कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
RCM 6.6.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।
RCM 6.6.3
कर गहि पतिहि भवन निज आनी। बोली परम मनोहर बानी।।