प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।
RCM 2.8.2
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।
RCM 2.8.2
प्रेम पुलकि तन मन अनुरागीं। मंगल कलस सजन सब लागीं।।