निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
RCM 6.6.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
RCM 6.6.1
निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।