सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।
RCM 1.1.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।
RCM 1.1.3
सुकृति संभु तन बिमल बिभूती। मंजुल मंगल मोद प्रसूती।।