गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।
RCM 5.5.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।
RCM 5.5.3
गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।