जानतहूँ अस स्वामि बिसारी। फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जानतहूँ अस स्वामि बिसारी। फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी।।
RCM 5.8.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जानतहूँ अस स्वामि बिसारी। फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी।।
RCM 5.8.1
जानतहूँ अस स्वामि बिसारी। फिरहिं ते काहे न होहिं दुखारी।।