नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।
RCM 2.4.2
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।
RCM 2.4.2
नाथ रामु करिअहिं जुबराजू। कहिअ कृपा करि करिअ समाजू।।