अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
RCM 6.5.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
RCM 6.5.1
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।