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Ramcharitmanas · Chapter 6

Lanka Kanda

लङ्काकाण्ड

The bridge to Lanka, the great war, the fall of Ravana, return to Ayodhya. (Called Yuddha Kanda in some Ramayana traditions.)

1393 verses

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  1. RCM 6.1.1
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    यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।।

  2. RCM 6.1.2
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    प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।।

  3. RCM 6.1.3
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    तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।

  4. RCM 6.1.4
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    सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।

  5. RCM 6.1.5
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    जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।।

  6. RCM 6.1.6
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    राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।।

  7. RCM 6.1.7
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    बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।

  8. RCM 6.1.8
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    राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।।

    अर्थ (Hindi)

    राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।।

  9. RCM 6.1.9
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    धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।

    अर्थ (Hindi)

    धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।

  10. RCM 6.1.10
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    सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।

  11. RCM 6.1.11
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    अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।

    अर्थ (Hindi)

    अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।

  12. RCM 6.1.12
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    आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।

    अर्थ (Hindi)

    आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।

  13. RCM 6.2.1
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    सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।।

  14. RCM 6.2.2
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    देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।।

  15. RCM 6.2.3
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    परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।

  16. RCM 6.2.4
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    करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।

    अर्थ (Hindi)

    करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।

  17. RCM 6.2.5
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    सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।

  18. RCM 6.2.6
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    लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।

    अर्थ (Hindi)

    लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।

  19. RCM 6.2.7
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    सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।

  20. RCM 6.2.8
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    संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।

  21. RCM 6.2.9
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    संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।

    अर्थ (Hindi)

    संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।

  22. RCM 6.2.10
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    ते नर करहि कलप भरि धोर नरक महुँ बास।।2।।

    अर्थ (Hindi)

    ते नर करहि कलप भरि धोर नरक महुँ बास।।2।।

  23. RCM 6.3.1
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    जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।

  24. RCM 6.3.2
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    जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।

    अर्थ (Hindi)

    जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।

  25. RCM 6.3.3
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    होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।

    अर्थ (Hindi)

    होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।

  26. RCM 6.3.4
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    मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।।

    अर्थ (Hindi)

    मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।।

  27. RCM 6.3.5
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    राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।

    अर्थ (Hindi)

    राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।

  28. RCM 6.3.6
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    गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।

  29. RCM 6.3.7
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    बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।

    अर्थ (Hindi)

    बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।

  30. RCM 6.3.8
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    बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।

    अर्थ (Hindi)

    बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।

  31. RCM 6.3.9
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    महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।

  32. RCM 6.3.10
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    श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान।

    अर्थ (Hindi)

    श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान।

  33. RCM 6.3.11
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    ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।।3।।

    अर्थ (Hindi)

    ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।।3।।

  34. RCM 6.4.1
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    बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।

    अर्थ (Hindi)

    बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।

  35. RCM 6.4.2
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    चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।

  36. RCM 6.4.3
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    सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।

    अर्थ (Hindi)

    सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।

  37. RCM 6.4.4
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    देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।

  38. RCM 6.4.5
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    मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।

  39. RCM 6.4.6
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    अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।

  40. RCM 6.4.7
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    प्रभुहि बिलोकहिं टरहिं न टारे। मन हरषित सब भए सुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभुहि बिलोकहिं टरहिं न टारे। मन हरषित सब भए सुखारे।।

  41. RCM 6.4.8
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    तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।

  42. RCM 6.4.9
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    चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।

  43. RCM 6.4.10
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    सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं।

    अर्थ (Hindi)

    सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं।

  44. RCM 6.4.11
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    अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं।।4।।

    अर्थ (Hindi)

    अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं।।4।।

  45. RCM 6.5.1
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    अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।

  46. RCM 6.5.2
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    सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।

  47. RCM 6.5.3
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    सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।

  48. RCM 6.5.4
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    खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।

  49. RCM 6.5.5
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    सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी।।

  50. RCM 6.5.6
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    खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।।

  51. RCM 6.5.7
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    जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।

  52. RCM 6.5.8
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    दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।

  53. RCM 6.5.9
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    जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता।।

  54. RCM 6.5.10
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    सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।

  55. RCM 6.5.11
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    बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस।

    अर्थ (Hindi)

    बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस।

  56. RCM 6.5.12
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    सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस।।5।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस।।5।।

  57. RCM 6.6.1
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    निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।

  58. RCM 6.6.2
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    मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।

  59. RCM 6.6.3
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    कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।

  60. RCM 6.6.4
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    चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।

    अर्थ (Hindi)

    चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।

  61. RCM 6.6.5
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    नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।

  62. RCM 6.6.6
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    तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।

  63. RCM 6.6.7
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    अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।

    अर्थ (Hindi)

    अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।

  64. RCM 6.6.8
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    जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।

  65. RCM 6.6.9
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    तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।

  66. RCM 6.6.10
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    रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।

    अर्थ (Hindi)

    रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।

  67. RCM 6.6.11
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    सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।

  68. RCM 6.7.1
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    नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।

  69. RCM 6.7.2
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    चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।

    अर्थ (Hindi)

    चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।

  70. RCM 6.7.3
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    संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।

    अर्थ (Hindi)

    संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।

  71. RCM 6.7.4
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    तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।

  72. RCM 6.7.5
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    सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी।।

  73. RCM 6.7.6
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    मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी।।

  74. RCM 6.7.7
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    सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।

  75. RCM 6.7.8
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    जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।

  76. RCM 6.7.9
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    अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।

  77. RCM 6.7.10
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    नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।

  78. RCM 6.8.1
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    तब रावन मयसुता उठाई। कहै लाग खल निज प्रभुताई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब रावन मयसुता उठाई। कहै लाग खल निज प्रभुताई।।

  79. RCM 6.8.2
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    सुनु तै प्रिया बृथा भय माना। जग जोधा को मोहि समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु तै प्रिया बृथा भय माना। जग जोधा को मोहि समाना।।

  80. RCM 6.8.3
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    बरुन कुबेर पवन जम काला। भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    बरुन कुबेर पवन जम काला। भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला।।

  81. RCM 6.8.4
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    देव दनुज नर सब बस मोरें। कवन हेतु उपजा भय तोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    देव दनुज नर सब बस मोरें। कवन हेतु उपजा भय तोरें।।

  82. RCM 6.8.5
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    नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई। सभाँ बहोरि बैठ सो जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई। सभाँ बहोरि बैठ सो जाई।।

  83. RCM 6.8.6
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    मंदोदरीं हदयँ अस जाना। काल बस्य उपजा अभिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरीं हदयँ अस जाना। काल बस्य उपजा अभिमाना।।

  84. RCM 6.8.7
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    सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।

    अर्थ (Hindi)

    सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।

  85. RCM 6.8.8
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    कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।

  86. RCM 6.8.9
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    कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।

  87. RCM 6.8.10
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    सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।

    अर्थ (Hindi)

    सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।

  88. RCM 6.8.11
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    निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।

    अर्थ (Hindi)

    निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।

  89. RCM 6.9.1
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    कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।।

  90. RCM 6.9.2
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    बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।

    अर्थ (Hindi)

    बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।

  91. RCM 6.9.3
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    छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।

  92. RCM 6.9.4
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    सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।

  93. RCM 6.9.5
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    जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।।

  94. RCM 6.9.6
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    सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।।

  95. RCM 6.9.7
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    तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।

    अर्थ (Hindi)

    तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।

  96. RCM 6.9.8
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    प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।

  97. RCM 6.9.9
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    बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।।

    अर्थ (Hindi)

    बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।।

  98. RCM 6.9.10
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    प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।

  99. RCM 6.9.11
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    नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।

    अर्थ (Hindi)

    नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।

  100. RCM 6.9.12
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    नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।

    अर्थ (Hindi)

    नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।

  101. RCM 6.10.1
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    यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।

  102. RCM 6.10.2
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    सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।

  103. RCM 6.10.3
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    अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।

    अर्थ (Hindi)

    अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।

  104. RCM 6.10.4
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    सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।

  105. RCM 6.10.5
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    हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।

  106. RCM 6.10.6
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    संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।

  107. RCM 6.10.7
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    लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा।।

    अर्थ (Hindi)

    लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा।।

  108. RCM 6.10.8
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    बैठ जाइ तेही मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन।।

    अर्थ (Hindi)

    बैठ जाइ तेही मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन।।

  109. RCM 6.10.9
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    बाजहिं ताल पखाउज बीना। नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजहिं ताल पखाउज बीना। नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना।।

  110. RCM 6.10.10
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    सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।

    अर्थ (Hindi)

    सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।

  111. RCM 6.10.11
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    परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।

    अर्थ (Hindi)

    परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।

  112. RCM 6.11.1
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    इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा।।

  113. RCM 6.11.2
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    सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी।।

  114. RCM 6.11.3
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    तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।

  115. RCM 6.11.4
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    ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।

  116. RCM 6.11.5
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    प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।

  117. RCM 6.11.6
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    दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।

    अर्थ (Hindi)

    दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।

  118. RCM 6.11.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना।।

  119. RCM 6.11.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन।।

  120. RCM 6.11.9
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    एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।

  121. RCM 6.11.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।

  122. RCM 6.11.11
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    पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।

    अर्थ (Hindi)

    पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।

  123. RCM 6.11.12
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    कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।

  124. RCM 6.12.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।

    अर्थ (Hindi)

    पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।

  125. RCM 6.12.2
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    मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।

  126. RCM 6.12.3
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    बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।

  127. RCM 6.12.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।

  128. RCM 6.12.5
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    कह सुग़ीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई।।

    अर्थ (Hindi)

    कह सुग़ीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई।।

  129. RCM 6.12.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई।।

  130. RCM 6.12.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा।।

  131. RCM 6.12.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं।।

  132. RCM 6.12.9
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    प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।

  133. RCM 6.12.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।

  134. RCM 6.12.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।

    अर्थ (Hindi)

    कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।

  135. RCM 6.12.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।

  136. RCM 6.12.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।

    अर्थ (Hindi)

    पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।

  137. RCM 6.12.14
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    दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।

  138. RCM 6.13.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।।

  139. RCM 6.13.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।।

  140. RCM 6.13.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।।

    अर्थ (Hindi)

    कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।।

  141. RCM 6.13.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।।

    अर्थ (Hindi)

    लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।।

  142. RCM 6.13.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।।

    अर्थ (Hindi)

    छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।।

  143. RCM 6.13.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।।

  144. RCM 6.13.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।

  145. RCM 6.13.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।

  146. RCM 6.13.9
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    छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।

    अर्थ (Hindi)

    छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।

  147. RCM 6.13.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।

  148. RCM 6.13.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।

    अर्थ (Hindi)

    अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।

  149. RCM 6.13.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।

  150. RCM 6.14.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।

  151. RCM 6.14.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।

  152. RCM 6.14.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दसमुख देखि सभा भय पाई। बिहसि बचन कह जुगुति बनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    दसमुख देखि सभा भय पाई। बिहसि बचन कह जुगुति बनाई।।

  153. RCM 6.14.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिरउ गिरे संतत सुभ जाही। मुकुट परे कस असगुन ताही।।

    अर्थ (Hindi)

    सिरउ गिरे संतत सुभ जाही। मुकुट परे कस असगुन ताही।।

  154. RCM 6.14.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।

  155. RCM 6.14.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।

  156. RCM 6.14.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।

  157. RCM 6.14.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।

    अर्थ (Hindi)

    कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।

  158. RCM 6.14.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।

  159. RCM 6.14.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।

    अर्थ (Hindi)

    लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।

  160. RCM 6.15.1
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    पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।

  161. RCM 6.15.2
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    भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।

    अर्थ (Hindi)

    भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।

  162. RCM 6.15.3
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    जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।

  163. RCM 6.15.4
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    श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।

  164. RCM 6.15.5
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    अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला।।

    अर्थ (Hindi)

    अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला।।

  165. RCM 6.15.6
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    आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा।।

    अर्थ (Hindi)

    आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा।।

  166. RCM 6.15.7
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    रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।

    अर्थ (Hindi)

    रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।

  167. RCM 6.15.8
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    उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।

    अर्थ (Hindi)

    उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।

  168. RCM 6.15.9
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    अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।

    अर्थ (Hindi)

    अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।

  169. RCM 6.15.10
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    मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।

  170. RCM 6.15.11
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    अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।

  171. RCM 6.15.12
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    प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ।।15(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ।।15(ख)।।

  172. RCM 6.16.1
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    बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना।।

  173. RCM 6.16.2
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    नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।

  174. RCM 6.16.3
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    साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।।

    अर्थ (Hindi)

    साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।।

  175. RCM 6.16.4
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    रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा।।

  176. RCM 6.16.5
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    सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें।।

  177. RCM 6.16.6
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    जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई।।

    अर्थ (Hindi)

    जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई।।

  178. RCM 6.16.7
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    तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।

    अर्थ (Hindi)

    तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।

  179. RCM 6.16.8
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    मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।

  180. RCM 6.16.9
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    एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।

  181. RCM 6.16.10
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    सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।

  182. RCM 6.16.11
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    फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।

    अर्थ (Hindi)

    फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।

  183. RCM 6.16.12
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    मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।

  184. RCM 6.17.1
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    इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।

  185. RCM 6.17.2
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    कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।

  186. RCM 6.17.3
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    सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी।।

  187. RCM 6.17.4
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    मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा।।

  188. RCM 6.17.5
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    नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।

  189. RCM 6.17.6
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    बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।

    अर्थ (Hindi)

    बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।

  190. RCM 6.17.7
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    बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।

  191. RCM 6.17.8
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    काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।

  192. RCM 6.17.9
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    प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।

  193. RCM 6.17.10
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    सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।

  194. RCM 6.17.11
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    स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ।

    अर्थ (Hindi)

    स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ।

  195. RCM 6.17.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।।17(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।।17(ख)।।

  196. RCM 6.18.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।

  197. RCM 6.18.2
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    प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।

  198. RCM 6.18.3
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    पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भैंटा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भैंटा।।

  199. RCM 6.18.4
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    बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई।।

  200. RCM 6.18.5
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    तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।

  201. RCM 6.18.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।

  202. RCM 6.18.7
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    एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं।।

  203. RCM 6.18.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी।।

  204. RCM 6.18.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।

  205. RCM 6.18.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।

  206. RCM 6.18.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।

    अर्थ (Hindi)

    गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।

  207. RCM 6.18.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।

    अर्थ (Hindi)

    सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।

  208. RCM 6.19.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा।।

  209. RCM 6.19.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा।।

  210. RCM 6.19.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए।।

    अर्थ (Hindi)

    आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए।।

  211. RCM 6.19.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें।।

  212. RCM 6.19.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।

  213. RCM 6.19.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।

  214. RCM 6.19.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा।।

    अर्थ (Hindi)

    गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा।।

  215. RCM 6.19.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी।।

  216. RCM 6.19.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।

    अर्थ (Hindi)

    जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।

  217. RCM 6.19.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।

    अर्थ (Hindi)

    राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।

  218. RCM 6.20.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।।

    अर्थ (Hindi)

    कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।।

  219. RCM 6.20.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई।।

  220. RCM 6.20.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती।।

  221. RCM 6.20.4
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    बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।

    अर्थ (Hindi)

    बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।

  222. RCM 6.20.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।

  223. RCM 6.20.6
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    अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।

  224. RCM 6.20.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।

  225. RCM 6.20.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।

  226. RCM 6.20.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।

    अर्थ (Hindi)

    प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।

  227. RCM 6.20.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।

    अर्थ (Hindi)

    आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।

  228. RCM 6.21.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।

  229. RCM 6.21.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।

    अर्थ (Hindi)

    कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।

  230. RCM 6.21.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा।।

  231. RCM 6.21.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।।

  232. RCM 6.21.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक।।

  233. RCM 6.21.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु।।

  234. RCM 6.21.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।

    अर्थ (Hindi)

    अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।

  235. RCM 6.21.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।

  236. RCM 6.21.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।

  237. RCM 6.21.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।

  238. RCM 6.21.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस।

    अर्थ (Hindi)

    हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस।

  239. RCM 6.21.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस।।21।

    अर्थ (Hindi)

    अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस।।21।

  240. RCM 6.22.1
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    सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।

  241. RCM 6.22.2
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    तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।

  242. RCM 6.22.3
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    सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।।

  243. RCM 6.22.4
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    खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ।।

  244. RCM 6.22.5
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    कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।

  245. RCM 6.22.6
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    देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।

  246. RCM 6.22.7
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    कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।

  247. RCM 6.22.8
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    धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।

    अर्थ (Hindi)

    धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।

  248. RCM 6.22.9
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    जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।

    अर्थ (Hindi)

    जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।

  249. RCM 6.22.10
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    लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।

  250. RCM 6.22.11
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    पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।

  251. RCM 6.22.12
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    सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।

  252. RCM 6.23.1
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    तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद।।

  253. RCM 6.23.2
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    तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना।।

    अर्थ (Hindi)

    तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना।।

  254. RCM 6.23.3
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    तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ।।

  255. RCM 6.23.4
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    जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा।।

  256. RCM 6.23.5
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    सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।।

    अर्थ (Hindi)

    सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।।

  257. RCM 6.23.6
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    आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।।

    अर्थ (Hindi)

    आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।।

  258. RCM 6.23.7
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    सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा।।

  259. RCM 6.23.8
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    रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई।।

  260. RCM 6.23.9
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    जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन।।

    अर्थ (Hindi)

    जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन।।

  261. RCM 6.23.10
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    चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई।।

  262. RCM 6.23.11
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    सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।

  263. RCM 6.23.12
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    फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।

  264. RCM 6.23.13
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    सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह।

  265. RCM 6.23.14
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    कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।

  266. RCM 6.23.15
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    प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।

    अर्थ (Hindi)

    प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।

  267. RCM 6.23.16
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    जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि।।23(ग)।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि।।23(ग)।।

  268. RCM 6.23.17
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    जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।

    अर्थ (Hindi)

    जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।

  269. RCM 6.23.18
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    तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष।।23(घ)।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष।।23(घ)।।

  270. RCM 6.23.19
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    बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस।

    अर्थ (Hindi)

    बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस।

  271. RCM 6.23.20
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    प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।

  272. RCM 6.23.21
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    हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।

    अर्थ (Hindi)

    हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।

  273. RCM 6.23.22
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    जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।

    अर्थ (Hindi)

    जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।

  274. RCM 6.24.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा।।

  275. RCM 6.24.2
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    नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई।।

  276. RCM 6.24.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।

  277. RCM 6.24.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।

  278. RCM 6.24.5
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    कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।

  279. RCM 6.24.6
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    बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।

  280. RCM 6.24.7
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    सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई।।

  281. RCM 6.24.8
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    देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा।।

  282. RCM 6.24.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।

  283. RCM 6.24.10
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    पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।

  284. RCM 6.24.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी।।

  285. RCM 6.24.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते।।

    अर्थ (Hindi)

    कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते।।

  286. RCM 6.24.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला।।

  287. RCM 6.24.14
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई।।

  288. RCM 6.24.15
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।

  289. RCM 6.24.16
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।

  290. RCM 6.24.17
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    एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।

    अर्थ (Hindi)

    एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।

  291. RCM 6.24.18
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।

    अर्थ (Hindi)

    इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।

  292. RCM 6.25.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला।।

  293. RCM 6.25.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई।।

  294. RCM 6.25.3
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    सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी।।

  295. RCM 6.25.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला।।

    अर्थ (Hindi)

    भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला।।

  296. RCM 6.25.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।

    अर्थ (Hindi)

    जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।

  297. RCM 6.25.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।

  298. RCM 6.25.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जासु चलत डोलति इमि धरनी। चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु चलत डोलति इमि धरनी। चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी।।

  299. RCM 6.25.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोइ रावन जग बिदित प्रतापी। सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी।।

    अर्थ (Hindi)

    सोइ रावन जग बिदित प्रतापी। सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी।।

  300. RCM 6.25.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।

  301. RCM 6.25.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।

    अर्थ (Hindi)

    रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।

  302. RCM 6.26.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।

  303. RCM 6.26.2
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    सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।

  304. RCM 6.26.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।

  305. RCM 6.26.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।

  306. RCM 6.26.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा।।

  307. RCM 6.26.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा।।

    अर्थ (Hindi)

    पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा।।

  308. RCM 6.26.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।

    अर्थ (Hindi)

    बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।

  309. RCM 6.26.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।

  310. RCM 6.26.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।

    अर्थ (Hindi)

    सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।

  311. RCM 6.26.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।

    अर्थ (Hindi)

    कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।

  312. RCM 6.27.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।

  313. RCM 6.27.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।

  314. RCM 6.27.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मूढ़ बृथा जनि मारसि गाला। राम बयर अस होइहि हाला।।

    अर्थ (Hindi)

    मूढ़ बृथा जनि मारसि गाला। राम बयर अस होइहि हाला।।

  315. RCM 6.27.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तव सिर निकर कपिन्ह के आगें। परिहहिं धरनि राम सर लागें।।

    अर्थ (Hindi)

    तव सिर निकर कपिन्ह के आगें। परिहहिं धरनि राम सर लागें।।

  316. RCM 6.27.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलहहिं भालु कीस चौगाना।।

    अर्थ (Hindi)

    ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलहहिं भालु कीस चौगाना।।

  317. RCM 6.27.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जबहिं समर कोपहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक।।

    अर्थ (Hindi)

    जबहिं समर कोपहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक।।

  318. RCM 6.27.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा। अस बिचारि भजु राम उदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा। अस बिचारि भजु राम उदारा।।

  319. RCM 6.27.8
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    सुनत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।

  320. RCM 6.27.9
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    कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।

  321. RCM 6.27.10
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    मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।

    अर्थ (Hindi)

    मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।

  322. RCM 6.28.1
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    सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।

    अर्थ (Hindi)

    सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।

  323. RCM 6.28.2
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    नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।

  324. RCM 6.28.3
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    मम भुज सागर बल जल पूरा। जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा।।

    अर्थ (Hindi)

    मम भुज सागर बल जल पूरा। जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा।।

  325. RCM 6.28.4
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    बीस पयोधि अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइहि पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बीस पयोधि अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइहि पारा।।

  326. RCM 6.28.5
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    दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा।।

  327. RCM 6.28.6
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    जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा।।

  328. RCM 6.28.7
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    तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।

  329. RCM 6.28.8
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    हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।

    अर्थ (Hindi)

    हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।

  330. RCM 6.28.9
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    सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस।

    अर्थ (Hindi)

    सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस।

  331. RCM 6.28.10
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    हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस।।28।।

    अर्थ (Hindi)

    हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस।।28।।

  332. RCM 6.29.1
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    जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला। बिधि के लिखे अंक निज भाला।।

    अर्थ (Hindi)

    जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला। बिधि के लिखे अंक निज भाला।।

  333. RCM 6.29.2
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    नर कें कर आपन बध बाँची। हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची।।

    अर्थ (Hindi)

    नर कें कर आपन बध बाँची। हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची।।

  334. RCM 6.29.3
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    सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें। लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें।।

    अर्थ (Hindi)

    सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें। लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें।।

  335. RCM 6.29.4
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    आन बीर बल सठ मम आगें। पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे।।

    अर्थ (Hindi)

    आन बीर बल सठ मम आगें। पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे।।

  336. RCM 6.29.5
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    कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।

  337. RCM 6.29.6
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    लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।

  338. RCM 6.29.7
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    सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही।।

    अर्थ (Hindi)

    सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही।।

  339. RCM 6.29.8
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    सो भुजबल राखेउ उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली।।

    अर्थ (Hindi)

    सो भुजबल राखेउ उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली।।

  340. RCM 6.29.9
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    सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा।।

  341. RCM 6.29.10
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    इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा।।

  342. RCM 6.29.11
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    जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।

    अर्थ (Hindi)

    जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।

  343. RCM 6.29.12
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    ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।

    अर्थ (Hindi)

    ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।

  344. RCM 6.30.1
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    अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।

  345. RCM 6.30.2
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    दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।

  346. RCM 6.30.3
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    बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।

  347. RCM 6.30.4
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    मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।

  348. RCM 6.30.5
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    नाहिं त करि मुख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीतहि बरजोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाहिं त करि मुख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीतहि बरजोरा।।

  349. RCM 6.30.6
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    जानेउँ तव बल अधम सुरारी। सूनें हरि आनिहि परनारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जानेउँ तव बल अधम सुरारी। सूनें हरि आनिहि परनारी।।

  350. RCM 6.30.7
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    तैं निसिचर पति गर्ब बहूता। मैं रघुपति सेवक कर दूता।।

    अर्थ (Hindi)

    तैं निसिचर पति गर्ब बहूता। मैं रघुपति सेवक कर दूता।।

  351. RCM 6.30.8
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    जौं न राम अपमानहि डरउँ। तोहि देखत अस कौतुक करऊँ।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं न राम अपमानहि डरउँ। तोहि देखत अस कौतुक करऊँ।।

  352. RCM 6.30.9
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    तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।

    अर्थ (Hindi)

    तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।

  353. RCM 6.30.10
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    तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।

    अर्थ (Hindi)

    तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।

  354. RCM 6.31.1
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    जौ अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौ अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।।

  355. RCM 6.31.2
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    कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।।

  356. RCM 6.31.3
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    सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।

    अर्थ (Hindi)

    सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।

  357. RCM 6.31.4
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    तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।

    अर्थ (Hindi)

    तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।

  358. RCM 6.31.5
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    अस बिचारि खल बधउँ न तोही। अब जनि रिस उपजावसि मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि खल बधउँ न तोही। अब जनि रिस उपजावसि मोही।।

  359. RCM 6.31.6
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    सुनि सकोप कह निसिचर नाथा। अधर दसन दसि मीजत हाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सकोप कह निसिचर नाथा। अधर दसन दसि मीजत हाथा।।

  360. RCM 6.31.7
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    रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी।।

    अर्थ (Hindi)

    रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी।।

  361. RCM 6.31.8
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    कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें।।

    अर्थ (Hindi)

    कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें।।

  362. RCM 6.31.9
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    अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास।

    अर्थ (Hindi)

    अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास।

  363. RCM 6.31.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।।31(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।।31(क)।।

  364. RCM 6.31.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक।

    अर्थ (Hindi)

    जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक।

  365. RCM 6.31.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खाहीं निसाचर दिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक।।31(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    खाहीं निसाचर दिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक।।31(ख)।।

  366. RCM 6.32.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।

  367. RCM 6.32.2
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    हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।

  368. RCM 6.32.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कटकटान कपिकुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महि मारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कटकटान कपिकुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महि मारी।।

  369. RCM 6.32.4
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    डोलत धरनि सभासद खसे। चले भाजि भय मारुत ग्रसे।।

    अर्थ (Hindi)

    डोलत धरनि सभासद खसे। चले भाजि भय मारुत ग्रसे।।

  370. RCM 6.32.5
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    गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।

  371. RCM 6.32.6
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    कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।

    अर्थ (Hindi)

    कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।

  372. RCM 6.32.7
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    आवत मुकुट देखि कपि भागे। दिनहीं लूक परन बिधि लागे।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत मुकुट देखि कपि भागे। दिनहीं लूक परन बिधि लागे।।

  373. RCM 6.32.8
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    की रावन करि कोप चलाए। कुलिस चारि आवत अति धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    की रावन करि कोप चलाए। कुलिस चारि आवत अति धाए।।

  374. RCM 6.32.9
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    कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।

    अर्थ (Hindi)

    कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।

  375. RCM 6.32.10
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    ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।

  376. RCM 6.32.11
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    तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास।

    अर्थ (Hindi)

    तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास।

  377. RCM 6.32.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास।।32(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास।।32(क)।।

  378. RCM 6.32.13
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    उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।

    अर्थ (Hindi)

    उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।

  379. RCM 6.32.14
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।

  380. RCM 6.33.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।

  381. RCM 6.33.2
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    मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।

  382. RCM 6.33.3
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    पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा। गाल बजावत तोहि न लाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा। गाल बजावत तोहि न लाजा।।

  383. RCM 6.33.4
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    मरु गर काटि निलज कुलघाती। बल बिलोकि बिहरति नहिं छाती।।

    अर्थ (Hindi)

    मरु गर काटि निलज कुलघाती। बल बिलोकि बिहरति नहिं छाती।।

  384. RCM 6.33.5
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    रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।

    अर्थ (Hindi)

    रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।

  385. RCM 6.33.6
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    सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।

    अर्थ (Hindi)

    सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।

  386. RCM 6.33.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    याको फलु पावहिगो आगें। बानर भालु चपेटन्हि लागें।।

    अर्थ (Hindi)

    याको फलु पावहिगो आगें। बानर भालु चपेटन्हि लागें।।

  387. RCM 6.33.8
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    रामु मनुज बोलत असि बानी। गिरहिं न तव रसना अभिमानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रामु मनुज बोलत असि बानी। गिरहिं न तव रसना अभिमानी।।

  388. RCM 6.33.9
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    गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।

  389. RCM 6.33.10
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    सो नर क्यों दसकंध बालि बध्यो जेहिं एक सर।

    अर्थ (Hindi)

    सो नर क्यों दसकंध बालि बध्यो जेहिं एक सर।

  390. RCM 6.33.11
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    बीसहुँ लोचन अंध धिग तव जन्म कुजाति जड़।।33(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    बीसहुँ लोचन अंध धिग तव जन्म कुजाति जड़।।33(क)।।

  391. RCM 6.33.12
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    तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।

    अर्थ (Hindi)

    तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।

  392. RCM 6.33.13
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    तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।

  393. RCM 6.34.1
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    मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।।

    अर्थ (Hindi)

    मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।।

  394. RCM 6.34.2
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    असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।

    अर्थ (Hindi)

    असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।

  395. RCM 6.34.3
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    गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।

    अर्थ (Hindi)

    गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।

  396. RCM 6.34.4
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    मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।

  397. RCM 6.34.5
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    जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।

  398. RCM 6.34.6
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    बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।

  399. RCM 6.34.7
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    साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।

    अर्थ (Hindi)

    साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।

  400. RCM 6.34.8
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    समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।

    अर्थ (Hindi)

    समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।

  401. RCM 6.34.9
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    जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।।

  402. RCM 6.34.10
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    सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।

  403. RCM 6.34.11
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    इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।।

  404. RCM 6.34.12
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    झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।

  405. RCM 6.34.13
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    पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।

  406. RCM 6.34.14
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    पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।

  407. RCM 6.34.15
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    कोटिन्ह मेघनाद सम सुभट उठे हरषाइ।

    अर्थ (Hindi)

    कोटिन्ह मेघनाद सम सुभट उठे हरषाइ।

  408. RCM 6.34.16
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    झपटहिं टरै न कपि चरन पुनि बैठहिं सिर नाइ।।34(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    झपटहिं टरै न कपि चरन पुनि बैठहिं सिर नाइ।।34(क)।।

  409. RCM 6.34.17
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    भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।

    अर्थ (Hindi)

    भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।

  410. RCM 6.34.18
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    कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।

  411. RCM 6.35.1
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    कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।

    अर्थ (Hindi)

    कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।

  412. RCM 6.35.2
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    गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।

    अर्थ (Hindi)

    गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।

  413. RCM 6.35.3
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    गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।

    अर्थ (Hindi)

    गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।

  414. RCM 6.35.4
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    भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।

  415. RCM 6.35.5
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    सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।

  416. RCM 6.35.6
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    जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।

    अर्थ (Hindi)

    जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।

  417. RCM 6.35.7
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    उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।

  418. RCM 6.35.8
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    तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।

    अर्थ (Hindi)

    तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।

  419. RCM 6.35.9
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    पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।

  420. RCM 6.35.10
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    रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।

    अर्थ (Hindi)

    रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।

  421. RCM 6.35.11
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    हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई।।

  422. RCM 6.35.12
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    प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा।।

  423. RCM 6.35.13
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    जातुधान अंगद पन देखी। भय ब्याकुल सब भए बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    जातुधान अंगद पन देखी। भय ब्याकुल सब भए बिसेषी।।

  424. RCM 6.35.14
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    रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।

    अर्थ (Hindi)

    रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।

  425. RCM 6.35.15
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    पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।

  426. RCM 6.35.16
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    साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।

    अर्थ (Hindi)

    साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।

  427. RCM 6.35.17
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    मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।

  428. RCM 6.36.1
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    कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही।।

    अर्थ (Hindi)

    कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही।।

  429. RCM 6.36.2
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    रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई।।

  430. RCM 6.36.3
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    पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा।।

    अर्थ (Hindi)

    पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा।।

  431. RCM 6.36.4
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    कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका।।

  432. RCM 6.36.5
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    रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा।।

  433. RCM 6.36.6
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    जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा।।

  434. RCM 6.36.7
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    अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु।।

    अर्थ (Hindi)

    अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु।।

  435. RCM 6.36.8
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    पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु।।

    अर्थ (Hindi)

    पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु।।

  436. RCM 6.36.9
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    बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।

    अर्थ (Hindi)

    बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।

  437. RCM 6.36.10
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    जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।

  438. RCM 6.36.11
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    भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।

    अर्थ (Hindi)

    भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।

  439. RCM 6.36.12
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    सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।

  440. RCM 6.36.13
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    सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी।।

  441. RCM 6.36.14
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    बधि बिराध खर दूषनहि लींलाँ हत्यो कबंध।

    अर्थ (Hindi)

    बधि बिराध खर दूषनहि लींलाँ हत्यो कबंध।

  442. RCM 6.36.15
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    बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।

    अर्थ (Hindi)

    बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।

  443. RCM 6.37.1
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    जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला।।

  444. RCM 6.37.2
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    कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू।।

  445. RCM 6.37.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा।।

  446. RCM 6.37.4
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    अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके।।

  447. RCM 6.37.5
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    तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।

  448. RCM 6.37.6
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    अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।

  449. RCM 6.37.7
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    काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।

  450. RCM 6.37.8
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    निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।

  451. RCM 6.37.9
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    दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु।

    अर्थ (Hindi)

    दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु।

  452. RCM 6.37.10
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    कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु।।37।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु।।37।।

  453. RCM 6.38.1
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    नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।

  454. RCM 6.38.2
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    बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।

    अर्थ (Hindi)

    बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।

  455. RCM 6.38.3
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    इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।

  456. RCM 6.38.4
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    अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।

  457. RCM 6.38.5
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    बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही।।।

    अर्थ (Hindi)

    बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही।।।

  458. RCM 6.38.6
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    रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका।।

    अर्थ (Hindi)

    रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका।।

  459. RCM 6.38.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए। कहहु तात कवनी बिधि पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए। कहहु तात कवनी बिधि पाए।।

  460. RCM 6.38.8
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    सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी। मुकुट न होहिं भूप गुन चारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी। मुकुट न होहिं भूप गुन चारी।।

  461. RCM 6.38.9
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    साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।

    अर्थ (Hindi)

    साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।

  462. RCM 6.38.10
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    नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।

    अर्थ (Hindi)

    नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।

  463. RCM 6.38.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस।

    अर्थ (Hindi)

    धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस।

  464. RCM 6.38.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस।।38(((क)।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस।।38(((क)।।

  465. RCM 6.38.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार।

    अर्थ (Hindi)

    परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार।

  466. RCM 6.38.14
    📖 Open verse-by-verse reader#

    समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार।।38(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार।।38(ख)।।

  467. RCM 6.39.1
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    रिपु के समाचार जब पाए। राम सचिव सब निकट बोलाए।।

    अर्थ (Hindi)

    रिपु के समाचार जब पाए। राम सचिव सब निकट बोलाए।।

  468. RCM 6.39.2
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    लंका बाँके चारि दुआरा। केहि बिधि लागिअ करहु बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    लंका बाँके चारि दुआरा। केहि बिधि लागिअ करहु बिचारा।।

  469. RCM 6.39.3
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    तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन।।

    अर्थ (Hindi)

    तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन।।

  470. RCM 6.39.4
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    करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा।।

  471. RCM 6.39.5
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    जथाजोग सेनापति कीन्हे। जूथप सकल बोलि तब लीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    जथाजोग सेनापति कीन्हे। जूथप सकल बोलि तब लीन्हे।।

  472. RCM 6.39.6
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    प्रभु प्रताप कहि सब समुझाए। सुनि कपि सिंघनाद करि धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु प्रताप कहि सब समुझाए। सुनि कपि सिंघनाद करि धाए।।

  473. RCM 6.39.7
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    हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।

  474. RCM 6.39.8
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    गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।

  475. RCM 6.39.9
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    जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।

    अर्थ (Hindi)

    जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।

  476. RCM 6.39.10
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    घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।

  477. RCM 6.39.11
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    जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।

    अर्थ (Hindi)

    जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।

  478. RCM 6.39.12
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    गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।

  479. RCM 6.40.1
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    लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी।।

  480. RCM 6.40.2
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    देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई।।

  481. RCM 6.40.3
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    आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे।।

  482. RCM 6.40.4
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    अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा।।

  483. RCM 6.40.5
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    सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू।।

  484. RCM 6.40.6
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    उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना।।

  485. RCM 6.40.7
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    चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।

    अर्थ (Hindi)

    चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।

  486. RCM 6.40.8
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    तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।

  487. RCM 6.40.9
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    जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।

  488. RCM 6.40.10
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    चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।

    अर्थ (Hindi)

    चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।

  489. RCM 6.40.11
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    नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।

    अर्थ (Hindi)

    नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।

  490. RCM 6.40.12
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    कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।

    अर्थ (Hindi)

    कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।

  491. RCM 6.41.1
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    कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे। मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे।।

    अर्थ (Hindi)

    कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे। मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे।।

  492. RCM 6.41.2
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    बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ। सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ। सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ।।

  493. RCM 6.41.3
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    बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा।।

  494. RCM 6.41.4
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    देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा।।

  495. RCM 6.41.5
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    धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।

    अर्थ (Hindi)

    धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।

  496. RCM 6.41.6
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    कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।

  497. RCM 6.41.7
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    उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई।।

    अर्थ (Hindi)

    उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई।।

  498. RCM 6.41.8
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    निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं।।

  499. RCM 6.42.1
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    राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।

  500. RCM 6.42.2
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    चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।

    अर्थ (Hindi)

    चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।

  501. RCM 6.42.3
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    चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।

  502. RCM 6.42.4
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    हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।

    अर्थ (Hindi)

    हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।

  503. RCM 6.42.5
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    सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी।।

  504. RCM 6.42.6
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    निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना।।

  505. RCM 6.42.7
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    जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।

    अर्थ (Hindi)

    जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।

  506. RCM 6.42.8
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    सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।

    अर्थ (Hindi)

    सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।

  507. RCM 6.42.9
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    उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।

    अर्थ (Hindi)

    उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।

  508. RCM 6.42.10
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    सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।

    अर्थ (Hindi)

    सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।

  509. RCM 6.42.11
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    बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।

    अर्थ (Hindi)

    बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।

  510. RCM 6.42.12
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    ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।

  511. RCM 6.43.1
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    भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।।

    अर्थ (Hindi)

    भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।।

  512. RCM 6.43.2
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    कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।।

  513. RCM 6.43.3
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    निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।।

  514. RCM 6.43.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।।

  515. RCM 6.43.5
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    पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।।

  516. RCM 6.43.6
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    कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।।

    अर्थ (Hindi)

    कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।।

  517. RCM 6.43.7
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    भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।।

    अर्थ (Hindi)

    भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।।

  518. RCM 6.43.8
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    दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।

    अर्थ (Hindi)

    दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।

  519. RCM 6.43.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अंगद सुना पवनसुत गढ़ पर गयउ अकेल।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद सुना पवनसुत गढ़ पर गयउ अकेल।

  520. RCM 6.43.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रन बाँकुरा बालिसुत तरकि चढ़ेउ कपि खेल।।43।।

    अर्थ (Hindi)

    रन बाँकुरा बालिसुत तरकि चढ़ेउ कपि खेल।।43।।

  521. RCM 6.44.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।।

    अर्थ (Hindi)

    जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।।

  522. RCM 6.44.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।

  523. RCM 6.44.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।

  524. RCM 6.44.4
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    नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।

    अर्थ (Hindi)

    नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।

  525. RCM 6.44.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।।

  526. RCM 6.44.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।

  527. RCM 6.44.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।।

  528. RCM 6.44.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।

    अर्थ (Hindi)

    काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।

  529. RCM 6.44.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड।

    अर्थ (Hindi)

    एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड।

  530. RCM 6.44.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।।

  531. RCM 6.45.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।

  532. RCM 6.45.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।

  533. RCM 6.45.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।

    अर्थ (Hindi)

    खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।

  534. RCM 6.45.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।

  535. RCM 6.45.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।

    अर्थ (Hindi)

    देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।

  536. RCM 6.45.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।

  537. RCM 6.45.7
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    अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।।

  538. RCM 6.45.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।

  539. RCM 6.45.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत।

    अर्थ (Hindi)

    भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत।

  540. RCM 6.45.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत।।45।।

    अर्थ (Hindi)

    कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत।।45।।

  541. RCM 6.46.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए।।

  542. RCM 6.46.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे।।

  543. RCM 6.46.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गए जानि अंगद हनुमाना। फिरे भालु मर्कट भट नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    गए जानि अंगद हनुमाना। फिरे भालु मर्कट भट नाना।।

  544. RCM 6.46.4
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    जातुधान प्रदोष बल पाई। धाए करि दससीस दोहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जातुधान प्रदोष बल पाई। धाए करि दससीस दोहाई।।

  545. RCM 6.46.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।

  546. RCM 6.46.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।

  547. RCM 6.46.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    महाबीर निसिचर सब कारे। नाना बरन बलीमुख भारे।।

    अर्थ (Hindi)

    महाबीर निसिचर सब कारे। नाना बरन बलीमुख भारे।।

  548. RCM 6.46.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सबल जुगल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत करि क्रोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    सबल जुगल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत करि क्रोधा।।

  549. RCM 6.46.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।

  550. RCM 6.46.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।

    अर्थ (Hindi)

    अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।

  551. RCM 6.46.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।

  552. RCM 6.46.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार।

    अर्थ (Hindi)

    देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार।

  553. RCM 6.46.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार।।46।।

    अर्थ (Hindi)

    एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार।।46।।

  554. RCM 6.47.1
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    सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।।

  555. RCM 6.47.2
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    समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।।

  556. RCM 6.47.3
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    पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।।

  557. RCM 6.47.4
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    भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।।

  558. RCM 6.47.5
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    भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।।

    अर्थ (Hindi)

    भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।।

  559. RCM 6.47.6
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    हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।

    अर्थ (Hindi)

    हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।

  560. RCM 6.47.7
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    भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।।

    अर्थ (Hindi)

    भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।।

  561. RCM 6.47.8
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    गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।

  562. RCM 6.47.9
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    कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।

    अर्थ (Hindi)

    कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।

  563. RCM 6.47.10
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    गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।

  564. RCM 6.48.1
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    निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।

    अर्थ (Hindi)

    निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।

  565. RCM 6.48.2
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    राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।

  566. RCM 6.48.3
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    उहाँ दसानन सचिव हँकारे। सब सन कहेसि सुभट जे मारे।।

    अर्थ (Hindi)

    उहाँ दसानन सचिव हँकारे। सब सन कहेसि सुभट जे मारे।।

  567. RCM 6.48.4
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    आधा कटकु कपिन्ह संघारा। कहहु बेगि का करिअ बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    आधा कटकु कपिन्ह संघारा। कहहु बेगि का करिअ बिचारा।।

  568. RCM 6.48.5
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    माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर।।

    अर्थ (Hindi)

    माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर।।

  569. RCM 6.48.6
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    बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन।।

    अर्थ (Hindi)

    बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन।।

  570. RCM 6.48.7
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    जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी।।

  571. RCM 6.48.8
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    बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो।।

    अर्थ (Hindi)

    बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो।।

  572. RCM 6.48.9
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    हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।

    अर्थ (Hindi)

    हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।

  573. RCM 6.48.10
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    जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।

  574. RCM 6.48.11
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    कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।

    अर्थ (Hindi)

    कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।

  575. RCM 6.48.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।

  576. RCM 6.49.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परिहरि बयरु देहु बैदेही। भजहु कृपानिधि परम सनेही।।

    अर्थ (Hindi)

    परिहरि बयरु देहु बैदेही। भजहु कृपानिधि परम सनेही।।

  577. RCM 6.49.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ताके बचन बान सम लागे। करिआ मुह करि जाहि अभागे।।

    अर्थ (Hindi)

    ताके बचन बान सम लागे। करिआ मुह करि जाहि अभागे।।

  578. RCM 6.49.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।

  579. RCM 6.49.4
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    तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।

  580. RCM 6.49.5
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    सो उठि गयउ कहत दुर्बादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो उठि गयउ कहत दुर्बादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।।

  581. RCM 6.49.6
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    कौतुक प्रात देखिअहु मोरा। करिहउँ बहुत कहौं का थोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक प्रात देखिअहु मोरा। करिहउँ बहुत कहौं का थोरा।।

  582. RCM 6.49.7
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    सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।

  583. RCM 6.49.8
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    करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।

    अर्थ (Hindi)

    करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।

  584. RCM 6.49.9
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    कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।।

  585. RCM 6.49.10
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    बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए।।

  586. RCM 6.50.1
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    कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।।

  587. RCM 6.50.2
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    कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।

  588. RCM 6.50.3
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    कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।।

    अर्थ (Hindi)

    कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।।

  589. RCM 6.50.4
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    अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।

  590. RCM 6.50.5
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    सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।

    अर्थ (Hindi)

    सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।

  591. RCM 6.50.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।

  592. RCM 6.50.7
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    जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।।

  593. RCM 6.50.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।

  594. RCM 6.50.9
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    दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर।

    अर्थ (Hindi)

    दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर।

  595. RCM 6.50.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।

    अर्थ (Hindi)

    सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।

  596. RCM 6.51.1
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    देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला।।

  597. RCM 6.51.2
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    महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा।।

    अर्थ (Hindi)

    महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा।।

  598. RCM 6.51.3
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    आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई।।

  599. RCM 6.51.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना।।

  600. RCM 6.51.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा।।

  601. RCM 6.51.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे।।

  602. RCM 6.51.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना।।

  603. RCM 6.51.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला।।

    अर्थ (Hindi)

    जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला।।

  604. RCM 6.51.9
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    जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।

    अर्थ (Hindi)

    जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।

  605. RCM 6.51.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।

    अर्थ (Hindi)

    ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।

  606. RCM 6.52.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।

    अर्थ (Hindi)

    नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।

  607. RCM 6.52.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।

  608. RCM 6.52.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।

  609. RCM 6.52.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।

  610. RCM 6.52.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कपि अकुलाने माया देखें। सब कर मरन बना एहि लेखें।।

    अर्थ (Hindi)

    कपि अकुलाने माया देखें। सब कर मरन बना एहि लेखें।।

  611. RCM 6.52.6
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    कौतुक देखि राम मुसुकाने। भए सभीत सकल कपि जाने।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक देखि राम मुसुकाने। भए सभीत सकल कपि जाने।।

  612. RCM 6.52.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया।।

    अर्थ (Hindi)

    एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया।।

  613. RCM 6.52.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके।।

  614. RCM 6.52.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।

    अर्थ (Hindi)

    आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।

  615. RCM 6.52.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।

  616. RCM 6.53.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला।।

    अर्थ (Hindi)

    छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला।।

  617. RCM 6.53.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इहाँ दसानन सुभट पठाए। नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ दसानन सुभट पठाए। नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए।।

  618. RCM 6.53.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भूधर नख बिटपायुध धारी। धाए कपि जय राम पुकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भूधर नख बिटपायुध धारी। धाए कपि जय राम पुकारी।।

  619. RCM 6.53.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भिरे सकल जोरिहि सन जोरी। इत उत जय इच्छा नहिं थोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    भिरे सकल जोरिहि सन जोरी। इत उत जय इच्छा नहिं थोरी।।

  620. RCM 6.53.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं। कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं। कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं।।

  621. RCM 6.53.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मारु मारु धरु धरु धरु मारू। सीस तोरि गहि भुजा उपारू।।

    अर्थ (Hindi)

    मारु मारु धरु धरु धरु मारू। सीस तोरि गहि भुजा उपारू।।

  622. RCM 6.53.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    असि रव पूरि रही नव खंडा। धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    असि रव पूरि रही नव खंडा। धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा।।

  623. RCM 6.53.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा। कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा। कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा।।

  624. RCM 6.53.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।

    अर्थ (Hindi)

    रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।

  625. RCM 6.53.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।

    अर्थ (Hindi)

    जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।

  626. RCM 6.54.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।।

    अर्थ (Hindi)

    घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।।

  627. RCM 6.54.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।।

  628. RCM 6.54.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।

    अर्थ (Hindi)

    एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।

  629. RCM 6.54.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।

    अर्थ (Hindi)

    क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।

  630. RCM 6.54.5
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    नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।

  631. RCM 6.54.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।

  632. RCM 6.54.7
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    बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।।

    अर्थ (Hindi)

    बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।।

  633. RCM 6.54.8
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    मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।

    अर्थ (Hindi)

    मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।

  634. RCM 6.54.9
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    मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।

    अर्थ (Hindi)

    मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।

  635. RCM 6.54.10
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    जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।

    अर्थ (Hindi)

    जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।

  636. RCM 6.55.1
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    सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।

  637. RCM 6.55.2
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    सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।

    अर्थ (Hindi)

    सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।

  638. RCM 6.55.3
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    यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।

    अर्थ (Hindi)

    यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।

  639. RCM 6.55.4
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    संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।

    अर्थ (Hindi)

    संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।

  640. RCM 6.55.5
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    ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।

  641. RCM 6.55.6
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    तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।

    अर्थ (Hindi)

    तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।

  642. RCM 6.55.7
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    जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।।

    अर्थ (Hindi)

    जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।।

  643. RCM 6.55.8
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    धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।

    अर्थ (Hindi)

    धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।

  644. RCM 6.55.9
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    राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।

    अर्थ (Hindi)

    राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।

  645. RCM 6.55.10
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    कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।

    अर्थ (Hindi)

    कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।

  646. RCM 6.56.1
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    राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।

  647. RCM 6.56.2
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    उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।

  648. RCM 6.56.3
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    दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।

    अर्थ (Hindi)

    दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।

  649. RCM 6.56.4
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    देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।

  650. RCM 6.56.5
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    भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।

    अर्थ (Hindi)

    भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।

  651. RCM 6.56.6
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    नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।

    अर्थ (Hindi)

    नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।

  652. RCM 6.56.7
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    मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।

  653. RCM 6.56.8
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    काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।

    अर्थ (Hindi)

    काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।

  654. RCM 6.56.9
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    सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।

  655. RCM 6.56.10
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    राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।

    अर्थ (Hindi)

    राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।

  656. RCM 6.57.1
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    अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।

  657. RCM 6.57.2
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    मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।

    अर्थ (Hindi)

    मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।

  658. RCM 6.57.3
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    राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा।।

  659. RCM 6.57.4
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    जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा।।

  660. RCM 6.57.5
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    होत महा रन रावन रामहिं। जितहहिं राम न संसय या महिं।।

    अर्थ (Hindi)

    होत महा रन रावन रामहिं। जितहहिं राम न संसय या महिं।।

  661. RCM 6.57.6
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    इहाँ भएँ मैं देखेउँ भाई। ग्यान दृष्टि बल मोहि अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ भएँ मैं देखेउँ भाई। ग्यान दृष्टि बल मोहि अधिकाई।।

  662. RCM 6.57.7
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    मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।

    अर्थ (Hindi)

    मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।

  663. RCM 6.57.8
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    सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।

    अर्थ (Hindi)

    सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।

  664. RCM 6.57.9
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    सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान।

    अर्थ (Hindi)

    सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान।

  665. RCM 6.57.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान।।57।।

    अर्थ (Hindi)

    मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान।।57।।

  666. RCM 6.58.1
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    कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।।

    अर्थ (Hindi)

    कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।।

  667. RCM 6.58.2
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    मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।।

  668. RCM 6.58.3
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    अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।।

  669. RCM 6.58.4
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    कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।।

    अर्थ (Hindi)

    कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।।

  670. RCM 6.58.5
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    सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।।

  671. RCM 6.58.6
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    राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।।

  672. RCM 6.58.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।

  673. RCM 6.58.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।

  674. RCM 6.58.9
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    देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।

    अर्थ (Hindi)

    देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।

  675. RCM 6.58.10
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    बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।

  676. RCM 6.59.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।

    अर्थ (Hindi)

    परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।

  677. RCM 6.59.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।

  678. RCM 6.59.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।

  679. RCM 6.59.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।

  680. RCM 6.59.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।

  681. RCM 6.59.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।

  682. RCM 6.59.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।

  683. RCM 6.59.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।

  684. RCM 6.59.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।

    अर्थ (Hindi)

    लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।

  685. RCM 6.59.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।

  686. RCM 6.60.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।

    अर्थ (Hindi)

    तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।

  687. RCM 6.60.2
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    कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।

    अर्थ (Hindi)

    कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।

  688. RCM 6.60.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।

  689. RCM 6.60.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।

  690. RCM 6.60.5
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    तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।

    अर्थ (Hindi)

    तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।

  691. RCM 6.60.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।

  692. RCM 6.60.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।

  693. RCM 6.60.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।

  694. RCM 6.60.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत।

    अर्थ (Hindi)

    तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत।

  695. RCM 6.60.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत।।60(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत।।60(क)।।

  696. RCM 6.60.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।

    अर्थ (Hindi)

    भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।

  697. RCM 6.60.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार।।60(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार।।60(ख)।।

  698. RCM 6.61.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उहाँ राम लछिमनहिं निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    उहाँ राम लछिमनहिं निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।

  699. RCM 6.61.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायउ।।

    अर्थ (Hindi)

    अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायउ।।

  700. RCM 6.61.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।

  701. RCM 6.61.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।

    अर्थ (Hindi)

    मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।

  702. RCM 6.61.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।

  703. RCM 6.61.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

  704. RCM 6.61.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।

  705. RCM 6.61.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।

  706. RCM 6.61.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।।

    अर्थ (Hindi)

    जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।।

  707. RCM 6.61.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

  708. RCM 6.61.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।

  709. RCM 6.61.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।

  710. RCM 6.61.13
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    अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।

  711. RCM 6.61.14
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    निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।

    अर्थ (Hindi)

    निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।

  712. RCM 6.61.15
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    सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।

  713. RCM 6.61.16
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    उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।

  714. RCM 6.61.17
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    बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।

  715. RCM 6.61.18
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    उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।

  716. RCM 6.61.19
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    प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।

  717. RCM 6.61.20
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    आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।61।।

    अर्थ (Hindi)

    आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।61।।

  718. RCM 6.62.1
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    हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।

  719. RCM 6.62.2
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    तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।

  720. RCM 6.62.3
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    हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।

  721. RCM 6.62.4
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    कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।

  722. RCM 6.62.5
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    यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।

  723. RCM 6.62.6
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    ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।

  724. RCM 6.62.7
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    जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।

    अर्थ (Hindi)

    जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।

  725. RCM 6.62.8
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    कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।

  726. RCM 6.62.9
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    कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी।।

    अर्थ (Hindi)

    कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी।।

  727. RCM 6.62.10
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    तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महामहा जोधा संघारे।।

    अर्थ (Hindi)

    तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महामहा जोधा संघारे।।

  728. RCM 6.62.11
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    दुर्मुख सुररिपु मनुज अहारी। भट अतिकाय अकंपन भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    दुर्मुख सुररिपु मनुज अहारी। भट अतिकाय अकंपन भारी।।

  729. RCM 6.62.12
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    अपर महोदर आदिक बीरा। परे समर महि सब रनधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    अपर महोदर आदिक बीरा। परे समर महि सब रनधीरा।।

  730. RCM 6.62.13
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    सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।

  731. RCM 6.62.14
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    जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।

    अर्थ (Hindi)

    जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।

  732. RCM 6.63.1
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    भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा।।

    अर्थ (Hindi)

    भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा।।

  733. RCM 6.63.2
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    अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना।।

  734. RCM 6.63.3
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    हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।

    अर्थ (Hindi)

    हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।

  735. RCM 6.63.4
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    अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।

    अर्थ (Hindi)

    अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।

  736. RCM 6.63.5
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    कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।

  737. RCM 6.63.6
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    नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।

    अर्थ (Hindi)

    नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।

  738. RCM 6.63.7
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    अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सूफल करौ मैं जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सूफल करौ मैं जाई।।

  739. RCM 6.63.8
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    स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन।।

  740. RCM 6.63.9
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    राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।

    अर्थ (Hindi)

    राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।

  741. RCM 6.63.10
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    रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।

  742. RCM 6.64.1
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    महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।।

  743. RCM 6.64.2
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    कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।।

  744. RCM 6.64.3
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    देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।

  745. RCM 6.64.4
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    अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।

  746. RCM 6.64.5
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    तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।

  747. RCM 6.64.6
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    तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।

  748. RCM 6.64.7
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    सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।।

  749. RCM 6.64.8
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    धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।।

    अर्थ (Hindi)

    धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।।

  750. RCM 6.64.9
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    बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।

  751. RCM 6.64.10
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    बचन कर्म मन कपट तजि भजेहु राम रनधीर।

    अर्थ (Hindi)

    बचन कर्म मन कपट तजि भजेहु राम रनधीर।

  752. RCM 6.64.11
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    जाहु न निज पर सूझ मोहि भयउँ कालबस बीर। 64।।

    अर्थ (Hindi)

    जाहु न निज पर सूझ मोहि भयउँ कालबस बीर। 64।।

  753. RCM 6.65.1
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    बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।

  754. RCM 6.65.2
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    नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।

  755. RCM 6.65.3
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    एतना कपिन्ह सुना जब काना। किलकिलाइ धाए बलवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    एतना कपिन्ह सुना जब काना। किलकिलाइ धाए बलवाना।।

  756. RCM 6.65.4
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    लिए उठाइ बिटप अरु भूधर। कटकटाइ डारहिं ता ऊपर।।

    अर्थ (Hindi)

    लिए उठाइ बिटप अरु भूधर। कटकटाइ डारहिं ता ऊपर।।

  757. RCM 6.65.5
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    कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा। करहिं भालु कपि एक एक बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा। करहिं भालु कपि एक एक बारा।।

  758. RCM 6.65.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो।।

    अर्थ (Hindi)

    मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो।।

  759. RCM 6.65.7
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    तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।

    अर्थ (Hindi)

    तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।

  760. RCM 6.65.8
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    पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।

  761. RCM 6.65.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि।।

  762. RCM 6.65.10
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    चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई।।

  763. RCM 6.65.11
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    अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।

    अर्थ (Hindi)

    अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।

  764. RCM 6.65.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।

    अर्थ (Hindi)

    काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।

  765. RCM 6.66.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उमा करत रघुपति नरलीला। खेलत गरुड़ जिमि अहिगन मीला।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा करत रघुपति नरलीला। खेलत गरुड़ जिमि अहिगन मीला।।

  766. RCM 6.66.2
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    भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई।।

    अर्थ (Hindi)

    भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई।।

  767. RCM 6.66.3
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    जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।

  768. RCM 6.66.4
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    मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।

  769. RCM 6.66.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।

    अर्थ (Hindi)

    सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।

  770. RCM 6.66.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।

  771. RCM 6.66.7
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    गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।

  772. RCM 6.66.8
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    पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।

  773. RCM 6.66.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।

    अर्थ (Hindi)

    नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।

  774. RCM 6.66.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।

    अर्थ (Hindi)

    सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।

  775. RCM 6.66.11
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    जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।

    अर्थ (Hindi)

    जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।

  776. RCM 6.66.12
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    एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।

    अर्थ (Hindi)

    एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।

  777. RCM 6.67.1
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    कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।

  778. RCM 6.67.2
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    कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।

  779. RCM 6.67.3
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    कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।

  780. RCM 6.67.4
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    मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।

  781. RCM 6.67.5
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    रन मद मत्त निसाचर दर्पा। बिस्व ग्रसिहि जनु एहि बिधि अर्पा।।

    अर्थ (Hindi)

    रन मद मत्त निसाचर दर्पा। बिस्व ग्रसिहि जनु एहि बिधि अर्पा।।

  782. RCM 6.67.6
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    मुरे सुभट सब फिरहिं न फेरे। सूझ न नयन सुनहिं नहिं टेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    मुरे सुभट सब फिरहिं न फेरे। सूझ न नयन सुनहिं नहिं टेरे।।

  783. RCM 6.67.7
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    कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी।।

  784. RCM 6.67.8
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    देखि राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई।।

  785. RCM 6.67.9
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    सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।

  786. RCM 6.67.10
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    मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।

    अर्थ (Hindi)

    मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।

  787. RCM 6.68.1
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    कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा।।

  788. RCM 6.68.2
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    प्रथम कीन्ह प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रथम कीन्ह प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा।।

  789. RCM 6.68.3
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    सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।

  790. RCM 6.68.4
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    जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।

  791. RCM 6.68.5
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    कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।

  792. RCM 6.68.6
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    घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।

  793. RCM 6.68.7
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    लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।

  794. RCM 6.68.8
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    रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।

  795. RCM 6.68.9
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    छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच।

    अर्थ (Hindi)

    छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच।

  796. RCM 6.68.10
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    पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच।।68।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच।।68।।

  797. RCM 6.69.1
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    कुंभकरन मन दीख बिचारी। हति धन माझ निसाचर धारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन मन दीख बिचारी। हति धन माझ निसाचर धारी।।

  798. RCM 6.69.2
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    भा अति क्रुद्ध महाबल बीरा। कियो मृगनायक नाद गँभीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    भा अति क्रुद्ध महाबल बीरा। कियो मृगनायक नाद गँभीरा।।

  799. RCM 6.69.3
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    कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।

  800. RCM 6.69.4
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    आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।

  801. RCM 6.69.5
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    पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।

  802. RCM 6.69.6
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    तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।

  803. RCM 6.69.7
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    सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।

  804. RCM 6.69.8
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    बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।

    अर्थ (Hindi)

    बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।

  805. RCM 6.69.9
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    महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।

    अर्थ (Hindi)

    महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।

  806. RCM 6.69.10
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    महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।

    अर्थ (Hindi)

    महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।

  807. RCM 6.70.1
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    भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।

    अर्थ (Hindi)

    भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।

  808. RCM 6.70.2
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    चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।

  809. RCM 6.70.3
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    यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।

    अर्थ (Hindi)

    यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।

  810. RCM 6.70.4
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    कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।

  811. RCM 6.70.5
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    सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।

  812. RCM 6.70.6
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    राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।

  813. RCM 6.70.7
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    खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।

    अर्थ (Hindi)

    खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।

  814. RCM 6.70.8
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    लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।

    अर्थ (Hindi)

    लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।

  815. RCM 6.70.9
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    लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।

    अर्थ (Hindi)

    लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।

  816. RCM 6.70.10
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    धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।

    अर्थ (Hindi)

    धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।

  817. RCM 6.70.11
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    काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।

    अर्थ (Hindi)

    काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।

  818. RCM 6.70.12
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    उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।

    अर्थ (Hindi)

    उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।

  819. RCM 6.70.13
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    करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।

    अर्थ (Hindi)

    करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।

  820. RCM 6.70.14
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    गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।

    अर्थ (Hindi)

    गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।

  821. RCM 6.71.1
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    सभय देव करुनानिधि जान्यो। श्रवन प्रजंत सरासनु तान्यो।।

    अर्थ (Hindi)

    सभय देव करुनानिधि जान्यो। श्रवन प्रजंत सरासनु तान्यो।।

  822. RCM 6.71.2
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    बिसिख निकर निसिचर मुख भरेऊ। तदपि महाबल भूमि न परेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    बिसिख निकर निसिचर मुख भरेऊ। तदपि महाबल भूमि न परेऊ।।

  823. RCM 6.71.3
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    सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।

  824. RCM 6.71.4
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    तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।

  825. RCM 6.71.5
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    सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।

    अर्थ (Hindi)

    सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।

  826. RCM 6.71.6
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    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।

  827. RCM 6.71.7
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    परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।

    अर्थ (Hindi)

    परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।

  828. RCM 6.71.8
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    तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।

  829. RCM 6.71.9
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    सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।

  830. RCM 6.71.10
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    करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।

  831. RCM 6.71.11
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    गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए।।

    अर्थ (Hindi)

    गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए।।

  832. RCM 6.71.12
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    बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए।।

    अर्थ (Hindi)

    बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए।।

  833. RCM 6.72.1
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    दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।

    अर्थ (Hindi)

    दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।

  834. RCM 6.72.2
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    राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।

  835. RCM 6.72.3
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    छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती। निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती। निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती।।

  836. RCM 6.72.4
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    बहु बिलाप दसकंधर करई। बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु बिलाप दसकंधर करई। बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई।।

  837. RCM 6.72.5
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    रोवहिं नारि हृदय हति पानी। तासु तेज बल बिपुल बखानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रोवहिं नारि हृदय हति पानी। तासु तेज बल बिपुल बखानी।।

  838. RCM 6.72.6
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    मेघनाद तेहि अवसर आयउ। कहि बहु कथा पिता समुझायउ।।

    अर्थ (Hindi)

    मेघनाद तेहि अवसर आयउ। कहि बहु कथा पिता समुझायउ।।

  839. RCM 6.72.7
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    देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।

  840. RCM 6.72.8
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    इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।

  841. RCM 6.72.9
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    एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना।।

  842. RCM 6.72.10
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    इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा।।

  843. RCM 6.72.11
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    लरहिं सुभट निज निज जय हेतू। बरनि न जाइ समर खगकेतू।।

    अर्थ (Hindi)

    लरहिं सुभट निज निज जय हेतू। बरनि न जाइ समर खगकेतू।।

  844. RCM 6.72.12
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    मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।

    अर्थ (Hindi)

    मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।

  845. RCM 6.72.13
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    गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।

  846. RCM 6.73.1
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    सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।

  847. RCM 6.73.2
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    डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।

    अर्थ (Hindi)

    डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।

  848. RCM 6.73.3
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    दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।

  849. RCM 6.73.4
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    धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।

  850. RCM 6.73.5
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    गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।

  851. RCM 6.73.6
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    अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।

    अर्थ (Hindi)

    अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।

  852. RCM 6.73.7
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    जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर।।

    अर्थ (Hindi)

    जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर।।

  853. RCM 6.73.8
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    मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला।।

    अर्थ (Hindi)

    मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला।।

  854. RCM 6.73.9
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    पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन।।

  855. RCM 6.73.10
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    पुनि रघुपति सैं जूझे लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि रघुपति सैं जूझे लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा।।

  856. RCM 6.73.11
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    ब्याल पास बस भए खरारी। स्वबस अनंत एक अबिकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्याल पास बस भए खरारी। स्वबस अनंत एक अबिकारी।।

  857. RCM 6.73.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नट इव कपट चरित कर नाना। सदा स्वतंत्र एक भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नट इव कपट चरित कर नाना। सदा स्वतंत्र एक भगवाना।।

  858. RCM 6.73.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।

    अर्थ (Hindi)

    रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।

  859. RCM 6.73.14
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    गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।

    अर्थ (Hindi)

    गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।

  860. RCM 6.73.15
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    सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।

    अर्थ (Hindi)

    सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।

  861. RCM 6.74.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।

    अर्थ (Hindi)

    चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।

  862. RCM 6.74.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।

    अर्थ (Hindi)

    अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।

  863. RCM 6.74.3
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    ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा। पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा। पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा।।

  864. RCM 6.74.4
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    जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा।।

    अर्थ (Hindi)

    जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा।।

  865. RCM 6.74.5
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    बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।

  866. RCM 6.74.6
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    अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।

  867. RCM 6.74.7
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    मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती।।

    अर्थ (Hindi)

    मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती।।

  868. RCM 6.74.8
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    पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ। महि पछारि निज बल देखरायो।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ। महि पछारि निज बल देखरायो।।

  869. RCM 6.74.9
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    बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा।।

  870. RCM 6.74.10
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    इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।।

  871. RCM 6.74.11
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    खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।

    अर्थ (Hindi)

    खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।

  872. RCM 6.74.12
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    माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।

  873. RCM 6.74.13
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    गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ।

    अर्थ (Hindi)

    गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ।

  874. RCM 6.74.14
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    चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।

  875. RCM 6.75.1
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    मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।

    अर्थ (Hindi)

    मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।

  876. RCM 6.75.2
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    तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।

  877. RCM 6.75.3
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    इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा।।

  878. RCM 6.75.4
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    मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन।।

    अर्थ (Hindi)

    मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन।।

  879. RCM 6.75.5
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    जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि।।

  880. RCM 6.75.6
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    सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना।।

  881. RCM 6.75.7
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    लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई।।

  882. RCM 6.75.8
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    तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही।।

  883. RCM 6.75.9
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    मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई।।

  884. RCM 6.75.10
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    जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन।।

    अर्थ (Hindi)

    जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन।।

  885. RCM 6.75.11
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    जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।

    अर्थ (Hindi)

    जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।

  886. RCM 6.75.12
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    प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।

  887. RCM 6.75.13
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    जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं।।

  888. RCM 6.75.14
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    जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई।।

  889. RCM 6.75.15
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    रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।

  890. RCM 6.75.16
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    अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।

    अर्थ (Hindi)

    अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।

  891. RCM 6.76.1
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    जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा।।

    अर्थ (Hindi)

    जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा।।

  892. RCM 6.76.2
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    कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा।।

  893. RCM 6.76.3
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    तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।

    अर्थ (Hindi)

    तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।

  894. RCM 6.76.4
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    लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।

    अर्थ (Hindi)

    लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।

  895. RCM 6.76.5
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    आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।

  896. RCM 6.76.6
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    कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।

    अर्थ (Hindi)

    कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।

  897. RCM 6.76.7
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    प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा।।

  898. RCM 6.76.8
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    उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा।।

  899. RCM 6.76.9
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    फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा।।

    अर्थ (Hindi)

    फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा।।

  900. RCM 6.76.10
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    आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला।।

  901. RCM 6.76.11
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    देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।

  902. RCM 6.76.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।

  903. RCM 6.76.13
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    देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा।।

  904. RCM 6.76.14
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    लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा।।

  905. RCM 6.76.15
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    सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।

  906. RCM 6.76.16
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    छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।

    अर्थ (Hindi)

    छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।

  907. RCM 6.76.17
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।

    अर्थ (Hindi)

    रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।

  908. RCM 6.76.18
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    धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।

    अर्थ (Hindi)

    धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।

  909. RCM 6.77.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो।।

  910. RCM 6.77.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा। चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा। चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा।।

  911. RCM 6.77.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।

  912. RCM 6.77.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।

    अर्थ (Hindi)

    जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।

  913. RCM 6.77.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।

  914. RCM 6.77.6
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    सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।

  915. RCM 6.77.7
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    मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी।।

  916. RCM 6.77.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा।।

    अर्थ (Hindi)

    नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा।।

  917. RCM 6.77.9
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    तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।

    अर्थ (Hindi)

    तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।

  918. RCM 6.77.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।

    अर्थ (Hindi)

    नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।

  919. RCM 6.78.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।

  920. RCM 6.78.2
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    पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।

  921. RCM 6.78.3
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    निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।।

    अर्थ (Hindi)

    निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।।

  922. RCM 6.78.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।।

  923. RCM 6.78.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।

  924. RCM 6.78.6
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    निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।

  925. RCM 6.78.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।

  926. RCM 6.78.8
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    चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।

    अर्थ (Hindi)

    चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।

  927. RCM 6.78.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।

  928. RCM 6.79.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा।।

    अर्थ (Hindi)

    चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा।।

  929. RCM 6.79.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बिबिध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    बिबिध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना।।

  930. RCM 6.79.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।

  931. RCM 6.79.4
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    बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।

    अर्थ (Hindi)

    बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।

  932. RCM 6.79.5
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    अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।

    अर्थ (Hindi)

    अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।

  933. RCM 6.79.6
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    चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।

  934. RCM 6.79.7
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    उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।

  935. RCM 6.79.8
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    पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।

  936. RCM 6.79.9
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    भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई।।

  937. RCM 6.79.10
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    केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं।।

  938. RCM 6.79.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा। मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा। मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा।।

  939. RCM 6.79.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई। अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई।।

    अर्थ (Hindi)

    हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई। अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई।।

  940. RCM 6.79.13
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    यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई। धाए करि रघुबीर दोहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई। धाए करि रघुबीर दोहाई।।

  941. RCM 6.80.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।

  942. RCM 6.80.2
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    अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।

    अर्थ (Hindi)

    अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।

  943. RCM 6.80.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।।

  944. RCM 6.80.4
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    सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।।

  945. RCM 6.80.5
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    सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।

    अर्थ (Hindi)

    सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।

  946. RCM 6.80.6
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    बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।

    अर्थ (Hindi)

    बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।

  947. RCM 6.80.7
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    ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना।।

    अर्थ (Hindi)

    ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना।।

  948. RCM 6.80.8
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    दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।

  949. RCM 6.80.9
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    अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।

  950. RCM 6.80.10
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    कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।

    अर्थ (Hindi)

    कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।

  951. RCM 6.80.11
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    सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।

    अर्थ (Hindi)

    सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।

  952. RCM 6.80.12
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    महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर।

    अर्थ (Hindi)

    महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर।

  953. RCM 6.80.13
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    जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर।।80(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर।।80(क)।।

  954. RCM 6.80.14
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    सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।

  955. RCM 6.80.15
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    एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।

  956. RCM 6.80.16
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    उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।

    अर्थ (Hindi)

    उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।

  957. RCM 6.80.17
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    लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।

    अर्थ (Hindi)

    लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।

  958. RCM 6.81.1
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    सुर ब्रह्मादि सिद्ध मुनि नाना। देखत रन नभ चढ़े बिमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर ब्रह्मादि सिद्ध मुनि नाना। देखत रन नभ चढ़े बिमाना।।

  959. RCM 6.81.2
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    हमहू उमा रहे तेहि संगा। देखत राम चरित रन रंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    हमहू उमा रहे तेहि संगा। देखत राम चरित रन रंगा।।

  960. RCM 6.81.3
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    सुभट समर रस दुहु दिसि माते। कपि जयसील राम बल ताते।।

    अर्थ (Hindi)

    सुभट समर रस दुहु दिसि माते। कपि जयसील राम बल ताते।।

  961. RCM 6.81.4
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    एक एक सन भिरहिं पचारहिं। एकन्ह एक मर्दि महि पारहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    एक एक सन भिरहिं पचारहिं। एकन्ह एक मर्दि महि पारहिं।।

  962. RCM 6.81.5
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    मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं। सीस तोरि सीसन्ह सन मारहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं। सीस तोरि सीसन्ह सन मारहिं।।

  963. RCM 6.81.6
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    उदर बिदारहिं भुजा उपारहिं। गहि पद अवनि पटकि भट डारहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    उदर बिदारहिं भुजा उपारहिं। गहि पद अवनि पटकि भट डारहिं।।

  964. RCM 6.81.7
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    निसिचर भट महि गाड़हि भालू। ऊपर ढारि देहिं बहु बालू।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिचर भट महि गाड़हि भालू। ऊपर ढारि देहिं बहु बालू।।

  965. RCM 6.81.8
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    बीर बलिमुख जुद्ध बिरुद्धे। देखिअत बिपुल काल जनु क्रुद्धे।।

    अर्थ (Hindi)

    बीर बलिमुख जुद्ध बिरुद्धे। देखिअत बिपुल काल जनु क्रुद्धे।।

  966. RCM 6.82.1
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    धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर।।

    अर्थ (Hindi)

    धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर।।

  967. RCM 6.82.2
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    गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा।।

  968. RCM 6.82.3
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    लागहिं सैल बज्र तन तासू। खंड खंड होइ फूटहिं आसू।।

    अर्थ (Hindi)

    लागहिं सैल बज्र तन तासू। खंड खंड होइ फूटहिं आसू।।

  969. RCM 6.82.4
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    चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुर्मद रावन अति कोपी।।

    अर्थ (Hindi)

    चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुर्मद रावन अति कोपी।।

  970. RCM 6.82.5
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    इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा।।

  971. RCM 6.82.6
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    चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना।।

  972. RCM 6.82.7
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    पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।।

  973. RCM 6.82.8
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    तेहि देखे कपि सकल पराने। दसहुँ चाप सायक संधाने।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि देखे कपि सकल पराने। दसहुँ चाप सायक संधाने।।

  974. RCM 6.83.1
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    रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।।

    अर्थ (Hindi)

    रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।।

  975. RCM 6.83.2
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    खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।।

    अर्थ (Hindi)

    खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।।

  976. RCM 6.83.3
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    अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।।

  977. RCM 6.83.4
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    कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।।

  978. RCM 6.83.5
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    पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।।

  979. RCM 6.83.6
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    सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।।

    अर्थ (Hindi)

    सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।।

  980. RCM 6.83.7
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    पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।।

  981. RCM 6.83.8
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    उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।

    अर्थ (Hindi)

    उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।

  982. RCM 6.84.1
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    जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।

    अर्थ (Hindi)

    जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।

  983. RCM 6.84.2
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    मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।

  984. RCM 6.84.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।

  985. RCM 6.84.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।

    अर्थ (Hindi)

    धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।

  986. RCM 6.84.5
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    अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।

  987. RCM 6.84.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।

  988. RCM 6.84.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।

  989. RCM 6.84.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।

  990. RCM 6.85.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई।।

  991. RCM 6.85.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा।।

  992. RCM 6.85.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर।।

    अर्थ (Hindi)

    पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर।।

  993. RCM 6.85.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए।।

  994. RCM 6.85.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।

    अर्थ (Hindi)

    कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।

  995. RCM 6.85.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।

  996. RCM 6.85.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।

    अर्थ (Hindi)

    रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।

  997. RCM 6.85.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।

  998. RCM 6.86.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।।

  999. RCM 6.86.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।।

  1000. RCM 6.86.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।।

    अर्थ (Hindi)

    चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।।

  1001. RCM 6.86.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।।

  1002. RCM 6.86.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।

  1003. RCM 6.86.6
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    अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।

  1004. RCM 6.86.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।

    अर्थ (Hindi)

    देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।

  1005. RCM 6.86.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।

    अर्थ (Hindi)

    जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।

  1006. RCM 6.86.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।।

    अर्थ (Hindi)

    अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।।

  1007. RCM 6.86.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।

  1008. RCM 6.87.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी।

    अर्थ (Hindi)

    एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी।

  1009. RCM 6.87.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा।।

  1010. RCM 6.87.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहु कृपान तरवारि चमंकहिं। जनु दहँ दिसि दामिनीं दमंकहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु कृपान तरवारि चमंकहिं। जनु दहँ दिसि दामिनीं दमंकहिं।।

  1011. RCM 6.87.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गज रथ तुरग चिकार कठोरा। गर्जहिं मनहुँ बलाहक घोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    गज रथ तुरग चिकार कठोरा। गर्जहिं मनहुँ बलाहक घोरा।।

  1012. RCM 6.87.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।

  1013. RCM 6.87.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।

    अर्थ (Hindi)

    उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।

  1014. RCM 6.87.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दुहुँ दिसि पर्बत करहिं प्रहारा। बज्रपात जनु बारहिं बारा।।

    अर्थ (Hindi)

    दुहुँ दिसि पर्बत करहिं प्रहारा। बज्रपात जनु बारहिं बारा।।

  1015. RCM 6.87.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रघुपति कोपि बान झरि लाई। घायल भै निसिचर समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति कोपि बान झरि लाई। घायल भै निसिचर समुदाई।।

  1016. RCM 6.87.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लागत बान बीर चिक्करहीं। घुर्मि घुर्मि जहँ तहँ महि परहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    लागत बान बीर चिक्करहीं। घुर्मि घुर्मि जहँ तहँ महि परहीं।।

  1017. RCM 6.87.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    स्त्रवहिं सैल जनु निर्झर भारी। सोनित सरि कादर भयकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    स्त्रवहिं सैल जनु निर्झर भारी। सोनित सरि कादर भयकारी।।

  1018. RCM 6.88.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मज्जहि भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला।।

    अर्थ (Hindi)

    मज्जहि भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला।।

  1019. RCM 6.88.2
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    काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं।।

  1020. RCM 6.88.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।

  1021. RCM 6.88.4
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    कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।

  1022. RCM 6.88.5
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    खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।

    अर्थ (Hindi)

    खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।

  1023. RCM 6.88.6
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    बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।

  1024. RCM 6.88.7
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    जोगिनि भरि भरि खप्पर संचहिं। भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    जोगिनि भरि भरि खप्पर संचहिं। भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं।।

  1025. RCM 6.88.8
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    भट कपाल करताल बजावहिं। चामुंडा नाना बिधि गावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    भट कपाल करताल बजावहिं। चामुंडा नाना बिधि गावहिं।।

  1026. RCM 6.88.9
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    जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।

  1027. RCM 6.88.10
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    कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।

  1028. RCM 6.89.1
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    देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।।

    अर्थ (Hindi)

    देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।।

  1029. RCM 6.89.2
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    सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।

  1030. RCM 6.89.3
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    तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।

  1031. RCM 6.89.4
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    चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।

    अर्थ (Hindi)

    चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।

  1032. RCM 6.89.5
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    रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।

    अर्थ (Hindi)

    रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।

  1033. RCM 6.89.6
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    सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।

  1034. RCM 6.89.7
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    सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।।

    अर्थ (Hindi)

    सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।।

  1035. RCM 6.89.8
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    देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।

  1036. RCM 6.90.1
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    अस कहि रथ रघुनाथ चलावा। बिप्र चरन पंकज सिरु नावा।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि रथ रघुनाथ चलावा। बिप्र चरन पंकज सिरु नावा।।

  1037. RCM 6.90.2
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    तब लंकेस क्रोध उर छावा। गर्जत तर्जत सन्मुख धावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब लंकेस क्रोध उर छावा। गर्जत तर्जत सन्मुख धावा।।

  1038. RCM 6.90.3
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    जीतेहु जे भट संजुग माहीं। सुनु तापस मैं तिन्ह सम नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जीतेहु जे भट संजुग माहीं। सुनु तापस मैं तिन्ह सम नाहीं।।

  1039. RCM 6.90.4
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    रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाकें बंदीखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाकें बंदीखाना।।

  1040. RCM 6.90.5
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    खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा।।

    अर्थ (Hindi)

    खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा।।

  1041. RCM 6.90.6
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    निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु।।

  1042. RCM 6.90.7
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    आजु बयरु सबु लेउँ निबाही। जौं रन भूप भाजि नहिं जाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    आजु बयरु सबु लेउँ निबाही। जौं रन भूप भाजि नहिं जाहीं।।

  1043. RCM 6.90.8
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    आजु करउँ खलु काल हवाले। परेहु कठिन रावन के पाले।।

    अर्थ (Hindi)

    आजु करउँ खलु काल हवाले। परेहु कठिन रावन के पाले।।

  1044. RCM 6.90.9
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    सुनि दुर्बचन कालबस जाना। बिहँसि बचन कह कृपानिधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि दुर्बचन कालबस जाना। बिहँसि बचन कह कृपानिधाना।।

  1045. RCM 6.90.10
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    सत्य सत्य सब तव प्रभुताई। जल्पसि जनि देखाउ मनुसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    सत्य सत्य सब तव प्रभुताई। जल्पसि जनि देखाउ मनुसाई।।

  1046. RCM 6.91.1
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    कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर।।

    अर्थ (Hindi)

    कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर।।

  1047. RCM 6.91.2
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    नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए।।

  1048. RCM 6.91.3
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    पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा।।

  1049. RCM 6.91.4
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    छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई।।

    अर्थ (Hindi)

    छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई।।

  1050. RCM 6.91.5
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    कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै। बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै।।

    अर्थ (Hindi)

    कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै। बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै।।

  1051. RCM 6.91.6
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    निफल होहिं रावन सर कैसें। खल के सकल मनोरथ जैसें।।

    अर्थ (Hindi)

    निफल होहिं रावन सर कैसें। खल के सकल मनोरथ जैसें।।

  1052. RCM 6.91.7
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    तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि।।

    अर्थ (Hindi)

    तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि।।

  1053. RCM 6.91.8
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    राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा।।

  1054. RCM 6.92.1
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    चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।।

    अर्थ (Hindi)

    चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।।

  1055. RCM 6.92.2
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    रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।

    अर्थ (Hindi)

    रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।

  1056. RCM 6.92.3
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    तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।।

  1057. RCM 6.92.4
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    बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।

    अर्थ (Hindi)

    बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।

  1058. RCM 6.92.5
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    तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।।

  1059. RCM 6.92.6
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    तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।

  1060. RCM 6.92.7
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    रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।।

  1061. RCM 6.92.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।

    अर्थ (Hindi)

    दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।

  1062. RCM 6.92.9
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    स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।।

    अर्थ (Hindi)

    स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।।

  1063. RCM 6.92.10
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    तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।

    अर्थ (Hindi)

    तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।

  1064. RCM 6.92.11
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    काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।।

    अर्थ (Hindi)

    काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।।

  1065. RCM 6.92.12
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    प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।

  1066. RCM 6.92.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।।

  1067. RCM 6.92.14
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    रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।

    अर्थ (Hindi)

    रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।

  1068. RCM 6.93.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।।

    अर्थ (Hindi)

    दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।।

  1069. RCM 6.93.2
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    गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।

  1070. RCM 6.93.3
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    समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।।

    अर्थ (Hindi)

    समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।।

  1071. RCM 6.93.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।

  1072. RCM 6.93.5
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    हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।।

  1073. RCM 6.93.6
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    सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।

    अर्थ (Hindi)

    सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।

  1074. RCM 6.93.7
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    काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।।

    अर्थ (Hindi)

    काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।।

  1075. RCM 6.93.8
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    कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।

  1076. RCM 6.94.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।।

    अर्थ (Hindi)

    आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।।

  1077. RCM 6.94.2
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    तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।

  1078. RCM 6.94.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।।

    अर्थ (Hindi)

    लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।।

  1079. RCM 6.94.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।

  1080. RCM 6.94.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।।

    अर्थ (Hindi)

    रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।।

  1081. RCM 6.94.6
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    सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।

  1082. RCM 6.94.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।।

  1083. RCM 6.94.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।

  1084. RCM 6.95.1
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    देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।।

  1085. RCM 6.95.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।

    अर्थ (Hindi)

    रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।

  1086. RCM 6.95.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।।

    अर्थ (Hindi)

    ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।।

  1087. RCM 6.95.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।

  1088. RCM 6.95.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।।

    अर्थ (Hindi)

    गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।।

  1089. RCM 6.95.6
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    लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।

    अर्थ (Hindi)

    लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।

  1090. RCM 6.95.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।

  1091. RCM 6.95.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।

    अर्थ (Hindi)

    बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।

  1092. RCM 6.96.1
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    अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।

    अर्थ (Hindi)

    अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।

  1093. RCM 6.96.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।

  1094. RCM 6.96.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।।

  1095. RCM 6.96.4
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    भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।

  1096. RCM 6.96.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।

    अर्थ (Hindi)

    दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।

  1097. RCM 6.96.6
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    डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।

    अर्थ (Hindi)

    डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।

  1098. RCM 6.96.7
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    सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।।

    अर्थ (Hindi)

    सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।।

  1099. RCM 6.96.8
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    रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।

  1100. RCM 6.97.1
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    प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।।

  1101. RCM 6.97.2
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    रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।

    अर्थ (Hindi)

    रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।

  1102. RCM 6.97.3
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    भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।

    अर्थ (Hindi)

    भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।

  1103. RCM 6.97.4
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    प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।

  1104. RCM 6.97.5
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    अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।

    अर्थ (Hindi)

    अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।

  1105. RCM 6.97.6
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    सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।

    अर्थ (Hindi)

    सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।

  1106. RCM 6.97.7
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    हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।।

    अर्थ (Hindi)

    हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।।

  1107. RCM 6.97.8
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    देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।

  1108. RCM 6.98.1
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    सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।।

  1109. RCM 6.98.2
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    मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।

  1110. RCM 6.98.3
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    बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।

    अर्थ (Hindi)

    बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।

  1111. RCM 6.98.4
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    बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।

    अर्थ (Hindi)

    बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।

  1112. RCM 6.98.5
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    एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।।

    अर्थ (Hindi)

    एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।।

  1113. RCM 6.98.6
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    तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।

  1114. RCM 6.98.7
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    रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।।

  1115. RCM 6.98.8
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    गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।

  1116. RCM 6.98.9
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    कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।

  1117. RCM 6.98.10
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    पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।

  1118. RCM 6.98.11
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    हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।।

    अर्थ (Hindi)

    हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।।

  1119. RCM 6.98.12
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    मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।

  1120. RCM 6.98.13
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    संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।।

  1121. RCM 6.98.14
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    भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।

    अर्थ (Hindi)

    भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।

  1122. RCM 6.98.15
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    देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।

  1123. RCM 6.99.1
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    तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।

  1124. RCM 6.99.2
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    सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।

    अर्थ (Hindi)

    सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।

  1125. RCM 6.99.3
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    मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।

    अर्थ (Hindi)

    मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।

  1126. RCM 6.99.4
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    होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।

    अर्थ (Hindi)

    होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।

  1127. RCM 6.99.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई। बिधि बिपरीत चरित सब करई।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई। बिधि बिपरीत चरित सब करई।।

  1128. RCM 6.99.6
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    मोर अभाग्य जिआवत ओही। जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही।।

    अर्थ (Hindi)

    मोर अभाग्य जिआवत ओही। जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही।।

  1129. RCM 6.99.7
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    जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।

  1130. RCM 6.99.8
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    जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।

  1131. RCM 6.99.9
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    रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।

  1132. RCM 6.99.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।

    अर्थ (Hindi)

    ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।

  1133. RCM 6.99.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।

  1134. RCM 6.99.12
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    कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।

    अर्थ (Hindi)

    कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।

  1135. RCM 6.99.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।

  1136. RCM 6.100.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।

  1137. RCM 6.100.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।

  1138. RCM 6.100.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    निसिहि ससिहि निंदति बहु भाँती। जुग सम भई सिराति न राती।।

    अर्थ (Hindi)

    निसिहि ससिहि निंदति बहु भाँती। जुग सम भई सिराति न राती।।

  1139. RCM 6.100.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करति बिलाप मनहिं मन भारी। राम बिरहँ जानकी दुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    करति बिलाप मनहिं मन भारी। राम बिरहँ जानकी दुखारी।।

  1140. RCM 6.100.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।

    अर्थ (Hindi)

    जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।

  1141. RCM 6.100.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।

  1142. RCM 6.100.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।।

  1143. RCM 6.100.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही।।

    अर्थ (Hindi)

    सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही।।

  1144. RCM 6.100.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भौरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भौरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा।।

  1145. RCM 6.100.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा।।

  1146. RCM 6.100.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।

  1147. RCM 6.101.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।

    अर्थ (Hindi)

    जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।

  1148. RCM 6.101.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।

    अर्थ (Hindi)

    बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।

  1149. RCM 6.101.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जोगिनि गहें करबाल। एक हाथ मनुज कपाल।।

    अर्थ (Hindi)

    जोगिनि गहें करबाल। एक हाथ मनुज कपाल।।

  1150. RCM 6.101.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    करि सद्य सोनित पान। नाचहिं करहिं बहु गान।।2।।

    अर्थ (Hindi)

    करि सद्य सोनित पान। नाचहिं करहिं बहु गान।।2।।

  1151. RCM 6.101.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।

    अर्थ (Hindi)

    धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।

  1152. RCM 6.101.6
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    मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।

    अर्थ (Hindi)

    मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।

  1153. RCM 6.101.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।

  1154. RCM 6.101.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।

    अर्थ (Hindi)

    भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।

  1155. RCM 6.101.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ तहँ थकित करि कीस। गर्जेउ बहुरि दससीस।।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ तहँ थकित करि कीस। गर्जेउ बहुरि दससीस।।

  1156. RCM 6.101.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लछिमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।।

  1157. RCM 6.101.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।

    अर्थ (Hindi)

    हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।

  1158. RCM 6.101.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।

    अर्थ (Hindi)

    एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।

  1159. RCM 6.101.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।

  1160. RCM 6.101.14
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।

    अर्थ (Hindi)

    तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।

  1161. RCM 6.101.15
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।

    अर्थ (Hindi)

    मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।

  1162. RCM 6.101.16
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।

    अर्थ (Hindi)

    दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।

  1163. RCM 6.101.17
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही।

    अर्थ (Hindi)

    तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही।

  1164. RCM 6.101.18
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही।।

    अर्थ (Hindi)

    जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही।।

  1165. RCM 6.101.19
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी।

  1166. RCM 6.101.20
    📖 Open verse-by-verse reader#

    रघुबीर एकहि तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी।।1।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुबीर एकहि तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी।।1।।

  1167. RCM 6.101.21
    📖 Open verse-by-verse reader#

    माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।

    अर्थ (Hindi)

    माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।

  1168. RCM 6.101.22
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    सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।

    अर्थ (Hindi)

    सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।

  1169. RCM 6.101.23
    📖 Open verse-by-verse reader#

    श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।

    अर्थ (Hindi)

    श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।

  1170. RCM 6.101.24
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।

    अर्थ (Hindi)

    सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।

  1171. RCM 6.102.1
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    काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।

    अर्थ (Hindi)

    काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।

  1172. RCM 6.102.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।

    अर्थ (Hindi)

    मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।

  1173. RCM 6.102.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    उमा काल मर जाकीं ईछा। सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा।।

    अर्थ (Hindi)

    उमा काल मर जाकीं ईछा। सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा।।

  1174. RCM 6.102.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु सरबग्य चराचर नायक। प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सरबग्य चराचर नायक। प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक।।

  1175. RCM 6.102.5
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    नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।

    अर्थ (Hindi)

    नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।

  1176. RCM 6.102.6
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    सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।

  1177. RCM 6.102.7
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    असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।

    अर्थ (Hindi)

    असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।

  1178. RCM 6.102.8
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    बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।

    अर्थ (Hindi)

    बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।

  1179. RCM 6.102.9
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    दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा।।

    अर्थ (Hindi)

    दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा।।

  1180. RCM 6.102.10
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    मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्त्रवहिं नयन मग बारी।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्त्रवहिं नयन मग बारी।।

  1181. RCM 6.103.1
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    सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।

    अर्थ (Hindi)

    सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।

  1182. RCM 6.103.2
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    लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।

    अर्थ (Hindi)

    लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।

  1183. RCM 6.103.3
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    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा।।

  1184. RCM 6.103.4
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    गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी।।

    अर्थ (Hindi)

    गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी।।

  1185. RCM 6.103.5
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    डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।।

    अर्थ (Hindi)

    डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।।

  1186. RCM 6.103.6
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    धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई।।

  1187. RCM 6.103.7
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    मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा।।

  1188. RCM 6.103.8
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    प्रबिसे सब निषंग महु जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रबिसे सब निषंग महु जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई।।

  1189. RCM 6.103.9
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    तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन।।

    अर्थ (Hindi)

    तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन।।

  1190. RCM 6.103.10
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    जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।

    अर्थ (Hindi)

    जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।

  1191. RCM 6.103.11
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    बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।

    अर्थ (Hindi)

    बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।

  1192. RCM 6.104.1
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    पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी।।

    अर्थ (Hindi)

    पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी।।

  1193. RCM 6.104.2
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    जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आई।।

    अर्थ (Hindi)

    जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आई।।

  1194. RCM 6.104.3
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    पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।

    अर्थ (Hindi)

    पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।

  1195. RCM 6.104.4
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    उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।

    अर्थ (Hindi)

    उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।

  1196. RCM 6.104.5
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    तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।

    अर्थ (Hindi)

    तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।

  1197. RCM 6.104.6
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    सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।

    अर्थ (Hindi)

    सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।

  1198. RCM 6.104.7
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    बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा।।

    अर्थ (Hindi)

    बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा।।

  1199. RCM 6.104.8
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    भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं।।

    अर्थ (Hindi)

    भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं।।

  1200. RCM 6.104.9
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    जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।

  1201. RCM 6.104.10
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    राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।

    अर्थ (Hindi)

    राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।

  1202. RCM 6.104.11
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    तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।

    अर्थ (Hindi)

    तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।

  1203. RCM 6.104.12
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    अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।

  1204. RCM 6.104.13
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    काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।

    अर्थ (Hindi)

    काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।

  1205. RCM 6.105.1
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    मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।।

    अर्थ (Hindi)

    मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।।

  1206. RCM 6.105.2
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    अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।।

    अर्थ (Hindi)

    अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।।

  1207. RCM 6.105.3
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    भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।

    अर्थ (Hindi)

    भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।

  1208. RCM 6.105.4
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    रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।

    अर्थ (Hindi)

    रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।

  1209. RCM 6.105.5
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    बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।

  1210. RCM 6.105.6
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    लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।

  1211. RCM 6.105.7
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    कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।

    अर्थ (Hindi)

    कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।

  1212. RCM 6.105.8
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    कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।

    अर्थ (Hindi)

    कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।

  1213. RCM 6.106.1
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    आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।।

    अर्थ (Hindi)

    आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।।

  1214. RCM 6.106.2
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    तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।।

  1215. RCM 6.106.3
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    सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।।

  1216. RCM 6.106.4
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    पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।।

    अर्थ (Hindi)

    पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।।

  1217. RCM 6.106.5
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    तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।

  1218. RCM 6.106.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।

  1219. RCM 6.106.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।।

    अर्थ (Hindi)

    जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।।

  1220. RCM 6.106.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।

    अर्थ (Hindi)

    तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।

  1221. RCM 6.107.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना। लंका जाहु कहेउ भगवाना।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना। लंका जाहु कहेउ भगवाना।।

  1222. RCM 6.107.2
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    समाचार जानकिहि सुनावहु। तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु।।

    अर्थ (Hindi)

    समाचार जानकिहि सुनावहु। तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु।।

  1223. RCM 6.107.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।

  1224. RCM 6.107.4
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    बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।

  1225. RCM 6.107.5
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    दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा। रघुपति दूत जानकीं चीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा। रघुपति दूत जानकीं चीन्हा।।

  1226. RCM 6.107.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कहहु तात प्रभु कृपानिकेता। कुसल अनुज कपि सेन समेता।।

    अर्थ (Hindi)

    कहहु तात प्रभु कृपानिकेता। कुसल अनुज कपि सेन समेता।।

  1227. RCM 6.107.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा।।

  1228. RCM 6.107.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो।।

    अर्थ (Hindi)

    अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो।।

  1229. RCM 6.108.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।

    अर्थ (Hindi)

    अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।

  1230. RCM 6.108.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।

  1231. RCM 6.108.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि संदेसु भानुकुलभूषन। बोलि लिए जुबराज बिभीषन।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि संदेसु भानुकुलभूषन। बोलि लिए जुबराज बिभीषन।।

  1232. RCM 6.108.4
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    मारुतसुत के संग सिधावहु। सादर जनकसुतहि लै आवहु।।

    अर्थ (Hindi)

    मारुतसुत के संग सिधावहु। सादर जनकसुतहि लै आवहु।।

  1233. RCM 6.108.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुरतहिं सकल गए जहँ सीता। सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरतहिं सकल गए जहँ सीता। सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता।।

  1234. RCM 6.108.6
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    बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो। तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो।।

    अर्थ (Hindi)

    बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो। तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो।।

  1235. RCM 6.108.7
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    बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।

    अर्थ (Hindi)

    बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।

  1236. RCM 6.108.8
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    ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।

    अर्थ (Hindi)

    ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।

  1237. RCM 6.108.9
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    बेतपानि रच्छक चहुँ पासा। चले सकल मन परम हुलासा।।

    अर्थ (Hindi)

    बेतपानि रच्छक चहुँ पासा। चले सकल मन परम हुलासा।।

  1238. RCM 6.108.10
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    देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए।।

    अर्थ (Hindi)

    देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए।।

  1239. RCM 6.108.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कह रघुबीर कहा मम मानहु। सीतहि सखा पयादें आनहु।।

    अर्थ (Hindi)

    कह रघुबीर कहा मम मानहु। सीतहि सखा पयादें आनहु।।

  1240. RCM 6.108.12
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    देखहुँ कपि जननी की नाईं। बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई।।

    अर्थ (Hindi)

    देखहुँ कपि जननी की नाईं। बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई।।

  1241. RCM 6.108.13
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।

  1242. RCM 6.108.14
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    सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।

    अर्थ (Hindi)

    सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।

  1243. RCM 6.109.1
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    प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।

  1244. RCM 6.109.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।

    अर्थ (Hindi)

    लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।

  1245. RCM 6.109.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।।

  1246. RCM 6.109.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।।

  1247. RCM 6.109.5
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    देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।

  1248. RCM 6.109.6
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    पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।

  1249. RCM 6.109.7
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    जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।

  1250. RCM 6.109.8
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    तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।

    अर्थ (Hindi)

    तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।

  1251. RCM 6.110.1
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    तब रघुपति अनुसासन पाई। मातलि चलेउ चरन सिरु नाई।।

    अर्थ (Hindi)

    तब रघुपति अनुसासन पाई। मातलि चलेउ चरन सिरु नाई।।

  1252. RCM 6.110.2
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    आए देव सदा स्वारथी। बचन कहहिं जनु परमारथी।।

    अर्थ (Hindi)

    आए देव सदा स्वारथी। बचन कहहिं जनु परमारथी।।

  1253. RCM 6.110.3
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    दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया।।

    अर्थ (Hindi)

    दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया।।

  1254. RCM 6.110.4
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    बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी।।

    अर्थ (Hindi)

    बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी।।

  1255. RCM 6.110.5
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    तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।

  1256. RCM 6.110.6
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    अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।

    अर्थ (Hindi)

    अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।

  1257. RCM 6.110.7
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    मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।

    अर्थ (Hindi)

    मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।

  1258. RCM 6.110.8
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    जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।

    अर्थ (Hindi)

    जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।

  1259. RCM 6.110.9
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    यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही।।

    अर्थ (Hindi)

    यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही।।

  1260. RCM 6.110.10
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    अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरे मन बिसमय आवा।।

    अर्थ (Hindi)

    अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरे मन बिसमय आवा।।

  1261. RCM 6.110.11
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    हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।

    अर्थ (Hindi)

    हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।

  1262. RCM 6.110.12
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    भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।

    अर्थ (Hindi)

    भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।

  1263. RCM 6.111.1
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    जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।।

    अर्थ (Hindi)

    जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।।

  1264. RCM 6.111.2
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    भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।

    अर्थ (Hindi)

    भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।

  1265. RCM 6.111.3
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    तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।।

    अर्थ (Hindi)

    तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।।

  1266. RCM 6.111.4
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    जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।

    अर्थ (Hindi)

    जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।

  1267. RCM 6.111.5
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    जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।

    अर्थ (Hindi)

    जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।

  1268. RCM 6.111.6
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    अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।

    अर्थ (Hindi)

    अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।

  1269. RCM 6.111.7
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    अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।।

    अर्थ (Hindi)

    अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।।

  1270. RCM 6.111.8
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    रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।

  1271. RCM 6.111.9
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    गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।।

    अर्थ (Hindi)

    गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।।

  1272. RCM 6.111.10
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    भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।।

    अर्थ (Hindi)

    भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।।

  1273. RCM 6.111.11
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    बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।

    अर्थ (Hindi)

    बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।

  1274. RCM 6.111.12
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    भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।

    अर्थ (Hindi)

    भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।

  1275. RCM 6.111.13
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    सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।।

    अर्थ (Hindi)

    सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।।

  1276. RCM 6.111.14
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    सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।।

  1277. RCM 6.111.15
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    अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।

    अर्थ (Hindi)

    अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।

  1278. RCM 6.111.16
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    इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।

    अर्थ (Hindi)

    इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।

  1279. RCM 6.111.17
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    कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।

    अर्थ (Hindi)

    कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।

  1280. RCM 6.111.18
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    धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।

    अर्थ (Hindi)

    धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।

  1281. RCM 6.111.19
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    अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।

    अर्थ (Hindi)

    अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।

  1282. RCM 6.111.20
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    जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।

    अर्थ (Hindi)

    जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।

  1283. RCM 6.111.21
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    खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।।

    अर्थ (Hindi)

    खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।।

  1284. RCM 6.111.22
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    नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेम सदा सुभदं।।

    अर्थ (Hindi)

    नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेम सदा सुभदं।।

  1285. RCM 6.112.1
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    तेहि अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बिलोकि नयन जल छाए।।

    अर्थ (Hindi)

    तेहि अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बिलोकि नयन जल छाए।।

  1286. RCM 6.112.2
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    अनुज सहित प्रभु बंदन कीन्हा। आसिरबाद पिताँ तब दीन्हा।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुज सहित प्रभु बंदन कीन्हा। आसिरबाद पिताँ तब दीन्हा।।

  1287. RCM 6.112.3
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    तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।

  1288. RCM 6.112.4
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    सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।

  1289. RCM 6.112.5
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    रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।

    अर्थ (Hindi)

    रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।

  1290. RCM 6.112.6
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    ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।

    अर्थ (Hindi)

    ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।

  1291. RCM 6.112.7
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    सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।

  1292. RCM 6.112.8
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    बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।

    अर्थ (Hindi)

    बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।

  1293. RCM 6.113.1
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    जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम।।

    अर्थ (Hindi)

    जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम।।

  1294. RCM 6.113.2
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    धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप।।1।।

    अर्थ (Hindi)

    धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप।।1।।

  1295. RCM 6.113.3
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    जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।।

    अर्थ (Hindi)

    जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।।

  1296. RCM 6.113.4
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    यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ।।2।।

    अर्थ (Hindi)

    यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ।।2।।

  1297. RCM 6.113.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जय हरन धरनी भार। महिमा उदार अपार।।

    अर्थ (Hindi)

    जय हरन धरनी भार। महिमा उदार अपार।।

  1298. RCM 6.113.6
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    जय रावनारि कृपाल। किए जातुधान बिहाल।।3।।

    अर्थ (Hindi)

    जय रावनारि कृपाल। किए जातुधान बिहाल।।3।।

  1299. RCM 6.113.7
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    लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।

    अर्थ (Hindi)

    लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।

  1300. RCM 6.113.8
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    मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।

  1301. RCM 6.113.9
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    परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।

    अर्थ (Hindi)

    परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।

  1302. RCM 6.113.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।

    अर्थ (Hindi)

    अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।

  1303. RCM 6.113.11
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    मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।

  1304. RCM 6.113.12
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    अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।

    अर्थ (Hindi)

    अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।

  1305. RCM 6.113.13
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    कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।

    अर्थ (Hindi)

    कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।

  1306. RCM 6.113.14
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    मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।

  1307. RCM 6.113.15
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।।

    अर्थ (Hindi)

    बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।।

  1308. RCM 6.113.16
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास।।8।।

    अर्थ (Hindi)

    मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास।।8।।

  1309. RCM 6.113.17
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दे भक्ति रमानिवास त्रास हरन सरन सुखदायकं।

    अर्थ (Hindi)

    दे भक्ति रमानिवास त्रास हरन सरन सुखदायकं।

  1310. RCM 6.113.18
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    सुख धाम राम नमामि काम अनेक छबि रघुनायकं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुख धाम राम नमामि काम अनेक छबि रघुनायकं।।

  1311. RCM 6.113.19
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुर बृंद रंजन द्वंद भंजन मनुज तनु अतुलितबलं।

    अर्थ (Hindi)

    सुर बृंद रंजन द्वंद भंजन मनुज तनु अतुलितबलं।

  1312. RCM 6.113.20
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    ब्रह्मादि संकर सेब्य राम नमामि करुना कोमलं।।

    अर्थ (Hindi)

    ब्रह्मादि संकर सेब्य राम नमामि करुना कोमलं।।

  1313. RCM 6.114.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।

  1314. RCM 6.114.2
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    मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।

    अर्थ (Hindi)

    मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।

  1315. RCM 6.114.3
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    सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।

  1316. RCM 6.114.4
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    प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।

  1317. RCM 6.114.5
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    सुधा बरषि कपि भालु जिआए। हरषि उठे सब प्रभु पहिं आए।।

    अर्थ (Hindi)

    सुधा बरषि कपि भालु जिआए। हरषि उठे सब प्रभु पहिं आए।।

  1318. RCM 6.114.6
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    सुधाबृष्टि भै दुहु दल ऊपर। जिए भालु कपि नहिं रजनीचर।।

    अर्थ (Hindi)

    सुधाबृष्टि भै दुहु दल ऊपर। जिए भालु कपि नहिं रजनीचर।।

  1319. RCM 6.114.7
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    रामाकार भए तिन्ह के मन। मुक्त भए छूटे भव बंधन।।

    अर्थ (Hindi)

    रामाकार भए तिन्ह के मन। मुक्त भए छूटे भव बंधन।।

  1320. RCM 6.114.8
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    सुर अंसिक सब कपि अरु रीछा। जिए सकल रघुपति कीं ईछा।।

    अर्थ (Hindi)

    सुर अंसिक सब कपि अरु रीछा। जिए सकल रघुपति कीं ईछा।।

  1321. RCM 6.114.9
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    राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।

    अर्थ (Hindi)

    राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।

  1322. RCM 6.114.10
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    खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।

    अर्थ (Hindi)

    खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।

  1323. RCM 6.115.1
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    मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।

    अर्थ (Hindi)

    मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।

  1324. RCM 6.115.2
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    मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।

    अर्थ (Hindi)

    मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।

  1325. RCM 6.115.3
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    अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।

    अर्थ (Hindi)

    अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।

  1326. RCM 6.115.4
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    काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।

    अर्थ (Hindi)

    काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।

  1327. RCM 6.115.5
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    बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन।।

    अर्थ (Hindi)

    बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन।।

  1328. RCM 6.115.6
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    भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर।।3।।

    अर्थ (Hindi)

    भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर।।3।।

  1329. RCM 6.115.7
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    स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।

    अर्थ (Hindi)

    स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।

  1330. RCM 6.115.8
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    अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।

    अर्थ (Hindi)

    अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।

  1331. RCM 6.115.9
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    मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।

  1332. RCM 6.116.1
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    करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।

    अर्थ (Hindi)

    करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।

  1333. RCM 6.116.2
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    नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।

    अर्थ (Hindi)

    नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।

  1334. RCM 6.116.3
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    सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।।

    अर्थ (Hindi)

    सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।।

  1335. RCM 6.116.4
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    दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।।

    अर्थ (Hindi)

    दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।।

  1336. RCM 6.116.5
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    अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।

    अर्थ (Hindi)

    अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।

  1337. RCM 6.116.6
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    देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।

  1338. RCM 6.116.7
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    सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।

    अर्थ (Hindi)

    सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।

  1339. RCM 6.116.8
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    सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।

  1340. RCM 6.117.1
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    सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।

  1341. RCM 6.117.2
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    बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।

    अर्थ (Hindi)

    बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।

  1342. RCM 6.117.3
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    बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो।।

  1343. RCM 6.117.4
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    लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा।।

    अर्थ (Hindi)

    लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा।।

  1344. RCM 6.117.5
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    चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन।।

    अर्थ (Hindi)

    चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन।।

  1345. RCM 6.117.6
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    नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही।।

    अर्थ (Hindi)

    नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही।।

  1346. RCM 6.117.7
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    जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।

  1347. RCM 6.117.8
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    हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।

    अर्थ (Hindi)

    हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।

  1348. RCM 6.118.1
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    भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।

    अर्थ (Hindi)

    भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।

  1349. RCM 6.118.2
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    नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।

  1350. RCM 6.118.3
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    चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया।।

    अर्थ (Hindi)

    चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया।।

  1351. RCM 6.118.4
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    तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो।।

    अर्थ (Hindi)

    तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो।।

  1352. RCM 6.118.5
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    निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।

    अर्थ (Hindi)

    निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।

  1353. RCM 6.118.6
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    सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।

  1354. RCM 6.118.7
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    प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।

  1355. RCM 6.118.8
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    दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।

    अर्थ (Hindi)

    दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।

  1356. RCM 6.118.9
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    सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।

  1357. RCM 6.118.10
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    देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।

    अर्थ (Hindi)

    देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।

  1358. RCM 6.119.1
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    अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई।।

    अर्थ (Hindi)

    अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई।।

  1359. RCM 6.119.2
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    मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो।।

    अर्थ (Hindi)

    मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो।।

  1360. RCM 6.119.3
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    चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई।।

    अर्थ (Hindi)

    चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई।।

  1361. RCM 6.119.4
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    सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर।।

    अर्थ (Hindi)

    सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर।।

  1362. RCM 6.119.5
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    राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी।।

    अर्थ (Hindi)

    राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी।।

  1363. RCM 6.119.6
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    रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर।।

    अर्थ (Hindi)

    रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर।।

  1364. RCM 6.119.7
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    परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।

    अर्थ (Hindi)

    परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।

  1365. RCM 6.119.8
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    सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।

  1366. RCM 6.119.9
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    कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।

    अर्थ (Hindi)

    कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।

  1367. RCM 6.119.10
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    हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे।।

    अर्थ (Hindi)

    हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे।।

  1368. RCM 6.119.11
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    कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।

  1369. RCM 6.119.12
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    इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।

  1370. RCM 6.119.13
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    सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम।।119(क)।।

    अर्थ (Hindi)

    सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम।।119(क)।।

  1371. RCM 6.119.14
    📖 Open verse-by-verse reader#

    जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।

    अर्थ (Hindi)

    जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।

  1372. RCM 6.119.15
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।

  1373. RCM 6.120.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा।।

  1374. RCM 6.120.2
    📖 Open verse-by-verse reader#

    कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना।।

    अर्थ (Hindi)

    कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना।।

  1375. RCM 6.120.3
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।

    अर्थ (Hindi)

    सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।

  1376. RCM 6.120.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।

    अर्थ (Hindi)

    तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।

  1377. RCM 6.120.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।

    अर्थ (Hindi)

    बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।

  1378. RCM 6.120.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।

  1379. RCM 6.120.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।

    अर्थ (Hindi)

    तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।

  1380. RCM 6.120.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।

    अर्थ (Hindi)

    देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।

  1381. RCM 6.120.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।

    अर्थ (Hindi)

    पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।

  1382. RCM 6.121.1
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।

  1383. RCM 6.121.2
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    भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।

    अर्थ (Hindi)

    भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।

  1384. RCM 6.121.3
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    तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।

    अर्थ (Hindi)

    तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।

  1385. RCM 6.121.4
    📖 Open verse-by-verse reader#

    नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।

    अर्थ (Hindi)

    नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।

  1386. RCM 6.121.5
    📖 Open verse-by-verse reader#

    मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी।।

    अर्थ (Hindi)

    मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी।।

  1387. RCM 6.121.6
    📖 Open verse-by-verse reader#

    इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।

    अर्थ (Hindi)

    इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।

  1388. RCM 6.121.7
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।

    अर्थ (Hindi)

    सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।

  1389. RCM 6.121.8
    📖 Open verse-by-verse reader#

    तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।

    अर्थ (Hindi)

    तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।

  1390. RCM 6.121.9
    📖 Open verse-by-verse reader#

    दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।

    अर्थ (Hindi)

    दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।

  1391. RCM 6.121.10
    📖 Open verse-by-verse reader#

    सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।

    अर्थ (Hindi)

    सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।

  1392. RCM 6.121.11
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।

  1393. RCM 6.121.12
    📖 Open verse-by-verse reader#

    प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।

    अर्थ (Hindi)

    प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।