जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं।।
RCM 2.3.5
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं।।
RCM 2.3.5
जे गुर चरन रेनु सिर धरहीं। ते जनु सकल बिभव बस करहीं।।