राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।
RCM 2.1.8
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।
RCM 2.1.8
राम रूपु गुनसीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।