मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।
RCM 2.1.4
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।
RCM 2.1.4
मनिगन पुर नर नारि सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।