर्थ · Hindi

    सकहु न आयसु धरहु सिर मेटहु कठिन कलेसु।।40।।

  397. RCM 2.41.1Open verse →

    निधरक बैठि कहइ कटु बानी। सुनत कठिनता अति अकुलानी।।

    अर्थ · Hindi

    निधरक बैठि कहइ कटु बानी। सुनत कठिनता अति अकुलानी।।

  398. RCM 2.41.2Open verse →

    जीभ कमान बचन सर नाना। मनहुँ महिप मृदु लच्छ समाना।।

    अर्थ · Hindi

    जीभ कमान बचन सर नाना। मनहुँ महिप मृदु लच्छ समाना।।

  399. RCM 2.41.3Open verse →

    जनु कठोरपनु धरें सरीरू। सिखइ धनुषबिद्या बर बीरू।।

    अर्थ · Hindi

    जनु कठोरपनु धरें सरीरू। सिखइ धनुषबिद्या बर बीरू।।

  400. RCM 2.41.4Open verse →

    सब प्रसंगु रघुपतिहि सुनाई। बैठि मनहुँ तनु धरि निठुराई।।

    अर्थ · Hindi

    सब प्रसंगु रघुपतिहि सुनाई। बैठि मनहुँ तनु धरि निठुराई।।

  401. RCM 2.41.5Open verse →

    मन मुसकाइ भानुकुल भानु। रामु सहज आनंद निधानू।।

    अर्थ · Hindi

    मन मुसकाइ भानुकुल भानु। रामु सहज आनंद निधानू।।

  402. RCM 2.41.6Open verse →

    बोले बचन बिगत सब दूषन। मृदु मंजुल जनु बाग बिभूषन।।

    अर्थ · Hindi

    बोले बचन बिगत सब दूषन। मृदु मंजुल जनु बाग बिभूषन।।

  403. RCM 2.41.7Open verse →

    सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी।।

  404. RCM 2.41.8Open verse →

    तनय मातु पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा।।

    अर्थ · Hindi

    तनय मातु पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा।।

  405. RCM 2.41.9Open verse →

    मुनिगन मिलनु बिसेषि बन सबहि भाँति हित मोर।

    अर्थ · Hindi

    मुनिगन मिलनु बिसेषि बन सबहि भाँति हित मोर।

  406. RCM 2.41.10Open verse →

    तेहि महँ पितु आयसु बहुरि संमत जननी तोर।।41।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि महँ पितु आयसु बहुरि संमत जननी तोर।।41।।

  407. RCM 2.42.1Open verse →

    भरत प्रानप्रिय पावहिं राजू। बिधि सब बिधि मोहि सनमुख आजु।

    अर्थ · Hindi

    भरत प्रानप्रिय पावहिं राजू। बिधि सब बिधि मोहि सनमुख आजु।

  408. RCM 2.42.2Open verse →

    जों न जाउँ बन ऐसेहु काजा। प्रथम गनिअ मोहि मूढ़ समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    जों न जाउँ बन ऐसेहु काजा। प्रथम गनिअ मोहि मूढ़ समाजा।।

  409. RCM 2.42.3Open verse →

    सेवहिं अरँडु कलपतरु त्यागी। परिहरि अमृत लेहिं बिषु मागी।।

    अर्थ · Hindi

    सेवहिं अरँडु कलपतरु त्यागी। परिहरि अमृत लेहिं बिषु मागी।।

  410. RCM 2.42.4Open verse →

    तेउ न पाइ अस समउ चुकाहीं। देखु बिचारि मातु मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तेउ न पाइ अस समउ चुकाहीं। देखु बिचारि मातु मन माहीं।।

  411. RCM 2.42.5Open verse →

    अंब एक दुखु मोहि बिसेषी। निपट बिकल नरनायकु देखी।।

    अर्थ · Hindi

    अंब एक दुखु मोहि बिसेषी। निपट बिकल नरनायकु देखी।।

  412. RCM 2.42.6Open verse →

    थोरिहिं बात पितहि दुख भारी। होति प्रतीति न मोहि महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    थोरिहिं बात पितहि दुख भारी। होति प्रतीति न मोहि महतारी।।

  413. RCM 2.42.7Open verse →

    राउ धीर गुन उदधि अगाधू। भा मोहि ते कछु बड़ अपराधू।।

    अर्थ · Hindi

    राउ धीर गुन उदधि अगाधू। भा मोहि ते कछु बड़ अपराधू।।

  414. RCM 2.42.8Open verse →

    जातें मोहि न कहत कछु राऊ। मोरि सपथ तोहि कहु सतिभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जातें मोहि न कहत कछु राऊ। मोरि सपथ तोहि कहु सतिभाऊ।।

  415. RCM 2.42.9Open verse →

    सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल करि जान।

    अर्थ · Hindi

    सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल करि जान।

  416. RCM 2.42.10Open verse →

    चलइ जोंक जल बक्रगति जद्यपि सलिलु समान।।42।।

    अर्थ · Hindi

    चलइ जोंक जल बक्रगति जद्यपि सलिलु समान।।42।।

  417. RCM 2.43.1Open verse →

    रहसी रानि राम रुख पाई। बोली कपट सनेहु जनाई।।

    अर्थ · Hindi

    रहसी रानि राम रुख पाई। बोली कपट सनेहु जनाई।।

  418. RCM 2.43.2Open verse →

    सपथ तुम्हार भरत कै आना। हेतु न दूसर मै कछु जाना।।

    अर्थ · Hindi

    सपथ तुम्हार भरत कै आना। हेतु न दूसर मै कछु जाना।।

  419. RCM 2.43.3Open verse →

    तुम्ह अपराध जोगु नहिं ताता। जननी जनक बंधु सुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह अपराध जोगु नहिं ताता। जननी जनक बंधु सुखदाता।।

  420. RCM 2.43.4Open verse →

    राम सत्य सबु जो कछु कहहू। तुम्ह पितु मातु बचन रत अहहू।।

    अर्थ · Hindi

    राम सत्य सबु जो कछु कहहू। तुम्ह पितु मातु बचन रत अहहू।।

  421. RCM 2.43.5Open verse →

    पितहि बुझाइ कहहु बलि सोई। चौथेंपन जेहिं अजसु न होई।।

    अर्थ · Hindi

    पितहि बुझाइ कहहु बलि सोई। चौथेंपन जेहिं अजसु न होई।।

  422. RCM 2.43.6Open verse →

    तुम्ह सम सुअन सुकृत जेहिं दीन्हे। उचित न तासु निरादरु कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सम सुअन सुकृत जेहिं दीन्हे। उचित न तासु निरादरु कीन्हे।।

  423. RCM 2.43.7Open verse →

    लागहिं कुमुख बचन सुभ कैसे। मगहँ गयादिक तीरथ जैसे।।

    अर्थ · Hindi

    लागहिं कुमुख बचन सुभ कैसे। मगहँ गयादिक तीरथ जैसे।।

  424. RCM 2.43.8Open verse →

    रामहि मातु बचन सब भाए। जिमि सुरसरि गत सलिल सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि मातु बचन सब भाए। जिमि सुरसरि गत सलिल सुहाए।।

  425. RCM 2.43.9Open verse →

    गइ मुरुछा रामहि सुमिरि नृप फिरि करवट लीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    गइ मुरुछा रामहि सुमिरि नृप फिरि करवट लीन्ह।

  426. RCM 2.43.10Open verse →

    सचिव राम आगमन कहि बिनय समय सम कीन्ह।।43।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव राम आगमन कहि बिनय समय सम कीन्ह।।43।।

  427. RCM 2.44.1Open verse →

    अवनिप अकनि रामु पगु धारे। धरि धीरजु तब नयन उघारे।।

    अर्थ · Hindi

    अवनिप अकनि रामु पगु धारे। धरि धीरजु तब नयन उघारे।।

  428. RCM 2.44.2Open verse →

    सचिवँ सँभारि राउ बैठारे। चरन परत नृप रामु निहारे।।

    अर्थ · Hindi

    सचिवँ सँभारि राउ बैठारे। चरन परत नृप रामु निहारे।।

  429. RCM 2.44.3Open verse →

    लिए सनेह बिकल उर लाई। गै मनि मनहुँ फनिक फिरि पाई।।

    अर्थ · Hindi

    लिए सनेह बिकल उर लाई। गै मनि मनहुँ फनिक फिरि पाई।।

  430. RCM 2.44.4Open verse →

    रामहि चितइ रहेउ नरनाहू। चला बिलोचन बारि प्रबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि चितइ रहेउ नरनाहू। चला बिलोचन बारि प्रबाहू।।

  431. RCM 2.44.5Open verse →

    सोक बिबस कछु कहै न पारा। हृदयँ लगावत बारहिं बारा।।

    अर्थ · Hindi

    सोक बिबस कछु कहै न पारा। हृदयँ लगावत बारहिं बारा।।

  432. RCM 2.44.6Open verse →

    बिधिहि मनाव राउ मन माहीं। जेहिं रघुनाथ न कानन जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिधिहि मनाव राउ मन माहीं। जेहिं रघुनाथ न कानन जाहीं।।

  433. RCM 2.44.7Open verse →

    सुमिरि महेसहि कहइ निहोरी। बिनती सुनहु सदासिव मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि महेसहि कहइ निहोरी। बिनती सुनहु सदासिव मोरी।।

  434. RCM 2.44.8Open verse →

    आसुतोष तुम्ह अवढर दानी। आरति हरहु दीन जनु जानी।।

    अर्थ · Hindi

    आसुतोष तुम्ह अवढर दानी। आरति हरहु दीन जनु जानी।।

  435. RCM 2.44.9Open verse →

    तुम्ह प्रेरक सब के हृदयँ सो मति रामहि देहु।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह प्रेरक सब के हृदयँ सो मति रामहि देहु।

  436. RCM 2.44.10Open verse →

    बचनु मोर तजि रहहि घर परिहरि सीलु सनेहु।।44।।

    अर्थ · Hindi

    बचनु मोर तजि रहहि घर परिहरि सीलु सनेहु।।44।।

  437. RCM 2.45.1Open verse →

    अजसु होउ जग सुजसु नसाऊ। नरक परौ बरु सुरपुरु जाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अजसु होउ जग सुजसु नसाऊ। नरक परौ बरु सुरपुरु जाऊ।।

  438. RCM 2.45.2Open verse →

    सब दुख दुसह सहावहु मोही। लोचन ओट रामु जनि होंही।।

    अर्थ · Hindi

    सब दुख दुसह सहावहु मोही। लोचन ओट रामु जनि होंही।।

  439. RCM 2.45.3Open verse →

    अस मन गुनइ राउ नहिं बोला। पीपर पात सरिस मनु डोला।।

    अर्थ · Hindi

    अस मन गुनइ राउ नहिं बोला। पीपर पात सरिस मनु डोला।।

  440. RCM 2.45.4Open verse →

    रघुपति पितहि प्रेमबस जानी। पुनि कछु कहिहि मातु अनुमानी।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति पितहि प्रेमबस जानी। पुनि कछु कहिहि मातु अनुमानी।।

  441. RCM 2.45.5Open verse →

    देस काल अवसर अनुसारी। बोले बचन बिनीत बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    देस काल अवसर अनुसारी। बोले बचन बिनीत बिचारी।।

  442. RCM 2.45.6Open verse →

    तात कहउँ कछु करउँ ढिठाई। अनुचितु छमब जानि लरिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    तात कहउँ कछु करउँ ढिठाई। अनुचितु छमब जानि लरिकाई।।

  443. RCM 2.45.7Open verse →

    अति लघु बात लागि दुखु पावा। काहुँ न मोहि कहि प्रथम जनावा।।

    अर्थ · Hindi

    अति लघु बात लागि दुखु पावा। काहुँ न मोहि कहि प्रथम जनावा।।

  444. RCM 2.45.8Open verse →

    देखि गोसाइँहि पूँछिउँ माता। सुनि प्रसंगु भए सीतल गाता।।

    अर्थ · Hindi

    देखि गोसाइँहि पूँछिउँ माता। सुनि प्रसंगु भए सीतल गाता।।

  445. RCM 2.45.9Open verse →

    मंगल समय सनेह बस सोच परिहरिअ तात।

    अर्थ · Hindi

    मंगल समय सनेह बस सोच परिहरिअ तात।

  446. RCM 2.45.10Open verse →

    आयसु देइअ हरषि हियँ कहि पुलके प्रभु गात।।45।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु देइअ हरषि हियँ कहि पुलके प्रभु गात।।45।।

  447. RCM 2.46.1Open verse →

    धन्य जनमु जगतीतल तासू। पितहि प्रमोदु चरित सुनि जासू।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य जनमु जगतीतल तासू। पितहि प्रमोदु चरित सुनि जासू।।

  448. RCM 2.46.2Open verse →

    चारि पदारथ करतल ताकें। प्रिय पितु मातु प्रान सम जाकें।।

    अर्थ · Hindi

    चारि पदारथ करतल ताकें। प्रिय पितु मातु प्रान सम जाकें।।

  449. RCM 2.46.3Open verse →

    आयसु पालि जनम फलु पाई। ऐहउँ बेगिहिं होउ रजाई।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु पालि जनम फलु पाई। ऐहउँ बेगिहिं होउ रजाई।।

  450. RCM 2.46.4Open verse →

    बिदा मातु सन आवउँ मागी। चलिहउँ बनहि बहुरि पग लागी।।

    अर्थ · Hindi

    बिदा मातु सन आवउँ मागी। चलिहउँ बनहि बहुरि पग लागी।।

  451. RCM 2.46.5Open verse →

    अस कहि राम गवनु तब कीन्हा। भूप सोक बसु उतरु न दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि राम गवनु तब कीन्हा। भूप सोक बसु उतरु न दीन्हा।।

  452. RCM 2.46.6Open verse →

    नगर ब्यापि गइ बात सुतीछी। छुअत चढ़ी जनु सब तन बीछी।।

    अर्थ · Hindi

    नगर ब्यापि गइ बात सुतीछी। छुअत चढ़ी जनु सब तन बीछी।।

  453. RCM 2.46.7Open verse →

    सुनि भए बिकल सकल नर नारी। बेलि बिटप जिमि देखि दवारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि भए बिकल सकल नर नारी। बेलि बिटप जिमि देखि दवारी।।

  454. RCM 2.46.8Open verse →

    जो जहँ सुनइ धुनइ सिरु सोई। बड़ बिषादु नहिं धीरजु होई।।

    अर्थ · Hindi

    जो जहँ सुनइ धुनइ सिरु सोई। बड़ बिषादु नहिं धीरजु होई।।

  455. RCM 2.46.9Open verse →

    मुख सुखाहिं लोचन स्त्रवहि सोकु न हृदयँ समाइ।

    अर्थ · Hindi

    मुख सुखाहिं लोचन स्त्रवहि सोकु न हृदयँ समाइ।

  456. RCM 2.46.10Open verse →

    मनहुँ करुन रस कटकई उतरी अवध बजाइ।।46।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ करुन रस कटकई उतरी अवध बजाइ।।46।।

  457. RCM 2.47.1Open verse →

    मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी। जहँ तहँ देहिं कैकेइहि गारी।।

    अर्थ · Hindi

    मिलेहि माझ बिधि बात बेगारी। जहँ तहँ देहिं कैकेइहि गारी।।

  458. RCM 2.47.2Open verse →

    एहि पापिनिहि बूझि का परेऊ। छाइ भवन पर पावकु धरेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    एहि पापिनिहि बूझि का परेऊ। छाइ भवन पर पावकु धरेऊ।।

  459. RCM 2.47.3Open verse →

    निज कर नयन काढ़ि चह दीखा। डारि सुधा बिषु चाहत चीखा।।

    अर्थ · Hindi

    निज कर नयन काढ़ि चह दीखा। डारि सुधा बिषु चाहत चीखा।।

  460. RCM 2.47.4Open verse →

    कुटिल कठोर कुबुद्धि अभागी। भइ रघुबंस बेनु बन आगी।।

    अर्थ · Hindi

    कुटिल कठोर कुबुद्धि अभागी। भइ रघुबंस बेनु बन आगी।।

  461. RCM 2.47.5Open verse →

    पालव बैठि पेड़ु एहिं काटा। सुख महुँ सोक ठाटु धरि ठाटा।।

    अर्थ · Hindi

    पालव बैठि पेड़ु एहिं काटा। सुख महुँ सोक ठाटु धरि ठाटा।।

  462. RCM 2.47.6Open verse →

    सदा रामु एहि प्रान समाना। कारन कवन कुटिलपनु ठाना।।

    अर्थ · Hindi

    सदा रामु एहि प्रान समाना। कारन कवन कुटिलपनु ठाना।।

  463. RCM 2.47.7Open verse →

    सत्य कहहिं कबि नारि सुभाऊ। सब बिधि अगहु अगाध दुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य कहहिं कबि नारि सुभाऊ। सब बिधि अगहु अगाध दुराऊ।।

  464. RCM 2.47.8Open verse →

    निज प्रतिबिंबु बरुकु गहि जाई। जानि न जाइ नारि गति भाई।।

    अर्थ · Hindi

    निज प्रतिबिंबु बरुकु गहि जाई। जानि न जाइ नारि गति भाई।।

  465. RCM 2.47.9Open verse →

    काह न पावकु जारि सक का न समुद्र समाइ।

    अर्थ · Hindi

    काह न पावकु जारि सक का न समुद्र समाइ।

  466. RCM 2.47.10Open verse →

    का न करै अबला प्रबल केहि जग कालु न खाइ।।47।।

    अर्थ · Hindi

    का न करै अबला प्रबल केहि जग कालु न खाइ।।47।।

  467. RCM 2.48.1Open verse →

    का सुनाइ बिधि काह सुनावा। का देखाइ चह काह देखावा।।

    अर्थ · Hindi

    का सुनाइ बिधि काह सुनावा। का देखाइ चह काह देखावा।।

  468. RCM 2.48.2Open verse →

    एक कहहिं भल भूप न कीन्हा। बरु बिचारि नहिं कुमतिहि दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    एक कहहिं भल भूप न कीन्हा। बरु बिचारि नहिं कुमतिहि दीन्हा।।

  469. RCM 2.48.3Open verse →

    जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु। अबला बिबस ग्यानु गुनु गा जनु।।

    अर्थ · Hindi

    जो हठि भयउ सकल दुख भाजनु। अबला बिबस ग्यानु गुनु गा जनु।।

  470. RCM 2.48.4Open verse →

    एक धरम परमिति पहिचाने। नृपहि दोसु नहिं देहिं सयाने।।

    अर्थ · Hindi

    एक धरम परमिति पहिचाने। नृपहि दोसु नहिं देहिं सयाने।।

  471. RCM 2.48.5Open verse →

    सिबि दधीचि हरिचंद कहानी। एक एक सन कहहिं बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सिबि दधीचि हरिचंद कहानी। एक एक सन कहहिं बखानी।।

  472. RCM 2.48.6Open verse →

    एक भरत कर संमत कहहीं। एक उदास भायँ सुनि रहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एक भरत कर संमत कहहीं। एक उदास भायँ सुनि रहहीं।।

  473. RCM 2.48.7Open verse →

    कान मूदि कर रद गहि जीहा। एक कहहिं यह बात अलीहा।।

    अर्थ · Hindi

    कान मूदि कर रद गहि जीहा। एक कहहिं यह बात अलीहा।।

  474. RCM 2.48.8Open verse →

    सुकृत जाहिं अस कहत तुम्हारे। रामु भरत कहुँ प्रानपिआरे।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृत जाहिं अस कहत तुम्हारे। रामु भरत कहुँ प्रानपिआरे।।

  475. RCM 2.48.9Open verse →

    चंदु चवै बरु अनल कन सुधा होइ बिषतूल।

    अर्थ · Hindi

    चंदु चवै बरु अनल कन सुधा होइ बिषतूल।

  476. RCM 2.48.10Open verse →

    सपनेहुँ कबहुँ न करहिं किछु भरतु राम प्रतिकूल।।48।।

    अर्थ · Hindi

    सपनेहुँ कबहुँ न करहिं किछु भरतु राम प्रतिकूल।।48।।

  477. RCM 2.49.1Open verse →

    एक बिधातहिं दूषनु देंहीं। सुधा देखाइ दीन्ह बिषु जेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एक बिधातहिं दूषनु देंहीं। सुधा देखाइ दीन्ह बिषु जेहीं।।

  478. RCM 2.49.2Open verse →

    खरभरु नगर सोचु सब काहू। दुसह दाहु उर मिटा उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    खरभरु नगर सोचु सब काहू। दुसह दाहु उर मिटा उछाहू।।

  479. RCM 2.49.3Open verse →

    बिप्रबधू कुलमान्य जठेरी। जे प्रिय परम कैकेई केरी।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्रबधू कुलमान्य जठेरी। जे प्रिय परम कैकेई केरी।।

  480. RCM 2.49.4Open verse →

    लगीं देन सिख सीलु सराही। बचन बानसम लागहिं ताही।।

    अर्थ · Hindi

    लगीं देन सिख सीलु सराही। बचन बानसम लागहिं ताही।।

  481. RCM 2.49.5Open verse →

    भरतु न मोहि प्रिय राम समाना। सदा कहहु यहु सबु जगु जाना।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु न मोहि प्रिय राम समाना। सदा कहहु यहु सबु जगु जाना।।

  482. RCM 2.49.6Open verse →

    करहु राम पर सहज सनेहू। केहिं अपराध आजु बनु देहू।।

    अर्थ · Hindi

    करहु राम पर सहज सनेहू। केहिं अपराध आजु बनु देहू।।

  483. RCM 2.49.7Open verse →

    कबहुँ न कियहु सवति आरेसू। प्रीति प्रतीति जान सबु देसू।।

    अर्थ · Hindi

    कबहुँ न कियहु सवति आरेसू। प्रीति प्रतीति जान सबु देसू।।

  484. RCM 2.49.8Open verse →

    कौसल्याँ अब काह बिगारा। तुम्ह जेहि लागि बज्र पुर पारा।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्याँ अब काह बिगारा। तुम्ह जेहि लागि बज्र पुर पारा।।

  485. RCM 2.49.9Open verse →

    सीय कि पिय सँगु परिहरिहि लखनु कि रहिहहिं धाम।

    अर्थ · Hindi

    सीय कि पिय सँगु परिहरिहि लखनु कि रहिहहिं धाम।

  486. RCM 2.49.10Open verse →

    राजु कि भूँजब भरत पुर नृपु कि जिइहि बिनु राम।।49।।

    अर्थ · Hindi

    राजु कि भूँजब भरत पुर नृपु कि जिइहि बिनु राम।।49।।

  487. RCM 2.50.1Open verse →

    अस बिचारि उर छाड़हु कोहू। सोक कलंक कोठि जनि होहू।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि उर छाड़हु कोहू। सोक कलंक कोठि जनि होहू।।

  488. RCM 2.50.2Open verse →

    भरतहि अवसि देहु जुबराजू। कानन काह राम कर काजू।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि अवसि देहु जुबराजू। कानन काह राम कर काजू।।

  489. RCM 2.50.3Open verse →

    नाहिन रामु राज के भूखे। धरम धुरीन बिषय रस रूखे।।

    अर्थ · Hindi

    नाहिन रामु राज के भूखे। धरम धुरीन बिषय रस रूखे।।

  490. RCM 2.50.4Open verse →

    गुर गृह बसहुँ रामु तजि गेहू। नृप सन अस बरु दूसर लेहू।।

    अर्थ · Hindi

    गुर गृह बसहुँ रामु तजि गेहू। नृप सन अस बरु दूसर लेहू।।

  491. RCM 2.50.5Open verse →

    जौं नहिं लगिहहु कहें हमारे। नहिं लागिहि कछु हाथ तुम्हारे।।

    अर्थ · Hindi

    जौं नहिं लगिहहु कहें हमारे। नहिं लागिहि कछु हाथ तुम्हारे।।

  492. RCM 2.50.6Open verse →

    जौं परिहास कीन्हि कछु होई। तौ कहि प्रगट जनावहु सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं परिहास कीन्हि कछु होई। तौ कहि प्रगट जनावहु सोई।।

  493. RCM 2.50.7Open verse →

    राम सरिस सुत कानन जोगू। काह कहिहि सुनि तुम्ह कहुँ लोगू।।

    अर्थ · Hindi

    राम सरिस सुत कानन जोगू। काह कहिहि सुनि तुम्ह कहुँ लोगू।।

  494. RCM 2.50.8Open verse →

    उठहु बेगि सोइ करहु उपाई। जेहि बिधि सोकु कलंकु नसाई।।

    अर्थ · Hindi

    उठहु बेगि सोइ करहु उपाई। जेहि बिधि सोकु कलंकु नसाई।।

  495. RCM 2.51.1Open verse →

    उतरु न देइ दुसह रिस रूखी। मृगिन्ह चितव जनु बाघिनि भूखी।।

    अर्थ · Hindi

    उतरु न देइ दुसह रिस रूखी। मृगिन्ह चितव जनु बाघिनि भूखी।।

  496. RCM 2.51.2Open verse →

    ब्याधि असाधि जानि तिन्ह त्यागी। चलीं कहत मतिमंद अभागी।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याधि असाधि जानि तिन्ह त्यागी। चलीं कहत मतिमंद अभागी।।

  497. RCM 2.51.3Open verse →

    राजु करत यह दैअँ बिगोई। कीन्हेसि अस जस करइ न कोई।।

    अर्थ · Hindi

    राजु करत यह दैअँ बिगोई। कीन्हेसि अस जस करइ न कोई।।

  498. RCM 2.51.4Open verse →

    एहि बिधि बिलपहिं पुर नर नारीं। देहिं कुचालिहि कोटिक गारीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि बिलपहिं पुर नर नारीं। देहिं कुचालिहि कोटिक गारीं।।

  499. RCM 2.51.5Open verse →

    जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा।।

    अर्थ · Hindi

    जरहिं बिषम जर लेहिं उसासा। कवनि राम बिनु जीवन आसा।।

  500. RCM 2.51.6Open verse →

    बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी। जनु जलचर गन सूखत पानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिपुल बियोग प्रजा अकुलानी। जनु जलचर गन सूखत पानी।।

  501. RCM 2.51.7Open verse →

    अति बिषाद बस लोग लोगाई। गए मातु पहिं रामु गोसाई।।

    अर्थ · Hindi

    अति बिषाद बस लोग लोगाई। गए मातु पहिं रामु गोसाई।।

  502. RCM 2.51.8Open verse →

    मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मुख प्रसन्न चित चौगुन चाऊ। मिटा सोचु जनि राखै राऊ।।

  503. RCM 2.51.9Open verse →

    नव गयंदु रघुबीर मनु राजु अलान समान।

    अर्थ · Hindi

    नव गयंदु रघुबीर मनु राजु अलान समान।

  504. RCM 2.51.10Open verse →

    छूट जानि बन गवनु सुनि उर अनंदु अधिकान।।51।।

    अर्थ · Hindi

    छूट जानि बन गवनु सुनि उर अनंदु अधिकान।।51।।

  505. RCM 2.52.1Open verse →

    रघुकुलतिलक जोरि दोउ हाथा। मुदित मातु पद नायउ माथा।।

    अर्थ · Hindi

    रघुकुलतिलक जोरि दोउ हाथा। मुदित मातु पद नायउ माथा।।

  506. RCM 2.52.2Open verse →

    दीन्हि असीस लाइ उर लीन्हे। भूषन बसन निछावरि कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    दीन्हि असीस लाइ उर लीन्हे। भूषन बसन निछावरि कीन्हे।।

  507. RCM 2.52.3Open verse →

    बार बार मुख चुंबति माता। नयन नेह जलु पुलकित गाता।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार मुख चुंबति माता। नयन नेह जलु पुलकित गाता।।

  508. RCM 2.52.4Open verse →

    गोद राखि पुनि हृदयँ लगाए। स्त्रवत प्रेनरस पयद सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    गोद राखि पुनि हृदयँ लगाए। स्त्रवत प्रेनरस पयद सुहाए।।

  509. RCM 2.52.5Open verse →

    प्रेमु प्रमोदु न कछु कहि जाई। रंक धनद पदबी जनु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेमु प्रमोदु न कछु कहि जाई। रंक धनद पदबी जनु पाई।।

  510. RCM 2.52.6Open verse →

    सादर सुंदर बदनु निहारी। बोली मधुर बचन महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सुंदर बदनु निहारी। बोली मधुर बचन महतारी।।

  511. RCM 2.52.7Open verse →

    कहहु तात जननी बलिहारी। कबहिं लगन मुद मंगलकारी।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु तात जननी बलिहारी। कबहिं लगन मुद मंगलकारी।।

  512. RCM 2.52.8Open verse →

    सुकृत सील सुख सीवँ सुहाई। जनम लाभ कइ अवधि अघाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृत सील सुख सीवँ सुहाई। जनम लाभ कइ अवधि अघाई।।

  513. RCM 2.52.9Open verse →

    जेहि चाहत नर नारि सब अति आरत एहि भाँति।

    अर्थ · Hindi

    जेहि चाहत नर नारि सब अति आरत एहि भाँति।

  514. RCM 2.52.10Open verse →

    जिमि चातक चातकि तृषित बृष्टि सरद रितु स्वाति।।52।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि चातक चातकि तृषित बृष्टि सरद रितु स्वाति।।52।।

  515. RCM 2.53.1Open verse →

    तात जाउँ बलि बेगि नहाहू। जो मन भाव मधुर कछु खाहू।।

    अर्थ · Hindi

    तात जाउँ बलि बेगि नहाहू। जो मन भाव मधुर कछु खाहू।।

  516. RCM 2.53.2Open verse →

    पितु समीप तब जाएहु भैआ। भइ बड़ि बार जाइ बलि मैआ।।

    अर्थ · Hindi

    पितु समीप तब जाएहु भैआ। भइ बड़ि बार जाइ बलि मैआ।।

  517. RCM 2.53.3Open verse →

    मातु बचन सुनि अति अनुकूला। जनु सनेह सुरतरु के फूला।।

    अर्थ · Hindi

    मातु बचन सुनि अति अनुकूला। जनु सनेह सुरतरु के फूला।।

  518. RCM 2.53.4Open verse →

    सुख मकरंद भरे श्रियमूला। निरखि राम मनु भवरुँ न भूला।।

    अर्थ · Hindi

    सुख मकरंद भरे श्रियमूला। निरखि राम मनु भवरुँ न भूला।।

  519. RCM 2.53.5Open verse →

    धरम धुरीन धरम गति जानी। कहेउ मातु सन अति मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    धरम धुरीन धरम गति जानी। कहेउ मातु सन अति मृदु बानी।।

  520. RCM 2.53.6Open verse →

    पिताँ दीन्ह मोहि कानन राजू। जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू।।

    अर्थ · Hindi

    पिताँ दीन्ह मोहि कानन राजू। जहँ सब भाँति मोर बड़ काजू।।

  521. RCM 2.53.7Open verse →

    आयसु देहि मुदित मन माता। जेहिं मुद मंगल कानन जाता।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु देहि मुदित मन माता। जेहिं मुद मंगल कानन जाता।।

  522. RCM 2.53.8Open verse →

    जनि सनेह बस डरपसि भोरें। आनँदु अंब अनुग्रह तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    जनि सनेह बस डरपसि भोरें। आनँदु अंब अनुग्रह तोरें।।

  523. RCM 2.53.9Open verse →

    बरष चारिदस बिपिन बसि करि पितु बचन प्रमान।

    अर्थ · Hindi

    बरष चारिदस बिपिन बसि करि पितु बचन प्रमान।

  524. RCM 2.53.10Open verse →

    आइ पाय पुनि देखिहउँ मनु जनि करसि मलान।।53।।

    अर्थ · Hindi

    आइ पाय पुनि देखिहउँ मनु जनि करसि मलान।।53।।

  525. RCM 2.54.1Open verse →

    बचन बिनीत मधुर रघुबर के। सर सम लगे मातु उर करके।।

    अर्थ · Hindi

    बचन बिनीत मधुर रघुबर के। सर सम लगे मातु उर करके।।

  526. RCM 2.54.2Open verse →

    सहमि सूखि सुनि सीतलि बानी। जिमि जवास परें पावस पानी।।

    अर्थ · Hindi

    सहमि सूखि सुनि सीतलि बानी। जिमि जवास परें पावस पानी।।

  527. RCM 2.54.3Open verse →

    कहि न जाइ कछु हृदय बिषादू। मनहुँ मृगी सुनि केहरि नादू।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न जाइ कछु हृदय बिषादू। मनहुँ मृगी सुनि केहरि नादू।।

  528. RCM 2.54.4Open verse →

    नयन सजल तन थर थर काँपी। माजहि खाइ मीन जनु मापी।।

    अर्थ · Hindi

    नयन सजल तन थर थर काँपी। माजहि खाइ मीन जनु मापी।।

  529. RCM 2.54.5Open verse →

    धरि धीरजु सुत बदनु निहारी। गदगद बचन कहति महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    धरि धीरजु सुत बदनु निहारी। गदगद बचन कहति महतारी।।

  530. RCM 2.54.6Open verse →

    तात पितहि तुम्ह प्रानपिआरे। देखि मुदित नित चरित तुम्हारे।।

    अर्थ · Hindi

    तात पितहि तुम्ह प्रानपिआरे। देखि मुदित नित चरित तुम्हारे।।

  531. RCM 2.54.7Open verse →

    राजु देन कहुँ सुभ दिन साधा। कहेउ जान बन केहिं अपराधा।।

    अर्थ · Hindi

    राजु देन कहुँ सुभ दिन साधा। कहेउ जान बन केहिं अपराधा।।

  532. RCM 2.54.8Open verse →

    तात सुनावहु मोहि निदानू। को दिनकर कुल भयउ कृसानू।।

    अर्थ · Hindi

    तात सुनावहु मोहि निदानू। को दिनकर कुल भयउ कृसानू।।

  533. RCM 2.54.9Open verse →

    निरखि राम रुख सचिवसुत कारनु कहेउ बुझाइ।

    अर्थ · Hindi

    निरखि राम रुख सचिवसुत कारनु कहेउ बुझाइ।

  534. RCM 2.54.10Open verse →

    सुनि प्रसंगु रहि मूक जिमि दसा बरनि नहिं जाइ।।54।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रसंगु रहि मूक जिमि दसा बरनि नहिं जाइ।।54।।

  535. RCM 2.55.1Open verse →

    राखि न सकइ न कहि सक जाहू। दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    राखि न सकइ न कहि सक जाहू। दुहूँ भाँति उर दारुन दाहू।।

  536. RCM 2.55.2Open verse →

    लिखत सुधाकर गा लिखि राहू। बिधि गति बाम सदा सब काहू।।

    अर्थ · Hindi

    लिखत सुधाकर गा लिखि राहू। बिधि गति बाम सदा सब काहू।।

  537. RCM 2.55.3Open verse →

    धरम सनेह उभयँ मति घेरी। भइ गति साँप छुछुंदरि केरी।।

    अर्थ · Hindi

    धरम सनेह उभयँ मति घेरी। भइ गति साँप छुछुंदरि केरी।।

  538. RCM 2.55.4Open verse →

    राखउँ सुतहि करउँ अनुरोधू। धरमु जाइ अरु बंधु बिरोधू।।

    अर्थ · Hindi

    राखउँ सुतहि करउँ अनुरोधू। धरमु जाइ अरु बंधु बिरोधू।।

  539. RCM 2.55.5Open verse →

    कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी। संकट सोच बिबस भइ रानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ जान बन तौ बड़ि हानी। संकट सोच बिबस भइ रानी।।

  540. RCM 2.55.6Open verse →

    बहुरि समुझि तिय धरमु सयानी। रामु भरतु दोउ सुत सम जानी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि समुझि तिय धरमु सयानी। रामु भरतु दोउ सुत सम जानी।।

  541. RCM 2.55.7Open verse →

    सरल सुभाउ राम महतारी। बोली बचन धीर धरि भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सरल सुभाउ राम महतारी। बोली बचन धीर धरि भारी।।

  542. RCM 2.55.8Open verse →

    तात जाउँ बलि कीन्हेहु नीका। पितु आयसु सब धरमक टीका।।

    अर्थ · Hindi

    तात जाउँ बलि कीन्हेहु नीका। पितु आयसु सब धरमक टीका।।

  543. RCM 2.55.9Open verse →

    राजु देन कहि दीन्ह बनु मोहि न सो दुख लेसु।

    अर्थ · Hindi

    राजु देन कहि दीन्ह बनु मोहि न सो दुख लेसु।

  544. RCM 2.55.10Open verse →

    तुम्ह बिनु भरतहि भूपतिहि प्रजहि प्रचंड कलेसु।।55।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह बिनु भरतहि भूपतिहि प्रजहि प्रचंड कलेसु।।55।।

  545. RCM 2.56.1Open verse →

    जौं केवल पितु आयसु ताता। तौ जनि जाहु जानि बड़ि माता।।

    अर्थ · Hindi

    जौं केवल पितु आयसु ताता। तौ जनि जाहु जानि बड़ि माता।।

  546. RCM 2.56.2Open verse →

    जौं पितु मातु कहेउ बन जाना। तौं कानन सत अवध समाना।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पितु मातु कहेउ बन जाना। तौं कानन सत अवध समाना।।

  547. RCM 2.56.3Open verse →

    पितु बनदेव मातु बनदेवी। खग मृग चरन सरोरुह सेवी।।

    अर्थ · Hindi

    पितु बनदेव मातु बनदेवी। खग मृग चरन सरोरुह सेवी।।

  548. RCM 2.56.4Open verse →

    अंतहुँ उचित नृपहि बनबासू। बय बिलोकि हियँ होइ हराँसू।।

    अर्थ · Hindi

    अंतहुँ उचित नृपहि बनबासू। बय बिलोकि हियँ होइ हराँसू।।

  549. RCM 2.56.5Open verse →

    बड़भागी बनु अवध अभागी। जो रघुबंसतिलक तुम्ह त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    बड़भागी बनु अवध अभागी। जो रघुबंसतिलक तुम्ह त्यागी।।

  550. RCM 2.56.6Open verse →

    जौं सुत कहौ संग मोहि लेहू। तुम्हरे हृदयँ होइ संदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं सुत कहौ संग मोहि लेहू। तुम्हरे हृदयँ होइ संदेहू।।

  551. RCM 2.56.7Open verse →

    पूत परम प्रिय तुम्ह सबही के। प्रान प्रान के जीवन जी के।।

    अर्थ · Hindi

    पूत परम प्रिय तुम्ह सबही के। प्रान प्रान के जीवन जी के।।

  552. RCM 2.56.8Open verse →

    ते तुम्ह कहहु मातु बन जाऊँ। मैं सुनि बचन बैठि पछिताऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    ते तुम्ह कहहु मातु बन जाऊँ। मैं सुनि बचन बैठि पछिताऊँ।।

  553. RCM 2.56.9Open verse →

    यह बिचारि नहिं करउँ हठ झूठ सनेहु बढ़ाइ।

    अर्थ · Hindi

    यह बिचारि नहिं करउँ हठ झूठ सनेहु बढ़ाइ।

  554. RCM 2.56.10Open verse →

    मानि मातु कर नात बलि सुरति बिसरि जनि जाइ।।56।।

    अर्थ · Hindi

    मानि मातु कर नात बलि सुरति बिसरि जनि जाइ।।56।।

  555. RCM 2.57.1Open verse →

    देव पितर सब तुन्हहि गोसाई। राखहुँ पलक नयन की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    देव पितर सब तुन्हहि गोसाई। राखहुँ पलक नयन की नाई।।

  556. RCM 2.57.2Open verse →

    अवधि अंबु प्रिय परिजन मीना। तुम्ह करुनाकर धरम धुरीना।।

    अर्थ · Hindi

    अवधि अंबु प्रिय परिजन मीना। तुम्ह करुनाकर धरम धुरीना।।

  557. RCM 2.57.3Open verse →

    अस बिचारि सोइ करहु उपाई। सबहि जिअत जेहिं भेंटेहु आई।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि सोइ करहु उपाई। सबहि जिअत जेहिं भेंटेहु आई।।

  558. RCM 2.57.4Open verse →

    जाहु सुखेन बनहि बलि जाऊँ। करि अनाथ जन परिजन गाऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    जाहु सुखेन बनहि बलि जाऊँ। करि अनाथ जन परिजन गाऊँ।।

  559. RCM 2.57.5Open verse →

    सब कर आजु सुकृत फल बीता। भयउ कराल कालु बिपरीता।।

    अर्थ · Hindi

    सब कर आजु सुकृत फल बीता। भयउ कराल कालु बिपरीता।।

  560. RCM 2.57.6Open verse →

    बहुबिधि बिलपि चरन लपटानी। परम अभागिनि आपुहि जानी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुबिधि बिलपि चरन लपटानी। परम अभागिनि आपुहि जानी।।

  561. RCM 2.57.7Open verse →

    दारुन दुसह दाहु उर ब्यापा। बरनि न जाहिं बिलाप कलापा।।

    अर्थ · Hindi

    दारुन दुसह दाहु उर ब्यापा। बरनि न जाहिं बिलाप कलापा।।

  562. RCM 2.57.8Open verse →

    राम उठाइ मातु उर लाई। कहि मृदु बचन बहुरि समुझाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम उठाइ मातु उर लाई। कहि मृदु बचन बहुरि समुझाई।।

  563. RCM 2.57.9Open verse →

    समाचार तेहि समय सुनि सीय उठी अकुलाइ।

    अर्थ · Hindi

    समाचार तेहि समय सुनि सीय उठी अकुलाइ।

  564. RCM 2.57.10Open verse →

    जाइ सासु पद कमल जुग बंदि बैठि सिरु नाइ।।57।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ सासु पद कमल जुग बंदि बैठि सिरु नाइ।।57।।

  565. RCM 2.58.1Open verse →

    दीन्हि असीस सासु मृदु बानी। अति सुकुमारि देखि अकुलानी।।

    अर्थ · Hindi

    दीन्हि असीस सासु मृदु बानी। अति सुकुमारि देखि अकुलानी।।

  566. RCM 2.58.2Open verse →

    बैठि नमितमुख सोचति सीता। रूप रासि पति प्रेम पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    बैठि नमितमुख सोचति सीता। रूप रासि पति प्रेम पुनीता।।

  567. RCM 2.58.3Open verse →

    चलन चहत बन जीवननाथू। केहि सुकृती सन होइहि साथू।।

    अर्थ · Hindi

    चलन चहत बन जीवननाथू। केहि सुकृती सन होइहि साथू।।

  568. RCM 2.58.4Open verse →

    की तनु प्रान कि केवल प्राना। बिधि करतबु कछु जाइ न जाना।।

    अर्थ · Hindi

    की तनु प्रान कि केवल प्राना। बिधि करतबु कछु जाइ न जाना।।

  569. RCM 2.58.5Open verse →

    चारु चरन नख लेखति धरनी। नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    चारु चरन नख लेखति धरनी। नूपुर मुखर मधुर कबि बरनी।।

  570. RCM 2.58.6Open verse →

    मनहुँ प्रेम बस बिनती करहीं। हमहि सीय पद जनि परिहरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ प्रेम बस बिनती करहीं। हमहि सीय पद जनि परिहरहीं।।

  571. RCM 2.58.7Open verse →

    मंजु बिलोचन मोचति बारी। बोली देखि राम महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    मंजु बिलोचन मोचति बारी। बोली देखि राम महतारी।।

  572. RCM 2.58.8Open verse →

    तात सुनहु सिय अति सुकुमारी। सासु ससुर परिजनहि पिआरी।।

    अर्थ · Hindi

    तात सुनहु सिय अति सुकुमारी। सासु ससुर परिजनहि पिआरी।।

  573. RCM 2.58.9Open verse →

    पिता जनक भूपाल मनि ससुर भानुकुल भानु।

    अर्थ · Hindi

    पिता जनक भूपाल मनि ससुर भानुकुल भानु।

  574. RCM 2.58.10Open verse →

    पति रबिकुल कैरव बिपिन बिधु गुन रूप निधानु।।58।।

    अर्थ · Hindi

    पति रबिकुल कैरव बिपिन बिधु गुन रूप निधानु।।58।।

  575. RCM 2.59.1Open verse →

    मैं पुनि पुत्रबधू प्रिय पाई। रूप रासि गुन सील सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    मैं पुनि पुत्रबधू प्रिय पाई। रूप रासि गुन सील सुहाई।।

  576. RCM 2.59.2Open verse →

    नयन पुतरि करि प्रीति बढ़ाई। राखेउँ प्रान जानिकिहिं लाई।।

    अर्थ · Hindi

    नयन पुतरि करि प्रीति बढ़ाई। राखेउँ प्रान जानिकिहिं लाई।।

  577. RCM 2.59.3Open verse →

    कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली। सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली।।

    अर्थ · Hindi

    कलपबेलि जिमि बहुबिधि लाली। सींचि सनेह सलिल प्रतिपाली।।

  578. RCM 2.59.4Open verse →

    फूलत फलत भयउ बिधि बामा। जानि न जाइ काह परिनामा।।

    अर्थ · Hindi

    फूलत फलत भयउ बिधि बामा। जानि न जाइ काह परिनामा।।

  579. RCM 2.59.5Open verse →

    पलँग पीठ तजि गोद हिंड़ोरा। सियँ न दीन्ह पगु अवनि कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    पलँग पीठ तजि गोद हिंड़ोरा। सियँ न दीन्ह पगु अवनि कठोरा।।

  580. RCM 2.59.6Open verse →

    जिअनमूरि जिमि जोगवत रहऊँ। दीप बाति नहिं टारन कहऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    जिअनमूरि जिमि जोगवत रहऊँ। दीप बाति नहिं टारन कहऊँ।।

  581. RCM 2.59.7Open verse →

    सोइ सिय चलन चहति बन साथा। आयसु काह होइ रघुनाथा।

    अर्थ · Hindi

    सोइ सिय चलन चहति बन साथा। आयसु काह होइ रघुनाथा।

  582. RCM 2.59.8Open verse →

    चंद किरन रस रसिक चकोरी। रबि रुख नयन सकइ किमि जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    चंद किरन रस रसिक चकोरी। रबि रुख नयन सकइ किमि जोरी।।

  583. RCM 2.59.9Open verse →

    करि केहरि निसिचर चरहिं दुष्ट जंतु बन भूरि।

    अर्थ · Hindi

    करि केहरि निसिचर चरहिं दुष्ट जंतु बन भूरि।

  584. RCM 2.59.10Open verse →

    बिष बाटिकाँ कि सोह सुत सुभग सजीवनि मूरि।।59।।

    अर्थ · Hindi

    बिष बाटिकाँ कि सोह सुत सुभग सजीवनि मूरि।।59।।

  585. RCM 2.60.1Open verse →

    बन हित कोल किरात किसोरी। रचीं बिरंचि बिषय सुख भोरी।।

    अर्थ · Hindi

    बन हित कोल किरात किसोरी। रचीं बिरंचि बिषय सुख भोरी।।

  586. RCM 2.60.2Open verse →

    पाइन कृमि जिमि कठिन सुभाऊ। तिन्हहि कलेसु न कानन काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पाइन कृमि जिमि कठिन सुभाऊ। तिन्हहि कलेसु न कानन काऊ।।

  587. RCM 2.60.3Open verse →

    कै तापस तिय कानन जोगू। जिन्ह तप हेतु तजा सब भोगू।।

    अर्थ · Hindi

    कै तापस तिय कानन जोगू। जिन्ह तप हेतु तजा सब भोगू।।

  588. RCM 2.60.4Open verse →

    सिय बन बसिहि तात केहि भाँती। चित्रलिखित कपि देखि डेराती।।

    अर्थ · Hindi

    सिय बन बसिहि तात केहि भाँती। चित्रलिखित कपि देखि डेराती।।

  589. RCM 2.60.5Open verse →

    सुरसर सुभग बनज बन चारी। डाबर जोगु कि हंसकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुरसर सुभग बनज बन चारी। डाबर जोगु कि हंसकुमारी।।

  590. RCM 2.60.6Open verse →

    अस बिचारि जस आयसु होई। मैं सिख देउँ जानकिहि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि जस आयसु होई। मैं सिख देउँ जानकिहि सोई।।

  591. RCM 2.60.7Open verse →

    जौं सिय भवन रहै कह अंबा। मोहि कहँ होइ बहुत अवलंबा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं सिय भवन रहै कह अंबा। मोहि कहँ होइ बहुत अवलंबा।।

  592. RCM 2.60.8Open verse →

    सुनि रघुबीर मातु प्रिय बानी। सील सनेह सुधाँ जनु सानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रघुबीर मातु प्रिय बानी। सील सनेह सुधाँ जनु सानी।।

  593. RCM 2.60.9Open verse →

    कहि प्रिय बचन बिबेकमय कीन्हि मातु परितोष।

    अर्थ · Hindi

    कहि प्रिय बचन बिबेकमय कीन्हि मातु परितोष।

  594. RCM 2.60.10Open verse →

    लगे प्रबोधन जानकिहि प्रगटि बिपिन गुन दोष।।60।।

    अर्थ · Hindi

    लगे प्रबोधन जानकिहि प्रगटि बिपिन गुन दोष।।60।।

  595. RCM 2.61.1Open verse →

    मातु समीप कहत सकुचाहीं। बोले समउ समुझि मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मातु समीप कहत सकुचाहीं। बोले समउ समुझि मन माहीं।।

  596. RCM 2.61.2Open verse →

    राजकुमारि सिखावन सुनहू। आन भाँति जियँ जनि कछु गुनहू।।

    अर्थ · Hindi

    राजकुमारि सिखावन सुनहू। आन भाँति जियँ जनि कछु गुनहू।।

  597. RCM 2.61.3Open verse →

    आपन मोर नीक जौं चहहू। बचनु हमार मानि गृह रहहू।।

    अर्थ · Hindi

    आपन मोर नीक जौं चहहू। बचनु हमार मानि गृह रहहू।।

  598. RCM 2.61.4Open verse →

    आयसु मोर सासु सेवकाई। सब बिधि भामिनि भवन भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु मोर सासु सेवकाई। सब बिधि भामिनि भवन भलाई।।

  599. RCM 2.61.5Open verse →

    एहि ते अधिक धरमु नहिं दूजा। सादर सासु ससुर पद पूजा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि ते अधिक धरमु नहिं दूजा। सादर सासु ससुर पद पूजा।।

  600. RCM 2.61.6Open verse →

    जब जब मातु करिहि सुधि मोरी। होइहि प्रेम बिकल मति भोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जब जब मातु करिहि सुधि मोरी। होइहि प्रेम बिकल मति भोरी।।

  601. RCM 2.61.7Open verse →

    तब तब तुम्ह कहि कथा पुरानी। सुंदरि समुझाएहु मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    तब तब तुम्ह कहि कथा पुरानी। सुंदरि समुझाएहु मृदु बानी।।

  602. RCM 2.61.8Open verse →

    कहउँ सुभायँ सपथ सत मोही। सुमुखि मातु हित राखउँ तोही।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ सुभायँ सपथ सत मोही। सुमुखि मातु हित राखउँ तोही।।

  603. RCM 2.61.9Open verse →

    गुर श्रुति संमत धरम फलु पाइअ बिनहिं कलेस।

    अर्थ · Hindi

    गुर श्रुति संमत धरम फलु पाइअ बिनहिं कलेस।

  604. RCM 2.61.10Open verse →

    हठ बस सब संकट सहे गालव नहुष नरेस।।61।।

    अर्थ · Hindi

    हठ बस सब संकट सहे गालव नहुष नरेस।।61।।

  605. RCM 2.62.1Open verse →

    मैं पुनि करि प्रवान पितु बानी। बेगि फिरब सुनु सुमुखि सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    मैं पुनि करि प्रवान पितु बानी। बेगि फिरब सुनु सुमुखि सयानी।।

  606. RCM 2.62.2Open verse →

    दिवस जात नहिं लागिहि बारा। सुंदरि सिखवनु सुनहु हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    दिवस जात नहिं लागिहि बारा। सुंदरि सिखवनु सुनहु हमारा।।

  607. RCM 2.62.3Open verse →

    जौ हठ करहु प्रेम बस बामा। तौ तुम्ह दुखु पाउब परिनामा।।

    अर्थ · Hindi

    जौ हठ करहु प्रेम बस बामा। तौ तुम्ह दुखु पाउब परिनामा।।

  608. RCM 2.62.4Open verse →

    काननु कठिन भयंकरु भारी। घोर घामु हिम बारि बयारी।।

    अर्थ · Hindi

    काननु कठिन भयंकरु भारी। घोर घामु हिम बारि बयारी।।

  609. RCM 2.62.5Open verse →

    कुस कंटक मग काँकर नाना। चलब पयादेहिं बिनु पदत्राना।।

    अर्थ · Hindi

    कुस कंटक मग काँकर नाना। चलब पयादेहिं बिनु पदत्राना।।

  610. RCM 2.62.6Open verse →

    चरन कमल मुदु मंजु तुम्हारे। मारग अगम भूमिधर भारे।।

    अर्थ · Hindi

    चरन कमल मुदु मंजु तुम्हारे। मारग अगम भूमिधर भारे।।

  611. RCM 2.62.7Open verse →

    कंदर खोह नदीं नद नारे। अगम अगाध न जाहिं निहारे।।

    अर्थ · Hindi

    कंदर खोह नदीं नद नारे। अगम अगाध न जाहिं निहारे।।

  612. RCM 2.62.8Open verse →

    भालु बाघ बृक केहरि नागा। करहिं नाद सुनि धीरजु भागा।।

    अर्थ · Hindi

    भालु बाघ बृक केहरि नागा। करहिं नाद सुनि धीरजु भागा।।

  613. RCM 2.62.9Open verse →

    भूमि सयन बलकल बसन असनु कंद फल मूल।

    अर्थ · Hindi

    भूमि सयन बलकल बसन असनु कंद फल मूल।

  614. RCM 2.62.10Open verse →

    ते कि सदा सब दिन मिलिहिं सबुइ समय अनुकूल।।62।।

    अर्थ · Hindi

    ते कि सदा सब दिन मिलिहिं सबुइ समय अनुकूल।।62।।

  615. RCM 2.63.1Open verse →

    नर अहार रजनीचर चरहीं। कपट बेष बिधि कोटिक करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नर अहार रजनीचर चरहीं। कपट बेष बिधि कोटिक करहीं।।

  616. RCM 2.63.2Open verse →

    लागइ अति पहार कर पानी। बिपिन बिपति नहिं जाइ बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    लागइ अति पहार कर पानी। बिपिन बिपति नहिं जाइ बखानी।।

  617. RCM 2.63.3Open verse →

    ब्याल कराल बिहग बन घोरा। निसिचर निकर नारि नर चोरा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याल कराल बिहग बन घोरा। निसिचर निकर नारि नर चोरा।।

  618. RCM 2.63.4Open verse →

    डरपहिं धीर गहन सुधि आएँ। मृगलोचनि तुम्ह भीरु सुभाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    डरपहिं धीर गहन सुधि आएँ। मृगलोचनि तुम्ह भीरु सुभाएँ।।

  619. RCM 2.63.5Open verse →

    हंसगवनि तुम्ह नहिं बन जोगू। सुनि अपजसु मोहि देइहि लोगू।।

    अर्थ · Hindi

    हंसगवनि तुम्ह नहिं बन जोगू। सुनि अपजसु मोहि देइहि लोगू।।

  620. RCM 2.63.6Open verse →

    मानस सलिल सुधाँ प्रतिपाली। जिअइ कि लवन पयोधि मराली।।

    अर्थ · Hindi

    मानस सलिल सुधाँ प्रतिपाली। जिअइ कि लवन पयोधि मराली।।

  621. RCM 2.63.7Open verse →

    नव रसाल बन बिहरनसीला। सोह कि कोकिल बिपिन करीला।।

    अर्थ · Hindi

    नव रसाल बन बिहरनसीला। सोह कि कोकिल बिपिन करीला।।

  622. RCM 2.63.8Open verse →

    रहहु भवन अस हृदयँ बिचारी। चंदबदनि दुखु कानन भारी।।

    अर्थ · Hindi

    रहहु भवन अस हृदयँ बिचारी। चंदबदनि दुखु कानन भारी।।

  623. RCM 2.63.9Open verse →

    सहज सुह्द गुर स्वामि सिख जो न करइ सिर मानि।।

    अर्थ · Hindi

    सहज सुह्द गुर स्वामि सिख जो न करइ सिर मानि।।

  624. RCM 2.63.10Open verse →

    सो पछिताइ अघाइ उर अवसि होइ हित हानि।।63।।

    अर्थ · Hindi

    सो पछिताइ अघाइ उर अवसि होइ हित हानि।।63।।

  625. RCM 2.64.1Open verse →

    सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के। लोचन ललित भरे जल सिय के।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मृदु बचन मनोहर पिय के। लोचन ललित भरे जल सिय के।।

  626. RCM 2.64.2Open verse →

    सीतल सिख दाहक भइ कैंसें। चकइहि सरद चंद निसि जैंसें।।

    अर्थ · Hindi

    सीतल सिख दाहक भइ कैंसें। चकइहि सरद चंद निसि जैंसें।।

  627. RCM 2.64.3Open verse →

    उतरु न आव बिकल बैदेही। तजन चहत सुचि स्वामि सनेही।।

    अर्थ · Hindi

    उतरु न आव बिकल बैदेही। तजन चहत सुचि स्वामि सनेही।।

  628. RCM 2.64.4Open verse →

    बरबस रोकि बिलोचन बारी। धरि धीरजु उर अवनिकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    बरबस रोकि बिलोचन बारी। धरि धीरजु उर अवनिकुमारी।।

  629. RCM 2.64.5Open verse →

    लागि सासु पग कह कर जोरी। छमबि देबि बड़ि अबिनय मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    लागि सासु पग कह कर जोरी। छमबि देबि बड़ि अबिनय मोरी।।

  630. RCM 2.64.6Open verse →

    दीन्हि प्रानपति मोहि सिख सोई। जेहि बिधि मोर परम हित होई।।

    अर्थ · Hindi

    दीन्हि प्रानपति मोहि सिख सोई। जेहि बिधि मोर परम हित होई।।

  631. RCM 2.64.7Open verse →

    मैं पुनि समुझि दीखि मन माहीं। पिय बियोग सम दुखु जग नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मैं पुनि समुझि दीखि मन माहीं। पिय बियोग सम दुखु जग नाहीं।।

  632. RCM 2.64.8Open verse →

    प्राननाथ करुनायतन सुंदर सुखद सुजान।

    अर्थ · Hindi

    प्राननाथ करुनायतन सुंदर सुखद सुजान।

  633. RCM 2.64.9Open verse →

    तुम्ह बिनु रघुकुल कुमुद बिधु सुरपुर नरक समान।।64।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह बिनु रघुकुल कुमुद बिधु सुरपुर नरक समान।।64।।

  634. RCM 2.65.1Open verse →

    मातु पिता भगिनी प्रिय भाई। प्रिय परिवारु सुह्रद समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    मातु पिता भगिनी प्रिय भाई। प्रिय परिवारु सुह्रद समुदाई।।

  635. RCM 2.65.2Open verse →

    सासु ससुर गुर सजन सहाई। सुत सुंदर सुसील सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    सासु ससुर गुर सजन सहाई। सुत सुंदर सुसील सुखदाई।।

  636. RCM 2.65.3Open verse →

    जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते। पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ लगि नाथ नेह अरु नाते। पिय बिनु तियहि तरनिहु ते ताते।।

  637. RCM 2.65.4Open verse →

    तनु धनु धामु धरनि पुर राजू। पति बिहीन सबु सोक समाजू।।

    अर्थ · Hindi

    तनु धनु धामु धरनि पुर राजू। पति बिहीन सबु सोक समाजू।।

  638. RCM 2.65.5Open verse →

    भोग रोगसम भूषन भारू। जम जातना सरिस संसारू।।

    अर्थ · Hindi

    भोग रोगसम भूषन भारू। जम जातना सरिस संसारू।।

  639. RCM 2.65.6Open verse →

    प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं। मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्राननाथ तुम्ह बिनु जग माहीं। मो कहुँ सुखद कतहुँ कछु नाहीं।।

  640. RCM 2.65.7Open verse →

    जिय बिनु देह नदी बिनु बारी। तैसिअ नाथ पुरुष बिनु नारी।।

    अर्थ · Hindi

    जिय बिनु देह नदी बिनु बारी। तैसिअ नाथ पुरुष बिनु नारी।।

  641. RCM 2.65.8Open verse →

    नाथ सकल सुख साथ तुम्हारें। सरद बिमल बिधु बदनु निहारें।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ सकल सुख साथ तुम्हारें। सरद बिमल बिधु बदनु निहारें।।

  642. RCM 2.65.9Open verse →

    खग मृग परिजन नगरु बनु बलकल बिमल दुकूल।

    अर्थ · Hindi

    खग मृग परिजन नगरु बनु बलकल बिमल दुकूल।

  643. RCM 2.65.10Open verse →

    नाथ साथ सुरसदन सम परनसाल सुख मूल।।65।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ साथ सुरसदन सम परनसाल सुख मूल।।65।।

  644. RCM 2.66.1Open verse →

    बनदेवीं बनदेव उदारा। करिहहिं सासु ससुर सम सारा।।

    अर्थ · Hindi

    बनदेवीं बनदेव उदारा। करिहहिं सासु ससुर सम सारा।।

  645. RCM 2.66.2Open verse →

    कुस किसलय साथरी सुहाई। प्रभु सँग मंजु मनोज तुराई।।

    अर्थ · Hindi

    कुस किसलय साथरी सुहाई। प्रभु सँग मंजु मनोज तुराई।।

  646. RCM 2.66.3Open verse →

    कंद मूल फल अमिअ अहारू। अवध सौध सत सरिस पहारू।।

    अर्थ · Hindi

    कंद मूल फल अमिअ अहारू। अवध सौध सत सरिस पहारू।।

  647. RCM 2.66.4Open verse →

    छिनु छिनु प्रभु पद कमल बिलोकि। रहिहउँ मुदित दिवस जिमि कोकी।।

    अर्थ · Hindi

    छिनु छिनु प्रभु पद कमल बिलोकि। रहिहउँ मुदित दिवस जिमि कोकी।।

  648. RCM 2.66.5Open verse →

    बन दुख नाथ कहे बहुतेरे। भय बिषाद परिताप घनेरे।।

    अर्थ · Hindi

    बन दुख नाथ कहे बहुतेरे। भय बिषाद परिताप घनेरे।।

  649. RCM 2.66.6Open verse →

    प्रभु बियोग लवलेस समाना। सब मिलि होहिं न कृपानिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु बियोग लवलेस समाना। सब मिलि होहिं न कृपानिधाना।।

  650. RCM 2.66.7Open verse →

    अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि। लेइअ संग मोहि छाड़िअ जनि।।

    अर्थ · Hindi

    अस जियँ जानि सुजान सिरोमनि। लेइअ संग मोहि छाड़िअ जनि।।

  651. RCM 2.66.8Open verse →

    बिनती बहुत करौं का स्वामी। करुनामय उर अंतरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    बिनती बहुत करौं का स्वामी। करुनामय उर अंतरजामी।।

  652. RCM 2.66.9Open verse →

    राखिअ अवध जो अवधि लगि रहत न जनिअहिं प्रान।

    अर्थ · Hindi

    राखिअ अवध जो अवधि लगि रहत न जनिअहिं प्रान।

  653. RCM 2.66.10Open verse →

    दीनबंधु संदर सुखद सील सनेह निधान।।66।।

    अर्थ · Hindi

    दीनबंधु संदर सुखद सील सनेह निधान।।66।।

  654. RCM 2.67.1Open verse →

    मोहि मग चलत न होइहि हारी। छिनु छिनु चरन सरोज निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि मग चलत न होइहि हारी। छिनु छिनु चरन सरोज निहारी।।

  655. RCM 2.67.2Open verse →

    सबहि भाँति पिय सेवा करिहौं। मारग जनित सकल श्रम हरिहौं।।

    अर्थ · Hindi

    सबहि भाँति पिय सेवा करिहौं। मारग जनित सकल श्रम हरिहौं।।

  656. RCM 2.67.3Open verse →

    पाय पखारी बैठि तरु छाहीं। करिहउँ बाउ मुदित मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पाय पखारी बैठि तरु छाहीं। करिहउँ बाउ मुदित मन माहीं।।

  657. RCM 2.67.4Open verse →

    श्रम कन सहित स्याम तनु देखें। कहँ दुख समउ प्रानपति पेखें।।

    अर्थ · Hindi

    श्रम कन सहित स्याम तनु देखें। कहँ दुख समउ प्रानपति पेखें।।

  658. RCM 2.67.5Open verse →

    सम महि तृन तरुपल्लव डासी। पाग पलोटिहि सब निसि दासी।।

    अर्थ · Hindi

    सम महि तृन तरुपल्लव डासी। पाग पलोटिहि सब निसि दासी।।

  659. RCM 2.67.6Open verse →

    बारबार मृदु मूरति जोही। लागहि तात बयारि न मोही।

    अर्थ · Hindi

    बारबार मृदु मूरति जोही। लागहि तात बयारि न मोही।

  660. RCM 2.67.7Open verse →

    को प्रभु सँग मोहि चितवनिहारा। सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा।।

    अर्थ · Hindi

    को प्रभु सँग मोहि चितवनिहारा। सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा।।

  661. RCM 2.67.8Open verse →

    मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू। तुम्हहि उचित तप मो कहुँ भोगू।।

    अर्थ · Hindi

    मैं सुकुमारि नाथ बन जोगू। तुम्हहि उचित तप मो कहुँ भोगू।।

  662. RCM 2.67.9Open verse →

    ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न ह्रदउ बिलगान।

    अर्थ · Hindi

    ऐसेउ बचन कठोर सुनि जौं न ह्रदउ बिलगान।

  663. RCM 2.67.10Open verse →

    तौ प्रभु बिषम बियोग दुख सहिहहिं पावँर प्रान।।67।।

    अर्थ · Hindi

    तौ प्रभु बिषम बियोग दुख सहिहहिं पावँर प्रान।।67।।

  664. RCM 2.68.1Open verse →

    अस कहि सीय बिकल भइ भारी। बचन बियोगु न सकी सँभारी।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि सीय बिकल भइ भारी। बचन बियोगु न सकी सँभारी।।

  665. RCM 2.68.2Open verse →

    देखि दसा रघुपति जियँ जाना। हठि राखें नहिं राखिहि प्राना।।

    अर्थ · Hindi

    देखि दसा रघुपति जियँ जाना। हठि राखें नहिं राखिहि प्राना।।

  666. RCM 2.68.3Open verse →

    कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा। परिहरि सोचु चलहु बन साथा।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ कृपाल भानुकुलनाथा। परिहरि सोचु चलहु बन साथा।।

  667. RCM 2.68.4Open verse →

    नहिं बिषाद कर अवसरु आजू। बेगि करहु बन गवन समाजू।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं बिषाद कर अवसरु आजू। बेगि करहु बन गवन समाजू।।

  668. RCM 2.68.5Open verse →

    कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई। लगे मातु पद आसिष पाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहि प्रिय बचन प्रिया समुझाई। लगे मातु पद आसिष पाई।।

  669. RCM 2.68.6Open verse →

    बेगि प्रजा दुख मेटब आई। जननी निठुर बिसरि जनि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि प्रजा दुख मेटब आई। जननी निठुर बिसरि जनि जाई।।

  670. RCM 2.68.7Open verse →

    फिरहि दसा बिधि बहुरि कि मोरी। देखिहउँ नयन मनोहर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    फिरहि दसा बिधि बहुरि कि मोरी। देखिहउँ नयन मनोहर जोरी।।

  671. RCM 2.68.8Open verse →

    सुदिन सुघरी तात कब होइहि। जननी जिअत बदन बिधु जोइहि।।

    अर्थ · Hindi

    सुदिन सुघरी तात कब होइहि। जननी जिअत बदन बिधु जोइहि।।

  672. RCM 2.68.9Open verse →

    बहुरि बच्छ कहि लालु कहि रघुपति रघुबर तात।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बच्छ कहि लालु कहि रघुपति रघुबर तात।

  673. RCM 2.68.10Open verse →

    कबहिं बोलाइ लगाइ हियँ हरषि निरखिहउँ गात।।68।।

    अर्थ · Hindi

    कबहिं बोलाइ लगाइ हियँ हरषि निरखिहउँ गात।।68।।

  674. RCM 2.69.1Open verse →

    लखि सनेह कातरि महतारी। बचनु न आव बिकल भइ भारी।।

    अर्थ · Hindi

    लखि सनेह कातरि महतारी। बचनु न आव बिकल भइ भारी।।

  675. RCM 2.69.2Open verse →

    राम प्रबोधु कीन्ह बिधि नाना। समउ सनेहु न जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रबोधु कीन्ह बिधि नाना। समउ सनेहु न जाइ बखाना।।

  676. RCM 2.69.3Open verse →

    तब जानकी सासु पग लागी। सुनिअ माय मैं परम अभागी।।

    अर्थ · Hindi

    तब जानकी सासु पग लागी। सुनिअ माय मैं परम अभागी।।

  677. RCM 2.69.4Open verse →

    सेवा समय दैअँ बनु दीन्हा। मोर मनोरथु सफल न कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    सेवा समय दैअँ बनु दीन्हा। मोर मनोरथु सफल न कीन्हा।।

  678. RCM 2.69.5Open verse →

    तजब छोभु जनि छाड़िअ छोहू। करमु कठिन कछु दोसु न मोहू।।

    अर्थ · Hindi

    तजब छोभु जनि छाड़िअ छोहू। करमु कठिन कछु दोसु न मोहू।।

  679. RCM 2.69.6Open verse →

    सुनि सिय बचन सासु अकुलानी। दसा कवनि बिधि कहौं बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सिय बचन सासु अकुलानी। दसा कवनि बिधि कहौं बखानी।।

  680. RCM 2.69.7Open verse →

    बारहि बार लाइ उर लीन्ही। धरि धीरजु सिख आसिष दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    बारहि बार लाइ उर लीन्ही। धरि धीरजु सिख आसिष दीन्ही।।

  681. RCM 2.69.8Open verse →

    अचल होउ अहिवातु तुम्हारा। जब लगि गंग जमुन जल धारा।।

    अर्थ · Hindi

    अचल होउ अहिवातु तुम्हारा। जब लगि गंग जमुन जल धारा।।

  682. RCM 2.69.9Open verse →

    सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक प्रकार।

    अर्थ · Hindi

    सीतहि सासु असीस सिख दीन्हि अनेक प्रकार।

  683. RCM 2.69.10Open verse →

    चली नाइ पद पदुम सिरु अति हित बारहिं बार।।69।।

    अर्थ · Hindi

    चली नाइ पद पदुम सिरु अति हित बारहिं बार।।69।।

  684. RCM 2.70.1Open verse →

    समाचार जब लछिमन पाए। ब्याकुल बिलख बदन उठि धाए।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार जब लछिमन पाए। ब्याकुल बिलख बदन उठि धाए।।

  685. RCM 2.70.2Open verse →

    कंप पुलक तन नयन सनीरा। गहे चरन अति प्रेम अधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    कंप पुलक तन नयन सनीरा। गहे चरन अति प्रेम अधीरा।।

  686. RCM 2.70.3Open verse →

    कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े। मीनु दीन जनु जल तें काढ़े।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न सकत कछु चितवत ठाढ़े। मीनु दीन जनु जल तें काढ़े।।

  687. RCM 2.70.4Open verse →

    सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा। सबु सुखु सुकृत सिरान हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    सोचु हृदयँ बिधि का होनिहारा। सबु सुखु सुकृत सिरान हमारा।।

  688. RCM 2.70.5Open verse →

    मो कहुँ काह कहब रघुनाथा। रखिहहिं भवन कि लेहहिं साथा।।

    अर्थ · Hindi

    मो कहुँ काह कहब रघुनाथा। रखिहहिं भवन कि लेहहिं साथा।।

  689. RCM 2.70.6Open verse →

    राम बिलोकि बंधु कर जोरें। देह गेह सब सन तृनु तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    राम बिलोकि बंधु कर जोरें। देह गेह सब सन तृनु तोरें।।

  690. RCM 2.70.7Open verse →

    बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर।।

    अर्थ · Hindi

    बोले बचनु राम नय नागर। सील सनेह सरल सुख सागर।।

  691. RCM 2.70.8Open verse →

    तात प्रेम बस जनि कदराहू। समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    तात प्रेम बस जनि कदराहू। समुझि हृदयँ परिनाम उछाहू।।

  692. RCM 2.70.9Open verse →

    मातु पिता गुरु स्वामि सिख सिर धरि करहि सुभायँ।

    अर्थ · Hindi

    मातु पिता गुरु स्वामि सिख सिर धरि करहि सुभायँ।

  693. RCM 2.70.10Open verse →

    लहेउ लाभु तिन्ह जनम कर नतरु जनमु जग जायँ।।70।।

    अर्थ · Hindi

    लहेउ लाभु तिन्ह जनम कर नतरु जनमु जग जायँ।।70।।

  694. RCM 2.71.1Open verse →

    अस जियँ जानि सुनहु सिख भाई। करहु मातु पितु पद सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    अस जियँ जानि सुनहु सिख भाई। करहु मातु पितु पद सेवकाई।।

  695. RCM 2.71.2Open verse →

    भवन भरतु रिपुसूदन नाहीं। राउ बृद्ध मम दुखु मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भवन भरतु रिपुसूदन नाहीं। राउ बृद्ध मम दुखु मन माहीं।।

  696. RCM 2.71.3Open verse →

    मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा। होइ सबहि बिधि अवध अनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    मैं बन जाउँ तुम्हहि लेइ साथा। होइ सबहि बिधि अवध अनाथा।।

  697. RCM 2.71.4Open verse →

    गुरु पितु मातु प्रजा परिवारू। सब कहुँ परइ दुसह दुख भारू।।

    अर्थ · Hindi

    गुरु पितु मातु प्रजा परिवारू। सब कहुँ परइ दुसह दुख भारू।।

  698. RCM 2.71.5Open verse →

    रहहु करहु सब कर परितोषू। नतरु तात होइहि बड़ दोषू।।

    अर्थ · Hindi

    रहहु करहु सब कर परितोषू। नतरु तात होइहि बड़ दोषू।।

  699. RCM 2.71.6Open verse →

    जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी। सो नृपु अवसि नरक अधिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी। सो नृपु अवसि नरक अधिकारी।।

  700. RCM 2.71.7Open verse →

    रहहु तात असि नीति बिचारी। सुनत लखनु भए ब्याकुल भारी।।

    अर्थ · Hindi

    रहहु तात असि नीति बिचारी। सुनत लखनु भए ब्याकुल भारी।।

  701. RCM 2.71.8Open verse →

    सिअरें बचन सूखि गए कैंसें। परसत तुहिन तामरसु जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    सिअरें बचन सूखि गए कैंसें। परसत तुहिन तामरसु जैसें।।

  702. RCM 2.71.9Open verse →

    उतरु न आवत प्रेम बस गहे चरन अकुलाइ।

    अर्थ · Hindi

    उतरु न आवत प्रेम बस गहे चरन अकुलाइ।

  703. RCM 2.71.10Open verse →

    नाथ दासु मैं स्वामि तुम्ह तजहु त काह बसाइ।।71।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ दासु मैं स्वामि तुम्ह तजहु त काह बसाइ।।71।।

  704. RCM 2.72.1Open verse →

    दीन्हि मोहि सिख नीकि गोसाईं। लागि अगम अपनी कदराईं।।

    अर्थ · Hindi

    दीन्हि मोहि सिख नीकि गोसाईं। लागि अगम अपनी कदराईं।।

  705. RCM 2.72.2Open verse →

    नरबर धीर धरम धुर धारी। निगम नीति कहुँ ते अधिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    नरबर धीर धरम धुर धारी। निगम नीति कहुँ ते अधिकारी।।

  706. RCM 2.72.3Open verse →

    मैं सिसु प्रभु सनेहँ प्रतिपाला। मंदरु मेरु कि लेहिं मराला।।

    अर्थ · Hindi

    मैं सिसु प्रभु सनेहँ प्रतिपाला। मंदरु मेरु कि लेहिं मराला।।

  707. RCM 2.72.4Open verse →

    गुर पितु मातु न जानउँ काहू। कहउँ सुभाउ नाथ पतिआहू।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पितु मातु न जानउँ काहू। कहउँ सुभाउ नाथ पतिआहू।।

  708. RCM 2.72.5Open verse →

    जहँ लगि जगत सनेह सगाई। प्रीति प्रतीति निगम निजु गाई।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ लगि जगत सनेह सगाई। प्रीति प्रतीति निगम निजु गाई।।

  709. RCM 2.72.6Open verse →

    मोरें सबइ एक तुम्ह स्वामी। दीनबंधु उर अंतरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    मोरें सबइ एक तुम्ह स्वामी। दीनबंधु उर अंतरजामी।।

  710. RCM 2.72.7Open verse →

    धरम नीति उपदेसिअ ताही। कीरति भूति सुगति प्रिय जाही।।

    अर्थ · Hindi

    धरम नीति उपदेसिअ ताही। कीरति भूति सुगति प्रिय जाही।।

  711. RCM 2.72.8Open verse →

    मन क्रम बचन चरन रत होई। कृपासिंधु परिहरिअ कि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    मन क्रम बचन चरन रत होई। कृपासिंधु परिहरिअ कि सोई।।

  712. RCM 2.72.9Open verse →

    करुनासिंधु सुबंध के सुनि मृदु बचन बिनीत।

    अर्थ · Hindi

    करुनासिंधु सुबंध के सुनि मृदु बचन बिनीत।

  713. RCM 2.72.10Open verse →

    समुझाए उर लाइ प्रभु जानि सनेहँ सभीत।।72।।

    अर्थ · Hindi

    समुझाए उर लाइ प्रभु जानि सनेहँ सभीत।।72।।

  714. RCM 2.73.1Open verse →

    मागहु बिदा मातु सन जाई। आवहु बेगि चलहु बन भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मागहु बिदा मातु सन जाई। आवहु बेगि चलहु बन भाई।।

  715. RCM 2.73.2Open verse →

    मुदित भए सुनि रघुबर बानी। भयउ लाभ बड़ गइ बड़ि हानी।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित भए सुनि रघुबर बानी। भयउ लाभ बड़ गइ बड़ि हानी।।

  716. RCM 2.73.3Open verse →

    हरषित ह्दयँ मातु पहिं आए। मनहुँ अंध फिरि लोचन पाए।

    अर्थ · Hindi

    हरषित ह्दयँ मातु पहिं आए। मनहुँ अंध फिरि लोचन पाए।

  717. RCM 2.73.4Open verse →

    जाइ जननि पग नायउ माथा। मनु रघुनंदन जानकि साथा।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ जननि पग नायउ माथा। मनु रघुनंदन जानकि साथा।।

  718. RCM 2.73.5Open verse →

    पूँछे मातु मलिन मन देखी। लखन कही सब कथा बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    पूँछे मातु मलिन मन देखी। लखन कही सब कथा बिसेषी।।

  719. RCM 2.73.6Open verse →

    गई सहमि सुनि बचन कठोरा। मृगी देखि दव जनु चहु ओरा।।

    अर्थ · Hindi

    गई सहमि सुनि बचन कठोरा। मृगी देखि दव जनु चहु ओरा।।

  720. RCM 2.73.7Open verse →

    लखन लखेउ भा अनरथ आजू। एहिं सनेह बस करब अकाजू।।

    अर्थ · Hindi

    लखन लखेउ भा अनरथ आजू। एहिं सनेह बस करब अकाजू।।

  721. RCM 2.73.8Open verse →

    मागत बिदा सभय सकुचाहीं। जाइ संग बिधि कहिहि कि नाही।।

    अर्थ · Hindi

    मागत बिदा सभय सकुचाहीं। जाइ संग बिधि कहिहि कि नाही।।

  722. RCM 2.73.9Open verse →

    समुझि सुमित्राँ राम सिय रूप सुसीलु सुभाउ।

    अर्थ · Hindi

    समुझि सुमित्राँ राम सिय रूप सुसीलु सुभाउ।

  723. RCM 2.73.10Open verse →

    नृप सनेहु लखि धुनेउ सिरु पापिनि दीन्ह कुदाउ।।73।।

    अर्थ · Hindi

    नृप सनेहु लखि धुनेउ सिरु पापिनि दीन्ह कुदाउ।।73।।

  724. RCM 2.74.1Open verse →

    धीरजु धरेउ कुअवसर जानी। सहज सुह्द बोली मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    धीरजु धरेउ कुअवसर जानी। सहज सुह्द बोली मृदु बानी।।

  725. RCM 2.74.2Open verse →

    तात तुम्हारि मातु बैदेही। पिता रामु सब भाँति सनेही।।

    अर्थ · Hindi

    तात तुम्हारि मातु बैदेही। पिता रामु सब भाँति सनेही।।

  726. RCM 2.74.3Open verse →

    अवध तहाँ जहँ राम निवासू। तहँइँ दिवसु जहँ भानु प्रकासू।।

    अर्थ · Hindi

    अवध तहाँ जहँ राम निवासू। तहँइँ दिवसु जहँ भानु प्रकासू।।

  727. RCM 2.74.4Open verse →

    जौ पै सीय रामु बन जाहीं। अवध तुम्हार काजु कछु नाहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जौ पै सीय रामु बन जाहीं। अवध तुम्हार काजु कछु नाहिं।।

  728. RCM 2.74.5Open verse →

    गुर पितु मातु बंधु सुर साई। सेइअहिं सकल प्रान की नाईं।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पितु मातु बंधु सुर साई। सेइअहिं सकल प्रान की नाईं।।

  729. RCM 2.74.6Open verse →

    रामु प्रानप्रिय जीवन जी के। स्वारथ रहित सखा सबही कै।।

    अर्थ · Hindi

    रामु प्रानप्रिय जीवन जी के। स्वारथ रहित सखा सबही कै।।

  730. RCM 2.74.7Open verse →

    पूजनीय प्रिय परम जहाँ तें। सब मानिअहिं राम के नातें।।

    अर्थ · Hindi

    पूजनीय प्रिय परम जहाँ तें। सब मानिअहिं राम के नातें।।

  731. RCM 2.74.8Open verse →

    अस जियँ जानि संग बन जाहू। लेहु तात जग जीवन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    अस जियँ जानि संग बन जाहू। लेहु तात जग जीवन लाहू।।

  732. RCM 2.74.9Open verse →

    भूरि भाग भाजनु भयहु मोहि समेत बलि जाउँ।

    अर्थ · Hindi

    भूरि भाग भाजनु भयहु मोहि समेत बलि जाउँ।

  733. RCM 2.74.10Open verse →

    जौम तुम्हरें मन छाड़ि छलु कीन्ह राम पद ठाउँ।।74।।

    अर्थ · Hindi

    जौम तुम्हरें मन छाड़ि छलु कीन्ह राम पद ठाउँ।।74।।

  734. RCM 2.75.1Open verse →

    पुत्रवती जुबती जग सोई। रघुपति भगतु जासु सुतु होई।।

    अर्थ · Hindi

    पुत्रवती जुबती जग सोई। रघुपति भगतु जासु सुतु होई।।

  735. RCM 2.75.2Open verse →

    नतरु बाँझ भलि बादि बिआनी। राम बिमुख सुत तें हित जानी।।

    अर्थ · Hindi

    नतरु बाँझ भलि बादि बिआनी। राम बिमुख सुत तें हित जानी।।

  736. RCM 2.75.3Open verse →

    तुम्हरेहिं भाग रामु बन जाहीं। दूसर हेतु तात कछु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरेहिं भाग रामु बन जाहीं। दूसर हेतु तात कछु नाहीं।।

  737. RCM 2.75.4Open verse →

    सकल सुकृत कर बड़ फलु एहू। राम सीय पद सहज सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुकृत कर बड़ फलु एहू। राम सीय पद सहज सनेहू।।

  738. RCM 2.75.5Open verse →

    राग रोषु इरिषा मदु मोहू। जनि सपनेहुँ इन्ह के बस होहू।।

    अर्थ · Hindi

    राग रोषु इरिषा मदु मोहू। जनि सपनेहुँ इन्ह के बस होहू।।

  739. RCM 2.75.6Open verse →

    सकल प्रकार बिकार बिहाई। मन क्रम बचन करेहु सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    सकल प्रकार बिकार बिहाई। मन क्रम बचन करेहु सेवकाई।।

  740. RCM 2.75.7Open verse →

    तुम्ह कहुँ बन सब भाँति सुपासू। सँग पितु मातु रामु सिय जासू।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह कहुँ बन सब भाँति सुपासू। सँग पितु मातु रामु सिय जासू।।

  741. RCM 2.75.8Open verse →

    जेहिं न रामु बन लहहिं कलेसू। सुत सोइ करेहु इहइ उपदेसू।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं न रामु बन लहहिं कलेसू। सुत सोइ करेहु इहइ उपदेसू।।

  742. RCM 2.75.9Open verse →

    उपदेसु यहु जेहिं तात तुम्हरे राम सिय सुख पावहीं।

    अर्थ · Hindi

    उपदेसु यहु जेहिं तात तुम्हरे राम सिय सुख पावहीं।

  743. RCM 2.75.10Open verse →

    पितु मातु प्रिय परिवार पुर सुख सुरति बन बिसरावहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पितु मातु प्रिय परिवार पुर सुख सुरति बन बिसरावहीं।।

  744. RCM 2.75.11Open verse →

    तुलसी प्रभुहि सिख देइ आयसु दीन्ह पुनि आसिष दई।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी प्रभुहि सिख देइ आयसु दीन्ह पुनि आसिष दई।

  745. RCM 2.75.12Open verse →

    रति होउ अबिरल अमल सिय रघुबीर पद नित नित नई।।

    अर्थ · Hindi

    रति होउ अबिरल अमल सिय रघुबीर पद नित नित नई।।

  746. RCM 2.75.13Open verse →

    मातु चरन सिरु नाइ चले तुरत संकित हृदयँ।

    अर्थ · Hindi

    मातु चरन सिरु नाइ चले तुरत संकित हृदयँ।

  747. RCM 2.75.14Open verse →

    बागुर बिषम तोराइ मनहुँ भाग मृगु भाग बस।।75।।

    अर्थ · Hindi

    बागुर बिषम तोराइ मनहुँ भाग मृगु भाग बस।।75।।

  748. RCM 2.76.1Open verse →

    गए लखनु जहँ जानकिनाथू। भे मन मुदित पाइ प्रिय साथू।।

    अर्थ · Hindi

    गए लखनु जहँ जानकिनाथू। भे मन मुदित पाइ प्रिय साथू।।

  749. RCM 2.76.2Open verse →

    बंदि राम सिय चरन सुहाए। चले संग नृपमंदिर आए।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि राम सिय चरन सुहाए। चले संग नृपमंदिर आए।।

  750. RCM 2.76.3Open verse →

    कहहिं परसपर पुर नर नारी। भलि बनाइ बिधि बात बिगारी।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं परसपर पुर नर नारी। भलि बनाइ बिधि बात बिगारी।।

  751. RCM 2.76.4Open verse →

    तन कृस दुखु बदन मलीने। बिकल मनहुँ माखी मधु छीने।।

    अर्थ · Hindi

    तन कृस दुखु बदन मलीने। बिकल मनहुँ माखी मधु छीने।।

  752. RCM 2.76.5Open verse →

    कर मीजहिं सिरु धुनि पछिताहीं। जनु बिन पंख बिहग अकुलाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कर मीजहिं सिरु धुनि पछिताहीं। जनु बिन पंख बिहग अकुलाहीं।।

  753. RCM 2.76.6Open verse →

    भइ बड़ि भीर भूप दरबारा। बरनि न जाइ बिषादु अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    भइ बड़ि भीर भूप दरबारा। बरनि न जाइ बिषादु अपारा।।

  754. RCM 2.76.7Open verse →

    सचिवँ उठाइ राउ बैठारे। कहि प्रिय बचन रामु पगु धारे।।

    अर्थ · Hindi

    सचिवँ उठाइ राउ बैठारे। कहि प्रिय बचन रामु पगु धारे।।

  755. RCM 2.76.8Open verse →

    सिय समेत दोउ तनय निहारी। ब्याकुल भयउ भूमिपति भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सिय समेत दोउ तनय निहारी। ब्याकुल भयउ भूमिपति भारी।।

  756. RCM 2.76.9Open verse →

    सीय सहित सुत सुभग दोउ देखि देखि अकुलाइ।

    अर्थ · Hindi

    सीय सहित सुत सुभग दोउ देखि देखि अकुलाइ।

  757. RCM 2.76.10Open verse →

    बारहिं बार सनेह बस राउ लेइ उर लाइ।।76।।

    अर्थ · Hindi

    बारहिं बार सनेह बस राउ लेइ उर लाइ।।76।।

  758. RCM 2.77.1Open verse →

    सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सकइ न बोलि बिकल नरनाहू। सोक जनित उर दारुन दाहू।।

  759. RCM 2.77.2Open verse →

    नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा।।

    अर्थ · Hindi

    नाइ सीसु पद अति अनुरागा। उठि रघुबीर बिदा तब मागा।।

  760. RCM 2.77.3Open verse →

    पितु असीस आयसु मोहि दीजै। हरष समय बिसमउ कत कीजै।।

    अर्थ · Hindi

    पितु असीस आयसु मोहि दीजै। हरष समय बिसमउ कत कीजै।।

  761. RCM 2.77.4Open verse →

    तात किएँ प्रिय प्रेम प्रमादू। जसु जग जाइ होइ अपबादू।।

    अर्थ · Hindi

    तात किएँ प्रिय प्रेम प्रमादू। जसु जग जाइ होइ अपबादू।।

  762. RCM 2.77.5Open verse →

    सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनेह बस उठि नरनाहाँ। बैठारे रघुपति गहि बाहाँ।।

  763. RCM 2.77.6Open verse →

    सुनहु तात तुम्ह कहुँ मुनि कहहीं। रामु चराचर नायक अहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु तात तुम्ह कहुँ मुनि कहहीं। रामु चराचर नायक अहहीं।।

  764. RCM 2.77.7Open verse →

    सुभ अरु असुभ करम अनुहारी। ईस देइ फलु ह्दयँ बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुभ अरु असुभ करम अनुहारी। ईस देइ फलु ह्दयँ बिचारी।।

  765. RCM 2.77.8Open verse →

    करइ जो करम पाव फल सोई। निगम नीति असि कह सबु कोई।।

    अर्थ · Hindi

    करइ जो करम पाव फल सोई। निगम नीति असि कह सबु कोई।।

  766. RCM 2.77.9Open verse →

    औरु करै अपराधु कोउ और पाव फल भोगु।

    अर्थ · Hindi

    औरु करै अपराधु कोउ और पाव फल भोगु।

  767. RCM 2.77.10Open verse →

    अति बिचित्र भगवंत गति को जग जानै जोगु।।77।।

    अर्थ · Hindi

    अति बिचित्र भगवंत गति को जग जानै जोगु।।77।।

  768. RCM 2.78.1Open verse →

    रायँ राम राखन हित लागी। बहुत उपाय किए छलु त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    रायँ राम राखन हित लागी। बहुत उपाय किए छलु त्यागी।।

  769. RCM 2.78.2Open verse →

    लखी राम रुख रहत न जाने। धरम धुरंधर धीर सयाने।।

    अर्थ · Hindi

    लखी राम रुख रहत न जाने। धरम धुरंधर धीर सयाने।।

  770. RCM 2.78.3Open verse →

    तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    तब नृप सीय लाइ उर लीन्ही। अति हित बहुत भाँति सिख दीन्ही।।

  771. RCM 2.78.4Open verse →

    कहि बन के दुख दुसह सुनाए। सासु ससुर पितु सुख समुझाए।।

    अर्थ · Hindi

    कहि बन के दुख दुसह सुनाए। सासु ससुर पितु सुख समुझाए।।

  772. RCM 2.78.5Open verse →

    सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा।।

    अर्थ · Hindi

    सिय मनु राम चरन अनुरागा। घरु न सुगमु बनु बिषमु न लागा।।

  773. RCM 2.78.6Open verse →

    औरउ सबहिं सीय समुझाई। कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    औरउ सबहिं सीय समुझाई। कहि कहि बिपिन बिपति अधिकाई।।

  774. RCM 2.78.7Open verse →

    सचिव नारि गुर नारि सयानी। सहित सनेह कहहिं मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव नारि गुर नारि सयानी। सहित सनेह कहहिं मृदु बानी।।

  775. RCM 2.78.8Open verse →

    तुम्ह कहुँ तौ न दीन्ह बनबासू। करहु जो कहहिं ससुर गुर सासू।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह कहुँ तौ न दीन्ह बनबासू। करहु जो कहहिं ससुर गुर सासू।।

  776. RCM 2.78.9Open verse →

    -सिख सीतलि हित मधुर मृदु सुनि सीतहि न सोहानि।

    अर्थ · Hindi

    -सिख सीतलि हित मधुर मृदु सुनि सीतहि न सोहानि।

  777. RCM 2.78.10Open verse →

    सरद चंद चंदनि लगत जनु चकई अकुलानि।।78।।

    अर्थ · Hindi

    सरद चंद चंदनि लगत जनु चकई अकुलानि।।78।।

  778. RCM 2.79.1Open verse →

    सीय सकुच बस उतरु न देई। सो सुनि तमकि उठी कैकेई।।

    अर्थ · Hindi

    सीय सकुच बस उतरु न देई। सो सुनि तमकि उठी कैकेई।।

  779. RCM 2.79.2Open verse →

    मुनि पट भूषन भाजन आनी। आगें धरि बोली मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि पट भूषन भाजन आनी। आगें धरि बोली मृदु बानी।।

  780. RCM 2.79.3Open verse →

    नृपहि प्रान प्रिय तुम्ह रघुबीरा। सील सनेह न छाड़िहि भीरा।।

    अर्थ · Hindi

    नृपहि प्रान प्रिय तुम्ह रघुबीरा। सील सनेह न छाड़िहि भीरा।।

  781. RCM 2.79.4Open verse →

    सुकृत सुजसु परलोकु नसाऊ। तुम्हहि जान बन कहिहि न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृत सुजसु परलोकु नसाऊ। तुम्हहि जान बन कहिहि न काऊ।।

  782. RCM 2.79.5Open verse →

    अस बिचारि सोइ करहु जो भावा। राम जननि सिख सुनि सुखु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि सोइ करहु जो भावा। राम जननि सिख सुनि सुखु पावा।।

  783. RCM 2.79.6Open verse →

    भूपहि बचन बानसम लागे। करहिं न प्रान पयान अभागे।।

    अर्थ · Hindi

    भूपहि बचन बानसम लागे। करहिं न प्रान पयान अभागे।।

  784. RCM 2.79.7Open verse →

    लोग बिकल मुरुछित नरनाहू। काह करिअ कछु सूझ न काहू।।

    अर्थ · Hindi

    लोग बिकल मुरुछित नरनाहू। काह करिअ कछु सूझ न काहू।।

  785. RCM 2.79.8Open verse →

    रामु तुरत मुनि बेषु बनाई। चले जनक जननिहि सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    रामु तुरत मुनि बेषु बनाई। चले जनक जननिहि सिरु नाई।।

  786. RCM 2.79.9Open verse →

    सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।

    अर्थ · Hindi

    सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।

  787. RCM 2.79.10Open verse →

    बंदि बिप्र गुर चरन प्रभु चले करि सबहि अचेत।।79।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि बिप्र गुर चरन प्रभु चले करि सबहि अचेत।।79।।

  788. RCM 2.80.1Open verse →

    निकसि बसिष्ठ द्वार भए ठाढ़े। देखे लोग बिरह दव दाढ़े।।

    अर्थ · Hindi

    निकसि बसिष्ठ द्वार भए ठाढ़े। देखे लोग बिरह दव दाढ़े।।

  789. RCM 2.80.2Open verse →

    कहि प्रिय बचन सकल समुझाए। बिप्र बृंद रघुबीर बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    कहि प्रिय बचन सकल समुझाए। बिप्र बृंद रघुबीर बोलाए।।

  790. RCM 2.80.3Open verse →

    गुर सन कहि बरषासन दीन्हे। आदर दान बिनय बस कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    गुर सन कहि बरषासन दीन्हे। आदर दान बिनय बस कीन्हे।।

  791. RCM 2.80.4Open verse →

    जाचक दान मान संतोषे। मीत पुनीत प्रेम परितोषे।।

    अर्थ · Hindi

    जाचक दान मान संतोषे। मीत पुनीत प्रेम परितोषे।।

  792. RCM 2.80.5Open verse →

    दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    दासीं दास बोलाइ बहोरी। गुरहि सौंपि बोले कर जोरी।।

  793. RCM 2.80.6Open verse →

    सब कै सार सँभार गोसाईं। करबि जनक जननी की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    सब कै सार सँभार गोसाईं। करबि जनक जननी की नाई।।

  794. RCM 2.80.7Open verse →

    बारहिं बार जोरि जुग पानी। कहत रामु सब सन मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    बारहिं बार जोरि जुग पानी। कहत रामु सब सन मृदु बानी।।

  795. RCM 2.80.8Open verse →

    सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जेहि तें रहै भुआल सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जेहि तें रहै भुआल सुखारी।।

  796. RCM 2.80.9Open verse →

    मातु सकल मोरे बिरहँ जेहिं न होहिं दुख दीन।

    अर्थ · Hindi

    मातु सकल मोरे बिरहँ जेहिं न होहिं दुख दीन।

  797. RCM 2.80.10Open verse →

    सोइ उपाउ तुम्ह करेहु सब पुर जन परम प्रबीन।।80।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ उपाउ तुम्ह करेहु सब पुर जन परम प्रबीन।।80।।

  798. RCM 2.81.1Open verse →

    एहि बिधि राम सबहि समुझावा। गुर पद पदुम हरषि सिरु नावा।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि राम सबहि समुझावा। गुर पद पदुम हरषि सिरु नावा।

  799. RCM 2.81.2Open verse →

    गनपती गौरि गिरीसु मनाई। चले असीस पाइ रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    गनपती गौरि गिरीसु मनाई। चले असीस पाइ रघुराई।।

  800. RCM 2.81.3Open verse →

    राम चलत अति भयउ बिषादू। सुनि न जाइ पुर आरत नादू।।

    अर्थ · Hindi

    राम चलत अति भयउ बिषादू। सुनि न जाइ पुर आरत नादू।।

  801. RCM 2.81.4Open verse →

    कुसगुन लंक अवध अति सोकू। हहरष बिषाद बिबस सुरलोकू।।

    अर्थ · Hindi

    कुसगुन लंक अवध अति सोकू। हहरष बिषाद बिबस सुरलोकू।।

  802. RCM 2.81.5Open verse →

    गइ मुरुछा तब भूपति जागे। बोलि सुमंत्रु कहन अस लागे।।

    अर्थ · Hindi

    गइ मुरुछा तब भूपति जागे। बोलि सुमंत्रु कहन अस लागे।।

  803. RCM 2.81.6Open verse →

    रामु चले बन प्रान न जाहीं। केहि सुख लागि रहत तन माहीं।

    अर्थ · Hindi

    रामु चले बन प्रान न जाहीं। केहि सुख लागि रहत तन माहीं।

  804. RCM 2.81.7Open verse →

    एहि तें कवन ब्यथा बलवाना। जो दुखु पाइ तजहिं तनु प्राना।।

    अर्थ · Hindi

    एहि तें कवन ब्यथा बलवाना। जो दुखु पाइ तजहिं तनु प्राना।।

  805. RCM 2.81.8Open verse →

    पुनि धरि धीर कहइ नरनाहू। लै रथु संग सखा तुम्ह जाहू।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि धरि धीर कहइ नरनाहू। लै रथु संग सखा तुम्ह जाहू।।

  806. RCM 2.81.9Open verse →

    -सुठि सुकुमार कुमार दोउ जनकसुता सुकुमारि।

    अर्थ · Hindi

    -सुठि सुकुमार कुमार दोउ जनकसुता सुकुमारि।

  807. RCM 2.81.10Open verse →

    रथ चढ़ाइ देखराइ बनु फिरेहु गएँ दिन चारि।।81।।

    अर्थ · Hindi

    रथ चढ़ाइ देखराइ बनु फिरेहु गएँ दिन चारि।।81।।

  808. RCM 2.82.1Open verse →

    जौ नहिं फिरहिं धीर दोउ भाई। सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    जौ नहिं फिरहिं धीर दोउ भाई। सत्यसंध दृढ़ब्रत रघुराई।।

  809. RCM 2.82.2Open verse →

    तौ तुम्ह बिनय करेहु कर जोरी। फेरिअ प्रभु मिथिलेसकिसोरी।।

    अर्थ · Hindi

    तौ तुम्ह बिनय करेहु कर जोरी। फेरिअ प्रभु मिथिलेसकिसोरी।।

  810. RCM 2.82.3Open verse →

    जब सिय कानन देखि डेराई। कहेहु मोरि सिख अवसरु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    जब सिय कानन देखि डेराई। कहेहु मोरि सिख अवसरु पाई।।

  811. RCM 2.82.4Open verse →

    सासु ससुर अस कहेउ सँदेसू। पुत्रि फिरिअ बन बहुत कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    सासु ससुर अस कहेउ सँदेसू। पुत्रि फिरिअ बन बहुत कलेसू।।

  812. RCM 2.82.5Open verse →

    पितृगृह कबहुँ कबहुँ ससुरारी। रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    पितृगृह कबहुँ कबहुँ ससुरारी। रहेहु जहाँ रुचि होइ तुम्हारी।।

  813. RCM 2.82.6Open verse →

    एहि बिधि करेहु उपाय कदंबा। फिरइ त होइ प्रान अवलंबा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि करेहु उपाय कदंबा। फिरइ त होइ प्रान अवलंबा।।

  814. RCM 2.82.7Open verse →

    नाहिं त मोर मरनु परिनामा। कछु न बसाइ भएँ बिधि बामा।।

    अर्थ · Hindi

    नाहिं त मोर मरनु परिनामा। कछु न बसाइ भएँ बिधि बामा।।

  815. RCM 2.82.8Open verse →

    अस कहि मुरुछि परा महि राऊ। रामु लखनु सिय आनि देखाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि मुरुछि परा महि राऊ। रामु लखनु सिय आनि देखाऊ।।

  816. RCM 2.82.9Open verse →

    -पाइ रजायसु नाइ सिरु रथु अति बेग बनाइ।

    अर्थ · Hindi

    -पाइ रजायसु नाइ सिरु रथु अति बेग बनाइ।

  817. RCM 2.82.10Open verse →

    गयउ जहाँ बाहेर नगर सीय सहित दोउ भाइ।।82।।

    अर्थ · Hindi

    गयउ जहाँ बाहेर नगर सीय सहित दोउ भाइ।।82।।

  818. RCM 2.83.1Open verse →

    तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए। करि बिनती रथ रामु चढ़ाए।।

    अर्थ · Hindi

    तब सुमंत्र नृप बचन सुनाए। करि बिनती रथ रामु चढ़ाए।।

  819. RCM 2.83.2Open verse →

    चढ़ि रथ सीय सहित दोउ भाई। चले हृदयँ अवधहि सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    चढ़ि रथ सीय सहित दोउ भाई। चले हृदयँ अवधहि सिरु नाई।।

  820. RCM 2.83.3Open verse →

    चलत रामु लखि अवध अनाथा। बिकल लोग सब लागे साथा।।

    अर्थ · Hindi

    चलत रामु लखि अवध अनाथा। बिकल लोग सब लागे साथा।।

  821. RCM 2.83.4Open verse →

    कृपासिंधु बहुबिधि समुझावहिं। फिरहिं प्रेम बस पुनि फिरि आवहिं।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु बहुबिधि समुझावहिं। फिरहिं प्रेम बस पुनि फिरि आवहिं।।

  822. RCM 2.83.5Open verse →

    लागति अवध भयावनि भारी। मानहुँ कालराति अँधिआरी।।

    अर्थ · Hindi

    लागति अवध भयावनि भारी। मानहुँ कालराति अँधिआरी।।

  823. RCM 2.83.6Open verse →

    घोर जंतु सम पुर नर नारी। डरपहिं एकहि एक निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    घोर जंतु सम पुर नर नारी। डरपहिं एकहि एक निहारी।।

  824. RCM 2.83.7Open verse →

    घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता।।

    अर्थ · Hindi

    घर मसान परिजन जनु भूता। सुत हित मीत मनहुँ जमदूता।।

  825. RCM 2.83.8Open verse →

    बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं। सरित सरोवर देखि न जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बागन्ह बिटप बेलि कुम्हिलाहीं। सरित सरोवर देखि न जाहीं।।

  826. RCM 2.83.9Open verse →

    हय गय कोटिन्ह केलिमृग पुरपसु चातक मोर।

    अर्थ · Hindi

    हय गय कोटिन्ह केलिमृग पुरपसु चातक मोर।

  827. RCM 2.83.10Open verse →

    पिक रथांग सुक सारिका सारस हंस चकोर।।83।।

    अर्थ · Hindi

    पिक रथांग सुक सारिका सारस हंस चकोर।।83।।

  828. RCM 2.84.1Open verse →

    राम बियोग बिकल सब ठाढ़े। जहँ तहँ मनहुँ चित्र लिखि काढ़े।।

    अर्थ · Hindi

    राम बियोग बिकल सब ठाढ़े। जहँ तहँ मनहुँ चित्र लिखि काढ़े।।

  829. RCM 2.84.2Open verse →

    नगरु सफल बनु गहबर भारी। खग मृग बिपुल सकल नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    नगरु सफल बनु गहबर भारी। खग मृग बिपुल सकल नर नारी।।

  830. RCM 2.84.3Open verse →

    बिधि कैकेई किरातिनि कीन्ही। जेंहि दव दुसह दसहुँ दिसि दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि कैकेई किरातिनि कीन्ही। जेंहि दव दुसह दसहुँ दिसि दीन्ही।।

  831. RCM 2.84.4Open verse →

    सहि न सके रघुबर बिरहागी। चले लोग सब ब्याकुल भागी।।

    अर्थ · Hindi

    सहि न सके रघुबर बिरहागी। चले लोग सब ब्याकुल भागी।।

  832. RCM 2.84.5Open verse →

    सबहिं बिचार कीन्ह मन माहीं। राम लखन सिय बिनु सुखु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सबहिं बिचार कीन्ह मन माहीं। राम लखन सिय बिनु सुखु नाहीं।।

  833. RCM 2.84.6Open verse →

    जहाँ रामु तहँ सबुइ समाजू। बिनु रघुबीर अवध नहिं काजू।।

    अर्थ · Hindi

    जहाँ रामु तहँ सबुइ समाजू। बिनु रघुबीर अवध नहिं काजू।।

  834. RCM 2.84.7Open verse →

    चले साथ अस मंत्रु दृढ़ाई। सुर दुर्लभ सुख सदन बिहाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले साथ अस मंत्रु दृढ़ाई। सुर दुर्लभ सुख सदन बिहाई।।

  835. RCM 2.84.8Open verse →

    राम चरन पंकज प्रिय जिन्हही। बिषय भोग बस करहिं कि तिन्हही।।

    अर्थ · Hindi

    राम चरन पंकज प्रिय जिन्हही। बिषय भोग बस करहिं कि तिन्हही।।

  836. RCM 2.84.9Open verse →

    बालक बृद्ध बिहाइ गृँह लगे लोग सब साथ।

    अर्थ · Hindi

    बालक बृद्ध बिहाइ गृँह लगे लोग सब साथ।

  837. RCM 2.84.10Open verse →

    तमसा तीर निवासु किय प्रथम दिवस रघुनाथ।।84।।

    अर्थ · Hindi

    तमसा तीर निवासु किय प्रथम दिवस रघुनाथ।।84।।

  838. RCM 2.85.1Open verse →

    रघुपति प्रजा प्रेमबस देखी। सदय हृदयँ दुखु भयउ बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति प्रजा प्रेमबस देखी। सदय हृदयँ दुखु भयउ बिसेषी।।

  839. RCM 2.85.2Open verse →

    करुनामय रघुनाथ गोसाँई। बेगि पाइअहिं पीर पराई।।

    अर्थ · Hindi

    करुनामय रघुनाथ गोसाँई। बेगि पाइअहिं पीर पराई।।

  840. RCM 2.85.3Open verse →

    कहि सप्रेम मृदु बचन सुहाए। बहुबिधि राम लोग समुझाए।।

    अर्थ · Hindi

    कहि सप्रेम मृदु बचन सुहाए। बहुबिधि राम लोग समुझाए।।

  841. RCM 2.85.4Open verse →

    किए धरम उपदेस घनेरे। लोग प्रेम बस फिरहिं न फेरे।।

    अर्थ · Hindi

    किए धरम उपदेस घनेरे। लोग प्रेम बस फिरहिं न फेरे।।

  842. RCM 2.85.5Open verse →

    सीलु सनेहु छाड़ि नहिं जाई। असमंजस बस भे रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    सीलु सनेहु छाड़ि नहिं जाई। असमंजस बस भे रघुराई।।

  843. RCM 2.85.6Open verse →

    लोग सोग श्रम बस गए सोई। कछुक देवमायाँ मति मोई।।

    अर्थ · Hindi

    लोग सोग श्रम बस गए सोई। कछुक देवमायाँ मति मोई।।

  844. RCM 2.85.7Open verse →

    जबहिं जाम जुग जामिनि बीती। राम सचिव सन कहेउ सप्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    जबहिं जाम जुग जामिनि बीती। राम सचिव सन कहेउ सप्रीती।।

  845. RCM 2.85.8Open verse →

    खोज मारि रथु हाँकहु ताता। आन उपायँ बनिहि नहिं बाता।।

    अर्थ · Hindi

    खोज मारि रथु हाँकहु ताता। आन उपायँ बनिहि नहिं बाता।।

  846. RCM 2.85.9Open verse →

    राम लखन सुय जान चढ़ि संभु चरन सिरु नाइ।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सुय जान चढ़ि संभु चरन सिरु नाइ।।

  847. RCM 2.85.10Open verse →

    सचिवँ चलायउ तुरत रथु इत उत खोज दुराइ।।85।।

    अर्थ · Hindi

    सचिवँ चलायउ तुरत रथु इत उत खोज दुराइ।।85।।

  848. RCM 2.86.1Open verse →

    जागे सकल लोग भएँ भोरू। गे रघुनाथ भयउ अति सोरू।।

    अर्थ · Hindi

    जागे सकल लोग भएँ भोरू। गे रघुनाथ भयउ अति सोरू।।

  849. RCM 2.86.2Open verse →

    रथ कर खोज कतहहुँ नहिं पावहिं। राम राम कहि चहु दिसि धावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    रथ कर खोज कतहहुँ नहिं पावहिं। राम राम कहि चहु दिसि धावहिं।।

  850. RCM 2.86.3Open verse →

    मनहुँ बारिनिधि बूड़ जहाजू। भयउ बिकल बड़ बनिक समाजू।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ बारिनिधि बूड़ जहाजू। भयउ बिकल बड़ बनिक समाजू।।

  851. RCM 2.86.4Open verse →

    एकहि एक देंहिं उपदेसू। तजे राम हम जानि कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    एकहि एक देंहिं उपदेसू। तजे राम हम जानि कलेसू।।

  852. RCM 2.86.5Open verse →

    निंदहिं आपु सराहहिं मीना। धिग जीवनु रघुबीर बिहीना।।

    अर्थ · Hindi

    निंदहिं आपु सराहहिं मीना। धिग जीवनु रघुबीर बिहीना।।

  853. RCM 2.86.6Open verse →

    जौं पै प्रिय बियोगु बिधि कीन्हा। तौ कस मरनु न मागें दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पै प्रिय बियोगु बिधि कीन्हा। तौ कस मरनु न मागें दीन्हा।।

  854. RCM 2.86.7Open verse →

    एहि बिधि करत प्रलाप कलापा। आए अवध भरे परितापा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि करत प्रलाप कलापा। आए अवध भरे परितापा।।

  855. RCM 2.86.8Open verse →

    बिषम बियोगु न जाइ बखाना। अवधि आस सब राखहिं प्राना।।

    अर्थ · Hindi

    बिषम बियोगु न जाइ बखाना। अवधि आस सब राखहिं प्राना।।

  856. RCM 2.86.9Open verse →

    राम दरस हित नेम ब्रत लगे करन नर नारि।

    अर्थ · Hindi

    राम दरस हित नेम ब्रत लगे करन नर नारि।

  857. RCM 2.86.10Open verse →

    मनहुँ कोक कोकी कमल दीन बिहीन तमारि।।86।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ कोक कोकी कमल दीन बिहीन तमारि।।86।।

  858. RCM 2.87.1Open verse →

    सीता सचिव सहित दोउ भाई। सृंगबेरपुर पहुँचे जाई।।

    अर्थ · Hindi

    सीता सचिव सहित दोउ भाई। सृंगबेरपुर पहुँचे जाई।।

  859. RCM 2.87.2Open verse →

    उतरे राम देवसरि देखी। कीन्ह दंडवत हरषु बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    उतरे राम देवसरि देखी। कीन्ह दंडवत हरषु बिसेषी।।

  860. RCM 2.87.3Open verse →

    लखन सचिवँ सियँ किए प्रनामा। सबहि सहित सुखु पायउ रामा।।

    अर्थ · Hindi

    लखन सचिवँ सियँ किए प्रनामा। सबहि सहित सुखु पायउ रामा।।

  861. RCM 2.87.4Open verse →

    गंग सकल मुद मंगल मूला। सब सुख करनि हरनि सब सूला।।

    अर्थ · Hindi

    गंग सकल मुद मंगल मूला। सब सुख करनि हरनि सब सूला।।

  862. RCM 2.87.5Open verse →

    कहि कहि कोटिक कथा प्रसंगा। रामु बिलोकहिं गंग तरंगा।।

    अर्थ · Hindi

    कहि कहि कोटिक कथा प्रसंगा। रामु बिलोकहिं गंग तरंगा।।

  863. RCM 2.87.6Open verse →

    सचिवहि अनुजहि प्रियहि सुनाई। बिबुध नदी महिमा अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    सचिवहि अनुजहि प्रियहि सुनाई। बिबुध नदी महिमा अधिकाई।।

  864. RCM 2.87.7Open verse →

    मज्जनु कीन्ह पंथ श्रम गयऊ। सुचि जलु पिअत मुदित मन भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मज्जनु कीन्ह पंथ श्रम गयऊ। सुचि जलु पिअत मुदित मन भयऊ।।

  865. RCM 2.87.8Open verse →

    सुमिरत जाहि मिटइ श्रम भारू। तेहि श्रम यह लौकिक ब्यवहारू।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरत जाहि मिटइ श्रम भारू। तेहि श्रम यह लौकिक ब्यवहारू।।

  866. RCM 2.87.9Open verse →

    सुध्द सचिदानंदमय कंद भानुकुल केतु।

    अर्थ · Hindi

    सुध्द सचिदानंदमय कंद भानुकुल केतु।

  867. RCM 2.87.10Open verse →

    चरित करत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु।।87।।

    अर्थ · Hindi

    चरित करत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु।।87।।

  868. RCM 2.88.1Open verse →

    यह सुधि गुहँ निषाद जब पाई। मुदित लिए प्रिय बंधु बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    यह सुधि गुहँ निषाद जब पाई। मुदित लिए प्रिय बंधु बोलाई।।

  869. RCM 2.88.2Open verse →

    लिए फल मूल भेंट भरि भारा। मिलन चलेउ हिंयँ हरषु अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    लिए फल मूल भेंट भरि भारा। मिलन चलेउ हिंयँ हरषु अपारा।।

  870. RCM 2.88.3Open verse →

    करि दंडवत भेंट धरि आगें। प्रभुहि बिलोकत अति अनुरागें।।

    अर्थ · Hindi

    करि दंडवत भेंट धरि आगें। प्रभुहि बिलोकत अति अनुरागें।।

  871. RCM 2.88.4Open verse →

    सहज सनेह बिबस रघुराई। पूँछी कुसल निकट बैठाई।।

    अर्थ · Hindi

    सहज सनेह बिबस रघुराई। पूँछी कुसल निकट बैठाई।।

  872. RCM 2.88.5Open verse →

    नाथ कुसल पद पंकज देखें। भयउँ भागभाजन जन लेखें।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ कुसल पद पंकज देखें। भयउँ भागभाजन जन लेखें।।

  873. RCM 2.88.6Open verse →

    देव धरनि धनु धामु तुम्हारा। मैं जनु नीचु सहित परिवारा।।

    अर्थ · Hindi

    देव धरनि धनु धामु तुम्हारा। मैं जनु नीचु सहित परिवारा।।

  874. RCM 2.88.7Open verse →

    कृपा करिअ पुर धारिअ पाऊ। थापिय जनु सबु लोगु सिहाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कृपा करिअ पुर धारिअ पाऊ। थापिय जनु सबु लोगु सिहाऊ।।

  875. RCM 2.88.8Open verse →

    कहेहु सत्य सबु सखा सुजाना। मोहि दीन्ह पितु आयसु आना।।

    अर्थ · Hindi

    कहेहु सत्य सबु सखा सुजाना। मोहि दीन्ह पितु आयसु आना।।

  876. RCM 2.88.9Open verse →

    बरष चारिदस बासु बन मुनि ब्रत बेषु अहारु।

    अर्थ · Hindi

    बरष चारिदस बासु बन मुनि ब्रत बेषु अहारु।

  877. RCM 2.88.10Open verse →

    ग्राम बासु नहिं उचित सुनि गुहहि भयउ दुखु भारु।।88।।

    अर्थ · Hindi

    ग्राम बासु नहिं उचित सुनि गुहहि भयउ दुखु भारु।।88।।

  878. RCM 2.89.1Open verse →

    राम लखन सिय रूप निहारी। कहहिं सप्रेम ग्राम नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सिय रूप निहारी। कहहिं सप्रेम ग्राम नर नारी।।

  879. RCM 2.89.2Open verse →

    ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।

    अर्थ · Hindi

    ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।

  880. RCM 2.89.3Open verse →

    एक कहहिं भल भूपति कीन्हा। लोयन लाहु हमहि बिधि दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    एक कहहिं भल भूपति कीन्हा। लोयन लाहु हमहि बिधि दीन्हा।।

  881. RCM 2.89.4Open verse →

    तब निषादपति उर अनुमाना। तरु सिंसुपा मनोहर जाना।।

    अर्थ · Hindi

    तब निषादपति उर अनुमाना। तरु सिंसुपा मनोहर जाना।।

  882. RCM 2.89.5Open verse →

    लै रघुनाथहि ठाउँ देखावा। कहेउ राम सब भाँति सुहावा।।

    अर्थ · Hindi

    लै रघुनाथहि ठाउँ देखावा। कहेउ राम सब भाँति सुहावा।।

  883. RCM 2.89.6Open verse →

    पुरजन करि जोहारु घर आए। रघुबर संध्या करन सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन करि जोहारु घर आए। रघुबर संध्या करन सिधाए।।

  884. RCM 2.89.7Open verse →

    गुहँ सँवारि साँथरी डसाई। कुस किसलयमय मृदुल सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    गुहँ सँवारि साँथरी डसाई। कुस किसलयमय मृदुल सुहाई।।

  885. RCM 2.89.8Open verse →

    सुचि फल मूल मधुर मृदु जानी। दोना भरि भरि राखेसि पानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुचि फल मूल मधुर मृदु जानी। दोना भरि भरि राखेसि पानी।।

  886. RCM 2.89.9Open verse →

    सिय सुमंत्र भ्राता सहित कंद मूल फल खाइ।

    अर्थ · Hindi

    सिय सुमंत्र भ्राता सहित कंद मूल फल खाइ।

  887. RCM 2.89.10Open verse →

    सयन कीन्ह रघुबंसमनि पाय पलोटत भाइ।।89।।

    अर्थ · Hindi

    सयन कीन्ह रघुबंसमनि पाय पलोटत भाइ।।89।।

  888. RCM 2.90.1Open verse →

    उठे लखनु प्रभु सोवत जानी। कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    उठे लखनु प्रभु सोवत जानी। कहि सचिवहि सोवन मृदु बानी।।

  889. RCM 2.90.2Open verse →

    कछुक दूर सजि बान सरासन। जागन लगे बैठि बीरासन।।

    अर्थ · Hindi

    कछुक दूर सजि बान सरासन। जागन लगे बैठि बीरासन।।

  890. RCM 2.90.3Open verse →

    गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती। ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    गुँह बोलाइ पाहरू प्रतीती। ठावँ ठाँव राखे अति प्रीती।।

  891. RCM 2.90.4Open verse →

    आपु लखन पहिं बैठेउ जाई। कटि भाथी सर चाप चढ़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    आपु लखन पहिं बैठेउ जाई। कटि भाथी सर चाप चढ़ाई।।

  892. RCM 2.90.5Open verse →

    सोवत प्रभुहि निहारि निषादू। भयउ प्रेम बस ह्दयँ बिषादू।।

    अर्थ · Hindi

    सोवत प्रभुहि निहारि निषादू। भयउ प्रेम बस ह्दयँ बिषादू।।

  893. RCM 2.90.6Open verse →

    तनु पुलकित जलु लोचन बहई। बचन सप्रेम लखन सन कहई।।

    अर्थ · Hindi

    तनु पुलकित जलु लोचन बहई। बचन सप्रेम लखन सन कहई।।

  894. RCM 2.90.7Open verse →

    भूपति भवन सुभायँ सुहावा। सुरपति सदनु न पटतर पावा।।

    अर्थ · Hindi

    भूपति भवन सुभायँ सुहावा। सुरपति सदनु न पटतर पावा।।

  895. RCM 2.90.8Open verse →

    मनिमय रचित चारु चौबारे। जनु रतिपति निज हाथ सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    मनिमय रचित चारु चौबारे। जनु रतिपति निज हाथ सँवारे।।

  896. RCM 2.90.9Open verse →

    सुचि सुबिचित्र सुभोगमय सुमन सुगंध सुबास।

    अर्थ · Hindi

    सुचि सुबिचित्र सुभोगमय सुमन सुगंध सुबास।

  897. RCM 2.90.10Open verse →

    पलँग मंजु मनिदीप जहँ सब बिधि सकल सुपास।।90।।

    अर्थ · Hindi

    पलँग मंजु मनिदीप जहँ सब बिधि सकल सुपास।।90।।

  898. RCM 2.91.1Open verse →

    बिबिध बसन उपधान तुराई। छीर फेन मृदु बिसद सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध बसन उपधान तुराई। छीर फेन मृदु बिसद सुहाई।।

  899. RCM 2.91.2Open verse →

    तहँ सिय रामु सयन निसि करहीं। निज छबि रति मनोज मदु हरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ सिय रामु सयन निसि करहीं। निज छबि रति मनोज मदु हरहीं।।

  900. RCM 2.91.3Open verse →

    ते सिय रामु साथरीं सोए। श्रमित बसन बिनु जाहिं न जोए।।

    अर्थ · Hindi

    ते सिय रामु साथरीं सोए। श्रमित बसन बिनु जाहिं न जोए।।

  901. RCM 2.91.4Open verse →

    मातु पिता परिजन पुरबासी। सखा सुसील दास अरु दासी।।

    अर्थ · Hindi

    मातु पिता परिजन पुरबासी। सखा सुसील दास अरु दासी।।

  902. RCM 2.91.5Open verse →

    जोगवहिं जिन्हहि प्रान की नाई। महि सोवत तेइ राम गोसाईं।।

    अर्थ · Hindi

    जोगवहिं जिन्हहि प्रान की नाई। महि सोवत तेइ राम गोसाईं।।

  903. RCM 2.91.6Open verse →

    पिता जनक जग बिदित प्रभाऊ। ससुर सुरेस सखा रघुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पिता जनक जग बिदित प्रभाऊ। ससुर सुरेस सखा रघुराऊ।।

  904. RCM 2.91.7Open verse →

    रामचंदु पति सो बैदेही। सोवत महि बिधि बाम न केही।।

    अर्थ · Hindi

    रामचंदु पति सो बैदेही। सोवत महि बिधि बाम न केही।।

  905. RCM 2.91.8Open verse →

    सिय रघुबीर कि कानन जोगू। करम प्रधान सत्य कह लोगू।।

    अर्थ · Hindi

    सिय रघुबीर कि कानन जोगू। करम प्रधान सत्य कह लोगू।।

  906. RCM 2.91.9Open verse →

    कैकयनंदिनि मंदमति कठिन कुटिलपनु कीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    कैकयनंदिनि मंदमति कठिन कुटिलपनु कीन्ह।

  907. RCM 2.91.10Open verse →

    जेहीं रघुनंदन जानकिहि सुख अवसर दुखु दीन्ह।।91।।

    अर्थ · Hindi

    जेहीं रघुनंदन जानकिहि सुख अवसर दुखु दीन्ह।।91।।

  908. RCM 2.92.1Open verse →

    भइ दिनकर कुल बिटप कुठारी। कुमति कीन्ह सब बिस्व दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    भइ दिनकर कुल बिटप कुठारी। कुमति कीन्ह सब बिस्व दुखारी।।

  909. RCM 2.92.2Open verse →

    भयउ बिषादु निषादहि भारी। राम सीय महि सयन निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ बिषादु निषादहि भारी। राम सीय महि सयन निहारी।।

  910. RCM 2.92.3Open verse →

    बोले लखन मधुर मृदु बानी। ग्यान बिराग भगति रस सानी।।

    अर्थ · Hindi

    बोले लखन मधुर मृदु बानी। ग्यान बिराग भगति रस सानी।।

  911. RCM 2.92.4Open verse →

    काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता।।

  912. RCM 2.92.5Open verse →

    जोग बियोग भोग भल मंदा। हित अनहित मध्यम भ्रम फंदा।।

    अर्थ · Hindi

    जोग बियोग भोग भल मंदा। हित अनहित मध्यम भ्रम फंदा।।

  913. RCM 2.92.6Open verse →

    जनमु मरनु जहँ लगि जग जालू। संपती बिपति करमु अरु कालू।।

    अर्थ · Hindi

    जनमु मरनु जहँ लगि जग जालू। संपती बिपति करमु अरु कालू।।

  914. RCM 2.92.7Open verse →

    धरनि धामु धनु पुर परिवारू। सरगु नरकु जहँ लगि ब्यवहारू।।

    अर्थ · Hindi

    धरनि धामु धनु पुर परिवारू। सरगु नरकु जहँ लगि ब्यवहारू।।

  915. RCM 2.92.8Open verse →

    देखिअ सुनिअ गुनिअ मन माहीं। मोह मूल परमारथु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    देखिअ सुनिअ गुनिअ मन माहीं। मोह मूल परमारथु नाहीं।।

  916. RCM 2.92.9Open verse →

    सपनें होइ भिखारि नृप रंकु नाकपति होइ।

    अर्थ · Hindi

    सपनें होइ भिखारि नृप रंकु नाकपति होइ।

  917. RCM 2.92.10Open verse →

    जागें लाभु न हानि कछु तिमि प्रपंच जियँ जोइ।।92।।

    अर्थ · Hindi

    जागें लाभु न हानि कछु तिमि प्रपंच जियँ जोइ।।92।।

  918. RCM 2.93.1Open verse →

    अस बिचारि नहिं कीजअ रोसू। काहुहि बादि न देइअ दोसू।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि नहिं कीजअ रोसू। काहुहि बादि न देइअ दोसू।।

  919. RCM 2.93.2Open verse →

    मोह निसाँ सबु सोवनिहारा। देखिअ सपन अनेक प्रकारा।।

    अर्थ · Hindi

    मोह निसाँ सबु सोवनिहारा। देखिअ सपन अनेक प्रकारा।।

  920. RCM 2.93.3Open verse →

    एहिं जग जामिनि जागहिं जोगी। परमारथी प्रपंच बियोगी।।

    अर्थ · Hindi

    एहिं जग जामिनि जागहिं जोगी। परमारथी प्रपंच बियोगी।।

  921. RCM 2.93.4Open verse →

    जानिअ तबहिं जीव जग जागा। जब जब बिषय बिलास बिरागा।।

    अर्थ · Hindi

    जानिअ तबहिं जीव जग जागा। जब जब बिषय बिलास बिरागा।।

  922. RCM 2.93.5Open verse →

    होइ बिबेकु मोह भ्रम भागा। तब रघुनाथ चरन अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    होइ बिबेकु मोह भ्रम भागा। तब रघुनाथ चरन अनुरागा।।

  923. RCM 2.93.6Open verse →

    सखा परम परमारथु एहू। मन क्रम बचन राम पद नेहू।।

    अर्थ · Hindi

    सखा परम परमारथु एहू। मन क्रम बचन राम पद नेहू।।

  924. RCM 2.93.7Open verse →

    राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अबिगत अलख अनादि अनूपा।।

    अर्थ · Hindi

    राम ब्रह्म परमारथ रूपा। अबिगत अलख अनादि अनूपा।।

  925. RCM 2.93.8Open verse →

    सकल बिकार रहित गतभेदा। कहि नित नेति निरूपहिं बेदा।

    अर्थ · Hindi

    सकल बिकार रहित गतभेदा। कहि नित नेति निरूपहिं बेदा।

  926. RCM 2.93.9Open verse →

    भगत भूमि भूसुर सुरभि सुर हित लागि कृपाल।

    अर्थ · Hindi

    भगत भूमि भूसुर सुरभि सुर हित लागि कृपाल।

  927. RCM 2.93.10Open verse →

    करत चरित धरि मनुज तनु सुनत मिटहि जग जाल।।93।।

    अर्थ · Hindi

    करत चरित धरि मनुज तनु सुनत मिटहि जग जाल।।93।।

  928. RCM 2.94.1Open verse →

    सखा समुझि अस परिहरि मोहु। सिय रघुबीर चरन रत होहू।।

    अर्थ · Hindi

    सखा समुझि अस परिहरि मोहु। सिय रघुबीर चरन रत होहू।।

  929. RCM 2.94.2Open verse →

    कहत राम गुन भा भिनुसारा। जागे जग मंगल सुखदारा।।

    अर्थ · Hindi

    कहत राम गुन भा भिनुसारा। जागे जग मंगल सुखदारा।।

  930. RCM 2.94.3Open verse →

    सकल सोच करि राम नहावा। सुचि सुजान बट छीर मगावा।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सोच करि राम नहावा। सुचि सुजान बट छीर मगावा।।

  931. RCM 2.94.4Open verse →

    अनुज सहित सिर जटा बनाए। देखि सुमंत्र नयन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    अनुज सहित सिर जटा बनाए। देखि सुमंत्र नयन जल छाए।।

  932. RCM 2.94.5Open verse →

    हृदयँ दाहु अति बदन मलीना। कह कर जोरि बचन अति दीना।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ दाहु अति बदन मलीना। कह कर जोरि बचन अति दीना।।

  933. RCM 2.94.6Open verse →

    नाथ कहेउ अस कोसलनाथा। लै रथु जाहु राम कें साथा।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ कहेउ अस कोसलनाथा। लै रथु जाहु राम कें साथा।।

  934. RCM 2.94.7Open verse →

    बनु देखाइ सुरसरि अन्हवाई। आनेहु फेरि बेगि दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बनु देखाइ सुरसरि अन्हवाई। आनेहु फेरि बेगि दोउ भाई।।

  935. RCM 2.94.8Open verse →

    लखनु रामु सिय आनेहु फेरी। संसय सकल सँकोच निबेरी।।

    अर्थ · Hindi

    लखनु रामु सिय आनेहु फेरी। संसय सकल सँकोच निबेरी।।

  936. RCM 2.94.9Open verse →

    नृप अस कहेउ गोसाईं जस कहइ करौं बलि सोइ।

    अर्थ · Hindi

    नृप अस कहेउ गोसाईं जस कहइ करौं बलि सोइ।

  937. RCM 2.94.10Open verse →

    करि बिनती पायन्ह परेउ दीन्ह बाल जिमि रोइ।।94।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिनती पायन्ह परेउ दीन्ह बाल जिमि रोइ।।94।।

  938. RCM 2.95.1Open verse →

    तात कृपा करि कीजिअ सोई। जातें अवध अनाथ न होई।।

    अर्थ · Hindi

    तात कृपा करि कीजिअ सोई। जातें अवध अनाथ न होई।।

  939. RCM 2.95.2Open verse →

    मंत्रहि राम उठाइ प्रबोधा। तात धरम मतु तुम्ह सबु सोधा।।

    अर्थ · Hindi

    मंत्रहि राम उठाइ प्रबोधा। तात धरम मतु तुम्ह सबु सोधा।।

  940. RCM 2.95.3Open verse →

    सिबि दधीचि हरिचंद नरेसा। सहे धरम हित कोटि कलेसा।।

    अर्थ · Hindi

    सिबि दधीचि हरिचंद नरेसा। सहे धरम हित कोटि कलेसा।।

  941. RCM 2.95.4Open verse →

    रंतिदेव बलि भूप सुजाना। धरमु धरेउ सहि संकट नाना।।

    अर्थ · Hindi

    रंतिदेव बलि भूप सुजाना। धरमु धरेउ सहि संकट नाना।।

  942. RCM 2.95.5Open verse →

    धरमु न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    धरमु न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना।।

  943. RCM 2.95.6Open verse →

    मैं सोइ धरमु सुलभ करि पावा। तजें तिहूँ पुर अपजसु छावा।।

    अर्थ · Hindi

    मैं सोइ धरमु सुलभ करि पावा। तजें तिहूँ पुर अपजसु छावा।।

  944. RCM 2.95.7Open verse →

    संभावित कहुँ अपजस लाहू। मरन कोटि सम दारुन दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    संभावित कहुँ अपजस लाहू। मरन कोटि सम दारुन दाहू।।

  945. RCM 2.95.8Open verse →

    तुम्ह सन तात बहुत का कहऊँ। दिएँ उतरु फिरि पातकु लहऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सन तात बहुत का कहऊँ। दिएँ उतरु फिरि पातकु लहऊँ।।

  946. RCM 2.95.9Open verse →

    पितु पद गहि कहि कोटि नति बिनय करब कर जोरि।

    अर्थ · Hindi

    पितु पद गहि कहि कोटि नति बिनय करब कर जोरि।

  947. RCM 2.95.10Open verse →

    चिंता कवनिहु बात कै तात करिअ जनि मोरि।।95।।

    अर्थ · Hindi

    चिंता कवनिहु बात कै तात करिअ जनि मोरि।।95।।

  948. RCM 2.96.1Open verse →

    तुम्ह पुनि पितु सम अति हित मोरें। बिनती करउँ तात कर जोरें।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह पुनि पितु सम अति हित मोरें। बिनती करउँ तात कर जोरें।।

  949. RCM 2.96.2Open verse →

    सब बिधि सोइ करतब्य तुम्हारें। दुख न पाव पितु सोच हमारें।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि सोइ करतब्य तुम्हारें। दुख न पाव पितु सोच हमारें।।

  950. RCM 2.96.3Open verse →

    सुनि रघुनाथ सचिव संबादू। भयउ सपरिजन बिकल निषादू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रघुनाथ सचिव संबादू। भयउ सपरिजन बिकल निषादू।।

  951. RCM 2.96.4Open verse →

    पुनि कछु लखन कही कटु बानी। प्रभु बरजे बड़ अनुचित जानी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कछु लखन कही कटु बानी। प्रभु बरजे बड़ अनुचित जानी।।

  952. RCM 2.96.5Open verse →

    सकुचि राम निज सपथ देवाई। लखन सँदेसु कहिअ जनि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    सकुचि राम निज सपथ देवाई। लखन सँदेसु कहिअ जनि जाई।।

  953. RCM 2.96.6Open verse →

    कह सुमंत्रु पुनि भूप सँदेसू। सहि न सकिहि सिय बिपिन कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    कह सुमंत्रु पुनि भूप सँदेसू। सहि न सकिहि सिय बिपिन कलेसू।।

  954. RCM 2.96.7Open verse →

    जेहि बिधि अवध आव फिरि सीया। सोइ रघुबरहि तुम्हहि करनीया।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बिधि अवध आव फिरि सीया। सोइ रघुबरहि तुम्हहि करनीया।।

  955. RCM 2.96.8Open verse →

    नतरु निपट अवलंब बिहीना। मैं न जिअब जिमि जल बिनु मीना।।

    अर्थ · Hindi

    नतरु निपट अवलंब बिहीना। मैं न जिअब जिमि जल बिनु मीना।।

  956. RCM 2.96.9Open verse →

    मइकें ससरें सकल सुख जबहिं जहाँ मनु मान।।

    अर्थ · Hindi

    मइकें ससरें सकल सुख जबहिं जहाँ मनु मान।।

  957. RCM 2.96.10Open verse →

    तँह तब रहिहि सुखेन सिय जब लगि बिपति बिहान।।96।।

    अर्थ · Hindi

    तँह तब रहिहि सुखेन सिय जब लगि बिपति बिहान।।96।।

  958. RCM 2.97.1Open verse →

    बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती। आरति प्रीति न सो कहि जाती।।

    अर्थ · Hindi

    बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती। आरति प्रीति न सो कहि जाती।।

  959. RCM 2.97.2Open verse →

    पितु सँदेसु सुनि कृपानिधाना। सियहि दीन्ह सिख कोटि बिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    पितु सँदेसु सुनि कृपानिधाना। सियहि दीन्ह सिख कोटि बिधाना।।

  960. RCM 2.97.3Open verse →

    सासु ससुर गुर प्रिय परिवारू। फिरतु त सब कर मिटै खभारू।।

    अर्थ · Hindi

    सासु ससुर गुर प्रिय परिवारू। फिरतु त सब कर मिटै खभारू।।

  961. RCM 2.97.4Open verse →

    सुनि पति बचन कहति बैदेही। सुनहु प्रानपति परम सनेही।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि पति बचन कहति बैदेही। सुनहु प्रानपति परम सनेही।।

  962. RCM 2.97.5Open verse →

    प्रभु करुनामय परम बिबेकी। तनु तजि रहति छाँह किमि छेंकी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु करुनामय परम बिबेकी। तनु तजि रहति छाँह किमि छेंकी।।

  963. RCM 2.97.6Open verse →

    प्रभा जाइ कहँ भानु बिहाई। कहँ चंद्रिका चंदु तजि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभा जाइ कहँ भानु बिहाई। कहँ चंद्रिका चंदु तजि जाई।।

  964. RCM 2.97.7Open verse →

    पतिहि प्रेममय बिनय सुनाई। कहति सचिव सन गिरा सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    पतिहि प्रेममय बिनय सुनाई। कहति सचिव सन गिरा सुहाई।।

  965. RCM 2.97.8Open verse →

    तुम्ह पितु ससुर सरिस हितकारी। उतरु देउँ फिरि अनुचित भारी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह पितु ससुर सरिस हितकारी। उतरु देउँ फिरि अनुचित भारी।।

  966. RCM 2.97.9Open verse →

    आरति बस सनमुख भइउँ बिलगु न मानब तात।

    अर्थ · Hindi

    आरति बस सनमुख भइउँ बिलगु न मानब तात।

  967. RCM 2.97.10Open verse →

    आरजसुत पद कमल बिनु बादि जहाँ लगि नात।।97।।

    अर्थ · Hindi

    आरजसुत पद कमल बिनु बादि जहाँ लगि नात।।97।।

  968. RCM 2.98.1Open verse →

    पितु बैभव बिलास मैं डीठा। नृप मनि मुकुट मिलित पद पीठा।।

    अर्थ · Hindi

    पितु बैभव बिलास मैं डीठा। नृप मनि मुकुट मिलित पद पीठा।।

  969. RCM 2.98.2Open verse →

    सुखनिधान अस पितु गृह मोरें। पिय बिहीन मन भाव न भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    सुखनिधान अस पितु गृह मोरें। पिय बिहीन मन भाव न भोरें।।

  970. RCM 2.98.3Open verse →

    ससुर चक्कवइ कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    ससुर चक्कवइ कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।

  971. RCM 2.98.4Open verse →

    आगें होइ जेहि सुरपति लेई। अरध सिंघासन आसनु देई।।

    अर्थ · Hindi

    आगें होइ जेहि सुरपति लेई। अरध सिंघासन आसनु देई।।

  972. RCM 2.98.5Open verse →

    ससुरु एतादृस अवध निवासू। प्रिय परिवारु मातु सम सासू।।

    अर्थ · Hindi

    ससुरु एतादृस अवध निवासू। प्रिय परिवारु मातु सम सासू।।

  973. RCM 2.98.6Open verse →

    बिनु रघुपति पद पदुम परागा। मोहि केउ सपनेहुँ सुखद न लागा।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु रघुपति पद पदुम परागा। मोहि केउ सपनेहुँ सुखद न लागा।।

  974. RCM 2.98.7Open verse →

    अगम पंथ बनभूमि पहारा। करि केहरि सर सरित अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    अगम पंथ बनभूमि पहारा। करि केहरि सर सरित अपारा।।

  975. RCM 2.98.8Open verse →

    कोल किरात कुरंग बिहंगा। मोहि सब सुखद प्रानपति संगा।।

    अर्थ · Hindi

    कोल किरात कुरंग बिहंगा। मोहि सब सुखद प्रानपति संगा।।

  976. RCM 2.98.9Open verse →

    सासु ससुर सन मोरि हुँति बिनय करबि परि पायँ।।

    अर्थ · Hindi

    सासु ससुर सन मोरि हुँति बिनय करबि परि पायँ।।

  977. RCM 2.98.10Open verse →

    मोर सोचु जनि करिअ कछु मैं बन सुखी सुभायँ।।98।।

    अर्थ · Hindi

    मोर सोचु जनि करिअ कछु मैं बन सुखी सुभायँ।।98।।

  978. RCM 2.99.1Open verse →

    प्राननाथ प्रिय देवर साथा। बीर धुरीन धरें धनु भाथा।।

    अर्थ · Hindi

    प्राननाथ प्रिय देवर साथा। बीर धुरीन धरें धनु भाथा।।

  979. RCM 2.99.2Open verse →

    नहिं मग श्रमु भ्रमु दुख मन मोरें। मोहि लगि सोचु करिअ जनि भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं मग श्रमु भ्रमु दुख मन मोरें। मोहि लगि सोचु करिअ जनि भोरें।।

  980. RCM 2.99.3Open verse →

    सुनि सुमंत्रु सिय सीतलि बानी। भयउ बिकल जनु फनि मनि हानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुमंत्रु सिय सीतलि बानी। भयउ बिकल जनु फनि मनि हानी।।

  981. RCM 2.99.4Open verse →

    नयन सूझ नहिं सुनइ न काना। कहि न सकइ कछु अति अकुलाना।।

    अर्थ · Hindi

    नयन सूझ नहिं सुनइ न काना। कहि न सकइ कछु अति अकुलाना।।

  982. RCM 2.99.5Open verse →

    राम प्रबोधु कीन्ह बहु भाँति। तदपि होति नहिं सीतलि छाती।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रबोधु कीन्ह बहु भाँति। तदपि होति नहिं सीतलि छाती।।

  983. RCM 2.99.6Open verse →

    जतन अनेक साथ हित कीन्हे। उचित उतर रघुनंदन दीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    जतन अनेक साथ हित कीन्हे। उचित उतर रघुनंदन दीन्हे।।

  984. RCM 2.99.7Open verse →

    मेटि जाइ नहिं राम रजाई। कठिन करम गति कछु न बसाई।।

    अर्थ · Hindi

    मेटि जाइ नहिं राम रजाई। कठिन करम गति कछु न बसाई।।

  985. RCM 2.99.8Open verse →

    राम लखन सिय पद सिरु नाई। फिरेउ बनिक जिमि मूर गवाँई।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सिय पद सिरु नाई। फिरेउ बनिक जिमि मूर गवाँई।।

  986. RCM 2.99.9Open verse →

    -रथ हाँकेउ हय राम तन हेरि हेरि हिहिनाहिं।

    अर्थ · Hindi

    -रथ हाँकेउ हय राम तन हेरि हेरि हिहिनाहिं।

  987. RCM 2.99.10Open verse →

    देखि निषाद बिषादबस धुनहिं सीस पछिताहिं।।99।।

    अर्थ · Hindi

    देखि निषाद बिषादबस धुनहिं सीस पछिताहिं।।99।।

  988. RCM 2.100.1Open verse →

    जासु बियोग बिकल पसु ऐसे। प्रजा मातु पितु जिइहहिं कैसें।।

    अर्थ · Hindi

    जासु बियोग बिकल पसु ऐसे। प्रजा मातु पितु जिइहहिं कैसें।।

  989. RCM 2.100.2Open verse →

    बरबस राम सुमंत्रु पठाए। सुरसरि तीर आपु तब आए।।

    अर्थ · Hindi

    बरबस राम सुमंत्रु पठाए। सुरसरि तीर आपु तब आए।।

  990. RCM 2.100.3Open verse →

    मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।।

    अर्थ · Hindi

    मागी नाव न केवटु आना। कहइ तुम्हार मरमु मैं जाना।।

  991. RCM 2.100.4Open verse →

    चरन कमल रज कहुँ सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई।।

    अर्थ · Hindi

    चरन कमल रज कहुँ सबु कहई। मानुष करनि मूरि कछु अहई।।

  992. RCM 2.100.5Open verse →

    छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई।।

    अर्थ · Hindi

    छुअत सिला भइ नारि सुहाई। पाहन तें न काठ कठिनाई।।

  993. RCM 2.100.6Open verse →

    तरनिउ मुनि घरिनि होइ जाई। बाट परइ मोरि नाव उड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    तरनिउ मुनि घरिनि होइ जाई। बाट परइ मोरि नाव उड़ाई।।

  994. RCM 2.100.7Open verse →

    एहिं प्रतिपालउँ सबु परिवारू। नहिं जानउँ कछु अउर कबारू।।

    अर्थ · Hindi

    एहिं प्रतिपालउँ सबु परिवारू। नहिं जानउँ कछु अउर कबारू।।

  995. RCM 2.100.8Open verse →

    जौ प्रभु पार अवसि गा चहहू। मोहि पद पदुम पखारन कहहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौ प्रभु पार अवसि गा चहहू। मोहि पद पदुम पखारन कहहू।।

  996. RCM 2.101.1Open verse →

    कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु बोले मुसुकाई। सोइ करु जेंहि तव नाव न जाई।।

  997. RCM 2.101.2Open verse →

    वेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू।।

    अर्थ · Hindi

    वेगि आनु जल पाय पखारू। होत बिलंबु उतारहि पारू।।

  998. RCM 2.101.3Open verse →

    जासु नाम सुमरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    जासु नाम सुमरत एक बारा। उतरहिं नर भवसिंधु अपारा।।

  999. RCM 2.101.4Open verse →

    सोइ कृपालु केवटहि निहोरा। जेहिं जगु किय तिहु पगहु ते थोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ कृपालु केवटहि निहोरा। जेहिं जगु किय तिहु पगहु ते थोरा।।

  1000. RCM 2.101.5Open verse →

    पद नख निरखि देवसरि हरषी। सुनि प्रभु बचन मोहँ मति करषी।।

    अर्थ · Hindi

    पद नख निरखि देवसरि हरषी। सुनि प्रभु बचन मोहँ मति करषी।।

  1001. RCM 2.101.6Open verse →

    केवट राम रजायसु पावा। पानि कठवता भरि लेइ आवा।।

    अर्थ · Hindi

    केवट राम रजायसु पावा। पानि कठवता भरि लेइ आवा।।

  1002. RCM 2.101.7Open verse →

    अति आनंद उमगि अनुरागा। चरन सरोज पखारन लागा।।

    अर्थ · Hindi

    अति आनंद उमगि अनुरागा। चरन सरोज पखारन लागा।।

  1003. RCM 2.101.8Open verse →

    बरषि सुमन सुर सकल सिहाहीं। एहि सम पुन्यपुंज कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बरषि सुमन सुर सकल सिहाहीं। एहि सम पुन्यपुंज कोउ नाहीं।।

  1004. RCM 2.101.9Open verse →

    पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार।

    अर्थ · Hindi

    पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार।

  1005. RCM 2.101.10Open verse →

    पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार।।101।।

    अर्थ · Hindi

    पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार।।101।।

  1006. RCM 2.102.1Open verse →

    उतरि ठाड़ भए सुरसरि रेता। सीयराम गुह लखन समेता।।

    अर्थ · Hindi

    उतरि ठाड़ भए सुरसरि रेता। सीयराम गुह लखन समेता।।

  1007. RCM 2.102.2Open verse →

    केवट उतरि दंडवत कीन्हा। प्रभुहि सकुच एहि नहिं कछु दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    केवट उतरि दंडवत कीन्हा। प्रभुहि सकुच एहि नहिं कछु दीन्हा।।

  1008. RCM 2.102.3Open verse →

    पिय हिय की सिय जाननिहारी। मनि मुदरी मन मुदित उतारी।।

    अर्थ · Hindi

    पिय हिय की सिय जाननिहारी। मनि मुदरी मन मुदित उतारी।।

  1009. RCM 2.102.4Open verse →

    कहेउ कृपाल लेहि उतराई। केवट चरन गहे अकुलाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ कृपाल लेहि उतराई। केवट चरन गहे अकुलाई।।

  1010. RCM 2.102.5Open verse →

    नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ आजु मैं काह न पावा। मिटे दोष दुख दारिद दावा।।

  1011. RCM 2.102.6Open verse →

    बहुत काल मैं कीन्हि मजूरी। आजु दीन्ह बिधि बनि भलि भूरी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुत काल मैं कीन्हि मजूरी। आजु दीन्ह बिधि बनि भलि भूरी।।

  1012. RCM 2.102.7Open verse →

    अब कछु नाथ न चाहिअ मोरें। दीनदयाल अनुग्रह तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    अब कछु नाथ न चाहिअ मोरें। दीनदयाल अनुग्रह तोरें।।

  1013. RCM 2.102.8Open verse →

    फिरती बार मोहि जे देबा। सो प्रसादु मैं सिर धरि लेबा।।

    अर्थ · Hindi

    फिरती बार मोहि जे देबा। सो प्रसादु मैं सिर धरि लेबा।।

  1014. RCM 2.102.9Open verse →

    बहुत कीन्ह प्रभु लखन सियँ नहिं कछु केवटु लेइ।

    अर्थ · Hindi

    बहुत कीन्ह प्रभु लखन सियँ नहिं कछु केवटु लेइ।

  1015. RCM 2.102.10Open verse →

    बिदा कीन्ह करुनायतन भगति बिमल बरु देइ।।102।।

    अर्थ · Hindi

    बिदा कीन्ह करुनायतन भगति बिमल बरु देइ।।102।।

  1016. RCM 2.103.1Open verse →

    तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। पूजि पारथिव नायउ माथा।।

    अर्थ · Hindi

    तब मज्जनु करि रघुकुलनाथा। पूजि पारथिव नायउ माथा।।

  1017. RCM 2.103.2Open verse →

    सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी। मातु मनोरथ पुरउबि मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सियँ सुरसरिहि कहेउ कर जोरी। मातु मनोरथ पुरउबि मोरी।।

  1018. RCM 2.103.3Open verse →

    पति देवर संग कुसल बहोरी। आइ करौं जेहिं पूजा तोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पति देवर संग कुसल बहोरी। आइ करौं जेहिं पूजा तोरी।।

  1019. RCM 2.103.4Open verse →

    सुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी। भइ तब बिमल बारि बर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी। भइ तब बिमल बारि बर बानी।।

  1020. RCM 2.103.5Open verse →

    सुनु रघुबीर प्रिया बैदेही। तव प्रभाउ जग बिदित न केही।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु रघुबीर प्रिया बैदेही। तव प्रभाउ जग बिदित न केही।।

  1021. RCM 2.103.6Open verse →

    लोकप होहिं बिलोकत तोरें। तोहि सेवहिं सब सिधि कर जोरें।।

    अर्थ · Hindi

    लोकप होहिं बिलोकत तोरें। तोहि सेवहिं सब सिधि कर जोरें।।

  1022. RCM 2.103.7Open verse →

    तुम्ह जो हमहि बड़ि बिनय सुनाई। कृपा कीन्हि मोहि दीन्हि बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह जो हमहि बड़ि बिनय सुनाई। कृपा कीन्हि मोहि दीन्हि बड़ाई।।

  1023. RCM 2.103.8Open verse →

    तदपि देबि मैं देबि असीसा। सफल होपन हित निज बागीसा।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि देबि मैं देबि असीसा। सफल होपन हित निज बागीसा।।

  1024. RCM 2.103.9Open verse →

    प्राननाथ देवर सहित कुसल कोसला आइ।

    अर्थ · Hindi

    प्राननाथ देवर सहित कुसल कोसला आइ।

  1025. RCM 2.103.10Open verse →

    पूजहि सब मनकामना सुजसु रहिहि जग छाइ।।103।।

    अर्थ · Hindi

    पूजहि सब मनकामना सुजसु रहिहि जग छाइ।।103।।

  1026. RCM 2.104.1Open verse →

    गंग बचन सुनि मंगल मूला। मुदित सीय सुरसरि अनुकुला।।

    अर्थ · Hindi

    गंग बचन सुनि मंगल मूला। मुदित सीय सुरसरि अनुकुला।।

  1027. RCM 2.104.2Open verse →

    तब प्रभु गुहहि कहेउ घर जाहू। सुनत सूख मुखु भा उर दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    तब प्रभु गुहहि कहेउ घर जाहू। सुनत सूख मुखु भा उर दाहू।।

  1028. RCM 2.104.3Open verse →

    दीन बचन गुह कह कर जोरी। बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    दीन बचन गुह कह कर जोरी। बिनय सुनहु रघुकुलमनि मोरी।।

  1029. RCM 2.104.4Open verse →

    नाथ साथ रहि पंथु देखाई। करि दिन चारि चरन सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ साथ रहि पंथु देखाई। करि दिन चारि चरन सेवकाई।।

  1030. RCM 2.104.5Open verse →

    जेहिं बन जाइ रहब रघुराई। परनकुटी मैं करबि सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बन जाइ रहब रघुराई। परनकुटी मैं करबि सुहाई।।

  1031. RCM 2.104.6Open verse →

    तब मोहि कहँ जसि देब रजाई। सोइ करिहउँ रघुबीर दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब मोहि कहँ जसि देब रजाई। सोइ करिहउँ रघुबीर दोहाई।।

  1032. RCM 2.104.7Open verse →

    सहज सनेह राम लखि तासु। संग लीन्ह गुह हृदय हुलासू।।

    अर्थ · Hindi

    सहज सनेह राम लखि तासु। संग लीन्ह गुह हृदय हुलासू।।

  1033. RCM 2.104.8Open verse →

    पुनि गुहँ ग्याति बोलि सब लीन्हे। करि परितोषु बिदा तब कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि गुहँ ग्याति बोलि सब लीन्हे। करि परितोषु बिदा तब कीन्हे।।

  1034. RCM 2.104.9Open verse →

    तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ।

    अर्थ · Hindi

    तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ।

  1035. RCM 2.104.10Open verse →

    सखा अनुज सिया सहित बन गवनु कीन्ह रधुनाथ।।104।।

    अर्थ · Hindi

    सखा अनुज सिया सहित बन गवनु कीन्ह रधुनाथ।।104।।

  1036. RCM 2.105.1Open verse →

    तेहि दिन भयउ बिटप तर बासू। लखन सखाँ सब कीन्ह सुपासू।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि दिन भयउ बिटप तर बासू। लखन सखाँ सब कीन्ह सुपासू।।

  1037. RCM 2.105.2Open verse →

    प्रात प्रातकृत करि रधुसाई। तीरथराजु दीख प्रभु जाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रात प्रातकृत करि रधुसाई। तीरथराजु दीख प्रभु जाई।।

  1038. RCM 2.105.3Open verse →

    सचिव सत्य श्रध्दा प्रिय नारी। माधव सरिस मीतु हितकारी।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव सत्य श्रध्दा प्रिय नारी। माधव सरिस मीतु हितकारी।।

  1039. RCM 2.105.4Open verse →

    चारि पदारथ भरा भँडारु। पुन्य प्रदेस देस अति चारु।।

    अर्थ · Hindi

    चारि पदारथ भरा भँडारु। पुन्य प्रदेस देस अति चारु।।

  1040. RCM 2.105.5Open verse →

    छेत्र अगम गढ़ु गाढ़ सुहावा। सपनेहुँ नहिं प्रतिपच्छिन्ह पावा।।

    अर्थ · Hindi

    छेत्र अगम गढ़ु गाढ़ सुहावा। सपनेहुँ नहिं प्रतिपच्छिन्ह पावा।।

  1041. RCM 2.105.6Open verse →

    सेन सकल तीरथ बर बीरा। कलुष अनीक दलन रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सेन सकल तीरथ बर बीरा। कलुष अनीक दलन रनधीरा।।

  1042. RCM 2.105.7Open verse →

    संगमु सिंहासनु सुठि सोहा। छत्रु अखयबटु मुनि मनु मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    संगमु सिंहासनु सुठि सोहा। छत्रु अखयबटु मुनि मनु मोहा।।

  1043. RCM 2.105.8Open verse →

    चवँर जमुन अरु गंग तरंगा। देखि होहिं दुख दारिद भंगा।।

    अर्थ · Hindi

    चवँर जमुन अरु गंग तरंगा। देखि होहिं दुख दारिद भंगा।।

  1044. RCM 2.105.9Open verse →

    सेवहिं सुकृति साधु सुचि पावहिं सब मनकाम।

    अर्थ · Hindi

    सेवहिं सुकृति साधु सुचि पावहिं सब मनकाम।

  1045. RCM 2.105.10Open verse →

    बंदी बेद पुरान गन कहहिं बिमल गुन ग्राम।।105।।

    अर्थ · Hindi

    बंदी बेद पुरान गन कहहिं बिमल गुन ग्राम।।105।।

  1046. RCM 2.106.1Open verse →

    को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ। कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ।।

  1047. RCM 2.106.2Open verse →

    अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    अस तीरथपति देखि सुहावा। सुख सागर रघुबर सुखु पावा।।

  1048. RCM 2.106.3Open verse →

    कहि सिय लखनहि सखहि सुनाई। श्रीमुख तीरथराज बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहि सिय लखनहि सखहि सुनाई। श्रीमुख तीरथराज बड़ाई।।

  1049. RCM 2.106.4Open verse →

    करि प्रनामु देखत बन बागा। कहत महातम अति अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु देखत बन बागा। कहत महातम अति अनुरागा।।

  1050. RCM 2.106.5Open verse →

    एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी। सुमिरत सकल सुमंगल देनी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी। सुमिरत सकल सुमंगल देनी।।

  1051. RCM 2.106.6Open verse →

    मुदित नहाइ कीन्हि सिव सेवा। पुजि जथाबिधि तीरथ देवा।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित नहाइ कीन्हि सिव सेवा। पुजि जथाबिधि तीरथ देवा।।

  1052. RCM 2.106.7Open verse →

    तब प्रभु भरद्वाज पहिं आए। करत दंडवत मुनि उर लाए।।

    अर्थ · Hindi

    तब प्रभु भरद्वाज पहिं आए। करत दंडवत मुनि उर लाए।।

  1053. RCM 2.106.8Open verse →

    मुनि मन मोद न कछु कहि जाइ। ब्रह्मानंद रासि जनु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि मन मोद न कछु कहि जाइ। ब्रह्मानंद रासि जनु पाई।।

  1054. RCM 2.106.9Open verse →

    दीन्हि असीस मुनीस उर अति अनंदु अस जानि।

    अर्थ · Hindi

    दीन्हि असीस मुनीस उर अति अनंदु अस जानि।

  1055. RCM 2.106.10Open verse →

    लोचन गोचर सुकृत फल मनहुँ किए बिधि आनि।।106।।

    अर्थ · Hindi

    लोचन गोचर सुकृत फल मनहुँ किए बिधि आनि।।106।।

  1056. RCM 2.107.1Open verse →

    कुसल प्रस्न करि आसन दीन्हे। पूजि प्रेम परिपूरन कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    कुसल प्रस्न करि आसन दीन्हे। पूजि प्रेम परिपूरन कीन्हे।।

  1057. RCM 2.107.2Open verse →

    कंद मूल फल अंकुर नीके। दिए आनि मुनि मनहुँ अमी के।।

    अर्थ · Hindi

    कंद मूल फल अंकुर नीके। दिए आनि मुनि मनहुँ अमी के।।

  1058. RCM 2.107.3Open verse →

    सीय लखन जन सहित सुहाए। अति रुचि राम मूल फल खाए।।

    अर्थ · Hindi

    सीय लखन जन सहित सुहाए। अति रुचि राम मूल फल खाए।।

  1059. RCM 2.107.4Open verse →

    भए बिगतश्रम रामु सुखारे। भरव्दाज मृदु बचन उचारे।।

    अर्थ · Hindi

    भए बिगतश्रम रामु सुखारे। भरव्दाज मृदु बचन उचारे।।

  1060. RCM 2.107.5Open verse →

    आजु सुफल तपु तीरथ त्यागू। आजु सुफल जप जोग बिरागू।।

    अर्थ · Hindi

    आजु सुफल तपु तीरथ त्यागू। आजु सुफल जप जोग बिरागू।।

  1061. RCM 2.107.6Open verse →

    सफल सकल सुभ साधन साजू। राम तुम्हहि अवलोकत आजू।।

    अर्थ · Hindi

    सफल सकल सुभ साधन साजू। राम तुम्हहि अवलोकत आजू।।

  1062. RCM 2.107.7Open verse →

    लाभ अवधि सुख अवधि न दूजी। तुम्हारें दरस आस सब पूजी।।

    अर्थ · Hindi

    लाभ अवधि सुख अवधि न दूजी। तुम्हारें दरस आस सब पूजी।।

  1063. RCM 2.107.8Open verse →

    अब करि कृपा देहु बर एहू। निज पद सरसिज सहज सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    अब करि कृपा देहु बर एहू। निज पद सरसिज सहज सनेहू।।

  1064. RCM 2.107.9Open verse →

    करम बचन मन छाड़ि छलु जब लगि जनु न तुम्हार।

    अर्थ · Hindi

    करम बचन मन छाड़ि छलु जब लगि जनु न तुम्हार।

  1065. RCM 2.107.10Open verse →

    तब लगि सुखु सपनेहुँ नहीं किएँ कोटि उपचार।।

    अर्थ · Hindi

    तब लगि सुखु सपनेहुँ नहीं किएँ कोटि उपचार।।

  1066. RCM 2.108.1Open verse →

    सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने। भाव भगति आनंद अघाने।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन रामु सकुचाने। भाव भगति आनंद अघाने।।

  1067. RCM 2.108.2Open verse →

    तब रघुबर मुनि सुजसु सुहावा। कोटि भाँति कहि सबहि सुनावा।।

    अर्थ · Hindi

    तब रघुबर मुनि सुजसु सुहावा। कोटि भाँति कहि सबहि सुनावा।।

  1068. RCM 2.108.3Open verse →

    सो बड सो सब गुन गन गेहू। जेहि मुनीस तुम्ह आदर देहू।।

    अर्थ · Hindi

    सो बड सो सब गुन गन गेहू। जेहि मुनीस तुम्ह आदर देहू।।

  1069. RCM 2.108.4Open verse →

    मुनि रघुबीर परसपर नवहीं। बचन अगोचर सुखु अनुभवहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि रघुबीर परसपर नवहीं। बचन अगोचर सुखु अनुभवहीं।।

  1070. RCM 2.108.5Open verse →

    यह सुधि पाइ प्रयाग निवासी। बटु तापस मुनि सिद्ध उदासी।।

    अर्थ · Hindi

    यह सुधि पाइ प्रयाग निवासी। बटु तापस मुनि सिद्ध उदासी।।

  1071. RCM 2.108.6Open verse →

    भरद्वाज आश्रम सब आए। देखन दसरथ सुअन सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    भरद्वाज आश्रम सब आए। देखन दसरथ सुअन सुहाए।।

  1072. RCM 2.108.7Open verse →

    राम प्रनाम कीन्ह सब काहू। मुदित भए लहि लोयन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रनाम कीन्ह सब काहू। मुदित भए लहि लोयन लाहू।।

  1073. RCM 2.108.8Open verse →

    देहिं असीस परम सुखु पाई। फिरे सराहत सुंदरताई।।

    अर्थ · Hindi

    देहिं असीस परम सुखु पाई। फिरे सराहत सुंदरताई।।

  1074. RCM 2.108.9Open verse →

    राम कीन्ह बिश्राम निसि प्रात प्रयाग नहाइ।

    अर्थ · Hindi

    राम कीन्ह बिश्राम निसि प्रात प्रयाग नहाइ।

  1075. RCM 2.108.10Open verse →

    चले सहित सिय लखन जन मुददित मुनिहि सिरु नाइ।।108।।

    अर्थ · Hindi

    चले सहित सिय लखन जन मुददित मुनिहि सिरु नाइ।।108।।

  1076. RCM 2.109.1Open verse →

    राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम सप्रेम कहेउ मुनि पाहीं। नाथ कहिअ हम केहि मग जाहीं।।

  1077. RCM 2.109.2Open verse →

    मुनि मन बिहसि राम सन कहहीं। सुगम सकल मग तुम्ह कहुँ अहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि मन बिहसि राम सन कहहीं। सुगम सकल मग तुम्ह कहुँ अहहीं।।

  1078. RCM 2.109.3Open verse →

    साथ लागि मुनि सिष्य बोलाए। सुनि मन मुदित पचासक आए।।

    अर्थ · Hindi

    साथ लागि मुनि सिष्य बोलाए। सुनि मन मुदित पचासक आए।।

  1079. RCM 2.109.4Open verse →

    सबन्हि राम पर प्रेम अपारा। सकल कहहि मगु दीख हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    सबन्हि राम पर प्रेम अपारा। सकल कहहि मगु दीख हमारा।।

  1080. RCM 2.109.5Open verse →

    मुनि बटु चारि संग तब दीन्हे। जिन्ह बहु जनम सुकृत सब कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि बटु चारि संग तब दीन्हे। जिन्ह बहु जनम सुकृत सब कीन्हे।।

  1081. RCM 2.109.6Open verse →

    करि प्रनामु रिषि आयसु पाई। प्रमुदित हृदयँ चले रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु रिषि आयसु पाई। प्रमुदित हृदयँ चले रघुराई।।

  1082. RCM 2.109.7Open verse →

    ग्राम निकट जब निकसहि जाई। देखहि दरसु नारि नर धाई।।

    अर्थ · Hindi

    ग्राम निकट जब निकसहि जाई। देखहि दरसु नारि नर धाई।।

  1083. RCM 2.109.8Open verse →

    होहि सनाथ जनम फलु पाई। फिरहि दुखित मनु संग पठाई।।

    अर्थ · Hindi

    होहि सनाथ जनम फलु पाई। फिरहि दुखित मनु संग पठाई।।

  1084. RCM 2.109.9Open verse →

    बिदा किए बटु बिनय करि फिरे पाइ मन काम।

    अर्थ · Hindi

    बिदा किए बटु बिनय करि फिरे पाइ मन काम।

  1085. RCM 2.109.10Open verse →

    उतरि नहाए जमुन जल जो सरीर सम स्याम।।109।।

    अर्थ · Hindi

    उतरि नहाए जमुन जल जो सरीर सम स्याम।।109।।

  1086. RCM 2.110.1Open verse →

    सुनत तीरवासी नर नारी। धाए निज निज काज बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत तीरवासी नर नारी। धाए निज निज काज बिसारी।।

  1087. RCM 2.110.2Open verse →

    लखन राम सिय सुन्दरताई। देखि करहिं निज भाग्य बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    लखन राम सिय सुन्दरताई। देखि करहिं निज भाग्य बड़ाई।।

  1088. RCM 2.110.3Open verse →

    अति लालसा बसहिं मन माहीं। नाउँ गाउँ बूझत सकुचाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अति लालसा बसहिं मन माहीं। नाउँ गाउँ बूझत सकुचाहीं।।

  1089. RCM 2.110.4Open verse →

    जे तिन्ह महुँ बयबिरिध सयाने। तिन्ह करि जुगुति रामु पहिचाने।।

    अर्थ · Hindi

    जे तिन्ह महुँ बयबिरिध सयाने। तिन्ह करि जुगुति रामु पहिचाने।।

  1090. RCM 2.110.5Open verse →

    सकल कथा तिन्ह सबहि सुनाई। बनहि चले पितु आयसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    सकल कथा तिन्ह सबहि सुनाई। बनहि चले पितु आयसु पाई।।

  1091. RCM 2.110.6Open verse →

    सुनि सबिषाद सकल पछिताहीं। रानी रायँ कीन्ह भल नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सबिषाद सकल पछिताहीं। रानी रायँ कीन्ह भल नाहीं।।

  1092. RCM 2.110.7Open verse →

    तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा।।

  1093. RCM 2.110.8Open verse →

    कवि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी।।

    अर्थ · Hindi

    कवि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी।।

  1094. RCM 2.110.9Open verse →

    सजल नयन तन पुलकि निज इष्टदेउ पहिचानि।

    अर्थ · Hindi

    सजल नयन तन पुलकि निज इष्टदेउ पहिचानि।

  1095. RCM 2.110.10Open verse →

    परेउ दंड जिमि धरनितल दसा न जाइ बखानि।।110।।

    अर्थ · Hindi

    परेउ दंड जिमि धरनितल दसा न जाइ बखानि।।110।।

  1096. RCM 2.111.1Open verse →

    राम सप्रेम पुलकि उर लावा। परम रंक जनु पारसु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    राम सप्रेम पुलकि उर लावा। परम रंक जनु पारसु पावा।।

  1097. RCM 2.111.2Open verse →

    मनहुँ प्रेमु परमारथु दोऊ। मिलत धरे तन कह सबु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ प्रेमु परमारथु दोऊ। मिलत धरे तन कह सबु कोऊ।।

  1098. RCM 2.111.3Open verse →

    बहुरि लखन पायन्ह सोइ लागा। लीन्ह उठाइ उमगि अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि लखन पायन्ह सोइ लागा। लीन्ह उठाइ उमगि अनुरागा।।

  1099. RCM 2.111.4Open verse →

    पुनि सिय चरन धूरि धरि सीसा। जननि जानि सिसु दीन्हि असीसा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि सिय चरन धूरि धरि सीसा। जननि जानि सिसु दीन्हि असीसा।।

  1100. RCM 2.111.5Open verse →

    कीन्ह निषाद दंडवत तेही। मिलेउ मुदित लखि राम सनेही।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह निषाद दंडवत तेही। मिलेउ मुदित लखि राम सनेही।।

  1101. RCM 2.111.6Open verse →

    पिअत नयन पुट रूपु पियूषा। मुदित सुअसनु पाइ जिमि भूखा।।

    अर्थ · Hindi

    पिअत नयन पुट रूपु पियूषा। मुदित सुअसनु पाइ जिमि भूखा।।

  1102. RCM 2.111.7Open verse →

    ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।

    अर्थ · Hindi

    ते पितु मातु कहहु सखि कैसे। जिन्ह पठए बन बालक ऐसे।।

  1103. RCM 2.111.8Open verse →

    राम लखन सिय रूपु निहारी। होहिं सनेह बिकल नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सिय रूपु निहारी। होहिं सनेह बिकल नर नारी।।

  1104. RCM 2.111.9Open verse →

    तब रघुबीर अनेक बिधि सखहि सिखावनु दीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    तब रघुबीर अनेक बिधि सखहि सिखावनु दीन्ह।

  1105. RCM 2.111.10Open verse →

    राम रजायसु सीस धरि भवन गवनु तेंइँ कीन्ह।।111।।

    अर्थ · Hindi

    राम रजायसु सीस धरि भवन गवनु तेंइँ कीन्ह।।111।।

  1106. RCM 2.112.1Open verse →

    पुनि सियँ राम लखन कर जोरी। जमुनहि कीन्ह प्रनामु बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि सियँ राम लखन कर जोरी। जमुनहि कीन्ह प्रनामु बहोरी।।

  1107. RCM 2.112.2Open verse →

    चले ससीय मुदित दोउ भाई। रबितनुजा कइ करत बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले ससीय मुदित दोउ भाई। रबितनुजा कइ करत बड़ाई।।

  1108. RCM 2.112.3Open verse →

    पथिक अनेक मिलहिं मग जाता। कहहिं सप्रेम देखि दोउ भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    पथिक अनेक मिलहिं मग जाता। कहहिं सप्रेम देखि दोउ भ्राता।।

  1109. RCM 2.112.4Open verse →

    राज लखन सब अंग तुम्हारें। देखि सोचु अति हृदय हमारें।।

    अर्थ · Hindi

    राज लखन सब अंग तुम्हारें। देखि सोचु अति हृदय हमारें।।

  1110. RCM 2.112.5Open verse →

    मारग चलहु पयादेहि पाएँ। ज्योतिषु झूठ हमारें भाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    मारग चलहु पयादेहि पाएँ। ज्योतिषु झूठ हमारें भाएँ।।

  1111. RCM 2.112.6Open verse →

    अगमु पंथ गिरि कानन भारी। तेहि महँ साथ नारि सुकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    अगमु पंथ गिरि कानन भारी। तेहि महँ साथ नारि सुकुमारी।।

  1112. RCM 2.112.7Open verse →

    करि केहरि बन जाइ न जोई। हम सँग चलहि जो आयसु होई।।

    अर्थ · Hindi

    करि केहरि बन जाइ न जोई। हम सँग चलहि जो आयसु होई।।

  1113. RCM 2.112.8Open verse →

    जाब जहाँ लगि तहँ पहुँचाई। फिरब बहोरि तुम्हहि सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    जाब जहाँ लगि तहँ पहुँचाई। फिरब बहोरि तुम्हहि सिरु नाई।।

  1114. RCM 2.112.9Open verse →

    एहि बिधि पूँछहिं प्रेम बस पुलक गात जलु नैन।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि पूँछहिं प्रेम बस पुलक गात जलु नैन।

  1115. RCM 2.112.10Open verse →

    कृपासिंधु फेरहि तिन्हहि कहि बिनीत मृदु बैन।।112।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु फेरहि तिन्हहि कहि बिनीत मृदु बैन।।112।।

  1116. RCM 2.113.1Open verse →

    जे पुर गाँव बसहिं मग माहीं। तिन्हहि नाग सुर नगर सिहाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जे पुर गाँव बसहिं मग माहीं। तिन्हहि नाग सुर नगर सिहाहीं।।

  1117. RCM 2.113.2Open verse →

    केहि सुकृतीं केहि घरीं बसाए। धन्य पुन्यमय परम सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    केहि सुकृतीं केहि घरीं बसाए। धन्य पुन्यमय परम सुहाए।।

  1118. RCM 2.113.3Open verse →

    जहँ जहँ राम चरन चलि जाहीं। तिन्ह समान अमरावति नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जहँ राम चरन चलि जाहीं। तिन्ह समान अमरावति नाहीं।।

  1119. RCM 2.113.4Open verse →

    पुन्यपुंज मग निकट निवासी। तिन्हहि सराहहिं सुरपुरबासी।।

    अर्थ · Hindi

    पुन्यपुंज मग निकट निवासी। तिन्हहि सराहहिं सुरपुरबासी।।

  1120. RCM 2.113.5Open verse →

    जे भरि नयन बिलोकहिं रामहि। सीता लखन सहित घनस्यामहि।।

    अर्थ · Hindi

    जे भरि नयन बिलोकहिं रामहि। सीता लखन सहित घनस्यामहि।।

  1121. RCM 2.113.6Open verse →

    जे सर सरित राम अवगाहहिं। तिन्हहि देव सर सरित सराहहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जे सर सरित राम अवगाहहिं। तिन्हहि देव सर सरित सराहहिं।।

  1122. RCM 2.113.7Open verse →

    जेहि तरु तर प्रभु बैठहिं जाई। करहिं कलपतरु तासु बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि तरु तर प्रभु बैठहिं जाई। करहिं कलपतरु तासु बड़ाई।।

  1123. RCM 2.113.8Open verse →

    परसि राम पद पदुम परागा। मानति भूमि भूरि निज भागा।।

    अर्थ · Hindi

    परसि राम पद पदुम परागा। मानति भूमि भूरि निज भागा।।

  1124. RCM 2.113.9Open verse →

    छाँह करहि घन बिबुधगन बरषहि सुमन सिहाहिं।

    अर्थ · Hindi

    छाँह करहि घन बिबुधगन बरषहि सुमन सिहाहिं।

  1125. RCM 2.113.10Open verse →

    देखत गिरि बन बिहग मृग रामु चले मग जाहिं।।113।।

    अर्थ · Hindi

    देखत गिरि बन बिहग मृग रामु चले मग जाहिं।।113।।

  1126. RCM 2.114.1Open verse →

    सीता लखन सहित रघुराई। गाँव निकट जब निकसहिं जाई।।

    अर्थ · Hindi

    सीता लखन सहित रघुराई। गाँव निकट जब निकसहिं जाई।।

  1127. RCM 2.114.2Open verse →

    सुनि सब बाल बृद्ध नर नारी। चलहिं तुरत गृहकाजु बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सब बाल बृद्ध नर नारी। चलहिं तुरत गृहकाजु बिसारी।।

  1128. RCM 2.114.3Open verse →

    राम लखन सिय रूप निहारी। पाइ नयनफलु होहिं सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सिय रूप निहारी। पाइ नयनफलु होहिं सुखारी।।

  1129. RCM 2.114.4Open verse →

    सजल बिलोचन पुलक सरीरा। सब भए मगन देखि दोउ बीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सजल बिलोचन पुलक सरीरा। सब भए मगन देखि दोउ बीरा।।

  1130. RCM 2.114.5Open verse →

    बरनि न जाइ दसा तिन्ह केरी। लहि जनु रंकन्ह सुरमनि ढेरी।।

    अर्थ · Hindi

    बरनि न जाइ दसा तिन्ह केरी। लहि जनु रंकन्ह सुरमनि ढेरी।।

  1131. RCM 2.114.6Open verse →

    एकन्ह एक बोलि सिख देहीं। लोचन लाहु लेहु छन एहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एकन्ह एक बोलि सिख देहीं। लोचन लाहु लेहु छन एहीं।।

  1132. RCM 2.114.7Open verse →

    रामहि देखि एक अनुरागे। चितवत चले जाहिं सँग लागे।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि देखि एक अनुरागे। चितवत चले जाहिं सँग लागे।।

  1133. RCM 2.114.8Open verse →

    एक नयन मग छबि उर आनी। होहिं सिथिल तन मन बर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    एक नयन मग छबि उर आनी। होहिं सिथिल तन मन बर बानी।।

  1134. RCM 2.114.9Open verse →

    एक देखिं बट छाँह भलि डासि मृदुल तृन पात।

    अर्थ · Hindi

    एक देखिं बट छाँह भलि डासि मृदुल तृन पात।

  1135. RCM 2.114.10Open verse →

    कहहिं गवाँइअ छिनुकु श्रमु गवनब अबहिं कि प्रात।।114।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं गवाँइअ छिनुकु श्रमु गवनब अबहिं कि प्रात।।114।।

  1136. RCM 2.115.1Open verse →

    एक कलस भरि आनहिं पानी। अँचइअ नाथ कहहिं मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    एक कलस भरि आनहिं पानी। अँचइअ नाथ कहहिं मृदु बानी।।

  1137. RCM 2.115.2Open verse →

    सुनि प्रिय बचन प्रीति अति देखी। राम कृपाल सुसील बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रिय बचन प्रीति अति देखी। राम कृपाल सुसील बिसेषी।।

  1138. RCM 2.115.3Open verse →

    जानी श्रमित सीय मन माहीं। घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जानी श्रमित सीय मन माहीं। घरिक बिलंबु कीन्ह बट छाहीं।।

  1139. RCM 2.115.4Open verse →

    मुदित नारि नर देखहिं सोभा। रूप अनूप नयन मनु लोभा।।

    अर्थ · Hindi

    मुदित नारि नर देखहिं सोभा। रूप अनूप नयन मनु लोभा।।

  1140. RCM 2.115.5Open verse →

    एकटक सब सोहहिं चहुँ ओरा। रामचंद्र मुख चंद चकोरा।।

    अर्थ · Hindi

    एकटक सब सोहहिं चहुँ ओरा। रामचंद्र मुख चंद चकोरा।।

  1141. RCM 2.115.6Open verse →

    तरुन तमाल बरन तनु सोहा। देखत कोटि मदन मनु मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    तरुन तमाल बरन तनु सोहा। देखत कोटि मदन मनु मोहा।।

  1142. RCM 2.115.7Open verse →

    दामिनि बरन लखन सुठि नीके। नख सिख सुभग भावते जी के।।

    अर्थ · Hindi

    दामिनि बरन लखन सुठि नीके। नख सिख सुभग भावते जी के।।

  1143. RCM 2.115.8Open verse →

    मुनिपट कटिन्ह कसें तूनीरा। सोहहिं कर कमलिनि धनु तीरा।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिपट कटिन्ह कसें तूनीरा। सोहहिं कर कमलिनि धनु तीरा।।

  1144. RCM 2.115.9Open verse →

    जटा मुकुट सीसनि सुभग उर भुज नयन बिसाल।

    अर्थ · Hindi

    जटा मुकुट सीसनि सुभग उर भुज नयन बिसाल।

  1145. RCM 2.115.10Open verse →

    सरद परब बिधु बदन बर लसत स्वेद कन जाल।।115।।

    अर्थ · Hindi

    सरद परब बिधु बदन बर लसत स्वेद कन जाल।।115।।

  1146. RCM 2.116.1Open verse →

    बरनि न जाइ मनोहर जोरी। सोभा बहुत थोरि मति मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    बरनि न जाइ मनोहर जोरी। सोभा बहुत थोरि मति मोरी।।

  1147. RCM 2.116.2Open verse →

    राम लखन सिय सुंदरताई। सब चितवहिं चित मन मति लाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सिय सुंदरताई। सब चितवहिं चित मन मति लाई।।

  1148. RCM 2.116.3Open verse →

    थके नारि नर प्रेम पिआसे। मनहुँ मृगी मृग देखि दिआ से।।

    अर्थ · Hindi

    थके नारि नर प्रेम पिआसे। मनहुँ मृगी मृग देखि दिआ से।।

  1149. RCM 2.116.4Open verse →

    सीय समीप ग्रामतिय जाहीं। पूँछत अति सनेहँ सकुचाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सीय समीप ग्रामतिय जाहीं। पूँछत अति सनेहँ सकुचाहीं।।

  1150. RCM 2.116.5Open verse →

    बार बार सब लागहिं पाएँ। कहहिं बचन मृदु सरल सुभाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार सब लागहिं पाएँ। कहहिं बचन मृदु सरल सुभाएँ।।

  1151. RCM 2.116.6Open verse →

    राजकुमारि बिनय हम करहीं। तिय सुभायँ कछु पूँछत डरहीं।

    अर्थ · Hindi

    राजकुमारि बिनय हम करहीं। तिय सुभायँ कछु पूँछत डरहीं।

  1152. RCM 2.116.7Open verse →

    स्वामिनि अबिनय छमबि हमारी। बिलगु न मानब जानि गवाँरी।।

    अर्थ · Hindi

    स्वामिनि अबिनय छमबि हमारी। बिलगु न मानब जानि गवाँरी।।

  1153. RCM 2.116.8Open verse →

    राजकुअँर दोउ सहज सलोने। इन्ह तें लही दुति मरकत सोने।।

    अर्थ · Hindi

    राजकुअँर दोउ सहज सलोने। इन्ह तें लही दुति मरकत सोने।।

  1154. RCM 2.116.9Open verse →

    स्यामल गौर किसोर बर सुंदर सुषमा ऐन।

    अर्थ · Hindi

    स्यामल गौर किसोर बर सुंदर सुषमा ऐन।

  1155. RCM 2.116.10Open verse →

    सरद सर्बरीनाथ मुखु सरद सरोरुह नैन।।116।।

    अर्थ · Hindi

    सरद सर्बरीनाथ मुखु सरद सरोरुह नैन।।116।।

  1156. RCM 2.117.1Open verse →

    कोटि मनोज लजावनिहारे। सुमुखि कहहु को आहिं तुम्हारे।।

    अर्थ · Hindi

    कोटि मनोज लजावनिहारे। सुमुखि कहहु को आहिं तुम्हारे।।

  1157. RCM 2.117.2Open verse →

    सुनि सनेहमय मंजुल बानी। सकुची सिय मन महुँ मुसुकानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनेहमय मंजुल बानी। सकुची सिय मन महुँ मुसुकानी।।

  1158. RCM 2.117.3Open verse →

    तिन्हहि बिलोकि बिलोकति धरनी। दुहुँ सकोच सकुचित बरबरनी।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्हहि बिलोकि बिलोकति धरनी। दुहुँ सकोच सकुचित बरबरनी।।

  1159. RCM 2.117.4Open verse →

    सकुचि सप्रेम बाल मृग नयनी। बोली मधुर बचन पिकबयनी।।

    अर्थ · Hindi

    सकुचि सप्रेम बाल मृग नयनी। बोली मधुर बचन पिकबयनी।।

  1160. RCM 2.117.5Open verse →

    सहज सुभाय सुभग तन गोरे। नामु लखनु लघु देवर मोरे।।

    अर्थ · Hindi

    सहज सुभाय सुभग तन गोरे। नामु लखनु लघु देवर मोरे।।

  1161. RCM 2.117.6Open verse →

    बहुरि बदनु बिधु अंचल ढाँकी। पिय तन चितइ भौंह करि बाँकी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बदनु बिधु अंचल ढाँकी। पिय तन चितइ भौंह करि बाँकी।।

  1162. RCM 2.117.7Open verse →

    खंजन मंजु तिरीछे नयननि। निज पति कहेउ तिन्हहि सियँ सयननि।।

    अर्थ · Hindi

    खंजन मंजु तिरीछे नयननि। निज पति कहेउ तिन्हहि सियँ सयननि।।

  1163. RCM 2.117.8Open verse →

    भइ मुदित सब ग्रामबधूटीं। रंकन्ह राय रासि जनु लूटीं।।

    अर्थ · Hindi

    भइ मुदित सब ग्रामबधूटीं। रंकन्ह राय रासि जनु लूटीं।।

  1164. RCM 2.117.9Open verse →

    अति सप्रेम सिय पायँ परि बहुबिधि देहिं असीस।

    अर्थ · Hindi

    अति सप्रेम सिय पायँ परि बहुबिधि देहिं असीस।

  1165. RCM 2.117.10Open verse →

    सदा सोहागिनि होहु तुम्ह जब लगि महि अहि सीस।।117।।

    अर्थ · Hindi

    सदा सोहागिनि होहु तुम्ह जब लगि महि अहि सीस।।117।।

  1166. RCM 2.118.1Open verse →

    पारबती सम पतिप्रिय होहू। देबि न हम पर छाड़ब छोहू।।

    अर्थ · Hindi

    पारबती सम पतिप्रिय होहू। देबि न हम पर छाड़ब छोहू।।

  1167. RCM 2.118.2Open verse →

    पुनि पुनि बिनय करिअ कर जोरी। जौं एहि मारग फिरिअ बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि बिनय करिअ कर जोरी। जौं एहि मारग फिरिअ बहोरी।।

  1168. RCM 2.118.3Open verse →

    दरसनु देब जानि निज दासी। लखीं सीयँ सब प्रेम पिआसी।।

    अर्थ · Hindi

    दरसनु देब जानि निज दासी। लखीं सीयँ सब प्रेम पिआसी।।

  1169. RCM 2.118.4Open verse →

    मधुर बचन कहि कहि परितोषीं। जनु कुमुदिनीं कौमुदीं पोषीं।।

    अर्थ · Hindi

    मधुर बचन कहि कहि परितोषीं। जनु कुमुदिनीं कौमुदीं पोषीं।।

  1170. RCM 2.118.5Open verse →

    तबहिं लखन रघुबर रुख जानी। पूँछेउ मगु लोगन्हि मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    तबहिं लखन रघुबर रुख जानी। पूँछेउ मगु लोगन्हि मृदु बानी।।

  1171. RCM 2.118.6Open verse →

    सुनत नारि नर भए दुखारी। पुलकित गात बिलोचन बारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत नारि नर भए दुखारी। पुलकित गात बिलोचन बारी।।

  1172. RCM 2.118.7Open verse →

    मिटा मोदु मन भए मलीने। बिधि निधि दीन्ह लेत जनु छीने।।

    अर्थ · Hindi

    मिटा मोदु मन भए मलीने। बिधि निधि दीन्ह लेत जनु छीने।।

  1173. RCM 2.118.8Open verse →

    समुझि करम गति धीरजु कीन्हा। सोधि सुगम मगु तिन्ह कहि दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि करम गति धीरजु कीन्हा। सोधि सुगम मगु तिन्ह कहि दीन्हा।।

  1174. RCM 2.118.9Open verse →

    लखन जानकी सहित तब गवनु कीन्ह रघुनाथ।

    अर्थ · Hindi

    लखन जानकी सहित तब गवनु कीन्ह रघुनाथ।

  1175. RCM 2.118.10Open verse →

    फेरे सब प्रिय बचन कहि लिए लाइ मन साथ।।118।।

    अर्थ · Hindi

    फेरे सब प्रिय बचन कहि लिए लाइ मन साथ।।118।।

  1176. RCM 2.119.1Open verse →

    फिरत नारि नर अति पछिताहीं। देअहि दोषु देहिं मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    फिरत नारि नर अति पछिताहीं। देअहि दोषु देहिं मन माहीं।।

  1177. RCM 2.119.2Open verse →

    सहित बिषाद परसपर कहहीं। बिधि करतब उलटे सब अहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सहित बिषाद परसपर कहहीं। बिधि करतब उलटे सब अहहीं।।

  1178. RCM 2.119.3Open verse →

    निपट निरंकुस निठुर निसंकू। जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू।।

    अर्थ · Hindi

    निपट निरंकुस निठुर निसंकू। जेहिं ससि कीन्ह सरुज सकलंकू।।

  1179. RCM 2.119.4Open verse →

    रूख कलपतरु सागरु खारा। तेहिं पठए बन राजकुमारा।।

    अर्थ · Hindi

    रूख कलपतरु सागरु खारा। तेहिं पठए बन राजकुमारा।।

  1180. RCM 2.119.5Open verse →

    जौं पे इन्हहि दीन्ह बनबासू। कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पे इन्हहि दीन्ह बनबासू। कीन्ह बादि बिधि भोग बिलासू।।

  1181. RCM 2.119.6Open verse →

    ए बिचरहिं मग बिनु पदत्राना। रचे बादि बिधि बाहन नाना।।

    अर्थ · Hindi

    ए बिचरहिं मग बिनु पदत्राना। रचे बादि बिधि बाहन नाना।।

  1182. RCM 2.119.7Open verse →

    ए महि परहिं डासि कुस पाता। सुभग सेज कत सृजत बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    ए महि परहिं डासि कुस पाता। सुभग सेज कत सृजत बिधाता।।

  1183. RCM 2.119.8Open verse →

    तरुबर बास इन्हहि बिधि दीन्हा। धवल धाम रचि रचि श्रमु कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    तरुबर बास इन्हहि बिधि दीन्हा। धवल धाम रचि रचि श्रमु कीन्हा।।

  1184. RCM 2.120.1Open verse →

    जौं ए कंद मूल फल खाहीं। बादि सुधादि असन जग माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं ए कंद मूल फल खाहीं। बादि सुधादि असन जग माहीं।।

  1185. RCM 2.120.2Open verse →

    एक कहहिं ए सहज सुहाए। आपु प्रगट भए बिधि न बनाए।।

    अर्थ · Hindi

    एक कहहिं ए सहज सुहाए। आपु प्रगट भए बिधि न बनाए।।

  1186. RCM 2.120.3Open verse →

    जहँ लगि बेद कही बिधि करनी। श्रवन नयन मन गोचर बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ लगि बेद कही बिधि करनी। श्रवन नयन मन गोचर बरनी।।

  1187. RCM 2.120.4Open verse →

    देखहु खोजि भुअन दस चारी। कहँ अस पुरुष कहाँ असि नारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखहु खोजि भुअन दस चारी। कहँ अस पुरुष कहाँ असि नारी।।

  1188. RCM 2.120.5Open verse →

    इन्हहि देखि बिधि मनु अनुरागा। पटतर जोग बनावै लागा।।

    अर्थ · Hindi

    इन्हहि देखि बिधि मनु अनुरागा। पटतर जोग बनावै लागा।।

  1189. RCM 2.120.6Open verse →

    कीन्ह बहुत श्रम ऐक न आए। तेहिं इरिषा बन आनि दुराए।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह बहुत श्रम ऐक न आए। तेहिं इरिषा बन आनि दुराए।।

  1190. RCM 2.120.7Open verse →

    एक कहहिं हम बहुत न जानहिं। आपुहि परम धन्य करि मानहिं।।

    अर्थ · Hindi

    एक कहहिं हम बहुत न जानहिं। आपुहि परम धन्य करि मानहिं।।

  1191. RCM 2.120.8Open verse →

    ते पुनि पुन्यपुंज हम लेखे। जे देखहिं देखिहहिं जिन्ह देखे।।

    अर्थ · Hindi

    ते पुनि पुन्यपुंज हम लेखे। जे देखहिं देखिहहिं जिन्ह देखे।।

  1192. RCM 2.120.9Open verse →

    एहि बिधि कहि कहि बचन प्रिय लेहिं नयन भरि नीर।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि कहि कहि बचन प्रिय लेहिं नयन भरि नीर।

  1193. RCM 2.120.10Open verse →

    किमि चलिहहि मारग अगम सुठि सुकुमार सरीर।।120।।

    अर्थ · Hindi

    किमि चलिहहि मारग अगम सुठि सुकुमार सरीर।।120।।

  1194. RCM 2.121.1Open verse →

    नारि सनेह बिकल बस होहीं। चकई साँझ समय जनु सोहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नारि सनेह बिकल बस होहीं। चकई साँझ समय जनु सोहीं।।

  1195. RCM 2.121.2Open verse →

    मृदु पद कमल कठिन मगु जानी। गहबरि हृदयँ कहहिं बर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    मृदु पद कमल कठिन मगु जानी। गहबरि हृदयँ कहहिं बर बानी।।

  1196. RCM 2.121.3Open verse →

    परसत मृदुल चरन अरुनारे। सकुचति महि जिमि हृदय हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    परसत मृदुल चरन अरुनारे। सकुचति महि जिमि हृदय हमारे।।

  1197. RCM 2.121.4Open verse →

    जौं जगदीस इन्हहि बनु दीन्हा। कस न सुमनमय मारगु कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं जगदीस इन्हहि बनु दीन्हा। कस न सुमनमय मारगु कीन्हा।।

  1198. RCM 2.121.5Open verse →

    जौं मागा पाइअ बिधि पाहीं। ए रखिअहिं सखि आँखिन्ह माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मागा पाइअ बिधि पाहीं। ए रखिअहिं सखि आँखिन्ह माहीं।।

  1199. RCM 2.121.6Open verse →

    जे नर नारि न अवसर आए। तिन्ह सिय रामु न देखन पाए।।

    अर्थ · Hindi

    जे नर नारि न अवसर आए। तिन्ह सिय रामु न देखन पाए।।

  1200. RCM 2.121.7Open verse →

    सुनि सुरुप बूझहिं अकुलाई। अब लगि गए कहाँ लगि भाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुरुप बूझहिं अकुलाई। अब लगि गए कहाँ लगि भाई।।

  1201. RCM 2.121.8Open verse →

    समरथ धाइ बिलोकहिं जाई। प्रमुदित फिरहिं जनमफलु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    समरथ धाइ बिलोकहिं जाई। प्रमुदित फिरहिं जनमफलु पाई।।

  1202. RCM 2.121.9Open verse →

    अबला बालक बृद्ध जन कर मीजहिं पछिताहिं।।

    अर्थ · Hindi

    अबला बालक बृद्ध जन कर मीजहिं पछिताहिं।।

  1203. RCM 2.121.10Open verse →

    होहिं प्रेमबस लोग इमि रामु जहाँ जहँ जाहिं।।121।।

    अर्थ · Hindi

    होहिं प्रेमबस लोग इमि रामु जहाँ जहँ जाहिं।।121।।

  1204. RCM 2.122.1Open verse →

    गाँव गाँव अस होइ अनंदू। देखि भानुकुल कैरव चंदू।।

    अर्थ · Hindi

    गाँव गाँव अस होइ अनंदू। देखि भानुकुल कैरव चंदू।।

  1205. RCM 2.122.2Open verse →

    जे कछु समाचार सुनि पावहिं। ते नृप रानिहि दोसु लगावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जे कछु समाचार सुनि पावहिं। ते नृप रानिहि दोसु लगावहिं।।

  1206. RCM 2.122.3Open verse →

    कहहिं एक अति भल नरनाहू। दीन्ह हमहि जोइ लोचन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं एक अति भल नरनाहू। दीन्ह हमहि जोइ लोचन लाहू।।

  1207. RCM 2.122.4Open verse →

    कहहिं परस्पर लोग लोगाईं। बातें सरल सनेह सुहाईं।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं परस्पर लोग लोगाईं। बातें सरल सनेह सुहाईं।।

  1208. RCM 2.122.5Open verse →

    ते पितु मातु धन्य जिन्ह जाए। धन्य सो नगरु जहाँ तें आए।।

    अर्थ · Hindi

    ते पितु मातु धन्य जिन्ह जाए। धन्य सो नगरु जहाँ तें आए।।

  1209. RCM 2.122.6Open verse →

    धन्य सो देसु सैलु बन गाऊँ। जहँ जहँ जाहिं धन्य सोइ ठाऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य सो देसु सैलु बन गाऊँ। जहँ जहँ जाहिं धन्य सोइ ठाऊँ।।

  1210. RCM 2.122.7Open verse →

    सुख पायउ बिरंचि रचि तेही। ए जेहि के सब भाँति सनेही।।

    अर्थ · Hindi

    सुख पायउ बिरंचि रचि तेही। ए जेहि के सब भाँति सनेही।।

  1211. RCM 2.122.8Open verse →

    राम लखन पथि कथा सुहाई। रही सकल मग कानन छाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन पथि कथा सुहाई। रही सकल मग कानन छाई।।

  1212. RCM 2.122.9Open verse →

    एहि बिधि रघुकुल कमल रबि मग लोगन्ह सुख देत।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि रघुकुल कमल रबि मग लोगन्ह सुख देत।

  1213. RCM 2.122.10Open verse →

    जाहिं चले देखत बिपिन सिय सौमित्रि समेत।।122।।

    अर्थ · Hindi

    जाहिं चले देखत बिपिन सिय सौमित्रि समेत।।122।।

  1214. RCM 2.123.1Open verse →

    आगे रामु लखनु बने पाछें। तापस बेष बिराजत काछें।।

    अर्थ · Hindi

    आगे रामु लखनु बने पाछें। तापस बेष बिराजत काछें।।

  1215. RCM 2.123.2Open verse →

    उभय बीच सिय सोहति कैसे। ब्रह्म जीव बिच माया जैसे।।

    अर्थ · Hindi

    उभय बीच सिय सोहति कैसे। ब्रह्म जीव बिच माया जैसे।।

  1216. RCM 2.123.3Open verse →

    बहुरि कहउँ छबि जसि मन बसई। जनु मधु मदन मध्य रति लसई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि कहउँ छबि जसि मन बसई। जनु मधु मदन मध्य रति लसई।।

  1217. RCM 2.123.4Open verse →

    उपमा बहुरि कहउँ जियँ जोही। जनु बुध बिधु बिच रोहिनि सोही।।

    अर्थ · Hindi

    उपमा बहुरि कहउँ जियँ जोही। जनु बुध बिधु बिच रोहिनि सोही।।

  1218. RCM 2.123.5Open verse →

    प्रभु पद रेख बीच बिच सीता। धरति चरन मग चलति सभीता।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद रेख बीच बिच सीता। धरति चरन मग चलति सभीता।।

  1219. RCM 2.123.6Open verse →

    सीय राम पद अंक बराएँ। लखन चलहिं मगु दाहिन लाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    सीय राम पद अंक बराएँ। लखन चलहिं मगु दाहिन लाएँ।।

  1220. RCM 2.123.7Open verse →

    राम लखन सिय प्रीति सुहाई। बचन अगोचर किमि कहि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सिय प्रीति सुहाई। बचन अगोचर किमि कहि जाई।।

  1221. RCM 2.123.8Open verse →

    खग मृग मगन देखि छबि होहीं। लिए चोरि चित राम बटोहीं।।

    अर्थ · Hindi

    खग मृग मगन देखि छबि होहीं। लिए चोरि चित राम बटोहीं।।

  1222. RCM 2.123.9Open verse →

    जिन्ह जिन्ह देखे पथिक प्रिय सिय समेत दोउ भाइ।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह जिन्ह देखे पथिक प्रिय सिय समेत दोउ भाइ।

  1223. RCM 2.123.10Open verse →

    भव मगु अगमु अनंदु तेइ बिनु श्रम रहे सिराइ।।123।।

    अर्थ · Hindi

    भव मगु अगमु अनंदु तेइ बिनु श्रम रहे सिराइ।।123।।

  1224. RCM 2.124.1Open verse →

    अजहुँ जासु उर सपनेहुँ काऊ। बसहुँ लखनु सिय रामु बटाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अजहुँ जासु उर सपनेहुँ काऊ। बसहुँ लखनु सिय रामु बटाऊ।।

  1225. RCM 2.124.2Open verse →

    राम धाम पथ पाइहि सोई। जो पथ पाव कबहुँ मुनि कोई।।

    अर्थ · Hindi

    राम धाम पथ पाइहि सोई। जो पथ पाव कबहुँ मुनि कोई।।

  1226. RCM 2.124.3Open verse →

    तब रघुबीर श्रमित सिय जानी। देखि निकट बटु सीतल पानी।।

    अर्थ · Hindi

    तब रघुबीर श्रमित सिय जानी। देखि निकट बटु सीतल पानी।।

  1227. RCM 2.124.4Open verse →

    तहँ बसि कंद मूल फल खाई। प्रात नहाइ चले रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ बसि कंद मूल फल खाई। प्रात नहाइ चले रघुराई।।

  1228. RCM 2.124.5Open verse →

    देखत बन सर सैल सुहाए। बालमीकि आश्रम प्रभु आए।।

    अर्थ · Hindi

    देखत बन सर सैल सुहाए। बालमीकि आश्रम प्रभु आए।।

  1229. RCM 2.124.6Open verse →

    राम दीख मुनि बासु सुहावन। सुंदर गिरि काननु जलु पावन।।

    अर्थ · Hindi

    राम दीख मुनि बासु सुहावन। सुंदर गिरि काननु जलु पावन।।

  1230. RCM 2.124.7Open verse →

    सरनि सरोज बिटप बन फूले। गुंजत मंजु मधुप रस भूले।।

    अर्थ · Hindi

    सरनि सरोज बिटप बन फूले। गुंजत मंजु मधुप रस भूले।।

  1231. RCM 2.124.8Open verse →

    खग मृग बिपुल कोलाहल करहीं। बिरहित बैर मुदित मन चरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    खग मृग बिपुल कोलाहल करहीं। बिरहित बैर मुदित मन चरहीं।।

  1232. RCM 2.124.9Open verse →

    सुचि सुंदर आश्रमु निरखि हरषे राजिवनेन।

    अर्थ · Hindi

    सुचि सुंदर आश्रमु निरखि हरषे राजिवनेन।

  1233. RCM 2.124.10Open verse →

    सुनि रघुबर आगमनु मुनि आगें आयउ लेन।।124।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रघुबर आगमनु मुनि आगें आयउ लेन।।124।।

  1234. RCM 2.125.1Open verse →

    मुनि कहुँ राम दंडवत कीन्हा। आसिरबादु बिप्रबर दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि कहुँ राम दंडवत कीन्हा। आसिरबादु बिप्रबर दीन्हा।।

  1235. RCM 2.125.2Open verse →

    देखि राम छबि नयन जुड़ाने। करि सनमानु आश्रमहिं आने।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम छबि नयन जुड़ाने। करि सनमानु आश्रमहिं आने।।

  1236. RCM 2.125.3Open verse →

    मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए। कंद मूल फल मधुर मगाए।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए। कंद मूल फल मधुर मगाए।।

  1237. RCM 2.125.4Open verse →

    सिय सौमित्रि राम फल खाए। तब मुनि आश्रम दिए सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    सिय सौमित्रि राम फल खाए। तब मुनि आश्रम दिए सुहाए।।

  1238. RCM 2.125.5Open verse →

    बालमीकि मन आनँदु भारी। मंगल मूरति नयन निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    बालमीकि मन आनँदु भारी। मंगल मूरति नयन निहारी।।

  1239. RCM 2.125.6Open verse →

    तब कर कमल जोरि रघुराई। बोले बचन श्रवन सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब कर कमल जोरि रघुराई। बोले बचन श्रवन सुखदाई।।

  1240. RCM 2.125.7Open verse →

    तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा। बिस्व बदर जिमि तुम्हरें हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह त्रिकाल दरसी मुनिनाथा। बिस्व बदर जिमि तुम्हरें हाथा।।

  1241. RCM 2.125.8Open verse →

    अस कहि प्रभु सब कथा बखानी। जेहि जेहि भाँति दीन्ह बनु रानी।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि प्रभु सब कथा बखानी। जेहि जेहि भाँति दीन्ह बनु रानी।।

  1242. RCM 2.125.9Open verse →

    तात बचन पुनि मातु हित भाइ भरत अस राउ।

    अर्थ · Hindi

    तात बचन पुनि मातु हित भाइ भरत अस राउ।

  1243. RCM 2.125.10Open verse →

    मो कहुँ दरस तुम्हार प्रभु सबु मम पुन्य प्रभाउ।।125।।

    अर्थ · Hindi

    मो कहुँ दरस तुम्हार प्रभु सबु मम पुन्य प्रभाउ।।125।।

  1244. RCM 2.126.1Open verse →

    देखि पाय मुनिराय तुम्हारे। भए सुकृत सब सुफल हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    देखि पाय मुनिराय तुम्हारे। भए सुकृत सब सुफल हमारे।।

  1245. RCM 2.126.2Open verse →

    अब जहँ राउर आयसु होई। मुनि उदबेगु न पावै कोई।।

    अर्थ · Hindi

    अब जहँ राउर आयसु होई। मुनि उदबेगु न पावै कोई।।

  1246. RCM 2.126.3Open verse →

    मुनि तापस जिन्ह तें दुखु लहहीं। ते नरेस बिनु पावक दहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि तापस जिन्ह तें दुखु लहहीं। ते नरेस बिनु पावक दहहीं।।

  1247. RCM 2.126.4Open verse →

    मंगल मूल बिप्र परितोषू। दहइ कोटि कुल भूसुर रोषू।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल मूल बिप्र परितोषू। दहइ कोटि कुल भूसुर रोषू।।

  1248. RCM 2.126.5Open verse →

    अस जियँ जानि कहिअ सोइ ठाऊँ। सिय सौमित्रि सहित जहँ जाऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    अस जियँ जानि कहिअ सोइ ठाऊँ। सिय सौमित्रि सहित जहँ जाऊँ।।

  1249. RCM 2.126.6Open verse →

    तहँ रचि रुचिर परन तृन साला। बासु करौ कछु काल कृपाला।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ रचि रुचिर परन तृन साला। बासु करौ कछु काल कृपाला।।

  1250. RCM 2.126.7Open verse →

    सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी।।

  1251. RCM 2.126.8Open verse →

    कस न कहहु अस रघुकुलकेतू। तुम्ह पालक संतत श्रुति सेतू।।

    अर्थ · Hindi

    कस न कहहु अस रघुकुलकेतू। तुम्ह पालक संतत श्रुति सेतू।।

  1252. RCM 2.127.1Open verse →

    जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे। बिधि हरि संभु नचावनिहारे।।

    अर्थ · Hindi

    जगु पेखन तुम्ह देखनिहारे। बिधि हरि संभु नचावनिहारे।।

  1253. RCM 2.127.2Open verse →

    तेउ न जानहिं मरमु तुम्हारा। औरु तुम्हहि को जाननिहारा।।

    अर्थ · Hindi

    तेउ न जानहिं मरमु तुम्हारा। औरु तुम्हहि को जाननिहारा।।

  1254. RCM 2.127.3Open verse →

    सोइ जानइ जेहि देहु जनाई। जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ जानइ जेहि देहु जनाई। जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई।।

  1255. RCM 2.127.4Open verse →

    तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन। जानहिं भगत भगत उर चंदन।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरिहि कृपाँ तुम्हहि रघुनंदन। जानहिं भगत भगत उर चंदन।।

  1256. RCM 2.127.5Open verse →

    चिदानंदमय देह तुम्हारी। बिगत बिकार जान अधिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    चिदानंदमय देह तुम्हारी। बिगत बिकार जान अधिकारी।।

  1257. RCM 2.127.6Open verse →

    नर तनु धरेहु संत सुर काजा। कहहु करहु जस प्राकृत राजा।।

    अर्थ · Hindi

    नर तनु धरेहु संत सुर काजा। कहहु करहु जस प्राकृत राजा।।

  1258. RCM 2.127.7Open verse →

    राम देखि सुनि चरित तुम्हारे। जड़ मोहहिं बुध होहिं सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    राम देखि सुनि चरित तुम्हारे। जड़ मोहहिं बुध होहिं सुखारे।।

  1259. RCM 2.127.8Open verse →

    तुम्ह जो कहहु करहु सबु साँचा। जस काछिअ तस चाहिअ नाचा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह जो कहहु करहु सबु साँचा। जस काछिअ तस चाहिअ नाचा।।

  1260. RCM 2.127.9Open verse →

    पूँछेहु मोहि कि रहौं कहँ मैं पूँछत सकुचाउँ।

    अर्थ · Hindi

    पूँछेहु मोहि कि रहौं कहँ मैं पूँछत सकुचाउँ।

  1261. RCM 2.127.10Open verse →

    जहँ न होहु तहँ देहु कहि तुम्हहि देखावौं ठाउँ।।127।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ न होहु तहँ देहु कहि तुम्हहि देखावौं ठाउँ।।127।।

  1262. RCM 2.128.1Open verse →

    सुनि मुनि बचन प्रेम रस साने। सकुचि राम मन महुँ मुसुकाने।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन प्रेम रस साने। सकुचि राम मन महुँ मुसुकाने।।

  1263. RCM 2.128.2Open verse →

    बालमीकि हँसि कहहिं बहोरी। बानी मधुर अमिअ रस बोरी।।

    अर्थ · Hindi

    बालमीकि हँसि कहहिं बहोरी। बानी मधुर अमिअ रस बोरी।।

  1264. RCM 2.128.3Open verse →

    सुनहु राम अब कहउँ निकेता। जहाँ बसहु सिय लखन समेता।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु राम अब कहउँ निकेता। जहाँ बसहु सिय लखन समेता।।

  1265. RCM 2.128.4Open verse →

    जिन्ह के श्रवन समुद्र समाना। कथा तुम्हारि सुभग सरि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह के श्रवन समुद्र समाना। कथा तुम्हारि सुभग सरि नाना।।

  1266. RCM 2.128.5Open verse →

    भरहिं निरंतर होहिं न पूरे। तिन्ह के हिय तुम्ह कहुँ गृह रूरे।।

    अर्थ · Hindi

    भरहिं निरंतर होहिं न पूरे। तिन्ह के हिय तुम्ह कहुँ गृह रूरे।।

  1267. RCM 2.128.6Open verse →

    लोचन चातक जिन्ह करि राखे। रहहिं दरस जलधर अभिलाषे।।

    अर्थ · Hindi

    लोचन चातक जिन्ह करि राखे। रहहिं दरस जलधर अभिलाषे।।

  1268. RCM 2.128.7Open verse →

    निदरहिं सरित सिंधु सर भारी। रूप बिंदु जल होहिं सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    निदरहिं सरित सिंधु सर भारी। रूप बिंदु जल होहिं सुखारी।।

  1269. RCM 2.128.8Open verse →

    तिन्ह के हृदय सदन सुखदायक। बसहु बंधु सिय सह रघुनायक।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह के हृदय सदन सुखदायक। बसहु बंधु सिय सह रघुनायक।।

  1270. RCM 2.128.9Open verse →

    जसु तुम्हार मानस बिमल हंसिनि जीहा जासु।

    अर्थ · Hindi

    जसु तुम्हार मानस बिमल हंसिनि जीहा जासु।

  1271. RCM 2.128.10Open verse →

    मुकुताहल गुन गन चुनइ राम बसहु हियँ तासु।।128।।

    अर्थ · Hindi

    मुकुताहल गुन गन चुनइ राम बसहु हियँ तासु।।128।।

  1272. RCM 2.129.1Open verse →

    प्रभु प्रसाद सुचि सुभग सुबासा। सादर जासु लहइ नित नासा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रसाद सुचि सुभग सुबासा। सादर जासु लहइ नित नासा।।

  1273. RCM 2.129.2Open verse →

    तुम्हहि निबेदित भोजन करहीं। प्रभु प्रसाद पट भूषन धरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हहि निबेदित भोजन करहीं। प्रभु प्रसाद पट भूषन धरहीं।।

  1274. RCM 2.129.3Open verse →

    सीस नवहिं सुर गुरु द्विज देखी। प्रीति सहित करि बिनय बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    सीस नवहिं सुर गुरु द्विज देखी। प्रीति सहित करि बिनय बिसेषी।।

  1275. RCM 2.129.4Open verse →

    कर नित करहिं राम पद पूजा। राम भरोस हृदयँ नहि दूजा।।

    अर्थ · Hindi

    कर नित करहिं राम पद पूजा। राम भरोस हृदयँ नहि दूजा।।

  1276. RCM 2.129.5Open verse →

    चरन राम तीरथ चलि जाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    चरन राम तीरथ चलि जाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।

  1277. RCM 2.129.6Open verse →

    मंत्रराजु नित जपहिं तुम्हारा। पूजहिं तुम्हहि सहित परिवारा।।

    अर्थ · Hindi

    मंत्रराजु नित जपहिं तुम्हारा। पूजहिं तुम्हहि सहित परिवारा।।

  1278. RCM 2.129.7Open verse →

    तरपन होम करहिं बिधि नाना। बिप्र जेवाँइ देहिं बहु दाना।।

    अर्थ · Hindi

    तरपन होम करहिं बिधि नाना। बिप्र जेवाँइ देहिं बहु दाना।।

  1279. RCM 2.129.8Open verse →

    तुम्ह तें अधिक गुरहि जियँ जानी। सकल भायँ सेवहिं सनमानी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह तें अधिक गुरहि जियँ जानी। सकल भायँ सेवहिं सनमानी।।

  1280. RCM 2.130.1Open verse →

    काम कोह मद मान न मोहा। लोभ न छोभ न राग न द्रोहा।।

    अर्थ · Hindi

    काम कोह मद मान न मोहा। लोभ न छोभ न राग न द्रोहा।।

  1281. RCM 2.130.2Open verse →

    जिन्ह कें कपट दंभ नहिं माया। तिन्ह कें हृदय बसहु रघुराया।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह कें कपट दंभ नहिं माया। तिन्ह कें हृदय बसहु रघुराया।।

  1282. RCM 2.130.3Open verse →

    सब के प्रिय सब के हितकारी। दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी।।

    अर्थ · Hindi

    सब के प्रिय सब के हितकारी। दुख सुख सरिस प्रसंसा गारी।।

  1283. RCM 2.130.4Open verse →

    कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी। जागत सोवत सरन तुम्हारी।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी। जागत सोवत सरन तुम्हारी।।

  1284. RCM 2.130.5Open verse →

    तुम्हहि छाड़ि गति दूसरि नाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हहि छाड़ि गति दूसरि नाहीं। राम बसहु तिन्ह के मन माहीं।।

  1285. RCM 2.130.6Open verse →

    जननी सम जानहिं परनारी। धनु पराव बिष तें बिष भारी।।

    अर्थ · Hindi

    जननी सम जानहिं परनारी। धनु पराव बिष तें बिष भारी।।

  1286. RCM 2.130.7Open verse →

    जे हरषहिं पर संपति देखी। दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    जे हरषहिं पर संपति देखी। दुखित होहिं पर बिपति बिसेषी।।

  1287. RCM 2.130.8Open verse →

    जिन्हहि राम तुम्ह प्रानपिआरे। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्हहि राम तुम्ह प्रानपिआरे। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।।

  1288. RCM 2.130.9Open verse →

    स्वामि सखा पितु मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात।

    अर्थ · Hindi

    स्वामि सखा पितु मातु गुर जिन्ह के सब तुम्ह तात।

  1289. RCM 2.130.10Open verse →

    मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात।।130।।

    अर्थ · Hindi

    मन मंदिर तिन्ह कें बसहु सीय सहित दोउ भ्रात।।130।।

  1290. RCM 2.131.1Open verse →

    अवगुन तजि सब के गुन गहहीं। बिप्र धेनु हित संकट सहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अवगुन तजि सब के गुन गहहीं। बिप्र धेनु हित संकट सहहीं।।

  1291. RCM 2.131.2Open verse →

    नीति निपुन जिन्ह कइ जग लीका। घर तुम्हार तिन्ह कर मनु नीका।।

    अर्थ · Hindi

    नीति निपुन जिन्ह कइ जग लीका। घर तुम्हार तिन्ह कर मनु नीका।।

  1292. RCM 2.131.3Open verse →

    गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा। जेहि सब भाँति तुम्हार भरोसा।।

    अर्थ · Hindi

    गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा। जेहि सब भाँति तुम्हार भरोसा।।

  1293. RCM 2.131.4Open verse →

    राम भगत प्रिय लागहिं जेही। तेहि उर बसहु सहित बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    राम भगत प्रिय लागहिं जेही। तेहि उर बसहु सहित बैदेही।।

  1294. RCM 2.131.5Open verse →

    जाति पाँति धनु धरम बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    जाति पाँति धनु धरम बड़ाई। प्रिय परिवार सदन सुखदाई।।

  1295. RCM 2.131.6Open verse →

    सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई। तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    सब तजि तुम्हहि रहइ उर लाई। तेहि के हृदयँ रहहु रघुराई।।

  1296. RCM 2.131.7Open verse →

    सरगु नरकु अपबरगु समाना। जहँ तहँ देख धरें धनु बाना।।

    अर्थ · Hindi

    सरगु नरकु अपबरगु समाना। जहँ तहँ देख धरें धनु बाना।।

  1297. RCM 2.131.8Open verse →

    करम बचन मन राउर चेरा। राम करहु तेहि कें उर डेरा।।

    अर्थ · Hindi

    करम बचन मन राउर चेरा। राम करहु तेहि कें उर डेरा।।

  1298. RCM 2.131.9Open verse →

    जाहि न चाहिअ कबहुँ कछु तुम्ह सन सहज सनेहु।

    अर्थ · Hindi

    जाहि न चाहिअ कबहुँ कछु तुम्ह सन सहज सनेहु।

  1299. RCM 2.131.10Open verse →

    बसहु निरंतर तासु मन सो राउर निज गेहु।।131।।

    अर्थ · Hindi

    बसहु निरंतर तासु मन सो राउर निज गेहु।।131।।

  1300. RCM 2.132.1Open verse →

    एहि बिधि मुनिबर भवन देखाए। बचन सप्रेम राम मन भाए।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि मुनिबर भवन देखाए। बचन सप्रेम राम मन भाए।।

  1301. RCM 2.132.2Open verse →

    कह मुनि सुनहु भानुकुलनायक। आश्रम कहउँ समय सुखदायक।।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनि सुनहु भानुकुलनायक। आश्रम कहउँ समय सुखदायक।।

  1302. RCM 2.132.3Open verse →

    चित्रकूट गिरि करहु निवासू। तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू।।

    अर्थ · Hindi

    चित्रकूट गिरि करहु निवासू। तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू।।

  1303. RCM 2.132.4Open verse →

    सैलु सुहावन कानन चारू। करि केहरि मृग बिहग बिहारू।।

    अर्थ · Hindi

    सैलु सुहावन कानन चारू। करि केहरि मृग बिहग बिहारू।।

  1304. RCM 2.132.5Open verse →

    नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तपबल आनी।।

    अर्थ · Hindi

    नदी पुनीत पुरान बखानी। अत्रिप्रिया निज तपबल आनी।।

  1305. RCM 2.132.6Open verse →

    सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि। जो सब पातक पोतक डाकिनि।।

    अर्थ · Hindi

    सुरसरि धार नाउँ मंदाकिनि। जो सब पातक पोतक डाकिनि।।

  1306. RCM 2.132.7Open verse →

    अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं। करहिं जोग जप तप तन कसहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अत्रि आदि मुनिबर बहु बसहीं। करहिं जोग जप तप तन कसहीं।।

  1307. RCM 2.132.8Open verse →

    चलहु सफल श्रम सब कर करहू। राम देहु गौरव गिरिबरहू।।

    अर्थ · Hindi

    चलहु सफल श्रम सब कर करहू। राम देहु गौरव गिरिबरहू।।

  1308. RCM 2.132.9Open verse →

    चित्रकूट महिमा अमित कहीं महामुनि गाइ।

    अर्थ · Hindi

    चित्रकूट महिमा अमित कहीं महामुनि गाइ।

  1309. RCM 2.132.10Open verse →

    आए नहाए सरित बर सिय समेत दोउ भाइ।।132।।

    अर्थ · Hindi

    आए नहाए सरित बर सिय समेत दोउ भाइ।।132।।

  1310. RCM 2.133.1Open verse →

    रघुबर कहेउ लखन भल घाटू। करहु कतहुँ अब ठाहर ठाटू।।

    अर्थ · Hindi

    रघुबर कहेउ लखन भल घाटू। करहु कतहुँ अब ठाहर ठाटू।।

  1311. RCM 2.133.2Open verse →

    लखन दीख पय उतर करारा। चहुँ दिसि फिरेउ धनुष जिमि नारा।।

    अर्थ · Hindi

    लखन दीख पय उतर करारा। चहुँ दिसि फिरेउ धनुष जिमि नारा।।

  1312. RCM 2.133.3Open verse →

    नदी पनच सर सम दम दाना। सकल कलुष कलि साउज नाना।।

    अर्थ · Hindi

    नदी पनच सर सम दम दाना। सकल कलुष कलि साउज नाना।।

  1313. RCM 2.133.4Open verse →

    चित्रकूट जनु अचल अहेरी। चुकइ न घात मार मुठभेरी।।

    अर्थ · Hindi

    चित्रकूट जनु अचल अहेरी। चुकइ न घात मार मुठभेरी।।

  1314. RCM 2.133.5Open verse →

    अस कहि लखन ठाउँ देखरावा। थलु बिलोकि रघुबर सुखु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि लखन ठाउँ देखरावा। थलु बिलोकि रघुबर सुखु पावा।।

  1315. RCM 2.133.6Open verse →

    रमेउ राम मनु देवन्ह जाना। चले सहित सुर थपति प्रधाना।।

    अर्थ · Hindi

    रमेउ राम मनु देवन्ह जाना। चले सहित सुर थपति प्रधाना।।

  1316. RCM 2.133.7Open verse →

    कोल किरात बेष सब आए। रचे परन तृन सदन सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    कोल किरात बेष सब आए। रचे परन तृन सदन सुहाए।।

  1317. RCM 2.133.8Open verse →

    बरनि न जाहि मंजु दुइ साला। एक ललित लघु एक बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    बरनि न जाहि मंजु दुइ साला। एक ललित लघु एक बिसाला।।

  1318. RCM 2.133.9Open verse →

    लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत।

    अर्थ · Hindi

    लखन जानकी सहित प्रभु राजत रुचिर निकेत।

  1319. RCM 2.133.10Open verse →

    सोह मदनु मुनि बेष जनु रति रितुराज समेत।।133।।

    अर्थ · Hindi

    सोह मदनु मुनि बेष जनु रति रितुराज समेत।।133।।

  1320. RCM 2.134.1Open verse →

    अमर नाग किंनर दिसिपाला। चित्रकूट आए तेहि काला।।

    अर्थ · Hindi

    अमर नाग किंनर दिसिपाला। चित्रकूट आए तेहि काला।।

  1321. RCM 2.134.2Open verse →

    राम प्रनामु कीन्ह सब काहू। मुदित देव लहि लोचन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रनामु कीन्ह सब काहू। मुदित देव लहि लोचन लाहू।।

  1322. RCM 2.134.3Open verse →

    बरषि सुमन कह देव समाजू। नाथ सनाथ भए हम आजू।।

    अर्थ · Hindi

    बरषि सुमन कह देव समाजू। नाथ सनाथ भए हम आजू।।

  1323. RCM 2.134.4Open verse →

    करि बिनती दुख दुसह सुनाए। हरषित निज निज सदन सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिनती दुख दुसह सुनाए। हरषित निज निज सदन सिधाए।।

  1324. RCM 2.134.5Open verse →

    चित्रकूट रघुनंदनु छाए। समाचार सुनि सुनि मुनि आए।।

    अर्थ · Hindi

    चित्रकूट रघुनंदनु छाए। समाचार सुनि सुनि मुनि आए।।

  1325. RCM 2.134.6Open verse →

    आवत देखि मुदित मुनिबृंदा। कीन्ह दंडवत रघुकुल चंदा।।

    अर्थ · Hindi

    आवत देखि मुदित मुनिबृंदा। कीन्ह दंडवत रघुकुल चंदा।।

  1326. RCM 2.134.7Open verse →

    मुनि रघुबरहि लाइ उर लेहीं। सुफल होन हित आसिष देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि रघुबरहि लाइ उर लेहीं। सुफल होन हित आसिष देहीं।।

  1327. RCM 2.134.8Open verse →

    सिय सौमित्र राम छबि देखहिं। साधन सकल सफल करि लेखहिं।।

    अर्थ · Hindi

    सिय सौमित्र राम छबि देखहिं। साधन सकल सफल करि लेखहिं।।

  1328. RCM 2.134.9Open verse →

    जथाजोग सनमानि प्रभु बिदा किए मुनिबृंद।

    अर्थ · Hindi

    जथाजोग सनमानि प्रभु बिदा किए मुनिबृंद।

  1329. RCM 2.134.10Open verse →

    करहि जोग जप जाग तप निज आश्रमन्हि सुछंद।।134।।

    अर्थ · Hindi

    करहि जोग जप जाग तप निज आश्रमन्हि सुछंद।।134।।

  1330. RCM 2.135.1Open verse →

    यह सुधि कोल किरातन्ह पाई। हरषे जनु नव निधि घर आई।।

    अर्थ · Hindi

    यह सुधि कोल किरातन्ह पाई। हरषे जनु नव निधि घर आई।।

  1331. RCM 2.135.2Open verse →

    कंद मूल फल भरि भरि दोना। चले रंक जनु लूटन सोना।।

    अर्थ · Hindi

    कंद मूल फल भरि भरि दोना। चले रंक जनु लूटन सोना।।

  1332. RCM 2.135.3Open verse →

    तिन्ह महँ जिन्ह देखे दोउ भ्राता। अपर तिन्हहि पूँछहि मगु जाता।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह महँ जिन्ह देखे दोउ भ्राता। अपर तिन्हहि पूँछहि मगु जाता।।

  1333. RCM 2.135.4Open verse →

    कहत सुनत रघुबीर निकाई। आइ सबन्हि देखे रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सुनत रघुबीर निकाई। आइ सबन्हि देखे रघुराई।।

  1334. RCM 2.135.5Open verse →

    करहिं जोहारु भेंट धरि आगे। प्रभुहि बिलोकहिं अति अनुरागे।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं जोहारु भेंट धरि आगे। प्रभुहि बिलोकहिं अति अनुरागे।।

  1335. RCM 2.135.6Open verse →

    चित्र लिखे जनु जहँ तहँ ठाढ़े। पुलक सरीर नयन जल बाढ़े।।

    अर्थ · Hindi

    चित्र लिखे जनु जहँ तहँ ठाढ़े। पुलक सरीर नयन जल बाढ़े।।

  1336. RCM 2.135.7Open verse →

    राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    राम सनेह मगन सब जाने। कहि प्रिय बचन सकल सनमाने।।

  1337. RCM 2.135.8Open verse →

    प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी। बचन बिनीत कहहिं कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुहि जोहारि बहोरि बहोरी। बचन बिनीत कहहिं कर जोरी।।

  1338. RCM 2.135.9Open verse →

    अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय।

    अर्थ · Hindi

    अब हम नाथ सनाथ सब भए देखि प्रभु पाय।

  1339. RCM 2.135.10Open verse →

    भाग हमारे आगमनु राउर कोसलराय।।135।।

    अर्थ · Hindi

    भाग हमारे आगमनु राउर कोसलराय।।135।।

  1340. RCM 2.136.1Open verse →

    धन्य भूमि बन पंथ पहारा। जहँ जहँ नाथ पाउ तुम्ह धारा।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य भूमि बन पंथ पहारा। जहँ जहँ नाथ पाउ तुम्ह धारा।।

  1341. RCM 2.136.2Open verse →

    धन्य बिहग मृग काननचारी। सफल जनम भए तुम्हहि निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य बिहग मृग काननचारी। सफल जनम भए तुम्हहि निहारी।।

  1342. RCM 2.136.3Open verse →

    हम सब धन्य सहित परिवारा। दीख दरसु भरि नयन तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    हम सब धन्य सहित परिवारा। दीख दरसु भरि नयन तुम्हारा।।

  1343. RCM 2.136.4Open verse →

    कीन्ह बासु भल ठाउँ बिचारी। इहाँ सकल रितु रहब सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह बासु भल ठाउँ बिचारी। इहाँ सकल रितु रहब सुखारी।।

  1344. RCM 2.136.5Open verse →

    हम सब भाँति करब सेवकाई। करि केहरि अहि बाघ बराई।।

    अर्थ · Hindi

    हम सब भाँति करब सेवकाई। करि केहरि अहि बाघ बराई।।

  1345. RCM 2.136.6Open verse →

    बन बेहड़ गिरि कंदर खोहा। सब हमार प्रभु पग पग जोहा।।

    अर्थ · Hindi

    बन बेहड़ गिरि कंदर खोहा। सब हमार प्रभु पग पग जोहा।।

  1346. RCM 2.136.7Open verse →

    तहँ तहँ तुम्हहि अहेर खेलाउब। सर निरझर जलठाउँ देखाउब।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ तहँ तुम्हहि अहेर खेलाउब। सर निरझर जलठाउँ देखाउब।।

  1347. RCM 2.136.8Open verse →

    हम सेवक परिवार समेता। नाथ न सकुचब आयसु देता।।

    अर्थ · Hindi

    हम सेवक परिवार समेता। नाथ न सकुचब आयसु देता।।

  1348. RCM 2.136.9Open verse →

    बेद बचन मुनि मन अगम ते प्रभु करुना ऐन।

    अर्थ · Hindi

    बेद बचन मुनि मन अगम ते प्रभु करुना ऐन।

  1349. RCM 2.136.10Open verse →

    बचन किरातन्ह के सुनत जिमि पितु बालक बैन।।136।।

    अर्थ · Hindi

    बचन किरातन्ह के सुनत जिमि पितु बालक बैन।।136।।

  1350. RCM 2.137.1Open verse →

    रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा।।

  1351. RCM 2.137.2Open verse →

    राम सकल बनचर तब तोषे। कहि मृदु बचन प्रेम परिपोषे।।

    अर्थ · Hindi

    राम सकल बनचर तब तोषे। कहि मृदु बचन प्रेम परिपोषे।।

  1352. RCM 2.137.3Open verse →

    बिदा किए सिर नाइ सिधाए। प्रभु गुन कहत सुनत घर आए।।

    अर्थ · Hindi

    बिदा किए सिर नाइ सिधाए। प्रभु गुन कहत सुनत घर आए।।

  1353. RCM 2.137.4Open verse →

    एहि बिधि सिय समेत दोउ भाई। बसहिं बिपिन सुर मुनि सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सिय समेत दोउ भाई। बसहिं बिपिन सुर मुनि सुखदाई।।

  1354. RCM 2.137.5Open verse →

    जब ते आइ रहे रघुनायकु। तब तें भयउ बनु मंगलदायकु।।

    अर्थ · Hindi

    जब ते आइ रहे रघुनायकु। तब तें भयउ बनु मंगलदायकु।।

  1355. RCM 2.137.6Open verse →

    फूलहिं फलहिं बिटप बिधि नाना।।मंजु बलित बर बेलि बिताना।।

    अर्थ · Hindi

    फूलहिं फलहिं बिटप बिधि नाना।।मंजु बलित बर बेलि बिताना।।

  1356. RCM 2.137.7Open verse →

    सुरतरु सरिस सुभायँ सुहाए। मनहुँ बिबुध बन परिहरि आए।।

    अर्थ · Hindi

    सुरतरु सरिस सुभायँ सुहाए। मनहुँ बिबुध बन परिहरि आए।।

  1357. RCM 2.137.8Open verse →

    गंज मंजुतर मधुकर श्रेनी। त्रिबिध बयारि बहइ सुख देनी।।

    अर्थ · Hindi

    गंज मंजुतर मधुकर श्रेनी। त्रिबिध बयारि बहइ सुख देनी।।

  1358. RCM 2.137.9Open verse →

    नीलकंठ कलकंठ सुक चातक चक्क चकोर।

    अर्थ · Hindi

    नीलकंठ कलकंठ सुक चातक चक्क चकोर।

  1359. RCM 2.137.10Open verse →

    भाँति भाँति बोलहिं बिहग श्रवन सुखद चित चोर।।137।।

    अर्थ · Hindi

    भाँति भाँति बोलहिं बिहग श्रवन सुखद चित चोर।।137।।

  1360. RCM 2.138.1Open verse →

    केरि केहरि कपि कोल कुरंगा। बिगतबैर बिचरहिं सब संगा।।

    अर्थ · Hindi

    केरि केहरि कपि कोल कुरंगा। बिगतबैर बिचरहिं सब संगा।।

  1361. RCM 2.138.2Open verse →

    फिरत अहेर राम छबि देखी। होहिं मुदित मृगबंद बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    फिरत अहेर राम छबि देखी। होहिं मुदित मृगबंद बिसेषी।।

  1362. RCM 2.138.3Open verse →

    बिबुध बिपिन जहँ लगि जग माहीं। देखि राम बनु सकल सिहाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिबुध बिपिन जहँ लगि जग माहीं। देखि राम बनु सकल सिहाहीं।।

  1363. RCM 2.138.4Open verse →

    सुरसरि सरसइ दिनकर कन्या। मेकलसुता गोदावरि धन्या।।

    अर्थ · Hindi

    सुरसरि सरसइ दिनकर कन्या। मेकलसुता गोदावरि धन्या।।

  1364. RCM 2.138.5Open verse →

    सब सर सिंधु नदी नद नाना। मंदाकिनि कर करहिं बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    सब सर सिंधु नदी नद नाना। मंदाकिनि कर करहिं बखाना।।

  1365. RCM 2.138.6Open verse →

    उदय अस्त गिरि अरु कैलासू। मंदर मेरु सकल सुरबासू।।

    अर्थ · Hindi

    उदय अस्त गिरि अरु कैलासू। मंदर मेरु सकल सुरबासू।।

  1366. RCM 2.138.7Open verse →

    सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते।।

    अर्थ · Hindi

    सैल हिमाचल आदिक जेते। चित्रकूट जसु गावहिं तेते।।

  1367. RCM 2.138.8Open verse →

    बिंधि मुदित मन सुखु न समाई। श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिंधि मुदित मन सुखु न समाई। श्रम बिनु बिपुल बड़ाई पाई।।

  1368. RCM 2.138.9Open verse →

    चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति।

    अर्थ · Hindi

    चित्रकूट के बिहग मृग बेलि बिटप तृन जाति।

  1369. RCM 2.138.10Open verse →

    पुन्य पुंज सब धन्य अस कहहिं देव दिन राति।।138।।

    अर्थ · Hindi

    पुन्य पुंज सब धन्य अस कहहिं देव दिन राति।।138।।

  1370. RCM 2.139.1Open verse →

    नयनवंत रघुबरहि बिलोकी। पाइ जनम फल होहिं बिसोकी।।

    अर्थ · Hindi

    नयनवंत रघुबरहि बिलोकी। पाइ जनम फल होहिं बिसोकी।।

  1371. RCM 2.139.2Open verse →

    परसि चरन रज अचर सुखारी। भए परम पद के अधिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    परसि चरन रज अचर सुखारी। भए परम पद के अधिकारी।।

  1372. RCM 2.139.3Open verse →

    सो बनु सैलु सुभायँ सुहावन। मंगलमय अति पावन पावन।।

    अर्थ · Hindi

    सो बनु सैलु सुभायँ सुहावन। मंगलमय अति पावन पावन।।

  1373. RCM 2.139.4Open verse →

    महिमा कहिअ कवनि बिधि तासू। सुखसागर जहँ कीन्ह निवासू।।

    अर्थ · Hindi

    महिमा कहिअ कवनि बिधि तासू। सुखसागर जहँ कीन्ह निवासू।।

  1374. RCM 2.139.5Open verse →

    पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई।।

    अर्थ · Hindi

    पय पयोधि तजि अवध बिहाई। जहँ सिय लखनु रामु रहे आई।।

  1375. RCM 2.139.6Open verse →

    कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन। जौं सत सहस होंहिं सहसानन।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न सकहिं सुषमा जसि कानन। जौं सत सहस होंहिं सहसानन।।

  1376. RCM 2.139.7Open verse →

    सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं। डाबर कमठ कि मंदर लेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सो मैं बरनि कहौं बिधि केहीं। डाबर कमठ कि मंदर लेहीं।।

  1377. RCM 2.139.8Open verse →

    सेवहिं लखनु करम मन बानी। जाइ न सीलु सनेहु बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सेवहिं लखनु करम मन बानी। जाइ न सीलु सनेहु बखानी।।

  1378. RCM 2.139.9Open verse →

    -छिनु छिनु लखि सिय राम पद जानि आपु पर नेहु।

    अर्थ · Hindi

    -छिनु छिनु लखि सिय राम पद जानि आपु पर नेहु।

  1379. RCM 2.139.10Open verse →

    करत न सपनेहुँ लखनु चितु बंधु मातु पितु गेहु।।139।।

    अर्थ · Hindi

    करत न सपनेहुँ लखनु चितु बंधु मातु पितु गेहु।।139।।

  1380. RCM 2.140.1Open verse →

    राम संग सिय रहति सुखारी। पुर परिजन गृह सुरति बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम संग सिय रहति सुखारी। पुर परिजन गृह सुरति बिसारी।।

  1381. RCM 2.140.2Open verse →

    छिनु छिनु पिय बिधु बदनु निहारी। प्रमुदित मनहुँ चकोरकुमारी।।

    अर्थ · Hindi

    छिनु छिनु पिय बिधु बदनु निहारी। प्रमुदित मनहुँ चकोरकुमारी।।

  1382. RCM 2.140.3Open verse →

    नाह नेहु नित बढ़त बिलोकी। हरषित रहति दिवस जिमि कोकी।।

    अर्थ · Hindi

    नाह नेहु नित बढ़त बिलोकी। हरषित रहति दिवस जिमि कोकी।।

  1383. RCM 2.140.4Open verse →

    सिय मनु राम चरन अनुरागा। अवध सहस सम बनु प्रिय लागा।।

    अर्थ · Hindi

    सिय मनु राम चरन अनुरागा। अवध सहस सम बनु प्रिय लागा।।

  1384. RCM 2.140.5Open verse →

    परनकुटी प्रिय प्रियतम संगा। प्रिय परिवारु कुरंग बिहंगा।।

    अर्थ · Hindi

    परनकुटी प्रिय प्रियतम संगा। प्रिय परिवारु कुरंग बिहंगा।।

  1385. RCM 2.140.6Open verse →

    सासु ससुर सम मुनितिय मुनिबर। असनु अमिअ सम कंद मूल फर।।

    अर्थ · Hindi

    सासु ससुर सम मुनितिय मुनिबर। असनु अमिअ सम कंद मूल फर।।

  1386. RCM 2.140.7Open verse →

    नाथ साथ साँथरी सुहाई। मयन सयन सय सम सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ साथ साँथरी सुहाई। मयन सयन सय सम सुखदाई।।

  1387. RCM 2.140.8Open verse →

    लोकप होहिं बिलोकत जासू। तेहि कि मोहि सक बिषय बिलासू।।

    अर्थ · Hindi

    लोकप होहिं बिलोकत जासू। तेहि कि मोहि सक बिषय बिलासू।।

  1388. RCM 2.140.9Open verse →

    -सुमिरत रामहि तजहिं जन तृन सम बिषय बिलासु।

    अर्थ · Hindi

    -सुमिरत रामहि तजहिं जन तृन सम बिषय बिलासु।

  1389. RCM 2.140.10Open verse →

    रामप्रिया जग जननि सिय कछु न आचरजु तासु।।140।।

    अर्थ · Hindi

    रामप्रिया जग जननि सिय कछु न आचरजु तासु।।140।।

  1390. RCM 2.141.1Open verse →

    सीय लखन जेहि बिधि सुखु लहहीं। सोइ रघुनाथ करहि सोइ कहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सीय लखन जेहि बिधि सुखु लहहीं। सोइ रघुनाथ करहि सोइ कहहीं।।

  1391. RCM 2.141.2Open verse →

    कहहिं पुरातन कथा कहानी। सुनहिं लखनु सिय अति सुखु मानी।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं पुरातन कथा कहानी। सुनहिं लखनु सिय अति सुखु मानी।

  1392. RCM 2.141.3Open verse →

    जब जब रामु अवध सुधि करहीं। तब तब बारि बिलोचन भरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जब जब रामु अवध सुधि करहीं। तब तब बारि बिलोचन भरहीं।।

  1393. RCM 2.141.4Open verse →

    सुमिरि मातु पितु परिजन भाई। भरत सनेहु सीलु सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि मातु पितु परिजन भाई। भरत सनेहु सीलु सेवकाई।।

  1394. RCM 2.141.5Open verse →

    कृपासिंधु प्रभु होहिं दुखारी। धीरजु धरहिं कुसमउ बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु प्रभु होहिं दुखारी। धीरजु धरहिं कुसमउ बिचारी।।

  1395. RCM 2.141.6Open verse →

    लखि सिय लखनु बिकल होइ जाहीं। जिमि पुरुषहि अनुसर परिछाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    लखि सिय लखनु बिकल होइ जाहीं। जिमि पुरुषहि अनुसर परिछाहीं।।

  1396. RCM 2.141.7Open verse →

    प्रिया बंधु गति लखि रघुनंदनु। धीर कृपाल भगत उर चंदनु।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिया बंधु गति लखि रघुनंदनु। धीर कृपाल भगत उर चंदनु।।

  1397. RCM 2.141.8Open verse →

    लगे कहन कछु कथा पुनीता। सुनि सुखु लहहिं लखनु अरु सीता।।

    अर्थ · Hindi

    लगे कहन कछु कथा पुनीता। सुनि सुखु लहहिं लखनु अरु सीता।।

  1398. RCM 2.141.9Open verse →

    रामु लखन सीता सहित सोहत परन निकेत।

    अर्थ · Hindi

    रामु लखन सीता सहित सोहत परन निकेत।

  1399. RCM 2.141.10Open verse →

    जिमि बासव बस अमरपुर सची जयंत समेत।।141।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि बासव बस अमरपुर सची जयंत समेत।।141।।

  1400. RCM 2.142.1Open verse →

    जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें। पलक बिलोचन गोलक जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    जोगवहिं प्रभु सिय लखनहिं कैसें। पलक बिलोचन गोलक जैसें।।

  1401. RCM 2.142.2Open verse →

    सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि। जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि।।

    अर्थ · Hindi

    सेवहिं लखनु सीय रघुबीरहि। जिमि अबिबेकी पुरुष सरीरहि।।

  1402. RCM 2.142.3Open verse →

    एहि बिधि प्रभु बन बसहिं सुखारी। खग मृग सुर तापस हितकारी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि प्रभु बन बसहिं सुखारी। खग मृग सुर तापस हितकारी।।

  1403. RCM 2.142.4Open verse →

    कहेउँ राम बन गवनु सुहावा। सुनहु सुमंत्र अवध जिमि आवा।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउँ राम बन गवनु सुहावा। सुनहु सुमंत्र अवध जिमि आवा।।

  1404. RCM 2.142.5Open verse →

    फिरेउ निषादु प्रभुहि पहुँचाई। सचिव सहित रथ देखेसि आई।।

    अर्थ · Hindi

    फिरेउ निषादु प्रभुहि पहुँचाई। सचिव सहित रथ देखेसि आई।।

  1405. RCM 2.142.6Open verse →

    मंत्री बिकल बिलोकि निषादू। कहि न जाइ जस भयउ बिषादू।।

    अर्थ · Hindi

    मंत्री बिकल बिलोकि निषादू। कहि न जाइ जस भयउ बिषादू।।

  1406. RCM 2.142.7Open verse →

    राम राम सिय लखन पुकारी। परेउ धरनितल ब्याकुल भारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम राम सिय लखन पुकारी। परेउ धरनितल ब्याकुल भारी।।

  1407. RCM 2.142.8Open verse →

    देखि दखिन दिसि हय हिहिनाहीं। जनु बिनु पंख बिहग अकुलाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    देखि दखिन दिसि हय हिहिनाहीं। जनु बिनु पंख बिहग अकुलाहीं।।

  1408. RCM 2.142.9Open verse →

    नहिं तृन चरहिं पिअहिं जलु मोचहिं लोचन बारि।

    अर्थ · Hindi

    नहिं तृन चरहिं पिअहिं जलु मोचहिं लोचन बारि।

  1409. RCM 2.142.10Open verse →

    ब्याकुल भए निषाद सब रघुबर बाजि निहारि।।142।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याकुल भए निषाद सब रघुबर बाजि निहारि।।142।।

  1410. RCM 2.143.1Open verse →

    धरि धीरज तब कहइ निषादू। अब सुमंत्र परिहरहु बिषादू।।

    अर्थ · Hindi

    धरि धीरज तब कहइ निषादू। अब सुमंत्र परिहरहु बिषादू।।

  1411. RCM 2.143.2Open verse →

    तुम्ह पंडित परमारथ ग्याता। धरहु धीर लखि बिमुख बिधाता

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह पंडित परमारथ ग्याता। धरहु धीर लखि बिमुख बिधाता

  1412. RCM 2.143.3Open verse →

    बिबिध कथा कहि कहि मृदु बानी। रथ बैठारेउ बरबस आनी।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध कथा कहि कहि मृदु बानी। रथ बैठारेउ बरबस आनी।।

  1413. RCM 2.143.4Open verse →

    सोक सिथिल रथ सकइ न हाँकी। रघुबर बिरह पीर उर बाँकी।।

    अर्थ · Hindi

    सोक सिथिल रथ सकइ न हाँकी। रघुबर बिरह पीर उर बाँकी।।

  1414. RCM 2.143.5Open verse →

    चरफराहिं मग चलहिं न घोरे। बन मृग मनहुँ आनि रथ जोरे।।

    अर्थ · Hindi

    चरफराहिं मग चलहिं न घोरे। बन मृग मनहुँ आनि रथ जोरे।।

  1415. RCM 2.143.6Open verse →

    अढ़ुकि परहिं फिरि हेरहिं पीछें। राम बियोगि बिकल दुख तीछें।।

    अर्थ · Hindi

    अढ़ुकि परहिं फिरि हेरहिं पीछें। राम बियोगि बिकल दुख तीछें।।

  1416. RCM 2.143.7Open verse →

    जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही।।

    अर्थ · Hindi

    जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही।।

  1417. RCM 2.143.8Open verse →

    बाजि बिरह गति कहि किमि जाती। बिनु मनि फनिक बिकल जेहि भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    बाजि बिरह गति कहि किमि जाती। बिनु मनि फनिक बिकल जेहि भाँती।।

  1418. RCM 2.143.9Open verse →

    भयउ निषाद बिषादबस देखत सचिव तुरंग।

    अर्थ · Hindi

    भयउ निषाद बिषादबस देखत सचिव तुरंग।

  1419. RCM 2.143.10Open verse →

    बोलि सुसेवक चारि तब दिए सारथी संग।।143।।

    अर्थ · Hindi

    बोलि सुसेवक चारि तब दिए सारथी संग।।143।।

  1420. RCM 2.144.1Open verse →

    गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई। बिरहु बिषादु बरनि नहिं जाई।।

    अर्थ · Hindi

    गुह सारथिहि फिरेउ पहुँचाई। बिरहु बिषादु बरनि नहिं जाई।।

  1421. RCM 2.144.2Open verse →

    चले अवध लेइ रथहि निषादा। होहि छनहिं छन मगन बिषादा।।

    अर्थ · Hindi

    चले अवध लेइ रथहि निषादा। होहि छनहिं छन मगन बिषादा।।

  1422. RCM 2.144.3Open verse →

    सोच सुमंत्र बिकल दुख दीना। धिग जीवन रघुबीर बिहीना।।

    अर्थ · Hindi

    सोच सुमंत्र बिकल दुख दीना। धिग जीवन रघुबीर बिहीना।।

  1423. RCM 2.144.4Open verse →

    रहिहि न अंतहुँ अधम सरीरू। जसु न लहेउ बिछुरत रघुबीरू।।

    अर्थ · Hindi

    रहिहि न अंतहुँ अधम सरीरू। जसु न लहेउ बिछुरत रघुबीरू।।

  1424. RCM 2.144.5Open verse →

    भए अजस अघ भाजन प्राना। कवन हेतु नहिं करत पयाना।।

    अर्थ · Hindi

    भए अजस अघ भाजन प्राना। कवन हेतु नहिं करत पयाना।।

  1425. RCM 2.144.6Open verse →

    अहह मंद मनु अवसर चूका। अजहुँ न हृदय होत दुइ टूका।।

    अर्थ · Hindi

    अहह मंद मनु अवसर चूका। अजहुँ न हृदय होत दुइ टूका।।

  1426. RCM 2.144.7Open verse →

    मीजि हाथ सिरु धुनि पछिताई। मनहँ कृपन धन रासि गवाँई।।

    अर्थ · Hindi

    मीजि हाथ सिरु धुनि पछिताई। मनहँ कृपन धन रासि गवाँई।।

  1427. RCM 2.144.8Open verse →

    बिरिद बाँधि बर बीरु कहाई। चलेउ समर जनु सुभट पराई।।

    अर्थ · Hindi

    बिरिद बाँधि बर बीरु कहाई। चलेउ समर जनु सुभट पराई।।

  1428. RCM 2.144.9Open verse →

    बिप्र बिबेकी बेदबिद संमत साधु सुजाति।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र बिबेकी बेदबिद संमत साधु सुजाति।

  1429. RCM 2.144.10Open verse →

    जिमि धोखें मदपान कर सचिव सोच तेहि भाँति।।144।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि धोखें मदपान कर सचिव सोच तेहि भाँति।।144।।

  1430. RCM 2.145.1Open verse →

    जिमि कुलीन तिय साधु सयानी। पतिदेवता करम मन बानी।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि कुलीन तिय साधु सयानी। पतिदेवता करम मन बानी।।

  1431. RCM 2.145.2Open verse →

    रहै करम बस परिहरि नाहू। सचिव हृदयँ तिमि दारुन दाहु।।

    अर्थ · Hindi

    रहै करम बस परिहरि नाहू। सचिव हृदयँ तिमि दारुन दाहु।।

  1432. RCM 2.145.3Open verse →

    लोचन सजल डीठि भइ थोरी। सुनइ न श्रवन बिकल मति भोरी।।

    अर्थ · Hindi

    लोचन सजल डीठि भइ थोरी। सुनइ न श्रवन बिकल मति भोरी।।

  1433. RCM 2.145.4Open verse →

    सूखहिं अधर लागि मुहँ लाटी। जिउ न जाइ उर अवधि कपाटी।।

    अर्थ · Hindi

    सूखहिं अधर लागि मुहँ लाटी। जिउ न जाइ उर अवधि कपाटी।।

  1434. RCM 2.145.5Open verse →

    बिबरन भयउ न जाइ निहारी। मारेसि मनहुँ पिता महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिबरन भयउ न जाइ निहारी। मारेसि मनहुँ पिता महतारी।।

  1435. RCM 2.145.6Open verse →

    हानि गलानि बिपुल मन ब्यापी। जमपुर पंथ सोच जिमि पापी।।

    अर्थ · Hindi

    हानि गलानि बिपुल मन ब्यापी। जमपुर पंथ सोच जिमि पापी।।

  1436. RCM 2.145.7Open verse →

    बचनु न आव हृदयँ पछिताई। अवध काह मैं देखब जाई।।

    अर्थ · Hindi

    बचनु न आव हृदयँ पछिताई। अवध काह मैं देखब जाई।।

  1437. RCM 2.145.8Open verse →

    राम रहित रथ देखिहि जोई। सकुचिहि मोहि बिलोकत सोई।।

    अर्थ · Hindi

    राम रहित रथ देखिहि जोई। सकुचिहि मोहि बिलोकत सोई।।

  1438. RCM 2.145.9Open verse →

    -धाइ पूँछिहहिं मोहि जब बिकल नगर नर नारि।

    अर्थ · Hindi

    -धाइ पूँछिहहिं मोहि जब बिकल नगर नर नारि।

  1439. RCM 2.145.10Open verse →

    उतरु देब मैं सबहि तब हृदयँ बज्रु बैठारि।।145।।

    अर्थ · Hindi

    उतरु देब मैं सबहि तब हृदयँ बज्रु बैठारि।।145।।

  1440. RCM 2.146.1Open verse →

    पुछिहहिं दीन दुखित सब माता। कहब काह मैं तिन्हहि बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    पुछिहहिं दीन दुखित सब माता। कहब काह मैं तिन्हहि बिधाता।।

  1441. RCM 2.146.2Open verse →

    पूछिहि जबहिं लखन महतारी। कहिहउँ कवन सँदेस सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    पूछिहि जबहिं लखन महतारी। कहिहउँ कवन सँदेस सुखारी।।

  1442. RCM 2.146.3Open verse →

    राम जननि जब आइहि धाई। सुमिरि बच्छु जिमि धेनु लवाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम जननि जब आइहि धाई। सुमिरि बच्छु जिमि धेनु लवाई।।

  1443. RCM 2.146.4Open verse →

    पूँछत उतरु देब मैं तेही। गे बनु राम लखनु बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    पूँछत उतरु देब मैं तेही। गे बनु राम लखनु बैदेही।।

  1444. RCM 2.146.5Open verse →

    जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा।जाइ अवध अब यहु सुखु लेबा।।

    अर्थ · Hindi

    जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा।जाइ अवध अब यहु सुखु लेबा।।

  1445. RCM 2.146.6Open verse →

    पूँछिहि जबहिं राउ दुख दीना। जिवनु जासु रघुनाथ अधीना।।

    अर्थ · Hindi

    पूँछिहि जबहिं राउ दुख दीना। जिवनु जासु रघुनाथ अधीना।।

  1446. RCM 2.146.7Open verse →

    देहउँ उतरु कौनु मुहु लाई। आयउँ कुसल कुअँर पहुँचाई।।

    अर्थ · Hindi

    देहउँ उतरु कौनु मुहु लाई। आयउँ कुसल कुअँर पहुँचाई।।

  1447. RCM 2.146.8Open verse →

    सुनत लखन सिय राम सँदेसू। तृन जिमि तनु परिहरिहि नरेसू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत लखन सिय राम सँदेसू। तृन जिमि तनु परिहरिहि नरेसू।।

  1448. RCM 2.146.9Open verse →

    -ह्रदउ न बिदरेउ पंक जिमि बिछुरत प्रीतमु नीरु।।

    अर्थ · Hindi

    -ह्रदउ न बिदरेउ पंक जिमि बिछुरत प्रीतमु नीरु।।

  1449. RCM 2.146.10Open verse →

    जानत हौं मोहि दीन्ह बिधि यहु जातना सरीरु।।146।।

    अर्थ · Hindi

    जानत हौं मोहि दीन्ह बिधि यहु जातना सरीरु।।146।।

  1450. RCM 2.147.1Open verse →

    एहि बिधि करत पंथ पछितावा। तमसा तीर तुरत रथु आवा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि करत पंथ पछितावा। तमसा तीर तुरत रथु आवा।।

  1451. RCM 2.147.2Open verse →

    बिदा किए करि बिनय निषादा। फिरे पायँ परि बिकल बिषादा।।

    अर्थ · Hindi

    बिदा किए करि बिनय निषादा। फिरे पायँ परि बिकल बिषादा।।

  1452. RCM 2.147.3Open verse →

    पैठत नगर सचिव सकुचाई। जनु मारेसि गुर बाँभन गाई।।

    अर्थ · Hindi

    पैठत नगर सचिव सकुचाई। जनु मारेसि गुर बाँभन गाई।।

  1453. RCM 2.147.4Open verse →

    बैठि बिटप तर दिवसु गवाँवा। साँझ समय तब अवसरु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    बैठि बिटप तर दिवसु गवाँवा। साँझ समय तब अवसरु पावा।।

  1454. RCM 2.147.5Open verse →

    अवध प्रबेसु कीन्ह अँधिआरें। पैठ भवन रथु राखि दुआरें।।

    अर्थ · Hindi

    अवध प्रबेसु कीन्ह अँधिआरें। पैठ भवन रथु राखि दुआरें।।

  1455. RCM 2.147.6Open verse →

    जिन्ह जिन्ह समाचार सुनि पाए। भूप द्वार रथु देखन आए।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह जिन्ह समाचार सुनि पाए। भूप द्वार रथु देखन आए।।

  1456. RCM 2.147.7Open verse →

    रथु पहिचानि बिकल लखि घोरे। गरहिं गात जिमि आतप ओरे।।

    अर्थ · Hindi

    रथु पहिचानि बिकल लखि घोरे। गरहिं गात जिमि आतप ओरे।।

  1457. RCM 2.147.8Open verse →

    नगर नारि नर ब्याकुल कैंसें। निघटत नीर मीनगन जैंसें।।

    अर्थ · Hindi

    नगर नारि नर ब्याकुल कैंसें। निघटत नीर मीनगन जैंसें।।

  1458. RCM 2.147.9Open verse →

    -सचिव आगमनु सुनत सबु बिकल भयउ रनिवासु।

    अर्थ · Hindi

    -सचिव आगमनु सुनत सबु बिकल भयउ रनिवासु।

  1459. RCM 2.147.10Open verse →

    भवन भयंकरु लाग तेहि मानहुँ प्रेत निवासु।।147।।

    अर्थ · Hindi

    भवन भयंकरु लाग तेहि मानहुँ प्रेत निवासु।।147।।

  1460. RCM 2.148.1Open verse →

    अति आरति सब पूँछहिं रानी। उतरु न आव बिकल भइ बानी।।

    अर्थ · Hindi

    अति आरति सब पूँछहिं रानी। उतरु न आव बिकल भइ बानी।।

  1461. RCM 2.148.2Open verse →

    सुनइ न श्रवन नयन नहिं सूझा। कहहु कहाँ नृप तेहि तेहि बूझा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनइ न श्रवन नयन नहिं सूझा। कहहु कहाँ नृप तेहि तेहि बूझा।।

  1462. RCM 2.148.3Open verse →

    दासिन्ह दीख सचिव बिकलाई। कौसल्या गृहँ गईं लवाई।।

    अर्थ · Hindi

    दासिन्ह दीख सचिव बिकलाई। कौसल्या गृहँ गईं लवाई।।

  1463. RCM 2.148.4Open verse →

    जाइ सुमंत्र दीख कस राजा। अमिअ रहित जनु चंदु बिराजा।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ सुमंत्र दीख कस राजा। अमिअ रहित जनु चंदु बिराजा।।

  1464. RCM 2.148.5Open verse →

    आसन सयन बिभूषन हीना। परेउ भूमितल निपट मलीना।।

    अर्थ · Hindi

    आसन सयन बिभूषन हीना। परेउ भूमितल निपट मलीना।।

  1465. RCM 2.148.6Open verse →

    लेइ उसासु सोच एहि भाँती। सुरपुर तें जनु खँसेउ जजाती।।

    अर्थ · Hindi

    लेइ उसासु सोच एहि भाँती। सुरपुर तें जनु खँसेउ जजाती।।

  1466. RCM 2.148.7Open verse →

    लेत सोच भरि छिनु छिनु छाती। जनु जरि पंख परेउ संपाती।।

    अर्थ · Hindi

    लेत सोच भरि छिनु छिनु छाती। जनु जरि पंख परेउ संपाती।।

  1467. RCM 2.148.8Open verse →

    राम राम कह राम सनेही। पुनि कह राम लखन बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    राम राम कह राम सनेही। पुनि कह राम लखन बैदेही।।

  1468. RCM 2.148.9Open verse →

    देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु।

    अर्थ · Hindi

    देखि सचिवँ जय जीव कहि कीन्हेउ दंड प्रनामु।

  1469. RCM 2.148.10Open verse →

    सुनत उठेउ ब्याकुल नृपति कहु सुमंत्र कहँ रामु।।148।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत उठेउ ब्याकुल नृपति कहु सुमंत्र कहँ रामु।।148।।

  1470. RCM 2.149.1Open verse →

    भूप सुमंत्रु लीन्ह उर लाई। बूड़त कछु अधार जनु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    भूप सुमंत्रु लीन्ह उर लाई। बूड़त कछु अधार जनु पाई।।

  1471. RCM 2.149.2Open verse →

    सहित सनेह निकट बैठारी। पूँछत राउ नयन भरि बारी।।

    अर्थ · Hindi

    सहित सनेह निकट बैठारी। पूँछत राउ नयन भरि बारी।।

  1472. RCM 2.149.3Open verse →

    राम कुसल कहु सखा सनेही। कहँ रघुनाथु लखनु बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    राम कुसल कहु सखा सनेही। कहँ रघुनाथु लखनु बैदेही।।

  1473. RCM 2.149.4Open verse →

    आने फेरि कि बनहि सिधाए। सुनत सचिव लोचन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    आने फेरि कि बनहि सिधाए। सुनत सचिव लोचन जल छाए।।

  1474. RCM 2.149.5Open verse →

    सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू। कहु सिय राम लखन संदेसू।।

    अर्थ · Hindi

    सोक बिकल पुनि पूँछ नरेसू। कहु सिय राम लखन संदेसू।।

  1475. RCM 2.149.6Open verse →

    राम रूप गुन सील सुभाऊ। सुमिरि सुमिरि उर सोचत राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    राम रूप गुन सील सुभाऊ। सुमिरि सुमिरि उर सोचत राऊ।।

  1476. RCM 2.149.7Open verse →

    राउ सुनाइ दीन्ह बनबासू। सुनि मन भयउ न हरषु हराँसू।।

    अर्थ · Hindi

    राउ सुनाइ दीन्ह बनबासू। सुनि मन भयउ न हरषु हराँसू।।

  1477. RCM 2.149.8Open verse →

    सो सुत बिछुरत गए न प्राना। को पापी बड़ मोहि समाना।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुत बिछुरत गए न प्राना। को पापी बड़ मोहि समाना।।

  1478. RCM 2.149.9Open verse →

    सखा रामु सिय लखनु जहँ तहाँ मोहि पहुँचाउ।

    अर्थ · Hindi

    सखा रामु सिय लखनु जहँ तहाँ मोहि पहुँचाउ।

  1479. RCM 2.149.10Open verse →

    नाहिं त चाहत चलन अब प्रान कहउँ सतिभाउ।।149।।

    अर्थ · Hindi

    नाहिं त चाहत चलन अब प्रान कहउँ सतिभाउ।।149।।

  1480. RCM 2.150.1Open verse →

    पुनि पुनि पूँछत मंत्रहि राऊ। प्रियतम सुअन सँदेस सुनाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि पूँछत मंत्रहि राऊ। प्रियतम सुअन सँदेस सुनाऊ।।

  1481. RCM 2.150.2Open verse →

    करहि सखा सोइ बेगि उपाऊ। रामु लखनु सिय नयन देखाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    करहि सखा सोइ बेगि उपाऊ। रामु लखनु सिय नयन देखाऊ।।

  1482. RCM 2.150.3Open verse →

    सचिव धीर धरि कह मुदु बानी। महाराज तुम्ह पंडित ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव धीर धरि कह मुदु बानी। महाराज तुम्ह पंडित ग्यानी।।

  1483. RCM 2.150.4Open verse →

    बीर सुधीर धुरंधर देवा। साधु समाजु सदा तुम्ह सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    बीर सुधीर धुरंधर देवा। साधु समाजु सदा तुम्ह सेवा।।

  1484. RCM 2.150.5Open verse →

    जनम मरन सब दुख भोगा। हानि लाभ प्रिय मिलन बियोगा।।

    अर्थ · Hindi

    जनम मरन सब दुख भोगा। हानि लाभ प्रिय मिलन बियोगा।।

  1485. RCM 2.150.6Open verse →

    काल करम बस हौहिं गोसाईं। बरबस राति दिवस की नाईं।।

    अर्थ · Hindi

    काल करम बस हौहिं गोसाईं। बरबस राति दिवस की नाईं।।

  1486. RCM 2.150.7Open verse →

    सुख हरषहिं जड़ दुख बिलखाहीं। दोउ सम धीर धरहिं मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुख हरषहिं जड़ दुख बिलखाहीं। दोउ सम धीर धरहिं मन माहीं।।

  1487. RCM 2.150.8Open verse →

    धीरज धरहु बिबेकु बिचारी। छाड़िअ सोच सकल हितकारी।।

    अर्थ · Hindi

    धीरज धरहु बिबेकु बिचारी। छाड़िअ सोच सकल हितकारी।।

  1488. RCM 2.150.9Open verse →

    प्रथम बासु तमसा भयउ दूसर सुरसरि तीर।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम बासु तमसा भयउ दूसर सुरसरि तीर।

  1489. RCM 2.150.10Open verse →

    न्हाई रहे जलपानु करि सिय समेत दोउ बीर।।150।।

    अर्थ · Hindi

    न्हाई रहे जलपानु करि सिय समेत दोउ बीर।।150।।

  1490. RCM 2.151.1Open verse →

    केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि सिंगरौर गवाँई।।

    अर्थ · Hindi

    केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि सिंगरौर गवाँई।।

  1491. RCM 2.151.2Open verse →

    होत प्रात बट छीरु मगावा। जटा मुकुट निज सीस बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    होत प्रात बट छीरु मगावा। जटा मुकुट निज सीस बनावा।।

  1492. RCM 2.151.3Open verse →

    राम सखाँ तब नाव मगाई। प्रिया चढ़ाइ चढ़े रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    राम सखाँ तब नाव मगाई। प्रिया चढ़ाइ चढ़े रघुराई।।

  1493. RCM 2.151.4Open verse →

    लखन बान धनु धरे बनाई। आपु चढ़े प्रभु आयसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    लखन बान धनु धरे बनाई। आपु चढ़े प्रभु आयसु पाई।।

  1494. RCM 2.151.5Open verse →

    बिकल बिलोकि मोहि रघुबीरा। बोले मधुर बचन धरि धीरा।।

    अर्थ · Hindi

    बिकल बिलोकि मोहि रघुबीरा। बोले मधुर बचन धरि धीरा।।

  1495. RCM 2.151.6Open verse →

    तात प्रनामु तात सन कहेहु। बार बार पद पंकज गहेहू।।

    अर्थ · Hindi

    तात प्रनामु तात सन कहेहु। बार बार पद पंकज गहेहू।।

  1496. RCM 2.151.7Open verse →

    करबि पायँ परि बिनय बहोरी। तात करिअ जनि चिंता मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    करबि पायँ परि बिनय बहोरी। तात करिअ जनि चिंता मोरी।।

  1497. RCM 2.151.8Open verse →

    बन मग मंगल कुसल हमारें। कृपा अनुग्रह पुन्य तुम्हारें।।

    अर्थ · Hindi

    बन मग मंगल कुसल हमारें। कृपा अनुग्रह पुन्य तुम्हारें।।

  1498. RCM 2.152.1Open verse →

    पुरजन परिजन सकल निहोरी। तात सुनाएहु बिनती मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन परिजन सकल निहोरी। तात सुनाएहु बिनती मोरी।।

  1499. RCM 2.152.2Open verse →

    सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जातें रह नरनाहु सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जातें रह नरनाहु सुखारी।।

  1500. RCM 2.152.3Open verse →

    कहब सँदेसु भरत के आएँ। नीति न तजिअ राजपदु पाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    कहब सँदेसु भरत के आएँ। नीति न तजिअ राजपदु पाएँ।।

  1501. RCM 2.152.4Open verse →

    पालेहु प्रजहि करम मन बानी। सेएहु मातु सकल सम जानी।।

    अर्थ · Hindi

    पालेहु प्रजहि करम मन बानी। सेएहु मातु सकल सम जानी।।

  1502. RCM 2.152.5Open verse →

    ओर निबाहेहु भायप भाई। करि पितु मातु सुजन सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    ओर निबाहेहु भायप भाई। करि पितु मातु सुजन सेवकाई।।

  1503. RCM 2.152.6Open verse →

    तात भाँति तेहि राखब राऊ। सोच मोर जेहिं करै न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तात भाँति तेहि राखब राऊ। सोच मोर जेहिं करै न काऊ।।

  1504. RCM 2.152.7Open verse →

    लखन कहे कछु बचन कठोरा। बरजि राम पुनि मोहि निहोरा।।

    अर्थ · Hindi

    लखन कहे कछु बचन कठोरा। बरजि राम पुनि मोहि निहोरा।।

  1505. RCM 2.152.8Open verse →

    बार बार निज सपथ देवाई। कहबि न तात लखन लरिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार निज सपथ देवाई। कहबि न तात लखन लरिकाई।।

  1506. RCM 2.152.9Open verse →

    कहि प्रनाम कछु कहन लिय सिय भइ सिथिल सनेह।

    अर्थ · Hindi

    कहि प्रनाम कछु कहन लिय सिय भइ सिथिल सनेह।

  1507. RCM 2.152.10Open verse →

    थकित बचन लोचन सजल पुलक पल्लवित देह।।152।।

    अर्थ · Hindi

    थकित बचन लोचन सजल पुलक पल्लवित देह।।152।।

  1508. RCM 2.153.1Open verse →

    तेहि अवसर रघुबर रूख पाई। केवट पारहि नाव चलाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर रघुबर रूख पाई। केवट पारहि नाव चलाई।।

  1509. RCM 2.153.2Open verse →

    रघुकुलतिलक चले एहि भाँती। देखउँ ठाढ़ कुलिस धरि छाती।।

    अर्थ · Hindi

    रघुकुलतिलक चले एहि भाँती। देखउँ ठाढ़ कुलिस धरि छाती।।

  1510. RCM 2.153.3Open verse →

    मैं आपन किमि कहौं कलेसू। जिअत फिरेउँ लेइ राम सँदेसू।।

    अर्थ · Hindi

    मैं आपन किमि कहौं कलेसू। जिअत फिरेउँ लेइ राम सँदेसू।।

  1511. RCM 2.153.4Open verse →

    अस कहि सचिव बचन रहि गयऊ। हानि गलानि सोच बस भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि सचिव बचन रहि गयऊ। हानि गलानि सोच बस भयऊ।।

  1512. RCM 2.153.5Open verse →

    सुत बचन सुनतहिं नरनाहू। परेउ धरनि उर दारुन दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सुत बचन सुनतहिं नरनाहू। परेउ धरनि उर दारुन दाहू।।

  1513. RCM 2.153.6Open verse →

    तलफत बिषम मोह मन मापा। माजा मनहुँ मीन कहुँ ब्यापा।।

    अर्थ · Hindi

    तलफत बिषम मोह मन मापा। माजा मनहुँ मीन कहुँ ब्यापा।।

  1514. RCM 2.153.7Open verse →

    करि बिलाप सब रोवहिं रानी। महा बिपति किमि जाइ बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिलाप सब रोवहिं रानी। महा बिपति किमि जाइ बखानी।।

  1515. RCM 2.153.8Open verse →

    सुनि बिलाप दुखहू दुखु लागा। धीरजहू कर धीरजु भागा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बिलाप दुखहू दुखु लागा। धीरजहू कर धीरजु भागा।।

  1516. RCM 2.153.9Open verse →

    भयउ कोलाहलु अवध अति सुनि नृप राउर सोरु।

    अर्थ · Hindi

    भयउ कोलाहलु अवध अति सुनि नृप राउर सोरु।

  1517. RCM 2.153.10Open verse →

    बिपुल बिहग बन परेउ निसि मानहुँ कुलिस कठोरु।।153।।

    अर्थ · Hindi

    बिपुल बिहग बन परेउ निसि मानहुँ कुलिस कठोरु।।153।।

  1518. RCM 2.154.1Open verse →

    प्रान कंठगत भयउ भुआलू। मनि बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रान कंठगत भयउ भुआलू। मनि बिहीन जनु ब्याकुल ब्यालू।।

  1519. RCM 2.154.2Open verse →

    इद्रीं सकल बिकल भइँ भारी। जनु सर सरसिज बनु बिनु बारी।।

    अर्थ · Hindi

    इद्रीं सकल बिकल भइँ भारी। जनु सर सरसिज बनु बिनु बारी।।

  1520. RCM 2.154.3Open verse →

    कौसल्याँ नृपु दीख मलाना। रबिकुल रबि अँथयउ जियँ जाना।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्याँ नृपु दीख मलाना। रबिकुल रबि अँथयउ जियँ जाना।

  1521. RCM 2.154.4Open verse →

    उर धरि धीर राम महतारी। बोली बचन समय अनुसारी।।

    अर्थ · Hindi

    उर धरि धीर राम महतारी। बोली बचन समय अनुसारी।।

  1522. RCM 2.154.5Open verse →

    नाथ समुझि मन करिअ बिचारू। राम बियोग पयोधि अपारू।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ समुझि मन करिअ बिचारू। राम बियोग पयोधि अपारू।।

  1523. RCM 2.154.6Open verse →

    करनधार तुम्ह अवध जहाजू। चढ़ेउ सकल प्रिय पथिक समाजू।।

    अर्थ · Hindi

    करनधार तुम्ह अवध जहाजू। चढ़ेउ सकल प्रिय पथिक समाजू।।

  1524. RCM 2.154.7Open verse →

    धीरजु धरिअ त पाइअ पारू। नाहिं त बूड़िहि सबु परिवारू।।

    अर्थ · Hindi

    धीरजु धरिअ त पाइअ पारू। नाहिं त बूड़िहि सबु परिवारू।।

  1525. RCM 2.154.8Open verse →

    जौं जियँ धरिअ बिनय पिय मोरी। रामु लखनु सिय मिलहिं बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं जियँ धरिअ बिनय पिय मोरी। रामु लखनु सिय मिलहिं बहोरी।।

  1526. RCM 2.154.9Open verse →

    प्रिया बचन मृदु सुनत नृपु चितयउ आँखि उघारि।

    अर्थ · Hindi

    प्रिया बचन मृदु सुनत नृपु चितयउ आँखि उघारि।

  1527. RCM 2.154.10Open verse →

    तलफत मीन मलीन जनु सींचत सीतल बारि।।154।।

    अर्थ · Hindi

    तलफत मीन मलीन जनु सींचत सीतल बारि।।154।।

  1528. RCM 2.155.1Open verse →

    धरि धीरजु उठी बैठ भुआलू। कहु सुमंत्र कहँ राम कृपालू।।

    अर्थ · Hindi

    धरि धीरजु उठी बैठ भुआलू। कहु सुमंत्र कहँ राम कृपालू।।

  1529. RCM 2.155.2Open verse →

    कहाँ लखनु कहँ रामु सनेही। कहँ प्रिय पुत्रबधू बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    कहाँ लखनु कहँ रामु सनेही। कहँ प्रिय पुत्रबधू बैदेही।।

  1530. RCM 2.155.3Open verse →

    बिलपत राउ बिकल बहु भाँती। भइ जुग सरिस सिराति न राती।।

    अर्थ · Hindi

    बिलपत राउ बिकल बहु भाँती। भइ जुग सरिस सिराति न राती।।

  1531. RCM 2.155.4Open verse →

    तापस अंध साप सुधि आई। कौसल्यहि सब कथा सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    तापस अंध साप सुधि आई। कौसल्यहि सब कथा सुनाई।।

  1532. RCM 2.155.5Open verse →

    भयउ बिकल बरनत इतिहासा। राम रहित धिग जीवन आसा।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ बिकल बरनत इतिहासा। राम रहित धिग जीवन आसा।।

  1533. RCM 2.155.6Open verse →

    सो तनु राखि करब मैं काहा। जेंहि न प्रेम पनु मोर निबाहा।।

    अर्थ · Hindi

    सो तनु राखि करब मैं काहा। जेंहि न प्रेम पनु मोर निबाहा।।

  1534. RCM 2.155.7Open verse →

    हा रघुनंदन प्रान पिरीते। तुम्ह बिनु जिअत बहुत दिन बीते।।

    अर्थ · Hindi

    हा रघुनंदन प्रान पिरीते। तुम्ह बिनु जिअत बहुत दिन बीते।।

  1535. RCM 2.155.8Open verse →

    हा जानकी लखन हा रघुबर। हा पितु हित चित चातक जलधर।

    अर्थ · Hindi

    हा जानकी लखन हा रघुबर। हा पितु हित चित चातक जलधर।

  1536. RCM 2.155.9Open verse →

    राम राम कहि राम कहि राम राम कहि राम।

    अर्थ · Hindi

    राम राम कहि राम कहि राम राम कहि राम।

  1537. RCM 2.155.10Open verse →

    तनु परिहरि रघुबर बिरहँ राउ गयउ सुरधाम।।155।।

    अर्थ · Hindi

    तनु परिहरि रघुबर बिरहँ राउ गयउ सुरधाम।।155।।

  1538. RCM 2.156.1Open verse →

    जिअन मरन फलु दसरथ पावा। अंड अनेक अमल जसु छावा।।

    अर्थ · Hindi

    जिअन मरन फलु दसरथ पावा। अंड अनेक अमल जसु छावा।।

  1539. RCM 2.156.2Open verse →

    जिअत राम बिधु बदनु निहारा। राम बिरह करि मरनु सँवारा।।

    अर्थ · Hindi

    जिअत राम बिधु बदनु निहारा। राम बिरह करि मरनु सँवारा।।

  1540. RCM 2.156.3Open verse →

    सोक बिकल सब रोवहिं रानी। रूपु सील बलु तेजु बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    सोक बिकल सब रोवहिं रानी। रूपु सील बलु तेजु बखानी।।

  1541. RCM 2.156.4Open verse →

    करहिं बिलाप अनेक प्रकारा। परहीं भूमितल बारहिं बारा।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं बिलाप अनेक प्रकारा। परहीं भूमितल बारहिं बारा।।

  1542. RCM 2.156.5Open verse →

    बिलपहिं बिकल दास अरु दासी। घर घर रुदनु करहिं पुरबासी।।

    अर्थ · Hindi

    बिलपहिं बिकल दास अरु दासी। घर घर रुदनु करहिं पुरबासी।।

  1543. RCM 2.156.6Open verse →

    अँथयउ आजु भानुकुल भानू। धरम अवधि गुन रूप निधानू।।

    अर्थ · Hindi

    अँथयउ आजु भानुकुल भानू। धरम अवधि गुन रूप निधानू।।

  1544. RCM 2.156.7Open verse →

    गारीं सकल कैकइहि देहीं। नयन बिहीन कीन्ह जग जेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गारीं सकल कैकइहि देहीं। नयन बिहीन कीन्ह जग जेहीं।।

  1545. RCM 2.156.8Open verse →

    एहि बिधि बिलपत रैनि बिहानी। आए सकल महामुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि बिलपत रैनि बिहानी। आए सकल महामुनि ग्यानी।।

  1546. RCM 2.156.9Open verse →

    तब बसिष्ठ मुनि समय सम कहि अनेक इतिहास।

    अर्थ · Hindi

    तब बसिष्ठ मुनि समय सम कहि अनेक इतिहास।

  1547. RCM 2.156.10Open verse →

    सोक नेवारेउ सबहि कर निज बिग्यान प्रकास।।156।।

    अर्थ · Hindi

    सोक नेवारेउ सबहि कर निज बिग्यान प्रकास।।156।।

  1548. RCM 2.157.1Open verse →

    तेल नाँव भरि नृप तनु राखा। दूत बोलाइ बहुरि अस भाषा।।

    अर्थ · Hindi

    तेल नाँव भरि नृप तनु राखा। दूत बोलाइ बहुरि अस भाषा।।

  1549. RCM 2.157.2Open verse →

    धावहु बेगि भरत पहिं जाहू। नृप सुधि कतहुँ कहहु जनि काहू।।

    अर्थ · Hindi

    धावहु बेगि भरत पहिं जाहू। नृप सुधि कतहुँ कहहु जनि काहू।।

  1550. RCM 2.157.3Open verse →

    एतनेइ कहेहु भरत सन जाई। गुर बोलाई पठयउ दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    एतनेइ कहेहु भरत सन जाई। गुर बोलाई पठयउ दोउ भाई।।

  1551. RCM 2.157.4Open verse →

    सुनि मुनि आयसु धावन धाए। चले बेग बर बाजि लजाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि आयसु धावन धाए। चले बेग बर बाजि लजाए।।

  1552. RCM 2.157.5Open verse →

    अनरथु अवध अरंभेउ जब तें। कुसगुन होहिं भरत कहुँ तब तें।।

    अर्थ · Hindi

    अनरथु अवध अरंभेउ जब तें। कुसगुन होहिं भरत कहुँ तब तें।।

  1553. RCM 2.157.6Open verse →

    देखहिं राति भयानक सपना। जागि करहिं कटु कोटि कलपना।।

    अर्थ · Hindi

    देखहिं राति भयानक सपना। जागि करहिं कटु कोटि कलपना।।

  1554. RCM 2.157.7Open verse →

    बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना। सिव अभिषेक करहिं बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना। सिव अभिषेक करहिं बिधि नाना।।

  1555. RCM 2.157.8Open verse →

    मागहिं हृदयँ महेस मनाई। कुसल मातु पितु परिजन भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मागहिं हृदयँ महेस मनाई। कुसल मातु पितु परिजन भाई।।

  1556. RCM 2.157.9Open verse →

    एहि बिधि सोचत भरत मन धावन पहुँचे आइ।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सोचत भरत मन धावन पहुँचे आइ।

  1557. RCM 2.157.10Open verse →

    गुर अनुसासन श्रवन सुनि चले गनेसु मनाइ।।157।।

    अर्थ · Hindi

    गुर अनुसासन श्रवन सुनि चले गनेसु मनाइ।।157।।

  1558. RCM 2.158.1Open verse →

    चले समीर बेग हय हाँके। नाघत सरित सैल बन बाँके।।

    अर्थ · Hindi

    चले समीर बेग हय हाँके। नाघत सरित सैल बन बाँके।।

  1559. RCM 2.158.2Open verse →

    हृदयँ सोचु बड़ कछु न सोहाई। अस जानहिं जियँ जाउँ उड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ सोचु बड़ कछु न सोहाई। अस जानहिं जियँ जाउँ उड़ाई।।

  1560. RCM 2.158.3Open verse →

    एक निमेष बरस सम जाई। एहि बिधि भरत नगर निअराई।।

    अर्थ · Hindi

    एक निमेष बरस सम जाई। एहि बिधि भरत नगर निअराई।।

  1561. RCM 2.158.4Open verse →

    असगुन होहिं नगर पैठारा। रटहिं कुभाँति कुखेत करारा।।

    अर्थ · Hindi

    असगुन होहिं नगर पैठारा। रटहिं कुभाँति कुखेत करारा।।

  1562. RCM 2.158.5Open verse →

    खर सिआर बोलहिं प्रतिकूला। सुनि सुनि होइ भरत मन सूला।।

    अर्थ · Hindi

    खर सिआर बोलहिं प्रतिकूला। सुनि सुनि होइ भरत मन सूला।।

  1563. RCM 2.158.6Open verse →

    श्रीहत सर सरिता बन बागा। नगरु बिसेषि भयावनु लागा।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीहत सर सरिता बन बागा। नगरु बिसेषि भयावनु लागा।।

  1564. RCM 2.158.7Open verse →

    खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए।।

    अर्थ · Hindi

    खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए।।

  1565. RCM 2.158.8Open verse →

    नगर नारि नर निपट दुखारी। मनहुँ सबन्हि सब संपति हारी।।

    अर्थ · Hindi

    नगर नारि नर निपट दुखारी। मनहुँ सबन्हि सब संपति हारी।।

  1566. RCM 2.158.9Open verse →

    पुरजन मिलिहिं न कहहिं कछु गवँहिं जोहारहिं जाहिं।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन मिलिहिं न कहहिं कछु गवँहिं जोहारहिं जाहिं।

  1567. RCM 2.158.10Open verse →

    भरत कुसल पूँछि न सकहिं भय बिषाद मन माहिं।।158।।

    अर्थ · Hindi

    भरत कुसल पूँछि न सकहिं भय बिषाद मन माहिं।।158।।

  1568. RCM 2.159.1Open verse →

    हाट बाट नहिं जाइ निहारी। जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी।।

    अर्थ · Hindi

    हाट बाट नहिं जाइ निहारी। जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी।।

  1569. RCM 2.159.2Open verse →

    आवत सुत सुनि कैकयनंदिनि। हरषी रबिकुल जलरुह चंदिनि।।

    अर्थ · Hindi

    आवत सुत सुनि कैकयनंदिनि। हरषी रबिकुल जलरुह चंदिनि।।

  1570. RCM 2.159.3Open verse →

    सजि आरती मुदित उठि धाई। द्वारेहिं भेंटि भवन लेइ आई।।

    अर्थ · Hindi

    सजि आरती मुदित उठि धाई। द्वारेहिं भेंटि भवन लेइ आई।।

  1571. RCM 2.159.4Open verse →

    भरत दुखित परिवारु निहारा। मानहुँ तुहिन बनज बनु मारा।।

    अर्थ · Hindi

    भरत दुखित परिवारु निहारा। मानहुँ तुहिन बनज बनु मारा।।

  1572. RCM 2.159.5Open verse →

    कैकेई हरषित एहि भाँति। मनहुँ मुदित दव लाइ किराती।।

    अर्थ · Hindi

    कैकेई हरषित एहि भाँति। मनहुँ मुदित दव लाइ किराती।।

  1573. RCM 2.159.6Open verse →

    सुतहि ससोच देखि मनु मारें। पूँछति नैहर कुसल हमारें।।

    अर्थ · Hindi

    सुतहि ससोच देखि मनु मारें। पूँछति नैहर कुसल हमारें।।

  1574. RCM 2.159.7Open verse →

    सकल कुसल कहि भरत सुनाई। पूँछी निज कुल कुसल भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    सकल कुसल कहि भरत सुनाई। पूँछी निज कुल कुसल भलाई।।

  1575. RCM 2.159.8Open verse →

    कहु कहँ तात कहाँ सब माता। कहँ सिय राम लखन प्रिय भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    कहु कहँ तात कहाँ सब माता। कहँ सिय राम लखन प्रिय भ्राता।।

  1576. RCM 2.159.9Open verse →

    सुनि सुत बचन सनेहमय कपट नीर भरि नैन।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुत बचन सनेहमय कपट नीर भरि नैन।

  1577. RCM 2.159.10Open verse →

    भरत श्रवन मन सूल सम पापिनि बोली बैन।।159।।

    अर्थ · Hindi

    भरत श्रवन मन सूल सम पापिनि बोली बैन।।159।।

  1578. RCM 2.160.1Open verse →

    तात बात मैं सकल सँवारी। भै मंथरा सहाय बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    तात बात मैं सकल सँवारी। भै मंथरा सहाय बिचारी।।

  1579. RCM 2.160.2Open verse →

    कछुक काज बिधि बीच बिगारेउ। भूपति सुरपति पुर पगु धारेउ।।

    अर्थ · Hindi

    कछुक काज बिधि बीच बिगारेउ। भूपति सुरपति पुर पगु धारेउ।।

  1580. RCM 2.160.3Open verse →

    सुनत भरतु भए बिबस बिषादा। जनु सहमेउ करि केहरि नादा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत भरतु भए बिबस बिषादा। जनु सहमेउ करि केहरि नादा।।

  1581. RCM 2.160.4Open verse →

    तात तात हा तात पुकारी। परे भूमितल ब्याकुल भारी।।

    अर्थ · Hindi

    तात तात हा तात पुकारी। परे भूमितल ब्याकुल भारी।।

  1582. RCM 2.160.5Open verse →

    चलत न देखन पायउँ तोही। तात न रामहि सौंपेहु मोही।।

    अर्थ · Hindi

    चलत न देखन पायउँ तोही। तात न रामहि सौंपेहु मोही।।

  1583. RCM 2.160.6Open verse →

    बहुरि धीर धरि उठे सँभारी। कहु पितु मरन हेतु महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि धीर धरि उठे सँभारी। कहु पितु मरन हेतु महतारी।।

  1584. RCM 2.160.7Open verse →

    सुनि सुत बचन कहति कैकेई। मरमु पाँछि जनु माहुर देई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुत बचन कहति कैकेई। मरमु पाँछि जनु माहुर देई।।

  1585. RCM 2.160.8Open verse →

    आदिहु तें सब आपनि करनी। कुटिल कठोर मुदित मन बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    आदिहु तें सब आपनि करनी। कुटिल कठोर मुदित मन बरनी।।

  1586. RCM 2.160.9Open verse →

    भरतहि बिसरेउ पितु मरन सुनत राम बन गौनु।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि बिसरेउ पितु मरन सुनत राम बन गौनु।

  1587. RCM 2.160.10Open verse →

    हेतु अपनपउ जानि जियँ थकित रहे धरि मौनु।।160।।

    अर्थ · Hindi

    हेतु अपनपउ जानि जियँ थकित रहे धरि मौनु।।160।।

  1588. RCM 2.161.1Open verse →

    बिकल बिलोकि सुतहि समुझावति। मनहुँ जरे पर लोनु लगावति।।

    अर्थ · Hindi

    बिकल बिलोकि सुतहि समुझावति। मनहुँ जरे पर लोनु लगावति।।

  1589. RCM 2.161.2Open verse →

    तात राउ नहिं सोचे जोगू। बिढ़इ सुकृत जसु कीन्हेउ भोगू।।

    अर्थ · Hindi

    तात राउ नहिं सोचे जोगू। बिढ़इ सुकृत जसु कीन्हेउ भोगू।।

  1590. RCM 2.161.3Open verse →

    जीवत सकल जनम फल पाए। अंत अमरपति सदन सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    जीवत सकल जनम फल पाए। अंत अमरपति सदन सिधाए।।

  1591. RCM 2.161.4Open verse →

    अस अनुमानि सोच परिहरहू। सहित समाज राज पुर करहू।।

    अर्थ · Hindi

    अस अनुमानि सोच परिहरहू। सहित समाज राज पुर करहू।।

  1592. RCM 2.161.5Open verse →

    सुनि सुठि सहमेउ राजकुमारू। पाकें छत जनु लाग अँगारू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुठि सहमेउ राजकुमारू। पाकें छत जनु लाग अँगारू।।

  1593. RCM 2.161.6Open verse →

    धीरज धरि भरि लेहिं उसासा। पापनि सबहि भाँति कुल नासा।।

    अर्थ · Hindi

    धीरज धरि भरि लेहिं उसासा। पापनि सबहि भाँति कुल नासा।।

  1594. RCM 2.161.7Open verse →

    जौं पै कुरुचि रही अति तोही। जनमत काहे न मारे मोही।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पै कुरुचि रही अति तोही। जनमत काहे न मारे मोही।।

  1595. RCM 2.161.8Open verse →

    पेड़ काटि तैं पालउ सींचा। मीन जिअन निति बारि उलीचा।।

    अर्थ · Hindi

    पेड़ काटि तैं पालउ सींचा। मीन जिअन निति बारि उलीचा।।

  1596. RCM 2.161.9Open verse →

    हंसबंसु दसरथु जनकु राम लखन से भाइ।

    अर्थ · Hindi

    हंसबंसु दसरथु जनकु राम लखन से भाइ।

  1597. RCM 2.161.10Open verse →

    जननी तूँ जननी भई बिधि सन कछु न बसाइ।।161।।

    अर्थ · Hindi

    जननी तूँ जननी भई बिधि सन कछु न बसाइ।।161।।

  1598. RCM 2.162.1Open verse →

    जब तैं कुमति कुमत जियँ ठयऊ। खंड खंड होइ ह्रदउ न गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जब तैं कुमति कुमत जियँ ठयऊ। खंड खंड होइ ह्रदउ न गयऊ।।

  1599. RCM 2.162.2Open verse →

    बर मागत मन भइ नहिं पीरा। गरि न जीह मुहँ परेउ न कीरा।।

    अर्थ · Hindi

    बर मागत मन भइ नहिं पीरा। गरि न जीह मुहँ परेउ न कीरा।।

  1600. RCM 2.162.3Open verse →

    भूपँ प्रतीत तोरि किमि कीन्ही। मरन काल बिधि मति हरि लीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    भूपँ प्रतीत तोरि किमि कीन्ही। मरन काल बिधि मति हरि लीन्ही।।

  1601. RCM 2.162.4Open verse →

    बिधिहुँ न नारि हृदय गति जानी। सकल कपट अघ अवगुन खानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिधिहुँ न नारि हृदय गति जानी। सकल कपट अघ अवगुन खानी।।

  1602. RCM 2.162.5Open verse →

    सरल सुसील धरम रत राऊ। सो किमि जानै तीय सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सरल सुसील धरम रत राऊ। सो किमि जानै तीय सुभाऊ।।

  1603. RCM 2.162.6Open verse →

    अस को जीव जंतु जग माहीं। जेहि रघुनाथ प्रानप्रिय नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अस को जीव जंतु जग माहीं। जेहि रघुनाथ प्रानप्रिय नाहीं।।

  1604. RCM 2.162.7Open verse →

    भे अति अहित रामु तेउ तोही। को तू अहसि सत्य कहु मोही।।

    अर्थ · Hindi

    भे अति अहित रामु तेउ तोही। को तू अहसि सत्य कहु मोही।।

  1605. RCM 2.162.8Open verse →

    जो हसि सो हसि मुहँ मसि लाई। आँखि ओट उठि बैठहिं जाई।।

    अर्थ · Hindi

    जो हसि सो हसि मुहँ मसि लाई। आँखि ओट उठि बैठहिं जाई।।

  1606. RCM 2.162.9Open verse →

    राम बिरोधी हृदय तें प्रगट कीन्ह बिधि मोहि।

    अर्थ · Hindi

    राम बिरोधी हृदय तें प्रगट कीन्ह बिधि मोहि।

  1607. RCM 2.162.10Open verse →

    मो समान को पातकी बादि कहउँ कछु तोहि।।162।।

    अर्थ · Hindi

    मो समान को पातकी बादि कहउँ कछु तोहि।।162।।

  1608. RCM 2.163.1Open verse →

    सुनि सत्रुघुन मातु कुटिलाई। जरहिं गात रिस कछु न बसाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सत्रुघुन मातु कुटिलाई। जरहिं गात रिस कछु न बसाई।।

  1609. RCM 2.163.2Open verse →

    तेहि अवसर कुबरी तहँ आई। बसन बिभूषन बिबिध बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर कुबरी तहँ आई। बसन बिभूषन बिबिध बनाई।।

  1610. RCM 2.163.3Open verse →

    लखि रिस भरेउ लखन लघु भाई। बरत अनल घृत आहुति पाई।।

    अर्थ · Hindi

    लखि रिस भरेउ लखन लघु भाई। बरत अनल घृत आहुति पाई।।

  1611. RCM 2.163.4Open verse →

    हुमगि लात तकि कूबर मारा। परि मुह भर महि करत पुकारा।।

    अर्थ · Hindi

    हुमगि लात तकि कूबर मारा। परि मुह भर महि करत पुकारा।।

  1612. RCM 2.163.5Open verse →

    कूबर टूटेउ फूट कपारू। दलित दसन मुख रुधिर प्रचारू।।

    अर्थ · Hindi

    कूबर टूटेउ फूट कपारू। दलित दसन मुख रुधिर प्रचारू।।

  1613. RCM 2.163.6Open verse →

    आह दइअ मैं काह नसावा। करत नीक फलु अनइस पावा।।

    अर्थ · Hindi

    आह दइअ मैं काह नसावा। करत नीक फलु अनइस पावा।।

  1614. RCM 2.163.7Open verse →

    सुनि रिपुहन लखि नख सिख खोटी। लगे घसीटन धरि धरि झोंटी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रिपुहन लखि नख सिख खोटी। लगे घसीटन धरि धरि झोंटी।।

  1615. RCM 2.163.8Open verse →

    भरत दयानिधि दीन्हि छड़ाई। कौसल्या पहिं गे दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत दयानिधि दीन्हि छड़ाई। कौसल्या पहिं गे दोउ भाई।।

  1616. RCM 2.163.9Open verse →

    मलिन बसन बिबरन बिकल कृस सरीर दुख भार।

    अर्थ · Hindi

    मलिन बसन बिबरन बिकल कृस सरीर दुख भार।

  1617. RCM 2.163.10Open verse →

    कनक कलप बर बेलि बन मानहुँ हनी तुसार।।163।।

    अर्थ · Hindi

    कनक कलप बर बेलि बन मानहुँ हनी तुसार।।163।।

  1618. RCM 2.164.1Open verse →

    भरतहि देखि मातु उठि धाई। मुरुछित अवनि परी झइँ आई।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि देखि मातु उठि धाई। मुरुछित अवनि परी झइँ आई।।

  1619. RCM 2.164.2Open verse →

    देखत भरतु बिकल भए भारी। परे चरन तन दसा बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखत भरतु बिकल भए भारी। परे चरन तन दसा बिसारी।।

  1620. RCM 2.164.3Open verse →

    मातु तात कहँ देहि देखाई। कहँ सिय रामु लखनु दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मातु तात कहँ देहि देखाई। कहँ सिय रामु लखनु दोउ भाई।।

  1621. RCM 2.164.4Open verse →

    कैकइ कत जनमी जग माझा। जौं जनमि त भइ काहे न बाँझा।।

    अर्थ · Hindi

    कैकइ कत जनमी जग माझा। जौं जनमि त भइ काहे न बाँझा।।

  1622. RCM 2.164.5Open verse →

    कुल कलंकु जेहिं जनमेउ मोही। अपजस भाजन प्रियजन द्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    कुल कलंकु जेहिं जनमेउ मोही। अपजस भाजन प्रियजन द्रोही।।

  1623. RCM 2.164.6Open verse →

    को तिभुवन मोहि सरिस अभागी। गति असि तोरि मातु जेहि लागी।।

    अर्थ · Hindi

    को तिभुवन मोहि सरिस अभागी। गति असि तोरि मातु जेहि लागी।।

  1624. RCM 2.164.7Open verse →

    पितु सुरपुर बन रघुबर केतू। मैं केवल सब अनरथ हेतु।।

    अर्थ · Hindi

    पितु सुरपुर बन रघुबर केतू। मैं केवल सब अनरथ हेतु।।

  1625. RCM 2.164.8Open verse →

    धिग मोहि भयउँ बेनु बन आगी। दुसह दाह दुख दूषन भागी।।

    अर्थ · Hindi

    धिग मोहि भयउँ बेनु बन आगी। दुसह दाह दुख दूषन भागी।।

  1626. RCM 2.164.9Open verse →

    मातु भरत के बचन मृदु सुनि सुनि उठी सँभारि।।

    अर्थ · Hindi

    मातु भरत के बचन मृदु सुनि सुनि उठी सँभारि।।

  1627. RCM 2.164.10Open verse →

    लिए उठाइ लगाइ उर लोचन मोचति बारि।।164।।

    अर्थ · Hindi

    लिए उठाइ लगाइ उर लोचन मोचति बारि।।164।।

  1628. RCM 2.165.1Open verse →

    सरल सुभाय मायँ हियँ लाए। अति हित मनहुँ राम फिरि आए।।

    अर्थ · Hindi

    सरल सुभाय मायँ हियँ लाए। अति हित मनहुँ राम फिरि आए।।

  1629. RCM 2.165.2Open verse →

    भेंटेउ बहुरि लखन लघु भाई। सोकु सनेहु न हृदयँ समाई।।

    अर्थ · Hindi

    भेंटेउ बहुरि लखन लघु भाई। सोकु सनेहु न हृदयँ समाई।।

  1630. RCM 2.165.3Open verse →

    देखि सुभाउ कहत सबु कोई। राम मातु अस काहे न होई।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सुभाउ कहत सबु कोई। राम मातु अस काहे न होई।।

  1631. RCM 2.165.4Open verse →

    माताँ भरतु गोद बैठारे। आँसु पौंछि मृदु बचन उचारे।।

    अर्थ · Hindi

    माताँ भरतु गोद बैठारे। आँसु पौंछि मृदु बचन उचारे।।

  1632. RCM 2.165.5Open verse →

    अजहुँ बच्छ बलि धीरज धरहू। कुसमउ समुझि सोक परिहरहू।।

    अर्थ · Hindi

    अजहुँ बच्छ बलि धीरज धरहू। कुसमउ समुझि सोक परिहरहू।।

  1633. RCM 2.165.6Open verse →

    जनि मानहु हियँ हानि गलानी। काल करम गति अघटित जानि।।

    अर्थ · Hindi

    जनि मानहु हियँ हानि गलानी। काल करम गति अघटित जानि।।

  1634. RCM 2.165.7Open verse →

    काहुहि दोसु देहु जनि ताता। भा मोहि सब बिधि बाम बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    काहुहि दोसु देहु जनि ताता। भा मोहि सब बिधि बाम बिधाता।।

  1635. RCM 2.165.8Open verse →

    जो एतेहुँ दुख मोहि जिआवा। अजहुँ को जानइ का तेहि भावा।।

    अर्थ · Hindi

    जो एतेहुँ दुख मोहि जिआवा। अजहुँ को जानइ का तेहि भावा।।

  1636. RCM 2.165.9Open verse →

    पितु आयस भूषन बसन तात तजे रघुबीर।

    अर्थ · Hindi

    पितु आयस भूषन बसन तात तजे रघुबीर।

  1637. RCM 2.165.10Open verse →

    बिसमउ हरषु न हृदयँ कछु पहिरे बलकल चीर। 165।।

    अर्थ · Hindi

    बिसमउ हरषु न हृदयँ कछु पहिरे बलकल चीर। 165।।

  1638. RCM 2.166.1Open verse →

    मुख प्रसन्न मन रंग न रोषू। सब कर सब बिधि करि परितोषू।।

    अर्थ · Hindi

    मुख प्रसन्न मन रंग न रोषू। सब कर सब बिधि करि परितोषू।।

  1639. RCM 2.166.2Open verse →

    चले बिपिन सुनि सिय सँग लागी। रहइ न राम चरन अनुरागी।।

    अर्थ · Hindi

    चले बिपिन सुनि सिय सँग लागी। रहइ न राम चरन अनुरागी।।

  1640. RCM 2.166.3Open verse →

    सुनतहिं लखनु चले उठि साथा। रहहिं न जतन किए रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनतहिं लखनु चले उठि साथा। रहहिं न जतन किए रघुनाथा।।

  1641. RCM 2.166.4Open verse →

    तब रघुपति सबही सिरु नाई। चले संग सिय अरु लघु भाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब रघुपति सबही सिरु नाई। चले संग सिय अरु लघु भाई।।

  1642. RCM 2.166.5Open verse →

    रामु लखनु सिय बनहि सिधाए। गइउँ न संग न प्रान पठाए।।

    अर्थ · Hindi

    रामु लखनु सिय बनहि सिधाए। गइउँ न संग न प्रान पठाए।।

  1643. RCM 2.166.6Open verse →

    यहु सबु भा इन्ह आँखिन्ह आगें। तउ न तजा तनु जीव अभागें।।

    अर्थ · Hindi

    यहु सबु भा इन्ह आँखिन्ह आगें। तउ न तजा तनु जीव अभागें।।

  1644. RCM 2.166.7Open verse →

    मोहि न लाज निज नेहु निहारी। राम सरिस सुत मैं महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि न लाज निज नेहु निहारी। राम सरिस सुत मैं महतारी।।

  1645. RCM 2.166.8Open verse →

    जिऐ मरै भल भूपति जाना। मोर हृदय सत कुलिस समाना।।

    अर्थ · Hindi

    जिऐ मरै भल भूपति जाना। मोर हृदय सत कुलिस समाना।।

  1646. RCM 2.166.9Open verse →

    कौसल्या के बचन सुनि भरत सहित रनिवास।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या के बचन सुनि भरत सहित रनिवास।

  1647. RCM 2.166.10Open verse →

    ब्याकुल बिलपत राजगृह मानहुँ सोक नेवासु।।166।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याकुल बिलपत राजगृह मानहुँ सोक नेवासु।।166।।

  1648. RCM 2.167.1Open verse →

    बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई। कौसल्याँ लिए हृदयँ लगाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिलपहिं बिकल भरत दोउ भाई। कौसल्याँ लिए हृदयँ लगाई।।

  1649. RCM 2.167.2Open verse →

    भाँति अनेक भरतु समुझाए। कहि बिबेकमय बचन सुनाए।।

    अर्थ · Hindi

    भाँति अनेक भरतु समुझाए। कहि बिबेकमय बचन सुनाए।।

  1650. RCM 2.167.3Open verse →

    भरतहुँ मातु सकल समुझाईं। कहि पुरान श्रुति कथा सुहाईं।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहुँ मातु सकल समुझाईं। कहि पुरान श्रुति कथा सुहाईं।।

  1651. RCM 2.167.4Open verse →

    छल बिहीन सुचि सरल सुबानी। बोले भरत जोरि जुग पानी।।

    अर्थ · Hindi

    छल बिहीन सुचि सरल सुबानी। बोले भरत जोरि जुग पानी।।

  1652. RCM 2.167.5Open verse →

    जे अघ मातु पिता सुत मारें। गाइ गोठ महिसुर पुर जारें।।

    अर्थ · Hindi

    जे अघ मातु पिता सुत मारें। गाइ गोठ महिसुर पुर जारें।।

  1653. RCM 2.167.6Open verse →

    जे अघ तिय बालक बध कीन्हें। मीत महीपति माहुर दीन्हें।।

    अर्थ · Hindi

    जे अघ तिय बालक बध कीन्हें। मीत महीपति माहुर दीन्हें।।

  1654. RCM 2.167.7Open verse →

    जे पातक उपपातक अहहीं। करम बचन मन भव कबि कहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जे पातक उपपातक अहहीं। करम बचन मन भव कबि कहहीं।।

  1655. RCM 2.167.8Open verse →

    ते पातक मोहि होहुँ बिधाता। जौं यहु होइ मोर मत माता।।

    अर्थ · Hindi

    ते पातक मोहि होहुँ बिधाता। जौं यहु होइ मोर मत माता।।

  1656. RCM 2.167.9Open verse →

    जे परिहरि हरि हर चरन भजहिं भूतगन घोर।

    अर्थ · Hindi

    जे परिहरि हरि हर चरन भजहिं भूतगन घोर।

  1657. RCM 2.167.10Open verse →

    तेहि कइ गति मोहि देउ बिधि जौं जननी मत मोर।।167।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कइ गति मोहि देउ बिधि जौं जननी मत मोर।।167।।

  1658. RCM 2.168.1Open verse →

    बेचहिं बेदु धरमु दुहि लेहीं। पिसुन पराय पाप कहि देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बेचहिं बेदु धरमु दुहि लेहीं। पिसुन पराय पाप कहि देहीं।।

  1659. RCM 2.168.2Open verse →

    कपटी कुटिल कलहप्रिय क्रोधी। बेद बिदूषक बिस्व बिरोधी।।

    अर्थ · Hindi

    कपटी कुटिल कलहप्रिय क्रोधी। बेद बिदूषक बिस्व बिरोधी।।

  1660. RCM 2.168.3Open verse →

    लोभी लंपट लोलुपचारा। जे ताकहिं परधनु परदारा।।

    अर्थ · Hindi

    लोभी लंपट लोलुपचारा। जे ताकहिं परधनु परदारा।।

  1661. RCM 2.168.4Open verse →

    पावौं मैं तिन्ह के गति घोरा। जौं जननी यहु संमत मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    पावौं मैं तिन्ह के गति घोरा। जौं जननी यहु संमत मोरा।।

  1662. RCM 2.168.5Open verse →

    जे नहिं साधुसंग अनुरागे। परमारथ पथ बिमुख अभागे।।

    अर्थ · Hindi

    जे नहिं साधुसंग अनुरागे। परमारथ पथ बिमुख अभागे।।

  1663. RCM 2.168.6Open verse →

    जे न भजहिं हरि नरतनु पाई। जिन्हहि न हरि हर सुजसु सोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जे न भजहिं हरि नरतनु पाई। जिन्हहि न हरि हर सुजसु सोहाई।।

  1664. RCM 2.168.7Open verse →

    तजि श्रुतिपंथु बाम पथ चलहीं। बंचक बिरचि बेष जगु छलहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तजि श्रुतिपंथु बाम पथ चलहीं। बंचक बिरचि बेष जगु छलहीं।।

  1665. RCM 2.168.8Open verse →

    तिन्ह कै गति मोहि संकर देऊ। जननी जौं यहु जानौं भेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह कै गति मोहि संकर देऊ। जननी जौं यहु जानौं भेऊ।।

  1666. RCM 2.168.9Open verse →

    मातु भरत के बचन सुनि साँचे सरल सुभायँ।

    अर्थ · Hindi

    मातु भरत के बचन सुनि साँचे सरल सुभायँ।

  1667. RCM 2.168.10Open verse →

    कहति राम प्रिय तात तुम्ह सदा बचन मन कायँ।।168।।

    अर्थ · Hindi

    कहति राम प्रिय तात तुम्ह सदा बचन मन कायँ।।168।।

  1668. RCM 2.169.1Open verse →

    राम प्रानहु तें प्रान तुम्हारे। तुम्ह रघुपतिहि प्रानहु तें प्यारे।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रानहु तें प्रान तुम्हारे। तुम्ह रघुपतिहि प्रानहु तें प्यारे।।

  1669. RCM 2.169.2Open verse →

    बिधु बिष चवै स्त्रवै हिमु आगी। होइ बारिचर बारि बिरागी।।

    अर्थ · Hindi

    बिधु बिष चवै स्त्रवै हिमु आगी। होइ बारिचर बारि बिरागी।।

  1670. RCM 2.169.3Open verse →

    भएँ ग्यानु बरु मिटै न मोहू। तुम्ह रामहि प्रतिकूल न होहू।।

    अर्थ · Hindi

    भएँ ग्यानु बरु मिटै न मोहू। तुम्ह रामहि प्रतिकूल न होहू।।

  1671. RCM 2.169.4Open verse →

    मत तुम्हार यहु जो जग कहहीं। सो सपनेहुँ सुख सुगति न लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मत तुम्हार यहु जो जग कहहीं। सो सपनेहुँ सुख सुगति न लहहीं।।

  1672. RCM 2.169.5Open verse →

    अस कहि मातु भरतु हियँ लाए। थन पय स्त्रवहिं नयन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि मातु भरतु हियँ लाए। थन पय स्त्रवहिं नयन जल छाए।।

  1673. RCM 2.169.6Open verse →

    करत बिलाप बहुत यहि भाँती। बैठेहिं बीति गइ सब राती।।

    अर्थ · Hindi

    करत बिलाप बहुत यहि भाँती। बैठेहिं बीति गइ सब राती।।

  1674. RCM 2.169.7Open verse →

    बामदेउ बसिष्ठ तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    बामदेउ बसिष्ठ तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।।

  1675. RCM 2.169.8Open verse →

    मुनि बहु भाँति भरत उपदेसे। कहि परमारथ बचन सुदेसे।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि बहु भाँति भरत उपदेसे। कहि परमारथ बचन सुदेसे।।

  1676. RCM 2.169.9Open verse →

    तात हृदयँ धीरजु धरहु करहु जो अवसर आजु।

    अर्थ · Hindi

    तात हृदयँ धीरजु धरहु करहु जो अवसर आजु।

  1677. RCM 2.169.10Open verse →

    उठे भरत गुर बचन सुनि करन कहेउ सबु साजु।।169।।

    अर्थ · Hindi

    उठे भरत गुर बचन सुनि करन कहेउ सबु साजु।।169।।

  1678. RCM 2.170.1Open verse →

    नृपतनु बेद बिदित अन्हवावा। परम बिचित्र बिमानु बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    नृपतनु बेद बिदित अन्हवावा। परम बिचित्र बिमानु बनावा।।

  1679. RCM 2.170.2Open verse →

    गहि पद भरत मातु सब राखी। रहीं रानि दरसन अभिलाषी।।

    अर्थ · Hindi

    गहि पद भरत मातु सब राखी। रहीं रानि दरसन अभिलाषी।।

  1680. RCM 2.170.3Open verse →

    चंदन अगर भार बहु आए। अमित अनेक सुगंध सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    चंदन अगर भार बहु आए। अमित अनेक सुगंध सुहाए।।

  1681. RCM 2.170.4Open verse →

    सरजु तीर रचि चिता बनाई। जनु सुरपुर सोपान सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    सरजु तीर रचि चिता बनाई। जनु सुरपुर सोपान सुहाई।।

  1682. RCM 2.170.5Open verse →

    एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही। बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि दाह क्रिया सब कीन्ही। बिधिवत न्हाइ तिलांजुलि दीन्ही।।

  1683. RCM 2.170.6Open verse →

    सोधि सुमृति सब बेद पुराना। कीन्ह भरत दसगात बिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    सोधि सुमृति सब बेद पुराना। कीन्ह भरत दसगात बिधाना।।

  1684. RCM 2.170.7Open verse →

    जहँ जस मुनिबर आयसु दीन्हा। तहँ तस सहस भाँति सबु कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जस मुनिबर आयसु दीन्हा। तहँ तस सहस भाँति सबु कीन्हा।।

  1685. RCM 2.170.8Open verse →

    भए बिसुद्ध दिए सब दाना। धेनु बाजि गज बाहन नाना।।

    अर्थ · Hindi

    भए बिसुद्ध दिए सब दाना। धेनु बाजि गज बाहन नाना।।

  1686. RCM 2.170.9Open verse →

    सिंघासन भूषन बसन अन्न धरनि धन धाम।

    अर्थ · Hindi

    सिंघासन भूषन बसन अन्न धरनि धन धाम।

  1687. RCM 2.170.10Open verse →

    दिए भरत लहि भूमिसुर भे परिपूरन काम।।170।।

    अर्थ · Hindi

    दिए भरत लहि भूमिसुर भे परिपूरन काम।।170।।

  1688. RCM 2.171.1Open verse →

    पितु हित भरत कीन्हि जसि करनी। सो मुख लाख जाइ नहिं बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    पितु हित भरत कीन्हि जसि करनी। सो मुख लाख जाइ नहिं बरनी।।

  1689. RCM 2.171.2Open verse →

    सुदिनु सोधि मुनिबर तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुदिनु सोधि मुनिबर तब आए। सचिव महाजन सकल बोलाए।।

  1690. RCM 2.171.3Open verse →

    बैठे राजसभाँ सब जाई। पठए बोलि भरत दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    बैठे राजसभाँ सब जाई। पठए बोलि भरत दोउ भाई।।

  1691. RCM 2.171.4Open verse →

    भरतु बसिष्ठ निकट बैठारे। नीति धरममय बचन उचारे।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु बसिष्ठ निकट बैठारे। नीति धरममय बचन उचारे।।

  1692. RCM 2.171.5Open verse →

    प्रथम कथा सब मुनिबर बरनी। कैकइ कुटिल कीन्हि जसि करनी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम कथा सब मुनिबर बरनी। कैकइ कुटिल कीन्हि जसि करनी।।

  1693. RCM 2.171.6Open verse →

    भूप धरमब्रतु सत्य सराहा। जेहिं तनु परिहरि प्रेमु निबाहा।।

    अर्थ · Hindi

    भूप धरमब्रतु सत्य सराहा। जेहिं तनु परिहरि प्रेमु निबाहा।।

  1694. RCM 2.171.7Open verse →

    कहत राम गुन सील सुभाऊ। सजल नयन पुलकेउ मुनिराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कहत राम गुन सील सुभाऊ। सजल नयन पुलकेउ मुनिराऊ।।

  1695. RCM 2.171.8Open verse →

    बहुरि लखन सिय प्रीति बखानी। सोक सनेह मगन मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि लखन सिय प्रीति बखानी। सोक सनेह मगन मुनि ग्यानी।।

  1696. RCM 2.171.9Open verse →

    सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु भरत भावी प्रबल बिलखि कहेउ मुनिनाथ।

  1697. RCM 2.171.10Open verse →

    हानि लाभु जीवन मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ।।171।।

    अर्थ · Hindi

    हानि लाभु जीवन मरनु जसु अपजसु बिधि हाथ।।171।।

  1698. RCM 2.172.1Open verse →

    अस बिचारि केहि देइअ दोसू। ब्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि केहि देइअ दोसू। ब्यरथ काहि पर कीजिअ रोसू।।

  1699. RCM 2.172.2Open verse →

    तात बिचारु केहि करहु मन माहीं। सोच जोगु दसरथु नृपु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तात बिचारु केहि करहु मन माहीं। सोच जोगु दसरथु नृपु नाहीं।।

  1700. RCM 2.172.3Open verse →

    सोचिअ बिप्र जो बेद बिहीना। तजि निज धरमु बिषय लयलीना।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ बिप्र जो बेद बिहीना। तजि निज धरमु बिषय लयलीना।।

  1701. RCM 2.172.4Open verse →

    सोचिअ नृपति जो नीति न जाना। जेहि न प्रजा प्रिय प्रान समाना।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ नृपति जो नीति न जाना। जेहि न प्रजा प्रिय प्रान समाना।।

  1702. RCM 2.172.5Open verse →

    सोचिअ बयसु कृपन धनवानू। जो न अतिथि सिव भगति सुजानू।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ बयसु कृपन धनवानू। जो न अतिथि सिव भगति सुजानू।।

  1703. RCM 2.172.6Open verse →

    सोचिअ सूद्रु बिप्र अवमानी। मुखर मानप्रिय ग्यान गुमानी।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ सूद्रु बिप्र अवमानी। मुखर मानप्रिय ग्यान गुमानी।।

  1704. RCM 2.172.7Open verse →

    सोचिअ पुनि पति बंचक नारी। कुटिल कलहप्रिय इच्छाचारी।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ पुनि पति बंचक नारी। कुटिल कलहप्रिय इच्छाचारी।।

  1705. RCM 2.172.8Open verse →

    सोचिअ बटु निज ब्रतु परिहरई। जो नहिं गुर आयसु अनुसरई।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ बटु निज ब्रतु परिहरई। जो नहिं गुर आयसु अनुसरई।।

  1706. RCM 2.172.9Open verse →

    सोचिअ गृही जो मोह बस करइ करम पथ त्याग।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ गृही जो मोह बस करइ करम पथ त्याग।

  1707. RCM 2.172.10Open verse →

    सोचिअ जति प्रंपच रत बिगत बिबेक बिराग।।172।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ जति प्रंपच रत बिगत बिबेक बिराग।।172।।

  1708. RCM 2.173.1Open verse →

    बैखानस सोइ सोचै जोगु। तपु बिहाइ जेहि भावइ भोगू।।

    अर्थ · Hindi

    बैखानस सोइ सोचै जोगु। तपु बिहाइ जेहि भावइ भोगू।।

  1709. RCM 2.173.2Open verse →

    सोचिअ पिसुन अकारन क्रोधी। जननि जनक गुर बंधु बिरोधी।।

    अर्थ · Hindi

    सोचिअ पिसुन अकारन क्रोधी। जननि जनक गुर बंधु बिरोधी।।

  1710. RCM 2.173.3Open verse →

    सब बिधि सोचिअ पर अपकारी। निज तनु पोषक निरदय भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि सोचिअ पर अपकारी। निज तनु पोषक निरदय भारी।।

  1711. RCM 2.173.4Open verse →

    सोचनीय सबहि बिधि सोई। जो न छाड़ि छलु हरि जन होई।।

    अर्थ · Hindi

    सोचनीय सबहि बिधि सोई। जो न छाड़ि छलु हरि जन होई।।

  1712. RCM 2.173.5Open verse →

    सोचनीय नहिं कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सोचनीय नहिं कोसलराऊ। भुवन चारिदस प्रगट प्रभाऊ।।

  1713. RCM 2.173.6Open verse →

    भयउ न अहइ न अब होनिहारा। भूप भरत जस पिता तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ न अहइ न अब होनिहारा। भूप भरत जस पिता तुम्हारा।।

  1714. RCM 2.173.7Open verse →

    बिधि हरि हरु सुरपति दिसिनाथा। बरनहिं सब दसरथ गुन गाथा।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि हरि हरु सुरपति दिसिनाथा। बरनहिं सब दसरथ गुन गाथा।।

  1715. RCM 2.173.8Open verse →

    कहहु तात केहि भाँति कोउ करिहि बड़ाई तासु।

    अर्थ · Hindi

    कहहु तात केहि भाँति कोउ करिहि बड़ाई तासु।

  1716. RCM 2.173.9Open verse →

    राम लखन तुम्ह सत्रुहन सरिस सुअन सुचि जासु।।173।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन तुम्ह सत्रुहन सरिस सुअन सुचि जासु।।173।।

  1717. RCM 2.174.1Open verse →

    सब प्रकार भूपति बड़भागी। बादि बिषादु करिअ तेहि लागी।।

    अर्थ · Hindi

    सब प्रकार भूपति बड़भागी। बादि बिषादु करिअ तेहि लागी।।

  1718. RCM 2.174.2Open verse →

    यहु सुनि समुझि सोचु परिहरहू। सिर धरि राज रजायसु करहू।।

    अर्थ · Hindi

    यहु सुनि समुझि सोचु परिहरहू। सिर धरि राज रजायसु करहू।।

  1719. RCM 2.174.3Open verse →

    राँय राजपदु तुम्ह कहुँ दीन्हा। पिता बचनु फुर चाहिअ कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    राँय राजपदु तुम्ह कहुँ दीन्हा। पिता बचनु फुर चाहिअ कीन्हा।।

  1720. RCM 2.174.4Open verse →

    तजे रामु जेहिं बचनहि लागी। तनु परिहरेउ राम बिरहागी।।

    अर्थ · Hindi

    तजे रामु जेहिं बचनहि लागी। तनु परिहरेउ राम बिरहागी।।

  1721. RCM 2.174.5Open verse →

    नृपहि बचन प्रिय नहिं प्रिय प्राना। करहु तात पितु बचन प्रवाना।।

    अर्थ · Hindi

    नृपहि बचन प्रिय नहिं प्रिय प्राना। करहु तात पितु बचन प्रवाना।।

  1722. RCM 2.174.6Open verse →

    करहु सीस धरि भूप रजाई। हइ तुम्ह कहँ सब भाँति भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    करहु सीस धरि भूप रजाई। हइ तुम्ह कहँ सब भाँति भलाई।।

  1723. RCM 2.174.7Open verse →

    परसुराम पितु अग्या राखी। मारी मातु लोक सब साखी।।

    अर्थ · Hindi

    परसुराम पितु अग्या राखी। मारी मातु लोक सब साखी।।

  1724. RCM 2.174.8Open verse →

    तनय जजातिहि जौबनु दयऊ। पितु अग्याँ अघ अजसु न भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तनय जजातिहि जौबनु दयऊ। पितु अग्याँ अघ अजसु न भयऊ।।

  1725. RCM 2.174.9Open verse →

    अनुचित उचित बिचारु तजि जे पालहिं पितु बैन।

    अर्थ · Hindi

    अनुचित उचित बिचारु तजि जे पालहिं पितु बैन।

  1726. RCM 2.174.10Open verse →

    ते भाजन सुख सुजस के बसहिं अमरपति ऐन।।174।।

    अर्थ · Hindi

    ते भाजन सुख सुजस के बसहिं अमरपति ऐन।।174।।

  1727. RCM 2.175.1Open verse →

    अवसि नरेस बचन फुर करहू। पालहु प्रजा सोकु परिहरहू।।

    अर्थ · Hindi

    अवसि नरेस बचन फुर करहू। पालहु प्रजा सोकु परिहरहू।।

  1728. RCM 2.175.2Open verse →

    सुरपुर नृप पाइहि परितोषू। तुम्ह कहुँ सुकृत सुजसु नहिं दोषू।।

    अर्थ · Hindi

    सुरपुर नृप पाइहि परितोषू। तुम्ह कहुँ सुकृत सुजसु नहिं दोषू।।

  1729. RCM 2.175.3Open verse →

    बेद बिदित संमत सबही का। जेहि पितु देइ सो पावइ टीका।।

    अर्थ · Hindi

    बेद बिदित संमत सबही का। जेहि पितु देइ सो पावइ टीका।।

  1730. RCM 2.175.4Open verse →

    करहु राजु परिहरहु गलानी। मानहु मोर बचन हित जानी।।

    अर्थ · Hindi

    करहु राजु परिहरहु गलानी। मानहु मोर बचन हित जानी।।

  1731. RCM 2.175.5Open verse →

    सुनि सुखु लहब राम बैदेहीं। अनुचित कहब न पंडित केहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुखु लहब राम बैदेहीं। अनुचित कहब न पंडित केहीं।।

  1732. RCM 2.175.6Open verse →

    कौसल्यादि सकल महतारीं। तेउ प्रजा सुख होहिं सुखारीं।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्यादि सकल महतारीं। तेउ प्रजा सुख होहिं सुखारीं।।

  1733. RCM 2.175.7Open verse →

    परम तुम्हार राम कर जानिहि। सो सब बिधि तुम्ह सन भल मानिहि।।

    अर्थ · Hindi

    परम तुम्हार राम कर जानिहि। सो सब बिधि तुम्ह सन भल मानिहि।।

  1734. RCM 2.175.8Open verse →

    सौंपेहु राजु राम कै आएँ। सेवा करेहु सनेह सुहाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    सौंपेहु राजु राम कै आएँ। सेवा करेहु सनेह सुहाएँ।।

  1735. RCM 2.175.9Open verse →

    कीजिअ गुर आयसु अवसि कहहिं सचिव कर जोरि।

    अर्थ · Hindi

    कीजिअ गुर आयसु अवसि कहहिं सचिव कर जोरि।

  1736. RCM 2.175.10Open verse →

    रघुपति आएँ उचित जस तस तब करब बहोरि।।175।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति आएँ उचित जस तस तब करब बहोरि।।175।।

  1737. RCM 2.176.1Open verse →

    कौसल्या धरि धीरजु कहई। पूत पथ्य गुर आयसु अहई।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या धरि धीरजु कहई। पूत पथ्य गुर आयसु अहई।।

  1738. RCM 2.176.2Open verse →

    सो आदरिअ करिअ हित मानी। तजिअ बिषादु काल गति जानी।।

    अर्थ · Hindi

    सो आदरिअ करिअ हित मानी। तजिअ बिषादु काल गति जानी।।

  1739. RCM 2.176.3Open verse →

    बन रघुपति सुरपति नरनाहू। तुम्ह एहि भाँति तात कदराहू।।

    अर्थ · Hindi

    बन रघुपति सुरपति नरनाहू। तुम्ह एहि भाँति तात कदराहू।।

  1740. RCM 2.176.4Open verse →

    परिजन प्रजा सचिव सब अंबा। तुम्हही सुत सब कहँ अवलंबा।।

    अर्थ · Hindi

    परिजन प्रजा सचिव सब अंबा। तुम्हही सुत सब कहँ अवलंबा।।

  1741. RCM 2.176.5Open verse →

    लखि बिधि बाम कालु कठिनाई। धीरजु धरहु मातु बलि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    लखि बिधि बाम कालु कठिनाई। धीरजु धरहु मातु बलि जाई।।

  1742. RCM 2.176.6Open verse →

    सिर धरि गुर आयसु अनुसरहू। प्रजा पालि परिजन दुखु हरहू।।

    अर्थ · Hindi

    सिर धरि गुर आयसु अनुसरहू। प्रजा पालि परिजन दुखु हरहू।।

  1743. RCM 2.176.7Open verse →

    गुर के बचन सचिव अभिनंदनु। सुने भरत हिय हित जनु चंदनु।।

    अर्थ · Hindi

    गुर के बचन सचिव अभिनंदनु। सुने भरत हिय हित जनु चंदनु।।

  1744. RCM 2.176.8Open verse →

    सुनी बहोरि मातु मृदु बानी। सील सनेह सरल रस सानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनी बहोरि मातु मृदु बानी। सील सनेह सरल रस सानी।।

  1745. RCM 2.177.1Open verse →

    मोहि उपदेसु दीन्ह गुर नीका। प्रजा सचिव संमत सबही का।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि उपदेसु दीन्ह गुर नीका। प्रजा सचिव संमत सबही का।।

  1746. RCM 2.177.2Open verse →

    मातु उचित धरि आयसु दीन्हा। अवसि सीस धरि चाहउँ कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    मातु उचित धरि आयसु दीन्हा। अवसि सीस धरि चाहउँ कीन्हा।।

  1747. RCM 2.177.3Open verse →

    गुर पितु मातु स्वामि हित बानी। सुनि मन मुदित करिअ भलि जानी।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पितु मातु स्वामि हित बानी। सुनि मन मुदित करिअ भलि जानी।।

  1748. RCM 2.177.4Open verse →

    उचित कि अनुचित किएँ बिचारू। धरमु जाइ सिर पातक भारू।।

    अर्थ · Hindi

    उचित कि अनुचित किएँ बिचारू। धरमु जाइ सिर पातक भारू।।

  1749. RCM 2.177.5Open verse →

    तुम्ह तौ देहु सरल सिख सोई। जो आचरत मोर भल होई।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह तौ देहु सरल सिख सोई। जो आचरत मोर भल होई।।

  1750. RCM 2.177.6Open verse →

    जद्यपि यह समुझत हउँ नीकें। तदपि होत परितोषु न जी कें।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि यह समुझत हउँ नीकें। तदपि होत परितोषु न जी कें।।

  1751. RCM 2.177.7Open verse →

    अब तुम्ह बिनय मोरि सुनि लेहू। मोहि अनुहरत सिखावनु देहू।।

    अर्थ · Hindi

    अब तुम्ह बिनय मोरि सुनि लेहू। मोहि अनुहरत सिखावनु देहू।।

  1752. RCM 2.177.8Open verse →

    ऊतरु देउँ छमब अपराधू। दुखित दोष गुन गनहिं न साधू।।

    अर्थ · Hindi

    ऊतरु देउँ छमब अपराधू। दुखित दोष गुन गनहिं न साधू।।

  1753. RCM 2.177.9Open verse →

    पितु सुरपुर सिय रामु बन करन कहहु मोहि राजु।

    अर्थ · Hindi

    पितु सुरपुर सिय रामु बन करन कहहु मोहि राजु।

  1754. RCM 2.177.10Open verse →

    एहि तें जानहु मोर हित कै आपन बड़ काजु।।177।।

    अर्थ · Hindi

    एहि तें जानहु मोर हित कै आपन बड़ काजु।।177।।

  1755. RCM 2.178.1Open verse →

    हित हमार सियपति सेवकाई। सो हरि लीन्ह मातु कुटिलाई।।

    अर्थ · Hindi

    हित हमार सियपति सेवकाई। सो हरि लीन्ह मातु कुटिलाई।।

  1756. RCM 2.178.2Open verse →

    मैं अनुमानि दीख मन माहीं। आन उपायँ मोर हित नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मैं अनुमानि दीख मन माहीं। आन उपायँ मोर हित नाहीं।।

  1757. RCM 2.178.3Open verse →

    सोक समाजु राजु केहि लेखें। लखन राम सिय बिनु पद देखें।।

    अर्थ · Hindi

    सोक समाजु राजु केहि लेखें। लखन राम सिय बिनु पद देखें।।

  1758. RCM 2.178.4Open verse →

    बादि बसन बिनु भूषन भारू। बादि बिरति बिनु ब्रह्म बिचारू।।

    अर्थ · Hindi

    बादि बसन बिनु भूषन भारू। बादि बिरति बिनु ब्रह्म बिचारू।।

  1759. RCM 2.178.5Open verse →

    सरुज सरीर बादि बहु भोगा। बिनु हरिभगति जायँ जप जोगा।।

    अर्थ · Hindi

    सरुज सरीर बादि बहु भोगा। बिनु हरिभगति जायँ जप जोगा।।

  1760. RCM 2.178.6Open verse →

    जायँ जीव बिनु देह सुहाई। बादि मोर सबु बिनु रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    जायँ जीव बिनु देह सुहाई। बादि मोर सबु बिनु रघुराई।।

  1761. RCM 2.178.7Open verse →

    जाउँ राम पहिं आयसु देहू। एकहिं आँक मोर हित एहू।।

    अर्थ · Hindi

    जाउँ राम पहिं आयसु देहू। एकहिं आँक मोर हित एहू।।

  1762. RCM 2.178.8Open verse →

    मोहि नृप करि भल आपन चहहू। सोउ सनेह जड़ता बस कहहू।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि नृप करि भल आपन चहहू। सोउ सनेह जड़ता बस कहहू।।

  1763. RCM 2.178.9Open verse →

    कैकेई सुअ कुटिलमति राम बिमुख गतलाज।

    अर्थ · Hindi

    कैकेई सुअ कुटिलमति राम बिमुख गतलाज।

  1764. RCM 2.178.10Open verse →

    तुम्ह चाहत सुखु मोहबस मोहि से अधम कें राज।।178।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह चाहत सुखु मोहबस मोहि से अधम कें राज।।178।।

  1765. RCM 2.179.1Open verse →

    कहउँ साँचु सब सुनि पतिआहू। चाहिअ धरमसील नरनाहू।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ साँचु सब सुनि पतिआहू। चाहिअ धरमसील नरनाहू।।

  1766. RCM 2.179.2Open verse →

    मोहि राजु हठि देइहहु जबहीं। रसा रसातल जाइहि तबहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि राजु हठि देइहहु जबहीं। रसा रसातल जाइहि तबहीं।।

  1767. RCM 2.179.3Open verse →

    मोहि समान को पाप निवासू। जेहि लगि सीय राम बनबासू।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि समान को पाप निवासू। जेहि लगि सीय राम बनबासू।।

  1768. RCM 2.179.4Open verse →

    रायँ राम कहुँ काननु दीन्हा। बिछुरत गमनु अमरपुर कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    रायँ राम कहुँ काननु दीन्हा। बिछुरत गमनु अमरपुर कीन्हा।।

  1769. RCM 2.179.5Open verse →

    मैं सठु सब अनरथ कर हेतू। बैठ बात सब सुनउँ सचेतू।।

    अर्थ · Hindi

    मैं सठु सब अनरथ कर हेतू। बैठ बात सब सुनउँ सचेतू।।

  1770. RCM 2.179.6Open verse →

    बिनु रघुबीर बिलोकि अबासू। रहे प्रान सहि जग उपहासू।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु रघुबीर बिलोकि अबासू। रहे प्रान सहि जग उपहासू।।

  1771. RCM 2.179.7Open verse →

    राम पुनीत बिषय रस रूखे। लोलुप भूमि भोग के भूखे।।

    अर्थ · Hindi

    राम पुनीत बिषय रस रूखे। लोलुप भूमि भोग के भूखे।।

  1772. RCM 2.179.8Open verse →

    कहँ लगि कहौं हृदय कठिनाई। निदरि कुलिसु जेहिं लही बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ लगि कहौं हृदय कठिनाई। निदरि कुलिसु जेहिं लही बड़ाई।।

  1773. RCM 2.179.9Open verse →

    कारन तें कारजु कठिन होइ दोसु नहि मोर।

    अर्थ · Hindi

    कारन तें कारजु कठिन होइ दोसु नहि मोर।

  1774. RCM 2.179.10Open verse →

    कुलिस अस्थि तें उपल तें लोह कराल कठोर।।179।।

    अर्थ · Hindi

    कुलिस अस्थि तें उपल तें लोह कराल कठोर।।179।।

  1775. RCM 2.180.1Open verse →

    कैकेई भव तनु अनुरागे। पाँवर प्रान अघाइ अभागे।।

    अर्थ · Hindi

    कैकेई भव तनु अनुरागे। पाँवर प्रान अघाइ अभागे।।

  1776. RCM 2.180.2Open verse →

    जौं प्रिय बिरहँ प्रान प्रिय लागे। देखब सुनब बहुत अब आगे।।

    अर्थ · Hindi

    जौं प्रिय बिरहँ प्रान प्रिय लागे। देखब सुनब बहुत अब आगे।।

  1777. RCM 2.180.3Open verse →

    लखन राम सिय कहुँ बनु दीन्हा। पठइ अमरपुर पति हित कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    लखन राम सिय कहुँ बनु दीन्हा। पठइ अमरपुर पति हित कीन्हा।।

  1778. RCM 2.180.4Open verse →

    लीन्ह बिधवपन अपजसु आपू। दीन्हेउ प्रजहि सोकु संतापू।।

    अर्थ · Hindi

    लीन्ह बिधवपन अपजसु आपू। दीन्हेउ प्रजहि सोकु संतापू।।

  1779. RCM 2.180.5Open verse →

    मोहि दीन्ह सुखु सुजसु सुराजू। कीन्ह कैकेईं सब कर काजू।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि दीन्ह सुखु सुजसु सुराजू। कीन्ह कैकेईं सब कर काजू।।

  1780. RCM 2.180.6Open verse →

    एहि तें मोर काह अब नीका। तेहि पर देन कहहु तुम्ह टीका।।

    अर्थ · Hindi

    एहि तें मोर काह अब नीका। तेहि पर देन कहहु तुम्ह टीका।।

  1781. RCM 2.180.7Open verse →

    कैकई जठर जनमि जग माहीं। यह मोहि कहँ कछु अनुचित नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कैकई जठर जनमि जग माहीं। यह मोहि कहँ कछु अनुचित नाहीं।।

  1782. RCM 2.180.8Open verse →

    मोरि बात सब बिधिहिं बनाई। प्रजा पाँच कत करहु सहाई।।

    अर्थ · Hindi

    मोरि बात सब बिधिहिं बनाई। प्रजा पाँच कत करहु सहाई।।

  1783. RCM 2.180.9Open verse →

    ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस तेहि पुनि बीछी मार।

    अर्थ · Hindi

    ग्रह ग्रहीत पुनि बात बस तेहि पुनि बीछी मार।

  1784. RCM 2.180.10Open verse →

    तेहि पिआइअ बारुनी कहहु काह उपचार।।180।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि पिआइअ बारुनी कहहु काह उपचार।।180।।

  1785. RCM 2.181.1Open verse →

    कैकइ सुअन जोगु जग जोई। चतुर बिरंचि दीन्ह मोहि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    कैकइ सुअन जोगु जग जोई। चतुर बिरंचि दीन्ह मोहि सोई।।

  1786. RCM 2.181.2Open verse →

    दसरथ तनय राम लघु भाई। दीन्हि मोहि बिधि बादि बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    दसरथ तनय राम लघु भाई। दीन्हि मोहि बिधि बादि बड़ाई।।

  1787. RCM 2.181.3Open verse →

    तुम्ह सब कहहु कढ़ावन टीका। राय रजायसु सब कहँ नीका।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सब कहहु कढ़ावन टीका। राय रजायसु सब कहँ नीका।।

  1788. RCM 2.181.4Open verse →

    उतरु देउँ केहि बिधि केहि केही। कहहु सुखेन जथा रुचि जेही।।

    अर्थ · Hindi

    उतरु देउँ केहि बिधि केहि केही। कहहु सुखेन जथा रुचि जेही।।

  1789. RCM 2.181.5Open verse →

    मोहि कुमातु समेत बिहाई। कहहु कहिहि के कीन्ह भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि कुमातु समेत बिहाई। कहहु कहिहि के कीन्ह भलाई।।

  1790. RCM 2.181.6Open verse →

    मो बिनु को सचराचर माहीं। जेहि सिय रामु प्रानप्रिय नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मो बिनु को सचराचर माहीं। जेहि सिय रामु प्रानप्रिय नाहीं।।

  1791. RCM 2.181.7Open verse →

    परम हानि सब कहँ बड़ लाहू। अदिनु मोर नहि दूषन काहू।।

    अर्थ · Hindi

    परम हानि सब कहँ बड़ लाहू। अदिनु मोर नहि दूषन काहू।।

  1792. RCM 2.181.8Open verse →

    संसय सील प्रेम बस अहहू। सबुइ उचित सब जो कछु कहहू।।

    अर्थ · Hindi

    संसय सील प्रेम बस अहहू। सबुइ उचित सब जो कछु कहहू।।

  1793. RCM 2.181.9Open verse →

    राम मातु सुठि सरलचित मो पर प्रेमु बिसेषि।

    अर्थ · Hindi

    राम मातु सुठि सरलचित मो पर प्रेमु बिसेषि।

  1794. RCM 2.181.10Open verse →

    कहइ सुभाय सनेह बस मोरि दीनता देखि।।181।

    अर्थ · Hindi

    कहइ सुभाय सनेह बस मोरि दीनता देखि।।181।

  1795. RCM 2.182.1Open verse →

    गुर बिबेक सागर जगु जाना। जिन्हहि बिस्व कर बदर समाना।।

    अर्थ · Hindi

    गुर बिबेक सागर जगु जाना। जिन्हहि बिस्व कर बदर समाना।।

  1796. RCM 2.182.2Open verse →

    मो कहँ तिलक साज सज सोऊ। भएँ बिधि बिमुख बिमुख सबु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मो कहँ तिलक साज सज सोऊ। भएँ बिधि बिमुख बिमुख सबु कोऊ।।

  1797. RCM 2.182.3Open verse →

    परिहरि रामु सीय जग माहीं। कोउ न कहिहि मोर मत नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    परिहरि रामु सीय जग माहीं। कोउ न कहिहि मोर मत नाहीं।।

  1798. RCM 2.182.4Open verse →

    सो मैं सुनब सहब सुखु मानी। अंतहुँ कीच तहाँ जहँ पानी।।

    अर्थ · Hindi

    सो मैं सुनब सहब सुखु मानी। अंतहुँ कीच तहाँ जहँ पानी।।

  1799. RCM 2.182.5Open verse →

    डरु न मोहि जग कहिहि कि पोचू। परलोकहु कर नाहिन सोचू।।

    अर्थ · Hindi

    डरु न मोहि जग कहिहि कि पोचू। परलोकहु कर नाहिन सोचू।।

  1800. RCM 2.182.6Open verse →

    एकइ उर बस दुसह दवारी। मोहि लगि भे सिय रामु दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    एकइ उर बस दुसह दवारी। मोहि लगि भे सिय रामु दुखारी।।

  1801. RCM 2.182.7Open verse →

    जीवन लाहु लखन भल पावा। सबु तजि राम चरन मनु लावा।।

    अर्थ · Hindi

    जीवन लाहु लखन भल पावा। सबु तजि राम चरन मनु लावा।।

  1802. RCM 2.182.8Open verse →

    मोर जनम रघुबर बन लागी। झूठ काह पछिताउँ अभागी।।

    अर्थ · Hindi

    मोर जनम रघुबर बन लागी। झूठ काह पछिताउँ अभागी।।

  1803. RCM 2.182.9Open verse →

    आपनि दारुन दीनता कहउँ सबहि सिरु नाइ।

    अर्थ · Hindi

    आपनि दारुन दीनता कहउँ सबहि सिरु नाइ।

  1804. RCM 2.182.10Open verse →

    देखें बिनु रघुनाथ पद जिय कै जरनि न जाइ।।182।।

    अर्थ · Hindi

    देखें बिनु रघुनाथ पद जिय कै जरनि न जाइ।।182।।

  1805. RCM 2.183.1Open verse →

    आन उपाउ मोहि नहि सूझा। को जिय कै रघुबर बिनु बूझा।।

    अर्थ · Hindi

    आन उपाउ मोहि नहि सूझा। को जिय कै रघुबर बिनु बूझा।।

  1806. RCM 2.183.2Open verse →

    एकहिं आँक इहइ मन माहीं। प्रातकाल चलिहउँ प्रभु पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एकहिं आँक इहइ मन माहीं। प्रातकाल चलिहउँ प्रभु पाहीं।।

  1807. RCM 2.183.3Open verse →

    जद्यपि मैं अनभल अपराधी। भै मोहि कारन सकल उपाधी।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि मैं अनभल अपराधी। भै मोहि कारन सकल उपाधी।।

  1808. RCM 2.183.4Open verse →

    तदपि सरन सनमुख मोहि देखी। छमि सब करिहहिं कृपा बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि सरन सनमुख मोहि देखी। छमि सब करिहहिं कृपा बिसेषी।।

  1809. RCM 2.183.5Open verse →

    सील सकुच सुठि सरल सुभाऊ। कृपा सनेह सदन रघुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सील सकुच सुठि सरल सुभाऊ। कृपा सनेह सदन रघुराऊ।।

  1810. RCM 2.183.6Open verse →

    अरिहुक अनभल कीन्ह न रामा। मैं सिसु सेवक जद्यपि बामा।।

    अर्थ · Hindi

    अरिहुक अनभल कीन्ह न रामा। मैं सिसु सेवक जद्यपि बामा।।

  1811. RCM 2.183.7Open verse →

    तुम्ह पै पाँच मोर भल मानी। आयसु आसिष देहु सुबानी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह पै पाँच मोर भल मानी। आयसु आसिष देहु सुबानी।।

  1812. RCM 2.183.8Open verse →

    जेहिं सुनि बिनय मोहि जनु जानी। आवहिं बहुरि रामु रजधानी।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं सुनि बिनय मोहि जनु जानी। आवहिं बहुरि रामु रजधानी।।

  1813. RCM 2.183.9Open verse →

    जद्यपि जनमु कुमातु तें मैं सठु सदा सदोस।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि जनमु कुमातु तें मैं सठु सदा सदोस।

  1814. RCM 2.183.10Open verse →

    आपन जानि न त्यागिहहिं मोहि रघुबीर भरोस।।183।।

    अर्थ · Hindi

    आपन जानि न त्यागिहहिं मोहि रघुबीर भरोस।।183।।

  1815. RCM 2.184.1Open verse →

    भरत बचन सब कहँ प्रिय लागे। राम सनेह सुधाँ जनु पागे।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन सब कहँ प्रिय लागे। राम सनेह सुधाँ जनु पागे।।

  1816. RCM 2.184.2Open verse →

    लोग बियोग बिषम बिष दागे। मंत्र सबीज सुनत जनु जागे।।

    अर्थ · Hindi

    लोग बियोग बिषम बिष दागे। मंत्र सबीज सुनत जनु जागे।।

  1817. RCM 2.184.3Open verse →

    मातु सचिव गुर पुर नर नारी। सकल सनेहँ बिकल भए भारी।।

    अर्थ · Hindi

    मातु सचिव गुर पुर नर नारी। सकल सनेहँ बिकल भए भारी।।

  1818. RCM 2.184.4Open verse →

    भरतहि कहहि सराहि सराही। राम प्रेम मूरति तनु आही।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि कहहि सराहि सराही। राम प्रेम मूरति तनु आही।।

  1819. RCM 2.184.5Open verse →

    तात भरत अस काहे न कहहू। प्रान समान राम प्रिय अहहू।।

    अर्थ · Hindi

    तात भरत अस काहे न कहहू। प्रान समान राम प्रिय अहहू।।

  1820. RCM 2.184.6Open verse →

    जो पावँरु अपनी जड़ताई। तुम्हहि सुगाइ मातु कुटिलाई।।

    अर्थ · Hindi

    जो पावँरु अपनी जड़ताई। तुम्हहि सुगाइ मातु कुटिलाई।।

  1821. RCM 2.184.7Open verse →

    सो सठु कोटिक पुरुष समेता। बसिहि कलप सत नरक निकेता।।

    अर्थ · Hindi

    सो सठु कोटिक पुरुष समेता। बसिहि कलप सत नरक निकेता।।

  1822. RCM 2.184.8Open verse →

    अहि अघ अवगुन नहि मनि गहई। हरइ गरल दुख दारिद दहई।।

    अर्थ · Hindi

    अहि अघ अवगुन नहि मनि गहई। हरइ गरल दुख दारिद दहई।।

  1823. RCM 2.184.9Open verse →

    अवसि चलिअ बन रामु जहँ भरत मंत्रु भल कीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    अवसि चलिअ बन रामु जहँ भरत मंत्रु भल कीन्ह।

  1824. RCM 2.184.10Open verse →

    सोक सिंधु बूड़त सबहि तुम्ह अवलंबनु दीन्ह।।184।।

    अर्थ · Hindi

    सोक सिंधु बूड़त सबहि तुम्ह अवलंबनु दीन्ह।।184।।

  1825. RCM 2.185.1Open verse →

    भा सब कें मन मोदु न थोरा। जनु घन धुनि सुनि चातक मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    भा सब कें मन मोदु न थोरा। जनु घन धुनि सुनि चातक मोरा।।

  1826. RCM 2.185.2Open verse →

    चलत प्रात लखि निरनउ नीके। भरतु प्रानप्रिय भे सबही के।।

    अर्थ · Hindi

    चलत प्रात लखि निरनउ नीके। भरतु प्रानप्रिय भे सबही के।।

  1827. RCM 2.185.3Open verse →

    मुनिहि बंदि भरतहि सिरु नाई। चले सकल घर बिदा कराई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिहि बंदि भरतहि सिरु नाई। चले सकल घर बिदा कराई।।

  1828. RCM 2.185.4Open verse →

    धन्य भरत जीवनु जग माहीं। सीलु सनेहु सराहत जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य भरत जीवनु जग माहीं। सीलु सनेहु सराहत जाहीं।।

  1829. RCM 2.185.5Open verse →

    कहहि परसपर भा बड़ काजू। सकल चलै कर साजहिं साजू।।

    अर्थ · Hindi

    कहहि परसपर भा बड़ काजू। सकल चलै कर साजहिं साजू।।

  1830. RCM 2.185.6Open verse →

    जेहि राखहिं रहु घर रखवारी। सो जानइ जनु गरदनि मारी।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि राखहिं रहु घर रखवारी। सो जानइ जनु गरदनि मारी।।

  1831. RCM 2.185.7Open verse →

    कोउ कह रहन कहिअ नहिं काहू। को न चहइ जग जीवन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह रहन कहिअ नहिं काहू। को न चहइ जग जीवन लाहू।।

  1832. RCM 2.185.8Open verse →

    जरउ सो संपति सदन सुखु सुहद मातु पितु भाइ।

    अर्थ · Hindi

    जरउ सो संपति सदन सुखु सुहद मातु पितु भाइ।

  1833. RCM 2.185.9Open verse →

    सनमुख होत जो राम पद करै न सहस सहाइ।।185।।

    अर्थ · Hindi

    सनमुख होत जो राम पद करै न सहस सहाइ।।185।।

  1834. RCM 2.186.1Open verse →

    घर घर साजहिं बाहन नाना। हरषु हृदयँ परभात पयाना।।

    अर्थ · Hindi

    घर घर साजहिं बाहन नाना। हरषु हृदयँ परभात पयाना।।

  1835. RCM 2.186.2Open verse →

    भरत जाइ घर कीन्ह बिचारू। नगरु बाजि गज भवन भँडारू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत जाइ घर कीन्ह बिचारू। नगरु बाजि गज भवन भँडारू।।

  1836. RCM 2.186.3Open verse →

    संपति सब रघुपति कै आही। जौ बिनु जतन चलौं तजि ताही।।

    अर्थ · Hindi

    संपति सब रघुपति कै आही। जौ बिनु जतन चलौं तजि ताही।।

  1837. RCM 2.186.4Open verse →

    तौ परिनाम न मोरि भलाई। पाप सिरोमनि साइँ दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    तौ परिनाम न मोरि भलाई। पाप सिरोमनि साइँ दोहाई।।

  1838. RCM 2.186.5Open verse →

    करइ स्वामि हित सेवकु सोई। दूषन कोटि देइ किन कोई।।

    अर्थ · Hindi

    करइ स्वामि हित सेवकु सोई। दूषन कोटि देइ किन कोई।।

  1839. RCM 2.186.6Open verse →

    अस बिचारि सुचि सेवक बोले। जे सपनेहुँ निज धरम न डोले।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि सुचि सेवक बोले। जे सपनेहुँ निज धरम न डोले।।

  1840. RCM 2.186.7Open verse →

    कहि सबु मरमु धरमु भल भाषा। जो जेहि लायक सो तेहिं राखा।।

    अर्थ · Hindi

    कहि सबु मरमु धरमु भल भाषा। जो जेहि लायक सो तेहिं राखा।।

  1841. RCM 2.186.8Open verse →

    करि सबु जतनु राखि रखवारे। राम मातु पहिं भरतु सिधारे।।

    अर्थ · Hindi

    करि सबु जतनु राखि रखवारे। राम मातु पहिं भरतु सिधारे।।

  1842. RCM 2.186.9Open verse →

    आरत जननी जानि सब भरत सनेह सुजान।

    अर्थ · Hindi

    आरत जननी जानि सब भरत सनेह सुजान।

  1843. RCM 2.186.10Open verse →

    कहेउ बनावन पालकीं सजन सुखासन जान।।186।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ बनावन पालकीं सजन सुखासन जान।।186।।

  1844. RCM 2.187.1Open verse →

    चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी।।

    अर्थ · Hindi

    चक्क चक्कि जिमि पुर नर नारी। चहत प्रात उर आरत भारी।।

  1845. RCM 2.187.2Open verse →

    जागत सब निसि भयउ बिहाना। भरत बोलाए सचिव सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    जागत सब निसि भयउ बिहाना। भरत बोलाए सचिव सुजाना।।

  1846. RCM 2.187.3Open verse →

    कहेउ लेहु सबु तिलक समाजू। बनहिं देब मुनि रामहिं राजू।।

    अर्थ · Hindi

    कहेउ लेहु सबु तिलक समाजू। बनहिं देब मुनि रामहिं राजू।।

  1847. RCM 2.187.4Open verse →

    बेगि चलहु सुनि सचिव जोहारे। तुरत तुरग रथ नाग सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि चलहु सुनि सचिव जोहारे। तुरत तुरग रथ नाग सँवारे।।

  1848. RCM 2.187.5Open verse →

    अरुंधती अरु अगिनि समाऊ। रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अरुंधती अरु अगिनि समाऊ। रथ चढ़ि चले प्रथम मुनिराऊ।।

  1849. RCM 2.187.6Open verse →

    बिप्र बृंद चढ़ि बाहन नाना। चले सकल तप तेज निधाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र बृंद चढ़ि बाहन नाना। चले सकल तप तेज निधाना।।

  1850. RCM 2.187.7Open verse →

    नगर लोग सब सजि सजि जाना। चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना।।

    अर्थ · Hindi

    नगर लोग सब सजि सजि जाना। चित्रकूट कहँ कीन्ह पयाना।।

  1851. RCM 2.187.8Open verse →

    सिबिका सुभग न जाहिं बखानी। चढ़ि चढ़ि चलत भई सब रानी।।

    अर्थ · Hindi

    सिबिका सुभग न जाहिं बखानी। चढ़ि चढ़ि चलत भई सब रानी।।

  1852. RCM 2.187.9Open verse →

    सौंपि नगर सुचि सेवकनि सादर सकल चलाइ।

    अर्थ · Hindi

    सौंपि नगर सुचि सेवकनि सादर सकल चलाइ।

  1853. RCM 2.187.10Open verse →

    सुमिरि राम सिय चरन तब चले भरत दोउ भाइ।।187।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि राम सिय चरन तब चले भरत दोउ भाइ।।187।।

  1854. RCM 2.188.1Open verse →

    राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम दरस बस सब नर नारी। जनु करि करिनि चले तकि बारी।।

  1855. RCM 2.188.2Open verse →

    बन सिय रामु समुझि मन माहीं। सानुज भरत पयादेहिं जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बन सिय रामु समुझि मन माहीं। सानुज भरत पयादेहिं जाहीं।।

  1856. RCM 2.188.3Open verse →

    देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सनेहु लोग अनुरागे। उतरि चले हय गय रथ त्यागे।।

  1857. RCM 2.188.4Open verse →

    जाइ समीप राखि निज डोली। राम मातु मृदु बानी बोली।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ समीप राखि निज डोली। राम मातु मृदु बानी बोली।।

  1858. RCM 2.188.5Open verse →

    तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    तात चढ़हु रथ बलि महतारी। होइहि प्रिय परिवारु दुखारी।।

  1859. RCM 2.188.6Open verse →

    तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरें चलत चलिहि सबु लोगू। सकल सोक कृस नहिं मग जोगू।।

  1860. RCM 2.188.7Open verse →

    सिर धरि बचन चरन सिरु नाई। रथ चढ़ि चलत भए दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    सिर धरि बचन चरन सिरु नाई। रथ चढ़ि चलत भए दोउ भाई।।

  1861. RCM 2.188.8Open verse →

    तमसा प्रथम दिवस करि बासू। दूसर गोमति तीर निवासू।।

    अर्थ · Hindi

    तमसा प्रथम दिवस करि बासू। दूसर गोमति तीर निवासू।।

  1862. RCM 2.188.9Open verse →

    पय अहार फल असन एक निसि भोजन एक लोग।

    अर्थ · Hindi

    पय अहार फल असन एक निसि भोजन एक लोग।

  1863. RCM 2.188.10Open verse →

    करत राम हित नेम ब्रत परिहरि भूषन भोग।।188।।

    अर्थ · Hindi

    करत राम हित नेम ब्रत परिहरि भूषन भोग।।188।।

  1864. RCM 2.189.1Open verse →

    सई तीर बसि चले बिहाने। सृंगबेरपुर सब निअराने।।

    अर्थ · Hindi

    सई तीर बसि चले बिहाने। सृंगबेरपुर सब निअराने।।

  1865. RCM 2.189.2Open verse →

    समाचार सब सुने निषादा। हृदयँ बिचार करइ सबिषादा।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार सब सुने निषादा। हृदयँ बिचार करइ सबिषादा।।

  1866. RCM 2.189.3Open verse →

    कारन कवन भरतु बन जाहीं। है कछु कपट भाउ मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कारन कवन भरतु बन जाहीं। है कछु कपट भाउ मन माहीं।।

  1867. RCM 2.189.4Open verse →

    जौं पै जियँ न होति कुटिलाई। तौ कत लीन्ह संग कटकाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पै जियँ न होति कुटिलाई। तौ कत लीन्ह संग कटकाई।।

  1868. RCM 2.189.5Open verse →

    जानहिं सानुज रामहि मारी। करउँ अकंटक राजु सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    जानहिं सानुज रामहि मारी। करउँ अकंटक राजु सुखारी।।

  1869. RCM 2.189.6Open verse →

    भरत न राजनीति उर आनी। तब कलंकु अब जीवन हानी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत न राजनीति उर आनी। तब कलंकु अब जीवन हानी।।

  1870. RCM 2.189.7Open verse →

    सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा। रामहि समर न जीतनिहारा।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा। रामहि समर न जीतनिहारा।।

  1871. RCM 2.189.8Open verse →

    का आचरजु भरतु अस करहीं। नहिं बिष बेलि अमिअ फल फरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    का आचरजु भरतु अस करहीं। नहिं बिष बेलि अमिअ फल फरहीं।।

  1872. RCM 2.189.9Open verse →

    अस बिचारि गुहँ ग्याति सन कहेउ सजग सब होहु।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि गुहँ ग्याति सन कहेउ सजग सब होहु।

  1873. RCM 2.189.10Open verse →

    हथवाँसहु बोरहु तरनि कीजिअ घाटारोहु।।189।।

    अर्थ · Hindi

    हथवाँसहु बोरहु तरनि कीजिअ घाटारोहु।।189।।

  1874. RCM 2.190.1Open verse →

    होहु सँजोइल रोकहु घाटा। ठाटहु सकल मरै के ठाटा।।

    अर्थ · Hindi

    होहु सँजोइल रोकहु घाटा। ठाटहु सकल मरै के ठाटा।।

  1875. RCM 2.190.2Open verse →

    सनमुख लोह भरत सन लेऊँ। जिअत न सुरसरि उतरन देऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    सनमुख लोह भरत सन लेऊँ। जिअत न सुरसरि उतरन देऊँ।।

  1876. RCM 2.190.3Open verse →

    समर मरनु पुनि सुरसरि तीरा। राम काजु छनभंगु सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    समर मरनु पुनि सुरसरि तीरा। राम काजु छनभंगु सरीरा।।

  1877. RCM 2.190.4Open verse →

    भरत भाइ नृपु मै जन नीचू। बड़ें भाग असि पाइअ मीचू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत भाइ नृपु मै जन नीचू। बड़ें भाग असि पाइअ मीचू।।

  1878. RCM 2.190.5Open verse →

    स्वामि काज करिहउँ रन रारी। जस धवलिहउँ भुवन दस चारी।।

    अर्थ · Hindi

    स्वामि काज करिहउँ रन रारी। जस धवलिहउँ भुवन दस चारी।।

  1879. RCM 2.190.6Open verse →

    तजउँ प्रान रघुनाथ निहोरें। दुहूँ हाथ मुद मोदक मोरें।।

    अर्थ · Hindi

    तजउँ प्रान रघुनाथ निहोरें। दुहूँ हाथ मुद मोदक मोरें।।

  1880. RCM 2.190.7Open verse →

    साधु समाज न जाकर लेखा। राम भगत महुँ जासु न रेखा।।

    अर्थ · Hindi

    साधु समाज न जाकर लेखा। राम भगत महुँ जासु न रेखा।।

  1881. RCM 2.190.8Open verse →

    जायँ जिअत जग सो महि भारू। जननी जौबन बिटप कुठारू।।

    अर्थ · Hindi

    जायँ जिअत जग सो महि भारू। जननी जौबन बिटप कुठारू।।

  1882. RCM 2.190.9Open verse →

    बिगत बिषाद निषादपति सबहि बढ़ाइ उछाहु।

    अर्थ · Hindi

    बिगत बिषाद निषादपति सबहि बढ़ाइ उछाहु।

  1883. RCM 2.190.10Open verse →

    सुमिरि राम मागेउ तुरत तरकस धनुष सनाहु।।190।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि राम मागेउ तुरत तरकस धनुष सनाहु।।190।।

  1884. RCM 2.191.1Open verse →

    बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बेगहु भाइहु सजहु सँजोऊ। सुनि रजाइ कदराइ न कोऊ।।

  1885. RCM 2.191.2Open verse →

    भलेहिं नाथ सब कहहिं सहरषा। एकहिं एक बढ़ावइ करषा।।

    अर्थ · Hindi

    भलेहिं नाथ सब कहहिं सहरषा। एकहिं एक बढ़ावइ करषा।।

  1886. RCM 2.191.3Open verse →

    चले निषाद जोहारि जोहारी। सूर सकल रन रूचइ रारी।।

    अर्थ · Hindi

    चले निषाद जोहारि जोहारी। सूर सकल रन रूचइ रारी।।

  1887. RCM 2.191.4Open verse →

    सुमिरि राम पद पंकज पनहीं। भाथीं बाँधि चढ़ाइन्हि धनहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि राम पद पंकज पनहीं। भाथीं बाँधि चढ़ाइन्हि धनहीं।।

  1888. RCM 2.191.5Open verse →

    अँगरी पहिरि कूँड़ि सिर धरहीं। फरसा बाँस सेल सम करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अँगरी पहिरि कूँड़ि सिर धरहीं। फरसा बाँस सेल सम करहीं।।

  1889. RCM 2.191.6Open verse →

    एक कुसल अति ओड़न खाँड़े। कूदहि गगन मनहुँ छिति छाँड़े।।

    अर्थ · Hindi

    एक कुसल अति ओड़न खाँड़े। कूदहि गगन मनहुँ छिति छाँड़े।।

  1890. RCM 2.191.7Open verse →

    निज निज साजु समाजु बनाई। गुह राउतहि जोहारे जाई।।

    अर्थ · Hindi

    निज निज साजु समाजु बनाई। गुह राउतहि जोहारे जाई।।

  1891. RCM 2.191.8Open verse →

    देखि सुभट सब लायक जाने। लै लै नाम सकल सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सुभट सब लायक जाने। लै लै नाम सकल सनमाने।।

  1892. RCM 2.191.9Open verse →

    भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज बड़ मोहि।

    अर्थ · Hindi

    भाइहु लावहु धोख जनि आजु काज बड़ मोहि।

  1893. RCM 2.191.10Open verse →

    सुनि सरोष बोले सुभट बीर अधीर न होहि।।191।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सरोष बोले सुभट बीर अधीर न होहि।।191।।

  1894. RCM 2.192.1Open verse →

    राम प्रताप नाथ बल तोरे। करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रताप नाथ बल तोरे। करहिं कटकु बिनु भट बिनु घोरे।।

  1895. RCM 2.192.2Open verse →

    जीवत पाउ न पाछें धरहीं। रुंड मुंडमय मेदिनि करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जीवत पाउ न पाछें धरहीं। रुंड मुंडमय मेदिनि करहीं।।

  1896. RCM 2.192.3Open verse →

    दीख निषादनाथ भल टोलू। कहेउ बजाउ जुझाऊ ढोलू।।

    अर्थ · Hindi

    दीख निषादनाथ भल टोलू। कहेउ बजाउ जुझाऊ ढोलू।।

  1897. RCM 2.192.4Open verse →

    एतना कहत छींक भइ बाँए। कहेउ सगुनिअन्ह खेत सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    एतना कहत छींक भइ बाँए। कहेउ सगुनिअन्ह खेत सुहाए।।

  1898. RCM 2.192.5Open verse →

    बूढ़ु एकु कह सगुन बिचारी। भरतहि मिलिअ न होइहि रारी।।

    अर्थ · Hindi

    बूढ़ु एकु कह सगुन बिचारी। भरतहि मिलिअ न होइहि रारी।।

  1899. RCM 2.192.6Open verse →

    रामहि भरतु मनावन जाहीं। सगुन कहइ अस बिग्रहु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि भरतु मनावन जाहीं। सगुन कहइ अस बिग्रहु नाहीं।।

  1900. RCM 2.192.7Open verse →

    सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा। सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा। सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा।।

  1901. RCM 2.192.8Open verse →

    भरत सुभाउ सीलु बिनु बूझें। बड़ि हित हानि जानि बिनु जूझें।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सुभाउ सीलु बिनु बूझें। बड़ि हित हानि जानि बिनु जूझें।।

  1902. RCM 2.192.9Open verse →

    गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ।

    अर्थ · Hindi

    गहहु घाट भट समिटि सब लेउँ मरम मिलि जाइ।

  1903. RCM 2.192.10Open verse →

    बूझि मित्र अरि मध्य गति तस तब करिहउँ आइ।।192।।

    अर्थ · Hindi

    बूझि मित्र अरि मध्य गति तस तब करिहउँ आइ।।192।।

  1904. RCM 2.193.1Open verse →

    लखन सनेहु सुभायँ सुहाएँ। बैरु प्रीति नहिं दुरइँ दुराएँ।।

    अर्थ · Hindi

    लखन सनेहु सुभायँ सुहाएँ। बैरु प्रीति नहिं दुरइँ दुराएँ।।

  1905. RCM 2.193.2Open verse →

    अस कहि भेंट सँजोवन लागे। कंद मूल फल खग मृग मागे।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि भेंट सँजोवन लागे। कंद मूल फल खग मृग मागे।।

  1906. RCM 2.193.3Open verse →

    मीन पीन पाठीन पुराने। भरि भरि भार कहारन्ह आने।।

    अर्थ · Hindi

    मीन पीन पाठीन पुराने। भरि भरि भार कहारन्ह आने।।

  1907. RCM 2.193.4Open verse →

    मिलन साजु सजि मिलन सिधाए। मंगल मूल सगुन सुभ पाए।।

    अर्थ · Hindi

    मिलन साजु सजि मिलन सिधाए। मंगल मूल सगुन सुभ पाए।।

  1908. RCM 2.193.5Open verse →

    देखि दूरि तें कहि निज नामू। कीन्ह मुनीसहि दंड प्रनामू।।

    अर्थ · Hindi

    देखि दूरि तें कहि निज नामू। कीन्ह मुनीसहि दंड प्रनामू।।

  1909. RCM 2.193.6Open verse →

    जानि रामप्रिय दीन्हि असीसा। भरतहि कहेउ बुझाइ मुनीसा।।

    अर्थ · Hindi

    जानि रामप्रिय दीन्हि असीसा। भरतहि कहेउ बुझाइ मुनीसा।।

  1910. RCM 2.193.7Open verse →

    राम सखा सुनि संदनु त्यागा। चले उतरि उमगत अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    राम सखा सुनि संदनु त्यागा। चले उतरि उमगत अनुरागा।।

  1911. RCM 2.193.8Open verse →

    गाउँ जाति गुहँ नाउँ सुनाई। कीन्ह जोहारु माथ महि लाई।।

    अर्थ · Hindi

    गाउँ जाति गुहँ नाउँ सुनाई। कीन्ह जोहारु माथ महि लाई।।

  1912. RCM 2.193.9Open verse →

    करत दंडवत देखि तेहि भरत लीन्ह उर लाइ।

    अर्थ · Hindi

    करत दंडवत देखि तेहि भरत लीन्ह उर लाइ।

  1913. RCM 2.193.10Open verse →

    मनहुँ लखन सन भेंट भइ प्रेम न हृदयँ समाइ।।193।।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ लखन सन भेंट भइ प्रेम न हृदयँ समाइ।।193।।

  1914. RCM 2.194.1Open verse →

    भेंटत भरतु ताहि अति प्रीती। लोग सिहाहिं प्रेम कै रीती।।

    अर्थ · Hindi

    भेंटत भरतु ताहि अति प्रीती। लोग सिहाहिं प्रेम कै रीती।।

  1915. RCM 2.194.2Open verse →

    धन्य धन्य धुनि मंगल मूला। सुर सराहि तेहि बरिसहिं फूला।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य धन्य धुनि मंगल मूला। सुर सराहि तेहि बरिसहिं फूला।।

  1916. RCM 2.194.3Open verse →

    लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा। जासु छाँह छुइ लेइअ सींचा।।

    अर्थ · Hindi

    लोक बेद सब भाँतिहिं नीचा। जासु छाँह छुइ लेइअ सींचा।।

  1917. RCM 2.194.4Open verse →

    तेहि भरि अंक राम लघु भ्राता। मिलत पुलक परिपूरित गाता।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि भरि अंक राम लघु भ्राता। मिलत पुलक परिपूरित गाता।।

  1918. RCM 2.194.5Open verse →

    राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पाप पुंज समुहाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम राम कहि जे जमुहाहीं। तिन्हहि न पाप पुंज समुहाहीं।।

  1919. RCM 2.194.6Open verse →

    यह तौ राम लाइ उर लीन्हा। कुल समेत जगु पावन कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    यह तौ राम लाइ उर लीन्हा। कुल समेत जगु पावन कीन्हा।।

  1920. RCM 2.194.7Open verse →

    करमनास जलु सुरसरि परई। तेहि को कहहु सीस नहिं धरई।।

    अर्थ · Hindi

    करमनास जलु सुरसरि परई। तेहि को कहहु सीस नहिं धरई।।

  1921. RCM 2.194.8Open verse →

    उलटा नामु जपत जगु जाना। बालमीकि भए ब्रह्म समाना।।

    अर्थ · Hindi

    उलटा नामु जपत जगु जाना। बालमीकि भए ब्रह्म समाना।।

  1922. RCM 2.194.9Open verse →

    स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात।

    अर्थ · Hindi

    स्वपच सबर खस जमन जड़ पावँर कोल किरात।

  1923. RCM 2.194.10Open verse →

    रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात।।194।।

    अर्थ · Hindi

    रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात।।194।।

  1924. RCM 2.195.1Open verse →

    नहिं अचिरजु जुग जुग चलि आई। केहि न दीन्हि रघुबीर बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं अचिरजु जुग जुग चलि आई। केहि न दीन्हि रघुबीर बड़ाई।।

  1925. RCM 2.195.2Open verse →

    राम नाम महिमा सुर कहहीं। सुनि सुनि अवधलोग सुखु लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम नाम महिमा सुर कहहीं। सुनि सुनि अवधलोग सुखु लहहीं।।

  1926. RCM 2.195.3Open verse →

    रामसखहि मिलि भरत सप्रेमा। पूँछी कुसल सुमंगल खेमा।।

    अर्थ · Hindi

    रामसखहि मिलि भरत सप्रेमा। पूँछी कुसल सुमंगल खेमा।।

  1927. RCM 2.195.4Open verse →

    देखि भरत कर सील सनेहू। भा निषाद तेहि समय बिदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    देखि भरत कर सील सनेहू। भा निषाद तेहि समय बिदेहू।।

  1928. RCM 2.195.5Open verse →

    सकुच सनेहु मोदु मन बाढ़ा। भरतहि चितवत एकटक ठाढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    सकुच सनेहु मोदु मन बाढ़ा। भरतहि चितवत एकटक ठाढ़ा।।

  1929. RCM 2.195.6Open verse →

    धरि धीरजु पद बंदि बहोरी। बिनय सप्रेम करत कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    धरि धीरजु पद बंदि बहोरी। बिनय सप्रेम करत कर जोरी।।

  1930. RCM 2.195.7Open verse →

    कुसल मूल पद पंकज पेखी। मैं तिहुँ काल कुसल निज लेखी।।

    अर्थ · Hindi

    कुसल मूल पद पंकज पेखी। मैं तिहुँ काल कुसल निज लेखी।।

  1931. RCM 2.195.8Open verse →

    अब प्रभु परम अनुग्रह तोरें। सहित कोटि कुल मंगल मोरें।।

    अर्थ · Hindi

    अब प्रभु परम अनुग्रह तोरें। सहित कोटि कुल मंगल मोरें।।

  1932. RCM 2.195.9Open verse →

    समुझि मोरि करतूति कुलु प्रभु महिमा जियँ जोइ।

    अर्थ · Hindi

    समुझि मोरि करतूति कुलु प्रभु महिमा जियँ जोइ।

  1933. RCM 2.195.10Open verse →

    जो न भजइ रघुबीर पद जग बिधि बंचित सोइ।।195।।

    अर्थ · Hindi

    जो न भजइ रघुबीर पद जग बिधि बंचित सोइ।।195।।

  1934. RCM 2.196.1Open verse →

    कपटी कायर कुमति कुजाती। लोक बेद बाहेर सब भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    कपटी कायर कुमति कुजाती। लोक बेद बाहेर सब भाँती।।

  1935. RCM 2.196.2Open verse →

    राम कीन्ह आपन जबही तें। भयउँ भुवन भूषन तबही तें।।

    अर्थ · Hindi

    राम कीन्ह आपन जबही तें। भयउँ भुवन भूषन तबही तें।।

  1936. RCM 2.196.3Open verse →

    देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई। मिलेउ बहोरि भरत लघु भाई।।

    अर्थ · Hindi

    देखि प्रीति सुनि बिनय सुहाई। मिलेउ बहोरि भरत लघु भाई।।

  1937. RCM 2.196.4Open verse →

    कहि निषाद निज नाम सुबानीं। सादर सकल जोहारीं रानीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहि निषाद निज नाम सुबानीं। सादर सकल जोहारीं रानीं।।

  1938. RCM 2.196.5Open verse →

    जानि लखन सम देहिं असीसा। जिअहु सुखी सय लाख बरीसा।।

    अर्थ · Hindi

    जानि लखन सम देहिं असीसा। जिअहु सुखी सय लाख बरीसा।।

  1939. RCM 2.196.6Open verse →

    निरखि निषादु नगर नर नारी। भए सुखी जनु लखनु निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि निषादु नगर नर नारी। भए सुखी जनु लखनु निहारी।।

  1940. RCM 2.196.7Open verse →

    कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू। भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं लहेउ एहिं जीवन लाहू। भेंटेउ रामभद्र भरि बाहू।।

  1941. RCM 2.196.8Open verse →

    सुनि निषादु निज भाग बड़ाई। प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि निषादु निज भाग बड़ाई। प्रमुदित मन लइ चलेउ लेवाई।।

  1942. RCM 2.196.9Open verse →

    सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ।

    अर्थ · Hindi

    सनकारे सेवक सकल चले स्वामि रुख पाइ।

  1943. RCM 2.196.10Open verse →

    घर तरु तर सर बाग बन बास बनाएन्हि जाइ।।196।।

    अर्थ · Hindi

    घर तरु तर सर बाग बन बास बनाएन्हि जाइ।।196।।

  1944. RCM 2.197.1Open verse →

    सृंगबेरपुर भरत दीख जब। भे सनेहँ सब अंग सिथिल तब।।

    अर्थ · Hindi

    सृंगबेरपुर भरत दीख जब। भे सनेहँ सब अंग सिथिल तब।।

  1945. RCM 2.197.2Open verse →

    सोहत दिएँ निषादहि लागू। जनु तनु धरें बिनय अनुरागू।।

    अर्थ · Hindi

    सोहत दिएँ निषादहि लागू। जनु तनु धरें बिनय अनुरागू।।

  1946. RCM 2.197.3Open verse →

    एहि बिधि भरत सेनु सबु संगा। दीखि जाइ जग पावनि गंगा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि भरत सेनु सबु संगा। दीखि जाइ जग पावनि गंगा।।

  1947. RCM 2.197.4Open verse →

    रामघाट कहँ कीन्ह प्रनामू। भा मनु मगनु मिले जनु रामू।।

    अर्थ · Hindi

    रामघाट कहँ कीन्ह प्रनामू। भा मनु मगनु मिले जनु रामू।।

  1948. RCM 2.197.5Open verse →

    करहिं प्रनाम नगर नर नारी। मुदित ब्रह्ममय बारि निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    करहिं प्रनाम नगर नर नारी। मुदित ब्रह्ममय बारि निहारी।।

  1949. RCM 2.197.6Open verse →

    करि मज्जनु मागहिं कर जोरी। रामचंद्र पद प्रीति न थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    करि मज्जनु मागहिं कर जोरी। रामचंद्र पद प्रीति न थोरी।।

  1950. RCM 2.197.7Open verse →

    भरत कहेउ सुरसरि तव रेनू। सकल सुखद सेवक सुरधेनू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत कहेउ सुरसरि तव रेनू। सकल सुखद सेवक सुरधेनू।।

  1951. RCM 2.197.8Open verse →

    जोरि पानि बर मागउँ एहू। सीय राम पद सहज सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    जोरि पानि बर मागउँ एहू। सीय राम पद सहज सनेहू।।

  1952. RCM 2.197.9Open verse →

    एहि बिधि मज्जनु भरतु करि गुर अनुसासन पाइ।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि मज्जनु भरतु करि गुर अनुसासन पाइ।

  1953. RCM 2.197.10Open verse →

    मातु नहानीं जानि सब डेरा चले लवाइ।।197।।

    अर्थ · Hindi

    मातु नहानीं जानि सब डेरा चले लवाइ।।197।।

  1954. RCM 2.198.1Open verse →

    जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा। भरत सोधु सबही कर लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ लोगन्ह डेरा कीन्हा। भरत सोधु सबही कर लीन्हा।।

  1955. RCM 2.198.2Open verse →

    सुर सेवा करि आयसु पाई। राम मातु पहिं गे दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुर सेवा करि आयसु पाई। राम मातु पहिं गे दोउ भाई।।

  1956. RCM 2.198.3Open verse →

    चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी। जननीं सकल भरत सनमानी।।

    अर्थ · Hindi

    चरन चाँपि कहि कहि मृदु बानी। जननीं सकल भरत सनमानी।।

  1957. RCM 2.198.4Open verse →

    भाइहि सौंपि मातु सेवकाई। आपु निषादहि लीन्ह बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    भाइहि सौंपि मातु सेवकाई। आपु निषादहि लीन्ह बोलाई।।

  1958. RCM 2.198.5Open verse →

    चले सखा कर सों कर जोरें। सिथिल सरीर सनेह न थोरें।।

    अर्थ · Hindi

    चले सखा कर सों कर जोरें। सिथिल सरीर सनेह न थोरें।।

  1959. RCM 2.198.6Open verse →

    पूँछत सखहि सो ठाउँ देखाऊ। नेकु नयन मन जरनि जुड़ाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पूँछत सखहि सो ठाउँ देखाऊ। नेकु नयन मन जरनि जुड़ाऊ।।

  1960. RCM 2.198.7Open verse →

    जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए। कहत भरे जल लोचन कोए।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ सिय रामु लखनु निसि सोए। कहत भरे जल लोचन कोए।।

  1961. RCM 2.198.8Open verse →

    भरत बचन सुनि भयउ बिषादू। तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन सुनि भयउ बिषादू। तुरत तहाँ लइ गयउ निषादू।।

  1962. RCM 2.198.9Open verse →

    जहँ सिंसुपा पुनीत तर रघुबर किय बिश्रामु।

    अर्थ · Hindi

    जहँ सिंसुपा पुनीत तर रघुबर किय बिश्रामु।

  1963. RCM 2.198.10Open verse →

    अति सनेहँ सादर भरत कीन्हेउ दंड प्रनामु।।198।।

    अर्थ · Hindi

    अति सनेहँ सादर भरत कीन्हेउ दंड प्रनामु।।198।।

  1964. RCM 2.199.1Open verse →

    कुस साँथरीनिहारि सुहाई। कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई।।

    अर्थ · Hindi

    कुस साँथरीनिहारि सुहाई। कीन्ह प्रनामु प्रदच्छिन जाई।।

  1965. RCM 2.199.2Open verse →

    चरन रेख रज आँखिन्ह लाई। बनइ न कहत प्रीति अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    चरन रेख रज आँखिन्ह लाई। बनइ न कहत प्रीति अधिकाई।।

  1966. RCM 2.199.3Open verse →

    कनक बिंदु दुइ चारिक देखे। राखे सीस सीय सम लेखे।।

    अर्थ · Hindi

    कनक बिंदु दुइ चारिक देखे। राखे सीस सीय सम लेखे।।

  1967. RCM 2.199.4Open verse →

    सजल बिलोचन हृदयँ गलानी। कहत सखा सन बचन सुबानी।।

    अर्थ · Hindi

    सजल बिलोचन हृदयँ गलानी। कहत सखा सन बचन सुबानी।।

  1968. RCM 2.199.5Open verse →

    श्रीहत सीय बिरहँ दुतिहीना। जथा अवध नर नारि बिलीना।।

    अर्थ · Hindi

    श्रीहत सीय बिरहँ दुतिहीना। जथा अवध नर नारि बिलीना।।

  1969. RCM 2.199.6Open verse →

    पिता जनक देउँ पटतर केही। करतल भोगु जोगु जग जेही।।

    अर्थ · Hindi

    पिता जनक देउँ पटतर केही। करतल भोगु जोगु जग जेही।।

  1970. RCM 2.199.7Open verse →

    ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू।।

    अर्थ · Hindi

    ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू।।

  1971. RCM 2.199.8Open verse →

    प्राननाथु रघुनाथ गोसाई। जो बड़ होत सो राम बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्राननाथु रघुनाथ गोसाई। जो बड़ होत सो राम बड़ाई।।

  1972. RCM 2.199.9Open verse →

    पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि।

    अर्थ · Hindi

    पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि।

  1973. RCM 2.199.10Open verse →

    बिहरत ह्रदउ न हहरि हर पबि तें कठिन बिसेषि।।199।।

    अर्थ · Hindi

    बिहरत ह्रदउ न हहरि हर पबि तें कठिन बिसेषि।।199।।

  1974. RCM 2.200.1Open verse →

    लालन जोगु लखन लघु लोने। भे न भाइ अस अहहिं न होने।।

    अर्थ · Hindi

    लालन जोगु लखन लघु लोने। भे न भाइ अस अहहिं न होने।।

  1975. RCM 2.200.2Open verse →

    पुरजन प्रिय पितु मातु दुलारे। सिय रघुबरहि प्रानपिआरे।।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन प्रिय पितु मातु दुलारे। सिय रघुबरहि प्रानपिआरे।।

  1976. RCM 2.200.3Open verse →

    मृदु मूरति सुकुमार सुभाऊ। तात बाउ तन लाग न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मृदु मूरति सुकुमार सुभाऊ। तात बाउ तन लाग न काऊ।।

  1977. RCM 2.200.4Open verse →

    ते बन सहहिं बिपति सब भाँती। निदरे कोटि कुलिस एहिं छाती।।

    अर्थ · Hindi

    ते बन सहहिं बिपति सब भाँती। निदरे कोटि कुलिस एहिं छाती।।

  1978. RCM 2.200.5Open verse →

    राम जनमि जगु कीन्ह उजागर। रूप सील सुख सब गुन सागर।।

    अर्थ · Hindi

    राम जनमि जगु कीन्ह उजागर। रूप सील सुख सब गुन सागर।।

  1979. RCM 2.200.6Open verse →

    पुरजन परिजन गुर पितु माता। राम सुभाउ सबहि सुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन परिजन गुर पितु माता। राम सुभाउ सबहि सुखदाता।।

  1980. RCM 2.200.7Open verse →

    बैरिउ राम बड़ाई करहीं। बोलनि मिलनि बिनय मन हरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बैरिउ राम बड़ाई करहीं। बोलनि मिलनि बिनय मन हरहीं।।

  1981. RCM 2.200.8Open verse →

    सारद कोटि कोटि सत सेषा। करि न सकहिं प्रभु गुन गन लेखा।।

    अर्थ · Hindi

    सारद कोटि कोटि सत सेषा। करि न सकहिं प्रभु गुन गन लेखा।।

  1982. RCM 2.200.9Open verse →

    सुखस्वरुप रघुबंसमनि मंगल मोद निधान।

    अर्थ · Hindi

    सुखस्वरुप रघुबंसमनि मंगल मोद निधान।

  1983. RCM 2.200.10Open verse →

    ते सोवत कुस डासि महि बिधि गति अति बलवान।।200।।

    अर्थ · Hindi

    ते सोवत कुस डासि महि बिधि गति अति बलवान।।200।।

  1984. RCM 2.201.1Open verse →

    राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    राम सुना दुखु कान न काऊ। जीवनतरु जिमि जोगवइ राऊ।।

  1985. RCM 2.201.2Open verse →

    पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती। जोगवहिं जननि सकल दिन राती।।

    अर्थ · Hindi

    पलक नयन फनि मनि जेहि भाँती। जोगवहिं जननि सकल दिन राती।।

  1986. RCM 2.201.3Open verse →

    ते अब फिरत बिपिन पदचारी। कंद मूल फल फूल अहारी।।

    अर्थ · Hindi

    ते अब फिरत बिपिन पदचारी। कंद मूल फल फूल अहारी।।

  1987. RCM 2.201.4Open verse →

    धिग कैकेई अमंगल मूला। भइसि प्रान प्रियतम प्रतिकूला।।

    अर्थ · Hindi

    धिग कैकेई अमंगल मूला। भइसि प्रान प्रियतम प्रतिकूला।।

  1988. RCM 2.201.5Open verse →

    मैं धिग धिग अघ उदधि अभागी। सबु उतपातु भयउ जेहि लागी।।

    अर्थ · Hindi

    मैं धिग धिग अघ उदधि अभागी। सबु उतपातु भयउ जेहि लागी।।

  1989. RCM 2.201.6Open verse →

    कुल कलंकु करि सृजेउ बिधाताँ। साइँदोह मोहि कीन्ह कुमाताँ।।

    अर्थ · Hindi

    कुल कलंकु करि सृजेउ बिधाताँ। साइँदोह मोहि कीन्ह कुमाताँ।।

  1990. RCM 2.201.7Open verse →

    सुनि सप्रेम समुझाव निषादू। नाथ करिअ कत बादि बिषादू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सप्रेम समुझाव निषादू। नाथ करिअ कत बादि बिषादू।।

  1991. RCM 2.201.8Open verse →

    राम तुम्हहि प्रिय तुम्ह प्रिय रामहि। यह निरजोसु दोसु बिधि बामहि।।

    अर्थ · Hindi

    राम तुम्हहि प्रिय तुम्ह प्रिय रामहि। यह निरजोसु दोसु बिधि बामहि।।

  1992. RCM 2.202.1Open verse →

    सखा बचन सुनि उर धरि धीरा। बास चले सुमिरत रघुबीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सखा बचन सुनि उर धरि धीरा। बास चले सुमिरत रघुबीरा।।

  1993. RCM 2.202.2Open verse →

    यह सुधि पाइ नगर नर नारी। चले बिलोकन आरत भारी।।

    अर्थ · Hindi

    यह सुधि पाइ नगर नर नारी। चले बिलोकन आरत भारी।।

  1994. RCM 2.202.3Open verse →

    परदखिना करि करहिं प्रनामा। देहिं कैकइहि खोरि निकामा।।

    अर्थ · Hindi

    परदखिना करि करहिं प्रनामा। देहिं कैकइहि खोरि निकामा।।

  1995. RCM 2.202.4Open verse →

    भरी भरि बारि बिलोचन लेंहीं। बाम बिधाताहि दूषन देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भरी भरि बारि बिलोचन लेंहीं। बाम बिधाताहि दूषन देहीं।।

  1996. RCM 2.202.5Open verse →

    एक सराहहिं भरत सनेहू। कोउ कह नृपति निबाहेउ नेहू।।

    अर्थ · Hindi

    एक सराहहिं भरत सनेहू। कोउ कह नृपति निबाहेउ नेहू।।

  1997. RCM 2.202.6Open verse →

    निंदहिं आपु सराहि निषादहि। को कहि सकइ बिमोह बिषादहि।।

    अर्थ · Hindi

    निंदहिं आपु सराहि निषादहि। को कहि सकइ बिमोह बिषादहि।।

  1998. RCM 2.202.7Open verse →

    एहि बिधि राति लोगु सबु जागा। भा भिनुसार गुदारा लागा।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि राति लोगु सबु जागा। भा भिनुसार गुदारा लागा।।

  1999. RCM 2.202.8Open verse →

    गुरहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं। नईं नाव सब मातु चढ़ाईं।।

    अर्थ · Hindi

    गुरहि सुनावँ चढ़ाइ सुहाईं। नईं नाव सब मातु चढ़ाईं।।

  2000. RCM 2.202.9Open verse →

    दंड चारि महँ भा सबु पारा। उतरि भरत तब सबहि सँभारा।।

    अर्थ · Hindi

    दंड चारि महँ भा सबु पारा। उतरि भरत तब सबहि सँभारा।।

  2001. RCM 2.202.10Open verse →

    प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ।

    अर्थ · Hindi

    प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ।

  2002. RCM 2.202.11Open verse →

    आगें किए निषाद गन दीन्हेउ कटकु चलाइ।।202।।

    अर्थ · Hindi

    आगें किए निषाद गन दीन्हेउ कटकु चलाइ।।202।।

  2003. RCM 2.203.1Open verse →

    कियउ निषादनाथु अगुआईं। मातु पालकीं सकल चलाईं।।

    अर्थ · Hindi

    कियउ निषादनाथु अगुआईं। मातु पालकीं सकल चलाईं।।

  2004. RCM 2.203.2Open verse →

    साथ बोलाइ भाइ लघु दीन्हा। बिप्रन्ह सहित गवनु गुर कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    साथ बोलाइ भाइ लघु दीन्हा। बिप्रन्ह सहित गवनु गुर कीन्हा।।

  2005. RCM 2.203.3Open verse →

    आपु सुरसरिहि कीन्ह प्रनामू। सुमिरे लखन सहित सिय रामू।।

    अर्थ · Hindi

    आपु सुरसरिहि कीन्ह प्रनामू। सुमिरे लखन सहित सिय रामू।।

  2006. RCM 2.203.4Open verse →

    गवने भरत पयोदेहिं पाए। कोतल संग जाहिं डोरिआए।।

    अर्थ · Hindi

    गवने भरत पयोदेहिं पाए। कोतल संग जाहिं डोरिआए।।

  2007. RCM 2.203.5Open verse →

    कहहिं सुसेवक बारहिं बारा। होइअ नाथ अस्व असवारा।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं सुसेवक बारहिं बारा। होइअ नाथ अस्व असवारा।।

  2008. RCM 2.203.6Open verse →

    रामु पयोदेहि पायँ सिधाए। हम कहँ रथ गज बाजि बनाए।।

    अर्थ · Hindi

    रामु पयोदेहि पायँ सिधाए। हम कहँ रथ गज बाजि बनाए।।

  2009. RCM 2.203.7Open verse →

    सिर भर जाउँ उचित अस मोरा। सब तें सेवक धरमु कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सिर भर जाउँ उचित अस मोरा। सब तें सेवक धरमु कठोरा।।

  2010. RCM 2.203.8Open verse →

    देखि भरत गति सुनि मृदु बानी। सब सेवक गन गरहिं गलानी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि भरत गति सुनि मृदु बानी। सब सेवक गन गरहिं गलानी।।

  2011. RCM 2.203.9Open verse →

    भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु प्रयाग।

    अर्थ · Hindi

    भरत तीसरे पहर कहँ कीन्ह प्रबेसु प्रयाग।

  2012. RCM 2.203.10Open verse →

    कहत राम सिय राम सिय उमगि उमगि अनुराग।।203।।

    अर्थ · Hindi

    कहत राम सिय राम सिय उमगि उमगि अनुराग।।203।।

  2013. RCM 2.204.1Open verse →

    झलका झलकत पायन्ह कैंसें। पंकज कोस ओस कन जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    झलका झलकत पायन्ह कैंसें। पंकज कोस ओस कन जैसें।।

  2014. RCM 2.204.2Open verse →

    भरत पयादेहिं आए आजू। भयउ दुखित सुनि सकल समाजू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत पयादेहिं आए आजू। भयउ दुखित सुनि सकल समाजू।।

  2015. RCM 2.204.3Open verse →

    खबरि लीन्ह सब लोग नहाए। कीन्ह प्रनामु त्रिबेनिहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    खबरि लीन्ह सब लोग नहाए। कीन्ह प्रनामु त्रिबेनिहिं आए।।

  2016. RCM 2.204.4Open verse →

    सबिधि सितासित नीर नहाने। दिए दान महिसुर सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    सबिधि सितासित नीर नहाने। दिए दान महिसुर सनमाने।।

  2017. RCM 2.204.5Open verse →

    देखत स्यामल धवल हलोरे। पुलकि सरीर भरत कर जोरे।।

    अर्थ · Hindi

    देखत स्यामल धवल हलोरे। पुलकि सरीर भरत कर जोरे।।

  2018. RCM 2.204.6Open verse →

    सकल काम प्रद तीरथराऊ। बेद बिदित जग प्रगट प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सकल काम प्रद तीरथराऊ। बेद बिदित जग प्रगट प्रभाऊ।।

  2019. RCM 2.204.7Open verse →

    मागउँ भीख त्यागि निज धरमू। आरत काह न करइ कुकरमू।।

    अर्थ · Hindi

    मागउँ भीख त्यागि निज धरमू। आरत काह न करइ कुकरमू।।

  2020. RCM 2.204.8Open verse →

    अस जियँ जानि सुजान सुदानी। सफल करहिं जग जाचक बानी।।

    अर्थ · Hindi

    अस जियँ जानि सुजान सुदानी। सफल करहिं जग जाचक बानी।।

  2021. RCM 2.204.9Open verse →

    अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान।

    अर्थ · Hindi

    अरथ न धरम न काम रुचि गति न चहउँ निरबान।

  2022. RCM 2.204.10Open verse →

    जनम जनम रति राम पद यह बरदानु न आन।।204।।

    अर्थ · Hindi

    जनम जनम रति राम पद यह बरदानु न आन।।204।।

  2023. RCM 2.205.1Open verse →

    जानहुँ रामु कुटिल करि मोही। लोग कहउ गुर साहिब द्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    जानहुँ रामु कुटिल करि मोही। लोग कहउ गुर साहिब द्रोही।।

  2024. RCM 2.205.2Open verse →

    सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    सीता राम चरन रति मोरें। अनुदिन बढ़उ अनुग्रह तोरें।।

  2025. RCM 2.205.3Open verse →

    जलदु जनम भरि सुरति बिसारउ। जाचत जलु पबि पाहन डारउ।।

    अर्थ · Hindi

    जलदु जनम भरि सुरति बिसारउ। जाचत जलु पबि पाहन डारउ।।

  2026. RCM 2.205.4Open verse →

    चातकु रटनि घटें घटि जाई। बढ़े प्रेमु सब भाँति भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    चातकु रटनि घटें घटि जाई। बढ़े प्रेमु सब भाँति भलाई।।

  2027. RCM 2.205.5Open verse →

    कनकहिं बान चढ़इ जिमि दाहें। तिमि प्रियतम पद नेम निबाहें।।

    अर्थ · Hindi

    कनकहिं बान चढ़इ जिमि दाहें। तिमि प्रियतम पद नेम निबाहें।।

  2028. RCM 2.205.6Open verse →

    भरत बचन सुनि माझ त्रिबेनी। भइ मृदु बानि सुमंगल देनी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन सुनि माझ त्रिबेनी। भइ मृदु बानि सुमंगल देनी।।

  2029. RCM 2.205.7Open verse →

    तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू। राम चरन अनुराग अगाधू।।

    अर्थ · Hindi

    तात भरत तुम्ह सब बिधि साधू। राम चरन अनुराग अगाधू।।

  2030. RCM 2.205.8Open verse →

    बाद गलानि करहु मन माहीं। तुम्ह सम रामहि कोउ प्रिय नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बाद गलानि करहु मन माहीं। तुम्ह सम रामहि कोउ प्रिय नाहीं।।

  2031. RCM 2.205.9Open verse →

    तनु पुलकेउ हियँ हरषु सुनि बेनि बचन अनुकूल।

    अर्थ · Hindi

    तनु पुलकेउ हियँ हरषु सुनि बेनि बचन अनुकूल।

  2032. RCM 2.205.10Open verse →

    भरत धन्य कहि धन्य सुर हरषित बरषहिं फूल।।205।।

    अर्थ · Hindi

    भरत धन्य कहि धन्य सुर हरषित बरषहिं फूल।।205।।

  2033. RCM 2.206.1Open verse →

    प्रमुदित तीरथराज निवासी। बैखानस बटु गृही उदासी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रमुदित तीरथराज निवासी। बैखानस बटु गृही उदासी।।

  2034. RCM 2.206.2Open verse →

    कहहिं परसपर मिलि दस पाँचा। भरत सनेह सीलु सुचि साँचा।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं परसपर मिलि दस पाँचा। भरत सनेह सीलु सुचि साँचा।।

  2035. RCM 2.206.3Open verse →

    सुनत राम गुन ग्राम सुहाए। भरद्वाज मुनिबर पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत राम गुन ग्राम सुहाए। भरद्वाज मुनिबर पहिं आए।।

  2036. RCM 2.206.4Open verse →

    दंड प्रनामु करत मुनि देखे। मूरतिमंत भाग्य निज लेखे।।

    अर्थ · Hindi

    दंड प्रनामु करत मुनि देखे। मूरतिमंत भाग्य निज लेखे।।

  2037. RCM 2.206.5Open verse →

    धाइ उठाइ लाइ उर लीन्हे। दीन्हि असीस कृतारथ कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    धाइ उठाइ लाइ उर लीन्हे। दीन्हि असीस कृतारथ कीन्हे।।

  2038. RCM 2.206.6Open verse →

    आसनु दीन्ह नाइ सिरु बैठे। चहत सकुच गृहँ जनु भजि पैठे।।

    अर्थ · Hindi

    आसनु दीन्ह नाइ सिरु बैठे। चहत सकुच गृहँ जनु भजि पैठे।।

  2039. RCM 2.206.7Open verse →

    मुनि पूँछब कछु यह बड़ सोचू। बोले रिषि लखि सीलु सँकोचू।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि पूँछब कछु यह बड़ सोचू। बोले रिषि लखि सीलु सँकोचू।।

  2040. RCM 2.206.8Open verse →

    सुनहु भरत हम सब सुधि पाई। बिधि करतब पर किछु न बसाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु भरत हम सब सुधि पाई। बिधि करतब पर किछु न बसाई।।

  2041. RCM 2.206.9Open verse →

    तुम्ह गलानि जियँ जनि करहु समुझी मातु करतूति।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह गलानि जियँ जनि करहु समुझी मातु करतूति।

  2042. RCM 2.206.10Open verse →

    तात कैकइहि दोसु नहिं गई गिरा मति धूति।।206।।

    अर्थ · Hindi

    तात कैकइहि दोसु नहिं गई गिरा मति धूति।।206।।

  2043. RCM 2.207.1Open verse →

    यहउ कहत भल कहिहि न कोऊ। लोकु बेद बुध संमत दोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    यहउ कहत भल कहिहि न कोऊ। लोकु बेद बुध संमत दोऊ।।

  2044. RCM 2.207.2Open verse →

    तात तुम्हार बिमल जसु गाई। पाइहि लोकउ बेदु बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    तात तुम्हार बिमल जसु गाई। पाइहि लोकउ बेदु बड़ाई।।

  2045. RCM 2.207.3Open verse →

    लोक बेद संमत सबु कहई। जेहि पितु देइ राजु सो लहई।।

    अर्थ · Hindi

    लोक बेद संमत सबु कहई। जेहि पितु देइ राजु सो लहई।।

  2046. RCM 2.207.4Open verse →

    राउ सत्यब्रत तुम्हहि बोलाई। देत राजु सुखु धरमु बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    राउ सत्यब्रत तुम्हहि बोलाई। देत राजु सुखु धरमु बड़ाई।।

  2047. RCM 2.207.5Open verse →

    राम गवनु बन अनरथ मूला। जो सुनि सकल बिस्व भइ सूला।।

    अर्थ · Hindi

    राम गवनु बन अनरथ मूला। जो सुनि सकल बिस्व भइ सूला।।

  2048. RCM 2.207.6Open verse →

    सो भावी बस रानि अयानी। करि कुचालि अंतहुँ पछितानी।।

    अर्थ · Hindi

    सो भावी बस रानि अयानी। करि कुचालि अंतहुँ पछितानी।।

  2049. RCM 2.207.7Open verse →

    तहँउँ तुम्हार अलप अपराधू। कहै सो अधम अयान असाधू।।

    अर्थ · Hindi

    तहँउँ तुम्हार अलप अपराधू। कहै सो अधम अयान असाधू।।

  2050. RCM 2.207.8Open verse →

    करतेहु राजु त तुम्हहि न दोषू। रामहि होत सुनत संतोषू।।

    अर्थ · Hindi

    करतेहु राजु त तुम्हहि न दोषू। रामहि होत सुनत संतोषू।।

  2051. RCM 2.207.9Open verse →

    अब अति कीन्हेहु भरत भल तुम्हहि उचित मत एहु।

    अर्थ · Hindi

    अब अति कीन्हेहु भरत भल तुम्हहि उचित मत एहु।

  2052. RCM 2.207.10Open verse →

    सकल सुमंगल मूल जग रघुबर चरन सनेहु।।207।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुमंगल मूल जग रघुबर चरन सनेहु।।207।।

  2053. RCM 2.208.1Open verse →

    सो तुम्हार धनु जीवनु प्राना। भूरिभाग को तुम्हहि समाना।।

    अर्थ · Hindi

    सो तुम्हार धनु जीवनु प्राना। भूरिभाग को तुम्हहि समाना।।

  2054. RCM 2.208.2Open verse →

    यह तम्हार आचरजु न ताता। दसरथ सुअन राम प्रिय भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    यह तम्हार आचरजु न ताता। दसरथ सुअन राम प्रिय भ्राता।।

  2055. RCM 2.208.3Open verse →

    सुनहु भरत रघुबर मन माहीं। पेम पात्रु तुम्ह सम कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु भरत रघुबर मन माहीं। पेम पात्रु तुम्ह सम कोउ नाहीं।।

  2056. RCM 2.208.4Open verse →

    लखन राम सीतहि अति प्रीती। निसि सब तुम्हहि सराहत बीती।।

    अर्थ · Hindi

    लखन राम सीतहि अति प्रीती। निसि सब तुम्हहि सराहत बीती।।

  2057. RCM 2.208.5Open verse →

    जाना मरमु नहात प्रयागा। मगन होहिं तुम्हरें अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    जाना मरमु नहात प्रयागा। मगन होहिं तुम्हरें अनुरागा।।

  2058. RCM 2.208.6Open verse →

    तुम्ह पर अस सनेहु रघुबर कें। सुख जीवन जग जस जड़ नर कें।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह पर अस सनेहु रघुबर कें। सुख जीवन जग जस जड़ नर कें।।

  2059. RCM 2.208.7Open verse →

    यह न अधिक रघुबीर बड़ाई। प्रनत कुटुंब पाल रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    यह न अधिक रघुबीर बड़ाई। प्रनत कुटुंब पाल रघुराई।।

  2060. RCM 2.208.8Open verse →

    तुम्ह तौ भरत मोर मत एहू। धरें देह जनु राम सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह तौ भरत मोर मत एहू। धरें देह जनु राम सनेहू।।

  2061. RCM 2.208.9Open verse →

    तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम सब कहँ उपदेसु।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह कहँ भरत कलंक यह हम सब कहँ उपदेसु।

  2062. RCM 2.208.10Open verse →

    राम भगति रस सिद्धि हित भा यह समउ गनेसु।।208।।

    अर्थ · Hindi

    राम भगति रस सिद्धि हित भा यह समउ गनेसु।।208।।

  2063. RCM 2.209.1Open verse →

    नव बिधु बिमल तात जसु तोरा। रघुबर किंकर कुमुद चकोरा।।

    अर्थ · Hindi

    नव बिधु बिमल तात जसु तोरा। रघुबर किंकर कुमुद चकोरा।।

  2064. RCM 2.209.2Open verse →

    उदित सदा अँथइहि कबहूँ ना। घटिहि न जग नभ दिन दिन दूना।।

    अर्थ · Hindi

    उदित सदा अँथइहि कबहूँ ना। घटिहि न जग नभ दिन दिन दूना।।

  2065. RCM 2.209.3Open verse →

    कोक तिलोक प्रीति अति करिही। प्रभु प्रताप रबि छबिहि न हरिही।।

    अर्थ · Hindi

    कोक तिलोक प्रीति अति करिही। प्रभु प्रताप रबि छबिहि न हरिही।।

  2066. RCM 2.209.4Open verse →

    निसि दिन सुखद सदा सब काहू। ग्रसिहि न कैकइ करतबु राहू।।

    अर्थ · Hindi

    निसि दिन सुखद सदा सब काहू। ग्रसिहि न कैकइ करतबु राहू।।

  2067. RCM 2.209.5Open verse →

    पूरन राम सुपेम पियूषा। गुर अवमान दोष नहिं दूषा।।

    अर्थ · Hindi

    पूरन राम सुपेम पियूषा। गुर अवमान दोष नहिं दूषा।।

  2068. RCM 2.209.6Open verse →

    राम भगत अब अमिअँ अघाहूँ। कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ।।

    अर्थ · Hindi

    राम भगत अब अमिअँ अघाहूँ। कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ।।

  2069. RCM 2.209.7Open verse →

    भूप भगीरथ सुरसरि आनी। सुमिरत सकल सुंमगल खानी।।

    अर्थ · Hindi

    भूप भगीरथ सुरसरि आनी। सुमिरत सकल सुंमगल खानी।।

  2070. RCM 2.209.8Open verse →

    दसरथ गुन गन बरनि न जाहीं। अधिकु कहा जेहि सम जग नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    दसरथ गुन गन बरनि न जाहीं। अधिकु कहा जेहि सम जग नाहीं।।

  2071. RCM 2.209.9Open verse →

    जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट भए आइ।।

    अर्थ · Hindi

    जासु सनेह सकोच बस राम प्रगट भए आइ।।

  2072. RCM 2.209.10Open verse →

    जे हर हिय नयननि कबहुँ निरखे नहीं अघाइ।।209।।

    अर्थ · Hindi

    जे हर हिय नयननि कबहुँ निरखे नहीं अघाइ।।209।।

  2073. RCM 2.210.1Open verse →

    कीरति बिधु तुम्ह कीन्ह अनूपा। जहँ बस राम पेम मृगरूपा।।

    अर्थ · Hindi

    कीरति बिधु तुम्ह कीन्ह अनूपा। जहँ बस राम पेम मृगरूपा।।

  2074. RCM 2.210.2Open verse →

    तात गलानि करहु जियँ जाएँ। डरहु दरिद्रहि पारसु पाएँ।।।।

    अर्थ · Hindi

    तात गलानि करहु जियँ जाएँ। डरहु दरिद्रहि पारसु पाएँ।।।।

  2075. RCM 2.210.3Open verse →

    सुनहु भरत हम झूठ न कहहीं। उदासीन तापस बन रहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु भरत हम झूठ न कहहीं। उदासीन तापस बन रहहीं।।

  2076. RCM 2.210.4Open verse →

    सब साधन कर सुफल सुहावा। लखन राम सिय दरसनु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    सब साधन कर सुफल सुहावा। लखन राम सिय दरसनु पावा।।

  2077. RCM 2.210.5Open verse →

    तेहि फल कर फलु दरस तुम्हारा। सहित पयाग सुभाग हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि फल कर फलु दरस तुम्हारा। सहित पयाग सुभाग हमारा।।

  2078. RCM 2.210.6Open verse →

    भरत धन्य तुम्ह जसु जगु जयऊ। कहि अस पेम मगन पुनि भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भरत धन्य तुम्ह जसु जगु जयऊ। कहि अस पेम मगन पुनि भयऊ।।

  2079. RCM 2.210.7Open verse →

    सुनि मुनि बचन सभासद हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन सभासद हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।

  2080. RCM 2.210.8Open verse →

    धन्य धन्य धुनि गगन पयागा। सुनि सुनि भरतु मगन अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य धन्य धुनि गगन पयागा। सुनि सुनि भरतु मगन अनुरागा।।

  2081. RCM 2.210.9Open verse →

    पुलक गात हियँ रामु सिय सजल सरोरुह नैन।

    अर्थ · Hindi

    पुलक गात हियँ रामु सिय सजल सरोरुह नैन।

  2082. RCM 2.210.10Open verse →

    करि प्रनामु मुनि मंडलिहि बोले गदगद बैन।।210।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु मुनि मंडलिहि बोले गदगद बैन।।210।।

  2083. RCM 2.211.1Open verse →

    मुनि समाजु अरु तीरथराजू। साँचिहुँ सपथ अघाइ अकाजू।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि समाजु अरु तीरथराजू। साँचिहुँ सपथ अघाइ अकाजू।।

  2084. RCM 2.211.2Open verse →

    एहिं थल जौं किछु कहिअ बनाई। एहि सम अधिक न अघ अधमाई।।

    अर्थ · Hindi

    एहिं थल जौं किछु कहिअ बनाई। एहि सम अधिक न अघ अधमाई।।

  2085. RCM 2.211.3Open verse →

    तुम्ह सर्बग्य कहउँ सतिभाऊ। उर अंतरजामी रघुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सर्बग्य कहउँ सतिभाऊ। उर अंतरजामी रघुराऊ।।

  2086. RCM 2.211.4Open verse →

    मोहि न मातु करतब कर सोचू। नहिं दुखु जियँ जगु जानिहि पोचू।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि न मातु करतब कर सोचू। नहिं दुखु जियँ जगु जानिहि पोचू।।

  2087. RCM 2.211.5Open verse →

    नाहिन डरु बिगरिहि परलोकू। पितहु मरन कर मोहि न सोकू।।

    अर्थ · Hindi

    नाहिन डरु बिगरिहि परलोकू। पितहु मरन कर मोहि न सोकू।।

  2088. RCM 2.211.6Open verse →

    सुकृत सुजस भरि भुअन सुहाए। लछिमन राम सरिस सुत पाए।।

    अर्थ · Hindi

    सुकृत सुजस भरि भुअन सुहाए। लछिमन राम सरिस सुत पाए।।

  2089. RCM 2.211.7Open verse →

    राम बिरहँ तजि तनु छनभंगू। भूप सोच कर कवन प्रसंगू।।

    अर्थ · Hindi

    राम बिरहँ तजि तनु छनभंगू। भूप सोच कर कवन प्रसंगू।।

  2090. RCM 2.211.8Open verse →

    राम लखन सिय बिनु पग पनहीं। करि मुनि बेष फिरहिं बन बनही।।

    अर्थ · Hindi

    राम लखन सिय बिनु पग पनहीं। करि मुनि बेष फिरहिं बन बनही।।

  2091. RCM 2.211.9Open verse →

    अजिन बसन फल असन महि सयन डासि कुस पात।

    अर्थ · Hindi

    अजिन बसन फल असन महि सयन डासि कुस पात।

  2092. RCM 2.211.10Open verse →

    बसि तरु तर नित सहत हिम आतप बरषा बात।।211।।

    अर्थ · Hindi

    बसि तरु तर नित सहत हिम आतप बरषा बात।।211।।

  2093. RCM 2.212.1Open verse →

    एहि दुख दाहँ दहइ दिन छाती। भूख न बासर नीद न राती।।

    अर्थ · Hindi

    एहि दुख दाहँ दहइ दिन छाती। भूख न बासर नीद न राती।।

  2094. RCM 2.212.2Open verse →

    एहि कुरोग कर औषधु नाहीं। सोधेउँ सकल बिस्व मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि कुरोग कर औषधु नाहीं। सोधेउँ सकल बिस्व मन माहीं।।

  2095. RCM 2.212.3Open verse →

    मातु कुमत बढ़ई अघ मूला। तेहिं हमार हित कीन्ह बँसूला।।

    अर्थ · Hindi

    मातु कुमत बढ़ई अघ मूला। तेहिं हमार हित कीन्ह बँसूला।।

  2096. RCM 2.212.4Open verse →

    कलि कुकाठ कर कीन्ह कुजंत्रू। गाड़ि अवधि पढ़ि कठिन कुमंत्रु।।

    अर्थ · Hindi

    कलि कुकाठ कर कीन्ह कुजंत्रू। गाड़ि अवधि पढ़ि कठिन कुमंत्रु।।

  2097. RCM 2.212.5Open verse →

    मोहि लगि यहु कुठाटु तेहिं ठाटा। घालेसि सब जगु बारहबाटा।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि लगि यहु कुठाटु तेहिं ठाटा। घालेसि सब जगु बारहबाटा।।

  2098. RCM 2.212.6Open verse →

    मिटइ कुजोगु राम फिरि आएँ। बसइ अवध नहिं आन उपाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    मिटइ कुजोगु राम फिरि आएँ। बसइ अवध नहिं आन उपाएँ।।

  2099. RCM 2.212.7Open verse →

    भरत बचन सुनि मुनि सुखु पाई। सबहिं कीन्ह बहु भाँति बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन सुनि मुनि सुखु पाई। सबहिं कीन्ह बहु भाँति बड़ाई।।

  2100. RCM 2.212.8Open verse →

    तात करहु जनि सोचु बिसेषी। सब दुखु मिटहि राम पग देखी।।

    अर्थ · Hindi

    तात करहु जनि सोचु बिसेषी। सब दुखु मिटहि राम पग देखी।।

  2101. RCM 2.212.9Open verse →

    करि प्रबोध मुनिबर कहेउ अतिथि पेमप्रिय होहु।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रबोध मुनिबर कहेउ अतिथि पेमप्रिय होहु।

  2102. RCM 2.212.10Open verse →

    कंद मूल फल फूल हम देहिं लेहु करि छोहु।।212।।

    अर्थ · Hindi

    कंद मूल फल फूल हम देहिं लेहु करि छोहु।।212।।

  2103. RCM 2.213.1Open verse →

    सुनि मुनि बचन भरत हिंय सोचू। भयउ कुअवसर कठिन सँकोचू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन भरत हिंय सोचू। भयउ कुअवसर कठिन सँकोचू।।

  2104. RCM 2.213.2Open verse →

    जानि गरुइ गुर गिरा बहोरी। चरन बंदि बोले कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जानि गरुइ गुर गिरा बहोरी। चरन बंदि बोले कर जोरी।।

  2105. RCM 2.213.3Open verse →

    सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरम यहु नाथ हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    सिर धरि आयसु करिअ तुम्हारा। परम धरम यहु नाथ हमारा।।

  2106. RCM 2.213.4Open verse →

    भरत बचन मुनिबर मन भाए। सुचि सेवक सिष निकट बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन मुनिबर मन भाए। सुचि सेवक सिष निकट बोलाए।।

  2107. RCM 2.213.5Open verse →

    चाहिए कीन्ह भरत पहुनाई। कंद मूल फल आनहु जाई।।

    अर्थ · Hindi

    चाहिए कीन्ह भरत पहुनाई। कंद मूल फल आनहु जाई।।

  2108. RCM 2.213.6Open verse →

    भलेहीं नाथ कहि तिन्ह सिर नाए। प्रमुदित निज निज काज सिधाए।।

    अर्थ · Hindi

    भलेहीं नाथ कहि तिन्ह सिर नाए। प्रमुदित निज निज काज सिधाए।।

  2109. RCM 2.213.7Open verse →

    मुनिहि सोच पाहुन बड़ नेवता। तसि पूजा चाहिअ जस देवता।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिहि सोच पाहुन बड़ नेवता। तसि पूजा चाहिअ जस देवता।।

  2110. RCM 2.213.8Open verse →

    सुनि रिधि सिधि अनिमादिक आई। आयसु होइ सो करहिं गोसाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रिधि सिधि अनिमादिक आई। आयसु होइ सो करहिं गोसाई।।

  2111. RCM 2.213.9Open verse →

    राम बिरह ब्याकुल भरतु सानुज सहित समाज।

    अर्थ · Hindi

    राम बिरह ब्याकुल भरतु सानुज सहित समाज।

  2112. RCM 2.213.10Open verse →

    पहुनाई करि हरहु श्रम कहा मुदित मुनिराज।।213।।

    अर्थ · Hindi

    पहुनाई करि हरहु श्रम कहा मुदित मुनिराज।।213।।

  2113. RCM 2.214.1Open verse →

    रिधि सिधि सिर धरि मुनिबर बानी। बड़भागिनि आपुहि अनुमानी।।

    अर्थ · Hindi

    रिधि सिधि सिर धरि मुनिबर बानी। बड़भागिनि आपुहि अनुमानी।।

  2114. RCM 2.214.2Open verse →

    कहहिं परसपर सिधि समुदाई। अतुलित अतिथि राम लघु भाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं परसपर सिधि समुदाई। अतुलित अतिथि राम लघु भाई।।

  2115. RCM 2.214.3Open verse →

    मुनि पद बंदि करिअ सोइ आजू। होइ सुखी सब राज समाजू।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि पद बंदि करिअ सोइ आजू। होइ सुखी सब राज समाजू।।

  2116. RCM 2.214.4Open verse →

    अस कहि रचेउ रुचिर गृह नाना। जेहि बिलोकि बिलखाहिं बिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि रचेउ रुचिर गृह नाना। जेहि बिलोकि बिलखाहिं बिमाना।।

  2117. RCM 2.214.5Open verse →

    भोग बिभूति भूरि भरि राखे। देखत जिन्हहि अमर अभिलाषे।।

    अर्थ · Hindi

    भोग बिभूति भूरि भरि राखे। देखत जिन्हहि अमर अभिलाषे।।

  2118. RCM 2.214.6Open verse →

    दासीं दास साजु सब लीन्हें। जोगवत रहहिं मनहि मनु दीन्हें।।

    अर्थ · Hindi

    दासीं दास साजु सब लीन्हें। जोगवत रहहिं मनहि मनु दीन्हें।।

  2119. RCM 2.214.7Open verse →

    सब समाजु सजि सिधि पल माहीं। जे सुख सुरपुर सपनेहुँ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सब समाजु सजि सिधि पल माहीं। जे सुख सुरपुर सपनेहुँ नाहीं।।

  2120. RCM 2.214.8Open verse →

    प्रथमहिं बास दिए सब केही। सुंदर सुखद जथा रुचि जेही।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथमहिं बास दिए सब केही। सुंदर सुखद जथा रुचि जेही।।

  2121. RCM 2.214.9Open verse →

    बहुरि सपरिजन भरत कहुँ रिषि अस आयसु दीन्ह।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि सपरिजन भरत कहुँ रिषि अस आयसु दीन्ह।

  2122. RCM 2.214.10Open verse →

    बिधि बिसमय दायकु बिभव मुनिबर तपबल कीन्ह।।214।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि बिसमय दायकु बिभव मुनिबर तपबल कीन्ह।।214।।

  2123. RCM 2.215.1Open verse →

    मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका। सब लघु लगे लोकपति लोका।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका। सब लघु लगे लोकपति लोका।।

  2124. RCM 2.215.2Open verse →

    सुख समाजु नहिं जाइ बखानी। देखत बिरति बिसारहीं ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुख समाजु नहिं जाइ बखानी। देखत बिरति बिसारहीं ग्यानी।।

  2125. RCM 2.215.3Open verse →

    आसन सयन सुबसन बिताना। बन बाटिका बिहग मृग नाना।।

    अर्थ · Hindi

    आसन सयन सुबसन बिताना। बन बाटिका बिहग मृग नाना।।

  2126. RCM 2.215.4Open verse →

    सुरभि फूल फल अमिअ समाना। बिमल जलासय बिबिध बिधाना।

    अर्थ · Hindi

    सुरभि फूल फल अमिअ समाना। बिमल जलासय बिबिध बिधाना।

  2127. RCM 2.215.5Open verse →

    असन पान सुच अमिअ अमी से। देखि लोग सकुचात जमी से।।

    अर्थ · Hindi

    असन पान सुच अमिअ अमी से। देखि लोग सकुचात जमी से।।

  2128. RCM 2.215.6Open verse →

    सुर सुरभी सुरतरु सबही कें। लखि अभिलाषु सुरेस सची कें।।

    अर्थ · Hindi

    सुर सुरभी सुरतरु सबही कें। लखि अभिलाषु सुरेस सची कें।।

  2129. RCM 2.215.7Open verse →

    रितु बसंत बह त्रिबिध बयारी। सब कहँ सुलभ पदारथ चारी।।

    अर्थ · Hindi

    रितु बसंत बह त्रिबिध बयारी। सब कहँ सुलभ पदारथ चारी।।

  2130. RCM 2.215.8Open verse →

    स्त्रक चंदन बनितादिक भोगा। देखि हरष बिसमय बस लोगा।।

    अर्थ · Hindi

    स्त्रक चंदन बनितादिक भोगा। देखि हरष बिसमय बस लोगा।।

  2131. RCM 2.215.9Open verse →

    संपत चकई भरतु चक मुनि आयस खेलवार।।

    अर्थ · Hindi

    संपत चकई भरतु चक मुनि आयस खेलवार।।

  2132. RCM 2.215.10Open verse →

    तेहि निसि आश्रम पिंजराँ राखे भा भिनुसार।।215।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि निसि आश्रम पिंजराँ राखे भा भिनुसार।।215।।

  2133. RCM 2.216.1Open verse →

    कीन्ह निमज्जनु तीरथराजा। नाइ मुनिहि सिरु सहित समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह निमज्जनु तीरथराजा। नाइ मुनिहि सिरु सहित समाजा।।

  2134. RCM 2.216.2Open verse →

    रिषि आयसु असीस सिर राखी। करि दंडवत बिनय बहु भाषी।।

    अर्थ · Hindi

    रिषि आयसु असीस सिर राखी। करि दंडवत बिनय बहु भाषी।।

  2135. RCM 2.216.3Open verse →

    पथ गति कुसल साथ सब लीन्हे। चले चित्रकूटहिं चितु दीन्हें।।

    अर्थ · Hindi

    पथ गति कुसल साथ सब लीन्हे। चले चित्रकूटहिं चितु दीन्हें।।

  2136. RCM 2.216.4Open verse →

    रामसखा कर दीन्हें लागू। चलत देह धरि जनु अनुरागू।।

    अर्थ · Hindi

    रामसखा कर दीन्हें लागू। चलत देह धरि जनु अनुरागू।।

  2137. RCM 2.216.5Open verse →

    नहिं पद त्रान सीस नहिं छाया। पेमु नेमु ब्रतु धरमु अमाया।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं पद त्रान सीस नहिं छाया। पेमु नेमु ब्रतु धरमु अमाया।।

  2138. RCM 2.216.6Open verse →

    लखन राम सिय पंथ कहानी। पूँछत सखहि कहत मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    लखन राम सिय पंथ कहानी। पूँछत सखहि कहत मृदु बानी।।

  2139. RCM 2.216.7Open verse →

    राम बास थल बिटप बिलोकें। उर अनुराग रहत नहिं रोकैं।।

    अर्थ · Hindi

    राम बास थल बिटप बिलोकें। उर अनुराग रहत नहिं रोकैं।।

  2140. RCM 2.216.8Open verse →

    दैखि दसा सुर बरिसहिं फूला। भइ मृदु महि मगु मंगल मूला।।

    अर्थ · Hindi

    दैखि दसा सुर बरिसहिं फूला। भइ मृदु महि मगु मंगल मूला।।

  2141. RCM 2.216.9Open verse →

    किएँ जाहिं छाया जलद सुखद बहइ बर बात।

    अर्थ · Hindi

    किएँ जाहिं छाया जलद सुखद बहइ बर बात।

  2142. RCM 2.216.10Open verse →

    तस मगु भयउ न राम कहँ जस भा भरतहि जात।।216।।

    अर्थ · Hindi

    तस मगु भयउ न राम कहँ जस भा भरतहि जात।।216।।

  2143. RCM 2.217.1Open verse →

    जड़ चेतन मग जीव घनेरे। जे चितए प्रभु जिन्ह प्रभु हेरे।।

    अर्थ · Hindi

    जड़ चेतन मग जीव घनेरे। जे चितए प्रभु जिन्ह प्रभु हेरे।।

  2144. RCM 2.217.2Open verse →

    ते सब भए परम पद जोगू। भरत दरस मेटा भव रोगू।।

    अर्थ · Hindi

    ते सब भए परम पद जोगू। भरत दरस मेटा भव रोगू।।

  2145. RCM 2.217.3Open verse →

    यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं। सुमिरत जिनहि रामु मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    यह बड़ि बात भरत कइ नाहीं। सुमिरत जिनहि रामु मन माहीं।।

  2146. RCM 2.217.4Open verse →

    बारक राम कहत जग जेऊ। होत तरन तारन नर तेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बारक राम कहत जग जेऊ। होत तरन तारन नर तेऊ।।

  2147. RCM 2.217.5Open verse →

    भरतु राम प्रिय पुनि लघु भ्राता। कस न होइ मगु मंगलदाता।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु राम प्रिय पुनि लघु भ्राता। कस न होइ मगु मंगलदाता।।

  2148. RCM 2.217.6Open verse →

    सिद्ध साधु मुनिबर अस कहहीं। भरतहि निरखि हरषु हियँ लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सिद्ध साधु मुनिबर अस कहहीं। भरतहि निरखि हरषु हियँ लहहीं।।

  2149. RCM 2.217.7Open verse →

    देखि प्रभाउ सुरेसहि सोचू। जगु भल भलेहि पोच कहुँ पोचू।।

    अर्थ · Hindi

    देखि प्रभाउ सुरेसहि सोचू। जगु भल भलेहि पोच कहुँ पोचू।।

  2150. RCM 2.217.8Open verse →

    गुर सन कहेउ करिअ प्रभु सोई। रामहि भरतहि भेंट न होई।।

    अर्थ · Hindi

    गुर सन कहेउ करिअ प्रभु सोई। रामहि भरतहि भेंट न होई।।

  2151. RCM 2.217.9Open verse →

    रामु सँकोची प्रेम बस भरत सपेम पयोधि।

    अर्थ · Hindi

    रामु सँकोची प्रेम बस भरत सपेम पयोधि।

  2152. RCM 2.217.10Open verse →

    बनी बात बेगरन चहति करिअ जतनु छलु सोधि।।217।।

    अर्थ · Hindi

    बनी बात बेगरन चहति करिअ जतनु छलु सोधि।।217।।

  2153. RCM 2.218.1Open verse →

    बचन सुनत सुरगुरु मुसकाने। सहसनयन बिनु लोचन जाने।।

    अर्थ · Hindi

    बचन सुनत सुरगुरु मुसकाने। सहसनयन बिनु लोचन जाने।।

  2154. RCM 2.218.2Open verse →

    मायापति सेवक सन माया। करइ त उलटि परइ सुरराया।।

    अर्थ · Hindi

    मायापति सेवक सन माया। करइ त उलटि परइ सुरराया।।

  2155. RCM 2.218.3Open verse →

    तब किछु कीन्ह राम रुख जानी। अब कुचालि करि होइहि हानी।।

    अर्थ · Hindi

    तब किछु कीन्ह राम रुख जानी। अब कुचालि करि होइहि हानी।।

  2156. RCM 2.218.4Open verse →

    सुनु सुरेस रघुनाथ सुभाऊ। निज अपराध रिसाहिं न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सुरेस रघुनाथ सुभाऊ। निज अपराध रिसाहिं न काऊ।।

  2157. RCM 2.218.5Open verse →

    जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई।।

    अर्थ · Hindi

    जो अपराधु भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई।।

  2158. RCM 2.218.6Open verse →

    लोकहुँ बेद बिदित इतिहासा। यह महिमा जानहिं दुरबासा।।

    अर्थ · Hindi

    लोकहुँ बेद बिदित इतिहासा। यह महिमा जानहिं दुरबासा।।

  2159. RCM 2.218.7Open verse →

    भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सरिस को राम सनेही। जगु जप राम रामु जप जेही।।

  2160. RCM 2.218.8Open verse →

    मनहुँ न आनिअ अमरपति रघुबर भगत अकाजु।

    अर्थ · Hindi

    मनहुँ न आनिअ अमरपति रघुबर भगत अकाजु।

  2161. RCM 2.218.9Open verse →

    अजसु लोक परलोक दुख दिन दिन सोक समाजु।।218।।

    अर्थ · Hindi

    अजसु लोक परलोक दुख दिन दिन सोक समाजु।।218।।

  2162. RCM 2.219.1Open verse →

    सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सुरेस उपदेसु हमारा। रामहि सेवकु परम पिआरा।।

  2163. RCM 2.219.2Open verse →

    मानत सुखु सेवक सेवकाई। सेवक बैर बैरु अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    मानत सुखु सेवक सेवकाई। सेवक बैर बैरु अधिकाई।।

  2164. RCM 2.219.3Open verse →

    जद्यपि सम नहिं राग न रोषू। गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू।।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि सम नहिं राग न रोषू। गहहिं न पाप पूनु गुन दोषू।।

  2165. RCM 2.219.4Open verse →

    करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा।।

    अर्थ · Hindi

    करम प्रधान बिस्व करि राखा। जो जस करइ सो तस फलु चाखा।।

  2166. RCM 2.219.5Open verse →

    तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि करहिं सम बिषम बिहारा। भगत अभगत हृदय अनुसारा।।

  2167. RCM 2.219.6Open verse →

    अगुन अलेप अमान एकरस। रामु सगुन भए भगत पेम बस।।

    अर्थ · Hindi

    अगुन अलेप अमान एकरस। रामु सगुन भए भगत पेम बस।।

  2168. RCM 2.219.7Open verse →

    राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान साधु सुर साखी।।

    अर्थ · Hindi

    राम सदा सेवक रुचि राखी। बेद पुरान साधु सुर साखी।।

  2169. RCM 2.219.8Open verse →

    अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई। करहु भरत पद प्रीति सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    अस जियँ जानि तजहु कुटिलाई। करहु भरत पद प्रीति सुहाई।।

  2170. RCM 2.219.9Open verse →

    राम भगत परहित निरत पर दुख दुखी दयाल।

    अर्थ · Hindi

    राम भगत परहित निरत पर दुख दुखी दयाल।

  2171. RCM 2.219.10Open verse →

    भगत सिरोमनि भरत तें जनि डरपहु सुरपाल।।219।।

    अर्थ · Hindi

    भगत सिरोमनि भरत तें जनि डरपहु सुरपाल।।219।।

  2172. RCM 2.220.1Open verse →

    सत्यसंध प्रभु सुर हितकारी। भरत राम आयस अनुसारी।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यसंध प्रभु सुर हितकारी। भरत राम आयस अनुसारी।।

  2173. RCM 2.220.2Open verse →

    स्वारथ बिबस बिकल तुम्ह होहू। भरत दोसु नहिं राउर मोहू।।

    अर्थ · Hindi

    स्वारथ बिबस बिकल तुम्ह होहू। भरत दोसु नहिं राउर मोहू।।

  2174. RCM 2.220.3Open verse →

    सुनि सुरबर सुरगुर बर बानी। भा प्रमोदु मन मिटी गलानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुरबर सुरगुर बर बानी। भा प्रमोदु मन मिटी गलानी।।

  2175. RCM 2.220.4Open verse →

    बरषि प्रसून हरषि सुरराऊ। लगे सराहन भरत सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बरषि प्रसून हरषि सुरराऊ। लगे सराहन भरत सुभाऊ।।

  2176. RCM 2.220.5Open verse →

    एहि बिधि भरत चले मग जाहीं। दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि भरत चले मग जाहीं। दसा देखि मुनि सिद्ध सिहाहीं।।

  2177. RCM 2.220.6Open verse →

    जबहिं रामु कहि लेहिं उसासा। उमगत पेमु मनहँ चहु पासा।।

    अर्थ · Hindi

    जबहिं रामु कहि लेहिं उसासा। उमगत पेमु मनहँ चहु पासा।।

  2178. RCM 2.220.7Open verse →

    द्रवहिं बचन सुनि कुलिस पषाना। पुरजन पेमु न जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    द्रवहिं बचन सुनि कुलिस पषाना। पुरजन पेमु न जाइ बखाना।।

  2179. RCM 2.220.8Open verse →

    बीच बास करि जमुनहिं आए। निरखि नीरु लोचन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    बीच बास करि जमुनहिं आए। निरखि नीरु लोचन जल छाए।।

  2180. RCM 2.220.9Open verse →

    रघुबर बरन बिलोकि बर बारि समेत समाज।

    अर्थ · Hindi

    रघुबर बरन बिलोकि बर बारि समेत समाज।

  2181. RCM 2.220.10Open verse →

    होत मगन बारिधि बिरह चढ़े बिबेक जहाज।।220।।

    अर्थ · Hindi

    होत मगन बारिधि बिरह चढ़े बिबेक जहाज।।220।।

  2182. RCM 2.221.1Open verse →

    जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू।।

    अर्थ · Hindi

    जमुन तीर तेहि दिन करि बासू। भयउ समय सम सबहि सुपासू।।

  2183. RCM 2.221.2Open verse →

    रातहिं घाट घाट की तरनी। आईं अगनित जाहिं न बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    रातहिं घाट घाट की तरनी। आईं अगनित जाहिं न बरनी।।

  2184. RCM 2.221.3Open verse →

    प्रात पार भए एकहि खेंवाँ। तोषे रामसखा की सेवाँ।।

    अर्थ · Hindi

    प्रात पार भए एकहि खेंवाँ। तोषे रामसखा की सेवाँ।।

  2185. RCM 2.221.4Open verse →

    चले नहाइ नदिहि सिर नाई। साथ निषादनाथ दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले नहाइ नदिहि सिर नाई। साथ निषादनाथ दोउ भाई।।

  2186. RCM 2.221.5Open verse →

    आगें मुनिबर बाहन आछें। राजसमाज जाइ सबु पाछें।।

    अर्थ · Hindi

    आगें मुनिबर बाहन आछें। राजसमाज जाइ सबु पाछें।।

  2187. RCM 2.221.6Open verse →

    तेहिं पाछें दोउ बंधु पयादें। भूषन बसन बेष सुठि सादें।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं पाछें दोउ बंधु पयादें। भूषन बसन बेष सुठि सादें।।

  2188. RCM 2.221.7Open verse →

    सेवक सुह्रद सचिवसुत साथा। सुमिरत लखनु सीय रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सुह्रद सचिवसुत साथा। सुमिरत लखनु सीय रघुनाथा।।

  2189. RCM 2.221.8Open verse →

    जहँ जहँ राम बास बिश्रामा। तहँ तहँ करहिं सप्रेम प्रनामा।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जहँ राम बास बिश्रामा। तहँ तहँ करहिं सप्रेम प्रनामा।।

  2190. RCM 2.221.9Open verse →

    मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ।

    अर्थ · Hindi

    मगबासी नर नारि सुनि धाम काम तजि धाइ।

  2191. RCM 2.221.10Open verse →

    देखि सरूप सनेह सब मुदित जनम फलु पाइ।।221।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सरूप सनेह सब मुदित जनम फलु पाइ।।221।।

  2192. RCM 2.222.1Open verse →

    कहहिं सपेम एक एक पाहीं। रामु लखनु सखि होहिं कि नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं सपेम एक एक पाहीं। रामु लखनु सखि होहिं कि नाहीं।।

  2193. RCM 2.222.2Open verse →

    बय बपु बरन रूप सोइ आली। सीलु सनेहु सरिस सम चाली।।

    अर्थ · Hindi

    बय बपु बरन रूप सोइ आली। सीलु सनेहु सरिस सम चाली।।

  2194. RCM 2.222.3Open verse →

    बेषु न सो सखि सीय न संगा। आगें अनी चली चतुरंगा।।

    अर्थ · Hindi

    बेषु न सो सखि सीय न संगा। आगें अनी चली चतुरंगा।।

  2195. RCM 2.222.4Open verse →

    नहिं प्रसन्न मुख मानस खेदा। सखि संदेहु होइ एहिं भेदा।।

    अर्थ · Hindi

    नहिं प्रसन्न मुख मानस खेदा। सखि संदेहु होइ एहिं भेदा।।

  2196. RCM 2.222.5Open verse →

    तासु तरक तियगन मन मानी। कहहिं सकल तेहि सम न सयानी।।

    अर्थ · Hindi

    तासु तरक तियगन मन मानी। कहहिं सकल तेहि सम न सयानी।।

  2197. RCM 2.222.6Open verse →

    तेहि सराहि बानी फुरि पूजी। बोली मधुर बचन तिय दूजी।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि सराहि बानी फुरि पूजी। बोली मधुर बचन तिय दूजी।।

  2198. RCM 2.222.7Open verse →

    कहि सपेम सब कथाप्रसंगू। जेहि बिधि राम राज रस भंगू।।

    अर्थ · Hindi

    कहि सपेम सब कथाप्रसंगू। जेहि बिधि राम राज रस भंगू।।

  2199. RCM 2.222.8Open verse →

    भरतहि बहुरि सराहन लागी। सील सनेह सुभाय सुभागी।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि बहुरि सराहन लागी। सील सनेह सुभाय सुभागी।।

  2200. RCM 2.222.9Open verse →

    चलत पयादें खात फल पिता दीन्ह तजि राजु।

    अर्थ · Hindi

    चलत पयादें खात फल पिता दीन्ह तजि राजु।

  2201. RCM 2.222.10Open verse →

    जात मनावन रघुबरहि भरत सरिस को आजु।।222।।

    अर्थ · Hindi

    जात मनावन रघुबरहि भरत सरिस को आजु।।222।।

  2202. RCM 2.223.1Open verse →

    भायप भगति भरत आचरनू। कहत सुनत दुख दूषन हरनू।।

    अर्थ · Hindi

    भायप भगति भरत आचरनू। कहत सुनत दुख दूषन हरनू।।

  2203. RCM 2.223.2Open verse →

    जो कछु कहब थोर सखि सोई। राम बंधु अस काहे न होई।।

    अर्थ · Hindi

    जो कछु कहब थोर सखि सोई। राम बंधु अस काहे न होई।।

  2204. RCM 2.223.3Open verse →

    हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें।।

    अर्थ · Hindi

    हम सब सानुज भरतहि देखें। भइन्ह धन्य जुबती जन लेखें।।

  2205. RCM 2.223.4Open verse →

    सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं। कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि गुन देखि दसा पछिताहीं। कैकइ जननि जोगु सुतु नाहीं।।

  2206. RCM 2.223.5Open verse →

    कोउ कह दूषनु रानिहि नाहिन। बिधि सबु कीन्ह हमहि जो दाहिन।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह दूषनु रानिहि नाहिन। बिधि सबु कीन्ह हमहि जो दाहिन।।

  2207. RCM 2.223.6Open verse →

    कहँ हम लोक बेद बिधि हीनी। लघु तिय कुल करतूति मलीनी।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ हम लोक बेद बिधि हीनी। लघु तिय कुल करतूति मलीनी।।

  2208. RCM 2.223.7Open verse →

    बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा।।

    अर्थ · Hindi

    बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा।।

  2209. RCM 2.223.8Open verse →

    अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा। जनु मरुभूमि कलपतरु जामा।।

    अर्थ · Hindi

    अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा। जनु मरुभूमि कलपतरु जामा।।

  2210. RCM 2.223.9Open verse →

    भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु।

    अर्थ · Hindi

    भरत दरसु देखत खुलेउ मग लोगन्ह कर भागु।

  2211. RCM 2.223.10Open verse →

    जनु सिंघलबासिन्ह भयउ बिधि बस सुलभ प्रयागु।।223।।

    अर्थ · Hindi

    जनु सिंघलबासिन्ह भयउ बिधि बस सुलभ प्रयागु।।223।।

  2212. RCM 2.224.1Open verse →

    निज गुन सहित राम गुन गाथा। सुनत जाहिं सुमिरत रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    निज गुन सहित राम गुन गाथा। सुनत जाहिं सुमिरत रघुनाथा।।

  2213. RCM 2.224.2Open verse →

    तीरथ मुनि आश्रम सुरधामा। निरखि निमज्जहिं करहिं प्रनामा।।

    अर्थ · Hindi

    तीरथ मुनि आश्रम सुरधामा। निरखि निमज्जहिं करहिं प्रनामा।।

  2214. RCM 2.224.3Open verse →

    मनहीं मन मागहिं बरु एहू। सीय राम पद पदुम सनेहू।।

    अर्थ · Hindi

    मनहीं मन मागहिं बरु एहू। सीय राम पद पदुम सनेहू।।

  2215. RCM 2.224.4Open verse →

    मिलहिं किरात कोल बनबासी। बैखानस बटु जती उदासी।।

    अर्थ · Hindi

    मिलहिं किरात कोल बनबासी। बैखानस बटु जती उदासी।।

  2216. RCM 2.224.5Open verse →

    करि प्रनामु पूँछहिं जेहिं तेही। केहि बन लखनु रामु बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु पूँछहिं जेहिं तेही। केहि बन लखनु रामु बैदेही।।

  2217. RCM 2.224.6Open verse →

    ते प्रभु समाचार सब कहहीं। भरतहि देखि जनम फलु लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    ते प्रभु समाचार सब कहहीं। भरतहि देखि जनम फलु लहहीं।।

  2218. RCM 2.224.7Open verse →

    जे जन कहहिं कुसल हम देखे। ते प्रिय राम लखन सम लेखे।।

    अर्थ · Hindi

    जे जन कहहिं कुसल हम देखे। ते प्रिय राम लखन सम लेखे।।

  2219. RCM 2.224.8Open verse →

    एहि बिधि बूझत सबहि सुबानी। सुनत राम बनबास कहानी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि बूझत सबहि सुबानी। सुनत राम बनबास कहानी।।

  2220. RCM 2.224.9Open verse →

    तेहि बासर बसि प्रातहीं चले सुमिरि रघुनाथ।

    अर्थ · Hindi

    तेहि बासर बसि प्रातहीं चले सुमिरि रघुनाथ।

  2221. RCM 2.224.10Open verse →

    राम दरस की लालसा भरत सरिस सब साथ।।224।।

    अर्थ · Hindi

    राम दरस की लालसा भरत सरिस सब साथ।।224।।

  2222. RCM 2.225.1Open verse →

    मंगल सगुन होहिं सब काहू। फरकहिं सुखद बिलोचन बाहू।।

    अर्थ · Hindi

    मंगल सगुन होहिं सब काहू। फरकहिं सुखद बिलोचन बाहू।।

  2223. RCM 2.225.2Open verse →

    भरतहि सहित समाज उछाहू। मिलिहहिं रामु मिटहि दुख दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि सहित समाज उछाहू। मिलिहहिं रामु मिटहि दुख दाहू।।

  2224. RCM 2.225.3Open verse →

    करत मनोरथ जस जियँ जाके। जाहिं सनेह सुराँ सब छाके।।

    अर्थ · Hindi

    करत मनोरथ जस जियँ जाके। जाहिं सनेह सुराँ सब छाके।।

  2225. RCM 2.225.4Open verse →

    सिथिल अंग पग मग डगि डोलहिं। बिहबल बचन पेम बस बोलहिं।।

    अर्थ · Hindi

    सिथिल अंग पग मग डगि डोलहिं। बिहबल बचन पेम बस बोलहिं।।

  2226. RCM 2.225.5Open verse →

    रामसखाँ तेहि समय देखावा। सैल सिरोमनि सहज सुहावा।।

    अर्थ · Hindi

    रामसखाँ तेहि समय देखावा। सैल सिरोमनि सहज सुहावा।।

  2227. RCM 2.225.6Open verse →

    जासु समीप सरित पय तीरा। सीय समेत बसहिं दोउ बीरा।।

    अर्थ · Hindi

    जासु समीप सरित पय तीरा। सीय समेत बसहिं दोउ बीरा।।

  2228. RCM 2.225.7Open verse →

    देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि करहिं सब दंड प्रनामा। कहि जय जानकि जीवन रामा।।

  2229. RCM 2.225.8Open verse →

    प्रेम मगन अस राज समाजू। जनु फिरि अवध चले रघुराजू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम मगन अस राज समाजू। जनु फिरि अवध चले रघुराजू।।

  2230. RCM 2.225.9Open verse →

    भरत प्रेमु तेहि समय जस तस कहि सकइ न सेषु।

    अर्थ · Hindi

    भरत प्रेमु तेहि समय जस तस कहि सकइ न सेषु।

  2231. RCM 2.225.10Open verse →

    कबिहिं अगम जिमि ब्रह्मसुखु अह मम मलिन जनेषु।।225।

    अर्थ · Hindi

    कबिहिं अगम जिमि ब्रह्मसुखु अह मम मलिन जनेषु।।225।

  2232. RCM 2.226.1Open verse →

    सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सनेह सिथिल रघुबर कें। गए कोस दुइ दिनकर ढरकें।।

  2233. RCM 2.226.2Open verse →

    जलु थलु देखि बसे निसि बीतें। कीन्ह गवन रघुनाथ पिरीतें।।

    अर्थ · Hindi

    जलु थलु देखि बसे निसि बीतें। कीन्ह गवन रघुनाथ पिरीतें।।

  2234. RCM 2.226.3Open verse →

    उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा।।

    अर्थ · Hindi

    उहाँ रामु रजनी अवसेषा। जागे सीयँ सपन अस देखा।।

  2235. RCM 2.226.4Open verse →

    सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए।।

    अर्थ · Hindi

    सहित समाज भरत जनु आए। नाथ बियोग ताप तन ताए।।

  2236. RCM 2.226.5Open verse →

    सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी।।

    अर्थ · Hindi

    सकल मलिन मन दीन दुखारी। देखीं सासु आन अनुहारी।।

  2237. RCM 2.226.6Open verse →

    सुनि सिय सपन भरे जल लोचन। भए सोचबस सोच बिमोचन।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सिय सपन भरे जल लोचन। भए सोचबस सोच बिमोचन।।

  2238. RCM 2.226.7Open verse →

    लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई।।

    अर्थ · Hindi

    लखन सपन यह नीक न होई। कठिन कुचाह सुनाइहि कोई।।

  2239. RCM 2.226.8Open verse →

    अस कहि बंधु समेत नहाने। पूजि पुरारि साधु सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि बंधु समेत नहाने। पूजि पुरारि साधु सनमाने।।

  2240. RCM 2.227.1Open verse →

    बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू।।

  2241. RCM 2.227.2Open verse →

    एक आइ अस कहा बहोरी। सेन संग चतुरंग न थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    एक आइ अस कहा बहोरी। सेन संग चतुरंग न थोरी।।

  2242. RCM 2.227.3Open verse →

    सो सुनि रामहि भा अति सोचू। इत पितु बच इत बंधु सकोचू।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुनि रामहि भा अति सोचू। इत पितु बच इत बंधु सकोचू।।

  2243. RCM 2.227.4Open verse →

    भरत सुभाउ समुझि मन माहीं। प्रभु चित हित थिति पावत नाही।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सुभाउ समुझि मन माहीं। प्रभु चित हित थिति पावत नाही।।

  2244. RCM 2.227.5Open verse →

    समाधान तब भा यह जाने। भरतु कहे महुँ साधु सयाने।।

    अर्थ · Hindi

    समाधान तब भा यह जाने। भरतु कहे महुँ साधु सयाने।।

  2245. RCM 2.227.6Open verse →

    लखन लखेउ प्रभु हृदयँ खभारू। कहत समय सम नीति बिचारू।।

    अर्थ · Hindi

    लखन लखेउ प्रभु हृदयँ खभारू। कहत समय सम नीति बिचारू।।

  2246. RCM 2.227.7Open verse →

    बिनु पूँछ कछु कहउँ गोसाईं। सेवकु समयँ न ढीठ ढिठाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु पूँछ कछु कहउँ गोसाईं। सेवकु समयँ न ढीठ ढिठाई।।

  2247. RCM 2.227.8Open verse →

    तुम्ह सर्बग्य सिरोमनि स्वामी। आपनि समुझि कहउँ अनुगामी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सर्बग्य सिरोमनि स्वामी। आपनि समुझि कहउँ अनुगामी।।

  2248. RCM 2.227.9Open verse →

    नाथ सुह्रद सुठि सरल चित सील सनेह निधान।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ सुह्रद सुठि सरल चित सील सनेह निधान।।

  2249. RCM 2.227.10Open verse →

    सब पर प्रीति प्रतीति जियँ जानिअ आपु समान।।227।।

    अर्थ · Hindi

    सब पर प्रीति प्रतीति जियँ जानिअ आपु समान।।227।।

  2250. RCM 2.228.1Open verse →

    बिषई जीव पाइ प्रभुताई। मूढ़ मोह बस होहिं जनाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिषई जीव पाइ प्रभुताई। मूढ़ मोह बस होहिं जनाई।।

  2251. RCM 2.228.2Open verse →

    भरतु नीति रत साधु सुजाना। प्रभु पद प्रेम सकल जगु जाना।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु नीति रत साधु सुजाना। प्रभु पद प्रेम सकल जगु जाना।।

  2252. RCM 2.228.3Open verse →

    तेऊ आजु राम पदु पाई। चले धरम मरजाद मेटाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेऊ आजु राम पदु पाई। चले धरम मरजाद मेटाई।।

  2253. RCM 2.228.4Open verse →

    कुटिल कुबंध कुअवसरु ताकी। जानि राम बनवास एकाकी।।

    अर्थ · Hindi

    कुटिल कुबंध कुअवसरु ताकी। जानि राम बनवास एकाकी।।

  2254. RCM 2.228.5Open verse →

    करि कुमंत्रु मन साजि समाजू। आए करै अकंटक राजू।।

    अर्थ · Hindi

    करि कुमंत्रु मन साजि समाजू। आए करै अकंटक राजू।।

  2255. RCM 2.228.6Open verse →

    कोटि प्रकार कलपि कुटलाई। आए दल बटोरि दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    कोटि प्रकार कलपि कुटलाई। आए दल बटोरि दोउ भाई।।

  2256. RCM 2.228.7Open verse →

    जौं जियँ होति न कपट कुचाली। केहि सोहाति रथ बाजि गजाली।।

    अर्थ · Hindi

    जौं जियँ होति न कपट कुचाली। केहि सोहाति रथ बाजि गजाली।।

  2257. RCM 2.228.8Open verse →

    भरतहि दोसु देइ को जाएँ। जग बौराइ राज पदु पाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि दोसु देइ को जाएँ। जग बौराइ राज पदु पाएँ।।

  2258. RCM 2.228.9Open verse →

    ससि गुर तिय गामी नघुषु चढ़ेउ भूमिसुर जान।

    अर्थ · Hindi

    ससि गुर तिय गामी नघुषु चढ़ेउ भूमिसुर जान।

  2259. RCM 2.228.10Open verse →

    लोक बेद तें बिमुख भा अधम न बेन समान।।228।।

    अर्थ · Hindi

    लोक बेद तें बिमुख भा अधम न बेन समान।।228।।

  2260. RCM 2.229.1Open verse →

    सहसबाहु सुरनाथु त्रिसंकू। केहि न राजमद दीन्ह कलंकू।।

    अर्थ · Hindi

    सहसबाहु सुरनाथु त्रिसंकू। केहि न राजमद दीन्ह कलंकू।।

  2261. RCM 2.229.2Open verse →

    भरत कीन्ह यह उचित उपाऊ। रिपु रिन रंच न राखब काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भरत कीन्ह यह उचित उपाऊ। रिपु रिन रंच न राखब काऊ।।

  2262. RCM 2.229.3Open verse →

    एक कीन्हि नहिं भरत भलाई। निदरे रामु जानि असहाई।।

    अर्थ · Hindi

    एक कीन्हि नहिं भरत भलाई। निदरे रामु जानि असहाई।।

  2263. RCM 2.229.4Open verse →

    समुझि परिहि सोउ आजु बिसेषी। समर सरोष राम मुखु पेखी।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि परिहि सोउ आजु बिसेषी। समर सरोष राम मुखु पेखी।।

  2264. RCM 2.229.5Open verse →

    एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला।।

    अर्थ · Hindi

    एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला।।

  2265. RCM 2.229.6Open verse →

    प्रभु पद बंदि सीस रज राखी। बोले सत्य सहज बलु भाषी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद बंदि सीस रज राखी। बोले सत्य सहज बलु भाषी।।

  2266. RCM 2.229.7Open verse →

    अनुचित नाथ न मानब मोरा। भरत हमहि उपचार न थोरा।।

    अर्थ · Hindi

    अनुचित नाथ न मानब मोरा। भरत हमहि उपचार न थोरा।।

  2267. RCM 2.229.8Open verse →

    कहँ लगि सहिअ रहिअ मनु मारें। नाथ साथ धनु हाथ हमारें।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ लगि सहिअ रहिअ मनु मारें। नाथ साथ धनु हाथ हमारें।।

  2268. RCM 2.229.9Open verse →

    छत्रि जाति रघुकुल जनमु राम अनुग जगु जान।

    अर्थ · Hindi

    छत्रि जाति रघुकुल जनमु राम अनुग जगु जान।

  2269. RCM 2.229.10Open verse →

    लातहुँ मारें चढ़ति सिर नीच को धूरि समान।।229।।

    अर्थ · Hindi

    लातहुँ मारें चढ़ति सिर नीच को धूरि समान।।229।।

  2270. RCM 2.230.1Open verse →

    उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा।।

    अर्थ · Hindi

    उठि कर जोरि रजायसु मागा। मनहुँ बीर रस सोवत जागा।।

  2271. RCM 2.230.2Open verse →

    बाँधि जटा सिर कसि कटि भाथा। साजि सरासनु सायकु हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    बाँधि जटा सिर कसि कटि भाथा। साजि सरासनु सायकु हाथा।।

  2272. RCM 2.230.3Open verse →

    आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    आजु राम सेवक जसु लेऊँ। भरतहि समर सिखावन देऊँ।।

  2273. RCM 2.230.4Open verse →

    राम निरादर कर फलु पाई। सोवहुँ समर सेज दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम निरादर कर फलु पाई। सोवहुँ समर सेज दोउ भाई।।

  2274. RCM 2.230.5Open verse →

    आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू।।

    अर्थ · Hindi

    आइ बना भल सकल समाजू। प्रगट करउँ रिस पाछिल आजू।।

  2275. RCM 2.230.6Open verse →

    जिमि करि निकर दलइ मृगराजू। लेइ लपेटि लवा जिमि बाजू।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि करि निकर दलइ मृगराजू। लेइ लपेटि लवा जिमि बाजू।।

  2276. RCM 2.230.7Open verse →

    तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता।।

    अर्थ · Hindi

    तैसेहिं भरतहि सेन समेता। सानुज निदरि निपातउँ खेता।।

  2277. RCM 2.230.8Open verse →

    जौं सहाय कर संकरु आई। तौ मारउँ रन राम दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं सहाय कर संकरु आई। तौ मारउँ रन राम दोहाई।।

  2278. RCM 2.230.9Open verse →

    अति सरोष माखे लखनु लखि सुनि सपथ प्रवान।

    अर्थ · Hindi

    अति सरोष माखे लखनु लखि सुनि सपथ प्रवान।

  2279. RCM 2.230.10Open verse →

    सभय लोक सब लोकपति चाहत भभरि भगान।।230।।

    अर्थ · Hindi

    सभय लोक सब लोकपति चाहत भभरि भगान।।230।।

  2280. RCM 2.231.1Open verse →

    जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    जगु भय मगन गगन भइ बानी। लखन बाहुबलु बिपुल बखानी।।

  2281. RCM 2.231.2Open verse →

    तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा।।

    अर्थ · Hindi

    तात प्रताप प्रभाउ तुम्हारा। को कहि सकइ को जाननिहारा।।

  2282. RCM 2.231.3Open verse →

    अनुचित उचित काजु किछु होऊ। समुझि करिअ भल कह सबु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अनुचित उचित काजु किछु होऊ। समुझि करिअ भल कह सबु कोऊ।।

  2283. RCM 2.231.4Open verse →

    सहसा करि पाछैं पछिताहीं। कहहिं बेद बुध ते बुध नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सहसा करि पाछैं पछिताहीं। कहहिं बेद बुध ते बुध नाहीं।।

  2284. RCM 2.231.5Open verse →

    सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुर बचन लखन सकुचाने। राम सीयँ सादर सनमाने।।

  2285. RCM 2.231.6Open verse →

    कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई।।

    अर्थ · Hindi

    कही तात तुम्ह नीति सुहाई। सब तें कठिन राजमदु भाई।।

  2286. RCM 2.231.7Open verse →

    जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई।।

    अर्थ · Hindi

    जो अचवँत नृप मातहिं तेई। नाहिन साधुसभा जेहिं सेई।।

  2287. RCM 2.231.8Open verse →

    सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु लखन भल भरत सरीसा। बिधि प्रपंच महँ सुना न दीसा।।

  2288. RCM 2.231.9Open verse →

    भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि होइ न राजमदु बिधि हरि हर पद पाइ।।

  2289. RCM 2.231.10Open verse →

    कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ।।231।।

    अर्थ · Hindi

    कबहुँ कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिनसाइ।।231।।

  2290. RCM 2.232.1Open verse →

    तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई।।

    अर्थ · Hindi

    तिमिरु तरुन तरनिहि मकु गिलई। गगनु मगन मकु मेघहिं मिलई।।

  2291. RCM 2.232.2Open verse →

    गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी।।

    अर्थ · Hindi

    गोपद जल बूड़हिं घटजोनी। सहज छमा बरु छाड़ै छोनी।।

  2292. RCM 2.232.3Open verse →

    मसक फूँक मकु मेरु उड़ाई। होइ न नृपमदु भरतहि भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मसक फूँक मकु मेरु उड़ाई। होइ न नृपमदु भरतहि भाई।।

  2293. RCM 2.232.4Open verse →

    लखन तुम्हार सपथ पितु आना। सुचि सुबंधु नहिं भरत समाना।।

    अर्थ · Hindi

    लखन तुम्हार सपथ पितु आना। सुचि सुबंधु नहिं भरत समाना।।

  2294. RCM 2.232.5Open verse →

    सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    सगुन खीरु अवगुन जलु ताता। मिलइ रचइ परपंचु बिधाता।।

  2295. RCM 2.232.6Open verse →

    भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु हंस रबिबंस तड़ागा। जनमि कीन्ह गुन दोष बिभागा।।

  2296. RCM 2.232.7Open verse →

    गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी।।

    अर्थ · Hindi

    गहि गुन पय तजि अवगुन बारी। निज जस जगत कीन्हि उजिआरी।।

  2297. RCM 2.232.8Open verse →

    कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    कहत भरत गुन सीलु सुभाऊ। पेम पयोधि मगन रघुराऊ।।

  2298. RCM 2.232.9Open verse →

    सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रघुबर बानी बिबुध देखि भरत पर हेतु।

  2299. RCM 2.232.10Open verse →

    सकल सराहत राम सो प्रभु को कृपानिकेतु।।232।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सराहत राम सो प्रभु को कृपानिकेतु।।232।।

  2300. RCM 2.233.1Open verse →

    जौं न होत जग जनम भरत को। सकल धरम धुर धरनि धरत को।।

    अर्थ · Hindi

    जौं न होत जग जनम भरत को। सकल धरम धुर धरनि धरत को।।

  2301. RCM 2.233.2Open verse →

    कबि कुल अगम भरत गुन गाथा। को जानइ तुम्ह बिनु रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कबि कुल अगम भरत गुन गाथा। को जानइ तुम्ह बिनु रघुनाथा।।

  2302. RCM 2.233.3Open verse →

    लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी।।

  2303. RCM 2.233.4Open verse →

    इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए।।

  2304. RCM 2.233.5Open verse →

    सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा।।

    अर्थ · Hindi

    सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा।।

  2305. RCM 2.233.6Open verse →

    चले भरतु जहँ सिय रघुराई। साथ निषादनाथु लघु भाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले भरतु जहँ सिय रघुराई। साथ निषादनाथु लघु भाई।।

  2306. RCM 2.233.7Open verse →

    समुझि मातु करतब सकुचाहीं। करत कुतरक कोटि मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि मातु करतब सकुचाहीं। करत कुतरक कोटि मन माहीं।।

  2307. RCM 2.233.8Open verse →

    रामु लखनु सिय सुनि मम नाऊँ। उठि जनि अनत जाहिं तजि ठाऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    रामु लखनु सिय सुनि मम नाऊँ। उठि जनि अनत जाहिं तजि ठाऊँ।।

  2308. RCM 2.233.9Open verse →

    मातु मते महुँ मानि मोहि जो कछु करहिं सो थोर।

    अर्थ · Hindi

    मातु मते महुँ मानि मोहि जो कछु करहिं सो थोर।

  2309. RCM 2.233.10Open verse →

    अघ अवगुन छमि आदरहिं समुझि आपनी ओर।।233।।

    अर्थ · Hindi

    अघ अवगुन छमि आदरहिं समुझि आपनी ओर।।233।।

  2310. RCM 2.234.1Open verse →

    जौं परिहरहिं मलिन मनु जानी। जौ सनमानहिं सेवकु मानी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं परिहरहिं मलिन मनु जानी। जौ सनमानहिं सेवकु मानी।।

  2311. RCM 2.234.2Open verse →

    मोरें सरन रामहि की पनही। राम सुस्वामि दोसु सब जनही।।

    अर्थ · Hindi

    मोरें सरन रामहि की पनही। राम सुस्वामि दोसु सब जनही।।

  2312. RCM 2.234.3Open verse →

    जग जस भाजन चातक मीना। नेम पेम निज निपुन नबीना।।

    अर्थ · Hindi

    जग जस भाजन चातक मीना। नेम पेम निज निपुन नबीना।।

  2313. RCM 2.234.4Open verse →

    अस मन गुनत चले मग जाता। सकुच सनेहँ सिथिल सब गाता।।

    अर्थ · Hindi

    अस मन गुनत चले मग जाता। सकुच सनेहँ सिथिल सब गाता।।

  2314. RCM 2.234.5Open verse →

    फेरत मनहुँ मातु कृत खोरी। चलत भगति बल धीरज धोरी।।

    अर्थ · Hindi

    फेरत मनहुँ मातु कृत खोरी। चलत भगति बल धीरज धोरी।।

  2315. RCM 2.234.6Open verse →

    जब समुझत रघुनाथ सुभाऊ। तब पथ परत उताइल पाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जब समुझत रघुनाथ सुभाऊ। तब पथ परत उताइल पाऊ।।

  2316. RCM 2.234.7Open verse →

    भरत दसा तेहि अवसर कैसी। जल प्रबाहँ जल अलि गति जैसी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत दसा तेहि अवसर कैसी। जल प्रबाहँ जल अलि गति जैसी।।

  2317. RCM 2.234.8Open verse →

    देखि भरत कर सोचु सनेहू। भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    देखि भरत कर सोचु सनेहू। भा निषाद तेहि समयँ बिदेहू।।

  2318. RCM 2.234.9Open verse →

    लगे होन मंगल सगुन सुनि गुनि कहत निषादु।

    अर्थ · Hindi

    लगे होन मंगल सगुन सुनि गुनि कहत निषादु।

  2319. RCM 2.234.10Open verse →

    मिटिहि सोचु होइहि हरषु पुनि परिनाम बिषादु।।234।।

    अर्थ · Hindi

    मिटिहि सोचु होइहि हरषु पुनि परिनाम बिषादु।।234।।

  2320. RCM 2.235.1Open verse →

    सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने।।

  2321. RCM 2.235.2Open verse →

    भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू।।

  2322. RCM 2.235.3Open verse →

    ईति भीति जनु प्रजा दुखारी। त्रिबिध ताप पीड़ित ग्रह मारी।।

    अर्थ · Hindi

    ईति भीति जनु प्रजा दुखारी। त्रिबिध ताप पीड़ित ग्रह मारी।।

  2323. RCM 2.235.4Open verse →

    जाइ सुराज सुदेस सुखारी। होहिं भरत गति तेहि अनुहारी।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ सुराज सुदेस सुखारी। होहिं भरत गति तेहि अनुहारी।।

  2324. RCM 2.235.5Open verse →

    राम बास बन संपति भ्राजा। सुखी प्रजा जनु पाइ सुराजा।।

    अर्थ · Hindi

    राम बास बन संपति भ्राजा। सुखी प्रजा जनु पाइ सुराजा।।

  2325. RCM 2.235.6Open verse →

    सचिव बिरागु बिबेकु नरेसू। बिपिन सुहावन पावन देसू।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव बिरागु बिबेकु नरेसू। बिपिन सुहावन पावन देसू।।

  2326. RCM 2.235.7Open verse →

    भट जम नियम सैल रजधानी। सांति सुमति सुचि सुंदर रानी।।

    अर्थ · Hindi

    भट जम नियम सैल रजधानी। सांति सुमति सुचि सुंदर रानी।।

  2327. RCM 2.235.8Open verse →

    सकल अंग संपन्न सुराऊ। राम चरन आश्रित चित चाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सकल अंग संपन्न सुराऊ। राम चरन आश्रित चित चाऊ।।

  2328. RCM 2.235.9Open verse →

    जीति मोह महिपालु दल सहित बिबेक भुआलु।

    अर्थ · Hindi

    जीति मोह महिपालु दल सहित बिबेक भुआलु।

  2329. RCM 2.235.10Open verse →

    करत अकंटक राजु पुरँ सुख संपदा सुकालु।।235।।

    अर्थ · Hindi

    करत अकंटक राजु पुरँ सुख संपदा सुकालु।।235।।

  2330. RCM 2.236.1Open verse →

    बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे।।

    अर्थ · Hindi

    बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे।।

  2331. RCM 2.236.2Open verse →

    बिपुल बिचित्र बिहग मृग नाना। प्रजा समाजु न जाइ बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिपुल बिचित्र बिहग मृग नाना। प्रजा समाजु न जाइ बखाना।।

  2332. RCM 2.236.3Open verse →

    खगहा करि हरि बाघ बराहा। देखि महिष बृष साजु सराहा।।

    अर्थ · Hindi

    खगहा करि हरि बाघ बराहा। देखि महिष बृष साजु सराहा।।

  2333. RCM 2.236.4Open verse →

    बयरु बिहाइ चरहिं एक संगा। जहँ तहँ मनहुँ सेन चतुरंगा।।

    अर्थ · Hindi

    बयरु बिहाइ चरहिं एक संगा। जहँ तहँ मनहुँ सेन चतुरंगा।।

  2334. RCM 2.236.5Open verse →

    झरना झरहिं मत्त गज गाजहिं। मनहुँ निसान बिबिधि बिधि बाजहिं।।

    अर्थ · Hindi

    झरना झरहिं मत्त गज गाजहिं। मनहुँ निसान बिबिधि बिधि बाजहिं।।

  2335. RCM 2.236.6Open verse →

    चक चकोर चातक सुक पिक गन। कूजत मंजु मराल मुदित मन।।

    अर्थ · Hindi

    चक चकोर चातक सुक पिक गन। कूजत मंजु मराल मुदित मन।।

  2336. RCM 2.236.7Open verse →

    अलिगन गावत नाचत मोरा। जनु सुराज मंगल चहु ओरा।।

    अर्थ · Hindi

    अलिगन गावत नाचत मोरा। जनु सुराज मंगल चहु ओरा।।

  2337. RCM 2.236.8Open verse →

    बेलि बिटप तृन सफल सफूला। सब समाजु मुद मंगल मूला।।

    अर्थ · Hindi

    बेलि बिटप तृन सफल सफूला। सब समाजु मुद मंगल मूला।।

  2338. RCM 2.236.9Open verse →

    राम सैल सोभा निरखि भरत हृदयँ अति पेमु।

    अर्थ · Hindi

    राम सैल सोभा निरखि भरत हृदयँ अति पेमु।

  2339. RCM 2.236.10Open verse →

    तापस तप फलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु।।236।।

    अर्थ · Hindi

    तापस तप फलु पाइ जिमि सुखी सिरानें नेमु।।236।।

  2340. RCM 2.237.1Open verse →

    तब केवट ऊँचें चढ़ि धाई। कहेउ भरत सन भुजा उठाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब केवट ऊँचें चढ़ि धाई। कहेउ भरत सन भुजा उठाई।।

  2341. RCM 2.237.2Open verse →

    नाथ देखिअहिं बिटप बिसाला। पाकरि जंबु रसाल तमाला।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ देखिअहिं बिटप बिसाला। पाकरि जंबु रसाल तमाला।।

  2342. RCM 2.237.3Open verse →

    जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह तरुबरन्ह मध्य बटु सोहा। मंजु बिसाल देखि मनु मोहा।।

  2343. RCM 2.237.4Open verse →

    नील सघन पल्ल्व फल लाला। अबिरल छाहँ सुखद सब काला।।

    अर्थ · Hindi

    नील सघन पल्ल्व फल लाला। अबिरल छाहँ सुखद सब काला।।

  2344. RCM 2.237.5Open verse →

    मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी। बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी।।

    अर्थ · Hindi

    मानहुँ तिमिर अरुनमय रासी। बिरची बिधि सँकेलि सुषमा सी।।

  2345. RCM 2.237.6Open verse →

    ए तरु सरित समीप गोसाँई। रघुबर परनकुटी जहँ छाई।।

    अर्थ · Hindi

    ए तरु सरित समीप गोसाँई। रघुबर परनकुटी जहँ छाई।।

  2346. RCM 2.237.7Open verse →

    तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए। कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए।।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी तरुबर बिबिध सुहाए। कहुँ कहुँ सियँ कहुँ लखन लगाए।।

  2347. RCM 2.237.8Open verse →

    बट छायाँ बेदिका बनाई। सियँ निज पानि सरोज सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    बट छायाँ बेदिका बनाई। सियँ निज पानि सरोज सुहाई।।

  2348. RCM 2.237.9Open verse →

    जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान।

    अर्थ · Hindi

    जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान।

  2349. RCM 2.237.10Open verse →

    सुनहिं कथा इतिहास सब आगम निगम पुरान।।237।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहिं कथा इतिहास सब आगम निगम पुरान।।237।।

  2350. RCM 2.238.1Open verse →

    सखा बचन सुनि बिटप निहारी। उमगे भरत बिलोचन बारी।।

    अर्थ · Hindi

    सखा बचन सुनि बिटप निहारी। उमगे भरत बिलोचन बारी।।

  2351. RCM 2.238.2Open verse →

    करत प्रनाम चले दोउ भाई। कहत प्रीति सारद सकुचाई।।

    अर्थ · Hindi

    करत प्रनाम चले दोउ भाई। कहत प्रीति सारद सकुचाई।।

  2352. RCM 2.238.3Open verse →

    हरषहिं निरखि राम पद अंका। मानहुँ पारसु पायउ रंका।।

    अर्थ · Hindi

    हरषहिं निरखि राम पद अंका। मानहुँ पारसु पायउ रंका।।

  2353. RCM 2.238.4Open verse →

    रज सिर धरि हियँ नयनन्हि लावहिं। रघुबर मिलन सरिस सुख पावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    रज सिर धरि हियँ नयनन्हि लावहिं। रघुबर मिलन सरिस सुख पावहिं।।

  2354. RCM 2.238.5Open verse →

    देखि भरत गति अकथ अतीवा। प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि भरत गति अकथ अतीवा। प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा।।

  2355. RCM 2.238.6Open verse →

    सखहि सनेह बिबस मग भूला। कहि सुपंथ सुर बरषहिं फूला।।

    अर्थ · Hindi

    सखहि सनेह बिबस मग भूला। कहि सुपंथ सुर बरषहिं फूला।।

  2356. RCM 2.238.7Open verse →

    निरखि सिद्ध साधक अनुरागे। सहज सनेहु सराहन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    निरखि सिद्ध साधक अनुरागे। सहज सनेहु सराहन लागे।।

  2357. RCM 2.238.8Open verse →

    होत न भूतल भाउ भरत को। अचर सचर चर अचर करत को।।

    अर्थ · Hindi

    होत न भूतल भाउ भरत को। अचर सचर चर अचर करत को।।

  2358. RCM 2.238.9Open verse →

    पेम अमिअ मंदरु बिरहु भरतु पयोधि गँभीर।

    अर्थ · Hindi

    पेम अमिअ मंदरु बिरहु भरतु पयोधि गँभीर।

  2359. RCM 2.238.10Open verse →

    मथि प्रगटेउ सुर साधु हित कृपासिंधु रघुबीर।।238।।

    अर्थ · Hindi

    मथि प्रगटेउ सुर साधु हित कृपासिंधु रघुबीर।।238।।

  2360. RCM 2.239.1Open verse →

    सखा समेत मनोहर जोटा। लखेउ न लखन सघन बन ओटा।।

    अर्थ · Hindi

    सखा समेत मनोहर जोटा। लखेउ न लखन सघन बन ओटा।।

  2361. RCM 2.239.2Open verse →

    भरत दीख प्रभु आश्रमु पावन। सकल सुमंगल सदनु सुहावन।।

    अर्थ · Hindi

    भरत दीख प्रभु आश्रमु पावन। सकल सुमंगल सदनु सुहावन।।

  2362. RCM 2.239.3Open verse →

    करत प्रबेस मिटे दुख दावा। जनु जोगीं परमारथु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    करत प्रबेस मिटे दुख दावा। जनु जोगीं परमारथु पावा।।

  2363. RCM 2.239.4Open verse →

    देखे भरत लखन प्रभु आगे। पूँछे बचन कहत अनुरागे।।

    अर्थ · Hindi

    देखे भरत लखन प्रभु आगे। पूँछे बचन कहत अनुरागे।।

  2364. RCM 2.239.5Open verse →

    सीस जटा कटि मुनि पट बाँधें। तून कसें कर सरु धनु काँधें।।

    अर्थ · Hindi

    सीस जटा कटि मुनि पट बाँधें। तून कसें कर सरु धनु काँधें।।

  2365. RCM 2.239.6Open verse →

    बेदी पर मुनि साधु समाजू। सीय सहित राजत रघुराजू।।

    अर्थ · Hindi

    बेदी पर मुनि साधु समाजू। सीय सहित राजत रघुराजू।।

  2366. RCM 2.239.7Open verse →

    बलकल बसन जटिल तनु स्यामा। जनु मुनि बेष कीन्ह रति कामा।।

    अर्थ · Hindi

    बलकल बसन जटिल तनु स्यामा। जनु मुनि बेष कीन्ह रति कामा।।

  2367. RCM 2.239.8Open verse →

    कर कमलनि धनु सायकु फेरत। जिय की जरनि हरत हँसि हेरत।।

    अर्थ · Hindi

    कर कमलनि धनु सायकु फेरत। जिय की जरनि हरत हँसि हेरत।।

  2368. RCM 2.239.9Open verse →

    लसत मंजु मुनि मंडली मध्य सीय रघुचंदु।

    अर्थ · Hindi

    लसत मंजु मुनि मंडली मध्य सीय रघुचंदु।

  2369. RCM 2.239.10Open verse →

    ग्यान सभाँ जनु तनु धरे भगति सच्चिदानंदु।।239।।

    अर्थ · Hindi

    ग्यान सभाँ जनु तनु धरे भगति सच्चिदानंदु।।239।।

  2370. RCM 2.240.1Open verse →

    सानुज सखा समेत मगन मन। बिसरे हरष सोक सुख दुख गन।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज सखा समेत मगन मन। बिसरे हरष सोक सुख दुख गन।।

  2371. RCM 2.240.2Open verse →

    पाहि नाथ कहि पाहि गोसाई। भूतल परे लकुट की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    पाहि नाथ कहि पाहि गोसाई। भूतल परे लकुट की नाई।।

  2372. RCM 2.240.3Open verse →

    बचन सपेम लखन पहिचाने। करत प्रनामु भरत जियँ जाने।।

    अर्थ · Hindi

    बचन सपेम लखन पहिचाने। करत प्रनामु भरत जियँ जाने।।

  2373. RCM 2.240.4Open verse →

    बंधु सनेह सरस एहि ओरा। उत साहिब सेवा बस जोरा।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु सनेह सरस एहि ओरा। उत साहिब सेवा बस जोरा।।

  2374. RCM 2.240.5Open verse →

    मिलि न जाइ नहिं गुदरत बनई। सुकबि लखन मन की गति भनई।।

    अर्थ · Hindi

    मिलि न जाइ नहिं गुदरत बनई। सुकबि लखन मन की गति भनई।।

  2375. RCM 2.240.6Open verse →

    रहे राखि सेवा पर भारू। चढ़ी चंग जनु खैंच खेलारू।।

    अर्थ · Hindi

    रहे राखि सेवा पर भारू। चढ़ी चंग जनु खैंच खेलारू।।

  2376. RCM 2.240.7Open verse →

    कहत सप्रेम नाइ महि माथा। भरत प्रनाम करत रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सप्रेम नाइ महि माथा। भरत प्रनाम करत रघुनाथा।।

  2377. RCM 2.240.8Open verse →

    उठे रामु सुनि पेम अधीरा। कहुँ पट कहुँ निषंग धनु तीरा।।

    अर्थ · Hindi

    उठे रामु सुनि पेम अधीरा। कहुँ पट कहुँ निषंग धनु तीरा।।

  2378. RCM 2.240.9Open verse →

    बरबस लिए उठाइ उर लाए कृपानिधान।

    अर्थ · Hindi

    बरबस लिए उठाइ उर लाए कृपानिधान।

  2379. RCM 2.240.10Open verse →

    भरत राम की मिलनि लखि बिसरे सबहि अपान।।240।।

    अर्थ · Hindi

    भरत राम की मिलनि लखि बिसरे सबहि अपान।।240।।

  2380. RCM 2.241.1Open verse →

    मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी।।

    अर्थ · Hindi

    मिलनि प्रीति किमि जाइ बखानी। कबिकुल अगम करम मन बानी।।

  2381. RCM 2.241.2Open verse →

    परम पेम पूरन दोउ भाई। मन बुधि चित अहमिति बिसराई।।

    अर्थ · Hindi

    परम पेम पूरन दोउ भाई। मन बुधि चित अहमिति बिसराई।।

  2382. RCM 2.241.3Open verse →

    कहहु सुपेम प्रगट को करई। केहि छाया कबि मति अनुसरई।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु सुपेम प्रगट को करई। केहि छाया कबि मति अनुसरई।।

  2383. RCM 2.241.4Open verse →

    कबिहि अरथ आखर बलु साँचा। अनुहरि ताल गतिहि नटु नाचा।।

    अर्थ · Hindi

    कबिहि अरथ आखर बलु साँचा। अनुहरि ताल गतिहि नटु नाचा।।

  2384. RCM 2.241.5Open verse →

    अगम सनेह भरत रघुबर को। जहँ न जाइ मनु बिधि हरि हर को।।

    अर्थ · Hindi

    अगम सनेह भरत रघुबर को। जहँ न जाइ मनु बिधि हरि हर को।।

  2385. RCM 2.241.6Open verse →

    सो मैं कुमति कहौं केहि भाँती। बाज सुराग कि गाँडर ताँती।।

    अर्थ · Hindi

    सो मैं कुमति कहौं केहि भाँती। बाज सुराग कि गाँडर ताँती।।

  2386. RCM 2.241.7Open verse →

    मिलनि बिलोकि भरत रघुबर की। सुरगन सभय धकधकी धरकी।।

    अर्थ · Hindi

    मिलनि बिलोकि भरत रघुबर की। सुरगन सभय धकधकी धरकी।।

  2387. RCM 2.241.8Open verse →

    समुझाए सुरगुरु जड़ जागे। बरषि प्रसून प्रसंसन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    समुझाए सुरगुरु जड़ जागे। बरषि प्रसून प्रसंसन लागे।।

  2388. RCM 2.241.9Open verse →

    मिलि सपेम रिपुसूदनहि केवटु भेंटेउ राम।

    अर्थ · Hindi

    मिलि सपेम रिपुसूदनहि केवटु भेंटेउ राम।

  2389. RCM 2.241.10Open verse →

    भूरि भायँ भेंटे भरत लछिमन करत प्रनाम।।241।।

    अर्थ · Hindi

    भूरि भायँ भेंटे भरत लछिमन करत प्रनाम।।241।।

  2390. RCM 2.242.1Open verse →

    भेंटेउ लखन ललकि लघु भाई। बहुरि निषादु लीन्ह उर लाई।।

    अर्थ · Hindi

    भेंटेउ लखन ललकि लघु भाई। बहुरि निषादु लीन्ह उर लाई।।

  2391. RCM 2.242.2Open verse →

    पुनि मुनिगन दुहुँ भाइन्ह बंदे। अभिमत आसिष पाइ अनंदे।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि मुनिगन दुहुँ भाइन्ह बंदे। अभिमत आसिष पाइ अनंदे।।

  2392. RCM 2.242.3Open verse →

    सानुज भरत उमगि अनुरागा। धरि सिर सिय पद पदुम परागा।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज भरत उमगि अनुरागा। धरि सिर सिय पद पदुम परागा।।

  2393. RCM 2.242.4Open verse →

    पुनि पुनि करत प्रनाम उठाए। सिर कर कमल परसि बैठाए।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि करत प्रनाम उठाए। सिर कर कमल परसि बैठाए।।

  2394. RCM 2.242.5Open verse →

    सीयँ असीस दीन्हि मन माहीं। मगन सनेहँ देह सुधि नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सीयँ असीस दीन्हि मन माहीं। मगन सनेहँ देह सुधि नाहीं।।

  2395. RCM 2.242.6Open verse →

    सब बिधि सानुकूल लखि सीता। भे निसोच उर अपडर बीता।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि सानुकूल लखि सीता। भे निसोच उर अपडर बीता।।

  2396. RCM 2.242.7Open verse →

    कोउ किछु कहइ न कोउ किछु पूँछा। प्रेम भरा मन निज गति छूँछा।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ किछु कहइ न कोउ किछु पूँछा। प्रेम भरा मन निज गति छूँछा।।

  2397. RCM 2.242.8Open verse →

    तेहि अवसर केवटु धीरजु धरि। जोरि पानि बिनवत प्रनामु करि।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर केवटु धीरजु धरि। जोरि पानि बिनवत प्रनामु करि।।

  2398. RCM 2.242.9Open verse →

    नाथ साथ मुनिनाथ के मातु सकल पुर लोग।

    अर्थ · Hindi

    नाथ साथ मुनिनाथ के मातु सकल पुर लोग।

  2399. RCM 2.242.10Open verse →

    सेवक सेनप सचिव सब आए बिकल बियोग।।242।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सेनप सचिव सब आए बिकल बियोग।।242।।

  2400. RCM 2.243.1Open verse →

    सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू।।

    अर्थ · Hindi

    सीलसिंधु सुनि गुर आगवनू। सिय समीप राखे रिपुदवनू।।

  2401. RCM 2.243.2Open verse →

    चले सबेग रामु तेहि काला। धीर धरम धुर दीनदयाला।।

    अर्थ · Hindi

    चले सबेग रामु तेहि काला। धीर धरम धुर दीनदयाला।।

  2402. RCM 2.243.3Open verse →

    गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे।।

    अर्थ · Hindi

    गुरहि देखि सानुज अनुरागे। दंड प्रनाम करन प्रभु लागे।।

  2403. RCM 2.243.4Open verse →

    मुनिबर धाइ लिए उर लाई। प्रेम उमगि भेंटे दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिबर धाइ लिए उर लाई। प्रेम उमगि भेंटे दोउ भाई।।

  2404. RCM 2.243.5Open verse →

    प्रेम पुलकि केवट कहि नामू। कीन्ह दूरि तें दंड प्रनामू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम पुलकि केवट कहि नामू। कीन्ह दूरि तें दंड प्रनामू।।

  2405. RCM 2.243.6Open verse →

    रामसखा रिषि बरबस भेंटा। जनु महि लुठत सनेह समेटा।।

    अर्थ · Hindi

    रामसखा रिषि बरबस भेंटा। जनु महि लुठत सनेह समेटा।।

  2406. RCM 2.243.7Open verse →

    रघुपति भगति सुमंगल मूला। नभ सराहि सुर बरिसहिं फूला।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति भगति सुमंगल मूला। नभ सराहि सुर बरिसहिं फूला।।

  2407. RCM 2.243.8Open verse →

    एहि सम निपट नीच कोउ नाहीं। बड़ बसिष्ठ सम को जग माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि सम निपट नीच कोउ नाहीं। बड़ बसिष्ठ सम को जग माहीं।।

  2408. RCM 2.243.9Open verse →

    जेहि लखि लखनहु तें अधिक मिले मुदित मुनिराउ।

    अर्थ · Hindi

    जेहि लखि लखनहु तें अधिक मिले मुदित मुनिराउ।

  2409. RCM 2.243.10Open verse →

    सो सीतापति भजन को प्रगट प्रताप प्रभाउ।।243।।

    अर्थ · Hindi

    सो सीतापति भजन को प्रगट प्रताप प्रभाउ।।243।।

  2410. RCM 2.244.1Open verse →

    आरत लोग राम सबु जाना। करुनाकर सुजान भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    आरत लोग राम सबु जाना। करुनाकर सुजान भगवाना।।

  2411. RCM 2.244.2Open verse →

    जो जेहि भायँ रहा अभिलाषी। तेहि तेहि कै तसि तसि रुख राखी।।

    अर्थ · Hindi

    जो जेहि भायँ रहा अभिलाषी। तेहि तेहि कै तसि तसि रुख राखी।।

  2412. RCM 2.244.3Open verse →

    सानुज मिलि पल महु सब काहू। कीन्ह दूरि दुखु दारुन दाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज मिलि पल महु सब काहू। कीन्ह दूरि दुखु दारुन दाहू।।

  2413. RCM 2.244.4Open verse →

    यह बड़ि बातँ राम कै नाहीं। जिमि घट कोटि एक रबि छाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    यह बड़ि बातँ राम कै नाहीं। जिमि घट कोटि एक रबि छाहीं।।

  2414. RCM 2.244.5Open verse →

    मिलि केवटिहि उमगि अनुरागा। पुरजन सकल सराहहिं भागा।।

    अर्थ · Hindi

    मिलि केवटिहि उमगि अनुरागा। पुरजन सकल सराहहिं भागा।।

  2415. RCM 2.244.6Open verse →

    देखीं राम दुखित महतारीं। जनु सुबेलि अवलीं हिम मारीं।।

    अर्थ · Hindi

    देखीं राम दुखित महतारीं। जनु सुबेलि अवलीं हिम मारीं।।

  2416. RCM 2.244.7Open verse →

    प्रथम राम भेंटी कैकेई। सरल सुभायँ भगति मति भेई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम राम भेंटी कैकेई। सरल सुभायँ भगति मति भेई।।

  2417. RCM 2.244.8Open verse →

    पग परि कीन्ह प्रबोधु बहोरी। काल करम बिधि सिर धरि खोरी।।

    अर्थ · Hindi

    पग परि कीन्ह प्रबोधु बहोरी। काल करम बिधि सिर धरि खोरी।।

  2418. RCM 2.244.9Open verse →

    भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु।।

    अर्थ · Hindi

    भेटीं रघुबर मातु सब करि प्रबोधु परितोषु।।

  2419. RCM 2.244.10Open verse →

    अंब ईस आधीन जगु काहु न देइअ दोषु।।244।।

    अर्थ · Hindi

    अंब ईस आधीन जगु काहु न देइअ दोषु।।244।।

  2420. RCM 2.245.1Open verse →

    गुरतिय पद बंदे दुहु भाई। सहित बिप्रतिय जे सँग आई।।

    अर्थ · Hindi

    गुरतिय पद बंदे दुहु भाई। सहित बिप्रतिय जे सँग आई।।

  2421. RCM 2.245.2Open verse →

    गंग गौरि सम सब सनमानीं।।देहिं असीस मुदित मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    गंग गौरि सम सब सनमानीं।।देहिं असीस मुदित मृदु बानी।।

  2422. RCM 2.245.3Open verse →

    गहि पद लगे सुमित्रा अंका। जनु भेटीं संपति अति रंका।।

    अर्थ · Hindi

    गहि पद लगे सुमित्रा अंका। जनु भेटीं संपति अति रंका।।

  2423. RCM 2.245.4Open verse →

    पुनि जननि चरननि दोउ भ्राता। परे पेम ब्याकुल सब गाता।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि जननि चरननि दोउ भ्राता। परे पेम ब्याकुल सब गाता।।

  2424. RCM 2.245.5Open verse →

    अति अनुराग अंब उर लाए। नयन सनेह सलिल अन्हवाए।।

    अर्थ · Hindi

    अति अनुराग अंब उर लाए। नयन सनेह सलिल अन्हवाए।।

  2425. RCM 2.245.6Open verse →

    तेहि अवसर कर हरष बिषादू। किमि कबि कहै मूक जिमि स्वादू।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर कर हरष बिषादू। किमि कबि कहै मूक जिमि स्वादू।।

  2426. RCM 2.245.7Open verse →

    मिलि जननहि सानुज रघुराऊ। गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मिलि जननहि सानुज रघुराऊ। गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ।।

  2427. RCM 2.245.8Open verse →

    पुरजन पाइ मुनीस नियोगू। जल थल तकि तकि उतरेउ लोगू।।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन पाइ मुनीस नियोगू। जल थल तकि तकि उतरेउ लोगू।।

  2428. RCM 2.245.9Open verse →

    महिसुर मंत्री मातु गुर गने लोग लिए साथ।।

    अर्थ · Hindi

    महिसुर मंत्री मातु गुर गने लोग लिए साथ।।

  2429. RCM 2.245.10Open verse →

    पावन आश्रम गवनु किय भरत लखन रघुनाथ।।245।।

    अर्थ · Hindi

    पावन आश्रम गवनु किय भरत लखन रघुनाथ।।245।।

  2430. RCM 2.246.1Open verse →

    सीय आइ मुनिबर पग लागी। उचित असीस लही मन मागी।।

    अर्थ · Hindi

    सीय आइ मुनिबर पग लागी। उचित असीस लही मन मागी।।

  2431. RCM 2.246.2Open verse →

    गुरपतिनिहि मुनितियन्ह समेता। मिली पेमु कहि जाइ न जेता।।

    अर्थ · Hindi

    गुरपतिनिहि मुनितियन्ह समेता। मिली पेमु कहि जाइ न जेता।।

  2432. RCM 2.246.3Open verse →

    बंदि बंदि पग सिय सबही के। आसिरबचन लहे प्रिय जी के।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि बंदि पग सिय सबही के। आसिरबचन लहे प्रिय जी के।।

  2433. RCM 2.246.4Open verse →

    सासु सकल जब सीयँ निहारीं। मूदे नयन सहमि सुकुमारीं।।

    अर्थ · Hindi

    सासु सकल जब सीयँ निहारीं। मूदे नयन सहमि सुकुमारीं।।

  2434. RCM 2.246.5Open verse →

    परीं बधिक बस मनहुँ मरालीं। काह कीन्ह करतार कुचालीं।।

    अर्थ · Hindi

    परीं बधिक बस मनहुँ मरालीं। काह कीन्ह करतार कुचालीं।।

  2435. RCM 2.246.6Open verse →

    तिन्ह सिय निरखि निपट दुखु पावा। सो सबु सहिअ जो दैउ सहावा।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह सिय निरखि निपट दुखु पावा। सो सबु सहिअ जो दैउ सहावा।।

  2436. RCM 2.246.7Open verse →

    जनकसुता तब उर धरि धीरा। नील नलिन लोयन भरि नीरा।।

    अर्थ · Hindi

    जनकसुता तब उर धरि धीरा। नील नलिन लोयन भरि नीरा।।

  2437. RCM 2.246.8Open verse →

    मिली सकल सासुन्ह सिय जाई। तेहि अवसर करुना महि छाई।।

    अर्थ · Hindi

    मिली सकल सासुन्ह सिय जाई। तेहि अवसर करुना महि छाई।।

  2438. RCM 2.246.9Open verse →

    लागि लागि पग सबनि सिय भेंटति अति अनुराग।।

    अर्थ · Hindi

    लागि लागि पग सबनि सिय भेंटति अति अनुराग।।

  2439. RCM 2.246.10Open verse →

    हृदयँ असीसहिं पेम बस रहिअहु भरी सोहाग।।246।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ असीसहिं पेम बस रहिअहु भरी सोहाग।।246।।

  2440. RCM 2.247.1Open verse →

    बिकल सनेहँ सीय सब रानीं। बैठन सबहि कहेउ गुर ग्यानीं।।

    अर्थ · Hindi

    बिकल सनेहँ सीय सब रानीं। बैठन सबहि कहेउ गुर ग्यानीं।।

  2441. RCM 2.247.2Open verse →

    कहि जग गति मायिक मुनिनाथा। कहे कछुक परमारथ गाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कहि जग गति मायिक मुनिनाथा। कहे कछुक परमारथ गाथा।।

  2442. RCM 2.247.3Open verse →

    नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा। सुनि रघुनाथ दुसह दुखु पावा।।

    अर्थ · Hindi

    नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा। सुनि रघुनाथ दुसह दुखु पावा।।

  2443. RCM 2.247.4Open verse →

    मरन हेतु निज नेहु बिचारी। भे अति बिकल धीर धुर धारी।।

    अर्थ · Hindi

    मरन हेतु निज नेहु बिचारी। भे अति बिकल धीर धुर धारी।।

  2444. RCM 2.247.5Open verse →

    कुलिस कठोर सुनत कटु बानी। बिलपत लखन सीय सब रानी।।

    अर्थ · Hindi

    कुलिस कठोर सुनत कटु बानी। बिलपत लखन सीय सब रानी।।

  2445. RCM 2.247.6Open verse →

    सोक बिकल अति सकल समाजू। मानहुँ राजु अकाजेउ आजू।।

    अर्थ · Hindi

    सोक बिकल अति सकल समाजू। मानहुँ राजु अकाजेउ आजू।।

  2446. RCM 2.247.7Open verse →

    मुनिबर बहुरि राम समुझाए। सहित समाज सुसरित नहाए।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिबर बहुरि राम समुझाए। सहित समाज सुसरित नहाए।।

  2447. RCM 2.247.8Open verse →

    ब्रतु निरंबु तेहि दिन प्रभु कीन्हा। मुनिहु कहें जलु काहुँ न लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रतु निरंबु तेहि दिन प्रभु कीन्हा। मुनिहु कहें जलु काहुँ न लीन्हा।।

  2448. RCM 2.247.9Open verse →

    भोरु भएँ रघुनंदनहि जो मुनि आयसु दीन्ह।।

    अर्थ · Hindi

    भोरु भएँ रघुनंदनहि जो मुनि आयसु दीन्ह।।

  2449. RCM 2.247.10Open verse →

    श्रद्धा भगति समेत प्रभु सो सबु सादरु कीन्ह।।247।।

    अर्थ · Hindi

    श्रद्धा भगति समेत प्रभु सो सबु सादरु कीन्ह।।247।।

  2450. RCM 2.248.1Open verse →

    करि पितु क्रिया बेद जसि बरनी। भे पुनीत पातक तम तरनी।।

    अर्थ · Hindi

    करि पितु क्रिया बेद जसि बरनी। भे पुनीत पातक तम तरनी।।

  2451. RCM 2.248.2Open verse →

    जासु नाम पावक अघ तूला। सुमिरत सकल सुमंगल मूला।।

    अर्थ · Hindi

    जासु नाम पावक अघ तूला। सुमिरत सकल सुमंगल मूला।।

  2452. RCM 2.248.3Open verse →

    सुद्ध सो भयउ साधु संमत अस। तीरथ आवाहन सुरसरि जस।।

    अर्थ · Hindi

    सुद्ध सो भयउ साधु संमत अस। तीरथ आवाहन सुरसरि जस।।

  2453. RCM 2.248.4Open verse →

    सुद्ध भएँ दुइ बासर बीते। बोले गुर सन राम पिरीते।।

    अर्थ · Hindi

    सुद्ध भएँ दुइ बासर बीते। बोले गुर सन राम पिरीते।।

  2454. RCM 2.248.5Open verse →

    नाथ लोग सब निपट दुखारी। कंद मूल फल अंबु अहारी।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ लोग सब निपट दुखारी। कंद मूल फल अंबु अहारी।।

  2455. RCM 2.248.6Open verse →

    सानुज भरतु सचिव सब माता। देखि मोहि पल जिमि जुग जाता।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज भरतु सचिव सब माता। देखि मोहि पल जिमि जुग जाता।।

  2456. RCM 2.248.7Open verse →

    सब समेत पुर धारिअ पाऊ। आपु इहाँ अमरावति राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सब समेत पुर धारिअ पाऊ। आपु इहाँ अमरावति राऊ।।

  2457. RCM 2.248.8Open verse →

    बहुत कहेउँ सब कियउँ ढिठाई। उचित होइ तस करिअ गोसाँई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुत कहेउँ सब कियउँ ढिठाई। उचित होइ तस करिअ गोसाँई।।

  2458. RCM 2.248.9Open verse →

    धर्म सेतु करुनायतन कस न कहहु अस राम।

    अर्थ · Hindi

    धर्म सेतु करुनायतन कस न कहहु अस राम।

  2459. RCM 2.248.10Open verse →

    लोग दुखित दिन दुइ दरस देखि लहहुँ बिश्राम।।248।।

    अर्थ · Hindi

    लोग दुखित दिन दुइ दरस देखि लहहुँ बिश्राम।।248।।

  2460. RCM 2.249.1Open verse →

    राम बचन सुनि सभय समाजू। जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू।।

    अर्थ · Hindi

    राम बचन सुनि सभय समाजू। जनु जलनिधि महुँ बिकल जहाजू।।

  2461. RCM 2.249.2Open verse →

    सुनि गुर गिरा सुमंगल मूला। भयउ मनहुँ मारुत अनुकुला।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि गुर गिरा सुमंगल मूला। भयउ मनहुँ मारुत अनुकुला।।

  2462. RCM 2.249.3Open verse →

    पावन पयँ तिहुँ काल नहाहीं। जो बिलोकि अंघ ओघ नसाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पावन पयँ तिहुँ काल नहाहीं। जो बिलोकि अंघ ओघ नसाहीं।।

  2463. RCM 2.249.4Open verse →

    मंगलमूरति लोचन भरि भरि। निरखहिं हरषि दंडवत करि करि।।

    अर्थ · Hindi

    मंगलमूरति लोचन भरि भरि। निरखहिं हरषि दंडवत करि करि।।

  2464. RCM 2.249.5Open verse →

    राम सैल बन देखन जाहीं। जहँ सुख सकल सकल दुख नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम सैल बन देखन जाहीं। जहँ सुख सकल सकल दुख नाहीं।।

  2465. RCM 2.249.6Open verse →

    झरना झरिहिं सुधासम बारी। त्रिबिध तापहर त्रिबिध बयारी।।

    अर्थ · Hindi

    झरना झरिहिं सुधासम बारी। त्रिबिध तापहर त्रिबिध बयारी।।

  2466. RCM 2.249.7Open verse →

    बिटप बेलि तृन अगनित जाती। फल प्रसून पल्लव बहु भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    बिटप बेलि तृन अगनित जाती। फल प्रसून पल्लव बहु भाँती।।

  2467. RCM 2.249.8Open verse →

    सुंदर सिला सुखद तरु छाहीं। जाइ बरनि बन छबि केहि पाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुंदर सिला सुखद तरु छाहीं। जाइ बरनि बन छबि केहि पाहीं।।

  2468. RCM 2.249.9Open verse →

    सरनि सरोरुह जल बिहग कूजत गुंजत भृंग।

    अर्थ · Hindi

    सरनि सरोरुह जल बिहग कूजत गुंजत भृंग।

  2469. RCM 2.249.10Open verse →

    बैर बिगत बिहरत बिपिन मृग बिहंग बहुरंग।।249।।

    अर्थ · Hindi

    बैर बिगत बिहरत बिपिन मृग बिहंग बहुरंग।।249।।

  2470. RCM 2.250.1Open verse →

    कोल किरात भिल्ल बनबासी। मधु सुचि सुंदर स्वादु सुधा सी।।

    अर्थ · Hindi

    कोल किरात भिल्ल बनबासी। मधु सुचि सुंदर स्वादु सुधा सी।।

  2471. RCM 2.250.2Open verse →

    भरि भरि परन पुटीं रचि रुरी। कंद मूल फल अंकुर जूरी।।

    अर्थ · Hindi

    भरि भरि परन पुटीं रचि रुरी। कंद मूल फल अंकुर जूरी।।

  2472. RCM 2.250.3Open verse →

    सबहि देहिं करि बिनय प्रनामा। कहि कहि स्वाद भेद गुन नामा।।

    अर्थ · Hindi

    सबहि देहिं करि बिनय प्रनामा। कहि कहि स्वाद भेद गुन नामा।।

  2473. RCM 2.250.4Open verse →

    देहिं लोग बहु मोल न लेहीं। फेरत राम दोहाई देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    देहिं लोग बहु मोल न लेहीं। फेरत राम दोहाई देहीं।।

  2474. RCM 2.250.5Open verse →

    कहहिं सनेह मगन मृदु बानी। मानत साधु पेम पहिचानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं सनेह मगन मृदु बानी। मानत साधु पेम पहिचानी।।

  2475. RCM 2.250.6Open verse →

    तुम्ह सुकृती हम नीच निषादा। पावा दरसनु राम प्रसादा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सुकृती हम नीच निषादा। पावा दरसनु राम प्रसादा।।

  2476. RCM 2.250.7Open verse →

    हमहि अगम अति दरसु तुम्हारा। जस मरु धरनि देवधुनि धारा।।

    अर्थ · Hindi

    हमहि अगम अति दरसु तुम्हारा। जस मरु धरनि देवधुनि धारा।।

  2477. RCM 2.250.8Open verse →

    राम कृपाल निषाद नेवाजा। परिजन प्रजउ चहिअ जस राजा।।

    अर्थ · Hindi

    राम कृपाल निषाद नेवाजा। परिजन प्रजउ चहिअ जस राजा।।

  2478. RCM 2.250.9Open verse →

    यह जिंयँ जानि सँकोचु तजि करिअ छोहु लखि नेहु।

    अर्थ · Hindi

    यह जिंयँ जानि सँकोचु तजि करिअ छोहु लखि नेहु।

  2479. RCM 2.250.10Open verse →

    हमहि कृतारथ करन लगि फल तृन अंकुर लेहु।।250।।

    अर्थ · Hindi

    हमहि कृतारथ करन लगि फल तृन अंकुर लेहु।।250।।

  2480. RCM 2.251.1Open verse →

    तुम्ह प्रिय पाहुने बन पगु धारे। सेवा जोगु न भाग हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह प्रिय पाहुने बन पगु धारे। सेवा जोगु न भाग हमारे।।

  2481. RCM 2.251.2Open verse →

    देब काह हम तुम्हहि गोसाँई। ईधनु पात किरात मिताई।।

    अर्थ · Hindi

    देब काह हम तुम्हहि गोसाँई। ईधनु पात किरात मिताई।।

  2482. RCM 2.251.3Open verse →

    यह हमारि अति बड़ि सेवकाई। लेहि न बासन बसन चोराई।।

    अर्थ · Hindi

    यह हमारि अति बड़ि सेवकाई। लेहि न बासन बसन चोराई।।

  2483. RCM 2.251.4Open verse →

    हम जड़ जीव जीव गन घाती। कुटिल कुचाली कुमति कुजाती।।

    अर्थ · Hindi

    हम जड़ जीव जीव गन घाती। कुटिल कुचाली कुमति कुजाती।।

  2484. RCM 2.251.5Open verse →

    पाप करत निसि बासर जाहीं। नहिं पट कटि नहि पेट अघाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पाप करत निसि बासर जाहीं। नहिं पट कटि नहि पेट अघाहीं।।

  2485. RCM 2.251.6Open verse →

    सपोनेहुँ धरम बुद्धि कस काऊ। यह रघुनंदन दरस प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सपोनेहुँ धरम बुद्धि कस काऊ। यह रघुनंदन दरस प्रभाऊ।।

  2486. RCM 2.251.7Open verse →

    जब तें प्रभु पद पदुम निहारे। मिटे दुसह दुख दोष हमारे।।

    अर्थ · Hindi

    जब तें प्रभु पद पदुम निहारे। मिटे दुसह दुख दोष हमारे।।

  2487. RCM 2.251.8Open verse →

    बचन सुनत पुरजन अनुरागे। तिन्ह के भाग सराहन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    बचन सुनत पुरजन अनुरागे। तिन्ह के भाग सराहन लागे।।

  2488. RCM 2.252.1Open verse →

    पुर जन नारि मगन अति प्रीती। बासर जाहिं पलक सम बीती।।

    अर्थ · Hindi

    पुर जन नारि मगन अति प्रीती। बासर जाहिं पलक सम बीती।।

  2489. RCM 2.252.2Open verse →

    सीय सासु प्रति बेष बनाई। सादर करइ सरिस सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    सीय सासु प्रति बेष बनाई। सादर करइ सरिस सेवकाई।।

  2490. RCM 2.252.3Open verse →

    लखा न मरमु राम बिनु काहूँ। माया सब सिय माया माहूँ।।

    अर्थ · Hindi

    लखा न मरमु राम बिनु काहूँ। माया सब सिय माया माहूँ।।

  2491. RCM 2.252.4Open verse →

    सीयँ सासु सेवा बस कीन्हीं। तिन्ह लहि सुख सिख आसिष दीन्हीं।।

    अर्थ · Hindi

    सीयँ सासु सेवा बस कीन्हीं। तिन्ह लहि सुख सिख आसिष दीन्हीं।।

  2492. RCM 2.252.5Open verse →

    लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। कुटिल रानि पछितानि अघाई।।

    अर्थ · Hindi

    लखि सिय सहित सरल दोउ भाई। कुटिल रानि पछितानि अघाई।।

  2493. RCM 2.252.6Open verse →

    अवनि जमहि जाचति कैकेई। महि न बीचु बिधि मीचु न देई।।

    अर्थ · Hindi

    अवनि जमहि जाचति कैकेई। महि न बीचु बिधि मीचु न देई।।

  2494. RCM 2.252.7Open verse →

    लोकहुँ बेद बिदित कबि कहहीं। राम बिमुख थलु नरक न लहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    लोकहुँ बेद बिदित कबि कहहीं। राम बिमुख थलु नरक न लहहीं।।

  2495. RCM 2.252.8Open verse →

    यहु संसउ सब के मन माहीं। राम गवनु बिधि अवध कि नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    यहु संसउ सब के मन माहीं। राम गवनु बिधि अवध कि नाहीं।।

  2496. RCM 2.252.9Open verse →

    निसि न नीद नहिं भूख दिन भरतु बिकल सुचि सोच।

    अर्थ · Hindi

    निसि न नीद नहिं भूख दिन भरतु बिकल सुचि सोच।

  2497. RCM 2.252.10Open verse →

    नीच कीच बिच मगन जस मीनहि सलिल सँकोच।।252।।

    अर्थ · Hindi

    नीच कीच बिच मगन जस मीनहि सलिल सँकोच।।252।।

  2498. RCM 2.253.1Open verse →

    कीन्ही मातु मिस काल कुचाली। ईति भीति जस पाकत साली।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ही मातु मिस काल कुचाली। ईति भीति जस पाकत साली।।

  2499. RCM 2.253.2Open verse →

    केहि बिधि होइ राम अभिषेकू। मोहि अवकलत उपाउ न एकू।।

    अर्थ · Hindi

    केहि बिधि होइ राम अभिषेकू। मोहि अवकलत उपाउ न एकू।।

  2500. RCM 2.253.3Open verse →

    अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी। मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी।।

    अर्थ · Hindi

    अवसि फिरहिं गुर आयसु मानी। मुनि पुनि कहब राम रुचि जानी।।

  2501. RCM 2.253.4Open verse →

    मातु कहेहुँ बहुरहिं रघुराऊ। राम जननि हठ करबि कि काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मातु कहेहुँ बहुरहिं रघुराऊ। राम जननि हठ करबि कि काऊ।।

  2502. RCM 2.253.5Open verse →

    मोहि अनुचर कर केतिक बाता। तेहि महँ कुसमउ बाम बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि अनुचर कर केतिक बाता। तेहि महँ कुसमउ बाम बिधाता।।

  2503. RCM 2.253.6Open verse →

    जौं हठ करउँ त निपट कुकरमू। हरगिरि तें गुरु सेवक धरमू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं हठ करउँ त निपट कुकरमू। हरगिरि तें गुरु सेवक धरमू।।

  2504. RCM 2.253.7Open verse →

    एकउ जुगुति न मन ठहरानी। सोचत भरतहि रैनि बिहानी।।

    अर्थ · Hindi

    एकउ जुगुति न मन ठहरानी। सोचत भरतहि रैनि बिहानी।।

  2505. RCM 2.253.8Open verse →

    प्रात नहाइ प्रभुहि सिर नाई। बैठत पठए रिषयँ बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रात नहाइ प्रभुहि सिर नाई। बैठत पठए रिषयँ बोलाई।।

  2506. RCM 2.253.9Open verse →

    गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ।

    अर्थ · Hindi

    गुर पद कमल प्रनामु करि बैठे आयसु पाइ।

  2507. RCM 2.253.10Open verse →

    बिप्र महाजन सचिव सब जुरे सभासद आइ।।253।।

    अर्थ · Hindi

    बिप्र महाजन सचिव सब जुरे सभासद आइ।।253।।

  2508. RCM 2.254.1Open verse →

    बोले मुनिबरु समय समाना। सुनहु सभासद भरत सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    बोले मुनिबरु समय समाना। सुनहु सभासद भरत सुजाना।।

  2509. RCM 2.254.2Open verse →

    धरम धुरीन भानुकुल भानू। राजा रामु स्वबस भगवानू।।

    अर्थ · Hindi

    धरम धुरीन भानुकुल भानू। राजा रामु स्वबस भगवानू।।

  2510. RCM 2.254.3Open verse →

    सत्यसंध पालक श्रुति सेतू। राम जनमु जग मंगल हेतू।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यसंध पालक श्रुति सेतू। राम जनमु जग मंगल हेतू।।

  2511. RCM 2.254.4Open verse →

    गुर पितु मातु बचन अनुसारी। खल दलु दलन देव हितकारी।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पितु मातु बचन अनुसारी। खल दलु दलन देव हितकारी।।

  2512. RCM 2.254.5Open verse →

    नीति प्रीति परमारथ स्वारथु। कोउ न राम सम जान जथारथु।।

    अर्थ · Hindi

    नीति प्रीति परमारथ स्वारथु। कोउ न राम सम जान जथारथु।।

  2513. RCM 2.254.6Open verse →

    बिधि हरि हरु ससि रबि दिसिपाला। माया जीव करम कुलि काला।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि हरि हरु ससि रबि दिसिपाला। माया जीव करम कुलि काला।।

  2514. RCM 2.254.7Open verse →

    अहिप महिप जहँ लगि प्रभुताई। जोग सिद्धि निगमागम गाई।।

    अर्थ · Hindi

    अहिप महिप जहँ लगि प्रभुताई। जोग सिद्धि निगमागम गाई।।

  2515. RCM 2.254.8Open verse →

    करि बिचार जिंयँ देखहु नीकें। राम रजाइ सीस सबही कें।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिचार जिंयँ देखहु नीकें। राम रजाइ सीस सबही कें।।

  2516. RCM 2.254.9Open verse →

    राखें राम रजाइ रुख हम सब कर हित होइ।

    अर्थ · Hindi

    राखें राम रजाइ रुख हम सब कर हित होइ।

  2517. RCM 2.254.10Open verse →

    समुझि सयाने करहु अब सब मिलि संमत सोइ।।254।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि सयाने करहु अब सब मिलि संमत सोइ।।254।।

  2518. RCM 2.255.1Open verse →

    सब कहुँ सुखद राम अभिषेकू। मंगल मोद मूल मग एकू।।

    अर्थ · Hindi

    सब कहुँ सुखद राम अभिषेकू। मंगल मोद मूल मग एकू।।

  2519. RCM 2.255.2Open verse →

    केहि बिधि अवध चलहिं रघुराऊ। कहहु समुझि सोइ करिअ उपाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    केहि बिधि अवध चलहिं रघुराऊ। कहहु समुझि सोइ करिअ उपाऊ।।

  2520. RCM 2.255.3Open verse →

    सब सादर सुनि मुनिबर बानी। नय परमारथ स्वारथ सानी।।

    अर्थ · Hindi

    सब सादर सुनि मुनिबर बानी। नय परमारथ स्वारथ सानी।।

  2521. RCM 2.255.4Open verse →

    उतरु न आव लोग भए भोरे। तब सिरु नाइ भरत कर जोरे।।

    अर्थ · Hindi

    उतरु न आव लोग भए भोरे। तब सिरु नाइ भरत कर जोरे।।

  2522. RCM 2.255.5Open verse →

    भानुबंस भए भूप घनेरे। अधिक एक तें एक बड़ेरे।।

    अर्थ · Hindi

    भानुबंस भए भूप घनेरे। अधिक एक तें एक बड़ेरे।।

  2523. RCM 2.255.6Open verse →

    जनमु हेतु सब कहँ पितु माता। करम सुभासुभ देइ बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    जनमु हेतु सब कहँ पितु माता। करम सुभासुभ देइ बिधाता।।

  2524. RCM 2.255.7Open verse →

    दलि दुख सजइ सकल कल्याना। अस असीस राउरि जगु जाना।।

    अर्थ · Hindi

    दलि दुख सजइ सकल कल्याना। अस असीस राउरि जगु जाना।।

  2525. RCM 2.255.8Open verse →

    सो गोसाइँ बिधि गति जेहिं छेंकी। सकइ को टारि टेक जो टेकी।।

    अर्थ · Hindi

    सो गोसाइँ बिधि गति जेहिं छेंकी। सकइ को टारि टेक जो टेकी।।

  2526. RCM 2.255.9Open verse →

    बूझिअ मोहि उपाउ अब सो सब मोर अभागु।

    अर्थ · Hindi

    बूझिअ मोहि उपाउ अब सो सब मोर अभागु।

  2527. RCM 2.255.10Open verse →

    सुनि सनेहमय बचन गुर उर उमगा अनुरागु।।255।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनेहमय बचन गुर उर उमगा अनुरागु।।255।।

  2528. RCM 2.256.1Open verse →

    तात बात फुरि राम कृपाहीं। राम बिमुख सिधि सपनेहुँ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तात बात फुरि राम कृपाहीं। राम बिमुख सिधि सपनेहुँ नाहीं।।

  2529. RCM 2.256.2Open verse →

    सकुचउँ तात कहत एक बाता। अरध तजहिं बुध सरबस जाता।।

    अर्थ · Hindi

    सकुचउँ तात कहत एक बाता। अरध तजहिं बुध सरबस जाता।।

  2530. RCM 2.256.3Open verse →

    तुम्ह कानन गवनहु दोउ भाई। फेरिअहिं लखन सीय रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह कानन गवनहु दोउ भाई। फेरिअहिं लखन सीय रघुराई।।

  2531. RCM 2.256.4Open verse →

    सुनि सुबचन हरषे दोउ भ्राता। भे प्रमोद परिपूरन गाता।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुबचन हरषे दोउ भ्राता। भे प्रमोद परिपूरन गाता।।

  2532. RCM 2.256.5Open verse →

    मन प्रसन्न तन तेजु बिराजा। जनु जिय राउ रामु भए राजा।।

    अर्थ · Hindi

    मन प्रसन्न तन तेजु बिराजा। जनु जिय राउ रामु भए राजा।।

  2533. RCM 2.256.6Open verse →

    बहुत लाभ लोगन्ह लघु हानी। सम दुख सुख सब रोवहिं रानी।।

    अर्थ · Hindi

    बहुत लाभ लोगन्ह लघु हानी। सम दुख सुख सब रोवहिं रानी।।

  2534. RCM 2.256.7Open verse →

    कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे। फलु जग जीवन्ह अभिमत दीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं भरतु मुनि कहा सो कीन्हे। फलु जग जीवन्ह अभिमत दीन्हे।।

  2535. RCM 2.256.8Open verse →

    कानन करउँ जनम भरि बासू। एहिं तें अधिक न मोर सुपासू।।

    अर्थ · Hindi

    कानन करउँ जनम भरि बासू। एहिं तें अधिक न मोर सुपासू।।

  2536. RCM 2.256.9Open verse →

    अँतरजामी रामु सिय तुम्ह सरबग्य सुजान।

    अर्थ · Hindi

    अँतरजामी रामु सिय तुम्ह सरबग्य सुजान।

  2537. RCM 2.256.10Open verse →

    जो फुर कहहु त नाथ निज कीजिअ बचनु प्रवान।।256।।

    अर्थ · Hindi

    जो फुर कहहु त नाथ निज कीजिअ बचनु प्रवान।।256।।

  2538. RCM 2.257.1Open verse →

    भरत बचन सुनि देखि सनेहू। सभा सहित मुनि भए बिदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन सुनि देखि सनेहू। सभा सहित मुनि भए बिदेहू।।

  2539. RCM 2.257.2Open verse →

    भरत महा महिमा जलरासी। मुनि मति ठाढ़ि तीर अबला सी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत महा महिमा जलरासी। मुनि मति ठाढ़ि तीर अबला सी।।

  2540. RCM 2.257.3Open verse →

    गा चह पार जतनु हियँ हेरा। पावति नाव न बोहितु बेरा।।

    अर्थ · Hindi

    गा चह पार जतनु हियँ हेरा। पावति नाव न बोहितु बेरा।।

  2541. RCM 2.257.4Open verse →

    औरु करिहि को भरत बड़ाई। सरसी सीपि कि सिंधु समाई।।

    अर्थ · Hindi

    औरु करिहि को भरत बड़ाई। सरसी सीपि कि सिंधु समाई।।

  2542. RCM 2.257.5Open verse →

    भरतु मुनिहि मन भीतर भाए। सहित समाज राम पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु मुनिहि मन भीतर भाए। सहित समाज राम पहिं आए।।

  2543. RCM 2.257.6Open verse →

    प्रभु प्रनामु करि दीन्ह सुआसनु। बैठे सब सुनि मुनि अनुसासनु।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रनामु करि दीन्ह सुआसनु। बैठे सब सुनि मुनि अनुसासनु।।

  2544. RCM 2.257.7Open verse →

    बोले मुनिबरु बचन बिचारी। देस काल अवसर अनुहारी।।

    अर्थ · Hindi

    बोले मुनिबरु बचन बिचारी। देस काल अवसर अनुहारी।।

  2545. RCM 2.257.8Open verse →

    सुनहु राम सरबग्य सुजाना। धरम नीति गुन ग्यान निधाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु राम सरबग्य सुजाना। धरम नीति गुन ग्यान निधाना।।

  2546. RCM 2.257.9Open verse →

    सब के उर अंतर बसहु जानहु भाउ कुभाउ।

    अर्थ · Hindi

    सब के उर अंतर बसहु जानहु भाउ कुभाउ।

  2547. RCM 2.257.10Open verse →

    पुरजन जननी भरत हित होइ सो कहिअ उपाउ।।257।।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन जननी भरत हित होइ सो कहिअ उपाउ।।257।।

  2548. RCM 2.258.1Open verse →

    आरत कहहिं बिचारि न काऊ। सूझ जूआरिहि आपन दाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    आरत कहहिं बिचारि न काऊ। सूझ जूआरिहि आपन दाऊ।।

  2549. RCM 2.258.2Open verse →

    सुनि मुनि बचन कहत रघुराऊ। नाथ तुम्हारेहि हाथ उपाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन कहत रघुराऊ। नाथ तुम्हारेहि हाथ उपाऊ।।

  2550. RCM 2.258.3Open verse →

    सब कर हित रुख राउरि राखें। आयसु किएँ मुदित फुर भाषें।।

    अर्थ · Hindi

    सब कर हित रुख राउरि राखें। आयसु किएँ मुदित फुर भाषें।।

  2551. RCM 2.258.4Open verse →

    प्रथम जो आयसु मो कहुँ होई। माथें मानि करौ सिख सोई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम जो आयसु मो कहुँ होई। माथें मानि करौ सिख सोई।।

  2552. RCM 2.258.5Open verse →

    पुनि जेहि कहँ जस कहब गोसाईं। सो सब भाँति घटिहि सेवकाईं।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि जेहि कहँ जस कहब गोसाईं। सो सब भाँति घटिहि सेवकाईं।।

  2553. RCM 2.258.6Open verse →

    कह मुनि राम सत्य तुम्ह भाषा। भरत सनेहँ बिचारु न राखा।।

    अर्थ · Hindi

    कह मुनि राम सत्य तुम्ह भाषा। भरत सनेहँ बिचारु न राखा।।

  2554. RCM 2.258.7Open verse →

    तेहि तें कहउँ बहोरि बहोरी। भरत भगति बस भइ मति मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि तें कहउँ बहोरि बहोरी। भरत भगति बस भइ मति मोरी।।

  2555. RCM 2.258.8Open verse →

    मोरें जान भरत रुचि राखि। जो कीजिअ सो सुभ सिव साखी।।

    अर्थ · Hindi

    मोरें जान भरत रुचि राखि। जो कीजिअ सो सुभ सिव साखी।।

  2556. RCM 2.258.9Open verse →

    भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि।

    अर्थ · Hindi

    भरत बिनय सादर सुनिअ करिअ बिचारु बहोरि।

  2557. RCM 2.258.10Open verse →

    करब साधुमत लोकमत नृपनय निगम निचोरि।।258।।

    अर्थ · Hindi

    करब साधुमत लोकमत नृपनय निगम निचोरि।।258।।

  2558. RCM 2.259.1Open verse →

    गुरु अनुराग भरत पर देखी। राम ह्दयँ आनंदु बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    गुरु अनुराग भरत पर देखी। राम ह्दयँ आनंदु बिसेषी।।

  2559. RCM 2.259.2Open verse →

    भरतहि धरम धुरंधर जानी। निज सेवक तन मानस बानी।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि धरम धुरंधर जानी। निज सेवक तन मानस बानी।।

  2560. RCM 2.259.3Open verse →

    बोले गुर आयस अनुकूला। बचन मंजु मृदु मंगलमूला।।

    अर्थ · Hindi

    बोले गुर आयस अनुकूला। बचन मंजु मृदु मंगलमूला।।

  2561. RCM 2.259.4Open verse →

    नाथ सपथ पितु चरन दोहाई। भयउ न भुअन भरत सम भाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ सपथ पितु चरन दोहाई। भयउ न भुअन भरत सम भाई।।

  2562. RCM 2.259.5Open verse →

    जे गुर पद अंबुज अनुरागी। ते लोकहुँ बेदहुँ बड़भागी।।

    अर्थ · Hindi

    जे गुर पद अंबुज अनुरागी। ते लोकहुँ बेदहुँ बड़भागी।।

  2563. RCM 2.259.6Open verse →

    राउर जा पर अस अनुरागू। को कहि सकइ भरत कर भागू।।

    अर्थ · Hindi

    राउर जा पर अस अनुरागू। को कहि सकइ भरत कर भागू।।

  2564. RCM 2.259.7Open verse →

    लखि लघु बंधु बुद्धि सकुचाई। करत बदन पर भरत बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    लखि लघु बंधु बुद्धि सकुचाई। करत बदन पर भरत बड़ाई।।

  2565. RCM 2.259.8Open verse →

    भरतु कहहीं सोइ किएँ भलाई। अस कहि राम रहे अरगाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु कहहीं सोइ किएँ भलाई। अस कहि राम रहे अरगाई।।

  2566. RCM 2.259.9Open verse →

    तब मुनि बोले भरत सन सब सँकोचु तजि तात।

    अर्थ · Hindi

    तब मुनि बोले भरत सन सब सँकोचु तजि तात।

  2567. RCM 2.259.10Open verse →

    कृपासिंधु प्रिय बंधु सन कहहु हृदय कै बात।।259।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु प्रिय बंधु सन कहहु हृदय कै बात।।259।।

  2568. RCM 2.260.1Open verse →

    सुनि मुनि बचन राम रुख पाई। गुरु साहिब अनुकूल अघाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन राम रुख पाई। गुरु साहिब अनुकूल अघाई।।

  2569. RCM 2.260.2Open verse →

    लखि अपने सिर सबु छरु भारू। कहि न सकहिं कछु करहिं बिचारू।।

    अर्थ · Hindi

    लखि अपने सिर सबु छरु भारू। कहि न सकहिं कछु करहिं बिचारू।।

  2570. RCM 2.260.3Open verse →

    पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढें। नीरज नयन नेह जल बाढ़ें।।

    अर्थ · Hindi

    पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढें। नीरज नयन नेह जल बाढ़ें।।

  2571. RCM 2.260.4Open verse →

    कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा।

    अर्थ · Hindi

    कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा।

  2572. RCM 2.260.5Open verse →

    मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ।।

  2573. RCM 2.260.6Open verse →

    मो पर कृपा सनेह बिसेषी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी।।

    अर्थ · Hindi

    मो पर कृपा सनेह बिसेषी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी।।

  2574. RCM 2.260.7Open verse →

    सिसुपन तेम परिहरेउँ न संगू। कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू।।

    अर्थ · Hindi

    सिसुपन तेम परिहरेउँ न संगू। कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू।।

  2575. RCM 2.260.8Open verse →

    मैं प्रभु कृपा रीति जियँ जोही। हारेहुँ खेल जितावहिं मोही।।

    अर्थ · Hindi

    मैं प्रभु कृपा रीति जियँ जोही। हारेहुँ खेल जितावहिं मोही।।

  2576. RCM 2.260.9Open verse →

    महूँ सनेह सकोच बस सनमुख कही न बैन।

    अर्थ · Hindi

    महूँ सनेह सकोच बस सनमुख कही न बैन।

  2577. RCM 2.260.10Open verse →

    दरसन तृपित न आजु लगि पेम पिआसे नैन।।260।।

    अर्थ · Hindi

    दरसन तृपित न आजु लगि पेम पिआसे नैन।।260।।

  2578. RCM 2.261.1Open verse →

    बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा।

    अर्थ · Hindi

    बिधि न सकेउ सहि मोर दुलारा। नीच बीचु जननी मिस पारा।

  2579. RCM 2.261.2Open verse →

    यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनीं समुझि साधु सुचि को भा।।

    अर्थ · Hindi

    यहउ कहत मोहि आजु न सोभा। अपनीं समुझि साधु सुचि को भा।।

  2580. RCM 2.261.3Open verse →

    मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली।।

    अर्थ · Hindi

    मातु मंदि मैं साधु सुचाली। उर अस आनत कोटि कुचाली।।

  2581. RCM 2.261.4Open verse →

    फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकुता प्रसव कि संबुक काली।।

    अर्थ · Hindi

    फरइ कि कोदव बालि सुसाली। मुकुता प्रसव कि संबुक काली।।

  2582. RCM 2.261.5Open verse →

    सपनेहुँ दोसक लेसु न काहू। मोर अभाग उदधि अवगाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सपनेहुँ दोसक लेसु न काहू। मोर अभाग उदधि अवगाहू।।

  2583. RCM 2.261.6Open verse →

    बिनु समुझें निज अघ परिपाकू। जारिउँ जायँ जननि कहि काकू।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु समुझें निज अघ परिपाकू। जारिउँ जायँ जननि कहि काकू।।

  2584. RCM 2.261.7Open verse →

    हृदयँ हेरि हारेउँ सब ओरा। एकहि भाँति भलेहिं भल मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ हेरि हारेउँ सब ओरा। एकहि भाँति भलेहिं भल मोरा।।

  2585. RCM 2.261.8Open verse →

    गुर गोसाइँ साहिब सिय रामू। लागत मोहि नीक परिनामू।।

    अर्थ · Hindi

    गुर गोसाइँ साहिब सिय रामू। लागत मोहि नीक परिनामू।।

  2586. RCM 2.261.9Open verse →

    साधु सभा गुर प्रभु निकट कहउँ सुथल सति भाउ।

    अर्थ · Hindi

    साधु सभा गुर प्रभु निकट कहउँ सुथल सति भाउ।

  2587. RCM 2.261.10Open verse →

    प्रेम प्रपंचु कि झूठ फुर जानहिं मुनि रघुराउ।।261।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम प्रपंचु कि झूठ फुर जानहिं मुनि रघुराउ।।261।।

  2588. RCM 2.262.1Open verse →

    भूपति मरन पेम पनु राखी। जननी कुमति जगतु सबु साखी।।

    अर्थ · Hindi

    भूपति मरन पेम पनु राखी। जननी कुमति जगतु सबु साखी।।

  2589. RCM 2.262.2Open verse →

    देखि न जाहि बिकल महतारी। जरहिं दुसह जर पुर नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखि न जाहि बिकल महतारी। जरहिं दुसह जर पुर नर नारी।।

  2590. RCM 2.262.3Open verse →

    महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला।।

    अर्थ · Hindi

    महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला।।

  2591. RCM 2.262.4Open verse →

    सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि बन गवनु कीन्ह रघुनाथा। करि मुनि बेष लखन सिय साथा।।

  2592. RCM 2.262.5Open verse →

    बिनु पानहिन्ह पयादेहि पाएँ। संकरु साखि रहेउँ एहि घाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु पानहिन्ह पयादेहि पाएँ। संकरु साखि रहेउँ एहि घाएँ।।

  2593. RCM 2.262.6Open verse →

    बहुरि निहार निषाद सनेहू। कुलिस कठिन उर भयउ न बेहू।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि निहार निषाद सनेहू। कुलिस कठिन उर भयउ न बेहू।।

  2594. RCM 2.262.7Open verse →

    अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई।।

    अर्थ · Hindi

    अब सबु आँखिन्ह देखेउँ आई। जिअत जीव जड़ सबइ सहाई।।

  2595. RCM 2.262.8Open verse →

    जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तामस तीछी।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तामस तीछी।।

  2596. RCM 2.262.9Open verse →

    तेइ रघुनंदनु लखनु सिय अनहित लागे जाहि।

    अर्थ · Hindi

    तेइ रघुनंदनु लखनु सिय अनहित लागे जाहि।

  2597. RCM 2.262.10Open verse →

    तासु तनय तजि दुसह दुख दैउ सहावइ काहि।।262।।

    अर्थ · Hindi

    तासु तनय तजि दुसह दुख दैउ सहावइ काहि।।262।।

  2598. RCM 2.263.1Open verse →

    सुनि अति बिकल भरत बर बानी। आरति प्रीति बिनय नय सानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि अति बिकल भरत बर बानी। आरति प्रीति बिनय नय सानी।।

  2599. RCM 2.263.2Open verse →

    सोक मगन सब सभाँ खभारू। मनहुँ कमल बन परेउ तुसारू।।

    अर्थ · Hindi

    सोक मगन सब सभाँ खभारू। मनहुँ कमल बन परेउ तुसारू।।

  2600. RCM 2.263.3Open verse →

    कहि अनेक बिधि कथा पुरानी। भरत प्रबोधु कीन्ह मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    कहि अनेक बिधि कथा पुरानी। भरत प्रबोधु कीन्ह मुनि ग्यानी।।

  2601. RCM 2.263.4Open verse →

    बोले उचित बचन रघुनंदू। दिनकर कुल कैरव बन चंदू।।

    अर्थ · Hindi

    बोले उचित बचन रघुनंदू। दिनकर कुल कैरव बन चंदू।।

  2602. RCM 2.263.5Open verse →

    तात जाँय जियँ करहु गलानी। ईस अधीन जीव गति जानी।।

    अर्थ · Hindi

    तात जाँय जियँ करहु गलानी। ईस अधीन जीव गति जानी।।

  2603. RCM 2.263.6Open verse →

    तीनि काल तिभुअन मत मोरें। पुन्यसिलोक तात तर तोरे।।

    अर्थ · Hindi

    तीनि काल तिभुअन मत मोरें। पुन्यसिलोक तात तर तोरे।।

  2604. RCM 2.263.7Open verse →

    उर आनत तुम्ह पर कुटिलाई। जाइ लोकु परलोकु नसाई।।

    अर्थ · Hindi

    उर आनत तुम्ह पर कुटिलाई। जाइ लोकु परलोकु नसाई।।

  2605. RCM 2.263.8Open verse →

    दोसु देहिं जननिहि जड़ तेई। जिन्ह गुर साधु सभा नहिं सेई।।

    अर्थ · Hindi

    दोसु देहिं जननिहि जड़ तेई। जिन्ह गुर साधु सभा नहिं सेई।।

  2606. RCM 2.263.9Open verse →

    मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल भार।

    अर्थ · Hindi

    मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल भार।

  2607. RCM 2.263.10Open verse →

    लोक सुजसु परलोक सुखु सुमिरत नामु तुम्हार।।263।।

    अर्थ · Hindi

    लोक सुजसु परलोक सुखु सुमिरत नामु तुम्हार।।263।।

  2608. RCM 2.264.1Open verse →

    कहउँ सुभाउ सत्य सिव साखी। भरत भूमि रह राउरि राखी।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ सुभाउ सत्य सिव साखी। भरत भूमि रह राउरि राखी।।

  2609. RCM 2.264.2Open verse →

    तात कुतरक करहु जनि जाएँ। बैर पेम नहि दुरइ दुराएँ।।

    अर्थ · Hindi

    तात कुतरक करहु जनि जाएँ। बैर पेम नहि दुरइ दुराएँ।।

  2610. RCM 2.264.3Open verse →

    मुनि गन निकट बिहग मृग जाहीं। बाधक बधिक बिलोकि पराहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि गन निकट बिहग मृग जाहीं। बाधक बधिक बिलोकि पराहीं।।

  2611. RCM 2.264.4Open verse →

    हित अनहित पसु पच्छिउ जाना। मानुष तनु गुन ग्यान निधाना।।

    अर्थ · Hindi

    हित अनहित पसु पच्छिउ जाना। मानुष तनु गुन ग्यान निधाना।।

  2612. RCM 2.264.5Open verse →

    तात तुम्हहि मैं जानउँ नीकें। करौं काह असमंजस जीकें।।

    अर्थ · Hindi

    तात तुम्हहि मैं जानउँ नीकें। करौं काह असमंजस जीकें।।

  2613. RCM 2.264.6Open verse →

    राखेउ रायँ सत्य मोहि त्यागी। तनु परिहरेउ पेम पन लागी।।

    अर्थ · Hindi

    राखेउ रायँ सत्य मोहि त्यागी। तनु परिहरेउ पेम पन लागी।।

  2614. RCM 2.264.7Open verse →

    तासु बचन मेटत मन सोचू। तेहि तें अधिक तुम्हार सँकोचू।।

    अर्थ · Hindi

    तासु बचन मेटत मन सोचू। तेहि तें अधिक तुम्हार सँकोचू।।

  2615. RCM 2.264.8Open verse →

    ता पर गुर मोहि आयसु दीन्हा। अवसि जो कहहु चहउँ सोइ कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    ता पर गुर मोहि आयसु दीन्हा। अवसि जो कहहु चहउँ सोइ कीन्हा।।

  2616. RCM 2.264.9Open verse →

    मनु प्रसन्न करि सकुच तजि कहहु करौं सोइ आजु।

    अर्थ · Hindi

    मनु प्रसन्न करि सकुच तजि कहहु करौं सोइ आजु।

  2617. RCM 2.264.10Open verse →

    सत्यसंध रघुबर बचन सुनि भा सुखी समाजु।।264।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यसंध रघुबर बचन सुनि भा सुखी समाजु।।264।।

  2618. RCM 2.265.1Open verse →

    सुर गन सहित सभय सुरराजू। सोचहिं चाहत होन अकाजू।।

    अर्थ · Hindi

    सुर गन सहित सभय सुरराजू। सोचहिं चाहत होन अकाजू।।

  2619. RCM 2.265.2Open verse →

    बनत उपाउ करत कछु नाहीं। राम सरन सब गे मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बनत उपाउ करत कछु नाहीं। राम सरन सब गे मन माहीं।।

  2620. RCM 2.265.3Open verse →

    बहुरि बिचारि परस्पर कहहीं। रघुपति भगत भगति बस अहहीं।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बिचारि परस्पर कहहीं। रघुपति भगत भगति बस अहहीं।

  2621. RCM 2.265.4Open verse →

    सुधि करि अंबरीष दुरबासा। भे सुर सुरपति निपट निरासा।।

    अर्थ · Hindi

    सुधि करि अंबरीष दुरबासा। भे सुर सुरपति निपट निरासा।।

  2622. RCM 2.265.5Open verse →

    सहे सुरन्ह बहु काल बिषादा। नरहरि किए प्रगट प्रहलादा।।

    अर्थ · Hindi

    सहे सुरन्ह बहु काल बिषादा। नरहरि किए प्रगट प्रहलादा।।

  2623. RCM 2.265.6Open verse →

    लगि लगि कान कहहिं धुनि माथा। अब सुर काज भरत के हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    लगि लगि कान कहहिं धुनि माथा। अब सुर काज भरत के हाथा।।

  2624. RCM 2.265.7Open verse →

    आन उपाउ न देखिअ देवा। मानत रामु सुसेवक सेवा।।

    अर्थ · Hindi

    आन उपाउ न देखिअ देवा। मानत रामु सुसेवक सेवा।।

  2625. RCM 2.265.8Open verse →

    हियँ सपेम सुमिरहु सब भरतहि। निज गुन सील राम बस करतहि।।

    अर्थ · Hindi

    हियँ सपेम सुमिरहु सब भरतहि। निज गुन सील राम बस करतहि।।

  2626. RCM 2.265.9Open verse →

    सुनि सुर मत सुरगुर कहेउ भल तुम्हार बड़ भागु।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुर मत सुरगुर कहेउ भल तुम्हार बड़ भागु।

  2627. RCM 2.265.10Open verse →

    सकल सुमंगल मूल जग भरत चरन अनुरागु।।265।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सुमंगल मूल जग भरत चरन अनुरागु।।265।।

  2628. RCM 2.266.1Open verse →

    सीतापति सेवक सेवकाई। कामधेनु सय सरिस सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    सीतापति सेवक सेवकाई। कामधेनु सय सरिस सुहाई।।

  2629. RCM 2.266.2Open verse →

    भरत भगति तुम्हरें मन आई। तजहु सोचु बिधि बात बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत भगति तुम्हरें मन आई। तजहु सोचु बिधि बात बनाई।।

  2630. RCM 2.266.3Open verse →

    देखु देवपति भरत प्रभाऊ। सहज सुभायँ बिबस रघुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    देखु देवपति भरत प्रभाऊ। सहज सुभायँ बिबस रघुराऊ।।

  2631. RCM 2.266.4Open verse →

    मन थिर करहु देव डरु नाहीं। भरतहि जानि राम परिछाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    मन थिर करहु देव डरु नाहीं। भरतहि जानि राम परिछाहीं।।

  2632. RCM 2.266.5Open verse →

    सुनो सुरगुर सुर संमत सोचू। अंतरजामी प्रभुहि सकोचू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनो सुरगुर सुर संमत सोचू। अंतरजामी प्रभुहि सकोचू।।

  2633. RCM 2.266.6Open verse →

    निज सिर भारु भरत जियँ जाना। करत कोटि बिधि उर अनुमाना।।

    अर्थ · Hindi

    निज सिर भारु भरत जियँ जाना। करत कोटि बिधि उर अनुमाना।।

  2634. RCM 2.266.7Open verse →

    करि बिचारु मन दीन्ही ठीका। राम रजायस आपन नीका।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिचारु मन दीन्ही ठीका। राम रजायस आपन नीका।।

  2635. RCM 2.266.8Open verse →

    निज पन तजि राखेउ पनु मोरा। छोहु सनेहु कीन्ह नहिं थोरा।।

    अर्थ · Hindi

    निज पन तजि राखेउ पनु मोरा। छोहु सनेहु कीन्ह नहिं थोरा।।

  2636. RCM 2.266.9Open verse →

    कीन्ह अनुग्रह अमित अति सब बिधि सीतानाथ।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह अनुग्रह अमित अति सब बिधि सीतानाथ।

  2637. RCM 2.266.10Open verse →

    करि प्रनामु बोले भरतु जोरि जलज जुग हाथ।।266।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु बोले भरतु जोरि जलज जुग हाथ।।266।।

  2638. RCM 2.267.1Open verse →

    कहौं कहावौं का अब स्वामी। कृपा अंबुनिधि अंतरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    कहौं कहावौं का अब स्वामी। कृपा अंबुनिधि अंतरजामी।।

  2639. RCM 2.267.2Open verse →

    गुर प्रसन्न साहिब अनुकूला। मिटी मलिन मन कलपित सूला।।

    अर्थ · Hindi

    गुर प्रसन्न साहिब अनुकूला। मिटी मलिन मन कलपित सूला।।

  2640. RCM 2.267.3Open verse →

    अपडर डरेउँ न सोच समूलें। रबिहि न दोसु देव दिसि भूलें।।

    अर्थ · Hindi

    अपडर डरेउँ न सोच समूलें। रबिहि न दोसु देव दिसि भूलें।।

  2641. RCM 2.267.4Open verse →

    मोर अभागु मातु कुटिलाई। बिधि गति बिषम काल कठिनाई।।

    अर्थ · Hindi

    मोर अभागु मातु कुटिलाई। बिधि गति बिषम काल कठिनाई।।

  2642. RCM 2.267.5Open verse →

    पाउ रोपि सब मिलि मोहि घाला। प्रनतपाल पन आपन पाला।।

    अर्थ · Hindi

    पाउ रोपि सब मिलि मोहि घाला। प्रनतपाल पन आपन पाला।।

  2643. RCM 2.267.6Open verse →

    यह नइ रीति न राउरि होई। लोकहुँ बेद बिदित नहिं गोई।।

    अर्थ · Hindi

    यह नइ रीति न राउरि होई। लोकहुँ बेद बिदित नहिं गोई।।

  2644. RCM 2.267.7Open verse →

    जगु अनभल भल एकु गोसाईं। कहिअ होइ भल कासु भलाईं।।

    अर्थ · Hindi

    जगु अनभल भल एकु गोसाईं। कहिअ होइ भल कासु भलाईं।।

  2645. RCM 2.267.8Open verse →

    देउ देवतरु सरिस सुभाऊ। सनमुख बिमुख न काहुहि काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    देउ देवतरु सरिस सुभाऊ। सनमुख बिमुख न काहुहि काऊ।।

  2646. RCM 2.267.9Open verse →

    जाइ निकट पहिचानि तरु छाहँ समनि सब सोच।

    अर्थ · Hindi

    जाइ निकट पहिचानि तरु छाहँ समनि सब सोच।

  2647. RCM 2.267.10Open verse →

    मागत अभिमत पाव जग राउ रंकु भल पोच।।267।।

    अर्थ · Hindi

    मागत अभिमत पाव जग राउ रंकु भल पोच।।267।।

  2648. RCM 2.268.1Open verse →

    लखि सब बिधि गुर स्वामि सनेहू। मिटेउ छोभु नहिं मन संदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    लखि सब बिधि गुर स्वामि सनेहू। मिटेउ छोभु नहिं मन संदेहू।।

  2649. RCM 2.268.2Open verse →

    अब करुनाकर कीजिअ सोई। जन हित प्रभु चित छोभु न होई।।

    अर्थ · Hindi

    अब करुनाकर कीजिअ सोई। जन हित प्रभु चित छोभु न होई।।

  2650. RCM 2.268.3Open verse →

    जो सेवकु साहिबहि सँकोची। निज हित चहइ तासु मति पोची।।

    अर्थ · Hindi

    जो सेवकु साहिबहि सँकोची। निज हित चहइ तासु मति पोची।।

  2651. RCM 2.268.4Open verse →

    सेवक हित साहिब सेवकाई। करै सकल सुख लोभ बिहाई।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक हित साहिब सेवकाई। करै सकल सुख लोभ बिहाई।।

  2652. RCM 2.268.5Open verse →

    स्वारथु नाथ फिरें सबही का। किएँ रजाइ कोटि बिधि नीका।।

    अर्थ · Hindi

    स्वारथु नाथ फिरें सबही का। किएँ रजाइ कोटि बिधि नीका।।

  2653. RCM 2.268.6Open verse →

    यह स्वारथ परमारथ सारु। सकल सुकृत फल सुगति सिंगारु।।

    अर्थ · Hindi

    यह स्वारथ परमारथ सारु। सकल सुकृत फल सुगति सिंगारु।।

  2654. RCM 2.268.7Open verse →

    देव एक बिनती सुनि मोरी। उचित होइ तस करब बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    देव एक बिनती सुनि मोरी। उचित होइ तस करब बहोरी।।

  2655. RCM 2.268.8Open verse →

    तिलक समाजु साजि सबु आना। करिअ सुफल प्रभु जौं मनु माना।।

    अर्थ · Hindi

    तिलक समाजु साजि सबु आना। करिअ सुफल प्रभु जौं मनु माना।।

  2656. RCM 2.268.9Open verse →

    सानुज पठइअ मोहि बन कीजिअ सबहि सनाथ।

    अर्थ · Hindi

    सानुज पठइअ मोहि बन कीजिअ सबहि सनाथ।

  2657. RCM 2.268.10Open verse →

    नतरु फेरिअहिं बंधु दोउ नाथ चलौं मैं साथ।।268।।

    अर्थ · Hindi

    नतरु फेरिअहिं बंधु दोउ नाथ चलौं मैं साथ।।268।।

  2658. RCM 2.269.1Open verse →

    नतरु जाहिं बन तीनिउ भाई। बहुरिअ सीय सहित रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    नतरु जाहिं बन तीनिउ भाई। बहुरिअ सीय सहित रघुराई।।

  2659. RCM 2.269.2Open verse →

    जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई। करुना सागर कीजिअ सोई।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई। करुना सागर कीजिअ सोई।।

  2660. RCM 2.269.3Open verse →

    देवँ दीन्ह सबु मोहि अभारु। मोरें नीति न धरम बिचारु।।

    अर्थ · Hindi

    देवँ दीन्ह सबु मोहि अभारु। मोरें नीति न धरम बिचारु।।

  2661. RCM 2.269.4Open verse →

    कहउँ बचन सब स्वारथ हेतू। रहत न आरत कें चित चेतू।।

    अर्थ · Hindi

    कहउँ बचन सब स्वारथ हेतू। रहत न आरत कें चित चेतू।।

  2662. RCM 2.269.5Open verse →

    उतरु देइ सुनि स्वामि रजाई। सो सेवकु लखि लाज लजाई।।

    अर्थ · Hindi

    उतरु देइ सुनि स्वामि रजाई। सो सेवकु लखि लाज लजाई।।

  2663. RCM 2.269.6Open verse →

    अस मैं अवगुन उदधि अगाधू। स्वामि सनेहँ सराहत साधू।।

    अर्थ · Hindi

    अस मैं अवगुन उदधि अगाधू। स्वामि सनेहँ सराहत साधू।।

  2664. RCM 2.269.7Open verse →

    अब कृपाल मोहि सो मत भावा। सकुच स्वामि मन जाइँ न पावा।।

    अर्थ · Hindi

    अब कृपाल मोहि सो मत भावा। सकुच स्वामि मन जाइँ न पावा।।

  2665. RCM 2.269.8Open verse →

    प्रभु पद सपथ कहउँ सति भाऊ। जग मंगल हित एक उपाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद सपथ कहउँ सति भाऊ। जग मंगल हित एक उपाऊ।।

  2666. RCM 2.269.9Open verse →

    प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देब।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रसन्न मन सकुच तजि जो जेहि आयसु देब।

  2667. RCM 2.269.10Open verse →

    सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब।।269।।

    अर्थ · Hindi

    सो सिर धरि धरि करिहि सबु मिटिहि अनट अवरेब।।269।।

  2668. RCM 2.270.1Open verse →

    भरत बचन सुचि सुनि सुर हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन सुचि सुनि सुर हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।

  2669. RCM 2.270.2Open verse →

    असमंजस बस अवध नेवासी। प्रमुदित मन तापस बनबासी।।

    अर्थ · Hindi

    असमंजस बस अवध नेवासी। प्रमुदित मन तापस बनबासी।।

  2670. RCM 2.270.3Open verse →

    चुपहिं रहे रघुनाथ सँकोची। प्रभु गति देखि सभा सब सोची।।

    अर्थ · Hindi

    चुपहिं रहे रघुनाथ सँकोची। प्रभु गति देखि सभा सब सोची।।

  2671. RCM 2.270.4Open verse →

    जनक दूत तेहि अवसर आए। मुनि बसिष्ठँ सुनि बेगि बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    जनक दूत तेहि अवसर आए। मुनि बसिष्ठँ सुनि बेगि बोलाए।।

  2672. RCM 2.270.5Open verse →

    करि प्रनाम तिन्ह रामु निहारे। बेषु देखि भए निपट दुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनाम तिन्ह रामु निहारे। बेषु देखि भए निपट दुखारे।।

  2673. RCM 2.270.6Open verse →

    दूतन्ह मुनिबर बूझी बाता। कहहु बिदेह भूप कुसलाता।।

    अर्थ · Hindi

    दूतन्ह मुनिबर बूझी बाता। कहहु बिदेह भूप कुसलाता।।

  2674. RCM 2.270.7Open verse →

    सुनि सकुचाइ नाइ महि माथा। बोले चर बर जोरें हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सकुचाइ नाइ महि माथा। बोले चर बर जोरें हाथा।।

  2675. RCM 2.270.8Open verse →

    बूझब राउर सादर साईं। कुसल हेतु सो भयउ गोसाईं।।

    अर्थ · Hindi

    बूझब राउर सादर साईं। कुसल हेतु सो भयउ गोसाईं।।

  2676. RCM 2.270.9Open verse →

    नाहि त कोसल नाथ कें साथ कुसल गइ नाथ।

    अर्थ · Hindi

    नाहि त कोसल नाथ कें साथ कुसल गइ नाथ।

  2677. RCM 2.270.10Open verse →

    मिथिला अवध बिसेष तें जगु सब भयउ अनाथ।।270।।

    अर्थ · Hindi

    मिथिला अवध बिसेष तें जगु सब भयउ अनाथ।।270।।

  2678. RCM 2.271.1Open verse →

    कोसलपति गति सुनि जनकौरा। भे सब लोक सोक बस बौरा।।

    अर्थ · Hindi

    कोसलपति गति सुनि जनकौरा। भे सब लोक सोक बस बौरा।।

  2679. RCM 2.271.2Open verse →

    जेहिं देखे तेहि समय बिदेहू। नामु सत्य अस लाग न केहू।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं देखे तेहि समय बिदेहू। नामु सत्य अस लाग न केहू।।

  2680. RCM 2.271.3Open verse →

    रानि कुचालि सुनत नरपालहि। सूझ न कछु जस मनि बिनु ब्यालहि।।

    अर्थ · Hindi

    रानि कुचालि सुनत नरपालहि। सूझ न कछु जस मनि बिनु ब्यालहि।।

  2681. RCM 2.271.4Open verse →

    भरत राज रघुबर बनबासू। भा मिथिलेसहि हृदयँ हराँसू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत राज रघुबर बनबासू। भा मिथिलेसहि हृदयँ हराँसू।।

  2682. RCM 2.271.5Open verse →

    नृप बूझे बुध सचिव समाजू। कहहु बिचारि उचित का आजू।।

    अर्थ · Hindi

    नृप बूझे बुध सचिव समाजू। कहहु बिचारि उचित का आजू।।

  2683. RCM 2.271.6Open verse →

    समुझि अवध असमंजस दोऊ। चलिअ कि रहिअ न कह कछु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि अवध असमंजस दोऊ। चलिअ कि रहिअ न कह कछु कोऊ।।

  2684. RCM 2.271.7Open verse →

    नृपहि धीर धरि हृदयँ बिचारी। पठए अवध चतुर चर चारी।।

    अर्थ · Hindi

    नृपहि धीर धरि हृदयँ बिचारी। पठए अवध चतुर चर चारी।।

  2685. RCM 2.271.8Open verse →

    बूझि भरत सति भाउ कुभाऊ। आएहु बेगि न होइ लखाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बूझि भरत सति भाउ कुभाऊ। आएहु बेगि न होइ लखाऊ।।

  2686. RCM 2.271.9Open verse →

    गए अवध चर भरत गति बूझि देखि करतूति।

    अर्थ · Hindi

    गए अवध चर भरत गति बूझि देखि करतूति।

  2687. RCM 2.271.10Open verse →

    चले चित्रकूटहि भरतु चार चले तेरहूति।।271।।

    अर्थ · Hindi

    चले चित्रकूटहि भरतु चार चले तेरहूति।।271।।

  2688. RCM 2.272.1Open verse →

    दूतन्ह आइ भरत कइ करनी। जनक समाज जथामति बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    दूतन्ह आइ भरत कइ करनी। जनक समाज जथामति बरनी।।

  2689. RCM 2.272.2Open verse →

    सुनि गुर परिजन सचिव महीपति। भे सब सोच सनेहँ बिकल अति।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि गुर परिजन सचिव महीपति। भे सब सोच सनेहँ बिकल अति।।

  2690. RCM 2.272.3Open verse →

    धरि धीरजु करि भरत बड़ाई। लिए सुभट साहनी बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    धरि धीरजु करि भरत बड़ाई। लिए सुभट साहनी बोलाई।।

  2691. RCM 2.272.4Open verse →

    घर पुर देस राखि रखवारे। हय गय रथ बहु जान सँवारे।।

    अर्थ · Hindi

    घर पुर देस राखि रखवारे। हय गय रथ बहु जान सँवारे।।

  2692. RCM 2.272.5Open verse →

    दुघरी साधि चले ततकाला। किए बिश्रामु न मग महीपाला।।

    अर्थ · Hindi

    दुघरी साधि चले ततकाला। किए बिश्रामु न मग महीपाला।।

  2693. RCM 2.272.6Open verse →

    भोरहिं आजु नहाइ प्रयागा। चले जमुन उतरन सबु लागा।।

    अर्थ · Hindi

    भोरहिं आजु नहाइ प्रयागा। चले जमुन उतरन सबु लागा।।

  2694. RCM 2.272.7Open verse →

    खबरि लेन हम पठए नाथा। तिन्ह कहि अस महि नायउ माथा।।

    अर्थ · Hindi

    खबरि लेन हम पठए नाथा। तिन्ह कहि अस महि नायउ माथा।।

  2695. RCM 2.272.8Open verse →

    साथ किरात छ सातक दीन्हे। मुनिबर तुरत बिदा चर कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    साथ किरात छ सातक दीन्हे। मुनिबर तुरत बिदा चर कीन्हे।।

  2696. RCM 2.272.9Open verse →

    सुनत जनक आगवनु सबु हरषेउ अवध समाजु।

    अर्थ · Hindi

    सुनत जनक आगवनु सबु हरषेउ अवध समाजु।

  2697. RCM 2.272.10Open verse →

    रघुनंदनहि सकोचु बड़ सोच बिबस सुरराजु।।272।।

    अर्थ · Hindi

    रघुनंदनहि सकोचु बड़ सोच बिबस सुरराजु।।272।।

  2698. RCM 2.273.1Open verse →

    गरइ गलानि कुटिल कैकेई। काहि कहै केहि दूषनु देई।।

    अर्थ · Hindi

    गरइ गलानि कुटिल कैकेई। काहि कहै केहि दूषनु देई।।

  2699. RCM 2.273.2Open verse →

    अस मन आनि मुदित नर नारी। भयउ बहोरि रहब दिन चारी।।

    अर्थ · Hindi

    अस मन आनि मुदित नर नारी। भयउ बहोरि रहब दिन चारी।।

  2700. RCM 2.273.3Open verse →

    एहि प्रकार गत बासर सोऊ। प्रात नहान लाग सबु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    एहि प्रकार गत बासर सोऊ। प्रात नहान लाग सबु कोऊ।।

  2701. RCM 2.273.4Open verse →

    करि मज्जनु पूजहिं नर नारी। गनप गौरि तिपुरारि तमारी।।

    अर्थ · Hindi

    करि मज्जनु पूजहिं नर नारी। गनप गौरि तिपुरारि तमारी।।

  2702. RCM 2.273.5Open verse →

    रमा रमन पद बंदि बहोरी। बिनवहिं अंजुलि अंचल जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    रमा रमन पद बंदि बहोरी। बिनवहिं अंजुलि अंचल जोरी।।

  2703. RCM 2.273.6Open verse →

    राजा रामु जानकी रानी। आनँद अवधि अवध रजधानी।।

    अर्थ · Hindi

    राजा रामु जानकी रानी। आनँद अवधि अवध रजधानी।।

  2704. RCM 2.273.7Open verse →

    सुबस बसउ फिरि सहित समाजा। भरतहि रामु करहुँ जुबराजा।।

    अर्थ · Hindi

    सुबस बसउ फिरि सहित समाजा। भरतहि रामु करहुँ जुबराजा।।

  2705. RCM 2.273.8Open verse →

    एहि सुख सुधाँ सींची सब काहू। देव देहु जग जीवन लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    एहि सुख सुधाँ सींची सब काहू। देव देहु जग जीवन लाहू।।

  2706. RCM 2.273.9Open verse →

    गुर समाज भाइन्ह सहित राम राजु पुर होउ।

    अर्थ · Hindi

    गुर समाज भाइन्ह सहित राम राजु पुर होउ।

  2707. RCM 2.273.10Open verse →

    अछत राम राजा अवध मरिअ माग सबु कोउ।।273।।

    अर्थ · Hindi

    अछत राम राजा अवध मरिअ माग सबु कोउ।।273।।

  2708. RCM 2.274.1Open verse →

    सुनि सनेहमय पुरजन बानी। निंदहिं जोग बिरति मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सनेहमय पुरजन बानी। निंदहिं जोग बिरति मुनि ग्यानी।।

  2709. RCM 2.274.2Open verse →

    एहि बिधि नित्यकरम करि पुरजन। रामहि करहिं प्रनाम पुलकि तन।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि नित्यकरम करि पुरजन। रामहि करहिं प्रनाम पुलकि तन।।

  2710. RCM 2.274.3Open verse →

    ऊँच नीच मध्यम नर नारी। लहहिं दरसु निज निज अनुहारी।।

    अर्थ · Hindi

    ऊँच नीच मध्यम नर नारी। लहहिं दरसु निज निज अनुहारी।।

  2711. RCM 2.274.4Open verse →

    सावधान सबही सनमानहिं। सकल सराहत कृपानिधानहिं।।

    अर्थ · Hindi

    सावधान सबही सनमानहिं। सकल सराहत कृपानिधानहिं।।

  2712. RCM 2.274.5Open verse →

    लरिकाइहि ते रघुबर बानी। पालत नीति प्रीति पहिचानी।।

    अर्थ · Hindi

    लरिकाइहि ते रघुबर बानी। पालत नीति प्रीति पहिचानी।।

  2713. RCM 2.274.6Open verse →

    सील सकोच सिंधु रघुराऊ। सुमुख सुलोचन सरल सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सील सकोच सिंधु रघुराऊ। सुमुख सुलोचन सरल सुभाऊ।।

  2714. RCM 2.274.7Open verse →

    कहत राम गुन गन अनुरागे। सब निज भाग सराहन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    कहत राम गुन गन अनुरागे। सब निज भाग सराहन लागे।।

  2715. RCM 2.274.8Open verse →

    हम सम पुन्य पुंज जग थोरे। जिन्हहि रामु जानत करि मोरे।।

    अर्थ · Hindi

    हम सम पुन्य पुंज जग थोरे। जिन्हहि रामु जानत करि मोरे।।

  2716. RCM 2.274.9Open verse →

    प्रेम मगन तेहि समय सब सुनि आवत मिथिलेसु।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम मगन तेहि समय सब सुनि आवत मिथिलेसु।

  2717. RCM 2.274.10Open verse →

    सहित सभा संभ्रम उठेउ रबिकुल कमल दिनेसु।।274।।

    अर्थ · Hindi

    सहित सभा संभ्रम उठेउ रबिकुल कमल दिनेसु।।274।।

  2718. RCM 2.275.1Open verse →

    भाइ सचिव गुर पुरजन साथा। आगें गवनु कीन्ह रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    भाइ सचिव गुर पुरजन साथा। आगें गवनु कीन्ह रघुनाथा।।

  2719. RCM 2.275.2Open verse →

    गिरिबरु दीख जनकपति जबहीं। करि प्रनाम रथ त्यागेउ तबहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गिरिबरु दीख जनकपति जबहीं। करि प्रनाम रथ त्यागेउ तबहीं।।

  2720. RCM 2.275.3Open verse →

    राम दरस लालसा उछाहू। पथ श्रम लेसु कलेसु न काहू।।

    अर्थ · Hindi

    राम दरस लालसा उछाहू। पथ श्रम लेसु कलेसु न काहू।।

  2721. RCM 2.275.4Open verse →

    मन तहँ जहँ रघुबर बैदेही। बिनु मन तन दुख सुख सुधि केही।।

    अर्थ · Hindi

    मन तहँ जहँ रघुबर बैदेही। बिनु मन तन दुख सुख सुधि केही।।

  2722. RCM 2.275.5Open verse →

    आवत जनकु चले एहि भाँती। सहित समाज प्रेम मति माती।।

    अर्थ · Hindi

    आवत जनकु चले एहि भाँती। सहित समाज प्रेम मति माती।।

  2723. RCM 2.275.6Open verse →

    आए निकट देखि अनुरागे। सादर मिलन परसपर लागे।।

    अर्थ · Hindi

    आए निकट देखि अनुरागे। सादर मिलन परसपर लागे।।

  2724. RCM 2.275.7Open verse →

    लगे जनक मुनिजन पद बंदन। रिषिन्ह प्रनामु कीन्ह रघुनंदन।।

    अर्थ · Hindi

    लगे जनक मुनिजन पद बंदन। रिषिन्ह प्रनामु कीन्ह रघुनंदन।।

  2725. RCM 2.275.8Open verse →

    भाइन्ह सहित रामु मिलि राजहि। चले लवाइ समेत समाजहि।।

    अर्थ · Hindi

    भाइन्ह सहित रामु मिलि राजहि। चले लवाइ समेत समाजहि।।

  2726. RCM 2.275.9Open verse →

    आश्रम सागर सांत रस पूरन पावन पाथु।

    अर्थ · Hindi

    आश्रम सागर सांत रस पूरन पावन पाथु।

  2727. RCM 2.275.10Open verse →

    सेन मनहुँ करुना सरित लिएँ जाहिं रघुनाथु।।275।।

    अर्थ · Hindi

    सेन मनहुँ करुना सरित लिएँ जाहिं रघुनाथु।।275।।

  2728. RCM 2.276.1Open verse →

    बोरति ग्यान बिराग करारे। बचन ससोक मिलत नद नारे।।

    अर्थ · Hindi

    बोरति ग्यान बिराग करारे। बचन ससोक मिलत नद नारे।।

  2729. RCM 2.276.2Open verse →

    सोच उसास समीर तंरगा। धीरज तट तरुबर कर भंगा।।

    अर्थ · Hindi

    सोच उसास समीर तंरगा। धीरज तट तरुबर कर भंगा।।

  2730. RCM 2.276.3Open verse →

    बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।।

  2731. RCM 2.276.4Open verse →

    केवट बुध बिद्या बड़ि नावा। सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा।।

    अर्थ · Hindi

    केवट बुध बिद्या बड़ि नावा। सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा।।

  2732. RCM 2.276.5Open verse →

    बनचर कोल किरात बिचारे। थके बिलोकि पथिक हियँ हारे।।

    अर्थ · Hindi

    बनचर कोल किरात बिचारे। थके बिलोकि पथिक हियँ हारे।।

  2733. RCM 2.276.6Open verse →

    आश्रम उदधि मिली जब जाई। मनहुँ उठेउ अंबुधि अकुलाई।।

    अर्थ · Hindi

    आश्रम उदधि मिली जब जाई। मनहुँ उठेउ अंबुधि अकुलाई।।

  2734. RCM 2.276.7Open verse →

    सोक बिकल दोउ राज समाजा। रहा न ग्यानु न धीरजु लाजा।।

    अर्थ · Hindi

    सोक बिकल दोउ राज समाजा। रहा न ग्यानु न धीरजु लाजा।।

  2735. RCM 2.276.8Open verse →

    भूप रूप गुन सील सराही। रोवहिं सोक सिंधु अवगाही।।

    अर्थ · Hindi

    भूप रूप गुन सील सराही। रोवहिं सोक सिंधु अवगाही।।

  2736. RCM 2.277.1Open verse →

    जासु ग्यानु रबि भव निसि नासा। बचन किरन मुनि कमल बिकासा।।

    अर्थ · Hindi

    जासु ग्यानु रबि भव निसि नासा। बचन किरन मुनि कमल बिकासा।।

  2737. RCM 2.277.2Open verse →

    तेहि कि मोह ममता निअराई। यह सिय राम सनेह बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कि मोह ममता निअराई। यह सिय राम सनेह बड़ाई।।

  2738. RCM 2.277.3Open verse →

    बिषई साधक सिद्ध सयाने। त्रिबिध जीव जग बेद बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    बिषई साधक सिद्ध सयाने। त्रिबिध जीव जग बेद बखाने।।

  2739. RCM 2.277.4Open verse →

    राम सनेह सरस मन जासू। साधु सभाँ बड़ आदर तासू।।

    अर्थ · Hindi

    राम सनेह सरस मन जासू। साधु सभाँ बड़ आदर तासू।।

  2740. RCM 2.277.5Open verse →

    सोह न राम पेम बिनु ग्यानू। करनधार बिनु जिमि जलजानू।।

    अर्थ · Hindi

    सोह न राम पेम बिनु ग्यानू। करनधार बिनु जिमि जलजानू।।

  2741. RCM 2.277.6Open verse →

    मुनि बहुबिधि बिदेहु समुझाए। रामघाट सब लोग नहाए।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि बहुबिधि बिदेहु समुझाए। रामघाट सब लोग नहाए।।

  2742. RCM 2.277.7Open verse →

    सकल सोक संकुल नर नारी। सो बासरु बीतेउ बिनु बारी।।

    अर्थ · Hindi

    सकल सोक संकुल नर नारी। सो बासरु बीतेउ बिनु बारी।।

  2743. RCM 2.277.8Open verse →

    पसु खग मृगन्ह न कीन्ह अहारू। प्रिय परिजन कर कौन बिचारू।।

    अर्थ · Hindi

    पसु खग मृगन्ह न कीन्ह अहारू। प्रिय परिजन कर कौन बिचारू।।

  2744. RCM 2.277.9Open verse →

    दोउ समाज निमिराजु रघुराजु नहाने प्रात।

    अर्थ · Hindi

    दोउ समाज निमिराजु रघुराजु नहाने प्रात।

  2745. RCM 2.277.10Open verse →

    बैठे सब बट बिटप तर मन मलीन कृस गात।।277।।

    अर्थ · Hindi

    बैठे सब बट बिटप तर मन मलीन कृस गात।।277।।

  2746. RCM 2.278.1Open verse →

    जे महिसुर दसरथ पुर बासी। जे मिथिलापति नगर निवासी।।

    अर्थ · Hindi

    जे महिसुर दसरथ पुर बासी। जे मिथिलापति नगर निवासी।।

  2747. RCM 2.278.2Open verse →

    हंस बंस गुर जनक पुरोधा। जिन्ह जग मगु परमारथु सोधा।।

    अर्थ · Hindi

    हंस बंस गुर जनक पुरोधा। जिन्ह जग मगु परमारथु सोधा।।

  2748. RCM 2.278.3Open verse →

    लगे कहन उपदेस अनेका। सहित धरम नय बिरति बिबेका।।

    अर्थ · Hindi

    लगे कहन उपदेस अनेका। सहित धरम नय बिरति बिबेका।।

  2749. RCM 2.278.4Open verse →

    कौसिक कहि कहि कथा पुरानीं। समुझाई सब सभा सुबानीं।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिक कहि कहि कथा पुरानीं। समुझाई सब सभा सुबानीं।।

  2750. RCM 2.278.5Open verse →

    तब रघुनाथ कोसिकहि कहेऊ। नाथ कालि जल बिनु सबु रहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तब रघुनाथ कोसिकहि कहेऊ। नाथ कालि जल बिनु सबु रहेऊ।।

  2751. RCM 2.278.6Open verse →

    मुनि कह उचित कहत रघुराई। गयउ बीति दिन पहर अढ़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि कह उचित कहत रघुराई। गयउ बीति दिन पहर अढ़ाई।।

  2752. RCM 2.278.7Open verse →

    रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू। इहाँ उचित नहिं असन अनाजू।।

    अर्थ · Hindi

    रिषि रुख लखि कह तेरहुतिराजू। इहाँ उचित नहिं असन अनाजू।।

  2753. RCM 2.278.8Open verse →

    कहा भूप भल सबहि सोहाना। पाइ रजायसु चले नहाना।।

    अर्थ · Hindi

    कहा भूप भल सबहि सोहाना। पाइ रजायसु चले नहाना।।

  2754. RCM 2.278.9Open verse →

    तेहि अवसर फल फूल दल मूल अनेक प्रकार।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर फल फूल दल मूल अनेक प्रकार।

  2755. RCM 2.278.10Open verse →

    लइ आए बनचर बिपुल भरि भरि काँवरि भार।।278।।

    अर्थ · Hindi

    लइ आए बनचर बिपुल भरि भरि काँवरि भार।।278।।

  2756. RCM 2.279.1Open verse →

    कामद मे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत बिषादा।।

    अर्थ · Hindi

    कामद मे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत बिषादा।।

  2757. RCM 2.279.2Open verse →

    सर सरिता बन भूमि बिभागा। जनु उमगत आनँद अनुरागा।।

    अर्थ · Hindi

    सर सरिता बन भूमि बिभागा। जनु उमगत आनँद अनुरागा।।

  2758. RCM 2.279.3Open verse →

    बेलि बिटप सब सफल सफूला। बोलत खग मृग अलि अनुकूला।।

    अर्थ · Hindi

    बेलि बिटप सब सफल सफूला। बोलत खग मृग अलि अनुकूला।।

  2759. RCM 2.279.4Open verse →

    तेहि अवसर बन अधिक उछाहू। त्रिबिध समीर सुखद सब काहू।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर बन अधिक उछाहू। त्रिबिध समीर सुखद सब काहू।।

  2760. RCM 2.279.5Open verse →

    जाइ न बरनि मनोहरताई। जनु महि करति जनक पहुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ न बरनि मनोहरताई। जनु महि करति जनक पहुनाई।।

  2761. RCM 2.279.6Open verse →

    तब सब लोग नहाइ नहाई। राम जनक मुनि आयसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब सब लोग नहाइ नहाई। राम जनक मुनि आयसु पाई।।

  2762. RCM 2.279.7Open verse →

    देखि देखि तरुबर अनुरागे। जहँ तहँ पुरजन उतरन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    देखि देखि तरुबर अनुरागे। जहँ तहँ पुरजन उतरन लागे।।

  2763. RCM 2.279.8Open verse →

    दल फल मूल कंद बिधि नाना। पावन सुंदर सुधा समाना।।

    अर्थ · Hindi

    दल फल मूल कंद बिधि नाना। पावन सुंदर सुधा समाना।।

  2764. RCM 2.279.9Open verse →

    सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि भरि भार।

    अर्थ · Hindi

    सादर सब कहँ रामगुर पठए भरि भरि भार।

  2765. RCM 2.279.10Open verse →

    पूजि पितर सुर अतिथि गुर लगे करन फरहार।।279।।

    अर्थ · Hindi

    पूजि पितर सुर अतिथि गुर लगे करन फरहार।।279।।

  2766. RCM 2.280.1Open verse →

    एहि बिधि बासर बीते चारी। रामु निरखि नर नारि सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि बासर बीते चारी। रामु निरखि नर नारि सुखारी।।

  2767. RCM 2.280.2Open verse →

    दुहु समाज असि रुचि मन माहीं। बिनु सिय राम फिरब भल नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    दुहु समाज असि रुचि मन माहीं। बिनु सिय राम फिरब भल नाहीं।।

  2768. RCM 2.280.3Open verse →

    सीता राम संग बनबासू। कोटि अमरपुर सरिस सुपासू।।

    अर्थ · Hindi

    सीता राम संग बनबासू। कोटि अमरपुर सरिस सुपासू।।

  2769. RCM 2.280.4Open verse →

    परिहरि लखन रामु बैदेही। जेहि घरु भाव बाम बिधि तेही।।

    अर्थ · Hindi

    परिहरि लखन रामु बैदेही। जेहि घरु भाव बाम बिधि तेही।।

  2770. RCM 2.280.5Open verse →

    दाहिन दइउ होइ जब सबही। राम समीप बसिअ बन तबही।।

    अर्थ · Hindi

    दाहिन दइउ होइ जब सबही। राम समीप बसिअ बन तबही।।

  2771. RCM 2.280.6Open verse →

    मंदाकिनि मज्जनु तिहु काला। राम दरसु मुद मंगल माला।।

    अर्थ · Hindi

    मंदाकिनि मज्जनु तिहु काला। राम दरसु मुद मंगल माला।।

  2772. RCM 2.280.7Open verse →

    अटनु राम गिरि बन तापस थल। असनु अमिअ सम कंद मूल फल।।

    अर्थ · Hindi

    अटनु राम गिरि बन तापस थल। असनु अमिअ सम कंद मूल फल।।

  2773. RCM 2.280.8Open verse →

    सुख समेत संबत दुइ साता। पल सम होहिं न जनिअहिं जाता।।

    अर्थ · Hindi

    सुख समेत संबत दुइ साता। पल सम होहिं न जनिअहिं जाता।।

  2774. RCM 2.280.9Open verse →

    एहि सुख जोग न लोग सब कहहिं कहाँ अस भागु।।

    अर्थ · Hindi

    एहि सुख जोग न लोग सब कहहिं कहाँ अस भागु।।

  2775. RCM 2.280.10Open verse →

    सहज सुभायँ समाज दुहु राम चरन अनुरागु।।280।।

    अर्थ · Hindi

    सहज सुभायँ समाज दुहु राम चरन अनुरागु।।280।।

  2776. RCM 2.281.1Open verse →

    एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। बचन सप्रेम सुनत मन हरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सकल मनोरथ करहीं। बचन सप्रेम सुनत मन हरहीं।।

  2777. RCM 2.281.2Open verse →

    सीय मातु तेहि समय पठाईं। दासीं देखि सुअवसरु आईं।।

    अर्थ · Hindi

    सीय मातु तेहि समय पठाईं। दासीं देखि सुअवसरु आईं।।

  2778. RCM 2.281.3Open verse →

    सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू।।

    अर्थ · Hindi

    सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू।।

  2779. RCM 2.281.4Open verse →

    कौसल्याँ सादर सनमानी। आसन दिए समय सम आनी।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्याँ सादर सनमानी। आसन दिए समय सम आनी।।

  2780. RCM 2.281.5Open verse →

    सीलु सनेह सकल दुहु ओरा। द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सीलु सनेह सकल दुहु ओरा। द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा।।

  2781. RCM 2.281.6Open verse →

    पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन। महि नख लिखन लगीं सब सोचन।।

    अर्थ · Hindi

    पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन। महि नख लिखन लगीं सब सोचन।।

  2782. RCM 2.281.7Open verse →

    सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती। जनु करुना बहु बेष बिसूरति।।

    अर्थ · Hindi

    सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती। जनु करुना बहु बेष बिसूरति।।

  2783. RCM 2.281.8Open verse →

    सीय मातु कह बिधि बुधि बाँकी। जो पय फेनु फोर पबि टाँकी।।

    अर्थ · Hindi

    सीय मातु कह बिधि बुधि बाँकी। जो पय फेनु फोर पबि टाँकी।।

  2784. RCM 2.281.9Open verse →

    सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल।

    अर्थ · Hindi

    सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल।

  2785. RCM 2.281.10Open verse →

    जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल।।281।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल।।281।।

  2786. RCM 2.282.1Open verse →

    सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा। बिधि गति बड़ि बिपरीत बिचित्रा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि ससोच कह देबि सुमित्रा। बिधि गति बड़ि बिपरीत बिचित्रा।।

  2787. RCM 2.282.2Open verse →

    जो सृजि पालइ हरइ बहोरी। बाल केलि सम बिधि मति भोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जो सृजि पालइ हरइ बहोरी। बाल केलि सम बिधि मति भोरी।।

  2788. RCM 2.282.3Open verse →

    कौसल्या कह दोसु न काहू। करम बिबस दुख सुख छति लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या कह दोसु न काहू। करम बिबस दुख सुख छति लाहू।।

  2789. RCM 2.282.4Open verse →

    कठिन करम गति जान बिधाता। जो सुभ असुभ सकल फल दाता।।

    अर्थ · Hindi

    कठिन करम गति जान बिधाता। जो सुभ असुभ सकल फल दाता।।

  2790. RCM 2.282.5Open verse →

    ईस रजाइ सीस सबही कें। उतपति थिति लय बिषहु अमी कें।।

    अर्थ · Hindi

    ईस रजाइ सीस सबही कें। उतपति थिति लय बिषहु अमी कें।।

  2791. RCM 2.282.6Open verse →

    देबि मोह बस सोचिअ बादी। बिधि प्रपंचु अस अचल अनादी।।

    अर्थ · Hindi

    देबि मोह बस सोचिअ बादी। बिधि प्रपंचु अस अचल अनादी।।

  2792. RCM 2.282.7Open verse →

    भूपति जिअब मरब उर आनी। सोचिअ सखि लखि निज हित हानी।।

    अर्थ · Hindi

    भूपति जिअब मरब उर आनी। सोचिअ सखि लखि निज हित हानी।।

  2793. RCM 2.282.8Open verse →

    सीय मातु कह सत्य सुबानी। सुकृती अवधि अवधपति रानी।।

    अर्थ · Hindi

    सीय मातु कह सत्य सुबानी। सुकृती अवधि अवधपति रानी।।

  2794. RCM 2.282.9Open verse →

    लखनु राम सिय जाहुँ बन भल परिनाम न पोचु।

    अर्थ · Hindi

    लखनु राम सिय जाहुँ बन भल परिनाम न पोचु।

  2795. RCM 2.282.10Open verse →

    गहबरि हियँ कह कौसिला मोहि भरत कर सोचु।।282।।

    अर्थ · Hindi

    गहबरि हियँ कह कौसिला मोहि भरत कर सोचु।।282।।

  2796. RCM 2.283.1Open verse →

    ईस प्रसाद असीस तुम्हारी। सुत सुतबधू देवसरि बारी।।

    अर्थ · Hindi

    ईस प्रसाद असीस तुम्हारी। सुत सुतबधू देवसरि बारी।।

  2797. RCM 2.283.2Open verse →

    राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ। सो करि कहउँ सखी सति भाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    राम सपथ मैं कीन्ह न काऊ। सो करि कहउँ सखी सति भाऊ।।

  2798. RCM 2.283.3Open verse →

    भरत सील गुन बिनय बड़ाई। भायप भगति भरोस भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सील गुन बिनय बड़ाई। भायप भगति भरोस भलाई।।

  2799. RCM 2.283.4Open verse →

    कहत सारदहु कर मति हीचे। सागर सीप कि जाहिं उलीचे।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सारदहु कर मति हीचे। सागर सीप कि जाहिं उलीचे।।

  2800. RCM 2.283.5Open verse →

    जानउँ सदा भरत कुलदीपा। बार बार मोहि कहेउ महीपा।।

    अर्थ · Hindi

    जानउँ सदा भरत कुलदीपा। बार बार मोहि कहेउ महीपा।।

  2801. RCM 2.283.6Open verse →

    कसें कनकु मनि पारिखि पाएँ। पुरुष परिखिअहिं समयँ सुभाएँ।

    अर्थ · Hindi

    कसें कनकु मनि पारिखि पाएँ। पुरुष परिखिअहिं समयँ सुभाएँ।

  2802. RCM 2.283.7Open verse →

    अनुचित आजु कहब अस मोरा। सोक सनेहँ सयानप थोरा।।

    अर्थ · Hindi

    अनुचित आजु कहब अस मोरा। सोक सनेहँ सयानप थोरा।।

  2803. RCM 2.283.8Open verse →

    सुनि सुरसरि सम पावनि बानी। भईं सनेह बिकल सब रानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुरसरि सम पावनि बानी। भईं सनेह बिकल सब रानी।।

  2804. RCM 2.283.9Open verse →

    कौसल्या कह धीर धरि सुनहु देबि मिथिलेसि।

    अर्थ · Hindi

    कौसल्या कह धीर धरि सुनहु देबि मिथिलेसि।

  2805. RCM 2.283.10Open verse →

    को बिबेकनिधि बल्लभहि तुम्हहि सकइ उपदेसि।।283।।

    अर्थ · Hindi

    को बिबेकनिधि बल्लभहि तुम्हहि सकइ उपदेसि।।283।।

  2806. RCM 2.284.1Open verse →

    रानि राय सन अवसरु पाई। अपनी भाँति कहब समुझाई।।

    अर्थ · Hindi

    रानि राय सन अवसरु पाई। अपनी भाँति कहब समुझाई।।

  2807. RCM 2.284.2Open verse →

    रखिअहिं लखनु भरतु गबनहिं बन। जौं यह मत मानै महीप मन।।

    अर्थ · Hindi

    रखिअहिं लखनु भरतु गबनहिं बन। जौं यह मत मानै महीप मन।।

  2808. RCM 2.284.3Open verse →

    तौ भल जतनु करब सुबिचारी। मोरें सौचु भरत कर भारी।।

    अर्थ · Hindi

    तौ भल जतनु करब सुबिचारी। मोरें सौचु भरत कर भारी।।

  2809. RCM 2.284.4Open verse →

    गूढ़ सनेह भरत मन माही। रहें नीक मोहि लागत नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गूढ़ सनेह भरत मन माही। रहें नीक मोहि लागत नाहीं।।

  2810. RCM 2.284.5Open verse →

    लखि सुभाउ सुनि सरल सुबानी। सब भइ मगन करुन रस रानी।।

    अर्थ · Hindi

    लखि सुभाउ सुनि सरल सुबानी। सब भइ मगन करुन रस रानी।।

  2811. RCM 2.284.6Open verse →

    नभ प्रसून झरि धन्य धन्य धुनि। सिथिल सनेहँ सिद्ध जोगी मुनि।।

    अर्थ · Hindi

    नभ प्रसून झरि धन्य धन्य धुनि। सिथिल सनेहँ सिद्ध जोगी मुनि।।

  2812. RCM 2.284.7Open verse →

    सबु रनिवासु बिथकि लखि रहेऊ। तब धरि धीर सुमित्राँ कहेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सबु रनिवासु बिथकि लखि रहेऊ। तब धरि धीर सुमित्राँ कहेऊ।।

  2813. RCM 2.284.8Open verse →

    देबि दंड जुग जामिनि बीती। राम मातु सुनी उठी सप्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    देबि दंड जुग जामिनि बीती। राम मातु सुनी उठी सप्रीती।।

  2814. RCM 2.284.9Open verse →

    बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ सतिभाय।

    अर्थ · Hindi

    बेगि पाउ धारिअ थलहि कह सनेहँ सतिभाय।

  2815. RCM 2.284.10Open verse →

    हमरें तौ अब ईस गति के मिथिलेस सहाय।।284।।

    अर्थ · Hindi

    हमरें तौ अब ईस गति के मिथिलेस सहाय।।284।।

  2816. RCM 2.285.1Open verse →

    लखि सनेह सुनि बचन बिनीता। जनकप्रिया गह पाय पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    लखि सनेह सुनि बचन बिनीता। जनकप्रिया गह पाय पुनीता।।

  2817. RCM 2.285.2Open verse →

    देबि उचित असि बिनय तुम्हारी। दसरथ घरिनि राम महतारी।।

    अर्थ · Hindi

    देबि उचित असि बिनय तुम्हारी। दसरथ घरिनि राम महतारी।।

  2818. RCM 2.285.3Open verse →

    प्रभु अपने नीचहु आदरहीं। अगिनि धूम गिरि सिर तिनु धरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु अपने नीचहु आदरहीं। अगिनि धूम गिरि सिर तिनु धरहीं।।

  2819. RCM 2.285.4Open verse →

    सेवकु राउ करम मन बानी। सदा सहाय महेसु भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    सेवकु राउ करम मन बानी। सदा सहाय महेसु भवानी।।

  2820. RCM 2.285.5Open verse →

    रउरे अंग जोगु जग को है। दीप सहाय कि दिनकर सोहै।।

    अर्थ · Hindi

    रउरे अंग जोगु जग को है। दीप सहाय कि दिनकर सोहै।।

  2821. RCM 2.285.6Open verse →

    रामु जाइ बनु करि सुर काजू। अचल अवधपुर करिहहिं राजू।।

    अर्थ · Hindi

    रामु जाइ बनु करि सुर काजू। अचल अवधपुर करिहहिं राजू।।

  2822. RCM 2.285.7Open verse →

    अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपने थल।।

    अर्थ · Hindi

    अमर नाग नर राम बाहुबल। सुख बसिहहिं अपनें अपने थल।।

  2823. RCM 2.285.8Open verse →

    यह सब जागबलिक कहि राखा। देबि न होइ मुधा मुनि भाषा।।

    अर्थ · Hindi

    यह सब जागबलिक कहि राखा। देबि न होइ मुधा मुनि भाषा।।

  2824. RCM 2.285.9Open verse →

    अस कहि पग परि पेम अति सिय हित बिनय सुनाइ।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि पग परि पेम अति सिय हित बिनय सुनाइ।।

  2825. RCM 2.285.10Open verse →

    सिय समेत सियमातु तब चली सुआयसु पाइ।।285।।

    अर्थ · Hindi

    सिय समेत सियमातु तब चली सुआयसु पाइ।।285।।

  2826. RCM 2.286.1Open verse →

    प्रिय परिजनहि मिली बैदेही। जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिय परिजनहि मिली बैदेही। जो जेहि जोगु भाँति तेहि तेही।।

  2827. RCM 2.286.2Open verse →

    तापस बेष जानकी देखी। भा सबु बिकल बिषाद बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    तापस बेष जानकी देखी। भा सबु बिकल बिषाद बिसेषी।।

  2828. RCM 2.286.3Open verse →

    जनक राम गुर आयसु पाई। चले थलहि सिय देखी आई।।

    अर्थ · Hindi

    जनक राम गुर आयसु पाई। चले थलहि सिय देखी आई।।

  2829. RCM 2.286.4Open verse →

    लीन्हि लाइ उर जनक जानकी। पाहुन पावन पेम प्रान की।।

    अर्थ · Hindi

    लीन्हि लाइ उर जनक जानकी। पाहुन पावन पेम प्रान की।।

  2830. RCM 2.286.5Open verse →

    उर उमगेउ अंबुधि अनुरागू। भयउ भूप मनु मनहुँ पयागू।।

    अर्थ · Hindi

    उर उमगेउ अंबुधि अनुरागू। भयउ भूप मनु मनहुँ पयागू।।

  2831. RCM 2.286.6Open verse →

    सिय सनेह बटु बाढ़त जोहा। ता पर राम पेम सिसु सोहा।।

    अर्थ · Hindi

    सिय सनेह बटु बाढ़त जोहा। ता पर राम पेम सिसु सोहा।।

  2832. RCM 2.286.7Open verse →

    चिरजीवी मुनि ग्यान बिकल जनु। बूड़त लहेउ बाल अवलंबनु।।

    अर्थ · Hindi

    चिरजीवी मुनि ग्यान बिकल जनु। बूड़त लहेउ बाल अवलंबनु।।

  2833. RCM 2.286.8Open verse →

    मोह मगन मति नहिं बिदेह की। महिमा सिय रघुबर सनेह की।।

    अर्थ · Hindi

    मोह मगन मति नहिं बिदेह की। महिमा सिय रघुबर सनेह की।।

  2834. RCM 2.286.9Open verse →

    सिय पितु मातु सनेह बस बिकल न सकी सँभारि।

    अर्थ · Hindi

    सिय पितु मातु सनेह बस बिकल न सकी सँभारि।

  2835. RCM 2.286.10Open verse →

    धरनिसुताँ धीरजु धरेउ समउ सुधरमु बिचारि।।286।।

    अर्थ · Hindi

    धरनिसुताँ धीरजु धरेउ समउ सुधरमु बिचारि।।286।।

  2836. RCM 2.287.1Open verse →

    तापस बेष जनक सिय देखी। भयउ पेमु परितोषु बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    तापस बेष जनक सिय देखी। भयउ पेमु परितोषु बिसेषी।।

  2837. RCM 2.287.2Open verse →

    पुत्रि पवित्र किए कुल दोऊ। सुजस धवल जगु कह सबु कोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    पुत्रि पवित्र किए कुल दोऊ। सुजस धवल जगु कह सबु कोऊ।।

  2838. RCM 2.287.3Open verse →

    जिति सुरसरि कीरति सरि तोरी। गवनु कीन्ह बिधि अंड करोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जिति सुरसरि कीरति सरि तोरी। गवनु कीन्ह बिधि अंड करोरी।।

  2839. RCM 2.287.4Open verse →

    गंग अवनि थल तीनि बड़ेरे। एहिं किए साधु समाज घनेरे।।

    अर्थ · Hindi

    गंग अवनि थल तीनि बड़ेरे। एहिं किए साधु समाज घनेरे।।

  2840. RCM 2.287.5Open verse →

    पितु कह सत्य सनेहँ सुबानी। सीय सकुच महुँ मनहुँ समानी।।

    अर्थ · Hindi

    पितु कह सत्य सनेहँ सुबानी। सीय सकुच महुँ मनहुँ समानी।।

  2841. RCM 2.287.6Open verse →

    पुनि पितु मातु लीन्ह उर लाई। सिख आसिष हित दीन्हि सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पितु मातु लीन्ह उर लाई। सिख आसिष हित दीन्हि सुहाई।।

  2842. RCM 2.287.7Open verse →

    कहति न सीय सकुचि मन माहीं। इहाँ बसब रजनीं भल नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कहति न सीय सकुचि मन माहीं। इहाँ बसब रजनीं भल नाहीं।।

  2843. RCM 2.287.8Open verse →

    लखि रुख रानि जनायउ राऊ। हृदयँ सराहत सीलु सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    लखि रुख रानि जनायउ राऊ। हृदयँ सराहत सीलु सुभाऊ।।

  2844. RCM 2.287.9Open verse →

    बार बार मिलि भेंट सिय बिदा कीन्ह सनमानि।

    अर्थ · Hindi

    बार बार मिलि भेंट सिय बिदा कीन्ह सनमानि।

  2845. RCM 2.287.10Open verse →

    कही समय सिर भरत गति रानि सुबानि सयानि।।287।।

    अर्थ · Hindi

    कही समय सिर भरत गति रानि सुबानि सयानि।।287।।

  2846. RCM 2.288.1Open verse →

    सुनि भूपाल भरत ब्यवहारू। सोन सुगंध सुधा ससि सारू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि भूपाल भरत ब्यवहारू। सोन सुगंध सुधा ससि सारू।।

  2847. RCM 2.288.2Open verse →

    मूदे सजल नयन पुलके तन। सुजसु सराहन लगे मुदित मन।।

    अर्थ · Hindi

    मूदे सजल नयन पुलके तन। सुजसु सराहन लगे मुदित मन।।

  2848. RCM 2.288.3Open verse →

    सावधान सुनु सुमुखि सुलोचनि। भरत कथा भव बंध बिमोचनि।।

    अर्थ · Hindi

    सावधान सुनु सुमुखि सुलोचनि। भरत कथा भव बंध बिमोचनि।।

  2849. RCM 2.288.4Open verse →

    धरम राजनय ब्रह्मबिचारू। इहाँ जथामति मोर प्रचारू।।

    अर्थ · Hindi

    धरम राजनय ब्रह्मबिचारू। इहाँ जथामति मोर प्रचारू।।

  2850. RCM 2.288.5Open verse →

    सो मति मोरि भरत महिमाही। कहै काह छलि छुअति न छाँही।।

    अर्थ · Hindi

    सो मति मोरि भरत महिमाही। कहै काह छलि छुअति न छाँही।।

  2851. RCM 2.288.6Open verse →

    बिधि गनपति अहिपति सिव सारद। कबि कोबिद बुध बुद्धि बिसारद।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि गनपति अहिपति सिव सारद। कबि कोबिद बुध बुद्धि बिसारद।।

  2852. RCM 2.288.7Open verse →

    भरत चरित कीरति करतूती। धरम सील गुन बिमल बिभूती।।

    अर्थ · Hindi

    भरत चरित कीरति करतूती। धरम सील गुन बिमल बिभूती।।

  2853. RCM 2.288.8Open verse →

    समुझत सुनत सुखद सब काहू। सुचि सुरसरि रुचि निदर सुधाहू।।

    अर्थ · Hindi

    समुझत सुनत सुखद सब काहू। सुचि सुरसरि रुचि निदर सुधाहू।।

  2854. RCM 2.288.9Open verse →

    निरवधि गुन निरुपम पुरुषु भरतु भरत सम जानि।

    अर्थ · Hindi

    निरवधि गुन निरुपम पुरुषु भरतु भरत सम जानि।

  2855. RCM 2.288.10Open verse →

    कहिअ सुमेरु कि सेर सम कबिकुल मति सकुचानि।।288।।

    अर्थ · Hindi

    कहिअ सुमेरु कि सेर सम कबिकुल मति सकुचानि।।288।।

  2856. RCM 2.289.1Open verse →

    अगम सबहि बरनत बरबरनी। जिमि जलहीन मीन गमु धरनी।।

    अर्थ · Hindi

    अगम सबहि बरनत बरबरनी। जिमि जलहीन मीन गमु धरनी।।

  2857. RCM 2.289.2Open verse →

    भरत अमित महिमा सुनु रानी। जानहिं रामु न सकहिं बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत अमित महिमा सुनु रानी। जानहिं रामु न सकहिं बखानी।।

  2858. RCM 2.289.3Open verse →

    बरनि सप्रेम भरत अनुभाऊ। तिय जिय की रुचि लखि कह राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बरनि सप्रेम भरत अनुभाऊ। तिय जिय की रुचि लखि कह राऊ।।

  2859. RCM 2.289.4Open verse →

    बहुरहिं लखनु भरतु बन जाहीं। सब कर भल सब के मन माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरहिं लखनु भरतु बन जाहीं। सब कर भल सब के मन माहीं।।

  2860. RCM 2.289.5Open verse →

    देबि परंतु भरत रघुबर की। प्रीति प्रतीति जाइ नहिं तरकी।।

    अर्थ · Hindi

    देबि परंतु भरत रघुबर की। प्रीति प्रतीति जाइ नहिं तरकी।।

  2861. RCM 2.289.6Open verse →

    भरतु अवधि सनेह ममता की। जद्यपि रामु सीम समता की।।

    अर्थ · Hindi

    भरतु अवधि सनेह ममता की। जद्यपि रामु सीम समता की।।

  2862. RCM 2.289.7Open verse →

    परमारथ स्वारथ सुख सारे। भरत न सपनेहुँ मनहुँ निहारे।।

    अर्थ · Hindi

    परमारथ स्वारथ सुख सारे। भरत न सपनेहुँ मनहुँ निहारे।।

  2863. RCM 2.289.8Open verse →

    साधन सिद्ध राम पग नेहू।।मोहि लखि परत भरत मत एहू।।

    अर्थ · Hindi

    साधन सिद्ध राम पग नेहू।।मोहि लखि परत भरत मत एहू।।

  2864. RCM 2.289.9Open verse →

    भोरेहुँ भरत न पेलिहहिं मनसहुँ राम रजाइ।

    अर्थ · Hindi

    भोरेहुँ भरत न पेलिहहिं मनसहुँ राम रजाइ।

  2865. RCM 2.289.10Open verse →

    करिअ न सोचु सनेह बस कहेउ भूप बिलखाइ।।289।।

    अर्थ · Hindi

    करिअ न सोचु सनेह बस कहेउ भूप बिलखाइ।।289।।

  2866. RCM 2.290.1Open verse →

    राम भरत गुन गनत सप्रीती। निसि दंपतिहि पलक सम बीती।।

    अर्थ · Hindi

    राम भरत गुन गनत सप्रीती। निसि दंपतिहि पलक सम बीती।।

  2867. RCM 2.290.2Open verse →

    राज समाज प्रात जुग जागे। न्हाइ न्हाइ सुर पूजन लागे।।

    अर्थ · Hindi

    राज समाज प्रात जुग जागे। न्हाइ न्हाइ सुर पूजन लागे।।

  2868. RCM 2.290.3Open verse →

    गे नहाइ गुर पहीं रघुराई। बंदि चरन बोले रुख पाई।।

    अर्थ · Hindi

    गे नहाइ गुर पहीं रघुराई। बंदि चरन बोले रुख पाई।।

  2869. RCM 2.290.4Open verse →

    नाथ भरतु पुरजन महतारी। सोक बिकल बनबास दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ भरतु पुरजन महतारी। सोक बिकल बनबास दुखारी।।

  2870. RCM 2.290.5Open verse →

    सहित समाज राउ मिथिलेसू। बहुत दिवस भए सहत कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    सहित समाज राउ मिथिलेसू। बहुत दिवस भए सहत कलेसू।।

  2871. RCM 2.290.6Open verse →

    उचित होइ सोइ कीजिअ नाथा। हित सबही कर रौरें हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    उचित होइ सोइ कीजिअ नाथा। हित सबही कर रौरें हाथा।।

  2872. RCM 2.290.7Open verse →

    अस कहि अति सकुचे रघुराऊ। मुनि पुलके लखि सीलु सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि अति सकुचे रघुराऊ। मुनि पुलके लखि सीलु सुभाऊ।।

  2873. RCM 2.290.8Open verse →

    तुम्ह बिनु राम सकल सुख साजा। नरक सरिस दुहु राज समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह बिनु राम सकल सुख साजा। नरक सरिस दुहु राज समाजा।।

  2874. RCM 2.290.9Open verse →

    प्रान प्रान के जीव के जिव सुख के सुख राम।

    अर्थ · Hindi

    प्रान प्रान के जीव के जिव सुख के सुख राम।

  2875. RCM 2.290.10Open verse →

    तुम्ह तजि तात सोहात गृह जिन्हहि तिन्हहिं बिधि बाम।।290।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह तजि तात सोहात गृह जिन्हहि तिन्हहिं बिधि बाम।।290।।

  2876. RCM 2.291.1Open verse →

    सो सुखु करमु धरमु जरि जाऊ। जहँ न राम पद पंकज भाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सो सुखु करमु धरमु जरि जाऊ। जहँ न राम पद पंकज भाऊ।।

  2877. RCM 2.291.2Open verse →

    जोगु कुजोगु ग्यानु अग्यानू। जहँ नहिं राम पेम परधानू।।

    अर्थ · Hindi

    जोगु कुजोगु ग्यानु अग्यानू। जहँ नहिं राम पेम परधानू।।

  2878. RCM 2.291.3Open verse →

    तुम्ह बिनु दुखी सुखी तुम्ह तेहीं। तुम्ह जानहु जिय जो जेहि केहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह बिनु दुखी सुखी तुम्ह तेहीं। तुम्ह जानहु जिय जो जेहि केहीं।।

  2879. RCM 2.291.4Open verse →

    राउर आयसु सिर सबही कें। बिदित कृपालहि गति सब नीकें।।

    अर्थ · Hindi

    राउर आयसु सिर सबही कें। बिदित कृपालहि गति सब नीकें।।

  2880. RCM 2.291.5Open verse →

    आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ। भयउ सनेह सिथिल मुनिराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    आपु आश्रमहि धारिअ पाऊ। भयउ सनेह सिथिल मुनिराऊ।।

  2881. RCM 2.291.6Open verse →

    करि प्रनाम तब रामु सिधाए। रिषि धरि धीर जनक पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनाम तब रामु सिधाए। रिषि धरि धीर जनक पहिं आए।।

  2882. RCM 2.291.7Open verse →

    राम बचन गुरु नृपहि सुनाए। सील सनेह सुभायँ सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    राम बचन गुरु नृपहि सुनाए। सील सनेह सुभायँ सुहाए।।

  2883. RCM 2.291.8Open verse →

    महाराज अब कीजिअ सोई। सब कर धरम सहित हित होई।।

    अर्थ · Hindi

    महाराज अब कीजिअ सोई। सब कर धरम सहित हित होई।।

  2884. RCM 2.291.9Open verse →

    ग्यान निधान सुजान सुचि धरम धीर नरपाल।

    अर्थ · Hindi

    ग्यान निधान सुजान सुचि धरम धीर नरपाल।

  2885. RCM 2.291.10Open verse →

    तुम्ह बिनु असमंजस समन को समरथ एहि काल।।291।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह बिनु असमंजस समन को समरथ एहि काल।।291।।

  2886. RCM 2.292.1Open verse →

    सुनि मुनि बचन जनक अनुरागे। लखि गति ग्यानु बिरागु बिरागे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मुनि बचन जनक अनुरागे। लखि गति ग्यानु बिरागु बिरागे।।

  2887. RCM 2.292.2Open verse →

    सिथिल सनेहँ गुनत मन माहीं। आए इहाँ कीन्ह भल नाही।।

    अर्थ · Hindi

    सिथिल सनेहँ गुनत मन माहीं। आए इहाँ कीन्ह भल नाही।।

  2888. RCM 2.292.3Open verse →

    रामहि रायँ कहेउ बन जाना। कीन्ह आपु प्रिय प्रेम प्रवाना।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि रायँ कहेउ बन जाना। कीन्ह आपु प्रिय प्रेम प्रवाना।।

  2889. RCM 2.292.4Open verse →

    हम अब बन तें बनहि पठाई। प्रमुदित फिरब बिबेक बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    हम अब बन तें बनहि पठाई। प्रमुदित फिरब बिबेक बड़ाई।।

  2890. RCM 2.292.5Open verse →

    तापस मुनि महिसुर सुनि देखी। भए प्रेम बस बिकल बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    तापस मुनि महिसुर सुनि देखी। भए प्रेम बस बिकल बिसेषी।।

  2891. RCM 2.292.6Open verse →

    समउ समुझि धरि धीरजु राजा। चले भरत पहिं सहित समाजा।।

    अर्थ · Hindi

    समउ समुझि धरि धीरजु राजा। चले भरत पहिं सहित समाजा।।

  2892. RCM 2.292.7Open verse →

    भरत आइ आगें भइ लीन्हे। अवसर सरिस सुआसन दीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    भरत आइ आगें भइ लीन्हे। अवसर सरिस सुआसन दीन्हे।।

  2893. RCM 2.292.8Open verse →

    तात भरत कह तेरहुति राऊ। तुम्हहि बिदित रघुबीर सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तात भरत कह तेरहुति राऊ। तुम्हहि बिदित रघुबीर सुभाऊ।।

  2894. RCM 2.292.9Open verse →

    राम सत्यब्रत धरम रत सब कर सीलु सनेहु।।

    अर्थ · Hindi

    राम सत्यब्रत धरम रत सब कर सीलु सनेहु।।

  2895. RCM 2.292.10Open verse →

    संकट सहत सकोच बस कहिअ जो आयसु देहु।।292।।

    अर्थ · Hindi

    संकट सहत सकोच बस कहिअ जो आयसु देहु।।292।।

  2896. RCM 2.293.1Open verse →

    सुनि तन पुलकि नयन भरि बारी। बोले भरतु धीर धरि भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि तन पुलकि नयन भरि बारी। बोले भरतु धीर धरि भारी।।

  2897. RCM 2.293.2Open verse →

    प्रभु प्रिय पूज्य पिता सम आपू। कुलगुरु सम हित माय न बापू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रिय पूज्य पिता सम आपू। कुलगुरु सम हित माय न बापू।।

  2898. RCM 2.293.3Open verse →

    कौसिकादि मुनि सचिव समाजू। ग्यान अंबुनिधि आपुनु आजू।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिकादि मुनि सचिव समाजू। ग्यान अंबुनिधि आपुनु आजू।।

  2899. RCM 2.293.4Open verse →

    सिसु सेवक आयसु अनुगामी। जानि मोहि सिख देइअ स्वामी।।

    अर्थ · Hindi

    सिसु सेवक आयसु अनुगामी। जानि मोहि सिख देइअ स्वामी।।

  2900. RCM 2.293.5Open verse →

    एहिं समाज थल बूझब राउर। मौन मलिन मैं बोलब बाउर।।

    अर्थ · Hindi

    एहिं समाज थल बूझब राउर। मौन मलिन मैं बोलब बाउर।।

  2901. RCM 2.293.6Open verse →

    छोटे बदन कहउँ बड़ि बाता। छमब तात लखि बाम बिधाता।।

    अर्थ · Hindi

    छोटे बदन कहउँ बड़ि बाता। छमब तात लखि बाम बिधाता।।

  2902. RCM 2.293.7Open verse →

    आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। सेवाधरमु कठिन जगु जाना।।

    अर्थ · Hindi

    आगम निगम प्रसिद्ध पुराना। सेवाधरमु कठिन जगु जाना।।

  2903. RCM 2.293.8Open verse →

    स्वामि धरम स्वारथहि बिरोधू। बैरु अंध प्रेमहि न प्रबोधू।।

    अर्थ · Hindi

    स्वामि धरम स्वारथहि बिरोधू। बैरु अंध प्रेमहि न प्रबोधू।।

  2904. RCM 2.293.9Open verse →

    राखि राम रुख धरमु ब्रतु पराधीन मोहि जानि।

    अर्थ · Hindi

    राखि राम रुख धरमु ब्रतु पराधीन मोहि जानि।

  2905. RCM 2.293.10Open verse →

    सब कें संमत सर्ब हित करिअ पेमु पहिचानि।।293।।

    अर्थ · Hindi

    सब कें संमत सर्ब हित करिअ पेमु पहिचानि।।293।।

  2906. RCM 2.294.1Open verse →

    भरत बचन सुनि देखि सुभाऊ। सहित समाज सराहत राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बचन सुनि देखि सुभाऊ। सहित समाज सराहत राऊ।।

  2907. RCM 2.294.2Open verse →

    सुगम अगम मृदु मंजु कठोरे। अरथु अमित अति आखर थोरे।।

    अर्थ · Hindi

    सुगम अगम मृदु मंजु कठोरे। अरथु अमित अति आखर थोरे।।

  2908. RCM 2.294.3Open verse →

    ज्यौ मुख मुकुर मुकुरु निज पानी। गहि न जाइ अस अदभुत बानी।।

    अर्थ · Hindi

    ज्यौ मुख मुकुर मुकुरु निज पानी। गहि न जाइ अस अदभुत बानी।।

  2909. RCM 2.294.4Open verse →

    भूप भरत मुनि सहित समाजू। गे जहँ बिबुध कुमुद द्विजराजू।।

    अर्थ · Hindi

    भूप भरत मुनि सहित समाजू। गे जहँ बिबुध कुमुद द्विजराजू।।

  2910. RCM 2.294.5Open verse →

    सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा। मनहुँ मीनगन नव जल जोगा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुधि सोच बिकल सब लोगा। मनहुँ मीनगन नव जल जोगा।।

  2911. RCM 2.294.6Open verse →

    देवँ प्रथम कुलगुर गति देखी। निरखि बिदेह सनेह बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    देवँ प्रथम कुलगुर गति देखी। निरखि बिदेह सनेह बिसेषी।।

  2912. RCM 2.294.7Open verse →

    राम भगतिमय भरतु निहारे। सुर स्वारथी हहरि हियँ हारे।।

    अर्थ · Hindi

    राम भगतिमय भरतु निहारे। सुर स्वारथी हहरि हियँ हारे।।

  2913. RCM 2.294.8Open verse →

    सब कोउ राम पेममय पेखा। भउ अलेख सोच बस लेखा।।

    अर्थ · Hindi

    सब कोउ राम पेममय पेखा। भउ अलेख सोच बस लेखा।।

  2914. RCM 2.294.9Open verse →

    रामु सनेह सकोच बस कह ससोच सुरराज।

    अर्थ · Hindi

    रामु सनेह सकोच बस कह ससोच सुरराज।

  2915. RCM 2.294.10Open verse →

    रचहु प्रपंचहि पंच मिलि नाहिं त भयउ अकाजु।।294।।

    अर्थ · Hindi

    रचहु प्रपंचहि पंच मिलि नाहिं त भयउ अकाजु।।294।।

  2916. RCM 2.295.1Open verse →

    सुरन्ह सुमिरि सारदा सराही। देबि देव सरनागत पाही।।

    अर्थ · Hindi

    सुरन्ह सुमिरि सारदा सराही। देबि देव सरनागत पाही।।

  2917. RCM 2.295.2Open verse →

    फेरि भरत मति करि निज माया। पालु बिबुध कुल करि छल छाया।।

    अर्थ · Hindi

    फेरि भरत मति करि निज माया। पालु बिबुध कुल करि छल छाया।।

  2918. RCM 2.295.3Open verse →

    बिबुध बिनय सुनि देबि सयानी। बोली सुर स्वारथ जड़ जानी।।

    अर्थ · Hindi

    बिबुध बिनय सुनि देबि सयानी। बोली सुर स्वारथ जड़ जानी।।

  2919. RCM 2.295.4Open verse →

    मो सन कहहु भरत मति फेरू। लोचन सहस न सूझ सुमेरू।।

    अर्थ · Hindi

    मो सन कहहु भरत मति फेरू। लोचन सहस न सूझ सुमेरू।।

  2920. RCM 2.295.5Open verse →

    बिधि हरि हर माया बड़ि भारी। सोउ न भरत मति सकइ निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि हरि हर माया बड़ि भारी। सोउ न भरत मति सकइ निहारी।।

  2921. RCM 2.295.6Open verse →

    सो मति मोहि कहत करु भोरी। चंदिनि कर कि चंडकर चोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सो मति मोहि कहत करु भोरी। चंदिनि कर कि चंडकर चोरी।।

  2922. RCM 2.295.7Open verse →

    भरत हृदयँ सिय राम निवासू। तहँ कि तिमिर जहँ तरनि प्रकासू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत हृदयँ सिय राम निवासू। तहँ कि तिमिर जहँ तरनि प्रकासू।।

  2923. RCM 2.295.8Open verse →

    अस कहि सारद गइ बिधि लोका। बिबुध बिकल निसि मानहुँ कोका।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि सारद गइ बिधि लोका। बिबुध बिकल निसि मानहुँ कोका।।

  2924. RCM 2.295.9Open verse →

    सुर स्वारथी मलीन मन कीन्ह कुमंत्र कुठाटु।।

    अर्थ · Hindi

    सुर स्वारथी मलीन मन कीन्ह कुमंत्र कुठाटु।।

  2925. RCM 2.295.10Open verse →

    रचि प्रपंच माया प्रबल भय भ्रम अरति उचाटु।।295।।

    अर्थ · Hindi

    रचि प्रपंच माया प्रबल भय भ्रम अरति उचाटु।।295।।

  2926. RCM 2.296.1Open verse →

    करि कुचालि सोचत सुरराजू। भरत हाथ सबु काजु अकाजू।।

    अर्थ · Hindi

    करि कुचालि सोचत सुरराजू। भरत हाथ सबु काजु अकाजू।।

  2927. RCM 2.296.2Open verse →

    गए जनकु रघुनाथ समीपा। सनमाने सब रबिकुल दीपा।।

    अर्थ · Hindi

    गए जनकु रघुनाथ समीपा। सनमाने सब रबिकुल दीपा।।

  2928. RCM 2.296.3Open verse →

    समय समाज धरम अबिरोधा। बोले तब रघुबंस पुरोधा।।

    अर्थ · Hindi

    समय समाज धरम अबिरोधा। बोले तब रघुबंस पुरोधा।।

  2929. RCM 2.296.4Open verse →

    जनक भरत संबादु सुनाई। भरत कहाउति कही सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जनक भरत संबादु सुनाई। भरत कहाउति कही सुहाई।।

  2930. RCM 2.296.5Open verse →

    तात राम जस आयसु देहू। सो सबु करै मोर मत एहू।।

    अर्थ · Hindi

    तात राम जस आयसु देहू। सो सबु करै मोर मत एहू।।

  2931. RCM 2.296.6Open verse →

    सुनि रघुनाथ जोरि जुग पानी। बोले सत्य सरल मृदु बानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रघुनाथ जोरि जुग पानी। बोले सत्य सरल मृदु बानी।।

  2932. RCM 2.296.7Open verse →

    बिद्यमान आपुनि मिथिलेसू। मोर कहब सब भाँति भदेसू।।

    अर्थ · Hindi

    बिद्यमान आपुनि मिथिलेसू। मोर कहब सब भाँति भदेसू।।

  2933. RCM 2.296.8Open verse →

    राउर राय रजायसु होई। राउरि सपथ सही सिर सोई।।

    अर्थ · Hindi

    राउर राय रजायसु होई। राउरि सपथ सही सिर सोई।।

  2934. RCM 2.296.9Open verse →

    राम सपथ सुनि मुनि जनकु सकुचे सभा समेत।

    अर्थ · Hindi

    राम सपथ सुनि मुनि जनकु सकुचे सभा समेत।

  2935. RCM 2.296.10Open verse →

    सकल बिलोकत भरत मुखु बनइ न उतरु देत।।296।।

    अर्थ · Hindi

    सकल बिलोकत भरत मुखु बनइ न उतरु देत।।296।।

  2936. RCM 2.297.1Open verse →

    सभा सकुच बस भरत निहारी। रामबंधु धरि धीरजु भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सभा सकुच बस भरत निहारी। रामबंधु धरि धीरजु भारी।।

  2937. RCM 2.297.2Open verse →

    कुसमउ देखि सनेहु सँभारा। बढ़त बिंधि जिमि घटज निवारा।।

    अर्थ · Hindi

    कुसमउ देखि सनेहु सँभारा। बढ़त बिंधि जिमि घटज निवारा।।

  2938. RCM 2.297.3Open verse →

    सोक कनकलोचन मति छोनी। हरी बिमल गुन गन जगजोनी।।

    अर्थ · Hindi

    सोक कनकलोचन मति छोनी। हरी बिमल गुन गन जगजोनी।।

  2939. RCM 2.297.4Open verse →

    भरत बिबेक बराहँ बिसाला। अनायास उधरी तेहि काला।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बिबेक बराहँ बिसाला। अनायास उधरी तेहि काला।।

  2940. RCM 2.297.5Open verse →

    करि प्रनामु सब कहँ कर जोरे। रामु राउ गुर साधु निहोरे।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु सब कहँ कर जोरे। रामु राउ गुर साधु निहोरे।।

  2941. RCM 2.297.6Open verse →

    छमब आजु अति अनुचित मोरा। कहउँ बदन मृदु बचन कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    छमब आजु अति अनुचित मोरा। कहउँ बदन मृदु बचन कठोरा।।

  2942. RCM 2.297.7Open verse →

    हियँ सुमिरी सारदा सुहाई। मानस तें मुख पंकज आई।।

    अर्थ · Hindi

    हियँ सुमिरी सारदा सुहाई। मानस तें मुख पंकज आई।।

  2943. RCM 2.297.8Open verse →

    बिमल बिबेक धरम नय साली। भरत भारती मंजु मराली।।

    अर्थ · Hindi

    बिमल बिबेक धरम नय साली। भरत भारती मंजु मराली।।

  2944. RCM 2.297.9Open verse →

    निरखि बिबेक बिलोचनन्हि सिथिल सनेहँ समाजु।

    अर्थ · Hindi

    निरखि बिबेक बिलोचनन्हि सिथिल सनेहँ समाजु।

  2945. RCM 2.297.10Open verse →

    करि प्रनामु बोले भरतु सुमिरि सीय रघुराजु।।297।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु बोले भरतु सुमिरि सीय रघुराजु।।297।।

  2946. RCM 2.298.1Open verse →

    प्रभु पितु मातु सुह्रद गुर स्वामी। पूज्य परम हित अतंरजामी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पितु मातु सुह्रद गुर स्वामी। पूज्य परम हित अतंरजामी।।

  2947. RCM 2.298.2Open verse →

    सरल सुसाहिबु सील निधानू। प्रनतपाल सर्बग्य सुजानू।।

    अर्थ · Hindi

    सरल सुसाहिबु सील निधानू। प्रनतपाल सर्बग्य सुजानू।।

  2948. RCM 2.298.3Open verse →

    समरथ सरनागत हितकारी। गुनगाहकु अवगुन अघ हारी।।

    अर्थ · Hindi

    समरथ सरनागत हितकारी। गुनगाहकु अवगुन अघ हारी।।

  2949. RCM 2.298.4Open verse →

    स्वामि गोसाँइहि सरिस गोसाई। मोहि समान मैं साइँ दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    स्वामि गोसाँइहि सरिस गोसाई। मोहि समान मैं साइँ दोहाई।।

  2950. RCM 2.298.5Open verse →

    प्रभु पितु बचन मोह बस पेली। आयउँ इहाँ समाजु सकेली।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पितु बचन मोह बस पेली। आयउँ इहाँ समाजु सकेली।।

  2951. RCM 2.298.6Open verse →

    जग भल पोच ऊँच अरु नीचू। अमिअ अमरपद माहुरु मीचू।।

    अर्थ · Hindi

    जग भल पोच ऊँच अरु नीचू। अमिअ अमरपद माहुरु मीचू।।

  2952. RCM 2.298.7Open verse →

    राम रजाइ मेट मन माहीं। देखा सुना कतहुँ कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम रजाइ मेट मन माहीं। देखा सुना कतहुँ कोउ नाहीं।।

  2953. RCM 2.298.8Open verse →

    सो मैं सब बिधि कीन्हि ढिठाई। प्रभु मानी सनेह सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    सो मैं सब बिधि कीन्हि ढिठाई। प्रभु मानी सनेह सेवकाई।।

  2954. RCM 2.298.9Open verse →

    कृपाँ भलाई आपनी नाथ कीन्ह भल मोर।

    अर्थ · Hindi

    कृपाँ भलाई आपनी नाथ कीन्ह भल मोर।

  2955. RCM 2.298.10Open verse →

    दूषन भे भूषन सरिस सुजसु चारु चहु ओर।।298।।

    अर्थ · Hindi

    दूषन भे भूषन सरिस सुजसु चारु चहु ओर।।298।।

  2956. RCM 2.299.1Open verse →

    राउरि रीति सुबानि बड़ाई। जगत बिदित निगमागम गाई।।

    अर्थ · Hindi

    राउरि रीति सुबानि बड़ाई। जगत बिदित निगमागम गाई।।

  2957. RCM 2.299.2Open verse →

    कूर कुटिल खल कुमति कलंकी। नीच निसील निरीस निसंकी।।

    अर्थ · Hindi

    कूर कुटिल खल कुमति कलंकी। नीच निसील निरीस निसंकी।।

  2958. RCM 2.299.3Open verse →

    तेउ सुनि सरन सामुहें आए। सकृत प्रनामु किहें अपनाए।।

    अर्थ · Hindi

    तेउ सुनि सरन सामुहें आए। सकृत प्रनामु किहें अपनाए।।

  2959. RCM 2.299.4Open verse →

    देखि दोष कबहुँ न उर आने। सुनि गुन साधु समाज बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    देखि दोष कबहुँ न उर आने। सुनि गुन साधु समाज बखाने।।

  2960. RCM 2.299.5Open verse →

    को साहिब सेवकहि नेवाजी। आपु समाज साज सब साजी।।

    अर्थ · Hindi

    को साहिब सेवकहि नेवाजी। आपु समाज साज सब साजी।।

  2961. RCM 2.299.6Open verse →

    निज करतूति न समुझिअ सपनें। सेवक सकुच सोचु उर अपनें।।

    अर्थ · Hindi

    निज करतूति न समुझिअ सपनें। सेवक सकुच सोचु उर अपनें।।

  2962. RCM 2.299.7Open verse →

    सो गोसाइँ नहि दूसर कोपी। भुजा उठाइ कहउँ पन रोपी।।

    अर्थ · Hindi

    सो गोसाइँ नहि दूसर कोपी। भुजा उठाइ कहउँ पन रोपी।।

  2963. RCM 2.299.8Open verse →

    पसु नाचत सुक पाठ प्रबीना। गुन गति नट पाठक आधीना।।

    अर्थ · Hindi

    पसु नाचत सुक पाठ प्रबीना। गुन गति नट पाठक आधीना।।

  2964. RCM 2.299.9Open verse →

    यों सुधारि सनमानि जन किए साधु सिरमोर।

    अर्थ · Hindi

    यों सुधारि सनमानि जन किए साधु सिरमोर।

  2965. RCM 2.299.10Open verse →

    को कृपाल बिनु पालिहै बिरिदावलि बरजोर।।299।।

    अर्थ · Hindi

    को कृपाल बिनु पालिहै बिरिदावलि बरजोर।।299।।

  2966. RCM 2.300.1Open verse →

    सोक सनेहँ कि बाल सुभाएँ। आयउँ लाइ रजायसु बाएँ।।

    अर्थ · Hindi

    सोक सनेहँ कि बाल सुभाएँ। आयउँ लाइ रजायसु बाएँ।।

  2967. RCM 2.300.2Open verse →

    तबहुँ कृपाल हेरि निज ओरा। सबहि भाँति भल मानेउ मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    तबहुँ कृपाल हेरि निज ओरा। सबहि भाँति भल मानेउ मोरा।।

  2968. RCM 2.300.3Open verse →

    देखेउँ पाय सुमंगल मूला। जानेउँ स्वामि सहज अनुकूला।।

    अर्थ · Hindi

    देखेउँ पाय सुमंगल मूला। जानेउँ स्वामि सहज अनुकूला।।

  2969. RCM 2.300.4Open verse →

    बड़ें समाज बिलोकेउँ भागू। बड़ीं चूक साहिब अनुरागू।।

    अर्थ · Hindi

    बड़ें समाज बिलोकेउँ भागू। बड़ीं चूक साहिब अनुरागू।।

  2970. RCM 2.300.5Open verse →

    कृपा अनुग्रह अंगु अघाई। कीन्हि कृपानिधि सब अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    कृपा अनुग्रह अंगु अघाई। कीन्हि कृपानिधि सब अधिकाई।।

  2971. RCM 2.300.6Open verse →

    राखा मोर दुलार गोसाईं। अपनें सील सुभायँ भलाईं।।

    अर्थ · Hindi

    राखा मोर दुलार गोसाईं। अपनें सील सुभायँ भलाईं।।

  2972. RCM 2.300.7Open verse →

    नाथ निपट मैं कीन्हि ढिठाई। स्वामि समाज सकोच बिहाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ निपट मैं कीन्हि ढिठाई। स्वामि समाज सकोच बिहाई।।

  2973. RCM 2.300.8Open verse →

    अबिनय बिनय जथारुचि बानी। छमिहि देउ अति आरति जानी।।

    अर्थ · Hindi

    अबिनय बिनय जथारुचि बानी। छमिहि देउ अति आरति जानी।।

  2974. RCM 2.300.9Open verse →

    सुह्रद सुजान सुसाहिबहि बहुत कहब बड़ि खोरि।

    अर्थ · Hindi

    सुह्रद सुजान सुसाहिबहि बहुत कहब बड़ि खोरि।

  2975. RCM 2.300.10Open verse →

    आयसु देइअ देव अब सबइ सुधारी मोरि।।300।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु देइअ देव अब सबइ सुधारी मोरि।।300।।

  2976. RCM 2.301.1Open verse →

    प्रभु पद पदुम पराग दोहाई। सत्य सुकृत सुख सीवँ सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद पदुम पराग दोहाई। सत्य सुकृत सुख सीवँ सुहाई।।

  2977. RCM 2.301.2Open verse →

    सो करि कहउँ हिए अपने की। रुचि जागत सोवत सपने की।।

    अर्थ · Hindi

    सो करि कहउँ हिए अपने की। रुचि जागत सोवत सपने की।।

  2978. RCM 2.301.3Open verse →

    सहज सनेहँ स्वामि सेवकाई। स्वारथ छल फल चारि बिहाई।।

    अर्थ · Hindi

    सहज सनेहँ स्वामि सेवकाई। स्वारथ छल फल चारि बिहाई।।

  2979. RCM 2.301.4Open verse →

    अग्या सम न सुसाहिब सेवा। सो प्रसादु जन पावै देवा।।

    अर्थ · Hindi

    अग्या सम न सुसाहिब सेवा। सो प्रसादु जन पावै देवा।।

  2980. RCM 2.301.5Open verse →

    अस कहि प्रेम बिबस भए भारी। पुलक सरीर बिलोचन बारी।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि प्रेम बिबस भए भारी। पुलक सरीर बिलोचन बारी।।

  2981. RCM 2.301.6Open verse →

    प्रभु पद कमल गहे अकुलाई। समउ सनेहु न सो कहि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद कमल गहे अकुलाई। समउ सनेहु न सो कहि जाई।।

  2982. RCM 2.301.7Open verse →

    कृपासिंधु सनमानि सुबानी। बैठाए समीप गहि पानी।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु सनमानि सुबानी। बैठाए समीप गहि पानी।।

  2983. RCM 2.301.8Open verse →

    भरत बिनय सुनि देखि सुभाऊ। सिथिल सनेहँ सभा रघुराऊ।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बिनय सुनि देखि सुभाऊ। सिथिल सनेहँ सभा रघुराऊ।।

  2984. RCM 2.302.1Open verse →

    कपट कुचालि सीवँ सुरराजू। पर अकाज प्रिय आपन काजू।।

    अर्थ · Hindi

    कपट कुचालि सीवँ सुरराजू। पर अकाज प्रिय आपन काजू।।

  2985. RCM 2.302.2Open verse →

    काक समान पाकरिपु रीती। छली मलीन कतहुँ न प्रतीती।।

    अर्थ · Hindi

    काक समान पाकरिपु रीती। छली मलीन कतहुँ न प्रतीती।।

  2986. RCM 2.302.3Open verse →

    प्रथम कुमत करि कपटु सँकेला। सो उचाटु सब कें सिर मेला।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम कुमत करि कपटु सँकेला। सो उचाटु सब कें सिर मेला।।

  2987. RCM 2.302.4Open verse →

    सुरमायाँ सब लोग बिमोहे। राम प्रेम अतिसय न बिछोहे।।

    अर्थ · Hindi

    सुरमायाँ सब लोग बिमोहे। राम प्रेम अतिसय न बिछोहे।।

  2988. RCM 2.302.5Open verse →

    भय उचाट बस मन थिर नाहीं। छन बन रुचि छन सदन सोहाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भय उचाट बस मन थिर नाहीं। छन बन रुचि छन सदन सोहाहीं।।

  2989. RCM 2.302.6Open verse →

    दुबिध मनोगति प्रजा दुखारी। सरित सिंधु संगम जनु बारी।।

    अर्थ · Hindi

    दुबिध मनोगति प्रजा दुखारी। सरित सिंधु संगम जनु बारी।।

  2990. RCM 2.302.7Open verse →

    दुचित कतहुँ परितोषु न लहहीं। एक एक सन मरमु न कहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    दुचित कतहुँ परितोषु न लहहीं। एक एक सन मरमु न कहहीं।।

  2991. RCM 2.302.8Open verse →

    लखि हियँ हँसि कह कृपानिधानू। सरिस स्वान मघवान जुबानू।।

    अर्थ · Hindi

    लखि हियँ हँसि कह कृपानिधानू। सरिस स्वान मघवान जुबानू।।

  2992. RCM 2.302.9Open verse →

    भरतु जनकु मुनिजन सचिव साधु सचेत बिहाइ।

    अर्थ · Hindi

    भरतु जनकु मुनिजन सचिव साधु सचेत बिहाइ।

  2993. RCM 2.302.10Open verse →

    लागि देवमाया सबहि जथाजोगु जनु पाइ।।302।।

    अर्थ · Hindi

    लागि देवमाया सबहि जथाजोगु जनु पाइ।।302।।

  2994. RCM 2.303.1Open verse →

    कृपासिंधु लखि लोग दुखारे। निज सनेहँ सुरपति छल भारे।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु लखि लोग दुखारे। निज सनेहँ सुरपति छल भारे।।

  2995. RCM 2.303.2Open verse →

    सभा राउ गुर महिसुर मंत्री। भरत भगति सब कै मति जंत्री।।

    अर्थ · Hindi

    सभा राउ गुर महिसुर मंत्री। भरत भगति सब कै मति जंत्री।।

  2996. RCM 2.303.3Open verse →

    रामहि चितवत चित्र लिखे से। सकुचत बोलत बचन सिखे से।।

    अर्थ · Hindi

    रामहि चितवत चित्र लिखे से। सकुचत बोलत बचन सिखे से।।

  2997. RCM 2.303.4Open verse →

    भरत प्रीति नति बिनय बड़ाई। सुनत सुखद बरनत कठिनाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत प्रीति नति बिनय बड़ाई। सुनत सुखद बरनत कठिनाई।।

  2998. RCM 2.303.5Open verse →

    जासु बिलोकि भगति लवलेसू। प्रेम मगन मुनिगन मिथिलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    जासु बिलोकि भगति लवलेसू। प्रेम मगन मुनिगन मिथिलेसू।।

  2999. RCM 2.303.6Open verse →

    महिमा तासु कहै किमि तुलसी। भगति सुभायँ सुमति हियँ हुलसी।।

    अर्थ · Hindi

    महिमा तासु कहै किमि तुलसी। भगति सुभायँ सुमति हियँ हुलसी।।

  3000. RCM 2.303.7Open verse →

    आपु छोटि महिमा बड़ि जानी। कबिकुल कानि मानि सकुचानी।।

    अर्थ · Hindi

    आपु छोटि महिमा बड़ि जानी। कबिकुल कानि मानि सकुचानी।।

  3001. RCM 2.303.8Open verse →

    कहि न सकति गुन रुचि अधिकाई। मति गति बाल बचन की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहि न सकति गुन रुचि अधिकाई। मति गति बाल बचन की नाई।।

  3002. RCM 2.303.9Open verse →

    भरत बिमल जसु बिमल बिधु सुमति चकोरकुमारि।

    अर्थ · Hindi

    भरत बिमल जसु बिमल बिधु सुमति चकोरकुमारि।

  3003. RCM 2.303.10Open verse →

    उदित बिमल जन हृदय नभ एकटक रही निहारि।।303।।

    अर्थ · Hindi

    उदित बिमल जन हृदय नभ एकटक रही निहारि।।303।।

  3004. RCM 2.304.1Open verse →

    भरत सुभाउ न सुगम निगमहूँ। लघु मति चापलता कबि छमहूँ।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सुभाउ न सुगम निगमहूँ। लघु मति चापलता कबि छमहूँ।।

  3005. RCM 2.304.2Open verse →

    कहत सुनत सति भाउ भरत को। सीय राम पद होइ न रत को।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सुनत सति भाउ भरत को। सीय राम पद होइ न रत को।।

  3006. RCM 2.304.3Open verse →

    सुमिरत भरतहि प्रेमु राम को। जेहि न सुलभ तेहि सरिस बाम को।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरत भरतहि प्रेमु राम को। जेहि न सुलभ तेहि सरिस बाम को।।

  3007. RCM 2.304.4Open verse →

    देखि दयाल दसा सबही की। राम सुजान जानि जन जी की।।

    अर्थ · Hindi

    देखि दयाल दसा सबही की। राम सुजान जानि जन जी की।।

  3008. RCM 2.304.5Open verse →

    धरम धुरीन धीर नय नागर। सत्य सनेह सील सुख सागर।।

    अर्थ · Hindi

    धरम धुरीन धीर नय नागर। सत्य सनेह सील सुख सागर।।

  3009. RCM 2.304.6Open verse →

    देसु काल लखि समउ समाजू। नीति प्रीति पालक रघुराजू।।

    अर्थ · Hindi

    देसु काल लखि समउ समाजू। नीति प्रीति पालक रघुराजू।।

  3010. RCM 2.304.7Open verse →

    बोले बचन बानि सरबसु से। हित परिनाम सुनत ससि रसु से।।

    अर्थ · Hindi

    बोले बचन बानि सरबसु से। हित परिनाम सुनत ससि रसु से।।

  3011. RCM 2.304.8Open verse →

    तात भरत तुम्ह धरम धुरीना। लोक बेद बिद प्रेम प्रबीना।।

    अर्थ · Hindi

    तात भरत तुम्ह धरम धुरीना। लोक बेद बिद प्रेम प्रबीना।।

  3012. RCM 2.304.9Open verse →

    करम बचन मानस बिमल तुम्ह समान तुम्ह तात।

    अर्थ · Hindi

    करम बचन मानस बिमल तुम्ह समान तुम्ह तात।

  3013. RCM 2.304.10Open verse →

    गुर समाज लघु बंधु गुन कुसमयँ किमि कहि जात।।304।।

    अर्थ · Hindi

    गुर समाज लघु बंधु गुन कुसमयँ किमि कहि जात।।304।।

  3014. RCM 2.305.1Open verse →

    जानहु तात तरनि कुल रीती। सत्यसंध पितु कीरति प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    जानहु तात तरनि कुल रीती। सत्यसंध पितु कीरति प्रीती।।

  3015. RCM 2.305.2Open verse →

    समउ समाजु लाज गुरुजन की। उदासीन हित अनहित मन की।।

    अर्थ · Hindi

    समउ समाजु लाज गुरुजन की। उदासीन हित अनहित मन की।।

  3016. RCM 2.305.3Open verse →

    तुम्हहि बिदित सबही कर करमू। आपन मोर परम हित धरमू।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हहि बिदित सबही कर करमू। आपन मोर परम हित धरमू।।

  3017. RCM 2.305.4Open verse →

    मोहि सब भाँति भरोस तुम्हारा। तदपि कहउँ अवसर अनुसारा।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि सब भाँति भरोस तुम्हारा। तदपि कहउँ अवसर अनुसारा।।

  3018. RCM 2.305.5Open verse →

    तात तात बिनु बात हमारी। केवल गुरुकुल कृपाँ सँभारी।।

    अर्थ · Hindi

    तात तात बिनु बात हमारी। केवल गुरुकुल कृपाँ सँभारी।।

  3019. RCM 2.305.6Open verse →

    नतरु प्रजा परिजन परिवारू। हमहि सहित सबु होत खुआरू।।

    अर्थ · Hindi

    नतरु प्रजा परिजन परिवारू। हमहि सहित सबु होत खुआरू।।

  3020. RCM 2.305.7Open verse →

    जौं बिनु अवसर अथवँ दिनेसू। जग केहि कहहु न होइ कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं बिनु अवसर अथवँ दिनेसू। जग केहि कहहु न होइ कलेसू।।

  3021. RCM 2.305.8Open verse →

    तस उतपातु तात बिधि कीन्हा। मुनि मिथिलेस राखि सबु लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    तस उतपातु तात बिधि कीन्हा। मुनि मिथिलेस राखि सबु लीन्हा।।

  3022. RCM 2.305.9Open verse →

    राज काज सब लाज पति धरम धरनि धन धाम।

    अर्थ · Hindi

    राज काज सब लाज पति धरम धरनि धन धाम।

  3023. RCM 2.305.10Open verse →

    गुर प्रभाउ पालिहि सबहि भल होइहि परिनाम।।305।।

    अर्थ · Hindi

    गुर प्रभाउ पालिहि सबहि भल होइहि परिनाम।।305।।

  3024. RCM 2.306.1Open verse →

    सहित समाज तुम्हार हमारा। घर बन गुर प्रसाद रखवारा।।

    अर्थ · Hindi

    सहित समाज तुम्हार हमारा। घर बन गुर प्रसाद रखवारा।।

  3025. RCM 2.306.2Open verse →

    मातु पिता गुर स्वामि निदेसू। सकल धरम धरनीधर सेसू।।

    अर्थ · Hindi

    मातु पिता गुर स्वामि निदेसू। सकल धरम धरनीधर सेसू।।

  3026. RCM 2.306.3Open verse →

    सो तुम्ह करहु करावहु मोहू। तात तरनिकुल पालक होहू।।

    अर्थ · Hindi

    सो तुम्ह करहु करावहु मोहू। तात तरनिकुल पालक होहू।।

  3027. RCM 2.306.4Open verse →

    साधक एक सकल सिधि देनी। कीरति सुगति भूतिमय बेनी।।

    अर्थ · Hindi

    साधक एक सकल सिधि देनी। कीरति सुगति भूतिमय बेनी।।

  3028. RCM 2.306.5Open verse →

    सो बिचारि सहि संकटु भारी। करहु प्रजा परिवारु सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    सो बिचारि सहि संकटु भारी। करहु प्रजा परिवारु सुखारी।।

  3029. RCM 2.306.6Open verse →

    बाँटी बिपति सबहिं मोहि भाई। तुम्हहि अवधि भरि बड़ि कठिनाई।।

    अर्थ · Hindi

    बाँटी बिपति सबहिं मोहि भाई। तुम्हहि अवधि भरि बड़ि कठिनाई।।

  3030. RCM 2.306.7Open verse →

    जानि तुम्हहि मृदु कहउँ कठोरा। कुसमयँ तात न अनुचित मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    जानि तुम्हहि मृदु कहउँ कठोरा। कुसमयँ तात न अनुचित मोरा।।

  3031. RCM 2.306.8Open verse →

    होहिं कुठायँ सुबंधु सुहाए। ओड़िअहिं हाथ असनिहु के घाए।।

    अर्थ · Hindi

    होहिं कुठायँ सुबंधु सुहाए। ओड़िअहिं हाथ असनिहु के घाए।।

  3032. RCM 2.306.9Open verse →

    सेवक कर पद नयन से मुख सो साहिबु होइ।

    अर्थ · Hindi

    सेवक कर पद नयन से मुख सो साहिबु होइ।

  3033. RCM 2.306.10Open verse →

    तुलसी प्रीति कि रीति सुनि सुकबि सराहहिं सोइ।।306।।

    अर्थ · Hindi

    तुलसी प्रीति कि रीति सुनि सुकबि सराहहिं सोइ।।306।।

  3034. RCM 2.307.1Open verse →

    सभा सकल सुनि रघुबर बानी। प्रेम पयोधि अमिअ जनु सानी।।

    अर्थ · Hindi

    सभा सकल सुनि रघुबर बानी। प्रेम पयोधि अमिअ जनु सानी।।

  3035. RCM 2.307.2Open verse →

    सिथिल समाज सनेह समाधी। देखि दसा चुप सारद साधी।।

    अर्थ · Hindi

    सिथिल समाज सनेह समाधी। देखि दसा चुप सारद साधी।।

  3036. RCM 2.307.3Open verse →

    भरतहि भयउ परम संतोषू। सनमुख स्वामि बिमुख दुख दोषू।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि भयउ परम संतोषू। सनमुख स्वामि बिमुख दुख दोषू।।

  3037. RCM 2.307.4Open verse →

    मुख प्रसन्न मन मिटा बिषादू। भा जनु गूँगेहि गिरा प्रसादू।।

    अर्थ · Hindi

    मुख प्रसन्न मन मिटा बिषादू। भा जनु गूँगेहि गिरा प्रसादू।।

  3038. RCM 2.307.5Open verse →

    कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी। बोले पानि पंकरुह जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह सप्रेम प्रनामु बहोरी। बोले पानि पंकरुह जोरी।।

  3039. RCM 2.307.6Open verse →

    नाथ भयउ सुखु साथ गए को। लहेउँ लाहु जग जनमु भए को।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ भयउ सुखु साथ गए को। लहेउँ लाहु जग जनमु भए को।।

  3040. RCM 2.307.7Open verse →

    अब कृपाल जस आयसु होई। करौं सीस धरि सादर सोई।।

    अर्थ · Hindi

    अब कृपाल जस आयसु होई। करौं सीस धरि सादर सोई।।

  3041. RCM 2.307.8Open verse →

    सो अवलंब देव मोहि देई। अवधि पारु पावौं जेहि सेई।।

    अर्थ · Hindi

    सो अवलंब देव मोहि देई। अवधि पारु पावौं जेहि सेई।।

  3042. RCM 2.307.9Open verse →

    देव देव अभिषेक हित गुर अनुसासनु पाइ।

    अर्थ · Hindi

    देव देव अभिषेक हित गुर अनुसासनु पाइ।

  3043. RCM 2.307.10Open verse →

    आनेउँ सब तीरथ सलिलु तेहि कहँ काह रजाइ।।307।।

    अर्थ · Hindi

    आनेउँ सब तीरथ सलिलु तेहि कहँ काह रजाइ।।307।।

  3044. RCM 2.308.1Open verse →

    एकु मनोरथु बड़ मन माहीं। सभयँ सकोच जात कहि नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एकु मनोरथु बड़ मन माहीं। सभयँ सकोच जात कहि नाहीं।।

  3045. RCM 2.308.2Open verse →

    कहहु तात प्रभु आयसु पाई। बोले बानि सनेह सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु तात प्रभु आयसु पाई। बोले बानि सनेह सुहाई।।

  3046. RCM 2.308.3Open verse →

    चित्रकूट सुचि थल तीरथ बन। खग मृग सर सरि निर्झर गिरिगन।।

    अर्थ · Hindi

    चित्रकूट सुचि थल तीरथ बन। खग मृग सर सरि निर्झर गिरिगन।।

  3047. RCM 2.308.4Open verse →

    प्रभु पद अंकित अवनि बिसेषी। आयसु होइ त आवौं देखी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद अंकित अवनि बिसेषी। आयसु होइ त आवौं देखी।।

  3048. RCM 2.308.5Open verse →

    अवसि अत्रि आयसु सिर धरहू। तात बिगतभय कानन चरहू।।

    अर्थ · Hindi

    अवसि अत्रि आयसु सिर धरहू। तात बिगतभय कानन चरहू।।

  3049. RCM 2.308.6Open verse →

    मुनि प्रसाद बनु मंगल दाता। पावन परम सुहावन भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि प्रसाद बनु मंगल दाता। पावन परम सुहावन भ्राता।।

  3050. RCM 2.308.7Open verse →

    रिषिनायकु जहँ आयसु देहीं। राखेहु तीरथ जलु थल तेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    रिषिनायकु जहँ आयसु देहीं। राखेहु तीरथ जलु थल तेहीं।।

  3051. RCM 2.308.8Open verse →

    सुनि प्रभु बचन भरत सुख पावा। मुनि पद कमल मुदित सिरु नावा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रभु बचन भरत सुख पावा। मुनि पद कमल मुदित सिरु नावा।।

  3052. RCM 2.308.9Open verse →

    भरत राम संबादु सुनि सकल सुमंगल मूल।

    अर्थ · Hindi

    भरत राम संबादु सुनि सकल सुमंगल मूल।

  3053. RCM 2.308.10Open verse →

    सुर स्वारथी सराहि कुल बरषत सुरतरु फूल।।308।।

    अर्थ · Hindi

    सुर स्वारथी सराहि कुल बरषत सुरतरु फूल।।308।।

  3054. RCM 2.309.1Open verse →

    धन्य भरत जय राम गोसाईं। कहत देव हरषत बरिआई।

    अर्थ · Hindi

    धन्य भरत जय राम गोसाईं। कहत देव हरषत बरिआई।

  3055. RCM 2.309.2Open verse →

    मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू। भरत बचन सुनि भयउ उछाहू।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि मिथिलेस सभाँ सब काहू। भरत बचन सुनि भयउ उछाहू।।

  3056. RCM 2.309.3Open verse →

    भरत राम गुन ग्राम सनेहू। पुलकि प्रसंसत राउ बिदेहू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत राम गुन ग्राम सनेहू। पुलकि प्रसंसत राउ बिदेहू।।

  3057. RCM 2.309.4Open verse →

    सेवक स्वामि सुभाउ सुहावन। नेमु पेमु अति पावन पावन।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक स्वामि सुभाउ सुहावन। नेमु पेमु अति पावन पावन।।

  3058. RCM 2.309.5Open verse →

    मति अनुसार सराहन लागे। सचिव सभासद सब अनुरागे।।

    अर्थ · Hindi

    मति अनुसार सराहन लागे। सचिव सभासद सब अनुरागे।।

  3059. RCM 2.309.6Open verse →

    सुनि सुनि राम भरत संबादू। दुहु समाज हियँ हरषु बिषादू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुनि राम भरत संबादू। दुहु समाज हियँ हरषु बिषादू।।

  3060. RCM 2.309.7Open verse →

    राम मातु दुखु सुखु सम जानी। कहि गुन राम प्रबोधीं रानी।।

    अर्थ · Hindi

    राम मातु दुखु सुखु सम जानी। कहि गुन राम प्रबोधीं रानी।।

  3061. RCM 2.309.8Open verse →

    एक कहहिं रघुबीर बड़ाई। एक सराहत भरत भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    एक कहहिं रघुबीर बड़ाई। एक सराहत भरत भलाई।।

  3062. RCM 2.309.9Open verse →

    अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप।

    अर्थ · Hindi

    अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप।

  3063. RCM 2.309.10Open verse →

    राखिअ तीरथ तोय तहँ पावन अमिअ अनूप।।309।।

    अर्थ · Hindi

    राखिअ तीरथ तोय तहँ पावन अमिअ अनूप।।309।।

  3064. RCM 2.310.1Open verse →

    भरत अत्रि अनुसासन पाई। जल भाजन सब दिए चलाई।।

    अर्थ · Hindi

    भरत अत्रि अनुसासन पाई। जल भाजन सब दिए चलाई।।

  3065. RCM 2.310.2Open verse →

    सानुज आपु अत्रि मुनि साधू। सहित गए जहँ कूप अगाधू।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज आपु अत्रि मुनि साधू। सहित गए जहँ कूप अगाधू।।

  3066. RCM 2.310.3Open verse →

    पावन पाथ पुन्यथल राखा। प्रमुदित प्रेम अत्रि अस भाषा।।

    अर्थ · Hindi

    पावन पाथ पुन्यथल राखा। प्रमुदित प्रेम अत्रि अस भाषा।।

  3067. RCM 2.310.4Open verse →

    तात अनादि सिद्ध थल एहू। लोपेउ काल बिदित नहिं केहू।।

    अर्थ · Hindi

    तात अनादि सिद्ध थल एहू। लोपेउ काल बिदित नहिं केहू।।

  3068. RCM 2.310.5Open verse →

    तब सेवकन्ह सरस थलु देखा। किन्ह सुजल हित कूप बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    तब सेवकन्ह सरस थलु देखा। किन्ह सुजल हित कूप बिसेषा।।

  3069. RCM 2.310.6Open verse →

    बिधि बस भयउ बिस्व उपकारू। सुगम अगम अति धरम बिचारू।।

    अर्थ · Hindi

    बिधि बस भयउ बिस्व उपकारू। सुगम अगम अति धरम बिचारू।।

  3070. RCM 2.310.7Open verse →

    भरतकूप अब कहिहहिं लोगा। अति पावन तीरथ जल जोगा।।

    अर्थ · Hindi

    भरतकूप अब कहिहहिं लोगा। अति पावन तीरथ जल जोगा।।

  3071. RCM 2.310.8Open verse →

    प्रेम सनेम निमज्जत प्रानी। होइहहिं बिमल करम मन बानी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रेम सनेम निमज्जत प्रानी। होइहहिं बिमल करम मन बानी।।

  3072. RCM 2.310.9Open verse →

    कहत कूप महिमा सकल गए जहाँ रघुराउ।

    अर्थ · Hindi

    कहत कूप महिमा सकल गए जहाँ रघुराउ।

  3073. RCM 2.310.10Open verse →

    अत्रि सुनायउ रघुबरहि तीरथ पुन्य प्रभाउ।।310।।

    अर्थ · Hindi

    अत्रि सुनायउ रघुबरहि तीरथ पुन्य प्रभाउ।।310।।

  3074. RCM 2.311.1Open verse →

    कहत धरम इतिहास सप्रीती। भयउ भोरु निसि सो सुख बीती।।

    अर्थ · Hindi

    कहत धरम इतिहास सप्रीती। भयउ भोरु निसि सो सुख बीती।।

  3075. RCM 2.311.2Open verse →

    नित्य निबाहि भरत दोउ भाई। राम अत्रि गुर आयसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    नित्य निबाहि भरत दोउ भाई। राम अत्रि गुर आयसु पाई।।

  3076. RCM 2.311.3Open verse →

    सहित समाज साज सब सादें। चले राम बन अटन पयादें।।

    अर्थ · Hindi

    सहित समाज साज सब सादें। चले राम बन अटन पयादें।।

  3077. RCM 2.311.4Open verse →

    कोमल चरन चलत बिनु पनहीं। भइ मृदु भूमि सकुचि मन मनहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कोमल चरन चलत बिनु पनहीं। भइ मृदु भूमि सकुचि मन मनहीं।।

  3078. RCM 2.311.5Open verse →

    कुस कंटक काँकरीं कुराईं। कटुक कठोर कुबस्तु दुराईं।।

    अर्थ · Hindi

    कुस कंटक काँकरीं कुराईं। कटुक कठोर कुबस्तु दुराईं।।

  3079. RCM 2.311.6Open verse →

    महि मंजुल मृदु मारग कीन्हे। बहत समीर त्रिबिध सुख लीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    महि मंजुल मृदु मारग कीन्हे। बहत समीर त्रिबिध सुख लीन्हे।।

  3080. RCM 2.311.7Open verse →

    सुमन बरषि सुर घन करि छाहीं। बिटप फूलि फलि तृन मृदुताहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुमन बरषि सुर घन करि छाहीं। बिटप फूलि फलि तृन मृदुताहीं।।

  3081. RCM 2.311.8Open verse →

    मृग बिलोकि खग बोलि सुबानी। सेवहिं सकल राम प्रिय जानी।।

    अर्थ · Hindi

    मृग बिलोकि खग बोलि सुबानी। सेवहिं सकल राम प्रिय जानी।।

  3082. RCM 2.311.9Open verse →

    सुलभ सिद्धि सब प्राकृतहु राम कहत जमुहात।

    अर्थ · Hindi

    सुलभ सिद्धि सब प्राकृतहु राम कहत जमुहात।

  3083. RCM 2.311.10Open verse →

    राम प्रान प्रिय भरत कहुँ यह न होइ बड़ि बात।।311।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रान प्रिय भरत कहुँ यह न होइ बड़ि बात।।311।।

  3084. RCM 2.312.1Open verse →

    एहि बिधि भरतु फिरत बन माहीं। नेमु प्रेमु लखि मुनि सकुचाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि भरतु फिरत बन माहीं। नेमु प्रेमु लखि मुनि सकुचाहीं।।

  3085. RCM 2.312.2Open verse →

    पुन्य जलाश्रय भूमि बिभागा। खग मृग तरु तृन गिरि बन बागा।।

    अर्थ · Hindi

    पुन्य जलाश्रय भूमि बिभागा। खग मृग तरु तृन गिरि बन बागा।।

  3086. RCM 2.312.3Open verse →

    चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी। बूझत भरतु दिब्य सब देखी।।

    अर्थ · Hindi

    चारु बिचित्र पबित्र बिसेषी। बूझत भरतु दिब्य सब देखी।।

  3087. RCM 2.312.4Open verse →

    सुनि मन मुदित कहत रिषिराऊ। हेतु नाम गुन पुन्य प्रभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि मन मुदित कहत रिषिराऊ। हेतु नाम गुन पुन्य प्रभाऊ।।

  3088. RCM 2.312.5Open verse →

    कतहुँ निमज्जन कतहुँ प्रनामा। कतहुँ बिलोकत मन अभिरामा।।

    अर्थ · Hindi

    कतहुँ निमज्जन कतहुँ प्रनामा। कतहुँ बिलोकत मन अभिरामा।।

  3089. RCM 2.312.6Open verse →

    कतहुँ बैठि मुनि आयसु पाई। सुमिरत सीय सहित दोउ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    कतहुँ बैठि मुनि आयसु पाई। सुमिरत सीय सहित दोउ भाई।।

  3090. RCM 2.312.7Open verse →

    देखि सुभाउ सनेहु सुसेवा। देहिं असीस मुदित बनदेवा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सुभाउ सनेहु सुसेवा। देहिं असीस मुदित बनदेवा।।

  3091. RCM 2.312.8Open verse →

    फिरहिं गएँ दिनु पहर अढ़ाई। प्रभु पद कमल बिलोकहिं आई।।

    अर्थ · Hindi

    फिरहिं गएँ दिनु पहर अढ़ाई। प्रभु पद कमल बिलोकहिं आई।।

  3092. RCM 2.312.9Open verse →

    देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच दिन माझ।

    अर्थ · Hindi

    देखे थल तीरथ सकल भरत पाँच दिन माझ।

  3093. RCM 2.312.10Open verse →

    कहत सुनत हरि हर सुजसु गयउ दिवसु भइ साँझ।।312।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सुनत हरि हर सुजसु गयउ दिवसु भइ साँझ।।312।।

  3094. RCM 2.313.1Open verse →

    भोर न्हाइ सबु जुरा समाजू। भरत भूमिसुर तेरहुति राजू।।

    अर्थ · Hindi

    भोर न्हाइ सबु जुरा समाजू। भरत भूमिसुर तेरहुति राजू।।

  3095. RCM 2.313.2Open verse →

    भल दिन आजु जानि मन माहीं। रामु कृपाल कहत सकुचाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भल दिन आजु जानि मन माहीं। रामु कृपाल कहत सकुचाहीं।।

  3096. RCM 2.313.3Open verse →

    गुर नृप भरत सभा अवलोकी। सकुचि राम फिरि अवनि बिलोकी।।

    अर्थ · Hindi

    गुर नृप भरत सभा अवलोकी। सकुचि राम फिरि अवनि बिलोकी।।

  3097. RCM 2.313.4Open verse →

    सील सराहि सभा सब सोची। कहुँ न राम सम स्वामि सँकोची।।

    अर्थ · Hindi

    सील सराहि सभा सब सोची। कहुँ न राम सम स्वामि सँकोची।।

  3098. RCM 2.313.5Open verse →

    भरत सुजान राम रुख देखी। उठि सप्रेम धरि धीर बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सुजान राम रुख देखी। उठि सप्रेम धरि धीर बिसेषी।।

  3099. RCM 2.313.6Open verse →

    करि दंडवत कहत कर जोरी। राखीं नाथ सकल रुचि मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    करि दंडवत कहत कर जोरी। राखीं नाथ सकल रुचि मोरी।।

  3100. RCM 2.313.7Open verse →

    मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू। बहुत भाँति दुखु पावा आपू।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू। बहुत भाँति दुखु पावा आपू।।

  3101. RCM 2.313.8Open verse →

    अब गोसाइँ मोहि देउ रजाई। सेवौं अवध अवधि भरि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    अब गोसाइँ मोहि देउ रजाई। सेवौं अवध अवधि भरि जाई।।

  3102. RCM 2.313.9Open verse →

    जेहिं उपाय पुनि पाय जनु देखै दीनदयाल।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं उपाय पुनि पाय जनु देखै दीनदयाल।

  3103. RCM 2.313.10Open verse →

    सो सिख देइअ अवधि लगि कोसलपाल कृपाल।।313।।

    अर्थ · Hindi

    सो सिख देइअ अवधि लगि कोसलपाल कृपाल।।313।।

  3104. RCM 2.314.1Open verse →

    पुरजन परिजन प्रजा गोसाई। सब सुचि सरस सनेहँ सगाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुरजन परिजन प्रजा गोसाई। सब सुचि सरस सनेहँ सगाई।।

  3105. RCM 2.314.2Open verse →

    राउर बदि भल भव दुख दाहू। प्रभु बिनु बादि परम पद लाहू।।

    अर्थ · Hindi

    राउर बदि भल भव दुख दाहू। प्रभु बिनु बादि परम पद लाहू।।

  3106. RCM 2.314.3Open verse →

    स्वामि सुजानु जानि सब ही की। रुचि लालसा रहनि जन जी की।।

    अर्थ · Hindi

    स्वामि सुजानु जानि सब ही की। रुचि लालसा रहनि जन जी की।।

  3107. RCM 2.314.4Open verse →

    प्रनतपालु पालिहि सब काहू। देउ दुहू दिसि ओर निबाहू।।

    अर्थ · Hindi

    प्रनतपालु पालिहि सब काहू। देउ दुहू दिसि ओर निबाहू।।

  3108. RCM 2.314.5Open verse →

    अस मोहि सब बिधि भूरि भरोसो। किएँ बिचारु न सोचु खरो सो।।

    अर्थ · Hindi

    अस मोहि सब बिधि भूरि भरोसो। किएँ बिचारु न सोचु खरो सो।।

  3109. RCM 2.314.6Open verse →

    आरति मोर नाथ कर छोहू। दुहुँ मिलि कीन्ह ढीठु हठि मोहू।।

    अर्थ · Hindi

    आरति मोर नाथ कर छोहू। दुहुँ मिलि कीन्ह ढीठु हठि मोहू।।

  3110. RCM 2.314.7Open verse →

    यह बड़ दोषु दूरि करि स्वामी। तजि सकोच सिखइअ अनुगामी।।

    अर्थ · Hindi

    यह बड़ दोषु दूरि करि स्वामी। तजि सकोच सिखइअ अनुगामी।।

  3111. RCM 2.314.8Open verse →

    भरत बिनय सुनि सबहिं प्रसंसी। खीर नीर बिबरन गति हंसी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत बिनय सुनि सबहिं प्रसंसी। खीर नीर बिबरन गति हंसी।।

  3112. RCM 2.314.9Open verse →

    दीनबंधु सुनि बंधु के बचन दीन छलहीन।

    अर्थ · Hindi

    दीनबंधु सुनि बंधु के बचन दीन छलहीन।

  3113. RCM 2.314.10Open verse →

    देस काल अवसर सरिस बोले रामु प्रबीन।।314।।

    अर्थ · Hindi

    देस काल अवसर सरिस बोले रामु प्रबीन।।314।।

  3114. RCM 2.315.1Open verse →

    तात तुम्हारि मोरि परिजन की। चिंता गुरहि नृपहि घर बन की।।

    अर्थ · Hindi

    तात तुम्हारि मोरि परिजन की। चिंता गुरहि नृपहि घर बन की।।

  3115. RCM 2.315.2Open verse →

    माथे पर गुर मुनि मिथिलेसू। हमहि तुम्हहि सपनेहुँ न कलेसू।।

    अर्थ · Hindi

    माथे पर गुर मुनि मिथिलेसू। हमहि तुम्हहि सपनेहुँ न कलेसू।।

  3116. RCM 2.315.3Open verse →

    मोर तुम्हार परम पुरुषारथु। स्वारथु सुजसु धरमु परमारथु।।

    अर्थ · Hindi

    मोर तुम्हार परम पुरुषारथु। स्वारथु सुजसु धरमु परमारथु।।

  3117. RCM 2.315.4Open verse →

    पितु आयसु पालिहिं दुहु भाई। लोक बेद भल भूप भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    पितु आयसु पालिहिं दुहु भाई। लोक बेद भल भूप भलाई।।

  3118. RCM 2.315.5Open verse →

    गुर पितु मातु स्वामि सिख पालें। चलेहुँ कुमग पग परहिं न खालें।।

    अर्थ · Hindi

    गुर पितु मातु स्वामि सिख पालें। चलेहुँ कुमग पग परहिं न खालें।।

  3119. RCM 2.315.6Open verse →

    अस बिचारि सब सोच बिहाई। पालहु अवध अवधि भरि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि सब सोच बिहाई। पालहु अवध अवधि भरि जाई।।

  3120. RCM 2.315.7Open verse →

    देसु कोसु परिजन परिवारू। गुर पद रजहिं लाग छरुभारू।।

    अर्थ · Hindi

    देसु कोसु परिजन परिवारू। गुर पद रजहिं लाग छरुभारू।।

  3121. RCM 2.315.8Open verse →

    तुम्ह मुनि मातु सचिव सिख मानी। पालेहु पुहुमि प्रजा रजधानी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह मुनि मातु सचिव सिख मानी। पालेहु पुहुमि प्रजा रजधानी।।

  3122. RCM 2.315.9Open verse →

    मुखिआ मुखु सो चाहिऐ खान पान कहुँ एक।

    अर्थ · Hindi

    मुखिआ मुखु सो चाहिऐ खान पान कहुँ एक।

  3123. RCM 2.315.10Open verse →

    पालइ पोषइ सकल अँग तुलसी सहित बिबेक।।315।।

    अर्थ · Hindi

    पालइ पोषइ सकल अँग तुलसी सहित बिबेक।।315।।

  3124. RCM 2.316.1Open verse →

    राजधरम सरबसु एतनोई। जिमि मन माहँ मनोरथ गोई।।

    अर्थ · Hindi

    राजधरम सरबसु एतनोई। जिमि मन माहँ मनोरथ गोई।।

  3125. RCM 2.316.2Open verse →

    बंधु प्रबोधु कीन्ह बहु भाँती। बिनु अधार मन तोषु न साँती।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु प्रबोधु कीन्ह बहु भाँती। बिनु अधार मन तोषु न साँती।।

  3126. RCM 2.316.3Open verse →

    भरत सील गुर सचिव समाजू। सकुच सनेह बिबस रघुराजू।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सील गुर सचिव समाजू। सकुच सनेह बिबस रघुराजू।।

  3127. RCM 2.316.4Open verse →

    प्रभु करि कृपा पाँवरीं दीन्हीं। सादर भरत सीस धरि लीन्हीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु करि कृपा पाँवरीं दीन्हीं। सादर भरत सीस धरि लीन्हीं।।

  3128. RCM 2.316.5Open verse →

    चरनपीठ करुनानिधान के। जनु जुग जामिक प्रजा प्रान के।।

    अर्थ · Hindi

    चरनपीठ करुनानिधान के। जनु जुग जामिक प्रजा प्रान के।।

  3129. RCM 2.316.6Open verse →

    संपुट भरत सनेह रतन के। आखर जुग जुन जीव जतन के।।

    अर्थ · Hindi

    संपुट भरत सनेह रतन के। आखर जुग जुन जीव जतन के।।

  3130. RCM 2.316.7Open verse →

    कुल कपाट कर कुसल करम के। बिमल नयन सेवा सुधरम के।।

    अर्थ · Hindi

    कुल कपाट कर कुसल करम के। बिमल नयन सेवा सुधरम के।।

  3131. RCM 2.316.8Open verse →

    भरत मुदित अवलंब लहे तें। अस सुख जस सिय रामु रहे तें।।

    अर्थ · Hindi

    भरत मुदित अवलंब लहे तें। अस सुख जस सिय रामु रहे तें।।

  3132. RCM 2.316.9Open verse →

    मागेउ बिदा प्रनामु करि राम लिए उर लाइ।

    अर्थ · Hindi

    मागेउ बिदा प्रनामु करि राम लिए उर लाइ।

  3133. RCM 2.316.10Open verse →

    लोग उचाटे अमरपति कुटिल कुअवसरु पाइ।।316।।

    अर्थ · Hindi

    लोग उचाटे अमरपति कुटिल कुअवसरु पाइ।।316।।

  3134. RCM 2.317.1Open verse →

    सो कुचालि सब कहँ भइ नीकी। अवधि आस सम जीवनि जी की।।

    अर्थ · Hindi

    सो कुचालि सब कहँ भइ नीकी। अवधि आस सम जीवनि जी की।।

  3135. RCM 2.317.2Open verse →

    नतरु लखन सिय सम बियोगा। हहरि मरत सब लोग कुरोगा।।

    अर्थ · Hindi

    नतरु लखन सिय सम बियोगा। हहरि मरत सब लोग कुरोगा।।

  3136. RCM 2.317.3Open verse →

    रामकृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।।

    अर्थ · Hindi

    रामकृपाँ अवरेब सुधारी। बिबुध धारि भइ गुनद गोहारी।।

  3137. RCM 2.317.4Open verse →

    भेंटत भुज भरि भाइ भरत सो। राम प्रेम रसु कहि न परत सो।।

    अर्थ · Hindi

    भेंटत भुज भरि भाइ भरत सो। राम प्रेम रसु कहि न परत सो।।

  3138. RCM 2.317.5Open verse →

    तन मन बचन उमग अनुरागा। धीर धुरंधर धीरजु त्यागा।।

    अर्थ · Hindi

    तन मन बचन उमग अनुरागा। धीर धुरंधर धीरजु त्यागा।।

  3139. RCM 2.317.6Open verse →

    बारिज लोचन मोचत बारी। देखि दसा सुर सभा दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    बारिज लोचन मोचत बारी। देखि दसा सुर सभा दुखारी।।

  3140. RCM 2.317.7Open verse →

    मुनिगन गुर धुर धीर जनक से। ग्यान अनल मन कसें कनक से।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिगन गुर धुर धीर जनक से। ग्यान अनल मन कसें कनक से।।

  3141. RCM 2.317.8Open verse →

    जे बिरंचि निरलेप उपाए। पदुम पत्र जिमि जग जल जाए।।

    अर्थ · Hindi

    जे बिरंचि निरलेप उपाए। पदुम पत्र जिमि जग जल जाए।।

  3142. RCM 2.317.9Open verse →

    तेउ बिलोकि रघुबर भरत प्रीति अनूप अपार।

    अर्थ · Hindi

    तेउ बिलोकि रघुबर भरत प्रीति अनूप अपार।

  3143. RCM 2.317.10Open verse →

    भए मगन मन तन बचन सहित बिराग बिचार।।317।।

    अर्थ · Hindi

    भए मगन मन तन बचन सहित बिराग बिचार।।317।।

  3144. RCM 2.318.1Open verse →

    जहाँ जनक गुर मति भोरी। प्राकृत प्रीति कहत बड़ि खोरी।।

    अर्थ · Hindi

    जहाँ जनक गुर मति भोरी। प्राकृत प्रीति कहत बड़ि खोरी।।

  3145. RCM 2.318.2Open verse →

    बरनत रघुबर भरत बियोगू। सुनि कठोर कबि जानिहि लोगू।।

    अर्थ · Hindi

    बरनत रघुबर भरत बियोगू। सुनि कठोर कबि जानिहि लोगू।।

  3146. RCM 2.318.3Open verse →

    सो सकोच रसु अकथ सुबानी। समउ सनेहु सुमिरि सकुचानी।।

    अर्थ · Hindi

    सो सकोच रसु अकथ सुबानी। समउ सनेहु सुमिरि सकुचानी।।

  3147. RCM 2.318.4Open verse →

    भेंटि भरत रघुबर समुझाए। पुनि रिपुदवनु हरषि हियँ लाए।।

    अर्थ · Hindi

    भेंटि भरत रघुबर समुझाए। पुनि रिपुदवनु हरषि हियँ लाए।।

  3148. RCM 2.318.5Open verse →

    सेवक सचिव भरत रुख पाई। निज निज काज लगे सब जाई।।

    अर्थ · Hindi

    सेवक सचिव भरत रुख पाई। निज निज काज लगे सब जाई।।

  3149. RCM 2.318.6Open verse →

    सुनि दारुन दुखु दुहूँ समाजा। लगे चलन के साजन साजा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि दारुन दुखु दुहूँ समाजा। लगे चलन के साजन साजा।।

  3150. RCM 2.318.7Open verse →

    प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई। चले सीस धरि राम रजाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई। चले सीस धरि राम रजाई।।

  3151. RCM 2.318.8Open verse →

    मुनि तापस बनदेव निहोरी। सब सनमानि बहोरि बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि तापस बनदेव निहोरी। सब सनमानि बहोरि बहोरी।।

  3152. RCM 2.318.9Open verse →

    लखनहि भेंटि प्रनामु करि सिर धरि सिय पद धूरि।

    अर्थ · Hindi

    लखनहि भेंटि प्रनामु करि सिर धरि सिय पद धूरि।

  3153. RCM 2.318.10Open verse →

    चले सप्रेम असीस सुनि सकल सुमंगल मूरि।।318।।

    अर्थ · Hindi

    चले सप्रेम असीस सुनि सकल सुमंगल मूरि।।318।।

  3154. RCM 2.319.1Open verse →

    सानुज राम नृपहि सिर नाई। कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज राम नृपहि सिर नाई। कीन्हि बहुत बिधि बिनय बड़ाई।।

  3155. RCM 2.319.2Open verse →

    देव दया बस बड़ दुखु पायउ। सहित समाज काननहिं आयउ।।

    अर्थ · Hindi

    देव दया बस बड़ दुखु पायउ। सहित समाज काननहिं आयउ।।

  3156. RCM 2.319.3Open verse →

    पुर पगु धारिअ देइ असीसा। कीन्ह धीर धरि गवनु महीसा।।

    अर्थ · Hindi

    पुर पगु धारिअ देइ असीसा। कीन्ह धीर धरि गवनु महीसा।।

  3157. RCM 2.319.4Open verse →

    मुनि महिदेव साधु सनमाने। बिदा किए हरि हर सम जाने।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि महिदेव साधु सनमाने। बिदा किए हरि हर सम जाने।।

  3158. RCM 2.319.5Open verse →

    सासु समीप गए दोउ भाई। फिरे बंदि पग आसिष पाई।।

    अर्थ · Hindi

    सासु समीप गए दोउ भाई। फिरे बंदि पग आसिष पाई।।

  3159. RCM 2.319.6Open verse →

    कौसिक बामदेव जाबाली। पुरजन परिजन सचिव सुचाली।।

    अर्थ · Hindi

    कौसिक बामदेव जाबाली। पुरजन परिजन सचिव सुचाली।।

  3160. RCM 2.319.7Open verse →

    जथा जोगु करि बिनय प्रनामा। बिदा किए सब सानुज रामा।।

    अर्थ · Hindi

    जथा जोगु करि बिनय प्रनामा। बिदा किए सब सानुज रामा।।

  3161. RCM 2.319.8Open verse →

    नारि पुरुष लघु मध्य बड़ेरे। सब सनमानि कृपानिधि फेरे।।

    अर्थ · Hindi

    नारि पुरुष लघु मध्य बड़ेरे। सब सनमानि कृपानिधि फेरे।।

  3162. RCM 2.319.9Open verse →

    भरत मातु पद बंदि प्रभु सुचि सनेहँ मिलि भेंटि।

    अर्थ · Hindi

    भरत मातु पद बंदि प्रभु सुचि सनेहँ मिलि भेंटि।

  3163. RCM 2.319.10Open verse →

    बिदा कीन्ह सजि पालकी सकुच सोच सब मेटि।।319।।

    अर्थ · Hindi

    बिदा कीन्ह सजि पालकी सकुच सोच सब मेटि।।319।।

  3164. RCM 2.320.1Open verse →

    परिजन मातु पितहि मिलि सीता। फिरी प्रानप्रिय प्रेम पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    परिजन मातु पितहि मिलि सीता। फिरी प्रानप्रिय प्रेम पुनीता।।

  3165. RCM 2.320.2Open verse →

    करि प्रनामु भेंटी सब सासू। प्रीति कहत कबि हियँ न हुलासू।।

    अर्थ · Hindi

    करि प्रनामु भेंटी सब सासू। प्रीति कहत कबि हियँ न हुलासू।।

  3166. RCM 2.320.3Open verse →

    सुनि सिख अभिमत आसिष पाई। रही सीय दुहु प्रीति समाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सिख अभिमत आसिष पाई। रही सीय दुहु प्रीति समाई।।

  3167. RCM 2.320.4Open verse →

    रघुपति पटु पालकीं मगाईं। करि प्रबोधु सब मातु चढ़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति पटु पालकीं मगाईं। करि प्रबोधु सब मातु चढ़ाई।।

  3168. RCM 2.320.5Open verse →

    बार बार हिलि मिलि दुहु भाई। सम सनेहँ जननी पहुँचाई।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार हिलि मिलि दुहु भाई। सम सनेहँ जननी पहुँचाई।।

  3169. RCM 2.320.6Open verse →

    साजि बाजि गज बाहन नाना। भरत भूप दल कीन्ह पयाना।।

    अर्थ · Hindi

    साजि बाजि गज बाहन नाना। भरत भूप दल कीन्ह पयाना।।

  3170. RCM 2.320.7Open verse →

    हृदयँ रामु सिय लखन समेता। चले जाहिं सब लोग अचेता।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ रामु सिय लखन समेता। चले जाहिं सब लोग अचेता।।

  3171. RCM 2.320.8Open verse →

    बसह बाजि गज पसु हियँ हारें। चले जाहिं परबस मन मारें।।

    अर्थ · Hindi

    बसह बाजि गज पसु हियँ हारें। चले जाहिं परबस मन मारें।।

  3172. RCM 2.320.9Open verse →

    गुर गुरतिय पद बंदि प्रभु सीता लखन समेत।

    अर्थ · Hindi

    गुर गुरतिय पद बंदि प्रभु सीता लखन समेत।

  3173. RCM 2.320.10Open verse →

    फिरे हरष बिसमय सहित आए परन निकेत।।320।।

    अर्थ · Hindi

    फिरे हरष बिसमय सहित आए परन निकेत।।320।।

  3174. RCM 2.321.1Open verse →

    बिदा कीन्ह सनमानि निषादू। चलेउ हृदयँ बड़ बिरह बिषादू।।

    अर्थ · Hindi

    बिदा कीन्ह सनमानि निषादू। चलेउ हृदयँ बड़ बिरह बिषादू।।

  3175. RCM 2.321.2Open verse →

    कोल किरात भिल्ल बनचारी। फेरे फिरे जोहारि जोहारी।।

    अर्थ · Hindi

    कोल किरात भिल्ल बनचारी। फेरे फिरे जोहारि जोहारी।।

  3176. RCM 2.321.3Open verse →

    प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं। प्रिय परिजन बियोग बिलखाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं। प्रिय परिजन बियोग बिलखाहीं।।

  3177. RCM 2.321.4Open verse →

    भरत सनेह सुभाउ सुबानी। प्रिया अनुज सन कहत बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    भरत सनेह सुभाउ सुबानी। प्रिया अनुज सन कहत बखानी।।

  3178. RCM 2.321.5Open verse →

    प्रीति प्रतीति बचन मन करनी। श्रीमुख राम प्रेम बस बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रीति प्रतीति बचन मन करनी। श्रीमुख राम प्रेम बस बरनी।।

  3179. RCM 2.321.6Open verse →

    तेहि अवसर खग मृग जल मीना। चित्रकूट चर अचर मलीना।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर खग मृग जल मीना। चित्रकूट चर अचर मलीना।।

  3180. RCM 2.321.7Open verse →

    बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की। बरषि सुमन कहि गति घर घर की।।

    अर्थ · Hindi

    बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की। बरषि सुमन कहि गति घर घर की।।

  3181. RCM 2.321.8Open verse →

    प्रभु प्रनामु करि दीन्ह भरोसो। चले मुदित मन डर न खरो सो।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रनामु करि दीन्ह भरोसो। चले मुदित मन डर न खरो सो।।

  3182. RCM 2.321.9Open verse →

    सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन कुटीर।

    अर्थ · Hindi

    सानुज सीय समेत प्रभु राजत परन कुटीर।

  3183. RCM 2.321.10Open verse →

    भगति ग्यानु बैराग्य जनु सोहत धरें सरीर।।321।।

    अर्थ · Hindi

    भगति ग्यानु बैराग्य जनु सोहत धरें सरीर।।321।।

  3184. RCM 2.322.1Open verse →

    मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू। राम बिरहँ सबु साजु बिहालू।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि महिसुर गुर भरत भुआलू। राम बिरहँ सबु साजु बिहालू।।

  3185. RCM 2.322.2Open verse →

    प्रभु गुन ग्राम गनत मन माहीं। सब चुपचाप चले मग जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु गुन ग्राम गनत मन माहीं। सब चुपचाप चले मग जाहीं।।

  3186. RCM 2.322.3Open verse →

    जमुना उतरि पार सबु भयऊ। सो बासरु बिनु भोजन गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    जमुना उतरि पार सबु भयऊ। सो बासरु बिनु भोजन गयऊ।।

  3187. RCM 2.322.4Open verse →

    उतरि देवसरि दूसर बासू। रामसखाँ सब कीन्ह सुपासू।।

    अर्थ · Hindi

    उतरि देवसरि दूसर बासू। रामसखाँ सब कीन्ह सुपासू।।

  3188. RCM 2.322.5Open verse →

    सई उतरि गोमतीं नहाए। चौथें दिवस अवधपुर आए।

    अर्थ · Hindi

    सई उतरि गोमतीं नहाए। चौथें दिवस अवधपुर आए।

  3189. RCM 2.322.6Open verse →

    जनकु रहे पुर बासर चारी। राज काज सब साज सँभारी।।

    अर्थ · Hindi

    जनकु रहे पुर बासर चारी। राज काज सब साज सँभारी।।

  3190. RCM 2.322.7Open verse →

    सौंपि सचिव गुर भरतहि राजू। तेरहुति चले साजि सबु साजू।।

    अर्थ · Hindi

    सौंपि सचिव गुर भरतहि राजू। तेरहुति चले साजि सबु साजू।।

  3191. RCM 2.322.8Open verse →

    नगर नारि नर गुर सिख मानी। बसे सुखेन राम रजधानी।।

    अर्थ · Hindi

    नगर नारि नर गुर सिख मानी। बसे सुखेन राम रजधानी।।

  3192. RCM 2.322.9Open verse →

    राम दरस लगि लोग सब करत नेम उपबास।

    अर्थ · Hindi

    राम दरस लगि लोग सब करत नेम उपबास।

  3193. RCM 2.322.10Open verse →

    तजि तजि भूषन भोग सुख जिअत अवधि कीं आस।।322।।

    अर्थ · Hindi

    तजि तजि भूषन भोग सुख जिअत अवधि कीं आस।।322।।

  3194. RCM 2.323.1Open verse →

    सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे। निज निज काज पाइ पाइ सिख ओधे।।

    अर्थ · Hindi

    सचिव सुसेवक भरत प्रबोधे। निज निज काज पाइ पाइ सिख ओधे।।

  3195. RCM 2.323.2Open verse →

    पुनि सिख दीन्ह बोलि लघु भाई। सौंपी सकल मातु सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि सिख दीन्ह बोलि लघु भाई। सौंपी सकल मातु सेवकाई।।

  3196. RCM 2.323.3Open verse →

    भूसुर बोलि भरत कर जोरे। करि प्रनाम बय बिनय निहोरे।।

    अर्थ · Hindi

    भूसुर बोलि भरत कर जोरे। करि प्रनाम बय बिनय निहोरे।।

  3197. RCM 2.323.4Open verse →

    ऊँच नीच कारजु भल पोचू। आयसु देब न करब सँकोचू।।

    अर्थ · Hindi

    ऊँच नीच कारजु भल पोचू। आयसु देब न करब सँकोचू।।

  3198. RCM 2.323.5Open verse →

    परिजन पुरजन प्रजा बोलाए। समाधानु करि सुबस बसाए।।

    अर्थ · Hindi

    परिजन पुरजन प्रजा बोलाए। समाधानु करि सुबस बसाए।।

  3199. RCM 2.323.6Open verse →

    सानुज गे गुर गेहँ बहोरी। करि दंडवत कहत कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सानुज गे गुर गेहँ बहोरी। करि दंडवत कहत कर जोरी।।

  3200. RCM 2.323.7Open verse →

    आयसु होइ त रहौं सनेमा। बोले मुनि तन पुलकि सपेमा।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु होइ त रहौं सनेमा। बोले मुनि तन पुलकि सपेमा।।

  3201. RCM 2.323.8Open verse →

    समुझव कहब करब तुम्ह जोई। धरम सारु जग होइहि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    समुझव कहब करब तुम्ह जोई। धरम सारु जग होइहि सोई।।

  3202. RCM 2.323.9Open verse →

    सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सिख पाइ असीस बड़ि गनक बोलि दिनु साधि।

  3203. RCM 2.323.10Open verse →

    सिंघासन प्रभु पादुका बैठारे निरुपाधि।।323।।

    अर्थ · Hindi

    सिंघासन प्रभु पादुका बैठारे निरुपाधि।।323।।

  3204. RCM 2.324.1Open verse →

    राम मातु गुर पद सिरु नाई। प्रभु पद पीठ रजायसु पाई।।

    अर्थ · Hindi

    राम मातु गुर पद सिरु नाई। प्रभु पद पीठ रजायसु पाई।।

  3205. RCM 2.324.2Open verse →

    नंदिगावँ करि परन कुटीरा। कीन्ह निवासु धरम धुर धीरा।।

    अर्थ · Hindi

    नंदिगावँ करि परन कुटीरा। कीन्ह निवासु धरम धुर धीरा।।

  3206. RCM 2.324.3Open verse →

    जटाजूट सिर मुनिपट धारी। महि खनि कुस साँथरी सँवारी।।

    अर्थ · Hindi

    जटाजूट सिर मुनिपट धारी। महि खनि कुस साँथरी सँवारी।।

  3207. RCM 2.324.4Open verse →

    असन बसन बासन ब्रत नेमा। करत कठिन रिषिधरम सप्रेमा।।

    अर्थ · Hindi

    असन बसन बासन ब्रत नेमा। करत कठिन रिषिधरम सप्रेमा।।

  3208. RCM 2.324.5Open verse →

    भूषन बसन भोग सुख भूरी। मन तन बचन तजे तिन तूरी।।

    अर्थ · Hindi

    भूषन बसन भोग सुख भूरी। मन तन बचन तजे तिन तूरी।।

  3209. RCM 2.324.6Open verse →

    अवध राजु सुर राजु सिहाई। दसरथ धनु सुनि धनदु लजाई।।

    अर्थ · Hindi

    अवध राजु सुर राजु सिहाई। दसरथ धनु सुनि धनदु लजाई।।

  3210. RCM 2.324.7Open verse →

    तेहिं पुर बसत भरत बिनु रागा। चंचरीक जिमि चंपक बागा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं पुर बसत भरत बिनु रागा। चंचरीक जिमि चंपक बागा।।

  3211. RCM 2.324.8Open verse →

    रमा बिलासु राम अनुरागी। तजत बमन जिमि जन बड़भागी।।

    अर्थ · Hindi

    रमा बिलासु राम अनुरागी। तजत बमन जिमि जन बड़भागी।।

  3212. RCM 2.324.9Open verse →

    राम पेम भाजन भरतु बड़े न एहिं करतूति।

    अर्थ · Hindi

    राम पेम भाजन भरतु बड़े न एहिं करतूति।

  3213. RCM 2.324.10Open verse →

    चातक हंस सराहिअत टेंक बिबेक बिभूति।।324।।

    अर्थ · Hindi

    चातक हंस सराहिअत टेंक बिबेक बिभूति।।324।।

  3214. RCM 2.325.1Open verse →

    देह दिनहुँ दिन दूबरि होई। घटइ तेजु बलु मुखछबि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    देह दिनहुँ दिन दूबरि होई। घटइ तेजु बलु मुखछबि सोई।।

  3215. RCM 2.325.2Open verse →

    नित नव राम प्रेम पनु पीना। बढ़त धरम दलु मनु न मलीना।।

    अर्थ · Hindi

    नित नव राम प्रेम पनु पीना। बढ़त धरम दलु मनु न मलीना।।

  3216. RCM 2.325.3Open verse →

    जिमि जलु निघटत सरद प्रकासे। बिलसत बेतस बनज बिकासे।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि जलु निघटत सरद प्रकासे। बिलसत बेतस बनज बिकासे।।

  3217. RCM 2.325.4Open verse →

    सम दम संजम नियम उपासा। नखत भरत हिय बिमल अकासा।।

    अर्थ · Hindi

    सम दम संजम नियम उपासा। नखत भरत हिय बिमल अकासा।।

  3218. RCM 2.325.5Open verse →

    ध्रुव बिस्वास अवधि राका सी। स्वामि सुरति सुरबीथि बिकासी।।

    अर्थ · Hindi

    ध्रुव बिस्वास अवधि राका सी। स्वामि सुरति सुरबीथि बिकासी।।

  3219. RCM 2.325.6Open verse →

    राम पेम बिधु अचल अदोषा। सहित समाज सोह नित चोखा।।

    अर्थ · Hindi

    राम पेम बिधु अचल अदोषा। सहित समाज सोह नित चोखा।।

  3220. RCM 2.325.7Open verse →

    भरत रहनि समुझनि करतूती। भगति बिरति गुन बिमल बिभूती।।

    अर्थ · Hindi

    भरत रहनि समुझनि करतूती। भगति बिरति गुन बिमल बिभूती।।

  3221. RCM 2.325.8Open verse →

    बरनत सकल सुकचि सकुचाहीं। सेस गनेस गिरा गमु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बरनत सकल सुकचि सकुचाहीं। सेस गनेस गिरा गमु नाहीं।।

  3222. RCM 2.325.9Open verse →

    नित पूजत प्रभु पाँवरी प्रीति न हृदयँ समाति।।

    अर्थ · Hindi

    नित पूजत प्रभु पाँवरी प्रीति न हृदयँ समाति।।

  3223. RCM 2.325.10Open verse →

    मागि मागि आयसु करत राज काज बहु भाँति।।325।।

    अर्थ · Hindi

    मागि मागि आयसु करत राज काज बहु भाँति।।325।।

  3224. RCM 2.326.1Open verse →

    पुलक गात हियँ सिय रघुबीरू। जीह नामु जप लोचन नीरू।।

    अर्थ · Hindi

    पुलक गात हियँ सिय रघुबीरू। जीह नामु जप लोचन नीरू।।

  3225. RCM 2.326.2Open verse →

    लखन राम सिय कानन बसहीं। भरतु भवन बसि तप तनु कसहीं।।

    अर्थ · Hindi

    लखन राम सिय कानन बसहीं। भरतु भवन बसि तप तनु कसहीं।।

  3226. RCM 2.326.3Open verse →

    दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू। सब बिधि भरत सराहन जोगू।।

    अर्थ · Hindi

    दोउ दिसि समुझि कहत सबु लोगू। सब बिधि भरत सराहन जोगू।।

  3227. RCM 2.326.4Open verse →

    सुनि ब्रत नेम साधु सकुचाहीं। देखि दसा मुनिराज लजाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि ब्रत नेम साधु सकुचाहीं। देखि दसा मुनिराज लजाहीं।।

  3228. RCM 2.326.5Open verse →

    परम पुनीत भरत आचरनू। मधुर मंजु मुद मंगल करनू।।

    अर्थ · Hindi

    परम पुनीत भरत आचरनू। मधुर मंजु मुद मंगल करनू।।

  3229. RCM 2.326.6Open verse →

    हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू।।

    अर्थ · Hindi

    हरन कठिन कलि कलुष कलेसू। महामोह निसि दलन दिनेसू।।

  3230. RCM 2.326.7Open verse →

    पाप पुंज कुंजर मृगराजू। समन सकल संताप समाजू।

    अर्थ · Hindi

    पाप पुंज कुंजर मृगराजू। समन सकल संताप समाजू।

  3231. RCM 2.326.8Open verse →

    जन रंजन भंजन भव भारू। राम सनेह सुधाकर सारू।।

    अर्थ · Hindi

    जन रंजन भंजन भव भारू। राम सनेह सुधाकर सारू।।