रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।
RCM 2.1.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।
RCM 2.1.3
रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहुँ आई।।