होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।
RCM 6.3.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।
RCM 6.3.3
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।