Ramcharitmanas · अध्याय 6
Lanka Kanda
लङ्काकाण्ड
The bridge to Lanka, the great war, the fall of Ravana, return to Ayodhya. (Called Yuddha Kanda in some Ramayana traditions.)
- RCM 6.1.1Open verse →
यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।।
अर्थ · Hindi
यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।।
- RCM 6.1.2Open verse →
प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।।
अर्थ · Hindi
प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।।
- RCM 6.1.3Open verse →
तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।
अर्थ · Hindi
तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।
- RCM 6.1.4Open verse →
सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।
अर्थ · Hindi
सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।
- RCM 6.1.5Open verse →
जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।।
अर्थ · Hindi
जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।।
- RCM 6.1.6Open verse →
राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।।
अर्थ · Hindi
राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।।
- RCM 6.1.7Open verse →
बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।
अर्थ · Hindi
बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।
- RCM 6.1.8Open verse →
राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।।
अर्थ · Hindi
राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।।
- RCM 6.1.9Open verse →
धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।
अर्थ · Hindi
धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।
- RCM 6.1.10Open verse →
सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
अर्थ · Hindi
सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।
- RCM 6.1.11Open verse →
अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।
अर्थ · Hindi
अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।
- RCM 6.1.12Open verse →
आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।
अर्थ · Hindi
आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।
- RCM 6.2.1Open verse →
सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।।
अर्थ · Hindi
सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।।
- RCM 6.2.2Open verse →
देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।।
अर्थ · Hindi
देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।।
- RCM 6.2.3Open verse →
परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।
अर्थ · Hindi
परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।
- RCM 6.2.4Open verse →
करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।
अर्थ · Hindi
करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।
- RCM 6.2.5Open verse →
सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।
अर्थ · Hindi
सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।
- RCM 6.2.6Open verse →
लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।
अर्थ · Hindi
लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।
- RCM 6.2.7Open verse →
सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।
अर्थ · Hindi
सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।
- RCM 6.2.8Open verse →
संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।
अर्थ · Hindi
संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।
- RCM 6.2.9Open verse →
संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।
अर्थ · Hindi
संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।
- RCM 6.2.10Open verse →
ते नर करहि कलप भरि धोर नरक महुँ बास।।2।।
अर्थ · Hindi
ते नर करहि कलप भरि धोर नरक महुँ बास।।2।।
- RCM 6.3.1Open verse →
जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।
अर्थ · Hindi
जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।
- RCM 6.3.2Open verse →
जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।
अर्थ · Hindi
जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।
- RCM 6.3.3Open verse →
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।
अर्थ · Hindi
होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।
- RCM 6.3.4Open verse →
मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।।
अर्थ · Hindi
मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।।
- RCM 6.3.5Open verse →
राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।
अर्थ · Hindi
राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।
- RCM 6.3.6Open verse →
गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।
अर्थ · Hindi
गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।
- RCM 6.3.7Open verse →
बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।
अर्थ · Hindi
बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।
- RCM 6.3.8Open verse →
बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।
अर्थ · Hindi
बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।
- RCM 6.3.9Open verse →
महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।
अर्थ · Hindi
महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।
- RCM 6.3.10Open verse →
श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान।
अर्थ · Hindi
श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान।
- RCM 6.3.11Open verse →
ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।।3।।
अर्थ · Hindi
ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।।3।।
- RCM 6.4.1Open verse →
बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।
अर्थ · Hindi
बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।
- RCM 6.4.2Open verse →
चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।
अर्थ · Hindi
चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।
- RCM 6.4.3Open verse →
सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।
अर्थ · Hindi
सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।
- RCM 6.4.4Open verse →
देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।
अर्थ · Hindi
देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।
- RCM 6.4.5Open verse →
मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।
अर्थ · Hindi
मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।
- RCM 6.4.6Open verse →
अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।
अर्थ · Hindi
अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।
- RCM 6.4.7Open verse →
प्रभुहि बिलोकहिं टरहिं न टारे। मन हरषित सब भए सुखारे।।
अर्थ · Hindi
प्रभुहि बिलोकहिं टरहिं न टारे। मन हरषित सब भए सुखारे।।
- RCM 6.4.8Open verse →
तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।
अर्थ · Hindi
तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।
- RCM 6.4.9Open verse →
चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।
अर्थ · Hindi
चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।
- RCM 6.4.10Open verse →
सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं।
अर्थ · Hindi
सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं।
- RCM 6.4.11Open verse →
अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं।।4।।
अर्थ · Hindi
अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं।।4।।
- RCM 6.5.1Open verse →
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
अर्थ · Hindi
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।
- RCM 6.5.2Open verse →
सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।
अर्थ · Hindi
सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।
- RCM 6.5.3Open verse →
सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।
अर्थ · Hindi
सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।
- RCM 6.5.4Open verse →
खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।
अर्थ · Hindi
खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।
- RCM 6.5.5Open verse →
सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी।।
अर्थ · Hindi
सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी।।
- RCM 6.5.6Open verse →
खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।।
अर्थ · Hindi
खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।।
- RCM 6.5.7Open verse →
जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।
अर्थ · Hindi
जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।
- RCM 6.5.8Open verse →
दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।
अर्थ · Hindi
दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।
- RCM 6.5.9Open verse →
जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता।।
अर्थ · Hindi
जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता।।
- RCM 6.5.10Open verse →
सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।
अर्थ · Hindi
सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।
- RCM 6.5.11Open verse →
बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस।
अर्थ · Hindi
बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस।
- RCM 6.5.12Open verse →
सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस।।5।।
अर्थ · Hindi
सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस।।5।।
- RCM 6.6.1Open verse →
निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
अर्थ · Hindi
निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।
- RCM 6.6.2Open verse →
मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।
- RCM 6.6.3Open verse →
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
अर्थ · Hindi
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
- RCM 6.6.4Open verse →
चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।
अर्थ · Hindi
चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।
- RCM 6.6.5Open verse →
नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।
अर्थ · Hindi
नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।
- RCM 6.6.6Open verse →
तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।
अर्थ · Hindi
तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।
- RCM 6.6.7Open verse →
अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।
अर्थ · Hindi
अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।
- RCM 6.6.8Open verse →
जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।
अर्थ · Hindi
जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।
- RCM 6.6.9Open verse →
तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।
अर्थ · Hindi
तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।
- RCM 6.6.10Open verse →
रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।
अर्थ · Hindi
रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।
- RCM 6.6.11Open verse →
सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।
अर्थ · Hindi
सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।
- RCM 6.7.1Open verse →
नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।
अर्थ · Hindi
नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।
- RCM 6.7.2Open verse →
चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।
अर्थ · Hindi
चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।
- RCM 6.7.3Open verse →
संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।
अर्थ · Hindi
संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।
- RCM 6.7.4Open verse →
तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।
अर्थ · Hindi
तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।
- RCM 6.7.5Open verse →
सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी।।
अर्थ · Hindi
सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी।।
- RCM 6.7.6Open verse →
मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी।।
अर्थ · Hindi
मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी।।
- RCM 6.7.7Open verse →
सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।
अर्थ · Hindi
सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।
- RCM 6.7.8Open verse →
जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।
अर्थ · Hindi
जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।
- RCM 6.7.9Open verse →
अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।
अर्थ · Hindi
अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।
- RCM 6.7.10Open verse →
नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।
अर्थ · Hindi
नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।
- RCM 6.8.1Open verse →
तब रावन मयसुता उठाई। कहै लाग खल निज प्रभुताई।।
अर्थ · Hindi
तब रावन मयसुता उठाई। कहै लाग खल निज प्रभुताई।।
- RCM 6.8.2Open verse →
सुनु तै प्रिया बृथा भय माना। जग जोधा को मोहि समाना।।
अर्थ · Hindi
सुनु तै प्रिया बृथा भय माना। जग जोधा को मोहि समाना।।
- RCM 6.8.3Open verse →
बरुन कुबेर पवन जम काला। भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला।।
अर्थ · Hindi
बरुन कुबेर पवन जम काला। भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला।।
- RCM 6.8.4Open verse →
देव दनुज नर सब बस मोरें। कवन हेतु उपजा भय तोरें।।
अर्थ · Hindi
देव दनुज नर सब बस मोरें। कवन हेतु उपजा भय तोरें।।
- RCM 6.8.5Open verse →
नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई। सभाँ बहोरि बैठ सो जाई।।
अर्थ · Hindi
नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई। सभाँ बहोरि बैठ सो जाई।।
- RCM 6.8.6Open verse →
मंदोदरीं हदयँ अस जाना। काल बस्य उपजा अभिमाना।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरीं हदयँ अस जाना। काल बस्य उपजा अभिमाना।।
- RCM 6.8.7Open verse →
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।
अर्थ · Hindi
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।
- RCM 6.8.8Open verse →
कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।
अर्थ · Hindi
कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।
- RCM 6.8.9Open verse →
कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।
अर्थ · Hindi
कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।
- RCM 6.8.10Open verse →
सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।
अर्थ · Hindi
सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।
- RCM 6.8.11Open verse →
निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।
अर्थ · Hindi
निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।
- RCM 6.9.1Open verse →
कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।।
अर्थ · Hindi
कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।।
- RCM 6.9.2Open verse →
बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।
अर्थ · Hindi
बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।
- RCM 6.9.3Open verse →
छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।
अर्थ · Hindi
छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।
- RCM 6.9.4Open verse →
सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।
अर्थ · Hindi
सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।
- RCM 6.9.5Open verse →
जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।।
अर्थ · Hindi
जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।।
- RCM 6.9.6Open verse →
सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।।
अर्थ · Hindi
सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।।
- RCM 6.9.7Open verse →
तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।
अर्थ · Hindi
तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।
- RCM 6.9.8Open verse →
प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।
अर्थ · Hindi
प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।
- RCM 6.9.9Open verse →
बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।।
अर्थ · Hindi
बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।।
- RCM 6.9.10Open verse →
प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।
अर्थ · Hindi
प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।
- RCM 6.9.11Open verse →
नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।
अर्थ · Hindi
नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।
- RCM 6.9.12Open verse →
नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।
अर्थ · Hindi
नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।
- RCM 6.10.1Open verse →
यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।
अर्थ · Hindi
यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।
- RCM 6.10.2Open verse →
सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।
अर्थ · Hindi
सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।
- RCM 6.10.3Open verse →
अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।
अर्थ · Hindi
अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।
- RCM 6.10.4Open verse →
सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।
अर्थ · Hindi
सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।
- RCM 6.10.5Open verse →
हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।
अर्थ · Hindi
हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।
- RCM 6.10.6Open verse →
संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।
अर्थ · Hindi
संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।
- RCM 6.10.7Open verse →
लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा।।
अर्थ · Hindi
लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा।।
- RCM 6.10.8Open verse →
बैठ जाइ तेही मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन।।
अर्थ · Hindi
बैठ जाइ तेही मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन।।
- RCM 6.10.9Open verse →
बाजहिं ताल पखाउज बीना। नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना।।
अर्थ · Hindi
बाजहिं ताल पखाउज बीना। नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना।।
- RCM 6.10.10Open verse →
सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।
अर्थ · Hindi
सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।
- RCM 6.10.11Open verse →
परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।
अर्थ · Hindi
परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।
- RCM 6.11.1Open verse →
इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा।।
अर्थ · Hindi
इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा।।
- RCM 6.11.2Open verse →
सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी।।
अर्थ · Hindi
सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी।।
- RCM 6.11.3Open verse →
तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।
अर्थ · Hindi
तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।
- RCM 6.11.4Open verse →
ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।
अर्थ · Hindi
ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।
- RCM 6.11.5Open verse →
प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।
अर्थ · Hindi
प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।
- RCM 6.11.6Open verse →
दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।
अर्थ · Hindi
दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।
- RCM 6.11.7Open verse →
बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना।।
अर्थ · Hindi
बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना।।
- RCM 6.11.8Open verse →
प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन।।
अर्थ · Hindi
प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन।।
- RCM 6.11.9Open verse →
एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।
अर्थ · Hindi
एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।
- RCM 6.11.10Open verse →
धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।
अर्थ · Hindi
धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।
- RCM 6.11.11Open verse →
पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।
अर्थ · Hindi
पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।
- RCM 6.11.12Open verse →
कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।
अर्थ · Hindi
कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।
- RCM 6.12.1Open verse →
पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।
अर्थ · Hindi
पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।
- RCM 6.12.2Open verse →
मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।
अर्थ · Hindi
मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।
- RCM 6.12.3Open verse →
बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।
अर्थ · Hindi
बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।
- RCM 6.12.4Open verse →
कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।
अर्थ · Hindi
कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।
- RCM 6.12.5Open verse →
कह सुग़ीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई।।
अर्थ · Hindi
कह सुग़ीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई।।
- RCM 6.12.6Open verse →
मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई।।
अर्थ · Hindi
मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई।।
- RCM 6.12.7Open verse →
कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा।।
अर्थ · Hindi
कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा।।
- RCM 6.12.8Open verse →
छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं।।
अर्थ · Hindi
छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं।।
- RCM 6.12.9Open verse →
प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।
अर्थ · Hindi
प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।
- RCM 6.12.10Open verse →
बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।
अर्थ · Hindi
बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।
- RCM 6.12.11Open verse →
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।
अर्थ · Hindi
कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।
- RCM 6.12.12Open verse →
तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।
अर्थ · Hindi
तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।
- RCM 6.12.13Open verse →
पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।
अर्थ · Hindi
पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।
- RCM 6.12.14Open verse →
दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।
अर्थ · Hindi
दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।
- RCM 6.13.1Open verse →
देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।।
अर्थ · Hindi
देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।।
- RCM 6.13.2Open verse →
मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।।
अर्थ · Hindi
मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।।
- RCM 6.13.3Open verse →
कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।।
अर्थ · Hindi
कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।।
- RCM 6.13.4Open verse →
लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।।
अर्थ · Hindi
लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।।
- RCM 6.13.5Open verse →
छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।।
अर्थ · Hindi
छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।।
- RCM 6.13.6Open verse →
मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।।
- RCM 6.13.7Open verse →
बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।
अर्थ · Hindi
बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।
- RCM 6.13.8Open verse →
प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।
अर्थ · Hindi
प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।
- RCM 6.13.9Open verse →
छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।
अर्थ · Hindi
छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।
- RCM 6.13.10Open verse →
सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।
अर्थ · Hindi
सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।
- RCM 6.13.11Open verse →
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।
अर्थ · Hindi
अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।
- RCM 6.13.12Open verse →
रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।
अर्थ · Hindi
रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।
- RCM 6.14.1Open verse →
कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।
अर्थ · Hindi
कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।
- RCM 6.14.2Open verse →
सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।
अर्थ · Hindi
सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।
- RCM 6.14.3Open verse →
दसमुख देखि सभा भय पाई। बिहसि बचन कह जुगुति बनाई।।
अर्थ · Hindi
दसमुख देखि सभा भय पाई। बिहसि बचन कह जुगुति बनाई।।
- RCM 6.14.4Open verse →
सिरउ गिरे संतत सुभ जाही। मुकुट परे कस असगुन ताही।।
अर्थ · Hindi
सिरउ गिरे संतत सुभ जाही। मुकुट परे कस असगुन ताही।।
- RCM 6.14.5Open verse →
सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।
अर्थ · Hindi
सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।
- RCM 6.14.6Open verse →
मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।
- RCM 6.14.7Open verse →
सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।
अर्थ · Hindi
सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।
- RCM 6.14.8Open verse →
कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।
अर्थ · Hindi
कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।
- RCM 6.14.9Open verse →
बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।
अर्थ · Hindi
बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।
- RCM 6.14.10Open verse →
लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।
अर्थ · Hindi
लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।
- RCM 6.15.1Open verse →
पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।
अर्थ · Hindi
पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।
- RCM 6.15.2Open verse →
भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।
अर्थ · Hindi
भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।
- RCM 6.15.3Open verse →
जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।
अर्थ · Hindi
जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।
- RCM 6.15.4Open verse →
श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।
अर्थ · Hindi
श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।
- RCM 6.15.5Open verse →
अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला।।
अर्थ · Hindi
अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला।।
- RCM 6.15.6Open verse →
आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा।।
अर्थ · Hindi
आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा।।
- RCM 6.15.7Open verse →
रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।
अर्थ · Hindi
रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।
- RCM 6.15.8Open verse →
उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।
अर्थ · Hindi
उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।
- RCM 6.15.9Open verse →
अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
अर्थ · Hindi
अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
- RCM 6.15.10Open verse →
मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।
अर्थ · Hindi
मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।
- RCM 6.15.11Open verse →
अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।
अर्थ · Hindi
अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।
- RCM 6.15.12Open verse →
प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ।।15(ख)।।
अर्थ · Hindi
प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ।।15(ख)।।
- RCM 6.16.1Open verse →
बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना।।
अर्थ · Hindi
बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना।।
- RCM 6.16.2Open verse →
नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।
अर्थ · Hindi
नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।
- RCM 6.16.3Open verse →
साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।।
अर्थ · Hindi
साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।।
- RCM 6.16.4Open verse →
रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा।।
अर्थ · Hindi
रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा।।
- RCM 6.16.5Open verse →
सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें।।
अर्थ · Hindi
सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें।।
- RCM 6.16.6Open verse →
जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई।।
अर्थ · Hindi
जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई।।
- RCM 6.16.7Open verse →
तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।
अर्थ · Hindi
तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।
- RCM 6.16.8Open verse →
मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।
- RCM 6.16.9Open verse →
एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।
अर्थ · Hindi
एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।
- RCM 6.16.10Open verse →
सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।
अर्थ · Hindi
सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।
- RCM 6.16.11Open verse →
फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।
अर्थ · Hindi
फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।
- RCM 6.16.12Open verse →
मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।
अर्थ · Hindi
मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।
- RCM 6.17.1Open verse →
इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।
अर्थ · Hindi
इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।
- RCM 6.17.2Open verse →
कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।
अर्थ · Hindi
कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।
- RCM 6.17.3Open verse →
सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी।।
अर्थ · Hindi
सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी।।
- RCM 6.17.4Open verse →
मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा।।
अर्थ · Hindi
मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा।।
- RCM 6.17.5Open verse →
नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।
अर्थ · Hindi
नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।
- RCM 6.17.6Open verse →
बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।
अर्थ · Hindi
बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।
- RCM 6.17.7Open verse →
बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।
अर्थ · Hindi
बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।
- RCM 6.17.8Open verse →
काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।
अर्थ · Hindi
काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।
- RCM 6.17.9Open verse →
प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।
अर्थ · Hindi
प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।
- RCM 6.17.10Open verse →
सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।
अर्थ · Hindi
सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।
- RCM 6.17.11Open verse →
स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ।
अर्थ · Hindi
स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ।
- RCM 6.17.12Open verse →
अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।।17(ख)।।
अर्थ · Hindi
अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।।17(ख)।।
- RCM 6.18.1Open verse →
बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।
अर्थ · Hindi
बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।
- RCM 6.18.2Open verse →
प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।
अर्थ · Hindi
प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।
- RCM 6.18.3Open verse →
पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भैंटा।।
अर्थ · Hindi
पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भैंटा।।
- RCM 6.18.4Open verse →
बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई।।
अर्थ · Hindi
बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई।।
- RCM 6.18.5Open verse →
तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।
अर्थ · Hindi
तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।
- RCM 6.18.6Open verse →
निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।
अर्थ · Hindi
निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।
- RCM 6.18.7Open verse →
एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं।।
अर्थ · Hindi
एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं।।
- RCM 6.18.8Open verse →
भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी।।
अर्थ · Hindi
भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी।।
- RCM 6.18.9Open verse →
अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।
अर्थ · Hindi
अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।
- RCM 6.18.10Open verse →
बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।
अर्थ · Hindi
बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।
- RCM 6.18.11Open verse →
गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।
अर्थ · Hindi
गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।
- RCM 6.18.12Open verse →
सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।
अर्थ · Hindi
सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।
- RCM 6.19.1Open verse →
तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा।।
अर्थ · Hindi
तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा।।
- RCM 6.19.2Open verse →
सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा।।
अर्थ · Hindi
सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा।।
- RCM 6.19.3Open verse →
आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए।।
अर्थ · Hindi
आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए।।
- RCM 6.19.4Open verse →
अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें।।
अर्थ · Hindi
अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें।।
- RCM 6.19.5Open verse →
भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।
अर्थ · Hindi
भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।
- RCM 6.19.6Open verse →
मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।
अर्थ · Hindi
मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।
- RCM 6.19.7Open verse →
गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा।।
अर्थ · Hindi
गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा।।
- RCM 6.19.8Open verse →
उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी।।
अर्थ · Hindi
उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी।।
- RCM 6.19.9Open verse →
जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।
अर्थ · Hindi
जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।
- RCM 6.19.10Open verse →
राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।
अर्थ · Hindi
राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।
- RCM 6.20.1Open verse →
कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।।
अर्थ · Hindi
कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।।
- RCM 6.20.2Open verse →
मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई।।
अर्थ · Hindi
मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई।।
- RCM 6.20.3Open verse →
उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती।।
अर्थ · Hindi
उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती।।
- RCM 6.20.4Open verse →
बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।
अर्थ · Hindi
बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।
- RCM 6.20.5Open verse →
नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।
अर्थ · Hindi
नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।
- RCM 6.20.6Open verse →
अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।
अर्थ · Hindi
अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।
- RCM 6.20.7Open verse →
दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।
अर्थ · Hindi
दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।
- RCM 6.20.8Open verse →
सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।
अर्थ · Hindi
सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।
- RCM 6.20.9Open verse →
प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।
अर्थ · Hindi
प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।
- RCM 6.20.10Open verse →
आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।
अर्थ · Hindi
आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।
- RCM 6.21.1Open verse →
रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।
अर्थ · Hindi
रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।
- RCM 6.21.2Open verse →
कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।
अर्थ · Hindi
कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।
- RCM 6.21.3Open verse →
अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा।।
अर्थ · Hindi
अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा।।
- RCM 6.21.4Open verse →
अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।।
अर्थ · Hindi
अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।।
- RCM 6.21.5Open verse →
अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक।।
अर्थ · Hindi
अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक।।
- RCM 6.21.6Open verse →
गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु।।
अर्थ · Hindi
गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु।।
- RCM 6.21.7Open verse →
अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।
अर्थ · Hindi
अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।
- RCM 6.21.8Open verse →
दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।
अर्थ · Hindi
दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।
- RCM 6.21.9Open verse →
राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।
अर्थ · Hindi
राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।
- RCM 6.21.10Open verse →
सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।
अर्थ · Hindi
सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।
- RCM 6.21.11Open verse →
हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस।
अर्थ · Hindi
हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस।
- RCM 6.21.12Open verse →
अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस।।21।
अर्थ · Hindi
अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस।।21।
- RCM 6.22.1Open verse →
सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।
अर्थ · Hindi
सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।
- RCM 6.22.2Open verse →
तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।
अर्थ · Hindi
तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।
- RCM 6.22.3Open verse →
सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।।
अर्थ · Hindi
सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।।
- RCM 6.22.4Open verse →
खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ।।
अर्थ · Hindi
खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ।।
- RCM 6.22.5Open verse →
कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।
अर्थ · Hindi
कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।
- RCM 6.22.6Open verse →
देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।
अर्थ · Hindi
देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।
- RCM 6.22.7Open verse →
कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।
अर्थ · Hindi
कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।
- RCM 6.22.8Open verse →
धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।
अर्थ · Hindi
धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।
- RCM 6.22.9Open verse →
जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।
अर्थ · Hindi
जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।
- RCM 6.22.10Open verse →
लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।
अर्थ · Hindi
लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।
- RCM 6.22.11Open verse →
पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।
अर्थ · Hindi
पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।
- RCM 6.22.12Open verse →
सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।
अर्थ · Hindi
सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।
- RCM 6.23.1Open verse →
तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद।।
अर्थ · Hindi
तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद।।
- RCM 6.23.2Open verse →
तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना।।
अर्थ · Hindi
तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना।।
- RCM 6.23.3Open verse →
तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ।।
अर्थ · Hindi
तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ।।
- RCM 6.23.4Open verse →
जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा।।
अर्थ · Hindi
जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा।।
- RCM 6.23.5Open verse →
सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।।
अर्थ · Hindi
सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।।
- RCM 6.23.6Open verse →
आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।।
अर्थ · Hindi
आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।।
- RCM 6.23.7Open verse →
सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा।।
अर्थ · Hindi
सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा।।
- RCM 6.23.8Open verse →
रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई।।
अर्थ · Hindi
रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई।।
- RCM 6.23.9Open verse →
जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन।।
अर्थ · Hindi
जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन।।
- RCM 6.23.10Open verse →
चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई।।
अर्थ · Hindi
चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई।।
- RCM 6.23.11Open verse →
सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।
अर्थ · Hindi
सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।
- RCM 6.23.12Open verse →
फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।
अर्थ · Hindi
फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।
- RCM 6.23.13Open verse →
सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह।
अर्थ · Hindi
सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह।
- RCM 6.23.14Open verse →
कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।
अर्थ · Hindi
कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।
- RCM 6.23.15Open verse →
प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।
अर्थ · Hindi
प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।
- RCM 6.23.16Open verse →
जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि।।23(ग)।।
अर्थ · Hindi
जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि।।23(ग)।।
- RCM 6.23.17Open verse →
जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।
अर्थ · Hindi
जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।
- RCM 6.23.18Open verse →
तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष।।23(घ)।।
अर्थ · Hindi
तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष।।23(घ)।।
- RCM 6.23.19Open verse →
बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस।
अर्थ · Hindi
बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस।
- RCM 6.23.20Open verse →
प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।
अर्थ · Hindi
प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।
- RCM 6.23.21Open verse →
हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।
अर्थ · Hindi
हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।
- RCM 6.23.22Open verse →
जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।
अर्थ · Hindi
जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।
- RCM 6.24.1Open verse →
धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा।।
अर्थ · Hindi
धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा।।
- RCM 6.24.2Open verse →
नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई।।
अर्थ · Hindi
नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई।।
- RCM 6.24.3Open verse →
अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।
अर्थ · Hindi
अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।
- RCM 6.24.4Open verse →
मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।
अर्थ · Hindi
मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।
- RCM 6.24.5Open verse →
कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।
अर्थ · Hindi
कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।
- RCM 6.24.6Open verse →
बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।
अर्थ · Hindi
बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।
- RCM 6.24.7Open verse →
सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई।।
अर्थ · Hindi
सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई।।
- RCM 6.24.8Open verse →
देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा।।
अर्थ · Hindi
देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा।।
- RCM 6.24.9Open verse →
जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।
अर्थ · Hindi
जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।
- RCM 6.24.10Open verse →
पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।
अर्थ · Hindi
पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।
- RCM 6.24.11Open verse →
बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी।।
अर्थ · Hindi
बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी।।
- RCM 6.24.12Open verse →
कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते।।
अर्थ · Hindi
कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते।।
- RCM 6.24.13Open verse →
बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला।।
अर्थ · Hindi
बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला।।
- RCM 6.24.14Open verse →
खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई।।
अर्थ · Hindi
खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई।।
- RCM 6.24.15Open verse →
एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।
अर्थ · Hindi
एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।
- RCM 6.24.16Open verse →
कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।
अर्थ · Hindi
कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।
- RCM 6.24.17Open verse →
एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।
अर्थ · Hindi
एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।
- RCM 6.24.18Open verse →
इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।
अर्थ · Hindi
इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।
- RCM 6.25.1Open verse →
सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला।।
अर्थ · Hindi
सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला।।
- RCM 6.25.2Open verse →
जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई।।
अर्थ · Hindi
जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई।।
- RCM 6.25.3Open verse →
सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी।।
अर्थ · Hindi
सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी।।
- RCM 6.25.4Open verse →
भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला।।
अर्थ · Hindi
भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला।।
- RCM 6.25.5Open verse →
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।
अर्थ · Hindi
जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।
- RCM 6.25.6Open verse →
जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।
अर्थ · Hindi
जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।
- RCM 6.25.7Open verse →
जासु चलत डोलति इमि धरनी। चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी।।
अर्थ · Hindi
जासु चलत डोलति इमि धरनी। चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी।।
- RCM 6.25.8Open verse →
सोइ रावन जग बिदित प्रतापी। सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी।।
अर्थ · Hindi
सोइ रावन जग बिदित प्रतापी। सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी।।
- RCM 6.25.9Open verse →
तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।
अर्थ · Hindi
तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।
- RCM 6.25.10Open verse →
रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।
अर्थ · Hindi
रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।
- RCM 6.26.1Open verse →
सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।
अर्थ · Hindi
सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।
- RCM 6.26.2Open verse →
सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।
अर्थ · Hindi
सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।
- RCM 6.26.3Open verse →
जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।
अर्थ · Hindi
जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।
- RCM 6.26.4Open verse →
तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।
अर्थ · Hindi
तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।
- RCM 6.26.5Open verse →
राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा।।
अर्थ · Hindi
राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा।।
- RCM 6.26.6Open verse →
पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा।।
अर्थ · Hindi
पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा।।
- RCM 6.26.7Open verse →
बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।
अर्थ · Hindi
बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।
- RCM 6.26.8Open verse →
सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।
अर्थ · Hindi
सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।
- RCM 6.26.9Open verse →
सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।
अर्थ · Hindi
सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।
- RCM 6.26.10Open verse →
कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।
अर्थ · Hindi
कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।
- RCM 6.27.1Open verse →
सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।
अर्थ · Hindi
सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।
- RCM 6.27.2Open verse →
जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।
अर्थ · Hindi
जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।
- RCM 6.27.3Open verse →
मूढ़ बृथा जनि मारसि गाला। राम बयर अस होइहि हाला।।
अर्थ · Hindi
मूढ़ बृथा जनि मारसि गाला। राम बयर अस होइहि हाला।।
- RCM 6.27.4Open verse →
तव सिर निकर कपिन्ह के आगें। परिहहिं धरनि राम सर लागें।।
अर्थ · Hindi
तव सिर निकर कपिन्ह के आगें। परिहहिं धरनि राम सर लागें।।
- RCM 6.27.5Open verse →
ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलहहिं भालु कीस चौगाना।।
अर्थ · Hindi
ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलहहिं भालु कीस चौगाना।।
- RCM 6.27.6Open verse →
जबहिं समर कोपहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक।।
अर्थ · Hindi
जबहिं समर कोपहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक।।
- RCM 6.27.7Open verse →
तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा। अस बिचारि भजु राम उदारा।।
अर्थ · Hindi
तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा। अस बिचारि भजु राम उदारा।।
- RCM 6.27.8Open verse →
सुनत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।
अर्थ · Hindi
सुनत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।
- RCM 6.27.9Open verse →
कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।
अर्थ · Hindi
कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।
- RCM 6.27.10Open verse →
मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।
अर्थ · Hindi
मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।
- RCM 6.28.1Open verse →
सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।
अर्थ · Hindi
सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।
- RCM 6.28.2Open verse →
नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।
अर्थ · Hindi
नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।
- RCM 6.28.3Open verse →
मम भुज सागर बल जल पूरा। जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा।।
अर्थ · Hindi
मम भुज सागर बल जल पूरा। जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा।।
- RCM 6.28.4Open verse →
बीस पयोधि अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइहि पारा।।
अर्थ · Hindi
बीस पयोधि अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइहि पारा।।
- RCM 6.28.5Open verse →
दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा।।
अर्थ · Hindi
दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा।।
- RCM 6.28.6Open verse →
जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा।।
अर्थ · Hindi
जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा।।
- RCM 6.28.7Open verse →
तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।
अर्थ · Hindi
तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।
- RCM 6.28.8Open verse →
हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।
अर्थ · Hindi
हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।
- RCM 6.28.9Open verse →
सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस।
अर्थ · Hindi
सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस।
- RCM 6.28.10Open verse →
हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस।।28।।
अर्थ · Hindi
हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस।।28।।
- RCM 6.29.1Open verse →
जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला। बिधि के लिखे अंक निज भाला।।
अर्थ · Hindi
जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला। बिधि के लिखे अंक निज भाला।।
- RCM 6.29.2Open verse →
नर कें कर आपन बध बाँची। हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची।।
अर्थ · Hindi
नर कें कर आपन बध बाँची। हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची।।
- RCM 6.29.3Open verse →
सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें। लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें।।
अर्थ · Hindi
सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें। लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें।।
- RCM 6.29.4Open verse →
आन बीर बल सठ मम आगें। पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे।।
अर्थ · Hindi
आन बीर बल सठ मम आगें। पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे।।
- RCM 6.29.5Open verse →
कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।
अर्थ · Hindi
कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।
- RCM 6.29.6Open verse →
लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।
अर्थ · Hindi
लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।
- RCM 6.29.7Open verse →
सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही।।
अर्थ · Hindi
सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही।।
- RCM 6.29.8Open verse →
सो भुजबल राखेउ उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली।।
अर्थ · Hindi
सो भुजबल राखेउ उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली।।
- RCM 6.29.9Open verse →
सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा।।
अर्थ · Hindi
सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा।।
- RCM 6.29.10Open verse →
इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा।।
अर्थ · Hindi
इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा।।
- RCM 6.29.11Open verse →
जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।
अर्थ · Hindi
जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।
- RCM 6.29.12Open verse →
ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।
अर्थ · Hindi
ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।
- RCM 6.30.1Open verse →
अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।
अर्थ · Hindi
अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।
- RCM 6.30.2Open verse →
दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।
अर्थ · Hindi
दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।
- RCM 6.30.3Open verse →
बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।
अर्थ · Hindi
बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।
- RCM 6.30.4Open verse →
मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।
अर्थ · Hindi
मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।
- RCM 6.30.5Open verse →
नाहिं त करि मुख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीतहि बरजोरा।।
अर्थ · Hindi
नाहिं त करि मुख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीतहि बरजोरा।।
- RCM 6.30.6Open verse →
जानेउँ तव बल अधम सुरारी। सूनें हरि आनिहि परनारी।।
अर्थ · Hindi
जानेउँ तव बल अधम सुरारी। सूनें हरि आनिहि परनारी।।
- RCM 6.30.7Open verse →
तैं निसिचर पति गर्ब बहूता। मैं रघुपति सेवक कर दूता।।
अर्थ · Hindi
तैं निसिचर पति गर्ब बहूता। मैं रघुपति सेवक कर दूता।।
- RCM 6.30.8Open verse →
जौं न राम अपमानहि डरउँ। तोहि देखत अस कौतुक करऊँ।।
अर्थ · Hindi
जौं न राम अपमानहि डरउँ। तोहि देखत अस कौतुक करऊँ।।
- RCM 6.30.9Open verse →
तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।
अर्थ · Hindi
तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।
- RCM 6.30.10Open verse →
तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।
अर्थ · Hindi
तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।
- RCM 6.31.1Open verse →
जौ अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।।
अर्थ · Hindi
जौ अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।।
- RCM 6.31.2Open verse →
कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।।
अर्थ · Hindi
कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।।
- RCM 6.31.3Open verse →
सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।
अर्थ · Hindi
सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।
- RCM 6.31.4Open verse →
तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।
अर्थ · Hindi
तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।
- RCM 6.31.5Open verse →
अस बिचारि खल बधउँ न तोही। अब जनि रिस उपजावसि मोही।।
अर्थ · Hindi
अस बिचारि खल बधउँ न तोही। अब जनि रिस उपजावसि मोही।।
- RCM 6.31.6Open verse →
सुनि सकोप कह निसिचर नाथा। अधर दसन दसि मीजत हाथा।।
अर्थ · Hindi
सुनि सकोप कह निसिचर नाथा। अधर दसन दसि मीजत हाथा।।
- RCM 6.31.7Open verse →
रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी।।
अर्थ · Hindi
रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी।।
- RCM 6.31.8Open verse →
कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें।।
अर्थ · Hindi
कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें।।
- RCM 6.31.9Open verse →
अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास।
अर्थ · Hindi
अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास।
- RCM 6.31.10Open verse →
सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।।31(क)।।
अर्थ · Hindi
सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।।31(क)।।
- RCM 6.31.11Open verse →
जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक।
अर्थ · Hindi
जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक।
- RCM 6.31.12Open verse →
खाहीं निसाचर दिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक।।31(ख)।।
अर्थ · Hindi
खाहीं निसाचर दिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक।।31(ख)।।
- RCM 6.32.1Open verse →
जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।
अर्थ · Hindi
जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।
- RCM 6.32.2Open verse →
हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।
अर्थ · Hindi
हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।
- RCM 6.32.3Open verse →
कटकटान कपिकुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महि मारी।।
अर्थ · Hindi
कटकटान कपिकुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महि मारी।।
- RCM 6.32.4Open verse →
डोलत धरनि सभासद खसे। चले भाजि भय मारुत ग्रसे।।
अर्थ · Hindi
डोलत धरनि सभासद खसे। चले भाजि भय मारुत ग्रसे।।
- RCM 6.32.5Open verse →
गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।
अर्थ · Hindi
गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।
- RCM 6.32.6Open verse →
कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।
अर्थ · Hindi
कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।
- RCM 6.32.7Open verse →
आवत मुकुट देखि कपि भागे। दिनहीं लूक परन बिधि लागे।।
अर्थ · Hindi
आवत मुकुट देखि कपि भागे। दिनहीं लूक परन बिधि लागे।।
- RCM 6.32.8Open verse →
की रावन करि कोप चलाए। कुलिस चारि आवत अति धाए।।
अर्थ · Hindi
की रावन करि कोप चलाए। कुलिस चारि आवत अति धाए।।
- RCM 6.32.9Open verse →
कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।
अर्थ · Hindi
कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।
- RCM 6.32.10Open verse →
ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।
अर्थ · Hindi
ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।
- RCM 6.32.11Open verse →
तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास।
अर्थ · Hindi
तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास।
- RCM 6.32.12Open verse →
कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास।।32(क)।।
अर्थ · Hindi
कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास।।32(क)।।
- RCM 6.32.13Open verse →
उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।
अर्थ · Hindi
उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।
- RCM 6.32.14Open verse →
धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।
अर्थ · Hindi
धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।
- RCM 6.33.1Open verse →
एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।
अर्थ · Hindi
एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।
- RCM 6.33.2Open verse →
मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।
अर्थ · Hindi
मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।
- RCM 6.33.3Open verse →
पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा। गाल बजावत तोहि न लाजा।।
अर्थ · Hindi
पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा। गाल बजावत तोहि न लाजा।।
- RCM 6.33.4Open verse →
मरु गर काटि निलज कुलघाती। बल बिलोकि बिहरति नहिं छाती।।
अर्थ · Hindi
मरु गर काटि निलज कुलघाती। बल बिलोकि बिहरति नहिं छाती।।
- RCM 6.33.5Open verse →
रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।
अर्थ · Hindi
रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।
- RCM 6.33.6Open verse →
सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।
अर्थ · Hindi
सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।
- RCM 6.33.7Open verse →
याको फलु पावहिगो आगें। बानर भालु चपेटन्हि लागें।।
अर्थ · Hindi
याको फलु पावहिगो आगें। बानर भालु चपेटन्हि लागें।।
- RCM 6.33.8Open verse →
रामु मनुज बोलत असि बानी। गिरहिं न तव रसना अभिमानी।।
अर्थ · Hindi
रामु मनुज बोलत असि बानी। गिरहिं न तव रसना अभिमानी।।
- RCM 6.33.9Open verse →
गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।
अर्थ · Hindi
गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।
- RCM 6.33.10Open verse →
सो नर क्यों दसकंध बालि बध्यो जेहिं एक सर।
अर्थ · Hindi
सो नर क्यों दसकंध बालि बध्यो जेहिं एक सर।
- RCM 6.33.11Open verse →
बीसहुँ लोचन अंध धिग तव जन्म कुजाति जड़।।33(क)।।
अर्थ · Hindi
बीसहुँ लोचन अंध धिग तव जन्म कुजाति जड़।।33(क)।।
- RCM 6.33.12Open verse →
तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।
अर्थ · Hindi
तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।
- RCM 6.33.13Open verse →
तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।
अर्थ · Hindi
तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।
- RCM 6.34.1Open verse →
मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।।
अर्थ · Hindi
मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।।
- RCM 6.34.2Open verse →
असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।
अर्थ · Hindi
असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।
- RCM 6.34.3Open verse →
गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।
अर्थ · Hindi
गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।
- RCM 6.34.4Open verse →
मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।
अर्थ · Hindi
मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।
- RCM 6.34.5Open verse →
जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।
अर्थ · Hindi
जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।
- RCM 6.34.6Open verse →
बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।
अर्थ · Hindi
बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।
- RCM 6.34.7Open verse →
साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।
अर्थ · Hindi
साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।
- RCM 6.34.8Open verse →
समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।
अर्थ · Hindi
समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।
- RCM 6.34.9Open verse →
जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।।
अर्थ · Hindi
जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।।
- RCM 6.34.10Open verse →
सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।
अर्थ · Hindi
सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।
- RCM 6.34.11Open verse →
इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।।
अर्थ · Hindi
इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।।
- RCM 6.34.12Open verse →
झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।
अर्थ · Hindi
झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।
- RCM 6.34.13Open verse →
पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।
अर्थ · Hindi
पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।
- RCM 6.34.14Open verse →
पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।
अर्थ · Hindi
पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।
- RCM 6.34.15Open verse →
कोटिन्ह मेघनाद सम सुभट उठे हरषाइ।
अर्थ · Hindi
कोटिन्ह मेघनाद सम सुभट उठे हरषाइ।
- RCM 6.34.16Open verse →
झपटहिं टरै न कपि चरन पुनि बैठहिं सिर नाइ।।34(क)।।
अर्थ · Hindi
झपटहिं टरै न कपि चरन पुनि बैठहिं सिर नाइ।।34(क)।।
- RCM 6.34.17Open verse →
भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।
अर्थ · Hindi
भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।
- RCM 6.34.18Open verse →
कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।
अर्थ · Hindi
कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।
- RCM 6.35.1Open verse →
कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।
अर्थ · Hindi
कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।
- RCM 6.35.2Open verse →
गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।
अर्थ · Hindi
गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।
- RCM 6.35.3Open verse →
गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।
अर्थ · Hindi
गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।
- RCM 6.35.4Open verse →
भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।
अर्थ · Hindi
भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।
- RCM 6.35.5Open verse →
सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।
अर्थ · Hindi
सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।
- RCM 6.35.6Open verse →
जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।
अर्थ · Hindi
जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।
- RCM 6.35.7Open verse →
उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।
अर्थ · Hindi
उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।
- RCM 6.35.8Open verse →
तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।
अर्थ · Hindi
तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।
- RCM 6.35.9Open verse →
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।
अर्थ · Hindi
पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।
- RCM 6.35.10Open verse →
रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।
अर्थ · Hindi
रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।
- RCM 6.35.11Open verse →
हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई।।
अर्थ · Hindi
हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई।।
- RCM 6.35.12Open verse →
प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा।।
अर्थ · Hindi
प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा।।
- RCM 6.35.13Open verse →
जातुधान अंगद पन देखी। भय ब्याकुल सब भए बिसेषी।।
अर्थ · Hindi
जातुधान अंगद पन देखी। भय ब्याकुल सब भए बिसेषी।।
- RCM 6.35.14Open verse →
रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।
अर्थ · Hindi
रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।
- RCM 6.35.15Open verse →
पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।
अर्थ · Hindi
पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।
- RCM 6.35.16Open verse →
साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।
अर्थ · Hindi
साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।
- RCM 6.35.17Open verse →
मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।
- RCM 6.36.1Open verse →
कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही।।
अर्थ · Hindi
कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही।।
- RCM 6.36.2Open verse →
रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई।।
अर्थ · Hindi
रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई।।
- RCM 6.36.3Open verse →
पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा।।
अर्थ · Hindi
पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा।।
- RCM 6.36.4Open verse →
कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका।।
अर्थ · Hindi
कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका।।
- RCM 6.36.5Open verse →
रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा।।
अर्थ · Hindi
रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा।।
- RCM 6.36.6Open verse →
जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा।।
अर्थ · Hindi
जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा।।
- RCM 6.36.7Open verse →
अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु।।
अर्थ · Hindi
अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु।।
- RCM 6.36.8Open verse →
पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु।।
अर्थ · Hindi
पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु।।
- RCM 6.36.9Open verse →
बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।
अर्थ · Hindi
बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।
- RCM 6.36.10Open verse →
जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।
अर्थ · Hindi
जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।
- RCM 6.36.11Open verse →
भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।
अर्थ · Hindi
भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।
- RCM 6.36.12Open verse →
सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।
अर्थ · Hindi
सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।
- RCM 6.36.13Open verse →
सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी।।
अर्थ · Hindi
सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी।।
- RCM 6.36.14Open verse →
बधि बिराध खर दूषनहि लींलाँ हत्यो कबंध।
अर्थ · Hindi
बधि बिराध खर दूषनहि लींलाँ हत्यो कबंध।
- RCM 6.36.15Open verse →
बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।
अर्थ · Hindi
बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।
- RCM 6.37.1Open verse →
जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला।।
अर्थ · Hindi
जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला।।
- RCM 6.37.2Open verse →
कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू।।
अर्थ · Hindi
कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू।।
- RCM 6.37.3Open verse →
सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा।।
अर्थ · Hindi
सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा।।
- RCM 6.37.4Open verse →
अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके।।
अर्थ · Hindi
अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके।।
- RCM 6.37.5Open verse →
तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।
अर्थ · Hindi
तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।
- RCM 6.37.6Open verse →
अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।
अर्थ · Hindi
अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।
- RCM 6.37.7Open verse →
काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।
अर्थ · Hindi
काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।
- RCM 6.37.8Open verse →
निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।
अर्थ · Hindi
निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।
- RCM 6.37.9Open verse →
दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु।
अर्थ · Hindi
दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु।
- RCM 6.37.10Open verse →
कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु।।37।।
अर्थ · Hindi
कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु।।37।।
- RCM 6.38.1Open verse →
नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।
अर्थ · Hindi
नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।
- RCM 6.38.2Open verse →
बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।
अर्थ · Hindi
बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।
- RCM 6.38.3Open verse →
इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।
अर्थ · Hindi
इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।
- RCM 6.38.4Open verse →
अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।
अर्थ · Hindi
अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।
- RCM 6.38.5Open verse →
बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही।।।
अर्थ · Hindi
बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही।।।
- RCM 6.38.6Open verse →
रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका।।
अर्थ · Hindi
रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका।।
- RCM 6.38.7Open verse →
तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए। कहहु तात कवनी बिधि पाए।।
अर्थ · Hindi
तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए। कहहु तात कवनी बिधि पाए।।
- RCM 6.38.8Open verse →
सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी। मुकुट न होहिं भूप गुन चारी।।
अर्थ · Hindi
सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी। मुकुट न होहिं भूप गुन चारी।।
- RCM 6.38.9Open verse →
साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।
अर्थ · Hindi
साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।
- RCM 6.38.10Open verse →
नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।
अर्थ · Hindi
नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।
- RCM 6.38.11Open verse →
धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस।
अर्थ · Hindi
धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस।
- RCM 6.38.12Open verse →
तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस।।38(((क)।।
अर्थ · Hindi
तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस।।38(((क)।।
- RCM 6.38.13Open verse →
परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार।
अर्थ · Hindi
परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार।
- RCM 6.38.14Open verse →
समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार।।38(ख)।।
अर्थ · Hindi
समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार।।38(ख)।।
- RCM 6.39.1Open verse →
रिपु के समाचार जब पाए। राम सचिव सब निकट बोलाए।।
अर्थ · Hindi
रिपु के समाचार जब पाए। राम सचिव सब निकट बोलाए।।
- RCM 6.39.2Open verse →
लंका बाँके चारि दुआरा। केहि बिधि लागिअ करहु बिचारा।।
अर्थ · Hindi
लंका बाँके चारि दुआरा। केहि बिधि लागिअ करहु बिचारा।।
- RCM 6.39.3Open verse →
तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन।।
अर्थ · Hindi
तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन।।
- RCM 6.39.4Open verse →
करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा।।
अर्थ · Hindi
करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा।।
- RCM 6.39.5Open verse →
जथाजोग सेनापति कीन्हे। जूथप सकल बोलि तब लीन्हे।।
अर्थ · Hindi
जथाजोग सेनापति कीन्हे। जूथप सकल बोलि तब लीन्हे।।
- RCM 6.39.6Open verse →
प्रभु प्रताप कहि सब समुझाए। सुनि कपि सिंघनाद करि धाए।।
अर्थ · Hindi
प्रभु प्रताप कहि सब समुझाए। सुनि कपि सिंघनाद करि धाए।।
- RCM 6.39.7Open verse →
हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।
अर्थ · Hindi
हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।
- RCM 6.39.8Open verse →
गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।
अर्थ · Hindi
गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।
- RCM 6.39.9Open verse →
जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।
अर्थ · Hindi
जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।
- RCM 6.39.10Open verse →
घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।
अर्थ · Hindi
घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।
- RCM 6.39.11Open verse →
जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।
अर्थ · Hindi
जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।
- RCM 6.39.12Open verse →
गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।
अर्थ · Hindi
गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।
- RCM 6.40.1Open verse →
लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी।।
अर्थ · Hindi
लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी।।
- RCM 6.40.2Open verse →
देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई।।
अर्थ · Hindi
देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई।।
- RCM 6.40.3Open verse →
आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे।।
अर्थ · Hindi
आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे।।
- RCM 6.40.4Open verse →
अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा।।
अर्थ · Hindi
अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा।।
- RCM 6.40.5Open verse →
सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू।।
अर्थ · Hindi
सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू।।
- RCM 6.40.6Open verse →
उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना।।
अर्थ · Hindi
उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना।।
- RCM 6.40.7Open verse →
चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।
अर्थ · Hindi
चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।
- RCM 6.40.8Open verse →
तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।
अर्थ · Hindi
तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।
- RCM 6.40.9Open verse →
जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।
अर्थ · Hindi
जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।
- RCM 6.40.10Open verse →
चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।
अर्थ · Hindi
चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।
- RCM 6.40.11Open verse →
नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।
अर्थ · Hindi
नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।
- RCM 6.40.12Open verse →
कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।
अर्थ · Hindi
कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।
- RCM 6.41.1Open verse →
कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे। मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे।।
अर्थ · Hindi
कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे। मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे।।
- RCM 6.41.2Open verse →
बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ। सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ।।
अर्थ · Hindi
बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ। सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ।।
- RCM 6.41.3Open verse →
बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा।।
अर्थ · Hindi
बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा।।
- RCM 6.41.4Open verse →
देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा।।
अर्थ · Hindi
देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा।।
- RCM 6.41.5Open verse →
धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।
अर्थ · Hindi
धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।
- RCM 6.41.6Open verse →
कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।
अर्थ · Hindi
कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।
- RCM 6.41.7Open verse →
उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई।।
अर्थ · Hindi
उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई।।
- RCM 6.41.8Open verse →
निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं।।
अर्थ · Hindi
निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं।।
- RCM 6.42.1Open verse →
राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।
अर्थ · Hindi
राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।
- RCM 6.42.2Open verse →
चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।
अर्थ · Hindi
चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।
- RCM 6.42.3Open verse →
चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।
अर्थ · Hindi
चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।
- RCM 6.42.4Open verse →
हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।
अर्थ · Hindi
हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।
- RCM 6.42.5Open verse →
सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी।।
अर्थ · Hindi
सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी।।
- RCM 6.42.6Open verse →
निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना।।
अर्थ · Hindi
निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना।।
- RCM 6.42.7Open verse →
जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।
अर्थ · Hindi
जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।
- RCM 6.42.8Open verse →
सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।
अर्थ · Hindi
सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।
- RCM 6.42.9Open verse →
उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।
अर्थ · Hindi
उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।
- RCM 6.42.10Open verse →
सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।
अर्थ · Hindi
सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।
- RCM 6.42.11Open verse →
बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।
अर्थ · Hindi
बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।
- RCM 6.42.12Open verse →
ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।
अर्थ · Hindi
ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।
- RCM 6.43.1Open verse →
भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।।
अर्थ · Hindi
भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।।
- RCM 6.43.2Open verse →
कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।।
अर्थ · Hindi
कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।।
- RCM 6.43.3Open verse →
निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।।
अर्थ · Hindi
निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।।
- RCM 6.43.4Open verse →
मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।।
अर्थ · Hindi
मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।।
- RCM 6.43.5Open verse →
पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।।
अर्थ · Hindi
पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।।
- RCM 6.43.6Open verse →
कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।।
अर्थ · Hindi
कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।।
- RCM 6.43.7Open verse →
भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।।
अर्थ · Hindi
भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।।
- RCM 6.43.8Open verse →
दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।
अर्थ · Hindi
दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।
- RCM 6.43.9Open verse →
अंगद सुना पवनसुत गढ़ पर गयउ अकेल।
अर्थ · Hindi
अंगद सुना पवनसुत गढ़ पर गयउ अकेल।
- RCM 6.43.10Open verse →
रन बाँकुरा बालिसुत तरकि चढ़ेउ कपि खेल।।43।।
अर्थ · Hindi
रन बाँकुरा बालिसुत तरकि चढ़ेउ कपि खेल।।43।।
- RCM 6.44.1Open verse →
जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।।
अर्थ · Hindi
जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।।
- RCM 6.44.2Open verse →
रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।
अर्थ · Hindi
रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।
- RCM 6.44.3Open verse →
कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।
अर्थ · Hindi
कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।
- RCM 6.44.4Open verse →
नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।
अर्थ · Hindi
नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।
- RCM 6.44.5Open verse →
कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।।
अर्थ · Hindi
कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।।
- RCM 6.44.6Open verse →
पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।
अर्थ · Hindi
पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।
- RCM 6.44.7Open verse →
गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।।
अर्थ · Hindi
गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।।
- RCM 6.44.8Open verse →
काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।
अर्थ · Hindi
काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।
- RCM 6.44.9Open verse →
एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड।
अर्थ · Hindi
एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड।
- RCM 6.44.10Open verse →
रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।।
अर्थ · Hindi
रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।।
- RCM 6.45.1Open verse →
महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।
अर्थ · Hindi
महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।
- RCM 6.45.2Open verse →
कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।
अर्थ · Hindi
कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।
- RCM 6.45.3Open verse →
खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।
अर्थ · Hindi
खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।
- RCM 6.45.4Open verse →
उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।
अर्थ · Hindi
उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।
- RCM 6.45.5Open verse →
देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।
अर्थ · Hindi
देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।
- RCM 6.45.6Open verse →
अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।
अर्थ · Hindi
अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।
- RCM 6.45.7Open verse →
अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।।
अर्थ · Hindi
अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।।
- RCM 6.45.8Open verse →
लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।
अर्थ · Hindi
लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।
- RCM 6.45.9Open verse →
भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत।
अर्थ · Hindi
भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत।
- RCM 6.45.10Open verse →
कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत।।45।।
अर्थ · Hindi
कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत।।45।।
- RCM 6.46.1Open verse →
प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए।।
अर्थ · Hindi
प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए।।
- RCM 6.46.2Open verse →
राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे।।
अर्थ · Hindi
राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे।।
- RCM 6.46.3Open verse →
गए जानि अंगद हनुमाना। फिरे भालु मर्कट भट नाना।।
अर्थ · Hindi
गए जानि अंगद हनुमाना। फिरे भालु मर्कट भट नाना।।
- RCM 6.46.4Open verse →
जातुधान प्रदोष बल पाई। धाए करि दससीस दोहाई।।
अर्थ · Hindi
जातुधान प्रदोष बल पाई। धाए करि दससीस दोहाई।।
- RCM 6.46.5Open verse →
निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।
अर्थ · Hindi
निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।
- RCM 6.46.6Open verse →
द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।
अर्थ · Hindi
द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।
- RCM 6.46.7Open verse →
महाबीर निसिचर सब कारे। नाना बरन बलीमुख भारे।।
अर्थ · Hindi
महाबीर निसिचर सब कारे। नाना बरन बलीमुख भारे।।
- RCM 6.46.8Open verse →
सबल जुगल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत करि क्रोधा।।
अर्थ · Hindi
सबल जुगल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत करि क्रोधा।।
- RCM 6.46.9Open verse →
प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।
अर्थ · Hindi
प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।
- RCM 6.46.10Open verse →
अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।
अर्थ · Hindi
अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।
- RCM 6.46.11Open verse →
भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।
अर्थ · Hindi
भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।
- RCM 6.46.12Open verse →
देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार।
अर्थ · Hindi
देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार।
- RCM 6.46.13Open verse →
एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार।।46।।
अर्थ · Hindi
एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार।।46।।
- RCM 6.47.1Open verse →
सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।।
अर्थ · Hindi
सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।।
- RCM 6.47.2Open verse →
समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।।
अर्थ · Hindi
समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।।
- RCM 6.47.3Open verse →
पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।।
अर्थ · Hindi
पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।।
- RCM 6.47.4Open verse →
भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।।
अर्थ · Hindi
भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।।
- RCM 6.47.5Open verse →
भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।।
अर्थ · Hindi
भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।।
- RCM 6.47.6Open verse →
हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।
अर्थ · Hindi
हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।
- RCM 6.47.7Open verse →
भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।।
अर्थ · Hindi
भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।।
- RCM 6.47.8Open verse →
गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।
अर्थ · Hindi
गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।
- RCM 6.47.9Open verse →
कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।
अर्थ · Hindi
कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।
- RCM 6.47.10Open verse →
गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।
अर्थ · Hindi
गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।
- RCM 6.48.1Open verse →
निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।
अर्थ · Hindi
निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।
- RCM 6.48.2Open verse →
राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।
अर्थ · Hindi
राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।
- RCM 6.48.3Open verse →
उहाँ दसानन सचिव हँकारे। सब सन कहेसि सुभट जे मारे।।
अर्थ · Hindi
उहाँ दसानन सचिव हँकारे। सब सन कहेसि सुभट जे मारे।।
- RCM 6.48.4Open verse →
आधा कटकु कपिन्ह संघारा। कहहु बेगि का करिअ बिचारा।।
अर्थ · Hindi
आधा कटकु कपिन्ह संघारा। कहहु बेगि का करिअ बिचारा।।
- RCM 6.48.5Open verse →
माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर।।
अर्थ · Hindi
माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर।।
- RCM 6.48.6Open verse →
बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन।।
अर्थ · Hindi
बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन।।
- RCM 6.48.7Open verse →
जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी।।
अर्थ · Hindi
जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी।।
- RCM 6.48.8Open verse →
बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो।।
अर्थ · Hindi
बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो।।
- RCM 6.48.9Open verse →
हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।
अर्थ · Hindi
हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।
- RCM 6.48.10Open verse →
जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।
अर्थ · Hindi
जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।
- RCM 6.48.11Open verse →
कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।
अर्थ · Hindi
कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।
- RCM 6.48.12Open verse →
सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।
अर्थ · Hindi
सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।
- RCM 6.49.1Open verse →
परिहरि बयरु देहु बैदेही। भजहु कृपानिधि परम सनेही।।
अर्थ · Hindi
परिहरि बयरु देहु बैदेही। भजहु कृपानिधि परम सनेही।।
- RCM 6.49.2Open verse →
ताके बचन बान सम लागे। करिआ मुह करि जाहि अभागे।।
अर्थ · Hindi
ताके बचन बान सम लागे। करिआ मुह करि जाहि अभागे।।
- RCM 6.49.3Open verse →
बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।
अर्थ · Hindi
बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।
- RCM 6.49.4Open verse →
तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।
अर्थ · Hindi
तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।
- RCM 6.49.5Open verse →
सो उठि गयउ कहत दुर्बादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।।
अर्थ · Hindi
सो उठि गयउ कहत दुर्बादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।।
- RCM 6.49.6Open verse →
कौतुक प्रात देखिअहु मोरा। करिहउँ बहुत कहौं का थोरा।।
अर्थ · Hindi
कौतुक प्रात देखिअहु मोरा। करिहउँ बहुत कहौं का थोरा।।
- RCM 6.49.7Open verse →
सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।
अर्थ · Hindi
सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।
- RCM 6.49.8Open verse →
करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।
अर्थ · Hindi
करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।
- RCM 6.49.9Open verse →
कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।।
अर्थ · Hindi
कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।।
- RCM 6.49.10Open verse →
बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए।।
अर्थ · Hindi
बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए।।
- RCM 6.50.1Open verse →
कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।।
अर्थ · Hindi
कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।।
- RCM 6.50.2Open verse →
कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।
अर्थ · Hindi
कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।
- RCM 6.50.3Open verse →
कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।।
अर्थ · Hindi
कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।।
- RCM 6.50.4Open verse →
अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।
अर्थ · Hindi
अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।
- RCM 6.50.5Open verse →
सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।
अर्थ · Hindi
सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।
- RCM 6.50.6Open verse →
जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।
अर्थ · Hindi
जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।
- RCM 6.50.7Open verse →
जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।।
अर्थ · Hindi
जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।।
- RCM 6.50.8Open verse →
सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।
अर्थ · Hindi
सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।
- RCM 6.50.9Open verse →
दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर।
अर्थ · Hindi
दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर।
- RCM 6.50.10Open verse →
सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।
अर्थ · Hindi
सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।
- RCM 6.51.1Open verse →
देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला।।
अर्थ · Hindi
देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला।।
- RCM 6.51.2Open verse →
महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा।।
अर्थ · Hindi
महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा।।
- RCM 6.51.3Open verse →
आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई।।
अर्थ · Hindi
आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई।।
- RCM 6.51.4Open verse →
बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना।।
अर्थ · Hindi
बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना।।
- RCM 6.51.5Open verse →
रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा।।
अर्थ · Hindi
रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा।।
- RCM 6.51.6Open verse →
अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे।।
अर्थ · Hindi
अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे।।
- RCM 6.51.7Open verse →
देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना।।
अर्थ · Hindi
देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना।।
- RCM 6.51.8Open verse →
जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला।।
अर्थ · Hindi
जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला।।
- RCM 6.51.9Open verse →
जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।
अर्थ · Hindi
जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।
- RCM 6.51.10Open verse →
ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।
अर्थ · Hindi
ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।
- RCM 6.52.1Open verse →
नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।
अर्थ · Hindi
नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।
- RCM 6.52.2Open verse →
नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।
अर्थ · Hindi
नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।
- RCM 6.52.3Open verse →
बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।
अर्थ · Hindi
बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।
- RCM 6.52.4Open verse →
बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।
अर्थ · Hindi
बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।
- RCM 6.52.5Open verse →
कपि अकुलाने माया देखें। सब कर मरन बना एहि लेखें।।
अर्थ · Hindi
कपि अकुलाने माया देखें। सब कर मरन बना एहि लेखें।।
- RCM 6.52.6Open verse →
कौतुक देखि राम मुसुकाने। भए सभीत सकल कपि जाने।।
अर्थ · Hindi
कौतुक देखि राम मुसुकाने। भए सभीत सकल कपि जाने।।
- RCM 6.52.7Open verse →
एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया।।
अर्थ · Hindi
एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया।।
- RCM 6.52.8Open verse →
कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके।।
अर्थ · Hindi
कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके।।
- RCM 6.52.9Open verse →
आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।
अर्थ · Hindi
आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।
- RCM 6.52.10Open verse →
लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।
अर्थ · Hindi
लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।
- RCM 6.53.1Open verse →
छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला।।
अर्थ · Hindi
छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला।।
- RCM 6.53.2Open verse →
इहाँ दसानन सुभट पठाए। नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए।।
अर्थ · Hindi
इहाँ दसानन सुभट पठाए। नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए।।
- RCM 6.53.3Open verse →
भूधर नख बिटपायुध धारी। धाए कपि जय राम पुकारी।।
अर्थ · Hindi
भूधर नख बिटपायुध धारी। धाए कपि जय राम पुकारी।।
- RCM 6.53.4Open verse →
भिरे सकल जोरिहि सन जोरी। इत उत जय इच्छा नहिं थोरी।।
अर्थ · Hindi
भिरे सकल जोरिहि सन जोरी। इत उत जय इच्छा नहिं थोरी।।
- RCM 6.53.5Open verse →
मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं। कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं।।
अर्थ · Hindi
मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं। कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं।।
- RCM 6.53.6Open verse →
मारु मारु धरु धरु धरु मारू। सीस तोरि गहि भुजा उपारू।।
अर्थ · Hindi
मारु मारु धरु धरु धरु मारू। सीस तोरि गहि भुजा उपारू।।
- RCM 6.53.7Open verse →
असि रव पूरि रही नव खंडा। धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा।।
अर्थ · Hindi
असि रव पूरि रही नव खंडा। धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा।।
- RCM 6.53.8Open verse →
देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा। कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा।।
अर्थ · Hindi
देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा। कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा।।
- RCM 6.53.9Open verse →
रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।
अर्थ · Hindi
रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।
- RCM 6.53.10Open verse →
जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।
अर्थ · Hindi
जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।
- RCM 6.54.1Open verse →
घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।।
अर्थ · Hindi
घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।।
- RCM 6.54.2Open verse →
लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।।
अर्थ · Hindi
लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।।
- RCM 6.54.3Open verse →
एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।
अर्थ · Hindi
एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।
- RCM 6.54.4Open verse →
क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।
अर्थ · Hindi
क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।
- RCM 6.54.5Open verse →
नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।
अर्थ · Hindi
नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।
- RCM 6.54.6Open verse →
रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।
अर्थ · Hindi
रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।
- RCM 6.54.7Open verse →
बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।।
अर्थ · Hindi
बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।।
- RCM 6.54.8Open verse →
मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।
अर्थ · Hindi
मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।
- RCM 6.54.9Open verse →
मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।
अर्थ · Hindi
मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।
- RCM 6.54.10Open verse →
जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।
अर्थ · Hindi
जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।
- RCM 6.55.1Open verse →
सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।
अर्थ · Hindi
सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।
- RCM 6.55.2Open verse →
सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।
अर्थ · Hindi
सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।
- RCM 6.55.3Open verse →
यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।
अर्थ · Hindi
यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।
- RCM 6.55.4Open verse →
संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।
अर्थ · Hindi
संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।
- RCM 6.55.5Open verse →
ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।
अर्थ · Hindi
ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।
- RCM 6.55.6Open verse →
तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।
अर्थ · Hindi
तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।
- RCM 6.55.7Open verse →
जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।।
अर्थ · Hindi
जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।।
- RCM 6.55.8Open verse →
धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।
अर्थ · Hindi
धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।
- RCM 6.55.9Open verse →
राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।
अर्थ · Hindi
राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।
- RCM 6.55.10Open verse →
कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।
अर्थ · Hindi
कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।
- RCM 6.56.1Open verse →
राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।
अर्थ · Hindi
राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।
- RCM 6.56.2Open verse →
उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।
अर्थ · Hindi
उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।
- RCM 6.56.3Open verse →
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।
अर्थ · Hindi
दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।
- RCM 6.56.4Open verse →
देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।
अर्थ · Hindi
देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।
- RCM 6.56.5Open verse →
भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।
अर्थ · Hindi
भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।
- RCM 6.56.6Open verse →
नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।
अर्थ · Hindi
नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।
- RCM 6.56.7Open verse →
मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।
अर्थ · Hindi
मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।
- RCM 6.56.8Open verse →
काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।
अर्थ · Hindi
काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।
- RCM 6.56.9Open verse →
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।
अर्थ · Hindi
सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।
- RCM 6.56.10Open verse →
राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।
अर्थ · Hindi
राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।
- RCM 6.57.1Open verse →
अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।
अर्थ · Hindi
अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।
- RCM 6.57.2Open verse →
मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।
अर्थ · Hindi
मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।
- RCM 6.57.3Open verse →
राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा।।
अर्थ · Hindi
राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा।।
- RCM 6.57.4Open verse →
जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा।।
अर्थ · Hindi
जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा।।
- RCM 6.57.5Open verse →
होत महा रन रावन रामहिं। जितहहिं राम न संसय या महिं।।
अर्थ · Hindi
होत महा रन रावन रामहिं। जितहहिं राम न संसय या महिं।।
- RCM 6.57.6Open verse →
इहाँ भएँ मैं देखेउँ भाई। ग्यान दृष्टि बल मोहि अधिकाई।।
अर्थ · Hindi
इहाँ भएँ मैं देखेउँ भाई। ग्यान दृष्टि बल मोहि अधिकाई।।
- RCM 6.57.7Open verse →
मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।
अर्थ · Hindi
मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।
- RCM 6.57.8Open verse →
सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।
अर्थ · Hindi
सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।
- RCM 6.57.9Open verse →
सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान।
अर्थ · Hindi
सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान।
- RCM 6.57.10Open verse →
मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान।।57।।
अर्थ · Hindi
मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान।।57।।
- RCM 6.58.1Open verse →
कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।।
अर्थ · Hindi
कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।।
- RCM 6.58.2Open verse →
मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।।
अर्थ · Hindi
मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।।
- RCM 6.58.3Open verse →
अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।।
अर्थ · Hindi
अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।।
- RCM 6.58.4Open verse →
कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।।
अर्थ · Hindi
कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।।
- RCM 6.58.5Open verse →
सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।।
अर्थ · Hindi
सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।।
- RCM 6.58.6Open verse →
राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।।
अर्थ · Hindi
राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।।
- RCM 6.58.7Open verse →
देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।
अर्थ · Hindi
देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।
- RCM 6.58.8Open verse →
गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।
अर्थ · Hindi
गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।
- RCM 6.58.9Open verse →
देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।
अर्थ · Hindi
देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।
- RCM 6.58.10Open verse →
बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।
अर्थ · Hindi
बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।
- RCM 6.59.1Open verse →
परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।
अर्थ · Hindi
परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।
- RCM 6.59.2Open verse →
सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।
अर्थ · Hindi
सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।
- RCM 6.59.3Open verse →
बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।
अर्थ · Hindi
बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।
- RCM 6.59.4Open verse →
मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।
अर्थ · Hindi
मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।
- RCM 6.59.5Open verse →
जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।
अर्थ · Hindi
जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।
- RCM 6.59.6Open verse →
जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।
अर्थ · Hindi
जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।
- RCM 6.59.7Open verse →
तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।
अर्थ · Hindi
तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।
- RCM 6.59.8Open verse →
सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।
अर्थ · Hindi
सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।
- RCM 6.59.9Open verse →
लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।
अर्थ · Hindi
लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।
- RCM 6.59.10Open verse →
प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।
अर्थ · Hindi
प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।
- RCM 6.60.1Open verse →
तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।
अर्थ · Hindi
तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।
- RCM 6.60.2Open verse →
कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।
अर्थ · Hindi
कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।
- RCM 6.60.3Open verse →
अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।
अर्थ · Hindi
अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।
- RCM 6.60.4Open verse →
जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।
अर्थ · Hindi
जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।
- RCM 6.60.5Open verse →
तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।
अर्थ · Hindi
तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।
- RCM 6.60.6Open verse →
चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।
अर्थ · Hindi
चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।
- RCM 6.60.7Open verse →
सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।
अर्थ · Hindi
सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।
- RCM 6.60.8Open verse →
राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।
अर्थ · Hindi
राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।
- RCM 6.60.9Open verse →
तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत।
अर्थ · Hindi
तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत।
- RCM 6.60.10Open verse →
अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत।।60(क)।।
अर्थ · Hindi
अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत।।60(क)।।
- RCM 6.60.11Open verse →
भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।
अर्थ · Hindi
भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।
- RCM 6.60.12Open verse →
मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार।।60(ख)।।
अर्थ · Hindi
मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार।।60(ख)।।
- RCM 6.61.1Open verse →
उहाँ राम लछिमनहिं निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।
अर्थ · Hindi
उहाँ राम लछिमनहिं निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।
- RCM 6.61.2Open verse →
अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायउ।।
अर्थ · Hindi
अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायउ।।
- RCM 6.61.3Open verse →
सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।
अर्थ · Hindi
सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।
- RCM 6.61.4Open verse →
मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।
अर्थ · Hindi
मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।
- RCM 6.61.5Open verse →
सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।
अर्थ · Hindi
सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।
- RCM 6.61.6Open verse →
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।
अर्थ · Hindi
जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।
- RCM 6.61.7Open verse →
सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।
अर्थ · Hindi
सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।
- RCM 6.61.8Open verse →
अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।
अर्थ · Hindi
अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।
- RCM 6.61.9Open verse →
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।।
अर्थ · Hindi
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।।
- RCM 6.61.10Open verse →
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।
अर्थ · Hindi
अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।
- RCM 6.61.11Open verse →
जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
अर्थ · Hindi
जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
- RCM 6.61.12Open verse →
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
अर्थ · Hindi
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
- RCM 6.61.13Open verse →
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।
अर्थ · Hindi
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।
- RCM 6.61.14Open verse →
निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।
अर्थ · Hindi
निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।
- RCM 6.61.15Open verse →
सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।
अर्थ · Hindi
सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।
- RCM 6.61.16Open verse →
उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।
अर्थ · Hindi
उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।
- RCM 6.61.17Open verse →
बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।
अर्थ · Hindi
बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।
- RCM 6.61.18Open verse →
उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।
अर्थ · Hindi
उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।
- RCM 6.61.19Open verse →
प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।
अर्थ · Hindi
प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।
- RCM 6.61.20Open verse →
आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।61।।
अर्थ · Hindi
आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।61।।
- RCM 6.62.1Open verse →
हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।
अर्थ · Hindi
हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।
- RCM 6.62.2Open verse →
तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।
अर्थ · Hindi
तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।
- RCM 6.62.3Open verse →
हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।
अर्थ · Hindi
हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।
- RCM 6.62.4Open verse →
कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।
अर्थ · Hindi
कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।
- RCM 6.62.5Open verse →
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।
अर्थ · Hindi
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।
- RCM 6.62.6Open verse →
ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।
अर्थ · Hindi
ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।
- RCM 6.62.7Open verse →
जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।
अर्थ · Hindi
जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।
- RCM 6.62.8Open verse →
कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।
अर्थ · Hindi
कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।
- RCM 6.62.9Open verse →
कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी।।
अर्थ · Hindi
कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी।।
- RCM 6.62.10Open verse →
तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महामहा जोधा संघारे।।
अर्थ · Hindi
तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महामहा जोधा संघारे।।
- RCM 6.62.11Open verse →
दुर्मुख सुररिपु मनुज अहारी। भट अतिकाय अकंपन भारी।।
अर्थ · Hindi
दुर्मुख सुररिपु मनुज अहारी। भट अतिकाय अकंपन भारी।।
- RCM 6.62.12Open verse →
अपर महोदर आदिक बीरा। परे समर महि सब रनधीरा।।
अर्थ · Hindi
अपर महोदर आदिक बीरा। परे समर महि सब रनधीरा।।
- RCM 6.62.13Open verse →
सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।
अर्थ · Hindi
सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।
- RCM 6.62.14Open verse →
जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।
अर्थ · Hindi
जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।
- RCM 6.63.1Open verse →
भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा।।
अर्थ · Hindi
भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा।।
- RCM 6.63.2Open verse →
अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना।।
अर्थ · Hindi
अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना।।
- RCM 6.63.3Open verse →
हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।
अर्थ · Hindi
हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।
- RCM 6.63.4Open verse →
अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।
अर्थ · Hindi
अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।
- RCM 6.63.5Open verse →
कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।
अर्थ · Hindi
कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।
- RCM 6.63.6Open verse →
नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।
अर्थ · Hindi
नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।
- RCM 6.63.7Open verse →
अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सूफल करौ मैं जाई।।
अर्थ · Hindi
अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सूफल करौ मैं जाई।।
- RCM 6.63.8Open verse →
स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन।।
अर्थ · Hindi
स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन।।
- RCM 6.63.9Open verse →
राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।
अर्थ · Hindi
राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।
- RCM 6.63.10Open verse →
रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।
अर्थ · Hindi
रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।
- RCM 6.64.1Open verse →
महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।।
अर्थ · Hindi
महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।।
- RCM 6.64.2Open verse →
कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।।
अर्थ · Hindi
कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।।
- RCM 6.64.3Open verse →
देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।
अर्थ · Hindi
देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।
- RCM 6.64.4Open verse →
अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।
अर्थ · Hindi
अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।
- RCM 6.64.5Open verse →
तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।
अर्थ · Hindi
तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।
- RCM 6.64.6Open verse →
तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।
अर्थ · Hindi
तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।
- RCM 6.64.7Open verse →
सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।।
अर्थ · Hindi
सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।।
- RCM 6.64.8Open verse →
धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।।
अर्थ · Hindi
धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।।
- RCM 6.64.9Open verse →
बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।
अर्थ · Hindi
बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।
- RCM 6.64.10Open verse →
बचन कर्म मन कपट तजि भजेहु राम रनधीर।
अर्थ · Hindi
बचन कर्म मन कपट तजि भजेहु राम रनधीर।
- RCM 6.64.11Open verse →
जाहु न निज पर सूझ मोहि भयउँ कालबस बीर। 64।।
अर्थ · Hindi
जाहु न निज पर सूझ मोहि भयउँ कालबस बीर। 64।।
- RCM 6.65.1Open verse →
बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।
अर्थ · Hindi
बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।
- RCM 6.65.2Open verse →
नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।
अर्थ · Hindi
नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।
- RCM 6.65.3Open verse →
एतना कपिन्ह सुना जब काना। किलकिलाइ धाए बलवाना।।
अर्थ · Hindi
एतना कपिन्ह सुना जब काना। किलकिलाइ धाए बलवाना।।
- RCM 6.65.4Open verse →
लिए उठाइ बिटप अरु भूधर। कटकटाइ डारहिं ता ऊपर।।
अर्थ · Hindi
लिए उठाइ बिटप अरु भूधर। कटकटाइ डारहिं ता ऊपर।।
- RCM 6.65.5Open verse →
कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा। करहिं भालु कपि एक एक बारा।।
अर्थ · Hindi
कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा। करहिं भालु कपि एक एक बारा।।
- RCM 6.65.6Open verse →
मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो।।
अर्थ · Hindi
मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो।।
- RCM 6.65.7Open verse →
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।
अर्थ · Hindi
तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।
- RCM 6.65.8Open verse →
पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।
अर्थ · Hindi
पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।
- RCM 6.65.9Open verse →
पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि।।
अर्थ · Hindi
पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि।।
- RCM 6.65.10Open verse →
चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई।।
अर्थ · Hindi
चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई।।
- RCM 6.65.11Open verse →
अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।
अर्थ · Hindi
अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।
- RCM 6.65.12Open verse →
काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।
अर्थ · Hindi
काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।
- RCM 6.66.1Open verse →
उमा करत रघुपति नरलीला। खेलत गरुड़ जिमि अहिगन मीला।।
अर्थ · Hindi
उमा करत रघुपति नरलीला। खेलत गरुड़ जिमि अहिगन मीला।।
- RCM 6.66.2Open verse →
भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई।।
अर्थ · Hindi
भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई।।
- RCM 6.66.3Open verse →
जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।
अर्थ · Hindi
जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।
- RCM 6.66.4Open verse →
मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।
अर्थ · Hindi
मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।
- RCM 6.66.5Open verse →
सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।
अर्थ · Hindi
सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।
- RCM 6.66.6Open verse →
काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।
अर्थ · Hindi
काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।
- RCM 6.66.7Open verse →
गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।
अर्थ · Hindi
गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।
- RCM 6.66.8Open verse →
पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।
अर्थ · Hindi
पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।
- RCM 6.66.9Open verse →
नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।
अर्थ · Hindi
नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।
- RCM 6.66.10Open verse →
सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।
अर्थ · Hindi
सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।
- RCM 6.66.11Open verse →
जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।
अर्थ · Hindi
जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।
- RCM 6.66.12Open verse →
एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।
अर्थ · Hindi
एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।
- RCM 6.67.1Open verse →
कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।
अर्थ · Hindi
कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।
- RCM 6.67.2Open verse →
कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।
अर्थ · Hindi
कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।
- RCM 6.67.3Open verse →
कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।
अर्थ · Hindi
कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।
- RCM 6.67.4Open verse →
मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।
अर्थ · Hindi
मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।
- RCM 6.67.5Open verse →
रन मद मत्त निसाचर दर्पा। बिस्व ग्रसिहि जनु एहि बिधि अर्पा।।
अर्थ · Hindi
रन मद मत्त निसाचर दर्पा। बिस्व ग्रसिहि जनु एहि बिधि अर्पा।।
- RCM 6.67.6Open verse →
मुरे सुभट सब फिरहिं न फेरे। सूझ न नयन सुनहिं नहिं टेरे।।
अर्थ · Hindi
मुरे सुभट सब फिरहिं न फेरे। सूझ न नयन सुनहिं नहिं टेरे।।
- RCM 6.67.7Open verse →
कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी।।
अर्थ · Hindi
कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी।।
- RCM 6.67.8Open verse →
देखि राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई।।
अर्थ · Hindi
देखि राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई।।
- RCM 6.67.9Open verse →
सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।
अर्थ · Hindi
सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।
- RCM 6.67.10Open verse →
मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।
अर्थ · Hindi
मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।
- RCM 6.68.1Open verse →
कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा।।
अर्थ · Hindi
कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा।।
- RCM 6.68.2Open verse →
प्रथम कीन्ह प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा।।
अर्थ · Hindi
प्रथम कीन्ह प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा।।
- RCM 6.68.3Open verse →
सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।
अर्थ · Hindi
सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।
- RCM 6.68.4Open verse →
जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।
अर्थ · Hindi
जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।
- RCM 6.68.5Open verse →
कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।
अर्थ · Hindi
कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।
- RCM 6.68.6Open verse →
घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।
अर्थ · Hindi
घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।
- RCM 6.68.7Open verse →
लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।
अर्थ · Hindi
लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।
- RCM 6.68.8Open verse →
रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।
अर्थ · Hindi
रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।
- RCM 6.68.9Open verse →
छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच।
अर्थ · Hindi
छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच।
- RCM 6.68.10Open verse →
पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच।।68।।
अर्थ · Hindi
पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच।।68।।
- RCM 6.69.1Open verse →
कुंभकरन मन दीख बिचारी। हति धन माझ निसाचर धारी।।
अर्थ · Hindi
कुंभकरन मन दीख बिचारी। हति धन माझ निसाचर धारी।।
- RCM 6.69.2Open verse →
भा अति क्रुद्ध महाबल बीरा। कियो मृगनायक नाद गँभीरा।।
अर्थ · Hindi
भा अति क्रुद्ध महाबल बीरा। कियो मृगनायक नाद गँभीरा।।
- RCM 6.69.3Open verse →
कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।
अर्थ · Hindi
कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।
- RCM 6.69.4Open verse →
आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।
अर्थ · Hindi
आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।
- RCM 6.69.5Open verse →
पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।
अर्थ · Hindi
पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।
- RCM 6.69.6Open verse →
तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।
अर्थ · Hindi
तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।
- RCM 6.69.7Open verse →
सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।
अर्थ · Hindi
सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।
- RCM 6.69.8Open verse →
बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।
अर्थ · Hindi
बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।
- RCM 6.69.9Open verse →
महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।
अर्थ · Hindi
महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।
- RCM 6.69.10Open verse →
महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।
अर्थ · Hindi
महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।
- RCM 6.70.1Open verse →
भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।
अर्थ · Hindi
भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।
- RCM 6.70.2Open verse →
चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।
अर्थ · Hindi
चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।
- RCM 6.70.3Open verse →
यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।
अर्थ · Hindi
यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।
- RCM 6.70.4Open verse →
कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।
अर्थ · Hindi
कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।
- RCM 6.70.5Open verse →
सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।
अर्थ · Hindi
सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।
- RCM 6.70.6Open verse →
राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।
अर्थ · Hindi
राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।
- RCM 6.70.7Open verse →
खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।
अर्थ · Hindi
खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।
- RCM 6.70.8Open verse →
लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।
अर्थ · Hindi
लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।
- RCM 6.70.9Open verse →
लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।
अर्थ · Hindi
लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।
- RCM 6.70.10Open verse →
धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।
अर्थ · Hindi
धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।
- RCM 6.70.11Open verse →
काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।
अर्थ · Hindi
काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।
- RCM 6.70.12Open verse →
उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।
अर्थ · Hindi
उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।
- RCM 6.70.13Open verse →
करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।
अर्थ · Hindi
करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।
- RCM 6.70.14Open verse →
गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।
अर्थ · Hindi
गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।
- RCM 6.71.1Open verse →
सभय देव करुनानिधि जान्यो। श्रवन प्रजंत सरासनु तान्यो।।
अर्थ · Hindi
सभय देव करुनानिधि जान्यो। श्रवन प्रजंत सरासनु तान्यो।।
- RCM 6.71.2Open verse →
बिसिख निकर निसिचर मुख भरेऊ। तदपि महाबल भूमि न परेऊ।।
अर्थ · Hindi
बिसिख निकर निसिचर मुख भरेऊ। तदपि महाबल भूमि न परेऊ।।
- RCM 6.71.3Open verse →
सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।
अर्थ · Hindi
सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।
- RCM 6.71.4Open verse →
तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।
अर्थ · Hindi
तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।
- RCM 6.71.5Open verse →
सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।
अर्थ · Hindi
सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।
- RCM 6.71.6Open verse →
धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।
अर्थ · Hindi
धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।
- RCM 6.71.7Open verse →
परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।
अर्थ · Hindi
परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।
- RCM 6.71.8Open verse →
तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।
अर्थ · Hindi
तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।
- RCM 6.71.9Open verse →
सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।
अर्थ · Hindi
सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।
- RCM 6.71.10Open verse →
करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।
अर्थ · Hindi
करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।
- RCM 6.71.11Open verse →
गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए।।
अर्थ · Hindi
गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए।।
- RCM 6.71.12Open verse →
बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए।।
अर्थ · Hindi
बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए।।
- RCM 6.72.1Open verse →
दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।
अर्थ · Hindi
दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।
- RCM 6.72.2Open verse →
राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।
अर्थ · Hindi
राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।
- RCM 6.72.3Open verse →
छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती। निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती।।
अर्थ · Hindi
छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती। निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती।।
- RCM 6.72.4Open verse →
बहु बिलाप दसकंधर करई। बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई।।
अर्थ · Hindi
बहु बिलाप दसकंधर करई। बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई।।
- RCM 6.72.5Open verse →
रोवहिं नारि हृदय हति पानी। तासु तेज बल बिपुल बखानी।।
अर्थ · Hindi
रोवहिं नारि हृदय हति पानी। तासु तेज बल बिपुल बखानी।।
- RCM 6.72.6Open verse →
मेघनाद तेहि अवसर आयउ। कहि बहु कथा पिता समुझायउ।।
अर्थ · Hindi
मेघनाद तेहि अवसर आयउ। कहि बहु कथा पिता समुझायउ।।
- RCM 6.72.7Open verse →
देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।
अर्थ · Hindi
देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।
- RCM 6.72.8Open verse →
इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।
अर्थ · Hindi
इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।
- RCM 6.72.9Open verse →
एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना।।
अर्थ · Hindi
एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना।।
- RCM 6.72.10Open verse →
इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा।।
अर्थ · Hindi
इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा।।
- RCM 6.72.11Open verse →
लरहिं सुभट निज निज जय हेतू। बरनि न जाइ समर खगकेतू।।
अर्थ · Hindi
लरहिं सुभट निज निज जय हेतू। बरनि न जाइ समर खगकेतू।।
- RCM 6.72.12Open verse →
मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।
अर्थ · Hindi
मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।
- RCM 6.72.13Open verse →
गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।
अर्थ · Hindi
गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।
- RCM 6.73.1Open verse →
सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।
अर्थ · Hindi
सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।
- RCM 6.73.2Open verse →
डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।
अर्थ · Hindi
डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।
- RCM 6.73.3Open verse →
दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।
अर्थ · Hindi
दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।
- RCM 6.73.4Open verse →
धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।
अर्थ · Hindi
धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।
- RCM 6.73.5Open verse →
गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।
अर्थ · Hindi
गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।
- RCM 6.73.6Open verse →
अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।
अर्थ · Hindi
अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।
- RCM 6.73.7Open verse →
जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर।।
अर्थ · Hindi
जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर।।
- RCM 6.73.8Open verse →
मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला।।
अर्थ · Hindi
मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला।।
- RCM 6.73.9Open verse →
पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन।।
अर्थ · Hindi
पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन।।
- RCM 6.73.10Open verse →
पुनि रघुपति सैं जूझे लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा।।
अर्थ · Hindi
पुनि रघुपति सैं जूझे लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा।।
- RCM 6.73.11Open verse →
ब्याल पास बस भए खरारी। स्वबस अनंत एक अबिकारी।।
अर्थ · Hindi
ब्याल पास बस भए खरारी। स्वबस अनंत एक अबिकारी।।
- RCM 6.73.12Open verse →
नट इव कपट चरित कर नाना। सदा स्वतंत्र एक भगवाना।।
अर्थ · Hindi
नट इव कपट चरित कर नाना। सदा स्वतंत्र एक भगवाना।।
- RCM 6.73.13Open verse →
रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।
अर्थ · Hindi
रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।
- RCM 6.73.14Open verse →
गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।
अर्थ · Hindi
गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।
- RCM 6.73.15Open verse →
सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।
अर्थ · Hindi
सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।
- RCM 6.74.1Open verse →
चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।
अर्थ · Hindi
चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।
- RCM 6.74.2Open verse →
अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।
अर्थ · Hindi
अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।
- RCM 6.74.3Open verse →
ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा। पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा।।
अर्थ · Hindi
ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा। पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा।।
- RCM 6.74.4Open verse →
जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा।।
अर्थ · Hindi
जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा।।
- RCM 6.74.5Open verse →
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।
अर्थ · Hindi
बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।
- RCM 6.74.6Open verse →
अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।
अर्थ · Hindi
अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।
- RCM 6.74.7Open verse →
मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती।।
अर्थ · Hindi
मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती।।
- RCM 6.74.8Open verse →
पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ। महि पछारि निज बल देखरायो।।
अर्थ · Hindi
पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ। महि पछारि निज बल देखरायो।।
- RCM 6.74.9Open verse →
बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा।।
अर्थ · Hindi
बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा।।
- RCM 6.74.10Open verse →
इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।।
अर्थ · Hindi
इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।।
- RCM 6.74.11Open verse →
खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।
अर्थ · Hindi
खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।
- RCM 6.74.12Open verse →
माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।
अर्थ · Hindi
माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।
- RCM 6.74.13Open verse →
गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ।
अर्थ · Hindi
गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ।
- RCM 6.74.14Open verse →
चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।
अर्थ · Hindi
चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।
- RCM 6.75.1Open verse →
मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।
अर्थ · Hindi
मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।
- RCM 6.75.2Open verse →
तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।
अर्थ · Hindi
तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।
- RCM 6.75.3Open verse →
इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा।।
अर्थ · Hindi
इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा।।
- RCM 6.75.4Open verse →
मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन।।
अर्थ · Hindi
मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन।।
- RCM 6.75.5Open verse →
जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि।।
अर्थ · Hindi
जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि।।
- RCM 6.75.6Open verse →
सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना।।
अर्थ · Hindi
सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना।।
- RCM 6.75.7Open verse →
लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई।।
अर्थ · Hindi
लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई।।
- RCM 6.75.8Open verse →
तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही।।
अर्थ · Hindi
तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही।।
- RCM 6.75.9Open verse →
मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई।।
अर्थ · Hindi
मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई।।
- RCM 6.75.10Open verse →
जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन।।
अर्थ · Hindi
जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन।।
- RCM 6.75.11Open verse →
जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।
अर्थ · Hindi
जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।
- RCM 6.75.12Open verse →
प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।
अर्थ · Hindi
प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।
- RCM 6.75.13Open verse →
जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं।।
अर्थ · Hindi
जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं।।
- RCM 6.75.14Open verse →
जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई।।
अर्थ · Hindi
जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई।।
- RCM 6.75.15Open verse →
रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।
अर्थ · Hindi
रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।
- RCM 6.75.16Open verse →
अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।
अर्थ · Hindi
अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।
- RCM 6.76.1Open verse →
जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा।।
अर्थ · Hindi
जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा।।
- RCM 6.76.2Open verse →
कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा।।
अर्थ · Hindi
कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा।।
- RCM 6.76.3Open verse →
तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।
अर्थ · Hindi
तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।
- RCM 6.76.4Open verse →
लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।
अर्थ · Hindi
लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।
- RCM 6.76.5Open verse →
आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।
अर्थ · Hindi
आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।
- RCM 6.76.6Open verse →
कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।
अर्थ · Hindi
कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।
- RCM 6.76.7Open verse →
प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा।।
अर्थ · Hindi
प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा।।
- RCM 6.76.8Open verse →
उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा।।
अर्थ · Hindi
उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा।।
- RCM 6.76.9Open verse →
फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा।।
अर्थ · Hindi
फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा।।
- RCM 6.76.10Open verse →
आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला।।
अर्थ · Hindi
आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला।।
- RCM 6.76.11Open verse →
देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।
अर्थ · Hindi
देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।
- RCM 6.76.12Open verse →
बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।
अर्थ · Hindi
बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।
- RCM 6.76.13Open verse →
देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा।।
अर्थ · Hindi
देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा।।
- RCM 6.76.14Open verse →
लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा।।
अर्थ · Hindi
लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा।।
- RCM 6.76.15Open verse →
सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।
अर्थ · Hindi
सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।
- RCM 6.76.16Open verse →
छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।
अर्थ · Hindi
छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।
- RCM 6.76.17Open verse →
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।
अर्थ · Hindi
रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।
- RCM 6.76.18Open verse →
धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।
अर्थ · Hindi
धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।
- RCM 6.77.1Open verse →
बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो।।
अर्थ · Hindi
बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो।।
- RCM 6.77.2Open verse →
तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा। चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा।।
अर्थ · Hindi
तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा। चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा।।
- RCM 6.77.3Open verse →
बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।
अर्थ · Hindi
बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।
- RCM 6.77.4Open verse →
जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।
अर्थ · Hindi
जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।
- RCM 6.77.5Open verse →
अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।
अर्थ · Hindi
अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।
- RCM 6.77.6Open verse →
सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।
अर्थ · Hindi
सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।
- RCM 6.77.7Open verse →
मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी।।
- RCM 6.77.8Open verse →
नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा।।
अर्थ · Hindi
नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा।।
- RCM 6.77.9Open verse →
तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।
अर्थ · Hindi
तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।
- RCM 6.77.10Open verse →
नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।
अर्थ · Hindi
नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।
- RCM 6.78.1Open verse →
तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।
अर्थ · Hindi
तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।
- RCM 6.78.2Open verse →
पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।
अर्थ · Hindi
पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।
- RCM 6.78.3Open verse →
निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।।
अर्थ · Hindi
निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।।
- RCM 6.78.4Open verse →
सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।।
अर्थ · Hindi
सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।।
- RCM 6.78.5Open verse →
सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।
अर्थ · Hindi
सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।
- RCM 6.78.6Open verse →
निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।
अर्थ · Hindi
निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।
- RCM 6.78.7Open verse →
अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।
अर्थ · Hindi
अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।
- RCM 6.78.8Open verse →
चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।
अर्थ · Hindi
चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।
- RCM 6.78.9Open verse →
असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।
अर्थ · Hindi
असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।
- RCM 6.79.1Open verse →
चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा।।
अर्थ · Hindi
चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा।।
- RCM 6.79.2Open verse →
बिबिध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना।।
अर्थ · Hindi
बिबिध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना।।
- RCM 6.79.3Open verse →
चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।
अर्थ · Hindi
चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।
- RCM 6.79.4Open verse →
बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।
अर्थ · Hindi
बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।
- RCM 6.79.5Open verse →
अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।
अर्थ · Hindi
अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।
- RCM 6.79.6Open verse →
चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।
अर्थ · Hindi
चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।
- RCM 6.79.7Open verse →
उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।
अर्थ · Hindi
उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।
- RCM 6.79.8Open verse →
पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।
अर्थ · Hindi
पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।
- RCM 6.79.9Open verse →
भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई।।
अर्थ · Hindi
भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई।।
- RCM 6.79.10Open verse →
केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं।।
अर्थ · Hindi
केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं।।
- RCM 6.79.11Open verse →
कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा। मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा।।
अर्थ · Hindi
कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा। मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा।।
- RCM 6.79.12Open verse →
हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई। अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई।।
अर्थ · Hindi
हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई। अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई।।
- RCM 6.79.13Open verse →
यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई। धाए करि रघुबीर दोहाई।।
अर्थ · Hindi
यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई। धाए करि रघुबीर दोहाई।।
- RCM 6.80.1Open verse →
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।
अर्थ · Hindi
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।
- RCM 6.80.2Open verse →
अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।
अर्थ · Hindi
अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।
- RCM 6.80.3Open verse →
नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।।
अर्थ · Hindi
नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।।
- RCM 6.80.4Open verse →
सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।।
अर्थ · Hindi
सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।।
- RCM 6.80.5Open verse →
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।
अर्थ · Hindi
सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।
- RCM 6.80.6Open verse →
बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।
अर्थ · Hindi
बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।
- RCM 6.80.7Open verse →
ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना।।
अर्थ · Hindi
ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना।।
- RCM 6.80.8Open verse →
दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।
अर्थ · Hindi
दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।
- RCM 6.80.9Open verse →
अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।
अर्थ · Hindi
अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।
- RCM 6.80.10Open verse →
कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।
अर्थ · Hindi
कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।
- RCM 6.80.11Open verse →
सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।
अर्थ · Hindi
सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।
- RCM 6.80.12Open verse →
महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर।
अर्थ · Hindi
महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर।
- RCM 6.80.13Open verse →
जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर।।80(क)।।
अर्थ · Hindi
जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर।।80(क)।।
- RCM 6.80.14Open verse →
सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।
अर्थ · Hindi
सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।
- RCM 6.80.15Open verse →
एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।
अर्थ · Hindi
एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।
- RCM 6.80.16Open verse →
उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।
अर्थ · Hindi
उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।
- RCM 6.80.17Open verse →
लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।
अर्थ · Hindi
लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।
- RCM 6.81.1Open verse →
सुर ब्रह्मादि सिद्ध मुनि नाना। देखत रन नभ चढ़े बिमाना।।
अर्थ · Hindi
सुर ब्रह्मादि सिद्ध मुनि नाना। देखत रन नभ चढ़े बिमाना।।
- RCM 6.81.2Open verse →
हमहू उमा रहे तेहि संगा। देखत राम चरित रन रंगा।।
अर्थ · Hindi
हमहू उमा रहे तेहि संगा। देखत राम चरित रन रंगा।।
- RCM 6.81.3Open verse →
सुभट समर रस दुहु दिसि माते। कपि जयसील राम बल ताते।।
अर्थ · Hindi
सुभट समर रस दुहु दिसि माते। कपि जयसील राम बल ताते।।
- RCM 6.81.4Open verse →
एक एक सन भिरहिं पचारहिं। एकन्ह एक मर्दि महि पारहिं।।
अर्थ · Hindi
एक एक सन भिरहिं पचारहिं। एकन्ह एक मर्दि महि पारहिं।।
- RCM 6.81.5Open verse →
मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं। सीस तोरि सीसन्ह सन मारहिं।।
अर्थ · Hindi
मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं। सीस तोरि सीसन्ह सन मारहिं।।
- RCM 6.81.6Open verse →
उदर बिदारहिं भुजा उपारहिं। गहि पद अवनि पटकि भट डारहिं।।
अर्थ · Hindi
उदर बिदारहिं भुजा उपारहिं। गहि पद अवनि पटकि भट डारहिं।।
- RCM 6.81.7Open verse →
निसिचर भट महि गाड़हि भालू। ऊपर ढारि देहिं बहु बालू।।
अर्थ · Hindi
निसिचर भट महि गाड़हि भालू। ऊपर ढारि देहिं बहु बालू।।
- RCM 6.81.8Open verse →
बीर बलिमुख जुद्ध बिरुद्धे। देखिअत बिपुल काल जनु क्रुद्धे।।
अर्थ · Hindi
बीर बलिमुख जुद्ध बिरुद्धे। देखिअत बिपुल काल जनु क्रुद्धे।।
- RCM 6.82.1Open verse →
धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर।।
अर्थ · Hindi
धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर।।
- RCM 6.82.2Open verse →
गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा।।
अर्थ · Hindi
गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा।।
- RCM 6.82.3Open verse →
लागहिं सैल बज्र तन तासू। खंड खंड होइ फूटहिं आसू।।
अर्थ · Hindi
लागहिं सैल बज्र तन तासू। खंड खंड होइ फूटहिं आसू।।
- RCM 6.82.4Open verse →
चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुर्मद रावन अति कोपी।।
अर्थ · Hindi
चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुर्मद रावन अति कोपी।।
- RCM 6.82.5Open verse →
इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा।।
अर्थ · Hindi
इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा।।
- RCM 6.82.6Open verse →
चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना।।
अर्थ · Hindi
चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना।।
- RCM 6.82.7Open verse →
पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।।
अर्थ · Hindi
पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।।
- RCM 6.82.8Open verse →
तेहि देखे कपि सकल पराने। दसहुँ चाप सायक संधाने।।
अर्थ · Hindi
तेहि देखे कपि सकल पराने। दसहुँ चाप सायक संधाने।।
- RCM 6.83.1Open verse →
रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।।
अर्थ · Hindi
रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।।
- RCM 6.83.2Open verse →
खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।।
अर्थ · Hindi
खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।।
- RCM 6.83.3Open verse →
अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।।
अर्थ · Hindi
अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।।
- RCM 6.83.4Open verse →
कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।।
अर्थ · Hindi
कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।।
- RCM 6.83.5Open verse →
पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।।
अर्थ · Hindi
पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।।
- RCM 6.83.6Open verse →
सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।।
अर्थ · Hindi
सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।।
- RCM 6.83.7Open verse →
पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।।
अर्थ · Hindi
पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।।
- RCM 6.83.8Open verse →
उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।
अर्थ · Hindi
उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।
- RCM 6.84.1Open verse →
जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।
अर्थ · Hindi
जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।
- RCM 6.84.2Open verse →
मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।
अर्थ · Hindi
मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।
- RCM 6.84.3Open verse →
मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।
अर्थ · Hindi
मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।
- RCM 6.84.4Open verse →
धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।
अर्थ · Hindi
धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।
- RCM 6.84.5Open verse →
अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।
अर्थ · Hindi
अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।
- RCM 6.84.6Open verse →
कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।
अर्थ · Hindi
कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।
- RCM 6.84.7Open verse →
सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।
अर्थ · Hindi
सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।
- RCM 6.84.8Open verse →
पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।
अर्थ · Hindi
पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।
- RCM 6.85.1Open verse →
इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई।।
अर्थ · Hindi
इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई।।
- RCM 6.85.2Open verse →
नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा।।
अर्थ · Hindi
नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा।।
- RCM 6.85.3Open verse →
पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर।।
अर्थ · Hindi
पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर।।
- RCM 6.85.4Open verse →
प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए।।
अर्थ · Hindi
प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए।।
- RCM 6.85.5Open verse →
कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।
अर्थ · Hindi
कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।
- RCM 6.85.6Open verse →
जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।
अर्थ · Hindi
जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।
- RCM 6.85.7Open verse →
रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।
अर्थ · Hindi
रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।
- RCM 6.85.8Open verse →
अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।
अर्थ · Hindi
अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।
- RCM 6.86.1Open verse →
चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।।
अर्थ · Hindi
चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।।
- RCM 6.86.2Open verse →
भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।।
अर्थ · Hindi
भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।।
- RCM 6.86.3Open verse →
चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।।
अर्थ · Hindi
चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।।
- RCM 6.86.4Open verse →
प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।।
अर्थ · Hindi
प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।।
- RCM 6.86.5Open verse →
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।
अर्थ · Hindi
इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।
- RCM 6.86.6Open verse →
अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।
अर्थ · Hindi
अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।
- RCM 6.86.7Open verse →
देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।
अर्थ · Hindi
देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।
- RCM 6.86.8Open verse →
जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।
अर्थ · Hindi
जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।
- RCM 6.86.9Open verse →
अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।।
अर्थ · Hindi
अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।।
- RCM 6.86.10Open verse →
कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।
अर्थ · Hindi
कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।
- RCM 6.87.1Open verse →
एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी।
अर्थ · Hindi
एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी।
- RCM 6.87.2Open verse →
देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा।।
अर्थ · Hindi
देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा।।
- RCM 6.87.3Open verse →
बहु कृपान तरवारि चमंकहिं। जनु दहँ दिसि दामिनीं दमंकहिं।।
अर्थ · Hindi
बहु कृपान तरवारि चमंकहिं। जनु दहँ दिसि दामिनीं दमंकहिं।।
- RCM 6.87.4Open verse →
गज रथ तुरग चिकार कठोरा। गर्जहिं मनहुँ बलाहक घोरा।।
अर्थ · Hindi
गज रथ तुरग चिकार कठोरा। गर्जहिं मनहुँ बलाहक घोरा।।
- RCM 6.87.5Open verse →
कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।
अर्थ · Hindi
कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।
- RCM 6.87.6Open verse →
उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।
अर्थ · Hindi
उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।
- RCM 6.87.7Open verse →
दुहुँ दिसि पर्बत करहिं प्रहारा। बज्रपात जनु बारहिं बारा।।
अर्थ · Hindi
दुहुँ दिसि पर्बत करहिं प्रहारा। बज्रपात जनु बारहिं बारा।।
- RCM 6.87.8Open verse →
रघुपति कोपि बान झरि लाई। घायल भै निसिचर समुदाई।।
अर्थ · Hindi
रघुपति कोपि बान झरि लाई। घायल भै निसिचर समुदाई।।
- RCM 6.87.9Open verse →
लागत बान बीर चिक्करहीं। घुर्मि घुर्मि जहँ तहँ महि परहीं।।
अर्थ · Hindi
लागत बान बीर चिक्करहीं। घुर्मि घुर्मि जहँ तहँ महि परहीं।।
- RCM 6.87.10Open verse →
स्त्रवहिं सैल जनु निर्झर भारी। सोनित सरि कादर भयकारी।।
अर्थ · Hindi
स्त्रवहिं सैल जनु निर्झर भारी। सोनित सरि कादर भयकारी।।
- RCM 6.88.1Open verse →
मज्जहि भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला।।
अर्थ · Hindi
मज्जहि भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला।।
- RCM 6.88.2Open verse →
काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं।।
अर्थ · Hindi
काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं।।
- RCM 6.88.3Open verse →
एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।
अर्थ · Hindi
एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।
- RCM 6.88.4Open verse →
कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।
अर्थ · Hindi
कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।
- RCM 6.88.5Open verse →
खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।
अर्थ · Hindi
खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।
- RCM 6.88.6Open verse →
बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।
अर्थ · Hindi
बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।
- RCM 6.88.7Open verse →
जोगिनि भरि भरि खप्पर संचहिं। भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं।।
अर्थ · Hindi
जोगिनि भरि भरि खप्पर संचहिं। भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं।।
- RCM 6.88.8Open verse →
भट कपाल करताल बजावहिं। चामुंडा नाना बिधि गावहिं।।
अर्थ · Hindi
भट कपाल करताल बजावहिं। चामुंडा नाना बिधि गावहिं।।
- RCM 6.88.9Open verse →
जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।
अर्थ · Hindi
जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।
- RCM 6.88.10Open verse →
कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।
अर्थ · Hindi
कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।
- RCM 6.89.1Open verse →
देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।।
अर्थ · Hindi
देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।।
- RCM 6.89.2Open verse →
सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।
अर्थ · Hindi
सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।
- RCM 6.89.3Open verse →
तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।
अर्थ · Hindi
तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।
- RCM 6.89.4Open verse →
चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।
अर्थ · Hindi
चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।
- RCM 6.89.5Open verse →
रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।
अर्थ · Hindi
रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।
- RCM 6.89.6Open verse →
सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।
अर्थ · Hindi
सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।
- RCM 6.89.7Open verse →
सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।।
अर्थ · Hindi
सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।।
- RCM 6.89.8Open verse →
देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।
अर्थ · Hindi
देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।
- RCM 6.90.1Open verse →
अस कहि रथ रघुनाथ चलावा। बिप्र चरन पंकज सिरु नावा।।
अर्थ · Hindi
अस कहि रथ रघुनाथ चलावा। बिप्र चरन पंकज सिरु नावा।।
- RCM 6.90.2Open verse →
तब लंकेस क्रोध उर छावा। गर्जत तर्जत सन्मुख धावा।।
अर्थ · Hindi
तब लंकेस क्रोध उर छावा। गर्जत तर्जत सन्मुख धावा।।
- RCM 6.90.3Open verse →
जीतेहु जे भट संजुग माहीं। सुनु तापस मैं तिन्ह सम नाहीं।।
अर्थ · Hindi
जीतेहु जे भट संजुग माहीं। सुनु तापस मैं तिन्ह सम नाहीं।।
- RCM 6.90.4Open verse →
रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाकें बंदीखाना।।
अर्थ · Hindi
रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाकें बंदीखाना।।
- RCM 6.90.5Open verse →
खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा।।
अर्थ · Hindi
खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा।।
- RCM 6.90.6Open verse →
निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु।।
अर्थ · Hindi
निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु।।
- RCM 6.90.7Open verse →
आजु बयरु सबु लेउँ निबाही। जौं रन भूप भाजि नहिं जाहीं।।
अर्थ · Hindi
आजु बयरु सबु लेउँ निबाही। जौं रन भूप भाजि नहिं जाहीं।।
- RCM 6.90.8Open verse →
आजु करउँ खलु काल हवाले। परेहु कठिन रावन के पाले।।
अर्थ · Hindi
आजु करउँ खलु काल हवाले। परेहु कठिन रावन के पाले।।
- RCM 6.90.9Open verse →
सुनि दुर्बचन कालबस जाना। बिहँसि बचन कह कृपानिधाना।।
अर्थ · Hindi
सुनि दुर्बचन कालबस जाना। बिहँसि बचन कह कृपानिधाना।।
- RCM 6.90.10Open verse →
सत्य सत्य सब तव प्रभुताई। जल्पसि जनि देखाउ मनुसाई।।
अर्थ · Hindi
सत्य सत्य सब तव प्रभुताई। जल्पसि जनि देखाउ मनुसाई।।
- RCM 6.91.1Open verse →
कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर।।
अर्थ · Hindi
कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर।।
- RCM 6.91.2Open verse →
नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए।।
अर्थ · Hindi
नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए।।
- RCM 6.91.3Open verse →
पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा।।
अर्थ · Hindi
पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा।।
- RCM 6.91.4Open verse →
छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई।।
अर्थ · Hindi
छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई।।
- RCM 6.91.5Open verse →
कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै। बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै।।
अर्थ · Hindi
कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै। बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै।।
- RCM 6.91.6Open verse →
निफल होहिं रावन सर कैसें। खल के सकल मनोरथ जैसें।।
अर्थ · Hindi
निफल होहिं रावन सर कैसें। खल के सकल मनोरथ जैसें।।
- RCM 6.91.7Open verse →
तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि।।
अर्थ · Hindi
तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि।।
- RCM 6.91.8Open verse →
राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा।।
अर्थ · Hindi
राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा।।
- RCM 6.92.1Open verse →
चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।।
अर्थ · Hindi
चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।।
- RCM 6.92.2Open verse →
रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।
अर्थ · Hindi
रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।
- RCM 6.92.3Open verse →
तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।।
अर्थ · Hindi
तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।।
- RCM 6.92.4Open verse →
बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।
अर्थ · Hindi
बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।
- RCM 6.92.5Open verse →
तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।।
अर्थ · Hindi
तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।।
- RCM 6.92.6Open verse →
तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।
अर्थ · Hindi
तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।
- RCM 6.92.7Open verse →
रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।।
अर्थ · Hindi
रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।।
- RCM 6.92.8Open verse →
दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।
अर्थ · Hindi
दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।
- RCM 6.92.9Open verse →
स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।।
अर्थ · Hindi
स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।।
- RCM 6.92.10Open verse →
तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।
अर्थ · Hindi
तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।
- RCM 6.92.11Open verse →
काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।।
अर्थ · Hindi
काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।।
- RCM 6.92.12Open verse →
प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।
अर्थ · Hindi
प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।
- RCM 6.92.13Open verse →
पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।।
अर्थ · Hindi
पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।।
- RCM 6.92.14Open verse →
रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।
अर्थ · Hindi
रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।
- RCM 6.93.1Open verse →
दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।।
अर्थ · Hindi
दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।।
- RCM 6.93.2Open verse →
गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।
अर्थ · Hindi
गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।
- RCM 6.93.3Open verse →
समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।।
अर्थ · Hindi
समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।।
- RCM 6.93.4Open verse →
दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।
अर्थ · Hindi
दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।
- RCM 6.93.5Open verse →
हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।।
अर्थ · Hindi
हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।।
- RCM 6.93.6Open verse →
सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।
अर्थ · Hindi
सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।
- RCM 6.93.7Open verse →
काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।।
अर्थ · Hindi
काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।।
- RCM 6.93.8Open verse →
कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।
अर्थ · Hindi
कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।
- RCM 6.94.1Open verse →
आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।।
अर्थ · Hindi
आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।।
- RCM 6.94.2Open verse →
तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।
अर्थ · Hindi
तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।
- RCM 6.94.3Open verse →
लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।।
अर्थ · Hindi
लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।।
- RCM 6.94.4Open verse →
देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।
अर्थ · Hindi
देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।
- RCM 6.94.5Open verse →
रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।।
अर्थ · Hindi
रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।।
- RCM 6.94.6Open verse →
सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।
अर्थ · Hindi
सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।
- RCM 6.94.7Open verse →
तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।।
अर्थ · Hindi
तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।।
- RCM 6.94.8Open verse →
राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।
अर्थ · Hindi
राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।
- RCM 6.95.1Open verse →
देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।।
अर्थ · Hindi
देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।।
- RCM 6.95.2Open verse →
रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।
अर्थ · Hindi
रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।
- RCM 6.95.3Open verse →
ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।।
अर्थ · Hindi
ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।।
- RCM 6.95.4Open verse →
पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।
अर्थ · Hindi
पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।
- RCM 6.95.5Open verse →
गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।।
अर्थ · Hindi
गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।।
- RCM 6.95.6Open verse →
लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।
अर्थ · Hindi
लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।
- RCM 6.95.7Open verse →
सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।
अर्थ · Hindi
सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।
- RCM 6.95.8Open verse →
बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।
अर्थ · Hindi
बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।
- RCM 6.96.1Open verse →
अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।
अर्थ · Hindi
अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।
- RCM 6.96.2Open verse →
रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।
अर्थ · Hindi
रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।
- RCM 6.96.3Open verse →
देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।।
अर्थ · Hindi
देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।।
- RCM 6.96.4Open verse →
भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।
अर्थ · Hindi
भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।
- RCM 6.96.5Open verse →
दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।
अर्थ · Hindi
दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।
- RCM 6.96.6Open verse →
डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।
अर्थ · Hindi
डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।
- RCM 6.96.7Open verse →
सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।।
अर्थ · Hindi
सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।।
- RCM 6.96.8Open verse →
रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।
अर्थ · Hindi
रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।
- RCM 6.97.1Open verse →
प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।।
अर्थ · Hindi
प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।।
- RCM 6.97.2Open verse →
रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।
अर्थ · Hindi
रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।
- RCM 6.97.3Open verse →
भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।
अर्थ · Hindi
भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।
- RCM 6.97.4Open verse →
प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।
अर्थ · Hindi
प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।
- RCM 6.97.5Open verse →
अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।
अर्थ · Hindi
अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।
- RCM 6.97.6Open verse →
सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।
अर्थ · Hindi
सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।
- RCM 6.97.7Open verse →
हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।।
अर्थ · Hindi
हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।।
- RCM 6.97.8Open verse →
देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।
अर्थ · Hindi
देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।
- RCM 6.98.1Open verse →
सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।।
अर्थ · Hindi
सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।।
- RCM 6.98.2Open verse →
मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।
अर्थ · Hindi
मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।
- RCM 6.98.3Open verse →
बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।
अर्थ · Hindi
बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।
- RCM 6.98.4Open verse →
बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।
अर्थ · Hindi
बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।
- RCM 6.98.5Open verse →
एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।।
अर्थ · Hindi
एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।।
- RCM 6.98.6Open verse →
तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।
अर्थ · Hindi
तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।
- RCM 6.98.7Open verse →
रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।।
अर्थ · Hindi
रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।।
- RCM 6.98.8Open verse →
गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।
अर्थ · Hindi
गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।
- RCM 6.98.9Open verse →
कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।
अर्थ · Hindi
कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।
- RCM 6.98.10Open verse →
पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।
अर्थ · Hindi
पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।
- RCM 6.98.11Open verse →
हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।।
अर्थ · Hindi
हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।।
- RCM 6.98.12Open verse →
मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।
अर्थ · Hindi
मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।
- RCM 6.98.13Open verse →
संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।।
अर्थ · Hindi
संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।।
- RCM 6.98.14Open verse →
भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।
अर्थ · Hindi
भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।
- RCM 6.98.15Open verse →
देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।
अर्थ · Hindi
देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।
- RCM 6.99.1Open verse →
तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।
अर्थ · Hindi
तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।
- RCM 6.99.2Open verse →
सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।
अर्थ · Hindi
सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।
- RCM 6.99.3Open verse →
मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।
अर्थ · Hindi
मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।
- RCM 6.99.4Open verse →
होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।
अर्थ · Hindi
होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।
- RCM 6.99.5Open verse →
रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई। बिधि बिपरीत चरित सब करई।।
अर्थ · Hindi
रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई। बिधि बिपरीत चरित सब करई।।
- RCM 6.99.6Open verse →
मोर अभाग्य जिआवत ओही। जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही।।
अर्थ · Hindi
मोर अभाग्य जिआवत ओही। जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही।।
- RCM 6.99.7Open verse →
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।
अर्थ · Hindi
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।
- RCM 6.99.8Open verse →
जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।
अर्थ · Hindi
जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।
- RCM 6.99.9Open verse →
रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।
अर्थ · Hindi
रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।
- RCM 6.99.10Open verse →
ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।
अर्थ · Hindi
ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।
- RCM 6.99.11Open verse →
बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।
अर्थ · Hindi
बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।
- RCM 6.99.12Open verse →
कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।
अर्थ · Hindi
कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।
- RCM 6.99.13Open verse →
प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।
अर्थ · Hindi
प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।
- RCM 6.100.1Open verse →
अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।
अर्थ · Hindi
अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।
- RCM 6.100.2Open verse →
राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।
अर्थ · Hindi
राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।
- RCM 6.100.3Open verse →
निसिहि ससिहि निंदति बहु भाँती। जुग सम भई सिराति न राती।।
अर्थ · Hindi
निसिहि ससिहि निंदति बहु भाँती। जुग सम भई सिराति न राती।।
- RCM 6.100.4Open verse →
करति बिलाप मनहिं मन भारी। राम बिरहँ जानकी दुखारी।।
अर्थ · Hindi
करति बिलाप मनहिं मन भारी। राम बिरहँ जानकी दुखारी।।
- RCM 6.100.5Open verse →
जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।
अर्थ · Hindi
जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।
- RCM 6.100.6Open verse →
सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।
अर्थ · Hindi
सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।
- RCM 6.100.7Open verse →
इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।।
अर्थ · Hindi
इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।।
- RCM 6.100.8Open verse →
सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही।।
अर्थ · Hindi
सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही।।
- RCM 6.100.9Open verse →
तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भौरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा।।
अर्थ · Hindi
तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भौरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा।।
- RCM 6.100.10Open verse →
सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा।।
अर्थ · Hindi
सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा।।
- RCM 6.100.11Open verse →
जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।
अर्थ · Hindi
जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।
- RCM 6.101.1Open verse →
जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।
अर्थ · Hindi
जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।
- RCM 6.101.2Open verse →
बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।
अर्थ · Hindi
बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।
- RCM 6.101.3Open verse →
जोगिनि गहें करबाल। एक हाथ मनुज कपाल।।
अर्थ · Hindi
जोगिनि गहें करबाल। एक हाथ मनुज कपाल।।
- RCM 6.101.4Open verse →
करि सद्य सोनित पान। नाचहिं करहिं बहु गान।।2।।
अर्थ · Hindi
करि सद्य सोनित पान। नाचहिं करहिं बहु गान।।2।।
- RCM 6.101.5Open verse →
धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।
अर्थ · Hindi
धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।
- RCM 6.101.6Open verse →
मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।
अर्थ · Hindi
मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।
- RCM 6.101.7Open verse →
जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।
अर्थ · Hindi
जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।
- RCM 6.101.8Open verse →
भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।
अर्थ · Hindi
भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।
- RCM 6.101.9Open verse →
जहँ तहँ थकित करि कीस। गर्जेउ बहुरि दससीस।।
अर्थ · Hindi
जहँ तहँ थकित करि कीस। गर्जेउ बहुरि दससीस।।
- RCM 6.101.10Open verse →
लछिमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।।
अर्थ · Hindi
लछिमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।।
- RCM 6.101.11Open verse →
हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।
अर्थ · Hindi
हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।
- RCM 6.101.12Open verse →
एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।
अर्थ · Hindi
एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।
- RCM 6.101.13Open verse →
प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।
अर्थ · Hindi
प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।
- RCM 6.101.14Open verse →
तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।
अर्थ · Hindi
तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।
- RCM 6.101.15Open verse →
मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।
अर्थ · Hindi
मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।
- RCM 6.101.16Open verse →
दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।
अर्थ · Hindi
दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।
- RCM 6.101.17Open verse →
तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही।
अर्थ · Hindi
तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही।
- RCM 6.101.18Open verse →
जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही।।
अर्थ · Hindi
जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही।।
- RCM 6.101.19Open verse →
प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी।
अर्थ · Hindi
प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी।
- RCM 6.101.20Open verse →
रघुबीर एकहि तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी।।1।।
अर्थ · Hindi
रघुबीर एकहि तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी।।1।।
- RCM 6.101.21Open verse →
माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।
अर्थ · Hindi
माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।
- RCM 6.101.22Open verse →
सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।
अर्थ · Hindi
सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।
- RCM 6.101.23Open verse →
श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।
अर्थ · Hindi
श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।
- RCM 6.101.24Open verse →
सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।
अर्थ · Hindi
सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।
- RCM 6.102.1Open verse →
काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।
अर्थ · Hindi
काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।
- RCM 6.102.2Open verse →
मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।
अर्थ · Hindi
मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।
- RCM 6.102.3Open verse →
उमा काल मर जाकीं ईछा। सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा।।
अर्थ · Hindi
उमा काल मर जाकीं ईछा। सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा।।
- RCM 6.102.4Open verse →
सुनु सरबग्य चराचर नायक। प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक।।
अर्थ · Hindi
सुनु सरबग्य चराचर नायक। प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक।।
- RCM 6.102.5Open verse →
नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।
अर्थ · Hindi
नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।
- RCM 6.102.6Open verse →
सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।
अर्थ · Hindi
सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।
- RCM 6.102.7Open verse →
असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।
अर्थ · Hindi
असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।
- RCM 6.102.8Open verse →
बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।
अर्थ · Hindi
बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।
- RCM 6.102.9Open verse →
दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा।।
अर्थ · Hindi
दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा।।
- RCM 6.102.10Open verse →
मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्त्रवहिं नयन मग बारी।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्त्रवहिं नयन मग बारी।।
- RCM 6.103.1Open verse →
सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।
अर्थ · Hindi
सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।
- RCM 6.103.2Open verse →
लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।
अर्थ · Hindi
लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।
- RCM 6.103.3Open verse →
धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा।।
अर्थ · Hindi
धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा।।
- RCM 6.103.4Open verse →
गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी।।
अर्थ · Hindi
गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी।।
- RCM 6.103.5Open verse →
डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।।
अर्थ · Hindi
डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।।
- RCM 6.103.6Open verse →
धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई।।
अर्थ · Hindi
धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई।।
- RCM 6.103.7Open verse →
मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा।।
- RCM 6.103.8Open verse →
प्रबिसे सब निषंग महु जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई।।
अर्थ · Hindi
प्रबिसे सब निषंग महु जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई।।
- RCM 6.103.9Open verse →
तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन।।
अर्थ · Hindi
तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन।।
- RCM 6.103.10Open verse →
जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।
अर्थ · Hindi
जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।
- RCM 6.103.11Open verse →
बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।
अर्थ · Hindi
बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।
- RCM 6.104.1Open verse →
पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी।।
अर्थ · Hindi
पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी।।
- RCM 6.104.2Open verse →
जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आई।।
अर्थ · Hindi
जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आई।।
- RCM 6.104.3Open verse →
पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।
अर्थ · Hindi
पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।
- RCM 6.104.4Open verse →
उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।
अर्थ · Hindi
उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।
- RCM 6.104.5Open verse →
तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।
अर्थ · Hindi
तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।
- RCM 6.104.6Open verse →
सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।
अर्थ · Hindi
सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।
- RCM 6.104.7Open verse →
बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा।।
अर्थ · Hindi
बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा।।
- RCM 6.104.8Open verse →
भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं।।
अर्थ · Hindi
भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं।।
- RCM 6.104.9Open verse →
जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।
अर्थ · Hindi
जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।
- RCM 6.104.10Open verse →
राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।
अर्थ · Hindi
राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।
- RCM 6.104.11Open verse →
तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।
अर्थ · Hindi
तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।
- RCM 6.104.12Open verse →
अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।
अर्थ · Hindi
अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।
- RCM 6.104.13Open verse →
काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।
अर्थ · Hindi
काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।
- RCM 6.105.1Open verse →
मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।।
अर्थ · Hindi
मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।।
- RCM 6.105.2Open verse →
अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।।
अर्थ · Hindi
अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।।
- RCM 6.105.3Open verse →
भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।
अर्थ · Hindi
भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।
- RCM 6.105.4Open verse →
रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।
अर्थ · Hindi
रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।
- RCM 6.105.5Open verse →
बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।
अर्थ · Hindi
बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।
- RCM 6.105.6Open verse →
लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।
अर्थ · Hindi
लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।
- RCM 6.105.7Open verse →
कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।
अर्थ · Hindi
कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।
- RCM 6.105.8Open verse →
कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।
अर्थ · Hindi
कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।
- RCM 6.106.1Open verse →
आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।।
अर्थ · Hindi
आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।।
- RCM 6.106.2Open verse →
तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।।
अर्थ · Hindi
तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।।
- RCM 6.106.3Open verse →
सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।।
अर्थ · Hindi
सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।।
- RCM 6.106.4Open verse →
पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।।
अर्थ · Hindi
पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।।
- RCM 6.106.5Open verse →
तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।
अर्थ · Hindi
तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।
- RCM 6.106.6Open verse →
सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।
अर्थ · Hindi
सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।
- RCM 6.106.7Open verse →
जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।।
अर्थ · Hindi
जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।।
- RCM 6.106.8Open verse →
तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।
अर्थ · Hindi
तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।
- RCM 6.107.1Open verse →
पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना। लंका जाहु कहेउ भगवाना।।
अर्थ · Hindi
पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना। लंका जाहु कहेउ भगवाना।।
- RCM 6.107.2Open verse →
समाचार जानकिहि सुनावहु। तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु।।
अर्थ · Hindi
समाचार जानकिहि सुनावहु। तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु।।
- RCM 6.107.3Open verse →
तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।
अर्थ · Hindi
तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।
- RCM 6.107.4Open verse →
बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।
अर्थ · Hindi
बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।
- RCM 6.107.5Open verse →
दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा। रघुपति दूत जानकीं चीन्हा।।
अर्थ · Hindi
दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा। रघुपति दूत जानकीं चीन्हा।।
- RCM 6.107.6Open verse →
कहहु तात प्रभु कृपानिकेता। कुसल अनुज कपि सेन समेता।।
अर्थ · Hindi
कहहु तात प्रभु कृपानिकेता। कुसल अनुज कपि सेन समेता।।
- RCM 6.107.7Open verse →
सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा।।
अर्थ · Hindi
सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा।।
- RCM 6.107.8Open verse →
अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो।।
अर्थ · Hindi
अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो।।
- RCM 6.108.1Open verse →
अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।
अर्थ · Hindi
अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।
- RCM 6.108.2Open verse →
तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।
अर्थ · Hindi
तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।
- RCM 6.108.3Open verse →
सुनि संदेसु भानुकुलभूषन। बोलि लिए जुबराज बिभीषन।।
अर्थ · Hindi
सुनि संदेसु भानुकुलभूषन। बोलि लिए जुबराज बिभीषन।।
- RCM 6.108.4Open verse →
मारुतसुत के संग सिधावहु। सादर जनकसुतहि लै आवहु।।
अर्थ · Hindi
मारुतसुत के संग सिधावहु। सादर जनकसुतहि लै आवहु।।
- RCM 6.108.5Open verse →
तुरतहिं सकल गए जहँ सीता। सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता।।
अर्थ · Hindi
तुरतहिं सकल गए जहँ सीता। सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता।।
- RCM 6.108.6Open verse →
बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो। तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो।।
अर्थ · Hindi
बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो। तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो।।
- RCM 6.108.7Open verse →
बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।
अर्थ · Hindi
बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।
- RCM 6.108.8Open verse →
ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।
अर्थ · Hindi
ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।
- RCM 6.108.9Open verse →
बेतपानि रच्छक चहुँ पासा। चले सकल मन परम हुलासा।।
अर्थ · Hindi
बेतपानि रच्छक चहुँ पासा। चले सकल मन परम हुलासा।।
- RCM 6.108.10Open verse →
देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए।।
अर्थ · Hindi
देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए।।
- RCM 6.108.11Open verse →
कह रघुबीर कहा मम मानहु। सीतहि सखा पयादें आनहु।।
अर्थ · Hindi
कह रघुबीर कहा मम मानहु। सीतहि सखा पयादें आनहु।।
- RCM 6.108.12Open verse →
देखहुँ कपि जननी की नाईं। बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई।।
अर्थ · Hindi
देखहुँ कपि जननी की नाईं। बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई।।
- RCM 6.108.13Open verse →
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।
अर्थ · Hindi
सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।
- RCM 6.108.14Open verse →
सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।
अर्थ · Hindi
सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।
- RCM 6.109.1Open verse →
प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।
अर्थ · Hindi
प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।
- RCM 6.109.2Open verse →
लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।
अर्थ · Hindi
लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।
- RCM 6.109.3Open verse →
सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।।
अर्थ · Hindi
सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।।
- RCM 6.109.4Open verse →
लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।।
अर्थ · Hindi
लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।।
- RCM 6.109.5Open verse →
देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।
अर्थ · Hindi
देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।
- RCM 6.109.6Open verse →
पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।
अर्थ · Hindi
पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।
- RCM 6.109.7Open verse →
जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।
अर्थ · Hindi
जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।
- RCM 6.109.8Open verse →
तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।
अर्थ · Hindi
तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।
- RCM 6.110.1Open verse →
तब रघुपति अनुसासन पाई। मातलि चलेउ चरन सिरु नाई।।
अर्थ · Hindi
तब रघुपति अनुसासन पाई। मातलि चलेउ चरन सिरु नाई।।
- RCM 6.110.2Open verse →
आए देव सदा स्वारथी। बचन कहहिं जनु परमारथी।।
अर्थ · Hindi
आए देव सदा स्वारथी। बचन कहहिं जनु परमारथी।।
- RCM 6.110.3Open verse →
दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया।।
अर्थ · Hindi
दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया।।
- RCM 6.110.4Open verse →
बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी।।
अर्थ · Hindi
बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी।।
- RCM 6.110.5Open verse →
तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।
अर्थ · Hindi
तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।
- RCM 6.110.6Open verse →
अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।
अर्थ · Hindi
अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।
- RCM 6.110.7Open verse →
मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।
अर्थ · Hindi
मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।
- RCM 6.110.8Open verse →
जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।
अर्थ · Hindi
जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।
- RCM 6.110.9Open verse →
यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही।।
अर्थ · Hindi
यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही।।
- RCM 6.110.10Open verse →
अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरे मन बिसमय आवा।।
अर्थ · Hindi
अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरे मन बिसमय आवा।।
- RCM 6.110.11Open verse →
हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।
अर्थ · Hindi
हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।
- RCM 6.110.12Open verse →
भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।
अर्थ · Hindi
भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।
- RCM 6.111.1Open verse →
जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।।
अर्थ · Hindi
जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।।
- RCM 6.111.2Open verse →
भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।
अर्थ · Hindi
भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।
- RCM 6.111.3Open verse →
तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।।
अर्थ · Hindi
तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।।
- RCM 6.111.4Open verse →
जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।
अर्थ · Hindi
जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।
- RCM 6.111.5Open verse →
जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।
अर्थ · Hindi
जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।
- RCM 6.111.6Open verse →
अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।
अर्थ · Hindi
अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।
- RCM 6.111.7Open verse →
अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।।
अर्थ · Hindi
अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।।
- RCM 6.111.8Open verse →
रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।
अर्थ · Hindi
रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।
- RCM 6.111.9Open verse →
गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।।
अर्थ · Hindi
गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।।
- RCM 6.111.10Open verse →
भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।।
अर्थ · Hindi
भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।।
- RCM 6.111.11Open verse →
बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।
अर्थ · Hindi
बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।
- RCM 6.111.12Open verse →
भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।
अर्थ · Hindi
भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।
- RCM 6.111.13Open verse →
सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।।
अर्थ · Hindi
सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।।
- RCM 6.111.14Open verse →
सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।।
अर्थ · Hindi
सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।।
- RCM 6.111.15Open verse →
अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।
अर्थ · Hindi
अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।
- RCM 6.111.16Open verse →
इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।
अर्थ · Hindi
इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।
- RCM 6.111.17Open verse →
कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।
अर्थ · Hindi
कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।
- RCM 6.111.18Open verse →
धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।
अर्थ · Hindi
धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।
- RCM 6.111.19Open verse →
अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।
अर्थ · Hindi
अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।
- RCM 6.111.20Open verse →
जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।
अर्थ · Hindi
जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।
- RCM 6.111.21Open verse →
खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।।
अर्थ · Hindi
खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।।
- RCM 6.111.22Open verse →
नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेम सदा सुभदं।।
अर्थ · Hindi
नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेम सदा सुभदं।।
- RCM 6.112.1Open verse →
तेहि अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बिलोकि नयन जल छाए।।
अर्थ · Hindi
तेहि अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बिलोकि नयन जल छाए।।
- RCM 6.112.2Open verse →
अनुज सहित प्रभु बंदन कीन्हा। आसिरबाद पिताँ तब दीन्हा।।
अर्थ · Hindi
अनुज सहित प्रभु बंदन कीन्हा। आसिरबाद पिताँ तब दीन्हा।।
- RCM 6.112.3Open verse →
तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।
अर्थ · Hindi
तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।
- RCM 6.112.4Open verse →
सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।
अर्थ · Hindi
सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।
- RCM 6.112.5Open verse →
रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।
अर्थ · Hindi
रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।
- RCM 6.112.6Open verse →
ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।
अर्थ · Hindi
ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।
- RCM 6.112.7Open verse →
सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।
अर्थ · Hindi
सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।
- RCM 6.112.8Open verse →
बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।
अर्थ · Hindi
बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।
- RCM 6.113.1Open verse →
जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम।।
अर्थ · Hindi
जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम।।
- RCM 6.113.2Open verse →
धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप।।1।।
अर्थ · Hindi
धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप।।1।।
- RCM 6.113.3Open verse →
जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।।
अर्थ · Hindi
जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।।
- RCM 6.113.4Open verse →
यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ।।2।।
अर्थ · Hindi
यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ।।2।।
- RCM 6.113.5Open verse →
जय हरन धरनी भार। महिमा उदार अपार।।
अर्थ · Hindi
जय हरन धरनी भार। महिमा उदार अपार।।
- RCM 6.113.6Open verse →
जय रावनारि कृपाल। किए जातुधान बिहाल।।3।।
अर्थ · Hindi
जय रावनारि कृपाल। किए जातुधान बिहाल।।3।।
- RCM 6.113.7Open verse →
लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।
अर्थ · Hindi
लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।
- RCM 6.113.8Open verse →
मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।
अर्थ · Hindi
मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।
- RCM 6.113.9Open verse →
परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।
अर्थ · Hindi
परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।
- RCM 6.113.10Open verse →
अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।
अर्थ · Hindi
अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।
- RCM 6.113.11Open verse →
मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।
अर्थ · Hindi
मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।
- RCM 6.113.12Open verse →
अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।
अर्थ · Hindi
अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।
- RCM 6.113.13Open verse →
कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।
अर्थ · Hindi
कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।
- RCM 6.113.14Open verse →
मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।
अर्थ · Hindi
मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।
- RCM 6.113.15Open verse →
बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।।
अर्थ · Hindi
बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।।
- RCM 6.113.16Open verse →
मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास।।8।।
अर्थ · Hindi
मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास।।8।।
- RCM 6.113.17Open verse →
दे भक्ति रमानिवास त्रास हरन सरन सुखदायकं।
अर्थ · Hindi
दे भक्ति रमानिवास त्रास हरन सरन सुखदायकं।
- RCM 6.113.18Open verse →
सुख धाम राम नमामि काम अनेक छबि रघुनायकं।।
अर्थ · Hindi
सुख धाम राम नमामि काम अनेक छबि रघुनायकं।।
- RCM 6.113.19Open verse →
सुर बृंद रंजन द्वंद भंजन मनुज तनु अतुलितबलं।
अर्थ · Hindi
सुर बृंद रंजन द्वंद भंजन मनुज तनु अतुलितबलं।
- RCM 6.113.20Open verse →
ब्रह्मादि संकर सेब्य राम नमामि करुना कोमलं।।
अर्थ · Hindi
ब्रह्मादि संकर सेब्य राम नमामि करुना कोमलं।।
- RCM 6.114.1Open verse →
सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।
अर्थ · Hindi
सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।
- RCM 6.114.2Open verse →
मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।
अर्थ · Hindi
मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।
- RCM 6.114.3Open verse →
सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।
अर्थ · Hindi
सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।
- RCM 6.114.4Open verse →
प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।
अर्थ · Hindi
प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।
- RCM 6.114.5Open verse →
सुधा बरषि कपि भालु जिआए। हरषि उठे सब प्रभु पहिं आए।।
अर्थ · Hindi
सुधा बरषि कपि भालु जिआए। हरषि उठे सब प्रभु पहिं आए।।
- RCM 6.114.6Open verse →
सुधाबृष्टि भै दुहु दल ऊपर। जिए भालु कपि नहिं रजनीचर।।
अर्थ · Hindi
सुधाबृष्टि भै दुहु दल ऊपर। जिए भालु कपि नहिं रजनीचर।।
- RCM 6.114.7Open verse →
रामाकार भए तिन्ह के मन। मुक्त भए छूटे भव बंधन।।
अर्थ · Hindi
रामाकार भए तिन्ह के मन। मुक्त भए छूटे भव बंधन।।
- RCM 6.114.8Open verse →
सुर अंसिक सब कपि अरु रीछा। जिए सकल रघुपति कीं ईछा।।
अर्थ · Hindi
सुर अंसिक सब कपि अरु रीछा। जिए सकल रघुपति कीं ईछा।।
- RCM 6.114.9Open verse →
राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।
अर्थ · Hindi
राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।
- RCM 6.114.10Open verse →
खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।
अर्थ · Hindi
खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।
- RCM 6.115.1Open verse →
मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।
अर्थ · Hindi
मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।
- RCM 6.115.2Open verse →
मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।
अर्थ · Hindi
मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।
- RCM 6.115.3Open verse →
अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।
अर्थ · Hindi
अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।
- RCM 6.115.4Open verse →
काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।
अर्थ · Hindi
काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।
- RCM 6.115.5Open verse →
बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन।।
अर्थ · Hindi
बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन।।
- RCM 6.115.6Open verse →
भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर।।3।।
अर्थ · Hindi
भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर।।3।।
- RCM 6.115.7Open verse →
स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।
अर्थ · Hindi
स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।
- RCM 6.115.8Open verse →
अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।
अर्थ · Hindi
अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।
- RCM 6.115.9Open verse →
मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।
अर्थ · Hindi
मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।
- RCM 6.116.1Open verse →
करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।
अर्थ · Hindi
करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।
- RCM 6.116.2Open verse →
नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।
अर्थ · Hindi
नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।
- RCM 6.116.3Open verse →
सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।।
अर्थ · Hindi
सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।।
- RCM 6.116.4Open verse →
दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।।
अर्थ · Hindi
दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।।
- RCM 6.116.5Open verse →
अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।
अर्थ · Hindi
अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।
- RCM 6.116.6Open verse →
देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।
अर्थ · Hindi
देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।
- RCM 6.116.7Open verse →
सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।
अर्थ · Hindi
सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।
- RCM 6.116.8Open verse →
सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।
अर्थ · Hindi
सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।
- RCM 6.117.1Open verse →
सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।
अर्थ · Hindi
सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।
- RCM 6.117.2Open verse →
बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।
अर्थ · Hindi
बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।
- RCM 6.117.3Open verse →
बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो।।
अर्थ · Hindi
बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो।।
- RCM 6.117.4Open verse →
लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा।।
अर्थ · Hindi
लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा।।
- RCM 6.117.5Open verse →
चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन।।
अर्थ · Hindi
चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन।।
- RCM 6.117.6Open verse →
नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही।।
अर्थ · Hindi
नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही।।
- RCM 6.117.7Open verse →
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।
अर्थ · Hindi
जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।
- RCM 6.117.8Open verse →
हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।
अर्थ · Hindi
हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।
- RCM 6.118.1Open verse →
भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।
अर्थ · Hindi
भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।
- RCM 6.118.2Open verse →
नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।
अर्थ · Hindi
नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।
- RCM 6.118.3Open verse →
चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया।।
अर्थ · Hindi
चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया।।
- RCM 6.118.4Open verse →
तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो।।
अर्थ · Hindi
तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो।।
- RCM 6.118.5Open verse →
निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।
अर्थ · Hindi
निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।
- RCM 6.118.6Open verse →
सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।
अर्थ · Hindi
सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।
- RCM 6.118.7Open verse →
प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।
अर्थ · Hindi
प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।
- RCM 6.118.8Open verse →
दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।
अर्थ · Hindi
दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।
- RCM 6.118.9Open verse →
सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।
अर्थ · Hindi
सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।
- RCM 6.118.10Open verse →
देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।
अर्थ · Hindi
देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।
- RCM 6.119.1Open verse →
अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई।।
अर्थ · Hindi
अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई।।
- RCM 6.119.2Open verse →
मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो।।
अर्थ · Hindi
मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो।।
- RCM 6.119.3Open verse →
चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई।।
अर्थ · Hindi
चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई।।
- RCM 6.119.4Open verse →
सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर।।
अर्थ · Hindi
सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर।।
- RCM 6.119.5Open verse →
राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी।।
अर्थ · Hindi
राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी।।
- RCM 6.119.6Open verse →
रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर।।
अर्थ · Hindi
रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर।।
- RCM 6.119.7Open verse →
परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।
अर्थ · Hindi
परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।
- RCM 6.119.8Open verse →
सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।
अर्थ · Hindi
सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।
- RCM 6.119.9Open verse →
कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।
अर्थ · Hindi
कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।
- RCM 6.119.10Open verse →
हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे।।
अर्थ · Hindi
हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे।।
- RCM 6.119.11Open verse →
कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।
अर्थ · Hindi
कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।
- RCM 6.119.12Open verse →
इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।
अर्थ · Hindi
इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।
- RCM 6.119.13Open verse →
सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम।।119(क)।।
अर्थ · Hindi
सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम।।119(क)।।
- RCM 6.119.14Open verse →
जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।
अर्थ · Hindi
जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।
- RCM 6.119.15Open verse →
सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।
अर्थ · Hindi
सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।
- RCM 6.120.1Open verse →
तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा।।
अर्थ · Hindi
तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा।।
- RCM 6.120.2Open verse →
कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना।।
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कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना।।
- RCM 6.120.3Open verse →
सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।
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सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।
- RCM 6.120.4Open verse →
तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।
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तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।
- RCM 6.120.5Open verse →
बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।
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बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।
- RCM 6.120.6Open verse →
पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।
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पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।
- RCM 6.120.7Open verse →
तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।
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तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।
- RCM 6.120.8Open verse →
देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।
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देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।
- RCM 6.120.9Open verse →
पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।
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पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।
- RCM 6.121.1Open verse →
प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।
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प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।
- RCM 6.121.2Open verse →
भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।
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भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।
- RCM 6.121.3Open verse →
तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।
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तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।
- RCM 6.121.4Open verse →
नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।
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नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।
- RCM 6.121.5Open verse →
मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी।।
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मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी।।
- RCM 6.121.6Open verse →
इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।
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इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।
- RCM 6.121.7Open verse →
सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।
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सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।
- RCM 6.121.8Open verse →
तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।
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तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।
- RCM 6.121.9Open verse →
दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।
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दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।
- RCM 6.121.10Open verse →
सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।
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सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।
- RCM 6.121.11Open verse →
प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।
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प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।
- RCM 6.121.12Open verse →
प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।
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प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।