नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।
RCM 2.2.8
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।
RCM 2.2.8
नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।