तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।
RCM 6.4.8
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।
RCM 6.4.8
तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।