सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
RCM 6.1.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
RCM 6.1.10
सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।