बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।
RCM 6.9.2
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।
RCM 6.9.2
बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।