बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।
RCM 1.5.2
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।
RCM 1.5.2
बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।।