भरत सरिस प्रिय को जग माहीं। इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भरत सरिस प्रिय को जग माहीं। इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं।।
RCM 2.7.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
भरत सरिस प्रिय को जग माहीं। इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं।।
RCM 2.7.7
भरत सरिस प्रिय को जग माहीं। इहइ सगुन फलु दूसर नाहीं।।