अस मन समुझु कहति जानकी। खल सुधि नहिं रघुबीर बान की।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
अस मन समुझु कहति जानकी। खल सुधि नहिं रघुबीर बान की।।
RCM 5.9.8
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
अस मन समुझु कहति जानकी। खल सुधि नहिं रघुबीर बान की।।
RCM 5.9.8
अस मन समुझु कहति जानकी। खल सुधि नहिं रघुबीर बान की।।