करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह जहवाँ।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह जहवाँ।।
RCM 5.8.6
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह जहवाँ।।
RCM 5.8.6
करि सोइ रूप गयउ पुनि तहवाँ। बन असोक सीता रह जहवाँ।।