गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।
RCM 2.8.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।
RCM 2.8.7
गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं।।