सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।
RCM 6.5.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।
RCM 6.5.10
सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।