राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए।।
RCM 2.7.4
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए।।
RCM 2.7.4
राम सीय तन सगुन जनाए। फरकहिं मंगल अंग सुहाए।।