श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।
RCM 2.2.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।
RCM 2.2.7
श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।