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Ramcharitmanas · अध्याय 6

Lanka Kanda

लङ्काकाण्ड

The bridge to Lanka, the great war, the fall of Ravana, return to Ayodhya. (Called Yuddha Kanda in some Ramayana traditions.)

  1. यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।।

    अर्थ · Hindi

    यह लघु जलधि तरत कति बारा। अस सुनि पुनि कह पवनकुमारा।।

  2. प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रताप बड़वानल भारी। सोषेउ प्रथम पयोनिधि बारी।।

  3. तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।

    अर्थ · Hindi

    तब रिपु नारी रुदन जल धारा। भरेउ बहोरि भयउ तेहिं खारा।।

  4. सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि अति उकुति पवनसुत केरी। हरषे कपि रघुपति तन हेरी।।

  5. जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    जामवंत बोले दोउ भाई। नल नीलहि सब कथा सुनाई।।

  6. राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रताप सुमिरि मन माहीं। करहु सेतु प्रयास कछु नाहीं।।

  7. बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    बोलि लिए कपि निकर बहोरी। सकल सुनहु बिनती कछु मोरी।।

  8. राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।।

    अर्थ · Hindi

    राम चरन पंकज उर धरहू। कौतुक एक भालु कपि करहू।।

  9. धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।

    अर्थ · Hindi

    धावहु मर्कट बिकट बरूथा। आनहु बिटप गिरिन्ह के जूथा।।

  10. RCM 6.1.10Open verse →

    सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि कपि भालु चले करि हूहा। जय रघुबीर प्रताप समूहा।।

  11. RCM 6.1.11Open verse →

    अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।

    अर्थ · Hindi

    अति उतंग गिरि पादप लीलहिं लेहिं उठाइ।

  12. RCM 6.1.12Open verse →

    आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।

    अर्थ · Hindi

    आनि देहिं नल नीलहि रचहिं ते सेतु बनाइ।।1।।

  13. सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सैल बिसाल आनि कपि देहीं। कंदुक इव नल नील ते लेहीं।।

  14. देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।।

    अर्थ · Hindi

    देखि सेतु अति सुंदर रचना। बिहसि कृपानिधि बोले बचना।।

  15. परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।

    अर्थ · Hindi

    परम रम्य उत्तम यह धरनी। महिमा अमित जाइ नहिं बरनी।।

  16. करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।

    अर्थ · Hindi

    करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना।।

  17. सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए।।

  18. लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।

    अर्थ · Hindi

    लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा।।

  19. सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।

    अर्थ · Hindi

    सिव द्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न पावा।।

  20. संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    संकर बिमुख भगति चह मोरी। सो नारकी मूढ़ मति थोरी।।

  21. संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।

    अर्थ · Hindi

    संकर प्रिय मम द्रोही सिव द्रोही मम दास।

  22. RCM 6.2.10Open verse →

    ते नर करहि कलप भरि धोर नरक महुँ बास।।2।।

    अर्थ · Hindi

    ते नर करहि कलप भरि धोर नरक महुँ बास।।2।।

  23. जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जे रामेस्वर दरसनु करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं।।

  24. जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।

    अर्थ · Hindi

    जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि।।

  25. होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।

    अर्थ · Hindi

    होइ अकाम जो छल तजि सेइहि। भगति मोरि तेहि संकर देइहि।।

  26. मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।।

    अर्थ · Hindi

    मम कृत सेतु जो दरसनु करिही। सो बिनु श्रम भवसागर तरिही।।

  27. राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।

    अर्थ · Hindi

    राम बचन सब के जिय भाए। मुनिबर निज निज आश्रम आए।।

  28. गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    गिरिजा रघुपति कै यह रीती। संतत करहिं प्रनत पर प्रीती।।

  29. बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।

    अर्थ · Hindi

    बाँधा सेतु नील नल नागर। राम कृपाँ जसु भयउ उजागर।।

  30. बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।

    अर्थ · Hindi

    बूड़हिं आनहि बोरहिं जेई। भए उपल बोहित सम तेई।।

  31. महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।

    अर्थ · Hindi

    महिमा यह न जलधि कइ बरनी। पाहन गुन न कपिन्ह कइ करनी।।

  32. RCM 6.3.10Open verse →

    श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान।

    अर्थ · Hindi

    श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान।

  33. RCM 6.3.11Open verse →

    ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।।3।।

    अर्थ · Hindi

    ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन।।3।।

  34. बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।

    अर्थ · Hindi

    बाँधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा। देखि कृपानिधि के मन भावा।।

  35. चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    चली सेन कछु बरनि न जाई। गर्जहिं मर्कट भट समुदाई।।

  36. सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।

    अर्थ · Hindi

    सेतुबंध ढिग चढ़ि रघुराई। चितव कृपाल सिंधु बहुताई।।

  37. देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।

    अर्थ · Hindi

    देखन कहुँ प्रभु करुना कंदा। प्रगट भए सब जलचर बृंदा।।

  38. मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    मकर नक्र नाना झष ब्याला। सत जोजन तन परम बिसाला।।

  39. अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अइसेउ एक तिन्हहि जे खाहीं। एकन्ह कें डर तेपि डेराहीं।।

  40. प्रभुहि बिलोकहिं टरहिं न टारे। मन हरषित सब भए सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुहि बिलोकहिं टरहिं न टारे। मन हरषित सब भए सुखारे।।

  41. तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह की ओट न देखिअ बारी। मगन भए हरि रूप निहारी।।

  42. चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।

    अर्थ · Hindi

    चला कटकु प्रभु आयसु पाई। को कहि सक कपि दल बिपुलाई।।

  43. RCM 6.4.10Open verse →

    सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं।

    अर्थ · Hindi

    सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं।

  44. RCM 6.4.11Open verse →

    अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं।।4।।

    अर्थ · Hindi

    अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं।।4।।

  45. अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई।।

  46. सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा।।

  47. सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    सिंधु पार प्रभु डेरा कीन्हा। सकल कपिन्ह कहुँ आयसु दीन्हा।।

  48. खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।

    अर्थ · Hindi

    खाहु जाइ फल मूल सुहाए। सुनत भालु कपि जहँ तहँ धाए।।

  49. सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    सब तरु फरे राम हित लागी। रितु अरु कुरितु काल गति त्यागी।।

  50. खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    खाहिं मधुर फल बटप हलावहिं। लंका सन्मुख सिखर चलावहिं।।

  51. जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ कहुँ फिरत निसाचर पावहिं। घेरि सकल बहु नाच नचावहिं।।

  52. दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।

    अर्थ · Hindi

    दसनन्हि काटि नासिका काना। कहि प्रभु सुजसु देहिं तब जाना।।

  53. जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह कर नासा कान निपाता। तिन्ह रावनहि कही सब बाता।।

  54. RCM 6.5.10Open verse →

    सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत श्रवन बारिधि बंधाना। दस मुख बोलि उठा अकुलाना।।

  55. RCM 6.5.11Open verse →

    बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस।

    अर्थ · Hindi

    बांध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस।

  56. RCM 6.5.12Open verse →

    सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस।।5।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस।।5।।

  57. निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।

    अर्थ · Hindi

    निज बिकलता बिचारि बहोरी। बिहँसि गयउ ग्रह करि भय भोरी।।

  58. मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरीं सुन्यो प्रभु आयो। कौतुकहीं पाथोधि बँधायो।।

  59. कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।

    अर्थ · Hindi

    कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।

  60. चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।

    अर्थ · Hindi

    चरन नाइ सिरु अंचलु रोपा। सुनहु बचन पिय परिहरि कोपा।।

  61. नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ बयरु कीजे ताही सों। बुधि बल सकिअ जीति जाही सों।।

  62. तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हहि रघुपतिहि अंतर कैसा। खलु खद्योत दिनकरहि जैसा।।

  63. अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।

    अर्थ · Hindi

    अतिबल मधु कैटभ जेहिं मारे। महाबीर दितिसुत संघारे।।

  64. जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बलि बाँधि सहजभुज मारा। सोइ अवतरेउ हरन महि भारा।।

  65. तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    तासु बिरोध न कीजिअ नाथा। काल करम जिव जाकें हाथा।।

  66. RCM 6.6.10Open verse →

    रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।

    अर्थ · Hindi

    रामहि सौपि जानकी नाइ कमल पद माथ।

  67. RCM 6.6.11Open verse →

    सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।

    अर्थ · Hindi

    सुत कहुँ राज समर्पि बन जाइ भजिअ रघुनाथ।।6।।

  68. नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ दीनदयाल रघुराई। बाघउ सनमुख गएँ न खाई।।

  69. चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।

    अर्थ · Hindi

    चाहिअ करन सो सब करि बीते। तुम्ह सुर असुर चराचर जीते।।

  70. संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।

    अर्थ · Hindi

    संत कहहिं असि नीति दसानन। चौथेंपन जाइहि नृप कानन।।

  71. तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।

    अर्थ · Hindi

    तासु भजन कीजिअ तहँ भर्ता। जो कर्ता पालक संहर्ता।।

  72. सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ रघुवीर प्रनत अनुरागी। भजहु नाथ ममता सब त्यागी।।

  73. मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनिबर जतनु करहिं जेहि लागी। भूप राजु तजि होहिं बिरागी।।

  74. सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ कोसलधीस रघुराया। आयउ करन तोहि पर दाया।।

  75. जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पिय मानहु मोर सिखावन। सुजसु होइ तिहुँ पुर अति पावन।।

  76. अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि नयन नीर भरि गहि पद कंपित गात।

  77. RCM 6.7.10Open verse →

    नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ भजहु रघुनाथहि अचल होइ अहिवात।।7।।

  78. तब रावन मयसुता उठाई। कहै लाग खल निज प्रभुताई।।

    अर्थ · Hindi

    तब रावन मयसुता उठाई। कहै लाग खल निज प्रभुताई।।

  79. सुनु तै प्रिया बृथा भय माना। जग जोधा को मोहि समाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु तै प्रिया बृथा भय माना। जग जोधा को मोहि समाना।।

  80. बरुन कुबेर पवन जम काला। भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला।।

    अर्थ · Hindi

    बरुन कुबेर पवन जम काला। भुज बल जितेउँ सकल दिगपाला।।

  81. देव दनुज नर सब बस मोरें। कवन हेतु उपजा भय तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    देव दनुज नर सब बस मोरें। कवन हेतु उपजा भय तोरें।।

  82. नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई। सभाँ बहोरि बैठ सो जाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाना बिधि तेहि कहेसि बुझाई। सभाँ बहोरि बैठ सो जाई।।

  83. मंदोदरीं हदयँ अस जाना। काल बस्य उपजा अभिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरीं हदयँ अस जाना। काल बस्य उपजा अभिमाना।।

  84. सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।

    अर्थ · Hindi

    सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।

  85. कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।

  86. कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।

  87. RCM 6.8.10Open verse →

    सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।

    अर्थ · Hindi

    सब के बचन श्रवन सुनि कह प्रहस्त कर जोरि।

  88. RCM 6.8.11Open verse →

    निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।

    अर्थ · Hindi

    निति बिरोध न करिअ प्रभु मत्रिंन्ह मति अति थोरि।।8।।

  89. कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    कहहिं सचिव सठ ठकुरसोहाती। नाथ न पूर आव एहि भाँती।।

  90. बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।

    अर्थ · Hindi

    बारिधि नाघि एक कपि आवा। तासु चरित मन महुँ सबु गावा।।

  91. छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।

    अर्थ · Hindi

    छुधा न रही तुम्हहि तब काहू। जारत नगरु कस न धरि खाहू।।

  92. सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत नीक आगें दुख पावा। सचिवन अस मत प्रभुहि सुनावा।।

  93. जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बारीस बँधायउ हेला। उतरेउ सेन समेत सुबेला।।

  94. सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।।

    अर्थ · Hindi

    सो भनु मनुज खाब हम भाई। बचन कहहिं सब गाल फुलाई।।

  95. तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।

    अर्थ · Hindi

    तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर।।

  96. प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं।।

  97. बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।।

    अर्थ · Hindi

    बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे।।

  98. RCM 6.9.10Open verse →

    प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती।।

  99. RCM 6.9.11Open verse →

    नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।

    अर्थ · Hindi

    नारि पाइ फिरि जाहिं जौं तौ न बढ़ाइअ रारि।

  100. RCM 6.9.12Open verse →

    नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।

    अर्थ · Hindi

    नाहिं त सन्मुख समर महि तात करिअ हठि मारि।।9।।

  101. RCM 6.10.1Open verse →

    यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    यह मत जौं मानहु प्रभु मोरा। उभय प्रकार सुजसु जग तोरा।।

  102. RCM 6.10.2Open verse →

    सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।

    अर्थ · Hindi

    सुत सन कह दसकंठ रिसाई। असि मति सठ केहिं तोहि सिखाई।।

  103. RCM 6.10.3Open verse →

    अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।

    अर्थ · Hindi

    अबहीं ते उर संसय होई। बेनुमूल सुत भयहु घमोई।।

  104. RCM 6.10.4Open verse →

    सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि पितु गिरा परुष अति घोरा। चला भवन कहि बचन कठोरा।।

  105. RCM 6.10.5Open verse →

    हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    हित मत तोहि न लागत कैसें। काल बिबस कहुँ भेषज जैसें।।

  106. RCM 6.10.6Open verse →

    संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।

    अर्थ · Hindi

    संध्या समय जानि दससीसा। भवन चलेउ निरखत भुज बीसा।।

  107. RCM 6.10.7Open verse →

    लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा।।

    अर्थ · Hindi

    लंका सिखर उपर आगारा। अति बिचित्र तहँ होइ अखारा।।

  108. RCM 6.10.8Open verse →

    बैठ जाइ तेही मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन।।

    अर्थ · Hindi

    बैठ जाइ तेही मंदिर रावन। लागे किंनर गुन गन गावन।।

  109. RCM 6.10.9Open verse →

    बाजहिं ताल पखाउज बीना। नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं ताल पखाउज बीना। नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना।।

  110. RCM 6.10.10Open verse →

    सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।

    अर्थ · Hindi

    सुनासीर सत सरिस सो संतत करइ बिलास।

  111. RCM 6.10.11Open verse →

    परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।

    अर्थ · Hindi

    परम प्रबल रिपु सीस पर तद्यपि सोच न त्रास।।10।।

  112. RCM 6.11.1Open verse →

    इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा।।

  113. RCM 6.11.2Open verse →

    सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी।।

  114. RCM 6.11.3Open verse →

    तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ तरु किसलय सुमन सुहाए। लछिमन रचि निज हाथ डसाए।।

  115. RCM 6.11.4Open verse →

    ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।

    अर्थ · Hindi

    ता पर रूचिर मृदुल मृगछाला। तेहीं आसान आसीन कृपाला।।

  116. RCM 6.11.5Open verse →

    प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु कृत सीस कपीस उछंगा। बाम दहिन दिसि चाप निषंगा।।

  117. RCM 6.11.6Open verse →

    दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।

    अर्थ · Hindi

    दुहुँ कर कमल सुधारत बाना। कह लंकेस मंत्र लगि काना।।

  118. RCM 6.11.7Open verse →

    बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    बड़भागी अंगद हनुमाना। चरन कमल चापत बिधि नाना।।

  119. RCM 6.11.8Open verse →

    प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पाछें लछिमन बीरासन। कटि निषंग कर बान सरासन।।

  120. RCM 6.11.9Open verse →

    एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि कृपा रूप गुन धाम रामु आसीन।

  121. RCM 6.11.10Open verse →

    धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य ते नर एहिं ध्यान जे रहत सदा लयलीन।।11(क)।।

  122. RCM 6.11.11Open verse →

    पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।

    अर्थ · Hindi

    पूरब दिसा बिलोकि प्रभु देखा उदित मंयक।

  123. RCM 6.11.12Open verse →

    कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    कहत सबहि देखहु ससिहि मृगपति सरिस असंक।।11(ख)।।

  124. RCM 6.12.1Open verse →

    पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।

    अर्थ · Hindi

    पूरब दिसि गिरिगुहा निवासी। परम प्रताप तेज बल रासी।।

  125. RCM 6.12.2Open verse →

    मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।

    अर्थ · Hindi

    मत्त नाग तम कुंभ बिदारी। ससि केसरी गगन बन चारी।।

  126. RCM 6.12.3Open verse →

    बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।

    अर्थ · Hindi

    बिथुरे नभ मुकुताहल तारा। निसि सुंदरी केर सिंगारा।।

  127. RCM 6.12.4Open verse →

    कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।

    अर्थ · Hindi

    कह प्रभु ससि महुँ मेचकताई। कहहु काह निज निज मति भाई।।

  128. RCM 6.12.5Open verse →

    कह सुग़ीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई।।

    अर्थ · Hindi

    कह सुग़ीव सुनहु रघुराई। ससि महुँ प्रगट भूमि कै झाँई।।

  129. RCM 6.12.6Open verse →

    मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई।।

    अर्थ · Hindi

    मारेउ राहु ससिहि कह कोई। उर महँ परी स्यामता सोई।।

  130. RCM 6.12.7Open verse →

    कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह जब बिधि रति मुख कीन्हा। सार भाग ससि कर हरि लीन्हा।।

  131. RCM 6.12.8Open verse →

    छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    छिद्र सो प्रगट इंदु उर माहीं। तेहि मग देखिअ नभ परिछाहीं।।

  132. RCM 6.12.9Open verse →

    प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु कह गरल बंधु ससि केरा। अति प्रिय निज उर दीन्ह बसेरा।।

  133. RCM 6.12.10Open verse →

    बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    बिष संजुत कर निकर पसारी। जारत बिरहवंत नर नारी।।

  134. RCM 6.12.11Open verse →

    कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।

    अर्थ · Hindi

    कह हनुमंत सुनहु प्रभु ससि तुम्हारा प्रिय दास।

  135. RCM 6.12.12Open verse →

    तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।

    अर्थ · Hindi

    तव मूरति बिधु उर बसति सोइ स्यामता अभास।।12(क)।।

  136. RCM 6.12.13Open verse →

    पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।

    अर्थ · Hindi

    पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।

  137. RCM 6.12.14Open verse →

    दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान।।12(ख)।।

  138. RCM 6.13.1Open verse →

    देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।।

    अर्थ · Hindi

    देखु बिभीषन दच्छिन आसा। घन घंमड दामिनि बिलासा।।

  139. RCM 6.13.2Open verse →

    मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।।

    अर्थ · Hindi

    मधुर मधुर गरजइ घन घोरा। होइ बृष्टि जनि उपल कठोरा।।

  140. RCM 6.13.3Open verse →

    कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।।

    अर्थ · Hindi

    कहत बिभीषन सुनहु कृपाला। होइ न तड़ित न बारिद माला।।

  141. RCM 6.13.4Open verse →

    लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।।

    अर्थ · Hindi

    लंका सिखर उपर आगारा। तहँ दसकंघर देख अखारा।।

  142. RCM 6.13.5Open verse →

    छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।।

    अर्थ · Hindi

    छत्र मेघडंबर सिर धारी। सोइ जनु जलद घटा अति कारी।।

  143. RCM 6.13.6Open verse →

    मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरी श्रवन ताटंका। सोइ प्रभु जनु दामिनी दमंका।।

  144. RCM 6.13.7Open verse →

    बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं ताल मृदंग अनूपा। सोइ रव मधुर सुनहु सुरभूपा।।

  145. RCM 6.13.8Open verse →

    प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु मुसुकान समुझि अभिमाना। चाप चढ़ाइ बान संधाना।।

  146. RCM 6.13.9Open verse →

    छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।

    अर्थ · Hindi

    छत्र मुकुट ताटंक तब हते एकहीं बान।

  147. RCM 6.13.10Open verse →

    सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।

    अर्थ · Hindi

    सबकें देखत महि परे मरमु न कोऊ जान।।13(क)।।

  148. RCM 6.13.11Open verse →

    अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।

    अर्थ · Hindi

    अस कौतुक करि राम सर प्रबिसेउ आइ निषंग।

  149. RCM 6.13.12Open verse →

    रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    रावन सभा ससंक सब देखि महा रसभंग।।13(ख)।।

  150. RCM 6.14.1Open verse →

    कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।

    अर्थ · Hindi

    कंप न भूमि न मरुत बिसेषा। अस्त्र सस्त्र कछु नयन न देखा।।

  151. RCM 6.14.2Open verse →

    सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।

    अर्थ · Hindi

    सोचहिं सब निज हृदय मझारी। असगुन भयउ भयंकर भारी।।

  152. RCM 6.14.3Open verse →

    दसमुख देखि सभा भय पाई। बिहसि बचन कह जुगुति बनाई।।

    अर्थ · Hindi

    दसमुख देखि सभा भय पाई। बिहसि बचन कह जुगुति बनाई।।

  153. RCM 6.14.4Open verse →

    सिरउ गिरे संतत सुभ जाही। मुकुट परे कस असगुन ताही।।

    अर्थ · Hindi

    सिरउ गिरे संतत सुभ जाही। मुकुट परे कस असगुन ताही।।

  154. RCM 6.14.5Open verse →

    सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।

    अर्थ · Hindi

    सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।

  155. RCM 6.14.6Open verse →

    मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।

  156. RCM 6.14.7Open verse →

    सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।

    अर्थ · Hindi

    सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।

  157. RCM 6.14.8Open verse →

    कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।

    अर्थ · Hindi

    कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।

  158. RCM 6.14.9Open verse →

    बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।

    अर्थ · Hindi

    बिस्वरुप रघुबंस मनि करहु बचन बिस्वासु।

  159. RCM 6.14.10Open verse →

    लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।

    अर्थ · Hindi

    लोक कल्पना बेद कर अंग अंग प्रति जासु।।14।।

  160. RCM 6.15.1Open verse →

    पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    पद पाताल सीस अज धामा। अपर लोक अँग अँग बिश्रामा।।

  161. RCM 6.15.2Open verse →

    भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।

    अर्थ · Hindi

    भृकुटि बिलास भयंकर काला। नयन दिवाकर कच घन माला।।

  162. RCM 6.15.3Open verse →

    जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    जासु घ्रान अस्विनीकुमारा। निसि अरु दिवस निमेष अपारा।।

  163. RCM 6.15.4Open verse →

    श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।

    अर्थ · Hindi

    श्रवन दिसा दस बेद बखानी। मारुत स्वास निगम निज बानी।।

  164. RCM 6.15.5Open verse →

    अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला।।

    अर्थ · Hindi

    अधर लोभ जम दसन कराला। माया हास बाहु दिगपाला।।

  165. RCM 6.15.6Open verse →

    आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा।।

    अर्थ · Hindi

    आनन अनल अंबुपति जीहा। उतपति पालन प्रलय समीहा।।

  166. RCM 6.15.7Open verse →

    रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।

    अर्थ · Hindi

    रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।

  167. RCM 6.15.8Open verse →

    उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।

    अर्थ · Hindi

    उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।

  168. RCM 6.15.9Open verse →

    अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।

    अर्थ · Hindi

    अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।

  169. RCM 6.15.10Open verse →

    मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।

    अर्थ · Hindi

    मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान।।15(क)।।

  170. RCM 6.15.11Open verse →

    अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ।

  171. RCM 6.15.12Open verse →

    प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ।।15(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ।।15(ख)।।

  172. RCM 6.16.1Open verse →

    बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिहँसा नारि बचन सुनि काना। अहो मोह महिमा बलवाना।।

  173. RCM 6.16.2Open verse →

    नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    नारि सुभाउ सत्य सब कहहीं। अवगुन आठ सदा उर रहहीं।।

  174. RCM 6.16.3Open verse →

    साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।।

    अर्थ · Hindi

    साहस अनृत चपलता माया। भय अबिबेक असौच अदाया।।

  175. RCM 6.16.4Open verse →

    रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा।।

    अर्थ · Hindi

    रिपु कर रुप सकल तैं गावा। अति बिसाल भय मोहि सुनावा।।

  176. RCM 6.16.5Open verse →

    सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें।।

    अर्थ · Hindi

    सो सब प्रिया सहज बस मोरें। समुझि परा प्रसाद अब तोरें।।

  177. RCM 6.16.6Open verse →

    जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई।।

    अर्थ · Hindi

    जानिउँ प्रिया तोरि चतुराई। एहि बिधि कहहु मोरि प्रभुताई।।

  178. RCM 6.16.7Open verse →

    तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।

    अर्थ · Hindi

    तव बतकही गूढ़ मृगलोचनि। समुझत सुखद सुनत भय मोचनि।।

  179. RCM 6.16.8Open verse →

    मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरि मन महुँ अस ठयऊ। पियहि काल बस मतिभ्रम भयऊ।।

  180. RCM 6.16.9Open verse →

    एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि करत बिनोद बहु प्रात प्रगट दसकंध।

  181. RCM 6.16.10Open verse →

    सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।

    अर्थ · Hindi

    सहज असंक लंकपति सभाँ गयउ मद अंध।।16(क)।।

  182. RCM 6.16.11Open verse →

    फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।

    अर्थ · Hindi

    फूलह फरइ न बेत जदपि सुधा बरषहिं जलद।

  183. RCM 6.16.12Open verse →

    मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    मूरुख हृदयँ न चेत जौं गुर मिलहिं बिरंचि सम।।16(ख)।।

  184. RCM 6.17.1Open verse →

    इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ प्रात जागे रघुराई। पूछा मत सब सचिव बोलाई।।

  185. RCM 6.17.2Open verse →

    कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु बेगि का करिअ उपाई। जामवंत कह पद सिरु नाई।।

  186. RCM 6.17.3Open verse →

    सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सर्बग्य सकल उर बासी। बुधि बल तेज धर्म गुन रासी।।

  187. RCM 6.17.4Open verse →

    मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा।।

    अर्थ · Hindi

    मंत्र कहउँ निज मति अनुसारा। दूत पठाइअ बालिकुमारा।।

  188. RCM 6.17.5Open verse →

    नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    नीक मंत्र सब के मन माना। अंगद सन कह कृपानिधाना।।

  189. RCM 6.17.6Open verse →

    बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।

    अर्थ · Hindi

    बालितनय बुधि बल गुन धामा। लंका जाहु तात मम कामा।।

  190. RCM 6.17.7Open verse →

    बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    बहुत बुझाइ तुम्हहि का कहऊँ। परम चतुर मैं जानत अहऊँ।।

  191. RCM 6.17.8Open verse →

    काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।

    अर्थ · Hindi

    काजु हमार तासु हित होई। रिपु सन करेहु बतकही सोई।।

  192. RCM 6.17.9Open verse →

    प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु अग्या धरि सीस चरन बंदि अंगद उठेउ।

  193. RCM 6.17.10Open verse →

    सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ गुन सागर ईस राम कृपा जा पर करहु।।17(क)।।

  194. RCM 6.17.11Open verse →

    स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ।

    अर्थ · Hindi

    स्वयं सिद्ध सब काज नाथ मोहि आदरु दियउ।

  195. RCM 6.17.12Open verse →

    अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।।17(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि जुबराज तन पुलकित हरषित हियउ।।17(ख)।।

  196. RCM 6.18.1Open verse →

    बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    बंदि चरन उर धरि प्रभुताई। अंगद चलेउ सबहि सिरु नाई।।

  197. RCM 6.18.2Open verse →

    प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रताप उर सहज असंका। रन बाँकुरा बालिसुत बंका।।

  198. RCM 6.18.3Open verse →

    पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भैंटा।।

    अर्थ · Hindi

    पुर पैठत रावन कर बेटा। खेलत रहा सो होइ गै भैंटा।।

  199. RCM 6.18.4Open verse →

    बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    बातहिं बात करष बढ़ि आई। जुगल अतुल बल पुनि तरुनाई।।

  200. RCM 6.18.5Open verse →

    तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अंगद कहुँ लात उठाई। गहि पद पटकेउ भूमि भवाँई।।

  201. RCM 6.18.6Open verse →

    निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।

    अर्थ · Hindi

    निसिचर निकर देखि भट भारी। जहँ तहँ चले न सकहिं पुकारी।।

  202. RCM 6.18.7Open verse →

    एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं।।

    अर्थ · Hindi

    एक एक सन मरमु न कहहीं। समुझि तासु बध चुप करि रहहीं।।

  203. RCM 6.18.8Open verse →

    भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ कोलाहल नगर मझारी। आवा कपि लंका जेहीं जारी।।

  204. RCM 6.18.9Open verse →

    अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    अब धौं कहा करिहि करतारा। अति सभीत सब करहिं बिचारा।।

  205. RCM 6.18.10Open verse →

    बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु पूछें मगु देहिं दिखाई। जेहि बिलोक सोइ जाइ सुखाई।।

  206. RCM 6.18.11Open verse →

    गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।

    अर्थ · Hindi

    गयउ सभा दरबार तब सुमिरि राम पद कंज।

  207. RCM 6.18.12Open verse →

    सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।

    अर्थ · Hindi

    सिंह ठवनि इत उत चितव धीर बीर बल पुंज।।18।।

  208. RCM 6.19.1Open verse →

    तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत निसाचर एक पठावा। समाचार रावनहि जनावा।।

  209. RCM 6.19.2Open verse →

    सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बिहँसि बोला दससीसा। आनहु बोलि कहाँ कर कीसा।।

  210. RCM 6.19.3Open verse →

    आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए।।

    अर्थ · Hindi

    आयसु पाइ दूत बहु धाए। कपिकुंजरहि बोलि लै आए।।

  211. RCM 6.19.4Open verse →

    अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद दीख दसानन बैंसें। सहित प्रान कज्जलगिरि जैसें।।

  212. RCM 6.19.5Open verse →

    भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।

    अर्थ · Hindi

    भुजा बिटप सिर सृंग समाना। रोमावली लता जनु नाना।।

  213. RCM 6.19.6Open verse →

    मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।

    अर्थ · Hindi

    मुख नासिका नयन अरु काना। गिरि कंदरा खोह अनुमाना।।

  214. RCM 6.19.7Open verse →

    गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा।।

    अर्थ · Hindi

    गयउ सभाँ मन नेकु न मुरा। बालितनय अतिबल बाँकुरा।।

  215. RCM 6.19.8Open verse →

    उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    उठे सभासद कपि कहुँ देखी। रावन उर भा क्रौध बिसेषी।।

  216. RCM 6.19.9Open verse →

    जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।

    अर्थ · Hindi

    जथा मत्त गज जूथ महुँ पंचानन चलि जाइ।

  217. RCM 6.19.10Open verse →

    राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रताप सुमिरि मन बैठ सभाँ सिरु नाइ।।19।।

  218. RCM 6.20.1Open verse →

    कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।।

    अर्थ · Hindi

    कह दसकंठ कवन तैं बंदर। मैं रघुबीर दूत दसकंधर।।

  219. RCM 6.20.2Open verse →

    मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मम जनकहि तोहि रही मिताई। तव हित कारन आयउँ भाई।।

  220. RCM 6.20.3Open verse →

    उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती।।

  221. RCM 6.20.4Open verse →

    बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।

    अर्थ · Hindi

    बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा।।

  222. RCM 6.20.5Open verse →

    नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।

    अर्थ · Hindi

    नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा।।

  223. RCM 6.20.6Open verse →

    अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा।।

  224. RCM 6.20.7Open verse →

    दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।

    अर्थ · Hindi

    दसन गहहु तृन कंठ कुठारी। परिजन सहित संग निज नारी।।

  225. RCM 6.20.8Open verse →

    सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।

    अर्थ · Hindi

    सादर जनकसुता करि आगें। एहि बिधि चलहु सकल भय त्यागें।।

  226. RCM 6.20.9Open verse →

    प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।

    अर्थ · Hindi

    प्रनतपाल रघुबंसमनि त्राहि त्राहि अब मोहि।

  227. RCM 6.20.10Open verse →

    आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।

    अर्थ · Hindi

    आरत गिरा सुनत प्रभु अभय करैगो तोहि।।20।।

  228. RCM 6.21.1Open verse →

    रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    रे कपिपोत बोलु संभारी। मूढ़ न जानेहि मोहि सुरारी।।

  229. RCM 6.21.2Open verse →

    कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।

    अर्थ · Hindi

    कहु निज नाम जनक कर भाई। केहि नातें मानिऐ मिताई।।

  230. RCM 6.21.3Open verse →

    अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद नाम बालि कर बेटा। तासों कबहुँ भई ही भेटा।।

  231. RCM 6.21.4Open verse →

    अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद बचन सुनत सकुचाना। रहा बालि बानर मैं जाना।।

  232. RCM 6.21.5Open verse →

    अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद तहीं बालि कर बालक। उपजेहु बंस अनल कुल घालक।।

  233. RCM 6.21.6Open verse →

    गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु।।

    अर्थ · Hindi

    गर्भ न गयहु ब्यर्थ तुम्ह जायहु। निज मुख तापस दूत कहायहु।।

  234. RCM 6.21.7Open verse →

    अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।

    अर्थ · Hindi

    अब कहु कुसल बालि कहँ अहई। बिहँसि बचन तब अंगद कहई।।

  235. RCM 6.21.8Open verse →

    दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।

    अर्थ · Hindi

    दिन दस गएँ बालि पहिं जाई। बूझेहु कुसल सखा उर लाई।।

  236. RCM 6.21.9Open verse →

    राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।

    अर्थ · Hindi

    राम बिरोध कुसल जसि होई। सो सब तोहि सुनाइहि सोई।।

  237. RCM 6.21.10Open verse →

    सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सठ भेद होइ मन ताकें। श्रीरघुबीर हृदय नहिं जाकें।।

  238. RCM 6.21.11Open verse →

    हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस।

    अर्थ · Hindi

    हम कुल घालक सत्य तुम्ह कुल पालक दससीस।

  239. RCM 6.21.12Open verse →

    अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस।।21।

    अर्थ · Hindi

    अंधउ बधिर न अस कहहिं नयन कान तव बीस।।21।

  240. RCM 6.22.1Open verse →

    सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।

    अर्थ · Hindi

    सिव बिरंचि सुर मुनि समुदाई। चाहत जासु चरन सेवकाई।।

  241. RCM 6.22.2Open verse →

    तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।

    अर्थ · Hindi

    तासु दूत होइ हम कुल बोरा। अइसिहुँ मति उर बिहर न तोरा।।

  242. RCM 6.22.3Open verse →

    सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि कठोर बानी कपि केरी। कहत दसानन नयन तरेरी।।

  243. RCM 6.22.4Open verse →

    खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    खल तव कठिन बचन सब सहऊँ। नीति धर्म मैं जानत अहऊँ।।

  244. RCM 6.22.5Open verse →

    कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।

    अर्थ · Hindi

    कह कपि धर्मसीलता तोरी। हमहुँ सुनी कृत पर त्रिय चोरी।।

  245. RCM 6.22.6Open verse →

    देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखी नयन दूत रखवारी। बूड़ि न मरहु धर्म ब्रतधारी।।

  246. RCM 6.22.7Open verse →

    कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।

    अर्थ · Hindi

    कान नाक बिनु भगिनि निहारी। छमा कीन्हि तुम्ह धर्म बिचारी।।

  247. RCM 6.22.8Open verse →

    धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।

    अर्थ · Hindi

    धर्मसीलता तव जग जागी। पावा दरसु हमहुँ बड़भागी।।

  248. RCM 6.22.9Open verse →

    जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।

    अर्थ · Hindi

    जनि जल्पसि जड़ जंतु कपि सठ बिलोकु मम बाहु।

  249. RCM 6.22.10Open verse →

    लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।

    अर्थ · Hindi

    लोकपाल बल बिपुल ससि ग्रसन हेतु सब राहु।।22(क)।।

  250. RCM 6.22.11Open verse →

    पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।

    अर्थ · Hindi

    पुनि नभ सर मम कर निकर कमलन्हि पर करि बास।

  251. RCM 6.22.12Open verse →

    सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    सोभत भयउ मराल इव संभु सहित कैलास।।22(ख)।।

  252. RCM 6.23.1Open verse →

    तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद।।

  253. RCM 6.23.2Open verse →

    तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना।।

    अर्थ · Hindi

    तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना।।

  254. RCM 6.23.3Open verse →

    तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ।।

  255. RCM 6.23.4Open verse →

    जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा।।

  256. RCM 6.23.5Open verse →

    सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।।

    अर्थ · Hindi

    सिल्पि कर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला।।

  257. RCM 6.23.6Open verse →

    आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।।

    अर्थ · Hindi

    आवा प्रथम नगरु जेंहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा।।

  258. RCM 6.23.7Open verse →

    सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य बचन कहु निसिचर नाहा। साँचेहुँ कीस कीन्ह पुर दाहा।।

  259. RCM 6.23.8Open verse →

    रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई।।

    अर्थ · Hindi

    रावन नगर अल्प कपि दहई। सुनि अस बचन सत्य को कहई।।

  260. RCM 6.23.9Open verse →

    जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन।।

    अर्थ · Hindi

    जो अति सुभट सराहेहु रावन। सो सुग्रीव केर लघु धावन।।

  261. RCM 6.23.10Open verse →

    चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई।।

    अर्थ · Hindi

    चलइ बहुत सो बीर न होई। पठवा खबरि लेन हम सोई।।

  262. RCM 6.23.11Open verse →

    सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।

    अर्थ · Hindi

    सत्य नगरु कपि जारेउ बिनु प्रभु आयसु पाइ।

  263. RCM 6.23.12Open verse →

    फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।

    अर्थ · Hindi

    फिरि न गयउ सुग्रीव पहिं तेहिं भय रहा लुकाइ।।23(क)।।

  264. RCM 6.23.13Open verse →

    सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह।

    अर्थ · Hindi

    सत्य कहहि दसकंठ सब मोहि न सुनि कछु कोह।

  265. RCM 6.23.14Open verse →

    कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ न हमारें कटक अस तो सन लरत जो सोह।।23(ख)।।

  266. RCM 6.23.15Open verse →

    प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।

    अर्थ · Hindi

    प्रीति बिरोध समान सन करिअ नीति असि आहि।

  267. RCM 6.23.16Open verse →

    जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि।।23(ग)।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मृगपति बध मेड़ुकन्हि भल कि कहइ कोउ ताहि।।23(ग)।।

  268. RCM 6.23.17Open verse →

    जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।

    अर्थ · Hindi

    जद्यपि लघुता राम कहुँ तोहि बधें बड़ दोष।

  269. RCM 6.23.18Open verse →

    तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष।।23(घ)।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि कठिन दसकंठ सुनु छत्र जाति कर रोष।।23(घ)।।

  270. RCM 6.23.19Open verse →

    बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस।

    अर्थ · Hindi

    बक्र उक्ति धनु बचन सर हृदय दहेउ रिपु कीस।

  271. RCM 6.23.20Open verse →

    प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।

    अर्थ · Hindi

    प्रतिउत्तर सड़सिन्ह मनहुँ काढ़त भट दससीस।।23(ङ)।।

  272. RCM 6.23.21Open verse →

    हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।

    अर्थ · Hindi

    हँसि बोलेउ दसमौलि तब कपि कर बड़ गुन एक।

  273. RCM 6.23.22Open verse →

    जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।

    अर्थ · Hindi

    जो प्रतिपालइ तासु हित करइ उपाय अनेक।।23(छ)।।

  274. RCM 6.24.1Open verse →

    धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य कीस जो निज प्रभु काजा। जहँ तहँ नाचइ परिहरि लाजा।।

  275. RCM 6.24.2Open verse →

    नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    नाचि कूदि करि लोग रिझाई। पति हित करइ धर्म निपुनाई।।

  276. RCM 6.24.3Open verse →

    अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद स्वामिभक्त तव जाती। प्रभु गुन कस न कहसि एहि भाँती।।

  277. RCM 6.24.4Open verse →

    मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।

    अर्थ · Hindi

    मैं गुन गाहक परम सुजाना। तव कटु रटनि करउँ नहिं काना।।

  278. RCM 6.24.5Open verse →

    कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    कह कपि तव गुन गाहकताई। सत्य पवनसुत मोहि सुनाई।।

  279. RCM 6.24.6Open verse →

    बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।

    अर्थ · Hindi

    बन बिधंसि सुत बधि पुर जारा। तदपि न तेहिं कछु कृत अपकारा।।

  280. RCM 6.24.7Open verse →

    सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ बिचारि तव प्रकृति सुहाई। दसकंधर मैं कीन्हि ढिठाई।।

  281. RCM 6.24.8Open verse →

    देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा।।

    अर्थ · Hindi

    देखेउँ आइ जो कछु कपि भाषा। तुम्हरें लाज न रोष न माखा।।

  282. RCM 6.24.9Open verse →

    जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं असि मति पितु खाए कीसा। कहि अस बचन हँसा दससीसा।।

  283. RCM 6.24.10Open verse →

    पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।

    अर्थ · Hindi

    पितहि खाइ खातेउँ पुनि तोही। अबहीं समुझि परा कछु मोही।।

  284. RCM 6.24.11Open verse →

    बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी।।

    अर्थ · Hindi

    बालि बिमल जस भाजन जानी। हतउँ न तोहि अधम अभिमानी।।

  285. RCM 6.24.12Open verse →

    कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते।।

    अर्थ · Hindi

    कहु रावन रावन जग केते। मैं निज श्रवन सुने सुनु जेते।।

  286. RCM 6.24.13Open verse →

    बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला।।

    अर्थ · Hindi

    बलिहि जितन एक गयउ पताला। राखेउ बाँधि सिसुन्ह हयसाला।।

  287. RCM 6.24.14Open verse →

    खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    खेलहिं बालक मारहिं जाई। दया लागि बलि दीन्ह छोड़ाई।।

  288. RCM 6.24.15Open verse →

    एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    एक बहोरि सहसभुज देखा। धाइ धरा जिमि जंतु बिसेषा।।

  289. RCM 6.24.16Open verse →

    कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक लागि भवन लै आवा। सो पुलस्ति मुनि जाइ छोड़ावा।।

  290. RCM 6.24.17Open verse →

    एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।

    अर्थ · Hindi

    एक कहत मोहि सकुच अति रहा बालि की काँख।

  291. RCM 6.24.18Open verse →

    इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।

    अर्थ · Hindi

    इन्ह महुँ रावन तैं कवन सत्य बदहि तजि माख।।24।।

  292. RCM 6.25.1Open verse →

    सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सठ सोइ रावन बलसीला। हरगिरि जान जासु भुज लीला।।

  293. RCM 6.25.2Open verse →

    जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    जान उमापति जासु सुराई। पूजेउँ जेहि सिर सुमन चढ़ाई।।

  294. RCM 6.25.3Open verse →

    सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    सिर सरोज निज करन्हि उतारी। पूजेउँ अमित बार त्रिपुरारी।।

  295. RCM 6.25.4Open verse →

    भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला।।

    अर्थ · Hindi

    भुज बिक्रम जानहिं दिगपाला। सठ अजहूँ जिन्ह कें उर साला।।

  296. RCM 6.25.5Open verse →

    जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।

    अर्थ · Hindi

    जानहिं दिग्गज उर कठिनाई। जब जब भिरउँ जाइ बरिआई।।

  297. RCM 6.25.6Open verse →

    जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह के दसन कराल न फूटे। उर लागत मूलक इव टूटे।।

  298. RCM 6.25.7Open verse →

    जासु चलत डोलति इमि धरनी। चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी।।

    अर्थ · Hindi

    जासु चलत डोलति इमि धरनी। चढ़त मत्त गज जिमि लघु तरनी।।

  299. RCM 6.25.8Open verse →

    सोइ रावन जग बिदित प्रतापी। सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी।।

    अर्थ · Hindi

    सोइ रावन जग बिदित प्रतापी। सुनेहि न श्रवन अलीक प्रलापी।।

  300. RCM 6.25.9Open verse →

    तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।

    अर्थ · Hindi

    तेहि रावन कहँ लघु कहसि नर कर करसि बखान।

  301. RCM 6.25.10Open verse →

    रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।

    अर्थ · Hindi

    रे कपि बर्बर खर्ब खल अब जाना तव ग्यान।।25।।

  302. RCM 6.26.1Open verse →

    सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि अंगद सकोप कह बानी। बोलु सँभारि अधम अभिमानी।।

  303. RCM 6.26.2Open verse →

    सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।

    अर्थ · Hindi

    सहसबाहु भुज गहन अपारा। दहन अनल सम जासु कुठारा।।

  304. RCM 6.26.3Open verse →

    जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।

    अर्थ · Hindi

    जासु परसु सागर खर धारा। बूड़े नृप अगनित बहु बारा।।

  305. RCM 6.26.4Open verse →

    तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।

    अर्थ · Hindi

    तासु गर्ब जेहि देखत भागा। सो नर क्यों दससीस अभागा।।

  306. RCM 6.26.5Open verse →

    राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा।।

    अर्थ · Hindi

    राम मनुज कस रे सठ बंगा। धन्वी कामु नदी पुनि गंगा।।

  307. RCM 6.26.6Open verse →

    पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा।।

    अर्थ · Hindi

    पसु सुरधेनु कल्पतरु रूखा। अन्न दान अरु रस पीयूषा।।

  308. RCM 6.26.7Open verse →

    बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।

    अर्थ · Hindi

    बैनतेय खग अहि सहसानन। चिंतामनि पुनि उपल दसानन।।

  309. RCM 6.26.8Open verse →

    सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मतिमंद लोक बैकुंठा। लाभ कि रघुपति भगति अकुंठा।।

  310. RCM 6.26.9Open verse →

    सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।

    अर्थ · Hindi

    सेन सहित तब मान मथि बन उजारि पुर जारि।।

  311. RCM 6.26.10Open verse →

    कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।

    अर्थ · Hindi

    कस रे सठ हनुमान कपि गयउ जो तव सुत मारि।।26।।

  312. RCM 6.27.1Open verse →

    सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु रावन परिहरि चतुराई। भजसि न कृपासिंधु रघुराई।।

  313. RCM 6.27.2Open verse →

    जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।

    अर्थ · Hindi

    जौ खल भएसि राम कर द्रोही। ब्रह्म रुद्र सक राखि न तोही।।

  314. RCM 6.27.3Open verse →

    मूढ़ बृथा जनि मारसि गाला। राम बयर अस होइहि हाला।।

    अर्थ · Hindi

    मूढ़ बृथा जनि मारसि गाला। राम बयर अस होइहि हाला।।

  315. RCM 6.27.4Open verse →

    तव सिर निकर कपिन्ह के आगें। परिहहिं धरनि राम सर लागें।।

    अर्थ · Hindi

    तव सिर निकर कपिन्ह के आगें। परिहहिं धरनि राम सर लागें।।

  316. RCM 6.27.5Open verse →

    ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलहहिं भालु कीस चौगाना।।

    अर्थ · Hindi

    ते तव सिर कंदुक सम नाना। खेलहहिं भालु कीस चौगाना।।

  317. RCM 6.27.6Open verse →

    जबहिं समर कोपहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक।।

    अर्थ · Hindi

    जबहिं समर कोपहि रघुनायक। छुटिहहिं अति कराल बहु सायक।।

  318. RCM 6.27.7Open verse →

    तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा। अस बिचारि भजु राम उदारा।।

    अर्थ · Hindi

    तब कि चलिहि अस गाल तुम्हारा। अस बिचारि भजु राम उदारा।।

  319. RCM 6.27.8Open verse →

    सुनत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन रावन परजरा। जरत महानल जनु घृत परा।।

  320. RCM 6.27.9Open verse →

    कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन अस बंधु मम सुत प्रसिद्ध सक्रारि।

  321. RCM 6.27.10Open verse →

    मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।

    अर्थ · Hindi

    मोर पराक्रम नहिं सुनेहि जितेउँ चराचर झारि।।27।।

  322. RCM 6.28.1Open verse →

    सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।

    अर्थ · Hindi

    सठ साखामृग जोरि सहाई। बाँधा सिंधु इहइ प्रभुताई।।

  323. RCM 6.28.2Open verse →

    नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।

    अर्थ · Hindi

    नाघहिं खग अनेक बारीसा। सूर न होहिं ते सुनु सब कीसा।।

  324. RCM 6.28.3Open verse →

    मम भुज सागर बल जल पूरा। जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा।।

    अर्थ · Hindi

    मम भुज सागर बल जल पूरा। जहँ बूड़े बहु सुर नर सूरा।।

  325. RCM 6.28.4Open verse →

    बीस पयोधि अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइहि पारा।।

    अर्थ · Hindi

    बीस पयोधि अगाध अपारा। को अस बीर जो पाइहि पारा।।

  326. RCM 6.28.5Open verse →

    दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा।।

    अर्थ · Hindi

    दिगपालन्ह मैं नीर भरावा। भूप सुजस खल मोहि सुनावा।।

  327. RCM 6.28.6Open verse →

    जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा।।

    अर्थ · Hindi

    जौं पै समर सुभट तव नाथा। पुनि पुनि कहसि जासु गुन गाथा।।

  328. RCM 6.28.7Open verse →

    तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।

    अर्थ · Hindi

    तौ बसीठ पठवत केहि काजा। रिपु सन प्रीति करत नहिं लाजा।।

  329. RCM 6.28.8Open verse →

    हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।

    अर्थ · Hindi

    हरगिरि मथन निरखु मम बाहू। पुनि सठ कपि निज प्रभुहि सराहू।।

  330. RCM 6.28.9Open verse →

    सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस।

    अर्थ · Hindi

    सूर कवन रावन सरिस स्वकर काटि जेहिं सीस।

  331. RCM 6.28.10Open verse →

    हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस।।28।।

    अर्थ · Hindi

    हुने अनल अति हरष बहु बार साखि गौरीस।।28।।

  332. RCM 6.29.1Open verse →

    जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला। बिधि के लिखे अंक निज भाला।।

    अर्थ · Hindi

    जरत बिलोकेउँ जबहिं कपाला। बिधि के लिखे अंक निज भाला।।

  333. RCM 6.29.2Open verse →

    नर कें कर आपन बध बाँची। हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची।।

    अर्थ · Hindi

    नर कें कर आपन बध बाँची। हसेउँ जानि बिधि गिरा असाँची।।

  334. RCM 6.29.3Open verse →

    सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें। लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें।।

    अर्थ · Hindi

    सोउ मन समुझि त्रास नहिं मोरें। लिखा बिरंचि जरठ मति भोरें।।

  335. RCM 6.29.4Open verse →

    आन बीर बल सठ मम आगें। पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे।।

    अर्थ · Hindi

    आन बीर बल सठ मम आगें। पुनि पुनि कहसि लाज पति त्यागे।।

  336. RCM 6.29.5Open verse →

    कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    कह अंगद सलज्ज जग माहीं। रावन तोहि समान कोउ नाहीं।।

  337. RCM 6.29.6Open verse →

    लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।

    अर्थ · Hindi

    लाजवंत तव सहज सुभाऊ। निज मुख निज गुन कहसि न काऊ।।

  338. RCM 6.29.7Open verse →

    सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही।।

    अर्थ · Hindi

    सिर अरु सैल कथा चित रही। ताते बार बीस तैं कही।।

  339. RCM 6.29.8Open verse →

    सो भुजबल राखेउ उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली।।

    अर्थ · Hindi

    सो भुजबल राखेउ उर घाली। जीतेहु सहसबाहु बलि बाली।।

  340. RCM 6.29.9Open verse →

    सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु मतिमंद देहि अब पूरा। काटें सीस कि होइअ सूरा।।

  341. RCM 6.29.10Open verse →

    इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा।।

    अर्थ · Hindi

    इंद्रजालि कहु कहिअ न बीरा। काटइ निज कर सकल सरीरा।।

  342. RCM 6.29.11Open verse →

    जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।

    अर्थ · Hindi

    जरहिं पतंग मोह बस भार बहहिं खर बृंद।

  343. RCM 6.29.12Open verse →

    ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।

    अर्थ · Hindi

    ते नहिं सूर कहावहिं समुझि देखु मतिमंद।।29।।

  344. RCM 6.30.1Open verse →

    अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।

    अर्थ · Hindi

    अब जनि बतबढ़ाव खल करही। सुनु मम बचन मान परिहरही।।

  345. RCM 6.30.2Open verse →

    दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।

    अर्थ · Hindi

    दसमुख मैं न बसीठीं आयउँ। अस बिचारि रघुबीर पठायउँ।।

  346. RCM 6.30.3Open verse →

    बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार अस कहइ कृपाला। नहिं गजारि जसु बधें सृकाला।।

  347. RCM 6.30.4Open verse →

    मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।

    अर्थ · Hindi

    मन महुँ समुझि बचन प्रभु केरे। सहेउँ कठोर बचन सठ तेरे।।

  348. RCM 6.30.5Open verse →

    नाहिं त करि मुख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीतहि बरजोरा।।

    अर्थ · Hindi

    नाहिं त करि मुख भंजन तोरा। लै जातेउँ सीतहि बरजोरा।।

  349. RCM 6.30.6Open verse →

    जानेउँ तव बल अधम सुरारी। सूनें हरि आनिहि परनारी।।

    अर्थ · Hindi

    जानेउँ तव बल अधम सुरारी। सूनें हरि आनिहि परनारी।।

  350. RCM 6.30.7Open verse →

    तैं निसिचर पति गर्ब बहूता। मैं रघुपति सेवक कर दूता।।

    अर्थ · Hindi

    तैं निसिचर पति गर्ब बहूता। मैं रघुपति सेवक कर दूता।।

  351. RCM 6.30.8Open verse →

    जौं न राम अपमानहि डरउँ। तोहि देखत अस कौतुक करऊँ।।

    अर्थ · Hindi

    जौं न राम अपमानहि डरउँ। तोहि देखत अस कौतुक करऊँ।।

  352. RCM 6.30.9Open verse →

    तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।

    अर्थ · Hindi

    तोहि पटकि महि सेन हति चौपट करि तव गाउँ।

  353. RCM 6.30.10Open verse →

    तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।

    अर्थ · Hindi

    तव जुबतिन्ह समेत सठ जनकसुतहि लै जाउँ।।30।।

  354. RCM 6.31.1Open verse →

    जौ अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौ अस करौं तदपि न बड़ाई। मुएहि बधें नहिं कछु मनुसाई।।

  355. RCM 6.31.2Open verse →

    कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    कौल कामबस कृपिन बिमूढ़ा। अति दरिद्र अजसी अति बूढ़ा।।

  356. RCM 6.31.3Open verse →

    सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।

    अर्थ · Hindi

    सदा रोगबस संतत क्रोधी। बिष्नु बिमूख श्रुति संत बिरोधी।।

  357. RCM 6.31.4Open verse →

    तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।

    अर्थ · Hindi

    तनु पोषक निंदक अघ खानी। जीवन सव सम चौदह प्रानी।।

  358. RCM 6.31.5Open verse →

    अस बिचारि खल बधउँ न तोही। अब जनि रिस उपजावसि मोही।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि खल बधउँ न तोही। अब जनि रिस उपजावसि मोही।।

  359. RCM 6.31.6Open verse →

    सुनि सकोप कह निसिचर नाथा। अधर दसन दसि मीजत हाथा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सकोप कह निसिचर नाथा। अधर दसन दसि मीजत हाथा।।

  360. RCM 6.31.7Open verse →

    रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी।।

    अर्थ · Hindi

    रे कपि अधम मरन अब चहसी। छोटे बदन बात बड़ि कहसी।।

  361. RCM 6.31.8Open verse →

    कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें।।

    अर्थ · Hindi

    कटु जल्पसि जड़ कपि बल जाकें। बल प्रताप बुधि तेज न ताकें।।

  362. RCM 6.31.9Open verse →

    अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास।

    अर्थ · Hindi

    अगुन अमान जानि तेहि दीन्ह पिता बनबास।

  363. RCM 6.31.10Open verse →

    सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।।31(क)।।

    अर्थ · Hindi

    सो दुख अरु जुबती बिरह पुनि निसि दिन मम त्रास।।31(क)।।

  364. RCM 6.31.11Open verse →

    जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक।

    अर्थ · Hindi

    जिन्ह के बल कर गर्ब तोहि अइसे मनुज अनेक।

  365. RCM 6.31.12Open verse →

    खाहीं निसाचर दिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक।।31(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    खाहीं निसाचर दिवस निसि मूढ़ समुझु तजि टेक।।31(ख)।।

  366. RCM 6.32.1Open verse →

    जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।

    अर्थ · Hindi

    जब तेहिं कीन्ह राम कै निंदा। क्रोधवंत अति भयउ कपिंदा।।

  367. RCM 6.32.2Open verse →

    हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।

    अर्थ · Hindi

    हरि हर निंदा सुनइ जो काना। होइ पाप गोघात समाना।।

  368. RCM 6.32.3Open verse →

    कटकटान कपिकुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महि मारी।।

    अर्थ · Hindi

    कटकटान कपिकुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महि मारी।।

  369. RCM 6.32.4Open verse →

    डोलत धरनि सभासद खसे। चले भाजि भय मारुत ग्रसे।।

    अर्थ · Hindi

    डोलत धरनि सभासद खसे। चले भाजि भय मारुत ग्रसे।।

  370. RCM 6.32.5Open verse →

    गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।

    अर्थ · Hindi

    गिरत सँभारि उठा दसकंधर। भूतल परे मुकुट अति सुंदर।।

  371. RCM 6.32.6Open verse →

    कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।

    अर्थ · Hindi

    कछु तेहिं लै निज सिरन्हि सँवारे। कछु अंगद प्रभु पास पबारे।।

  372. RCM 6.32.7Open verse →

    आवत मुकुट देखि कपि भागे। दिनहीं लूक परन बिधि लागे।।

    अर्थ · Hindi

    आवत मुकुट देखि कपि भागे। दिनहीं लूक परन बिधि लागे।।

  373. RCM 6.32.8Open verse →

    की रावन करि कोप चलाए। कुलिस चारि आवत अति धाए।।

    अर्थ · Hindi

    की रावन करि कोप चलाए। कुलिस चारि आवत अति धाए।।

  374. RCM 6.32.9Open verse →

    कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।

    अर्थ · Hindi

    कह प्रभु हँसि जनि हृदयँ डेराहू। लूक न असनि केतु नहिं राहू।।

  375. RCM 6.32.10Open verse →

    ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।

    अर्थ · Hindi

    ए किरीट दसकंधर केरे। आवत बालितनय के प्रेरे।।

  376. RCM 6.32.11Open verse →

    तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास।

    अर्थ · Hindi

    तरकि पवनसुत कर गहे आनि धरे प्रभु पास।

  377. RCM 6.32.12Open verse →

    कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास।।32(क)।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक देखहिं भालु कपि दिनकर सरिस प्रकास।।32(क)।।

  378. RCM 6.32.13Open verse →

    उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।

    अर्थ · Hindi

    उहाँ सकोपि दसानन सब सन कहत रिसाइ।

  379. RCM 6.32.14Open verse →

    धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    धरहु कपिहि धरि मारहु सुनि अंगद मुसुकाइ।।32(ख)।।

  380. RCM 6.33.1Open verse →

    एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि बेगि सूभट सब धावहु। खाहु भालु कपि जहँ जहँ पावहु।।

  381. RCM 6.33.2Open verse →

    मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मर्कटहीन करहु महि जाई। जिअत धरहु तापस द्वौ भाई।।

  382. RCM 6.33.3Open verse →

    पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा। गाल बजावत तोहि न लाजा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि सकोप बोलेउ जुबराजा। गाल बजावत तोहि न लाजा।।

  383. RCM 6.33.4Open verse →

    मरु गर काटि निलज कुलघाती। बल बिलोकि बिहरति नहिं छाती।।

    अर्थ · Hindi

    मरु गर काटि निलज कुलघाती। बल बिलोकि बिहरति नहिं छाती।।

  384. RCM 6.33.5Open verse →

    रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।

    अर्थ · Hindi

    रे त्रिय चोर कुमारग गामी। खल मल रासि मंदमति कामी।।

  385. RCM 6.33.6Open verse →

    सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।

    अर्थ · Hindi

    सन्यपात जल्पसि दुर्बादा। भएसि कालबस खल मनुजादा।।

  386. RCM 6.33.7Open verse →

    याको फलु पावहिगो आगें। बानर भालु चपेटन्हि लागें।।

    अर्थ · Hindi

    याको फलु पावहिगो आगें। बानर भालु चपेटन्हि लागें।।

  387. RCM 6.33.8Open verse →

    रामु मनुज बोलत असि बानी। गिरहिं न तव रसना अभिमानी।।

    अर्थ · Hindi

    रामु मनुज बोलत असि बानी। गिरहिं न तव रसना अभिमानी।।

  388. RCM 6.33.9Open verse →

    गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गिरिहहिं रसना संसय नाहीं। सिरन्हि समेत समर महि माहीं।।

  389. RCM 6.33.10Open verse →

    सो नर क्यों दसकंध बालि बध्यो जेहिं एक सर।

    अर्थ · Hindi

    सो नर क्यों दसकंध बालि बध्यो जेहिं एक सर।

  390. RCM 6.33.11Open verse →

    बीसहुँ लोचन अंध धिग तव जन्म कुजाति जड़।।33(क)।।

    अर्थ · Hindi

    बीसहुँ लोचन अंध धिग तव जन्म कुजाति जड़।।33(क)।।

  391. RCM 6.33.12Open verse →

    तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।

    अर्थ · Hindi

    तब सोनित की प्यास तृषित राम सायक निकर।

  392. RCM 6.33.13Open verse →

    तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    तजउँ तोहि तेहि त्रास कटु जल्पक निसिचर अधम।।33(ख)।।

  393. RCM 6.34.1Open verse →

    मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।।

    अर्थ · Hindi

    मै तव दसन तोरिबे लायक। आयसु मोहि न दीन्ह रघुनायक।।

  394. RCM 6.34.2Open verse →

    असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।

    अर्थ · Hindi

    असि रिस होति दसउ मुख तोरौं। लंका गहि समुद्र महँ बोरौं।।

  395. RCM 6.34.3Open verse →

    गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।

    अर्थ · Hindi

    गूलरि फल समान तव लंका। बसहु मध्य तुम्ह जंतु असंका।।

  396. RCM 6.34.4Open verse →

    मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।

    अर्थ · Hindi

    मैं बानर फल खात न बारा। आयसु दीन्ह न राम उदारा।।

  397. RCM 6.34.5Open verse →

    जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।

    अर्थ · Hindi

    जुगति सुनत रावन मुसुकाई। मूढ़ सिखिहि कहँ बहुत झुठाई।।

  398. RCM 6.34.6Open verse →

    बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।

    अर्थ · Hindi

    बालि न कबहुँ गाल अस मारा। मिलि तपसिन्ह तैं भएसि लबारा।।

  399. RCM 6.34.7Open verse →

    साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।

    अर्थ · Hindi

    साँचेहुँ मैं लबार भुज बीहा। जौं न उपारिउँ तव दस जीहा।।

  400. RCM 6.34.8Open verse →

    समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।

    अर्थ · Hindi

    समुझि राम प्रताप कपि कोपा। सभा माझ पन करि पद रोपा।।

  401. RCM 6.34.9Open verse →

    जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं रामु सीता मैं हारी।।

  402. RCM 6.34.10Open verse →

    सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।

  403. RCM 6.34.11Open verse →

    इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।।

    अर्थ · Hindi

    इंद्रजीत आदिक बलवाना। हरषि उठे जहँ तहँ भट नाना।।

  404. RCM 6.34.12Open verse →

    झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    झपटहिं करि बल बिपुल उपाई। पद न टरइ बैठहिं सिरु नाई।।

  405. RCM 6.34.13Open verse →

    पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि उठि झपटहीं सुर आराती। टरइ न कीस चरन एहि भाँती।।

  406. RCM 6.34.14Open verse →

    पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।

    अर्थ · Hindi

    पुरुष कुजोगी जिमि उरगारी। मोह बिटप नहिं सकहिं उपारी।।

  407. RCM 6.34.15Open verse →

    कोटिन्ह मेघनाद सम सुभट उठे हरषाइ।

    अर्थ · Hindi

    कोटिन्ह मेघनाद सम सुभट उठे हरषाइ।

  408. RCM 6.34.16Open verse →

    झपटहिं टरै न कपि चरन पुनि बैठहिं सिर नाइ।।34(क)।।

    अर्थ · Hindi

    झपटहिं टरै न कपि चरन पुनि बैठहिं सिर नाइ।।34(क)।।

  409. RCM 6.34.17Open verse →

    भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।

    अर्थ · Hindi

    भूमि न छाँडत कपि चरन देखत रिपु मद भाग।।

  410. RCM 6.34.18Open verse →

    कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    कोटि बिघ्न ते संत कर मन जिमि नीति न त्याग।।34(ख)।।

  411. RCM 6.35.1Open verse →

    कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।

    अर्थ · Hindi

    कपि बल देखि सकल हियँ हारे। उठा आपु कपि कें परचारे।।

  412. RCM 6.35.2Open verse →

    गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।

    अर्थ · Hindi

    गहत चरन कह बालिकुमारा। मम पद गहें न तोर उबारा।।

  413. RCM 6.35.3Open verse →

    गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।

    अर्थ · Hindi

    गहसि न राम चरन सठ जाई। सुनत फिरा मन अति सकुचाई।।

  414. RCM 6.35.4Open verse →

    भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ तेजहत श्री सब गई। मध्य दिवस जिमि ससि सोहई।।

  415. RCM 6.35.5Open verse →

    सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।

    अर्थ · Hindi

    सिंघासन बैठेउ सिर नाई। मानहुँ संपति सकल गँवाई।।

  416. RCM 6.35.6Open verse →

    जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।

    अर्थ · Hindi

    जगदातमा प्रानपति रामा। तासु बिमुख किमि लह बिश्रामा।।

  417. RCM 6.35.7Open verse →

    उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।

    अर्थ · Hindi

    उमा राम की भृकुटि बिलासा। होइ बिस्व पुनि पावइ नासा।।

  418. RCM 6.35.8Open verse →

    तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।

    अर्थ · Hindi

    तृन ते कुलिस कुलिस तृन करई। तासु दूत पन कहु किमि टरई।।

  419. RCM 6.35.9Open verse →

    पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कपि कही नीति बिधि नाना। मान न ताहि कालु निअराना।।

  420. RCM 6.35.10Open verse →

    रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।

    अर्थ · Hindi

    रिपु मद मथि प्रभु सुजसु सुनायो। यह कहि चल्यो बालि नृप जायो।।

  421. RCM 6.35.11Open verse →

    हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    हतौं न खेत खेलाइ खेलाई। तोहि अबहिं का करौं बड़ाई।।

  422. RCM 6.35.12Open verse →

    प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथमहिं तासु तनय कपि मारा। सो सुनि रावन भयउ दुखारा।।

  423. RCM 6.35.13Open verse →

    जातुधान अंगद पन देखी। भय ब्याकुल सब भए बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    जातुधान अंगद पन देखी। भय ब्याकुल सब भए बिसेषी।।

  424. RCM 6.35.14Open verse →

    रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।

    अर्थ · Hindi

    रिपु बल धरषि हरषि कपि बालितनय बल पुंज।

  425. RCM 6.35.15Open verse →

    पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।

    अर्थ · Hindi

    पुलक सरीर नयन जल गहे राम पद कंज।।35(क)।।

  426. RCM 6.35.16Open verse →

    साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।

    अर्थ · Hindi

    साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ।

  427. RCM 6.35.17Open verse →

    मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरी रावनहि बहुरि कहा समुझाइ।।(ख)।।

  428. RCM 6.36.1Open verse →

    कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही।।

    अर्थ · Hindi

    कंत समुझि मन तजहु कुमतिही। सोह न समर तुम्हहि रघुपतिही।।

  429. RCM 6.36.2Open verse →

    रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई।।

    अर्थ · Hindi

    रामानुज लघु रेख खचाई। सोउ नहिं नाघेहु असि मनुसाई।।

  430. RCM 6.36.3Open verse →

    पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा।।

    अर्थ · Hindi

    पिय तुम्ह ताहि जितब संग्रामा। जाके दूत केर यह कामा।।

  431. RCM 6.36.4Open verse →

    कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक सिंधु नाघी तव लंका। आयउ कपि केहरी असंका।।

  432. RCM 6.36.5Open verse →

    रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा।।

    अर्थ · Hindi

    रखवारे हति बिपिन उजारा। देखत तोहि अच्छ तेहिं मारा।।

  433. RCM 6.36.6Open verse →

    जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा।।

    अर्थ · Hindi

    जारि सकल पुर कीन्हेसि छारा। कहाँ रहा बल गर्ब तुम्हारा।।

  434. RCM 6.36.7Open verse →

    अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु।।

    अर्थ · Hindi

    अब पति मृषा गाल जनि मारहु। मोर कहा कछु हृदयँ बिचारहु।।

  435. RCM 6.36.8Open verse →

    पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु।।

    अर्थ · Hindi

    पति रघुपतिहि नृपति जनि मानहु। अग जग नाथ अतुल बल जानहु।।

  436. RCM 6.36.9Open verse →

    बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।

    अर्थ · Hindi

    बान प्रताप जान मारीचा। तासु कहा नहिं मानेहि नीचा।।

  437. RCM 6.36.10Open verse →

    जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    जनक सभाँ अगनित भूपाला। रहे तुम्हउ बल अतुल बिसाला।।

  438. RCM 6.36.11Open verse →

    भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।

    अर्थ · Hindi

    भंजि धनुष जानकी बिआही। तब संग्राम जितेहु किन ताही।।

  439. RCM 6.36.12Open verse →

    सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।

    अर्थ · Hindi

    सुरपति सुत जानइ बल थोरा। राखा जिअत आँखि गहि फोरा।।

  440. RCM 6.36.13Open verse →

    सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी।।

    अर्थ · Hindi

    सूपनखा कै गति तुम्ह देखी। तदपि हृदयँ नहिं लाज बिषेषी।।

  441. RCM 6.36.14Open verse →

    बधि बिराध खर दूषनहि लींलाँ हत्यो कबंध।

    अर्थ · Hindi

    बधि बिराध खर दूषनहि लींलाँ हत्यो कबंध।

  442. RCM 6.36.15Open verse →

    बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।

    अर्थ · Hindi

    बालि एक सर मारयो तेहि जानहु दसकंध।।36।।

  443. RCM 6.37.1Open verse →

    जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं जलनाथ बँधायउ हेला। उतरे प्रभु दल सहित सुबेला।।

  444. RCM 6.37.2Open verse →

    कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू।।

    अर्थ · Hindi

    कारुनीक दिनकर कुल केतू। दूत पठायउ तव हित हेतू।।

  445. RCM 6.37.3Open verse →

    सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा।।

    अर्थ · Hindi

    सभा माझ जेहिं तव बल मथा। करि बरूथ महुँ मृगपति जथा।।

  446. RCM 6.37.4Open verse →

    अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद हनुमत अनुचर जाके। रन बाँकुरे बीर अति बाँके।।

  447. RCM 6.37.5Open verse →

    तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कहँ पिय पुनि पुनि नर कहहू। मुधा मान ममता मद बहहू।।

  448. RCM 6.37.6Open verse →

    अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।

    अर्थ · Hindi

    अहह कंत कृत राम बिरोधा। काल बिबस मन उपज न बोधा।।

  449. RCM 6.37.7Open verse →

    काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    काल दंड गहि काहु न मारा। हरइ धर्म बल बुद्धि बिचारा।।

  450. RCM 6.37.8Open verse →

    निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।

    अर्थ · Hindi

    निकट काल जेहि आवत साईं। तेहि भ्रम होइ तुम्हारिहि नाईं।।

  451. RCM 6.37.9Open verse →

    दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु।

    अर्थ · Hindi

    दुइ सुत मरे दहेउ पुर अजहुँ पूर पिय देहु।

  452. RCM 6.37.10Open verse →

    कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु।।37।।

    अर्थ · Hindi

    कृपासिंधु रघुनाथ भजि नाथ बिमल जसु लेहु।।37।।

  453. RCM 6.38.1Open verse →

    नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।

    अर्थ · Hindi

    नारि बचन सुनि बिसिख समाना। सभाँ गयउ उठि होत बिहाना।।

  454. RCM 6.38.2Open verse →

    बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।

    अर्थ · Hindi

    बैठ जाइ सिंघासन फूली। अति अभिमान त्रास सब भूली।।

  455. RCM 6.38.3Open verse →

    इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा।।

  456. RCM 6.38.4Open verse →

    अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।

    अर्थ · Hindi

    अति आदर सपीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी।।

  457. RCM 6.38.5Open verse →

    बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही।।।

    अर्थ · Hindi

    बालितनय कौतुक अति मोही। तात सत्य कहु पूछउँ तोही।।।

  458. RCM 6.38.6Open verse →

    रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका।।

    अर्थ · Hindi

    रावनु जातुधान कुल टीका। भुज बल अतुल जासु जग लीका।।

  459. RCM 6.38.7Open verse →

    तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए। कहहु तात कवनी बिधि पाए।।

    अर्थ · Hindi

    तासु मुकुट तुम्ह चारि चलाए। कहहु तात कवनी बिधि पाए।।

  460. RCM 6.38.8Open verse →

    सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी। मुकुट न होहिं भूप गुन चारी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सर्बग्य प्रनत सुखकारी। मुकुट न होहिं भूप गुन चारी।।

  461. RCM 6.38.9Open verse →

    साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।

    अर्थ · Hindi

    साम दान अरु दंड बिभेदा। नृप उर बसहिं नाथ कह बेदा।।

  462. RCM 6.38.10Open verse →

    नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    नीति धर्म के चरन सुहाए। अस जियँ जानि नाथ पहिं आए।।

  463. RCM 6.38.11Open verse →

    धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस।

    अर्थ · Hindi

    धर्महीन प्रभु पद बिमुख काल बिबस दससीस।

  464. RCM 6.38.12Open verse →

    तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस।।38(((क)।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि परिहरि गुन आए सुनहु कोसलाधीस।।38(((क)।।

  465. RCM 6.38.13Open verse →

    परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार।

    अर्थ · Hindi

    परम चतुरता श्रवन सुनि बिहँसे रामु उदार।

  466. RCM 6.38.14Open verse →

    समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार।।38(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार पुनि सब कहे गढ़ के बालिकुमार।।38(ख)।।

  467. RCM 6.39.1Open verse →

    रिपु के समाचार जब पाए। राम सचिव सब निकट बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    रिपु के समाचार जब पाए। राम सचिव सब निकट बोलाए।।

  468. RCM 6.39.2Open verse →

    लंका बाँके चारि दुआरा। केहि बिधि लागिअ करहु बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    लंका बाँके चारि दुआरा। केहि बिधि लागिअ करहु बिचारा।।

  469. RCM 6.39.3Open verse →

    तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन।।

    अर्थ · Hindi

    तब कपीस रिच्छेस बिभीषन। सुमिरि हृदयँ दिनकर कुल भूषन।।

  470. RCM 6.39.4Open verse →

    करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिचार तिन्ह मंत्र दृढ़ावा। चारि अनी कपि कटकु बनावा।।

  471. RCM 6.39.5Open verse →

    जथाजोग सेनापति कीन्हे। जूथप सकल बोलि तब लीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    जथाजोग सेनापति कीन्हे। जूथप सकल बोलि तब लीन्हे।।

  472. RCM 6.39.6Open verse →

    प्रभु प्रताप कहि सब समुझाए। सुनि कपि सिंघनाद करि धाए।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रताप कहि सब समुझाए। सुनि कपि सिंघनाद करि धाए।।

  473. RCM 6.39.7Open verse →

    हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    हरषित राम चरन सिर नावहिं। गहि गिरि सिखर बीर सब धावहिं।।

  474. RCM 6.39.8Open verse →

    गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।

    अर्थ · Hindi

    गर्जहिं तर्जहिं भालु कपीसा। जय रघुबीर कोसलाधीसा।।

  475. RCM 6.39.9Open verse →

    जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।

    अर्थ · Hindi

    जानत परम दुर्ग अति लंका। प्रभु प्रताप कपि चले असंका।।

  476. RCM 6.39.10Open verse →

    घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।

    अर्थ · Hindi

    घटाटोप करि चहुँ दिसि घेरी। मुखहिं निसान बजावहीं भेरी।।

  477. RCM 6.39.11Open verse →

    जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।

    अर्थ · Hindi

    जयति राम जय लछिमन जय कपीस सुग्रीव।

  478. RCM 6.39.12Open verse →

    गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।

    अर्थ · Hindi

    गर्जहिं सिंघनाद कपि भालु महा बल सींव।।39।।

  479. RCM 6.40.1Open verse →

    लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी।।

    अर्थ · Hindi

    लंकाँ भयउ कोलाहल भारी। सुना दसानन अति अहँकारी।।

  480. RCM 6.40.2Open verse →

    देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई।।

    अर्थ · Hindi

    देखहु बनरन्ह केरि ढिठाई। बिहँसि निसाचर सेन बोलाई।।

  481. RCM 6.40.3Open verse →

    आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे।।

    अर्थ · Hindi

    आए कीस काल के प्रेरे। छुधावंत सब निसिचर मेरे।।

  482. RCM 6.40.4Open verse →

    अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि अट्टहास सठ कीन्हा। गृह बैठे अहार बिधि दीन्हा।।

  483. RCM 6.40.5Open verse →

    सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू।।

    अर्थ · Hindi

    सुभट सकल चारिहुँ दिसि जाहू। धरि धरि भालु कीस सब खाहू।।

  484. RCM 6.40.6Open verse →

    उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना।।

    अर्थ · Hindi

    उमा रावनहि अस अभिमाना। जिमि टिट्टिभ खग सूत उताना।।

  485. RCM 6.40.7Open verse →

    चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।

    अर्थ · Hindi

    चले निसाचर आयसु मागी। गहि कर भिंडिपाल बर साँगी।।

  486. RCM 6.40.8Open verse →

    तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।

    अर्थ · Hindi

    तोमर मुग्दर परसु प्रचंडा। सुल कृपान परिघ गिरिखंडा।।

  487. RCM 6.40.9Open verse →

    जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि अरुनोपल निकर निहारी। धावहिं सठ खग मांस अहारी।।

  488. RCM 6.40.10Open verse →

    चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।

    अर्थ · Hindi

    चोंच भंग दुख तिन्हहि न सूझा। तिमि धाए मनुजाद अबूझा।।

  489. RCM 6.40.11Open verse →

    नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।

    अर्थ · Hindi

    नानायुध सर चाप धर जातुधान बल बीर।

  490. RCM 6.40.12Open verse →

    कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।

    अर्थ · Hindi

    कोट कँगूरन्हि चढ़ि गए कोटि कोटि रनधीर।।40।।

  491. RCM 6.41.1Open verse →

    कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे। मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे।।

    अर्थ · Hindi

    कोट कँगूरन्हि सोहहिं कैसे। मेरु के सृंगनि जनु घन बैसे।।

  492. RCM 6.41.2Open verse →

    बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ। सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं ढोल निसान जुझाऊ। सुनि धुनि होइ भटन्हि मन चाऊ।।

  493. RCM 6.41.3Open verse →

    बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा।।

    अर्थ · Hindi

    बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा।।

  494. RCM 6.41.4Open verse →

    देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा।।

    अर्थ · Hindi

    देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा।।

  495. RCM 6.41.5Open verse →

    धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।

    अर्थ · Hindi

    धावहिं गनहिं न अवघट घाटा। पर्बत फोरि करहिं गहि बाटा।।

  496. RCM 6.41.6Open verse →

    कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।

    अर्थ · Hindi

    कटकटाहिं कोटिन्ह भट गर्जहिं। दसन ओठ काटहिं अति तर्जहिं।।

  497. RCM 6.41.7Open verse →

    उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई।।

    अर्थ · Hindi

    उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई।।

  498. RCM 6.41.8Open verse →

    निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं।।

  499. RCM 6.42.1Open verse →

    राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रताप प्रबल कपिजूथा। मर्दहिं निसिचर सुभट बरूथा।।

  500. RCM 6.42.2Open verse →

    चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।

    अर्थ · Hindi

    चढ़े दुर्ग पुनि जहँ तहँ बानर। जय रघुबीर प्रताप दिवाकर।।

  501. RCM 6.42.3Open verse →

    चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    चले निसाचर निकर पराई। प्रबल पवन जिमि घन समुदाई।।

  502. RCM 6.42.4Open verse →

    हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।

    अर्थ · Hindi

    हाहाकार भयउ पुर भारी। रोवहिं बालक आतुर नारी।।

  503. RCM 6.42.5Open verse →

    सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी।।

    अर्थ · Hindi

    सब मिलि देहिं रावनहि गारी। राज करत एहिं मृत्यु हँकारी।।

  504. RCM 6.42.6Open verse →

    निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना।।

    अर्थ · Hindi

    निज दल बिचल सुनी तेहिं काना। फेरि सुभट लंकेस रिसाना।।

  505. RCM 6.42.7Open verse →

    जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।

    अर्थ · Hindi

    जो रन बिमुख सुना मैं काना। सो मैं हतब कराल कृपाना।।

  506. RCM 6.42.8Open verse →

    सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।

    अर्थ · Hindi

    सर्बसु खाइ भोग करि नाना। समर भूमि भए बल्लभ प्राना।।

  507. RCM 6.42.9Open verse →

    उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।

    अर्थ · Hindi

    उग्र बचन सुनि सकल डेराने। चले क्रोध करि सुभट लजाने।।

  508. RCM 6.42.10Open verse →

    सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।

    अर्थ · Hindi

    सन्मुख मरन बीर कै सोभा। तब तिन्ह तजा प्रान कर लोभा।।

  509. RCM 6.42.11Open verse →

    बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।

    अर्थ · Hindi

    बहु आयुध धर सुभट सब भिरहिं पचारि पचारि।

  510. RCM 6.42.12Open verse →

    ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याकुल किए भालु कपि परिघ त्रिसूलन्हि मारी।।42।।

  511. RCM 6.43.1Open verse →

    भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।।

    अर्थ · Hindi

    भय आतुर कपि भागन लागे। जद्यपि उमा जीतिहहिं आगे।।

  512. RCM 6.43.2Open verse →

    कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ कह कहँ अंगद हनुमंता। कहँ नल नील दुबिद बलवंता।।

  513. RCM 6.43.3Open verse →

    निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।।

    अर्थ · Hindi

    निज दल बिकल सुना हनुमाना। पच्छिम द्वार रहा बलवाना।।

  514. RCM 6.43.4Open verse →

    मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।।

    अर्थ · Hindi

    मेघनाद तहँ करइ लराई। टूट न द्वार परम कठिनाई।।

  515. RCM 6.43.5Open verse →

    पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।।

    अर्थ · Hindi

    पवनतनय मन भा अति क्रोधा। गर्जेउ प्रबल काल सम जोधा।।

  516. RCM 6.43.6Open verse →

    कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।।

    अर्थ · Hindi

    कूदि लंक गढ़ ऊपर आवा। गहि गिरि मेघनाद कहुँ धावा।।

  517. RCM 6.43.7Open verse →

    भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।।

    अर्थ · Hindi

    भंजेउ रथ सारथी निपाता। ताहि हृदय महुँ मारेसि लाता।।

  518. RCM 6.43.8Open verse →

    दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।

    अर्थ · Hindi

    दुसरें सूत बिकल तेहि जाना। स्यंदन घालि तुरत गृह आना।।

  519. RCM 6.43.9Open verse →

    अंगद सुना पवनसुत गढ़ पर गयउ अकेल।

    अर्थ · Hindi

    अंगद सुना पवनसुत गढ़ पर गयउ अकेल।

  520. RCM 6.43.10Open verse →

    रन बाँकुरा बालिसुत तरकि चढ़ेउ कपि खेल।।43।।

    अर्थ · Hindi

    रन बाँकुरा बालिसुत तरकि चढ़ेउ कपि खेल।।43।।

  521. RCM 6.44.1Open verse →

    जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।।

    अर्थ · Hindi

    जुद्ध बिरुद्ध क्रुद्ध द्वौ बंदर। राम प्रताप सुमिरि उर अंतर।।

  522. RCM 6.44.2Open verse →

    रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    रावन भवन चढ़े द्वौ धाई। करहि कोसलाधीस दोहाई।।

  523. RCM 6.44.3Open verse →

    कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।

    अर्थ · Hindi

    कलस सहित गहि भवनु ढहावा। देखि निसाचरपति भय पावा।।

  524. RCM 6.44.4Open verse →

    नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।

    अर्थ · Hindi

    नारि बृंद कर पीटहिं छाती। अब दुइ कपि आए उतपाती।।

  525. RCM 6.44.5Open verse →

    कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    कपिलीला करि तिन्हहि डेरावहिं। रामचंद्र कर सुजसु सुनावहिं।।

  526. RCM 6.44.6Open verse →

    पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कर गहि कंचन के खंभा। कहेन्हि करिअ उतपात अरंभा।।

  527. RCM 6.44.7Open verse →

    गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।।

    अर्थ · Hindi

    गर्जि परे रिपु कटक मझारी। लागे मर्दै भुज बल भारी।।

  528. RCM 6.44.8Open verse →

    काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।

    अर्थ · Hindi

    काहुहि लात चपेटन्हि केहू। भजहु न रामहि सो फल लेहू।।

  529. RCM 6.44.9Open verse →

    एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड।

    अर्थ · Hindi

    एक एक सों मर्दहिं तोरि चलावहिं मुंड।

  530. RCM 6.44.10Open verse →

    रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।।

    अर्थ · Hindi

    रावन आगें परहिं ते जनु फूटहिं दधि कुंड।।44।।

  531. RCM 6.45.1Open verse →

    महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    महा महा मुखिआ जे पावहिं। ते पद गहि प्रभु पास चलावहिं।।

  532. RCM 6.45.2Open verse →

    कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।

    अर्थ · Hindi

    कहइ बिभीषनु तिन्ह के नामा। देहिं राम तिन्हहू निज धामा।।

  533. RCM 6.45.3Open verse →

    खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।

    अर्थ · Hindi

    खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी।।

  534. RCM 6.45.4Open verse →

    उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।

    अर्थ · Hindi

    उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर।।

  535. RCM 6.45.5Open verse →

    देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।

    अर्थ · Hindi

    देहिं परम गति सो जियँ जानी। अस कृपाल को कहहु भवानी।।

  536. RCM 6.45.6Open verse →

    अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।

    अर्थ · Hindi

    अस प्रभु सुनि न भजहिं भ्रम त्यागी। नर मतिमंद ते परम अभागी।।

  537. RCM 6.45.7Open verse →

    अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद अरु हनुमंत प्रबेसा। कीन्ह दुर्ग अस कह अवधेसा।।

  538. RCM 6.45.8Open verse →

    लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    लंकाँ द्वौ कपि सोहहिं कैसें। मथहि सिंधु दुइ मंदर जैसें।।

  539. RCM 6.45.9Open verse →

    भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत।

    अर्थ · Hindi

    भुज बल रिपु दल दलमलि देखि दिवस कर अंत।

  540. RCM 6.45.10Open verse →

    कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत।।45।।

    अर्थ · Hindi

    कूदे जुगल बिगत श्रम आए जहँ भगवंत।।45।।

  541. RCM 6.46.1Open verse →

    प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु पद कमल सीस तिन्ह नाए। देखि सुभट रघुपति मन भाए।।

  542. RCM 6.46.2Open verse →

    राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे।।

    अर्थ · Hindi

    राम कृपा करि जुगल निहारे। भए बिगतश्रम परम सुखारे।।

  543. RCM 6.46.3Open verse →

    गए जानि अंगद हनुमाना। फिरे भालु मर्कट भट नाना।।

    अर्थ · Hindi

    गए जानि अंगद हनुमाना। फिरे भालु मर्कट भट नाना।।

  544. RCM 6.46.4Open verse →

    जातुधान प्रदोष बल पाई। धाए करि दससीस दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जातुधान प्रदोष बल पाई। धाए करि दससीस दोहाई।।

  545. RCM 6.46.5Open verse →

    निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।

    अर्थ · Hindi

    निसिचर अनी देखि कपि फिरे। जहँ तहँ कटकटाइ भट भिरे।।

  546. RCM 6.46.6Open verse →

    द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।

    अर्थ · Hindi

    द्वौ दल प्रबल पचारि पचारी। लरत सुभट नहिं मानहिं हारी।।

  547. RCM 6.46.7Open verse →

    महाबीर निसिचर सब कारे। नाना बरन बलीमुख भारे।।

    अर्थ · Hindi

    महाबीर निसिचर सब कारे। नाना बरन बलीमुख भारे।।

  548. RCM 6.46.8Open verse →

    सबल जुगल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत करि क्रोधा।।

    अर्थ · Hindi

    सबल जुगल दल समबल जोधा। कौतुक करत लरत करि क्रोधा।।

  549. RCM 6.46.9Open verse →

    प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।

    अर्थ · Hindi

    प्राबिट सरद पयोद घनेरे। लरत मनहुँ मारुत के प्रेरे।।

  550. RCM 6.46.10Open verse →

    अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।

    अर्थ · Hindi

    अनिप अकंपन अरु अतिकाया। बिचलत सेन कीन्हि इन्ह माया।।

  551. RCM 6.46.11Open verse →

    भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ निमिष महँ अति अँधियारा। बृष्टि होइ रुधिरोपल छारा।।

  552. RCM 6.46.12Open verse →

    देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार।

    अर्थ · Hindi

    देखि निबिड़ तम दसहुँ दिसि कपिदल भयउ खभार।

  553. RCM 6.46.13Open verse →

    एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार।।46।।

    अर्थ · Hindi

    एकहि एक न देखई जहँ तहँ करहिं पुकार।।46।।

  554. RCM 6.47.1Open verse →

    सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।।

    अर्थ · Hindi

    सकल मरमु रघुनायक जाना। लिए बोलि अंगद हनुमाना।।

  555. RCM 6.47.2Open verse →

    समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार सब कहि समुझाए। सुनत कोपि कपिकुंजर धाए।।

  556. RCM 6.47.3Open verse →

    पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कृपाल हँसि चाप चढ़ावा। पावक सायक सपदि चलावा।।

  557. RCM 6.47.4Open verse →

    भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ प्रकास कतहुँ तम नाहीं। ग्यान उदयँ जिमि संसय जाहीं।।

  558. RCM 6.47.5Open verse →

    भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।।

    अर्थ · Hindi

    भालु बलीमुख पाइ प्रकासा। धाए हरष बिगत श्रम त्रासा।।

  559. RCM 6.47.6Open verse →

    हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।

    अर्थ · Hindi

    हनूमान अंगद रन गाजे। हाँक सुनत रजनीचर भाजे।।

  560. RCM 6.47.7Open verse →

    भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।।

    अर्थ · Hindi

    भागत पट पटकहिं धरि धरनी। करहिं भालु कपि अद्भुत करनी।।

  561. RCM 6.47.8Open verse →

    गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गहि पद डारहिं सागर माहीं। मकर उरग झष धरि धरि खाहीं।।

  562. RCM 6.47.9Open verse →

    कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।

    अर्थ · Hindi

    कछु मारे कछु घायल कछु गढ़ चढ़े पराइ।

  563. RCM 6.47.10Open verse →

    गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।

    अर्थ · Hindi

    गर्जहिं भालु बलीमुख रिपु दल बल बिचलाइ।।47।।

  564. RCM 6.48.1Open verse →

    निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।

    अर्थ · Hindi

    निसा जानि कपि चारिउ अनी। आए जहाँ कोसला धनी।।

  565. RCM 6.48.2Open verse →

    राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।

    अर्थ · Hindi

    राम कृपा करि चितवा सबही। भए बिगतश्रम बानर तबही।।

  566. RCM 6.48.3Open verse →

    उहाँ दसानन सचिव हँकारे। सब सन कहेसि सुभट जे मारे।।

    अर्थ · Hindi

    उहाँ दसानन सचिव हँकारे। सब सन कहेसि सुभट जे मारे।।

  567. RCM 6.48.4Open verse →

    आधा कटकु कपिन्ह संघारा। कहहु बेगि का करिअ बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    आधा कटकु कपिन्ह संघारा। कहहु बेगि का करिअ बिचारा।।

  568. RCM 6.48.5Open verse →

    माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर।।

    अर्थ · Hindi

    माल्यवंत अति जरठ निसाचर। रावन मातु पिता मंत्री बर।।

  569. RCM 6.48.6Open verse →

    बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन।।

    अर्थ · Hindi

    बोला बचन नीति अति पावन। सुनहु तात कछु मोर सिखावन।।

  570. RCM 6.48.7Open verse →

    जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    जब ते तुम्ह सीता हरि आनी। असगुन होहिं न जाहिं बखानी।।

  571. RCM 6.48.8Open verse →

    बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो।।

    अर्थ · Hindi

    बेद पुरान जासु जसु गायो। राम बिमुख काहुँ न सुख पायो।।

  572. RCM 6.48.9Open verse →

    हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।

    अर्थ · Hindi

    हिरन्याच्छ भ्राता सहित मधु कैटभ बलवान।

  573. RCM 6.48.10Open verse →

    जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि मारे सोइ अवतरेउ कृपासिंधु भगवान।।48(क)।।

  574. RCM 6.48.11Open verse →

    कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।

    अर्थ · Hindi

    कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध।

  575. RCM 6.48.12Open verse →

    सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध।।48(ख)।।

  576. RCM 6.49.1Open verse →

    परिहरि बयरु देहु बैदेही। भजहु कृपानिधि परम सनेही।।

    अर्थ · Hindi

    परिहरि बयरु देहु बैदेही। भजहु कृपानिधि परम सनेही।।

  577. RCM 6.49.2Open verse →

    ताके बचन बान सम लागे। करिआ मुह करि जाहि अभागे।।

    अर्थ · Hindi

    ताके बचन बान सम लागे। करिआ मुह करि जाहि अभागे।।

  578. RCM 6.49.3Open verse →

    बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।

    अर्थ · Hindi

    बूढ़ भएसि न त मरतेउँ तोही। अब जनि नयन देखावसि मोही।।

  579. RCM 6.49.4Open verse →

    तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अपने मन अस अनुमाना। बध्यो चहत एहि कृपानिधाना।।

  580. RCM 6.49.5Open verse →

    सो उठि गयउ कहत दुर्बादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।।

    अर्थ · Hindi

    सो उठि गयउ कहत दुर्बादा। तब सकोप बोलेउ घननादा।।

  581. RCM 6.49.6Open verse →

    कौतुक प्रात देखिअहु मोरा। करिहउँ बहुत कहौं का थोरा।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक प्रात देखिअहु मोरा। करिहउँ बहुत कहौं का थोरा।।

  582. RCM 6.49.7Open verse →

    सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।

  583. RCM 6.49.8Open verse →

    करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।

    अर्थ · Hindi

    करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।

  584. RCM 6.49.9Open verse →

    कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।।

    अर्थ · Hindi

    कोपि कपिन्ह दुर्घट गढ़ु घेरा। नगर कोलाहलु भयउ घनेरा।।

  585. RCM 6.49.10Open verse →

    बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिधायुध धर निसिचर धाए। गढ़ ते पर्बत सिखर ढहाए।।

  586. RCM 6.50.1Open verse →

    कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ कोसलाधीस द्वौ भ्राता। धन्वी सकल लोक बिख्याता।।

  587. RCM 6.50.2Open verse →

    कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ नल नील दुबिद सुग्रीवा। अंगद हनूमंत बल सींवा।।

  588. RCM 6.50.3Open verse →

    कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।।

    अर्थ · Hindi

    कहाँ बिभीषनु भ्राताद्रोही। आजु सबहि हठि मारउँ ओही।।

  589. RCM 6.50.4Open verse →

    अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि कठिन बान संधाने। अतिसय क्रोध श्रवन लगि ताने।।

  590. RCM 6.50.5Open verse →

    सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।

    अर्थ · Hindi

    सर समुह सो छाड़ै लागा। जनु सपच्छ धावहिं बहु नागा।।

  591. RCM 6.50.6Open verse →

    जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ परत देखिअहिं बानर। सन्मुख होइ न सके तेहि अवसर।।

  592. RCM 6.50.7Open verse →

    जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ भागि चले कपि रीछा। बिसरी सबहि जुद्ध कै ईछा।।

  593. RCM 6.50.8Open verse →

    सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    सो कपि भालु न रन महँ देखा। कीन्हेसि जेहि न प्रान अवसेषा।।

  594. RCM 6.50.9Open verse →

    दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर।

    अर्थ · Hindi

    दस दस सर सब मारेसि परे भूमि कपि बीर।

  595. RCM 6.50.10Open verse →

    सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।

    अर्थ · Hindi

    सिंहनाद करि गर्जा मेघनाद बल धीर।।50।।

  596. RCM 6.51.1Open verse →

    देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला।।

    अर्थ · Hindi

    देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला।।

  597. RCM 6.51.2Open verse →

    महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा।।

    अर्थ · Hindi

    महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा।।

  598. RCM 6.51.3Open verse →

    आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई।।

    अर्थ · Hindi

    आवत देखि गयउ नभ सोई। रथ सारथी तुरग सब खोई।।

  599. RCM 6.51.4Open verse →

    बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार पचार हनुमाना। निकट न आव मरमु सो जाना।।

  600. RCM 6.51.5Open verse →

    रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति निकट गयउ घननादा। नाना भाँति करेसि दुर्बादा।।

  601. RCM 6.51.6Open verse →

    अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे।।

    अर्थ · Hindi

    अस्त्र सस्त्र आयुध सब डारे। कौतुकहीं प्रभु काटि निवारे।।

  602. RCM 6.51.7Open verse →

    देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    देखि प्रताप मूढ़ खिसिआना। करै लाग माया बिधि नाना।।

  603. RCM 6.51.8Open verse →

    जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला।।

    अर्थ · Hindi

    जिमि कोउ करै गरुड़ सैं खेला। डरपावै गहि स्वल्प सपेला।।

  604. RCM 6.51.9Open verse →

    जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।

    अर्थ · Hindi

    जासु प्रबल माया बल सिव बिरंचि बड़ छोट।

  605. RCM 6.51.10Open verse →

    ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।

    अर्थ · Hindi

    ताहि दिखावइ निसिचर निज माया मति खोट।।51।।

  606. RCM 6.52.1Open verse →

    नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।

    अर्थ · Hindi

    नभ चढ़ि बरष बिपुल अंगारा। महि ते प्रगट होहिं जलधारा।।

  607. RCM 6.52.2Open verse →

    नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।

    अर्थ · Hindi

    नाना भाँति पिसाच पिसाची। मारु काटु धुनि बोलहिं नाची।।

  608. RCM 6.52.3Open verse →

    बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।

    अर्थ · Hindi

    बिष्टा पूय रुधिर कच हाड़ा। बरषइ कबहुँ उपल बहु छाड़ा।।

  609. RCM 6.52.4Open verse →

    बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।

    अर्थ · Hindi

    बरषि धूरि कीन्हेसि अँधिआरा। सूझ न आपन हाथ पसारा।।

  610. RCM 6.52.5Open verse →

    कपि अकुलाने माया देखें। सब कर मरन बना एहि लेखें।।

    अर्थ · Hindi

    कपि अकुलाने माया देखें। सब कर मरन बना एहि लेखें।।

  611. RCM 6.52.6Open verse →

    कौतुक देखि राम मुसुकाने। भए सभीत सकल कपि जाने।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक देखि राम मुसुकाने। भए सभीत सकल कपि जाने।।

  612. RCM 6.52.7Open verse →

    एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया।।

    अर्थ · Hindi

    एक बान काटी सब माया। जिमि दिनकर हर तिमिर निकाया।।

  613. RCM 6.52.8Open verse →

    कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके।।

    अर्थ · Hindi

    कृपादृष्टि कपि भालु बिलोके। भए प्रबल रन रहहिं न रोके।।

  614. RCM 6.52.9Open verse →

    आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।

    अर्थ · Hindi

    आयसु मागि राम पहिं अंगदादि कपि साथ।

  615. RCM 6.52.10Open verse →

    लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन चले क्रुद्ध होइ बान सरासन हाथ।।52।।

  616. RCM 6.53.1Open verse →

    छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला।।

    अर्थ · Hindi

    छतज नयन उर बाहु बिसाला। हिमगिरि निभ तनु कछु एक लाला।।

  617. RCM 6.53.2Open verse →

    इहाँ दसानन सुभट पठाए। नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ दसानन सुभट पठाए। नाना अस्त्र सस्त्र गहि धाए।।

  618. RCM 6.53.3Open verse →

    भूधर नख बिटपायुध धारी। धाए कपि जय राम पुकारी।।

    अर्थ · Hindi

    भूधर नख बिटपायुध धारी। धाए कपि जय राम पुकारी।।

  619. RCM 6.53.4Open verse →

    भिरे सकल जोरिहि सन जोरी। इत उत जय इच्छा नहिं थोरी।।

    अर्थ · Hindi

    भिरे सकल जोरिहि सन जोरी। इत उत जय इच्छा नहिं थोरी।।

  620. RCM 6.53.5Open verse →

    मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं। कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं।।

    अर्थ · Hindi

    मुठिकन्ह लातन्ह दातन्ह काटहिं। कपि जयसील मारि पुनि डाटहिं।।

  621. RCM 6.53.6Open verse →

    मारु मारु धरु धरु धरु मारू। सीस तोरि गहि भुजा उपारू।।

    अर्थ · Hindi

    मारु मारु धरु धरु धरु मारू। सीस तोरि गहि भुजा उपारू।।

  622. RCM 6.53.7Open verse →

    असि रव पूरि रही नव खंडा। धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा।।

    अर्थ · Hindi

    असि रव पूरि रही नव खंडा। धावहिं जहँ तहँ रुंड प्रचंडा।।

  623. RCM 6.53.8Open verse →

    देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा। कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा।।

    अर्थ · Hindi

    देखहिं कौतुक नभ सुर बृंदा। कबहुँक बिसमय कबहुँ अनंदा।।

  624. RCM 6.53.9Open verse →

    रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।

    अर्थ · Hindi

    रुधिर गाड़ भरि भरि जम्यो ऊपर धूरि उड़ाइ।

  625. RCM 6.53.10Open verse →

    जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।

    अर्थ · Hindi

    जनु अँगार रासिन्ह पर मृतक धूम रह्यो छाइ।।53।।

  626. RCM 6.54.1Open verse →

    घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।।

    अर्थ · Hindi

    घायल बीर बिराजहिं कैसे। कुसुमित किंसुक के तरु जैसे।।

  627. RCM 6.54.2Open verse →

    लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन मेघनाद द्वौ जोधा। भिरहिं परसपर करि अति क्रोधा।।

  628. RCM 6.54.3Open verse →

    एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।

    अर्थ · Hindi

    एकहि एक सकइ नहिं जीती। निसिचर छल बल करइ अनीती।।

  629. RCM 6.54.4Open verse →

    क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।

    अर्थ · Hindi

    क्रोधवंत तब भयउ अनंता। भंजेउ रथ सारथी तुरंता।।

  630. RCM 6.54.5Open verse →

    नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    नाना बिधि प्रहार कर सेषा। राच्छस भयउ प्रान अवसेषा।।

  631. RCM 6.54.6Open verse →

    रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।

    अर्थ · Hindi

    रावन सुत निज मन अनुमाना। संकठ भयउ हरिहि मम प्राना।।

  632. RCM 6.54.7Open verse →

    बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।।

    अर्थ · Hindi

    बीरघातिनी छाड़िसि साँगी। तेज पुंज लछिमन उर लागी।।

  633. RCM 6.54.8Open verse →

    मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।

    अर्थ · Hindi

    मुरुछा भई सक्ति के लागें। तब चलि गयउ निकट भय त्यागें।।

  634. RCM 6.54.9Open verse →

    मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।

    अर्थ · Hindi

    मेघनाद सम कोटि सत जोधा रहे उठाइ।

  635. RCM 6.54.10Open verse →

    जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।

    अर्थ · Hindi

    जगदाधार सेष किमि उठै चले खिसिआइ।।54।।

  636. RCM 6.55.1Open verse →

    सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु गिरिजा क्रोधानल जासू। जारइ भुवन चारिदस आसू।।

  637. RCM 6.55.2Open verse →

    सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।

    अर्थ · Hindi

    सक संग्राम जीति को ताही। सेवहिं सुर नर अग जग जाही।।

  638. RCM 6.55.3Open verse →

    यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।

    अर्थ · Hindi

    यह कौतूहल जानइ सोई। जा पर कृपा राम कै होई।।

  639. RCM 6.55.4Open verse →

    संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।

    अर्थ · Hindi

    संध्या भइ फिरि द्वौ बाहनी। लगे सँभारन निज निज अनी।।

  640. RCM 6.55.5Open verse →

    ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।

    अर्थ · Hindi

    ब्यापक ब्रह्म अजित भुवनेस्वर। लछिमन कहाँ बूझ करुनाकर।।

  641. RCM 6.55.6Open verse →

    तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।

    अर्थ · Hindi

    तब लगि लै आयउ हनुमाना। अनुज देखि प्रभु अति दुख माना।।

  642. RCM 6.55.7Open verse →

    जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।।

    अर्थ · Hindi

    जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना।।

  643. RCM 6.55.8Open verse →

    धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।

    अर्थ · Hindi

    धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता।।

  644. RCM 6.55.9Open verse →

    राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।

    अर्थ · Hindi

    राम पदारबिंद सिर नायउ आइ सुषेन।

  645. RCM 6.55.10Open verse →

    कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।

    अर्थ · Hindi

    कहा नाम गिरि औषधी जाहु पवनसुत लेन।।55।।

  646. RCM 6.56.1Open verse →

    राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।

    अर्थ · Hindi

    राम चरन सरसिज उर राखी। चला प्रभंजन सुत बल भाषी।।

  647. RCM 6.56.2Open verse →

    उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।

    अर्थ · Hindi

    उहाँ दूत एक मरमु जनावा। रावन कालनेमि गृह आवा।।

  648. RCM 6.56.3Open verse →

    दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।

    अर्थ · Hindi

    दसमुख कहा मरमु तेहिं सुना। पुनि पुनि कालनेमि सिरु धुना।।

  649. RCM 6.56.4Open verse →

    देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।

    अर्थ · Hindi

    देखत तुम्हहि नगरु जेहिं जारा। तासु पंथ को रोकन पारा।।

  650. RCM 6.56.5Open verse →

    भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।

    अर्थ · Hindi

    भजि रघुपति करु हित आपना। छाँड़हु नाथ मृषा जल्पना।।

  651. RCM 6.56.6Open verse →

    नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।

    अर्थ · Hindi

    नील कंज तनु सुंदर स्यामा। हृदयँ राखु लोचनाभिरामा।।

  652. RCM 6.56.7Open verse →

    मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।

    अर्थ · Hindi

    मैं तैं मोर मूढ़ता त्यागू। महा मोह निसि सूतत जागू।।

  653. RCM 6.56.8Open verse →

    काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।

    अर्थ · Hindi

    काल ब्याल कर भच्छक जोई। सपनेहुँ समर कि जीतिअ सोई।।

  654. RCM 6.56.9Open verse →

    सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।

    अर्थ · Hindi

    सुनि दसकंठ रिसान अति तेहिं मन कीन्ह बिचार।

  655. RCM 6.56.10Open verse →

    राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।

    अर्थ · Hindi

    राम दूत कर मरौं बरु यह खल रत मल भार।।56।।

  656. RCM 6.57.1Open verse →

    अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि चला रचिसि मग माया। सर मंदिर बर बाग बनाया।।

  657. RCM 6.57.2Open verse →

    मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।

    अर्थ · Hindi

    मारुतसुत देखा सुभ आश्रम। मुनिहि बूझि जल पियौं जाइ श्रम।।

  658. RCM 6.57.3Open verse →

    राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    राच्छस कपट बेष तहँ सोहा। मायापति दूतहि चह मोहा।।

  659. RCM 6.57.4Open verse →

    जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ पवनसुत नायउ माथा। लाग सो कहै राम गुन गाथा।।

  660. RCM 6.57.5Open verse →

    होत महा रन रावन रामहिं। जितहहिं राम न संसय या महिं।।

    अर्थ · Hindi

    होत महा रन रावन रामहिं। जितहहिं राम न संसय या महिं।।

  661. RCM 6.57.6Open verse →

    इहाँ भएँ मैं देखेउँ भाई। ग्यान दृष्टि बल मोहि अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ भएँ मैं देखेउँ भाई। ग्यान दृष्टि बल मोहि अधिकाई।।

  662. RCM 6.57.7Open verse →

    मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।

    अर्थ · Hindi

    मागा जल तेहिं दीन्ह कमंडल। कह कपि नहिं अघाउँ थोरें जल।।

  663. RCM 6.57.8Open verse →

    सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।

    अर्थ · Hindi

    सर मज्जन करि आतुर आवहु। दिच्छा देउँ ग्यान जेहिं पावहु।।

  664. RCM 6.57.9Open verse →

    सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान।

    अर्थ · Hindi

    सर पैठत कपि पद गहा मकरीं तब अकुलान।

  665. RCM 6.57.10Open verse →

    मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान।।57।।

    अर्थ · Hindi

    मारी सो धरि दिव्य तनु चली गगन चढ़ि जान।।57।।

  666. RCM 6.58.1Open verse →

    कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।।

    अर्थ · Hindi

    कपि तव दरस भइउँ निष्पापा। मिटा तात मुनिबर कर सापा।।

  667. RCM 6.58.2Open verse →

    मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि न होइ यह निसिचर घोरा। मानहु सत्य बचन कपि मोरा।।

  668. RCM 6.58.3Open verse →

    अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि गई अपछरा जबहीं। निसिचर निकट गयउ कपि तबहीं।।

  669. RCM 6.58.4Open verse →

    कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।।

    अर्थ · Hindi

    कह कपि मुनि गुरदछिना लेहू। पाछें हमहि मंत्र तुम्ह देहू।।

  670. RCM 6.58.5Open verse →

    सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।।

    अर्थ · Hindi

    सिर लंगूर लपेटि पछारा। निज तनु प्रगटेसि मरती बारा।।

  671. RCM 6.58.6Open verse →

    राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।।

    अर्थ · Hindi

    राम राम कहि छाड़ेसि प्राना। सुनि मन हरषि चलेउ हनुमाना।।

  672. RCM 6.58.7Open verse →

    देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    देखा सैल न औषध चीन्हा। सहसा कपि उपारि गिरि लीन्हा।।

  673. RCM 6.58.8Open verse →

    गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    गहि गिरि निसि नभ धावत भयऊ। अवधपुरी उपर कपि गयऊ।।

  674. RCM 6.58.9Open verse →

    देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।

    अर्थ · Hindi

    देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि।

  675. RCM 6.58.10Open verse →

    बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि।।58।।

  676. RCM 6.59.1Open verse →

    परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।

    अर्थ · Hindi

    परेउ मुरुछि महि लागत सायक। सुमिरत राम राम रघुनायक।।

  677. RCM 6.59.2Open verse →

    सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रिय बचन भरत तब धाए। कपि समीप अति आतुर आए।।

  678. RCM 6.59.3Open verse →

    बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।

    अर्थ · Hindi

    बिकल बिलोकि कीस उर लावा। जागत नहिं बहु भाँति जगावा।।

  679. RCM 6.59.4Open verse →

    मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।

    अर्थ · Hindi

    मुख मलीन मन भए दुखारी। कहत बचन भरि लोचन बारी।।

  680. RCM 6.59.5Open verse →

    जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बिधि राम बिमुख मोहि कीन्हा। तेहिं पुनि यह दारुन दुख दीन्हा।।

  681. RCM 6.59.6Open verse →

    जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मोरें मन बच अरु काया। प्रीति राम पद कमल अमाया।।

  682. RCM 6.59.7Open verse →

    तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।

    अर्थ · Hindi

    तौ कपि होउ बिगत श्रम सूला। जौं मो पर रघुपति अनुकूला।।

  683. RCM 6.59.8Open verse →

    सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन उठि बैठ कपीसा। कहि जय जयति कोसलाधीसा।।

  684. RCM 6.59.9Open verse →

    लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।

    अर्थ · Hindi

    लीन्ह कपिहि उर लाइ पुलकित तनु लोचन सजल।

  685. RCM 6.59.10Open verse →

    प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।

    अर्थ · Hindi

    प्रीति न हृदयँ समाइ सुमिरि राम रघुकुल तिलक।।59।।

  686. RCM 6.60.1Open verse →

    तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।

    अर्थ · Hindi

    तात कुसल कहु सुखनिधान की। सहित अनुज अरु मातु जानकी।।

  687. RCM 6.60.2Open verse →

    कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।

    अर्थ · Hindi

    कपि सब चरित समास बखाने। भए दुखी मन महुँ पछिताने।।

  688. RCM 6.60.3Open verse →

    अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।

    अर्थ · Hindi

    अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ।।

  689. RCM 6.60.4Open verse →

    जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।

    अर्थ · Hindi

    जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा।।

  690. RCM 6.60.5Open verse →

    तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।

    अर्थ · Hindi

    तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता।।

  691. RCM 6.60.6Open verse →

    चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।

    अर्थ · Hindi

    चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता।।

  692. RCM 6.60.7Open verse →

    सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि कपि मन उपजा अभिमाना। मोरें भार चलिहि किमि बाना।।

  693. RCM 6.60.8Open verse →

    राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।

    अर्थ · Hindi

    राम प्रभाव बिचारि बहोरी। बंदि चरन कह कपि कर जोरी।।

  694. RCM 6.60.9Open verse →

    तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत।

    अर्थ · Hindi

    तव प्रताप उर राखि प्रभु जेहउँ नाथ तुरंत।

  695. RCM 6.60.10Open verse →

    अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत।।60(क)।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि आयसु पाइ पद बंदि चलेउ हनुमंत।।60(क)।।

  696. RCM 6.60.11Open verse →

    भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।

    अर्थ · Hindi

    भरत बाहु बल सील गुन प्रभु पद प्रीति अपार।

  697. RCM 6.60.12Open verse →

    मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार।।60(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    मन महुँ जात सराहत पुनि पुनि पवनकुमार।।60(ख)।।

  698. RCM 6.61.1Open verse →

    उहाँ राम लछिमनहिं निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।

    अर्थ · Hindi

    उहाँ राम लछिमनहिं निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी।।

  699. RCM 6.61.2Open verse →

    अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायउ।।

    अर्थ · Hindi

    अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर लायउ।।

  700. RCM 6.61.3Open verse →

    सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।

    अर्थ · Hindi

    सकहु न दुखित देखि मोहि काऊ। बंधु सदा तव मृदुल सुभाऊ।।

  701. RCM 6.61.4Open verse →

    मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।

    अर्थ · Hindi

    मम हित लागि तजेहु पितु माता। सहेहु बिपिन हिम आतप बाता।।

  702. RCM 6.61.5Open verse →

    सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।

    अर्थ · Hindi

    सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।

  703. RCM 6.61.6Open verse →

    जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

    अर्थ · Hindi

    जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू।।

  704. RCM 6.61.7Open verse →

    सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।

    अर्थ · Hindi

    सुत बित नारि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग बारहिं बारा।।

  705. RCM 6.61.8Open verse →

    अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि जियँ जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।।

  706. RCM 6.61.9Open verse →

    जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।।

    अर्थ · Hindi

    जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फनि करिबर कर हीना।।

  707. RCM 6.61.10Open verse →

    अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

    अर्थ · Hindi

    अस मम जिवन बंधु बिनु तोही। जौं जड़ दैव जिआवै मोही।।

  708. RCM 6.61.11Open verse →

    जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।

    अर्थ · Hindi

    जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।

  709. RCM 6.61.12Open verse →

    बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।

  710. RCM 6.61.13Open verse →

    अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।

  711. RCM 6.61.14Open verse →

    निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।

    अर्थ · Hindi

    निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।

  712. RCM 6.61.15Open verse →

    सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।

    अर्थ · Hindi

    सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।

  713. RCM 6.61.16Open verse →

    उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।

    अर्थ · Hindi

    उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।

  714. RCM 6.61.17Open verse →

    बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।

    अर्थ · Hindi

    बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।

  715. RCM 6.61.18Open verse →

    उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।

    अर्थ · Hindi

    उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।

  716. RCM 6.61.19Open verse →

    प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर।

  717. RCM 6.61.20Open verse →

    आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।61।।

    अर्थ · Hindi

    आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस।।61।।

  718. RCM 6.62.1Open verse →

    हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।

  719. RCM 6.62.2Open verse →

    तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।

  720. RCM 6.62.3Open verse →

    हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।

    अर्थ · Hindi

    हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।

  721. RCM 6.62.4Open verse →

    कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।

    अर्थ · Hindi

    कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।

  722. RCM 6.62.5Open verse →

    यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।

  723. RCM 6.62.6Open verse →

    ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।

  724. RCM 6.62.7Open verse →

    जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।

    अर्थ · Hindi

    जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।

  725. RCM 6.62.8Open verse →

    कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।

  726. RCM 6.62.9Open verse →

    कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी।।

    अर्थ · Hindi

    कथा कही सब तेहिं अभिमानी। जेहि प्रकार सीता हरि आनी।।

  727. RCM 6.62.10Open verse →

    तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महामहा जोधा संघारे।।

    अर्थ · Hindi

    तात कपिन्ह सब निसिचर मारे। महामहा जोधा संघारे।।

  728. RCM 6.62.11Open verse →

    दुर्मुख सुररिपु मनुज अहारी। भट अतिकाय अकंपन भारी।।

    अर्थ · Hindi

    दुर्मुख सुररिपु मनुज अहारी। भट अतिकाय अकंपन भारी।।

  729. RCM 6.62.12Open verse →

    अपर महोदर आदिक बीरा। परे समर महि सब रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    अपर महोदर आदिक बीरा। परे समर महि सब रनधीरा।।

  730. RCM 6.62.13Open verse →

    सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।

    अर्थ · Hindi

    सुनि दसकंधर बचन तब कुंभकरन बिलखान।

  731. RCM 6.62.14Open verse →

    जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।

    अर्थ · Hindi

    जगदंबा हरि आनि अब सठ चाहत कल्यान।।62।।

  732. RCM 6.63.1Open verse →

    भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा।।

    अर्थ · Hindi

    भल न कीन्ह तैं निसिचर नाहा। अब मोहि आइ जगाएहि काहा।।

  733. RCM 6.63.2Open verse →

    अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना।।

    अर्थ · Hindi

    अजहूँ तात त्यागि अभिमाना। भजहु राम होइहि कल्याना।।

  734. RCM 6.63.3Open verse →

    हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।

    अर्थ · Hindi

    हैं दससीस मनुज रघुनायक। जाके हनूमान से पायक।।

  735. RCM 6.63.4Open verse →

    अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।

    अर्थ · Hindi

    अहह बंधु तैं कीन्हि खोटाई। प्रथमहिं मोहि न सुनाएहि आई।।

  736. RCM 6.63.5Open verse →

    कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्हेहु प्रभू बिरोध तेहि देवक। सिव बिरंचि सुर जाके सेवक।।

  737. RCM 6.63.6Open verse →

    नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।

    अर्थ · Hindi

    नारद मुनि मोहि ग्यान जो कहा। कहतेउँ तोहि समय निरबहा।।

  738. RCM 6.63.7Open verse →

    अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सूफल करौ मैं जाई।।

    अर्थ · Hindi

    अब भरि अंक भेंटु मोहि भाई। लोचन सूफल करौ मैं जाई।।

  739. RCM 6.63.8Open verse →

    स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गात सरसीरुह लोचन। देखौं जाइ ताप त्रय मोचन।।

  740. RCM 6.63.9Open verse →

    राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।

    अर्थ · Hindi

    राम रूप गुन सुमिरत मगन भयउ छन एक।

  741. RCM 6.63.10Open verse →

    रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।

    अर्थ · Hindi

    रावन मागेउ कोटि घट मद अरु महिष अनेक।।63।।

  742. RCM 6.64.1Open verse →

    महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।।

    अर्थ · Hindi

    महिष खाइ करि मदिरा पाना। गर्जा बज्राघात समाना।।

  743. RCM 6.64.2Open verse →

    कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन दुर्मद रन रंगा। चला दुर्ग तजि सेन न संगा।।

  744. RCM 6.64.3Open verse →

    देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।

    अर्थ · Hindi

    देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ।।

  745. RCM 6.64.4Open verse →

    अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।

    अर्थ · Hindi

    अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो।।

  746. RCM 6.64.5Open verse →

    तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा।।

  747. RCM 6.64.6Open verse →

    तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ।।

  748. RCM 6.64.7Open verse →

    सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन।।

  749. RCM 6.64.8Open verse →

    धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन।।

  750. RCM 6.64.9Open verse →

    बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु बंस तैं कीन्ह उजागर। भजेहु राम सोभा सुख सागर।।

  751. RCM 6.64.10Open verse →

    बचन कर्म मन कपट तजि भजेहु राम रनधीर।

    अर्थ · Hindi

    बचन कर्म मन कपट तजि भजेहु राम रनधीर।

  752. RCM 6.64.11Open verse →

    जाहु न निज पर सूझ मोहि भयउँ कालबस बीर। 64।।

    अर्थ · Hindi

    जाहु न निज पर सूझ मोहि भयउँ कालबस बीर। 64।।

  753. RCM 6.65.1Open verse →

    बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन।।

  754. RCM 6.65.2Open verse →

    नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा।।

  755. RCM 6.65.3Open verse →

    एतना कपिन्ह सुना जब काना। किलकिलाइ धाए बलवाना।।

    अर्थ · Hindi

    एतना कपिन्ह सुना जब काना। किलकिलाइ धाए बलवाना।।

  756. RCM 6.65.4Open verse →

    लिए उठाइ बिटप अरु भूधर। कटकटाइ डारहिं ता ऊपर।।

    अर्थ · Hindi

    लिए उठाइ बिटप अरु भूधर। कटकटाइ डारहिं ता ऊपर।।

  757. RCM 6.65.5Open verse →

    कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा। करहिं भालु कपि एक एक बारा।।

    अर्थ · Hindi

    कोटि कोटि गिरि सिखर प्रहारा। करहिं भालु कपि एक एक बारा।।

  758. RCM 6.65.6Open verse →

    मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो।।

    अर्थ · Hindi

    मुर् यो न मन तनु टर् यो न टार् यो। जिमि गज अर्क फलनि को मार्यो।।

  759. RCM 6.65.7Open verse →

    तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।

    अर्थ · Hindi

    तब मारुतसुत मुठिका हन्यो। पर् यो धरनि ब्याकुल सिर धुन्यो।।

  760. RCM 6.65.8Open verse →

    पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि उठि तेहिं मारेउ हनुमंता। घुर्मित भूतल परेउ तुरंता।।

  761. RCM 6.65.9Open verse →

    पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि नल नीलहि अवनि पछारेसि। जहँ तहँ पटकि पटकि भट डारेसि।।

  762. RCM 6.65.10Open verse →

    चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    चली बलीमुख सेन पराई। अति भय त्रसित न कोउ समुहाई।।

  763. RCM 6.65.11Open verse →

    अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।

    अर्थ · Hindi

    अंगदादि कपि मुरुछित करि समेत सुग्रीव।

  764. RCM 6.65.12Open verse →

    काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।

    अर्थ · Hindi

    काँख दाबि कपिराज कहुँ चला अमित बल सींव।।65।।

  765. RCM 6.66.1Open verse →

    उमा करत रघुपति नरलीला। खेलत गरुड़ जिमि अहिगन मीला।।

    अर्थ · Hindi

    उमा करत रघुपति नरलीला। खेलत गरुड़ जिमि अहिगन मीला।।

  766. RCM 6.66.2Open verse →

    भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई।।

    अर्थ · Hindi

    भृकुटि भंग जो कालहि खाई। ताहि कि सोहइ ऐसि लराई।।

  767. RCM 6.66.3Open verse →

    जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जग पावनि कीरति बिस्तरिहहिं। गाइ गाइ भवनिधि नर तरिहहिं।।

  768. RCM 6.66.4Open verse →

    मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।

    अर्थ · Hindi

    मुरुछा गइ मारुतसुत जागा। सुग्रीवहि तब खोजन लागा।।

  769. RCM 6.66.5Open verse →

    सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।

    अर्थ · Hindi

    सुग्रीवहु कै मुरुछा बीती। निबुक गयउ तेहि मृतक प्रतीती।।

  770. RCM 6.66.6Open verse →

    काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।

    अर्थ · Hindi

    काटेसि दसन नासिका काना। गरजि अकास चलउ तेहिं जाना।।

  771. RCM 6.66.7Open verse →

    गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।

    अर्थ · Hindi

    गहेउ चरन गहि भूमि पछारा। अति लाघवँ उठि पुनि तेहि मारा।।

  772. RCM 6.66.8Open verse →

    पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि आयसु प्रभु पहिं बलवाना। जयति जयति जय कृपानिधाना।।

  773. RCM 6.66.9Open verse →

    नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।

    अर्थ · Hindi

    नाक कान काटे जियँ जानी। फिरा क्रोध करि भइ मन ग्लानी।।

  774. RCM 6.66.10Open verse →

    सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।

    अर्थ · Hindi

    सहज भीम पुनि बिनु श्रुति नासा। देखत कपि दल उपजी त्रासा।।

  775. RCM 6.66.11Open verse →

    जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।

    अर्थ · Hindi

    जय जय जय रघुबंस मनि धाए कपि दै हूह।

  776. RCM 6.66.12Open verse →

    एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।

    अर्थ · Hindi

    एकहि बार तासु पर छाड़ेन्हि गिरि तरु जूह।।66।।

  777. RCM 6.67.1Open verse →

    कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन रन रंग बिरुद्धा। सन्मुख चला काल जनु क्रुद्धा।।

  778. RCM 6.67.2Open verse →

    कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।

    अर्थ · Hindi

    कोटि कोटि कपि धरि धरि खाई। जनु टीड़ी गिरि गुहाँ समाई।।

  779. RCM 6.67.3Open verse →

    कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।

    अर्थ · Hindi

    कोटिन्ह गहि सरीर सन मर्दा। कोटिन्ह मीजि मिलव महि गर्दा।।

  780. RCM 6.67.4Open verse →

    मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।

    अर्थ · Hindi

    मुख नासा श्रवनन्हि कीं बाटा। निसरि पराहिं भालु कपि ठाटा।।

  781. RCM 6.67.5Open verse →

    रन मद मत्त निसाचर दर्पा। बिस्व ग्रसिहि जनु एहि बिधि अर्पा।।

    अर्थ · Hindi

    रन मद मत्त निसाचर दर्पा। बिस्व ग्रसिहि जनु एहि बिधि अर्पा।।

  782. RCM 6.67.6Open verse →

    मुरे सुभट सब फिरहिं न फेरे। सूझ न नयन सुनहिं नहिं टेरे।।

    अर्थ · Hindi

    मुरे सुभट सब फिरहिं न फेरे। सूझ न नयन सुनहिं नहिं टेरे।।

  783. RCM 6.67.7Open verse →

    कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी।।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन कपि फौज बिडारी। सुनि धाई रजनीचर धारी।।

  784. RCM 6.67.8Open verse →

    देखि राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम बिकल कटकाई। रिपु अनीक नाना बिधि आई।।

  785. RCM 6.67.9Open verse →

    सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सुग्रीव बिभीषन अनुज सँभारेहु सैन।

  786. RCM 6.67.10Open verse →

    मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।

    अर्थ · Hindi

    मैं देखउँ खल बल दलहि बोले राजिवनैन।।67।।

  787. RCM 6.68.1Open verse →

    कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    कर सारंग साजि कटि भाथा। अरि दल दलन चले रघुनाथा।।

  788. RCM 6.68.2Open verse →

    प्रथम कीन्ह प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रथम कीन्ह प्रभु धनुष टँकोरा। रिपु दल बधिर भयउ सुनि सोरा।।

  789. RCM 6.68.3Open verse →

    सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।

    अर्थ · Hindi

    सत्यसंध छाँड़े सर लच्छा। कालसर्प जनु चले सपच्छा।।

  790. RCM 6.68.4Open verse →

    जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ चले बिपुल नाराचा। लगे कटन भट बिकट पिसाचा।।

  791. RCM 6.68.5Open verse →

    कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।

    अर्थ · Hindi

    कटहिं चरन उर सिर भुजदंडा। बहुतक बीर होहिं सत खंडा।।

  792. RCM 6.68.6Open verse →

    घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    घुर्मि घुर्मि घायल महि परहीं। उठि संभारि सुभट पुनि लरहीं।।

  793. RCM 6.68.7Open verse →

    लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।

    अर्थ · Hindi

    लागत बान जलद जिमि गाजहीं। बहुतक देखी कठिन सर भाजहिं।।

  794. RCM 6.68.8Open verse →

    रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    रुंड प्रचंड मुंड बिनु धावहिं। धरु धरु मारू मारु धुनि गावहिं।।

  795. RCM 6.68.9Open verse →

    छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच।

    अर्थ · Hindi

    छन महुँ प्रभु के सायकन्हि काटे बिकट पिसाच।

  796. RCM 6.68.10Open verse →

    पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच।।68।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि रघुबीर निषंग महुँ प्रबिसे सब नाराच।।68।।

  797. RCM 6.69.1Open verse →

    कुंभकरन मन दीख बिचारी। हति धन माझ निसाचर धारी।।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन मन दीख बिचारी। हति धन माझ निसाचर धारी।।

  798. RCM 6.69.2Open verse →

    भा अति क्रुद्ध महाबल बीरा। कियो मृगनायक नाद गँभीरा।।

    अर्थ · Hindi

    भा अति क्रुद्ध महाबल बीरा। कियो मृगनायक नाद गँभीरा।।

  799. RCM 6.69.3Open verse →

    कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।

    अर्थ · Hindi

    कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।

  800. RCM 6.69.4Open verse →

    आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।

    अर्थ · Hindi

    आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।

  801. RCM 6.69.5Open verse →

    पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।

  802. RCM 6.69.6Open verse →

    तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।

  803. RCM 6.69.7Open verse →

    सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।

    अर्थ · Hindi

    सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।

  804. RCM 6.69.8Open verse →

    बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।

    अर्थ · Hindi

    बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।

  805. RCM 6.69.9Open verse →

    महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।

    अर्थ · Hindi

    महानाद करि गर्जा कोटि कोटि गहि कीस।

  806. RCM 6.69.10Open verse →

    महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।

    अर्थ · Hindi

    महि पटकइ गजराज इव सपथ करइ दससीस।।69।।

  807. RCM 6.70.1Open verse →

    भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।

    अर्थ · Hindi

    भागे भालु बलीमुख जूथा। बृकु बिलोकि जिमि मेष बरूथा।।

  808. RCM 6.70.2Open verse →

    चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।

    अर्थ · Hindi

    चले भागि कपि भालु भवानी। बिकल पुकारत आरत बानी।।

  809. RCM 6.70.3Open verse →

    यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।

    अर्थ · Hindi

    यह निसिचर दुकाल सम अहई। कपिकुल देस परन अब चहई।।

  810. RCM 6.70.4Open verse →

    कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।

    अर्थ · Hindi

    कृपा बारिधर राम खरारी। पाहि पाहि प्रनतारति हारी।।

  811. RCM 6.70.5Open verse →

    सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।

    अर्थ · Hindi

    सकरुन बचन सुनत भगवाना। चले सुधारि सरासन बाना।।

  812. RCM 6.70.6Open verse →

    राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।

    अर्थ · Hindi

    राम सेन निज पाछैं घाली। चले सकोप महा बलसाली।।

  813. RCM 6.70.7Open verse →

    खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।

    अर्थ · Hindi

    खैंचि धनुष सर सत संधाने। छूटे तीर सरीर समाने।।

  814. RCM 6.70.8Open verse →

    लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।

    अर्थ · Hindi

    लागत सर धावा रिस भरा। कुधर डगमगत डोलति धरा।।

  815. RCM 6.70.9Open verse →

    लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।

    अर्थ · Hindi

    लीन्ह एक तेहिं सैल उपाटी। रघुकुल तिलक भुजा सोइ काटी।।

  816. RCM 6.70.10Open verse →

    धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।

    अर्थ · Hindi

    धावा बाम बाहु गिरि धारी। प्रभु सोउ भुजा काटि महि पारी।।

  817. RCM 6.70.11Open verse →

    काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।

    अर्थ · Hindi

    काटें भुजा सोह खल कैसा। पच्छहीन मंदर गिरि जैसा।।

  818. RCM 6.70.12Open verse →

    उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।

    अर्थ · Hindi

    उग्र बिलोकनि प्रभुहि बिलोका। ग्रसन चहत मानहुँ त्रेलोका।।

  819. RCM 6.70.13Open verse →

    करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।

    अर्थ · Hindi

    करि चिक्कार घोर अति धावा बदनु पसारि।

  820. RCM 6.70.14Open verse →

    गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।

    अर्थ · Hindi

    गगन सिद्ध सुर त्रासित हा हा हेति पुकारि।।70।।

  821. RCM 6.71.1Open verse →

    सभय देव करुनानिधि जान्यो। श्रवन प्रजंत सरासनु तान्यो।।

    अर्थ · Hindi

    सभय देव करुनानिधि जान्यो। श्रवन प्रजंत सरासनु तान्यो।।

  822. RCM 6.71.2Open verse →

    बिसिख निकर निसिचर मुख भरेऊ। तदपि महाबल भूमि न परेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    बिसिख निकर निसिचर मुख भरेऊ। तदपि महाबल भूमि न परेऊ।।

  823. RCM 6.71.3Open verse →

    सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।

    अर्थ · Hindi

    सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।

  824. RCM 6.71.4Open verse →

    तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।

  825. RCM 6.71.5Open verse →

    सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।

    अर्थ · Hindi

    सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।

  826. RCM 6.71.6Open verse →

    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।

    अर्थ · Hindi

    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।

  827. RCM 6.71.7Open verse →

    परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।

    अर्थ · Hindi

    परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।

  828. RCM 6.71.8Open verse →

    तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।

    अर्थ · Hindi

    तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।

  829. RCM 6.71.9Open verse →

    सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।

    अर्थ · Hindi

    सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।

  830. RCM 6.71.10Open verse →

    करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।

  831. RCM 6.71.11Open verse →

    गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए।।

    अर्थ · Hindi

    गगनोपरि हरि गुन गन गाए। रुचिर बीररस प्रभु मन भाए।।

  832. RCM 6.71.12Open verse →

    बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि हतहु खल कहि मुनि गए। राम समर महि सोभत भए।।

  833. RCM 6.72.1Open verse →

    दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।

    अर्थ · Hindi

    दिन कें अंत फिरीं दोउ अनी। समर भई सुभटन्ह श्रम घनी।।

  834. RCM 6.72.2Open verse →

    राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    राम कृपाँ कपि दल बल बाढ़ा। जिमि तृन पाइ लाग अति डाढ़ा।।

  835. RCM 6.72.3Open verse →

    छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती। निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    छीजहिं निसिचर दिनु अरु राती। निज मुख कहें सुकृत जेहि भाँती।।

  836. RCM 6.72.4Open verse →

    बहु बिलाप दसकंधर करई। बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई।।

    अर्थ · Hindi

    बहु बिलाप दसकंधर करई। बंधु सीस पुनि पुनि उर धरई।।

  837. RCM 6.72.5Open verse →

    रोवहिं नारि हृदय हति पानी। तासु तेज बल बिपुल बखानी।।

    अर्थ · Hindi

    रोवहिं नारि हृदय हति पानी। तासु तेज बल बिपुल बखानी।।

  838. RCM 6.72.6Open verse →

    मेघनाद तेहि अवसर आयउ। कहि बहु कथा पिता समुझायउ।।

    अर्थ · Hindi

    मेघनाद तेहि अवसर आयउ। कहि बहु कथा पिता समुझायउ।।

  839. RCM 6.72.7Open verse →

    देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    देखेहु कालि मोरि मनुसाई। अबहिं बहुत का करौं बड़ाई।।

  840. RCM 6.72.8Open verse →

    इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।

    अर्थ · Hindi

    इष्टदेव सैं बल रथ पायउँ। सो बल तात न तोहि देखायउँ।।

  841. RCM 6.72.9Open verse →

    एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि जल्पत भयउ बिहाना। चहुँ दुआर लागे कपि नाना।।

  842. RCM 6.72.10Open verse →

    इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    इत कपि भालु काल सम बीरा। उत रजनीचर अति रनधीरा।।

  843. RCM 6.72.11Open verse →

    लरहिं सुभट निज निज जय हेतू। बरनि न जाइ समर खगकेतू।।

    अर्थ · Hindi

    लरहिं सुभट निज निज जय हेतू। बरनि न जाइ समर खगकेतू।।

  844. RCM 6.72.12Open verse →

    मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।

    अर्थ · Hindi

    मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।।

  845. RCM 6.72.13Open verse →

    गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।

    अर्थ · Hindi

    गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास।।72।।

  846. RCM 6.73.1Open verse →

    सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।

    अर्थ · Hindi

    सक्ति सूल तरवारि कृपाना। अस्त्र सस्त्र कुलिसायुध नाना।।

  847. RCM 6.73.2Open verse →

    डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।

    अर्थ · Hindi

    डारह परसु परिघ पाषाना। लागेउ बृष्टि करै बहु बाना।।

  848. RCM 6.73.3Open verse →

    दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।

    अर्थ · Hindi

    दस दिसि रहे बान नभ छाई। मानहुँ मघा मेघ झरि लाई।।

  849. RCM 6.73.4Open verse →

    धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।

    अर्थ · Hindi

    धरु धरु मारु सुनिअ धुनि काना। जो मारइ तेहि कोउ न जाना।।

  850. RCM 6.73.5Open verse →

    गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।

    अर्थ · Hindi

    गहि गिरि तरु अकास कपि धावहिं। देखहि तेहि न दुखित फिरि आवहिं।।

  851. RCM 6.73.6Open verse →

    अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।

    अर्थ · Hindi

    अवघट घाट बाट गिरि कंदर। माया बल कीन्हेसि सर पंजर।।

  852. RCM 6.73.7Open verse →

    जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर।।

    अर्थ · Hindi

    जाहिं कहाँ ब्याकुल भए बंदर। सुरपति बंदि परे जनु मंदर।।

  853. RCM 6.73.8Open verse →

    मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला।।

    अर्थ · Hindi

    मारुतसुत अंगद नल नीला। कीन्हेसि बिकल सकल बलसीला।।

  854. RCM 6.73.9Open verse →

    पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि लछिमन सुग्रीव बिभीषन। सरन्हि मारि कीन्हेसि जर्जर तन।।

  855. RCM 6.73.10Open verse →

    पुनि रघुपति सैं जूझे लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि रघुपति सैं जूझे लागा। सर छाँड़इ होइ लागहिं नागा।।

  856. RCM 6.73.11Open verse →

    ब्याल पास बस भए खरारी। स्वबस अनंत एक अबिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याल पास बस भए खरारी। स्वबस अनंत एक अबिकारी।।

  857. RCM 6.73.12Open verse →

    नट इव कपट चरित कर नाना। सदा स्वतंत्र एक भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    नट इव कपट चरित कर नाना। सदा स्वतंत्र एक भगवाना।।

  858. RCM 6.73.13Open verse →

    रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।

    अर्थ · Hindi

    रन सोभा लगि प्रभुहिं बँधायो। नागपास देवन्ह भय पायो।।

  859. RCM 6.73.14Open verse →

    गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।

    अर्थ · Hindi

    गिरिजा जासु नाम जपि मुनि काटहिं भव पास।

  860. RCM 6.73.15Open verse →

    सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।

    अर्थ · Hindi

    सो कि बंध तर आवइ ब्यापक बिस्व निवास।।73।।

  861. RCM 6.74.1Open verse →

    चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।

    अर्थ · Hindi

    चरित राम के सगुन भवानी। तर्कि न जाहिं बुद्धि बल बानी।।

  862. RCM 6.74.2Open verse →

    अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।

    अर्थ · Hindi

    अस बिचारि जे तग्य बिरागी। रामहि भजहिं तर्क सब त्यागी।।

  863. RCM 6.74.3Open verse →

    ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा। पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा।।

    अर्थ · Hindi

    ब्याकुल कटकु कीन्ह घननादा। पुनि भा प्रगट कहइ दुर्बादा।।

  864. RCM 6.74.4Open verse →

    जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा।।

    अर्थ · Hindi

    जामवंत कह खल रहु ठाढ़ा। सुनि करि ताहि क्रोध अति बाढ़ा।।

  865. RCM 6.74.5Open verse →

    बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।

    अर्थ · Hindi

    बूढ़ जानि सठ छाँड़ेउँ तोही। लागेसि अधम पचारै मोही।।

  866. RCM 6.74.6Open verse →

    अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि तरल त्रिसूल चलायो। जामवंत कर गहि सोइ धायो।।

  867. RCM 6.74.7Open verse →

    मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती।।

    अर्थ · Hindi

    मारिसि मेघनाद कै छाती। परा भूमि घुर्मित सुरघाती।।

  868. RCM 6.74.8Open verse →

    पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ। महि पछारि निज बल देखरायो।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि रिसान गहि चरन फिरायौ। महि पछारि निज बल देखरायो।।

  869. RCM 6.74.9Open verse →

    बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा।।

    अर्थ · Hindi

    बर प्रसाद सो मरइ न मारा। तब गहि पद लंका पर डारा।।

  870. RCM 6.74.10Open verse →

    इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ देवरिषि गरुड़ पठायो। राम समीप सपदि सो आयो।।

  871. RCM 6.74.11Open verse →

    खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।

    अर्थ · Hindi

    खगपति सब धरि खाए माया नाग बरूथ।

  872. RCM 6.74.12Open verse →

    माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।

    अर्थ · Hindi

    माया बिगत भए सब हरषे बानर जूथ। 74(क)।।

  873. RCM 6.74.13Open verse →

    गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ।

    अर्थ · Hindi

    गहि गिरि पादप उपल नख धाए कीस रिसाइ।

  874. RCM 6.74.14Open verse →

    चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    चले तमीचर बिकलतर गढ़ पर चढ़े पराइ।।74(ख)।।

  875. RCM 6.75.1Open verse →

    मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।

    अर्थ · Hindi

    मेघनाद के मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी।।

  876. RCM 6.75.2Open verse →

    तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा।।

  877. RCM 6.75.3Open verse →

    इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ बिभीषन मंत्र बिचारा। सुनहु नाथ बल अतुल उदारा।।

  878. RCM 6.75.4Open verse →

    मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन।।

    अर्थ · Hindi

    मेघनाद मख करइ अपावन। खल मायावी देव सतावन।।

  879. RCM 6.75.5Open verse →

    जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि।।

    अर्थ · Hindi

    जौं प्रभु सिद्ध होइ सो पाइहि। नाथ बेगि पुनि जीति न जाइहि।।

  880. RCM 6.75.6Open verse →

    सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि रघुपति अतिसय सुख माना। बोले अंगदादि कपि नाना।।

  881. RCM 6.75.7Open verse →

    लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन संग जाहु सब भाई। करहु बिधंस जग्य कर जाई।।

  882. RCM 6.75.8Open verse →

    तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह लछिमन मारेहु रन ओही। देखि सभय सुर दुख अति मोही।।

  883. RCM 6.75.9Open verse →

    मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई।।

    अर्थ · Hindi

    मारेहु तेहि बल बुद्धि उपाई। जेहिं छीजै निसिचर सुनु भाई।।

  884. RCM 6.75.10Open verse →

    जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन।।

    अर्थ · Hindi

    जामवंत सुग्रीव बिभीषन। सेन समेत रहेहु तीनिउ जन।।

  885. RCM 6.75.11Open verse →

    जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।

    अर्थ · Hindi

    जब रघुबीर दीन्हि अनुसासन। कटि निषंग कसि साजि सरासन।।

  886. RCM 6.75.12Open verse →

    प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु प्रताप उर धरि रनधीरा। बोले घन इव गिरा गँभीरा।।

  887. RCM 6.75.13Open verse →

    जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं तेहि आजु बधें बिनु आवौं। तौ रघुपति सेवक न कहावौं।।

  888. RCM 6.75.14Open verse →

    जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    जौं सत संकर करहिं सहाई। तदपि हतउँ रघुबीर दोहाई।।

  889. RCM 6.75.15Open verse →

    रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति चरन नाइ सिरु चलेउ तुरंत अनंत।

  890. RCM 6.75.16Open verse →

    अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।

    अर्थ · Hindi

    अंगद नील मयंद नल संग सुभट हनुमंत।।75।।

  891. RCM 6.76.1Open verse →

    जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा।।

    अर्थ · Hindi

    जाइ कपिन्ह सो देखा बैसा। आहुति देत रुधिर अरु भैंसा।।

  892. RCM 6.76.2Open verse →

    कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्ह कपिन्ह सब जग्य बिधंसा। जब न उठइ तब करहिं प्रसंसा।।

  893. RCM 6.76.3Open verse →

    तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।

    अर्थ · Hindi

    तदपि न उठइ धरेन्हि कच जाई। लातन्हि हति हति चले पराई।।

  894. RCM 6.76.4Open verse →

    लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।

    अर्थ · Hindi

    लै त्रिसुल धावा कपि भागे। आए जहँ रामानुज आगे।।

  895. RCM 6.76.5Open verse →

    आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।

    अर्थ · Hindi

    आवा परम क्रोध कर मारा। गर्ज घोर रव बारहिं बारा।।

  896. RCM 6.76.6Open verse →

    कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।

    अर्थ · Hindi

    कोपि मरुतसुत अंगद धाए। हति त्रिसूल उर धरनि गिराए।।

  897. RCM 6.76.7Open verse →

    प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु कहँ छाँड़ेसि सूल प्रचंडा। सर हति कृत अनंत जुग खंडा।।

  898. RCM 6.76.8Open verse →

    उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा।।

    अर्थ · Hindi

    उठि बहोरि मारुति जुबराजा। हतहिं कोपि तेहि घाउ न बाजा।।

  899. RCM 6.76.9Open verse →

    फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा।।

    अर्थ · Hindi

    फिरे बीर रिपु मरइ न मारा। तब धावा करि घोर चिकारा।।

  900. RCM 6.76.10Open verse →

    आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला।।

    अर्थ · Hindi

    आवत देखि क्रुद्ध जनु काला। लछिमन छाड़े बिसिख कराला।।

  901. RCM 6.76.11Open verse →

    देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।

    अर्थ · Hindi

    देखेसि आवत पबि सम बाना। तुरत भयउ खल अंतरधाना।।

  902. RCM 6.76.12Open verse →

    बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध बेष धरि करइ लराई। कबहुँक प्रगट कबहुँ दुरि जाई।।

  903. RCM 6.76.13Open verse →

    देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि अजय रिपु डरपे कीसा। परम क्रुद्ध तब भयउ अहीसा।।

  904. RCM 6.76.14Open verse →

    लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन मन अस मंत्र दृढ़ावा। एहि पापिहि मैं बहुत खेलावा।।

  905. RCM 6.76.15Open verse →

    सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।

    अर्थ · Hindi

    सुमिरि कोसलाधीस प्रतापा। सर संधान कीन्ह करि दापा।।

  906. RCM 6.76.16Open verse →

    छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।

    अर्थ · Hindi

    छाड़ा बान माझ उर लागा। मरती बार कपटु सब त्यागा।।

  907. RCM 6.76.17Open verse →

    रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।

    अर्थ · Hindi

    रामानुज कहँ रामु कहँ अस कहि छाँड़ेसि प्रान।

  908. RCM 6.76.18Open verse →

    धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।

    अर्थ · Hindi

    धन्य धन्य तव जननी कह अंगद हनुमान।।76।।

  909. RCM 6.77.1Open verse →

    बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु प्रयास हनुमान उठायो। लंका द्वार राखि पुनि आयो।।

  910. RCM 6.77.2Open verse →

    तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा। चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा।।

    अर्थ · Hindi

    तासु मरन सुनि सुर गंधर्बा। चढ़ि बिमान आए नभ सर्बा।।

  911. RCM 6.77.3Open verse →

    बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    बरषि सुमन दुंदुभीं बजावहिं। श्रीरघुनाथ बिमल जसु गावहिं।।

  912. RCM 6.77.4Open verse →

    जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।

    अर्थ · Hindi

    जय अनंत जय जगदाधारा। तुम्ह प्रभु सब देवन्हि निस्तारा।।

  913. RCM 6.77.5Open verse →

    अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    अस्तुति करि सुर सिद्ध सिधाए। लछिमन कृपासिन्धु पहिं आए।।

  914. RCM 6.77.6Open verse →

    सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुत बध सुना दसानन जबहीं। मुरुछित भयउ परेउ महि तबहीं।।

  915. RCM 6.77.7Open verse →

    मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरी रुदन कर भारी। उर ताड़न बहु भाँति पुकारी।।

  916. RCM 6.77.8Open verse →

    नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा।।

    अर्थ · Hindi

    नगर लोग सब ब्याकुल सोचा। सकल कहहिं दसकंधर पोचा।।

  917. RCM 6.77.9Open verse →

    तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।

    अर्थ · Hindi

    तब दसकंठ बिबिध बिधि समुझाईं सब नारि।

  918. RCM 6.77.10Open verse →

    नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।

    अर्थ · Hindi

    नस्वर रूप जगत सब देखहु हृदयँ बिचारि।।77।।

  919. RCM 6.78.1Open verse →

    तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन।।

  920. RCM 6.78.2Open verse →

    पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।

    अर्थ · Hindi

    पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे।।

  921. RCM 6.78.3Open verse →

    निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।।

    अर्थ · Hindi

    निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा।।

  922. RCM 6.78.4Open verse →

    सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।।

    अर्थ · Hindi

    सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला।।

  923. RCM 6.78.5Open verse →

    सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।

    अर्थ · Hindi

    सो अबहीं बरु जाउ पराई। संजुग बिमुख भएँ न भलाई।।

  924. RCM 6.78.6Open verse →

    निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।

    अर्थ · Hindi

    निज भुज बल मैं बयरु बढ़ावा। देहउँ उतरु जो रिपु चढ़ि आवा।।

  925. RCM 6.78.7Open verse →

    अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि मरुत बेग रथ साजा। बाजे सकल जुझाऊ बाजा।।

  926. RCM 6.78.8Open verse →

    चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।

    अर्थ · Hindi

    चले बीर सब अतुलित बली। जनु कज्जल कै आँधी चली।।

  927. RCM 6.78.9Open verse →

    असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    असगुन अमित होहिं तेहि काला। गनइ न भुजबल गर्ब बिसाला।।

  928. RCM 6.79.1Open verse →

    चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा।।

    अर्थ · Hindi

    चलेउ निसाचर कटकु अपारा। चतुरंगिनी अनी बहु धारा।।

  929. RCM 6.79.2Open verse →

    बिबिध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना।।

    अर्थ · Hindi

    बिबिध भाँति बाहन रथ जाना। बिपुल बरन पताक ध्वज नाना।।

  930. RCM 6.79.3Open verse →

    चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।

    अर्थ · Hindi

    चले मत्त गज जूथ घनेरे। प्राबिट जलद मरुत जनु प्रेरे।।

  931. RCM 6.79.4Open verse →

    बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।

    अर्थ · Hindi

    बरन बरद बिरदैत निकाया। समर सूर जानहिं बहु माया।।

  932. RCM 6.79.5Open verse →

    अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।

    अर्थ · Hindi

    अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी।।

  933. RCM 6.79.6Open verse →

    चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।

    अर्थ · Hindi

    चलत कटक दिगसिधुंर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं।।

  934. RCM 6.79.7Open verse →

    उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।

    अर्थ · Hindi

    उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई।।

  935. RCM 6.79.8Open verse →

    पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।

    अर्थ · Hindi

    पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं।।

  936. RCM 6.79.9Open verse →

    भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई।।

  937. RCM 6.79.10Open verse →

    केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं।।

  938. RCM 6.79.11Open verse →

    कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा। मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा।।

    अर्थ · Hindi

    कहइ दसानन सुनहु सुभट्टा। मर्दहु भालु कपिन्ह के ठट्टा।।

  939. RCM 6.79.12Open verse →

    हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई। अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई।।

    अर्थ · Hindi

    हौं मारिहउँ भूप द्वौ भाई। अस कहि सन्मुख फौज रेंगाई।।

  940. RCM 6.79.13Open verse →

    यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई। धाए करि रघुबीर दोहाई।।

    अर्थ · Hindi

    यह सुधि सकल कपिन्ह जब पाई। धाए करि रघुबीर दोहाई।।

  941. RCM 6.80.1Open verse →

    रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा।।

  942. RCM 6.80.2Open verse →

    अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।

    अर्थ · Hindi

    अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा।।

  943. RCM 6.80.3Open verse →

    नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।।

  944. RCM 6.80.4Open verse →

    सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।।

  945. RCM 6.80.5Open verse →

    सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।

    अर्थ · Hindi

    सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।

  946. RCM 6.80.6Open verse →

    बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।

    अर्थ · Hindi

    बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे।।

  947. RCM 6.80.7Open verse →

    ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना।।

    अर्थ · Hindi

    ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना।।

  948. RCM 6.80.8Open verse →

    दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।

    अर्थ · Hindi

    दान परसु बुधि सक्ति प्रचंड़ा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।

  949. RCM 6.80.9Open verse →

    अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।

    अर्थ · Hindi

    अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना।।

  950. RCM 6.80.10Open verse →

    कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।

    अर्थ · Hindi

    कवच अभेद बिप्र गुर पूजा। एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।

  951. RCM 6.80.11Open verse →

    सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।

    अर्थ · Hindi

    सखा धर्ममय अस रथ जाकें। जीतन कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।

  952. RCM 6.80.12Open verse →

    महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर।

    अर्थ · Hindi

    महा अजय संसार रिपु जीति सकइ सो बीर।

  953. RCM 6.80.13Open verse →

    जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर।।80(क)।।

    अर्थ · Hindi

    जाकें अस रथ होइ दृढ़ सुनहु सखा मतिधीर।।80(क)।।

  954. RCM 6.80.14Open verse →

    सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रभु बचन बिभीषन हरषि गहे पद कंज।

  955. RCM 6.80.15Open verse →

    एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    एहि मिस मोहि उपदेसेहु राम कृपा सुख पुंज।।80(ख)।।

  956. RCM 6.80.16Open verse →

    उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।

    अर्थ · Hindi

    उत पचार दसकंधर इत अंगद हनुमान।

  957. RCM 6.80.17Open verse →

    लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।

    अर्थ · Hindi

    लरत निसाचर भालु कपि करि निज निज प्रभु आन।।80(ग)।।

  958. RCM 6.81.1Open verse →

    सुर ब्रह्मादि सिद्ध मुनि नाना। देखत रन नभ चढ़े बिमाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुर ब्रह्मादि सिद्ध मुनि नाना। देखत रन नभ चढ़े बिमाना।।

  959. RCM 6.81.2Open verse →

    हमहू उमा रहे तेहि संगा। देखत राम चरित रन रंगा।।

    अर्थ · Hindi

    हमहू उमा रहे तेहि संगा। देखत राम चरित रन रंगा।।

  960. RCM 6.81.3Open verse →

    सुभट समर रस दुहु दिसि माते। कपि जयसील राम बल ताते।।

    अर्थ · Hindi

    सुभट समर रस दुहु दिसि माते। कपि जयसील राम बल ताते।।

  961. RCM 6.81.4Open verse →

    एक एक सन भिरहिं पचारहिं। एकन्ह एक मर्दि महि पारहिं।।

    अर्थ · Hindi

    एक एक सन भिरहिं पचारहिं। एकन्ह एक मर्दि महि पारहिं।।

  962. RCM 6.81.5Open verse →

    मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं। सीस तोरि सीसन्ह सन मारहिं।।

    अर्थ · Hindi

    मारहिं काटहिं धरहिं पछारहिं। सीस तोरि सीसन्ह सन मारहिं।।

  963. RCM 6.81.6Open verse →

    उदर बिदारहिं भुजा उपारहिं। गहि पद अवनि पटकि भट डारहिं।।

    अर्थ · Hindi

    उदर बिदारहिं भुजा उपारहिं। गहि पद अवनि पटकि भट डारहिं।।

  964. RCM 6.81.7Open verse →

    निसिचर भट महि गाड़हि भालू। ऊपर ढारि देहिं बहु बालू।।

    अर्थ · Hindi

    निसिचर भट महि गाड़हि भालू। ऊपर ढारि देहिं बहु बालू।।

  965. RCM 6.81.8Open verse →

    बीर बलिमुख जुद्ध बिरुद्धे। देखिअत बिपुल काल जनु क्रुद्धे।।

    अर्थ · Hindi

    बीर बलिमुख जुद्ध बिरुद्धे। देखिअत बिपुल काल जनु क्रुद्धे।।

  966. RCM 6.82.1Open verse →

    धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर।।

    अर्थ · Hindi

    धायउ परम क्रुद्ध दसकंधर। सन्मुख चले हूह दै बंदर।।

  967. RCM 6.82.2Open verse →

    गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा।।

    अर्थ · Hindi

    गहि कर पादप उपल पहारा। डारेन्हि ता पर एकहिं बारा।।

  968. RCM 6.82.3Open verse →

    लागहिं सैल बज्र तन तासू। खंड खंड होइ फूटहिं आसू।।

    अर्थ · Hindi

    लागहिं सैल बज्र तन तासू। खंड खंड होइ फूटहिं आसू।।

  969. RCM 6.82.4Open verse →

    चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुर्मद रावन अति कोपी।।

    अर्थ · Hindi

    चला न अचल रहा रथ रोपी। रन दुर्मद रावन अति कोपी।।

  970. RCM 6.82.5Open verse →

    इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा।।

    अर्थ · Hindi

    इत उत झपटि दपटि कपि जोधा। मर्दै लाग भयउ अति क्रोधा।।

  971. RCM 6.82.6Open verse →

    चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना।।

    अर्थ · Hindi

    चले पराइ भालु कपि नाना। त्राहि त्राहि अंगद हनुमाना।।

  972. RCM 6.82.7Open verse →

    पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।।

    अर्थ · Hindi

    पाहि पाहि रघुबीर गोसाई। यह खल खाइ काल की नाई।।

  973. RCM 6.82.8Open verse →

    तेहि देखे कपि सकल पराने। दसहुँ चाप सायक संधाने।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि देखे कपि सकल पराने। दसहुँ चाप सायक संधाने।।

  974. RCM 6.83.1Open verse →

    रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।।

    अर्थ · Hindi

    रे खल का मारसि कपि भालू। मोहि बिलोकु तोर मैं कालू।।

  975. RCM 6.83.2Open verse →

    खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।।

    अर्थ · Hindi

    खोजत रहेउँ तोहि सुतघाती। आजु निपाति जुड़ावउँ छाती।।

  976. RCM 6.83.3Open verse →

    अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि छाड़ेसि बान प्रचंडा। लछिमन किए सकल सत खंडा।।

  977. RCM 6.83.4Open verse →

    कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।।

    अर्थ · Hindi

    कोटिन्ह आयुध रावन डारे। तिल प्रवान करि काटि निवारे।।

  978. RCM 6.83.5Open verse →

    पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि निज बानन्ह कीन्ह प्रहारा। स्यंदनु भंजि सारथी मारा।।

  979. RCM 6.83.6Open verse →

    सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।।

    अर्थ · Hindi

    सत सत सर मारे दस भाला। गिरि सृंगन्ह जनु प्रबिसहिं ब्याला।।

  980. RCM 6.83.7Open verse →

    पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि सत सर मारा उर माहीं। परेउ धरनि तल सुधि कछु नाहीं।।

  981. RCM 6.83.8Open verse →

    उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।

    अर्थ · Hindi

    उठा प्रबल पुनि मुरुछा जागी। छाड़िसि ब्रह्म दीन्हि जो साँगी।।

  982. RCM 6.84.1Open verse →

    जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।

    अर्थ · Hindi

    जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।

  983. RCM 6.84.2Open verse →

    मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।

    अर्थ · Hindi

    मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।

  984. RCM 6.84.3Open verse →

    मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।

    अर्थ · Hindi

    मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।

  985. RCM 6.84.4Open verse →

    धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।

    अर्थ · Hindi

    धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।

  986. RCM 6.84.5Open verse →

    अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।

  987. RCM 6.84.6Open verse →

    कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।

    अर्थ · Hindi

    कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।

  988. RCM 6.84.7Open verse →

    सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।

  989. RCM 6.84.8Open verse →

    पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।

  990. RCM 6.85.1Open verse →

    इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ बिभीषन सब सुधि पाई। सपदि जाइ रघुपतिहि सुनाई।।

  991. RCM 6.85.2Open verse →

    नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा।।

    अर्थ · Hindi

    नाथ करइ रावन एक जागा। सिद्ध भएँ नहिं मरिहि अभागा।।

  992. RCM 6.85.3Open verse →

    पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर।।

    अर्थ · Hindi

    पठवहु नाथ बेगि भट बंदर। करहिं बिधंस आव दसकंधर।।

  993. RCM 6.85.4Open verse →

    प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए।।

    अर्थ · Hindi

    प्रात होत प्रभु सुभट पठाए। हनुमदादि अंगद सब धाए।।

  994. RCM 6.85.5Open verse →

    कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।

    अर्थ · Hindi

    कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।

  995. RCM 6.85.6Open verse →

    जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।

  996. RCM 6.85.7Open verse →

    रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।

    अर्थ · Hindi

    रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।

  997. RCM 6.85.8Open verse →

    अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।

  998. RCM 6.86.1Open verse →

    चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।।

    अर्थ · Hindi

    चलत होहिं अति असुभ भयंकर। बैठहिं गीध उड़ाइ सिरन्ह पर।।

  999. RCM 6.86.2Open verse →

    भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ कालबस काहु न माना। कहेसि बजावहु जुद्ध निसाना।।

  1000. RCM 6.86.3Open verse →

    चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।।

    अर्थ · Hindi

    चली तमीचर अनी अपारा। बहु गज रथ पदाति असवारा।।

  1001. RCM 6.86.4Open verse →

    प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु सन्मुख धाए खल कैंसें। सलभ समूह अनल कहँ जैंसें।।

  1002. RCM 6.86.5Open verse →

    इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ देवतन्ह अस्तुति कीन्ही। दारुन बिपति हमहि एहिं दीन्ही।।

  1003. RCM 6.86.6Open verse →

    अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    अब जनि राम खेलावहु एही। अतिसय दुखित होति बैदेही।।

  1004. RCM 6.86.7Open verse →

    देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।

    अर्थ · Hindi

    देव बचन सुनि प्रभु मुसकाना। उठि रघुबीर सुधारे बाना।

  1005. RCM 6.86.8Open verse →

    जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।

    अर्थ · Hindi

    जटा जूट दृढ़ बाँधै माथे। सोहहिं सुमन बीच बिच गाथे।।

  1006. RCM 6.86.9Open verse →

    अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।।

    अर्थ · Hindi

    अरुन नयन बारिद तनु स्यामा। अखिल लोक लोचनाभिरामा।।

  1007. RCM 6.86.10Open verse →

    कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।

    अर्थ · Hindi

    कटितट परिकर कस्यो निषंगा। कर कोदंड कठिन सारंगा।।

  1008. RCM 6.87.1Open verse →

    एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी।

    अर्थ · Hindi

    एहीं बीच निसाचर अनी। कसमसात आई अति घनी।

  1009. RCM 6.87.2Open verse →

    देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि चले सन्मुख कपि भट्टा। प्रलयकाल के जनु घन घट्टा।।

  1010. RCM 6.87.3Open verse →

    बहु कृपान तरवारि चमंकहिं। जनु दहँ दिसि दामिनीं दमंकहिं।।

    अर्थ · Hindi

    बहु कृपान तरवारि चमंकहिं। जनु दहँ दिसि दामिनीं दमंकहिं।।

  1011. RCM 6.87.4Open verse →

    गज रथ तुरग चिकार कठोरा। गर्जहिं मनहुँ बलाहक घोरा।।

    अर्थ · Hindi

    गज रथ तुरग चिकार कठोरा। गर्जहिं मनहुँ बलाहक घोरा।।

  1012. RCM 6.87.5Open verse →

    कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।

    अर्थ · Hindi

    कपि लंगूर बिपुल नभ छाए। मनहुँ इंद्रधनु उए सुहाए।।

  1013. RCM 6.87.6Open verse →

    उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।

    अर्थ · Hindi

    उठइ धूरि मानहुँ जलधारा। बान बुंद भै बृष्टि अपारा।।

  1014. RCM 6.87.7Open verse →

    दुहुँ दिसि पर्बत करहिं प्रहारा। बज्रपात जनु बारहिं बारा।।

    अर्थ · Hindi

    दुहुँ दिसि पर्बत करहिं प्रहारा। बज्रपात जनु बारहिं बारा।।

  1015. RCM 6.87.8Open verse →

    रघुपति कोपि बान झरि लाई। घायल भै निसिचर समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति कोपि बान झरि लाई। घायल भै निसिचर समुदाई।।

  1016. RCM 6.87.9Open verse →

    लागत बान बीर चिक्करहीं। घुर्मि घुर्मि जहँ तहँ महि परहीं।।

    अर्थ · Hindi

    लागत बान बीर चिक्करहीं। घुर्मि घुर्मि जहँ तहँ महि परहीं।।

  1017. RCM 6.87.10Open verse →

    स्त्रवहिं सैल जनु निर्झर भारी। सोनित सरि कादर भयकारी।।

    अर्थ · Hindi

    स्त्रवहिं सैल जनु निर्झर भारी। सोनित सरि कादर भयकारी।।

  1018. RCM 6.88.1Open verse →

    मज्जहि भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला।।

    अर्थ · Hindi

    मज्जहि भूत पिसाच बेताला। प्रमथ महा झोटिंग कराला।।

  1019. RCM 6.88.2Open verse →

    काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    काक कंक लै भुजा उड़ाहीं। एक ते छीनि एक लै खाहीं।।

  1020. RCM 6.88.3Open verse →

    एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    एक कहहिं ऐसिउ सौंघाई। सठहु तुम्हार दरिद्र न जाई।।

  1021. RCM 6.88.4Open verse →

    कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।

    अर्थ · Hindi

    कहँरत भट घायल तट गिरे। जहँ तहँ मनहुँ अर्धजल परे।।

  1022. RCM 6.88.5Open verse →

    खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।

    अर्थ · Hindi

    खैंचहिं गीध आँत तट भए। जनु बंसी खेलत चित दए।।

  1023. RCM 6.88.6Open verse →

    बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।

    अर्थ · Hindi

    बहु भट बहहिं चढ़े खग जाहीं। जनु नावरि खेलहिं सरि माहीं।।

  1024. RCM 6.88.7Open verse →

    जोगिनि भरि भरि खप्पर संचहिं। भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जोगिनि भरि भरि खप्पर संचहिं। भूत पिसाच बधू नभ नंचहिं।।

  1025. RCM 6.88.8Open verse →

    भट कपाल करताल बजावहिं। चामुंडा नाना बिधि गावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    भट कपाल करताल बजावहिं। चामुंडा नाना बिधि गावहिं।।

  1026. RCM 6.88.9Open verse →

    जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।

    अर्थ · Hindi

    जंबुक निकर कटक्कट कट्टहिं। खाहिं हुआहिं अघाहिं दपट्टहिं।।

  1027. RCM 6.88.10Open verse →

    कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।

    अर्थ · Hindi

    कोटिन्ह रुंड मुंड बिनु डोल्लहिं। सीस परे महि जय जय बोल्लहिं।।

  1028. RCM 6.89.1Open verse →

    देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।।

    अर्थ · Hindi

    देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा।।

  1029. RCM 6.89.2Open verse →

    सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।

    अर्थ · Hindi

    सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा।।

  1030. RCM 6.89.3Open verse →

    तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।

    अर्थ · Hindi

    तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा।।

  1031. RCM 6.89.4Open verse →

    चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।

    अर्थ · Hindi

    चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी।।

  1032. RCM 6.89.5Open verse →

    रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।

    अर्थ · Hindi

    रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी।।

  1033. RCM 6.89.6Open verse →

    सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।

    अर्थ · Hindi

    सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी।।

  1034. RCM 6.89.7Open verse →

    सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।।

    अर्थ · Hindi

    सो माया रघुबीरहि बाँची। लछिमन कपिन्ह सो मानी साँची।।

  1035. RCM 6.89.8Open verse →

    देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।

    अर्थ · Hindi

    देखी कपिन्ह निसाचर अनी। अनुज सहित बहु कोसलधनी।।

  1036. RCM 6.90.1Open verse →

    अस कहि रथ रघुनाथ चलावा। बिप्र चरन पंकज सिरु नावा।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि रथ रघुनाथ चलावा। बिप्र चरन पंकज सिरु नावा।।

  1037. RCM 6.90.2Open verse →

    तब लंकेस क्रोध उर छावा। गर्जत तर्जत सन्मुख धावा।।

    अर्थ · Hindi

    तब लंकेस क्रोध उर छावा। गर्जत तर्जत सन्मुख धावा।।

  1038. RCM 6.90.3Open verse →

    जीतेहु जे भट संजुग माहीं। सुनु तापस मैं तिन्ह सम नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जीतेहु जे भट संजुग माहीं। सुनु तापस मैं तिन्ह सम नाहीं।।

  1039. RCM 6.90.4Open verse →

    रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाकें बंदीखाना।।

    अर्थ · Hindi

    रावन नाम जगत जस जाना। लोकप जाकें बंदीखाना।।

  1040. RCM 6.90.5Open verse →

    खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा।।

    अर्थ · Hindi

    खर दूषन बिराध तुम्ह मारा। बधेहु ब्याध इव बालि बिचारा।।

  1041. RCM 6.90.6Open verse →

    निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु।।

    अर्थ · Hindi

    निसिचर निकर सुभट संघारेहु। कुंभकरन घननादहि मारेहु।।

  1042. RCM 6.90.7Open verse →

    आजु बयरु सबु लेउँ निबाही। जौं रन भूप भाजि नहिं जाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    आजु बयरु सबु लेउँ निबाही। जौं रन भूप भाजि नहिं जाहीं।।

  1043. RCM 6.90.8Open verse →

    आजु करउँ खलु काल हवाले। परेहु कठिन रावन के पाले।।

    अर्थ · Hindi

    आजु करउँ खलु काल हवाले। परेहु कठिन रावन के पाले।।

  1044. RCM 6.90.9Open verse →

    सुनि दुर्बचन कालबस जाना। बिहँसि बचन कह कृपानिधाना।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि दुर्बचन कालबस जाना। बिहँसि बचन कह कृपानिधाना।।

  1045. RCM 6.90.10Open verse →

    सत्य सत्य सब तव प्रभुताई। जल्पसि जनि देखाउ मनुसाई।।

    अर्थ · Hindi

    सत्य सत्य सब तव प्रभुताई। जल्पसि जनि देखाउ मनुसाई।।

  1046. RCM 6.91.1Open verse →

    कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर।।

    अर्थ · Hindi

    कहि दुर्बचन क्रुद्ध दसकंधर। कुलिस समान लाग छाँड़ै सर।।

  1047. RCM 6.91.2Open verse →

    नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए।।

    अर्थ · Hindi

    नानाकार सिलीमुख धाए। दिसि अरु बिदिस गगन महि छाए।।

  1048. RCM 6.91.3Open verse →

    पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा।।

    अर्थ · Hindi

    पावक सर छाँड़ेउ रघुबीरा। छन महुँ जरे निसाचर तीरा।।

  1049. RCM 6.91.4Open verse →

    छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई।।

    अर्थ · Hindi

    छाड़िसि तीब्र सक्ति खिसिआई। बान संग प्रभु फेरि चलाई।।

  1050. RCM 6.91.5Open verse →

    कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै। बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै।।

    अर्थ · Hindi

    कोटिक चक्र त्रिसूल पबारै। बिनु प्रयास प्रभु काटि निवारै।।

  1051. RCM 6.91.6Open verse →

    निफल होहिं रावन सर कैसें। खल के सकल मनोरथ जैसें।।

    अर्थ · Hindi

    निफल होहिं रावन सर कैसें। खल के सकल मनोरथ जैसें।।

  1052. RCM 6.91.7Open verse →

    तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि।।

    अर्थ · Hindi

    तब सत बान सारथी मारेसि। परेउ भूमि जय राम पुकारेसि।।

  1053. RCM 6.91.8Open verse →

    राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा।।

    अर्थ · Hindi

    राम कृपा करि सूत उठावा। तब प्रभु परम क्रोध कहुँ पावा।।

  1054. RCM 6.92.1Open verse →

    चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।।

    अर्थ · Hindi

    चले बान सपच्छ जनु उरगा। प्रथमहिं हतेउ सारथी तुरगा।।

  1055. RCM 6.92.2Open verse →

    रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।

    अर्थ · Hindi

    रथ बिभंजि हति केतु पताका। गर्जा अति अंतर बल थाका।।

  1056. RCM 6.92.3Open verse →

    तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत आन रथ चढ़ि खिसिआना। अस्त्र सस्त्र छाँड़ेसि बिधि नाना।।

  1057. RCM 6.92.4Open verse →

    बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।

    अर्थ · Hindi

    बिफल होहिं सब उद्यम ताके। जिमि परद्रोह निरत मनसा के।।

  1058. RCM 6.92.5Open verse →

    तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।।

    अर्थ · Hindi

    तब रावन दस सूल चलावा। बाजि चारि महि मारि गिरावा।।

  1059. RCM 6.92.6Open verse →

    तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।

    अर्थ · Hindi

    तुरग उठाइ कोपि रघुनायक। खैंचि सरासन छाँड़े सायक।।

  1060. RCM 6.92.7Open verse →

    रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।।

    अर्थ · Hindi

    रावन सिर सरोज बनचारी। चलि रघुबीर सिलीमुख धारी।।

  1061. RCM 6.92.8Open verse →

    दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।

    अर्थ · Hindi

    दस दस बान भाल दस मारे। निसरि गए चले रुधिर पनारे।।

  1062. RCM 6.92.9Open verse →

    स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।।

    अर्थ · Hindi

    स्त्रवत रुधिर धायउ बलवाना। प्रभु पुनि कृत धनु सर संधाना।।

  1063. RCM 6.92.10Open verse →

    तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।

    अर्थ · Hindi

    तीस तीर रघुबीर पबारे। भुजन्हि समेत सीस महि पारे।।

  1064. RCM 6.92.11Open verse →

    काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।।

    अर्थ · Hindi

    काटतहीं पुनि भए नबीने। राम बहोरि भुजा सिर छीने।।

  1065. RCM 6.92.12Open verse →

    प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु बहु बार बाहु सिर हए। कटत झटिति पुनि नूतन भए।।

  1066. RCM 6.92.13Open verse →

    पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि पुनि प्रभु काटत भुज सीसा। अति कौतुकी कोसलाधीसा।।

  1067. RCM 6.92.14Open verse →

    रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।

    अर्थ · Hindi

    रहे छाइ नभ सिर अरु बाहू। मानहुँ अमित केतु अरु राहू।।

  1068. RCM 6.93.1Open verse →

    दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।।

    अर्थ · Hindi

    दसमुख देखि सिरन्ह कै बाढ़ी। बिसरा मरन भई रिस गाढ़ी।।

  1069. RCM 6.93.2Open verse →

    गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।

    अर्थ · Hindi

    गर्जेउ मूढ़ महा अभिमानी। धायउ दसहु सरासन तानी।।

  1070. RCM 6.93.3Open verse →

    समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।।

    अर्थ · Hindi

    समर भूमि दसकंधर कोप्यो। बरषि बान रघुपति रथ तोप्यो।।

  1071. RCM 6.93.4Open verse →

    दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।

    अर्थ · Hindi

    दंड एक रथ देखि न परेऊ। जनु निहार महुँ दिनकर दुरेऊ।।

  1072. RCM 6.93.5Open verse →

    हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    हाहाकार सुरन्ह जब कीन्हा। तब प्रभु कोपि कारमुक लीन्हा।।

  1073. RCM 6.93.6Open verse →

    सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।

    अर्थ · Hindi

    सर निवारि रिपु के सिर काटे। ते दिसि बिदिस गगन महि पाटे।।

  1074. RCM 6.93.7Open verse →

    काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।।

    अर्थ · Hindi

    काटे सिर नभ मारग धावहिं। जय जय धुनि करि भय उपजावहिं।।

  1075. RCM 6.93.8Open verse →

    कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।

    अर्थ · Hindi

    कहँ लछिमन सुग्रीव कपीसा। कहँ रघुबीर कोसलाधीसा।।

  1076. RCM 6.94.1Open verse →

    आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।।

    अर्थ · Hindi

    आवत देखि सक्ति अति घोरा। प्रनतारति भंजन पन मोरा।।

  1077. RCM 6.94.2Open verse →

    तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत बिभीषन पाछें मेला। सन्मुख राम सहेउ सोइ सेला।।

  1078. RCM 6.94.3Open verse →

    लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।।

    अर्थ · Hindi

    लागि सक्ति मुरुछा कछु भई। प्रभु कृत खेल सुरन्ह बिकलई।।

  1079. RCM 6.94.4Open verse →

    देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।

    अर्थ · Hindi

    देखि बिभीषन प्रभु श्रम पायो। गहि कर गदा क्रुद्ध होइ धायो।।

  1080. RCM 6.94.5Open verse →

    रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।।

    अर्थ · Hindi

    रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे।।

  1081. RCM 6.94.6Open verse →

    सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए।।

  1082. RCM 6.94.7Open verse →

    तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो।।

  1083. RCM 6.94.8Open verse →

    राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।

    अर्थ · Hindi

    राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा।।

  1084. RCM 6.95.1Open verse →

    देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।।

    अर्थ · Hindi

    देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी।।

  1085. RCM 6.95.2Open verse →

    रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।

    अर्थ · Hindi

    रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता।।

  1086. RCM 6.95.3Open verse →

    ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।।

    अर्थ · Hindi

    ठाढ़ रहा अति कंपित गाता। गयउ बिभीषनु जहँ जनत्राता।।

  1087. RCM 6.95.4Open verse →

    पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि रावन कपि हतेउ पचारी। चलेउ गगन कपि पूँछ पसारी।।

  1088. RCM 6.95.5Open verse →

    गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।।

    अर्थ · Hindi

    गहिसि पूँछ कपि सहित उड़ाना। पुनि फिरि भिरेउ प्रबल हनुमाना।।

  1089. RCM 6.95.6Open verse →

    लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।

    अर्थ · Hindi

    लरत अकास जुगल सम जोधा। एकहि एकु हनत करि क्रोधा।।

  1090. RCM 6.95.7Open verse →

    सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।

  1091. RCM 6.95.8Open verse →

    बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।

    अर्थ · Hindi

    बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।

  1092. RCM 6.96.1Open verse →

    अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।

    अर्थ · Hindi

    अंतरधान भयउ छन एका। पुनि प्रगटे खल रूप अनेका।।

  1093. RCM 6.96.2Open verse →

    रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति कटक भालु कपि जेते। जहँ तहँ प्रगट दसानन तेते।।

  1094. RCM 6.96.3Open verse →

    देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।।

    अर्थ · Hindi

    देखे कपिन्ह अमित दससीसा। जहँ तहँ भजे भालु अरु कीसा।।

  1095. RCM 6.96.4Open verse →

    भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।

    अर्थ · Hindi

    भागे बानर धरहिं न धीरा। त्राहि त्राहि लछिमन रघुबीरा।।

  1096. RCM 6.96.5Open verse →

    दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।

    अर्थ · Hindi

    दहँ दिसि धावहिं कोटिन्ह रावन। गर्जहिं घोर कठोर भयावन।।

  1097. RCM 6.96.6Open verse →

    डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।

    अर्थ · Hindi

    डरे सकल सुर चले पराई। जय कै आस तजहु अब भाई।।

  1098. RCM 6.96.7Open verse →

    सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।।

    अर्थ · Hindi

    सब सुर जिते एक दसकंधर। अब बहु भए तकहु गिरि कंदर।।

  1099. RCM 6.96.8Open verse →

    रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।

    अर्थ · Hindi

    रहे बिरंचि संभु मुनि ग्यानी। जिन्ह जिन्ह प्रभु महिमा कछु जानी।।

  1100. RCM 6.97.1Open verse →

    प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु छन महुँ माया सब काटी। जिमि रबि उएँ जाहिं तम फाटी।।

  1101. RCM 6.97.2Open verse →

    रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।

    अर्थ · Hindi

    रावनु एकु देखि सुर हरषे। फिरे सुमन बहु प्रभु पर बरषे।।

  1102. RCM 6.97.3Open verse →

    भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।

    अर्थ · Hindi

    भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।

  1103. RCM 6.97.4Open verse →

    प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।

  1104. RCM 6.97.5Open verse →

    अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।

    अर्थ · Hindi

    अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।

  1105. RCM 6.97.6Open verse →

    सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।

    अर्थ · Hindi

    सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।

  1106. RCM 6.97.7Open verse →

    हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।।

    अर्थ · Hindi

    हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे।।

  1107. RCM 6.97.8Open verse →

    देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।

    अर्थ · Hindi

    देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो।।

  1108. RCM 6.98.1Open verse →

    सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।।

    अर्थ · Hindi

    सिर भुज बाढ़ि देखि रिपु केरी। भालु कपिन्ह रिस भई घनेरी।।

  1109. RCM 6.98.2Open verse →

    मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।

    अर्थ · Hindi

    मरत न मूढ़ कटेउ भुज सीसा। धाए कोपि भालु भट कीसा।।

  1110. RCM 6.98.3Open verse →

    बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।

    अर्थ · Hindi

    बालितनय मारुति नल नीला। बानरराज दुबिद बलसीला।।

  1111. RCM 6.98.4Open verse →

    बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।

    अर्थ · Hindi

    बिटप महीधर करहिं प्रहारा। सोइ गिरि तरु गहि कपिन्ह सो मारा।।

  1112. RCM 6.98.5Open verse →

    एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।।

    अर्थ · Hindi

    एक नखन्हि रिपु बपुष बिदारी। भअगि चलहिं एक लातन्ह मारी।।

  1113. RCM 6.98.6Open verse →

    तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तब नल नील सिरन्हि चढ़ि गयऊ। नखन्हि लिलार बिदारत भयऊ।।

  1114. RCM 6.98.7Open verse →

    रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।।

    अर्थ · Hindi

    रुधिर देखि बिषाद उर भारी। तिन्हहि धरन कहुँ भुजा पसारी।।

  1115. RCM 6.98.8Open verse →

    गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।

    अर्थ · Hindi

    गहे न जाहिं करन्हि पर फिरहीं। जनु जुग मधुप कमल बन चरहीं।।

  1116. RCM 6.98.9Open verse →

    कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।

    अर्थ · Hindi

    कोपि कूदि द्वौ धरेसि बहोरी। महि पटकत भजे भुजा मरोरी।।

  1117. RCM 6.98.10Open verse →

    पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि सकोप दस धनु कर लीन्हे। सरन्हि मारि घायल कपि कीन्हे।।

  1118. RCM 6.98.11Open verse →

    हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।।

    अर्थ · Hindi

    हनुमदादि मुरुछित करि बंदर। पाइ प्रदोष हरष दसकंधर।।

  1119. RCM 6.98.12Open verse →

    मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।

    अर्थ · Hindi

    मुरुछित देखि सकल कपि बीरा। जामवंत धायउ रनधीरा।।

  1120. RCM 6.98.13Open verse →

    संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।।

    अर्थ · Hindi

    संग भालु भूधर तरु धारी। मारन लगे पचारि पचारी।।

  1121. RCM 6.98.14Open verse →

    भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।

    अर्थ · Hindi

    भयउ क्रुद्ध रावन बलवाना। गहि पद महि पटकइ भट नाना।।

  1122. RCM 6.98.15Open verse →

    देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।

    अर्थ · Hindi

    देखि भालुपति निज दल घाता। कोपि माझ उर मारेसि लाता।।

  1123. RCM 6.99.1Open verse →

    तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई।।

  1124. RCM 6.99.2Open verse →

    सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।

    अर्थ · Hindi

    सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी।।

  1125. RCM 6.99.3Open verse →

    मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।

    अर्थ · Hindi

    मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता।।

  1126. RCM 6.99.4Open verse →

    होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।

    अर्थ · Hindi

    होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता।।

  1127. RCM 6.99.5Open verse →

    रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई। बिधि बिपरीत चरित सब करई।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति सर सिर कटेहुँ न मरई। बिधि बिपरीत चरित सब करई।।

  1128. RCM 6.99.6Open verse →

    मोर अभाग्य जिआवत ओही। जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही।।

    अर्थ · Hindi

    मोर अभाग्य जिआवत ओही। जेहिं हौ हरि पद कमल बिछोही।।

  1129. RCM 6.99.7Open verse →

    जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।

  1130. RCM 6.99.8Open verse →

    जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।

    अर्थ · Hindi

    जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।

  1131. RCM 6.99.9Open verse →

    रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।

  1132. RCM 6.99.10Open verse →

    ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।

    अर्थ · Hindi

    ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।

  1133. RCM 6.99.11Open verse →

    बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।

    अर्थ · Hindi

    बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।

  1134. RCM 6.99.12Open verse →

    कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।

    अर्थ · Hindi

    कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।

  1135. RCM 6.99.13Open verse →

    प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।

  1136. RCM 6.100.1Open verse →

    अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।

    अर्थ · Hindi

    अस कहि बहुत भाँति समुझाई। पुनि त्रिजटा निज भवन सिधाई।।

  1137. RCM 6.100.2Open verse →

    राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।

    अर्थ · Hindi

    राम सुभाउ सुमिरि बैदेही। उपजी बिरह बिथा अति तेही।।

  1138. RCM 6.100.3Open verse →

    निसिहि ससिहि निंदति बहु भाँती। जुग सम भई सिराति न राती।।

    अर्थ · Hindi

    निसिहि ससिहि निंदति बहु भाँती। जुग सम भई सिराति न राती।।

  1139. RCM 6.100.4Open verse →

    करति बिलाप मनहिं मन भारी। राम बिरहँ जानकी दुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    करति बिलाप मनहिं मन भारी। राम बिरहँ जानकी दुखारी।।

  1140. RCM 6.100.5Open verse →

    जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।

    अर्थ · Hindi

    जब अति भयउ बिरह उर दाहू। फरकेउ बाम नयन अरु बाहू।।

  1141. RCM 6.100.6Open verse →

    सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।

    अर्थ · Hindi

    सगुन बिचारि धरी मन धीरा। अब मिलिहहिं कृपाल रघुबीरा।।

  1142. RCM 6.100.7Open verse →

    इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।।

  1143. RCM 6.100.8Open verse →

    सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही।।

    अर्थ · Hindi

    सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही।।

  1144. RCM 6.100.9Open verse →

    तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भौरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा।।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भौरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा।।

  1145. RCM 6.100.10Open verse →

    सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा।।

  1146. RCM 6.100.11Open verse →

    जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी।।

  1147. RCM 6.101.1Open verse →

    जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।

    अर्थ · Hindi

    जब कीन्ह तेहिं पाषंड। भए प्रगट जंतु प्रचंड।।

  1148. RCM 6.101.2Open verse →

    बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।

    अर्थ · Hindi

    बेताल भूत पिसाच। कर धरें धनु नाराच।।1।।

  1149. RCM 6.101.3Open verse →

    जोगिनि गहें करबाल। एक हाथ मनुज कपाल।।

    अर्थ · Hindi

    जोगिनि गहें करबाल। एक हाथ मनुज कपाल।।

  1150. RCM 6.101.4Open verse →

    करि सद्य सोनित पान। नाचहिं करहिं बहु गान।।2।।

    अर्थ · Hindi

    करि सद्य सोनित पान। नाचहिं करहिं बहु गान।।2।।

  1151. RCM 6.101.5Open verse →

    धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।

    अर्थ · Hindi

    धरु मारु बोलहिं घोर। रहि पूरि धुनि चहुँ ओर।।

  1152. RCM 6.101.6Open verse →

    मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।

    अर्थ · Hindi

    मुख बाइ धावहिं खान। तब लगे कीस परान।।3।।

  1153. RCM 6.101.7Open verse →

    जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जाहिं मर्कट भागि। तहँ बरत देखहिं आगि।।

  1154. RCM 6.101.8Open verse →

    भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।

    अर्थ · Hindi

    भए बिकल बानर भालु। पुनि लाग बरषै बालु।।4।।

  1155. RCM 6.101.9Open verse →

    जहँ तहँ थकित करि कीस। गर्जेउ बहुरि दससीस।।

    अर्थ · Hindi

    जहँ तहँ थकित करि कीस। गर्जेउ बहुरि दससीस।।

  1156. RCM 6.101.10Open verse →

    लछिमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन कपीस समेत। भए सकल बीर अचेत।।5।।

  1157. RCM 6.101.11Open verse →

    हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।

    अर्थ · Hindi

    हा राम हा रघुनाथ। कहि सुभट मीजहिं हाथ।।

  1158. RCM 6.101.12Open verse →

    एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।

    अर्थ · Hindi

    एहि बिधि सकल बल तोरि। तेहिं कीन्ह कपट बहोरि।।6।।

  1159. RCM 6.101.13Open verse →

    प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।

    अर्थ · Hindi

    प्रगटेसि बिपुल हनुमान। धाए गहे पाषान।।

  1160. RCM 6.101.14Open verse →

    तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।

    अर्थ · Hindi

    तिन्ह रामु घेरे जाइ। चहुँ दिसि बरूथ बनाइ।।7।।

  1161. RCM 6.101.15Open verse →

    मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।

    अर्थ · Hindi

    मारहु धरहु जनि जाइ। कटकटहिं पूँछ उठाइ।।

  1162. RCM 6.101.16Open verse →

    दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।

    अर्थ · Hindi

    दहँ दिसि लँगूर बिराज। तेहिं मध्य कोसलराज।।8।।

  1163. RCM 6.101.17Open verse →

    तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही।

    अर्थ · Hindi

    तेहिं मध्य कोसलराज सुंदर स्याम तन सोभा लही।

  1164. RCM 6.101.18Open verse →

    जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही।।

    अर्थ · Hindi

    जनु इंद्रधनुष अनेक की बर बारि तुंग तमालही।।

  1165. RCM 6.101.19Open verse →

    प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु देखि हरष बिषाद उर सुर बदत जय जय जय करी।

  1166. RCM 6.101.20Open verse →

    रघुबीर एकहि तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी।।1।।

    अर्थ · Hindi

    रघुबीर एकहि तीर कोपि निमेष महुँ माया हरी।।1।।

  1167. RCM 6.101.21Open verse →

    माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।

    अर्थ · Hindi

    माया बिगत कपि भालु हरषे बिटप गिरि गहि सब फिरे।

  1168. RCM 6.101.22Open verse →

    सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।

    अर्थ · Hindi

    सर निकर छाड़े राम रावन बाहु सिर पुनि महि गिरे।।

  1169. RCM 6.101.23Open verse →

    श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।

    अर्थ · Hindi

    श्रीराम रावन समर चरित अनेक कल्प जो गावहीं।

  1170. RCM 6.101.24Open verse →

    सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।

    अर्थ · Hindi

    सत सेष सारद निगम कबि तेउ तदपि पार न पावहीं।।2।।

  1171. RCM 6.102.1Open verse →

    काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।

    अर्थ · Hindi

    काटत बढ़हिं सीस समुदाई। जिमि प्रति लाभ लोभ अधिकाई।।

  1172. RCM 6.102.2Open verse →

    मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।

    अर्थ · Hindi

    मरइ न रिपु श्रम भयउ बिसेषा। राम बिभीषन तन तब देखा।।

  1173. RCM 6.102.3Open verse →

    उमा काल मर जाकीं ईछा। सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा।।

    अर्थ · Hindi

    उमा काल मर जाकीं ईछा। सो प्रभु जन कर प्रीति परीछा।।

  1174. RCM 6.102.4Open verse →

    सुनु सरबग्य चराचर नायक। प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सरबग्य चराचर नायक। प्रनतपाल सुर मुनि सुखदायक।।

  1175. RCM 6.102.5Open verse →

    नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।

    अर्थ · Hindi

    नाभिकुंड पियूष बस याकें। नाथ जिअत रावनु बल ताकें।।

  1176. RCM 6.102.6Open verse →

    सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बिभीषन बचन कृपाला। हरषि गहे कर बान कराला।।

  1177. RCM 6.102.7Open verse →

    असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।

    अर्थ · Hindi

    असुभ होन लागे तब नाना। रोवहिं खर सृकाल बहु स्वाना।।

  1178. RCM 6.102.8Open verse →

    बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।

    अर्थ · Hindi

    बोलहि खग जग आरति हेतू। प्रगट भए नभ जहँ तहँ केतू।।

  1179. RCM 6.102.9Open verse →

    दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा।।

    अर्थ · Hindi

    दस दिसि दाह होन अति लागा। भयउ परब बिनु रबि उपरागा।।

  1180. RCM 6.102.10Open verse →

    मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्त्रवहिं नयन मग बारी।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरि उर कंपति भारी। प्रतिमा स्त्रवहिं नयन मग बारी।।

  1181. RCM 6.103.1Open verse →

    सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।

    अर्थ · Hindi

    सायक एक नाभि सर सोषा। अपर लगे भुज सिर करि रोषा।।

  1182. RCM 6.103.2Open verse →

    लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।

    अर्थ · Hindi

    लै सिर बाहु चले नाराचा। सिर भुज हीन रुंड महि नाचा।।

  1183. RCM 6.103.3Open verse →

    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा।।

    अर्थ · Hindi

    धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब सर हति प्रभु कृत दुइ खंडा।।

  1184. RCM 6.103.4Open verse →

    गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी।।

    अर्थ · Hindi

    गर्जेउ मरत घोर रव भारी। कहाँ रामु रन हतौं पचारी।।

  1185. RCM 6.103.5Open verse →

    डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।।

    अर्थ · Hindi

    डोली भूमि गिरत दसकंधर। छुभित सिंधु सरि दिग्गज भूधर।।

  1186. RCM 6.103.6Open verse →

    धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई।।

    अर्थ · Hindi

    धरनि परेउ द्वौ खंड बढ़ाई। चापि भालु मर्कट समुदाई।।

  1187. RCM 6.103.7Open verse →

    मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा।।

  1188. RCM 6.103.8Open verse →

    प्रबिसे सब निषंग महु जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रबिसे सब निषंग महु जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई।।

  1189. RCM 6.103.9Open verse →

    तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन।।

    अर्थ · Hindi

    तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन।।

  1190. RCM 6.103.10Open verse →

    जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।

    अर्थ · Hindi

    जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा।।

  1191. RCM 6.103.11Open verse →

    बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।

    अर्थ · Hindi

    बरषहि सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा।।

  1192. RCM 6.104.1Open verse →

    पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी।।

    अर्थ · Hindi

    पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी।।

  1193. RCM 6.104.2Open verse →

    जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आई।।

    अर्थ · Hindi

    जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आई।।

  1194. RCM 6.104.3Open verse →

    पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।

    अर्थ · Hindi

    पति गति देखि ते करहिं पुकारा। छूटे कच नहिं बपुष सँभारा।।

  1195. RCM 6.104.4Open verse →

    उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।

    अर्थ · Hindi

    उर ताड़ना करहिं बिधि नाना। रोवत करहिं प्रताप बखाना।।

  1196. RCM 6.104.5Open verse →

    तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।

    अर्थ · Hindi

    तव बल नाथ डोल नित धरनी। तेज हीन पावक ससि तरनी।।

  1197. RCM 6.104.6Open verse →

    सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।

    अर्थ · Hindi

    सेष कमठ सहि सकहिं न भारा। सो तनु भूमि परेउ भरि छारा।।

  1198. RCM 6.104.7Open verse →

    बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा।।

    अर्थ · Hindi

    बरुन कुबेर सुरेस समीरा। रन सन्मुख धरि काहुँ न धीरा।।

  1199. RCM 6.104.8Open verse →

    भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं।।

    अर्थ · Hindi

    भुजबल जितेहु काल जम साईं। आजु परेहु अनाथ की नाईं।।

  1200. RCM 6.104.9Open verse →

    जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।

    अर्थ · Hindi

    जगत बिदित तुम्हारी प्रभुताई। सुत परिजन बल बरनि न जाई।।

  1201. RCM 6.104.10Open verse →

    राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।

    अर्थ · Hindi

    राम बिमुख अस हाल तुम्हारा। रहा न कोउ कुल रोवनिहारा।।

  1202. RCM 6.104.11Open verse →

    तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।

    अर्थ · Hindi

    तव बस बिधि प्रपंच सब नाथा। सभय दिसिप नित नावहिं माथा।।

  1203. RCM 6.104.12Open verse →

    अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    अब तव सिर भुज जंबुक खाहीं। राम बिमुख यह अनुचित नाहीं।।

  1204. RCM 6.104.13Open verse →

    काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।

    अर्थ · Hindi

    काल बिबस पति कहा न माना। अग जग नाथु मनुज करि जाना।।

  1205. RCM 6.105.1Open verse →

    मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।।

    अर्थ · Hindi

    मंदोदरी बचन सुनि काना। सुर मुनि सिद्ध सबन्हि सुख माना।।

  1206. RCM 6.105.2Open verse →

    अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।।

    अर्थ · Hindi

    अज महेस नारद सनकादी। जे मुनिबर परमारथबादी।।

  1207. RCM 6.105.3Open verse →

    भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।

    अर्थ · Hindi

    भरि लोचन रघुपतिहि निहारी। प्रेम मगन सब भए सुखारी।।

  1208. RCM 6.105.4Open verse →

    रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।

    अर्थ · Hindi

    रुदन करत देखीं सब नारी। गयउ बिभीषनु मन दुख भारी।।

  1209. RCM 6.105.5Open verse →

    बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    बंधु दसा बिलोकि दुख कीन्हा। तब प्रभु अनुजहि आयसु दीन्हा।।

  1210. RCM 6.105.6Open verse →

    लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन तेहि बहु बिधि समुझायो। बहुरि बिभीषन प्रभु पहिं आयो।।

  1211. RCM 6.105.7Open verse →

    कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।

    अर्थ · Hindi

    कृपादृष्टि प्रभु ताहि बिलोका। करहु क्रिया परिहरि सब सोका।।

  1212. RCM 6.105.8Open verse →

    कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।

    अर्थ · Hindi

    कीन्हि क्रिया प्रभु आयसु मानी। बिधिवत देस काल जियँ जानी।।

  1213. RCM 6.106.1Open verse →

    आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।।

    अर्थ · Hindi

    आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो।।

  1214. RCM 6.106.2Open verse →

    तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला।।

  1215. RCM 6.106.3Open verse →

    सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा।।

  1216. RCM 6.106.4Open verse →

    पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।।

    अर्थ · Hindi

    पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ।।

  1217. RCM 6.106.5Open verse →

    तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत चले कपि सुनि प्रभु बचना। कीन्ही जाइ तिलक की रचना।।

  1218. RCM 6.106.6Open verse →

    सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।

    अर्थ · Hindi

    सादर सिंहासन बैठारी। तिलक सारि अस्तुति अनुसारी।।

  1219. RCM 6.106.7Open verse →

    जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    जोरि पानि सबहीं सिर नाए। सहित बिभीषन प्रभु पहिं आए।।

  1220. RCM 6.106.8Open verse →

    तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।

    अर्थ · Hindi

    तब रघुबीर बोलि कपि लीन्हे। कहि प्रिय बचन सुखी सब कीन्हे।।

  1221. RCM 6.107.1Open verse →

    पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना। लंका जाहु कहेउ भगवाना।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि प्रभु बोलि लियउ हनुमाना। लंका जाहु कहेउ भगवाना।।

  1222. RCM 6.107.2Open verse →

    समाचार जानकिहि सुनावहु। तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु।।

    अर्थ · Hindi

    समाचार जानकिहि सुनावहु। तासु कुसल लै तुम्ह चलि आवहु।।

  1223. RCM 6.107.3Open verse →

    तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।

    अर्थ · Hindi

    तब हनुमंत नगर महुँ आए। सुनि निसिचरी निसाचर धाए।।

  1224. RCM 6.107.4Open verse →

    बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    बहु प्रकार तिन्ह पूजा कीन्ही। जनकसुता देखाइ पुनि दीन्ही।।

  1225. RCM 6.107.5Open verse →

    दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा। रघुपति दूत जानकीं चीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    दूरहि ते प्रनाम कपि कीन्हा। रघुपति दूत जानकीं चीन्हा।।

  1226. RCM 6.107.6Open verse →

    कहहु तात प्रभु कृपानिकेता। कुसल अनुज कपि सेन समेता।।

    अर्थ · Hindi

    कहहु तात प्रभु कृपानिकेता। कुसल अनुज कपि सेन समेता।।

  1227. RCM 6.107.7Open verse →

    सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि कुसल कोसलाधीसा। मातु समर जीत्यो दससीसा।।

  1228. RCM 6.107.8Open verse →

    अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो।।

    अर्थ · Hindi

    अबिचल राजु बिभीषन पायो। सुनि कपि बचन हरष उर छायो।।

  1229. RCM 6.108.1Open verse →

    अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।

    अर्थ · Hindi

    अब सोइ जतन करहु तुम्ह ताता। देखौं नयन स्याम मृदु गाता।।

  1230. RCM 6.108.2Open verse →

    तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब हनुमान राम पहिं जाई। जनकसुता कै कुसल सुनाई।।

  1231. RCM 6.108.3Open verse →

    सुनि संदेसु भानुकुलभूषन। बोलि लिए जुबराज बिभीषन।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि संदेसु भानुकुलभूषन। बोलि लिए जुबराज बिभीषन।।

  1232. RCM 6.108.4Open verse →

    मारुतसुत के संग सिधावहु। सादर जनकसुतहि लै आवहु।।

    अर्थ · Hindi

    मारुतसुत के संग सिधावहु। सादर जनकसुतहि लै आवहु।।

  1233. RCM 6.108.5Open verse →

    तुरतहिं सकल गए जहँ सीता। सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता।।

    अर्थ · Hindi

    तुरतहिं सकल गए जहँ सीता। सेवहिं सब निसिचरीं बिनीता।।

  1234. RCM 6.108.6Open verse →

    बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो। तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो।।

    अर्थ · Hindi

    बेगि बिभीषन तिन्हहि सिखायो। तिन्ह बहु बिधि मज्जन करवायो।।

  1235. RCM 6.108.7Open verse →

    बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।

    अर्थ · Hindi

    बहु प्रकार भूषन पहिराए। सिबिका रुचिर साजि पुनि ल्याए।।

  1236. RCM 6.108.8Open verse →

    ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।

    अर्थ · Hindi

    ता पर हरषि चढ़ी बैदेही। सुमिरि राम सुखधाम सनेही।।

  1237. RCM 6.108.9Open verse →

    बेतपानि रच्छक चहुँ पासा। चले सकल मन परम हुलासा।।

    अर्थ · Hindi

    बेतपानि रच्छक चहुँ पासा। चले सकल मन परम हुलासा।।

  1238. RCM 6.108.10Open verse →

    देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए।।

    अर्थ · Hindi

    देखन भालु कीस सब आए। रच्छक कोपि निवारन धाए।।

  1239. RCM 6.108.11Open verse →

    कह रघुबीर कहा मम मानहु। सीतहि सखा पयादें आनहु।।

    अर्थ · Hindi

    कह रघुबीर कहा मम मानहु। सीतहि सखा पयादें आनहु।।

  1240. RCM 6.108.12Open verse →

    देखहुँ कपि जननी की नाईं। बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई।।

    अर्थ · Hindi

    देखहुँ कपि जननी की नाईं। बिहसि कहा रघुनाथ गोसाई।।

  1241. RCM 6.108.13Open verse →

    सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रभु बचन भालु कपि हरषे। नभ ते सुरन्ह सुमन बहु बरषे।।

  1242. RCM 6.108.14Open verse →

    सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।

    अर्थ · Hindi

    सीता प्रथम अनल महुँ राखी। प्रगट कीन्हि चह अंतर साखी।।

  1243. RCM 6.109.1Open verse →

    प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु के बचन सीस धरि सीता। बोली मन क्रम बचन पुनीता।।

  1244. RCM 6.109.2Open verse →

    लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।

    अर्थ · Hindi

    लछिमन होहु धरम के नेगी। पावक प्रगट करहु तुम्ह बेगी।।

  1245. RCM 6.109.3Open verse →

    सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि लछिमन सीता कै बानी। बिरह बिबेक धरम निति सानी।।

  1246. RCM 6.109.4Open verse →

    लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।।

    अर्थ · Hindi

    लोचन सजल जोरि कर दोऊ। प्रभु सन कछु कहि सकत न ओऊ।।

  1247. RCM 6.109.5Open verse →

    देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम रुख लछिमन धाए। पावक प्रगटि काठ बहु लाए।।

  1248. RCM 6.109.6Open verse →

    पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।

    अर्थ · Hindi

    पावक प्रबल देखि बैदेही। हृदयँ हरष नहिं भय कछु तेही।।

  1249. RCM 6.109.7Open verse →

    जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जौं मन बच क्रम मम उर माहीं। तजि रघुबीर आन गति नाहीं।।

  1250. RCM 6.109.8Open verse →

    तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।

    अर्थ · Hindi

    तौ कृसानु सब कै गति जाना। मो कहुँ होउ श्रीखंड समाना।।

  1251. RCM 6.110.1Open verse →

    तब रघुपति अनुसासन पाई। मातलि चलेउ चरन सिरु नाई।।

    अर्थ · Hindi

    तब रघुपति अनुसासन पाई। मातलि चलेउ चरन सिरु नाई।।

  1252. RCM 6.110.2Open verse →

    आए देव सदा स्वारथी। बचन कहहिं जनु परमारथी।।

    अर्थ · Hindi

    आए देव सदा स्वारथी। बचन कहहिं जनु परमारथी।।

  1253. RCM 6.110.3Open verse →

    दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया।।

    अर्थ · Hindi

    दीन बंधु दयाल रघुराया। देव कीन्हि देवन्ह पर दाया।।

  1254. RCM 6.110.4Open verse →

    बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी।।

    अर्थ · Hindi

    बिस्व द्रोह रत यह खल कामी। निज अघ गयउ कुमारगगामी।।

  1255. RCM 6.110.5Open verse →

    तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।

  1256. RCM 6.110.6Open verse →

    अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।

    अर्थ · Hindi

    अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।

  1257. RCM 6.110.7Open verse →

    मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।

    अर्थ · Hindi

    मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।

  1258. RCM 6.110.8Open verse →

    जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।

    अर्थ · Hindi

    जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।

  1259. RCM 6.110.9Open verse →

    यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही।।

    अर्थ · Hindi

    यह खल मलिन सदा सुरद्रोही। काम लोभ मद रत अति कोही।।

  1260. RCM 6.110.10Open verse →

    अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरे मन बिसमय आवा।।

    अर्थ · Hindi

    अधम सिरोमनि तव पद पावा। यह हमरे मन बिसमय आवा।।

  1261. RCM 6.110.11Open verse →

    हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।

    अर्थ · Hindi

    हम देवता परम अधिकारी। स्वारथ रत प्रभु भगति बिसारी।।

  1262. RCM 6.110.12Open verse →

    भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।

    अर्थ · Hindi

    भव प्रबाहँ संतत हम परे। अब प्रभु पाहि सरन अनुसरे।।

  1263. RCM 6.111.1Open verse →

    जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।।

    अर्थ · Hindi

    जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।।

  1264. RCM 6.111.2Open verse →

    भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।

    अर्थ · Hindi

    भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।

  1265. RCM 6.111.3Open verse →

    तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।।

    अर्थ · Hindi

    तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।।

  1266. RCM 6.111.4Open verse →

    जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।

    अर्थ · Hindi

    जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।

  1267. RCM 6.111.5Open verse →

    जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।

    अर्थ · Hindi

    जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।।

  1268. RCM 6.111.6Open verse →

    अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।

    अर्थ · Hindi

    अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।

  1269. RCM 6.111.7Open verse →

    अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।।

    अर्थ · Hindi

    अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।।

  1270. RCM 6.111.8Open verse →

    रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।

    अर्थ · Hindi

    रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।

  1271. RCM 6.111.9Open verse →

    गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।।

    अर्थ · Hindi

    गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।।

  1272. RCM 6.111.10Open verse →

    भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।।

    अर्थ · Hindi

    भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।।

  1273. RCM 6.111.11Open verse →

    बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।

    अर्थ · Hindi

    बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।।

  1274. RCM 6.111.12Open verse →

    भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।

    अर्थ · Hindi

    भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।

  1275. RCM 6.111.13Open verse →

    सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।।

    अर्थ · Hindi

    सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।।

  1276. RCM 6.111.14Open verse →

    सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।।

    अर्थ · Hindi

    सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।।

  1277. RCM 6.111.15Open verse →

    अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।

    अर्थ · Hindi

    अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।।

  1278. RCM 6.111.16Open verse →

    इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।

    अर्थ · Hindi

    इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।

  1279. RCM 6.111.17Open verse →

    कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।

    अर्थ · Hindi

    कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।।

  1280. RCM 6.111.18Open verse →

    धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।

    अर्थ · Hindi

    धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।

  1281. RCM 6.111.19Open verse →

    अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।

    अर्थ · Hindi

    अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।।

  1282. RCM 6.111.20Open verse →

    जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।

    अर्थ · Hindi

    जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि सुखी चरिऐ।।

  1283. RCM 6.111.21Open verse →

    खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।।

    अर्थ · Hindi

    खल खंडन मंडन रम्य छमा। पद पंकज सेवित संभु उमा।।

  1284. RCM 6.111.22Open verse →

    नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेम सदा सुभदं।।

    अर्थ · Hindi

    नृप नायक दे बरदानमिदं। चरनांबुज प्रेम सदा सुभदं।।

  1285. RCM 6.112.1Open verse →

    तेहि अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बिलोकि नयन जल छाए।।

    अर्थ · Hindi

    तेहि अवसर दसरथ तहँ आए। तनय बिलोकि नयन जल छाए।।

  1286. RCM 6.112.2Open verse →

    अनुज सहित प्रभु बंदन कीन्हा। आसिरबाद पिताँ तब दीन्हा।।

    अर्थ · Hindi

    अनुज सहित प्रभु बंदन कीन्हा। आसिरबाद पिताँ तब दीन्हा।।

  1287. RCM 6.112.3Open verse →

    तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।

  1288. RCM 6.112.4Open verse →

    सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।

  1289. RCM 6.112.5Open verse →

    रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।

    अर्थ · Hindi

    रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।

  1290. RCM 6.112.6Open verse →

    ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।

    अर्थ · Hindi

    ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।

  1291. RCM 6.112.7Open verse →

    सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।

  1292. RCM 6.112.8Open verse →

    बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।

    अर्थ · Hindi

    बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।

  1293. RCM 6.113.1Open verse →

    जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम।।

    अर्थ · Hindi

    जय राम सोभा धाम। दायक प्रनत बिश्राम।।

  1294. RCM 6.113.2Open verse →

    धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप।।1।।

    अर्थ · Hindi

    धृत त्रोन बर सर चाप। भुजदंड प्रबल प्रताप।।1।।

  1295. RCM 6.113.3Open verse →

    जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।।

    अर्थ · Hindi

    जय दूषनारि खरारि। मर्दन निसाचर धारि।।

  1296. RCM 6.113.4Open verse →

    यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ।।2।।

    अर्थ · Hindi

    यह दुष्ट मारेउ नाथ। भए देव सकल सनाथ।।2।।

  1297. RCM 6.113.5Open verse →

    जय हरन धरनी भार। महिमा उदार अपार।।

    अर्थ · Hindi

    जय हरन धरनी भार। महिमा उदार अपार।।

  1298. RCM 6.113.6Open verse →

    जय रावनारि कृपाल। किए जातुधान बिहाल।।3।।

    अर्थ · Hindi

    जय रावनारि कृपाल। किए जातुधान बिहाल।।3।।

  1299. RCM 6.113.7Open verse →

    लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।

    अर्थ · Hindi

    लंकेस अति बल गर्ब। किए बस्य सुर गंधर्ब।।

  1300. RCM 6.113.8Open verse →

    मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि सिद्ध नर खग नाग। हठि पंथ सब कें लाग।।4।।

  1301. RCM 6.113.9Open verse →

    परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।

    अर्थ · Hindi

    परद्रोह रत अति दुष्ट। पायो सो फलु पापिष्ट।।

  1302. RCM 6.113.10Open verse →

    अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।

    अर्थ · Hindi

    अब सुनहु दीन दयाल। राजीव नयन बिसाल।।5।।

  1303. RCM 6.113.11Open verse →

    मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि रहा अति अभिमान। नहिं कोउ मोहि समान।।

  1304. RCM 6.113.12Open verse →

    अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।

    अर्थ · Hindi

    अब देखि प्रभु पद कंज। गत मान प्रद दुख पुंज।।6।।

  1305. RCM 6.113.13Open verse →

    कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।

    अर्थ · Hindi

    कोउ ब्रह्म निर्गुन ध्याव। अब्यक्त जेहि श्रुति गाव।।

  1306. RCM 6.113.14Open verse →

    मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि भाव कोसल भूप। श्रीराम सगुन सरूप।।7।।

  1307. RCM 6.113.15Open verse →

    बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।।

    अर्थ · Hindi

    बैदेहि अनुज समेत। मम हृदयँ करहु निकेत।।

  1308. RCM 6.113.16Open verse →

    मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास।।8।।

    अर्थ · Hindi

    मोहि जानिए निज दास। दे भक्ति रमानिवास।।8।।

  1309. RCM 6.113.17Open verse →

    दे भक्ति रमानिवास त्रास हरन सरन सुखदायकं।

    अर्थ · Hindi

    दे भक्ति रमानिवास त्रास हरन सरन सुखदायकं।

  1310. RCM 6.113.18Open verse →

    सुख धाम राम नमामि काम अनेक छबि रघुनायकं।।

    अर्थ · Hindi

    सुख धाम राम नमामि काम अनेक छबि रघुनायकं।।

  1311. RCM 6.113.19Open verse →

    सुर बृंद रंजन द्वंद भंजन मनुज तनु अतुलितबलं।

    अर्थ · Hindi

    सुर बृंद रंजन द्वंद भंजन मनुज तनु अतुलितबलं।

  1312. RCM 6.113.20Open verse →

    ब्रह्मादि संकर सेब्य राम नमामि करुना कोमलं।।

    अर्थ · Hindi

    ब्रह्मादि संकर सेब्य राम नमामि करुना कोमलं।।

  1313. RCM 6.114.1Open verse →

    सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।

  1314. RCM 6.114.2Open verse →

    मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।

    अर्थ · Hindi

    मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।

  1315. RCM 6.114.3Open verse →

    सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।

    अर्थ · Hindi

    सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।

  1316. RCM 6.114.4Open verse →

    प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।

  1317. RCM 6.114.5Open verse →

    सुधा बरषि कपि भालु जिआए। हरषि उठे सब प्रभु पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    सुधा बरषि कपि भालु जिआए। हरषि उठे सब प्रभु पहिं आए।।

  1318. RCM 6.114.6Open verse →

    सुधाबृष्टि भै दुहु दल ऊपर। जिए भालु कपि नहिं रजनीचर।।

    अर्थ · Hindi

    सुधाबृष्टि भै दुहु दल ऊपर। जिए भालु कपि नहिं रजनीचर।।

  1319. RCM 6.114.7Open verse →

    रामाकार भए तिन्ह के मन। मुक्त भए छूटे भव बंधन।।

    अर्थ · Hindi

    रामाकार भए तिन्ह के मन। मुक्त भए छूटे भव बंधन।।

  1320. RCM 6.114.8Open verse →

    सुर अंसिक सब कपि अरु रीछा। जिए सकल रघुपति कीं ईछा।।

    अर्थ · Hindi

    सुर अंसिक सब कपि अरु रीछा। जिए सकल रघुपति कीं ईछा।।

  1321. RCM 6.114.9Open verse →

    राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।

    अर्थ · Hindi

    राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।

  1322. RCM 6.114.10Open verse →

    खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।

    अर्थ · Hindi

    खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।

  1323. RCM 6.115.1Open verse →

    मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।

    अर्थ · Hindi

    मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।

  1324. RCM 6.115.2Open verse →

    मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।

    अर्थ · Hindi

    मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।

  1325. RCM 6.115.3Open verse →

    अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।

    अर्थ · Hindi

    अगुन सगुन गुन मंदिर सुंदर। भ्रम तम प्रबल प्रताप दिवाकर।।

  1326. RCM 6.115.4Open verse →

    काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।

    अर्थ · Hindi

    काम क्रोध मद गज पंचानन। बसहु निरंतर जन मन कानन।।2।।

  1327. RCM 6.115.5Open verse →

    बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन।।

    अर्थ · Hindi

    बिषय मनोरथ पुंज कंज बन। प्रबल तुषार उदार पार मन।।

  1328. RCM 6.115.6Open verse →

    भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर।।3।।

    अर्थ · Hindi

    भव बारिधि मंदर परमं दर। बारय तारय संसृति दुस्तर।।3।।

  1329. RCM 6.115.7Open verse →

    स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।

    अर्थ · Hindi

    स्याम गात राजीव बिलोचन। दीन बंधु प्रनतारति मोचन।।

  1330. RCM 6.115.8Open verse →

    अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।

    अर्थ · Hindi

    अनुज जानकी सहित निरंतर। बसहु राम नृप मम उर अंतर।।4।।

  1331. RCM 6.115.9Open verse →

    मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि रंजन महि मंडल मंडन। तुलसिदास प्रभु त्रास बिखंडन।।5।।

  1332. RCM 6.116.1Open verse →

    करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।

    अर्थ · Hindi

    करि बिनती जब संभु सिधाए। तब प्रभु निकट बिभीषनु आए।।

  1333. RCM 6.116.2Open verse →

    नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।

    अर्थ · Hindi

    नाइ चरन सिरु कह मृदु बानी। बिनय सुनहु प्रभु सारँगपानी।।

  1334. RCM 6.116.3Open verse →

    सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।।

    अर्थ · Hindi

    सकुल सदल प्रभु रावन मार् यो। पावन जस त्रिभुवन बिस्तार् यो।।

  1335. RCM 6.116.4Open verse →

    दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।।

    अर्थ · Hindi

    दीन मलीन हीन मति जाती। मो पर कृपा कीन्हि बहु भाँती।।

  1336. RCM 6.116.5Open verse →

    अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।

    अर्थ · Hindi

    अब जन गृह पुनीत प्रभु कीजे। मज्जनु करिअ समर श्रम छीजे।।

  1337. RCM 6.116.6Open verse →

    देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि कोस मंदिर संपदा। देहु कृपाल कपिन्ह कहुँ मुदा।।

  1338. RCM 6.116.7Open verse →

    सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।

    अर्थ · Hindi

    सब बिधि नाथ मोहि अपनाइअ। पुनि मोहि सहित अवधपुर जाइअ।।

  1339. RCM 6.116.8Open verse →

    सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन मृदु दीनदयाला। सजल भए द्वौ नयन बिसाला।।

  1340. RCM 6.117.1Open verse →

    सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के।।

  1341. RCM 6.117.2Open verse →

    बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।

    अर्थ · Hindi

    बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने।।

  1342. RCM 6.117.3Open verse →

    बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि बिभीषन भवन सिधायो। मनि गन बसन बिमान भरायो।।

  1343. RCM 6.117.4Open verse →

    लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा।।

    अर्थ · Hindi

    लै पुष्पक प्रभु आगें राखा। हँसि करि कृपासिंधु तब भाषा।।

  1344. RCM 6.117.5Open verse →

    चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन।।

    अर्थ · Hindi

    चढ़ि बिमान सुनु सखा बिभीषन। गगन जाइ बरषहु पट भूषन।।

  1345. RCM 6.117.6Open verse →

    नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही।।

    अर्थ · Hindi

    नभ पर जाइ बिभीषन तबही। बरषि दिए मनि अंबर सबही।।

  1346. RCM 6.117.7Open verse →

    जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।

    अर्थ · Hindi

    जोइ जोइ मन भावइ सोइ लेहीं। मनि मुख मेलि डारि कपि देहीं।।

  1347. RCM 6.117.8Open verse →

    हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।

    अर्थ · Hindi

    हँसे रामु श्री अनुज समेता। परम कौतुकी कृपा निकेता।।

  1348. RCM 6.118.1Open verse →

    भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।

    अर्थ · Hindi

    भालु कपिन्ह पट भूषन पाए। पहिरि पहिरि रघुपति पहिं आए।।

  1349. RCM 6.118.2Open verse →

    नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।

    अर्थ · Hindi

    नाना जिनस देखि सब कीसा। पुनि पुनि हँसत कोसलाधीसा।।

  1350. RCM 6.118.3Open verse →

    चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया।।

    अर्थ · Hindi

    चितइ सबन्हि पर कीन्हि दाया। बोले मृदुल बचन रघुराया।।

  1351. RCM 6.118.4Open verse →

    तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो।।

    अर्थ · Hindi

    तुम्हरें बल मैं रावनु मार् यो। तिलक बिभीषन कहँ पुनि सार् यो।।

  1352. RCM 6.118.5Open verse →

    निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।

    अर्थ · Hindi

    निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।

  1353. RCM 6.118.6Open verse →

    सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।

  1354. RCM 6.118.7Open verse →

    प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।

  1355. RCM 6.118.8Open verse →

    दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।

    अर्थ · Hindi

    दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।

  1356. RCM 6.118.9Open verse →

    सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।

    अर्थ · Hindi

    सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।

  1357. RCM 6.118.10Open verse →

    देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।

    अर्थ · Hindi

    देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।

  1358. RCM 6.119.1Open verse →

    अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई।।

    अर्थ · Hindi

    अतिसय प्रीति देख रघुराई। लिन्हे सकल बिमान चढ़ाई।।

  1359. RCM 6.119.2Open verse →

    मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो।।

    अर्थ · Hindi

    मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो।।

  1360. RCM 6.119.3Open verse →

    चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई।।

    अर्थ · Hindi

    चलत बिमान कोलाहल होई। जय रघुबीर कहइ सबु कोई।।

  1361. RCM 6.119.4Open verse →

    सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर।।

    अर्थ · Hindi

    सिंहासन अति उच्च मनोहर। श्री समेत प्रभु बैठै ता पर।।

  1362. RCM 6.119.5Open verse →

    राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी।।

    अर्थ · Hindi

    राजत रामु सहित भामिनी। मेरु सृंग जनु घन दामिनी।।

  1363. RCM 6.119.6Open verse →

    रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर।।

    अर्थ · Hindi

    रुचिर बिमानु चलेउ अति आतुर। कीन्ही सुमन बृष्टि हरषे सुर।।

  1364. RCM 6.119.7Open verse →

    परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।

    अर्थ · Hindi

    परम सुखद चलि त्रिबिध बयारी। सागर सर सरि निर्मल बारी।।

  1365. RCM 6.119.8Open verse →

    सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।

    अर्थ · Hindi

    सगुन होहिं सुंदर चहुँ पासा। मन प्रसन्न निर्मल नभ आसा।।

  1366. RCM 6.119.9Open verse →

    कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।

    अर्थ · Hindi

    कह रघुबीर देखु रन सीता। लछिमन इहाँ हत्यो इँद्रजीता।।

  1367. RCM 6.119.10Open verse →

    हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे।।

    अर्थ · Hindi

    हनूमान अंगद के मारे। रन महि परे निसाचर भारे।।

  1368. RCM 6.119.11Open verse →

    कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।

    अर्थ · Hindi

    कुंभकरन रावन द्वौ भाई। इहाँ हते सुर मुनि दुखदाई।।

  1369. RCM 6.119.12Open verse →

    इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ सेतु बाँध्यो अरु थापेउँ सिव सुख धाम।

  1370. RCM 6.119.13Open verse →

    सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम।।119(क)।।

    अर्थ · Hindi

    सीता सहित कृपानिधि संभुहि कीन्ह प्रनाम।।119(क)।।

  1371. RCM 6.119.14Open verse →

    जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।

    अर्थ · Hindi

    जहँ जहँ कृपासिंधु बन कीन्ह बास बिश्राम।

  1372. RCM 6.119.15Open verse →

    सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।

    अर्थ · Hindi

    सकल देखाए जानकिहि कहे सबन्हि के नाम।।119(ख)।।

  1373. RCM 6.120.1Open verse →

    तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा।।

  1374. RCM 6.120.2Open verse →

    कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना।।

    अर्थ · Hindi

    कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना।।

  1375. RCM 6.120.3Open verse →

    सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।

    अर्थ · Hindi

    सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा।।

  1376. RCM 6.120.4Open verse →

    तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।

    अर्थ · Hindi

    तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा।।

  1377. RCM 6.120.5Open verse →

    बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।

    अर्थ · Hindi

    बहुरि राम जानकिहि देखाई। जमुना कलि मल हरनि सुहाई।।

  1378. RCM 6.120.6Open verse →

    पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि देखी सुरसरी पुनीता। राम कहा प्रनाम करु सीता।।

  1379. RCM 6.120.7Open verse →

    तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।

    अर्थ · Hindi

    तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा।।

  1380. RCM 6.120.8Open verse →

    देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।

    अर्थ · Hindi

    देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी।।

  1381. RCM 6.120.9Open verse →

    पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।

    अर्थ · Hindi

    पुनि देखु अवधपुरी अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि।।।

  1382. RCM 6.121.1Open verse →

    प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभु हनुमंतहि कहा बुझाई। धरि बटु रूप अवधपुर जाई।।

  1383. RCM 6.121.2Open verse →

    भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।

    अर्थ · Hindi

    भरतहि कुसल हमारि सुनाएहु। समाचार लै तुम्ह चलि आएहु।।

  1384. RCM 6.121.3Open verse →

    तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।

    अर्थ · Hindi

    तुरत पवनसुत गवनत भयउ। तब प्रभु भरद्वाज पहिं गयऊ।।

  1385. RCM 6.121.4Open verse →

    नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।

    अर्थ · Hindi

    नाना बिधि मुनि पूजा कीन्ही। अस्तुती करि पुनि आसिष दीन्ही।।

  1386. RCM 6.121.5Open verse →

    मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी।।

    अर्थ · Hindi

    मुनि पद बंदि जुगल कर जोरी। चढ़ि बिमान प्रभु चले बहोरी।।

  1387. RCM 6.121.6Open verse →

    इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।

    अर्थ · Hindi

    इहाँ निषाद सुना प्रभु आए। नाव नाव कहँ लोग बोलाए।।

  1388. RCM 6.121.7Open verse →

    सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।

    अर्थ · Hindi

    सुरसरि नाघि जान तब आयो। उतरेउ तट प्रभु आयसु पायो।।

  1389. RCM 6.121.8Open verse →

    तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।

    अर्थ · Hindi

    तब सीताँ पूजी सुरसरी। बहु प्रकार पुनि चरनन्हि परी।।

  1390. RCM 6.121.9Open verse →

    दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।

    अर्थ · Hindi

    दीन्हि असीस हरषि मन गंगा। सुंदरि तव अहिवात अभंगा।।

  1391. RCM 6.121.10Open verse →

    सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।

    अर्थ · Hindi

    सुनत गुहा धायउ प्रेमाकुल। आयउ निकट परम सुख संकुल।।

  1392. RCM 6.121.11Open verse →

    प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।

    अर्थ · Hindi

    प्रभुहि सहित बिलोकि बैदेही। परेउ अवनि तन सुधि नहिं तेही।।

  1393. RCM 6.121.12Open verse →

    प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।

    अर्थ · Hindi

    प्रीति परम बिलोकि रघुराई। हरषि उठाइ लियो उर लाई।।