बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।
RCM 6.1.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।
RCM 6.1.7
बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।