तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई। करइ बिचार करौं का भाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई। करइ बिचार करौं का भाई।।
RCM 5.9.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई। करइ बिचार करौं का भाई।।
RCM 5.9.1
तरु पल्लव महुँ रहा लुकाई। करइ बिचार करौं का भाई।।