नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।
RCM 2.2.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।
RCM 2.2.3
नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।